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जीवन-परिचय एवं कृतियाँ
Question 1. भगवतशरण उपाध्याय के जीवन-परिचय एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालिए। [2009, 10]
या
भगवतशरण उपाध्याय का जीवन-परिचय दीजिए एवं उनकी एक रचना का नामोल्लेख कीजिए । [2011, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]
Answer: भगवतशरण उपाध्याय संस्कृत साहित्य और पुरातत्व के गहरे जानकार थे। वे हिंदी साहित्य के भी एक बड़े प्रमोटर माने जाते हैं। उन्हें अपने मौलिक और स्वतंत्र विचारों के लिए जाना जाता है। वे पुराने भारतीय इतिहास और संस्कृति को अच्छे से जानते और समझाते थे, पर पुरानी सोच और परंपराओं से ऊपर उठकर काम करते थे।
जीवन-परिचय: भगवतशरण उपाध्याय का जन्म सन् 1910 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के 'उजियारपुर' नामक गाँव में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गाँव में की। आगे की पढ़ाई के लिए वे बनारस आए और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास में एम.ए. की परीक्षा पास की। वे संस्कृत साहित्य, पुरातत्व और हिंदी साहित्य के विकास में लगे रहे। उन्होंने प्रयाग और लखनऊ के संग्रहालयों में पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। उन्होंने पिलानी के बिड़ला महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर भी काम किया। बाद में वे उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर और अध्यक्ष बने। रिटायर होने के बाद वे देहरादून में रहने लगे और साहित्य की सेवा करते रहे। अगस्त 1982 में इस महान साहित्यकार का निधन हो गया। उनका जीवन दिखाता है कि लगन से काम करने पर व्यक्ति बहुत कुछ हासिल कर सकता है।
रचनाएँ: उपाध्याय जी ने हिंदी में तो बहुत साहित्य लिखा ही है, किन्तु अंग्रेजी में भी उनकी कुछ प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। उनकी कुछ खास रचनाएँ इस प्रकार हैं:
1. पुरातत्व: 'मंदिर और भवन', 'भारतीय मूर्तिकला की कहानी', 'भारतीय चित्रकला की कहानी', 'कालिदास का भारत' आदि। इन किताबों में उन्होंने पुरानी भारतीय संस्कृति, साहित्य और कला को बहुत गहराई से समझाया है।
2. इतिहास: 'खून के छींटे', 'इतिहास साक्षी है', 'इतिहास के पन्नों पर', 'प्राचीन भारत का इतिहास', 'साम्राज्यों के उत्थान-पतन' आदि। इन किताबों में पुराने इतिहास को साहित्य के अंदाज में पेश किया गया है।
3. आलोचना: 'विश्व साहित्य की रूपरेखा', 'साहित्य और कला', 'कालिदास' आदि। इन ग्रंथों में साहित्य के अलग-अलग पहलुओं पर रोशनी डाली गई है।
4. यात्रा-वृत्तांत: 'कलकत्ता से पीकिंग', 'सागर की लहरों पर', 'मैंने देखा लाल चीन' आदि। इनमें उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं का बहुत ही सजीव वर्णन किया है।
5. संस्मरण और रेखाचित्र: 'मैंने देखा', 'इँठा आम' आदि। इनमें उनकी यादें और भावनाएं शब्दों के चित्रों के रूप में सामने आती हैं।
6. अंग्रेजी ग्रंथ: 'इंडिया इन कालिदास', 'वीमेन इन ऋग्वेद' तथा 'एंशिएंट इंडिया' आदि।
साहित्य में स्थान: उपाध्याय जी पुरातत्व और संस्कृति के बड़े विद्वान थे। उन्होंने अपनी गहरी और बारीक पढ़ाई को अपनी रचनाओं में उतारा। वे हिंदी के ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने सौ से ज़्यादा किताबें लिखकर इसे समृद्ध किया।
In simple words: भगवतशरण उपाध्याय एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार और इतिहासकार थे, जिनका जन्म 1910 में बलिया में हुआ था। उन्होंने बनारस में पढ़ाई की और कई संग्रहालयों में काम किया। उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में कई किताबें लिखीं, जिनमें 'इतिहास साक्षी है' और 'मंदिर और भवन' प्रमुख हैं। उनका निधन 1982 में हुआ था।
🎯 Exam Tip: जीवनी संबंधी प्रश्नों में लेखक का जन्म, शिक्षा, प्रमुख कार्य और प्रमुख रचनाएँ क्रम से लिखें। एक या दो महत्वपूर्ण रचनाओं का उल्लेख करना ज़रूरी है।
गद्यांशों पर आधारित प्रश्न
Question 1. जिन्दगी को मौत के पंजों से मुक्त कर उसे अमर बनाने के लिए आदमी ने पहाड़ काटा है। किस तरह इंसान की खूबियों की कहानी सदियों बाद आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचायी जाए, इसके लिए आदमी ने कितने ही उपाय सोचे और किये। उसने चट्टानों पर अपने संदेश खोदे, ताड़ों-से ऊँचे धातुओं-से चिकने पत्थर के खम्भे खड़े किये, ताँबे और पीतल के पत्तरों पर अक्षरों के मोती बिखेरे और उसके जीवन-मरण की कहानी सदियों के उतार पर सरकती चली आयी, चली आ रही है, जो आज हमारी अमानत-विरासत बन गयी है। [2011]
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए ।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है ?
