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Detailed Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता एवं असमिकाएँ RBSE Solutions for Class 9 Mathematics
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Class 9 Mathematics Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता एवं असमिकाएँ RBSE Solutions PDF
Question 1. चित्र में AB = AC एवं ∠B = 58° हो तो ∠A का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: त्रिभुज ABC में, हमें दिया गया है कि AB = AC, जिसका अर्थ है कि यह एक समद्विबाहु त्रिभुज है। एक समद्विबाहु त्रिभुज में, समान भुजाओं के सामने के कोण भी समान होते हैं। इसलिए, AB के सामने का कोण ∠C और AC के सामने का कोण ∠B बराबर होंगे।
दिया गया है कि ∠B = 58°।
इसलिए, ∠C भी 58° होगा।
अब, हम जानते हैं कि त्रिभुज के सभी आंतरिक कोणों का योग 180° होता है।
\( \implies \) ∠A + ∠B + ∠C = 180°
\( \implies \) ∠A + 58° + 58° = 180°
\( \implies \) ∠A + 116° = 180°
\( \implies \) ∠A = 180° - 116°
\( \implies \) ∠A = 64°
अतः, ∠A का मान 64° है।
In simple words: एक त्रिभुज में अगर दो भुजाएँ बराबर हों, तो उनके सामने के कोण भी बराबर होते हैं। यहाँ ∠B = 58°, तो ∠C भी 58° होगा। त्रिभुज के तीनों कोणों को जोड़कर 180° आता है, इसलिए ∠A का मान 180° में से 58° और 58° घटाकर 64° मिलेगा।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों और त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म को याद रखें। यह हमेशा सुनिश्चित करें कि आप समान भुजाओं के विपरीत कोणों को सही ढंग से पहचानते हैं।
Question 2. चित्र में AD = BD एवं ∠C = ∠E हो, तो सिद्ध कीजिए BC = AE
Answer: हमें दो त्रिभुजों △ADE और △BDC में BC = AE सिद्ध करना है।
हम निम्नलिखित जानकारी का उपयोग कर सकते हैं:
1. AD = BD (यह प्रश्न में दिया गया है)।
2. ∠ADE = ∠BDC (ये शीर्षाभिमुख कोण हैं, जो हमेशा बराबर होते हैं)।
3. ∠E = ∠C (यह प्रश्न में दिया गया है)।
अब, त्रिभुज △ADE और △BDC पर विचार करें:
\( \implies \) ∠E = ∠C (दिया है)
\( \implies \) ∠ADE = ∠BDC (शीर्षाभिमुख कोण)
\( \implies \) AD = BD (दिया है)
इन तीन शर्तों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि त्रिभुज △ADE, त्रिभुज △BDC के सर्वांगसम है, 'कोण-कोण-भुजा (AAS)' सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके।
\( \implies \) △ADE ≅ △BDC (AAS नियम द्वारा)
जब दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) भी बराबर होते हैं। इसे CPCTC (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग) कहा जाता है।
इसलिए, संगत भुजाएँ बराबर होंगी:
\( \implies \) AE = BC
इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि BC = AE है।
In simple words: चित्र में दिए गए दो त्रिभुजों (ADE और BDC) को देखें। हमें बताया गया है कि दो कोण (∠E और ∠C) बराबर हैं, और एक भुजा (AD और BD) बराबर है। साथ ही, बीच वाले कोण (∠ADE और ∠BDC) भी बराबर हैं क्योंकि वे उल्टे कोण हैं। इन तीन बातों से हम कह सकते हैं कि दोनों त्रिभुज बिल्कुल एक जैसे हैं (सर्वांगसम)। जब त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनकी सभी संगत भुजाएँ और कोण भी बराबर होते हैं। इसलिए, AE और BC भुजाएँ भी बराबर होंगी।
