UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 8 Siddharthasya Nirvedah

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 08 सिद्धार्थस्य निर्वेदः

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परिचय

महाकवि अश्वघोष मूलतः बौद्ध दार्शनिक थे और बौद्ध भिक्षु भी थे, इसलिए उन्हें आर्य भदन्त भी कहा जाता है। वे कनिष्क के समकालीन थे और साकेत के निवासी थे। उनकी माता का नाम सुवर्णाक्षी था। अश्वघोष के दो बड़े काव्य-बुद्धचरितम् और सौन्दरनन्द- के साथ एक अधूरा नाटक-शारिपुत्रप्रकरण- भी मिलता है। उनके लेखन की शैली स्वाभाविक, सरल और प्रवाहपूर्ण है।

प्रस्तुत पाठ के श्लोक महाकवि अश्वघोष द्वारा रचित 'बुद्धचरितम्' महाकाव्य के तीसरे और पाँचवें सर्ग से लिए गए हैं। इनमें उस समय का संक्षिप्त वर्णन है जब सिद्धार्थ विहार (घूमने) के लिए निकले थे और उनके मन में दृढ़ वैराग्य का भाव जागा था।

पाठ-सारांश

एक बार राजकुमार सिद्धार्थ ने अपने पिता से आज्ञा ली और रथ पर सवार होकर नगर घूमने के लिए निकले। रास्ते में उन्होंने एक बहुत बूढ़े व्यक्ति को देखा, जिसके बाल सफेद थे, जो लाठी के सहारे चल रहा था, और जिसके अंग ढीले थे। सारथी से पूछने पर उसने बताया कि बुढ़ापा सभी के जीवन में आता है, राजकुमार को भी यह आएगा। इसके बाद सिद्धार्थ ने एक रोगी व्यक्ति को देखा, जिसका पेट फूला हुआ था, शरीर साँस लेने के कारण काँप रहा था, कंधे झुके हुए थे और शरीर पतला था। वह दूसरे के सहारे चल रहा था। पूछने पर सारथी ने बताया कि इस व्यक्ति को धातु विकार से गंभीर रोग हो गया है। यह रोग इतना गंभीर है कि इंद्र को भी शक्तिहीन बना सकता है।

इसके बाद सिद्धार्थ ने एक मृत व्यक्ति को देखा, जिसकी बुद्धि, इंद्रियाँ और प्राणों से शक्ति खत्म हो चुकी थी। वह महानिद्रा में सोया हुआ था, होश रहित था, और कफन से ढका हुआ था। उसे चार लोग उठाकर ले जा रहे थे। सारथी ने उनकी जिज्ञासा शांत करते हुए बताया कि मृत्यु सभी मनुष्यों का अंत करती है। चाहे कोई नीच हो, मध्यम हो या उत्तम, सभी की मृत्यु निश्चित है।

वृद्ध, रोगी और मृतक को देखकर सिद्धार्थ का अभिमान तुरंत खत्म हो गया। इसके बाद सिद्धार्थ को एक अदृश्य भिक्षु वेशधारी पुरुष दिखाई पड़ा। पूछने पर उसने बताया कि वह जन्म-मृत्यु पर विजय पाने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए संन्यासी बन गया है। वह इस नश्वर संसार में अविनाशी पद को खोज रहा है। भिक्षु के पक्षी की तरह आकाश में चले जाने के बाद सिद्धार्थ ने भी घर छोड़कर संन्यास लेने का निश्चय कर लिया।

पद्यांशों की ससन्दर्भ हिन्दी व्याख्या

 

