UP Board Solutions Class 10 Science Chapter 10 Light Reflection and Refraction

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Detailed Chapter 10 प्रकाश का परावर्तन और अपवर्तन UP Board Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 10 प्रकाश का परावर्तन और अपवर्तन UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 10 Science Chapter 10 Light Reflection And Refraction (प्रकाश-परावर्तन एवं अपवर्तन)

पाठगत हल प्रश्न

[NCERT IN-TEXT QUESTIONS SOLVED]

खंड 10.1 (पृष्ठ संख्या 185)

Question 1. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
Answer: अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष के समांतर आपतित सभी किरणें परावर्तित होकर मुख्य अक्ष के एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं। यह बिंदु अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहलाता है।
In simple words: अवतल दर्पण का मुख्य फोकस वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्य फोकस की परिभाषा लिखते समय समांतर किरणों और परावर्तन के बाद प्रतिच्छेद बिंदु का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?
Answer: दिया है-
\( R = 20cm \)
\( R = 2f \)
\( f = \frac{R}{2} \)
\( f = \frac{20}{2} = 10cm. \)
In simple words: गोलीय दर्पण की फोकस दूरी (f) उसकी वक्रता त्रिज्या (R) की आधी होती है, इसलिए 20cm की वक्रता त्रिज्या वाले दर्पण की फोकस दूरी 10cm होगी।

🎯 Exam Tip: गोलीय दर्पणों के लिए फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या के बीच संबंध \( f = R/2 \) को याद रखें।

 

Question 3. उस दर्पण का नाम बताइए जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सके ।
Answer: अवतल दर्पण (concave mirror)|
In simple words: अवतल दर्पण बिंब का सीधा और आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बना सकता है जब बिंब को उसके ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है।

🎯 Exam Tip: दर्पणों द्वारा बनने वाले प्रतिबिंबों की प्रकृति और स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब आवर्धित और सीधा प्रतिबिंब बनता हो।

 

Question 4. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?
Answer: वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता निम्न कारणों से देते हैं
1. यह सदैव सीधा एवं छोटा प्रतिबिंब बनाते हैं।
2. इनका दृष्टि-क्षेत्र बहुत अधिक होता है क्योंकि ये बाहर की ओर वक्रित होते हैं। अतः समतल दर्पण की तुलना में उत्तल दर्पण ड्राइवर को अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देखने में सक्षम बनाते हैं।
In simple words: उत्तल दर्पणों को वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में इसलिए पसंद किया जाता है क्योंकि वे हमेशा सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाते हैं, साथ ही उनका व्यापक दृष्टि-क्षेत्र होता है जिससे ड्राइवर पीछे का बड़ा इलाका देख पाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र और सीधे/छोटे प्रतिबिंब बनाने की क्षमता पर ध्यान दें, जो इसे सुरक्षा के लिए आदर्श बनाता है।

खंड 10.2 (पृष्ठ संख्या 188)

 

Question 1. उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता-त्रिज्या 32cm है।
Answer: उत्तल दर्पण की वक्रता-त्रिज्या \( R = 32cm \)
अतः \( f = \frac{R}{2} = \frac{32}{2} = 16cm \)
अतः उत्तल दर्पण की फोकस दूरी 16cm होगी ।
In simple words: उत्तल दर्पण की फोकस दूरी उसकी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है, इसलिए 32cm वक्रता त्रिज्या के लिए फोकस दूरी 16cm होगी।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पणों के लिए फोकस दूरी धनात्मक होती है।

 

Question 2. कोई अवतल दर्पण अपने सामने 10cm दूरी पर रखे किसी बिंब का तीन गुणा आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है?
Answer:
\( m = \frac{-v}{u} \)

\( \implies - 3 = \frac{-v}{-u} \)
\( v = - 30cm \)
अतः प्रतिबिंब दर्पण के सामने 30cm की दूरी पर बनता है।
In simple words: यदि अवतल दर्पण से बिंब का वास्तविक और तीन गुना आवर्धित प्रतिबिंब बनता है, तो प्रतिबिंब दर्पण से 30cm की दूरी पर बनेगा।

