UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 8 AdiShankaracharyah

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UP Board Textbook Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 8 आदि शंकराचार्य

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Class 10 Sanskrit Chapter 8 आदि शंकराचार्य Textbook Solutions with Answers

कक्षा 10 संस्कृत पाठ 8 हिंदी अनुवाद आदिशङ्कराचार्यः के प्रश्न उत्तर यूपी बोर्ड

परिचय

पाठ-सारांश

जन्म एवं वैराग्य

संन्यास-ग्रहण

लघु उत्तरीयप्रश्न

 

Question 1. शंकराचार्य का जन्म कब और कहाँ हुआ था? इनके माता-पिता का नाम भी बताइए ।
Answer: आदि शंकराचार्य का जन्म केरल प्रदेश के मालाबार प्रांत में सन् 788 ईस्वी में हुआ था। उनका जन्म पूर्णा नदी के किनारे शलक नामक गाँव में नम्बूदरी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम सुभद्रा देवी था। ये जानकारी हमें उनके प्रारंभिक जीवन के बारे में बताती है।
In simple words: शंकराचार्य का जन्म केरल के शलक गाँव में 788 ईस्वी में हुआ था। उनके पिता शिवगुरु और माता सुभद्रा थीं।

🎯 Exam Tip: जब जीवन-परिचय के प्रश्न हों, तो जन्म स्थान, जन्म वर्ष और माता-पिता का नाम स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. आचार्य शंकर क्यों प्रसिद्ध हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: आचार्य शंकर 'अद्वैत ब्रह्म' के सिद्धांत के कारण प्रसिद्ध हैं। यह सिद्धांत सिखाता है कि सारा संसार एक है और किसी में कोई भेद नहीं है। यह सोच सभी लोगों को भाईचारे से जोड़ती है और जाति, क्षेत्र या ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाती है। उन्होंने अज्ञान को दूर करने के लिए भारत के चारों कोनों में चार वेदान्तपीठों की स्थापना की। इसके साथ ही उन्होंने व्यास सूत्र, उपनिषदों और भगवद्गीता पर बहुत अच्छे भाष्य भी लिखे। इन कार्यों से वे हमेशा दुनिया भर में जाने जाते हैं। उन्होंने वेदों के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
In simple words: आचार्य शंकर अपने 'अद्वैत ब्रह्म' के सिद्धांत और भाईचारे की भावना के कारण प्रसिद्ध हैं। उन्होंने चार वेदपीठ बनाए और कई ग्रंथों पर भाष्य लिखे, जिससे अज्ञान दूर हुआ।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति की प्रसिद्धि के कारण बताते समय, उनके मुख्य योगदान और सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 3. गोविन्दपाद ने शंकर से क्या पूछा और शंकर ने क्या उत्तर दिया?
Answer: यति वेश में गोविन्दपाद ने शंकर से पूछा, “तुम कौन हो?” इसके जवाब में शंकर ने कहा, “मैं न तो मन हूँ, न बुद्धि हूँ, न अहंकार हूँ, न चित्त हूँ। मैं न कान हूँ, न जीभ हूँ, न प्राण हूँ, न आँख हूँ। मैं न आकाश हूँ, न धरती हूँ, न अग्नि हूँ, न हवा हूँ। मैं शुद्ध चेतना और आनंद का रूप हूँ, मैं शिव हूँ।” यह उत्तर उनके गहरे आत्मज्ञान को दर्शाता है।
In simple words: गोविन्दपाद ने शंकर से पूछा, 'तुम कौन हो?' शंकर ने कहा कि वे मन, बुद्धि या शरीर नहीं, बल्कि शुद्ध चेतना और आनंद स्वरूप शिव हैं।

🎯 Exam Tip: दार्शनिक संवादों में, उत्तर को मूल विचार के साथ सरल शब्दों में प्रस्तुत करें।

 