Question 1. (1) ततः कुमारो जरयाभिभूतं, दृष्ट्वा नरेभ्यः पृथगाकृतिं तम् । उवाच सङ्ग्राहकमागतास्थस्तत्रैव निष्कम्पनिविष्टदृष्टिः ॥
Answer: रथ पर सवार होकर नगर घूमने निकले राजकुमार सिद्धार्थ ने एक बहुत ही बूढ़े व्यक्ति को देखा। वह व्यक्ति दूसरे लोगों से अलग दिख रहा था और बुढ़ापे से कमजोर हो चुका था। राजकुमार सिद्धार्थ ने उस वृद्ध पुरुष को देखकर अपने सारथी से सवाल पूछा, उनकी आँखें उस पर ठहर गई थीं। सिद्धार्थ ने पहले केवल युवा लोगों को देखा था, इसलिए इस वृद्ध व्यक्ति को देखकर उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। यह पहली बार था जब सिद्धार्थ ने जीवन की इस कठोर सच्चाई को इतने करीब से देखा था।
In simple words: राजकुमार सिद्धार्थ ने नगर में एक बूढ़े और कमजोर व्यक्ति को देखा। उस वृद्ध व्यक्ति को देखकर सिद्धार्थ ने सारथी से पूछा, क्योंकि यह उनके लिए एक नया अनुभव था।

🎯 Exam Tip: श्लोक की व्याख्या करते समय, पहले उसके मुख्य अर्थ को स्पष्ट करें और फिर उसके प्रत्येक शब्द का भाव समझाएँ।

 

Question 2. (2) क एष भोः सूत नरोऽभ्युपेतः, केशैः सितैर्यष्टिविषक्तहस्तः भूसंवृताक्षः शिथिलानताङ्गः किं विक्रियैषा प्रकृतिर्यदृच्छा ॥
Answer: राजकुमार सिद्धार्थ ने अपने सारथी से पूछा, "हे सारथि! यह व्यक्ति कौन है जिसके बाल सफेद हैं, जिसने लाठी पकड़ी है, जिसकी आँखें भौंहों से ढकी हैं, और जिसके अंग ढीले होकर झुके हुए हैं? क्या यह कोई बीमारी या बदलाव है, या फिर यह जीवन की सामान्य अवस्था है, या सिर्फ एक संयोग है?" यह प्रश्न सिद्धार्थ के मन में उत्पन्न गहरी जिज्ञासा को दर्शाता है।
In simple words: सिद्धार्थ ने सारथी से उस बूढ़े व्यक्ति के बारे में पूछा, उसके सफेद बालों और कमजोर शरीर का वर्णन करते हुए जानना चाहा कि क्या यह अवस्था सामान्य है या कोई रोग है।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में वर्णित विशेषताओं को ध्यान से पढ़कर उत्तर दें, जिससे सभी विवरण सही से शामिल हों।

 

Question 3. (3) रूपस्य हर्जी व्यसनं बलस्य, शोकस्य योनिर्निधनं रतीनाम् । नाशः स्मृतीनां रिपुरिन्द्रियाणामेषा जरा नाम ययैष भग्नः ॥ [2009, 13]
Answer: सारथी ने राजकुमार को उत्तर दिया कि यह बुढ़ापा ही है, जिसने इस व्यक्ति को कमजोर कर दिया है। बुढ़ापा सुंदरता को खत्म करता है, ताकत को कमजोर करता है, दुखों को जन्म देता है, सभी इच्छाओं को मिटा देता है, याददाश्त को नष्ट करता है, और इंद्रियों का दुश्मन होता है। इसी बुढ़ापे के कारण यह मनुष्य टूट गया है। बुढ़ापा जीवन का एक ऐसा चक्र है जहाँ शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।
In simple words: सारथी ने बताया कि बुढ़ापा सुंदरता को नष्ट करता है, शक्ति को कमजोर करता है, दुखों को जन्म देता है, और इंद्रियों का दुश्मन है, जिससे मनुष्य टूट जाता है।

