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पाठगत हल प्रश्न
NCERT In-Text Questions Solved
खंड-2.1 (पृष्ठ संख्या 20)
Question 1. आपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। उनमें से एक में आसवित जल एवं शेष दो में से एक में अम्लीय विलयन तथा दूसरे में क्षारीय विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिटमस पत्र दिया जाता है, तो आप प्रत्येक परखनली में रखे गए पदार्थों की पहचान कैसे करेंगे?
Answer: सबसे पहले दिए गए लाल लिटमस पत्र को बारी-बारी से तीनों परखनलियों में डालते हैं। हम पाते हैं कि किसी एक परखनली में यह लिटमस पत्र नीला हो गया। चूँकि क्षारीय विलयन में लाल लिटमस पत्र नीला हो जाता है। अतः इस परखनली में अवश्य ही क्षारीय विलयन है। अब शेष दो परखनलियों में इस नीले लिटमस पत्र को डालते हैं। इसमें दो स्थितियाँ हो सकती हैं
1. लिटमस पत्र पुनः लाल हो जाएगा।
2. लिटमस पत्र नीला ही रह जाएगा। जिस परखनली में लिटमस पत्र लाल हो गया उसमें अम्लीय विलयन तथा जिसमें रंग अपरिवर्तित अर्थात् नीला ही रहा उसमें आसवित जल होगा ।
In simple words: लाल लिटमस पेपर को सभी परखनलियों में डालकर क्षारीय विलयन की पहचान करें (लाल से नीला होना)। फिर, इस नीले लिटमस को शेष दो परखनलियों में डालकर अम्लीय विलयन (नीले से लाल) और आसवित जल (रंग में कोई परिवर्तन नहीं) की पहचान करें।
🎯 Exam Tip: इस प्रयोग में रंगों का परिवर्तन और pH मानों से संबंधित अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझें क्योंकि यह अक्सर कारण-आधारित प्रश्नों में पूछा जाता है।
खंड 2.2 (पृष्ठ संख्या 24)
Question 1. पीतल एवं ताँबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं, रखने चाहिए?
Answer: पीतल (Cu तथा Zn का मिश्रधातु) तथा ताँबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ इसलिए नहीं रखे जाते हैं, क्योंकि इसमें अम्ल मौजूद होते हैं, जो इससे अभिक्रिया करके हानिकारक (विषैले) यौगिक (toxic compounds) बनाते हैं। जिसके कारणवश ये खाने लायक नहीं रह जाते । अम्ल की अभिक्रिया से धातु के बर्तन भी संक्षारित हो जाते हैं।
In simple words: खट्टे खाद्य पदार्थों में अम्ल होते हैं जो पीतल और ताँबे जैसी धातुओं से अभिक्रिया करके हानिकारक पदार्थ बनाते हैं, जिससे भोजन असुरक्षित हो जाता है और बर्तन खराब हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न धातुओं और अम्लों के बीच अभिक्रियाओं के सामान्य परिणामों और खाद्य सुरक्षा के लिए इसके महत्व पर केंद्रित है।
Question 2. धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन-सी गैस निकलती है? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे?