🎯 Exam Tip: सर्वांगसमता सिद्ध करते समय, त्रिभुज के कोणों और भुजाओं को सावधानी से पहचानें। हमेशा शीर्षाभिमुख कोणों और दी गई जानकारी का उपयोग करना सुनिश्चित करें।
Question 3. यदि एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC की माध्यिका AD हो तथा ∠A = 120° एवं AB = AC हो, तो ∠ADB का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें दिया गया है कि त्रिभुज ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC और ∠A = 120° है। AD एक माध्यिका है, जिसका अर्थ है कि यह BC भुजा को दो बराबर भागों में बांटती है (यानी BD = CD)।
अब, त्रिभुज △ADB और त्रिभुज △ADC में विचार करें:
1. AB = AC (यह प्रश्न में दिया गया है)।
2. BD = CD (क्योंकि AD, △ABC की माध्यिका है)।
3. AD = AD (यह दोनों त्रिभुजों की उभयनिष्ठ भुजा है)।
इन तीन शर्तों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि त्रिभुज △ADB, त्रिभुज △ADC के सर्वांगसम है, 'भुजा-भुजा-भुजा (SSS)' सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके।
\( \implies \) △ADB ≅ △ADC (SSS नियम द्वारा)
जब दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनके संगत कोण भी बराबर होते हैं।
\( \implies \) ∠ADB = ∠ADC
हम जानते हैं कि ∠ADB और ∠ADC एक सीधी रेखा पर स्थित कोण हैं (रैखिक कोण-युग्म बनाते हैं)। एक सीधी रेखा पर बने कोणों का योग 180° होता है।
माना ∠ADB = ∠ADC = x।
\( \implies \) x + x = 180°
\( \implies \) 2x = 180°
\( \implies \) x = 90°
अतः, ∠ADB का मान 90° है। एक समद्विबाहु त्रिभुज में, माध्यिका जो शीर्ष कोण से असमान भुजा पर खींची जाती है, वह उस भुजा को समकोण पर काटती है।
In simple words: हमें एक त्रिभुज दिया गया है जिसकी दो भुजाएँ (AB और AC) बराबर हैं, और एक रेखा (AD) नीचे वाली भुजा (BC) को आधे में काटती है। इससे दो छोटे त्रिभुज (ADB और ADC) बनते हैं जो बिलकुल एक जैसे होते हैं। क्योंकि ये त्रिभुज एक जैसे हैं, तो कोण ∠ADB और ∠ADC भी बराबर होंगे। ये दोनों कोण एक सीधी रेखा पर हैं, तो इनका जोड़ 180° होता है। अगर दोनों कोण बराबर हैं और उनका जोड़ 180° है, तो इसका मतलब है कि प्रत्येक कोण 90° का है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि एक समद्विबाहु त्रिभुज में, शीर्ष कोण से खींची गई माध्यिका आधार को लंब समद्विभाजित करती है। सर्वांगसमता नियम (जैसे SSS) का उपयोग करके इसे सिद्ध करना एक महत्वपूर्ण चरण है।
Question 4. यदि त्रिभुज के किसी कोण का समद्विभाजक सम्मुख भुजा को भी समद्विभाजित करता है, तो सिद्ध कीजिए कि त्रिभुज समद्विबाहु होगा।
Answer: माना एक त्रिभुज ABC है।
हमें दिया गया है कि कोण ∠BAC का समद्विभाजक AD, सम्मुख भुजा BC को भी समद्विभाजित करता है। इसका अर्थ है कि AD, ∠BAC को दो बराबर कोणों (∠BAD और ∠CAD) में बांटता है, और D, BC का मध्यबिंदु है (यानी BD = DC)।
हमें सिद्ध करना है कि △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, यानी AB = AC।
