RBSE Solutions Class 6 Science Chapter 2 सजीव जगत में विविधता

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Detailed Chapter 2 सजीव जगत में विविधता RBSE Solutions for Class 6 Science

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Class 6 Science Chapter 2 सजीव जगत में विविधता RBSE Solutions PDF

 

प्रश्न 1. यहाँ दो प्रकार के बीज दिए गए हैं। आप इनके पौधों की जड़ों और पत्तियों के शिरा-विन्यास में क्या अंतर पाते हैं?
Answer: गेहूँ एक बीजपत्री पौधा है जिसमें झकड़ा (रेशेदार) जड़ें होती हैं। इसकी पत्तियों में शिराएँ एक-दूसरे के समांतर होती हैं। वहीं, राजमा एक द्विबीजपत्री पौधा है जिसमें मूसला जड़ें होती हैं और इसकी पत्तियों में जाली जैसा शिरा-विन्यास पाया जाता है। हर पौधे की जड़ और पत्ती का पैटर्न उसे अलग तरह से बढ़ने में मदद करता है।
In simple words: गेहूँ के पौधे में रेशेदार जड़ें होती हैं और पत्तियों में सीधी शिराएँ होती हैं, जबकि राजमा के पौधे में मूसला जड़ें और पत्तियों में जाली जैसी शिराएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: जड़ के प्रकार और पत्ती के शिरा-विन्यास को बीज के प्रकार से जोड़कर याद रखें: एकबीजपत्री में रेशेदार जड़ें और समांतर शिरा-विन्यास, द्विबीजपत्री में मूसला जड़ें और जालिकावत शिरा-विन्यास।

 

प्रश्न 2. नीचे कुछ जंतुओं के नाम दिए गए हैं, उनके आवास के आधार पर समूह बनाएँ। चिह्नांकित खंड 'क' में जलीय जंतुओं और चिह्नांकित खंड 'ख' में थलीय जंतुओं के नाम लिखिए। खंड 'ग' में दोनों आवासों में रहने वाले जंतुओं के नाम लिखिए। घोड़ा, डॉल्फिन, मेंढक, भेड़, मगरमच्छ, गिलहरी, व्हेल, केंचुआ, कबूतर, कछुआ

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Answer: दिए गए जंतुओं को उनके रहने की जगह के हिसाब से बांटा गया है: खण्ड 'क' के जन्तु (जो सिर्फ पानी में रहते हैं): 1. डॉल्फिन 2. व्हेल खण्ड 'ख' के जन्तु (जो सिर्फ जमीन पर रहते हैं): 1. घोड़ा 2. भेड़ 3. गिलहरी 4. केंचुआ 5. कबूतर खण्ड 'ग' के जन्तु (जो पानी और जमीन दोनों पर रह सकते हैं): 1. मेंढक 2. मगरमच्छ 3. कछुआ यह विभाजन हमें अलग-अलग जीवों के अनुकूलन को समझने में मदद करता है।
In simple words: पानी में रहने वाले जीव डॉल्फिन और व्हेल हैं। जमीन पर रहने वाले जीव घोड़ा, भेड़, गिलहरी, केंचुआ और कबूतर हैं। जो पानी और जमीन दोनों पर रहते हैं वे मेंढक, मगरमच्छ और कछुआ हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में सभी जीवों को ध्यान से वर्गीकृत करें और याद रखें कि 'उभयचर' वो होते हैं जो जल और थल दोनों पर रह सकते हैं।

 

प्रश्न 3. मनु की माँ की एक शाक वाटिका (किचन गार्डन) है। एक दिन वह मिट्टी से मूली उखाड़ रही थीं। उन्होंने मनु को बताया कि मूली एक प्रकार की जड़ है। एक मूली को सावधानीपूर्वक देखें और लिखें कि वह किस प्रकार की जड़ है? मूली के पौधे की पत्तियों में आपको किस प्रकार का शिरा – विन्यास दिखाई देगा?
Answer: मूली एक मूसला जड़ का उदाहरण है। यह मोटी होती है और इसमें से पतली, छोटी शाखाएँ निकलती हैं। मूली के पौधे की पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास पाया जाता है, जहाँ शिराएँ एक जाल जैसा पैटर्न बनाती हैं। यह शिरा-विन्यास पानी और पोषक तत्वों को पत्ती के सभी हिस्सों तक पहुँचाने में मदद करता है।
In simple words: मूली की जड़ मूसला जड़ होती है, और मूली के पत्तों में जाली जैसी शिराएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: मूसला जड़ों में एक मुख्य जड़ होती है और पत्ती में जाली जैसी शिराएँ होती हैं। रेशेदार जड़ों में एक जैसी कई जड़ें होती हैं और पत्ती में समांतर शिराएँ होती हैं।

 

प्रश्न 4. पर्वतीय और मैदानी बकरी में क्या समानताएं और अंतर हैं, और इन अंतरों के क्या कारण हैं?
Answer: पर्वतीय और मैदानी बकरियों में कुछ समानताएँ और अंतर पाए जाते हैं। समानताएँ: 1. दोनों के शरीर पर बाल होते हैं। 2. दोनों में चलने के लिए खुर वाले पैर होते हैं। अंतर:

