UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 4 Prabuddho Graminah

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Detailed Chapter 4 प्रबुद्धो ग्रामिनः UP Board Solutions for Class 10 Hindi

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Class 10 Hindi Chapter 4 प्रबुद्धो ग्रामिनः UP Board Solutions PDF

अवतरणों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद

 

Question 1. एकदा बहवः जनाः धूमयानम् (रेलगाड़ी) आरुह्य नगरं प्रति गच्छन्ति स्म । तेषु केचित् । ग्रामीणाः केचिच्च नागरिकाः आसन्। मौनं स्थितेषु एकः नागरिकः ग्रामीणीन् उपहसन् अकथयत्‘ग्रामीणाः अद्यापि पूर्ववत् अशिक्षिताः अज्ञाश्च सन्ति । न तेषां विकासः अभवत् न च भवितुं शक्नोति ।” तस्य तादृशं जल्पनं श्रुत्वा कोऽपि चतुरः ग्रामीणः अब्रवीत् 'भद्र नागरिक ! भवान् एवं किञ्चित् ब्रवीतु, यतो हि भवान् शिक्षितः बहुज्ञश्च अस्ति ।” इदम् आकर्त्य स नागरिकः सदर्प ग्रीवाम् उन्नमय्य अकथयत्-‘”कथयिष्यामि परं पूर्वं समयः विधातव्यः । तस्य तां वार्ता श्रुत्वा च चतुरः ग्रामीणः अकथयत्-‘भोः वयम् अशिक्षिताः भवान्च शिक्षितः, वयम् अल्पज्ञाः भवान् च बहुज्ञः, इत्येवं विज्ञाय अस्माभिः समयः कर्तव्यः, वयं परस्परं प्रहेलिकां प्रक्ष्यामः । यदि भवान्नुत्तरं दातुं समर्थः न भविष्यति तदा भवान् दशरूप्यकाणि दास्यति । यदि वयम् उत्तरं दातुं समर्थाः न भविष्यामः तदा दशरूप्यकाणाम् अर्धं पञ्चरूप्यकाणि दास्यामः ।” [2010, 14, 17]
यह प्रश्न दिए गए संस्कृत गद्यांश का हिन्दी अनुवाद करने को कहता है।
शब्दार्थ:
धूमयानम् = रेलगाड़ी
आरुह्य = चढ़कर
उपहसन् = मजाक उड़ाते हुए
जल्पनम् = कथन
अज्ञाः = मूर्ख
ब्रवीत् = कहे
आकण्य = सुनकर
सदर्प = गर्वसहित
ग्रीवाम् = गर्दन को
उन्नमय्य = ऊँची करके
समयः विधातव्यः = शर्त रख लेनी चाहिए
विज्ञाय = जानकर
प्रहेलिकां = पहेली को
प्रक्ष्यामः = पूछेगे
दशरूप्यकाणाम् अर्धं = दस रुपये के आधे, पाँच रुपये

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड' के 'प्रबुद्धो ग्रामीणः' पाठ से लिया गया है।
प्रसंग: इस गद्यांश में एक ग्रामीण व्यक्ति की बुद्धिमत्ता और चतुराई का वर्णन बड़े ही रोचक तरीके से किया गया है।
Answer: एक बार बहुत-से लोग रेलगाड़ी में बैठकर शहर की ओर जा रहे थे। उनमें कुछ गाँव के रहने वाले थे और कुछ शहर के। जब सब चुपचाप बैठे थे, तो एक शहर के आदमी ने गाँव वालों का मजाक उड़ाते हुए कहा, "गाँव के लोग आज भी पहले की तरह अनपढ़ और मूर्ख हैं। उनका न तो विकास हुआ है और न ही हो सकता है।" उसकी ऐसी बात सुनकर एक चतुर ग्रामीण बोला, "हे शहर के भाई! आप ही कुछ कहिए, क्योंकि आप पढ़े-लिखे और बहुत जानकार हैं।" यह सुनकर उस शहर के आदमी ने गर्व से अपनी गर्दन ऊपर करके कहा, "मैं कहूँगा, परन्तु पहले हमें एक शर्त तय करनी चाहिए।" उसकी यह बात सुनकर उस चतुर ग्रामीण ने कहा, "भाई! हम अनपढ़ हैं और आप पढ़े-लिखे हैं। हम कम जानकार हैं और आप अधिक जानकार हैं। यही सोचकर हमें शर्त रखनी चाहिए। हम आपस में पहेलियाँ पूछेंगे। यदि आप उत्तर नहीं दे पाएँगे तो आप दस रुपये देंगे। यदि हम उत्तर नहीं दे पाएँगे, तब हम दस रुपये के आधे यानी पाँच रुपये देंगे।" इस प्रकार दोनों पक्षों में एक रोचक बौद्धिक प्रतियोगिता शुरू हो गई।
In simple words: एक बार ट्रेन में बैठे शहर के आदमी ने गाँव वालों को अनपढ़ कहा। एक चतुर ग्रामीण ने उसे चुनौती दी कि वे एक-दूसरे से पहेलियाँ पूछें और जो हार जाए वह पैसे देगा।

