UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 12 Ashok Vajpeyi

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Detailed Chapter 12 अशोक वाजपेयी UP Board Solutions for Class 10 Hindi

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Class 10 Hindi Chapter 12 अशोक वाजपेयी UP Board Solutions PDF

कवि-परिचय

 

Question 1. कवि अशोक वाजपेयी का जीवन-परिचय लिखिए और उनकी काव्य-कृतियों (रचनाओं) के नाम लिखिए। [2012, 15, 18]
Answer: अशोक वाजपेयी केवल एक कवि ही नहीं हैं, बल्कि एक गहरे विचारक और आलोचक भी हैं। उनकी कविताएँ आधुनिक जीवन की गहरी समझ और संवेदनशील विचारों को व्यक्त करती हैं। उनका जन्म 16 जनवरी, 1941 को मध्य प्रदेश के दुर्ग नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने सागर विश्वविद्यालय से बी.ए. और सेण्ट स्टीफेन्स कॉलेज, नई दिल्ली से अंग्रेजी में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। सन् 1965 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। मध्य प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में बहुत काम किया। उन्होंने भोपाल में 'भारत भवन' जैसे बहु-आयामी कला केंद्र की स्थापना की और वर्धा में महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पहले कुलपति भी रहे। वे हमेशा नए विचारों और कला रूपों को प्रोत्साहित करते रहे हैं।
विख्यात हिंदी कवि, आलोचक और संपादक अशोक वाजपेयी को 'साहित्य अकादमी पुरस्कार', 'दयावती कवि-शेखर सम्मान' और 'कबीर सम्मान' सहित कई बड़े सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पोलैंड और फ्रांस की सरकारों द्वारा भी अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। वर्तमान में वे 'ललित कला अकादमी' के अध्यक्ष हैं और नई दिल्ली में रहते हुए साहित्य सेवा में लगे हुए हैं।
प्रमुख रचनाएँ:
उनकी 15 कविता-पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें मुख्य हैं: 'शहर अब भी सम्भावना है', 'एक पतंग अनंत', 'अगर इतने से', 'तत्पुरुष', 'कहीं नहीं वहीं', 'बहुरि अकेला', 'इबारत से गिरी मात्राएँ', 'आविन्यो', 'अभी कुछ और', 'समय के पास समय', 'उम्मीद का दूसरा नाम', 'तिनका तिनका', 'थोड़ी-सी जगह', 'घास में दुबका आकाश', 'पुनरपि' तथा 'विवक्षा'।
साहित्य और आलोचना से संबंधित उनकी सात कृतियाँ भी प्रकाशित हुई हैं, जिनमें प्रमुख हैं: 'फिलहाल', 'कुछ पूर्वाग्रह', 'समय से बाहर', 'कविता का गल्प' और 'सिद्धियाँ शुरू हो गयी हैं'।
उनकी कला से संबंधित तीन पुस्तकें अंग्रेजी में भी प्रकाशित हुई हैं। उनकी कविताओं का कई भाषाओं जैसे बांग्ला, मराठी, गुजराती, उर्दू, राजस्थानी, अंग्रेजी, पोलिश और फ्रेंच में अनुवाद किया जा चुका है।
साहित्य में स्थान: अशोक वाजपेयी ने अपनी कविताओं के माध्यम से अपने समय की सच्चाई को गहराई से व्यक्त किया है। उनकी प्रतिभा और कार्य के कारण आधुनिक हिंदी साहित्य में उनका स्थान हमेशा याद किया जाएगा।
In simple words: अशोक वाजपेयी एक प्रसिद्ध कवि, विचारक और आलोचक हैं, जिनका जन्म 1941 में मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में काम किया और कला तथा साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं, और उनकी अनेक कविता व आलोचना की पुस्तकें हैं।

🎯 Exam Tip: जीवन-परिचय लिखते समय मुख्य जन्मतिथि, स्थान, शिक्षा, प्रमुख रचनाएँ और पुरस्कारों को क्रमबद्ध तरीके से लिखना चाहिए।

काव्यगत सौन्दर्य-

  • स्वयं को वृक्षों के रूप में कल्पना करना बहुत खास है।
  • भाषा: बोलचाल की खड़ी बोली है।
  • शैली: प्रतीकात्मक है।
  • रस: शांत है।
  • छंद: अतुकांत और मुक्त है।
  • अलंकार: मानवीकरण है।
  • शब्द-शक्ति: अभिधा और लक्षणा का प्रयोग है।
  • गुण: माधुर्य है।

युवा जंगल

 

Question 1. एक युवा जंगल मुझे,
अपनी हरी उँगलियों से बुलाता है।
मेरी शिराओं में हरा रक्त बहने लगा है।
आँखों में हरी परछाइयाँ फिसलती हैं ।
कन्धों पर एक हरा आकाश ठहरा है।
होठ मेरे एक हरे गान में काँपते हैं - [2013] |
मैं नहीं हूँ और कुछ
बस एक हरा पेड़ हूँ
- हरी पत्तियों की एक दीप्त रचना!

