UP Board Solutions Class 10 Science Chapter 6 Life Processes

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Detailed Chapter 6 जीवन का चक्र UP Board Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 6 जीवन का चक्र UP Board Solutions PDF

पाठगत हल प्रश्न

[NCERT IN-TEXT QUESTIONS SOLVED]

खंड 6.1 (पृष्ठ संख्या 105)

 

Question 1. हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?
Answer: हम जानते हैं कि बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ अपने आसपास के पर्यावरण के सीधे संपर्क में नहीं रह सकती हैं। अतः साधारण विसरण द्वारा सभी कोशिकाओं और ऊतकों तक ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पाती है, क्योंकि यह अत्यंत धीमी प्रक्रिया है। इसलिए वहन तंत्र द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुँचाई जाती है।
In simple words: बहुकोशिकीय जीवों में कोशिकाएँ सीधे पर्यावरण के संपर्क में नहीं होतीं, इसलिए साधारण विसरण से सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती। वहन तंत्र ही ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाता है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न विसरण की सीमाओं और बहुकोशिकीय जीवों में वहन तंत्र की आवश्यकता को उजागर करता है। उत्तर में कारण और समाधान दोनों स्पष्ट होने चाहिए।

 

Question 2. कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?
Answer: कोई वस्तु सजीव है इसका निर्धारण हम निम्न मापदंडों द्वारा कर सकते हैं|
1. गति
2. वृद्धि
3. श्वसन
4. उत्तेजनशीलता
5. पोषण इत्यादि ।
In simple words: किसी वस्तु को सजीव कहने के लिए हम उसमें गति, वृद्धि, श्वसन, बाहरी उद्दीपकों के प्रति प्रतिक्रिया (उत्तेजनशीलता) और पोषण जैसी जैविक प्रक्रियाओं को देखते हैं।

🎯 Exam Tip: सजीवों के मूलभूत लक्षणों की स्पष्ट सूची दें। प्रत्येक बिंदु को संक्षिप्त और सटीक रखें।

 

Question 3. किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?
Answer: किसी जीव द्वारा निम्न कच्ची सामग्रियों के उपयोग किए जाते हैं
1. खाद्य पदार्थ (कार्बन आधारित)- यह जीवों के लिए ऊर्जा प्राप्त करने के लिए।
2. ऑक्सीजन श्वसन तथा ATP के रूप में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए।
3. जल-भोजन के पाचन तथा शरीर के अंदर अन्य कार्यों के लिए।
4. कार्बन डाइऑक्साइड [CO,]-पौधों में प्रकाश संश्लेषण का एक आवश्यक घटक।।
In simple words: जीवों को ऊर्जा, वृद्धि और अन्य जैविक क्रियाओं के लिए खाद्य पदार्थ (कार्बन आधारित), ऑक्सीजन, जल और पौधों के लिए कार्बन डाइऑक्साइड जैसी कच्ची सामग्रियों की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में विभिन्न जीवों के लिए आवश्यक मूलभूत सामग्रियों पर ध्यान केंद्रित करें और प्रत्येक का संक्षिप्त कार्य बताएं।

 

Question 4. जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन-किन प्रक्रमों को आवश्यक मानेंगे?
Answer: जीवन के अनुरक्षण के लिए सभी जैव क्रियाएँ आवश्यक होती हैं- जैसे-पोषण, श्वसन, परिवहन, उत्सर्जन, वृद्धि आदि ।
In simple words: जीवन को बनाए रखने के लिए पोषण (ऊर्जा प्राप्त करना), श्वसन (ऊर्जा मुक्त करना), परिवहन (पदार्थों का संचार), उत्सर्जन (अपशिष्ट निकालना) और वृद्धि जैसी सभी मुख्य जैविक प्रक्रियाएं आवश्यक हैं।

🎯 Exam Tip: जीवन के प्रमुख प्रक्रमों की सूची बनाना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन जैसे मुख्य प्रक्रमों को शामिल करें।

 

खंड 6.2 (पृष्ठ संख्या 111)

 

Question 1. स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है?
Answer: स्वयंपोषी पोषण में पर्यावरण से सरल अकार्बनिक पदार्थ लेकर तथा बाह्य ऊर्जा स्रोत जैसे सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके उच्च ऊर्जा वाले जटिल कार्बनिक पदार्थों का संश्लेषण होता है जबकि विषमपोषी पोषण में दूसरे जीवों द्वारा तैयार किये गये जटिल पदार्थों का अंतर्ग्रहण होता है।
In simple words: स्वयंपोषी जीव सूर्य के प्रकाश या रसायनों का उपयोग करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जबकि विषमपोषी जीव भोजन के लिए सीधे या परोक्ष रूप से अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।

🎯 Exam Tip: स्वयंपोषी और विषमपोषी पोषण के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, जिसमें ऊर्जा स्रोत और भोजन निर्माण की विधि शामिल हो।

 

