UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 2 Karuniko Jimutavahanah

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UP Board Textbook Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 2 करुणिको जिमुतवाहनह

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कथा - नाटक कौमुदी कक्षा 10 परिचय

यह पाठ महाकवि हर्ष द्वारा लिखे गए नाटक 'नागानन्द' से लिया गया है। इस नाटक में जीमूतवाहन नामक विद्याधर राजकुमार ने खुद को कुर्बान करके शंखचूड नाम के साँप को गरुड़ से बचाया है। इस नाटक में कुल पाँच अंक हैं। इस पर बौद्ध धर्म का असर दिखता है। बौद्ध धर्म में जीवों को न मारने (अहिंसा) पर बहुत जोर दिया जाता है। यह नाटक भी अहिंसा, खुद को दूसरों के लिए बलिदान करने और दूसरों की मदद करने का उदाहरण दिखाता है। नाटक की भाषा बहुत आसान है और यह भावनाओं के हिसाब से भी बहुत खास है। इसमें शांति और करुणा के भाव ज्यादा हैं। दूसरों की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है।
In simple words: यह पाठ 'नागानन्द' नाटक से है। इसमें जीमूतवाहन ने एक साँप को बचाने के लिए अपना जीवन दिया। यह नाटक अहिंसा और परोपकार सिखाता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी नाटक या पाठ के परिचय में उसके लेखक, मुख्य कहानी और केंद्रीय भाव को याद रखना महत्वपूर्ण होता है।

 

जीमूतवाहनः पाठ-सारांश

 

जीमूतवाहन की खोज

जीमूतवाहन समुद्र तट देखने की इच्छा से वहाँ गया था। जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटा, तो राजा विश्वावसु ने द्वारपाल को उसके घर भेजा यह जानने के लिए कि जीमूतवाहन वहाँ पहुँचा या नहीं। द्वारपाल ने वहाँ जाकर देखा कि जीमूतवाहन अपने पिता जीमूतकेतु की सेवा अपनी पत्नी और पुत्रवधू के साथ कर रहा था। उसने बताया कि राजा विश्वावसु जीमूतवाहन के बारे में जानने के लिए आए हैं, क्योंकि उन्हें उसकी कोई खबर नहीं मिली थी। यह सुनकर जीमूतकेतु, उसकी पत्नी और पुत्रवधू बहुत चिंतित हो गए कि जीमूतवाहन कहाँ गया होगा और कहीं उसे कुछ बुरा तो नहीं हुआ। उसी समय उनका बायाँ नेत्र भी फड़कने लगा, जो अशुभ संकेत माना जाता है।
In simple words: जीमूतवाहन समुद्र तट गया और देर तक नहीं लौटा। राजा विश्वावसु ने द्वारपाल को उसे खोजने भेजा। जीमूतवाहन के परिवार को उसकी चिंता हुई और उन्हें अशुभ संकेत भी मिले।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों के उद्देश्यों और शुरुआती घटनाओं को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि ये अक्सर कथा की दिशा तय करते हैं।

 

चूडामणि की प्राप्ति

तभी एक चूडामणि, जिसमें गीला मांस और बाल लगे थे, उनके पैरों पर आकर गिरी। वे इसे जीमूतवाहन का समझकर दुखी हो गए। लेकिन द्वारपाल ने उन्हें शांत करते हुए कहा कि ऐसी चूडामणियाँ गरुड़ द्वारा खाए गए साँपों के शरीर से गिरती हैं। यह सुनकर जीमूतकेतु ने अपने पुत्र जीमूतवाहन का पता लगाने के लिए प्रतिहार को उसके ससुर के घर भेजा।
In simple words: एक चूडामणि गिरने पर जीमूतवाहन के परिवार को चिंता हुई। द्वारपाल ने उन्हें समझाया कि यह साँपों के अवशेष हैं। फिर जीमूतकेतु ने अपने पुत्र को खोजने के लिए अपने दामाद के घर द्वारपाल को भेजा।

🎯 Exam Tip: कहानी में किसी भी प्रतीक या घटना (जैसे चूडामणि का गिरना) के महत्व को समझना चाहिए।

 

शंखचूड का आगमन

द्वारपाल के जाने के बाद, लाल वस्त्र पहने शंखचूड नामक एक साँप वहाँ आया। उसे और चूडामणि को देखकर सभी निश्चिंत हो गए। तब शंखचूड ने कहा कि यह चूडामणि उसकी नहीं है। उसे वासुकि की शर्त के अनुसार गरुड़ के भोजन के लिए भेजा गया था। लेकिन किसी दयालु विद्याधर ने अपने प्राण देकर उसकी रक्षा की है। यह सोचकर कि वह उपकार करने वाला जीमूतवाहन ही है, जीमूतवाहन के माता-पिता और पत्नी तीनों बेहोश हो गए। दूसरों के लिए अपना जीवन समर्पित करना एक महान त्याग का उदाहरण है।
In simple words: शंखचूड नामक साँप आया और उसने बताया कि उसे गरुड़ के भोजन के लिए भेजा गया था, लेकिन किसी ने उसकी जान बचाई। जीमूतवाहन के माता-पिता यह जानकर बेहोश हो गए कि जीमूतवाहन ने ही उसकी जान बचाई है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के आगमन और उनके कथनों पर ध्यान दें, क्योंकि वे कहानी में महत्वपूर्ण मोड़ लाते हैं।

 

उन्हें उस हालत में देखकर शंखचूड रोने लगा और सोचने लगा कि ये दोनों निश्चित रूप से उस महान व्यक्ति के माता-पिता हैं। उसने अप्रिय वचन कहकर उनके हृदय को दुखी किया है। अब उसका कर्तव्य है कि वह अपने प्राण दे या उन दोनों को धैर्य दिलाए। अंततः उसने उन्हें धैर्य दिलाने का निश्चय किया। दूसरों की पीड़ा देखकर दुखी होना और अपनी गलती स्वीकार करना एक अच्छे व्यक्ति की निशानी है।
In simple words: शंखचूड ने जीमूतवाहन के माता-पिता को दुखी देखकर अपनी गलती महसूस की। उसने उन्हें दिलासा देने का फैसला किया।