🎯 Exam Tip: वास्तविक प्रतिबिंब के लिए आवर्धन ऋणात्मक होता है, और अवतल दर्पण में वास्तविक प्रतिबिंब दर्पण के सामने बनता है।

खंड 10.3 (पृष्ठ संख्या 194)

 

Question 1. वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी? बताइए क्यों?
Answer: प्रकाश की किरण जब वायु से जल में गमन करती है तो यह अभिलंब की ओर झुकेगी, क्योंकि जल, वायु की तुलना में सघन माध्यम है। अर्थात् प्रकाश की किरणें विरल से सघन माध्यम में प्रवेश करने पर अभिलंब की ओर झुकेगी ।
In simple words: जब प्रकाश वायु (विरल माध्यम) से जल (सघन माध्यम) में प्रवेश करता है, तो वह अभिलंब की ओर मुड़ जाता है क्योंकि सघन माध्यम में प्रकाश की चाल कम हो जाती है।

🎯 Exam Tip: विरल से सघन माध्यम में प्रकाश अभिलंब की ओर झुकता है, और सघन से विरल माध्यम में अभिलंब से दूर हटता है।

 

Question 2. प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 x 108 m/s है।
Answer: दिया है-
निर्वात में प्रकाश की चाल \( (c) = 3 \times 10^8 \) m/s
काँच की प्लेट का अपवर्तनांक \( (n_m) = 1.50 \)
\( n_m = \frac{c}{v} \); \( v = \) काँच में प्रकाश की चाल

\( \implies 1.50 = \frac{3 \times 10^8}{v} \)

\( \implies v = \frac{3 \times 10^8}{1.5} = 2 \times 10^8 \) m/s
अतः काँच में प्रकाश की चाल = \( 2 \times 10^8 \) m/s
In simple words: प्रकाश की चाल को अपवर्तनांक से भाग करके काँच में प्रकाश की चाल ज्ञात की जाती है; यहाँ यह \( 2 \times 10^8 \) m/s होगी।

🎯 Exam Tip: माध्यम में प्रकाश की चाल \( v = c/n \) सूत्र का उपयोग करके ज्ञात की जा सकती है, जहाँ \( c \) निर्वात में प्रकाश की चाल और \( n \) माध्यम का अपवर्तनांक है।

 

Question 3. सारणी 10.3 (NCERT पृष्ठ सं० 193) से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए सारणी 10.3 के अवलोकन से पता चलता है कि अधिकतम प्रकाशिक घनत्व का माध्यम हीरा है जिसका अपवर्तनांक \( (n) = 2.42 \) है। तथा न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व का माध्यम वायु है, जिसका अपवर्तनांक \( (n) = 1.0003 \) है।
In simple words: सारणी के अनुसार, हीरा अधिकतम प्रकाशिक घनत्व वाला माध्यम है जिसका अपवर्तनांक 2.42 है, जबकि वायु न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व वाला माध्यम है जिसका अपवर्तनांक 1.0003 है।

🎯 Exam Tip: जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होता है, वह उतना ही अधिक प्रकाशिक सघन होता है।

 

Question 4. आपको केरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलती | है? सारणी 10.3 (NCERT पृष्ठ सं० 193) में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।
Answer: पाठयपुस्तक में दी गई सारणी 10.3 से दिए गए पदार्थों के अपवर्तनांक निम्न हैं-
किरोसिन का अपवर्तनांक \( (n) = 1.44 \)
तारपीन के तेल का अपवर्तनांक \( (n) = 1.47 \)
जल का अपवर्तनांक \( (n) = 1.33 \)
यहाँ जल का अपवर्तनांक न्यूनतम है। अतः केरोसिन तथा तारपीन के तेल की अपेक्षा जल में प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है।
क्योंकि \( v = \frac{c}{n} \) के अनुसार न्यूनतम अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रकाश का वेग (चाल) अधिकतम होगा।
In simple words: प्रकाश उस माध्यम में सबसे तीव्र गति से चलता है जिसका अपवर्तनांक सबसे कम होता है। दिए गए पदार्थों में जल का अपवर्तनांक सबसे कम (1.33) है, इसलिए प्रकाश जल में सबसे तेज़ चलेगा।