2. व्यक्ति ने आगामी पीढ़ी तक अपनी बातों को पहुँचाने के लिए क्या-क्या किया है ?
3. आगामी पीढ़ी तक पहुँचायी गयी बातें आज हमारे लिए क्या स्थान रखती हैं ?
4. लेखक की दृष्टि में अजन्ता की गुफाओं के निर्माण का क्या उद्देश्य रहा है ?
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक बताते हैं कि मनुष्य का जीवन बहुत छोटा है। सबको एक दिन मरना ही है। मौत से बचने का एक ही तरीका है कि कुछ ऐसा काम किया जाए जो हमेशा याद रहे। इंसान को ऐसी रचनाएँ बनानी चाहिए जो हमेशा बनी रहें। जब तक वे रचनाएँ मौजूद रहेंगी, बनाने वाले का नाम भी जीवित रहेगा और लोग उसे याद करते रहेंगे। ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने पूर्वजों की महानता और इतिहास को जान सकें, मनुष्य ने इसके लिए कई तरीके सोचे और उन्हें पूरा भी किया। यह मानव की अमरता की चाह को दर्शाता है।
द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक कहते हैं कि अपनी बातें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए, मनुष्य ने बड़ी चट्टानों पर संदेश खुदवाए। इससे आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें पढ़ सकेंगी और जान सकेंगी। कभी-कभी मनुष्य ने ताड़ के पेड़ों जैसे ऊँचे और चिकने पत्थरों से खंभे बनवाए। उन्होंने ताँबे और पीतल के पत्तों पर सुंदर मोतियों जैसे अक्षरों में लेख लिखवाए। ये सभी काम इसलिए किए गए ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनके पूर्वजों की कहानियाँ पता चलें। इस तरह मानव जाति का इतिहास एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलता रहा है। ये पहाड़ की गुफाएँ, चट्टानें, खंभे और लेख आज हमारे समाज की धरोहर हैं। ये हमारे पूर्वजों की विरासत हैं जिन पर हमें गर्व होना चाहिए। इन सब के ज़रिए इंसान की कहानियाँ हमेशा ज़िंदा रहती हैं।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक यह कहना चाहते हैं कि अमरता पाने के लिए व्यक्ति को कला और रचनात्मक कार्यों का सहारा लेना चाहिए। कला ही एक ऐसा माध्यम है जो व्यक्ति को अमर बना देता है।
2. अपनी बातें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए व्यक्ति ने पत्थर की चट्टानों पर संदेश खुदवाए, ताड़ जैसे ऊँचे चिकने पत्थरों के खंभे बनवाए, ताँबे-पीतल के पत्तों पर लेख लिखवाए और पहाड़ों पर गुफा-मंदिर बनवाए।
3. आने वाली पीढ़ियों तक विभिन्न माध्यमों से पहुँचाई गई बातें आज हमारे लिए एक धरोहर के समान हैं। ये पूर्वजों से मिली हमारी बहुमूल्य संपत्ति हैं।
4. लेखक के अनुसार, अजन्ता की गुफाओं को बनाने का उद्देश्य यह था कि सदियों बाद आने वाली पीढ़ियाँ भी अपने पूर्वजों की ख़ास बातों और अपने देश के इतिहास को जान सकें। यह उन्हें प्रेरणा भी देता है।
In simple words: लेखक बताते हैं कि इंसान ने अपनी कहानियों को अमर करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए पहाड़ काटे, संदेश खोदे और खंभे बनाए। अजंता की गुफाएँ इसी प्रयास का एक हिस्सा हैं, जहाँ पुराने समय की कला और जीवन को चित्रों के ज़रिए दिखाया गया है।
🎯 Exam Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में सबसे पहले 'पाठ का नाम' और 'लेखक का नाम' सही लिखें। रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय मूल भाव को सरल शब्दों में विस्तार दें।
Question 2. जैसे संगसाजों ने उन गुफाओं पर रौनक बरसायी है, चितेरे जैसे रंग और रेखा में दर्द और दया की कहानी लिखते गये हैं, कलावन्त छेनी से मूरतें उभारते-कोरते गये हैं, वैसे ही अजन्ता पर कुदरत का नूर बरस पड़ा है, प्रकृति भी वहाँ थिरक उठी है। बम्बई के सूबे में बम्बई और हैदराबाद के बीच, विन्ध्याचल के पूरब-पश्चिम दौड़ती पर्वतमालाओं से निचौंधे पहाड़ों का एक सिलसिला उत्तर से दक्खिन चला गया है, जिसे सह्याद्रि कहते हैं। (2015)
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस स्थान का और कैसा चित्रण किया है ?
2. अजन्ता के गुफा मन्दिर किस पहाड़ की श्रृंखला को सनाथ करते हैं ?