Answer: धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया से सामान्यतः हाइड्रोजन गैस निकलती है। उदाहरण-
(i) Zn(s) जिंक \( + \) HCl(aq) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
\( \implies \) ZnCl2 (aq) जिंक क्लोराइड \( + \) H2(g) हाइड्रोजन
(ii) Mg(s) मैग्नीशियम \( + \) H₂SO₄(aq) सल्फ्यूरिक अम्ल
\( \implies \) MgSO4 (aq) मैग्नीशियम सल्फेट \( + \) H2(g) हाइड्रोजन
जाँच-जलती हुई माचिस की तीली परखनली के मुँह के पास ले जाने पर फट-फट की आवाज़ (Pop sound) के साथ जलने लगती है जो यह दर्शाता है कि H2 गैस बनी है।
In simple words: धातु जब अम्ल से अभिक्रिया करती है तो हाइड्रोजन गैस निकलती है। इसकी उपस्थिति की जाँच जलती हुई माचिस की तीली को पास लाकर 'पॉप' ध्वनि से की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन गैस की "पॉप" ध्वनि जाँच एक महत्वपूर्ण प्रायोगिक पहचान है; इस अभिक्रिया का समीकरण और जांच विधि अच्छी तरह से याद रखें।
Question 3. कोई धातु यौगिक A तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करती है तो बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे उत्पन्न | गैस जलती मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में से एक कैल्सियम क्लोराइड है, तो इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Answer: धातु के यौगिक A CaCO3 (कैल्शियम कार्बोनेट) है।
\( CaCO_3 (s) + 2HCl (aq) \implies CaCl_2 (aq) + H_2O (l) + CO_2 (g) \)
In simple words: धातु यौगिक A कैल्शियम कार्बोनेट है। यह तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके कैल्शियम क्लोराइड, जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है, जो बुदबुदाहट के साथ निकलती है और जलती मोमबत्ती को बुझा देती है।
🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान (बुदबुदाहट और मोमबत्ती का बुझना) और अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखना महत्वपूर्ण है।
खंड 2.3 (पृष्ठ संख्या 27)
Question 1. HCI, HNO आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण क्यों प्रदर्शित करते हैं, जबकि ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों के विलयनों में अम्लीयता के अभिलक्षण नहीं प्रदर्शित होते हैं।
Answer: HCI, HNO3 आदि के जलीय विलयन में H⁺ आयन बनता है, जिसके कारण ये अम्लीय अभिलक्षण प्रदर्शित करते हैं जबकि ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों के जलीय विलयनों में H⁺ आयन नहीं बनता है। इसलिए ये अम्लीयता के अभिलक्षण नहीं प्रदर्शित करते हैं।
In simple words: HCl और HNO3 जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H⁺) बनाते हैं, जिससे वे अम्लीय गुण दिखाते हैं; जबकि ऐल्कोहॉल और ग्लूकोज़ H⁺ आयन नहीं बनाते, इसलिए वे अम्लीय नहीं होते।
🎯 Exam Tip: अम्लीय व्यवहार के लिए हाइड्रोजन आयन (H⁺) का जलीय विलयन में बनना आवश्यक है; यह इस प्रश्न का मुख्य बिंदु है।
Question 2. अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?
Answer: अम्ल का जलीय विलयन H⁺ आयन उत्पन्न करता है जिसके कारण विद्युत धारा का प्रवाह (चालन) होता है।
In simple words: अम्ल के जलीय घोल में H⁺ आयन बनते हैं, और ये आयन विद्युत को घोल से गुजरने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत चालन के लिए आयनों की उपस्थिति आवश्यक है; अम्ल के जलीय विलयन में H⁺ आयनों का बनना इस सिद्धांत को सिद्ध करता है।
Question 3. शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को क्यों नहीं बदलती है?
Answer: शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को इसलिए नहीं बदल पाती है, क्योंकि जल की अनुपस्थिति में HCI से H⁺ आयन अलग नहीं हो पाता है। अर्थात् सिर्फ जलीय माध्यम में ही H⁺ आयन बनता है।
In simple words: शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस लिटमस का रंग नहीं बदलती क्योंकि पानी की अनुपस्थिति में वह H⁺ आयन नहीं बना पाती, जो रंग बदलने के लिए ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: यह दर्शाता है कि अम्लीय गुणों के लिए जल की उपस्थिति में आयनीकरण (H⁺ आयन का बनना) अनिवार्य है।
Question 4. अम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में?
Answer: क्योंकि जल में अम्ल या क्षारक के घुलने की प्रक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी होती है। जल में सांद्र नाइट्रिक अम्ल या सल्फ्यूरिक अम्ल को मिलाते समय अत्यंत सावधानी रखनी चाहिए। अम्ल को सदैव धीरे-धीरे तथा जल को लगातार हिलाते हुए जल में मिलाना चाहिए। सांद्र अम्ल में जल मिलाने पर उत्पन्न हुई ऊष्मा के कारण मिश्रण आस्फलित होकर बाहर आ सकता है तथा आप जल सकते हैं। साथ ही अत्यधिक स्थानीय ताप के कारण प्रयोग में उपयोग किया जा रहा काँच का पात्र भी टूट सकता है।
In simple words: अम्ल को जल में धीरे-धीरे मिलाना चाहिए क्योंकि यह प्रक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है; ऐसा न करने पर मिश्रण बाहर उछल सकता है या पात्र टूट सकता है।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा पहलू और ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया की अवधारणा को ध्यान में रखें, यह अक्सर प्रायोगिक सुरक्षा के संदर्भ में पूछा जाता है।
Question 5. अम्ल के विलयन को तनुकृत करते समय हाइड्रोनियम आयन (H3O+) की सांद्रता कैसे प्रभावित हो जाती है?