🎯 Exam Tip: प्रकाश की चाल और माध्यम के अपवर्तनांक के बीच व्युत्क्रम संबंध को याद रखें: \( v \propto \frac{1}{n} \)।

 

Question 5. हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?
Answer: हमें ज्ञात है कि किसी माध्यम का अपवर्तनांक
\( n_m = \frac{\text{वायु (या निर्वात) में प्रकाश की चाल}}{\text{माध्यम में प्रकाश की चाल}} \)
अर्थात् \( n_m = \frac{c}{v} \)
दिया है- \( c = 3 \times 10^8 \) m/s तथा \( n_m = 2.42 \)

\( \implies v = \frac{c}{n_m} = \frac{3 \times 10^8 \text{ m/s}}{2.42} \)

\( \implies v = 1.24 \times 10^8 \) m/s
अतः हीरे में प्रकाश की चाल न्यूनतम है, क्योंकि इसका अपवर्तनांक अधिकतम है। हीरे में प्रकाश की चाल वायु (निर्वात) में प्रकाश की चाल का \( \frac{1}{2.42} \)वाँ भाग है।
In simple words: हीरे का अपवर्तनांक 2.42 होने का अर्थ है कि निर्वात में प्रकाश की चाल हीरे में प्रकाश की चाल का 2.42 गुना है, या दूसरे शब्दों में, हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात की तुलना में 2.42 गुना कम है।

🎯 Exam Tip: अपवर्तनांक \( n = c/v \) की परिभाषा को याद रखें; यह दर्शाता है कि प्रकाश किसी माध्यम में निर्वात की तुलना में कितना धीमा चलता है।

खंड 10.3 (पृष्ठ संख्या 203)

 

Question 1. किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए ।
Answer: 1 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता है, जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो । अर्थात् \( 1D = 1m^{-1} \) होती है।
In simple words: 1 डाइऑप्टर उस लेंस की शक्ति को दर्शाता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर होती है।

🎯 Exam Tip: लेंस की क्षमता का S.I. मात्रक डाइऑप्टर है, और इसे फोकस दूरी के व्युत्क्रम के रूप में व्यक्त किया जाता है, जब फोकस दूरी मीटर में हो।

 

Question 2. कोई उत्तल लेंस, किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब उस लेंस से 50cm दूर बनता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिंब उसी साइज़ का बन रहा है, जिस साइज़ का बिंब है। लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिए ।
Answer: चूँकि उत्तल लेंस द्वारा सुई का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब लेंस से 50cm दूर बनता है। इसलिए,
इसलिए, \( v = + 50 \) cm
दिया है- प्रतिबिंब का साइज़ \( (h') = \) बिंब का साइज़ \( (h) \)
\( \frac{h'}{h} = \frac{v}{u} \)

\( \implies \frac{h}{h} = \frac{v}{u} \quad [: h = h'] \)

\( \implies v = u \)
परिपाटी के अनुसार \( u = - 50 \) cm
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u} \)
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{(50\text{cm})} - \frac{1}{(-50\text{cm})} \)
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{50} + \frac{1}{50} = \frac{2}{50} = \frac{1}{25 \text{ cm}} \)
\( f = + 25 \) cm \( = + 0.25 \) m
... लेंस की क्षमता \( P = \frac{1}{f} = \frac{1}{0.25\text{cm}} = + 4D \)
In simple words: जब उत्तल लेंस एक ही साइज़ का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनाता है, तो बिंब को फोकस दूरी की दोगुनी (2F) पर रखा जाता है। यहाँ, लेंस 50cm पर प्रतिबिंब बना रहा है, इसलिए बिंब भी 50cm पर ही होगा, और इसकी क्षमता +4D होगी।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस के लिए, जब प्रतिबिंब और बिंब का साइज़ समान हो, तो दोनों 2F पर स्थित होते हैं। वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब के लिए \( v \) धनात्मक होता है।

 