पर्वतीय बकरीमैदानी बकरी
(i) इनके शरीर पर लंबे, घने बाल होते हैं।(i) इनके शरीर पर छोटे बाल होते हैं।
(ii) इनके कान छोटे होते हैं।(ii) इनके कान लंबे होते हैं।
(iii) इनके पैर के खुर बहुत मजबूत होते हैं ताकि ये पथरीले रास्तों पर आसानी से चल सकें।(iii) इनके पैर के खुर उतने मजबूत नहीं होते हैं।
इन अंतरों का मुख्य कारण इनके आवासों में भिन्नता है। पर्वतीय बकरियाँ ठंडे और चट्टानी इलाकों में रहती हैं, जबकि मैदानी बकरियाँ समतल और गर्म इलाकों में रहती हैं। यह प्रकृति उन्हें अपने वातावरण में बेहतर ढंग से जीने में मदद करती है।
In simple words: दोनों बकरियों के शरीर पर बाल होते हैं और खुर होते हैं। पर्वतीय बकरियों के बाल लंबे, कान छोटे और खुर मजबूत होते हैं, जबकि मैदानी बकरियों के बाल छोटे, कान लंबे और खुर कम मजबूत होते हैं। ये अंतर उनके रहने की जगह (ठंड या गर्मी, पहाड़ या मैदान) के कारण होते हैं।

🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में हमेशा समानताएँ और अंतर दोनों लिखें, और यदि संभव हो तो कारणों का भी उल्लेख करें।

 

प्रश्न 5. पाठ में चर्चा की गई विशेषताओं के अतिरिक्त किसी अन्य विशेषता के आधार पर निम्नलिखित जंतुओं के दो समूह बनाएँ – गाय, तिलचट्टा (कॉकरोच), कबूतर, चमगादड़, व्हेल, कछुआ, मछली, टिड्डा, छिपकली।
Answer: हम इन जंतुओं को उनके चलने या उड़ने की क्षमता के आधार पर दो समूहों में बाँट सकते हैं: समूह 1: जो उड़ सकते हैं या तैर सकते हैं (गति के लिए विशेष अनुकूलन): * कबूतर (उड़ना) * चमगादड़ (उड़ना) * व्हेल (तैरना) * मछली (तैरना) समूह 2: जो जमीन पर चलते या रेंगते हैं: * गाय (चलना) * तिलचट्टा (चलना/रेंगना) * कछुआ (चलना/तैरना) * टिड्डा (कूदना/उड़ना) * छिपकली (रेंगना) यह तरीका हमें जीवों की गति के अनुकूलन को समझने में मदद करता है।
In simple words: हम जीवों को उनके चलने या उड़ने के तरीके के अनुसार दो समूह में बाँट सकते हैं। एक समूह में वो हैं जो उड़ते या तैरते हैं, और दूसरे समूह में वो हैं जो जमीन पर चलते या रेंगते हैं।

🎯 Exam Tip: जीवों का वर्गीकरण करते समय, आप उनकी भोजन की आदत, शारीरिक बनावट या गति के तरीके जैसे कई आधारों का उपयोग कर सकते हैं।

 

प्रश्न 6. जनसंख्या के बढ़ने और मनुष्यों द्वारा अधिक सुविधाजनक जीवन की चाह में विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों की कटाई की जा रही है। यह हमारे आस-पास के परिवेश को कैसे प्रभावित कर सकता है? आपके विचार से हम इस चुनौती का निदान कैसे कर सकते हैं?
Answer: जनसंख्या बढ़ने और सुविधाजनक जीवन की चाहत में वनों की कटाई से हमारे आसपास के वातावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है। वनों की कटाई से वन्य जीवों के घर, भोजन और अन्य ज़रूरी चीज़ें कम होती जा रही हैं। इन सभी का बुरा नतीजा जैव विविधता में कमी के रूप में दिखाई दे रहा है। हम इस समस्या को रोकने के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं: 1. जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए। 2. वन संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करना चाहिए। 3. वनों को समुदाय के साथ मिलकर पवित्र उपवनों की तरह बचाना चाहिए। 4. जिन जगहों पर पहले जंगल थे, वहाँ नए पेड़ लगाकर जंगल को फिर से उगाना चाहिए। जंगलों को बचाना हमारे पर्यावरण और सभी जीवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: बढ़ती आबादी और आरामदायक जीवन के लिए जंगल काटे जा रहे हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है और जानवरों के घर व भोजन कम हो रहे हैं, जिससे जैव विविधता घट रही है। इसे रोकने के लिए हमें जनसंख्या नियंत्रण करना चाहिए, वनों का सही उपयोग करना चाहिए, जंगलों को बचाना चाहिए और नए पेड़ लगाने चाहिए।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण संबंधी समस्याओं के समाधान हमेशा व्यवहारिक और बहुआयामी होने चाहिए, जिसमें व्यक्तिगत और सामुदायिक प्रयास दोनों शामिल हों।