Answer: अम्ल के विलयन में जल मिलाने पर H⁺ आयन H20 से संयोग कर (H3O+) आयन बनाते हैं। अम्ल के विलयन को तनुकृत करने पर हाइड्रोनियम आयन (H3O+) की सांद्रता में कमी हो जाती है।
In simple words: अम्ल के विलयन को पतला करने पर हाइड्रोनियम आयन (H3O⁺) की सांद्रता कम हो जाती है क्योंकि जल मिलाने पर आयन अधिक आयतन में फैल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: तनुकृत करने पर आयनों की सांद्रता में कमी एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो pH मान में परिवर्तन से जुड़ी है।
Question 6. जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाते हैं, तो हाइड्रॉक्साइड (OH⁺) की सांद्रता कैसे प्रभावित होती है?
Answer: जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाते हैं तो (OH¯) आयन की सांद्रता बढ़ जाती है।
In simple words: सोडियम हाइड्रॉक्साइड के घोल में और क्षारक मिलाने पर हाइड्रॉक्साइड (OH¯) आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: यह क्षारक विलयनों में OH¯ आयन सांद्रता के सीधे संबंध को दर्शाता है, जो pH स्केल के क्षारीय पक्ष में बदलाव लाएगा।
खंड 2.4 (पृष्ठ संख्या 31)
Question 1. आपके पास विलयन ‘A' एवं ‘B' है। विलयन ‘A' के pH का मान 6 है एवं विलयन ‘B' के PH का मान 8 है। किस विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है? इनमें से कौन, अम्लीय है तथा कौन-सा क्षारकीय?
Answer: विलयन 'A' का PH = 6 है, इसलिए यह अम्लीय होगा, क्योंकि pH <7 है। विलयन 'B' का PH = 9 है इसलिए यह क्षारकीय होगा, क्योंकि pH > 7 है। विलयन 'A' में H⁺ आयन की सांद्रता अधिक है।
In simple words: विलयन A (pH 6) अम्लीय है और इसमें हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है, जबकि विलयन B (pH 8) क्षारकीय है।
🎯 Exam Tip: pH स्केल और हाइड्रोजन आयन सांद्रता के बीच के संबंध को समझना महत्वपूर्ण है: pH < 7 अम्लीय, pH > 7 क्षारीय, pH = 7 उदासीन।
Question 2. H' (aq) आयन की सांद्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जैसे-जैस हाइड्रोजन आयन H+ (aq) आयन की सांद्रता बढ़ती है, विलयन और अधिक अम्लीय होता जाता है।
In simple words: जैसे-जैसे H⁺ (aq) आयनों की सांद्रता बढ़ती है, विलयन अधिक अम्लीय हो जाता है।
🎯 Exam Tip: H⁺ आयन सांद्रता अम्लता का सीधा संकेतक है; उच्च सांद्रता का अर्थ है अधिक अम्लीय विलयन।
Question 3. क्या क्षारकीय विलयन में H⁺ (aq) आयन होते हैं? अगर हाँ, तो यह क्षारकीय क्यों होते हैं?
Answer: हाँ, H+ (aq) आयन क्षारकीय विलयन में भी होते हैं परंतु इसकी सांद्रता (OH) आयनों की सांद्रता से कम होती है, जिसके कारणवश यह विलयन क्षारकीय होते हैं।
In simple words: हाँ, क्षारकीय विलयनों में H⁺ आयन होते हैं, लेकिन वे क्षारकीय इसलिए होते हैं क्योंकि OH⁻ आयनों की सांद्रता H⁺ आयनों की सांद्रता से अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: किसी भी जलीय घोल में H⁺ और OH⁻ दोनों आयन मौजूद होते हैं; प्रकृति उस आयन की सापेक्ष सांद्रता से निर्धारित होती है जो अधिक मात्रा में होता है।
Question 4. कोई किसान खेत की मृदा की किस परिस्थिति में बिना बुझी हुआ चूना (कैल्शियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्शियम कार्बोनेट) का उपयोग करेगा?