Question 3. 2m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है-
अवतल लेंस की फोकस दूरी \( f = - 2m \)
.. लेंस की क्षमता \( P = \frac{1}{f} = \frac{1}{(-2m)} = - 0.5D \)
In simple words: अवतल लेंस की फोकस दूरी 2m होने पर उसकी क्षमता \( -0.5D \) होगी, क्योंकि क्षमता फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है और अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस की क्षमता हमेशा ऋणात्मक होती है, जबकि उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक होती है।

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

 

Question 1. निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है?
(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी
Answer: (d) मिट्टी ।
In simple words: लेंस बनाने के लिए ऐसे पदार्थ का उपयोग किया जाता है जो पारदर्शी हों और प्रकाश को अपवर्तित कर सकें। मिट्टी अपारदर्शी होती है, इसलिए इसका उपयोग लेंस बनाने के लिए नहीं किया जा सकता।

🎯 Exam Tip: लेंस बनाने के लिए पदार्थ पारदर्शी और प्रकाशिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए।

 

Question 2. किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच
(b) वक्रता केंद्र पर
(c) वक्रता केंद्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच
Answer: (d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच ।
In simple words: अवतल दर्पण से आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब तभी बनता है जब बिंब को दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनने की सभी छह स्थितियों को याद रखना महत्वपूर्ण है। आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब केवल एक विशेष स्थिति में बनता है।

 

Question 3. किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज़ का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनंत पर ।
(d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच
Answer: (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर ।
In simple words: उत्तल लेंस से वास्तविक और समान साइज़ का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उसकी फोकस दूरी की दोगुनी दूरी (2F) पर रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस के लिए, जब बिंब 2F पर होता है, तो प्रतिबिंब भी 2F पर बनता है, वास्तविक, उल्टा और समान साइज़ का होता है।

 

Question 4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं
(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल
Answer: (d) दोनों अवतल ।
In simple words: अवतल दर्पण और अवतल लेंस दोनों की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है। इसलिए, यदि फोकस दूरी -15cm है, तो दोनों ही अवतल प्रकार के हैं।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण और अवतल लेंस की फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है, जबकि उत्तल दर्पण और उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है।

 

Question 5. किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है
(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल ।
(d) या तो समतल अथवा उत्तल
Answer: (d) या तो समतल अथवा उत्तल।
In simple words: समतल दर्पण और उत्तल दर्पण दोनों ही हमेशा सीधा प्रतिबिंब बनाते हैं, चाहे बिंब की स्थिति कुछ भी हो।

🎯 Exam Tip: समतल दर्पण हमेशा सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनाता है। उत्तल दर्पण भी हमेशा सीधा, आभासी और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

 

Question 6. किसी शब्दकोश (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे?
(a) 50cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
Answer: (c) 5cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस ।।
In simple words: छोटे अक्षरों को आवर्धित करके देखने के लिए उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है, और कम फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की आवर्धन क्षमता अधिक होती है।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस आवर्धक लेंस के रूप में कार्य करता है। छोटी फोकस दूरी का अर्थ है अधिक आवर्धन शक्ति।

 

Question 7. 15cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी को परिसर (range) क्या होना चाहिए? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी है? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है अथवा छोटा? इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने का एक किरण आरेख बनाइए ।
Answer: बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर 0 cm से 15cm के बीच होना चाहिए, क्योंकि जब बिंब दर्पण के ध्रुव P तथा मुख्य फोकस F के बीच स्थित होता है, तभी उसका सीधा प्रतिबिंब बनता है।
किरण आरेख-

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक अवतल दर्पण का किरण आरेख है जिसमें एक बिंब (AB) को दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखा गया है। इससे दर्पण के पीछे एक आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब (A'B') बनता है, जिसे दर्शाने के लिए प्रकाश किरणों का मार्ग दिखाया गया है।
प्रतिबिंब की प्रकृति - आभासी तथा सीधा, प्रतिबिंब का साइज़ बिंब से बड़ा है।
In simple words: अवतल दर्पण से सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब बनाने के लिए बिंब को दर्पण के ध्रुव और फोकस (यहाँ 0-15cm) के बीच रखना होगा। प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बिंब से बड़ा बनेगा।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण से आभासी प्रतिबिंब केवल तभी बनता है जब बिंब ध्रुव और फोकस के बीच हो, और यह प्रतिबिंब हमेशा सीधा और आवर्धित होता है।