**रचना:** AD को E तक इस प्रकार बढ़ायें कि AD = DE हो। फिर E को C से मिलाएँ।
**उपपत्ति:**
अब त्रिभुज △ADB और △EDC में विचार करें:
1. BD = DC (दिया गया है कि AD, BC को समद्विभाजित करता है)।
2. AD = DE (रचना द्वारा)।
3. ∠ADB = ∠EDC (ये शीर्षाभिमुख कोण हैं)।
इसलिए, 'भुजा-कोण-भुजा (SAS)' सर्वांगसमता नियम द्वारा:
\( \implies \) △ADB ≅ △EDC
सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं (CPCTC)। इसलिए:
\( \implies \) AB = EC …(i)
और
\( \implies \) ∠BAD = ∠CED (संगत कोण)
हमें दिया गया है कि AD, ∠A का समद्विभाजक है, जिसका अर्थ है:
\( \implies \) ∠BAD = ∠CAD
इसलिए, ∠CAD = ∠CED (क्योंकि दोनों ∠BAD के बराबर हैं)।
अब, त्रिभुज △AEC में, ∠CAD और ∠CED बराबर हैं। एक त्रिभुज में, समान कोणों के सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
\( \implies \) AC = EC …(ii)
समीकरण (i) और (ii) से, हम देखते हैं कि AB और AC दोनों EC के बराबर हैं।
\( \implies \) AB = AC
अतः, त्रिभुज △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है। इस प्रकार, यदि किसी त्रिभुज का एक कोण समद्विभाजक सम्मुख भुजा को भी समद्विभाजित करता है, तो त्रिभुज समद्विबाहु होता है।
In simple words: हमें एक त्रिभुज दिया है जहाँ एक रेखा (AD) एक कोण को आधे में बांटती है और सामने वाली भुजा को भी आधे में काटती है। हमें दिखाना है कि इस त्रिभुज की दो भुजाएँ (AB और AC) बराबर हैं। इसके लिए, हम AD को आगे E तक बढ़ाते हैं ताकि AD और DE बराबर हों। फिर हम C और E को जोड़ते हैं। हम देखते हैं कि △ADB और △EDC बिल्कुल एक जैसे त्रिभुज हैं। इससे हमें पता चलता है कि AB और EC बराबर हैं। साथ ही, हमें यह भी पता चलता है कि ∠CAD और ∠CED बराबर हैं, जिससे △AEC में AC और EC भी बराबर हो जाते हैं। क्योंकि AB और AC दोनों EC के बराबर हैं, तो AB और AC भी आपस में बराबर होंगे।
🎯 Exam Tip: ऐसे सिद्ध करने वाले प्रश्नों में, अतिरिक्त रचना अक्सर आवश्यक होती है। सर्वांगसमता नियमों का सही उपयोग और संगत भागों की समानता (CPCTC) सिद्ध करने का आधार है।
Question 5. चित्र में, AB = AC एवं BE = CD हो, तो सिद्ध कीजिए AD = AE
Answer: हमें दिया गया है कि त्रिभुज ABC में AB = AC और BE = CD। हमें AD = AE सिद्ध करना है।
चूंकि AB = AC है, तो त्रिभुज ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है। इसलिए, समान भुजाओं के सामने के कोण बराबर होंगे:
\( \implies \) ∠ABC = ∠ACB
अब, हमें दिया गया है BE = CD।
हम दोनों पक्षों में से DE को घटा सकते हैं, क्योंकि DE दोनों खंडों BE और CD में एक सामान्य भाग है:
\( \implies \) BE - DE = CD - DE
\( \implies \) BD = CE …(iii)
अब, त्रिभुज △ABD और △ACE में विचार करें:
1. AB = AC (दिया गया है)।
2. ∠ABD = ∠ACE (या ∠ABC = ∠ACB, जैसा कि ऊपर सिद्ध किया गया है)।
3. BD = CE (जैसा कि ऊपर (iii) में सिद्ध किया गया है)।
इन तीन शर्तों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि त्रिभुज △ABD, त्रिभुज △ACE के सर्वांगसम है, 'भुजा-कोण-भुजा (SAS)' सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके।
