UP Board Solutions Class 10 Science Chapter 4 Carbon and Its Compounds

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Detailed Chapter 4 कार्बन और उसके यौगिक UP Board Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 4 कार्बन और उसके यौगिक UP Board Solutions PDF

पाठगत हल प्रश्न

NCERT In-Text Questions Solved

खंड 4.1 (पृष्ठ संख्या 68)

 

Question 1. CO2 सूत्रे वाले कार्बन डाइऑक्साइड की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी?
Answer: CO2 की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना निम्न आकृति में दर्शाई गई है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख कार्बन डाइऑक्साइड (\(CO_2\)) अणु की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना को दर्शाता है। इसमें एक केंद्रीय कार्बन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ दोहरे सहसंयोजक आबंध बनाता है। प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pairs) दिखाए गए हैं, और आबंध बनाने में प्रत्येक कार्बन-ऑक्सीजन जोड़े के बीच चार इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है, जो दोहरे आबंध को दर्शाती है।In simple words: कार्बन डाइऑक्साइड में, कार्बन केंद्रीय परमाणु होता है और दो ऑक्सीजन परमाणुओं से दोहरे आबंध से जुड़ा होता है। प्रत्येक परमाणु अपने बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉन साझा करके अपना अष्टक पूरा करता है।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाते समय केंद्रीय परमाणु और बाहरी परमाणुओं के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की सही संख्या दर्शाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. सल्फ़र के आठ परमाणुओं से बने सल्फर के अणु की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी? (संकेत- सल्फर के आठ परमाणु एक अँगूठी के रूप में आपस में जुड़े होते हैं।)
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख सल्फर के एक अणु (\(S_8\)) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना को दर्शाता है, जिसमें आठ सल्फर परमाणु एक मुकुट (crown) के आकार की अंगूठी में व्यवस्थित हैं। प्रत्येक सल्फर परमाणु दो अन्य सल्फर परमाणुओं के साथ एकल सहसंयोजक आबंध बनाता है। आरेख में, प्रत्येक सल्फर परमाणु पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और दो आबंध बनाने वाले इलेक्ट्रॉन युग्म दिखाए गए हैं, जो उसके बाहरी कोश में आठ इलेक्ट्रॉनों को पूरा करते हैं।In simple words: सल्फर का अणु आठ परमाणुओं से मिलकर बना होता है जो एक अंगूठी जैसी संरचना में होते हैं। प्रत्येक सल्फर परमाणु दो पड़ोसी परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन साझा करता है, जिससे एक स्थिर वलय बनता है।

🎯 Exam Tip: जटिल अणुओं की संरचनाओं में, जैसे कि S8, वलय या श्रृंखला के आकार को सही ढंग से दर्शाना और प्रत्येक परमाणु के लिए संयोजी इलेक्ट्रॉनों को पूरा करना महत्वपूर्ण है।

खंड 4.2 (पृष्ठ संख्या 76)

 

Question 1. पेन्टेन के लिए आप कितने संरचनात्मक समावयवों का चित्रण कर सकते हैं?
Answer: पेन्टेन के लिए तीन संरचनात्मक समावयवों का चित्रण संभव है, जिसे निम्न आकृति में दर्शाया गया है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख पेन्टेन (C5H12) के तीन संरचनात्मक समावयवों को दिखाता है: नॉर्मल पेन्टेन (एक सीधी श्रृंखला), आइसो पेन्टेन (एक शाखित श्रृंखला जिसमें एक कार्बन परमाणु केंद्रीय श्रृंखला से जुड़ा होता है), और नियो पेन्टेन (एक अत्यधिक शाखित श्रृंखला जिसमें एक केंद्रीय कार्बन परमाणु से चार अन्य कार्बन जुड़े होते हैं)। प्रत्येक संरचना में कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच के आबंधों को दर्शाया गया है, जिससे उनके अलग-अलग विन्यास स्पष्ट होते हैं।In simple words: पेन्टेन के तीन अलग-अलग संरचनात्मक रूप होते हैं, जिन्हें समावयव कहते हैं। ये संरचनाएं सीधी श्रृंखला, एक शाखा वाली श्रृंखला, और एक केंद्रीय कार्बन से जुड़ी चार शाखाओं के रूप में होती हैं।

🎯 Exam Tip: संरचनात्मक समावयवों को चित्रित करते समय, यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक संरचना का आणविक सूत्र समान हो लेकिन परमाणुओं की व्यवस्था अलग हो।

 

Question 2. कार्बन के दो गुणधर्म कौन से हैं, जिनके कारण हमारे चारों कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है?
Answer: कार्बन के वे दो गुणधर्म निम्न हैं, जिनके कारण चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है-
1. श्रृंखलन (Catenation)- कार्बन में कार्बन के दूसरे परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की क्षमता होती है जिससे बड़ी संख्या में अणु बनते हैं। इसी गुण के कारण सीधी श्रृंखला, शाखा श्रृंखला तथा वलयाकर श्रृंखला द्वारा बड़ी संख्या में यौगिकों का निर्माण होता है।
2. कार्बन की चतुःसंयोजकता- कार्बन की संयोजकता 4 है। इसमें चार अन्य कार्बन परमाणु या कुछ अन्य एक संयोजक तत्वों के परमाणुओं के साथ आबंधन की क्षमता होती है। ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, सल्फर, क्लोरीन तथा अनेक अन्य तत्वों के साथ कार्बन के यौगिक बनते हैं। इसके परिणामस्वरूप कार्बन यौगिक की संख्या विशाल होती है|In simple words: कार्बन की दो मुख्य विशेषताएं हैं: श्रृंखलन (अपने परमाणुओं से जुड़कर लंबी श्रृंखलाएं बनाना) और चतुःसंयोजकता (चार अन्य परमाणुओं से जुड़ने की क्षमता)। इन्हीं गुणों के कारण कार्बन के विभिन्न प्रकार के यौगिकों की एक बड़ी संख्या मौजूद है।