Answer: कवि कहते हैं कि पेड़ों की लगातार कटाई देखकर उनका मन बहुत दुखी होता है, क्योंकि वे चारों ओर हरियाली देखना चाहते हैं। हरियाली और पेड़ उनके जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। एक दिन जब उनकी नज़र एक नए जंगल की ओर जाती है, तो वे उसे देखकर बहुत खुश हो जाते हैं। कवि उस युवा जंगल से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। जब युवा जंगल उन्हें अपनी छोटी-छोटी हरी उंगलियों (शाखाओं) से बुलाता है, तो कवि को महसूस होता है कि उनकी नसों में लाल खून की जगह हरा खून बहने लगा है। ऐसा लगता है जैसे कवि उस समय खुद को एक पौधा मान रहे थे। कवि की आँखों के सामने जो परछाइयाँ आती-जाती दिखती हैं, वे भी हरी दिखाई पड़ती हैं। धीरे-धीरे उन्हें ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने कंधों पर हरे रंग का एक पूरा आकाश उठा रखा है। उनके होंठ हरियाली को देखकर अचानक हरियाली के गाने गाने के लिए गुनगुनाने लगते हैं और अचानक उनके मुंह से निकलता है कि वे अब सिर्फ एक हरे पेड़ हैं। वे हरी पत्तियों से बनी ईश्वर की एक चमकीली रचना हैं। यह कवि का प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव दिखाता है।
In simple words: कवि कहते हैं कि उन्हें एक नया हरा-भरा जंगल बुला रहा है। उन्हें महसूस होता है कि वे खुद एक पेड़ बन गए हैं, उनकी नसों में हरा खून बह रहा है और उनके होंठ हरे गाने गा रहे हैं। वे खुद को हरी पत्तियों से बनी एक खूबसूरत रचना मानते हैं।

🎯 Exam Tip: काव्यांश की व्याख्या करते समय, कवि के मनोभावों और प्राकृतिक तत्वों के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें।

काव्यगत सौन्दर्य-

  • खुद को पेड़ों के रूप में देखना बहुत अनोखा है।
  • भाषा: बोलचाल की खड़ी बोली।
  • शैली: प्रतीकात्मक।
  • रस: शांत।
  • छंद: अतुकांत और मुक्त।
  • अलंकार: मानवीकरण।
  • शब्द-शक्ति: अभिधा और लक्षणा।
  • गुण: माधुर्य।

 

Question 2. ओ जंगल युवा,
बुलाते हो ।
आता हूँ।
एक हरे वसन्त में डूबा हुआ
आऽताऽ हूँ ... ।
सन्दर्भ-पूर्ववत् ।।

Answer: कवि एक नए युवा जंगल से बात करते हुए कहते हैं कि अगर तुम मुझे बुला रहे हो, तो मैं तुम्हारे पास आ रहा हूँ। मैं खुद को पूरी तरह से हरियाली से भरे वसंत में डुबोकर आ रहा हूँ। इसका मतलब यह है कि कवि उस समय खुद को भी एक पेड़ की तरह देख रहे हैं। जब हम किसी से, चाहे वह सजीव हो या निर्जीव, खुद को जोड़कर देखते हैं, तो उनके सुख-दुख हमें अपने ही सुख-दुख जैसे लगते हैं। जब हमारी सोच बड़ी होती है, तो हम खुद को पूरी प्रकृति में और प्रकृति को खुद में समाया हुआ देखते हैं। इसका मतलब है कि कोई अलग चीज नहीं होती, और अगर होती भी है तो वह केवल स्वार्थ है। स्वार्थी व्यक्ति को प्रकृति में सब कुछ अलग-अलग दिखता है, जबकि एक जुड़ा हुआ व्यक्ति एकता महसूस करता है।
In simple words: कवि युवा जंगल से कहते हैं कि अगर तुम बुलाओगे तो मैं आऊँगा। वे खुद को हरे वसंत में डूबा हुआ महसूस करते हैं। कवि का मानना है कि जब हमारी सोच बड़ी होती है, तो हम प्रकृति के साथ एकाकार हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: व्याख्या में "संदर्भ-पूर्ववत्" का मतलब है कि पिछले प्रश्न का संदर्भ ही यहाँ भी लागू होता है। छात्रों को इसे स्पष्ट रूप से समझने की आवश्यकता है।

काव्यगत सौन्दर्य-

  • प्रकृति के साथ एकात्म भाव की कल्पना बहुत अद्भुत है।
  • भाषा: बोलचाल की खड़ी बोली।
  • शैली: प्रतीकात्मक।
  • छंद: अतुकांत और मुक्त।
  • अलंकार: मानवीकरण।
  • गुण: प्रसाद।

भाषा एकमात्र अनन्त है।

 

Question 1. फूल झरता है।
फूल शब्द नहीं!
बच्चा गेंद उछालता है,
सदियों के पार
लोकती है उसे एक बच्ची !

