Official RBSE Solutions for Class 9 Mathematics: Chapter 07 त्रिभुजों की सर्वांगसमता एवं असमिकाए
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Chapter-wise Solutions for Mathematics: Chapter 07 त्रिभुजों की सर्वांगसमता एवं असमिकाए
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बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. किसी त्रिभुज में दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से होता है:
(a) बड़ा
(b) छोटा
(c) बराबर
(d) कोई नहीं
Answer: (a) बड़ा
In simple words: किसी भी त्रिभुज में, किन्हीं भी दो भुजाओं को जोड़ने पर उनका कुल माप हमेशा तीसरी भुजा से अधिक होता है। यह एक त्रिभुज के बनने के लिए बहुत ज़रूरी नियम है।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज बनाने के लिए यह एक मौलिक शर्त है; यदि दो भुजाओं का योग तीसरी से छोटा या बराबर हो, तो त्रिभुज नहीं बन सकता।
Question 2. किसी त्रिभुज में बड़े कोण की सम्मुख भुजा होती है:
(a) बड़ी
(b) छोटी
(c) बराबर
(d) कोई नहीं
Answer: (a) बड़ी
In simple words: त्रिभुज में जो कोण सबसे बड़ा होता है, उसके सामने वाली भुजा भी सबसे लंबी होती है। इसी तरह, सबसे छोटे कोण के सामने सबसे छोटी भुजा होती है।
🎯 Exam Tip: इस नियम को याद रखने से आप आसानी से त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच के संबंध को समझ सकते हैं।
Question 3. किसी त्रिभुज में बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ होती हैं:
(a) बड़ी
(b) छोटी
(c) बराबर
(d) कोई नहीं
Answer: (c) बराबर
In simple words: अगर किसी त्रिभुज में दो कोण एक जैसे हों, तो उन कोणों के सामने वाली भुजाएँ भी एक ही माप की होती हैं। ऐसे त्रिभुज को समद्विबाहु त्रिभुज कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यह समद्विबाहु त्रिभुज की एक महत्वपूर्ण विशेषता है; इसे 'बराबर कोणों के सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं' प्रमेय के रूप में भी जाना जाता है।
Question 5. समकोण त्रिभुज ABC में कोण c समकोण हो, तो बड़ी भुजा होगी :
(a) AB
(b) BC
(c) CA
(d) कोई नहीं
Answer: (a) AB
In simple words: एक समकोण त्रिभुज में, समकोण के ठीक सामने वाली भुजा (जिसे कर्ण कहते हैं) हमेशा सबसे लंबी होती है। यहाँ, कोण C समकोण है, इसलिए उसके सामने वाली भुजा AB सबसे बड़ी होगी।
🎯 Exam Tip: समकोण त्रिभुज में कर्ण हमेशा सबसे लंबी भुजा होती है। इस बात को हमेशा याद रखें।
Question 6. किसी त्रिभुज की दो भुजाओं का अन्तर तीसरी भुजा से होता है:
(a) अधिक
(b) समान
(c) कम
(d) आधा
Answer: (c) कम
In simple words: किसी भी त्रिभुज में, दो भुजाओं की लंबाई का अंतर हमेशा तीसरी भुजा की लंबाई से कम होता है। यह भी त्रिभुज के बनने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त है।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज असमिका के दो नियम हैं: दो भुजाओं का योग तीसरी से अधिक होता है और दो भुजाओं का अंतर तीसरी से कम होता है। दोनों को याद रखें।
Question 7. त्रिभुज के तीनों शीर्षालम्बों का योग उसके परिमाप से होता है :
(a) अधिक
