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UP Board Textbook Solutions for Class 10 Science Chapter 7 नियंत्रण और समन्वय
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Class 10 Science Chapter 7 नियंत्रण और समन्वय Textbook Solutions with Answers
पाठगत हल प्रश्न
NCERT In-Text Questions Solved
खण्ड 7.1 (पृष्ठ संख्या 132)
Question 1. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है?
Answer:
In simple words: प्रतिवर्ती क्रियाएँ अनैच्छिक, तीव्र और स्वचालित प्रतिक्रियाएँ होती हैं जो मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती हैं, जबकि टहलना एक ऐच्छिक क्रिया है जो मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिवर्ती क्रिया और ऐच्छिक क्रिया के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और प्रत्येक के उदाहरण दें, खासकर नियंत्रण केंद्र के संदर्भ में।
Question 2. दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है?
Answer: दो तंत्रिका कोशिकाओं के मध्य रिक्त स्थान होते हैं, जिसे अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) कहते हैं। तंत्रिका कोशिका के द्रुमाकृति पर उत्पन्न विद्युत आवेग तंत्रिकांक्ष (एकसॉन) में होता हुआ अंतिम सिरे तक पहुँचता है। एक्सॉन के अंत में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन करता है। यह रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स (सिनोण्टिक दरार) को पार करते हैं और अगली तंत्रिका कोशिका की दुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं। अंततः इसी प्रकार का एक अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) ऐसे आवेगों को तंत्रिका कोशिका से अन्य कोशिकाओं जैसे कि पेशी कोशिकाओं या ग्रंथि तक ले जाते हैं।
In simple words: सिनेप्स में, एक न्यूरॉन के सिरे से रासायनिक संदेश जारी होते हैं जो अगली तंत्रिका कोशिका तक विद्युत आवेगों को पार करने में मदद करते हैं, जिससे तंत्रिका संकेतों का संचारण होता है।
🎯 Exam Tip: सिनेप्स की परिभाषा, न्यूरोट्रांसमीटर की भूमिका, और एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक संकेत के संचरण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाएँ।
Question 3. मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?
Answer: अनुमस्तिष्क (Cerebellum) शरीर की स्थित तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है। यह मस्तिष्क के भाग पश्चमस्तिष्क में होता है।
In simple words: मस्तिष्क का अनुमस्तिष्क (सेरिबेलम) नामक भाग शरीर का संतुलन बनाए रखने और उसकी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होता है।
🎯 Exam Tip: मस्तिष्क के विभिन्न भागों और उनके कार्यों को याद रखें, विशेषकर संतुलन और मुद्रा के लिए जिम्मेदार भाग को।
Question 4. हम अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं?
Answer: हमारे नाक में गंधीय संवेदांग (Olfactory receptors) होते हैं। गंध के कारण रासायनिक क्रिया होती है, जिससे विद्युत आवेग संवेदी तंत्रिका कोशिकाओं (Sensory neurons) द्वारा अग्रमस्तिष्क (fore brain) तक पहुँचता है, जिसमें विद्यमान सँघने के लिए विशिष्टीकृत क्षेत्र अगरबत्ती की गंध पहचानने की क्रिया संपादित करता है।
In simple words: नाक में मौजूद गंधीय रिसेप्टर्स गंध के रासायनिक संकेतों को विद्युत आवेगों में बदलते हैं, जिन्हें अग्रमस्तिष्क का सँघने वाला क्षेत्र पहचानता है।
🎯 Exam Tip: संवेदी अंगों (जैसे नाक) में रिसेप्टर्स की भूमिका और मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों द्वारा संवेदी सूचनाओं के प्रसंस्करण को समझाएँ।
Question 5. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?
Answer: प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होती है। ग्राही अंग (त्वचा में ऊष्मा/दर्द) से संवेदना संवेदी तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा मेरुरज्जु तक लाई जाती है तथा प्रेरक तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा कार्यकर (Effector) (जैसे भुज में पेशी) को संदेश भेजा जाता है। मस्तिष्क की प्रतिवर्ती क्रिया में कोई कार्य नहीं है, केवल संदेश मस्तिष्क तक पहुँचता है।
In simple words: प्रतिवर्ती क्रियाएँ मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती हैं; मस्तिष्क इनमें सीधे शामिल नहीं होता, बल्कि उसे केवल सूचना मिलती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिवर्ती चाप के मार्ग को पहचानें और मस्तिष्क की भूमिका (या उसकी अनुपस्थिति) को स्पष्ट करें।
खण्ड 7.2 (पृष्ठ संख्या 136)
Question 1. पादप हॉर्मोन क्या है?
