Official UP Board Solutions for Class 10 Hindi: Chapter 07 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी
Review structured textbook solutions for Class 10 Hindi Chapter 07 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी. Built according to UP Board guidelines for the 2026 27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.
Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 07 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी
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जीवन-परिचय एवं कृतियाँ
Question 1. जयप्रकाश भारती के जीवन-परिचय एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालिए। या जयप्रकाश भारती का जीवन-परिचय दीजिए और उनकी एक रचना का नामोल्लेख कीजिए।
Answer: श्री जयप्रकाश भारती एक प्रसिद्ध पत्रकार और हिंदी लेखक थे। उन्होंने वैज्ञानिक विषयों पर लेख लिखे और साक्षरता फैलाने का काम किया। वे सफल निबंधकार, कहानीकार और रिपोर्ताज लेखक थे। वे कठिन बातों को भी रोचक और सरल तरीके से समझाने में माहिर थे।
**जीवन-परिचय:** जयप्रकाश भारती का जन्म 2 जनवरी, 1936 को मेरठ शहर के एक सम्मानित मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता, श्री रघुनाथ सहाय, मेरठ के प्रसिद्ध वकील और समाज-सेवी थे। उन्होंने मेरठ से बी.एससी. की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे समाज-सेवा में लगे रहे। उन्होंने कई सालों तक प्रौढ़ों के लिए मुफ्त रात की पाठशाला चलाई। उन्होंने 'संपादन कला-विशारद' की परीक्षा पास की। मेरठ के 'दैनिक प्रभात' और दिल्ली के 'नवभारत टाइम्स' में काम करके व्यवहारिक प्रशिक्षण लिया। लखनऊ के 'साक्षरता-निकेतन' में नवसाक्षर साहित्य लेखन का प्रशिक्षण भी लिया। दिल्ली के 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में उन्होंने सह-संपादक के रूप में काम किया। बाद में, वे 'हिंदुस्तान टाइम्स' द्वारा प्रकाशित बच्चों की पत्रिका 'नंदन' के संपादक रहे। 5 फरवरी, 2005 को उनका निधन हो गया।
**रचनाएँ:** भारती जी ने लगभग सौ मौलिक और संपादित किताबें लिखी हैं। उनकी कुछ खास रचनाएँ इस प्रकार हैं:
1. **मौलिक रचनाएँ:** 'हिमालय की पुकार', 'अनंत आकाश : अथाह सागर' (यूनेस्को द्वारा पुरस्कृत), 'विज्ञान की विभूतियाँ', 'देश हमारा', 'चलो चाँद पर चलें' (भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत), 'सरदार भगत सिंह', 'हमारे गौरव के प्रतीक', 'अस्त्र-शस्त्र', 'आदिम युग से अणु युग तक', 'उनका बचपन यूँ बीता', 'ऐसे थे हमारे बापू', 'लोकमान्य तिलक', 'बर्फ की गुड़िया', 'संयुक्त राष्ट्र संघ', 'भारत को संविधान', 'दुनिया रंग-बिरंगी' आदि। उनकी रचनाओं ने बच्चों के मन में विज्ञान और देश प्रेम जगाया।
2. **संपादित रचनाएँ:** 'भारत की प्रतिनिधि लोककथाएँ' और 'किरणमाला' (तीन भागों में)।
3. **संपादन-कार्य:** उन्होंने 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में सह-संपादक और 'नंदन' (बाल-पत्रिका) के संपादक के रूप में काम किया। उन्होंने बाल उपयोगी साहित्य, वैज्ञानिक लेखों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
In simple words: जयप्रकाश भारती एक प्रमुख हिंदी लेखक और पत्रकार थे। उन्होंने वैज्ञानिक विषयों पर सरल भाषा में लिखा और बच्चों के लिए पत्रिकाएँ संपादित कीं। वे 1936 में जन्मे और 2005 में उनका निधन हो गया।