🎯 Exam Tip: श्रृंखलन और चतुःसंयोजकता कार्बन की अद्वितीय विशेषताएं हैं जो कार्बनिक रसायन विज्ञान की नींव बनाती हैं; इन्हें उदाहरणों के साथ याद रखना चाहिए।

 

Question 3. साइक्लोपेन्टेन का सूत्र तथा इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होंगे?
Answer: साइक्लोपेन्टेन का सूत्र – \(C_5H_{10}\) है। इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख साइक्लोपेन्टेन (\(C_5H_{10}\)) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना को दर्शाता है, जिसमें पांच कार्बन परमाणु एक वलय (ring) में व्यवस्थित होते हैं। प्रत्येक कार्बन परमाणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है और वलय में दो अन्य कार्बन परमाणुओं से एकल आबंध द्वारा जुड़ा होता है। इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और क्रॉस के रूप में दिखाया गया है, जो कार्बन-कार्बन और कार्बन-हाइड्रोजन आबंधों में साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों को प्रदर्शित करता है।In simple words: साइक्लोपेन्टेन का सूत्र \(C_5H_{10}\) है, जिसमें पांच कार्बन परमाणु एक चक्र बनाते हैं, और प्रत्येक कार्बन दो हाइड्रोजन से जुड़ा होता है।

🎯 Exam Tip: चक्रीय यौगिकों की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाते समय, सुनिश्चित करें कि वलय संरचना स्पष्ट हो और प्रत्येक कार्बन परमाणु की संयोजकता पूरी हो।

 

Question 4. निम्न यौगिकों की संरचनाएँ चित्रित कीजिए|
(i) एथेनॉइक अम्ल
(ii) ब्रोमोपेन्टेन*
(iii) ब्यूटेनोन
(iv) हेक्सेनैल
*क्या ब्रोमोपेन्टेन के संरचनात्मक समावयव संभव हैं?

Answer:
1. एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic acid) \(CH_3COOH\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना एथेनॉइक अम्ल के लिए है। इसमें एक केंद्रीय कार्बन परमाणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं और एक अन्य कार्बन परमाणु से जुड़ा है। दूसरा कार्बन परमाणु एक ऑक्सीजन से दोहरा आबंध बनाता है और एक हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह से एकल आबंध बनाता है। यह कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह को दर्शाता है।
2. ब्रोमो पेन्टेन (Bromopentane) \(C_5H_{11}Br\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना 1-ब्रोमोपेन्टेन को दर्शाती है, जहाँ पांच कार्बन परमाणुओं की एक सीधी श्रृंखला है और एक ब्रोमीन परमाणु श्रृंखला के पहले कार्बन परमाणु से जुड़ा है। प्रत्येक कार्बन परमाणु की संयोजकता को हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा पूरा किया गया है।
3. ब्यूटेनोन (Butanone) \(C_2H_5COCH_3\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना ब्यूटेनोन को दर्शाती है, जो एक कीटोन है। इसमें चार कार्बन परमाणुओं की एक श्रृंखला है, जहाँ दूसरे कार्बन परमाणु पर एक ऑक्सीजन परमाणु से दोहरा आबंध बनता है। बाकी संयोजकताओं को हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा पूरा किया गया है।
4. हेक्सेनैल (Hexanal) \([C_5H_{11}CHO]\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना हेक्सेनैल को दर्शाती है, जो एक ऐल्डिहाइड है। इसमें छह कार्बन परमाणुओं की एक सीधी श्रृंखला है, जहाँ श्रृंखला के अंत में एक कार्बन परमाणु एक हाइड्रोजन से और एक ऑक्सीजन से दोहरा आबंध बनाता है (ऐल्डिहाइड समूह)। बाकी संयोजकताओं को हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा पूरा किया गया है।
हाँ, ब्रोमोपेन्टेन के संरचनात्मक समावयव संभव हैं जो इस प्रकार हैं-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख ब्रोमोपेन्टेन के तीन संरचनात्मक समावयवों को दर्शाता है। पहली संरचना 1-ब्रोमोपेन्टेन है, जहाँ ब्रोमीन श्रृंखला के पहले कार्बन पर है। दूसरी संरचना 2-ब्रोमोपेन्टेन है, जहाँ ब्रोमीन दूसरे कार्बन पर है। तीसरी संरचना 3-ब्रोमोपेन्टेन है, जहाँ ब्रोमीन तीसरे कार्बन पर है। ये सभी संरचनाएं C5H11Br आणविक सूत्र को बनाए रखते हुए ब्रोमीन की स्थिति में भिन्नता दिखाती हैं।In simple words: एथेनॉइक अम्ल में एक कार्बोक्सिलिक समूह (-COOH) होता है, ब्रोमोपेन्टेन एक पांच कार्बन श्रृंखला पर ब्रोमीन परमाणु के साथ होता है, ब्यूटेनोन में एक कीटोन समूह (-CO-) होता है, और हेक्सेनैल में एक ऐल्डिहाइड समूह (-CHO) होता है। ब्रोमोपेन्टेन के कई रूप हो सकते हैं, जो ब्रोमीन की स्थिति पर निर्भर करते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार्यात्मक समूहों वाले यौगिकों की संरचनाएं बनाते समय, प्रत्येक समूह की विशिष्ट व्यवस्था और संयोजकता को सही ढंग से दर्शाना सुनिश्चित करें।

 

Question 5. निम्न यौगिकों का नामकरण कैसे करेंगे?
(i) \(CH_3-CH_2-Br\)
(ii) \(H-C=O\)
(iii) \(H-C-C-C-C=C-H\)

Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना एथिल ब्रोमाइड (ब्रोमोएथेन) को दर्शाती है, जिसमें दो कार्बन परमाणु एक एकल आबंध से जुड़े होते हैं, और एक ब्रोमीन परमाणु पहले कार्बन से जुड़ा होता है, जबकि अन्य संयोजकताओं को हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा पूरा किया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना मेथैनल (फॉर्मेल्डिहाइड) को दर्शाती है, जिसमें एक केंद्रीय कार्बन परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से दोहरा आबंध और दो हाइड्रोजन परमाणुओं से एकल आबंध बनाता है, जो एक ऐल्डिहाइड समूह की विशेषता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह संरचना 1-हेक्साइन (हेक्सा-1-आइन) को दर्शाती है, जिसमें छह कार्बन परमाणुओं की एक सीधी श्रृंखला होती है। श्रृंखला के पहले और दूसरे कार्बन परमाणुओं के बीच एक त्रि-आबंध मौजूद होता है, जो 'आइन' प्रत्यय को इंगित करता है, जबकि अन्य कार्बन परमाणुओं की संयोजकताओं को हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा पूरा किया जाता है।
1. ब्रोमो एथेन
2. मेथैनल (Methanal)
3. 1-हेक्साइन या हेक्साइनIn simple words: यौगिकों का नामकरण उनके कार्बन श्रृंखला की लंबाई और उनमें मौजूद प्रकार्यात्मक समूहों के आधार पर होता है। ब्रोमीन वाले दो कार्बन एथेन को ब्रोमो एथेन बनाते हैं, एक कार्बन और एक ऐल्डिहाइड समूह मेथैनल बनाता है, और छह कार्बन परमाणुओं की श्रृंखला में एक त्रि-आबंध वाला यौगिक हेक्साइन कहलाता है।

🎯 Exam Tip: कार्बनिक यौगिकों का नामकरण करते समय, सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें और प्रकार्यात्मक समूहों की उपस्थिति के आधार पर उपसर्ग और प्रत्यय सही ढंग से लागू करें।

खंड 4.3 (पृष्ठ संख्या 79)

 

Question 1. एथनॉल से एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
Answer: चूँकि क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (क्षारीय \(KMnO_4\)) अथवा अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट (\(K_2Cr_2O_7\)) एथनॉल को एथेनॉइक अम्ल में आक्सीकृत करते हैं अर्थात् ये प्रारंभिक पदार्थ में ऑक्सीजन जोड़ देते हैं, इसलिए इनको ऑक्सीकारक अभिक्रिया कहते हैं।
\[CH_3 - CH_2OH \xrightarrow{\text{क्षारीय } KMnO_4 \text{ + ऊष्मा}} CH_3COOH\]
या \[CH_3 - CH_2OH \xrightarrow{\text{अम्लीय } K_2Cr_2O_7 \text{ + ऊष्मा}} CH_3COOH\] (एथनॉल) (एथेनॉइक अम्ल)In simple words: एथनॉल से एथेनॉइक अम्ल में बदलने की प्रक्रिया ऑक्सीकरण कहलाती है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन जुड़ती है और यह ऑक्सीकारक अभिकर्मकों जैसे पोटैशियम परमैंगनेट या पोटैशियम डाइक्रोमेट की उपस्थिति में होती है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अभिक्रियाओं में ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना शामिल होता है; ऑक्सीकारक अभिकर्मक इन परिवर्तनों को सुगम बनाते हैं।

 

Question 2. ऑक्सीजन तथा एथाइन के मिश्रण का दहन वेल्डिंग के लिए किया जाता है। क्या आप बता सकते हैं कि एथाइन तथा वायु के मिश्रण का उपयोग क्यों नहीं किया जाता?
Answer: हम जानते हैं कि वायु में ऑक्सीजन की मात्रा केवल 21% है। अतः ऑक्सीजन की सीमित आपूर्ति के कारण एथाइन का अपूर्ण दहन होता है, जिसके कारण कज्जली ज्वाला (Sooty flame) निकलेगी तथा कम ऊष्मा उत्पन्न होगी। जबकि ऑक्सीजन मिश्रण के साथ पूर्ण दहन के कारण स्वच्छ नीली ज्वाला तथा अधिक ऊष्मा निकलेगी जो धातुओं को गलाकर वेल्डिग करने के लिए आवश्यक ऊष्मा प्रदान करेगी।In simple words: वेल्डिंग के लिए एथाइन को शुद्ध ऑक्सीजन के साथ जलाया जाता है क्योंकि इससे बहुत अधिक गर्मी वाली नीली लौ मिलती है। हवा में ऑक्सीजन कम होने के कारण, एथाइन को हवा के साथ जलाने पर कम गर्मी और काली धुएँ वाली लौ निकलती है, जो वेल्डिंग के लिए पर्याप्त नहीं होती।

🎯 Exam Tip: दहन की दक्षता ऑक्सीजन की उपलब्धता पर निर्भर करती है; पूर्ण दहन के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन आवश्यक है, जो उच्च ऊष्मा और स्वच्छ लौ देता है।

खंड 4.4 (पृष्ठ संख्या 83)

 

