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Detailed Chapter 3 धातुएँ और अधातुएँ UP Board Solutions for Class 10 Science
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Class 10 Science Chapter 3 धातुएँ और अधातुएँ UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 3 Metals and Non-metals (धातु और अधातु)
पाठगत हल प्रश्न
[NCERT IN-TEXT QUESTIONS SOLVED]
खंड 3.1 (पृष्ठ संख्या 45)
Question 1. ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो
(i) कमरे के ताप पर द्रव होती है।
(ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
(iii) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है।
(iv) ऊष्मा की कुचालक होती है।
Answer:
(i) मर्करी (Hg)
(ii) सोडियम (Na) लीथियम और पोटैशियम
(iii) सिल्वर तथा कॉपर
(iv) लेड तथा मर्करी
In simple words: कमरे के तापमान पर द्रव धातु मर्करी है, सोडियम, लीथियम और पोटैशियम इतनी नरम होती हैं कि इन्हें चाकू से काटा जा सकता है। सिल्वर और कॉपर ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक हैं, जबकि लेड और मर्करी ऊष्मा के कुचालक होते हैं।
🎯 Exam Tip: धातुओं के विशिष्ट गुणों को उनके रासायनिक प्रतीकों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये प्रश्न सीधे पहचानने और उनके अनुप्रयोगों पर आधारित होते हैं।
Question 2. आघातवर्थ्य तथा तन्य का अर्थ बताइए।
Answer: कुछ धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है। इस गुणधर्म को आघातवर्ध्यता कहते हैं। सोना (Au) तथा चाँदी (Ag) सबसे अधिक आघातवर्थ्य धातुएँ हैं। धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहा जाता है। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है।
In simple words: आघातवर्ध्यता धातुओं का वह गुण है जिससे उन्हें पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है, और तन्यता वह गुण है जिससे धातुओं को खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: आघातवर्ध्यता और तन्यता धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण हैं। इनके उदाहरणों के साथ स्पष्ट परिभाषाएँ देना परीक्षा में अच्छे अंक दिला सकता है।
खंड 3.2 (पृष्ठ संख्या 51)
Question 1. सोडियम को केरोसिन में डुबोकर क्यों रखा जाता है?
Answer: सोडियम और पोटैशियम अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ हैं। इनमें वायु के साथ अभिक्रिया कर आग पकड़ लेती है। ये ठंडे जल के साथ भी ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करती हैं और इससे उत्सर्जित \(H_2\) गैस प्रज्वलित हो जाती है। इसलिए इन्हें सुरक्षित रखने तथा आकस्मिक आग को रोकने के लिए केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है।
In simple words: सोडियम और पोटैशियम जैसी धातुएँ हवा और पानी दोनों से बहुत तेज़ी से क्रिया करती हैं और आग पकड़ सकती हैं, इसलिए उन्हें केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है ताकि वे इन तत्वों के संपर्क में न आएं।
🎯 Exam Tip: उच्च अभिक्रियाशील धातुओं के भंडारण और सुरक्षा उपायों से संबंधित प्रश्नों में उनके रासायनिक व्यवहार को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए-
(i) भाप के साथ आयरन
(ii) जल के साथ कैल्शियम तथा पोटैशियम
Answer:
1. भाप के साथ आयरन अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन प्रदान करती है।
2. जल के साथ Ca तथा K की अभिक्रिया- जल के साथ Ca की अभिक्रिया थोड़ी धीमी होती है।
पोटैशियम के साथ तेज़ तथा ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है।
In simple words: आयरन भाप के साथ क्रिया करके आयरन ऑक्साइड और हाइड्रोजन बनाता है, जबकि कैल्शियम और पोटैशियम जल के साथ क्रिया करके धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस छोड़ते हैं, जहाँ पोटैशियम की अभिक्रिया अधिक तीव्र होती है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना और उत्पादों को सही ढंग से लिखना महत्वपूर्ण है। अभिक्रिया की गति और प्रकृति (ऊष्माक्षेपी) का उल्लेख अतिरिक्त अंक दिला सकता है।
Question 3. A, B, C एवं D चार धातुओं के नमूनों को लेकर एक-एक करके निम्न विलयन में डाला गया। इससे प्राप्त परिणाम को निम्न प्रकार से सारणीबद्ध किया गया है।
| धातु | आयरन (II) सल्फेट | कॉपर (II) सल्फेट | जिंक सल्फेट | सिल्वर नाइट्रेट |
| A | कोई अभिक्रिया नहीं | विस्थापन | कोई अभिक्रिया नहीं | - |
| B | विस्थापन | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं | विस्थापन |
| C | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं |
| D | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं |
इस सारणी का उपयोग कर धातु A, B, C एवं D के संबंध में निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए |
(i) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन-सी है?