🎯 Exam Tip: श्लोक के भावार्थ को स्पष्ट करते हुए, उसमें बुढ़ापे के सभी नकारात्मक प्रभावों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 4. (4) पीतं ह्यनेनापि पयः शिशुत्वे, कालेन भूयः परिमृष्टमुव्याम् । क्रमेण भूत्वा च युवा वपुष्मान्, क्रमेण तेनैव जरामुपेतः ॥
Answer: सारथी ने राजकुमार को समझाया कि इस वृद्ध व्यक्ति ने भी बचपन में दूध पिया था। समय के साथ उसने पृथ्वी पर जीवन बिताया और धीरे-धीरे एक सुंदर, युवा शरीर प्राप्त किया। फिर उसी क्रम से वह बुढ़ापे की अवस्था तक पहुँच गया। यह स्थिति अचानक नहीं आई, बल्कि जन्म, बचपन, युवावस्था और प्रौढ़ावस्था के निश्चित क्रम से ही हुई है। यह जीवन का प्राकृतिक चक्र है, जहाँ हर जीव को इन अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है।
In simple words: सारथी ने बताया कि सभी लोग बचपन से युवावस्था और फिर बुढ़ापे की ओर बढ़ते हैं, यह जीवन का एक स्वाभाविक और क्रमिक परिवर्तन है।

🎯 Exam Tip: जीवन के विभिन्न चरणों-बचपन, युवावस्था, बुढ़ापा-के क्रमिक परिवर्तन को समझाते हुए उत्तर को स्पष्ट करें।

 

Question 5. (5) आयुष्मतोऽप्येष वयोऽपकर्षों, निःसंशयं कालवशेन भावी । श्रुत्वा जरामुविविजे महात्मा महाशनेर्दोषमिवान्तिके गौः ॥
Answer: सारथी ने राजकुमार सिद्धार्थ से कहा कि यह बुढ़ापा जो उम्र को घटाता है, निश्चित रूप से समय के कारण ही आता है, और आपको भी यह अवस्था जरूर आएगी। यह सुनकर महान आत्मा वाले कुमार सिद्धार्थ बुढ़ापे के बारे में सुनकर, ऐसे घबरा गए जैसे बिजली कड़कने की आवाज सुनकर पास खड़ी गाय डर जाती है। बुढ़ापे की inevitability (निश्चितता) ने सिद्धार्थ के मन में गहरे विचार पैदा किए।
In simple words: सारथी ने सिद्धार्थ को बताया कि बुढ़ापा सभी के जीवन में आता है। यह सुनकर सिद्धार्थ बहुत चिंतित हो गए, जैसे बिजली की आवाज सुनकर गाय डर जाती है।

🎯 Exam Tip: श्लोक में दी गई उपमा (गाय और वज्र की ध्वनि) का उल्लेख करना न भूलें, यह उत्तर को और प्रभावी बनाता है।

 

Question 6. (6) अथापरं व्याधिपरीतदेहं, त एव देवाः ससृजुर्मनुष्यम् । दृष्ट्वा च तं सारथिमाबभाषे, शौद्धोदनिस्तद्गतदृष्टिरेव ॥
Answer: इसके बाद, राजकुमार सिद्धार्थ ने एक और मनुष्य को देखा, जिसका शरीर बीमारी से घिरा हुआ था। उसे देखकर, शुद्धोदन के पुत्र सिद्धार्थ ने उसी पर अपनी आँखें जमाईं और सारथी से पूछा। यह दृश्य सिद्धार्थ को जीवन के एक और दुख, रोग से परिचित कराता है।
In simple words: सिद्धार्थ ने एक रोगी व्यक्ति को देखा और उसे देखकर ध्यानपूर्वक सारथी से उसके बारे में पूछा।

🎯 Exam Tip: घटनाओं का क्रम याद रखें, पहले बुढ़ापा, फिर रोग। इससे उत्तर अधिक स्पष्ट होगा।

 

