UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 5 Sumitranandan Pant

NCERT Solutions for Class 10 Hindi: Chapter 05 सुमित्रानंदन पंत

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Practice Class 10 Hindi Solutions: Chapter 05 सुमित्रानंदन पंत

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कवि परिचय

 

Question 1. सुमित्रानन्दन पन्त का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए। या सुमित्रानन्दन पन्त का जीवन-परिचय दीजिए एवं उनकी किसी एक रचना का नाम लिखिए।
Answer: श्री सुमित्रानन्दन पन्त का पूरा काव्य आधुनिक काव्य-सोच का प्रतीक है। ये ऐसे कवि हैं, जो हिंदी-साहित्य को एक झरने की तरह नया जीवन देते हैं। इन्होंने अपनी कविताओं में मानव-जीवन की धुन को बांधने की कोशिश की है। इनके काव्य में धर्म, दर्शन, नैतिकता, समाज के मूल्य, प्रकृति की कोमलता और कठोरता एक साथ देखी जा सकती है। वास्तव में इनकी कविता काव्य पसंद करने वालों के लिए एक हार के जैसी है।

जीवन-परिचय:सुकुमार भावनाओं के कवि और प्रकृति को बहुत अच्छे से चित्रित करने वाले श्री सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म 20 मई, सन् 1900 ई० को अल्मोड़ा के पास कौसानी गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम पं० गंगादत्त पन्त था। इनके जन्म के छह घंटे बाद ही इनकी माता का देहांत हो गया था, इसलिए इनका पालन-पोषण पिता और दादी के प्यार भरी देखरेख में हुआ। पन्त जी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अल्मोड़ा में की। यहीं पर इन्होंने अपना नाम गुसाईंदत्त से बदलकर सुमित्रानन्दन रख लिया। इसके बाद वाराणसी के जयनारायण हाईस्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की और जुलाई, 1919 ई० में इलाहाबाद आकर म्योर सेण्ट्रल कॉलेज में दाखिला लिया। सन् 1921 ई० में महात्मा गाँधी के कहने पर असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर इन्होंने बी० ए० की परीक्षा दिए बिना ही कॉलेज छोड़ दिया था। इन्होंने खुद से संस्कृत, अंग्रेजी, बांग्ला और हिन्दी भाषा का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। प्रकृति की गोद में पले होने के कारण इन्होंने अपनी कोमल भावनाओं को प्रकृति के चित्रों में दिखाया। इन्होंने प्रगतिशील विचारों की पत्रिका ‘रूपाभा’ भी निकाली। सन् 1942 ई० में भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरित होकर ‘लोकायन’ नामक सांस्कृतिक संस्था बनाई और पूरे भारत में यात्रा की। सन् 1950 ई० में ये ऑल इण्डिया रेडियो में सलाहकार बने और सन् 1976 ई० में भारत सरकार ने इनकी साहित्य-सेवाओं के लिए 'पद्मभूषण' उपाधि दी। इनकी कृति 'चिदम्बरा' के लिए इन्हें ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’ मिला। 28 दिसम्बर, सन् 1977 ई० को इस महान साहित्यकार ने हमेशा के लिए यह दुनिया छोड़ दी और हमेशा की नींद में सो गए। इनका काव्य हमेशा प्रकृति और मानव भावनाओं के बीच गहरा संबंध दर्शाता है।

रचनाएँ:पन्त जी कई तरह की प्रतिभा वाले थे। इन्होंने कविता के साथ-साथ नाटक, उपन्यास और कहानियाँ भी लिखी हैं, लेकिन कविता इनका मुख्य क्षेत्र रहा है। अपने लंबे कवि-जीवन में इन्होंने हिन्दी काव्य को कई रचनाएँ दी हैं, जो नीचे लिखी हैं:

  • (1) वीणा - यह पन्त जी की पहली काव्य-पुस्तक है। इसमें प्रकृति-देखरेख, भावनाओं और कल्पनाओं का सुंदर रूप दिखता है।
  • (2) ग्रन्थि - यह अधूरे प्यार की दुख भरी कहानी का काव्य है। इसमें वियोग श्रृंगार मुख्य है।
  • (3) पल्लव - यह कल्पना पर आधारित काव्य है। इसमें प्रकृति-देखरेख और ऊंची कल्पनाएँ दिखती हैं। इसमें 'वसन्तश्री', 'परिवर्तन'; 'मौन-निमन्त्रण', 'बादल' जैसी अच्छी कविताएँ शामिल हैं।
  • (4) गुंजन - इसमें कवि का मन प्रकृति से हटकर खुद को चित्रित करने की ओर चला गया है। 'नौकाविहार' इस संग्रह की सबसे अच्छी कविता है।
  • (5) युगान्त,
  • (6) युगवाणी,
  • (7) ग्राम्या - इन काव्यों में कवि पर गाँधीवाद और समाजवाद का प्रभाव साफ दिखता है।
  • (8) लोकायतन - इस महाकाव्य में कवि की सांस्कृतिक और दार्शनिक सोच दिखाई गई है। इसमें ग्रामीण जीवन और आम लोगों की भावनाओं को आवाज दी गई है। पन्त जी की अन्य रचनाएँ हैं - पल्लविनी, अतिमा, युगपथ, ऋता, स्वर्णकिरण, चिदम्बरा, उत्तरा, कला और बूढा चाँद, शिल्पी, स्वर्णधूलि आदि।

साहित्य में स्थान:सुंदर और कोमल भावों के कुशल चितेरे पन्त ने खड़ी बोली को ब्रजभाषा जैसी मिठास और सरलता दी है। पन्त जी गहरे विचारक, उत्कृष्ट कवि और मानवता में सहज विश्वास रखने वाले कुशल कलाकार हैं, जिन्होंने नई सृष्टि के उदय की कल्पना की है। अंत में कहा जा सकता है कि "पन्त जी हिन्दी कविता के आभूषण हैं, जिन्हें पाकर माँ-भारती धन्य हुई।"In simple words: सुमित्रानन्दन पन्त एक बहुत बड़े कवि थे जिन्होंने प्रकृति और भावनाओं के बारे में लिखा। उनका जन्म 1900 में कौसानी में हुआ था और उनकी माँ का निधन जन्म के कुछ समय बाद हो गया था। उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने अपनी कविताओं में कल्पना और प्रकृति का सुंदर चित्रण किया। उन्हें 'पद्मभूषण' और 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' भी मिले।

🎯 Exam Tip: जीवनी लिखते समय जन्म, माता-पिता, शिक्षा, मुख्य रचनाएँ और साहित्य में योगदान जैसे बिंदुओं को क्रम से लिखना चाहिए ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

पद्यांशों की सन्दर्भ व्याख्या चींटी

 

Question 1. चींटी को देखा? वह सरल, विरल, काली रेखा तम के तागे-सी जो हिल-डुल, चलती लघुपद पल-पल मिल-जुल वह है पिपीलिका पाँति ! देखो ना, किस भाँति । काम करती वह सतत ! कन-कन करके चुनती अविरत ! [2012] गाय चराती, धूप खिलाती, बच्चों की निगरानी करती, लड़ती, अरि से तनिक न डरती, दल के दल सेना सँवारती, घर आँगन, जनपथ बुहारती ।
Answer:शब्दार्थ: [विरल = जो घंनी न हो । तम = अन्धकार । लघुपद = छोटे-छोटे पैरों से । पल-पल = थोड़ी-थोड़ी देर में। पिपीलिका = चींटी । सतत = निरन्तर। अविरत = बिना रुके । अरि = शत्रु । बुहारती = साफ करती ।]

सन्दर्भ: ये पंक्तियाँ प्रकृति के कोमल कवि सुमित्रानन्दन पन्त की 'युगवाणी' काव्य-संग्रह की 'चींटी' शीर्षक कविता से हमारी हिन्दी पाठ्य-पुस्तक 'काव्य-खण्ड' में ली गई हैं।