(ii) धातु B को कॉपर (II) सल्फेट के विलयन में डाला जाए तो क्या होगा?
(iii) धातु A, B, C एवं D को अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए ।
Answer:
1. 'B' सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
2. कॉपर सल्फेट का नीला रंग गायब हो जाता है तथा लालिमायुक्त भूरे (Reddish brown) रंग की कॉपर की
3. अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम हैं- \(B > A > C > D\)
In simple words: दी गई तालिका से, धातु B सबसे अधिक अभिक्रियाशील है क्योंकि यह आयरन (II) सल्फेट को विस्थापित करती है, जबकि धातु D सबसे कम अभिक्रियाशील है क्योंकि यह किसी को विस्थापित नहीं करती। यदि धातु B को कॉपर (II) सल्फेट में डाला जाए, तो यह कॉपर को विस्थापित कर देगी, जिससे विलयन का नीला रंग गायब हो जाएगा और भूरा कॉपर अवक्षेपित होगा।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाओं के आधार पर धातुओं की अभिक्रियाशीलता को समझने और क्रमबद्ध करने की क्षमता महत्वपूर्ण है। तालिका से जानकारी को सही ढंग से पढ़ना और निष्कर्ष निकालना आवश्यक है।
Question 4. अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है, तो कौन-सी गैस निकलती है? आयरन के साथ तनु \(H_2SO_4\) की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
Answer: जब अभिक्रियाशील धातु को तनु HCL अम्ल में डाला जाता है, तो हाइड्रोजन गैस निकलती है। क्योंकि, अभिक्रियाशील धातुएँ अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं।
In simple words: जब एक अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है, तो हाइड्रोजन गैस निकलती है क्योंकि धातुएँ अम्ल में से हाइड्रोजन को हटा देती हैं।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि केवल हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ ही अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती हैं। रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना और उत्पादों को पहचानना भी आवश्यक है।
Question 5. जिंक की आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होता है? इसकी रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
Answer: जब जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डाला जाता है, तो इसका हरा रंग धीरे-धीरे मलीन हो जाता है। तथा विलयन रंगहीन जिंक सल्फेट बनता है। काले-भूरे रंग के आयरन धातु विस्थापित हो जाती है क्योंकि Zn, Fe से अधिक क्रियाशील है।
In simple words: जब जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में मिलाया जाता है, तो जिंक आयरन को विस्थापित कर देता है क्योंकि जिंक आयरन से अधिक क्रियाशील है, जिससे हरा रंग फीका पड़ जाता है और रंगहीन जिंक सल्फेट विलयन बनता है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाओं में, अधिक क्रियाशील धातु हमेशा कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित करती है। उत्पादों के रंग परिवर्तन का उल्लेख करना आपकी समझ को दर्शाता है।
खंड 3.3 (पृष्ठ संख्या 54)
Question 1. (i) सोडियम, ऑक्सीजन एवं मैग्नीशियम के लिए इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना लिखिए।
(ii) इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण द्वारा \(Na_2O\) एवं MgO को निर्माण दर्शाइए ।
(iii) इने यौगिकों में कौन-से आयन उपस्थित हैं?
Answer:
(i) सोडियम- Na .
2,8,1
ऑक्सीजन- O :
2,6
मैग्नीशियम - Mg .
2, 8, 2
(ii) (a) Na . → [Na+]
O :
Na . → [Na+]
Question 2. आयनिक यौगिक का गलनांक उच्च क्यों होता है?