Question 7. (7) स्थूलोदर-श्वासचलच्छरीरः, स्वस्तांसबाहुः कृशपाण्डुगात्रः । अम्बेति वाचं करुणं बुवाणः, परं समाश्लिष्य नरः क एषः ॥
Answer: राजकुमार सिद्धार्थ ने सारथी से पूछा, "यह व्यक्ति कौन है जिसका पेट बड़ा है, जिसका शरीर साँस लेने से काँप रहा है, जिसके कंधे और भुजाएँ ढीली हैं, और जिसका शरीर पतला और पीला पड़ा है? यह व्यक्ति 'हाय माता!' कहकर करुणा भरी आवाज में दूसरे का सहारा लेकर क्यों चिपका हुआ है?" यह दृश्य रोगी की पीड़ा और लाचारी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
In simple words: सिद्धार्थ ने सारथी से उस बीमार व्यक्ति की पहचान पूछी, जिसके शरीर में कमजोरी और पीड़ा के लक्षण स्पष्ट दिख रहे थे।

🎯 Exam Tip: रोगी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति का वर्णन करने वाले विशेषणों (जैसे स्थूलोदरः, कृशपाण्डुगात्रः) को ठीक से लिखें।

 

Question 8. (8) ततोऽब्रवीत् सारथिरस्य सौम्य!, धातुप्रकोपप्रभवः प्रवृद्धः । रोगाभिधानः सुमहाननर्थः, शक्रोऽपि येनैष कृतोऽस्वतन्त्रः ॥
Answer: सारथी ने सिद्धार्थ से कहा, "हे सौम्य! यह एक भयानक रोग है जो वात, पित्त और कफ जैसी शारीरिक धातुओं के असंतुलन से पैदा हुआ है और बहुत बढ़ गया है। यह इतना बुरा रोग है कि इसने तो देवताओं के राजा इंद्र को भी असहाय और दूसरों पर निर्भर कर दिया है।" सारथी ने बताया कि रोग एक व्यक्ति को पूरी तरह से पराधीन कर देता है। यह बताता है कि रोग किसी की शक्ति या पद नहीं देखता, वह सबको प्रभावित करता है।
In simple words: सारथी ने बताया कि यह व्यक्ति धातुओं के असंतुलन से उत्पन्न भयंकर रोग से पीड़ित है, जिसने इंद्र को भी असहाय कर दिया था।

🎯 Exam Tip: रोग के कारण और उसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएँ, विशेषकर इंद्र के असहाय होने का उदाहरण।

 

Question 9. (9) अथाब्रवीद् राजसुतः स सूतं, नरैश्चतुर्भिर्हियते क एषः ? दीनैर्मनुष्यैरनुगम्यमानो, यो भूषितोऽश्वास्यवरुध्यते च ॥
Answer: इसके बाद, राजकुमार सिद्धार्थ ने सारथी से पूछा, "हे सारथी! यह व्यक्ति कौन है जिसे चार लोग उठाकर ले जा रहे हैं? इसे फूलमालाओं और चंदन से सजाया गया है, यह साँस नहीं ले रहा है, और इसे कपड़े से ढका गया है। दुखी लोग इसके पीछे-पीछे चल रहे हैं।" यह दृश्य सिद्धार्थ को जीवन के अंतिम सत्य, मृत्यु से अवगत कराता है।
In simple words: सिद्धार्थ ने सारथी से पूछा कि कौन है वह व्यक्ति जिसे सजाया गया है, जो साँस नहीं ले रहा, और जिसे चार लोग उठाकर ले जा रहे हैं, जबकि दुखी लोग उसके पीछे चल रहे हैं।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में वर्णित मृतक के स्वरूप और उसके साथ चल रहे लोगों के भावों का स्पष्ट उल्लेख करें।

 