प्रसंग: इस हिस्से में कवि ने चींटी जैसे छोटे जीव की मेहनत का वर्णन किया है और इंसान को उससे प्रेरणा लेने का संदेश दिया है।

व्याख्या: कवि पूछता है कि क्या आपने कभी चींटी को ध्यान से देखा है? चींटियों की पंक्ति एक सीधी काली और पतली रेखा के जैसी लगती है। वह अपने छोटे-छोटे पैरों से हर पल चलती रहती है। जब चींटियाँ साथ मिलकर चलती हैं तो ऐसा लगता है जैसे कोई पतला काला धागा हिल-डुल रहा हो। कवि आगे कहते हैं कि वह चींटियों की पंक्ति (कतार) है। आप ध्यान से देखिए कि वह कैसे लगातार चलती रहती है। वह लगातार अपने काम में लगी रहती है और अपने और अपने परिवार के लिए छोटे-छोटे ज़रूरी कणों को बिना रुके लगातार चुनती रहती है।

इतना ही नहीं, उसका अपना घर-समाज भी है। यह गाय चराती है और उन्हें धूप खिलाती है। जीव विज्ञानियों के अनुसार चींटियों में भी गायें होती हैं। वे अपने बच्चों की देखभाल करती हैं, अपने दुश्मनों से बिना डरे लड़ती हैं, अपनी सेना तैयार करती हैं और घर, आँगन और रास्ते को साफ करती हुई लगती हैं। चींटियों का जीवन हमें निरंतर सक्रियता और समुदाय में रहने का पाठ पढ़ाता है।

काव्यगत सौन्दर्य:

  • 1. इन पंक्तियों में चींटी की मेहनत (लगन) को दिखाया गया है।
  • 2. कवि चींटी के ज़रिए इंसान को हमेशा काम करते रहने की प्रेरणा दे रहा है। कवि के अनुसार चींटियों का छोटा आकार और मिल-जुलकर काम करने की आदत यह दिखाती है कि शारीरिक रूप से छोटे होने पर भी व्यक्ति की काम करने की क्षमता पर कोई खास असर नहीं पड़ता।
  • 3. भाषा-सरल साहित्यिक खड़ी बोली ।
  • 4. शैली-वर्णनात्मक ।
  • 5. रस-वीर रस (कर्मवीरता के कारण)।
  • 6. गुण-ओज ।
  • 7. अलंकार-'तम के तागे-सी जो हिल-डुल' में उपमा और अनुप्रास; 'कन-कन' में पुनरुक्तिप्रकाश।
  • 8. भावसाम्य–जिस प्रकार पन्त ने चींटी के ज़रिए हमेशा काम करते रहने की प्रेरणा दी है, वैसे ही राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने भी हमेशा कर्मशील बने रहने पर ज़ोर दिया है: "नर हो, न निराश करो मन को। कुछ काम करो, कुछ काम करो, जग में रहकर कुछ नाम करो।"

In simple words: कवि ने चींटी के छोटे से जीवन में उसकी कड़ी मेहनत को दिखाया है। चींटी हमेशा चलती रहती है और छोटे-छोटे कणों को इकट्ठा करती है। वह अपने बच्चों की देखभाल करती है और दुश्मनों से लड़ती है। कवि हमें चींटी से लगातार काम करने और कभी न हारने की प्रेरणा देते हैं।

🎯 Exam Tip: कविता की व्याख्या करते समय, कवि का नाम, कविता का शीर्षक और मुख्य भावों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है। अलंकारों और रसों का उल्लेख करने से उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है।

 

Question 2. चींटी है प्राणी सामाजिक, वह श्रमजीवी, वह सुनागरिक ! देखा चींटी को ? उसके जी को ? भूरे बालों की सी कतरन, छिपा नहीं उसका छोटापन, वह समस्त पृथ्वी पर निर्भय विचरण करती, श्रम में तन्मय, वह जीवन की चिनगी अक्षय । वह भी क्या देही है, तिल-सी ? प्राणों की रिलमिल झिलमिल-सी ! दिन भर में वह मीलों चलती, अथक, कार्य से कभी न टलती।
Answer:शब्दार्थ: [श्रमजीवी = श्रम करके जीने वाली। चिनगी = चिंगारी । अक्षय = कभी नष्ट न होने वाली । अथक = बिना थके ।]