🎯 Exam Tip: संस्कृत अनुवाद करते समय प्रत्येक शब्द के अर्थ को ठीक से समझना और फिर उसे सरल हिन्दी वाक्यों में ढालना महत्वपूर्ण है, ताकि मूल भाव बना रहे।

 

Question 2. “आम् स्वीकृतः समयः”, इति कथिते तस्मिन् नागरिके से ग्रामीणः नागरिकम् अवदत्-“प्रथमं भवान् एव पृच्छतु।"नागरिकश्चतं ग्रामीणम् अकथयत्-'त्वमेव प्रथमं पृच्छ' इति । इदं श्रुत्वा स ग्रामीणः अवदत्-'युक्तम्, अहमेव प्रथमं पृच्छामि- अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः । अमुखः स्फुटवक्ता च यो जानाति स पण्डितः ॥ अस्या उत्तरं ब्रवीतु भवान् ।' [2011, 13, 15, 17]
यह प्रश्न दिए गए संस्कृत गद्यांश का हिन्दी अनुवाद करने को कहता है।
शब्दार्थ:
आम् = हाँ
स्वीकृतः समयः = शर्त स्वीकार है
कथिते = कहने पर
तस्मिन् नागरिके = उस नागरिक के
श्रुत्वा = सुनकर
युक्तम् = ठीक है
अपदः = बिना पैर के
साक्षरः = अक्षरयुक्त
अमुखः = बिना मुख के
स्फुटवक्ता = स्पष्ट बोलने वाला

प्रसंग: इस गद्यांश में ग्रामीण और नागरिक के बीच पहेली पूछने की शर्त के बाद बातचीत का वर्णन किया गया है।
Answer: जब उस नागरिक ने "हाँ, शर्त स्वीकार है" कहा, तो ग्रामीण ने उस नागरिक से कहा, "पहले आप ही पूछिए।" शहर के आदमी ने फिर गाँव वाले से कहा, "पहले तुम ही पूछो।" यह सुनकर गाँव वाला बोला, "ठीक है, मैं ही पहले पूछता हूँ। वह बिना पैर का है, लेकिन दूर तक जाता है। वह साक्षर है (अक्षरों को जानता है), परन्तु विद्वान नहीं है। उसका मुँह नहीं है, फिर भी वह साफ-साफ बोलता है। जो उसे जानता है, वह ज्ञानी है।" ग्रामीण ने अपनी पहेली में एक वस्तु के गुणों का वर्णन किया और शहर के आदमी से उत्तर पूछा।
In simple words: शर्त तय होने पर ग्रामीण ने शहर के आदमी को पहेली पूछी। पहेली थी, "वह बिना पैर के दूर जाता है, अक्षर जानता है पर पंडित नहीं, बिना मुँह के स्पष्ट बोलता है।"

🎯 Exam Tip: संस्कृत के श्लोकों या पहेलियों का अनुवाद करते समय, पहले हर शब्द का अर्थ समझें और फिर पूरे वाक्य का भावार्थ स्पष्ट करें, जिससे सही उत्तर तक पहुँच सकें।

 