Answer: पादपों में उपस्थित वे रासायनिक पदार्थ जो पौधों की वृधि, विकास एवं पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वय में सहायता करते हैं। उदाहरण-ऑक्सिन, जिब्बरेलिन, तथा साइटोकाइनिन ।
In simple words: पादप हॉर्मोन ऐसे रसायन होते हैं जो पौधों की वृद्धि, विकास और पर्यावरणीय प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
🎯 Exam Tip: पादप हॉर्मोन की परिभाषा, उनकी प्रमुख भूमिकाएँ और कम से कम तीन उदाहरण याद रखें।
Question 2. छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?
Answer: छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति दिशिक नहीं होती है अर्थात् यह किसी भी दिशा में हो सकती है जबकि प्रकाश की ओर प्ररोह की गति प्रकाशानुवर्ती होती है अर्थात् यह प्रकाश स्रोत की दिशा की ओर होती है।
In simple words: छुई-मुई की पत्तियों की गति किसी विशिष्ट दिशा में नहीं होती (अदिशिक), जबकि प्ररोह की प्रकाश की ओर गति प्रकाश की दिशा में (दिशिक) होती है।
🎯 Exam Tip: छुई-मुई की गति को ट्रॉपिज्म (जैसे फोटोट्रोपिज्म) से अलग करने वाले प्रमुख अंतरों, जैसे कि दिशा और प्रेरक, पर ध्यान दें।
Question 3. एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
Answer: ऑक्सीजन पादप हॉर्मोन है, जो पौधे में वृद्धि करता है।
In simple words: ऑक्सिन एक पादप हॉर्मोन है जो पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पादप हॉर्मोनों के विशिष्ट कार्यों (जैसे वृद्धि को बढ़ावा देना या रोकना) को याद रखें।
Question 4. किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?
Answer: हम जानते हैं कि प्रतान के शिखर पर ऑक्सिन बनता है। प्रतान स्पर्श के प्रति संवेदनशील होते हैं। जैसे ही प्रतान किसी आधार के संपर्क में आते हैं, वह भाग उतनी तेज़ी से साथ वृद्धि नहीं करती, जितनी तेजी से आधार से दूर वाला भाग करता है, क्योंकि ऑक्सिन विसरित होकर उस तरफ़ चला जाता है। इसके कारण कोशिकाएँ लंबी एवं तन्य हो जाती हैं और प्रतान मुड़ जाता है तथा आधार से लिपट जाती हैं। उदाहरण-मटर के पौधे ।
In simple words: ऑक्सिन प्रतान को सहारे के चारों ओर मुड़ने में मदद करता है क्योंकि यह स्पर्श के विपरीत दिशा में अधिक सांद्र होकर कोशिकाओं को लंबा करता है।
🎯 Exam Tip: थिग्मोट्रोपिज्म (स्पर्शानुवर्तन) में ऑक्सिन की भूमिका और यह कैसे प्रतान के मुड़ने में सहायता करता है, इसे स्पष्ट करें।
Question 5. जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए ।
Answer:
चरण (ii) इसके पेंदे में छेद कर दीजिए तथा आकृति में दर्शाए अनुसार तिरछा रखिए।
चरण (iii) इसमें लकड़ी का बुरादा भर दीजिए।
चरण (iv) 24 घंटे तक चने के बीज को पानी में भिगोकर निकाल लीजिए।
चरण (v) भीगे हुए चने को ऊपर से नीचे तक बुरादे के ऊपर समान दूरी पर रखिए तथा पानी का छिड़काव कीजिए।
चरण (vi) अब बीजों के अंकुरित होने के बाद पानी केवल डिब्बे के निचले भाग में स्थित बुरादे पर डालें।
चरण (vii) इसे दो-तीन दिनों तक छोड़ दीजिए।
निष्कर्ष – अंकुरित बीजों की जड़ें गीले बुरादे की ओर मुड़ जाती हैं, जिसे जलानुवर्तन कहा जाता है।
In simple words: जलानुवर्तन प्रयोग में, अंकुरित बीजों की जड़ों को नमी वाले क्षेत्र की ओर मुड़ते हुए देखा जाता है, यह दर्शाता है कि जड़ें पानी की ओर बढ़ती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रयोग की स्थापना, अवलोकन और जलानुवर्तन की अवधारणा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र जलानुवर्तन दर्शाने वाले एक प्रयोग को दर्शाता है। एक बीकर में सूखी और सामान्य मृदा रखी गई है, जिसमें कुछ बीज बोए गए हैं। बीकर को एक प्लास्टिक शीट से ढका गया है, और जल नमी वाले क्षेत्र की ओर जड़ों की वृद्धि को दर्शाया गया है।