Answer: जब खेत की मृदा अम्लीय होती है तभी किसान इसमें कैल्शियम ऑक्साइड (CaO), कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2] तथा कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) मिलाते हैं ताकि मिट्टी उदासीन हो जाए या इसका pH परास खेती के लिए उपयुक्त हो जाए।
In simple words: किसान अम्लीय मिट्टी को उदासीन करने के लिए बिना बुझे चूने, बुझे चूने या चॉक का उपयोग करेगा ताकि फसल उगाने के लिए pH उपयुक्त हो जाए।
🎯 Exam Tip: मृदा की अम्लता को कम करने के लिए इन क्षारीय पदार्थों का उपयोग किया जाता है; यह कृषि में pH संतुलन के महत्व को दर्शाता है।
खंड 2.5 (पृष्ठ संख्या 36)
Question 1. CaOCl2 यौगिक का प्रचलित नाम क्या है?
Answer: CaOCl2 यौगिक का प्रचलित नाम विरंजक चूर्ण है।
In simple words: CaOCl2 को आमतौर पर विरंजक चूर्ण के नाम से जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: सामान्य नाम और रासायनिक सूत्र को याद रखना आवश्यक है; यह अक्सर एक-शब्द के उत्तर वाले प्रश्नों में पूछा जाता है।
Question 2. उस पदार्थ का नाम बताइए जो क्लोरीन से क्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है।
Answer: शुष्क बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रोक्सॉइड-Ca(OH)2) क्लोरीन से अभिक्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है।
\( Ca(OH)_2 + Cl_2 \implies CaOCl_2 + H_2O \)
In simple words: शुष्क बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है।
🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया विरंजक चूर्ण के निर्माण की मुख्य विधि है; अभिकारकों और उत्पादों को उनके सूत्रों सहित याद रखें।
Question 3. कठोर जल को मृदु करने के लिए किस सोडियम यौगिक का उपयोग किया जाता है?
Answer: सोडियम कार्बोनेट (Na2CO) इसे धोने का सोडा भी कहा जाता है।
In simple words: कठोर जल को नरम करने के लिए सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: सोडियम कार्बोनेट के उपयोग और इसे "धोने का सोडा" कहने का कारण याद रखें, यह अक्सर पूछा जाता है।
Question 4. सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
Answer: जब सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के विलयन को गर्म किया जाता है तो यह अपघटित होकर सोडिधम कार्बोनेट, जल एवं CO2 गैस का निर्माण करता है। अभिक्रिया इस प्रकार होती है-
\( 2NaHCO_3(s) \xrightarrow{heat} Na_2CO_3(s) + H_2O(l) + CO_2(g) \)
In simple words: सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर यह सोडियम कार्बोनेट, जल और कार्बन डाइऑक्साइड में टूट जाता है।
🎯 Exam Tip: इस तापीय अपघटन अभिक्रिया का समीकरण और उसके उत्पाद महत्वपूर्ण हैं, विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड गैस का निकलना।
Question 5. प्लास्टर ऑफ पेरिस की जल के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
Answer:
\( CaSO_4 \cdot \frac{1}{2}H_2O + 1\frac{1}{2}H_2O \implies CaSO_4 \cdot 2H_2O \)
प्लास्टर ऑफ पेरिस जिप्सम
(सफ़ेद चूर्ण) कठोर पदार्थ
In simple words: प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO₄·½H₂O) जल के साथ मिलकर जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) बनाता है, जो एक कठोर पदार्थ है।
🎯 Exam Tip: प्लास्टर ऑफ पेरिस और जिप्सम के रासायनिक सूत्र और उनके जल अणुओं की संख्या को ध्यान में रखें, यह अक्सर उलझन पैदा कर सकता है।
पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न
NCERT Textbook Questions Solved
Question 1. कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH संभवतः क्या होगा?
(a) 1
(b) 4
(c) 5
(d) 10
Answer: (d) 10 (संकेत-क्योंकि क्षारीय विलयन में लाल लिटमस नीला हो जाता है जिसका pH>7 होता है ।)
In simple words: लाल लिटमस को नीला करने वाला विलयन क्षारीय होता है, और क्षारीय विलयनों का pH मान 7 से अधिक होता है, इसलिए 10 एक संभावित मान है।
🎯 Exam Tip: pH स्केल और लिटमस परीक्षण के बीच संबंध को याद रखें: लाल से नीला (क्षारीय, pH > 7), नीला से लाल (अम्लीय, pH < 7)।
Question 2. कोई विलयन अंडे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया कर एक गैस उत्पन्न करता है जो चूने के पानी को दुधिया कर देती है। इस विलयन में क्या होगा?