Question 10. (10) बुद्धीन्द्रियप्राणगुणैर्वियुक्तः, सुप्तो विसञ्जस्तृणकाष्ठभूतः । सम्बध्य संरक्ष्य च यत्नवद्भिः, प्रियाप्रियैस्त्यज्यते एष कोऽपि ॥
Answer: सारथी ने सिद्धार्थ को उत्तर दिया कि यह एक मृत व्यक्ति है। यह व्यक्ति बुद्धि, इंद्रियों और जीवन शक्ति (प्राणों) से अलग हो चुका है। यह हमेशा के लिए सो गया है, होश रहित हो गया है, और घास या लकड़ी के टुकड़े जैसा निर्जीव हो गया है। इसे प्रिय और अप्रिय सभी लोग मिलकर सावधानी से बाँधकर और सुरक्षित करके अब हमेशा के लिए छोड़ रहे हैं। मृत्यु के बाद शरीर केवल एक वस्तु बन जाता है, जिससे आत्मा निकल चुकी होती है।
In simple words: सारथी ने बताया कि वह मृत व्यक्ति है, जिसकी बुद्धि, इंद्रिय और प्राण शक्ति खत्म हो गई है। वह अब निर्जीव है और उसे अपने प्रियजन भी छोड़ रहे हैं।

🎯 Exam Tip: मृतक व्यक्ति की अवस्था का वर्णन करते हुए, यह स्पष्ट करें कि मृत्यु के बाद शरीर कैसे निर्जीव हो जाता है और आत्मा उससे अलग हो जाती है।

 

Question 11. (11) ततः प्रणेता वदति स्म तस्मै, सर्वप्रजानामयमन्तकर्ता। हीनस्य मध्यस्य महात्मनो वा, सर्वस्य लोके नियतो विनाशः ॥ (2012, 14]
Answer: सारथी ने सिद्धार्थ से कहा कि यह मृत्यु, सभी प्राणियों का अंत करने वाली है। इस संसार में चाहे कोई नीचा हो, मध्यम हो या महान हो, सभी का अंत निश्चित है। जो कोई भी इस संसार में जन्म लेता है, उसकी मृत्यु अवश्य होती है। कोई भी हमेशा जीवित नहीं रहता। मृत्यु एक अटल सत्य है जिसे कोई भी नहीं टाल सकता।
In simple words: सारथी ने कहा कि मृत्यु सभी जीवों का अंत करती है और संसार में सबका विनाश निश्चित है, चाहे वे किसी भी स्तर के हों।

🎯 Exam Tip: मृत्यु की सार्वभौमिकता और निश्चितता पर जोर दें, जिसमें सभी प्रकार के प्राणी शामिल हैं।

 

Question 12. (12) इति तस्य विपश्यतो यथावज्जगतोव्याधिजराविपत्तिदोषान् । बलयौवनजीवितप्रवृत्तौ विजगामात्मगतो मदः क्षणेन ॥
Answer: इस प्रकार, जब सिद्धार्थ ने संसार की बीमारियों, बुढ़ापे और मृत्यु जैसे दोषों को अच्छी तरह समझा, तो उनकी शक्ति, यौवन और जीवन के प्रति जो अहंकार था, वह क्षणभर में ही समाप्त हो गया। उन्हें यह महसूस हुआ कि वे भी एक सामान्य मनुष्य हैं, कोई राजकुमार नहीं। इन दृश्यों ने सिद्धार्थ के जीवन की दिशा बदल दी।
In simple words: सिद्धार्थ ने संसार के दुखों (रोग, बुढ़ापा, मृत्यु) को समझा, जिससे उनका बल, यौवन और जीवन का घमंड तुरंत खत्म हो गया।

🎯 Exam Tip: सिद्धार्थ के मन में आए परिवर्तन को स्पष्ट करें और बताएं कि कैसे सांसारिक दुखों ने उनका अहंकार मिटा दिया।

 