खण्ड 7.3 (पृष्ठ संख्या 138)
Question 1. जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
Answer: जंतुओं में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन के द्वारा होता है। ये जंतु हार्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित होते हैं तथा रक्त के माध्यम से शरीर के उन अंगों तक पहुँच जाते हैं, जहाँ इसकी आवश्यकता होती है।
In simple words: जंतुओं में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन द्वारा होता है, जो अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा रक्त में स्रावित होकर लक्षित अंगों तक पहुँचते हैं।
🎯 Exam Tip: अंतःस्रावी ग्रंथियों, हॉर्मोनों और रक्त संचार प्रणाली की भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 2. आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
Answer: अवटुग्रंथि (Thyroid gland) को थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक होता है। थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का हमारे शरीर में नियंत्रण करता है। हमारे आहार में आयोडीन की कमी से हमें घंघा रोग (गॉयटर) हो जाता है। अतः थायरॉक्सिन की उचित मात्रा शरीर में बनाए रखने के लिए आयोडीन युक्त नमक भोजन के साथ खाने की सलाह दी जाती है।
In simple words: आयोडीन थायरॉक्सिन हॉर्मोन के उत्पादन के लिए आवश्यक है, जो उपापचय को नियंत्रित करता है; इसकी कमी से घंघा रोग होता है, इसलिए आयोडीन युक्त नमक की सलाह दी जाती है।
🎯 Exam Tip: आयोडीन और थायरॉक्सिन हॉर्मोन के बीच संबंध, थायरॉक्सिन के कार्य और इसकी कमी से होने वाले रोग (घंघा) को समझाएँ।
Question 3. जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होती है, तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
Answer:
1. एड्रीनली हृदय की धड़कन को बढ़ा देता है, ताकि हमारी मांसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सके।
2. पाचन तंत्र तथा त्वचा में रुधिर की आपूर्ति कम हो जाती है, क्योंकि इन अंगों की छोटी धमनियों के आस-पास की पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं।
3. इससे डायाफ्राम तथा पसलियों के सिकुड़ने से श्वसन दर बढ़ जाती है। ये सभी अनुक्रियाएँ मिलकर जंतु शरीर को स्थिति से निपटने के लिए तैयार करती हैं।
In simple words: एड्रीनलीन का स्राव हृदय गति, रक्तचाप और श्वसन दर को बढ़ाता है, तथा पाचन और त्वचा में रक्त प्रवाह को कम करता है, जिससे शरीर तनावपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए तैयार होता है।
🎯 Exam Tip: एड्रीनलीन के "लड़ो या भागो" प्रतिक्रिया में शामिल सभी शारीरिक परिवर्तनों को विस्तार से समझाएँ।
Question 4. मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?
Answer: मधुमेह रोग अग्न्याशय द्वारा स्रावित हॉर्मोन इन्सुलिन की कमी के कारण होता है, यह हॉर्मोन रुधिर में शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। अतः डॉक्टर रोगी को इन्सुलिन के इंजेक्शन लगवाने की सलाह देता है ताकि रुधिर में शर्करा का स्तर कम किया जा सके।
In simple words: मधुमेह में इंसुलिन की कमी के कारण रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, इसलिए इंजेक्शन के माध्यम से इंसुलिन देकर इसे नियंत्रित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: इंसुलिन की भूमिका, मधुमेह में इसकी कमी का प्रभाव और इंसुलिन इंजेक्शन द्वारा उपचार के तर्क को स्पष्ट करें।
पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न
NCERT Textbook Questions Solved
Question 1. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हार्मोन है?