🎯 Exam Tip: भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ और संकल्प अक्सर कहानी में पात्रों के स्वभाव और उनके अगले कदमों को दर्शाते हैं।

 

गरुड़ के पास जाना

इसके बाद शंखचूड ने उन्हें तसल्ली देते हुए कहा कि शायद गरुड़ ने उसे साँप न समझा हो और उसे न खाया हो। इसलिए, खून के निशानों का पीछा करते हुए वे गरुड़ के पास चलते हैं। शंखचूड के पीछे-पीछे जीमूतवाहन के माता-पिता भी गरुड़ के पास जाते हैं। उम्मीद और धैर्य के साथ खोज जारी रखना अक्सर अनिश्चित स्थितियों में मदद करता है।
In simple words: शंखचूड ने जीमूतवाहन के माता-पिता को धीरज बंधाया। उन्होंने खून के निशानों का पीछा करते हुए गरुड़ के पास जाने का फैसला किया।

🎯 Exam Tip: किसी भी खोज या यात्रा के कारण और उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

 

अपने सामने पड़े जीमूतवाहन के पास गरुड़ बैठा था और सोच रहा था कि जन्म के बाद से उसने केवल साँपों को ही खाया है, लेकिन यह महान प्राणी कौन है, जो खाए जाने के बाद भी खुश दिख रहा है। तब गरुड़ उसे खाने से रोककर पूछता है कि वह कौन है? जीमूतवाहन कहता है कि पहले वह उसके मांस और खून से अपनी भूख मिटा ले, लेकिन गरुड़ उसका मांस खाने का विचार छोड़ देता है। दूसरों की निस्वार्थता अक्सर शक्तिशाली लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर देती है।
In simple words: गरुड़ जीमूतवाहन को खा रहा था, लेकिन उसे खुश देखकर हैरान हुआ। उसने जीमूतवाहन से पूछा कि वह कौन है और फिर उसे खाने का विचार छोड़ दिया।

🎯 Exam Tip: संवाद (बातचीत) में वक्ता और श्रोता की पहचान करना और संवाद का मुख्य बिंदु समझना महत्वपूर्ण है।

 

इसके बाद शंखचूड गरुड़ के पास जाकर कहता है कि यह साँप नहीं है; इसलिए तुम इसे छोड़कर उसे ही खाओ, क्योंकि पहले की शर्त के अनुसार वासुकि ने उसे ही खाने के लिए भेजा है। अपने वचन का पालन करना और दूसरों के लिए बलिदान देना एक सच्चे चरित्र की निशानी है।
In simple words: शंखचूड गरुड़ के पास गया और कहा कि जीमूतवाहन साँप नहीं है। उसने गरुड़ से जीमूतवाहन को छोड़कर उसे खाने के लिए कहा, क्योंकि वह गरुड़ का भोजन था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के त्याग और समर्पण को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए।

 

जीमूतकेतु का आगमन

उसी समय जीमूतवाहन के पिता जीमूतकेतु, उसकी माता और पत्नी के साथ वध-स्थल पर पहुँच जाते हैं। जीमूतवाहन उन्हें देखकर शंखचूड से कहता है कि वह अपने शरीर को चादर से ढक ले, क्योंकि उसे डर था कि उसके माता-पिता उसे इस हालत में देखकर तुरंत अपने प्राण त्याग देंगे। माता-पिता के प्रति प्रेम और सम्मान दर्शाना एक पुत्र का कर्तव्य है।
In simple words: जीमूतवाहन के माता-पिता और पत्नी वध-स्थल पर पहुँचे। जीमूतवाहन ने शंखचूड से अपना शरीर ढकने को कहा, क्योंकि उसे डर था कि उसके माता-पिता उसे देखकर जान दे देंगे।

🎯 Exam Tip: कहानी में प्रमुख पात्रों के संबंधों और उनके भावनात्मक लगाव को समझना आवश्यक है।

 

जीमूतवाहन की मृत्यु

इसके बाद जीमूतकेतु पत्नी और पुत्रवधू के साथ वहाँ आते हैं। गरुड़ जीमूतकेतु को आया देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा होता है। पहले तो जीमूतवाहन को देखकर उसके माता-पिता खुश होते हैं, लेकिन जब जीमूतवाहन के उठने पर उसकी चादर गिर जाती है और जीमूतवाहन खुद बेहोश हो जाता है, तो उसकी यह हालत देखकर उसके माता-पिता और पत्नी भी बेहोश हो जाते हैं। जीमूतवाहन की माता लोकपालों से अमृत की वर्षा करने के लिए प्रार्थना करती हैं। गरुड़ इंद्र से प्रार्थना करके अमृत लाने और पहले खाए गए नागों को जीवित करने के लिए चला जाता है। त्याग और बलिदान के बाद भी प्रेम हमेशा बना रहता है।
In simple words: जीमूतकेतु के आने पर गरुड़ शर्मिंदा हुआ। जीमूतवाहन की हालत देखकर उसके माता-पिता और पत्नी बेहोश हो गए। जीमूतवाहन की माँ ने लोकपालों से अमृत की प्रार्थना की। गरुड़ अमृत लाने और सभी नागों को जीवित करने के लिए गया।

🎯 Exam Tip: कहानी के मोड़ बिंदुओं को पहचानें, जैसे जीमूतवाहन की मृत्यु और उसके बाद की घटनाएँ, जो कहानी को नया दिशा देती हैं।

 