Question 3. नागरिकः बहुकालं यावत् अचिन्तयत्, परं प्रहेलिकायाः उत्तरं दातुं समर्थः न अभवत्। अतः ग्रामीणम् अवदत्-"अहम् अस्याः प्रहेलिकायाः उत्तरं न जानामि ।” इदं श्रुत्वा ग्रामीणः अकथयत् 'यदि भवान् उत्तरं न जानाति, तर्हि ददातु दशरूप्यकाणि ।” अतः म्लानमुखेन नागरिकेण समयानुसारं दशरूप्यकाणि दत्तानि ।। [2010, 11, 13, 15, 17]
यह प्रश्न दिए गए संस्कृत गद्यांश का हिन्दी अनुवाद करने को कहता है।
शब्दार्थ:
बहुकालं यावत् = बहुत देर तक
अचिन्तयत् = सोचता रहा
तर्हि = तो
म्लानमुखेन = मलिन मुख वाले (दुःखी चेहरे से)

प्रसंग: इस गद्यांश में शहर के आदमी द्वारा ग्रामीण की पहेली का उत्तर न दे पाने और शर्त के अनुसार पैसे देने का वर्णन किया गया है।
Answer: शहर के आदमी ने बहुत देर तक सोचा, परन्तु वह उस पहेली का उत्तर नहीं दे सका। इसलिए उसने ग्रामीण से कहा, "मैं इस पहेली का उत्तर नहीं जानता हूँ।" यह सुनकर ग्रामीण ने कहा, "यदि आप उत्तर नहीं जानते हैं, तो दस रुपये दीजिए।" अतः उदास चेहरे वाले उस शहर के आदमी ने शर्त के अनुसार दस रुपये दे दिए। इस घटना से ग्रामीण की बुद्धिमत्ता और शहर के आदमी की हार स्पष्ट होती है।
In simple words: शहर का आदमी पहेली का उत्तर नहीं दे पाया। इसलिए, शर्त के अनुसार, उसने दस रुपये दुःखी मन से ग्रामीण को दिए।

🎯 Exam Tip: किसी भी गद्यांश का अनुवाद करते समय, संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है ताकि शब्दों और वाक्यों के सही अर्थ को व्यक्त किया जा सके।

 

Question 4. पुनः ग्रामीणोऽब्रवीत् -“इदानीं भवान् पृच्छतु प्रहेलिकाम् ।” दण्डदानेन खिन्नः नागरिकः बहुकालं विचार्य न काञ्चित् प्रहेलिकाम् अस्मरत्, अतः अधिकं लज्जायमानः अब्रवीत्‘स्वकीयायाः प्रहेलिकायाः त्वमेव उत्तरं ब्रूहि ।” तदा स ग्रामीणः विहस्य स्वप्रहेलिकायाः सम्यक् उत्तरम् अवदत्-'पत्रम्” इति । यतो हि इदं पदेन विनापि दूरं याति, अक्षरैः युक्तमपि न पण्डितः भवति । एतस्मिन्नेव काले तस्य ग्रामीणस्य ग्रामः आगतः स विहस रेलयानात् अवतीर्य स्वग्राम प्रति अचलत् । नागरिकः लज्जितः भूत्वा पूर्ववत् तूष्णीम् अतिष्ठत् । सर्वे यात्रिणः वाचालं तं नागरिकं दृष्ट्वा अहसन् । तदा स नागरिकः अन्वभवत् यत्ज्ञानं सर्वत्र सम्भवति । ग्रामीणोः अपि कदाचित् नागरिकेभ्यः प्रबुद्धतराः भवन्ति । [2009, 12, 15]
यह प्रश्न दिए गए संस्कृत गद्यांश का हिन्दी अनुवाद करने को कहता है।
शब्दार्थ:
दण्डदानेन = दण्ड देने के कारण
खिन्न = दुःखी
विचार्य = सोचकर
काञ्चित् = किसी
अस्मरत् = याद कर सका
लज्जमानः = लज्जित होता हुआ
स्वकीयायाः = अपनी
विहस्य = हँसकर
सम्यक् = ठीक
याति = जाता है
युक्तमपि (युक्तम् + अपि) = युक्त होने पर भी
अवतीर्य = उतरकर
तूष्णीम् = चुपचाप
वाचालं = अधिक बात करने वाले को
दृष्ट्वा = देखकर
अहसन् = हँसे
अन्वभवत् = अनुभव किया
प्रबुद्धतराः = अधिक बुद्धिमान्