Answer: कवि कहते हैं कि भाषा ही एकमात्र अनंत चीज है, जिसका कभी अंत नहीं होता। एक फूल पेड़ से टूटकर जमीन पर गिरता है, उसकी पंखुड़ियाँ बिखर जाती हैं और आखिर में वह मिट्टी में मिल जाता है। फूल प्रकृति से पैदा होता है और अंत में प्रकृति में ही विलीन हो जाता है। लेकिन फूल की तरह शब्द कभी खत्म नहीं होते। भाषा जो शब्दों से बनती है, वह कभी समाप्त नहीं होती। सदियों बाद भी भाषा का अस्तित्व बना रहता है। यह सच है कि समय के साथ भाषा का रूप बदल सकता है, लेकिन वह कभी खत्म नहीं होती। यह ऐसा ही है जैसे एक बच्चा गेंद उछालता है और दूसरा उसे पकड़कर फिर उछाल देता है। आज अगर किसी ने कोई बात कही है, तो सैकड़ों वर्षों बाद कोई और व्यक्ति भी उसी बात को थोड़े बदले हुए रूप में कह सकता है। इसलिए यह निश्चित है कि भाषा ही एकमात्र अनंत है, जिसका कोई अंत नहीं है। भाषा मानव सभ्यता को पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान और विचारों को हस्तांतरित करती है।
In simple words: कवि कहते हैं कि फूल तो मुरझा जाते हैं, पर शब्द कभी खत्म नहीं होते। जैसे गेंद को एक बच्चा उछालता है और दूसरा पकड़ता है, वैसे ही सदियों से भाषा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती रहती है। भाषा ही एकमात्र ऐसी चीज है जिसका कोई अंत नहीं है।

🎯 Exam Tip: ऐसे काव्यांशों की व्याख्या करते समय, कवि के मुख्य विचार को पहचानें और उदाहरणों के माध्यम से उसे स्पष्ट करें।

काव्यगत सौन्दर्य-

  • भाषा की खासियत का वर्णन किया गया है कि भाषा अनंत है।
  • सदियों पहले की घटनाओं को हमारे सामने लाने का एकमात्र साधन भाषा है।
  • भाषा को अनंत कहकर उसे ईश्वर के समान माना गया है।
  • भाषा: देशज शब्दों से युक्त सहज और सरल खड़ी बोली।
  • शैली: वर्णनात्मक और विवेचनात्मक।
  • छंद: अतुकांत और मुक्त।
  • शब्दशक्ति: अभिधा और लक्षणा।
  • गुण: प्रसाद।

 

Question 2. बूढा गाता है एक पद्म,
दुहराता है दूसरा बूढा,
भूगोल और इतिहास से परे
किसी दालान में बैठा हुआ!
न बच्चा रहेगा,
ने बूढा,
न गेंद, न फूल, न दालान
रहेंगे फिर भी शब्द
भाषा एकमात्र अनन्त है।
सन्दर्भ--पूर्ववत् ।

Answer: कवि कहते हैं कि हमें पुराने समय के ज्ञान इतिहास और भूगोल जैसे विषयों की मदद से मिलते हैं। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब इतिहास और भूगोल भी नहीं लिखे गए थे, तब भी भाषा का अस्तित्व था। उस समय भी कोई एक बूढ़ा व्यक्ति जब कोई गीत गुनगुनाता था, तो घर के किसी दूसरे हिस्से में बैठा कोई और बूढ़ा उसी गीत को या किसी और गीत को गुनगुना उठता था। इसी तरह भाषा आज तक चलती आ रही है। कवि का मतलब है कि भाषा हमेशा किसी न किसी रूप में मौजूद रही है। शब्द हमेशा विचारों और भावनाओं को जीवित रखते हैं।
कवि फिर कहते हैं कि न बच्चा रहेगा, न बूढ़ा; क्योंकि बच्चा एक समय के बाद बूढ़ा हो जाएगा और बूढ़ा अपना जीवन पूरा कर चुका होगा। न गेंद रहेगी, न फूल रहेगा और न ही दालान; क्योंकि ये सभी चीजें खत्म होने वाली हैं। एक न एक दिन सब कुछ समाप्त हो जाएगा। लेकिन इन सबके खत्म होने के बाद भी शब्द बने रहेंगे; क्योंकि शब्द भाषा का ही एक हिस्सा हैं और भाषा ही एकमात्र अनंत है।
In simple words: कवि कहते हैं कि इतिहास और भूगोल से पहले भी भाषा मौजूद थी, जो पीढ़ियों से गीतों और बातों के माध्यम से चलती आ रही है। सारी चीजें, जैसे बच्चे, बूढ़े, गेंद और फूल, खत्म हो जाती हैं, लेकिन शब्द हमेशा बने रहते हैं, क्योंकि भाषा ही अनंत है।

