Download UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 09 सुभद्रकुमारी चौहान
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कवयित्री-परिचय
Question 1. श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान का जीवन-परिचय देते हुए उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों (रचनाओं) पर प्रकाश डालिए ।
Answer: सुभद्राकुमारी चौहान की कविताएँ एक सच्ची वीरांगना की शक्ति और वीरता दिखाती हैं। उनकी कविताओं ने भारत के युवाओं के अंदर उत्साह भरा और उन्हें आजादी पाने के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनकी कविताएँ लोगों को बहुत पसंद आईं और वे एक लोकप्रिय कवयित्री बन गईं।
जीवन-परिचय: क्रांति की समर्थक सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म 1904 ईस्वी में इलाहाबाद के निहालपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता रामनाथ सिंह पढ़े-लिखे, अमीर और सम्मानित व्यक्ति थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज में की। 15 साल की उम्र में उनकी शादी खंडवा (मध्य प्रदेश) के ठाकुर लक्ष्मणसिंह चौहान से हुई। उनके पति ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलनों में शामिल थे। सुभद्राकुमारी भी अपने पति के साथ कई राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लेती रहीं, जिसके कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। असहयोग आंदोलन के कारण उनकी पढ़ाई रुक गई थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित होकर उन्होंने देश-प्रेम पर कविताएँ लिखना शुरू किया। वे हिंदी कविता की दुनिया में ऐसी कवयित्री थीं, जिन्होंने अपनी जोश भरी कविताओं से लाखों भारतीय युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। 'झाँसी वाली रानी थी' और 'वीरों का कैसा हो बसंत' जैसी उनकी कविताएँ युवाओं में क्रांति की भावना भरती रहीं। उन्हें पंडित माखनलाल चतुर्वेदी से भी बहुत प्रोत्साहन मिला, जिससे उनकी देशभक्ति और गहरी होती गई। वे मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्य भी रहीं। 1948 ईस्वी में एक गाड़ी दुर्घटना में हिंदी साहित्य ने एक प्रतिभाशाली कवयित्री को समय से पहले ही खो दिया। उनकी रचनाएँ हमेशा लोगों को देश के प्रति प्रेम और बलिदान की याद दिलाती रहेंगी।
काव्य-कृतियाँ: सुभद्राकुमारी चौहान की मुख्य काव्य-कृतियाँ इस प्रकार हैं:
(1) मुकुल: इस संग्रह में वीर रस से भरी 'वीरों का कैसा हो बसंत' जैसी कविताएँ शामिल हैं। इस काव्य-संग्रह के लिए उन्हें 'सेकसरिया' पुरस्कार मिला था।
(2) त्रिधारा: इस काव्य-संग्रह में 'झाँसी की रानी की समाधि पर' नामक प्रसिद्ध कविता है। इस संग्रह में देश प्रेम की भावना साफ दिखती है।
(3) सीधे-सादे चित्र, (4) बिखरे मोती और (5) उन्मादिनी। ये तीनों उनके कहानी-संग्रह हैं।
In simple words: सुभद्राकुमारी चौहान एक प्रसिद्ध कवयित्री थीं जो स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी थीं। उनकी कविताओं में वीरता और देश प्रेम की भावना थी, जिससे उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया। उनकी मुख्य किताबें 'मुकुल' और 'त्रिधारा' हैं।
🎯 Exam Tip: जीवन-परिचय लिखते समय जन्म, मृत्यु, शिक्षा, और मुख्य कृतियों को क्रम से बताना महत्वपूर्ण है। प्रमुख रचनाओं के नाम याद रखें।
पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या
झाँसी की रानी की समाधि पर