(b) समान
(c) आधा
(d) कम
Answer: (d) कम
In simple words: एक त्रिभुज के तीनों शीर्षालम्बों (ऊँचाइयों) की कुल लंबाई हमेशा उसके परिमाप (सभी भुजाओं का योग) से कम होती है। शीर्षालम्ब त्रिभुज के अंदर होते हैं, इसलिए उनकी कुल लंबाई बाहरी किनारों से कम होगी।
🎯 Exam Tip: शीर्षालम्ब हमेशा त्रिभुज के अंदर या उसकी भुजा पर होते हैं, इसलिए उनकी लंबाई परिमाप से कम होना स्वाभाविक है।
Question 8. चित्र में, यदि AB = BC एवं ∠B = 70°, तो ∠A का मान होगा:
(a) 70°
(b) 40°
(c) 55°
(d) 90°
Answer: (c) 55°
In simple words: क्योंकि AB = BC है, यह एक समद्विबाहु त्रिभुज है। इसलिए, कोण A और कोण C बराबर होंगे। त्रिभुज के सभी कोणों का योग 180° होता है। यदि कोण B 70° है, तो बचे हुए 110° को कोण A और C के बीच बराबर बांटा जाएगा, जिससे प्रत्येक कोण 55° का होगा।
🎯 Exam Tip: समद्विबाहु त्रिभुज में, बराबर भुजाओं के सामने वाले कोण भी हमेशा बराबर होते हैं। यह गुणधर्म अक्सर ऐसे प्रश्नों को हल करने में मदद करता है।
Question 9. एक समद्विबाहु त्रिभुज में, AB = AC तथा ∠B = 45° है, एवं भुजा BA को D तक इस प्रकार बढ़ाया कि AB = AD हो, तो ∠BCD की माप होगी
(a) 70°
(b) 90°
(c) 60°
(d) 45°
Answer: (b) 90°
In simple words: त्रिभुज ABC में, AB = AC और ∠B = 45° है, तो ∠C भी 45° होगा। इसलिए, ∠BAC 90° होगा। क्योंकि AB = AD है, और AB = AC भी है, तो AD = AC होगा। ∠CAD एक सीधा कोण है (180°), इसलिए ∠CAD = 180° - ∠BAC = 180° - 90° = 90°। अब त्रिभुज ADC में, AD = AC और ∠CAD = 90°, तो ∠ACD 45° होगा। अंत में, ∠BCD = ∠BCA + ∠ACD = 45° + 45° = 90°।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों को हल करते समय समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों और त्रिभुज के कोणों के योग के नियम का ध्यान रखें। बहिष्कोण प्रमेय का उपयोग करके भी कोण ज्ञात किए जा सकते हैं।
Question 10. चित्र में, AB = AC एवं ∠ABD = ∠ACD हो, तो △BDC होगा:
(a) समबाहु त्रिभुज
Answer: △BDC एक समद्विबाहु त्रिभुज होगा।
In simple words: क्योंकि AB = AC है, त्रिभुज ABC में ∠ABC = ∠ACB होगा। हमें यह भी दिया गया है कि ∠ABD = ∠ACD। अब, ∠DBC = ∠ABC - ∠ABD और ∠DCB = ∠ACB - ∠ACD। चूंकि ∠ABC = ∠ACB और ∠ABD = ∠ACD, इसका मतलब है कि ∠DBC = ∠DCB। एक त्रिभुज में, यदि दो कोण बराबर हों, तो उनके सामने वाली भुजाएँ भी बराबर होती हैं। इसलिए, BD = CD, और △BDC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज के बराबर कोणों के सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं और बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं – इन दो महत्वपूर्ण प्रमेयों को हमेशा ध्यान में रखें।
Question 12. ABC एक समकोण त्रिभुज है, जिसमें ∠A = 90° और AB = AC है। ∠B और ∠C का मान होगा:
(a) 45°, 45°
(b) 60°, 30°
(c) 30°, 60°
(d) कोई नहीं
Answer: (a) 45°, 45°
In simple words: एक समकोण त्रिभुज में एक कोण 90° का होता है। यदि AB = AC है, तो यह एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज है, जिसका मतलब है कि शेष दो कोण (∠B और ∠C) बराबर होंगे। त्रिभुज के कोणों का कुल योग 180° होता है, तो 180° - 90° = 90° को दोनों बराबर कोणों में बांटा जाएगा, जिससे प्रत्येक कोण 45° का होगा।