Answer: आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च इसलिए होता है, क्योंकि इनके आयनों के बीच मजबूत अंतर-आकर्षण बल होता है, जिसे तोड़ने के लिए ऊर्जा की पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता होती है।
In simple words: आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च होता है क्योंकि उनके आयनों के बीच बहुत मजबूत आकर्षण बल होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए बहुत ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक के पीछे का कारण आयनों के बीच मजबूत स्थिरवैद्युत आकर्षण बल है। इसे स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
खंड 3.4 (पृष्ठ संख्या 59)
Question 1. निम्न पदों की परिभाषा दीजिए
(i) खनिज
(ii) अयस्क
(iii) गैंग
Answer:
1. खनिज (Minerals)- धातुओं के वे तत्व या यौगिक जो भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, जिनमें कुछ अन्य पदार्थ; जैसे-मृदा, रेत, चूना पत्थर मिले होते हैं, उन्हें खनिज कहा जाता है।
2. अयस्क (Ore)- जिस खनिज से धातु कम खर्चे पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है, उसे अयस्क कहते हैं।
3. गैंग (gangue)- पृथ्वी से खनित अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ होती हैं, जिन्हें गैंग कहते हैं।
In simple words: खनिज पृथ्वी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक तत्व या यौगिक होते हैं; अयस्क वे खनिज होते हैं जिनसे धातुओं को लाभप्रद तरीके से निकाला जा सकता है; और गैंग अयस्कों के साथ मिली हुई अवांछित अशुद्धियाँ हैं।
🎯 Exam Tip: खनिज, अयस्क और गैंग की परिभाषाएँ स्पष्ट और सटीक होनी चाहिए, खासकर उनके अंतर पर ध्यान दें कि सभी खनिज अयस्क नहीं होते, लेकिन सभी अयस्क खनिज होते हैं।
Question 2. दो धातुओं के नाम बताइए जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।
Answer: सोना और प्लैटिनम धातु मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।
In simple words: सोना और प्लैटिनम जैसी धातुएँ प्रकृति में शुद्ध रूप में पाई जाती हैं क्योंकि वे बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं।
🎯 Exam Tip: मुक्त अवस्था में पाई जाने वाली धातुएँ आमतौर पर कम अभिक्रियाशील होती हैं। इनके उदाहरणों को याद रखना सीधे प्रश्न के उत्तर में सहायक होता है।
Question 3. धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
Answer: अपचयन (Reduction) प्रक्रम का उपयोग किया जाता है। कार्बन के अलावा अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ; जैसे-Na, Ca, Al आदि को अपचायक के रूप में उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि ये निम्न अभिक्रियाशीलता वाले धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर देते हैं। उदाहरण के लिए-
\(3MnO_2(s) + 4Al(s) → 3Mn(I) + 2Al_2O_3(s) + ऊष्मा\)
In simple words: धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए अपचयन विधि का उपयोग किया जाता है, जिसमें ऑक्सीजन को धातु से अलग किया जाता है, अक्सर कार्बन या अन्य अभिक्रियाशील धातुओं का उपयोग करके।
🎯 Exam Tip: अपचयन प्रक्रिया में, ऑक्सीजन को हटाकर धातु प्राप्त की जाती है। उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ स्वयं अपचायक के रूप में कार्य कर सकती हैं। रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना महत्वपूर्ण है।
खण्ड 3.5 (पृष्ठ संख्या 61)
Question 1. जिंकमैग्नीशियम एवं कॉपर के धात्विक ऑक्साइडों को निम्न धातुओं के साथ गर्म किया गया-
| धातु | जिंक | मैग्नीशियम | कॉपर |
| जिंक ऑक्साइड | |||
| मैग्नीशियम ऑक्साइड | |||
| कॉपर ऑक्साइड |
किस स्थिति में विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी?
Answer:
| धातु | जिंक | मैग्नीशियम | कॉपर |
| जिंक ऑक्साइड | नहीं | हाँ | नहीं |
| मैग्नीशियम ऑक्साइड | नहीं | नहीं | नहीं |
| कॉपर ऑक्साइड | हाँ | हाँ | नहीं |
कारण- क्योंकि अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ ही कम अभिक्रियाशील धातुओं को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती हैं।
In simple words: विस्थापन अभिक्रिया तब होगी जब गर्म की जाने वाली धातु, ऑक्साइड में मौजूद धातु की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील हो। इस तालिका में, मैग्नीशियम जिंक ऑक्साइड और कॉपर ऑक्साइड को विस्थापित करेगा, और जिंक केवल कॉपर ऑक्साइड को विस्थापित करेगा, जबकि कॉपर किसी भी ऑक्साइड को विस्थापित नहीं करेगा।
🎯 Exam Tip: अभिक्रियाशीलता श्रेणी को समझना इस प्रकार के प्रश्नों को हल करने की कुंजी है। अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ हमेशा कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित करती हैं।
Question 2. कौन-सी धातु आसानी से संक्षारित नहीं होती है?