🎯 Exam Tip: जीवन-परिचय लिखते समय जन्म स्थान, माता-पिता का नाम, शिक्षा, प्रमुख कार्य और मुख्य रचनाएँ क्रम से लिखें। अंत में निधन तिथि का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
गद्यांशों पर आधारित प्रश्न
प्रश्न-पत्र में केवल 3 प्रश्न (अ, ब, स) ही पूछे जाएँगे। अतिरिक्त प्रश्न अभ्यास एवं परीक्षोपयोगी दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होने के कारण दिए गये हैं।
Question 1. दुनिया के सभी भागों में स्त्री-पुरुष और बच्चे रेडियो से कान सटाए बैठे थे, जिनके पास टेलीविजन थे, वे उसके पर्दे पर आँखें गड़ाए थे। मानवता के सम्पूर्ण इतिहास की सर्वाधिक रोमांचक घटना के एक क्षण के वे भागीदार बन रहे थे – उत्सुकता और कुतूहल के कारण अपने अस्तित्व से बिल्कुल बेखबर हो गये थे।
Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में 'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयप्रकाश भारती हैं। यह प्रसंग किसी महत्वपूर्ण घटना के सीधे वर्णन से जुड़ा है।
(ब) लेखक बताते हैं कि जब मनुष्य चाँद पर पहुँचा, तो यह एक बहुत ही रोमांचक घटना थी। पूरी दुनिया के लोग, अपने घरों में टीवी या रेडियो के सामने बैठकर, इस पल के गवाह बन रहे थे। वे इतने उत्सुक और बेचैन थे कि पल भर के लिए अपनी दुनिया को भूल गए थे।
(स) इस रोमांचक घटना में दुनिया के सभी हिस्सों के स्त्री, पुरुष और बच्चे शामिल हो रहे थे। उन्हें यह अनोखा अनुभव बहुत पसंद आ रहा था।
In simple words: लोग चाँद पर मनुष्य के पहुँचने की रोमांचक घटना को टीवी और रेडियो पर देख रहे थे। वे इतने उत्सुक थे कि सब कुछ भूल गए थे। सभी स्त्री, पुरुष और बच्चे इस घटना के साक्षी बन रहे थे।
🎯 Exam Tip: संदर्भ लिखते समय पाठ का नाम और लेखक का नाम सही से लिखें। व्याख्या में मुख्य बिंदु को सरल शब्दों में स्पष्ट करें।
Question 2. मानव को चन्द्रमा पर उतारने का यह सर्वप्रथम प्रयास होते हुए भी असाधारण रूप से सफल रहा। यद्यपि हर क्षण, हर पग पर खतरे थे। चन्द्रतल पर मानव के पाँव के निशान उसके द्वारा वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षेत्र की गयी असाधारण प्रगति के प्रतीक हैं। जिस क्षण डगमग-डगमग करते मानव के पग उस धुलि-धूसरित अनछुई सतह पर पड़े तो मानो वह हजारों-लाखों साल से पालित-पोषित सैकड़ों अन्धविश्वासों तथा कपोल-कल्पनाओं पर पद-प्रहार ही हुआ। कवियों की कल्पना के सलोने चाँद को वैज्ञानिकों ने बदसूरत और जीवनहीन करार दे दिया-भला अब चन्द्रमुखी कहलाना किसे रुचिकर लगेगा।
Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में 'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयप्रकाश भारती हैं।
(ब) लेखक समझाते हैं कि अमेरिका द्वारा चाँद पर मनुष्य को उतारने का यह पहला प्रयास था। यह उम्मीद से कहीं अधिक सफल रहा, भले ही हर पल खतरा था। दोनों अंतरिक्ष यात्री अपने तीसरे साथी के साथ सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए। जैसे ही अमेरिकी चंद्रयान चाँद पर उतरा और मनुष्य ने अपने कदम चाँद की धरती पर रखे, सदियों से चले आ रहे सारे अंधविश्वास और गलत धारणाएं झूठी साबित हो गईं। कवियों ने चाँद को सुंदर कहा था और नारियों के मुख की तुलना चाँद से की थी, लेकिन वैज्ञानिकों ने बताया कि चाँद वास्तव में कुरूप, ऊबड़-खाबड़ और जीवनहीन है। अब कोई भी स्त्री खुद को चन्द्रमुखी (कुरूप और निर्जीव मुख वाली) कहलाना पसंद नहीं करेगी। यह खोज हमारी सदियों पुरानी मान्यताओं को तोड़ती है।