3. सह्याद्रि की भौगोलिक स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक कहते हैं कि अजन्ता की गुफाओं को देखने पर ऐसा लगता है, जैसे पत्थर की मूर्ति बनाने वाले कारीगरों ने इन गुफाओं में हर तरफ सुंदरता भर दी हो। चित्रकारों ने रंगों और रेखाओं का इस्तेमाल करके दुख और करुणा की भावनाओं को बहुत ही जीवंत चित्रों में बदल दिया है। मूर्ति बनाने वालों ने अपनी छेनी की चोटों से पत्थरों को काटकर सुंदर मूर्तियाँ बनाई हैं। अजन्ता की गुफाओं में प्रकृति ने भी बहुत खास सुंदरता बिखेरी है। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति भी उस कला की सुंदरता को देखकर खुशी से नाचने लगी हो। यह कारीगरों की अद्भुत कला का प्रतीक है।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने अजन्ता की गुफाओं के चारों ओर की प्राकृतिक सुंदरता, गुफाओं के पत्थरों पर बने भावपूर्ण चित्रों और जीवित मूर्तियों का बहुत ही सजीव, मन को छू लेने वाला और सुंदर चित्रण किया है।
2. अजन्ता के गुफा मंदिर, जो देश-विदेश के पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं, सह्याद्रि की पर्वत श्रृंखला को एक पहचान देते हैं।
3. बंबई प्रांत (जो आजादी से पहले बंबई था और अब महाराष्ट्र में मुंबई है) में बंबई और हैदराबाद के बीच, विंध्याचल पर्वतमाला पूर्व से पश्चिम की ओर फैली हुई है। इसी पर्वतमाला के नीचे से पहाड़ों की एक श्रृंखला उत्तर से दक्षिण की ओर गई है। इसी पर्वत-श्रृंखला को 'सह्याद्रि' कहा जाता है। लेखक ने इसी पर्वत श्रृंखला को 'पहाड़ी जंजीर' भी कहा है। अजन्ता के गुफा-मंदिर इसी पर बने हुए हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देते हैं।
In simple words: लेखक अजन्ता की गुफाओं की सुंदरता का वर्णन करते हैं, जहाँ कारीगरों और चित्रकारों ने पत्थरों और रंगों से जीवन भर दिया है। ये गुफाएँ सह्याद्रि नामक पर्वत श्रृंखला पर स्थित हैं, जो बंबई और हैदराबाद के बीच फैली हुई हैं।
🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या करते समय, लेखक के मूल विचार को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करें। यह सुनिश्चित करें कि आप सभी महत्वपूर्ण शब्दों और वाक्यांशों का अर्थ समझाएँ।
Question 3. अजन्ता गाँव से थोड़ी दूर पर पहाड़ों के पैरों में साँप-सी लोटती बाधुर नदी कमान-सी मुड़ गयी है। वहीं पर्वत का सिलसिला एकाएक अर्द्धचन्द्राकार हो गया है, कोई दो-सौ पचास फुट ऊँचा हरे वनों के बीच मंच पर मंच की तरह उठते पहाड़ों का यह सिलसिला हमारे पुरखों को भा गया और उन्होंने उसे खोदकर भवनों-महलों से भर दिया। सोचिए, जरा ठोस पहाड़ की चट्टानी छाती और कमजोर इंसान का उन्होंने मेल जो किया, तो पर्वत का हिया दरकता चला गया और वहाँ एक-से-एक बरामदे, हॉल और मन्दिर बनते चले गये ।
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है ?
2. अजन्ता की भौगोलिक स्थिति का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय जी कहते हैं कि दो सौ पचास फुट ऊँची पर्वतों की आधी चाँद जैसी पंक्ति हमारे पूर्वजों को बहुत अच्छी लगी। उन्होंने उन पहाड़ों को खोदकर भवन और महल बना दिए। जरा सोचिए, जब कमजोर इंसान ने मजबूत चट्टानी पहाड़ को छेनी से काटा, तो पहाड़ का दिल पिघलता चला गया। वहाँ एक के बाद एक सुंदर बरामदे, हॉल और मंदिर बनते चले गए। मनुष्य के कमजोर हाथों ने पहाड़ों की कठोर चट्टानों को काटकर सुंदर भवन, उनके अलग-अलग हिस्से और मंदिर बनाए। यह दिखाता है कि मानव की दृढ़ इच्छाशक्ति किसी भी बाधा को पार कर सकती है।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि मनुष्य अपनी लगन और मेहनत से किसी भी कठिन से कठिन काम को पूरा कर सकता है। इच्छाशक्ति और परिश्रम के बल पर असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
2. अजन्ता गाँव से थोड़ी दूर पर बाधुर नदी, जो साँप की तरह लोटती हुई धनुष के आकार में मुड़ी हुई है, पर्वत की तलहटी में स्थित है। इसी जगह पर पर्वत भी आधे चाँद के आकार का हो गया है। हरे-भरे जंगलों के बीच में ऐसा लगता है जैसे पहाड़ों ने एक के ऊपर एक मंच बना दिया हो। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मानव निर्मित कला के लिए प्रसिद्ध है।
In simple words: अजन्ता गाँव के पास बाधुर नदी धनुष की तरह मुड़ती है और पहाड़ आधे चाँद जैसे दिखते हैं। हमारे पूर्वजों को यह जगह बहुत पसंद आई और उन्होंने पहाड़ काटकर शानदार महल और मंदिर बना दिए। यह दिखाता है कि इंसान की इच्छाशक्ति से कोई भी मुश्किल काम हो सकता है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक स्थिति का वर्णन करते समय, स्थान के आसपास की नदियों, पहाड़ों और उनकी बनावट का उल्लेख करें, साथ ही यह भी बताएं कि यह क्यों महत्वपूर्ण है।
Question 4. पहले पहाड़ काटकर उसे खोखला कर दिया गया, फिर उसमें सुन्दर भवन बना लिए गए, जहाँ खंभों पर उमादी मूरतें विहँस उठीं। भीतर की समूची दीवारें और छतें रगड़कर चिकनी कर ली गयीं और तब उनकी जमीन पर चित्रों की एक दुनिया ही बसा दी गयी। पहले पलस्तर लगाकर आचार्यों ने उन पर लहराती रेखाओं में चित्रों की काया सिरज दी, फिर उनके चेले कलावन्तों ने उनमें रंग भरकर प्राण फेंक दिए। फिर तो दीवारें उमग उठीं, पहाड़ पुलकित हो उठे। [2014]
(अ) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ (पाठ और लेखक का नाम) लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) पहाड़ों को किस प्रकार जीवन्त बनाया गया?