(a) NaCl
(b) HCI
(C) LICI
(d) KCI
Answer: (b) HCI (संकेत–क्योंकि अंडे के कवच में CaCO3 होता है, जो HCI अम्ल से अभिक्रिया कर CO2 गैस बनाता है। CO2 गैस चूने के पानी को दुधिया कर देती है।
In simple words: अंडे का कवच कैल्शियम कार्बोनेट से बना होता है; जब यह HCI जैसे अम्ल से अभिक्रिया करता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है जो चूने के पानी को दुधिया कर देती है।
🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड की पहचान (चूने के पानी को दुधिया करना) और अम्ल-कार्बोनेट अभिक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. NaOH का 10 ml विलयन HCI के 8 ml विलयन से पूर्णतः उदासीन हो जाता है। यदि हम NaOH के उसी विलयन का 20 ml लें तो इसे उदासीन करने के लिए HCI के उसी विलयन की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
(a) 4 mL
(b) 8 mL
(C) 12 mL
(d) 16 mL
Answer: (d) 16 mL
In simple words: यदि 10 ml NaOH को उदासीन करने के लिए 8 ml HCl की आवश्यकता होती है, तो NaOH की मात्रा दोगुनी (20 ml) होने पर HCl की भी दोगुनी मात्रा (16 ml) की आवश्यकता होगी।
🎯 Exam Tip: यह उदासीनीकरण अभिक्रिया में आयतनों की आनुपातिकता पर आधारित एक सीधा गणना प्रश्न है; अनुपात को सही ढंग से लागू करें।
Question 4. अपच का उपचार करने के लिए निम्न में से किस औषधि का उपयोग होता है?
(a) एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक)
(b) ऐनालजेसिक (पीड़ाहारी)
(C) ऐन्टैसिड
(d) एंटीसेप्टिक (प्रतिरोधी)
Answer: (C) ऐन्टैसिड
In simple words: अपच का इलाज एंटासिड से किया जाता है, जो पेट के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न औषधियों के कार्यों को जानें; एंटासिड अम्ल-क्षार अभिक्रिया के सिद्धांत पर आधारित है।
Question 5. निम्न अभिक्रिया के पहले शब्द-समीकरण लिखिए तथा उसके बाद संतुलित समीकरण लिखिए
(a) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है।
(b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है।
(C) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है।
(d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लौह के रेतन के साथ अभिक्रिया करता है।
Answer:
(a) दानेदार जिंक \( + \) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल
\( \implies \) जिंक सल्फेट \( + \) हाइड्रोजन गैस
\( Zn(s) + H_2SO_4 (aq) \implies ZnSO_4(aq) + H_2(g) \)
(b) मैग्नीशियम पट्टी \( + \) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
\( \implies \) मैग्नीशियम क्लोराइड \( + \) हाइड्रोजन गैस
\( Mg(s) + 2HCl \implies MgCl_2(aq) + H_2 \)
(c) ऐलुमिनियम चूर्ण \( + \) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल
\( \implies \) ऐलुमिनियम सल्फेट \( + \) हाइड्रोजन गैस
\( 2Al(s) + 3H_2SO_4 \implies Al_2(SO_4)_3 (aq) + 3H_2(g) \)
(d) लौह के रेतन \( + \) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
\( \implies \) आयरन क्लोराइड \( + \) हाइड्रोजन गैस
\( Fe(s) + 2HCl(aq) \implies FeCl_2(aq) + H_2(g) \)
In simple words: जब धातुएँ तनु अम्लों से अभिक्रिया करती हैं, तो हाइड्रोजन गैस और संबंधित धातु लवण बनते हैं। इन अभिक्रियाओं के शब्द-समीकरण और संतुलित रासायनिक समीकरण ऊपर दिए गए हैं।
🎯 Exam Tip: यह सभी अभिक्रियाएँ एकल विस्थापन अभिक्रियाएँ हैं; समीकरणों को संतुलित करना और उत्पादों को सही ढंग से लिखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं, लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता | है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे सिद्ध कीजिए ।