जीमूतवाहन का जीवित होना

इसके बाद देवी पार्वती जीमूतवाहन पर जल छिड़ककर उसे जीवित करती हैं। सभी पार्वती के चरणों में गिरते हैं। उसी समय गरुड़ अमृत की वर्षा करके जीमूतवाहन और सभी नागों को जीवित करता है। इस तरह सभी नाग जीवित हो जाते हैं। दैवीय हस्तक्षेप अक्सर कहानी में न्याय और समाधान लाता है।
In simple words: पार्वती ने जीमूतवाहन को जल छिड़ककर जीवित किया। गरुड़ ने अमृत वर्षा करके जीमूतवाहन और सभी नागों को भी जीवित कर दिया।

🎯 Exam Tip: कहानी के अंतिम समाधान और उसमें दैवीय या चमत्कारी हस्तक्षेप की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है।

 

इस नाटक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों के प्राणों की रक्षा के लिए हमें अपने प्राणों की बाजी लगाने में भी संकोच नहीं करना चाहिए, क्योंकि परोपकार सबका कल्याण करने वाला होता है। हमें किसी भी कार्य को करने से पहले अच्छी तरह सोचना चाहिए और किए गए बुरे काम का प्रायश्चित्त अवश्य करना चाहिए। परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है।
In simple words: हमें इस नाटक से यह सीखने को मिलता है कि दूसरों की जान बचाने के लिए हमें अपना जीवन भी दांव पर लगाने से नहीं डरना चाहिए। परोपकार सबसे बड़ा धर्म है और हमें अपने गलत कामों का प्रायश्चित्त करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: किसी भी पाठ से मिलने वाली नैतिक शिक्षा या संदेश को स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में व्यक्त करने की तैयारी रखें।

 

जीमूत वाहन कश्यप पुत्र अस्ति चरित्र-चित्रण

 

जीमूतवाहन विद्याधर जाति का था और राजा जीमूतकेतु का पुत्र था। उसकी पत्नी का नाम मलयवती था। वह एक परोपकारी, दयालु, माता-पिता का भक्त और असाधारण व्यक्तित्व वाला प्राणी था। उसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
In simple words: जीमूतवाहन विद्याधर जाति का एक राजकुमार था, जो बहुत दयालु और अपने माता-पिता का सम्मान करता था।

🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण करते समय पात्र की मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

 

1. त्यागमय जीवन

जीमूतवाहन का जीवन त्याग से भरा था। गरुड़ और वासुकि के बीच एक शर्त थी कि गरुड़ के भोजन के लिए हर दिन एक साँप भेजा जाएगा। शंखचूड नामक साँप की बारी आने पर उसकी माँ के रोने की आवाज सुनकर, जीमूतवाहन ने शंखचूड के प्राणों को बचाने के लिए लाल वस्त्र पहने और वध-स्थल पर गरुड़ के पास चला गया। गरुड़ के रक्त पीने के बाद भी वह थोड़ा भी विचलित नहीं हुआ, जो उसके महान त्याग को दर्शाता है। यह दिखाता है कि वह कितना निस्वार्थ था।
In simple words: जीमूतवाहन ने शंखचूड साँप की जान बचाने के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया। वह बिना डरे गरुड़ के पास गया और अपने त्याग का अद्भुत उदाहरण दिया।

🎯 Exam Tip: त्याग और निस्वार्थता जैसे गुणों को उदाहरण सहित समझाना चाहिए।

 

2. निर्भीक

जीमूतवाहन एक निडर व्यक्ति था। वह गरुड़ द्वारा खाए जाने के लिए जरा भी नहीं डरा। गरुड़ द्वारा पेट फाड़ दिए जाने पर भी उसके चेहरे पर कोई उदासी नहीं थी। उसने गरुड़ से कहा कि वह उसके खून और मांस से अपनी भूख मिटा ले। यह उसकी बहादुरी दिखाता है।
In simple words: जीमूतवाहन बिल्कुल निडर था। वह अपनी जान देने से नहीं डरा और गरुड़ को अपनी भूख मिटाने के लिए कहा।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के निर्भीक स्वभाव को दर्शाने के लिए उसके कार्यों और प्रतिक्रियाओं का उल्लेख करें।

 

3. मातृ-पितृभक्त

जीमूतवाहन अपने माता-पिता का बहुत सम्मान करता था। वह उन्हें दुखी नहीं देखना चाहता था। इसीलिए, वध-स्थल पर आए माता-पिता को देखकर उसने शंखचूड से अपना शरीर चादर से ढकने को कहा, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि वे उसकी खराब हालत देखें। घायल होने पर भी वह उनका अभिवादन करने के लिए उठता है। यह उसका मातृ-पितृभक्त होना दर्शाता है।
In simple words: जीमूतवाहन अपने माता-पिता का बहुत भक्त था। उसने उन्हें अपनी खराब हालत नहीं दिखाने के लिए खुद को ढका और घायल होने पर भी उनका सम्मान किया।

🎯 Exam Tip: मातृ-पितृभक्ति को समझाने के लिए पात्र के कार्यों और उसके विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

4. दयालु

जीमूतवाहन स्वभाव से बहुत दयालु था। वह किसी का भी कष्ट नहीं देख पाता था। शंखचूड की माँ को रोते हुए देखकर वह गरुड़ का भोजन बनने के लिए खुद वध-स्थल पर पहुँच गया और उसे मृत्यु से बचा लिया। दूसरों की मदद करने का भाव उसकी करुणा को दिखाता है।
In simple words: जीमूतवाहन बहुत दयालु था। उसने शंखचूड की माँ का दुख देखकर, खुद गरुड़ का भोजन बनने का फैसला किया और शंखचूड की जान बचाई।

🎯 Exam Tip: दयालुता को दर्शाने के लिए पात्र द्वारा किए गए बलिदान और सहायता के कार्यों का वर्णन करें।

 