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक कहते हैं कि अजन्ता की गुफाओं की दीवारों पर बने चित्र इतने खूबसूरत हैं कि उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे इन दीवारों पर जीवन स्वयं ही उतर आया हो। अजन्ता के इन भित्ति-चित्रों में हैरान कर देने वाली कहानियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि अद्भुत कहानियों का एक बड़ा भंडार यहीं मौजूद है। बंदरों, हाथियों और हिरणों की कहानियों से क्रूरता, भय, दया और त्याग की भावनाएँ बहुत जीवंत रूप में दिखाई गई हैं। किसी चित्र में क्रूरता है तो किसी में असीम दया की कहानी। कहीं पाप का दृश्य है तो कहीं क्षमा का भी दृश्य है, यह मानव स्वभाव की विविधता को दर्शाता है।
द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक का कहना है कि गुफा की भीतरी दीवारें और छतें बहुत रगड़कर चिकनी कर ली गईं। फिर चित्रकारों ने उन चिकनी सतहों पर कई चित्र बनाए। इन चित्रों को देखकर ऐसा लगता है जैसे एक नई दुनिया ही बन गई हो। पहले शिक्षकों ने उन पर लहराती हुई रेखाओं से चित्रों के आकार बनाए, फिर उनके छात्रों ने उन चित्रों में रंग भरकर उन्हें जीवंत बना दिया। इसके बाद तो दीवारें खुशी से भर उठीं और पहाड़ भी आनंद से झूम उठे। यह कला और परिश्रम का अद्भुत संगम है।
(स) पहाड़ों को काटकर भवन का रूप दिया गया। दीवारों, छतों और खंभों को चिकना करके उन पर सजीव चित्र बनाए गए। इन चित्रों में रंग भरकर पहाड़ों को जीवंत कर दिया गया, जिससे वे कला और जीवन का प्रतीक बन गए।
In simple words: पहले पहाड़ों को काटकर खोखला किया गया और फिर उनमें सुंदर भवन बनाए गए। दीवारों और छतों को चिकना करके उन पर चित्रकारों ने रंगीन और जीवंत चित्र उकेरे। इस तरह पहाड़ों को ऐसा बनाया गया जैसे वे खुद ही बोल रहे हों।
🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या में लेखक के मुख्य संदेश को पकड़ें। कला और प्रकृति के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से उजागर करें।
Question 5. कितना जीवन बरस पड़ा है इन दीवारों पर; जैसे फसाने अजायब का भण्डार खुल पड़ा हो। कहानी से कहानी टकराती चली गयी है। बन्दरों की कहानी, हाथियों की कहानी, हिरनों की कहानी, क्रूरता और भय की, दया और त्याग की। जहाँ बेरहमी है, वहीं दया का भी समुद्र उमड़ पड़ा है। जहाँ पाप है, वहीं क्षमा की सोता फूट पड़ा है। राजा और कैंगले, विलासी और भिक्षु, नर और नारी, मनुष्य और पशु सभी कलाकारों के हाथों सिरजते चले गये हैं। हैवान की हैवानी को इंसान की इंसानियत से कैसे जीता जा सकता है, कोई अजन्ता में जाकर देखे । बुद्ध का जीवन हजार धाराओं में होकर बहता है। जन्म से लेकर निर्वाण तक उनके जीवन की प्रधान घटनाएँ कुछ ऐसे लिख दी गयी हैं कि आँखें अटक जाती हैं, हटने का नाम नहीं लेतीं। [2009, 12, 14, 17]
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।
(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए ।
(स)
1. अजन्ता की दीवारों पर किनकी कहानियाँ चित्रित हैं ?