 

Question 8. निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए
(a) किसी कार का अग्र-दीप (हैड-लाइट)
(b) किसी वाहन का पाश्र्व/पश्च दृश्य दर्पण
(c) सौर भट्टी
अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए ।
Answer:
बल्ब

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक अवतल दर्पण को दर्शाता है जिसके फोकस पर या उसके निकट एक बल्ब रखा गया है। बल्ब से निकलने वाली प्रकाश किरणें अवतल दर्पण से परावर्तित होकर मुख्य अक्ष के समानांतर एक शक्तिशाली किरण पुंज बनाती हैं, जैसा कि कार की हेडलाइट्स में उपयोग होता है।
अवतल दर्पण
1. कार की हैडलाइटों में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। बल्ब दर्पण के मुख्य फोकस पर रख दिया जाता है ताकि प्रकाश की किरणें दर्पण से परावर्तन के बाद उसके मुख्य अक्ष के समांतर हो जाएँ तथा प्रकाश का सीधा और शक्तिशाली किरण पुंज मिले ।
2. किसी वाहन के पाश्र्व/पश्च-दृश्य दर्पण के लिए उत्तल दर्पण का प्रयोग किया जाता है क्योंकि ये सदैव छोटा परंतु सीधा प्रतिबिंब बनाते हैं। बाहर की ओर वक्रित होने के कारण इनका दृष्टि-क्षेत्र भी ज्यादा होता अवतल दर्पण है, जिसके कारण ड्राइवर पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देखने में समर्थ होता है।
3. सौर भट्टी में सूर्य के प्रकाश को केंद्रित करने के लिए बड़े अवतल दर्पणों का उपयोग किया जाता है। आपतित सूर्य की किरणें अनंत दूरी से आने वाली समांतर किरणें होती हैं जो अवतल दर्पण से परावर्तित होकर इसके फोकस बिंदु पर फोकसित होती हैं, जिससे ताप तेजी से 180°C-200°C तक बढ़ जाता है।
In simple words: कार की हेडलाइट्स में अवतल दर्पण का उपयोग समांतर प्रकाश पुंज के लिए होता है, पश्च-दृश्य दर्पण में उत्तल दर्पण का उपयोग बड़े दृष्टि-क्षेत्र के लिए होता है, और सौर भट्टियों में अवतल दर्पण का उपयोग सूर्य के प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करने के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक दर्पण के उपयोग को उसकी प्रतिबिंब बनाने की विशेषताओं (समांतर पुंज, विस्तृत क्षेत्र, प्रकाश एकत्र करना) से जोड़कर याद रखें।

 

Question 9. किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बना पाएगा? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
Answer: हाँ, किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक देने पर भी उत्तल लेंस दिए गए बिंब का पूरा प्रतिबिंब बनाता है। प्रायोगिक विधि द्वारा जाँच-सर्वप्रथम एक उत्तल लेंस लीजिए तथा इसके आधे भाग को काले कागज़ से ढक दीजिए। अब लेंस को किसी स्टैंड के सहारे दी गई आकृति के अनुसार रखिए। लेंस के एक तरफ़ जलती हुई मोमबत्ती तथा दूसरी तरफ़ एक सफ़ेद पर्दा रखिए। हम पाते हैं कि पर्दे पर मोमबत्ती का पूरा उल्टा प्रतिबिंब बनता है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक उत्तल लेंस को दर्शाता है जिसका आधा निचला भाग काले कागज़ से ढका हुआ है। एक जलती हुई मोमबत्ती (बिंब) लेंस के सामने 2F1 पर रखी गई है। लेंस का खुला ऊपरी भाग मोमबत्ती का पूरा उल्टा प्रतिबिंब सफ़ेद पर्दे पर बनाता है, जिससे यह दर्शाता है कि लेंस का केवल एक हिस्सा भी पूरा प्रतिबिंब बना सकता है, हालांकि उसकी चमक कम हो जाएगी।
प्रेक्षण-
1. प्रतिबिंब की संरचना लेंस के आकार पर निर्भर नहीं करती है, एक छोटा लेंस भी वस्तु का पूर्ण प्रतिबिंब बना सकता है।
2. परंतु प्रतिबिंब की चमक (brightness) अपेक्षाकृत कम हो जाती है, क्योंकि लेंस से गुजरने वाली प्रकाश की किरणों की संख्या कम हो जाती है।
In simple words: हाँ, एक उत्तल लेंस का आधा भाग ढका होने पर भी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बनता है, लेकिन प्रतिबिंब की चमक कम हो जाती है क्योंकि प्रकाश की कम किरणें लेंस से गुजर पाती हैं।