Answer: सक्रियता श्रेणी के नीचे स्थित सबसे कम अभिक्रियाशील धातुएँ- सिल्वर (Ag), सोना (Au) और प्लेटिनम (Pt) | वायुमंडलीय गैसों से अभिक्रिया नहीं करती हैं, इसलिए संक्षारित नहीं होती हैं।
In simple words: सोना, सिल्वर और प्लेटिनम जैसी कम अभिक्रियाशील धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होतीं क्योंकि वे हवा और नमी से क्रिया नहीं करतीं।
🎯 Exam Tip: निष्क्रिय धातुएँ जैसे सोना, चाँदी और प्लेटिनम वायुमंडलीय कारकों के प्रति प्रतिरोधक होती हैं, इसलिए वे आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं। सक्रियता श्रेणी में उनकी स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. मिश्रधातु क्या होती हैं?
Answer: दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु या एक अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं; जैसे-काँसा (Cu एवं Sn), इस्पात (C एवं Fe) आदि ।
In simple words: मिश्रधातु दो या दो से अधिक धातुओं, या एक धातु और एक अधातु का एक समान मिश्रण होती है, जिसे बेहतर गुणधर्मों के लिए बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: मिश्रधातु की परिभाषा के साथ उदाहरण देना महत्वपूर्ण है। यह भी याद रखें कि मिश्रधातुएँ उनके घटक धातुओं से बेहतर या विशिष्ट गुण प्रदर्शित करती हैं।
पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न
[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]
Question 1. निम्न में कौन-सा युगल विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है
(a) NaCl विलयन एवं कॉपर धातु
(b) \(MgCl_2\) विलयन एव ऐलुमिनियम धातु
(C) \(FeSO_4\) विलयन एवं सिल्वर धातु
(d) \(AgNO_3\) विलयन एवं कॉपर धातु
Answer: (d) \(AgNO_3\) विलयन एवं कॉपर धातु
In simple words: कॉपर धातु, सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर को विस्थापित करेगी क्योंकि कॉपर सिल्वर से अधिक अभिक्रियाशील है, जिससे विस्थापन अभिक्रिया होगी।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाओं के लिए सक्रियता श्रेणी का ज्ञान आवश्यक है। केवल अधिक अभिक्रियाशील धातु ही कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती है।
Question 2. लोहे के फ्राइंग पैन (frying pan) को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन-सी विधि उपयुक्त है?
(a) ग्रीज लगाकर
(b) पेंट लगाकर
(C) जिंक की परत चढ़ाकर
(d) सभी
Answer: (c) जिंक की परत चढ़ाकर
In simple words: लोहे के फ्राइंग पैन को जंग से बचाने के लिए जिंक की परत चढ़ाना सबसे उपयुक्त विधि है क्योंकि यह एक टिकाऊ सुरक्षा प्रदान करती है जिसे गैल्वनीकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: गैल्वनीकरण लोहे को जंग से बचाने का एक प्रभावी तरीका है, विशेषकर उन वस्तुओं के लिए जो ऊष्मा के संपर्क में आती हैं जैसे फ्राइंग पैन, जहाँ ग्रीस या पेंट स्थायी समाधान नहीं होते।
Question 3. कोई धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला यौगिक निर्मित करती है यह यौगिक जल में विलेय है। यह तत्व क्या हो सकता है?
(a) कैल्शियम
(b) कार्बन
(c) सिलिकन
(d) लोहा
Answer: (a) कैल्शियम
In simple words: कैल्शियम ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके कैल्शियम ऑक्साइड बनाता है, जिसका गलनांक उच्च होता है और यह जल में विलेय होता है, अन्य विकल्प इन गुणों को पूरा नहीं करते।
🎯 Exam Tip: धातुओं के ऑक्साइड आमतौर पर आयनिक होते हैं, उच्च गलनांक वाले होते हैं, और उनमें से कुछ जल में विलेय होते हैं (क्षार बनाते हैं)। इन गुणों का संयोजन सही धातु की पहचान में मदद करता है।
Question 4. खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर जिंक की बजाय टिन का लेप होता है, क्योंकि
(a) टिन की अपेक्षा जिंक महँगा है।
(b) टिन की अपेक्षा जिंक का गलनांक अधिक है।
(C) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।
(d) टिन की अपेक्षा जिंक कम अभिक्रियाशील है।
Answer: (c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।
In simple words: खाद्य डिब्बों पर टिन का लेप इसलिए किया जाता है क्योंकि टिन जिंक की तुलना में कम अभिक्रियाशील होता है, जिससे यह खाद्य पदार्थों के साथ क्रिया नहीं करता और उन्हें सुरक्षित रखता है।
🎯 Exam Tip: खाद्य संरक्षण के लिए धातु की अभिक्रियाशीलता एक महत्वपूर्ण कारक है। कम अभिक्रियाशील धातुएँ खाद्य पदार्थों के साथ अवांछित प्रतिक्रियाओं को रोकती हैं।
Question 5. आपको एक हथौड़ा, बैट्री, बल्ब, तार एवं स्विच दिया गया है-
(a) इनका उपयोग कर धातुओं एवं अधातुओं के नमूनों के बीच आप विभेद कैसे कर सकते हैं?