Question 1. इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी ।। जल कर जिसने स्वतन्त्रता की, दिव्य आरती फेरी ॥ यह समाधि यह लधु समाधि है, झाँसी की रानी की । अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की ॥ यहीं कहीं पर बिखर गयी वह, भग्न विजय-माला-सी। उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति-शाला-सी ॥ सहे वार पर वार अंत तक, लड़ी वीर बाला-सी । आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी ॥
Answer:
सन्दर्भ: ये पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक 'काव्य-खण्ड' में शामिल श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान की कविता 'झाँसी की रानी की समाधि पर' से ली गई हैं। यह कविता उनके 'त्रिधारा' काव्य-संग्रह का हिस्सा है। इस कविता में रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को बहुत सम्मान के साथ याद किया गया है।
प्रसंग: इन पंक्तियों में कवयित्री रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के महत्व को बता रही हैं और उनके प्रति अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित कर रही हैं।
व्याख्या: कवयित्री कहती हैं कि यह रानी लक्ष्मीबाई की समाधि है। इसके अंदर रानी के शरीर की राख है। रानी ने अपना जीवन बलिदान करके यहीं पर स्वतंत्रता की दिव्य आरती की थी। यह छोटी-सी समाधि लक्ष्मीबाई के महान त्याग और देशप्रेम की निशानी है। यह स्थान रानी के जीवन का अंतिम पड़ाव है, जहाँ उन्होंने पुरुषों जैसी वीरता दिखाते हुए खुद को बलिदान कर दिया। कवयित्री कहती हैं कि रानी लक्ष्मीबाई टूटी हुई विजयमाला की तरह अपनी समाधि के आसपास ही बिखर गई थीं। युद्ध में अंग्रेजी सेना से बहादुरी से लड़ते हुए रानी के शरीर के टुकड़े यहीं-कहीं बिखर गए थे। इस समाधि में वीरांगना लक्ष्मीबाई की हड्डियाँ (फूल) इकट्ठी करके रखी गई हैं, ताकि देश की आने वाली पीढ़ी उनके गौरवशाली बलिदान से प्रेरणा ले सके। कवयित्री कहती हैं कि रानी लक्ष्मीबाई अंतिम सांस तक दुश्मनों की तलवारों के वार सहती रहीं। जैसे यज्ञ-कुंड में आहुतियाँ पड़ने से आग जल उठती है, उसी तरह रानी के बलिदान से आजादी की आग चारों ओर फैल गई। रानी के इस महान त्याग ने अग्नि में आहुति का काम किया, जिससे लोगों में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का उत्साह बढ़ा और रानी की प्रसिद्धि चारों ओर फैल गई।
काव्यगत सौन्दर्य:
1. कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और बलिदान की महानता का गुणगान किया है।
2. भाषा सरल और समझने योग्य खड़ी बोली है।
3. शैली ओजपूर्ण आख्यानक गीति शैली है, जो जोश से भरी हुई है।
4. इसमें वीर रस का प्रयोग हुआ है।
5. यह कविता छंद मुक्त है, जिसमें तुक मिलती है।
6. इसमें प्रसाद और ओज गुण हैं।
7. शब्दशक्ति अभिधा है।
8. अलंकार: 'यहीं-कहीं' में सर्वत्र अनुप्रास एवं रूपक अलंकार है। 'ज्वाला-सी' में उपमा अलंकार है, दृष्टान्त अलंकार भी है, और 'आरती' तथा 'फूल' में श्लेष अलंकार है।
In simple words: यह समाधि रानी लक्ष्मीबाई की याद दिलाती है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान दी। कवयित्री बताती हैं कि उनकी राख और अस्थियाँ यहाँ हैं, जो हमें वीरता की याद दिलाती हैं। रानी ने अंत तक लड़ाई लड़ी और आग की तरह आजादी का जोश फैलाया।
🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या करते समय सबसे पहले संदर्भ और प्रसंग लिखें, फिर सरल शब्दों में उसका अर्थ बताएं। अंत में काव्यगत सौंदर्य के महत्वपूर्ण बिंदुओं को लिखें।