2. अजन्ता की गुफाओं में किस महापुरुष के जीवन को विस्तार से चित्रित किया गया है?
3. अजन्ता की गुफाओं में किन-किन विरोधी भावों और व्यक्तियों का चित्रण है ? या दीवारों पर बने चित्र किन-किन से सम्बन्धित हैं ?
4. कलाकारों के हाथों क्या सिरजते चले गये हैं?
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक कहते हैं कि अजन्ता की गुफाओं की दीवारों पर बने चित्र इतने सुंदर हैं कि उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे इन दीवारों पर जीवन स्वयं ही उतर आया हो। अजन्ता के इन चित्रों में अनोखी कहानियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि अद्भुत कहानियों का एक बड़ा भंडार यहीं मौजूद है। बंदरों, हाथियों और हिरणों की कहानियों से क्रूरता, भय, दया और त्याग की भावनाएँ बहुत जीवंत रूप में दिखाई गई हैं। किसी चित्र में क्रूरता है तो किसी में असीम दया की कहानी। कहीं पाप का दृश्य है तो कहीं क्षमा का भी दृश्य है, यह मानव स्वभाव की विविधता को दर्शाता है।
द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या: श्री भगवतशरण उपाध्याय जी कहते हैं कि अजन्ता की गुफाओं में राजा हो या गरीब, अमीर हो या भिखारी, पुरुष हो या स्त्री, मनुष्य हो या पशु, कलाकारों ने इन सभी के चित्रों में रंग-रेखाओं के द्वारा जान डाल दी है। यह दृश्य यह भाव दिखाता है कि 'बुरे को अच्छाई से जीतना चाहिए', क्योंकि इंसानियत के सामने हैवानियत झुक जाती है। अजन्ता की गुफाओं में बने ऐसे चित्रों को देखकर कोई भी व्यक्ति अच्छी प्रेरणा ले सकता है। यह कलाकृति मानव मूल्यों की गहरी समझ को दर्शाती है।
(स)
1. अजन्ता की दीवारों पर बंदरों, हाथियों, हिरणों, क्रूरता और भय, दया और त्याग की कहानियाँ चित्रित हैं।
2. अजन्ता की गुफाओं में भगवान बुद्ध के पूरे जीवन को विस्तार से चित्रित किया गया है; उनके जन्म से लेकर मोक्ष तक की सभी मुख्य घटनाएँ इतनी खूबसूरती से दिखाई गई हैं कि उनसे आँखें हटती ही नहीं।
3. अजन्ता की गुफाओं में बेरहमी और दया, पाप और क्षमा जैसे विरोधी भावों का चित्रण है। साथ ही राजा और गरीब, अमीर और भिक्षु, नर और नारी, मनुष्य और पशु जैसे विरोधी व्यक्तियों का भी चित्रण है।
4. कलाकारों के हाथों राजा और गरीब, विलासी और भिक्षु, नर और नारी, मनुष्य और पशु जैसे अलग-अलग व्यक्तियों के चित्र बनाए गए हैं।
In simple words: अजन्ता की दीवारों पर जीवन की कहानियाँ उकेरी गई हैं, जिनमें जानवरों की कथाएँ, क्रूरता-दया, पाप-क्षमा जैसे भाव और अलग-अलग तरह के लोग शामिल हैं। भगवान बुद्ध के पूरे जीवन को भी यहाँ इतने सुंदर ढंग से दिखाया गया है कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: गद्यांश में वर्णित विभिन्न भावों (जैसे क्रूरता-दया) और चरित्रों (जैसे राजा-भिक्षु) को पहचानें और उन्हें अपनी व्याख्या में स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
Question 6. यह हाथ में कमल लिये बुद्ध खड़े हैं, जैसे छवि छलकी पड़ती है, उभरे नयनों की जोत पसरती जा रही है। और यह यशोधरा है, वैसे ही कमल-नाल धारण किये त्रिभंग में खड़ी। और यह दृश्य है। महाभिनिष्क्रमण का-यशोधरा और राहुल निद्रा में खोये, गौतम दृढ़ निश्चय पर धड़कते हिया को सँभालते। और यह नन्द है, अपनी पत्नी सुन्दरी का भेजा, द्वार पर आए बिना भिक्षा के लौटे भाई बुद्ध को जो लौटाने आया था और जिसे भिक्षु बन जाना पड़ा था। बार-बार वह भागने को होता है, बार-बार पकड़कर संघ में लौटा लिया जाता है। उधर वह यशोधरा है बालक राहुल के साथ। [2013]
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए ।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में क्या वर्णित किया गया है ? या प्रस्तुत गद्यांश में कहाँ के दृश्यों का चित्रण किया गया है ?