🎯 Exam Tip: काव्यांश की व्याख्या करते समय, कवि के गहरे दार्शनिक विचारों को सरल शब्दों में व्यक्त करें और उनके प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें।

काव्यगत सौन्दर्य-

  • कवि ने भूगोल और इतिहास से पहले भाषा की शक्ति को माना है।
  • भाषा: सरल और सहज शब्दों का प्रयोग है।
  • शैली: विवेचनात्मक।
  • छंद: अतुकांत और मुक्त।
  • शब्दशक्ति: अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
  • भावसाम्य: भाषा का एक हिस्सा होने के कारण शब्द भी अनंत हैं; क्योंकि अनंत का हिस्सा भी अनंत ही होता है। भारतीय उपनिषद् ग्रंथ भी इस बात को मानते हैं।
  • ॐ पूर्णः पूर्णमिदं, पूर्णात् पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय, पूर्ण मेवावशिष्यते ॥

काव्य-सौन्दर्य एवं व्याकरण-बोध

 

Question 1. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार का नाम लिखिए-
(क) एक युवा जंगल मुझे, अपनी हरी उँगलियों से बुलाता है।
(ख) कन्धों पर एक हरा आकाश ठहरा है, होठ मेरे एक हरे गान में काँपते हैं।
(ग) ने गेंद, न फूल, न दालान रहेंगे फिर भी शब्द

Answer:
(क) मानवीकरण: यहाँ जंगल को एक मनुष्य की तरह हरी उँगलियों से बुलाते हुए दिखाया गया है। यह निर्जीव वस्तु को सजीव रूप देना है।
(ख) मानवीकरण: कवि के कंधों पर आकाश का ठहरा होना और होंठों का हरे गान में कांपना, दोनों ही निर्जीव या शरीर के अंगों को मानवीय क्रियाएँ देते हैं।
(ग) अनुप्रास: इस पंक्ति में 'न' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है, जिससे काव्य में सुंदरता आती है।
In simple words: (क) जंगल को इंसान की तरह बुलाते हुए दिखाया गया है, इसलिए यह मानवीकरण है। (ख) कंधों पर आकाश और होंठों पर गान को इंसान जैसी क्रियाएँ देते हुए दिखाया गया है, यह भी मानवीकरण है। (ग) 'न' अक्षर कई बार आया है, इसलिए यह अनुप्रास अलंकार है।

🎯 Exam Tip: मानवीकरण अलंकार तब होता है जब निर्जीव वस्तुओं या अमूर्त विचारों को मानव जैसी विशेषताओं या क्रियाओं के साथ दिखाया जाता है। अनुप्रास अलंकार में एक ही वर्ण की आवृत्ति होती है।

 

Question 2. निम्नलिखित शब्दों के चार-चार पर्यायवाची शब्द लिखिए- आकाश, आँख, पेड़, फूल, जंगल।
Answer: पर्यायवाची शब्द ऐसे शब्द होते हैं जिनका अर्थ समान या मिलता-जुलता होता है। ये भाषा को अधिक समृद्ध बनाते हैं।
आकाश: अन्तरिक्ष, अम्बर, व्योम, नभ
आँख: दृग, लोचन, चक्षु, अक्षि
पेड़: रूख, विटप, द्रुम, पादप
फूल: पुष्प, कुसुम, सुमन, पुहुप
जंगल: विपिन, कानन, अरण्य, वन
In simple words: यहाँ दिए गए शब्दों के चार-चार ऐसे शब्द लिखे गए हैं जिनका अर्थ लगभग एक जैसा है। ये शब्द किसी एक चीज के लिए अलग-अलग नाम होते हैं।

🎯 Exam Tip: पर्यायवाची शब्दों को याद करने से आपकी शब्दावली मजबूत होती है और आप अपनी भाषा में विविधता ला पाते हैं।

UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 12 अशोक वाजपेयी

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