Question 13. (13) पुरुषैरपरैरदृश्यमानः पुरुषश्चोपससर्प भिक्षुवेषः ।। नरदेवसुतस्तमभ्यपृच्छद् वद कोऽसीति शशंस सोऽथ तस्मै ॥
Answer: दूसरे मनुष्यों को दिखाई न देने वाला एक भिक्षु वेशधारी पुरुष सिद्धार्थ के पास आया। राजकुमार सिद्धार्थ ने उससे पूछा, "तुम कौन हो, मुझे बताओ।" उसके बाद उस भिक्षु ने सिद्धार्थ को उत्तर दिया। यह दर्शा रहा है कि जब सिद्धार्थ के मन से अहंकार चला गया, तभी उन्हें यह दिव्य पुरुष दिखाई दिया। यह भिक्षु सिद्धार्थ को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करने वाला था।
In simple words: जब सिद्धार्थ का घमंड खत्म हुआ, तो एक भिक्षु वेशधारी पुरुष उनके पास आया। सिद्धार्थ ने उससे पूछा कि वह कौन है, और भिक्षु ने उत्तर दिया।

🎯 Exam Tip: भिक्षु के 'अदृश्य' होने के पीछे का अर्थ (अहंकार समाप्त होने पर दर्शन) समझाएँ।

 

Question 14. (14) नृपपुङ्गव ! जन्ममृत्युभीतः, श्रमणः प्रव्रजितोऽस्मि मोक्षहेतोः । जगति क्षयधर्मके मुमुक्षुर्मुगयेऽहं शिवमक्षयं पदं तत् ॥
Answer: भिक्षु ने सिद्धार्थ से कहा, "हे राजाओं में श्रेष्ठ! मैं जन्म और मृत्यु के भय से डरकर, मोक्ष पाने के लिए संन्यासी बन गया हूँ। इस नश्वर संसार में, मैं मोक्ष की इच्छा वाला होकर उस अविनाशी और कल्याणकारी पद को खोज रहा हूँ, जो कभी नष्ट नहीं होता।" भिक्षु का यह उत्तर सिद्धार्थ को जीवन के अंतिम लक्ष्य की ओर संकेत करता है।
In simple words: भिक्षु ने सिद्धार्थ को बताया कि वह जन्म-मृत्यु के भय से संन्यासी बना है और इस नश्वर संसार में अविनाशी मोक्ष पद की तलाश कर रहा है।

🎯 Exam Tip: भिक्षु के संन्यास के दो मुख्य कारणों (जन्म-मृत्यु का भय और मोक्ष की खोज) को स्पष्ट करें।

 

Question 15. (15) गगनं खगवद् गते च तस्मिन्, नृवरः सञ्जहृषे विसिपिये च । उपलभ्य ततश्च धर्मसञ्ज्ञामभिनिर्याणविधौ मतिं चकार ॥
Answer: जब वह भिक्षु पक्षी की तरह आकाश में चला गया, तो मनुष्यों में श्रेष्ठ राजकुमार सिद्धार्थ बहुत प्रसन्न हुए और आश्चर्यचकित भी हुए। तब उन्होंने धर्म का ज्ञान प्राप्त करके संन्यास लेने का विचार किया। इसका मतलब है कि भिक्षु से सही ज्ञान मिलने के बाद सिद्धार्थ बहुत खुश हुए और उन्होंने घर छोड़कर संन्यास ग्रहण करने का निश्चय कर लिया। यह घटना सिद्धार्थ के जीवन का एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।
In simple words: भिक्षु के आकाश में चले जाने पर सिद्धार्थ प्रसन्न और विस्मित हुए। उन्हें धर्म का ज्ञान हुआ और उन्होंने संन्यास लेने का निश्चय कर लिया।

🎯 Exam Tip: भिक्षु के जाने के बाद सिद्धार्थ के मन में आए सकारात्मक परिवर्तनों (प्रसन्नता, विस्मय, संन्यास का निश्चय) पर ध्यान दें।

सूक्तिपरक वाक्यांशों की व्याख्या

 