Question 2. प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधे कहाँ से प्राप्त करते हैं?
Answer: प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री तथा उनके स्रोत निम्न हैं:
1. जल-पौधों की जड़े भूमि से जल प्राप्त करती हैं।
2. कार्बन-डाइऑक्साइड (CO)-पौधे इसे वायुमंडल से रंध्रों (Stomata) द्वारा प्राप्त करते हैं।
3. क्लोरोफिले-हरे पत्तों में क्लोरोप्लास्ट होता है, जिसमें क्लोरोफिल मौजूद होते हैं।
4. सूर्य का प्रकाश-सूर्य से प्राप्त करते हैं।
In simple words: पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए मिट्टी से पानी, वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड, पत्तों में क्लोरोफिल और सूर्य से प्रकाश ऊर्जा मिलती है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की कच्ची सामग्रियों को उनके स्रोत के साथ सूचीबद्ध करें, यह एक सीधा और स्कोरिंग प्रश्न है।

 

Question 3. हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?
Answer: हमारे आमाशय में अम्ल की निम्नलिखित भूमिका है
1. आमाशय में HCI अम्ल की भूमिका आमाशय रस को अम्लीय बनाना है, क्योंकि एन्जाइम पेप्सिन केवल अम्लीय माध्यम में ही प्रभावशाली ढंग से प्रोटीनों का पाचन कर सकता है।
2. अम्ल का एक अन्य कार्य यह भी है कि ये भोजन में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को मार देते हैं।
3. यह अधपचे भोजन का किण्वन नहीं होने देता है।
In simple words: आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन को अम्लीय बनाता है, जो पेप्सिन एंजाइम को प्रोटीन पचाने में मदद करता है। यह हानिकारक जीवाणुओं को भी नष्ट करता है और भोजन को सड़ने से रोकता है।

🎯 Exam Tip: आमाशय में अम्ल की दो प्रमुख भूमिकाओं (एंजाइम सक्रियण और रोगाणुनाशक) पर जोर दें।

 

Question 4. पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?
Answer: पाचक एंजाइम अघुलनशील जटिल कार्बनिक अणुओं को सरल घुलनशील अणुओं में परिवर्तित कर देते हैं, ताकि क्षुद्रांत की भित्ति द्वारा सरलतापूर्वक अवशोषित कर लिए जाएँ।
In simple words: पाचक एंजाइम जटिल भोजन के अणुओं को छोटे, घुलनशील रूपों में तोड़ते हैं, जिससे उन्हें छोटी आंत द्वारा आसानी से अवशोषित किया जा सके।

🎯 Exam Tip: एंजाइमों के कार्य को सरल शब्दों में समझाएं- जटिल से सरल अणुओं में रूपांतरण, जो अवशोषण के लिए आवश्यक है।

 

Question 5. पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?
Answer: क्षुद्रांत्र के आंतरिक आस्तर पर अनेक अँगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं, जिन्हें दीर्घरोम कहते हैं, ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। दीर्घरोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है, जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाती हैं।
In simple words: छोटी आंत में दीर्घरोम (माइक्रोविली) नामक उंगली जैसी संरचनाएं होती हैं, जो भोजन के अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ाती हैं। इनमें रक्त वाहिकाएं होती हैं जो अवशोषित पोषक तत्वों को शरीर में ले जाती हैं।

🎯 Exam Tip: दीर्घरोम (विली) की संरचना और उनके कार्य (सतह क्षेत्र बढ़ाना और पोषक तत्वों का परिवहन) का वर्णन करें।

 

खंड 6.3 (पृष्ठ संख्या 116)

 

Question 1. श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?
Answer:
1. जलीय जीव जल में विलेय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं। क्योंकि जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा वायु में ऑक्सजीन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है, इसलिए जलीय जीवों की श्वास दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा द्रुत गति से होती है।
2. स्थलीय जीवों में ऑक्सीजन भिन्न-भिन्न अंगों द्वारा अवशोषित की जाती है। इन सभी अंगों में एक रचना होती है, जो उस सतही क्षेत्रफल को बढ़ाती है जो ऑक्सीजन बाहुल्य वायुमंडल के संपर्क में रहता है।
In simple words: स्थलीय जीव वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं, जो जल में घुली ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होती है। इससे जलीय जीवों को कम ऑक्सीजन के कारण तेजी से सांस लेनी पड़ती है, जबकि स्थलीय जीवों के पास ऑक्सीजन अवशोषण के लिए बड़े सतही क्षेत्रफल वाले अंग होते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, ऑक्सीजन की उपलब्धता और श्वसन दर में अंतर पर ध्यान दें, साथ ही स्थलीय जीवों में अनुकूलित श्वसन संरचनाओं का भी उल्लेख करें।

 

Question 2. ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पर्थ क्या हैं?
Answer: ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ इस प्रकार हैं:
जीव निम्नलिखित तीन पथों द्वारा ग्लूकोज़ का ऑक्सीकरण करके ऊर्जा प्राप्त करते हैं
(i) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में पायरुवेट का विखंडन
(ii) ऑक्सीजन की कमी में पायरुवेट का विखंडन
(iii) ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज़ का विखंडन
In simple words: ग्लूकोज से ऊर्जा प्राप्त करने के तीन मुख्य तरीके हैं- ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में (जैसे किण्वन), ऑक्सीजन की कमी में (जैसे मांसपेशियों में लैक्टिक एसिड बनना), और ऑक्सीजन की उपस्थिति में (जैसे कोशिकीय श्वसन)।