(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(C) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन
Answer: (d) साइटोकाइनिन
In simple words: साइटोकाइनिन एक पादप हार्मोन है जो कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है, जबकि अन्य विकल्प जंतु हार्मोन हैं।
🎯 Exam Tip: पादप हार्मोन और जंतु हार्मोन के बीच अंतर को पहचानें और प्रत्येक के मुख्य उदाहरण याद रखें।
Question 2. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं-
(a) दुमिका
(b) सिनेप्स ।
(C) एक्सॉन
(d) आवेग
Answer: (b) सिनेप्स
In simple words: दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच के रिक्त स्थान को सिनेप्स कहते हैं, जहाँ एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक संकेत संचारित होते हैं।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका तंत्र की संरचनाओं के महत्वपूर्ण शब्दावली और उनकी भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 3. मस्तिष्क उत्तरदायी है
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(C) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: मस्तिष्क सोचने, हृदय गति को नियंत्रित करने और शरीर का संतुलन बनाए रखने सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जिम्मेदार है।
🎯 Exam Tip: मस्तिष्क के प्रमुख कार्यों की एक व्यापक सूची तैयार करें, जिसमें ऐच्छिक और अनैच्छिक दोनों तरह की क्रियाएँ शामिल हों।
Question 4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहा हो । क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
Answer: ग्राही, हमारी ज्ञानेन्द्रियों में स्थित एक खास कोशिकाएँ होती हैं, जो वातावरण से सभी सूचनाएँ ढूंढ निकालती हैं और उन्हें केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मेरुरज्जू तथा मस्तिष्क) में पहुँचाती हैं। मस्तिष्क के भाग अग्रमस्तिष्क में विभिन्न ग्राही से संवेदी आवेग (सूचनाएँ) प्राप्त करने के लिए क्षेत्र होते हैं। इसके अलग-अलग क्षेत्र सुनने, सँघने, देखने आदि के लिए विशिष्टीकृत होते हैं। यदि कोई ग्राही उचित प्रकार कार्य नहीं करेगी तो उस ग्राही द्वारा एकत्र की गई सूचना मस्तिष्क तक नहीं पहुँचेगी।
उदाहरण-
1. यदि रेटिना की कोशिका अच्छी तरह कार्य नहीं करेंगी, तो हम देख नहीं पाएँगे तथा अंधे भी हो सकते हैं।
2. जिह्वा द्वार मीठा, नमकीन आदि स्वाद का पता लगाना संभव नहीं हो पाएगा ।
In simple words: ग्राही वातावरण से सूचना एकत्र करते हैं और उन्हें मस्तिष्क तक भेजते हैं; यदि वे ठीक से काम न करें, तो हम देखने, सूंघने या स्वाद लेने जैसी संवेदी जानकारी को संसाधित करने में असमर्थ होंगे।
🎯 Exam Tip: ग्राही की परिभाषा, उनका कार्य, और यदि वे खराब हो जाएँ तो होने वाले परिणामों को विशिष्ट उदाहरणों के साथ समझाएँ।
Question 5. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए ।
Answer:
न्यूरॉन के कार्य-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की विस्तृत संरचना को दर्शाता है, जिसमें वृक्षिका (दुमिका), कोशिकाकाय, केंद्रक, कोशिकाद्रव्य, तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन), मायलिन आच्छद और अगली तंत्रिका कोशिका से युग्मानुबंध स्पष्ट रूप से दिखाए गए हैं।
1. सूचना या उद्दीपन एक तंत्रिका कोशिका के दुमिका के सिरे द्वारा प्राप्त की जाती है।
2. रासायनिक क्रिया द्वारा विद्युत आवेग पैदा होती है, जो कोशिकाय तक जाता है तथा तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) में होता हुआ इसके अंतिम सिरे तक पहुँचता है।
3. एक्सॉन के अंत में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन करता है। ये रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स को पार करते हैं। और अगली तंत्रिका कोशिका की दुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं।