🎯 Exam Tip: समकोण त्रिभुज में समकोण के अलावा बाकी दो कोणों का योग 90° होता है। यदि भुजाएँ बराबर हों, तो वे कोण भी बराबर होंगे।
उत्तरमाला
अतिलघूत्तरीय/लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. चित्र में, चतुर्भुज ABCD के ∠ABC = ∠ABD एवं BC = BD हों, तो सिद्ध कीजिए कि △ABC = ∆ABD
Answer:
दिया है: चित्र में, ∠ABC = ∠ABD और BC = BD है।
सिद्ध करना है: △ABC ≅ △ABD
उपपत्ति: △ABC और △ABD में,
\( BC = BD \) (यह दिया गया है)
\( \angle ABC = \angle ABD \) (यह भी दिया गया है)
\( AB = AB \) (यह दोनों त्रिभुजों में उभयनिष्ठ भुजा है)
इसलिए, भुजा-कोण-भुजा (SAS) सर्वांगसमता नियम से, △ABC ≅ △ABD सिद्ध होता है। इस नियम का उपयोग तब किया जाता है जब दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण बराबर हों।
In simple words: हमें दो त्रिभुज दिए गए हैं जिनकी एक भुजा (BC और BD) बराबर है, उनके बीच का कोण (∠ABC और ∠ABD) बराबर है, और एक और भुजा (AB) दोनों में समान है। इसलिए, SAS नियम का उपयोग करके, हम कह सकते हैं कि दोनों त्रिभुज एक जैसे हैं।
🎯 Exam Tip: SAS सर्वांगसमता नियम का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि बराबर कोण, बराबर भुजाओं के बीच का ही कोण हो।
Question 2. निम्न आकृति में, △ABC में, AB = AC, BE और CF क्रमशः ∠B और ∠C के समद्विभाजक हैं। सिद्ध कीजिए कि △EBC = AFCB
Answer:
दिया है: △ABC में, AB = AC है। BE और CF क्रमशः ∠B और ∠C के कोण समद्विभाजक हैं।
सिद्ध करना है: △EBC ≅ △FCB
उपपत्ति: △ABC में, AB = AC (यह दिया गया है)
\( \implies \angle B = \angle C \) (बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं)
\( \implies \frac { 1 }{ 2 } \angle B = \frac { 1 }{ 2 } \angle C \) (दोनों पक्षों को 2 से भाग देने पर)
चूंकि BE, ∠B को समद्विभाजित करता है और CF, ∠C को समद्विभाजित करता है,
\( \implies \angle EBC = \angle FCB \) (क्योंकि ये \( \angle B \) और \( \angle C \) के आधे हैं और \( \angle B = \angle C \) है)
अब, △EBC और △FCB में,
\( \angle EBC = \angle FCB \) (ऊपर सिद्ध किया गया)
\( BC = BC \) (यह उभयनिष्ठ भुजा है)
\( \angle ECB = \angle FBC \) (क्योंकि \( \angle B = \angle C \) है, तो उनके बड़े कोण भी बराबर होंगे)
इसलिए, कोण-भुजा-कोण (ASA) सर्वांगसमता गुणधर्म से, △EBC ≅ △FCB सिद्ध होता है। ASA नियम दो कोणों और उनके बीच की भुजा की समानता पर आधारित है।
In simple words: त्रिभुज ABC में, दो भुजाएँ AB और AC बराबर हैं, इसलिए उनके सामने वाले कोण ∠B और ∠C भी बराबर होंगे। उनके आधे कोण (जब BE और CF उन्हें काटते हैं) भी बराबर होंगे। अब हम दो छोटे त्रिभुजों △EBC और △FCB को देखते हैं। इन दोनों त्रिभुजों में एक कोण (∠EBC और ∠FCB) बराबर है, एक भुजा (BC) समान है, और दूसरा कोण (∠C और ∠B) बराबर है। इसलिए, ASA नियम से, ये दोनों त्रिभुज एक जैसे हैं।