प्रसंग: इस गद्यांश में शहर के आदमी के अपनी पहेली का उत्तर न दे पाने और शर्मिंदा होने का वर्णन किया गया है।
Answer: फिर ग्रामीण ने कहा, "अब आप अपनी पहेली पूछिए।" पैसे देने के कारण दुःखी शहर के आदमी ने बहुत देर तक सोचा, परन्तु उसे कोई पहेली याद नहीं आई। इसलिए, बहुत अधिक शर्मिंदा होकर उसने कहा, "अपनी पहेली का उत्तर तुम ही बताओ।" तब वह ग्रामीण हँसकर अपनी पहेली का सही उत्तर बोला, "पत्र (चिट्ठी)।" क्योंकि यह बिना पैरों के भी दूर तक चला जाता है, अक्षरों से युक्त होने पर भी विद्वान नहीं होता। इसी समय उस ग्रामीण का गाँव आ गया। वह हँसते हुए रेलगाड़ी से उतरकर अपने गाँव चला गया। शहर का आदमी लज्जित होकर पहले की तरह चुपचाप बैठ गया। सभी यात्रियों ने उस बातूनी शहर के आदमी को देखकर हँसना शुरू कर दिया। तब उस शहर के आदमी ने यह महसूस किया कि ज्ञान हर जगह संभव है। ग्रामीण भी कभी-कभी शहर के लोगों से अधिक बुद्धिमान होते हैं। इस घटना ने साबित किया कि ज्ञान का संबंध केवल औपचारिक शिक्षा से नहीं होता।
In simple words: ग्रामीण ने अपनी पहेली का उत्तर 'पत्र' बताया। शहर का आदमी शर्मिंदा होकर चुप रहा, और उसे महसूस हुआ कि ज्ञान कहीं भी मिल सकता है, और ग्रामीण भी समझदार हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी कहानी के अंत में नैतिक शिक्षा या मुख्य सीख को पहचानना और उसे अपने अनुवाद में शामिल करना, उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

अतिलघु-उतरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर

 

Question 1. ग्रामीणान् उपहसन् नागरिकः किम् अकथयत् ? [2010]
Answer: ग्रामीणान् उपहसन् नागरिकः अकथयत्-"ग्रामीणः अद्यापि पूर्ववत् अशिक्षिताः अज्ञानश्च सन्ति । न तेषां विकासः अभवत् न च भवितुं शक्नोति ।” इसका अर्थ है कि शहर के व्यक्ति ने गाँव वालों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें अनपढ़ और अज्ञानी कहा, जिससे उनकी सोच का पता चलता है।
In simple words: गाँव वालों का मजाक उड़ाते हुए शहर के आदमी ने कहा कि ग्रामीण अभी भी अनपढ़ और अज्ञानी हैं, और उनका विकास नहीं हुआ है।

🎯 Exam Tip: जब कोई प्रश्न किसी के कथन के बारे में पूछे, तो मूल कथन को यथासंभव सटीक रूप से उद्धृत करें।

 

Question 2. समये स्वीकृते प्रथमं कः अवदत् ?
Answer: शर्त स्वीकार होने के बाद, सबसे पहले ग्रामीण ने बातचीत शुरू की। यह दर्शाता है कि ग्रामीण व्यक्ति स्थिति को नियंत्रित करने और अपनी बुद्धिमत्ता दिखाने में सक्षम था।
In simple words: शर्त स्वीकार होने पर सबसे पहले ग्रामीण बोला।

🎯 Exam Tip: 'प्रथमं कः' जैसे प्रश्नों में क्रिया को ध्यान से देखकर सही कर्ता की पहचान करें।

 

Question 3. कः प्रथमं प्रहेलिकाम् अपृच्छत् ?
Answer: सबसे पहले ग्रामीण ने पहेली पूछी। यह दर्शाता है कि ग्रामीण ने चुनौती स्वीकार की और अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करने के लिए पहल की।
In simple words: सबसे पहले ग्रामीण ने पहेली पूछी।

🎯 Exam Tip: कहानी के घटनाओं के क्रम को याद रखना ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में सहायक होता है।

 

Question 4. ग्रामीणः नागरिकं कां प्रहेलिकाम् अपृच्छत् ?
Answer: ग्रामीण ने शहर के आदमी से यह पहेली पूछी कि "वह बिना पैरों के भी दूर तक जाता है, अक्षर जानता है पर पंडित नहीं, बिना मुँह के स्पष्ट बोलता है। जो उसे जानता है वह ज्ञानी है।" इस पहेली में ग्रामीण ने एक ऐसी वस्तु का वर्णन किया, जो ज्ञान और गति दोनों का प्रतीक है।
In simple words: ग्रामीण ने शहर के आदमी से पहेली पूछी कि "बिना पैर के दूर जाने वाला, अक्षर से युक्त पर पंडित नहीं, बिना मुँह के स्पष्ट बोलने वाला कौन है?"