4. इसी तरह का एक सिनेप्स अंततः ऐसे आवेगों को तंत्रिका कोशिका से अन्य कोशिकाओं, जैसे कि पेशी कोशिकाओं या ग्रंथि तक ले जाते हैं। अतः न्यूरॉन एक संगठित जाल का बना होता है, जो सूचनाओं को विद्युत आवेग के द्वारा शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक संवहन करता है।
5. उदाहरण के लिए ग्राही संवेदी तंत्रिका कोशिका (Sensory neurons) सूचना ग्रहण कर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाते हैं तथा यह आवेग को वापस प्रेरक तंत्रिका कोशिका (Motor neurons) द्वारा पेशी कोशिकाओं या कार्यकर (effectors) तक पहुँचाती है।
In simple words: न्यूरॉन शरीर में सूचनाओं को विद्युत आवेगों के रूप में प्राप्त करते हैं, संसाधित करते हैं और संचारित करते हैं, जिससे शरीर के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय होता है।
🎯 Exam Tip: न्यूरॉन की संरचना (डेंड्राइट, कोशिकाकाय, एक्सॉन) और उसके कार्य (संकेत संचरण) को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
Answer: पादपों में प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़कर तथा जड़े इससे दूर मुड़कर अनुक्रिया करती हैं, जिसे प्रकाशानुवर्तन कहा जाता है। प्रकाश जब पादप की वृद्धि वाले भाग पर पड़ता है, तो वृद्धि हॉर्मोन ऑक्सिन छाया वाले भाग में अधिक मात्रा में एकत्र होकर उसे प्रकाश की आने की दिशा में मोड़ देता है अर्थात् पौधे का तने वाला भाग तथा पत्तियाँ प्रकाश की ओर मुड़ जाती हैं। इससे पत्तियों को प्रकाश संश्लेषण क्रिया के लिए अधिक से अधिक प्रकाश मिलने लगता है।
In simple words: प्रकाशानुवर्तन में, ऑक्सिन हार्मोन के असमान वितरण के कारण प्ररोह प्रकाश की ओर झुकते हैं और जड़ें प्रकाश से दूर जाती हैं, जिससे पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए अनुकूल स्थिति मिलती है।
🎯 Exam Tip: प्रकाशानुवर्तन की परिभाषा, ऑक्सिन हार्मोन की भूमिका और यह कैसे प्ररोह और जड़ों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ पैदा करता है, इसे विस्तार से समझाएँ।
Question 7. मेरुरज्जु आघात से किन संकेतों के आने में व्यवधान होगा?
Answer: मेरुरज्जु आघात से निम्न क्रियाओं में व्यवधान होगा
1. हम जानते हैं कि प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु के द्वारा नियंत्रित होती है। अतः प्रतिवर्ती क्रिया नहीं होगी।
2. ज्ञानेंद्रियों से आने वाली सूचना (आवेग) मस्तिष्क तक नहीं पहुँचेगी।
3. मस्तिष्क से सूचना शरीर के विभिन्न कार्यकर अंगों तक नहीं पहुँचेगी।
In simple words: मेरुरज्जु आघात से प्रतिवर्ती क्रियाएँ बाधित होंगी, संवेदी जानकारी मस्तिष्क तक नहीं पहुँचेगी, और मस्तिष्क के आदेश कार्यकर अंगों तक नहीं पहुँच पाएँगे।
🎯 Exam Tip: मेरुरज्जु के विभिन्न कार्यों (प्रतिवर्ती क्रिया, संवेदी और प्रेरक संकेतों का संचरण) को पहचानें और आघात के संभावित परिणामों को समझाएँ।
Question 8. पादपों में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है? ।
Answer: पादपों में रासायनिक समन्वय पादप हॉर्मोन द्वारा होते हैं। ये हॉर्मोन पौधों की वृद्धि, विकास एवं पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वयन में सहायता प्रदान करते हैं। इनके संश्लेषण का स्थान इनके क्रिया क्षेत्र से दूर होता है और वे साधारण विसरण द्वारा क्रिया क्षेत्र तक पहुँच जाते हैं।
उदाहरण के लिए
1. ऑक्सिन का सांद्रण कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि के लिए उद्दीप्त करता है।
2. जिब्बेरेलिन - तने की वृद्धि में सहायता करते हैं।
3. साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
4. एब्सिसिक अम्ल वृद्धि का संदमन करते हैं, जैसे पत्तियों का मुरझाना।
In simple words: पादपों में रासायनिक समन्वय पादप हॉर्मोन द्वारा होता है, जो वृद्धि, विकास और पर्यावरण प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हुए विसरण द्वारा लक्षित स्थानों तक पहुँचते हैं।
🎯 Exam Tip: पादप हॉर्मोनों के मुख्य उदाहरणों, उनके विशिष्ट कार्यों और पौधों में रासायनिक समन्वय की प्रक्रिया को समझाएँ।
Question 9. एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र की क्या आवश्यकता है?