(b) धातुओं एवं अधातुओं में विभेदन के लिए इन परीक्षणों की उपयोगिताओं का आकलन कीजिए।
Answer:
(a)
• हथौड़े से पीटकर- धातु की पतली चादर प्राप्त होती है, जबकि अधातु भंगुर होती हैं अतः छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाएँगी।
• विद्युत परिपथ द्वारा- सर्वप्रथम बल्ब, बैट्री, तार तथा स्विच का उपयोग कर निम्न परिपथ बनाइए। इसके बाद बारी-बारी से धातुओं और अधातुओं के दिए गए नमूनों को विद्युत परिपथ के क्लिप में लगाकर स्विच को ऑन करते हैं। हम पाते हैं कि धातुओं की स्थिति में बल्ब जलने लगता है, जबकि अधातुओं के साथ बल्ब नहीं जलता है।
(b) परीक्षण
ज्यादा उपयुक्त तरीका है क्योंकि ग्रेफाइट एक अधातु है, परंतु विद्युत का सुचालक है इसलिए | इसके साथ भी बल्ब जलने लगेगा लेकिन सभी अधातुएँ भंगुर होती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक साधारण विद्युत परिपथ को दर्शाता है जिसका उपयोग धातुओं और अधातुओं के बीच चालकता के आधार पर अंतर करने के लिए किया जाता है। इसमें एक बैटरी, एक स्विच, एक बल्ब और दो क्लिप (A और B) होते हैं, जिनके बीच परीक्षण के लिए धातु या अधातु का नमूना रखा जाता है। यदि नमूना धातु है, तो बल्ब जलेगा; यदि अधातु है, तो बल्ब नहीं जलेगा।
In simple words: धातुओं को हथौड़े से पीटने पर वे पतली चादर में बदल जाती हैं, जबकि अधातुएँ टूट जाती हैं। विद्युत परिपथ का उपयोग करके, धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं और बल्ब को जलाती हैं, जबकि अधातुएँ कुचालक होती हैं।
🎯 Exam Tip: धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणों (आघातवर्ध्यता, तन्यता, चालकता) का उपयोग करके विभेद करना महत्वपूर्ण है। ग्रेफाइट जैसी अधातुओं के अपवादों पर ध्यान दें।
Question 6. उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दीजिए।
Answer: ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल प्रदान करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।
उदाहरण- ऐलुमीनियम ऑक्साइड \((Al_2O_3)\) और जिंक ऑक्साइड (ZnO)
In simple words: उभयधर्मी ऑक्साइड वे धातु ऑक्साइड होते हैं जो अम्ल और क्षारक दोनों के साथ क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, जैसे ऐलुमीनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड।
🎯 Exam Tip: उभयधर्मी ऑक्साइड की परिभाषा और उनके कम से कम दो उदाहरण याद रखना महत्वपूर्ण है। यह गुण कुछ धातुओं के विशेष रासायनिक व्यवहार को दर्शाता है।
Question 7. दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगी, तथा दो धातुएँ जो ऐसा नहीं कर सकती हैं।
Answer: मैग्नीशियम (Mg) और कैल्शियम (Ca) धातुएँ तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगी जबकि कॉपर (Cu) और सिल्वर (Ag) धातुएँ हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर पाएँगी, क्योंकि ये धातुएँ हाइड्रोजन से कम अभिक्रियाशील हैं।
In simple words: मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसी धातुएँ तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती हैं क्योंकि वे हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील हैं, जबकि कॉपर और सिल्वर ऐसा नहीं कर सकतीं क्योंकि वे हाइड्रोजन से कम अभिक्रियाशील हैं।
🎯 Exam Tip: धातुओं की सक्रियता श्रेणी को अच्छी तरह समझना चाहिए ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कौन-सी धातुएँ अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती हैं।
Question 8. किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप एनोड, कैथोड । एवं विद्युत अपघटय किसे बनाएँगे?