Question 2. बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से । मूल्यवती होती सोने की, भस्म यथा सोने से ॥ रानी से भी अधिक हमें अब, यह समाधि है प्यारी । यहाँ निहित है स्वतन्त्रता की, आशा की चिनगारी ॥
Answer:
सन्दर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'काव्य-खण्ड' में संकलित श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान की कविता 'झाँसी की रानी की समाधि पर' से ली गई हैं। यह कविता उनके 'त्रिधारा' काव्य-संग्रह का हिस्सा है।
प्रसंग: इन पंक्तियों में कवयित्री कहती हैं कि देश के गौरव की रक्षा के लिए अपना बलिदान करने से रानी का महत्व और भी बढ़ गया है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।
व्याख्या: कवयित्री कहती हैं कि स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने से एक वीर का सम्मान और बढ़ जाता है। रानी लक्ष्मीबाई भी युद्ध में बलिदान हुईं, इसलिए उनका सम्मान और भी बढ़ गया है, ठीक वैसे ही जैसे सोने की राख (भस्म) सोने से भी ज्यादा मूल्यवान होती है। यही कारण है कि रानी लक्ष्मीबाई की यह समाधि हमें रानी लक्ष्मीबाई से भी ज्यादा प्रिय है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस समाधि में स्वतंत्रता पाने की आशा की एक चिंगारी छिपी हुई है, जो आग की तरह फैलकर देशवासियों को गुलामी से मुक्ति पाने के लिए हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। यह छोटी-सी चिंगारी बड़े बदलाव ला सकती है।
काव्यगत सौन्दर्य:
1. कवयित्री ने लक्ष्मीबाई की समाधि से स्वतंत्रता पाने की प्रेरणा लेने के लिए युवाओं को बुलाया है।
2. भाषा सरल खड़ी बोली है।
3. शैली ओजपूर्ण और आख्यानक गीति शैली है।
4. इसमें वीर रस है।
5. यह छंद तुकान्त-मुक्त है।
6. इसमें ओज और प्रसाद गुण हैं।
7. शब्दशक्ति अभिधा है।
8. अलंकार: 'बढ़ जाता है ....... सोने से' में दृष्टान्त अलंकार है, 'आशा की चिनगारी' में रूपक अलंकार है और अनुप्रास अलंकार भी है।
9. भावसाम्य: कवयित्री की तरह ही कवि श्यामनारायण पाण्डेय भी देशहित में बलिदान देने वाले को ही सच्चा वीर मानते हैं। वे कहते हैं कि जो देश और जाति के लिए दुश्मनों के सिर काटे या कटवाए, वही सच्चा वीर होता है।
In simple words: कवयित्री बताती हैं कि देश के लिए जान देने से एक वीर का सम्मान बढ़ जाता है, जैसे सोने से ज्यादा उसकी राख कीमती होती है। रानी की यह समाधि हमें बहुत प्यारी है क्योंकि इसमें आजादी की उम्मीद की एक चिंगारी छिपी है, जो हमेशा हमें प्रेरित करती रहेगी।
🎯 Exam Tip: व्याख्या में उपमा और दृष्टान्त अलंकारों को पहचानना और उनके अर्थ को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। 'सोने की भस्म' जैसे प्रतीकात्मक प्रयोगों को समझकर लिखें।
Question 3. इससे भी सुन्दर समाधियाँ, हम जग में हैं पाते । उनकी गाथा पर निशीथ में, क्षुद्र जंतु ही गाते ॥ पर कवियों की अमर गिरा में, इसकी अमिट कहानी । स्नेह और श्रद्धा से गाती, है, वीरों की बानी ॥ बुंदेले हरबोलों के मुख, हमने सुनी कहानी । खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ॥ यह समाधि, यह चिर समाधि-है, झाँसी की रानी की। अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की ॥
Answer:
सन्दर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक 'काव्य-खण्ड' में संकलित श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान की कविता 'झाँसी की रानी की समाधि पर' से ली गई हैं। यह कविता उनके 'त्रिधारा' काव्य-संग्रह का हिस्सा है।