Answer: विधि-
• ग्लूकोज, ऐल्कोहॉल तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का विलयन लीजिए।
• एक कॉर्क पर दो कीलें लगाकर कार्क को 100 ml के बीकर में रख दीजिए ।
• चित्र 2.6 के अनुसार कीलों को 6 वोल्ट की एक बैट्री के दोनों टर्मिनलों के साथ एक बल्ब तथा स्विच के माध्यम से जोड़ दीजिए। अब बीकर में थोड़ा तनु HCI डालकर विद्युत धारा प्रवाहित कीजिए ।
• अब स्विच ऑन कीजिए आप देखेंगे कि बल्ब जल उठता है।
• इस क्रियाकलाप को HCI के स्थान पर बारी-बारी से ग्लूकोज और ऐल्कोहॉल के विलयन के साथ करिए।
अवलोकन - आप पाएँगे कि ऐल्कोहॉल और ग्लूकोज़ की स्थिति में बल्ब नहीं जलता है, क्योंकि विलयनों में H⁺ आयन नहीं बनता है।
निष्कर्ष- ग्लूकोज़ और ऐल्कोहॉल H⁺ आयन नहीं उत्पन्न करते हैं। किसी विलयन में विद्युत धारा का प्रवाह आयनों द्वारा होता है। इसलिए इन्हें अम्ल नहीं कहा जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक परिपथ दिखाता है जिसमें दो कीलें एक कॉर्क में फंसी हुई हैं और एक बीकर में तनु अम्ल विलयन में डूबी हुई हैं। कीलें एक बैटरी और एक बल्ब से जुड़ी हैं, जिससे यह प्रदर्शित होता है कि अम्ल के विलयन में विद्युत का चालन होता है, क्योंकि बल्ब जल रहा है।
In simple words: एक प्रयोग में, HCl विलयन विद्युत का चालन करता है (बल्ब जलता है) क्योंकि यह H⁺ आयन बनाता है, जबकि ग्लूकोज़ और ऐल्कोहॉल विद्युत का चालन नहीं करते (बल्ब नहीं जलता) क्योंकि वे H⁺ आयन नहीं बनाते, यह सिद्ध करता है कि उनमें हाइड्रोजन होने पर भी वे अम्ल नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रयोग का मुख्य बिंदु आयनीकरण और विद्युत चालकता के बीच का संबंध है; यह प्रायोगिक अवलोकन-आधारित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. आसवित जल विद्युत का चालक क्यों नहीं होता, जबकि वर्षा । जल होता है?
Answer:
• आसवित जल शुद्ध होते हैं, जिसमें आयन नहीं बनता है तथा विद्युत चालन करता है। विद्युत का चालन आयनों द्वारा होता है।
• वर्षा के जल में थोड़ी मात्रा में अम्ल होते हैं, क्योंकि वायु में उपस्थित SO2 और NO2 गैस जल में मिलकर इसे अम्लीय बना देते हैं। ये अम्ल (H+) आयन उत्पन्न करते हैं, जिसके कारण विद्युत धारा का चालन हो जाता है।
In simple words: आसवित जल शुद्ध होता है और उसमें आयन नहीं होते, इसलिए यह विद्युत का कुचालक है, जबकि वर्षा जल में वायुमंडलीय गैसों से बने अम्ल होते हैं जो आयन उत्पन्न करते हैं, जिससे यह विद्युत का सुचालक बन जाता है।
🎯 Exam Tip: विद्युत चालकता के लिए आयनों की उपस्थिति महत्वपूर्ण है; आसवित जल में आयनों की अनुपस्थिति और वर्षा जल में उनकी उपस्थिति के कारणों को समझें।
Question 8. जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है?
Answer: क्योंकि जल की अनुपस्थिति में अम्लों से H⁺ आयन पृथक नहीं हो पाते हैं, इसलिए अम्ल का व्यवहार अम्लीय नहीं होता है। केवल जल की उपस्थिति में ही H⁺ आयन अलग हो पाते हैं तथा अम्लीय अभिलक्षण दर्शाने के लिए आयनों का बनना जरूरी होता है।
In simple words: जल की अनुपस्थिति में अम्ल अम्लीय व्यवहार नहीं दिखाता क्योंकि H⁺ आयन अलग नहीं हो पाते; अम्लीय गुण दिखाने के लिए जल में आयनों का बनना आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: यह फिर से अम्लीय गुणों के लिए जलीय माध्यम में आयनीकरण के महत्व पर जोर देता है; यह एक बुनियादी अवधारणा है।
Question 9. पाँच विलयनों A, B, C, D, व E की जब सार्वत्रिक सूचक से जाँच की जाती है, तो pH के मान क्रमशः 4, 1, | 11, 7 एवं 9 प्राप्त होते हैं। कौन-सा विलयन
(a) उदासीन है?