Answer: धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण के लिए-
अशुद्ध धातु M का → एनोड
शुद्ध धातु M की पतली पट्टी → कैथोड
विद्युत अपघट्य → M धातु का अम्लीकृत लवण विलयन
In simple words: धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में, अशुद्ध धातु M को एनोड बनाया जाता है, शुद्ध धातु M की पतली पट्टी को कैथोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, और M धातु के लवण का अम्लीकृत विलयन विद्युत अपघट्य के रूप में कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: विद्युत अपघटनी परिष्करण की प्रक्रिया में, एनोड, कैथोड और विद्युत अपघट्य की सही पहचान महत्वपूर्ण है। यह प्रक्रिया धातुओं को शुद्ध करने के लिए उपयोग की जाती है।
Question 9. प्रत्यूष ने सल्फर चूर्ण को स्पैचुला में लेकर उसे गर्म किया। चित्र के अनुसार एक परखनली को उलटा करके उसने उत्सर्जित गैस को एकत्र किया
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख एक प्रयोग को दर्शाता है जिसमें सल्फर चूर्ण को एक स्पैचुला में गर्म किया जा रहा है, और उससे निकलने वाली गैस को एक उल्टी परखनली का उपयोग करके एकत्र किया जा रहा है। एक बर्नर स्पैचुला को गर्म करने के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे सल्फर जलता है और गैस परखनली में जमा होती है।
(a) गैस की क्रिया क्या होगी
(i) सूखे लिटमस पत्र पर?
(ii) आई लिटमस पत्र पर?
(b) ऊपर की अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
(a)
• सूखे लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
• आर्द्र लिटमस पत्र पर प्रभाव पड़ता है। नीले रंग के आर्द्र लिटमस पत्र का रंग बदलकर लाल हो जाता है।
(b)
• \(S + O_2 → SO_2\) सल्फर डाइऑक्साइड
• \(SO_2 + H_2O → H_2SO_3\) सल्फ्यूरस अम्ल
In simple words: सल्फर को गर्म करने पर सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो एक अम्लीय गैस है। यह गैस सूखे लिटमस पेपर पर कोई प्रभाव नहीं डालती है, लेकिन नमी की उपस्थिति में नीले लिटमस पेपर को लाल कर देती है क्योंकि यह पानी से क्रिया कर सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है।
🎯 Exam Tip: अधातुओं के ऑक्साइड की अम्लीय प्रकृति को लिटमस पेपर परीक्षण से दर्शाया जा सकता है। याद रखें कि गैसें जल की उपस्थिति में ही अम्लीय व्यवहार दर्शाती हैं। रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना भी आवश्यक है।
Question 10. लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताइए ।
Answer: लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके निम्न हैं
1. यशदलेपन द्वारा- इस विधि में लोहे एवं इस्पात पर जिंक की पतली परत चढ़ाई जाती है।
2. पेंटिंग द्वारा- इस विधि में लोहे की वस्तु को पेंट कर देते हैं, ताकि इसकी सतहें वायु और आर्द्रता के सीधे सम्पर्क में न रहें।
In simple words: लोहे को जंग से बचाने के लिए दो मुख्य तरीके हैं: यशदलेपन (गैल्वनीकरण), जिसमें जिंक की परत चढ़ाई जाती है, और पेंटिंग, जो लोहे की सतह को वायु और नमी से बचाती है।
🎯 Exam Tip: जंग लगने से बचाने के तरीकों में धातु को वायु और नमी के संपर्क से बचाना शामिल है। गैल्वनीकरण और पेंटिंग जैसे सामान्य तरीकों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 11. ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ कैसा ऑक्साइड बनाती हैं?