प्रसंग: इन पंक्तियों में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई की समाधि को दुनिया की अन्य समाधियों से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया है। रानी की समाधि युगों-युगों तक प्रेरणा देती रहेगी।
व्याख्या: कवयित्री कहती हैं कि दुनिया में रानी लक्ष्मीबाई की समाधि से भी कई सुंदर समाधियाँ हैं, लेकिन उनका महत्व इस समाधि से कम नहीं है। उन समाधियों पर रात में गीदड़, झींगुर, छिपकली जैसे छोटे-छोटे जीव गाते रहते हैं, मतलब वे समाधियाँ एकदम उपेक्षित हैं, जहाँ तुच्छ जीव रहते हैं। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई की समाधि की कभी न खत्म होने वाली कहानी कवियों की अमर वाणी में हमेशा गाई जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि रानी की समाधि के प्रति लोगों में बहुत श्रद्धा है, जबकि अन्य समाधियों के प्रति ऐसी भावना नहीं है। इस समाधि की कहानी को वीर लोगों की वाणी बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ गाती है। इसलिए यह समाधि अन्य समाधियों से अधिक महत्वपूर्ण और पूजनीय है। बुंदेलखंड के हरबोलों के मुँह से हमने यह कहानी सुनी है कि झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई पुरुषों की तरह बहुत वीरता से लड़ी थीं। यह अमर समाधि उसी झाँसी की रानी की है। यही उस वीरांगना का अंतिम कार्यस्थल भी है, जहाँ उन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
काव्यगत सौन्दर्य:
1. कवयित्री ने रानी की समाधि के प्रति अपनी श्रद्धा-भावना व्यक्त की है।
2. भाषा सरल साहित्यिक खड़ी बोली है।
3. शैली आख्यानक गीति की ओजपूर्ण शैली है।
4. इसमें वीर रस है।
5. इसमें प्रसाद और ओज गुण हैं।
6. शब्दशक्ति व्यंजना है।
7. अलंकार सर्वत्र अनुप्रास है।
8. भावसाम्य: कला और कविता उन्हीं का गान करती हैं, जो वीरता और रणभेरी की आवाज को महत्व देते हैं, न कि सिर्फ मधुर बांसुरी को। जो कविता ऐसा नहीं करती, वह बाँझ स्त्री के समान है। कवि माखनलाल चतुर्वेदी ने भी कवयित्री की तरह ही कवि और कविता के बारे में कहा है- "यह किसने कहा कला कविता सब बाँझ हुई? बलि के प्रकाश की सुन्दरता ही साँझ हुई, मधुरी वंशी रणभेरी का डंका हो अब, नव तरुणाई पर किसको, क्या शंका हो अब?"
In simple words: दुनिया में और भी सुंदर समाधियाँ हैं, लेकिन रात में उन पर छोटे जीव ही गाते हैं। रानी लक्ष्मीबाई की समाधि की कहानी कवियों की अमर वाणी में हमेशा गाई जाती है, क्योंकि यह वीरता की निशानी है। बुंदेले हरबोलों ने बताया कि झाँसी की रानी बहुत वीर थीं, और यह समाधि उनका अंतिम कार्यस्थल है।
🎯 Exam Tip: व्याख्या करते समय बताएं कि कवयित्री रानी की समाधि को क्यों खास मानती हैं और उसे अन्य समाधियों से कैसे अलग करती हैं। "अमर गिरा" और "वीरों की बानी" जैसे वाक्यांशों के महत्व को उजागर करें।
काव्य-सौन्दर्य एवं व्याकरण-बोध
Question 1. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार का नाम लिखकर उनका लक्षण भी लिखिए-
(क) बढ़ जाता है मान वीर का रण में बलि होने से । मूल्यवती होती सोने की भस्म यथा सोने से । रानी से भी अधिक हमें अब, यह समाधि है प्यारी, यहाँ निहित है स्वतन्त्रता की, आशा की चिनगारी ॥
(ख) यहीं कहीं पर बिखर गयी वह, भग्न विजयमाला-सी ।
Answer:
(क) इन पंक्तियों में अनुप्रास, रूपक और पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार हैं।
अनुप्रास अलंकार का लक्षण: जब एक ही अक्षर या वर्ण दो या दो से अधिक बार आता है, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