5. प्रभावशाली

जीमूतवाहन एक प्रभावशाली युवक था। शंखचूड उसके महान त्याग से प्रभावित होता है और गरुड़ पर भी उसका ऐसा प्रभाव पड़ता है कि वह हमेशा के लिए हिंसा छोड़ देता है, अहिंसक बन जाता है, और सभी नागों को जीवित करने के लिए अमृत की वर्षा करता है। एक व्यक्ति का अच्छा व्यवहार दूसरों को भी बदल सकता है।
In simple words: जीमूतवाहन इतना प्रभावशाली था कि उसके त्याग से शंखचूड और गरुड़ दोनों प्रभावित हुए। गरुड़ अहिंसक बन गया और उसने सभी नागों को जीवित कर दिया।

🎯 Exam Tip: पात्र के प्रभाव को दर्शाने के लिए उसके कार्यों के दूसरों पर पड़े परिणामों का उल्लेख करें।

 

6. विनयशील

जीमूतवाहन विनम्र और सुशील था। वह सभी के साथ विनम्रता से व्यवहार करता था और अपने व्यवहार से किसी को भी कष्ट नहीं देना चाहता था। इसी गुण के कारण उसके पिता और ससुर दोनों उससे बहुत प्यार करते थे। विनम्रता और सम्मान व्यक्ति के रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।
In simple words: जीमूतवाहन विनम्र और सुशील था। वह किसी को दुख नहीं देना चाहता था, इसलिए उसके माता-पिता और ससुर उसे बहुत प्यार करते थे।

🎯 Exam Tip: विनयशीलता जैसे गुणों को समझाने के लिए पात्र के व्यवहार और दूसरों के साथ उसके संबंधों का जिक्र करें।

 

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि जीमूतवाहन त्यागी, परोपकारी, मातृ-पितृभक्त, दयालु और प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी है।
In simple words: जीमूतवाहन एक त्यागी, परोपकारी, माता-पिता के भक्त, दयालु और प्रभावशाली व्यक्ति था।

🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण के अंत में एक संक्षिप्त निष्कर्ष देना हमेशा अच्छा होता है जो सभी गुणों को सारांशित करता है।

 

जीमूतवाहन कस्य पुत्र अस्ति गरुड़

गरुड़ पक्षियों का राजा और भगवान विष्णु का वाहन है, ऐसा पुराणों में माना जाता है। गरुड़ का सबसे पसंदीदा भोजन साँप है। प्रस्तुत नाटक के अंश में भी उसका इसी रूप में वर्णन किया गया है। उसकी चारित्रिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
In simple words: गरुड़ पक्षियों का राजा और भगवान विष्णु का वाहन है। उसे साँप खाना बहुत पसंद था, और इस कहानी में भी उसे ऐसा ही दिखाया गया है।

🎯 Exam Tip: पौराणिक पात्रों का परिचय देते समय उनके महत्व और मुख्य विशेषताओं को बताएं।

 

1. दयालु

गरुड़ मांसाहारी जीव था, फिर भी उसमें दया का भाव था। जीमूतवाहन को अपने भोजन के रूप में देखकर उसके हृदय में दया जागी और उसने उसे खाने से रोककर उसका परिचय पूछा। जीमूतवाहन की मृत्यु पर उसके माता-पिता और पत्नी को बेहोश देखकर वह दुखी हो गया। इंद्र से अमृत वर्षा करवाकर सभी साँपों को जीवित कराने के पुण्य कार्य से भी उसकी दयालुता का पता चलता है। दूसरों के दुख को समझना और उसके प्रति करुणा दिखाना एक महान गुण है।
In simple words: गरुड़ एक मांसाहारी होते हुए भी दयालु था। उसने जीमूतवाहन पर दया की, उसे खाने से रोका और जीमूतवाहन के माता-पिता के दुख को देखकर सभी साँपों को अमृत से जीवित कराया।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र की दयालुता को दर्शाने के लिए उसके कार्यों और उसके परिणामस्वरूप हुए परिवर्तनों का उदाहरण दें।

 

2. बलशाली

गरुड़ एक शक्तिशाली पक्षी था। भगवान विष्णु का वाहन होने के कारण उसकी शक्ति का भी संकेत मिलता है। दूसरे साँप जाति का नाश करने और साँप राजा वासुकि द्वारा उससे समझौता कर खुद उसका भोजन उपलब्ध कराने के प्रसंग से भी उसकी शक्ति की पुष्टि होती है। गरुड़ का बल देवताओं के स्तर का था।
In simple words: गरुड़ बहुत बलशाली पक्षी था। वह भगवान विष्णु का वाहन था और उसने कई साँपों का नाश किया था। साँप राजा वासुकि ने भी उससे समझौता किया था, जो उसकी शक्ति को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: पात्र की शक्ति को दर्शाने के लिए उसके शारीरिक गुणों या उसके द्वारा किए गए शक्तिशाली कार्यों का उल्लेख करें।

 

3. प्रायश्चित्त करने वाला

साँपों के राजा वासुकि की प्रार्थना पर उसने साँपों के अंधाधुंध विनाश को रोक दिया और अपने भोजन के लिए हर दिन एक साँप देने के लिए वासुकि से कहा। जीमूतवाहन के प्रसंग में उसे अपने किए पर पश्चात्ताप हुआ और उसने प्रायश्चित्त के लिए इंद्र से अमृत वर्षा कराकर सभी साँपों को फिर से जीवित कर दिया। साथ ही, प्रायश्चित्त के तौर पर वह हमेशा के लिए अहिंसक भी बन गया। अपनी गलतियों को सुधारना और दूसरों के प्रति दयालु होना पश्चात्ताप का सही अर्थ है।
In simple words: गरुड़ ने अपनी गलती का प्रायश्चित्त किया। उसने साँपों को मारना बंद कर दिया, सभी मरे हुए साँपों को जीवित कराया और खुद भी हमेशा के लिए अहिंसक बन गया।

🎯 Exam Tip: प्रायश्चित्त की प्रक्रिया को स्पष्ट करें, जिसमें गलती का एहसास, सुधार के लिए कार्रवाई और भविष्य में परिवर्तन शामिल हों।

