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Detailed Chapter 9 ज्योति जवाहर UP Board Solutions for Class 10 Hindi
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Class 10 Hindi Chapter 9 ज्योति जवाहर UP Board Solutions PDF
Question 1. ‘ज्योति-जवाहर' खण्डकाव्य की कथावस्तु (कथानक, कथासार) संक्षेप में लिखिए।
Answer: 'ज्योति-जवाहर' खण्डकाव्य की कहानी घटना पर आधारित नहीं है, बल्कि भावों पर आधारित है। इसमें भारत के निर्माता पं० जवाहरलाल नेहरू को एक महान जननायक के रूप में दिखाया गया है। कवि ने इस पूरी कहानी को सिर्फ एक ही सर्ग 'प्रवेश' में लिखा है। इस कहानी का सार इस प्रकार है:
यह कहानी नायक में देवत्व और मनुष्यत्व के मेल से शुरू होती है। भगवान ने जवाहरलाल नेहरू के अद्भुत व्यक्तित्व को बनाने के लिए अपनी सारी कला का उपयोग किया है। कवि की सुंदर कल्पना है कि भगवान ने उन्हें सूर्य से तेज, चंद्रमा से कोमलता, हिमालय से स्वाभिमान, सागर से गहराई, हवा से गति और धरती से धैर्य लेकर एक दिव्य पुरुष के रूप में बनाया है। कवि के अनुसार, नेहरू जी के व्यक्तित्व में कई राज्यों के महान पुरुषों के गुण और साथ ही उन राज्यों के सामाजिक-सांस्कृतिक गुण भी शामिल हैं:
गुजरात के महात्मा गांधी से उन्होंने कर्मयोग के सिद्धांत की प्रेरणा ली। उन्हें गांधीजी से आशीर्वाद, सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, समानता और ममता उसी तरह मिली, जैसे राम को वशिष्ठ से मिली थी।
महाराष्ट्र ने उन्हें वीर शिवाजी की तलवार जैसी शक्ति दी, जिससे वे विदेशी ताकतों से उसी तरह लड़ते रहे, जैसे शिवाजी ने औरंगजेब से लड़ा था।
नेहरू जी ने राजस्थान से संघर्षों में जीना सीखा और यहाँ के महापुरुषों से सीखा कि संकटों में भी अपने रास्ते से भटकना नहीं चाहिए। हल्दीघाटी की मिट्टी वीर जवाहर को आज़ादी के लिए बलिदान करने की भावना देती है। राजस्थान उन्हें भारत की पूरी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत जैसे पवित्र कला, जौहर-व्रत, स्वामिभक्ति और त्याग सौंपता है। यह उन्हें राणा सांगा, कुम्भा, जयमल और महाराणा प्रताप का शौर्य और त्याग देता है।
सतपुड़ा राज्य भारत की एकता का ऐलान करता है। कालिदास की भावुकता, कुमारिल की अद्भुत प्रतिभा, क्रोध भरी भाषा वाले फकीर मोहन और अकबर से लड़ने वाली चाँदबीबी जैसी महान हस्तियों को सतपुड़ा अपने दिल में रखता है। वह इन सभी महान गुणों को नेहरू जी को समर्पित करता है।
बंगाल भी जवाहर पर अपना वैभव लुटाने में पीछे नहीं रहा। विवेकानंद और दीनबंधु एंड्रयूज की कर्मठता ने नेहरू जी को बहुत प्रभावित किया। बंगाल प्रदेश ने नेहरू जी को बंकिम चंद्र का राष्ट्र-प्रेम, टैगोर और शरत् की अमर कला, सुभाष चंद्र बोस की देशभक्ति सब कुछ सौंप कर गर्व महसूस किया है।
असम अपने जंगलों, पहाड़ों और नदियों की प्राकृतिक सुंदरता को नेहरू जी पर लुटाकर धन्य महसूस करता है। रामायण के अनुवादक माधव कंदली और मनसा नामक भक्त-कवि के गीतों ने नेहरू जी के मन को शुद्धता दी है।
बिहार गौतम बुद्ध की तपस्या भूमि है। यह सत्य, दया, अहिंसा, क्षमा और त्याग का सुंदर बगीचा है। महावीर स्वामी की वैशाली नेहरू जी को मानवीय गुणों के मोती अर्पित करती है।
समुद्रगुप्त की बहादुरी की कहानी आज भी मौजूद है। समुद्रगुप्त के बेटे चंद्रगुप्त ने भी अपनी वीरता से भारत का सिर कभी झुकने नहीं दिया। कलिंग जीतने के बाद अशोक वैराग्य-भावना से भर गए। इस प्रदेश की ये सभी घटनाएँ नेहरू जी के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालती हैं।
उत्तर प्रदेश ने वीर जवाहर को जन्म देकर खुद को धन्य किया है। मथुरा, वृंदावन और अयोध्या की हर गली में चर्चा है कि आज राम और कृष्ण ने प्रयाग में जन्म लिया है। उत्तर प्रदेश तुलसी की राममयी वाणी, सारनाथ में बुद्ध के उपदेश, कबीर की आडंबरहीनता और सांप्रदायिक सौहार्द, सूर के गीतों का उपहार देकर इस महामानव का अभिनंदन करता है।
पंजाब भी अपनी गौरवशाली परंपरा को सौंपते हुए जननायक जवाहर के व्यक्तित्व के विकास में योगदान दे रहा है। सिकंदर को स्वाभिमान का पाठ पढ़ाने वाले राजा पोरस का पौरुष, गुरु नानक की वाणी आदि सब कुछ पंजाब वीर जवाहर को सौंप देता है।
कश्मीर की सुंदरता नेहरू जी को आकर्षित करती है और उन पर फूलों की वर्षा करती है।
कुरुक्षेत्र नेहरू जी को अर्जुन का नाम देता है और अर्जुन से गांडीव उठवाकर दुर्योधन जैसे अत्याचारियों को खत्म करने का आदेश देता है।
गुलामी की जंजीरों में बंधी दिल्ली अकबर की हिंदू-मुस्लिम एकता की ज्योति सौंपकर गौरवान्वित महसूस करती है। दिल्ली उन्हें जहांगीर का न्याय और शाहजहाँ की कलात्मक सौगात अर्पित करती है।
सच में, पूरे भारत ने नेहरू जी को अपनी सभी अनमोल चीजें समर्पित की हैं। यमुना नदी अपने संगम के राजा के अभिनंदन के लिए अपनी निधियों को संगम तक न्यौछावर करने गई है। इसलिए यह कथन पूरी तरह से सही है कि 'ज्योति-जवाहर' के नायक के व्यक्तित्व के निर्माण में पूरे भारत का योगदान रहा है। कवि नायक के व्यक्तित्व में पूरे देश की चेतना की झलक देखते हुए कहते हैं:
जब लगा देखने मानचित्र, भारत न मिला तुमको पाया। जब तुझको देखा नयनों में, भारत का चित्र उभर आया।
कुल मिलाकर, कवि श्री देवीप्रसाद राही ने 'ज्योति-जवाहर' के प्रतीकों के माध्यम से एक लाक्षणिक माहौल बनाया है। उन्होंने कहानी के शुरू, बीच और अंत को एकता के सूत्र में पिरोकर, घटना-प्रधान कहानियों की पुरानी परंपरा से हटकर, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक पृष्ठभूमि पर इस खंडकाव्य को एक नया रूप दिया है। इससे साफ है कि राष्ट्रनायक पं. नेहरू का उदय एक महान घटना है, जिससे प्रेरित होकर यह रचना हुई है। नेहरू जी का व्यक्तित्व पूरे देश की विविधताओं को एकता में पिरोता है।
In simple words: 'ज्योति-जवाहर' पंडित जवाहरलाल नेहरू के व्यक्तित्व पर आधारित एक खंडकाव्य है। इसमें बताया गया है कि नेहरू जी का व्यक्तित्व भारत के हर क्षेत्र और हर संस्कृति के महान गुणों का मेल था, जिससे वे एक सच्चे राष्ट्रनायक बने।
🎯 Exam Tip: किसी भी खंडकाव्य की कथावस्तु लिखते समय, मुख्य पात्र का परिचय, कहानी का सार, और प्रमुख घटनाओं का उल्लेख क्रमबद्ध तरीके से करें।
Question 2. 'ज्योति-जवाहर' का कथानक घटनाप्रधान न होकर भावप्रधान है।” इस कथन का क्या अभिप्राय है ?