🎯 Exam Tip: पहेलियों वाले प्रश्नों में, पहेली के मुख्य गुणों को याद रखना और उन्हें सटीक रूप से व्यक्त करना आवश्यक है।

 

Question 5. प्रहेलिकायाः उत्तरं दातुं कः समर्थः न अभवत् ?
Answer: शहर का आदमी पहेली का उत्तर देने में समर्थ नहीं हो सका। उसकी हार ने ग्रामीण की बुद्धिमत्ता को और भी उजागर किया।
In simple words: शहर का आदमी पहेली का उत्तर नहीं दे पाया।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न सीधे तौर पर पूछता है कि कौन असफल रहा, इसलिए उत्तर में केवल सही व्यक्ति का उल्लेख करें।

 

Question 6. ग्रामीणस्य प्रहेलिकायाः किम् उत्तरम् आसीत् ? [2010, 13, 18]
Answer: ग्रामीण की पहेली का उत्तर 'पत्र' (चिट्ठी) था। पत्र बिना पैरों के भी दूर जा सकता है, अक्षरों से युक्त होता है लेकिन पंडित नहीं होता, और बिना मुँह के भी अपना संदेश स्पष्ट रूप से पहुँचाता है।
In simple words: ग्रामीण की पहेली का उत्तर 'पत्र' (चिट्ठी) था।

🎯 Exam Tip: पहेलियों के उत्तर हमेशा संक्षिप्त और सटीक होते हैं, इसलिए मुख्य शब्द को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. नागरिकः किमर्थं लज्जितः अभवत् ? [2011]
या
नागरिकः किं अर्थेन खिन्नः अभवत् ?

Answer: शहर का आदमी ग्रामीण की पहेली का उत्तर देने में समर्थ नहीं हो सका, इस कारण वह लज्जित और दुःखी हुआ। अपनी अज्ञानता स्वीकार करना उसके लिए शर्मनाक था।
In simple words: शहर का आदमी ग्रामीण की पहेली का उत्तर नहीं दे पाया, इसलिए वह शर्मिंदा और दुःखी हुआ।

🎯 Exam Tip: 'किमर्थं' या 'किं अर्थेन' जैसे प्रश्नों में कारण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।

 

Question 8. पदेन विना किं दूरं याति ? [2011, 12, 13, 14, 16, 17, 18]
Answer: बिना पैरों के पत्र दूर तक जाता है। पत्र भौतिक रूप से यात्रा करता है और दूर बैठे लोगों तक सूचना पहुँचाता है।
In simple words: बिना पैरों के पत्र दूर जाता है।

🎯 Exam Tip: पहेलियों के सीधे उत्तर देने वाले प्रश्नों में, सटीक उत्तर एक या दो शब्दों में ही होता है।

 

Question 9. नागरिकः प्रहेलिकां कथं न अपृच्छत् ?
Answer: शहर का आदमी दण्ड देने के कारण दुःखी था, इसलिए वह कोई पहेली याद नहीं कर सका और पूछ भी नहीं पाया। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिससे वह नई पहेली सोचने में असमर्थ रहा।
In simple words: शहर का आदमी दण्ड देने से दुःखी था, इसलिए वह कोई पहेली याद नहीं कर पाया और पूछ भी नहीं सका।

🎯 Exam Tip: 'कथं न' वाले प्रश्नों में, उस कार्य के न होने का कारण बताना अनिवार्य है।

 

Question 10. अन्ते नागरिकः किम् अनुभवम् अकरोत् ? [2010]
Answer: अंत में शहर के आदमी ने अनुभव किया कि ज्ञान हर जगह संभव है और कभी-कभी ग्रामीण भी शहर के लोगों से अधिक बुद्धिमान हो सकते हैं। यह अनुभव उसके पहले के घमंड को तोड़ता है।
In simple words: अंत में शहर के आदमी ने समझा कि ज्ञान हर जगह मिल सकता है और ग्रामीण भी कभी-कभी शहर के लोगों से ज्यादा समझदार हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: 'किम् अनुभवम् अकरोत्' जैसे प्रश्नों में, कहानी से मिली सीख या मुख्य अनुभव को संक्षेप में बताएं।