सन्दर्भ: ये पंक्तियाँ पिछली कविता की तरह ही प्रकृति के कोमल कवि सुमित्रानन्दन पन्त की 'युगवाणी' काव्य-संग्रह की 'चींटी' शीर्षक कविता से हमारी हिन्दी पाठ्य-पुस्तक 'काव्य-खण्ड' में ली गई हैं।

प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि ने चींटी के गुणों और उसकी मेहनत का वर्णन किया है।

व्याख्या: चींटी एक सामाजिक जीव है। चींटी का अपना एक समाज होता है और वह सब मिलकर नियम से रहती है। वह बहुत मेहनती जीव है और उसमें एक अच्छे नागरिक के सभी गुण मौजूद हैं।

कवि कहता है कि तुमने चींटी को ध्यान से देखा होगा। वह बहुत छोटी है, लेकिन उसका दिल और हिम्मत बहुत बड़े हैं। चींटियों की पंक्ति भूरे बालों की कतरन जैसी दिखती है। उसकी छोटापन सब जानते हैं, लेकिन उसके दिल में बहुत साहस है। वह पूरी धरती पर, जहाँ चाहे, बिना डरे घूमती है। उसे कहीं भी जाने में डर नहीं लगता है। वह लगातार अपनी मेहनत से भोजन इकट्ठा करने में लगी रहती है। चींटी मेहनत की साक्षात मूर्ति है। वह जीवन की कभी न खत्म होने वाली चिंगारी है। चींटी बहुत छोटी है, लेकिन उसमें जीवन की पूरी रोशनी चमकती है।

कवि कहते हैं कि उसका शरीर बड़ा नहीं, बल्कि वह तिल के समान बहुत छोटा है। इतनी छोटी होने पर भी चींटी पूरी शक्ति से इधर-उधर घूमती रहती है। दिनभर में वह कई मील की लंबी यात्रा करती है, फिर भी वह कभी थकती नहीं है और लगातार अपने काम में लगी रहती है। धूप, छाँव, सर्दी, वर्षा में भी वह अपना काम करने से पीछे नहीं हटती है। चींटी का अटल स्वभाव हमें दृढ़ता और लगन का पाठ सिखाता है।

काव्यगत सौन्दर्य:

  • 1. पन्त जी ने चींटी जैसे छोटे जीव में भी आदर्श सामाजिक प्राणी के गुण देखे हैं।
  • 2. कवि छोटे दिखने वाले जीवन में भी महानता के तत्व ढूंढने में सक्षम हैं।
  • 3. भाषा-साहित्यिक खड़ी बोली ।
  • 4. शैली-वर्णनात्मक।
  • 5. रस-वीर रस (कर्मवीरता के कारण)।
  • 6. अलंकार-'भूरे बालों की सी कतरन' में उपमा, 'रिलमिल-झिलमिल' में अनुप्रास ।
  • 7. गुण-ओज मिश्रित प्रसाद ।
  • 8. भावसाम्य–जिस प्रकार चींटी धूप-छाँव, सर्दी-वर्षा की चिंता किए बिना आजीवन मेहनती रहने की प्रेरणा देती है, उसी प्रकार रामनरेश त्रिपाठी भी जीवन भर कर्म करने के लिए प्रेरित करते हुए कहते हैं: "कर्म तुम्हारा धर्म अटल हो, कर्म तुम्हारी भाषा । हो सकर्म ही मृत्यु तुम्हारे जीवन की अभिलाषा ।"

In simple words: कवि ने बताया है कि चींटी एक सामाजिक और मेहनती प्राणी है। वह भले ही बहुत छोटी दिखती है, पर उसका दिल बहुत बड़ा है। वह बिना डरे पूरे धरती पर घूमती है और कभी थकती नहीं। चींटी हमें दिखाती है कि छोटे होने पर भी कोई बहुत मेहनती और शक्तिशाली हो सकता है।