\( \implies \) △ABD ≅ △ACE (SAS नियम द्वारा)
जब दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनके संगत भाग भी बराबर होते हैं (CPCTC)।
इसलिए, संगत भुजाएँ बराबर होंगी:
\( \implies \) AD = AE
इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि AD = AE है।
In simple words: हमें एक त्रिभुज दिया है जहाँ AB और AC बराबर हैं, और नीचे वाली रेखा पर BE और CD भी बराबर हैं। हमें यह दिखाना है कि AD और AE भी बराबर हैं। क्योंकि AB और AC बराबर हैं, तो उनके कोण ∠B और ∠C भी बराबर होंगे। अब, चूंकि BE और CD बराबर हैं, और उनमें से एक ही हिस्सा (DE) हटा दिया जाए, तो बाकी के हिस्से (BD और CE) भी बराबर होंगे। अब हम दो छोटे त्रिभुजों (ABD और ACE) को देखते हैं। इनमें AB=AC, ∠B=∠C और BD=CE है। इससे ये दोनों छोटे त्रिभुज बिलकुल एक जैसे (सर्वांगसम) सिद्ध होते हैं। जब त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनकी सभी संगत भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए AD और AE भी बराबर होंगे।
🎯 Exam Tip: ज्यामिति के प्रश्नों में, दिए गए सेगमेंट में से कॉमन हिस्से को घटाने की तकनीक बहुत उपयोगी होती है। साथ ही, समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों का उपयोग करना न भूलें।
Question 6. एक वर्ग ABCD की भुजाओं AD एवं BC पर क्रमशः E एवं F दो बिन्दु इस प्रकार हैं कि AF = BE तो सिद्ध कीजिए कि : (i) ∠BAF = ∠ABE (ii) BF = AE
Answer: हमें एक वर्ग ABCD दिया गया है, जिसमें E भुजा AD पर और F भुजा BC पर स्थित बिंदु हैं। हमें AF = BE दिया गया है। हमें सिद्ध करना है कि (i) ∠BAF = ∠ABE और (ii) BF = AE।
त्रिभुज △ABE और त्रिभुज △BAF पर विचार करें:
1. AB = BA (यह दोनों त्रिभुजों की उभयनिष्ठ भुजा है)।
2. ∠EAB = ∠FBA = 90° (वर्ग के प्रत्येक कोण 90° के होते हैं)।
3. BE = AF (यह प्रश्न में दिया गया है)।
इन तीन शर्तों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि त्रिभुज △ABE, त्रिभुज △BAF के सर्वांगसम है, 'समकोण-कर्ण-भुजा (RHS)' सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके। यहाँ BE और AF कर्ण हैं, और AB भुजा है।
\( \implies \) △ABE ≅ △BAF (RHS नियम द्वारा)
जब दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनके संगत भाग (CPCTC) बराबर होते हैं।
(i) संगत कोण बराबर होंगे:
\( \implies \) ∠BAF = ∠ABE
(ii) संगत भुजाएँ बराबर होंगी:
\( \implies \) AE = BF
इस प्रकार, दोनों भाग सिद्ध होते हैं।
In simple words: हमारे पास एक वर्ग है और उसमें दो रेखाएँ (AF और BE) खींची गई हैं जो बराबर हैं। हमें यह दिखाना है कि दो कोण (∠BAF और ∠ABE) बराबर हैं, और दो भुजाएँ (BF और AE) बराबर हैं। इसके लिए, हम दो त्रिभुजों (ABE और BAF) को देखते हैं। इन दोनों त्रिभुजों में एक भुजा (AB) कॉमन है, दोनों में एक कोण 90° का है, और दोनों के कर्ण (BE और AF) बराबर दिए गए हैं। इसलिए, ये दोनों त्रिभुज बिल्कुल एक जैसे (सर्वांगसम) हैं। जब त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनके बचे हुए कोण और भुजाएँ भी बराबर होती हैं।