🎯 Exam Tip: यह अवधारणा प्रकाश की प्रत्येक बिंदु से कई किरणों के उत्सर्जन और लेंस के प्रत्येक भाग द्वारा अपवर्तन से संबंधित है। चमक में कमी प्रकाश की कुल मात्रा में कमी के कारण होती है।

 

Question 10. 5cm लंबा कोई बिंब 10cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति, साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
Answer: किरण-आरेख-

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक अभिसारी (उत्तल) लेंस का किरण आरेख है जिसमें एक बिंब (AB) को 2F1 से परे 25 सेमी की दूरी पर रखा गया है, जबकि लेंस की फोकस दूरी 10 सेमी है। लेंस से अपवर्तन के बाद किरणें F2 और 2F2 के बीच प्रतिच्छेद करती हैं, जिससे एक वास्तविक, उल्टा और छोटा प्रतिबिंब (A'B') बनता है।
दिया है-
\( f = + 10 \) cm, [चूँकि लेंस अभिसारी (उत्तल लेंस) है।]
\( u = - 25 \) cm
\( h = 5 \) cm
तथा
लेंस सूत्र द्वारा,
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u} \)

\( \implies \frac{1}{10} = \frac{1}{v} - \frac{1}{(-25)} \)

\( \implies \frac{1}{v} = \frac{1}{10} - \frac{1}{25} = \frac{5-2}{50} = \frac{3}{50} \)

\( \implies v = \frac{50}{3} = 16.666 = 16.67 \) cm
प्रतिबिंब की स्थितिः लेंस की दूसरी ओर 16.7 cm पर \( F_2 \) तथा \( 2F_2 \) के बीच
प्रतिबिंब की साइज़-
\( m = \frac{h'}{h} = \frac{v}{u} \)

\( \implies \frac{h'}{5} = \frac{(50/3)}{(-25)} \)

\( \implies h' = \frac{50}{3} \times \frac{5}{(-25)} = \frac{-10}{3} = -3.33 \) cm
In simple words: 10cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस के सामने 25cm पर 5cm लंबा बिंब रखने पर, प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 16.67cm पर बनेगा। यह 3.33cm लंबा, वास्तविक और उल्टा होगा।

🎯 Exam Tip: किरण आरेख बनाते समय सही माप और चिन्ह परिपाटी का पालन करना आवश्यक है। गणना में \( u \) हमेशा ऋणात्मक होता है, और उत्तल लेंस के लिए \( f \) धनात्मक।

 

Question 11. 15cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब लेंस से 10cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है? किरण आरेख खीचिए ।
Answer: अवतल लेंस के लिए \( u \) तथा \( f \) ऋणात्मक है क्योंकि प्रतिबिंब आभासी होता है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एक अवतल लेंस का किरण आरेख है जिसमें एक बिंब (AB) को लेंस के सामने 30 सेमी की दूरी पर रखा गया है, जिसकी फोकस दूरी 15 सेमी है। लेंस से अपवर्तन के बाद, बिंब का एक आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब (A'B') उसी ओर लेंस से 10 सेमी की दूरी पर बनता है।
दिया है-
\( f = -15 \) cm, \( v = -10 \) cm
लेंस सूत्र द्वारा
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u} \)

