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Step-by-Step UP Board Solutions: Class 10 Hindi Chapter 9 जीवन सुत्रानी
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Class 10 Hindi Chapter 9 जीवन सुत्रानी Textbook Solutions with Answers
अवतरणों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद
प्रश्न (1-2)
प्रश्न (3-4)
प्रश्न (5-6)
प्रश्न (7-8)
प्रश्न (9-10)
अतिलघु-उतरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर
Question 1. भूमेः गुरुतरं किम् अस्ति ? [2011, 12, 15]
Answer: माता गुरुतरा भूमेः । माँ धरती से भी अधिक महान होती हैं, क्योंकि वह बच्चों का पालन-पोषण करती हैं।
In simple words: धरती से भी भारी (महान) माँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में सीधा उत्तर देना होता है। 'गुरुतरा' शब्द का अर्थ 'अधिक भारी' या 'महान' है।
Question 2. खात् (आकाशात्) उच्चतरं किम् अस्ति ? [2014, 17]
या
पिता कस्मात् उच्चतरः भवति ? [2010]
Answer: खात् (आकाशात्) उच्चतरः पिता अस्ति। पिता का दर्जा आकाश से भी ऊँचा माना जाता है क्योंकि वे हमें सही मार्ग दिखाते हैं और हमारी रक्षा करते हैं।
In simple words: आकाश से ऊँचा पिता होते हैं।
🎯 Exam Tip: संस्कृत में 'खात्' का अर्थ 'आकाश से' होता है, जो पंचमी विभक्ति का प्रयोग दर्शाता है।
Question 3. वातात् शीघ्रतरं किम् अस्ति ? [2009, 10, 12, 14, 15, 16]
Answer: वातात् शीघ्रतरं मनः अस्ति।। मन हवा से भी ज़्यादा तेज़ी से चलता है, क्योंकि यह एक ही पल में कहीं से कहीं भी पहुँच सकता है।
In simple words: हवा से भी तेज़ मन होता है।
🎯 Exam Tip: मन की गति को अक्सर हवा की गति से तुलना की जाती है, जो उसकी चंचलता को दिखाती है।
Question 4. तृणात् बहुतरं किम् अस्ति ?
या
तृणात् का बहुतरी अस्ति ?
Answer: तृणात् चिन्ता बहुतरी अस्ति । चिन्ता तिनकों से भी अधिक होती है, क्योंकि यह एक बार शुरू हो जाए तो बढ़ती ही जाती है और मन को परेशान करती है।
In simple words: तिनकों से भी ज़्यादा चिंता होती है।
🎯 Exam Tip: 'बहुतरी' शब्द 'अधिक' या 'बहुत' को दर्शाता है, जिसका प्रयोग चिन्ता के फैलाव को बताने के लिए किया गया है।
Question 5. प्रवसतो (विदेशे) मित्रं किम् अस्ति ?
Answer: प्रवसतो (विदेशे) मित्रम् धनम् अस्ति । विदेश में रहने वाले व्यक्ति का मित्र धन होता है, क्योंकि बिना धन के परदेश में रहना बहुत मुश्किल होता है।
In simple words: विदेश में धन ही सच्चा मित्र होता है।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में धन की महत्ता को दर्शाया गया है, खासकर जब व्यक्ति अपने घर से दूर हो।
Question 6. गृहे सतः मित्रम् किं अस्ति ? [2012, 14]
Answer: भार्या गृहे सर्तः मित्रम् अस्ति । घर में पत्नी ही सबसे अच्छी मित्र होती है, क्योंकि वह हर सुख-दुःख में साथ देती है और घर संभालती है।
In simple words: घर पर पत्नी ही मित्र होती है।
🎯 Exam Tip: 'भार्या' का अर्थ 'पत्नी' होता है और 'सतः' का अर्थ 'रहते हुए' या 'होते हुए' है।
Question 7. मरिष्यतः मित्रं किम् अस्ति ?
Answer: मरिष्यतः मित्रं दानम् अस्ति । मरने वाले व्यक्ति का मित्र दान होता है, क्योंकि दान ही परलोक में उसके साथ जाता है और उसे पुण्य दिलाता है।
In simple words: मरने वाले का मित्र दान होता है।
🎯 Exam Tip: यह श्लोक दान के महत्व को बताता है, खासकर मृत्यु के बाद के जीवन में।
Question 8. धनानाम् उत्तमं धनं किम् अस्ति ? [2011, 12]
Answer: धनानाम् उत्तमं श्रुतम् (विद्या) अस्ति । सभी धनों में विद्या ही सबसे उत्तम धन है, क्योंकि इसे कोई चुरा नहीं सकता और यह हमेशा साथ रहती है।
In simple words: सभी धनों में विद्या ही सबसे अच्छा धन है।
🎯 Exam Tip: 'श्रुतम्' का अर्थ 'ज्ञान' या 'विद्या' है, जो यहाँ सभी प्रकार के धन से श्रेष्ठ बताया गया है।
Question 9. लाभानाम् उत्तमं किम् अस्ति ?