🎯 Exam Tip: ग्लूकोज के ऑक्सीकरण के विभिन्न मार्गों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें और प्रत्येक के लिए ऑक्सीजन की स्थिति का उल्लेख करें।

 

Question 3. मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन-डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
Answer: ऑक्सीजन का परिवहन-मानव शरीर के फुफ्फुस कूपिकाओं की रुधिर वाहिकाओं में RBC होते हैं, जिसमें मौजूद हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से संयुक्त होकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है तथा सभी ऊतकों एवं अंगों तक पहुँच जाता है। कार्बन-डाइऑक्साइड (CO2) का परिवहन-ऑक्सीजन की अपेक्षा CO2 जल में अधिक विलेय है, इसलिए ऊतकों से फुफ्फुस तक परिवहन हमारे रुधिर (प्लाज्मा) में विलेय अवस्था में होता है।
In simple words: मनुष्यों में ऑक्सीजन का परिवहन RBC में मौजूद हीमोग्लोबिन द्वारा होता है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड प्लाज्मा में घुलित अवस्था में परिवहन की जाती है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन के लिए अलग-अलग तंत्रों पर ध्यान दें- हीमोग्लोबिन के माध्यम से ऑक्सीजन और प्लाज्मा में घुलित अवस्था में कार्बन डाइऑक्साइड।

 

Question 4. गैसों के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया है?
Answer: फुफ्फुस के अंदर मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता है, जो अंत में गुब्बारे जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है, जिसे कूपिका कहते हैं। कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है। जिसमें गैसों का विनिमय हो सकता है। यदि कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए तो यह लगभग 80 से 100 वर्ग मीटर क्षेत्र ढक लेगी। इस तरह हमारे फुफ्फुस गैसों के विनिमय के लिए अधिकतम क्षेत्रफल बनाती है।
In simple words: मानव फेफड़े में कूपिकाएँ (एल्विओली) नामक लाखों छोटी, गुब्बारे जैसी संरचनाएँ होती हैं, जो गैसों के आदान-प्रदान के लिए एक विशाल सतही क्षेत्रफल प्रदान करती हैं, जिससे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का प्रभावी विनिमय हो सके।

🎯 Exam Tip: कूपिकाओं की संरचना (गुब्बारे जैसी) और उनके कार्य (विशाल सतही क्षेत्रफल प्रदान करना) को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

खंड 6.4 (पृष्ठ संख्या 122)

 

Question 1. मानव में वहन तंत्र के घटक कौन से हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?
Answer: मानव में वहन तंत्र के घटक हैं- हृदय, रुधिर वाहिकाएँ और रुधिर । उनके कार्य इस प्रकार हैं :
1. हृदय (Heart)-यह एक पंप की तरह कार्य करता है।
2. रुधिर वाहिकाएँ (Blood Vessels):
1. धमनियाँ (Arteries)- हृदय से शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त (Oxygenated blood) ले जाती हैं।
2. शिराएँ (Veins)- विभिन्न अंगों से हृदय तक वापस डीऑक्सीजनेटेड (De-Oxygenated) रक्त शुद्धिकरण के लिए लाती हैं।
3. कोशिकाएँ (capillaries)- धमनी छोटी-छोटी वाहिकाओं में विभाजित हो जाती है, जिसे कोशिकाएँ कहते हैं। रुधिर एवं आसपास की कोशिकाओं के मध्य पदार्थों का विनिमय होता है।
3. रुधिर या रक्त (Blood)-यह परिवहन का माध्यम है जो निम्नलिखित से बने हैं:
1. प्लाज्मा (Plasma)-भोजन के अणुओं, CO2 नाइट्रोजनी वर्त्य (nitrogenous wastes), लवण, हार्मोन, प्रोटीन आदि का विलीन रूप में वहन करता है।
2. RBC-इसमें हीमोग्लोबीन होता है, जो ऑक्सीजन को ले जाती है।
3. WBC-संक्रमण से लड़ने में सहायता करता है। यह शरीर में आए रोगाणुओं को मारकर शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है।
4. प्लेटलेट्स (Plateletes)-रक्तस्राव के स्थान पर रुधिर का थक्का बनाकर मार्ग अवरुद्ध कर देती है।
In simple words: मानव वहन तंत्र में हृदय (रक्त पंप करना), रक्त वाहिकाएँ (धमनी, शिरा, केशिकाएं- रक्त परिवहन) और रक्त (प्लाज्मा, RBC, WBC, प्लेटलेट्स- पोषक तत्व, गैसें, अपशिष्ट, प्रतिरक्षा का वहन) शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: मानव वहन तंत्र के प्रत्येक घटक- हृदय, रक्त वाहिकाएँ (धमनी, शिरा, केशिका) और रक्त (प्लाज्मा, RBC, WBC, प्लेटलेट्स)- का उल्लेख करें और प्रत्येक का संक्षिप्त कार्य बताएं।