रूपक अलंकार का लक्षण: जब उपमेय (जिसकी तुलना की जाती है) में उपमान (जिससे तुलना की जाती है) का आरोप बिना किसी भेद के किया जाता है। जैसे - 'आशा की चिनगारी' में आशा को चिनगारी का रूप दिया गया है।
पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार का लक्षण: जब एक ही शब्द को बार-बार दोहराया जाता है, जैसे - 'सोने' शब्द का बार-बार आना।
(ख) इन पंक्तियों में उपमा अलंकार है।
उपमा अलंकार का लक्षण: जब उपमेय की तुलना उपमान से उसकी सुंदरता और समानता दिखाने के लिए स्पष्ट रूप से की जाती है। जैसे - 'विजयमाला-सी' में रानी के बिखरने की तुलना टूटी हुई विजयमाला से की गई है। काव्य-पंक्तियों में जब उदाहरण के रूप में कुछ कहा जाता है, जैसे - 'सोने की भस्म यथा सोने से', तब दृष्टान्त अलंकार होता है।
In simple words: (क) पहली पंक्तियों में अक्षर बार-बार आते हैं (अनुप्रास), आशा को चिनगारी कहा गया है (रूपक) और सोने शब्द दोहराया गया है (पुनरुक्तिप्रकाश)। (ख) दूसरी पंक्ति में रानी की तुलना विजयमाला से की गई है (उपमा)।
🎯 Exam Tip: अलंकारों को पहचानने के लिए उनके लक्षणों को ध्यान से पढ़ें। एक ही पंक्ति में कई अलंकार हो सकते हैं। उदाहरणों को याद रखने से पहचानना आसान होता है।
Question 2. निम्नलिखित पंक्तियों में रस को पहचानिए बुंदेले हरबोलों के मुख, हमने सुनी कहानी । खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ॥
Answer: इन पंक्तियों में वीर रस है। यह रस वीरता और शौर्य की भावना को दर्शाता है। यह पढ़कर मन में उत्साह और पराक्रम का भाव जगता है।
In simple words: इन पंक्तियों में वीर रस है, जो बहादुरी और युद्ध का जोश दिखाता है।
🎯 Exam Tip: रस की पहचान के लिए कविता के भाव और शब्दों पर ध्यान दें। वीरता, उत्साह, और बलिदान की बातें वीर रस को दर्शाती हैं।
Question 3. निम्नलिखित पदों में समास का नाम बताते हुए समास-विग्रह कीजिए- विजय-माला, स्मृति-शाला, वीर-बाला, अमिट
Answer:
| समस्त पद | समास-विग्रह | समास-नाम |
|---|---|---|
| विजय-माला | विजय की माला | षष्ठी तत्पुरुष |
| स्मृति-शाला | स्मृति के लिए शाला | चतुर्थी तत्पुरुष |
| वीर-बाला | वीरता से युक्त बाला | कर्मधारय समास |
| अमिट | न मिटने वाला | नञ् तत्पुरुष |
In simple words: यहाँ दिए गए शब्दों को तोड़कर बताया गया है कि उनमें कौन सा समास है। जैसे, 'विजय-माला' में 'विजय की माला' है और यह षष्ठी तत्पुरुष है।
🎯 Exam Tip: समास-विग्रह करते समय शब्दों के अर्थ को समझें और सही कारक चिह्न (का, के, की, लिए, आदि) का प्रयोग करें। नञ् तत्पुरुष को नकारात्मक अर्थ वाले शब्दों में पहचानें।
Question 4. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग और प्रत्ययों को पृथक् करके लिखिए- मूल्यवती, निहित, अमर, अन्तिम।
Answer:
| शब्द | उपसर्ग | प्रत्यय | मूल शब्द |
|---|---|---|---|
| मूल्यवती | - | वती | मूल्य |
| निहित | नि | हित | हित |
| अमर | अ | - | मर |
| अन्तिम | - | इम | अन्त |
In simple words: यहाँ कुछ शब्दों को उनके उपसर्ग (जो शब्द से पहले लगते हैं) और प्रत्यय (जो शब्द के बाद लगते हैं) में बांटा गया है, साथ ही उनका मूल शब्द भी बताया गया है।
🎯 Exam Tip: उपसर्ग और प्रत्यय पहचानते समय हमेशा यह सुनिश्चित करें कि मूल शब्द का अपना अर्थ हो। उपसर्ग शब्द की शुरुआत में जुड़ते हैं जबकि प्रत्यय अंत में।
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