Question 1. प्रयोग द्वारा आप ऐल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल में कैसे अंतर कर सकते हैं?
Answer:
1. अम्ल का परीक्षण (Acid Test)- दो परखनलियाँ 'A' तथा 'B' लीजिए। एक में एल्कोहॉल तथा दूसरे में कार्बोक्सिलिक अम्ल लीजिए। अब दोनों परखनलियों में एक स्पैचुला भरकर \(NaHCO_3\) या \(Na_2CO_3\) डालिए । जिस परखनली में तेज़ बुदबुदाहट के साथ \(CO_2\) गैस निकलेगी, उसमें अम्ल होंगे।
2. ऐल्कोहॉल परीक्षण (Alcohol Test)- एक परखनली (A) में 3mL एथेनॉल लेते हैं और 5% क्षारीय पोटैशियम - परमैंगनेट उसमें एक-एक बूंद कर डालते हैं, जल ऊष्मक में गर्म करने पर पोटैशियम परमैंगनेट का रंग गायब हो जाता है, परंतु यही क्रिया एथेनॉइक अम्ल के साथ करने पर रंग अपरिवर्तित रहता है।In simple words: ऐल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल में अंतर करने के लिए, आप सोडियम बाइकार्बोनेट या कार्बोनेट के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं; कार्बोक्सिलिक अम्ल कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बुलबुले पैदा करेगा, जबकि ऐल्कोहॉल नहीं करेगा। इसके अतिरिक्त, क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट ऐल्कोहॉल का रंग बदल देगा लेकिन कार्बोक्सिलिक अम्ल का नहीं।

🎯 Exam Tip: कार्बोक्सिलिक अम्ल की अम्लीय प्रकृति की पहचान करने के लिए सोडियम बाइकार्बोनेट परीक्षण एक विश्वसनीय तरीका है, जो \(CO_2\) गैस के उत्सर्जन से पुष्टि होती है।

 

Question 2. ऑक्सीकारक क्या हैं?
Answer: ऑक्सीकारक वे पदार्थ होते हैं, जो ऑक्सीजन प्रदान करते हैं या हाइड्रोजन हटाकर उपचयित करते हैं। जैसे- अम्लीय \(K_2Cr_2O_7\) तथा क्षारीय \(KMnO_4\) ऑक्सीकारक हैं, जो एथेनॉल को ऑक्सीजन प्रदान कर एथेनॉइक अम्ल में बदल देता है। [अभिक्रिया के लिए खंड 4.3, का प्र०-1 देखें ।]In simple words: ऑक्सीकारक ऐसे रसायन होते हैं जो रासायनिक प्रतिक्रिया में दूसरे पदार्थ को ऑक्सीजन देते हैं या उससे हाइड्रोजन हटाते हैं, जिससे वह पदार्थ ऑक्सीकृत हो जाता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक अभिकर्मकों को याद रखें जैसे पोटैशियम परमैंगनेट (\(KMnO_4\)) और पोटैशियम डाइक्रोमेट (\(K_2Cr_2O_7\)) क्योंकि ये आमतौर पर कार्बनिक यौगिकों के ऑक्सीकरण में उपयोग होते हैं।

खंड 4.5 (पृष्ठ संख्या 85)

 

Question 1. क्या आप डिटरजेंट का उपयोग कर बता सकते हैं कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं?
Answer: नहीं क्योंकि डिटरजेंट (अपमार्जक) कठोर जल एवं मृदु जल दोनों के साथ आसानी से झाग बनाते हैं। अतएव जल की कठोरता की पहचान संभव नहीं होगी ।In simple words: नहीं, डिटरजेंट का उपयोग करके यह नहीं बताया जा सकता कि पानी कठोर है या नहीं, क्योंकि डिटरजेंट कठोर और मृदु दोनों प्रकार के पानी में आसानी से झाग पैदा करते हैं।

🎯 Exam Tip: साबुन के विपरीत, डिटरजेंट कठोर पानी में भी प्रभावी होते हैं क्योंकि वे कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ अविलेय स्कम नहीं बनाते हैं।

 

Question 2. लोग विभिन्न प्रकार से कपड़े धोते हैं। सामान्यतः साबुन लगाने के बाद लोग कपड़े को पत्थर पर पटकते हैं, डंडे से पीटते हैं, ब्रुश से रगड़ते हैं या वाशिंग मशीन से कपड़े रगड़े जाते हैं। कपड़ा साफ़ करने के लिए उसे रगड़ने की क्यों आवश्यकता होती है?
Answer: साबुन के अणु लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम एवं पोटैशियम लवण होते हैं। साबुन का आयनिक भाग जल में घुल जाता है, जबकि कार्बन श्रृंखला तेल में घुल जाती है। इस प्रकार साबुन के अणु मिसेली संरचना तैयार करते हैं। अणु का एक सिरा तेल कण की ओर तथा आयनिक सिरा बाहर की ओर होता है, जिसके कारण इमल्शन बनता है। जब कपड़ों को पत्थर पर पटकते हैं, रगड़ते हैं या डंडे से पीटते हैं तो तैलीय या ग्रीज मैल से युक्त मिसेल कपड़ों से हटकर पानी में चंली जाती है। अतः साबुन का मिसेल मैल को पानी में घुलाने में मदद करता है और कपड़े साफ हो जाते हैं।In simple words: कपड़े को रगड़ने या पीटने से मिसेल (साबुन और मैल के छोटे गोले) कपड़ों से अलग होकर पानी में चले जाते हैं, जिससे कपड़े साफ हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: साबुन के अणुओं की मिसेल संरचना को समझें- उनका जलरागी (पानी से प्यार करने वाला) सिरा और जलविरागी (पानी से नफरत करने वाला) सिरा मिलकर तेल और गंदगी को घेर लेते हैं, जिससे उन्हें हटाया जा सकता है।

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

NCERT Textbook Questions Solved

 

Question 1. एथेन का आणविक सूत्र-\(C_2H_6\) है। इसमें-
(a) 6 सहसंयोजक आबंध हैं।
(b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं ।
(c) 8 सहसंयोजक आबंध हैं।
(d) 9 सहसंयोजक आबंध हैं।