 

Question 2. स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है?
Answer: हृदय का दायाँ व बायाँ बँटवारा ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने से रोकता है तथा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति करता है, क्योंकि पक्षी और स्तनधारी जंतुओं को अपने शरीर का तापक्रम बनाए रखने के लिए निरंतर उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके लिए यह बहुत लाभदायक होता है।
In simple words: स्तनधारियों और पक्षियों में ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त को अलग रखना इसलिए जरूरी है ताकि उनके शरीर को लगातार उच्च ऊर्जा मिलती रहे, जो शरीर के तापमान को स्थिर रखने के लिए आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, उच्च ऊर्जा आवश्यकताओं और शरीर के तापमान को बनाए रखने पर जोर दें, जो ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रक्त के पृथक्करण के मुख्य कारण हैं।

 

Question 3. उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?
Answer: उच्च संगठित पादप में निम्नलिखित वहन तंत्र होते हैं :
1. जाइलम ऊतक (Xylem tissue)-जाइलम ऊतक पादप के जड़ से खनिज लवण तथा जल इसके सभी अंगों तक पहुँचाता है। जाइलम ऊतक में जड़ों, तनों और पत्तियों की वाहिनिकाएँ तथा वाहिकाएँ आपस में जुड़कर जल संवहन वाहिकाओं का एक जाल बनाती हैं, जो पादप के सभी भागों से संबद्ध होता है।
2. फ्लोएम ऊतक (Phloem tissue)-भोजन तथा अन्य पदार्थों का संवहन (Translocation) पत्तियों से अन्य सभी अंगों तक फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है।
In simple words: उच्च संगठित पौधों में वहन तंत्र के मुख्य घटक जाइलम (जो पानी और खनिजों का परिवहन करता है) और फ्लोएम (जो भोजन का परिवहन करता है) ऊतक हैं।

🎯 Exam Tip: पौधों में वहन तंत्र के दो मुख्य घटकों- जाइलम और फ्लोएम- को उनके विशिष्ट कार्यों के साथ उल्लेख करें।

 

Question 4. पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?
Answer: पापों में जल और खनिज लवण का वहन जाइलम ऊतक द्वारा होता है।
जड़ों की कोशिकाएँ मृदा के संपर्क में हैं तथा वे सक्रिय रूप से आयन प्राप्त करती हैं। यह जड़ और मृदा के मध्य आयन सांद्रण में एक अंतर उत्पन्न करता है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए जल अनवरत गति से जड़ के जाइलम में जाता है और जल के स्तंभ का निर्माण करता है, जो लगातार ऊपर की ओर धकेला जाता है। यह दाब जल को ऊँचाई तक पहुँचाने में पर्याप्त नहीं होता है। पत्तियों के द्वारा वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा रंध्र से जल की हानि होती है, जो एक चूषण उत्पन्न करता है, जो जल को जड़ों में उपस्थित जाइलम कोशिकाओं द्वारा खींचता है। अतः वाष्पोत्सर्जन कर्षण जल की गति के लिए एक मुख्य प्रेरक बल होता है।
In simple words: पौधों में जल और खनिज लवण का वहन जाइलम द्वारा होता है। जड़ें मिट्टी से सक्रिय रूप से आयन लेती हैं, जिससे जल जड़ों में प्रवेश करता है। वाष्पोत्सर्जन पत्तियों से पानी की कमी करता है, जिससे एक चूषण खिंचाव बनता है जो जल को जड़ों से ऊपर की ओर खींचता है।

🎯 Exam Tip: जल और खनिज लवण के वहन में जड़ दबाव और वाष्पोत्सर्जन कर्षण की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 5. पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?
Answer: पादप में भोजन का स्थानांतरण फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है। प्रकाश संश्लेषण के उत्पादों के अलावा फ्लोएम अमीनो अम्ल तथा अन्य पदार्थों का परिवहन भी करता है। ये पदार्थ विशेष रूप से जड़ के भंडारण अंगों, फलों, बीजों तथा वृद्धि वाले अंगों में ले जाए जाते हैं। भोजन तथा अन्य पदार्थों का स्थानांतरण संलग्न साथी कोशिका की सहायता से चालनी नलिका में उपरिमुखी तथा अधोमुखी दोनों दिशाओं में होता है। सुक्रोज सरीखे पदार्थ फ्लोएम ऊतक में ए०टी०पी० से प्राप्त ऊर्जा से ही स्थानांतरित होते हैं।
In simple words: पौधों में भोजन (मुख्यतः सुक्रोज) और अन्य पदार्थों का परिवहन फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है। यह स्थानांतरण पत्तियों से भंडारण अंगों और वृद्धि वाले भागों तक, ऊर्जा (ATP) का उपयोग करके, दोनों दिशाओं में होता है।

🎯 Exam Tip: फ्लोएम द्वारा भोजन स्थानांतरण की प्रक्रिया (ट्रांसलोकेशन) को समझाएं, जिसमें सुक्रोज, ATP का उपयोग और द्वि-दिशात्मक प्रवाह शामिल हो।