Answer: 'ज्योति-जवाहर' खंडकाव्य का कथानक घटना-प्रधान न होकर भाव-प्रधान है, इसका मतलब यह है कि इस काव्य में घटनाओं की बजाय भावनाओं और विचारों को अधिक महत्व दिया गया है। यह नेहरू जी के व्यक्तित्व और भारत की संस्कृति को गहराई से दिखाता है। नेहरू जी के महान व्यक्तित्व में भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखती है। कवि के अनुसार, नेहरू जी के व्यक्तित्व में कई राज्यों के महान पुरुषों के गुण और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक गुण भी शामिल हैं। यह खंडकाव्य नेहरू जी को आधुनिक भारत के निर्माता और देशप्रेमी के रूप में चित्रित करता है, जो भारतीय एकता और विश्व शांति के प्रतीक हैं। लेखक ने कहानी को प्रतीकों और लाक्षणिक भाषा का उपयोग करके रचा है, जो घटनाओं से ज्यादा भावनाओं और संदेशों पर जोर देती है। यह काव्य दिखाता है कि कैसे नेहरू जी का चरित्र पूरे भारत की चेतना का निचोड़ था, जिसमें देशप्रेम, विश्वबंधुत्व और वैज्ञानिक सोच थी।
In simple words: इस खंडकाव्य में कहानी के घटनाओं से ज़्यादा, पंडित नेहरू के विचारों, भावनाओं और उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं पर ध्यान दिया गया है, जो भारत की आत्मा को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: जब किसी कथन का अभिप्राय पूछा जाए, तो उसके गहरे अर्थ को समझाएं और बताएं कि वह मुख्य विषय या पात्र से कैसे संबंधित है।
Question 3. 'ज्योति-जवाहर' के आधार पर खण्डकाव्य के नायक पं० जवाहरलाल नेहरू का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: श्री देवीप्रसाद शुक्ल 'राही' द्वारा लिखा गया खंडकाव्य 'ज्योति-जवाहर' पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में है। कवि ने इस खंडकाव्य में नेहरू जी के व्यक्तित्व को भारत की सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक, साहित्यिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विशेषताओं से जोड़कर दिखाया है। उनके व्यक्तित्व की खास बातें इस प्रकार हैं:
(1) **अलौकिक पुरुष:** कवि ने नेहरू जी के व्यक्तित्व में दिव्य गुणों को शामिल किया है। उन्होंने बताया कि नेहरू जी को सूर्य से तेज, चंद्रमा से कोमलता, हिमालय से स्वाभिमान, सागर से गहराई, हवा से गति और धरती से धैर्य मिला। कवि ने उनके व्यक्तित्व को राम-कृष्ण के गुणों से भरा एक युगावतार बताया है।
(2) **गांधीजी से प्रभावित:** जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी के सच्चे शिष्य थे। उन्हें गांधीजी से सत्य, अहिंसा, उदारता, मानव-प्रेम और दया का आशीर्वाद मिला, जैसे राम को वशिष्ठ से मिला था। उन्होंने गांधीजी के कर्म-सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को कर्मशील बनाया।
(3) **समन्वयकारी लोकनायक:** कवि ने 'ज्योति-जवाहर' में नेहरू जी को 'संगम का राजा' कहा है। उनके विशाल व्यक्तित्व में भारत के सभी धर्मों, संस्कृति, दर्शन, कला, साहित्य और राजनीति का अद्भुत मेल दिखता है। वे जननायक, लोकनायक और युगपुरुष के रूप में चित्रित हुए हैं। भारत के हर राज्य ने उन्हें कुछ-न-कुछ दिया है। कवि ने नेहरू जी को युगावतार मानते हुए कहा है:
मथुरा वृन्दावन अवधपुरी की, गली-गली में बात चली। फिर नया रूप धरकर उतरा, द्वापर त्रेता का महाबली ॥
(4) **राष्ट्रीय भावों के प्रेरक:** जवाहरलाल नेहरू का व्यक्तित्व भारतीयों में राष्ट्रीय भावनाओं को जगाने वाला है। उनके व्यक्तित्व में अशोक की युद्ध से विरक्ति, बुद्ध की करुणा, महावीर की अहिंसा, प्रताप का स्वाभिमान, शिवाजी की देशभक्ति और विवेकानंद के आत्मज्ञान की झलक दिखती है। भारत का हर कण उन्हें त्याग और बलिदान से सजा हुआ महसूस होता है। इसी भाव को व्यक्त करते हुए राही जी कहते हैं:
आजादी की मुमताज जिसे, अपने प्राणों से प्यारी है। उस पर अपनी मुमताजसहित, यह शाहजहाँ बलिहारी है ॥
उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रीय चेतना और भावनात्मक एकता के दर्शन होते हैं।
(5) **स्वाधीनता-सेनानी:** इस खंडकाव्य में कवि ने वीर जवाहर को एक महान देशभक्त और कभी न हारने वाले स्वतंत्रता-सेनानी के रूप में दिखाया है। महाराष्ट्र ने इस युगपुरुष को शिवाजी की तलवार जैसी शक्ति दी है, जिससे वे विदेशी ताकतों से लड़ सकें। झांसी और बिठूर को नेहरू की कार्यक्षमता पर पूरा भरोसा है, क्योंकि उनका आगमन तात्या टोपे और मुहम्मद शाह के बलिदान से हुआ है। राजस्थान इस वीर सेनानी को अपनी जान कुर्बान करने और संघर्षों से जूझने की मस्ती देता है।
(6) **दृढ़ पुरुष:** नायक जवाहरलाल में कठिनाइयों में धैर्य रखने की अद्भुत क्षमता थी। उन्हें यह गुण असम की मिट्टी से मिला था। उनका जीवन मुश्किलों भरा था, लेकिन वे कभी हार नहीं मानते थे।
काँटों की नोकों पर खिलना, मेरे जीवन की शैली है। मेरी दिनचर्या पर्वत से, लेकर जंगल तक फैली है ॥
जैसे नारियल ऊपर से सख्त और अंदर से नरम होता है, उसी तरह श्री नेहरू ऊपर से सैनिक जैसे सख्त और अंदर से संत जैसे कोमल थे। इसीलिए खंडकाव्य में राही जी ने खुद उनके मुंह से कहलवाया है:
मुझमें कोमलता है लेकिन, कायरता मेरा मर्म नहीं । बैरी के सम्मुख झुक जाना, मेरे जीवन का धर्म नहीं ॥
(7) **नीतिज्ञ एवं स्वाभिमानी:** नेहरू जी महान राजनीतिज्ञ थे। यह गुण उन्हें चाणक्य से मिला था, जिसके सामने सिकंदर जैसे विश्व-विजेता भी हार गए थे। उन्होंने राजा पोरस से स्वाभिमान का पाठ सीखा, जिसने सिकंदर को स्वाभिमान सिखाया था।
(8) **नवराष्ट्र के निर्माता:** भारत को स्वतंत्र कराने के बाद नया राष्ट्र बनाने वालों में जवाहरलाल नेहरू का नाम सबसे ऊपर है। देश के विकास के लिए उन्होंने पंचवर्षीय योजनाएं शुरू कीं। गुट-निरपेक्षता, निरस्त्रीकरण और विश्व शांति के कार्यों से भारत विश्व में प्रसिद्ध हुआ। वे भारत को जाति-पाति के बंधनों से मुक्त देखना चाहते थे और सभी धर्मों की एकता में विश्वास रखकर देश को हमेशा प्रगति के रास्ते पर ले जाना चाहते थे।