 

4. गुणग्राही और विवेकशील

गरुड़ एक गुणग्राही पक्षी था। जीमूतवाहन के त्याग, परोपकार और आत्म-बलिदान के गुणों को देखकर उसका हृदय पिघल गया। उसके गुणों से प्रभावित होकर उसने उसे खाना छोड़ दिया और उसका परिचय पूछा। अंततः उसने अपने कर्मों की गलतियों पर पश्चात्ताप किया और सभी साँपों को जीवित करा दिया। यह तथ्य उसके गुणग्राही और विवेकशील होने को दर्शाता है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि गरुड़ समझौतावादी, सिद्धांतवादी, विवेकशील, गुणग्राही, क्षमाशील, दयालु और पराक्रमी पक्षी है। दूसरे के अच्छे गुणों को पहचानना और अपनी गलती स्वीकार करना विवेक का लक्षण है।
In simple words: गरुड़ ने जीमूतवाहन के अच्छे गुणों को समझा और अपनी गलतियों पर पश्चात्ताप किया। उसने साँपों को जीवित कराया और एक समझदार, दयालु पक्षी के रूप में बदल गया।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के गुणग्राही और विवेकशील होने के प्रमाण के रूप में उसके निर्णय और उनके परिणामों को बताएं।

 

शंखचूड

शंखचूड एक गुणग्राही साँप था, जिसे साँप राजा वासुकि के समझौते के अनुसार गरुड़ का भोजन बनने के लिए भेजा गया था। उसके माता-पिता को उससे बहुत प्यार था। उसकी चारित्रिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
In simple words: शंखचूड एक अच्छा साँप था, जिसे गरुड़ के भोजन के लिए भेजा गया था। उसके माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे।

🎯 Exam Tip: पात्र के मूल उद्देश्य और उसके परिवार के प्रति उसके लगाव को रेखांकित करें।

 

1. दयावान्

शंखचूड एक दयावान साँप था। वह दूसरों के दुखों को सहन नहीं कर पाता था। जीमूतवाहन के माता-पिता और उसकी पत्नी की दुखद स्थिति को देखकर उसका हृदय दया से भर गया। वह खुद को कोसने लगा कि उसने यह क्या कर दिया।
In simple words: शंखचूड बहुत दयालु साँप था। उसने जीमूतवाहन के माता-पिता का दुख देखकर खुद को बहुत बुरा महसूस किया।

🎯 Exam Tip: दयावान चरित्र को दर्शाने के लिए पात्र की भावनाओं और दूसरों के प्रति उसकी सहानुभूति का वर्णन करें।

 

2. बुद्धिमान्

जीमूतवाहन के माता-पिता जब उसके द्वारा सुनाई गई कहानी को सुनकर बेहोश हो जाते हैं, तो वह समझ जाता है कि ये दोनों उसी उपकारी (जीमूतवाहन) के माता-पिता हैं। उसकी चेतना लौटने पर वह उनसे कहता है कि गरुड़ ने जीमूतवाहन को साँप न होने के कारण शायद न खाया हो और वह जीवित हो। हमें खून के निशानों का पीछा करते हुए उसकी खोज करनी चाहिए। अंततः वह उसे खोजने में सफल भी हो जाता है। ये दोनों घटनाएँ उसके बुद्धिमान होने का प्रमाण देती हैं। समस्या को समझने और समाधान खोजने की क्षमता बुद्धिमानी है।
In simple words: शंखचूड बहुत बुद्धिमान था। उसने जीमूतवाहन के माता-पिता की हालत देखकर उन्हें पहचाना और जीमूतवाहन को खोजने का सही तरीका सुझाया, जिससे वह उसे ढूंढ पाया।

🎯 Exam Tip: पात्र की बुद्धिमानी को दर्शाने के लिए उसके निर्णय लेने की क्षमता और समस्या-समाधान के तरीकों का उल्लेख करें।

 

3. सत्यवादी

शंखचूड एक सत्यवादी साँप था। उसने जीमूतवाहन के माता-पिता को पूरी कहानी सही-सही बताई। इसके बाद वह गरुड़ के पास पहुँचकर अपने प्राणों की चिंता न करते हुए उससे सच-सच बता देता है कि उसका भोजन जीमूतवाहन नहीं, बल्कि वह खुद है। उसने गरुड़ से कहा कि वह उसे खाकर अपनी भूख शांत कर ले। सच बोलना हमेशा साहस का काम है।
In simple words: शंखचूड बहुत सच्चा साँप था। उसने जीमूतवाहन के माता-पिता और गरुड़ को पूरी सच्चाई बताई, अपनी जान की परवाह किए बिना।

🎯 Exam Tip: सत्यवादिता को समझाने के लिए पात्र द्वारा दिए गए स्पष्ट और निडर बयानों का उदाहरण दें।

 

4. आशावादी

शंखचूड एक आशावादी नाग था। उसे उम्मीद थी कि गरुड़ ने जीमूतवाहन को साँप न होने के कारण छोड़ दिया होगा। इसी उम्मीद के साथ वह जीमूतवाहन के शरीर से टपकते हुए खून के सहारे गरुड़ तक पहुँच जाता है। आशा ही मुश्किल समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
In simple words: शंखचूड एक आशावादी साँप था। उसे लगा कि शायद जीमूतवाहन बच गया होगा, इसलिए वह खून के निशानों का पीछा करते हुए गरुड़ के पास गया।

🎯 Exam Tip: पात्र की आशावादी प्रकृति को दर्शाने के लिए उसकी उम्मीदों और उन उम्मीदों के आधार पर की गई कार्रवाइयों का वर्णन करें।

 