2. “महाभिनिष्क्रमण' क्या है ? इसके दृश्य का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक भगवान बुद्ध के घर त्यागते समय के अजन्ता के चित्रों का वर्णन करते हुए कहते हैं कि एक तरफ भगवान बुद्ध हाथ में कमल लिए खड़े हैं। उनकी सुंदरता हर जगह फैल रही है और उनकी आँखों का प्रकाश भी हर तरफ बिखर रहा है। उनकी पत्नी यशोधरा भी, कमल के फूल जैसी, कमल की डंडी पकड़े हुए 'त्रिभंग' मुद्रा (शरीर को तीन जगह से मोड़कर खड़ा होना) में चित्रित की गई हैं। यह चित्र बहुत ही जीवंत लगता है और देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह बुद्ध के शांत और दिव्य रूप को दर्शाता है।
द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक भगवान बुद्ध के घर छोड़ने के बाद भिक्षा माँगने के एक चित्र का वर्णन करते हुए कहते हैं कि एक चित्र में गौतम बुद्ध के साथ उनके भाई नन्द हैं। नन्द को उनकी पत्नी सुन्दरी ने गौतम बुद्ध को वापस लाने के लिए भेजा था। सुन्दरी ने भिक्षा माँगने आए गौतम बुद्ध को बिना भिक्षा दिए ही द्वार से वापस कर दिया था। लेकिन नन्द बुद्ध को वापस नहीं ला पाए, बल्कि उनके उपदेशों से प्रभावित होकर खुद भिक्षु बन गए। यह घटना नन्द के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाती है।
(स)
1. प्रस्तुत गद्यांश में अजन्ता की गुफाओं में चित्रित भगवान बुद्ध के महाभिनिष्क्रमण (गृह-त्याग) के दृश्य का बहुत ही भावुक और विस्तृत चित्र वर्णन किया गया है। यहाँ बुद्ध के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाया गया है।
2. संसार से वैराग्य हो जाने पर शांति की खोज जैसे बड़े उद्देश्य के लिए गौतम बुद्ध द्वारा अपनी पत्नी, पुत्र, परिवार और राजमहल को त्याग कर घर से निकल जाने की क्रिया 'महाभिनिष्क्रमण' कहलाती है। इस चित्र में गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल नींद में डूबे हुए दिखाए गए हैं, और गौतम बुद्ध अपने धड़कते दिल को संभालते हुए, घर छोड़ने के दृढ़ निश्चय में चित्रित किए गए हैं। यह दृश्य त्याग और बलिदान का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
In simple words: गद्यांश अजन्ता में बुद्ध के जीवन के महत्वपूर्ण दृश्यों का वर्णन करता है, जिसमें कमल पकड़े बुद्ध, त्रिभंग मुद्रा में यशोधरा, और बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण शामिल है। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे उनके भाई नन्द भी उनके उपदेशों से प्रभावित होकर भिक्षु बन गए।
🎯 Exam Tip: महाभिनिष्क्रमण जैसे पारिभाषिक शब्दों को परिभाषित करते हुए उसके दृश्य का वर्णन करें। चित्रों के माध्यम से व्यक्त भावनाओं पर ध्यान दें।
Question 7. और उधर वह बन्दरों का चित्र है, कितना सजीव-कितना गतिमान्। उधर सरोवर में जल-विहार करता वह गजराज कमलदण्ड तोड़-तोड़कर हथिनियों को दे रहा है। वहाँ महलों में प्यालों के दौर चल रहे हैं, उधर वह रानी अपनी जीवन-यात्रा समाप्त कर रही है, उसका दम टूटा जा रहा है। खाने-खिलाने, बसने-बसाने, नाचने-गाने, कहने-सुनने, वन-नगर, ऊँच-नीच, धनी-गरीब के जितने नज़ारे हो सकते हैं, सब आदमी अजन्ता की गुफाओं की इन दीवारों पर देख सकता है। [2012]
(अ) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) आदमी अजन्ता की गुफाओं की दीवारों पर क्या देख सकता हैं ?
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक अजन्ता की गुफाओं में चित्रित चित्रों का वर्णन करते हुए लिख रहे हैं कि गुफा में एक तरफ सरोवर में जल-क्रीड़ा करते हुए एक गजराज और हथिनियों को चित्रित किया गया है। इसमें वह गजराज सरोवर में उगे कमल के डंडे तोड़-तोड़कर साथ में क्रीड़ा करने वाली हथिनियों को दे रहा है। दूसरी तरफ महलों में मनाए जाने वाले किसी उत्सव का चित्रण है। इस चित्र में लोगों को मद्यपान करते हुए दिखाया गया है। जहाँ एक तरफ महल में कुछ लोग जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक रानी को मरते हुए दर्शाया गया है। यह चित्र इतना जीवंत है कि ऐसा लगता है कि उसकी जीवन-लीला अब खत्म होने ही वाली है। ऐसे जीवंत दृश्य अजन्ता की गुफा की दीवारों पर ही देखे जा सकते हैं, और कहीं नहीं। यह कला मानव जीवन के हर पहलू को दर्शाती है।
(स) व्यक्ति अजन्ता की गुफा की दीवारों पर खाने-खिलाने, बसने-बसाने, नाचने-गाने, कहने-सुनने, वन-नगर, ऊँच-नीच, अमीर-गरीब से संबंधित जितने भी संभव दृश्य हो सकते हैं, उन सभी को देख सकता है। यह कलाकृति मानव समाज के विविध पक्षों का दर्पण है।
In simple words: अजन्ता की गुफाओं की दीवारों पर बंदरों, हाथियों, महलों में उत्सवों और यहाँ तक कि एक रानी की मौत के दृश्य भी सजीव रूप में चित्रित हैं। यहाँ इंसान अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और समाज के हर पहलू को देख सकता है, चाहे वह अमीर हो या गरीब।
🎯 Exam Tip: गद्यांश में वर्णित विभिन्न दृश्यों और उनके प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें। मानव जीवन के विविध पहलुओं का वर्णन करें।
Question 8. इन पिछले जन्मों में बुद्ध ने गज, कपि, मृग आदि के रूप में विविध योनियों में जन्म लिया था और संसार के कल्याण के लिए दया और त्याग का आदर्श स्थापित करते वे बलिदान हो गये थे। उन स्थितियों में किस प्रकार पशुओं तक ने मानवोचित व्यवहार किया था, किस प्रकार औचित्य का पालन किया था, यह सब उन चित्रों में असाधारण खूबी से दर्शाया गया है और उन्हीं को दर्शाते समय चितेरों ने अपनी । जानकारी की गाँठ खोल दी है। [2013]
(अ) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए। (ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।
(स) अपनी जानकारी की गाँठ खोलने का क्या आशय है ?