Question 1. (1) नाशः स्मृतीनां रिपुरिन्द्रियाणामेषा जरा नाम ययैष भग्नः । एषा जरा नाम ययैष भग्नः । [2010, 14]
Answer: यह सूक्ति कहती है कि बुढ़ापा याददाश्त को खत्म करता है और इंद्रियों का दुश्मन होता है, जिससे मनुष्य कमजोर हो जाता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, याददाश्त कमजोर होती जाती है, देखने-सुनने की शक्ति घटती है, और सोचने-समझने की क्षमता भी कम हो जाती है। बुढ़ापा जीवन का एक ऐसा चरण है जहाँ शरीर धीरे-धीरे अपनी क्षमता खोने लगता है।
In simple words: यह सूक्ति बताती है कि बुढ़ापा याददाश्त और इंद्रियों का दुश्मन है, जिससे व्यक्ति कमजोर हो जाता है।

🎯 Exam Tip: सूक्ति के मूल अर्थ को स्पष्ट करें और बुढ़ापे के कारण होने वाली शारीरिक व मानसिक कमजोरियों का उल्लेख करें।

 

Question 2. (2) शक्रोऽपि येनैष कृतोऽस्वतन्त्रः । [2006]
Answer: इस सूक्ति का अर्थ है कि रोग इतना शक्तिशाली होता है कि यह देवताओं के राजा इंद्र को भी अपने अधीन कर लेता है, यानी उन्हें भी असहाय बना देता है। सारथी ने सिद्धार्थ को बताया कि रोग एक ऐसी बीमारी है जिससे कोई बच नहीं सकता। यह सबको प्रभावित करता है, यहाँ तक कि सबसे शक्तिशाली इंद्र को भी। यह सिद्ध करता है कि रोग सभी को प्रभावित कर सकता है, चाहे वे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों।
In simple words: यह सूक्ति दर्शाती है कि रोग इतना प्रबल है कि यह इंद्र जैसे शक्तिशाली देवता को भी असहाय बना देता है।

🎯 Exam Tip: सूक्ति का अर्थ बताते हुए, रोग की सार्वभौमिकता और उसकी शक्ति को इंद्र के उदाहरण से समझाएँ।

 

Question 3. (3) सर्वस्य लोके नियतो विनाशः । । [2006, 08, 09, 10, 11, 13]
Answer: यह सूक्ति बताती है कि संसार में सभी चीज़ों का अंत निश्चित है। जो कुछ भी जड़ या चेतन इस दुनिया में बनता है, वह हमेशा नहीं रहता। हर वस्तु, चाहे वह कोई प्राणी हो, पेड़ हो या पर्वत, जो पैदा होता है, उसका अंत अवश्य होता है। यह जीवन का एक अपरिवर्तनीय नियम है जिसे कोई नहीं बदल सकता।
In simple words: यह सूक्ति कहती है कि संसार में हर चीज़ का विनाश निश्चित है, जो भी उत्पन्न होता है, वह एक दिन नष्ट हो जाता है।

🎯 Exam Tip: संसार की नश्वरता और जन्म के साथ मृत्यु की निश्चितता को इस सूक्ति का मुख्य भाव बताएँ।

श्लोक का संस्कृत-अर्थ

 

Question 1. (1) ततः कुमारो .......... निष्कम्प-निविष्ट-दृष्टिः ॥ (श्लोक 1) :
Answer: अस्मिन् श्लोके अश्वघोषः वदति यत्, सिद्धार्थः एकं वृद्धं पुरुषं अपश्यत्। सः वृद्धः जराग्रस्तः, अन्येभ्यः भिन्नः च आसीत्। सिद्धार्थः तं दृष्ट्वा विस्मितः अभवत्। सः सारथिं प्रति अकथयत्। एतत् दर्शनं सिद्धार्थस्य मनसि परिवर्तनम् आरब्धम्।
In simple words: सिद्धार्थः एकं वृद्धं पुरुषं अपश्यत्। सः सारथिं पृष्टवान्।

🎯 Exam Tip: श्लोक के संस्कृतार्थ को सरल संस्कृत वाक्यों में प्रस्तुत करें और मुख्य क्रियाकलाप पर ध्यान दें।

 