5. निर्भीक

शंखचूड एक निडर साँप था। उसे मृत्यु का कोई डर नहीं था। इसीलिए वह जीमूतवाहन को बचाने के लिए गरुड़ के पास जाता है और उससे कहता है कि उसका (गरुड़ का) भोजन बनने की आज उसकी (शंखचूड की) बारी है। अतः वह जीमूतवाहन को छोड़कर उसे खा ले। दूसरों के लिए अपनी जान जोखिम में डालना बहादुरी का प्रतीक है।
In simple words: शंखचूड निडर था। उसे मरने का डर नहीं था। उसने जीमूतवाहन को बचाने के लिए गरुड़ से कहा कि वह जीमूतवाहन की जगह उसे खा ले।

🎯 Exam Tip: पात्र के निर्भीक स्वभाव को दर्शाने के लिए उसकी निडरता के स्पष्ट उदाहरण दें।

 

निष्कर्ष रूप में हमें कह सकते हैं कि शंखचूड एक दयावान, निर्भीक, आशावादी, सत्यवादी और बुद्धिमत्ता से भरा हुआ साँप था, जो अंततः जीमूतवाहन के प्राण बचाने में सफल होता है।
In simple words: शंखचूड एक दयालु, निडर, आशावादी, सच्चा और बुद्धिमान साँप था, जिसने अंत में जीमूतवाहन की जान बचाई।

🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण के अंत में एक संक्षिप्त निष्कर्ष देना हमेशा अच्छा होता है जो सभी गुणों को सारांशित करता है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. जीमूतवाहनस्य वार्तामन्चेष्टुं महाराजविश्वावसुना प्रतीहारः कुत्र प्रेषितः ?
Answer: महाराज विश्वावसु ने जीमूतवाहन का पता लगाने के लिए द्वारपाल को जीमूतकेतु के पास भेजा था। उन्हें लगा कि जीमूतवाहन अपने पिता के पास हो सकता है।
In simple words: राजा विश्वावसु ने जीमूतवाहन को खोजने के लिए द्वारपाल को जीमूतकेतु के पास भेजा।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में पूछे गए मुख्य व्यक्ति और स्थान को सीधे और स्पष्ट रूप से उत्तर दें।

 

Question 2. जीमूतवाहनः कस्य पुत्रः आसीत् ?
Answer: जीमूतवाहन, जीमूतकेतु का पुत्र था। वह एक विद्याधर राजकुमार था, जिसने दूसरों की भलाई के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया था।
In simple words: जीमूतवाहन जीमूतकेतु का पुत्र था।

🎯 Exam Tip: किसी भी पात्र के माता-पिता का नाम सीधे और सही बताएं।

 

Question 3. शङ्खचूडः कः आसीत् ?
Answer: शंखचूड एक साँप (नाग) था। उसे गरुड़ के भोजन के लिए चुना गया था, लेकिन जीमूतवाहन ने उसकी जान बचाई।
In simple words: शंखचूड एक साँप था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख पात्रों की पहचान और उनकी जाति या भूमिका को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 4. जीमूतवाहनः फणिनः प्राणान् परिरक्षितं किमकरोत् ?
Answer: जीमूतवाहन ने साँप के प्राणों की रक्षा के लिए अपना शरीर गरुड़ को समर्पित कर दिया। उसने खुद को साँप की जगह बलिदान कर दिया।
In simple words: जीमूतवाहन ने साँप की जान बचाने के लिए अपना शरीर गरुड़ को दे दिया।

🎯 Exam Tip: पात्र द्वारा किए गए बलिदान के कार्य को स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में बताएं।

 

Question 5. गरुडेनकः व्यापादितः ?
Answer: गरुड़ ने जीमूतवाहन को मार डाला था। गरुड़ को लगा कि जीमूतवाहन एक साँप है।
In simple words: गरुड़ ने जीमूतवाहन को मार दिया था।

🎯 Exam Tip: क्रिया (किसने मारा) और कर्म (किसे मारा) को सही ढंग से पहचानें और बताएं।

 

Question 6. जीमूतवाहनः कथं प्रत्युज्जीवितः कृतः ?
Answer: जीमूतवाहन को देवी गौरी के कमंडल के जल से अभिषेक करके फिर से जीवित किया गया। इस प्रकार दैवीय शक्ति से उसे नया जीवन मिला।
In simple words: जीमूतवाहन को देवी गौरी ने अपने कमंडल के जल से जीवित किया।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के जीवित होने के तरीके को स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें शामिल साधन या व्यक्ति का उल्लेख हो।

 

Question 7. अनभ्रा वृष्टिः कथम् अभवत् ?
Answer: जीमूतवाहन के शरीर के बचे हुए अस्थि अवशेषों और नागों को फिर से जीवित करने के लिए बिना बादलों की वर्षा हुई थी। यह एक चमत्कार था।
In simple words: जीमूतवाहन के अस्थि अवशेषों और नागों को जीवित करने के लिए बिना बादलों के बारिश हुई।

🎯 Exam Tip: 'अनभ्रा वृष्टि' जैसी विशेष घटनाओं के कारण और उद्देश्य को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 8. जीमूतवाहनस्य पिता कः आसीत् ?
Answer: जीमूतवाहन के पिता का नाम जीमूतकेतु था। जीमूतकेतु ने अपने पुत्र की परोपकारी भावना का समर्थन किया था।
In simple words: जीमूतवाहन के पिता जीमूतकेतु थे।

🎯 Exam Tip: परिवार के सदस्यों के संबंधों को सीधे और सही बताएं।

 

Question 9. जीमूतवाहनः केन व्यापादितः ?
Answer: जीमूतवाहन को गरुड़ ने मार डाला था। गरुड़ को यह गलतफहमी थी कि जीमूतवाहन एक साँप है।
In simple words: जीमूतवाहन को गरुड़ ने मारा था।

🎯 Exam Tip: प्रश्न के मुख्य कर्ता और कर्म को स्पष्ट रूप से पहचानें और बताएं।

 

Question 10. नागानन्दनाटकस्य प्रणेतुः किं नाम आसीत् ?
Answer: नागानन्द नाटक के लेखक का नाम महाकवि हर्ष था। महाकवि हर्ष एक प्रसिद्ध कवि और नाटककार थे।
In simple words: नागानन्द नाटक के लेखक महाकवि हर्ष थे।