Question 4. आदि शंकराचार्य ने चार वेदपीठों की स्थापना कहाँ-कहाँ की और क्यों की ?
Answer: आचार्य शंकर ने जाति और क्षेत्र से जुड़े ऊँच-नीच के भेदभाव को खत्म करने के लिए भारत के चारों कोनों में चार वेदपीठों की स्थापना की। ऐसा करके उन्होंने देश में एकता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत किया। ये चार पीठ हैं: मैसूर प्रदेश में श्रृंगेरीपीठ, पुरी में गोवर्धनपीठ, बदरिकाश्रम में ज्योतिष्पीठ, और द्वारका में शारदा पीठ है। इन पीठों का उद्देश्य वैदिक धर्म का प्रचार करना था।
In simple words: शंकराचार्य ने जाति और क्षेत्र के भेदभाव को मिटाने और राष्ट्रीय भावना बढ़ाने के लिए चार वेदपीठ स्थापित किए। ये पीठ श्रृंगेरी (मैसूर), गोवर्धन (पुरी), ज्योतिष्पीठ (बदरिकाश्रम) और शारदा (द्वारका) में हैं।

🎯 Exam Tip: वेदपीठों के नाम और उनके स्थानों के साथ-साथ उनके स्थापना के उद्देश्य को भी याद रखें।

 

Question 5. शंकराचार्य के संन्यास-ग्रहण की घटना का वर्णन कीजिए।
Answer: एक बार शंकर पूर्णा नदी में नहा रहे थे, तभी एक बड़े मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। उस मगरमच्छ ने उनका पैर तब तक नहीं छोड़ा जब तक उनकी माता ने उन्हें संन्यास लेने की अनुमति नहीं दे दी। माता की आज्ञा मिलने और मगरमच्छ से मुक्ति पाने के बाद, शंकर ने संन्यास ग्रहण कर लिया। यह घटना उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ थी।
In simple words: शंकर जब पूर्णा नदी में स्नान कर रहे थे, तो एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। उनकी माता ने संन्यास की आज्ञा दी, तब जाकर शंकर मगरमच्छ से छूटे और उन्होंने संन्यास ले लिया।

🎯 Exam Tip: किसी भी घटना का वर्णन करते समय, मुख्य पात्र, स्थान, कारण और परिणाम को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 6. शंकराचार्य ने काशी में किन-किन ग्रन्थों का भाष्य लिखा और किससे शास्त्रार्थ करके पराजित
Answer: शंकराचार्य ने काशी में व्यास-सूत्रों, उपनिषदों और श्रीमद्भगवद्गीता पर भाष्य लिखे। उन्होंने काशी में प्रसिद्ध विद्वान् मण्डन मिश्र को शास्त्रार्थ में हराया। हालांकि, पहली बार में वे मण्डन मिश्र की पत्नी से शास्त्रार्थ में हार गए थे। बाद में, उन्होंने मण्डन मिश्र की पत्नी को भी शास्त्रार्थ में पराजित किया। उन्होंने अनेक धर्मग्रंथों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
In simple words: शंकराचार्य ने काशी में व्यास-सूत्रों, उपनिषदों और भगवद्गीता पर भाष्य लिखे। उन्होंने मण्डन मिश्र को शास्त्रार्थ में हराया, और बाद में उनकी पत्नी को भी पराजित किया।

🎯 Exam Tip: प्रमुख ग्रंथों के नाम और महत्वपूर्ण शास्त्रार्थों को याद रखना इस प्रकार के प्रश्नों के लिए आवश्यक है।

 

Question 7. स्वतः प्रमाणं परतः प्रमाणं, कीराङ्गना यत्र गिरो गिरन्ति । द्वारस्थनीडान्तरसन्निरुद्धाः, अवेहि तधाम हि मण्डनस्य ॥ उपरिलिखित श्लोक किसने, किससे और क्यों कहा?
Answer: ऊपर दिया गया श्लोक एक मछुआरे की पत्नी (धीवरी) ने शंकराचार्य से कहा था। धीवरी ने यह इसलिए कहा क्योंकि शंकराचार्य ने उससे मण्डन मिश्र के घर का रास्ता पूछा था। इस श्लोक के माध्यम से धीवरी ने मण्डन मिश्र के घर का पता बताया।
In simple words: यह श्लोक धीवरी ने शंकराचार्य से तब कहा था, जब शंकराचार्य ने उससे मण्डन मिश्र के घर का पता पूछा था।