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक अजन्ता की गुफाओं में चित्रित चित्रों का वर्णन करते हुए कहते हैं कि बुद्ध के कई जन्मों की कथा 'जातक' ग्रंथों में लिखी है। वे बताते हैं कि जब बुद्ध ने जानवरों के रूप में जन्म लिया था, उस समय बाकी जानवरों ने भी ऐसा व्यवहार किया था जो इंसानों के लिए सही होता। उन सभी ने किस तरह सही व्यवहार किया, यह सब अजन्ता के चित्रों में बहुत खास तरीके से दिखाया गया है। इसका मतलब है कि बुद्ध के पिछले जन्मों के सभी विवरणों को चित्रों में खास तौर पर दिखाया गया है, जो उनके त्याग और दया को उजागर करते हैं।
(स) अपनी जानकारी की गाँठ खोलने का मतलब है कि अपने ज्ञान को विस्तार से प्रकट करना या सबके सामने लाना। इसका अर्थ है कि चित्रकारों ने अपनी कला के माध्यम से बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं के गूढ़ रहस्यों को स्पष्ट कर दिया है।
In simple words: अजन्ता के चित्रों में बुद्ध के पिछले जन्मों की कहानियाँ दिखाई गई हैं, जहाँ उन्होंने हाथी, बंदर जैसे जानवरों के रूप में जन्म लेकर त्याग और दया का आदर्श प्रस्तुत किया। चित्रकारों ने इन कहानियों को इतनी खूबसूरती से दिखाया है कि वे अपना सारा ज्ञान कला के माध्यम से सबके सामने ले आए।
🎯 Exam Tip: 'जातक' कथाओं का उल्लेख बुद्ध के पूर्वजन्मों के प्रसंग में करें। 'गाँठ खोलना' जैसे मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करते हुए व्याख्या करें।
Question 9. अजन्ता संसार की चित्रकलाओं में अपना अद्वितीय स्थान रखता है। इतने प्राचीन काल के इतने सजीव, इतने गतिमान, इतने बहुसंख्यक कथा-प्राण चित्र कहीं नहीं बने । अजन्ता के चित्रों ने देश-विदेश सर्वत्र की चित्रकला को प्रभावित किया। उसका प्रभाव पूर्व के देशों की कला पर तो पड़ा हीं, मध्य-पश्चिमी एशिया भी उसके कल्याणकर प्रभाव से वंचित न रह सका। [2014]
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए ।
(स) अजन्ती की कला का प्रभाव किन-किन देशों पर पड़ा ? या अजन्ता की चित्रकला का बाहर के देशों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer:
(अ) इस गद्यांश का पाठ 'अजन्ता' है और इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।
(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक का कहना है कि अजन्ता की चित्रकला बहुत ही अद्भुत और बेजोड़ है। दुनिया में इसकी कोई बराबरी नहीं है। निःसंदेह, यह विश्व में चित्रकला का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। दुनिया में कोई दूसरी ऐसी जगह नहीं, जहाँ इतने पुराने और इतने जीवंत चित्र मिलें। ऐसी कोई चित्रशाला नहीं, जहाँ इतने गतिशील और इतनी बड़ी संख्या में चित्र हों, जिनमें कहानियाँ चित्रित की गई हों। ऐसी जगहें पूरी दुनिया में मिलना बहुत मुश्किल हैं। इसी वजह से अजन्ता की चित्रकला का देश-विदेश की चित्रकलाओं पर गहरा असर पड़ा है। अजंता की कलाकृति की भव्यता उसे एक वैश्विक पहचान दिलाती है।
द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक कहते हैं कि अजन्ता की चित्रकला का खास असर अपने देश पर ही नहीं, बल्कि विदेशों की चित्रकलाओं पर भी पड़ा है। चीन, जापान, इंडोनेशिया जैसे पूरब के देशों में इसके जैसे प्रयोग साफ तौर पर देखने को मिलते हैं। साथ ही ईरान, मिस्र जैसे मध्य-पश्चिमी एशिया के देशों की चित्रकला भी इसके असर से बच नहीं पाई है। अजंता की कला ने दुनिया भर की कला को प्रेरित किया और उसे एक नई दिशा दी।