🎯 Exam Tip: कविता के गुणों का वर्णन करते समय, उसमें प्रयुक्त भाषा, शैली, रस, गुण और अलंकारों को उदाहरण सहित समझाना चाहिए। भावसाम्य के लिए अन्य कवियों की मिलती-जुलती पंक्तियाँ उद्धृत करना प्रभावशाली होता है।

 

चंद्रलोक में प्रथम बार

 

Question 1. चंद्रलोक में प्रथम बार, मानव ने किया पदार्पण, छिन्न हुए लो, देश काल के, दुर्जय बाधा बंधन । दिग-विजयी मनु-सुत, निश्चय, यह महत् ऐतिहासिक क्षण, भू-विरोध हो शांत, निकट आये सब देशों के जन। [2015] युग-युग का पौराणिक स्वप्न हुआ मानव का संभव, समारंभ शुभ नए चन्द्र-युग का भू को दे गौरव ।।
Answer:शब्दार्थ: [पदार्पण = पैर रखना । दुर्जय = कठिनाई से जीते जा सकने वाले । बाधा = रुकावट, अड़चन । दिग-विजयी = दिशाओं को जीतने वाला । मनु-सुत = मनुष्य । महत् = बड़ा । भू-विरोध = पृथ्वी पर दिखाई देने वाले झगड़े । पौराणिक = पुराना । समारंभ = प्रारम्भ ।]

सन्दर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि सुमित्रानन्दन पन्त द्वारा लिखी 'ऋता' नामक काव्य-संग्रह से हमारी हिन्दी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'काव्य-खण्ड' में संकलित 'चंद्रलोक में प्रथम बार' शीर्षक कविता से ली गई हैं।

प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि ने इंसान के चंद्रमा पर पहुँचने की खास घटना के महत्व को बताया है। यहाँ कवि ने उन संभावनाओं का भी वर्णन किया है, जो इंसान के चंद्रमा पर पैर रखने से सच होती दिख रही हैं।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि जब इंसान ने पहली बार चंद्रमा पर कदम रखा तो उसने समय और स्थान की उन सभी मुश्किलों को तोड़ दिया, जिन्हें जीतना कठिन माना जाता था। इंसान को यह उम्मीद बंधी कि इस ब्रह्मांड में कोई भी देश और ग्रह अब दूर नहीं हैं। यह पक्का है कि मनु के बच्चों (इंसानों) की यह सबसे बड़ी जीत है। यह एक बहुत ही ऐतिहासिक पल है कि अब सभी देशों के लोग अपने आपसी झगड़ों को खत्म करके एक-दूसरे के करीब आएं और प्यार से रहें। यह पूरा विश्व अब एक देश में बदल गया है। सभी देशों के लोग अब एक-दूसरे के करीब आएं, यही कवि की इच्छा है।

इंसान का युगों-युगों से चंद्रमा के साथ गहरा रिश्ता रहा है। चंद्रमा पर विजय से युगों-युगों का पुराना सपना अब सच हो गया है। चंद्रमा के बारे में इंसान की सुंदर कल्पनाएँ अब साकार हो चुकी हैं। धरती के लोगों को गर्व महसूस कराकर अब नए चंद्रमा युग की शुरुआत हो गई है। यह उपलब्धि मानव जाति के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

काव्यगत सौन्दर्य:

  • 1. प्रस्तुत कविता में कवि ने दार्शनिक विचारों को वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत किया है।
  • 2. भाषा-साहित्यिक खड़ी बोली
  • 3. शैली-प्रतीकात्मक
  • 4. रस-वीर ।
  • 5. छन्द- तुकान्त-मुक्त।
  • 6. गुण-ओज ।
  • 7. अलंकार-अनुप्रास और पुनरुक्तिप्रकाश ।
  • 8. भावसाम्य-संस्कृत के नीचे लिखे श्लोक जैसी भावना ही कवि ने इन पंक्तियों में व्यक्त की है- "अयं निजः परोवेति, गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु, वसुधैव कुटुम्बकम् ॥"