🎯 Exam Tip: किसी भी साहित्यिक कृति के लेखक का नाम सीधे और सही बताएं।

 

Question 11. जीमूतवाहनः कः आसीत् ?
Answer: जीमूतवाहन गन्धर्वराज जीमूतकेतु का पुत्र और विद्याधर वंश का एक राजकुमार था। वह परोपकारी स्वभाव का था।
In simple words: जीमूतवाहन गन्धर्वराज जीमूतकेतु का पुत्र और विद्याधर वंश का राजकुमार था।

🎯 Exam Tip: पात्र की पहचान, उसके वंश और उसकी मुख्य विशेषताओं को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 12. नागानन्दस्य नाटकस्य रचयिता कः आसीत् ?
Answer: नागानन्द नाटक के रचयिता महाकवि हर्ष थे। उनका यह नाटक उनके महान कार्यों में से एक है।
In simple words: नागानन्द नाटक महाकवि हर्ष ने लिखा था।

🎯 Exam Tip: लेखक और उनकी रचना के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

बहुविकल्पीय प्रश्न

नीचे दिए गए प्रश्नों में हर प्रश्न के लिए चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें से एक विकल्प सही है। सही विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए। यह छात्रों को सही उत्तर चुनने में मदद करता है।
In simple words: इन प्रश्नों में चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से एक सही है। सही विकल्प को चुनें।

🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों के निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप केवल सही विकल्प का चयन करें।

 

Question 1. 'कारुणिको जीमूतवाहनः' शीर्षक पाठ किस कृति से संकलित है?
(क) “पुरुष-परीक्षा से
(ख) 'नागानन्दम्' से
(ग) “बुद्धचरितम्' से
(घ) “जातकमाला' से
Answer: (ख) 'नागानन्दम्' से
In simple words: 'कारुणिको जीमूतवाहनः' पाठ 'नागानन्दम्' नामक नाटक से लिया गया है।

🎯 Exam Tip: पाठ के स्रोत या मूल कृति को हमेशा याद रखें।

 

Question 2. जीमूतवाहन के अनुपम त्याग को दर्शाने वाला नाटक 'कारुणिको जीमूतवाहनः' किस धर्म से सम्बद्ध है?
(क) बौद्ध धर्म
(ख) सिक्ख धर्म
(ग) जैन धर्म
(घ) पारसी धर्म
Answer: (क) बौद्ध धर्म
In simple words: जीमूतवाहन का त्याग बौद्ध धर्म के अहिंसा सिद्धांत से जुड़ा है।

🎯 Exam Tip: पाठ के मुख्य संदेश और उसके धार्मिक या नैतिक संबंधों को समझें।

 

Question 3. परोपकारी विद्याधर राजकुमार का क्या नाम है?
(क) विश्वावसु
(ख) शंखचूड
(ग) जीमूतवाहन
(घ) जीमूतकेतु
Answer: (ग) जीमूतवाहन
In simple words: परोपकारी विद्याधर राजकुमार का नाम जीमूतवाहन था।

🎯 Exam Tip: मुख्य पात्रों के नाम और उनके विशेष गुणों को याद रखें।

 

Question 4. जीमूतवाहन और जीमूतकेतु का परस्पर क्या सम्बन्ध है ?
(क) पुत्र-पिता
(ख) पिता-पुत्र
(ग) भाई-भाई
(घ) स्वामी-सेवक
Answer: (ख) पिता-पुत्र
In simple words: जीमूतवाहन जीमूतकेतु का पुत्र था और जीमूतकेतु जीमूतवाहन के पिता थे।

🎯 Exam Tip: परिवार के सदस्यों के बीच के संबंधों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 5. मलयवती जीमूतवाहन की कौन थी ?
(क) माता
(ख) पत्नी
(ग) पुत्री
(घ) दासी
Answer: (ख) पत्नी
In simple words: मलयवती जीमूतवाहन की पत्नी थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख सहायक पात्रों और उनके रिश्तों को याद रखें।

 

Question 6. जीमूतवाहन किसकी रक्षा करता है ?
(क) शंखचूड की
(ख) वासुकि की
(ग) गरुड़ की
(घ) विश्वावसु की
Answer: (क) शंखचूड की
In simple words: जीमूतवाहन ने शंखचूड नामक साँप की रक्षा की थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के मुख्य संघर्ष और उनकी भूमिकाओं को पहचानें।

 

Question 7. 'कारुणिको जीमूतवाहनः' पाठ में सर्पराज किसे कहा गया है?
(क) वासुकि को
(ख) गरुड़ को
(ग) शंखचूड को
(घ) विश्वावसु को
Answer: (क) वासुकि को
In simple words: इस पाठ में वासुकि को साँपों का राजा कहा गया है।

🎯 Exam Tip: कहानी में प्रमुख उपाधियों और पात्रों के नामों को सही ढंग से मिलाएं।

 

Question 8. गरुड़ ने जीमूतवाहन का मांस क्यों खाया?
(क) उसकी जीमूतवाहन से शत्रुता थी
(ख) उसको जीमूतवाहन का मांस प्रिय था
(ग) उसने जीमूतवाहन को नाग समझा था
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) उसने जीमूतवाहन को नाग समझा था
In simple words: गरुड़ ने जीमूतवाहन को साँप समझकर उसका मांस खाया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के कार्यों के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 9. 'कारुणिको जीमूतवाहनः' शीर्षक पाठ में 'नायिका' कौन है?
(क) शंखचूड की माता
(ख) जीमूतवाहन की सास
(ग) जीमूतवाहन की माता
(घ) जीमूतवाहन की पत्नी
Answer: (घ) जीमूतवाहन की पत्नी
In simple words: 'कारुणिको जीमूतवाहनः' पाठ में नायिका जीमूतवाहन की पत्नी थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य और सहायक पात्रों की भूमिकाओं को पहचानें।