🎯 Exam Tip: श्लोक से जुड़े प्रश्नों में, यह बताना महत्वपूर्ण है कि किसने कहा, किससे कहा, और कहने का कारण क्या था।

 

Question 8. आदि शंकराचार्य का जीवन-परिचय संक्षेप में लिखिए।
Answer: आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में केरल के मालाबार प्रांत के शलक गाँव में पूर्णा नदी के किनारे हुआ था। उनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम सुभद्रा था। वे आठ साल की उम्र तक सभी वेदों और वेदांगों के जानकार बन गए थे। बचपन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था। एक बार जब वे पूर्णा नदी में स्नान कर रहे थे, तो एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। माता की अनुमति मिलने पर ही मगरमच्छ ने उन्हें छोड़ा, और तब उन्होंने संन्यास ले लिया। उन्होंने गोविन्दपाद से संन्यास की दीक्षा ली और वेदान्त का ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने काशी में मण्डन मिश्र और उनकी पत्नी को शास्त्रार्थ में हराया, और प्रयाग में कुमारिल भट्ट को भी पराजित किया। उन्होंने व्यास-सूत्रों, उपनिषदों और भगवद्गीता पर भाष्य लिखे। राष्ट्रीय एकता के लिए उन्होंने भारत में चार वेदान्तपीठों की स्थापना भी की। केवल 32 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। उनका जीवन धर्म और ज्ञान के प्रचार को समर्पित था।
In simple words: शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में केरल के शलक गाँव में हुआ था। उनके माता-पिता शिवगुरु और सुभद्रा थे। उन्होंने कम उम्र में ही वेदों का ज्ञान प्राप्त किया और माता की अनुमति से संन्यास लिया। उन्होंने गोविन्दपाद से शिक्षा ली, कई विद्वानों को शास्त्रार्थ में हराया, और चार वेदान्तपीठ स्थापित किए। 32 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया।

🎯 Exam Tip: संक्षिप्त जीवन-परिचय लिखते समय, प्रमुख घटनाओं और योगदानों को क्रम से प्रस्तुत करें।

 

Question 9. वह महान् कर्मयोगी कौन थे, जिन्होंने वैदिक धर्म की पुनः स्थापना करायी?
Answer: आदि शंकराचार्य ही वे महान कर्मयोगी थे, जिन्होंने वैदिक धर्म को फिर से स्थापित किया। उन्होंने उस समय के धार्मिक भ्रम को दूर करके वैदिक सिद्धांतों को पुनः स्थापित किया।
In simple words: आदि शंकराचार्य ही वे महान व्यक्ति थे जिन्होंने वैदिक धर्म को दोबारा स्थापित किया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक शख्सियतों के योगदानों को स्पष्ट और संक्षेप में बताएं।

 

Question 10. शंकर ने किससे संन्यास-दीक्षा ली एवं वेदान्त-तत्त्व का ज्ञान प्राप्त किया?
Answer: शंकर ने गौड़पाद के शिष्य गोविन्दपाद से संन्यास की दीक्षा ली और उन्हीं से वेदान्त का गहरा ज्ञान प्राप्त किया। गोविन्दपाद उनके गुरु थे जिन्होंने उन्हें आध्यात्मिक राह दिखाई।
In simple words: शंकर ने गौड़पाद के शिष्य गोविन्दपाद से संन्यास की दीक्षा ली और वेदान्त का ज्ञान सीखा।

🎯 Exam Tip: किसी भी महान व्यक्तित्व के गुरु और उनसे प्राप्त शिक्षा का उल्लेख करना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 10 Sanskrit Chapter 8 आदि शंकराचार्य

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