(9) **विश्व-शांति के अग्रदूत:** नेहरू जी का व्यक्तित्व महान था। भारत के राष्ट्र-भक्तों में उनका नाम सबसे आगे है। भारत के भाग्य-विधाता के रूप में वे भारत की धरती पर आए थे। वे एक विश्वविख्यात धीरोदात्त नायक थे, जिन्हें देश के हर कोने से प्यार और आशीर्वाद मिलता था।
संक्षेप में कहें तो, जवाहरलाल नेहरू एक लोकनायक और युगावतार थे, जिनमें अहिंसा, सत्य, मानव-प्रेम, करुणा, विश्व-बंधुत्व, शौर्य, स्वाभिमान, क्षमा आदि सभी गुण थे। वे राष्ट्रीय भावनात्मक एकता के प्रतीक थे। उनका व्यक्तित्व साफ, स्वदेशाभिमान, देश-प्रेम, विश्वबंधुत्व और महान मानवीय चेतना से भरा हुआ था। सच में, वे भारत की आत्मा थे।
In simple words: पंडित जवाहरलाल नेहरू का चरित्र 'ज्योति-जवाहर' में एक दिव्य पुरुष, गांधीजी के शिष्य, जननायक, देशभक्त और दृढ़ व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है। वे भारत के सभी राज्यों के गुणों और संस्कृतियों का संगम थे, जिन्होंने देश की एकता और विश्व शांति के लिए काम किया।
🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण लिखते समय, पात्र की प्रमुख विशेषताओं को शीर्षक या बिंदुवार तरीके से प्रस्तुत करें और हर विशेषता को उदाहरण या कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें।
Question 4. 'ज्योति-जवाहर' खण्डकाव्य के आधार पर कलिंग युद्ध (मर्मस्पर्शी प्रसंग) का वर्णन कीजिए तथा उसके परिणाम का उल्लेख कीजिए ।
Answer: 'ज्योति-जवाहर' खंडकाव्य में कवि श्री देवीप्रसाद शुक्ल 'राही' ने आधुनिक भारत के निर्माता जवाहरलाल नेहरू को भारतीय संस्कृति और इतिहास का प्रतीक दिखाया है। इसके लिए कवि ने भारतीय इतिहास की कई घटनाओं का वर्णन किया है। इस काव्य में वर्णित कलिंग युद्ध और उसके परिणाम मेरे मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं, क्योंकि इसका बहुत मार्मिक वर्णन किया गया है। इसका प्रसंग इस प्रकार है:
कलिंग का युद्ध सम्राट अशोक के समय हुआ था। यह घटना दिल दहला देने वाली है। इस विनाशकारी युद्ध में खून की नदियाँ बह गई थीं, जिसमें लोग मछलियों जैसे तैरते दिखाई दे रहे थे। इस युद्ध में हथियारों की भयंकर आवाजें सुनाई पड़ती थीं। हर तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई थी। सिर कट-कट कर धरती पर गिर रहे थे। न जाने कितनी माताओं की गोद सूनी हो गई थी, कितनी ही नारियों का सिंदूर मिट गया था और कई बहनें अपने भाइयों की मृत्यु पर रो रही थीं। ऐसे भयानक दृश्यों को देखकर सभी का दिल करुणा से भर गया था।
सम्राट अशोक ने जब इतना भयानक नरसंहार देखा, तो उनका हृदय करुणा से भर गया। उनके मन में दया का सागर उमड़ने लगा। उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे अब कभी हिंसा नहीं करेंगे और न ही कोई युद्ध लड़ेंगे। वे सोचने लगे कि उनके एक इशारे से न जाने कितने लोग मारे गए। उनका मन विचलित हो गया। उनके हृदय में वैराग्य की भावना जागृत हो गई। विशाल साम्राज्य भी उन्हें छोटा और बेकार लगने लगा। कवि ने अशोक की मनोदशा का वर्णन करते हुए कहा है:
सोने चाँदी का आकर्षण अब उसे घिनौना लगता था। साम्राज्यवाद का शीशमहल कुटिया से बौना लगता था।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक पूरी तरह अहिंसक और वैरागी बन गए। इस युद्ध ने उनके दिल पर गहरा घाव किया था:
जाने कैसी थी कचोट, छिन पहले जिसने जगा दिया। हिंसा की जगह अहिंसा का, अंकुर अन्तर में जमा दिया।
कलिंग युद्ध से अशोक का हृदय इतना दुखी हुआ कि उन्होंने हमेशा के लिए तलवार छोड़ दी और महात्मा गौतम बुद्ध के अनुयायी होकर बौद्ध भिक्षु बन गए। कवि ने अशोक की इस स्थिति का चित्रण इस प्रकार किया है:
जो कभी न हारा औरों से, वह आज स्वयं से हार गया। भिक्षुक अशोक, राजा अशोक से, पहले बाजी मार गया ।।।
'ज्योति-जवाहर' खंडकाव्य में अशोक द्वारा कलिंग युद्ध करने और फिर वैराग्य में बदल जाने का वर्णन, नायक जवाहरलाल नेहरू के विचारों पर वैराग्य के प्रभाव को दिखाने के लिए किया गया है।
सच में, कलिंग युद्ध और उससे प्रभावित अशोक का यह प्रसंग बहुत ही रोमांचक, भावपूर्ण और भारतीय इतिहास की अन्य घटनाओं में प्रभावशाली, महत्वपूर्ण और प्रमुख है।
इस खंडकाव्य की कहानी में कलिंग युद्ध का प्रसंग बहुत महत्व रखता है। इसमें एक तरफ तो अशोक को युद्ध करते दिखाया गया है, और दूसरी तरफ युद्ध की अधिकता और भीषण नरसंहार से उनके हृदय को बदलते हुए, हिंसा छोड़कर अहिंसक बनते दिखाया गया है। अशोक द्वारा शांति और अहिंसा का संदेश दूर-दूर तक फैलाने का वर्णन किया गया है। जवाहरलाल नेहरू भी शांति के अग्रदूत और हिंसा के विरोधी थे। अशोक से संबंधित इस प्रसंग का वर्णन करके कवि ने जवाहरलाल नेहरू के विचारों को अहिंसक बनाने का प्रयास किया है। इस काव्य का मुख्य उद्देश्य जवाहरलाल नेहरू के व्यक्तित्व को उजागर करना है और इसी के लिए इस प्रसंग का वर्णन किया गया है। इसलिए यह प्रसंग मेरी नजर में बहुत महत्वपूर्ण है। कलिंग युद्ध ने सम्राट अशोक को एक हिंसक विजेता से शांति के दूत में बदल दिया।
In simple words: 'ज्योति-जवाहर' में कलिंग युद्ध का मार्मिक वर्णन है, जिसमें सम्राट अशोक की क्रूरता और फिर युद्ध से हुई तबाही देखकर उनका हृदय परिवर्तन दिखाया गया है। इस युद्ध ने अशोक को अहिंसक बना दिया, जिससे वे शांति के रास्ते पर चले। यह घटना नेहरू जी के विचारों पर भी वैराग्य के प्रभाव को दर्शाती है।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन करते समय, प्रमुख व्यक्तियों के नाम, घटना के मुख्य कारण और उसके परिणामों पर विशेष ध्यान दें। मार्मिक प्रसंगों को भावनात्मक भाषा में प्रस्तुत करें।
सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली तथा प्रायोगिक एवं आन्तरिक मूल्यांकन
प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र (हल सहित)
प्रथम मासिक परीक्षा
हिन्दी-X
Question 1. वाचन के अन्तर्गत कौन-कौन से विषय सम्मिलित किये जाते हैं ?