(b) प्रबल क्षारीय है?
(C) प्रबल अम्लीय है?
(d) दुर्बल अम्लीय है?
(e) दुर्बल क्षारीय है?
pH के मानों को हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए ।
Answer: विलयन pH के मान
| विलयन | pH के मान | प्रकृति |
|---|---|---|
| A | 4 | दुर्बल अम्लीय |
| B | 1 | प्रबल अम्लीय |
| C | 11 | प्रबल क्षारीय |
| D | 7 | उदासीन |
| E | 9 | दुर्बल क्षारीय |
(i) (a) D, (b) C, (c) B, (d) A, (e) E
(ii) H+ आयन की सांद्रता जैसे-जैसे बढ़ती है,
PH का मान उसी तरह घटता जाता है।
C < E < D < A < B
(pH:11) (pH:9) (pH:7) (pH: 4) (pH:1)
In simple words: pH मानों के आधार पर, विलयन D उदासीन (pH 7), C प्रबल क्षारीय (pH 11), B प्रबल अम्लीय (pH 1), A दुर्बल अम्लीय (pH 4), और E दुर्बल क्षारीय (pH 9) है। हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आरोही क्रम में, उनका क्रम C < E < D < A < B है।
🎯 Exam Tip: pH स्केल, अम्लीय/क्षारीय प्रकृति, और H⁺ आयन सांद्रता के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से समझें; यह pH-आधारित प्रश्नों का आधार है।
Question 10. परखनली 'A' एवं 'B' में समान लंबाई की मैग्नीशियम की पट्टी लीजिए। परखनली ‘A’ में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) तथा परखनली 'B' में ऐसिटिक अम्ल (CH3COOH) डालिए। दोनों अम्लों की मात्रा तथा सांद्रता समान हैं। किस परखनली में अधिक तेज़ी से बुदबुदाहट होगी तथा क्यों?
Answer: परखनली A में बुदबुदाहट अधिक तेजी से होती है, क्योंकि HCI एक प्रबल अम्ल है, जो पूर्णतः वियोजित होकर H⁺ और CI¯ आयन अधिक मात्रा में बनाते हैं जबकि CH3COOH एक दुर्बल अम्ल है, जो कम मात्रा में H' आयन बनाते हैं क्योंकि यह कम विघटित हो पाता है।
In simple words: परखनली A में अधिक तेज़ी से बुदबुदाहट होगी क्योंकि उसमें प्रबल अम्ल (HCI) है, जो अधिक H⁺ आयन बनाता है, जबकि परखनली B में दुर्बल अम्ल (ऐसिटिक अम्ल) कम H⁺ आयन बनाता है।
🎯 Exam Tip: प्रबल और दुर्बल अम्लों के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से उनकी आयनीकरण की डिग्री और अभिक्रिया दर के संदर्भ में।
Question 11. ताजे दूध के pH का मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा? अपना उत्तर समझाइए । उत्तर दूध से दही बनने की प्रक्रिया में लैक्टिक अम्ल का निर्माण होता है, जिसके कारण इसका pH: 6 से कम हो जाता है।
Answer: दूध से दही बनने की प्रक्रिया में लैक्टिक अम्ल का निर्माण होता है, जिसके कारण इसका pH: 6 से कम हो जाता है।
In simple words: दूध के दही बनने पर उसमें लैक्टिक अम्ल बनता है, जिससे उसका pH मान 6 से कम होकर अधिक अम्लीय हो जाता है।
🎯 Exam Tip: दही जमने की प्रक्रिया और लैक्टिक अम्ल के निर्माण से pH में कमी को याद रखें; यह एक सामान्य रासायनिक परिवर्तन है।
Question 12. एक ग्वाला ताजे दूध में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाता है।
(a) ताज़ा दूध के pH के माना को 6 से बदलकर थोड़ा क्षारीय क्यों बना देता है?