🎯 Exam Tip: समकोण त्रिभुजों में सर्वांगसमता सिद्ध करते समय RHS (Right angle-Hypotenuse-Side) नियम को ध्यान में रखें। यह अक्सर उन स्थितियों में लागू होता है जहाँ साधारण SAS या ASA काम नहीं करते।
Question 8. AB = AC वाले एक समद्विबाहु त्रिभुज के कोणों B और C के समद्विभाजक परस्पर O पर प्रतिच्छेद करते हैं। BO को एक बिन्दु M तक बढ़ाया जाता है। सिद्ध कीजिए ∠MOC = ∠ABC है।
Answer: हमें एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC दिया गया है जहाँ AB = AC।
चूंकि AB = AC है, तो इनके सम्मुख कोण भी बराबर होंगे:
\( \implies \) ∠ABC = ∠ACB
BO और CO, क्रमशः ∠B और ∠C के समद्विभाजक हैं। इसका मतलब है कि वे इन कोणों को दो बराबर भागों में बांटते हैं:
\( \implies \) ∠OBC = \( \frac{1}{2} \) ∠ABC
\( \implies \) ∠OCB = \( \frac{1}{2} \) ∠ACB
चूंकि ∠ABC = ∠ACB, तो:
\( \implies \) ∠OBC = ∠OCB
अब, त्रिभुज △OBC में, ∠MOC, ∠OBC का एक बाह्य कोण है (क्योंकि BO को M तक बढ़ाया गया है)। एक त्रिभुज का बाह्य कोण, उसके दोनों आंतरिक सम्मुख कोणों के योग के बराबर होता है।
\( \implies \) ∠MOC = ∠OBC + ∠OCB
जैसा कि हमने ऊपर सिद्ध किया है, ∠OBC = ∠OCB है। इसलिए, हम लिख सकते हैं:
\( \implies \) ∠MOC = ∠OBC + ∠OBC
\( \implies \) ∠MOC = 2∠OBC
हमें पता है कि ∠OBC = \( \frac{1}{2} \) ∠ABC है। इस मान को समीकरण में रखने पर:
\( \implies \) ∠MOC = 2 \( \times \) \( \frac{1}{2} \) ∠ABC
\( \implies \) ∠MOC = ∠ABC
इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि ∠MOC = ∠ABC है। एक त्रिभुज का बाह्य कोण गुणधर्म इसे सरलता से समझने में मदद करता है।
In simple words: एक त्रिभुज में, अगर दो भुजाएँ बराबर हैं, तो उनके सामने वाले कोण भी बराबर होते हैं। यहाँ, ∠B और ∠C बराबर हैं। BO और CO इन कोणों को आधे-आधे में बांटते हैं। रेखा BO को आगे M तक बढ़ाने पर, ∠MOC एक बाहरी कोण बनता है। त्रिभुज के बाहर का यह कोण, अंदर के दो दूर वाले कोणों (∠OBC और ∠OCB) के जोड़ के बराबर होता है। क्योंकि ∠OBC और ∠OCB आधे ∠ABC और आधे ∠ACB के बराबर हैं (और ∠ABC = ∠ACB), तो ∠OBC और ∠OCB भी बराबर होते हैं। इस तरह, ∠MOC इन दोनों कोणों के जोड़ यानी 2 गुणा ∠OBC के बराबर होगा, जो कि ∠ABC के बराबर है।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज के बाह्य कोण गुणधर्म का उपयोग ऐसे प्रश्नों में निर्णायक होता है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एक समद्विबाहु त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं और कोण समद्विभाजक कोणों को आधे में बांटते हैं।
Question 9. रेखा l कोण A को समद्विभाजित करती है और B रेखा l पर स्थित कोई बिन्दु है। BP और BQ कोण A की भुजाओं पर B से डाले गए लम्ब हैं। (देखिए चित्र)। दर्शाइए कि : (i) △APB = △AQB (ii) BP = BQ है, अर्थात्बिन्दु B कोण की भुजाओं से समदूरस्थ है।
Answer: हमें दिया गया है कि रेखा l कोण A को समद्विभाजित करती है, और बिंदु B रेखा l पर स्थित है। BP और BQ, B से कोण A की भुजाओं पर डाले गए लम्ब हैं।
(i) त्रिभुज △APB और त्रिभुज △AQB में विचार करें:
1. ∠APB = ∠AQB = 90° (क्योंकि BP और BQ लम्ब हैं)।
2. ∠PAB = ∠QAB (क्योंकि रेखा l, कोण A को समद्विभाजित करती है, और B, l पर है)।
3. AB = AB (यह दोनों त्रिभुजों की उभयनिष्ठ भुजा है)।
इन तीन शर्तों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि त्रिभुज △APB, त्रिभुज △AQB के सर्वांगसम है, 'कोण-कोण-भुजा (AAS)' सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके।
\( \implies \) △APB ≅ △AQB (AAS नियम द्वारा)
(ii) जब दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनके संगत भाग (CPCTC) बराबर होते हैं।
इसलिए, संगत भुजाएँ बराबर होंगी:
\( \implies \) BP = BQ
इसका अर्थ है कि बिंदु B, कोण A की दोनों भुजाओं से समान दूरी पर है, क्योंकि BP और BQ उन भुजाओं से बिंदु B की लंबवत दूरी को दर्शाते हैं।
In simple words: हमें एक कोण A दिया गया है और एक रेखा (l) है जो इस कोण को दो बराबर हिस्सों में बांटती है। रेखा l पर एक बिंदु B है। बिंदु B से कोण की दोनों भुजाओं पर दो सीधी रेखाएँ (BP और BQ) खींची गई हैं, जो उन भुजाओं पर 90° का कोण बनाती हैं। हमें यह दिखाना है कि दो छोटे त्रिभुज (APB और AQB) बिल्कुल एक जैसे हैं, और BP और BQ की लंबाई बराबर है। त्रिभुज APB और AQB में, दोनों में एक कोण 90° का है, एक कोण (∠PAB और ∠QAB) बराबर है क्योंकि रेखा l कोण A को बांटती है, और भुजा AB दोनों में कॉमन है। इससे वे AAS नियम से सर्वांगसम हो जाते हैं। जब त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, तो उनकी सभी संगत भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए BP और BQ बराबर हैं।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण प्रमेय है जो कहता है कि कोण समद्विभाजक पर स्थित कोई भी बिंदु कोण की भुजाओं से समान दूरी पर होता है। सर्वांगसमता के लिए AAS नियम का उपयोग करना याद रखें।
Question 11. एक समकोण त्रिभुज ABC में, जिसमें कोण C समकोण है, M कर्ण AB का मध्य-बिन्दु है। C को M से मिलाकर D तक इस प्रकार बढ़ाया गया कि DM = CM है। बिन्दु D को बिन्दु B से मिला दिया जाता है (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि : (i) △AMC = △BMD (ii) ∠DBC एक समकोण है। (iii) ADBC = △ACB (iv) CM = \( \frac{1}{2} \) AB
Answer: हमें एक समकोण त्रिभुज ABC दिया गया है, जहाँ ∠C = 90°। M, कर्ण AB का मध्यबिंदु है। C को M से D तक बढ़ाया गया है ताकि DM = CM हो, और D को B से जोड़ा गया है।
(i) त्रिभुज △AMC और त्रिभुज △BMD में विचार करें:
1. AM = BM (क्योंकि M, AB का मध्यबिंदु है)।
2. CM = DM (यह रचना द्वारा दिया गया है)।
3. ∠AMC = ∠BMD (ये शीर्षाभिमुख कोण हैं, जो हमेशा बराबर होते हैं)।
इन तीन शर्तों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि त्रिभुज △AMC, त्रिभुज △BMD के सर्वांगसम है, 'भुजा-कोण-भुजा (SAS)' सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके।
\( \implies \) △AMC ≅ △BMD (SAS नियम द्वारा)
(ii) चूंकि △AMC ≅ △BMD है (भाग (i) से), तो संगत भाग (CPCTC) बराबर होंगे:
\( \implies \) AC = BD
और
\( \implies \) ∠ACM = ∠BDM