Answer: (b) 7 सहसंयोजक बंधन हैं।In simple words: एथेन (\(C_2H_6\)) में दो कार्बन परमाणुओं के बीच एक एकल आबंध होता है और प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे कुल सात सहसंयोजक आबंध बनते हैं (एक C-C और छह C-H आबंध)।

🎯 Exam Tip: सहसंयोजक आबंधों की संख्या गिनते समय, कार्बन-कार्बन और कार्बन-हाइड्रोजन दोनों आबंधों को ध्यान से गिनें।

 

Question 2. ब्यूटेनॉन चर्तु-कार्बन यौगिक है, जिसका प्रकार्यात्मक समूह
(a) कार्बोक्सिलिक अम्ल
(b) ऐल्डिहाइड
(C) कीटोन
(d) ऐल्कोहॉल

Answer: (C) कीटोनIn simple words: ब्यूटेनॉन एक चार-कार्बन वाला यौगिक है और इसका नाम 'ओन' प्रत्यय से समाप्त होता है, जो इंगित करता है कि इसका प्रकार्यात्मक समूह कीटोन है।

🎯 Exam Tip: कार्बनिक यौगिकों के नामकरण (आईयूपीएसी) को याद रखें; 'ओन' कीटोन के लिए, 'अल' ऐल्डिहाइड के लिए, 'ओइक अम्ल' कार्बोक्सिलिक अम्ल के लिए और 'ऑल' ऐल्कोहॉल के लिए होता है।

 

Question 3. खाना बनाते समय यदि बर्तन की तली बाहर से काली हो रही है, तो इसका मतलब है कि
(a) भोजन पूरी तरह नहीं पका है।
(b) ईंधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है।
(C) ईंधन आई है।
(d) ईंधन पूरी तरह से जल रहा है।

Answer: (b) ईधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है।In simple words: अगर खाना बनाते समय बर्तन की तली काली हो जाती है, तो इसका मतलब है कि ईंधन (जैसे एलपीजी) पूरी तरह से जल नहीं रहा है, जिससे कालिख बनती है।

🎯 Exam Tip: ईंधन के अपूर्ण दहन से कालिख (कार्बन कण) और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें बनती हैं, जो वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती हैं।

 

Question 4. \(CH_3Cl\) में आबंध निर्माण का उपयोग कर सहसंयोजक आबंध की प्रकृति समझाइए ।
Answer: \(CH_3Cl\) में तीन एकल बंध कार्बन व हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच जुड़े होते हैं और एक एकल बंध कार्बन व क्लोरीन के बीच होता है।
इस तरह कार्बन का अस्टक पूर्ण हो जाता है तथा प्रत्येक हाइड्रोजन के बाहरी कक्ष में भी 2 इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं तथा \(Cl\) का भी अष्टक पूर्ण हो जाता है। अतः इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा सहसंयोजक आबंध बनता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख क्लोरोमेथेन (\(CH_3Cl\)) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक केंद्रीय कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं और एक क्लोरीन परमाणु से एकल आबंध द्वारा जुड़ा होता है। हाइड्रोजन, कार्बन और क्लोरीन के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी को क्रॉस और बिंदुओं का उपयोग करके दिखाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रत्येक परमाणु अपने निकटतम उत्कृष्ट गैस विन्यास को प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनों को साझा करता है। क्लोरीन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी स्पष्ट रूप से दर्शाए गए हैं।In simple words: \(CH_3Cl\) में, कार्बन तीन हाइड्रोजन और एक क्लोरीन परमाणु के साथ इलेक्ट्रॉन साझा करता है, जिससे सहसंयोजक आबंध बनते हैं। इस साझेदारी के माध्यम से, सभी परमाणु अपने बाहरी कोशों में आवश्यक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके स्थिर हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: सहसंयोजक आबंध तब बनते हैं जब परमाणु अपने बाहरी कोशों को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं, और यह अक्सर गैर-धातुओं के बीच होता है।

 

Question 5. इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए|
(a) एथेनॉइक अम्ल.
(b) \(H_2S\)
(C) प्रोपेनोन
(d) \(F_2\)

Answer:
(a) एथेनॉइक अम्ल (\(CH_3COOH\))
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एथेनॉइक अम्ल (\(CH_3COOH\)) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना दर्शाता है। इसमें एक मिथाइल समूह (\(CH_3\)) है जो एक कार्बोक्सिलिक समूह (-COOH) से जुड़ा है। ऑक्सीजन और हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच साझा किए गए और एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों को दर्शाते हुए, इसमें एक कार्बन-ऑक्सीजन दोहरा आबंध और एक कार्बन-हाइड्रोजन, कार्बन-कार्बन और कार्बन-ऑक्सीजन एकल आबंध शामिल हैं। यह संरचना विभिन्न प्रकार से इलेक्ट्रॉनों को दर्शाती है, जिसमें डॉट्स और क्रॉस का उपयोग किया गया है।
(b) \(H_2S\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख हाइड्रोजन सल्फाइड (\(H_2S\)) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना को दर्शाता है। एक केंद्रीय सल्फर परमाणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं से एकल आबंध द्वारा जुड़ा हुआ है। सल्फर परमाणु पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी दिखाए गए हैं, जो उसके बाहरी कोश में आठ इलेक्ट्रॉनों को पूरा करते हैं।
(c) प्रोपेनोन
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख प्रोपेनोन (एसिटोन) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना को दर्शाता है। एक केंद्रीय कार्बन परमाणु दो मिथाइल समूहों (\(CH_3\)) और एक ऑक्सीजन परमाणु से दोहरा आबंध द्वारा जुड़ा हुआ है। प्रत्येक कार्बन-हाइड्रोजन, कार्बन-कार्बन, और कार्बन-ऑक्सीजन आबंध में साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों को बिंदुओं और क्रॉस का उपयोग करके दर्शाया गया है। ऑक्सीजन परमाणु पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी दिखाए गए हैं।
(d) \(F_2\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख फ्लोरीन अणु (\(F_2\)) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना को दर्शाता है, जिसमें दो फ्लोरीन परमाणु एक एकल सहसंयोजक आबंध द्वारा जुड़े होते हैं। प्रत्येक फ्लोरीन परमाणु पर तीन एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी दिखाए गए हैं, जो प्रत्येक परमाणु के बाहरी कोश में आठ इलेक्ट्रॉनों को पूरा करते हैं।In simple words: एथेनॉइक अम्ल में एक कार्बोक्सिलिक समूह होता है, \(H_2S\) में सल्फर दो हाइड्रोजन से जुड़ा होता है, प्रोपेनोन में एक केंद्रीय कार्बन से दोहरा आबंध द्वारा ऑक्सीजन और दो मिथाइल समूह जुड़े होते हैं, और \(F_2\) में दो फ्लोरीन परमाणु एक-दूसरे से एकल आबंध द्वारा जुड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाते समय, प्रत्येक परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की सही संख्या का उपयोग करना और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक परमाणु अपना अष्टक (या हाइड्रोजन के लिए डुप्लेट) पूरा कर रहा है।