\( \implies \frac{1}{(-15)} = \frac{1}{(-10)} - \frac{1}{u} \)

\( \implies \frac{-1}{15} = \frac{-1}{10} - \frac{1}{u} \)

\( \implies \frac{1}{u} = \frac{-1}{10} + \frac{1}{15} = \frac{-3+2}{30} = \frac{-1}{30} \)

\( \implies u = - 30 \) cm
अतः बिंब (वस्तु) लेंस के सामने 30cm की दूरी पर स्थित है, जिसे आकृति में दर्शाया गया है।
In simple words: 15cm फोकस दूरी वाले अवतल लेंस द्वारा 10cm पर प्रतिबिंब बनने पर, बिंब लेंस के सामने 30cm की दूरी पर स्थित होगा।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस में, प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और बिंब से छोटा होता है, और यह लेंस के सामने, फोकस और प्रकाशिक केंद्र के बीच बनता है। सभी दूरियों के लिए सही चिन्ह परिपाटी का पालन करें।

 

Question 12. 15cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण में कोई बिंब 10cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए ।
Answer:
\( f = + 15 \) cm (उत्तल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक होती है)
\( u = - 10 \) cm
अतः दर्पण सूत्र द्वारा-
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u} \)

\( \implies \frac{1}{15} = \frac{1}{v} + \frac{1}{(-10)} \)

\( \implies \frac{1}{v} = \frac{1}{15} + \frac{1}{10} = \frac{2+3}{30} = \frac{5}{30} \)

\( \implies v = + 6 \) cm
अतः प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6cm की दूरी पर बनेगा तथा यह एक आभासी तथा सीधा प्रतिबिंब होगा ।
In simple words: 15cm फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण के सामने 10cm पर बिंब रखने पर, प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6cm पर आभासी और सीधा बनेगा।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जो दर्पण के पीछे बनता है और उसकी फोकस दूरी हमेशा धनात्मक होती है।

 

Question 13. एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 है। इसका क्या अर्थ है?
Answer:
\( m = \frac{-v}{u} = \frac{h'}{h} \)

\( \implies +1 = \frac{-v}{u} = \frac{h'}{h} \)
.. \( v = -u \) तथा \( h' = h \)
बिंब के साइज़ बराबर हैं। \( m \) का धनात्मक चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिंब आभासी तथा सीधा है। साथ ही, प्रतिबिंब दर्पण से ठीक उतना ही पीछे बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु (बिंब) इसके सामने स्थित है।
In simple words: समतल दर्पण द्वारा +1 आवर्धन का अर्थ है कि प्रतिबिंब बिंब के बराबर साइज़ का, आभासी, सीधा है, और यह दर्पण से उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर बिंब दर्पण के सामने रखा है।

🎯 Exam Tip: आवर्धन का धनात्मक मान सीधा और आभासी प्रतिबिंब को इंगित करता है, जबकि मान 1 समान साइज़ के प्रतिबिंब को दर्शाता है।

 

Question 14. 5.0cm लंबाई का कोई बिंब 30cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज़ ज्ञात कीजिए।
Answer:
\( f = \frac{R}{2} = \frac{30}{2} = 15 \) cm
\( f = +15 \) cm, \( u = - 20 \) cm, \( h = 5.0 \) cm (उत्तल दर्पण के लिए \( f \) धनात्मक होता है)
दर्पण सूत्र द्वारा-
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u} \)

\( \implies \frac{1}{15} = \frac{1}{v} + \frac{1}{(-20)} \)

\( \implies \frac{1}{v} = \frac{1}{15} + \frac{1}{20} = \frac{4+3}{60} = \frac{7}{60} \)

\( \implies v = \frac{60}{7} \) cm \( = 8.6 \) cm

\( m = \frac{-v}{u} = \frac{-(60/7)}{(-20)} = \frac{60}{7 \times 20} = \frac{3}{7} \)
\( \frac{h'}{h} = m \)

\( \implies \frac{h'}{5} = \frac{3}{7} \)