In simple words: कवि ने चंद्रमा पर पहली बार इंसान के पहुंचने को एक ऐतिहासिक पल बताया है। उन्होंने कहा कि इससे देश और समय की सभी बाधाएं टूट गई हैं। अब सभी देशों को एक साथ मिलकर प्यार से रहना चाहिए। यह युगों पुराना सपना पूरा हुआ है और पूरी धरती को इससे गर्व महसूस हुआ है।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक उपलब्धियों का वर्णन करते समय, उनके मानवीय और दार्शनिक महत्व पर ध्यान दें। यह भी बताएं कि कवि उनसे समाज के लिए क्या संदेश देना चाहता है।

 

Question 2. फहराए ग्रह-उपग्रह में धरती का श्यामल-अंचल, सुख संपद् संपन्न जगत् में बरसे जीवन-मंगल । अमरीका सोवियत बने । नव दिक् रचना के वाहन जीवन पद्धतियों के भेद । समन्वित हों, विस्तृत मन ।
Answer:शब्दार्थ: [ग्रह = सूर्य की परिक्रमा करने वाले तारे । इनके नाम हैं-पृथ्वी, बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, प्लूटो, नेप्च्यून, यूरेनस । (प्रस्तुत कविता के अनुसार नौ ग्रह हैं; परन्तु वर्तमान में केवल आठ ग्रह माने गये हैं। प्लूटो को क्षुद्र ग्रह माना गया है)। उपग्रह = किसी बड़े ग्रह के चारों ओर घूमने वाले छोटे ग्रह; जैसे पृथ्वी का उपग्रह चन्द्रमा । श्यामल = हरा-भरा । संपद् = सम्पत्ति, वैभव । मंगल = कल्याण। नव दिक् = नयी दिशाएँ। रचना = सृजन, निर्माण। पद्धति = रास्ता। समन्वित = मिले हुए। विस्तृत = विशाल ।]

व्याख्या: कवि कहते हैं कि मैं अब यह चाहता हूँ कि अंतरिक्ष के ग्रहों और उपग्रहों में इस पृथ्वी का हरा-भरा अंचल लहराए। इसका मतलब है कि इंसान अन्य ग्रहों पर भी पहुँचकर वहाँ पृथ्वी जैसी हरियाली और जीवन को फैला दे। सुख और धन से भरे इस संसार में मानव-जीवन का कल्याण हो; यानी पूरे संसार में कहीं भी दुख और गरीबी दिखाई न दे।

अमेरिका और सोवियत रूस नई दिशाओं को बनाएं, क्योंकि अंतरिक्ष विज्ञान में यही देश सबसे आगे हैं। कवि का कहना है कि विश्व में हर देश की संस्कृति और सभ्यता अलग-अलग है। इनकी यह भिन्नता खत्म होनी चाहिए। इसका मतलब है कि सभी जीवन-पद्धतियाँ आपस में मिल जाएं और मन की छोटी सोच खत्म हो जाए, लोग खुले विचारों वाले बनें और पूरे विश्व में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (पूरी धरती एक परिवार है) की भावना विकसित हो। ज्ञान का प्रसार सभी के लिए समानता और एकजुटता की भावना को बढ़ावा देता है।

काव्यगत सौन्दर्य:

  • 1. कवि चारों ओर कल्याणमय जीवन के प्रसार की कामना करता है।
  • 2. भाषा-साहित्यिक खड़ी बोली
  • 3. शैली-प्रतीकात्मक ।
  • 4. रस-वीर ।
  • 5. छन्द-तुकान्तमुक्त।
  • 6. गुण-ओज ।
  • 7. अलंकार-'फहराये ग्रह-उपग्रह में धरती का श्यामल अंचल' में रूपक तथा अनुप्रास ।

In simple words: कवि चाहते हैं कि हमारी हरी-भरी धरती का प्रभाव सभी ग्रहों पर फैले और हर जगह सुख-शांति आए। वह चाहते हैं कि सभी देश, जैसे अमेरिका और सोवियत, मिलकर नई राहें बनाएं और अपनी अलग-अलग सोच छोड़कर एक बड़ा परिवार बन जाएं।