 

Question 11. ज्ञानं कुत्र सम्भवति.? [2015, 16]
Answer: ज्ञान हर जगह संभव है, चाहे वह गाँव हो या शहर। सीखने और समझने की कोई सीमा नहीं होती, यह व्यक्ति की जिज्ञासा पर निर्भर करता है।
In simple words: ज्ञान हर जगह संभव है।

🎯 Exam Tip: 'कुत्र' प्रश्नों में स्थान या व्यापकता को स्पष्ट करना आवश्यक है।

 

Question 12. नागरिकः किं दातुं समर्थः न अभवत् ? [2015, 17]
Answer: शहर का आदमी ग्रामीण की पहेली का उत्तर देने में समर्थ नहीं हो सका। उसकी हार के कारण उसे अपनी गलती माननी पड़ी।
In simple words: शहर का आदमी ग्रामीण की पहेली का उत्तर नहीं दे पाया।

🎯 Exam Tip: 'किं दातुं' प्रश्नों में, यह स्पष्ट करें कि किस चीज को देने में असमर्थता थी।

 

Question 13. अमुखोऽपि कः स्फुटवक्ता भवति ? [2012, 13, 15, 16]
Answer: बिना मुँह के भी पत्र स्पष्ट बोलने वाला होता है। पत्र अपने संदेश को बिना किसी आवाज के स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है।
In simple words: बिना मुँह के भी पत्र स्पष्ट बोलने वाला होता है।

🎯 Exam Tip: पहेलियों से संबंधित प्रश्नों में, उत्तर को कहानी के अनुसार ही दें।

 

Question 14. ग्रामीणान् कः उपाहसत् ? [2010, 12, 16, 17, 18]
Answer: ग्रामीण लोगों का एक शहर के आदमी ने मजाक उड़ाया। उसने अपनी शिक्षा और ज्ञान का घमंड करते हुए ऐसा किया।
In simple words: ग्रामीणों का एक शहर के आदमी ने मजाक उड़ाया।

🎯 Exam Tip: 'कः' प्रश्नों में, कर्ता (कौन) की पहचान करें और उसका नाम या पद बताएं।

 

Question 15. धूमयाने समयः केन जितः ? [2013, 17]
Answer: रेलगाड़ी में समय एक ग्रामीण ने जीता। उसने अपनी बुद्धिमत्ता से शहर के आदमी को हरा दिया।
In simple words: रेलगाड़ी में शर्त एक ग्रामीण ने जीती।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्न कहानी के मुख्य परिणाम पर केंद्रित होते हैं, इसलिए मुख्य विजेता को पहचानें।

 

Question 16. 'कथयिष्यामि परं पूर्व समयः विधातव्यम्' इति केन उक्तम् ?
Answer: 'मैं कहूँगा, परन्तु पहले शर्त रखनी चाहिए' यह बात शहर के आदमी ने कही। उसने अपनी बात रखने से पहले शर्त तय करने की बात कही।
In simple words: 'मैं कहूँगा, परन्तु पहले शर्त रखनी चाहिए' यह बात शहर के आदमी ने कही।

🎯 Exam Tip: उद्धरणों वाले प्रश्नों में, कथन को कहने वाले व्यक्ति का सटीक उल्लेख करें।

 

Question 17. धूमयानमारुह्य के गच्छन्ति स्म ?
Answer: रेलगाड़ी में बैठकर बहुत-से लोग शहर की ओर जा रहे थे। इस यात्रा में ग्रामीण और शहर के लोग दोनों शामिल थे।
In simple words: रेलगाड़ी में बैठकर बहुत-से लोग शहर की ओर जा रहे थे।

🎯 Exam Tip: 'के' प्रश्नों में, समूह या व्यक्तियों की पहचान करें जो क्रिया कर रहे थे।

 