Answer: सजीवों में अनेक अंग तंत्र पाए जाते हैं, जो एक खास कार्य करते हैं। जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय को कार्य तंत्रिका पेशी ऊतक तथा हॉर्मोन द्वारा किया जाता है तथा पादपों में हॉर्मोन द्वारा नियंत्रण एवं समन्वय होते हैं। यदि जीवों में समन्वय तंत्र नहीं होगा, तो सभी अंग एवं कोशिकाएँ स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगी तथा हमें इच्छित परिणाम नहीं मिलेंगे।
In simple words: जीवों में नियंत्रण और समन्वय आवश्यक है ताकि सभी अंग और कोशिकाएँ एक साथ काम कर सकें, जिससे शरीर का सुचारु संचालन और पर्यावरण के प्रति उचित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
🎯 Exam Tip: नियंत्रण और समन्वय की आवश्यकता के पीछे के तर्क, विभिन्न जीव समूहों (जंतु और पादप) में उनके तंत्र, और उनके अभाव में होने वाले परिणामों को स्पष्ट करें।
Question 10. अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
Answer: प्रतिवर्ती क्रियाएँ तीव्र गति से स्वयं होने वाली अनुक्रियाएँ हैं जो विशेष स्थिति में होती हैं जबकि अनैच्छिक क्रियाएँ बिना हमारी इच्छा या सोच के परन्तु लगातार होने वाली क्रियाएँ हैं।
उदाहरणार्थ: हृदय स्पंदन, रुधिर प्रवाह आदि अनैच्छिक क्रियाएँ हैं जबकि जल जाने पर हाथ का स्वयं पीछे हटना प्रतिवर्ती क्रिया है।
In simple words: अनैच्छिक क्रियाएँ शरीर में लगातार और स्वचालित रूप से होती रहती हैं (जैसे दिल की धड़कन), जबकि प्रतिवर्ती क्रियाएँ विशिष्ट बाहरी उत्तेजनाओं के जवाब में तीव्र, अचानक प्रतिक्रियाएँ होती हैं (जैसे हाथ हटाना)।
🎯 Exam Tip: अनैच्छिक और प्रतिवर्ती क्रियाओं के बीच के मुख्य अंतर (स्वभाव, गति, नियंत्रण केंद्र, कारण) को पहचानें और प्रत्येक के उपयुक्त उदाहरण दें।
Question 11. जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोने क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (contrast) कीजिए।
Answer: सभी जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि पायी जाती हैं। ये क्रियाविधियाँ केवल नियंत्रण एवं समन्वय का ही कार्य नहीं करतीं बल्कि बाह्य उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया भी करती हैं। तंत्रिका तंत्र द्वारा कार्य बड़ी तीव्रता के साथ किया जाता है परन्तु हॉर्मोनल क्रियाविधि में कार्य धीमी गति से होता है।
उपर्युक्त दोनों क्रियाविधियों के कार्यों में निम्नलिखित समानताएँ हैं
(i) ये दोनों ही शरीर के विभिन्न कार्यों के नियंत्रण एवं समन्वय में सहायक हैं।
(ii) ये दोनों ही शरीर तथा बाह्य वातावरण से संबंध स्थापित करती हैं।
In simple words: तंत्रिका तंत्र तेज़ और सटीक संकेत भेजकर तत्काल प्रतिक्रिया देता है, जबकि हॉर्मोनल प्रणाली धीमी गति से कार्य करती है लेकिन लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव डालती है, दोनों ही शरीर के समन्वय और बाहरी वातावरण के अनुकूलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका और हॉर्मोनल प्रणालियों की तुलना उनके कार्य की गति, प्रभाव की अवधि, संचरण के माध्यम और विशिष्टता के आधार पर करें, साथ ही उनकी समानताओं पर भी प्रकाश डालें।
Question 12. छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या अंतर है?
Answer:
In simple words: छुई-मुई पादप में गति जल के दबाव में परिवर्तन के कारण होती है और यह ऐच्छिक नहीं होती, जबकि हमारी टाँग में गति तंत्रिका आवेगों द्वारा नियंत्रित मांसपेशियों के संकुचन के कारण होती है और यह एक ऐच्छिक क्रिया है।
🎯 Exam Tip: पादप गतियों (जैसे स्पर्शानुवर्तन) और जंतु गतियों (ऐच्छिक पेशीय गति) के बीच के प्रमुख यांत्रिक और नियंत्रक अंतरों को स्पष्ट करें।
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