🎯 Exam Tip: कोण समद्विभाजक से बने कोणों का सही से उपयोग करना सीखें और ध्यान दें कि ASA सर्वांगसमता के लिए कौन से कोण और भुजाएँ आवश्यक हैं।
Question 3. दी गई आकृति में, △ABC समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है। BD और CE त्रिभुज की दो माध्यिकाएँ हैं। सिद्ध कीजिये की BD = CE
Answer:
दिया है: △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है। BD भुजा AC की माध्यिका है और CE भुजा AB की माध्यिका है।
सिद्ध करना है: \( BD = CE \)
उपपत्ति: चूंकि AB = AC दिया गया है, और BD व CE माध्यिकाएँ हैं, तो E, AB का मध्य-बिंदु है और D, AC का मध्य-बिंदु है।
इसलिए, \( AE = EB = \frac { 1 }{ 2 } AB \) और \( AD = DC = \frac { 1 }{ 2 } AC \)
क्योंकि \( AB = AC \), तो \( \frac { 1 }{ 2 } AB = \frac { 1 }{ 2 } AC \)
इससे \( AE = AD \) और \( EB = DC \) सिद्ध होता है।
अब, △BCE और △CBD में,
\( EB = DC \) (ऊपर सिद्ध किया गया)
\( \angle EBC = \angle DCB \) (क्योंकि AB = AC, तो ∠B = ∠C)
\( BC = CB \) (यह उभयनिष्ठ भुजा है)
इसलिए, भुजा-कोण-भुजा (SAS) सर्वांगसमता नियम से, △BCE ≅ △CBD सिद्ध होता है। इस सर्वांगसमता के आधार पर, संगत भाग बराबर होते हैं।
अतः, CPCTC (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग) से, \( CE = BD \) सिद्ध होता है। माध्यिकाएँ त्रिभुज के केंद्रक से होकर गुजरती हैं, जो एक महत्वपूर्ण ज्यामितीय बिंदु है।
In simple words: एक त्रिभुज ABC है जहाँ AB और AC बराबर हैं। BD और CE इसकी माध्यिकाएँ हैं, जिसका मतलब है कि E, AB का बीच का बिंदु है और D, AC का बीच का बिंदु है। क्योंकि AB और AC बराबर हैं, तो उनके आधे हिस्से AE, EB, AD, DC भी आपस में बराबर होंगे। साथ ही, त्रिभुज के कोण ∠B और ∠C भी बराबर होंगे। अब, हम दो त्रिभुजों BCE और CBD को देखते हैं। इन दोनों में EB = DC, ∠B = ∠C और BC उभयनिष्ठ भुजा है। इसलिए, ये SAS नियम से एक जैसे हैं, और उनकी संगत भुजाएँ BD और CE भी बराबर होंगी।
🎯 Exam Tip: माध्यिकाएँ सामने वाली भुजा के मध्य-बिंदु तक जाती हैं। समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों का उपयोग करना याद रखें कि बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
Question 4. आकृति में, PR > PQ है और PS कोण PPR को समद्विभाजित करती है। सिद्ध कीजिए कि ∠PSR > ∠PSQ है।
Answer:
दिया है: △PQR में, PR > PQ है और PS, ∠QPR को समद्विभाजित करती है।
सिद्ध करना है: ∠PSR > ∠PSQ है।
उपपत्ति: △PQR में, PR > PQ दिया है।
\( \implies \angle PQR > \angle PRQ \) (त्रिभुज में, बड़ी भुजा के सम्मुख कोण बड़ा होता है)
चूंकि PS, ∠QPR का समद्विभाजक है, तो \( \angle QPS = \angle RPS \). मान लीजिए \( \angle QPS = \angle RPS = x \).
△PSQ में, ∠PSR एक बहिष्कोण है (बाहरी कोण)।
\( \implies \angle PSR = \angle PQS + \angle QPS \) (बहिष्कोण प्रमेय से)
\( \implies \angle PSR = \angle PQR + x \) (समीकरण i)
इसी प्रकार, △PSR में, ∠PSQ एक बहिष्कोण है।
\( \implies \angle PSQ = \angle PRS + \angle RPS \) (बहिष्कोण प्रमेय से)
\( \implies \angle PSQ = \angle PRQ + x \) (समीकरण ii)
हमें पता है कि \( \angle PQR > \angle PRQ \).