(स) अजन्ता की कला का प्रभाव चीन, जापान, इंडोनेशिया जैसे पूरब के देशों के साथ-साथ ईरान, मिस्र आदि मध्य-पश्चिमी एशिया के देशों की चित्रकला पर भी बहुत ज़्यादा पड़ा है।
In simple words: अजन्ता की चित्रकला विश्व में अद्वितीय है, जिसमें पुराने समय के जीवंत और गतिशील चित्र बने हैं। इसका प्रभाव सिर्फ भारत पर ही नहीं, बल्कि चीन, जापान, इंडोनेशिया, ईरान और मिस्र जैसे कई अन्य देशों की कला पर भी पड़ा है।
🎯 Exam Tip: अजन्ता की कला के वैश्विक महत्व को उजागर करें और उन देशों का नाम लिखें जिन पर इसका प्रभाव पड़ा है। 'अद्वितीय' जैसे शब्दों का प्रयोग करके इसकी विशेषता बताएँ।
व्याकरण एवं रचना-बोध
Question 1. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग पृथक् कीजिए-
सन्देश, अभिराम, सनाथ, विहँस, बेरहमी, अद्वितीय ।।
Answer:
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द |
|---|---|---|
| सन्देश | सन् | देश |
| अभिराम | अभि | राम |
| सनाथ | स | नाथ |
| विहँस | वि | हँस |
| बेरहमी | बे | रहमी |
| अद्वितीय | अ | द्वितीय |
In simple words: उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के शुरू में जुड़कर उसका अर्थ बदल देते हैं। इस सवाल में हमने दिए गए शब्दों से उपसर्ग और उनके मूल शब्दों को अलग-अलग किया है।
🎯 Exam Tip: उपसर्ग को पहचानते समय, मूल शब्द का अर्थपूर्ण होना सुनिश्चित करें। उपसर्ग हमेशा शब्द की शुरुआत में आते हैं।
Question 2. निम्नलिखित उपसर्गों के योग से तीन-तीन शब्दों की रचना कीजिए-
अति, उप, सु, वि, परि, अ ।
Answer:
उपसर्ग
अति: अतिरिक्त, अत्याचार, अतिक्रमण
उप: उपनाम, उपवन, उपकार
सु: सुमार्ग, सुकर्म, सुधार
वि: विज्ञान, विषाद, वियोग
परि: परिजन, परिपूर्ण, परिणाम
अ: अविश्वास, अहिंसा, असुविधा
In simple words: दिए गए उपसर्गों का इस्तेमाल करके हमने नए शब्द बनाए हैं। उपसर्ग शब्द के आगे जुड़कर उसके अर्थ में बदलाव लाते हैं, जिससे कई अलग-अलग मतलब वाले शब्द बन पाते हैं।
🎯 Exam Tip: उपसर्गों से शब्द बनाते समय, यह सुनिश्चित करें कि बनाए गए शब्द का कोई उचित अर्थ हो। प्रत्येक उपसर्ग से कम से कम तीन शब्द बनाने का अभ्यास करें।
Question 3. प्रत्ययरहित और प्रत्ययसहित शब्द-युग्म यहाँ दिये जा रहे हैं। इनका स्वरचित वाक्यों में इस प्रकार प्रयोग कीजिए कि इनके अर्थ का अन्तर स्पष्ट हो जाए।
कला-कलावन्त, हैवान-हैवानी, इंसान-इंसानियत, सुरक्षा-सुरक्षित, कल्याण-कल्याणकर ।
Answer:
कला-कलावन्त: कला की उपासना को कलावन्त अपना धर्म मानते हैं। (कलाकार, कला को जानने वाला)
हैवान-हैवानी: हैवान की हैवानी के सम्मुख सभी विवश हो जाते हैं। (क्रूरता, पाशविकता)
इंसान-इंसानियत: इंसान को कभी भी इंसानियत नहीं छोड़नी चाहिए। (मानवता, मनुष्यता)
सुरक्षा-सुरक्षित: कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बावजूद मन्त्री जी, सुरक्षित नहीं रह सके। (जो सुरक्षित हो, सुरक्षित किया गया हो)
कल्याण-कल्याणकर: केवल कल्याणकर योजनाएँ बनाकर ही समाज का कल्याण नहीं हो सकता। (कल्याण करने वाला)
In simple words: हमने प्रत्यय वाले और बिना प्रत्यय वाले शब्दों के जोड़े का वाक्य में इस्तेमाल किया है। इससे साफ पता चलता है कि प्रत्यय जुड़ने से शब्द का अर्थ कैसे बदल जाता है, जैसे 'कल्याण' से 'कल्याणकर' बनता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यय वाले और बिना प्रत्यय वाले शब्दों का प्रयोग ऐसे वाक्यों में करें जो उनके अर्थ के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ। यह अभ्यास शब्दों के सही उपयोग को समझने में मदद करता है।
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