ये कोण, AC और BD रेखाओं के लिए CD तिर्यक रेखा द्वारा बनाए गए एकांतर अंतःकोण हैं। चूंकि एकांतर अंतःकोण बराबर हैं, तो रेखाएँ समानांतर होंगी:
\( \implies \) AC || BD
अब, क्योंकि AC || BD है, और BC एक तिर्यक रेखा है, तो BC के एक ही ओर के आंतरिक कोणों का योग 180° होता है:
\( \implies \) ∠DBC + ∠ACB = 180°
हमें दिया गया है कि ∠ACB = 90°। इस मान को समीकरण में रखने पर:
\( \implies \) ∠DBC + 90° = 180°
\( \implies \) ∠DBC = 180° - 90°
\( \implies \) ∠DBC = 90°
इस प्रकार, ∠DBC एक समकोण है।
(iii) त्रिभुज △DBC और त्रिभुज △ACB में विचार करें:
1. BC = CB (यह दोनों त्रिभुजों की उभयनिष्ठ भुजा है)।
2. ∠DBC = ∠ACB = 90° (जैसा कि भाग (ii) में सिद्ध किया गया है और प्रश्न में दिया गया है)।
3. BD = AC (जैसा कि भाग (i) में सर्वांगसमता से सिद्ध किया गया है)।
इन तीन शर्तों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि त्रिभुज △DBC, त्रिभुज △ACB के सर्वांगसम है, 'भुजा-कोण-भुजा (SAS)' सर्वांगसमता नियम का उपयोग करके।
\( \implies \) △DBC ≅ △ACB (SAS नियम द्वारा)
(iv) चूंकि △DBC ≅ △ACB है (भाग (iii) से), तो संगत भाग (CPCTC) बराबर होंगे:
\( \implies \) CD = AB
हमें यह भी पता है कि CM = DM (रचना द्वारा)। इसका मतलब है कि C, M, D एक रेखा पर हैं और M, CD का मध्यबिंदु है।
इसलिए, CD = CM + DM = CM + CM = 2CM।
अब, CD = AB और CD = 2CM को बराबर करने पर:
\( \implies \) 2CM = AB
\( \implies \) CM = \( \frac{1}{2} \) AB
यह दर्शाता है कि समकोण त्रिभुज के कर्ण का मध्यबिंदु, शीर्ष से समान दूरी पर होता है।
In simple words: हमें एक सीधा कोण वाला त्रिभुज (ABC) दिया है, जहाँ कोण C 90° का है। AB रेखा का बीच का बिंदु M है। रेखा CM को D तक बढ़ाया गया है ताकि CM और DM बराबर हों। हमें चार चीजें दिखानी हैं।
(i) सबसे पहले, हम दो छोटे त्रिभुजों (AMC और BMD) को देखते हैं। इन दोनों में दो भुजाएँ (AM=BM और CM=DM) और बीच के कोण (∠AMC=∠BMD) बराबर हैं। इसलिए, ये दोनों त्रिभुज बिल्कुल एक जैसे (सर्वांगसम) हैं।
(ii) चूंकि ये त्रिभुज सर्वांगसम हैं, तो AC और BD भुजाएँ बराबर होंगी और ∠ACM और ∠BDM कोण भी बराबर होंगे। ये कोण बताते हैं कि AC और BD रेखाएँ एक-दूसरे के समानांतर हैं। क्योंकि AC और BD समानांतर हैं, और BC उन्हें काटती है, तो ∠DBC और ∠ACB का जोड़ 180° होगा। चूंकि ∠ACB 90° है, तो ∠DBC भी 90° होगा।
(iii) अब हम दो बड़े त्रिभुजों (DBC और ACB) को देखते हैं। इनमें BC कॉमन भुजा है, दोनों में एक कोण 90° का है (∠DBC और ∠ACB), और BD=AC है (जो हमने पहले सिद्ध किया है)। इसलिए, ये दोनों त्रिभुज भी सर्वांगसम हैं।
(iv) क्योंकि DBC और ACB सर्वांगसम हैं, तो CD और AB भुजाएँ बराबर होंगी। हमें पता है कि CM, CD का आधा है (क्योंकि DM=CM)। तो, CM, AB का भी आधा होगा।
🎯 Exam Tip: यह प्रमेय समकोण त्रिभुजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक भाग पिछले भाग पर निर्भर करता है, इसलिए चरणों को सावधानी से और तार्किक क्रम में पालन करें। एकांतर अंतःकोण और बाह्य कोण गुणों को याद रखें।
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