Answer: वाचन के अंतर्गत मुख्य रूप से नौ विषय शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. भाषण,
2. वाद-विवाद,
3. सस्वर कविता-वाचन,
4. वार्तालाप,
5. कार्यक्रम-प्रस्तुति,
6. अन्त्याक्षरी,
7. कथा-कहानी या कोई घटना सुनाना,
8. परिचय देना और परिचय प्राप्त करना,
9. भावानुकूल संवाद वाचन।
In simple words: वाचन में भाषण देना, वाद-विवाद करना, कविता पढ़ना, बातचीत करना और कहानियाँ सुनाना जैसी कई बातें आती हैं।
🎯 Exam Tip: जब किसी विषय के अंतर्गत आने वाली चीजों को पूछा जाए, तो उन्हें बिंदुवार या क्रमबद्ध तरीके से लिखें ताकि उत्तर स्पष्ट और समझने में आसान हो।
Question 2. अच्छे भाषण की चार प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
Answer: अच्छे भाषण की चार मुख्य विशेषताएँ ये हैं:
1. भाषण ऐसा होना चाहिए जो सुनने वाले को पसंद आए। उसमें जोश, उत्साह और उमंग होनी चाहिए।
2. भाषण की भाषा साफ-सुथरी और लोगों की समझ में आने वाली होनी चाहिए।
3. भाषण के विषय को आज के जीवन से जोड़कर, नए उदाहरणों से समझाना चाहिए ताकि वह जीवंत लगे। इससे श्रोता आसानी से जुड़ पाते हैं।
4. भाषण देते समय कविताओं की पंक्तियाँ, शेर या सूक्तियों का सही जगह पर इस्तेमाल करना चाहिए। यह भाषण को अधिक प्रभावशाली बनाता है।
In simple words: एक अच्छा भाषण मजेदार, सरल भाषा में होना चाहिए, आज के जीवन से जुड़ा हो और उसमें कविताओं या अच्छी बातों का इस्तेमाल हो।
🎯 Exam Tip: किसी भी विषय की विशेषताओं को लिखते समय, हर विशेषता को एक अलग बिंदु में बताएं और उसे संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 3. आपके विद्यालय के वार्षिकोत्सव में आपके विद्यालय की एक छात्रा सुनिधि कत्थक नृत्य प्रस्तुत करेगी। आप उसका परिचय देकर मंच पर बुलाइए तथा प्रस्तुति पश्चात् टिप्पणी भी कीजिए।
Answer: नृत्य का नाम सुनते ही हमारा मन खुशी से झूम उठता है। शरीर के अंग थिरकने लगते हैं, खासकर जब शास्त्रीय नृत्य हो तो बात ही कुछ और हो जाती है। आज आपके सामने कथक नृत्य प्रस्तुत किया जा रहा है। यह नृत्य हमारे ही विद्यालय की नौवीं कक्षा की छात्रा सुनिधि प्रस्तुत करेंगी। जैसा उनका सुंदर नाम है, वैसा ही उनका सुंदर काम भी है। तो अब देखिए कथक नृत्य।
कार्यक्रम के बाद टिप्पणी: मैंने कहा था - जैसा सुंदर नाम, वैसा ही सुंदर काम! यह नृत्य बहुत सुंदर, मनमोहक और अपने आप में पूरा था।
In simple words: वार्षिक उत्सव में सुनिधि का कथक नृत्य बहुत सुंदर था। उन्होंने अपने नाम की तरह ही सुंदर प्रदर्शन किया, जो सभी को बहुत पसंद आया।
🎯 Exam Tip: इस तरह के रचनात्मक लेखन में, अपनी कल्पना का उपयोग करके विवरणों को जीवंत बनाएं, लेकिन विषय के मुख्य बिंदु पर केंद्रित रहें।
Question 4. निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द का स्वनिर्मित वाक्य में प्रयोग कीजिए विश्वकोश और दूरस्थ
Answer: वाक्य-प्रयोग:
विश्वकोश को जानकारी के लिए सबसे विश्वसनीय किताब माना जाता है।
In simple words: विश्वकोश ज्ञान की सबसे भरोसेमंद किताब होती है।
🎯 Exam Tip: वाक्य प्रयोग करते समय, यह सुनिश्चित करें कि वाक्य सरल, स्पष्ट और शब्द के अर्थ को सही ढंग से दर्शाता हो।
Question 5. निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द से उपसर्ग व प्रत्यय अलग करके लिखिए प्रोत्साहित या प्रतिनिधित्व
Answer:
प्रोत्साहित = प्र (उपसर्ग) + उत्साह (मूल शब्द) + इत (प्रत्यय)
प्रतिनिधित्व = प्रति (उपसर्ग) + निधि (मूल शब्द) + त्व (प्रत्यय)
In simple words: 'प्रोत्साहित' शब्द में 'प्र' उपसर्ग है और 'इत' प्रत्यय है, जबकि 'प्रतिनिधित्व' में 'प्रति' उपसर्ग और 'त्व' प्रत्यय है।
🎯 Exam Tip: उपसर्ग और प्रत्यय को अलग करते समय, हमेशा सुनिश्चित करें कि मूल शब्द का अपना अर्थ हो।
Question 6. निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द का सनाम समास-विग्रह दीजिए पदकमल या सुलोचनि
Answer:
पदकमल = कमल रूपी पद (कर्मधारय समास)
In simple words: 'पदकमल' का मतलब है कमल जैसे पैर, और यह कर्मधारय समास का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: समास-विग्रह करते समय, शब्द का सही अर्थ और उसमें निहित संबंध को स्पष्ट रूप से बताएं।
द्वितीय मासिक परीक्षा
हिन्दी-X
Question 1. (i) संज्ञा किसे कहते हैं?