 

खंड 6.5 (पृष्ठ संख्या 124)

 

Question 1. वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
Answer: संरचना (Structure)- मानव शरीर में दो वृक्क होते हैं। प्रत्येक वृक्क नेफ्रॉन की अनेक इकाइयों से बना होता है। वृक्काणु (नेफॉन) वृक्क की क्रियात्मक इकाई होती है। नेफॉन में कप के आकार का बोमन संपुट (Bowman's Capsule) होता है, जिसमें कोशिका गुच्छ (Glomerulus) होते हैं। यह रुधिर कोशिकाओं का एक गुच्छ होता है जो एफेरेन्ट कोशिकाओं द्वारा बने होते हैं। एफेरेन्ट धमनियाँ अशुद्ध रक्त नेफ्रॉन तक लाते हैं। कप के आकार का बोमन संपुट वृक्काणु के निलिकाकार भाग (Tubular part of rephron) का निर्माण करती है। जो संग्राहक वाहिनी (collecting duct) से जुड़ा होता है।
क्रियाविधि (Working)- वृक्क धमनी (Renal artery) ऑक्सीजनित रुधिर लाती है, जिसमें नाइट्रोजनी वर्त्य होते हैं। मूत्र बोमन संपुट में स्थित कोशिका गुच्छ (ग्लामेरूलस) में फिल्टर होकर कुंडली के आकार में नेफ्रॉन के नलिकाकार भाग में पहुँचता है। मूत्र में कुछ उपयोगी पदार्थ- जैसे-ग्लूकोज, अमीनों अम्ल, लवण तथा जले रह जाते हैं जो पुनः इस नलिकाकार भाग में अवशोषित कर लिए जाते हैं। इसके बाद मूत्र संग्राहक वाहिनी में एकत्र हो जाती है तथा मूत्रवाहिनी; में प्रवेश करता है जहाँ से मूत्राशय में चली जाती है। अतः प्रत्येक वृक्क में बनने वाला मूत्र एक लंबी नलिका, मूत्रवाहिनी में प्रवेश करता है, जो वृक्क को मूत्राशय से जोड़ती है।
In simple words: नेफ्रॉन किडनी की कार्यात्मक इकाई है, जिसमें बोमन संपुट और एक नलिकाकार भाग होता है। रक्त बोमन संपुट में छनता है, फिर उपयोगी पदार्थ नलिका में अवशोषित हो जाते हैं, और बचा हुआ अपशिष्ट (मूत्र) संग्राहक वाहिनी के माध्यम से मूत्राशय तक पहुँचता है।

🎯 Exam Tip: नेफ्रॉन की संरचना (बोमन संपुट, ग्लोमेरुलस, नलिकाकार भाग) और क्रियाविधि (निस्पंदन, पुनरावशोषण) का विस्तृत वर्णन करें।

 

Question 2. उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं?
Answer: उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप निम्न विधियों को उपयोग करते हैं
1. प्रकाश संश्लेषण में O2 उत्पाद के रूप में तथा CO2 श्वसन क्रिया में रंध्रों द्वारा निष्कासित किए जाते हैं।
2. पौधे अतिरिक्त जल से वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा छुटकारा पा सकते हैं।
3. पौधों में निष्क्रिय पत्तियाँ समय-समय पर अलग होती रहती हैं, जिनमें अपशिष्ट उत्पाद संचित रहते हैं।
4. पादपों में अन्य अपशिष्ट उत्पाद रेजिन तथा गोंद के रूप में विशेष रूप से पुराने जाइलम में संचित रहते हैं।
5. पादप कुछ अपशिष्ट पदार्थों को अपने आसपास की मृदा में उत्सर्जित करते हैं।
6. बहुत से पादप अपशिष्ट उत्पाद कोशकीय रिक्तिका में संचित रहते हैं।
In simple words: पौधे अपशिष्ट पदार्थों को ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में रंध्रों से, अतिरिक्त जल को वाष्पोत्सर्जन से, पत्तियों में जमा करके जिन्हें वे गिरा देते हैं, या रेजिन और गोंद के रूप में पुराने जाइलम में संग्रहीत करके हटाते हैं।

🎯 Exam Tip: पौधों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों के निपटान की विभिन्न विधियों की सूची बनाएं, जैसे गैसीय विनिमय, वाष्पोत्सर्जन और भंडारण।

 