Answer: लाभानाम् उत्तमम् आरोग्यम् अस्ति। सभी लाभों में स्वास्थ्य (नीरोगिता) सबसे उत्तम है, क्योंकि स्वस्थ शरीर के बिना कोई भी कार्य ठीक से नहीं हो सकता।
In simple words: सभी लाभों में स्वास्थ्य सबसे अच्छा है।
🎯 Exam Tip: 'आरोग्यम्' का अर्थ 'स्वस्थ' या 'नीरोगी' होता है, जो अच्छे स्वास्थ्य को दर्शाता है।
Question 10. सुखानाम् उत्तमं किं स्यात् ?
Answer: तुष्टि; सुखानाम् उत्तमा स्यात् ।। सभी सुखों में संतोष (तुष्टि) सबसे उत्तम है, क्योंकि संतुष्ट व्यक्ति ही सबसे सुखी होता है, चाहे उसके पास कितना भी कम क्यों न हो।
In simple words: सभी सुखों में संतोष सबसे अच्छा है।
🎯 Exam Tip: 'तुष्टि' का अर्थ 'संतोष' होता है, जिसका सीधा संबंध मानसिक शांति और खुशी से है।
Question 11. किं हित्वा नरः प्रियो भवति ?
Answer: मानं हित्वा नरः प्रियो भवति । मनुष्य अहंकार (घमंड) छोड़कर सबका प्रिय हो जाता है, क्योंकि विनम्रता लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
In simple words: घमंड छोड़ने से इंसान सबका प्यारा बन जाता है।
🎯 Exam Tip: 'मानं' का अर्थ 'अभिमान' या 'घमंड' है, जिसे छोड़ने से व्यक्ति के संबंध बेहतर होते हैं।
Question 12. नरः किं हित्वा न शोचति ?
Answer: नरः क्रोधं हित्वा न शोचति । मनुष्य क्रोध को छोड़कर कभी दुखी नहीं होता है, क्योंकि क्रोध करने से मन अशांत होता है और दुःख मिलता है।
In simple words: गुस्सा छोड़ने से इंसान दुखी नहीं होता।
🎯 Exam Tip: 'हित्वा' का अर्थ 'छोड़कर' होता है। इस श्लोक में क्रोध त्यागने का महत्व बताया गया है।
Question 13. मनुष्यः किं हित्वा सुखी भवति ?
Answer: मनुष्यः लोभं हित्वा सुखी भवति । मनुष्य लोभ (लालच) को छोड़कर सुखी होता है, क्योंकि लालच कभी पूरा नहीं होता और व्यक्ति को हमेशा बेचैन रखता है।
In simple words: लालच छोड़ने से इंसान सुखी होता है।
🎯 Exam Tip: लोभ को त्यागने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और वह अपने पास जो कुछ है, उसमें संतुष्ट रहता है।
Question 14. सर्वेषु उत्तमं धनं किम् अस्ति ?
या
धनानां उत्तमं धनं किम् अस्ति ?
Answer: श्रुतं सर्वेषु उत्तमं धनम् अस्ति। सभी धनों में ज्ञान (विद्या) सबसे उत्तम धन है, क्योंकि ज्ञान ही हमें सही राह दिखाता है और कभी खत्म नहीं होता।
In simple words: सभी धनों में ज्ञान ही सबसे अच्छा धन है।
🎯 Exam Tip: 'श्रुतं' शब्द का प्रयोग ज्ञान के लिए हुआ है, जो भौतिक धन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
Question 15. आतुरस्य मित्रं किं अस्ति ? [2011, 12, 13, 14, 16]
Answer: आतुरस्य मित्रं वैद्यः अस्ति । बीमार व्यक्ति का मित्र वैद्य (डॉक्टर) होता है, क्योंकि वही उसे रोग से मुक्ति दिलाकर स्वस्थ कर सकता है।
In simple words: बीमार व्यक्ति का दोस्त डॉक्टर होता है।
🎯 Exam Tip: 'आतुरस्य' का अर्थ 'बीमार का' होता है, और 'वैद्यः' का अर्थ 'डॉक्टर' या 'चिकित्सक' है।
Question 16. किं त्यक्त्वा न शोचति ?
या
किं हित्वा (त्यक्त्वा) नरः न शोचति ?