(क) व्यक्तियों, वस्तुओं और स्थानों के गुण, संख्या और परिमाण का बोध कराने वाले शब्दों को
(ख) किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, स्थिति, गुण अथवा भाव का बोध कराने वाले शब्दों को
(ग) किसी व्यक्ति की स्थिति व गुणों को बोध कराने वाले शब्दों को
(घ) किसी वस्तु व स्थान की स्थिति व उसके गुण-दोषों व भाव की स्थिति का बोध कराने वाले शब्दों को
Answer: (ख) किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, स्थिति, गुण अथवा भाव का बोध कराने वाले शब्दों को
In simple words: संज्ञा वे शब्द होते हैं जिनसे किसी व्यक्ति, वस्तु, जगह, दशा या किसी भाव के बारे में पता चलता है।
🎯 Exam Tip: संज्ञा की परिभाषा याद करते समय, उसके पाँच मुख्य भेदों (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक, द्रव्यवाचक) को भी समझ लें।
Question 1. (ii) विशेषण को उन शब्दों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है-
(क) जो शब्द पुल्लिग की विशेषता बताते हैं।
(ख) जो शब्द स्त्रीलिंग की विशेषता बताते हैं।
(ग) जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं।
(घ) जो शब्द बहुवचन की विशेषता बताते हैं।
Answer: (ग) जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं।
In simple words: विशेषण वे शब्द होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की खूबी या कमी बताते हैं।
🎯 Exam Tip: विशेषण को पहचानते समय यह ध्यान रखें कि वह हमेशा किसी संज्ञा या सर्वनाम के साथ आकर उसकी विशेषता बताएगा।
Question 1. (iii) वाच्य को परिभाषित किया जा सकता है-
(क) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कर्ता स्वयं कार्य न करके दूसरे से काम करवाता है, उसे वाच्य कहते हैं।
(ख) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कर्ता दूसरे से कार्य न करवाकर स्वयं कार्य करता है, उसे वाच्य कहते हैं।
(ग) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव, उसे वाच्य कहते हैं।
(घ) दो या दो से अधिक धातुओं के योग से बनी क्रियाओं को वाच्य कहते हैं।
Answer: (ग) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव, उसे वाच्य कहते हैं।
In simple words: वाच्य क्रिया का वह रूप है जिससे पता चलता है कि वाक्य में मुख्य बात कर्ता, कर्म या भाव में से क्या है।
🎯 Exam Tip: वाच्य के तीन मुख्य प्रकारों - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य - के उदाहरणों को समझकर आप इन्हें आसानी से पहचान सकते हैं।
Question 1. (iv) क्रिया-विशेषण की उचित परिभाषा है-
(क) वे संज्ञा शब्द जो विशेषण प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
(ख) वे सर्वनाम शब्द जो विशेषण की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
(ग) वे अविकारी शब्द जो क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
(घ) वे सम्बन्ध बोधक शब्द जो विशेषण की विशेषता प्रकट करते हैं क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
Answer: (ग) वे अविकारी शब्द जो क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
In simple words: क्रिया-विशेषण ऐसे शब्द होते हैं जो क्रिया के बारे में बताते हैं, जैसे वह कैसे, कब, कहाँ या कितनी बार हुई।
🎯 Exam Tip: क्रिया-विशेषण अविकारी होते हैं, यानी लिंग, वचन या कारक बदलने पर भी उनका रूप नहीं बदलता।
Question 1. (v) जो अव्यय शब्द वाक्य में किसी शब्द के बाद लगकर उसके अर्थ पर विशेष प्रकार का बल देते हैं, उन्हें कहते हैं-
(क) निपात
(ख) क्रिया-विशेषण
(ग) संबंधबोधक
(घ) समुच्चयबोधक
Answer: (क) निपात
In simple words: निपात वे शब्द होते हैं जो वाक्य में किसी खास बात पर जोर देने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
🎯 Exam Tip: निपात का प्रयोग अक्सर वाक्य में 'ही', 'भी', 'तो', 'तक' जैसे शब्दों के रूप में होता है, जो वाक्य के अर्थ को गहराई देते हैं।
Question 2. 1. कौन-से विकल्प में सभी शब्द भाववाचक संज्ञाएँ हैं?
(क) अमीरी, दोस्ती, संस्कार, इंसानियत
(ख) नारीत्व, दोस्त, बूढा, यौवन
(ग) युवक, गुरु, शठ, नेतृत्व
(घ) वक्ता, स्वत्व, प्रयोग, सर्दी
Answer: (क) अमीरी, दोस्ती, संस्कार, इंसानियत
In simple words: 'अमीरी', 'दोस्ती', 'संस्कार', और 'इंसानियत' ऐसे भाव हैं जिन्हें हम छू नहीं सकते, सिर्फ महसूस कर सकते हैं, इसलिए ये भाववाचक संज्ञाएँ हैं।
🎯 Exam Tip: भाववाचक संज्ञाएँ अक्सर प्रत्यय (जैसे -ई, -ता, -त्व) के योग से बनती हैं और किसी गुण, दशा या भाव का बोध कराती हैं।
Question 2. 2. कौन-से विकल्प में सभी सर्वनाम अनिश्चयवाचक हैं?
(क) कुछ, किसी का, किन का, मैं
(ख) किसी ने, किसे, क्या, हम ।
(ग) किन्हीं ने, कोई, कुछ, जो
(घ) कोई, कुछ, किसी की, किन्हीं की
Answer: (घ) कोई, कुछ, किसी की, किन्हीं की
In simple words: अनिश्चयवाचक सर्वनाम वे शब्द होते हैं जो किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु के बारे में नहीं बताते, जैसे 'कोई' या 'कुछ'।
🎯 Exam Tip: अनिश्चयवाचक सर्वनामों का प्रयोग तब होता है जब बोलने वाले को किसी व्यक्ति या वस्तु की निश्चित जानकारी नहीं होती।
Question 2. 3. कौन-से वाक्य में गुणवाचक विशेषण का प्रयोग किया गया है?