 

Question 10. 'कारुणिको जीमूतवाहनः' पाठ में 'देवी' के रूप में किसको प्रस्तुत किया गया है ?
(क) शंखचूड की माँ को
(ख) जीमूतवाहन की माँ को
(ग) पार्वती को ।
(घ) जीमूतवाहन की पत्नी को
Answer: (ग) पार्वती को ।
In simple words: इस पाठ में 'देवी' के रूप में पार्वती को दिखाया गया है।

🎯 Exam Tip: कहानी में विशेषणों या उपाधियों का संबंध सही पात्र से स्थापित करें।

 

Question 11. “वत्स! अवितथैषा तव भारती भवतु । वयमपि त्वरितमेवानुगच्छामः ।' वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति ?
(क) शंखचूडः
(ख) जीमूतवाहनः
(ग) गरुडः
(घ) जीमूतकेतुः
Answer: (ग) गरुडः
In simple words: यह वाक्य गरुड़ ने कहा था।

🎯 Exam Tip: दिए गए कथन का वक्ता पहचानें और उसके संदर्भ को याद रखें।

 

Question 12. जीमूतवाहन को किसने जीवित किया?
(क) अमृत वर्षा ने
(ख) गौरी ने
(ग) गरुड़ ने
(घ) इन्द्र ने
Answer: (ख) गौरी ने
In simple words: देवी गौरी ने जीमूतवाहन को जीवित किया।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य घटनाओं और उनमें शामिल पात्रों को याद रखें।

 

Question 13. अमृत लेने के लिए इन्द्र के पास कौन जाता है ?
(क) शंखचूड
(ख) गरुड़
(ग) वासुकि
(घ) जीमूतकेतु
Answer: (ख) गरुड़
In simple words: गरुड़ अमृत लाने के लिए इंद्र के पास गया था।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण कार्यों को करने वाले पात्रों की पहचान करें।

 

Question 14. “सुनन्द! यावदनया वेलया .................. सदनमेव गतो मे पुत्रको भविष्यति ।” वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति होगी –
(क) 'वधू' से
(ख) मातु से
(ग) श्वशुर' से
(घ) “पितु से
Answer: (ग) श्वशुर' से
In simple words: इस वाक्य में 'श्वशुर' शब्द आएगा, जिसका अर्थ ससुर से है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए सही व्याकरण और शब्द ज्ञान का प्रयोग करें।

 

Question 15. “शङ्खचूडः नाम नागः खल्वहं वैनतेयस्याहारार्थमवसरप्राप्तो वासुकिना प्रेषितः । वाक्यस्य वक्ता कोऽस्ति?
(क) गरुडः
(ख) जीमूतकेतुः
(ग) मलयकेतुः
(घ) शंखचूडः
Answer: (घ) शंखचूडः
In simple words: यह वाक्य शंखचूड ने कहा था।

🎯 Exam Tip: दिए गए कथन के संदर्भ और उसे कहने वाले पात्र को पहचानें।

 

Question 16. "अहं तव" ....................... "प्रेषितोऽस्मि वासुकिना।” में रिक्त-स्थान की पूर्ति होगी
(क) 'रक्षार्थम्' से
(ख) 'हन्तुम्' से
(ग) 'आहारार्थम्' से
(घ) “नष्टार्थम्' से
Answer: (ग) 'आहारार्थम्' से
In simple words: इस वाक्य में 'आहारार्थम्' शब्द आएगा, जिसका अर्थ भोजन के लिए है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए वाक्य के अर्थ और व्याकरण के अनुसार सही शब्द का चयन करें।

 

Question 17. “शङ्खचूडः समुपविश्यानेनोत्तरीयेण आच्छादितशरीरं कृत्वा धारयमाम्।” वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति ?
(क) जीमूतवाहनः
(ख) जीमूतकेतुः
(ग) मलयकेतुः
(घ) मलयवती
Answer: (क) जीमूतवाहनः
In simple words: यह वाक्य जीमूतवाहन ने कहा था।

🎯 Exam Tip: दिए गए कथन के संदर्भ और उसे कहने वाले पात्र को पहचानें।

 

Question 18. जीमूतवाहनस्य पिता ................. आसीत् ।
(क) शङ्खचूङः
(ख) मलयकेतुः
(ग) जीमूतकेतुः
(घ) सत्यकेतुः
Answer: (ग) जीमूतकेतुः
In simple words: जीमूतवाहन के पिता जीमूतकेतु थे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के पारिवारिक संबंधों को सही ढंग से याद रखें।

 

Question 19. नागानन्दस्य नाटकस्य रचयिता ................... अस्ति ।
(क) कालिदासः
(ख) हर्षवर्धनः
(ग) भवभूतिः
(घ) विशाखदत्तः
Answer: (ख) हर्षवर्धनः
In simple words: नागानन्द नाटक महाकवि हर्षवर्धन ने लिखा था।

🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों और उनके लेखकों के नाम याद रखें।

 

Question 20. विद्याधरेण केनानि ................. आविष्ट चेतसा ।
(क) क्रोध
(ख) भय
(ग) पीड़ा
(घ) करुणा
Answer: (घ) करुणा
In simple words: इस वाक्य में 'करुणा' शब्द आएगा, जिसका अर्थ दया से है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत शब्दों के अर्थ को समझें और उन्हें सही संदर्भ में प्रयोग करें।

 

Question 21. विद्याधरः ............................ रक्षां करोति ।
(क) गरुडस्य
(ख) शङ्खचूडस्य
(ग) वासुकेः
(घ) जीमूतकेतोः
Answer: (ख) शङ्खचूडस्य
In simple words: विद्याधर शंखचूड की रक्षा करता है।

🎯 Exam Tip: वाक्य के अर्थ के अनुसार सही संबंधकारक पद का चुनाव करें।

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