Answer: ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधिकांश अधातुएँ अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं। कुछ अधातुएँ उदासीन ऑक्साइड भी बनाती हैं।
अम्लीय ऑक्साईड- \(SO_2, CO_2, NO_2\) आदि
उदासीन ऑक्साइड-\(H_2O, CO\)
In simple words: अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर मुख्य रूप से अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं, लेकिन कुछ मामलों में उदासीन ऑक्साइड भी बना सकती हैं।
🎯 Exam Tip: अधातुओं के ऑक्साइडों की प्रकृति (अम्लीय या उदासीन) को उनके उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है। यह धातुओं के ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति से भिन्न होता है।
Question 12. कारण बताइए
(a) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।
(b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम को तेल के अंदर संग्रहित किया जाता है।
(C) ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है।
(d) निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
Answer:
(a) सोना (Au), चाँदी (Ag) और प्लेटिनम (Pt) का उपयोग आभूषण बनाने में इसलिए किया जाता है, क्योंकि ये धातुएँ वायु, आर्द्रता और अम्लों से जल्द संक्षारित नहीं होते हैं और इसकी धात्विक चमक लम्बे समय तक रहती है। साथ ही, ये धातुएँ सर्वोत्तम आघातवर्थ्य और तन्य भी हैं।
(b) क्योंकि सोडियम (Na), पोटैशियम (K) और लीथियम (Li) जैसी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ इतनी तेजी से अभिक्रिया करती हैं कि खुले में रखने पर आग पकड़ लेती हैं। इन्हें सुरक्षित रखने तथा अचानक आग को रोकने के लिए तेल (केरोसिन तेल) के अंदर डुबोकर रखा जाता है। साथ ही, ये धातुएँ जल के साथ भी तेज़ ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करती हैं और उत्सर्जित \(H_2\) जलने लगते हैं।
(c) क्योंकि बर्तनों के ऊपर ऐलुमिनियम ऑक्साइड \((Al_2O_3)\) की परत बन जाती है, जो ऐलुमिनियम की सतहों को संक्षारित होने से बचाता है तथा खाद्य पदार्थ को खराब होने से बचाता है। (d) क्योंकि किसी धातु को उसके सल्फाइड और कार्बोनेट की तुलना में उसके ऑक्साइडों से प्राप्त करना अधिक आसान होता है। इसलिए निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
In simple words: प्लैटिनम, सोना, चाँदी आभूषण बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं क्योंकि वे संक्षारित नहीं होते और उनकी चमक बनी रहती है। सोडियम, पोटैशियम और लीथियम को तेल में रखते हैं क्योंकि वे हवा और पानी से अत्यधिक अभिक्रियाशील हैं। ऐलुमिनियम के बर्तन उपयोग किए जाते हैं क्योंकि इसके ऊपर एक सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत बनती है। निष्कर्षण में कार्बोनेट और सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है क्योंकि ऑक्साइडों से धातु निकालना आसान होता है।
🎯 Exam Tip: धातुओं के गुणों और उनके अनुप्रयोगों से संबंधित 'कारण बताइए' प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं। प्रत्येक कारण को वैज्ञानिक सिद्धांतों (जैसे अभिक्रियाशीलता, संक्षारण प्रतिरोध, निष्कर्षण विधि) के साथ स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए।
Question 13. आपने ताँबे के मलीन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ़ करते अवश्य देखा होगा। यह खट्टे पदार्थ बर्तन को साफ़ करने में क्यों प्रभावी हैं?
Answer: ताँबे के ऊपर आर्द्र वायु तथा \(CO_2\) के कारण कॉपर कार्बोनेट की एक हरी-सी परत बन जाती है, जो क्षारकीय प्रकृति की होती है। इसलिए जब इसे नींबू या इमली के रस से साफ़ करते हैं, तो इसमें मौजूद अम्ल क्षारक को उदासीन कर देता है और बर्तन साफ़ हो जाता है।
\(कॉपर कार्बोनेट + साइट्रिक अम्ल → कॉपर साइट्रेट + CO_2 + H_2O\)
In simple words: ताँबे के बर्तनों पर बनी हरे रंग की परत कॉपर कार्बोनेट होती है जो क्षारीय प्रकृति की होती है। नींबू या इमली के रस में मौजूद अम्ल इस क्षारीय परत को उदासीन करके हटा देते हैं, जिससे बर्तन साफ हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में अम्लों और क्षारों की उदासीन अभिक्रिया का व्यावहारिक अनुप्रयोग शामिल है। रासायनिक प्रतिक्रिया और उसके उत्पादों को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 14. रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए ।
Answer:
| धातु | अधातु |