(क) मेरे पास एक काला कुत्ता है
(ख) बाज़ार से तीन किलो घी ले आओ ।
(ग) उसने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया
(घ) वह लड़का कहाँ चला गया
Answer: (क) मेरे पास एक काला कुत्ता है।
In simple words: इस वाक्य में 'काला' शब्द कुत्ते का रंग बता रहा है, जो उसका एक गुण है, इसलिए यह गुणवाचक विशेषण है।
🎯 Exam Tip: गुणवाचक विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के रूप, रंग, आकार, दशा, गुण-दोष आदि का बोध कराते हैं।
Question 2. 4. अब से ऐसी बात नहीं होगी' में क्रिया-विशेषण है
(क) ऐसी
(ख) अब से
(ग) नहीं
(घ) ऐसी बात
Answer: (ख) अब से
In simple words: 'अब से' यहाँ समय बता रहा है कि क्रिया कब से नहीं होगी, इसलिए यह क्रिया-विशेषण है।
🎯 Exam Tip: क्रिया-विशेषण पहचानने के लिए 'कब', 'कहाँ', 'कैसे' और 'कितना' जैसे प्रश्न क्रिया से पूछें।
Question 2. 5. निम्नलिखित वाक्यों में सरल वाक्य है
(क) सत्य बोलो और प्रगति प्राप्त करो
(ख) सत्य बोलने वाले की सदा विजय होती है।
(ग) जो सत्य बोलते हैं उनकी सदा जय होती है।
(घ) कभी असत्य मत बोलो क्योंकि सत्य बोलना श्रेष्ठ है।
Answer: (ख) सत्य बोलने वाले की सदा विजय होती है।
In simple words: सरल वाक्य वह होता है जिसमें एक ही मुख्य क्रिया और एक ही उद्देश्य होता है।
🎯 Exam Tip: सरल वाक्य में कोई उपवाक्य नहीं होता और न ही इसमें 'और', 'लेकिन', 'क्योंकि' जैसे योजक शब्दों का प्रयोग होता है।
तृतीय मासिक परीक्षा
हिन्दी-X
Question 1. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अति संक्षिप्त (100-150 शब्दों का) निबन्ध लिखिए -
(क) स्वदेश-प्रेम,
(ख) प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ।
Answer: **स्वदेश-प्रेम**
**रूपरेखा:** (1) प्रस्तावना, (2) देश-प्रेम की स्वाभाविकता, (3) देश-प्रेम का अर्थ, (4) देश-प्रेम का क्षेत्र, (5) भारतीयों का देश-प्रेम, (6) उपसंहार।
**प्रस्तावना:** ईश्वर की बनाई सबसे अद्भुत रचना 'माँ' है, जो बिना स्वार्थ के प्यार का प्रतीक है। यही बात जन्मभूमि के बारे में भी सच है। जिसने इन दोनों का प्यार पाया, उसे धरती पर ही स्वर्ग का अनुभव हो गया। इसीलिए माँ और जन्मभूमि की महिमा को स्वर्ग से भी बड़ा बताया गया है।
**देश-प्रेम की स्वाभाविकता:** हर देशवासी को अपने देश से बहुत प्यार होता है। अपना देश चाहे बर्फ से ढका हो, गर्म रेत से भरा हो या ऊँचे पहाड़ों से घिरा हो, वह सबको प्यारा लगता है। सुबह पक्षी भोजन के लिए दूर जाते हैं, पर शाम होते ही अपने घोंसलों में लौट आते हैं। जब पशु-पक्षियों को अपनी मातृभूमि से इतना प्यार हो सकता है, तो इंसान को अपने देश से क्यों नहीं होगा? कहा भी गया है कि माँ और जन्मभूमि का सुख स्वर्ग से भी बढ़कर है।
**देश-प्रेम का अर्थ:** देश-प्रेम का मतलब है- देश में रहने वाले हर जीव-जंतु, हर घर, महल, संस्था, रीति-रिवाज, वेशभूषा, धर्म, मत, भूमि, पर्वत, नदी, वन और पेड़-पौधों से प्यार करना। सच्चा देशभक्त वही होता है जो देश के लिए बिना स्वार्थ के बड़ा-से-बड़ा त्याग कर सकता है। वह स्वदेशी चीजों का खुद उपयोग करता है और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करता है। वह उत्साही, सत्यवादी, महत्वाकांक्षी और कर्तव्य की भावना से भरा होता है।
**देश-प्रेम का क्षेत्र:** देश-प्रेम का क्षेत्र बहुत बड़ा है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति देशभक्ति दिखा सकता है। सैनिक युद्ध में जान देकर, राजनेता देश के विकास में मदद करके, समाज सुधारक समाज का निर्माण करके, धार्मिक नेता मानव-धर्म का आदर्श प्रस्तुत करके, साहित्यकार राष्ट्रीय चेतना जगाकर, कर्मचारी, श्रमिक और किसान निष्ठा से अपना काम करके, व्यापारी मुनाफाखोरी और तस्करी छोड़कर अपनी देशभक्ति दिखा सकता है। संक्षेप में, सबको अपना काम देशहित को सबसे ऊपर रखकर करना चाहिए।
**भारतीयों का देश-प्रेम:** भारत माँ ने ऐसे कई रत्न पैदा किए हैं, जिन्होंने बहुत त्याग भावना से हँसते-हँसते मातृभूमि पर अपनी जान दी है। महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाई, पर मुगलों के सामने सिर नहीं झुकाया। शिवाजी ने गुफाओं में छिपकर शत्रुओं से लड़ाई की। रानी लक्ष्मीबाई ने महलों का सुख छोड़कर शत्रुओं से लोहा लिया और वीरगति प्राप्त की। भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव जैसे कई देशभक्तों ने विदेशियों की यातनाएँ सहते हुए 'वंदेमातरम्' कहते हुए हँसते-हँसते फांसी को गले लगा लिया।
**उपसंहार:** यह दुख की बात है कि आज हमारे नागरिकों में देश-प्रेम की भावना बहुत कम होती जा रही है। नई पीढ़ी का विदेशों से आई वस्तुओं और संस्कृतियों के प्रति अंधाधुंध लगाव चिंताजनक है। हमें अपने राष्ट्र की दशा और छवि को सुधारना होगा। हर देशवासी को यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत राज्यों का एक बगीचा है। एक हिस्से की उन्नति अधूरी है, पूरे बगीचे की उन्नति ही सबकी उन्नति है। देश-प्रेम मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। इसे संकीर्ण रूप में न देखकर व्यापक रूप में ग्रहण करना चाहिए। संकीर्ण देश-प्रेम विश्व-शांति के लिए खतरा हो सकता है। हमें स्वदेश-प्रेम की भावना के साथ-साथ पूरी मानवता के कल्याण का भी ध्यान रखना चाहिए।
In simple words: स्वदेश-प्रेम का अर्थ है अपने देश, उसकी संस्कृति और लोगों से प्यार करना। यह एक स्वाभाविक भावना है, जिसे हर नागरिक को निभाना चाहिए। हमें अपने देश के लिए त्याग करने और उसकी प्रगति में योगदान देने के साथ-साथ विश्व शांति का भी ध्यान रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: निबंध लिखते समय, दिए गए रूपरेखा बिंदुओं का पालन करें, प्रत्येक बिंदु को संक्षिप्त और स्पष्ट पैराग्राफ में विकसित करें, और अंत में एक मजबूत निष्कर्ष दें।
Question 2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए- महात्मा गाँधी अपना काम अपने हाथ से करने पर बल देते थे। वह प्रत्येक आश्रमवासी से आशा करते थे कि वह अपने शरीर से सम्बन्धित प्रत्येक कार्य, सफाई तक स्वयं करेगा। उनका कहना था कि जो श्रम नहीं करता है, वह पाप करता है और पाप का अन्न खाता है। ऋषि-मुनियों ने कहा है बिना श्रम किये जो भोजन करता है, वह वस्तुतः चोर है। महात्मा गाँधी का समस्त जीवन-दर्शन श्रमसापेक्ष था। उनका समस्त अर्थशास्त्र यही बताता था कि प्रत्येक उपभोक्ता को उत्पादनकर्ता होना चाहिए। उनकी नीतियों की उपेक्षा करने के परिणाम हम आज भी भोग रहे हैं। न गरीबी कम होने में आती है, न बेरोजगारी पर नियंत्रण हो पा रहा है और न अपराधों की वृद्धि हमारे वश की बात रही है। दक्षिण कोरियावासियों ने श्रमदान करके ऐसे श्रेष्ठ भवनों का निर्माण किया है, जिनसे किसी को भी ईष्या हो सकती है।
(क) महात्मा गाँधी प्रत्येक आश्रमवासी से क्या आशा करते थे?