(स)
1. अब किसी स्त्री को 'चन्द्रमुखी' (चाँद के समान मुख वाली) कहलाना पसंद नहीं आएगा, क्योंकि वैज्ञानिकों ने चाँद को बदसूरत और जीवनहीन घोषित कर दिया है।
2. जिस पल मनुष्य के कदम चाँद पर पड़े, उस समय हजारों-लाखों वर्षों से चाँद के बारे में चले आ रहे अंधविश्वास और झूठी कल्पनाएँ गलत साबित हो गईं।
3. मानव द्वारा चाँद पर उतरने का पहला प्रयास बहुत सफल रहा। यह मनुष्य की विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में की गई असाधारण तरक्की का एक बड़ा प्रतीक था।
In simple words: चाँद पर इंसान का उतरना एक बड़ी वैज्ञानिक सफलता थी। इसने चाँद के बारे में पुराने सारे अंधविश्वास तोड़ दिए और साबित कर दिया कि चाँद सुंदर नहीं, बल्कि बेजान और ऊबड़-खाबड़ है।
🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या करते समय लेखक के मूल भाव को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करें। रेखांकित अंशों पर विशेष ध्यान दें।
Question 3. हमारे देश में ही नहीं, संसार की प्रत्येक जाति ने अपनी भाषा में चन्द्रमा के बारे में कहानियाँ गढ़ी हैं और कवियों ने कविताएँ रची हैं। किसी ने उसे रजनीपति माना तो किसी ने उसे रात्रि की देवी कहकर पुकारा। किसी विरहिणी ने उसे अपना दूत बनाया तो किसी ने उसके पीलेपन से क्षुब्ध होकर उसे बूढा और बीमार ही समझ लिया। बालक श्रीराम चन्द्रमा को खिलौना समझकर उसके लिए मचलते हैं तो सूर के । श्रीकृष्ण भी उसके लिए हठ करते हैं। बालक को शान्त करने के लिए एक ही उपाय था; चन्द्रमा की छवि को । पानी में दिखा देना।
Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में 'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयप्रकाश भारती हैं।
(ब) लेखक बताते हैं कि बेजान चाँद को कभी रात का स्वामी तो कभी रात की देवी कहा गया है। कभी किसी दुखी नायिका ने उसे अपने प्रेमी को संदेश भेजने वाला दूत बनाया, तो कभी उसके पीलेपन को देखकर उसे बूढ़ा, बीमार और कमजोर समझ लिया। यह दर्शाता है कि मानव मन चाँद के प्रति कितनी तरह की भावनाएं रखता है।
(स)
1. मचलते और हठ करते बालक को शांत करने के लिए चाँद की परछाई को पानी में दिखाया जाता था।
2. इस गद्यांश में लेखक ने बताया है कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की हर जाति के लेखक और कवि चाँद से प्रभावित हुए हैं और उसके बारे में कई कहानियाँ गढ़ी हैं।
3. मानव की प्रगति का चक्र बहुत घूम गया है। श्रीमती महादेवी वर्मा ने इस लंबी विकास-यात्रा को एक वाक्य में कहा है- "पहले पानी में चंदा को उतारा जाता था और आज चाँद पर मानव पहुँच गया है।" यह कथन मानव के वैज्ञानिक विकास को दर्शाता है।
In simple words: दुनिया भर में चाँद को लेकर कई कहानियाँ और कविताएँ हैं। बच्चे चाँद के लिए मचलते थे, तो उन्हें पानी में चाँद की परछाई दिखाकर शांत किया जाता था। मानव अब चाँद पर पहुँच गया है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक उद्धरणों को लिखते समय उन्हें सही ढंग से उद्धृत करें और उनके लेखक का नाम भी बताएं।
Question 4. मानव मन सदा से ही अज्ञात के रहस्यों को खोलने और जानने-समझने को उत्सुक रहा है। जहाँ तक वह नहीं पहुंच सकता था, वहाँ वह कल्पना के पंखों पर उड़कर पहुंचा। उसकी अनगढ़ और अविश्वसनीय कथाएँ उसे सत्य के निकट पहुँचाने में प्रेरणा-शक्ति का काम करती रहीं। अन्तरिक्ष युग का सूत्रपात 4 अक्टूबर, 1956 को हुआ था, जब सोवियत रूस ने अपना पहला स्पुतनिक छोड़ा। प्रथम अन्तरिक्ष यात्री बनने का गौरव यूरी गागरिन को प्राप्त हुआ।
Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में 'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयप्रकाश भारती हैं।
(ब) लेखक बताते हैं कि मनुष्य का मन हमेशा नई बातों को जानने के लिए उत्सुक रहा है। उसने हमेशा अनजाने रहस्यों को सुलझाने और समझने की कोशिश की है। जहाँ तक संभव हुआ, मनुष्य ने अपनी कल्पना से उन रहस्यों को जानने का प्रयास किया है। भले ही ये कल्पनाएँ सच से दूर और निराधार लगती हों, पर उनसे ही सत्य के करीब पहुँचने की प्रेरणा मिलती रही है। मनुष्य की जिज्ञासा ने ही उसे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
(स)
1. महादेवी जी ने मानव की विकास-यात्रा को एक ही वाक्य में समझाया है- "पहले पानी में चंदा को उतारा जाता था और आज मानव चाँद पर पहुँच गया है।"
2. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मनुष्य की अज्ञात रहस्यों को जानने की तीव्र इच्छा को स्पष्ट किया है। यह जिज्ञासा ही उसे तरक्की की ओर ले जाती है।
3. अंतरिक्ष युग की शुरुआत सोवियत रूस द्वारा 4 अक्टूबर, 1956 को पहले स्पुतनिक को छोड़े जाने के साथ हुई थी।
In simple words: इंसान हमेशा नई चीजें जानना चाहता है। कल्पनाओं ने उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अंतरिक्ष युग की शुरुआत सोवियत रूस के स्पुतनिक से 1956 में हुई।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों और तिथियों को सटीक रूप से याद रखें, क्योंकि वे अक्सर सीधे प्रश्न में पूछे जाते हैं।
Question 5. अभी चन्द्रमा के लिए अनेक उड़ानें होंगी। दूसरे ग्रहों के लिए मानवरहित यान छोड़े जा रहे हैं। अन्तरिक्ष में परिक्रमा करने वाला स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से प्रयत्न किये जा रहे हैं। ऐसा स्टेशन बन जाने पर ब्रह्माण्ड के रहस्यों की पर्ते खोलने में काफी सहायता मिलेगी । यह पृथ्वी मानव के लिए पालने के समान है। वह हमेशा-हमेशा के लिए इसकी परिधि में बँधा हुआ नहीं रह सकता। अज्ञात की खोज में वह कहाँ तक पहुँचेगा, कौन कह सकता है?
Answer:
(अ) यह गद्यांश हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में 'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयप्रकाश भारती हैं।
(ब) लेखक कहते हैं कि मनुष्य अपनी बचपन की अवस्था में ही सीमित नहीं रहता। जैसे बच्चा बड़ा होकर पालने से बाहर निकलता है, वैसे ही मानव भी पृथ्वी की सीमाओं से बाहर जाने की कोशिश करता रहता है। अंतरिक्ष या अज्ञात जगहों की खोज उसकी इसी कोशिश का नतीजा है। यह बताना मुश्किल है कि वह इस अनंत और असीम अंतरिक्ष में कहाँ तक पहुँचेगा, लेकिन खोज जारी रहेगी।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक यह कहना चाहते हैं कि वैज्ञानिक खोजों के लिए बहुत बड़े क्षेत्र खुले हैं। मनुष्य अपने ज्ञान और विज्ञान की मदद से इस असीमित विस्तार को जानने की कोशिश करता रहेगा। मानव की जिज्ञासा की कोई सीमा नहीं है।
2. लेखक ने चंद्र-अंतरिक्ष अभियानों के भविष्य के प्रयासों के बारे में लिखा था कि चंद्रमा के लिए और भी उड़ानें होंगी, दूसरे ग्रहों के लिए मानवरहित यान भेजे जाएंगे, और अंतरिक्ष में परिक्रमा करने वाले स्टेशन बनाने की कोशिश की जाएगी। वर्तमान में, वैज्ञानिक इन सभी प्रयासों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।