समीकरण (i) और (ii) से, क्योंकि \( \angle PQR + x \) में \( \angle PQR \) बड़ा है, तो \( \angle PSR \) भी \( \angle PSQ \) से बड़ा होगा।
इसलिए, \( \angle PSR > \angle PSQ \) सिद्ध होता है। त्रिभुज के कोणों और भुजाओं के बीच यह संबंध ज्यामिति का आधार है।
In simple words: त्रिभुज PQR में, हमें पता है कि भुजा PR, भुजा PQ से लंबी है। इसका मतलब है कि PR के सामने वाला कोण (∠PQR) PQ के सामने वाले कोण (∠PRQ) से बड़ा होगा। PS, कोण QPR को दो बराबर हिस्सों में बांटता है। अब, त्रिभुज PSQ में, ∠PSR एक बाहरी कोण है, तो यह दूर के दो अंदरूनी कोणों (∠PQS और ∠QPS) के बराबर होगा। इसी तरह, त्रिभुज PSR में, ∠PSQ एक बाहरी कोण है, तो यह (∠PRS और ∠RPS) के बराबर होगा। क्योंकि ∠PQR, ∠PRQ से बड़ा है, तो ∠PSR, ∠PSQ से बड़ा होगा।
🎯 Exam Tip: त्रिभुज में बड़ी भुजा के सम्मुख बड़ा कोण होता है और बहिष्कोण प्रमेय (बाहरी कोण दूर के आंतरिक कोणों के योग के बराबर होता है) का सही उपयोग करना सीखें।
Question 6. ABC एक त्रिभुज है। जिसमें AC और AB पर खींचे गए शीर्षलम्ब BE और CF बराबर हैं। (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि
(i) △ABE ≅ △ACF
(ii) AB = AC अर्थात △ABC समद्विबाहु त्रिभुज है।
Answer:
दिया है: △ABC एक त्रिभुज है जिसमें AC पर खींचा गया शीर्षलम्ब BE और AB पर खींचा गया शीर्षलम्ब CF बराबर हैं (अर्थात BE = CF)।
सिद्ध करना है:
(i) △ABE ≅ △ACF
(ii) AB = AC, अर्थात △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
उपपत्ति:
(i) △ABE और △ACF में,
\( \angle AEB = \angle AFC \) (प्रत्येक कोण 90° का है क्योंकि BE और CF शीर्षलम्ब हैं)
\( \angle BAE = \angle CAF \) (यह कोण A दोनों त्रिभुजों में उभयनिष्ठ है)
\( BE = CF \) (यह दिया गया है)
इसलिए, कोण-कोण-भुजा (AAS) सर्वांगसमता नियम से, △ABE ≅ △ACF सिद्ध होता है। इस नियम में दो कोण और एक गैर-समाहित भुजा की समानता देखी जाती है।
(ii) चूंकि △ABE ≅ △ACF (भाग (i) में सिद्ध किया गया है),
तो सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग (CPCTC) से,
\( AB = AC \)
यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ बराबर होती हैं, तो वह समद्विबाहु त्रिभुज कहलाता है।
अतः, △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है। यह एक महत्वपूर्ण ज्यामितीय संबंध है।
In simple words: हमें एक त्रिभुज ABC दिया गया है जहाँ दो ऊँचाईयाँ (BE और CF) बराबर हैं। पहले, हम दो छोटे त्रिभुजों △ABE और △ACF को देखेंगे। इन दोनों में एक कोण 90° का है (क्योंकि ये ऊँचाईयाँ हैं), कोण A दोनों में समान है, और एक भुजा (BE और CF) बराबर है। इसलिए, AAS नियम का उपयोग करके, हम कह सकते हैं कि ये दोनों त्रिभुज एक जैसे हैं। जब दो त्रिभुज एक जैसे होते हैं, तो उनकी सभी संगत भुजाएँ भी बराबर होती हैं। इसलिए, AB और AC बराबर होंगे, जिसका मतलब है कि △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
🎯 Exam Tip: AAS सर्वांगसमता नियम का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि बराबर भुजा, बराबर कोणों के बीच वाली भुजा नहीं है। CPCTC का उपयोग करके संगत भागों की समानता सिद्ध करना भी महत्वपूर्ण है।
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