(i) वह आश्रम के सभी काम स्वयं करें
(ii) वह परिश्रमशील बने ।
(iii) वह अपने शरीर से सम्बन्धित प्रत्येक कार्य स्वयं करें
(iv) वह आश्रम के कार्यों में सहयोग करें ।
Answer: (iii) वह अपने शरीर से सम्बन्धित प्रत्येक कार्य स्वयं करें
In simple words: गाँधीजी चाहते थे कि आश्रम में रहने वाला हर व्यक्ति अपना शारीरिक काम खुद करे, यहाँ तक कि साफ-सफाई भी।
🎯 Exam Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों के उत्तर देते समय, पहले प्रश्न को ध्यान से पढ़ें और फिर गद्यांश में सीधे तौर पर दिए गए संबंधित वाक्य या वाक्यांश को खोजें।
Question 2. (ख) ऋषि-मुनियों ने किस प्रकार के व्यक्ति को चोर कहा है?
(i) जो किसी को हानि पहुँचाता है।
(ii) जो चोरी करता है।
(iii) जो बिना श्रम किये भोजन करता है।
(iv) जो असत्य भाषण करता है।
Answer: (iii) जो बिना श्रम किये भोजन करता है।
In simple words: ऋषि-मुनियों का मानना था कि जो व्यक्ति बिना मेहनत किए खाना खाता है, वह चोर के समान है।
🎯 Exam Tip: प्रश्नों का उत्तर गद्यांश के आधार पर ही दें, अपनी तरफ से कोई अतिरिक्त जानकारी या व्याख्या न जोड़ें।
Question 2. (ग) दक्षिण कोरियावासियों ने श्रमदान करके किस प्रकार की चीजों का निर्माण किया है?
(i) श्रेष्ठ मन्दिरों का
(ii) श्रेष्ठ भवनों का
(iii) श्रेष्ठ पुलों का ।
(iv) श्रेष्ठ बाँधों का
Answer: (ii) श्रेष्ठ भवनों का
In simple words: दक्षिण कोरिया के लोगों ने मिलकर मेहनत करके बहुत अच्छे भवन बनाए हैं, जिन्हें देखकर कोई भी जल सकता है।
🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और सबसे सटीक उत्तर चुनें जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से उल्लेखित हो।
Question 3. नीचे दिये गये चित्रों के आधार पर एक अति संक्षिप्त कहानी लिखिए-
Answer: **तीन मित्र**
एक घने जंगल में एक हिरन, एक कौआ और एक चूहा रहते थे। तीनों बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा साथ रहते व खाते-पीते थे। एक दिन, जंगल में एक शिकारी आया और उसने अपना जाल बिछा दिया। बेचारा हिरन उस जाल में फंस गया। उस समय कौआ और चूहा वहाँ नहीं थे। जब कौआ आया, तो उसने देखा कि हिरन जाल में फंसा हुआ है। यह देखकर वह पेड़ पर बैठकर 'काँव-काँव' करने लगा। कौए की आवाज सुनकर चूहा भागता हुआ आया और उसने अपने तेज दांतों से जाल को काट दिया। इस तरह हिरन की जान बच गई। यह कहानी दर्शाती है कि मुश्किल समय में दोस्त ही एक-दूसरे की मदद करते हैं।
In simple words: एक हिरन, कौआ और चूहा गहरे दोस्त थे। एक दिन हिरन शिकारी के जाल में फंस गया। कौए ने चूहे को बुलाया, और चूहे ने अपने दांतों से जाल काटकर हिरन को आज़ाद कर दिया।
🎯 Exam Tip: चित्र-आधारित कहानी लिखते समय, सभी चित्रों को क्रमबद्ध तरीके से कहानी में शामिल करें और एक स्पष्ट शुरुआत, मध्य और अंत के साथ एक शिक्षाप्रद संदेश दें।
मॉडल पेपर
केवल प्रश्न-पत्र
हिन्दी
कक्षा 10
निर्देश-प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं ।
Question 1. (क) निम्नलिखित कथनों में से कोई एक कथन सत्य है, उसे पहचानकर लिखिए-
(i) 'झूठा सच' यशपाल का प्रसिद्ध काव्य है।
(ii) डॉ० नगेन्द्र ख्यातिप्राप्त उपन्यासकार हैं।
(iii) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद निबन्धकार थे।
(iv) 'गबन' बालकृष्ण भट्ट की प्रसिद्ध कृति है।
Question 1. (ख) निम्नलिखित कृतियों में से किसी एक कृति के लेखक का नाम लिखिए-
(i) साहित्यालोचन
(ii) सेवासदन
(iii) कलम का सिपाही
(iv) अशोक के फूल
Question 1. (ग) किसी एक रिपोर्ताज-लेखक का नाम लिखिए।
Question 1. (घ) किसी एक नाटककार का नाम लिखिए ।
Question 1. (ङ) शुक्लोत्तर युग के किसी एक साहित्यकार का नाम लिखिए।
Question 2. (क) छायावाद की किन्हीं दो रचनाओं का उल्लेख करते हुए उनके रचनाकारों के नाम लिखिए।
Question 2. (ख) रामचन्द्रिका' तथा 'ललितललाम' के रचयिताओं के नाम लिखिए।
Question 2. (ग) भक्तिकाल के किसी एक कवि का नाम लिखिए।
Question 3. निम्नांकित गद्यांशों में से किसी एक के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) जब एक बार मनुष्य अपना पैर कीचड़ में डाल देता है तब फिर यह नहीं देखता कि वह कहाँ और कैसी जगह पैर रखता है। धीरे-धीरे उन बुरी बातों में अभ्यस्त होते-होते तुम्हारी घृणा कम हो जाएगी। पीछे तुम्हें उनसे चिढ़ न मालूम होगी क्योंकि तुम यह सोचने लगोगे कि चिढ़ने की बात ही क्या है? तुम्हारा विवेक कुंठित हो जाएगा और तुम्हें भले-बुरे की पहचान न रह जाएगी। अंत में होते-होते तुम भी बुराई के भक्त बन जाओगे। अतः हृदय को उज्ज्वल और निष्कलंक रखने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि बुरी संगत की छूत । से बचो ।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) लेखक ने हृदय को उज्ज्वल और निष्कलंक रखने का क्या उपाय सुझाया है ?
(ख) एक उपवन को पाकर भगवान् को धन्यवाद देते हुए उसका आनन्द नहीं लेना और बराबर इस चिन्ता में निमग्न रहना किं इससे भी बड़ा उपवन क्यों नहीं मिला, एक ऐसा दोष है, जिससे ईष्यालु व्यक्ति को चरित्र भी भयंकर हो उठता है। (UPBoardSolutions.com) अपने अभाव परे दिन-रात सोचते-सोचते वह सृष्टि की प्रक्रिया को भूलकर विनाश में लग जाता है और अपनी उन्नति के लिए उद्यम करना छोड़कर वह दूसरों को हानि पहुँचाने को ही अपना श्रेष्ठ कर्तव्ये समझने लगता है।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) लेखक ने ईर्ष्यालु व्यक्ति के चरित्र के भयंकर होने का क्या कारण बताया है ?