\( \implies h' = \frac{15}{7} = 2.2 \) cm
अतः प्रतिबिंब, बिंब से छोटे साइज़ का है।
अतः प्रतिबिंब आभासी तथा सीधा और दर्पण के पीछे 8.6cm की दूरी पर बनता है।
In simple words: 30cm वक्रता त्रिज्या वाले उत्तल दर्पण के सामने 20cm पर 5cm का बिंब रखने पर, प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 8.6cm पर, 2.2cm साइज़ का, आभासी और सीधा बनेगा।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। गणना करते समय चिन्ह परिपाटी का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. 7.0cm साइज़ का कोई बिंब 18cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सके । प्रतिबिंब का साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
Answer:
\( h = + 7 \) cm, \( u = - 27 \) cm, \( f = - 18 \) cm, (अवतल दर्पण)
\( v = ?, h' = ? \)
दर्पण सूत्र द्वारा-
\( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u} \)

\( \implies \frac{1}{(-18)} = \frac{1}{v} + \frac{1}{(-27)} \)

\( \implies \frac{1}{v} = \frac{-1}{18} + \frac{1}{27} = \frac{-3+2}{54} = \frac{-1}{54} \)

\( \implies v = -54 \) cm.
\( m = \frac{-v}{u} = \frac{-(-54)}{(-27)} = -2 \)
साथ ही, \( \frac{h'}{h} = m \)

\( \implies \frac{h'}{7} = -2 \)

\( \implies h' = -14 \) cm.
प्रतिबिंब का साइज़ 14cm है जो बिंब से आवर्धित (बड़ा) है । प्रतिबिंब की प्रकृति- चूँकि \( v \) का मान ऋणात्मक है, इसलिए प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा है।
In simple words: अवतल दर्पण के सामने 27cm पर रखे 7cm बिंब का प्रतिबिंब दर्पण से 54cm दूर, 14cm साइज़ का, वास्तविक और उल्टा बनेगा। परदे को दर्पण से 54cm दूर रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के लिए, वास्तविक और उल्टे प्रतिबिंब के लिए \( v \) और \( u \) दोनों ऋणात्मक होते हैं, और आवर्धन भी ऋणात्मक होता है। \( |m| > 1 \) का अर्थ आवर्धित प्रतिबिंब होता है।

 

Question 16. उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0D है। यह किस प्रकार का लेंस है?
Answer:
लेंस की क्षमता \( P = - 2.0 \) D.
\( P = \frac{1}{f} \)
.. \( f = \frac{1}{P} = \frac{1}{(-2.0D)} = - 0.5 \) m.
चूँकि लेंस की क्षमता और फोकस दूरी का मान ऋणात्मक है, इसलिए यह एक अवतल लेंस या अपसारी लेंस (concave lens) है।
In simple words: -2.0D क्षमता वाले लेंस की फोकस दूरी -0.5m होगी। क्षमता और फोकस दूरी दोनों के ऋणात्मक होने के कारण यह एक अवतल या अपसारी लेंस है।

🎯 Exam Tip: क्षमता और फोकस दूरी के चिन्ह लेंस के प्रकार को निर्धारित करते हैं: ऋणात्मक मान अवतल लेंस के लिए, और धनात्मक मान उत्तल लेंस के लिए।

 

Question 17. कोई डॉक्टर + 1.5D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी?
Answer:
लेंस की क्षमता \( P = +1.5 \) D, \( P = \frac{1}{f} \)
लेंस की फोकस दूरी \( f = \frac{1}{P} = \frac{1}{(+1.5 \text{ D})} = + 0.67 \) m
चूँकि लेंस की क्षमता एवं फोकस दूरी के मान धनात्मक हैं अतः यह एक उत्तल लेंस (अभिसारी) लेंस है।
In simple words: +1.5D क्षमता वाले लेंस की फोकस दूरी +0.67m होगी। क्षमता और फोकस दूरी दोनों के धनात्मक मान उत्तल लेंस (अभिसारी) को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस अभिसारी होता है और इसकी फोकस दूरी एवं क्षमता धनात्मक होती है।

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