 

Question 6. समजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण के साथ समझाइए ।
Answer: कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रेणी जिसकी संरचना तथा रासायनिक गुणों में समानता हो तथा किन्हीं दो लगातार यौगिकों के बीच (-CH2-) इकाई और आणविक द्रव्यमान में 14u का अंतर हो समजातीय श्रेणी कहलाता है।
- समजातीय श्रेणी को एक खास सामान्य सूत्र द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।
- इसमें एक ही प्रकार के प्रकार्यात्मक समूह होते हैं; जैसे- \(CH_3OH\), \(C_2H_5OH\), \(C_3H_7OH\) तथा \(C_4H_9OH\) के रासायनिक गुणधर्मों में अत्यधिक समानता है तथा इनमें (-CH2-) का अंतर है और (-OH) प्रकार्यात्मक समूह हैं । इन्हें \(C_nH_{2n+1}-OH\) सामान्य सूत्र द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।In simple words: समजातीय श्रेणी ऐसे कार्बनिक यौगिकों का समूह है जिनकी संरचना और रासायनिक गुण समान होते हैं, और किन्हीं भी दो लगातार सदस्यों के बीच एक \(CH_2\) समूह और 14u द्रव्यमान का अंतर होता है।

🎯 Exam Tip: समजातीय श्रेणी की मुख्य विशेषताओं को याद रखें: समान प्रकार्यात्मक समूह, समान सामान्य सूत्र, समान रासायनिक गुण, और लगातार सदस्यों के बीच एक \(-CH_2\) इकाई का अंतर।

 

Question 7. भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर एथनॉल एवं एथनॉइक अम्ल में आप कैसे अंतर करेंगे?
Answer:
(a) भौतिक गुणों में अंतर-

एथनॉल (\(C_2H_5OH\))एथेनॉइक अम्ल (\(CH_3COOH\))
1. इसका क्वथनांक (B.P.) 351K है।1. इसका क्वथनांक (B.P.) 391K है।
2. इसका गलनांक 156K है।2. इसका गलनांक 290K है।
3. इसमें एक विशिष्ट गंध (pleasant smell) होती है।3. इसका गंध तीक्ष्ण (Pungent smell) होता है।

(b) रासायनिक गुणों में अंतर
एथनॉलएथेनॉइक अम्ल
1. एथनॉल के साथ सोडियम कार्बोनेट (\(Na_2CO_3\)) और सोडियम बाइकार्बोनेट (\(NaHCO_3\)) की अभिक्रिया नहीं होती है।1. यह सोडियम कार्बोनेट (\(Na_2CO_3\)), और सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (\(NaHCO_3\)) के विलयन के साथ तीव्र बुदबुदाहट (Brisk effervescence) देते हैं, क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड गैस का निर्माण होता है।
2. लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं होता क्योंकि यह उदासीन पदार्थ है।2. यह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है। क्योंकि यह अम्लीय पदार्थ है।
3. इसमें क्षारीय \(KMnO_4\) डालने पर रंग गायब हो जाता है।3. इसमें क्षारीय \(KMnO_4\) डालने पर रंग गायब नहीं होता।
In simple words: एथनॉल और एथेनॉइक अम्ल को उनके क्वथनांक, गंध और रासायनिक प्रतिक्रियाओं से अलग किया जा सकता है। एथेनॉइक अम्ल सोडियम कार्बोनेट के साथ \(CO_2\) गैस उत्पन्न करता है और नीले लिटमस को लाल कर देता है, जबकि एथनॉल ऐसा नहीं करता।