Question 18. 'ज्ञानं सर्वत्र सम्भवति' इति कः अन्वभवत् ? [2010]
Answer: 'ज्ञान हर जगह संभव है' यह शहर के आदमी ने अनुभव किया। इस घटना के बाद उसे अपनी पहले की गलत धारणा का एहसास हुआ।
In simple words: 'ज्ञान हर जगह संभव है' यह शहर के आदमी ने अनुभव किया।

🎯 Exam Tip: अनुभव से संबंधित प्रश्नों में, उस व्यक्ति का नाम बताएं जिसने वह अनुभव प्राप्त किया।

 

Question 19. ग्रामीणः नागरिकं किम् अपृच्छत्? [2013, 14]
Answer: ग्रामीण ने शहर के आदमी से एक पहेली पूछी। यह पहेली उसके ज्ञान की परीक्षा के लिए थी।
In simple words: ग्रामीण ने शहर के आदमी से एक पहेली पूछी।

🎯 Exam Tip: 'किम् अपृच्छत्' जैसे प्रश्नों में, उस चीज़ का उल्लेख करें जिसे पूछा गया था।

अनुवादात्मक

 

Question 1. निम्नलिखित वाक्यों की संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
(क) रेलगाड़ी में कुछ लोग जा रहे थे।
(ख) ग्रामीण आज भी अशिक्षित हैं।
(ग) हम अशिक्षित और आप शिक्षित हैं।
(घ) मैं तुम्हें दस रुपये दूँगा।
(ङ) अब आप प्रश्न पूछिए।
(च) यह बिना पैर के भी दूर तक जाता है।
(छ) ग्रामीण भी नागरिकों से अधिक बुद्धिमान् होते हैं।
(ज) मैं वाराणसी नगरी जाऊँगा।
(झ) वहाँ जाकर मैं किसी पण्डित से प्रश्न पूँहूँगा।
(ञ) फिर अपने भविष्य पर विचार करूँगा।
Answer:

हिन्दी वाक्यसंस्कृतानुवाद
(क) रेलगाड़ी में कुछ लोग जा रहे थे।रेलयाने केचित् जनाः गच्छन्ति स्म।
(ख) ग्रामीण आज भी अशिक्षित हैं।ग्रामीणाः अद्यापि अशिक्षिताः सन्ति।
(ग) हम अशिक्षित और आप शिक्षित हैं।वयम् अशिक्षिताः भवान् च शिक्षितः अस्ति।
(घ) मैं तुम्हें दस रुपये दूँगा।अहं त्वां दशरूप्यकाणि दास्यामि।
(ङ) अब आप प्रश्न पूछिए।इदानीं भवान् प्रश्नं पृच्छत।
(च) यह बिना पैर के भी दूर तक जाता है।इदं पादेन विना अपि दूरगामी अस्ति।
(छ) ग्रामीण भी नागरिकों से अधिक बुद्धिमान् होते हैं।ग्रामीणाः अपि नागरिकेभ्यः प्रबुद्धतराः भवन्ति।
(ज) मैं वाराणसी नगरी जाऊँगा।अहं वाराणसीं नगरीं गमिष्यामि।
(झ) वहाँ जाकर मैं किसी पण्डित से प्रश्न पूँहूँगा।तत्र गत्वा अहं कस्मिन् पण्डितं प्रश्नं प्रक्ष्यामि।
(ञ) फिर अपने भविष्य पर विचार करूँगा।तत्पश्चात् स्वभविष्यं विचारं करिष्यामि।

In simple words: यहाँ दिए गए हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में सीधा अनुवाद किया गया है, जिसमें प्रत्येक वाक्य के अर्थ को संरक्षित रखा गया है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत अनुवाद करते समय शब्दों के सही लिंग, वचन, कारक और क्रियापदों के लकार का ध्यान रखना आवश्यक है।

प्याराणत्मक

 

Question 1. 'बहु में 'ज्ञः' जोड़कर 'बहुशः' शब्द की रचना की गयी है। इसी प्रकार से 'शः' जोड़कर पाँच अन्य शब्दों की रचना कीजिए।
Answer: 'शः' प्रत्यय जोड़कर बनने वाले पाँच अन्य शब्द इस प्रकार हैं: अल्पज्ञः, विशेषज्ञः, नीतिज्ञः, वेदज्ञः, नेत्रज्ञः। यह प्रत्यय 'जानने वाला' या 'ज्ञात' अर्थ को व्यक्त करता है।
In simple words: 'ज्ञः' प्रत्यय जोड़ने पर अल्पज्ञः, विशेषज्ञः, नीतिज्ञः, वेदज्ञः और नेत्रज्ञः जैसे शब्द बनते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाते समय, मूल शब्द के अर्थ और नए शब्द के बनने वाले अर्थ के बीच की संगति को ध्यान में रखें।