Question 3. मूत्र' बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है?
Answer:
1. जल की मात्रा पुनरवशोषण (Reabsorption) शरीर में उपलब्ध अतिरिक्त जल की मात्रा पर तथा कितना जल की मात्रा पर तथा कितना विलेय वयं उत्सर्जित करना है, पर निर्भर करती है।
2. जैसे गर्मी के दिनों में शरीर से अत्यधिक पसीने के द्वारा जल एवं लवण निष्कासित होते हैं। इसलिए वृक्क के द्वारा छने (filterate) हुए मूत्र में विद्यमान जल एवं लवण की अधिकांश मात्रा पुनः अवशोषित कर ली जाती है। अतः मूत्र कम मात्रा में उत्सर्जित होते हैं इसके विपरीत सर्दियों में कम पसीना आता है, इसलिए मूत्र अधिक बनता है। जल एवं लवण पुनरवशोषण हार्मोन के द्वारा नियंत्रित होते हैं।
3. अतः मूत्र निर्माण पर नियंत्रण रक्त के ऑसमोटिक (osmotic) संतुलन को भी बनाए रखता है।
In simple words: मूत्र की मात्रा शरीर में पानी की उपलब्धता, उत्सर्जित किए जाने वाले अपशिष्ट की मात्रा और हार्मोनल नियंत्रण पर निर्भर करती है। शरीर में पानी की कमी होने पर कम मूत्र बनता है, जबकि अधिक पानी होने पर या ठंडे मौसम में अधिक मूत्र बनता है।

🎯 Exam Tip: मूत्र की मात्रा के नियमन को प्रभावित करने वाले कारकों (जल की उपलब्धता, अपशिष्ट सांद्रता, हार्मोन और आसमाटिक संतुलन) को समझाएं।

 

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

 

Question 1. मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है, जो संबंधित है
(a) पोषण
(b) श्वसन
(C) उत्सर्जन
(d) परिवहन

Answer: (c) उत्सर्जन
In simple words: मनुष्य में वृक्क (किडनी) का मुख्य कार्य शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को हटाकर मूत्र के रूप में बाहर निकालना है, जो उत्सर्जन तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: वृक्क (किडनी) उत्सर्जन तंत्र का एक प्रमुख अंग है। इस कार्य को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. पादप में जाइलम उत्तरदायी है
(a) जल का वहन
(b) भोजन का वहन
(C) अमीनो अम्ल का वहन
(d) ऑक्सीजन का वहन

Answer: (a) जल का वहन
In simple words: पौधों में जाइलम ऊतक जड़ों से पानी और खनिजों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाने का कार्य करता है।

🎯 Exam Tip: जाइलम का प्राथमिक कार्य जल और खनिज लवणों का परिवहन करना है, इसे याद रखें।

 

Question 3. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है
(a) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल
(b) क्लोरोफिल
(C) सूर्य का प्रकाश
(d) उपरोक्त सभी

Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: स्वपोषी पोषण, जिसमें पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, जल, क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश- इन सभी तत्वों का होना अनिवार्य है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए आवश्यक सभी घटकों को याद रखें, क्योंकि ये सभी मिलकर स्वपोषी पोषण को संभव बनाते हैं।

 

Question 4. पायरुवेट के विखण्डन से यह कार्बन-डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है
(a) कोशिका द्रव्य
(b) माइटोकॉन्ड्रिया
(C) हरित लवक
(d) केन्द्रक

Answer: (b) माइटोकॉन्ड्रिया
In simple words: पायरुवेट का पूर्ण विखंडन, जिसमें कार्बन-डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा मुक्त होती है, माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर होता है, जो कोशिका का 'पावरहाउस' कहलाता है।

🎯 Exam Tip: कोशिकीय श्वसन के दौरान पायरुवेट के पूर्ण विखंडन और ऊर्जा उत्पादन का मुख्य स्थल माइटोकॉन्ड्रिया है।

 

Question 5. हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?
Answer:
- वसा का पाचन छोटी आँत में होता है।
- क्षुद्रांत में वसा बड़ी गोलिकाओं के रूप में होता है, जिससे उस पर एंजाइम का कार्य करना मुश्किल हो जाता है।
- लीवर द्वारा स्रावित पित्त लवण उन्हें छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देता है, जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। यह इमल्सीकृत क्रिया कहलाती है।
- पित्त रस अम्लीय माध्यम को क्षारीय बनाता है, ताकि अग्न्याशय से स्रावित लाइपेज एंजाइम क्रियाशील हो सके ।
- लाइपेज एंजाइम वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में परिवर्तित कर देता है।
- पाचित वसा अंत में आंत्र की भित्रि अवशोषित कर लेती है।
In simple words: वसा का पाचन छोटी आंत में होता है, जहाँ पित्त लवण वसा की बड़ी बूंदों को छोटी बूंदों में तोड़ते हैं (इमल्सीकरण)। फिर लाइपेज एंजाइम वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में बदलता है, जिन्हें आंत की दीवारों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

🎯 Exam Tip: वसा के पाचन में छोटी आंत, पित्त लवण द्वारा इमल्सीकरण और लाइपेज एंजाइम की भूमिका पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 6. भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
Answer: भोजन के पाचन में लार की भूमिका निम्नलिखित है
1. लार भोजन को गीला करता है जिससे निगलने में आसानी होती है।
2. लार में एमिलेस (amylase) एंजाइम होता है, जो मंड (स्टार्च) के जटिल अणु को शर्करा में खंडित करता है। (जटिल कार्बोहाइड्रेट को सरल कार्बोहाइड्रेड में बदलना)
3. इसमें मौजूद लाइसोजाइम हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है।
In simple words: लार भोजन को गीला करके निगलने में मदद करती है, इसमें मौजूद एमिलेस स्टार्च को पचाना शुरू करता है, और लाइसोजाइम भोजन में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को मारता है।