🎯 Exam Tip: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' जैसे आदर्शवादी विचारों को समझाते समय, यह स्पष्ट करें कि कवि कैसे वैज्ञानिक प्रगति को मानव एकता और शांति के लिए उपयोग करना चाहता है।

 

Question 3. अणु-युग बने धरा जीवन हित स्वर्ण-सृजन को साधन, मानवता ही विश्व सत्य भू राष्ट्र करें आत्मार्पण । धरा चन्द्र की प्रीति परस्पर जगत प्रसिद्ध, पुरातन, हृदय-सिन्धु में उठता। स्वर्गिक ज्वार देख चन्द्रानन । [2012, 16]
Answer:शब्दार्थ: [धरा = पृथ्वी । सृजन = निर्माण । आत्मार्पण = आत्म-समर्पण । चन्द्रानन = चन्द्रमा का मुख ।]

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियों में यह इच्छा की गई है कि परमाणु शक्ति का सही उपयोग और प्रयोग करने वाला यह वैज्ञानिक युग, मानव-जीवन के लिए फायदेमंद साबित हो।

व्याख्या: कवि का कहना है कि विज्ञान का पूरा विकास मानव-जीवन के अच्छे के लिए ही होना चाहिए। परमाणु-शक्ति मानव-जीवन को खत्म करने का साधन न बनकर पृथ्वी पर स्वर्ग बनाने का साधन बननी चाहिए। विश्व का एकमात्र सच मानवता की भावना है। इसके सामने पूरी पृथ्वी के राष्ट्रों को खुद को समर्पित कर देना चाहिए; यानी पूरा विश्व एक राष्ट्र बने और पूरा देश मानवता की ही बात सोचे। वे परमाणु शक्ति से एक-दूसरे को खत्म करने की बात न सोचें, बल्कि उसे मानवता के फायदे में लगाएं।

चंद्रमा और पृथ्वी का प्यार पूरी दुनिया में मशहूर है और बहुत पुराना है; क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी का ही एक हिस्सा है। इसीलिए पृथ्वी के सागर जैसे हृदय में चंद्रमा का मुख देखकर लहरें उठती हैं। इसका मतलब है कि चंद्रमा पर विजय तभी सफल है जब वैज्ञानिक खोजों को मानव-हित में लगाया जाए। विज्ञान को हमेशा मानव जाति की भलाई के लिए उपयोग करना चाहिए।

काव्यगत सौन्दर्य:

  • 1. कवि विज्ञान की तरक्की को मानवता के विकास के लिए उपयोगी मानता है।
  • 2. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के करीब आता है तो समुद्र का पानी चंद्रमा की आकर्षण शक्ति से ऊपर उठ जाता है। इसी को ज्वार कहते हैं। कवि ने इस भौगोलिक सच्चाई को बहुत ही सुंदर साहित्यिक रूप दिया है।
  • 3. भाषा-साहित्यिक खड़ी बोली ।
  • 4. शैली-प्रतीकात्मक एवं भावात्मक ।
  • 5. रस-शान्त ।
  • 6. छन्द-तुकान्त-मुक्त।
  • 7. गुण-प्रसाद ।
  • 8. अलंकार-'स्वर्ण-सृजन का साधन' में अनुप्रास तथा 'हृदय-सिन्धु' में रूपक।
  • 9. भावसाम्य–विज्ञान की शक्ति मनुष्य द्वारा नियंत्रित है और मनुष्य अपनी इच्छा के अनुसार इसका उपयोग कर सकता है; यह भाव कहीं और भी व्यक्त किया गया है: "शक्ति शक्ति है बुरी या अच्छी कभी नहीं होती है। एक नियन्त्रक मानव, इसके ही विचार ढोती है।"