Answer: क्रोधं त्यक्त्वा न शोचति।। क्रोध को छोड़कर मनुष्य कभी दुखी नहीं होता है, क्योंकि क्रोध ही सभी दुःखों का कारण बनता है।
In simple words: क्रोध को त्यागने से मनुष्य दुखी नहीं होता।
🎯 Exam Tip: 'त्यक्त्वा' और 'हित्वा' दोनों का अर्थ 'छोड़कर' होता है, जो यहाँ क्रोध त्यागने के संदर्भ में प्रयोग किया गया है।
Question 17. आतुरस्य मित्रं कः भवति ? [2015]
या
भिषक् कस्य मित्रं भवति ? [2009]
Answer: आतुरस्य मित्रं भिषक् भवति । बीमार व्यक्ति का मित्र वैद्य (डॉक्टर) होता है, जो उसे स्वास्थ्य लाभ देकर जीवन देता है।
In simple words: बीमार का मित्र वैद्य (डॉक्टर) होता है।
🎯 Exam Tip: 'भिषक्' भी 'वैद्य' या 'डॉक्टर' का पर्यायवाची शब्द है, जिसका अर्थ रोग का उपचार करने वाला होता है।
Question 18. किं नु हित्वा सुखी भवेत् ?
Answer: लोभं हित्वा सुखी भवेत् ।। लोभ (लालच) को छोड़कर व्यक्ति सुखी होता है, क्योंकि लालच से मुक्ति पाकर ही व्यक्ति संतुष्ट और प्रसन्न रह सकता है।
In simple words: लालच छोड़ने से इंसान सुखी होता है।
🎯 Exam Tip: इस श्लोक में संतोष और लालच के त्याग के माध्यम से सुख प्राप्त करने का मार्ग बताया गया है।
Question 19. किंस्वित् शीघ्रतरं वातात किं स्विद बहुतरं तृणात ?
Answer: मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात् ।। हवा से भी तेज़ मन होता है और तिनकों से भी ज़्यादा चिंताएँ होती हैं। मन की गति बेजोड़ है और चिंताएँ अनंत।
In simple words: हवा से तेज़ मन है और तिनकों से ज़्यादा चिंताएँ।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न एक ही वाक्य में दो अलग-अलग गुणों की तुलना करता है - मन की गति और चिंताओं की संख्या।
अनुवादात्मक
Question 1. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
(क) माता भूमि से बढ़कर है।
(ख) आकाश से पिता उच्च होता है।
(ग) विदेश में धन मित्र होता है।
(घ) घर में पत्नी ही मित्र होती है।
(ङ) धनों में श्रुत ही उत्तम धन है।
(च) क्या छोड़कर व्यक्ति दुःखी नहीं होता ?
(छ) सुखों में सन्तुष्टि उत्तम है।
(ज) अभिमान को त्यागकर व्यक्ति प्रिय होता है।
(झ) सन्तोष उत्तम सुख है।
(ञ) वह शोक नहीं करता है।
Answer:
(क) माता भूमेः महत्तरा अस्ति। माता की महत्ता पृथ्वी से भी अधिक है, क्योंकि वह हमें जन्म देती हैं।
(ख) आकाशात् पिता उच्चतरः अस्ति। पिता आकाश से भी ऊँचे होते हैं, क्योंकि वे हमारा पालन-पोषण करते हैं।
(ग) विदेशेषु धनं मित्रं भवति। विदेश में धन ही सच्चा मित्र होता है, जो सभी मुश्किलों में काम आता है।
(घ) गृहे भार्या एव मित्रं भवति। घर में पत्नी ही सबसे अच्छी मित्र होती है, जो हर सुख-दुःख में साथ देती है।
(ङ) धनेषु श्रुतम् एव उत्तमं धनम् अस्ति। सभी धनों में ज्ञान (विद्या) ही सबसे उत्तम धन है, क्योंकि इसे कोई चुरा नहीं सकता।
(च) किं हित्वा मानवः दुःखी न भवति ? क्या छोड़कर मनुष्य दुखी नहीं होता है? क्रोध त्यागने से व्यक्ति को शांति मिलती है।
(छ) सुखानां सन्तुष्टिः उत्तमा अस्ति। सुखों में संतोष सबसे उत्तम है, क्योंकि संतोष से ही मन शांत रहता है।
(ज) अभिमानं हित्वा नरः प्रिय भवति । अभिमान (घमंड) छोड़कर मनुष्य सबका प्रिय हो जाता है, क्योंकि विनम्रता सबको पसंद आती है।
(झ) सन्तोषः परमं सुखं अस्ति। संतोष ही सबसे बड़ा सुख है, क्योंकि यह मन को शांति देता है।
(ञ) सः शोकं न करोति । वह शोक नहीं करता है। क्रोध और लोभ त्यागने से व्यक्ति शोक से दूर रहता है।
In simple words: यहाँ पर हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद दिया गया है। हर वाक्य में एक महत्वपूर्ण सीख छिपी है।
🎯 Exam Tip: अनुवाद करते समय शब्द के सही रूप (विभक्ति, वचन) और क्रिया के सही काल का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।
व्याकरणत्मक
Question 1. निम्नलिखित शब्दों के विभक्ति और वचन बताइए- तृणात्, मित्रम्, धनानाम्, प्रियः, कामम्, वातात्, भूमेः, गृहे, आतुरस्य।