In simple words: लेखक का कहना है कि मानव हमेशा नई खोजें करता रहेगा। पृथ्वी उसके लिए एक पालने जैसी है, जिससे वह बाहर निकलना चाहता है।
🎯 Exam Tip: भविष्य की संभावनाओं और वैज्ञानिक प्रगति से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देते समय लेखक के विचारों को वर्तमान की जानकारी से जोड़कर लिखें।
व्याकरण एवं रचना-बोध
Question 1. निम्नलिखित शब्दों में सविग्रह समास-नाम बताइए- चन्द्रतल, त्रिपाद, मरणोपरान्त, चन्द्रमुखी, रजनीपति, प्राणोदक, प्रयोगशाला।
Answer:
| समस्त पद | समास-विग्रह | समास-नाम |
|---|---|---|
| चन्द्रतल | चन्द्र का तल | षष्ठी तत्पुरुष |
| त्रिपाद | तीन पादों का समूह | द्विगु |
| मरणोपरान्त | मरण के उपरान्त | षष्ठी तत्पुरुष |
| चन्द्रमुखी | चन्द्रमा के समान मुख वाली है जो | बहुव्रीहि |
| रजनीपति | रजनी (रात्रि) का पति | षष्ठी तत्पुरुष |
| प्राणोदक | प्राणरूपी उदक | कर्मधारय |
| प्रयोगशाला | प्रयोग के लिए शाला | चतुर्थी तत्पुरुष |
🎯 Exam Tip: समास-विग्रह करते समय शब्दों के सही अर्थ और उनके बीच के संबंध को पहचानना महत्वपूर्ण है, ताकि सही समास-नाम बताया जा सके।
Question 2. निम्नलिखित शब्दों में प्रत्यय लगाकर नये शब्द बनाइए- अस्ति, स्थापना, दुर्घटना, काल, प्रक्षेपण, स्थगन।
Answer:
| शब्द | नया शब्द (प्रत्यय सहित) |
|---|---|
| अस्ति | अस्तित्व |
| स्थापना | स्थापत्य |
| दुर्घटना | दुर्घटनाग्रस्त |
| काल | कालीन |
| प्रक्षेपण | प्रक्षेपणीय |
| स्थगन | स्थगित |
🎯 Exam Tip: प्रत्यय जोड़ते समय शब्द के मूल अर्थ को समझें और यह भी देखें कि नया शब्द व्याकरणिक रूप से सही है।
Question 3. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग पृथक् करके लिखिए- बदसूरत, दुस्साहस, प्रघात, अनुसन्धान, प्रयोग, विशेष ।
Answer:
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द |
|---|---|---|
| बदसूरत | बद | सूरत |
| दुस्साहस | दुस् | साहस |
| प्रघात | प्र | घात |
| अनुसन्धान | अनु | सन्धान |
| प्रयोग | प्र | योग |
| विशेष | वि | शेष |
🎯 Exam Tip: उपसर्ग को मूल शब्द से अलग करते समय यह सुनिश्चित करें कि मूल शब्द का अपना स्वतंत्र और सार्थक अर्थ हो।
Question 4. निम्नलिखित शब्दों में नियम-निर्देशपूर्वक सन्धि-विच्छेद कीजिए- सर्वाधिक, मरणोपरान्त, दुस्साहस, पूर्वाभिनय, शयनागार, प्राणोदक ।
Answer:
| शब्द | सन्धि-विच्छेद | सन्धि-नाम | सन्धि-नियम |
|---|---|---|---|
| सर्वाधिक | सर्व + अधिक | दीर्घ सन्धि | अ + अ = आ |
| मरणोपरान्त | मरण + उपरान्त | गुण सन्धि | अ + उ = ओ |
| दुस्साहस | दुः + साहस | विसर्ग सन्धि | विसर्ग + स = स |
| पूर्वाभिनय | पूर्व + अभिनय | दीर्घ सन्धि | अ + अ = आ |
| शयनागार | शयन + आगार | दीर्घ सन्धि | अ + अ = आ |
| प्राणोदक | प्राण + उदक | गुण सन्धि | अ + उ = ओ |
🎯 Exam Tip: संधि-विच्छेद करते समय मूल शब्दों के सही अर्थ को ध्यान में रखें और संधि के प्रकारों (दीर्घ, गुण, विसर्ग आदि) के नियमों का पालन करें।
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Step-by-Step Textbook Answers: Class 10 Hindi Chapter 07 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी
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