 

Question 2. 'तव्य' एक प्रत्यय है, इसे धातु के साथ चाहिए अर्थ में प्रयुक्त किया जाता है; जैसे- गम् + तव्य = गन्तव्य (जहाँ) जाना चाहिए। कृ + तव्य = कर्त्तव्य (जिसे) करना चाहिए। मन् + तव्य = मन्तव्य (जिसे) मानना चाहिए। इसी प्रकार निम्नलिखित धातुओं में 'तव्य' प्रत्यय जोड़कर नये शब्द बनाइए- दृश, प्राप्, स्था, प, ध्या, पा।
Answer: 'तव्य' प्रत्यय को धातुओं के साथ जोड़कर 'चाहिए' अर्थ वाले शब्द बनाए जाते हैं। यहाँ दिए गए धातुओं से बने नए शब्द इस प्रकार हैं:

धातु + प्रत्ययनया शब्दधातु + प्रत्ययनया शब्द
दृश् + तव्यद्रष्टव्यपठ् + तव्यपठितव्य
प्राप् + तव्यप्राप्तव्यध्या + तव्यध्यातव्य
स्था + तव्यस्थातव्यपा + तव्यपातव्य

In simple words: 'तव्य' प्रत्यय जोड़कर धातुओं से 'चाहिए' अर्थ वाले नए शब्द बनते हैं, जैसे 'दृश्' से 'द्रष्टव्य' (देखना चाहिए)।

🎯 Exam Tip: 'तव्य' प्रत्यय का प्रयोग करते समय, धातु में होने वाले परिवर्तनों (जैसे 'दृश्' का 'द्रष्टव्य' बनना) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. निम्नलिखित शब्दों का सरल संस्कृत-वाक्यों में प्रयोग कीजिए- बहुशः, अल्पः, चतुरः, निर्धनम्, युक्तम्, अयुक्तम्, उत्तरम्, तूष्णीम् ।
Answer: यहाँ दिए गए शब्दों का सरल संस्कृत वाक्यों में प्रयोग किया गया है, जो उनके अर्थ को स्पष्ट करते हैं:

शब्दवाक्य-प्रयोग
बहुज्ञःनागरिकः बहुज्ञः भवति।
अल्पज्ञःग्रामीणः अल्पज्ञः भवति।
चतुरःरामः चतुरः अस्ति।
निर्धनम्निर्धनं पश्य।
युक्तम्युक्तम् अहमेव गच्छामि।
अयुक्तम्तस्य तर्कम् अयुक्तम् अस्ति।

In simple words: दिए गए संस्कृत शब्दों को छोटे और आसान वाक्यों में इस्तेमाल किया गया है ताकि उनका मतलब अच्छे से समझ आ सके।

🎯 Exam Tip: वाक्य प्रयोग करते समय, शब्द के सही अर्थ और व्याकरणिक रूप का ध्यान रखें, और वाक्य को सरल व स्पष्ट रखें।

 

Question 4. 'कृ' धातु के लोट् लकार के रूप लिखिए।
Answer: 'कृ' धातु (करने के अर्थ में) के लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना) के रूप इस प्रकार हैं:

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषकरोतुकुरुताम्कुर्वन्तु
मध्यम पुरुषकुरुकुरुतम्कुरुत
उत्तम पुरुषकरवाणिकरवावकरवाम

In simple words: 'कृ' धातु के लोट् लकार के रूप 'करोतु' (वह करे), 'कुरु' (तुम करो), और 'करवाणि' (मैं करूँ) जैसे होते हैं, जो आज्ञा या प्रार्थना के लिए इस्तेमाल होते हैं।

🎯 Exam Tip: धातुओं के विभिन्न लकारों के रूपों को याद रखना संस्कृत व्याकरण के लिए महत्वपूर्ण है; उन्हें नियमित रूप से दोहराएं।

UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 4 प्रबुद्धो ग्रामिनः

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