Answer:
| शब्द | विभक्ति | वचन |
|---|---|---|
| तृणात् | पञ्चमी | एकवचन |
| मित्रम् | प्रथमा | एकवचन |
| धनानाम् | षष्ठी | बहुवचन |
| प्रियः | प्रथमा | एकवचन |
| कामम् | द्वितीया | एकवचन |
| वातात् | पञ्चमी | एकवचन |
| भूमेः | षष्ठी | एकवचन |
| गृहे | प्रथमा-द्वितीया/सप्तमी | द्विवचन/एकवचन |
| आतुरस्य | षष्ठी | एकवचन |
In simple words: इस सारणी में संस्कृत शब्दों की विभक्ति और वचन बताए गए हैं, जो शब्द के रूप और अर्थ को समझने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: विभक्ति और वचन का सही ज्ञान संस्कृत व्याकरण के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह वाक्य संरचना को प्रभावित करता है।
Question 2. 'मृ' धातु के लृट् लकार तथा 'भू धातु के विधिलिङ् लकार के तीनों पुरुषों और वचनों के रूप लिखिए।
Answer:
'मृ' धातु (लृट् लकार)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | मरिष्यति | मरिष्यतः | मरिष्यन्ति |
| मध्यम | मरिष्यसि | मरिष्यथः | मरिष्यथ |
| उत्तम | मरिष्यामि | मरिष्यावः | मरिष्यामः |
'भू' धातु (विधिलिङ् लकार)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भवेत् | भवेताम् | भवेयुः |
| मध्यम | भवेः | भवेतम् | भवेत |
| उत्तम | भवेयम् | भवेव | भवेम |
In simple words: यहाँ 'मृ' और 'भू' धातु के भविष्य काल और 'चाहिए' अर्थ वाले रूप दिए गए हैं।
🎯 Exam Tip: लकारों के रूपों को याद करने से संस्कृत में वाक्य बनाने में बहुत आसानी होती है। प्रत्येक लकार का अपना विशिष्ट अर्थ होता है।
Question 3. निम्नलिखित शब्दों के धातु, लकार, पुरुष एवं वचन बताइए- भवेत्, मरिष्यतः, स्यात्, शोचति ।।
Answer:
| धातु-रूप | धातु | लकार | पुरुष | वचन |
|---|---|---|---|---|
| भवेत् | भू | विधिलिङ् | प्रथम | एकवचन |
| मरिष्यतः | मृ | लृट् | प्रथम | द्विवचन |
| स्यात् | अस | विधिलिङ् | प्रथम | एकवचन |
| शोचति | शुच् | लट् | प्रथम | एकवचन |
In simple words: इस सारणी में संस्कृत शब्दों के मूल धातु, उनके काल, पुरुष और वचन बताए गए हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी संस्कृत शब्द का सही व्याकरणिक विश्लेषण करने के लिए धातु, लकार, पुरुष और वचन की पहचान करना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है।
श्लोक-लेखन
ध्यातव्य-यहाँ पाठ्य-पुस्तक से चुनकर कुछ श्लोक दिये जा रहे हैं। छात्रों को इन्हें कण्ठस्थ कर इनके शुद्ध लेखन का अभ्यास करना चाहिए।
1. रे रे चातक ! सावधानमनसा मित्र! क्षणं श्रूयताम् । अम्भोदा बहवो वसन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः ॥
2. केचिद वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसथां गर्जन्ति केचिद वृथा। यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वचः ॥
3. त्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं, भास्वानुदेष्यति हसिष्यति पङ्कजालिः । इत्थं विचिन्तयति कोशगते द्विरेफे, हा हन्त! हन्त! नलिनीं गज उज्जहार ॥
4. उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् । वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥
5. अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः । अमुखः स्फुटवक्ता च यो जानाति स पण्डितः ॥
6. सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत् ॥
7. माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा । मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात् ॥
8. सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः । आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ॥
9. मानं हित्वा प्रियो भवति क्रोधं हित्वा न शोचति ।। कामं हित्वार्थवान् भवति लोभं हित्वा सुखी भवेत् ॥
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