Question 4. निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए और काव्यसौन्दर्य भी लिखिए
Question 4. (क) निरगुन कौन देस कौ बासी ?
मधुकर कहि समुझाइ सौंह है,
बुझतिं साँच न हाँसी ।।
को है जनक, कौन है जननी,
कौन नारि, को दासी ?
कैसे बरन, भेष है कैसो,
किहिं रस को अभिलाषी ?
पावैगो पुनि कियौ आपनौ,
जो रे करैगो गाँसी ?
सुनत मौन है रह्यौ बावरी,
सूर सबै मति नासी ।।
Question 4. (ख) मेवाड़-केसरी देख रहा, केवल रण का न तमाशा था। वह दौड़-दौड़ करता था रण, वह मान-रक्त का प्यासा था।।
चढ़कर चेतक पर घूम-घूम, करता सेना रखवाली था। ले महामृत्यु को साथ-साथ । मानो प्रत्यक्ष कपाली था।।
Question 5. (क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक का जीवन-परिचय दीजिए एवं लेखक की एक रचना का नाम लिखिए
(i) रामधारी सिंह दिनकर
(ii) जयप्रकाश भारती
(iii) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
Question 5. (ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक का जीवन-परिचय एवं उनकी एक रचना लिखिए-
(i) मैथिलीशरण गुप्त
(ii) रामनरेश त्रिपाठी
(iii) सूरदास
Question 6. निम्नलिखित का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए-
अधुनाऽपि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानं च वर्द्धयति । अत्र अनेके आचार्याः मूर्धन्याः विद्वांसः वैदिकवाङ्मयस्य अध्ययने अध्यापने च इदानीं निरताः । न केवलं भारतीयाः अपितु वैदेशिकाः गीर्वाणवाण्याः अध्ययनाय अत्र आगच्छन्ति, निःशुल्कं (UPBoardSolutions.com) च विद्यां गृहणन्ति । अत्र हिन्दू विश्वविद्यालयः, संस्कृत विश्वविद्यालयः काशी विद्यापीठम् इत्येते त्रयः विश्वविद्यालयाः सन्ति, येषु नवीनां प्राचीनानाम् च ज्ञानविज्ञान विषयाणाम् अध्ययनं प्रचलति ।
अथवा स ह द्वादशवर्ष उपेत्य चतुर्विंशतिवर्षः सर्वान्वेदानधीत्य महामना अनूचानमानी स्तब्ध एयाय तं ह पितोवाच
Question 7. (क) अपनी पाठ्य-पुस्तक से कंठस्थ किया गया कोई एक श्लोक लिखिए जो प्रश्न-पत्र में न आया हो ।
Question 7. (ख) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए
(i) दाराशिकोहः कस्यां भाषायां उपनिषदाम् अनुवादम् अकारयत् ?
(ii) वातात् शीघ्रतरं किम अस्ति ?
(iii) भारतीय संस्कृतेः मूलं किम् अस्ति ?
(iv) इन्दुदर्शनेन कः वर्धते ?
Question 8. (क) हास्य रस की परिभाषा लिखकर उसका एक उदाहरण दीजिए।
अथवा
राम-राम कहि राम कहि, राम-राम कहि राम
तन परिहरि रघुपति विरहं राउ गयउ सुरछाम् ।।
उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त रस का नाम तथा स्थायी भाव लिखिए।
Question 8. (ख) “रूपक' अथवा 'उपमा अलंकार की परिभाषा उदाहरण-सहित लिखिए।
Question 8. (ग) रोला' अथवा 'सोरठा' छन्द की परिभाषा उदाहरण-सहित लिखिए।
Question 9. (क) निम्नलिखित उपसर्गों में से किन्हीं तीन के मेल से एक-एक शब्द बनाइए-
Question 9. (ख) निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रत्ययों का प्रयोग करके एक-एक शब्द बनाइए-
(i) हट
(ii) पन
(iii) ता
(iv) त्व
Question 9. (ग) निम्नलिखित में से किन्हीं दो में समास-विग्रह कीजिए तथा समास का नाम लिखिए
(i) स्वर्णकलश
(ii) चौमासा
(iii) जल-थल
(iv) विषधर
Question 9. (घ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो के तत्सम रूप लिखिए-
(i) आँख
(ii) हाथ,
(iii) कपूर
(iv) कान
Question 9. (ङ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-
(i) चाँद
(ii) भ्रमर
(iii) समुद्र
(iv) पर्वत
Question 10. (क) निम्नलिखित में से किन्हीं दो में सन्धि कीजिए और सन्धि का नाम लिखिए-
(i) प्रति + उत्तरम्
(ii) पितृ + आदेशः
(iii) तथा + एवं
(iv) महा + ओजः
Question 10. (ख) निम्नलिखित शब्दों के रूप षष्ठी विभक्ति, द्विवचन में लिखिए-
(i) नदी अथवा मधु
(ii) फल अथवा मति
Question 10. (ग) निम्नलिखित में से किसी एक की धातु, लकार, पुरुष तथा वचन का उल्लेख कीजिए
(i) पचेव
(ii) पश्याम
(iii) अहसाम्
(iv) पठामः
Question 10. (घ) निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं दो का संस्कृत में अनुवाद कीजिए
(i) मैं प्रतिदिन स्नान करता हूँ।
(ii) तुम वीर हो ।
(iii) वे लड़के दिन में कहाँ पढ़ेंगे ?
(iv) हमें देशभक्त होना चाहिए ।
Question 11. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए
(i) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ii) भ्रष्टाचार : कारण और निवारण
(iii) पर्यावरण-प्रदूषण
(iv) विज्ञान के बढ़ते कदम
(v) स्वास्थ्य शिक्षा का महत्त्व
Question 12. अपने पठित खण्डकाव्य के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक को उत्तर लिखिए
(क)
(i) “तुमुल' खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) 'तुमुल' खण्डकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
(ख)
(i) कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
(ii) कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ग)
(i) 'कर्ण' खण्डकाव्य के नायक के चरित्र का चित्रण कीजिए।
(ii) ‘कर्ण' खण्डकाव्य की कथा संक्षेप (UPBoardSolutions.com) में लिखिए।
(घ)
(i) 'अग्रपूजा' खण्डकाव्य की कथावस्तु पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
(ii) 'अग्रपूजा' के प्रधान पात्र की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
(ङ)
(i) ज्योति-जवाहर' खण्डकाव्य का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
(ii) 'ज्योति-जवाहर' खण्डकाव्य के प्रधान पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
(च)
(i) मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के प्रथम सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(छ)
(i) मेवाड़-मुकुट' के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) 'मेवाड़-मुकुट' खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
Question 12. (ज)
(i) 'जय सुभाष' खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
(ii) 'जय सुभाष' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(झ)
(i) 'मुक्ति-दूत' खण्डकाव्य के प्रमुख पात्र की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(ii) मुक्ति-दूत' खण्डकाव्य का कथासार प्रस्तुत (UPBoardSolutions.com) कीजिए।
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