🎯 Exam Tip: लार के तीन मुख्य कार्यों- भोजन को नम करना, स्टार्च का पाचन शुरू करना, और जीवाणुनाशक क्रिया- को याद रखें।

 

Question 7. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन-सी हैं और उसके उपोत्पाद क्या हैं?
Answer: हरे पौधे स्वपोषी कहलाते हैं, क्योंकि प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा वे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं
1. क्लोरोफिल-पौधों के हरे भाग में क्लोरोफिल होते हैं, जो प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है।
2. सूर्य का प्रकाश-सूर्य के प्रकाश से
3. कार्बन-डाइऑक्साइड-वायुमंडल से
4. जल-पौधे जड़ों द्वारा भूमि से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को निम्न रासायनिक समीकरण द्वारा बनाया जाता है। अतः कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज़), ऑक्सीजन तथा जल उपोत्पाद के रूप में प्राप्त होते हैं।
In simple words: स्वपोषी पोषण (प्रकाश संश्लेषण) के लिए क्लोरोफिल, सूर्य का प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और जल आवश्यक हैं। इस प्रक्रिया के उपोत्पाद कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज), ऑक्सीजन और जल हैं।

🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की आवश्यक शर्तों (सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, CO2, जल) और उसके उत्पादों (ग्लूकोज, ऑक्सीजन, जल) को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 8. वायवीय श्वसन तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।
Answer:

क्र०सं०वायवीय श्वसनअवायवीय श्वसन
1.वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है तथा इसमें ऑक्सीजन उपभुक्त हो जाती है।अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है।
2.इसमें ग्लूकोज़ का पूर्ण विखंडन होता है।इसमें ग्लूकोज़ का पूर्ण विखंडन नहीं होता है।
3.इसमें CO2 गैस तथा जल अन्तिम उत्पाद होते हैं।इसमें एथेनॉल तथा लैक्टिक अम्ल अन्तिम उत्पाद होते हैं।
4.इसमें उच्च मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।इसमें कम मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
5.यह माइटोकॉन्ड्रिया तथा साइटोप्लाज्म में होता है।यह केवल साइटोप्लाज्म में होता है।
6.इसमें 38 ATP अणु मुक्त होते हैं।इसमें केवल 2 ATP अणु मुक्त होते हैं।
In simple words: वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, ग्लूकोज का पूर्ण विखंडन होता है, अधिक ऊर्जा बनती है और इसके अंतिम उत्पाद CO2 तथा जल होते हैं। अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, ग्लूकोज का अपूर्ण विखंडन होता है, कम ऊर्जा बनती है, और इसके अंतिम उत्पाद एथेनॉल या लैक्टिक अम्ल होते हैं। यीस्ट और कुछ बैक्टीरिया अवायवीय श्वसन करते हैं।

🎯 Exam Tip: वायवीय और अवायवीय श्वसन के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए एक तुलनात्मक तालिका बनाएं, जिसमें ऑक्सीजन की आवश्यकता, ऊर्जा उत्पादन और अंतिम उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया गया हो। अवायवीय श्वसन वाले जीवों के उदाहरण भी दें।

 

Question 9. गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?
Answer: कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है, जिससे गैसों का विनिमय हो सके । कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तीर्ण जाल होता है, जो वायु से ऑक्सीजन लेकर हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है तथा रुधिर में विलेय Co2 को कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है ताकि CO2 हमारे शरीर से बाहर निकल जाए।
In simple words: कूपिकाएँ (एल्विओली) छोटी, पतली दीवार वाली संरचनाएँ होती हैं जिनमें रक्त वाहिकाओं का एक घना जाल होता है, जो गैसों के आदान-प्रदान के लिए अधिकतम सतह क्षेत्र प्रदान करती हैं, जिससे ऑक्सीजन आसानी से रक्त में और CO2 रक्त से बाहर जा सके।

🎯 Exam Tip: कूपिकाओं की पतली दीवारें, विशाल सतही क्षेत्रफल और रक्त केशिकाओं के घने जाल जैसी विशेषताओं का वर्णन करें, जो कुशल गैस विनिमय में सहायक होती हैं।

 

Question 10. हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं?
Answer: हम जानते हैं कि मानव में श्वसन वर्णक हीमोग्लोबिन है, जो ऑक्सीजन के लिए उच्च बंधुता रखता है। इसकी कमी के कारण हमारे शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी, जिससे ऊर्जा कम मात्रा में निर्मित होगी और हम थकान का अनुभव करेंगे। हमारी श्वास गति भी बढ़ जाएगी। अतः हीमोग्लोबिन की कमी से एनीमिया (anaeamia) होता है।
In simple words: हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन कम हो जाता है, जिससे कोशिकाओं को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती। इसके परिणामस्वरूप थकान, सांस फूलना और एनीमिया (रक्ताल्पता) जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन वहन क्षमता और इसकी कमी से होने वाले प्रभावों (ऊर्जा की कमी, थकान, सांस लेने में तकलीफ, एनीमिया) पर प्रकाश डालें।