In simple words: कवि चाहते हैं कि परमाणु शक्ति का उपयोग विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानव जाति की भलाई और पृथ्वी को स्वर्ग बनाने के लिए हो। उन्हें लगता है कि सभी देशों को मिलकर मानवता को सबसे ऊपर रखना चाहिए। पृथ्वी और चंद्रमा का पुराना रिश्ता है, और विज्ञान का लक्ष्य यही होना चाहिए कि वह मानव जीवन को बेहतर बनाए।

🎯 Exam Tip: विज्ञान और नैतिकता के समन्वय को समझाते समय, यह स्पष्ट करें कि परमाणु ऊर्जा जैसे शक्तिशाली साधनों का उपयोग किस प्रकार मानवीय मूल्यों और शांति के लिए किया जाना चाहिए।

 

काव्य-सौन्दर्य एवं व्याकरण-बोध

 

Question 1. निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
(क) तम के तागे सी जो हिल-डुल
चलती लघुपद पल-पल मिल-जुल ।
(ख) भूरे बालों की सी कतरन,
छिपा नहीं उसका छोटापन,
(ग) सुख संपद् सम्पन्न जगत् में
बरसे जीवन-मंगल ।
Answer:
(क) उपमा, अनुप्रास, पुनरुक्तिप्रकाश,
(ख) उपमा,
(ग) अनुप्रास ।
In simple words: पंक्तियों को पढ़कर यह पहचानना है कि उनमें कौन सा अलंकार (जैसे उपमा, अनुप्रास या पुनरुक्तिप्रकाश) इस्तेमाल किया गया है। अलंकार से कविता की सुंदरता बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: अलंकारों को पहचानने के लिए उनके प्रमुख लक्षणों को याद रखें: जैसे 'सी', 'सम' आदि उपमा में, वर्णों की आवृत्ति अनुप्रास में और शब्दों की आवृत्ति पुनरुक्तिप्रकाश में होती है।

 

Question 2. निम्नलिखित पदों से उपसर्ग और शब्द को पृथक्-पृथक् करके लिखिए- सुनागरिक, अक्षय, समारम्भ, उपग्रह ।
Answer:

पदउपसर्गशब्द
सुनागरिकसुनागरिक
अक्षयअक्षय
समारम्भसम्आरम्भ
उपग्रहउपग्रह
In simple words: हमें दिए गए शब्दों को दो हिस्सों में बांटना है: एक हिस्सा उपसर्ग (जो शब्द के आगे लगता है) और दूसरा मूल शब्द। जैसे 'सुनागरिक' में 'सु' उपसर्ग है और 'नागरिक' मूल शब्द है।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग हमेशा शब्द के अर्थ में बदलाव लाता है। सही उपसर्ग और मूल शब्द को अलग करने के लिए, ध्यान दें कि मूल शब्द का अपना अर्थ होना चाहिए।

 

Question 3. निम्नलिखित पदों में से प्रत्ययों को अलग करके लिखिए- सामाजिक, छोटापन, पौराणिक ।
Answer:

पदप्रत्ययशब्द
सामाजिकइकसमाज
छोटापनपनछोटा
पौराणिकइकपुराण
In simple words: हमें दिए गए शब्दों को फिर से दो हिस्सों में बांटना है: एक हिस्सा प्रत्यय (जो शब्द के पीछे लगता है) और दूसरा मूल शब्द। जैसे 'सामाजिक' में 'इक' प्रत्यय है और 'समाज' मूल शब्द है।

🎯 Exam Tip: प्रत्यय भी शब्द के अर्थ में बदलाव लाता है, लेकिन यह मूल शब्द के बाद जुड़ता है। मूल शब्द को पहचानने के लिए, यह देखें कि प्रत्यय हटाने के बाद शब्द का कोई अर्थ बचता है या नहीं।

Hindi Class 10 Curriculum Solutions: Chapter 05 सुमित्रानंदन पंत

Textbook Solutions for Class 10 Hindi Chapter 05 सुमित्रानंदन पंत

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Mastering Theoretical and Practical Questions

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FAQs

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Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 5 सुमित्रानंदन पंत in printable PDF format for offline study on any device.