(b) इस दूध को दही बनने में अधिक समय क्यों लगता है?
Answer:
1. ताज़ा दूध के pH के मान को 6 से बदलकर थोड़ा क्षारीय इसलिए किया जाता है, क्योंकि क्षारीय दूध अधिक समय तक खराब नहीं होता है।
2. इस दूध को दही बनने में अधिक समय इसलिए लगता है, क्योंकि इस प्रक्रिया में बना लैक्टिक अम्ल पहले क्षारक को उदासीन करता है फिर अम्लीय होता है, जिसके कारण दही बनता है।
In simple words: ग्वाला दूध में बेकिंग सोडा मिलाकर उसे थोड़ा क्षारीय कर देता है ताकि वह ज़्यादा देर तक ताज़ा रहे (a), और इसे दही बनने में अधिक समय लगता है क्योंकि बेकिंग सोडा लैक्टिक अम्ल को पहले उदासीन करता है (b)।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न pH समायोजन के व्यावहारिक अनुप्रयोग और खाद्य संरक्षण पर इसके प्रभाव को दर्शाता है; दोनों भागों को अच्छी तरह से समझें।
Question 13. प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्र-रोधी बर्तन में क्यों रखा जाना चाहिए? इसकी व्याख्या कीजिए।
Answer: प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्र-रोधी (moisture-proof) बर्तनों में इसलिए रखा जाता है, क्योंकि यह आर्द्रता की उपस्थिति में जल को अवशोषित कर ठोस पदार्थ जिप्सम बनाती है, जिसके कारण इसमें जल के साथ मिलकर जमने का गुण नष्ट हो जाता है।
\( CaSO_4 \cdot \frac{1}{2}H_2O + 1\frac{1}{2}H_2O \implies CaSO_4 \cdot 2H_2O \)
प्लास्टर ऑफ पेरिस जिप्सम
ठोस पदार्थ
In simple words: प्लास्टर ऑफ पेरिस को नमी-रोधी कंटेनर में रखा जाता है ताकि यह नमी को सोखकर जिप्सम में न बदल जाए, जिससे इसकी जमने की क्षमता खत्म हो जाएगी।
🎯 Exam Tip: प्लास्टर ऑफ पेरिस और जिप्सम की अभिक्रिया और उनकी भौतिक गुणों (जमना) पर नमी के प्रभाव को याद रखें।
Question 14. उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए ।
Answer: अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया से लवण एवं जल बनते हैं, जिसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। चूँकि सभी
अम्ल H+(aq) तथा सभी क्षारक OH-(aq) बनाते हैं।
इसलिए \( HX + MOH \implies MX + HOH \)
अम्ल \( + \) क्षारक \( \implies \) लवण \( + \) जल
(i) \( NaOH (aq) + HCl(aq) \implies NaCl + H_2O \)
(ii) \( KOH + HCl \implies KCl + H_2O \)
In simple words: उदासीनीकरण अभिक्रिया वह होती है जिसमें एक अम्ल और एक क्षारक अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, जहाँ अम्ल से H⁺ आयन और क्षारक से OH⁻ आयन मिलकर जल बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: उदासीनीकरण की परिभाषा और इसके सामान्य उदाहरणों को समझना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से मजबूत अम्ल-क्षारक अभिक्रियाओं के संदर्भ में।
Question 15. धोने का सोडा एवं बेकिंग सोडा के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए ।
Answer:
1. धोने के सोडे का उपयोग-
• सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) का उपयोग काँच, साबुन एवं कागज उद्योगों में होता है।
• सोडियम कार्बोनेट का उपयोग घरों में साफ़-सफ़ाई के लिए होता है।
2. बेकिंग सोडा (NaHCO3) का उपयोग-
• बेकिंग पाउडर बनाने में जो बेकिंग सोडा और टार्टरिक अम्ल का मिश्रण है।
• इसका उपयोग सोडा-अम्ल अग्निशामक में भी किया जाता है।
In simple words: धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट) काँच, साबुन, कागज उद्योगों में और घरों की सफ़ाई में उपयोग होता है। बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) बेकिंग पाउडर और सोडा-अम्ल अग्निशामक में उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: धोने के सोडे (सोडियम कार्बोनेट) और बेकिंग सोडे (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) के रासायनिक नाम और उनके दो-दो मुख्य उपयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
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