🎯 Exam Tip: भौतिक और रासायनिक गुणों का उपयोग करके यौगिकों में अंतर करना एक सामान्य बोर्ड परीक्षा प्रश्न है; सोडियम बाइकार्बोनेट और लिटमस परीक्षण कार्बोक्सिलिक अम्ल की पहचान करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 8. जब साबुन को जल में डाला जाता है तो मिसेल का निर्माण क्यों होता है?
Answer: साबुन के अणु में दो भाग होते हैं
1. लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ - जल विरागी सिरा (Water repelling end) हाइड्रोकार्बन में विलेय
2. छोटा आयनिक सिरा - जलरागी सिरा (Water attracting end) जल में विलेय ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक साबुन के अणु को दर्शाता है जिसमें एक लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ (जल-विरागी) और एक आयनिक सिरा (जल-रागी) होता है। जब साबुन के अणु को पानी में डाला जाता है, तो जल-विरागी पूँछ पानी से दूर और जल-रागी आयनिक सिरा पानी की ओर उन्मुख होता है। यह व्यवस्था तेल की बूंदों को घेरने वाली मिसेल संरचना के निर्माण की ओर ले जाती है, जहाँ आयनिक सिरा बाहर की तरफ होता है और हाइड्रोकार्बन पूँछ अंदर की तरफ होती है।
साबुन के अणु साबुन का आयनिक भाग जल में घुल जाता है तथा जल के अंदर होता है, जबकि लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ जल के बाहर होती है। जल के अंदर इन अणुओं की एक विशेष व्यवस्था होती है, जिससे इसका हाइड्रोकार्बन सिरी जल के बाहर बना होता है। ऐसा अणुओं का बड़ा गुच्छा बनने के कारण होता है, जिसमें जलविरागी पूँछ गुच्छे के आंतरिक हिस्से में होती है जबकि उसको आयनिक सिरा गुच्छे की सतह पर होता है। इस संरचना को मिसेल कहते हैं।In simple words: साबुन के अणु के दो सिरे होते हैं - एक पानी को पसंद करने वाला और दूसरा पानी को नापसंद करने वाला। जब साबुन पानी में मिलता है, तो पानी को नापसंद करने वाले सिरे गंदगी के कणों को घेर लेते हैं और पानी को पसंद करने वाले सिरे बाहर की ओर रहते हैं, जिससे एक गोलाकार संरचना बनती है जिसे मिसेल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मिसेल संरचना साबुन की सफाई क्रिया का आधार है; जलविरागी पूँछ और जलरागी सिरों के कार्य को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में ईंधन के रूप में क्यों किया जाता है?
Answer: कार्बन तथा उसके यौगिकों के दहन पर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा प्राप्त होती है तथा उत्पन्न ऊष्मा को नियंत्रित ढंग से उपयोग किया जा सकता है। इसलिए अधिकतर अनुप्रयोगों के लिए कार्बन तथा इसके यौगिकों को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।In simple words: कार्बन और उसके यौगिकों का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है क्योंकि वे जलने पर बड़ी मात्रा में गर्मी पैदा करते हैं, और इस गर्मी को नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: कार्बनिक यौगिकों की उच्च कैलोरी मान और नियंत्रित दहन क्षमता उन्हें कुशल ईंधन बनाती है।

 

Question 10. कठोर जल को साबुन से उपचारित करने पर झाग के निर्माण को समझाइए ।
Answer: कठोर जल में कैल्शियम (\(Ca^{2+}\)) तथा मैग्नीशियम (\(Mg^{2+}\)) के सल्फेट तथा क्लोराइड के घुलनशील लवण होते हैं, जो साबुन से अभिक्रिया कर अघुलनशील पदार्थ (स्कम) बनाती है। इसी अघुलनशील पदार्थ (स्कम) के कारण झाग आसानी से नहीं बनता है तथा साबुन अधिक मात्रा में उपयोग करना पड़ता है। कठोर जल + साबुन - स्कमIn simple words: कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम आयन होते हैं जो साबुन के साथ मिलकर 'स्कम' नामक एक अघुलनशील पदार्थ बनाते हैं। यह स्कम झाग बनने से रोकता है, इसलिए कठोर जल में अधिक साबुन की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: साबुन की कठोर जल में अप्रभावीता को समझना महत्वपूर्ण है, जो जल में मौजूद धातु आयनों के साथ स्कम के निर्माण के कारण होता है।

 

Question 11. यदि आप लिटमस पत्र (लाल एवं नीला) से साबुन की जाँच करें, तो आपका प्रेक्षण क्या होगा?
Answer: हम जानते हैं कि साबुन की प्रकृति क्षारीय होती है। अतः लाल लिटमस पत्र को नीला कर देगा।In simple words: साबुन क्षारीय प्रकृति का होता है, इसलिए यह लाल लिटमस पेपर को नीला कर देगा।

🎯 Exam Tip: पदार्थों की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति का पता लगाने के लिए लिटमस पेपर एक सामान्य संकेतक है; याद रखें कि क्षारीय पदार्थ लाल लिटमस को नीला करते हैं।

 

Question 12. हाइड्रोजनीकरण क्या है? इसका औद्योगिक अनुप्रयोग क्या है?
Answer: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में पैलेडियम अथवा निकैल जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में हाइड्रोजन के योग से संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनता है, जिसे हाइड्रोजनीकरण कहते हैं। औद्योगिक अनुप्रयोग - असंतृप्त वसा (वनस्पति तेलों) के हाइड्रोजनीकरण से वनस्पति घी (संतृप्त वसा) बनाया जाता है।
\[\text{वनस्पति तेल} + H_2 \xrightarrow{\text{Ni} \\ 473K} \text{वनस्पति घी}\] (जैसे मूँगफली का तेल एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) (जैसे डालडा, रथ एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन)In simple words: हाइड्रोजनीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन को जोड़ा जाता है, जिससे वे संतृप्त हाइड्रोकार्बन बन जाते हैं। इसका उपयोग वनस्पति तेलों को वनस्पति घी (डालडा) में बदलने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजनीकरण एक महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रक्रिया है जिसका उपयोग असंतृप्त तेलों को संतृप्त वसा में परिवर्तित करके उनके शेल्फ जीवन को बढ़ाने के लिए किया जाता है, निकैल एक सामान्य उत्प्रेरक है।

 