 

Question 11. मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?
Answer: मनुष्य के परिसंचरण तंत्र को दोहरा परिसंचरण इसलिए कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक चक्र में रुधिर दो बार हृदय में जाती है। हृदय का दायाँ और बायाँ बँटवारा ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने से रोकता है। चूंकि हमारे शरीर में उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन जरूरी होता है। अतः शरीर का तापक्रम बनाए रखने तथा निरंतर ऊर्जा की पूर्ति के लिए यह परिसंचरण लाभदायक होता है।
In simple words: मनुष्य में दोहरा परिसंचरण इसलिए होता है क्योंकि रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से दो बार गुजरता है- एक बार फेफड़ों से होते हुए और दूसरी बार शरीर के बाकी हिस्सों से होते हुए। यह ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त को अलग रखता है, जिससे शरीर को उच्च ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अधिक कुशल ऑक्सीजन आपूर्ति मिलती है।

🎯 Exam Tip: दोहरा परिसंचरण की परिभाषा (रक्त का हृदय से दो बार गुजरना) और इसकी आवश्यकता (ऑक्सीजनित/विऑक्सीजनित रक्त का पृथक्करण, उच्च ऊर्जा दक्षता) को समझाएं।

 

Question 12. जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है?
Answer:

क्र०सं०जाइलमफ्लोएम
1.जाइलम जड़ों से जल और खनिज लवणों को पौधों के अन्य भागों तक पहुँचाता है।फ्लोएम तैयार भोजन को पत्तियों से पौधों के अन्य भागों में पहुँचाता है।
2.खनिज लवणों का परिवहन नलिकाओं एवं वाहिकाओं द्वारा होता है।भोजन का परिवहन चालनी नलिकाओं एवं सहायक कोशिकाओं द्वारा होता है।
3.नलिकाएँ और वाहिकाएँ मृत कोशिकाएँ होती. हैं।चालनी नलिकाएँ और सहायक कोशिकाएँ जीवित होती हैं।
4.पदार्थों का स्थानान्तरण वाष्पोत्सर्जन आकर्षण बल के कारण होता है।पदार्थों का स्थानान्तरण परासरण दाब के कारण होता है।
In simple words: जाइलम जल और खनिज लवणों को जड़ों से ऊपर की ओर ले जाता है, जबकि फ्लोएम पत्तियों से बने भोजन को पौधे के सभी भागों में पहुँचाता है। जाइलम मुख्य रूप से मृत कोशिकाओं से बना होता है और वाष्पोत्सर्जन पर निर्भर करता है, जबकि फ्लोएम जीवित कोशिकाओं से बना होता है और परासरण दाब का उपयोग करता है।

🎯 Exam Tip: जाइलम और फ्लोएम के बीच अंतर को उनके द्वारा वहन किए जाने वाले पदार्थों, परिवहन की दिशा, कोशिका प्रकार और परिवहन के पीछे के बल के संदर्भ में स्पष्ट करें।

 

Question 13. फुफ्फुस में कूपिकाओं तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना कीजिए।
Answer:

क्र०सं०कूपिकावृक्काणु (नेफ्रॉन)
1.कूपिका की संरचना महीन दीवारों वाले गुब्बारे के समान होती है।वृक्काणु की संरचना महीन दीवारों वाले कप के समान होती है।
2.कूपिका में महीन दीवारों वाली रक्त केशिकाओं का जाल बिछा रहता है जो गैसों का आदान-प्रदान करती हैं।बोमैन संपुट में भी महीन दीवारों वाली केशिकाओं का गुच्छा होता है जिसे ग्लोमेरूलस कहते हैं। यह छनक का कार्य करता है।
3.ये CO₂ व O2 गैसों का आदान-प्रदान करने के लिए पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ा सकती हैं।ये भी रुधिर को छानने तथा पुनरवशोषण के लिए अपना पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ा सकते हैं।
4.कूपिका केवल गैसों का आदान-प्रदान करने के लिए ही फेफडों को सतह प्रदान करती है।वृक्काणु का नलिकीय भाग मूत्र को मूत्रकोश तक ले भी जाता है।
In simple words: कूपिकाएँ (फेफड़ों में) गैसों (ऑक्सीजन और CO2) के विनिमय के लिए गुब्बारे जैसी संरचनाएं हैं, जबकि वृक्काणु (किडनी में) रक्त से अपशिष्ट छानने और मूत्र बनाने के लिए कप और नलिका जैसी संरचनाएं हैं। दोनों ही कार्य के लिए बड़ा सतही क्षेत्रफल प्रदान करते हैं।

🎯 Exam Tip: कूपिकाओं और वृक्काणुओं के बीच तुलना करते समय, उनकी संरचना, मुख्य कार्य (गैस विनिमय बनाम रक्त निस्पंदन) और दोनों द्वारा प्रदान किए गए बड़े सतही क्षेत्रफल पर ध्यान दें।

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