Question 2. (2) क एष भोः .......... प्रकृतिर्यदृच्छा ॥ (श्लोक 2)
Answer: अस्मिन् श्लोके सिद्धार्थः सारथिं पृच्छति। सः वदति, "भो सारथे! अयं जनः कः अस्ति? अस्य केशाः श्वेताः सन्ति, हस्ते दण्डः अस्ति, अङ्गानि शिथिलानि सन्ति। एषा दशा कथं आगता? किं एषा स्वभाविकी अस्ति अथवा आकस्मिकी?" सिद्धार्थस्य मनसि महती जिज्ञासा आसीत्।
In simple words: सिद्धार्थः सारथिं पृच्छति यत्, श्वेताः केशाः, दण्डहस्तः, शिथिलशरीरः अयं पुरुषः कः? एषा अवस्था किं स्वभाविकी अस्ति?

🎯 Exam Tip: प्रश्न के सभी हिस्सों का उत्तर संस्कृत में दें और सिद्धार्थ की जिज्ञासा को व्यक्त करें।

 

Question 3. (3) रूपस्य हर्जी .......... ययैष भग्नः ॥ (श्लोक 3) [2006]
Answer: सिद्धार्थस्य प्रश्नं श्रुत्वा सारथिः उत्तरं ददाति। सः वदति, "कुमार! अयं पुरुषः वृद्धावस्थायाः कारणेन भग्नः अस्ति। जरा रूपं हरति, बलं नाशयति, शोकं जनयति। एषा काम सुखं नाशयति, स्मृतिं च हरति। जरा इन्द्रियाणां शत्रुः अस्ति। जरा सर्वदुःखस्य मूलं अस्ति।" जरा जीवनस्य अनिवार्यं सत्यम् अस्ति।
In simple words: सारथिः वदति यत् जरा रूपं बलं च हरति, शोकं च जनयति। सा स्मृतीनां इन्द्रियाणां च शत्रुः अस्ति।

🎯 Exam Tip: बुढ़ापे के विनाशकारी प्रभावों को संस्कृत में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।

 

Question 4. (4) ततोऽब्रवीत् .......... कृतोऽस्वतन्त्रः ॥ (श्लोक 8)
Answer: अश्वघोषः कथयति यत् सारथिः सिद्धार्थं प्रति वदति, "हे सौम्य! अयं जनः रोगेण ग्रस्तः अस्ति। अस्य शरीरे धातवः दुर्बलाः अभवन्। रोगस्य प्रभावेण अयं जनः शक्तिहीनः जातः। अतः इन्द्रः अपि तं रक्षितुं न शक्नोति।" रोगः सर्वेषां जीवनं दुःखमयम् करोति।
In simple words: सारथिः वदति यत्, रोगेण कारणेन अयं जनः दुर्बलः जातः। इन्द्रः अपि तं रक्षितुं न शक्नोति।

🎯 Exam Tip: रोग की भयावहता और उसके द्वारा उत्पन्न असहायता को संस्कृत में प्रभावी ढंग से व्यक्त करें।

 

Question 5. (5) ततः प्रणेता .......... नियतो विनाशः ॥ (श्लोक 11) [2007, 08]
Answer: सारथिः सिद्धार्थं प्रति वदति, "भो राजकुमार! कालः सर्वेषां प्राणिनाम् अन्तकर्ता अस्ति। अस्मिन् संसारे, श्रेष्ठ, मध्यम, हीन वा सर्व जनानां विनाशः निश्चितः अस्ति। यः कश्चित् जायते, सः निश्चितं म्रियते। कोऽपि नित्यं न तिष्ठति।" मृत्युः जीवनस्य अन्तिमं सत्यम् अस्ति।
In simple words: सारथिः वदति यत्, कालः सर्वेषाम् अन्तकर्ता अस्ति। सर्व जनानां विनाशः निश्चितः अस्ति।

🎯 Exam Tip: संस्कृतार्थ में मृत्यु की सार्वभौमिकता और जीवन की नश्वरता को स्पष्ट शब्दों में व्यक्त करें।

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