Question 13. दिए गए हाइड्रोकार्बन – \(C_2H_6 C_3H_8, C_3H_6 C_2H_2\) एवं \(CH_4\) में किसमें संकलन अभिक्रिया होती है?
Answer: दिए गए हाइड्रोकार्बनों में से \(C_3H_6\) तथा \(C_2H_2\) के साथ संकलन (योग) अभिक्रिया होती है क्योंकि ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख प्रोपीन (\(C_3H_6\)) और एथाइन (\(C_2H_2\)) की संरचनाओं को दर्शाता है। प्रोपीन में एक कार्बन-कार्बन दोहरा आबंध होता है, जबकि एथाइन में एक कार्बन-कार्बन त्रि-आबंध होता है। ये दोनों संरचनाएं स्पष्ट रूप से उनके असंतृप्त स्वभाव को दिखाती हैं, जो संकलन अभिक्रियाओं की संभावना का संकेत देता है।In simple words: संकलन अभिक्रियाएं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में होती हैं, जिनमें दोहरा या त्रि-आबंध होता है। दिए गए यौगिकों में से, \(C_3H_6\) (प्रोपीन) में दोहरा आबंध और \(C_2H_2\) (एथाइन) में त्रि-आबंध होता है, इसलिए इनमें संकलन अभिक्रियाएं होंगी।

🎯 Exam Tip: संकलन अभिक्रियाएं केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन और एल्काइन) में होती हैं, क्योंकि उनमें अतिरिक्त परमाणु जोड़ने के लिए खाली आबंध स्थान होते हैं। संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) ये अभिक्रियाएं नहीं दिखाते।

 

Question 14. मक्खन एवं खाना बनाने वाले तेल के बीच रासायनिक अंतर समझने के लिए एक परीक्षण बताइए।
Answer: मक्खन एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन है जबकि खाना बनाने वाला तेल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है। परीक्षण-
1. ब्रोमीन जल द्वारा- दो अलग-अलग परखनली लेकर एक में तेल तथा दूसरे में मक्खन लीजिए। दोनों परखनलियों ' में ब्रोमीन जल की कुछ बूंदें डालिए। दोनों परखनलियों को धीरे-धीरे गर्म करने पर हम पाते हैं कि तेल वाले परखनली में ब्रोमीन जल का रंग उड़ जाता है।
2. क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट द्वारा-In simple words: मक्खन और खाना पकाने के तेल में अंतर करने के लिए, आप ब्रोमीन जल परीक्षण का उपयोग कर सकते हैं। ब्रोमीन जल को तेल में मिलाने पर उसका रंग उड़ जाएगा (क्योंकि यह असंतृप्त होता है), जबकि मक्खन (जो संतृप्त होता है) में रंग वैसा ही रहेगा।

🎯 Exam Tip: ब्रोमीन जल परीक्षण कार्बनिक यौगिकों में असंतृप्तता का पता लगाने का एक मानक तरीका है; ब्रोमीन का लाल-भूरा रंग गायब हो जाना दोहरा या त्रि-आबंध की उपस्थिति को दर्शाता है।

 

Question 15. साबुन की सफ़ाई प्रक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।।
Answer: साबुन के अणु लंबी श्रृंखला वाले वसीय अम्लों के सोडियम लवण होते हैं, जिसमें दो भाग होते हैं- लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ तथा छोटी आयनिक सिरा। उदाहरण के लिए- \(C_{15}H_{31}COONa\), \(C_{17}H_{33}COONa\) आदि
इसे हम निम्न प्रकार भी दर्शाते हैं-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख साबुन के अणु की संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ (जलविरागी सिरा) और एक ध्रुवीय आयनिक सिरा (-COO⁻Na⁺, जलरागी सिरा) होता है। जब साबुन को पानी में मिलाया जाता है, तो ये अणु गंदगी या तेल की बूंदों को घेरने के लिए मिसेल बनाते हैं, जहाँ जलविरागी पूँछ अंदर की तरफ होती है और जलरागी सिरा बाहर की तरफ होता है, जिससे मैल पानी में घुलनशील हो जाता है।
साबुन घोला जाता है, तब जलरागी सिरा जल में घुलनशील तथा जल विरागी सिरा जल में अघुलनशील परंतु तैलीय मैल, वसा इत्यादि में घुलनशील होते हैं। किसी कपड़े या वस्तु पर साबुन के अणु इस प्रकार व्यवस्थित हो जाते हैं कि इनका आयनिक सिरा जल के अंदर तथा हाइड्रोकार्बन पूँछ जल के बाहर होती है। ऐसा अणुओं का बेड़ा गुच्छा बनने के कारण होता है, जिसमें जल विरागी पूँछ गुच्छे के आंतरिक हिस्से में होती है, जबकि उसका आयनिक सिरा गुच्छे की सतह पर होता है। इस संरचना को मिसेल कहते हैं। तैलीय मैल मिसेल के केन्द्र में एकत्र हो जाता है। मिसेल विलयन में कोलॉइड के रूप में बना रहता है तथा आयन-आयन विकर्षण के कारण वह अवक्षेपित नहीं होता। अतः मिसेल में तैरता मैल रगड़ कर यो डंडे से पीटकर आसानी से हटाया जा सकता है। [देखिए चित्र (4.4)]In simple words: साबुन के अणुओं में एक पानी-पसंद करने वाला और एक तेल-पसंद करने वाला हिस्सा होता है। पानी में, ये अणु तेल या गंदगी को घेरकर मिसेल बनाते हैं, जिससे तेल-पसंद करने वाले हिस्से गंदगी के अंदर और पानी-पसंद करने वाले हिस्से बाहर की तरफ होते हैं। रगड़ने या पीटने से ये मिसेल कपड़े से हटकर पानी में चले जाते हैं, जिससे सफाई होती है।

🎯 Exam Tip: साबुन की सफाई क्रिया में मिसेल का निर्माण केंद्रीय अवधारणा है। साबुन के अणु के जलरागी (hydrophilic) और जलविरागी (hydrophobic) भागों की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।

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