| 1. धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं। | • अधातुएँ अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं। |
| 2. धातुएँ तनु HCl या तनु \(H_2SO_4\) से अभिक्रिया कर \(H_2\) गैस मुक्त करती हैं, क्योंकि हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं। | • अधातुएँ तनु HCl या तनु \(H_2SO_4\) से अभिक्रिया नहीं करती हैं क्योंकि हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करती हैं। |
| 3. धातुएँ अपचायक होती हैं। | • अधातुएँ उपचायक होती हैं। |
| 4. धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्याग कर (+ve) आयन बनाती हैं। | • अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर (-ve) आयन बनाती हैं। |
| 5. धातुएँ जल (या भाप) से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं। | • अधातुएँ जल से या भाप से अभिक्रिया नहीं करती हैं। अतः हाइड्रोजन को जल से विस्थापित नहीं करती हैं। |
| 6. सभी धातुएँ \(H_2\) से संयोग कर हाइड्राइड नहीं बनाती हैं (केवल Na, K,. Ca जैसे क्रियाशील तत्व बनाती हैं) | • सभी अधातुएँ \(H_2\) से संयोग कर हाइड्राइड (hydrides) बनाती हैं। |
In simple words: धातुओं में रासायनिक रूप से क्षारकीय ऑक्साइड बनाने, अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करने, इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनात्मक आयन बनाने और अपचायक के रूप में कार्य करने जैसे गुण होते हैं, जबकि अधातुओं में अम्लीय/उदासीन ऑक्साइड बनाने, अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित न करने, इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणात्मक आयन बनाने और उपचायक के रूप में कार्य करने जैसे गुण होते हैं।
🎯 Exam Tip: धातुओं और अधातुओं के बीच रासायनिक गुणों के आधार पर विभेद करना एक महत्वपूर्ण और अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न है। तुलनात्मक तालिका के रूप में उत्तर देना अधिक प्रभावी होता है।
Question 15. एक व्यक्ति प्रत्येक घर में सुनार बनकर जाता है। उसने पुराने एवं मलीन सोने के आभूषणों में पहले जैसी चमक पैदा करने का ढोंग रचाया। कोई संदेह किए बिना ही एक महिला अपने सोने के कंगन उसे देती है, जिसे वह एक विशेष विलयन में डाल देता है। कंगन नए की तरह चमकने लगते हैं, लेकिन उनका वज़न अत्यंत कम हो जाता है। वह महिला बहुत दुखी होती है तथा तर्क-वितर्क के पश्चात् उस व्यक्ति को झुकना पड़ता है। एक जासूस की तरह क्या आप उस विलयन की प्रकृति के बारे में बता सकते हैं।
Answer: वह व्यक्ति जो सुनार बनकर जाता है, उसके पास ऐक्वा रेजिया (aqua regia) का विलयन है, जो 3:1 में सांद्र HCl एवं सांद्र \(HNO_3\) अम्ल का ताज़ा मिश्रण होता है। इसमें सोने को गलाने की क्षमता होती है, जिसके कारण कंगन चमकने लगते हैं, लेकिन उनका वज़न कम हो जाता है।
In simple words: सुनार द्वारा उपयोग किया गया विलयन ऐक्वा रेजिया था, जो सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 मिश्रण होता है। यह विलयन सोने को गला सकता है, जिससे आभूषणों की सतह चमकने लगती है लेकिन उनका वज़न कम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: ऐक्वा रेजिया (अम्लराज) की संरचना और सोने को घोलने की उसकी अद्वितीय क्षमता को जानना महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रश्नों में अवलोकन और रासायनिक ज्ञान का संयोजन आवश्यक है।
Question 16. गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है, परंतु इस्पात (लोहे की मिश्रधातु) का नहीं। इसको कारण बताइए।
Answer: ऐसा इसलिए क्योंकि कॉपर ऊष्मा का सुचालक होता है, जबकि इस्पात जो लोहे का एक मिश्रधातु है ऊष्मा का अच्छा चालक नहीं होता है। साथ ही कॉपर जल (भाप) से अभिक्रिया नहीं करता है, जबकि इस्पात में जल से अभिक्रिया होती है और जंग लग जाती है।
In simple words: गर्म पानी के टैंक बनाने के लिए तांबे का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह ऊष्मा का अच्छा चालक है और पानी से क्रिया नहीं करता, जबकि इस्पात (लोहे की मिश्रधातु) ऊष्मा का उतना अच्छा चालक नहीं है और पानी के साथ क्रिया करके जंग पकड़ लेता है।
🎯 Exam Tip: धातुओं के गुणों (जैसे ऊष्मा चालकता और जल के साथ अभिक्रियाशीलता) का तुलनात्मक अध्ययन ऐसे प्रश्नों के उत्तर के लिए महत्वपूर्ण है। कारण स्पष्ट और वैज्ञानिक रूप से मान्य होने चाहिए।
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