 

प्रश्न 7. फ्लोचार्ट का विश्लेषण करें। इसमें 'क' और 'ख' के कौन-कौन से उदाहरण हो सकते हैं?
पौधा
   ↓ हाँ
क्या इसमें पत्तियाँ हैं?
   ↓ हाँ
क्या इसमें जालिकारूपी शिरा-विन्यास है
   ↓ हाँ

   ↓ नहीं

Answer: दिए गए फ्लोचार्ट के अनुसार: 'क' ऐसे पौधे हैं जिनमें पत्तियाँ होती हैं और पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है। 'ख' ऐसे पौधे हैं जिनमें पत्तियाँ तो होती हैं, लेकिन उनमें जालिकारूपी शिरा-विन्यास नहीं होता (अर्थात उनमें समांतर शिरा-विन्यास होता है)। 'क' के उदाहरण: आम, गुड़हल, राजमा, मूली 'ख' के उदाहरण: गेहूँ, मक्का, घास, केला यह फ्लोचार्ट हमें पौधों को उनकी पत्तियों की विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत करने में मदद करता है।
In simple words: 'क' उन पौधों के उदाहरण हैं जिनकी पत्तियों में जाली जैसी नसें होती हैं, जैसे आम और गुड़हल। 'ख' उन पौधों के उदाहरण हैं जिनकी पत्तियों में सीधी नसें होती हैं, जैसे गेहूँ और मक्का।

🎯 Exam Tip: पौधों के वर्गीकरण में पत्तियों का शिरा-विन्यास और जड़ों का प्रकार बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

प्रश्न 8. राज अपने मित्र संजय से तर्क करता है, "गुड़हल का पौधा एक झाड़ी है।” संजय इसके स्पष्टीकरण के लिए कौन से प्रश्न पूछ सकता है?
Answer: संजय यह जानने के लिए कि गुड़हल का पौधा एक झाड़ी है, राज से निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकता है: 1. क्या गुड़हल का पौधा मुझसे छोटा है, मेरी बराबर ऊँचाई का है या मुझसे अधिक ऊँचा है? 2. गुड़हल के तने का रंग भूरा है या हरा है? 3. क्या गुड़हल के तने को आसानी से मोड़ा जा सकता है या वह कठोर है? 4. गुड़हल के पौधे की शाखाएँ जमीन के पास से निकलती हैं या तने के ऊपरी हिस्से से निकलती हैं? ये प्रश्न पौधे के आकार, तने के रंग, कठोरता और शाखाओं के निकलने के स्थान को समझने में मदद करते हैं, जो झाड़ी की विशेषताओं को जानने के लिए ज़रूरी हैं।
In simple words: संजय पूछ सकता है कि गुड़हल कितना ऊँचा है, उसके तने का रंग क्या है, वह कठोर है या लचीला, और उसकी शाखाएँ कहाँ से निकलती हैं, यह जानने के लिए कि वह झाड़ी है या नहीं।

🎯 Exam Tip: पौधों को शाक, झाड़ी या वृक्ष में वर्गीकृत करने के लिए उनके तने की कठोरता, शाखाओं के निकलने का स्थान और कुल ऊँचाई मुख्य मापदंड होते हैं।

 

प्रश्न 9. तालिका में कुछ आँकड़े दिए गए हैं। आँकड़ों के के आधार पर इन पौधों के उदाहरण का पता समूह लगाडा

समूहबीज का प्रकारजड़ का प्रकारउदाहरण
द्विबीजपत्रीमूसला जड़
एकबीजपत्रीझकड़ा जड़
(I) समूह 'क' के पौधों में और क्या समानताएँ हैं?
(II) समूह 'ख' के पौधों में और क्या समानताएँ हैं?
Answer: तालिका में दिए गए आँकड़ों के आधार पर पौधों के उदाहरण और समानताएँ इस प्रकार हैं: समूह 'क' के उदाहरण: आम, चना, राजमा, मूली समूह 'ख' के उदाहरण: गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा, घास (I) समूह 'क' के पौधों में एक और समानता है कि इनकी पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास पाया जाता है। (II) समूह 'ख' के पौधों में एक और समानता है कि इनकी पत्तियों में समांतर शिरा-विन्यास पाया जाता है। यह वर्गीकरण हमें पौधों की संरचनात्मक विशेषताओं को समझने में सहायता करता है।
In simple words: समूह 'क' में आम और चना जैसे पौधे हैं जिनकी पत्तियों में जाल जैसी नसें होती हैं। समूह 'ख' में गेहूँ और चावल जैसे पौधे हैं जिनकी पत्तियों में सीधी नसें होती हैं।

🎯 Exam Tip: द्विबीजपत्री पौधों में मूसला जड़ और जालिकावत शिरा-विन्यास होता है, जबकि एकबीजपत्री पौधों में रेशेदार जड़ और समांतर शिरा-विन्यास होता है।

 

प्रश्न 10. नीचे दिए गए चित्र में बत्तख के नामांकित भाग को देखें। बत्तख के पंजों में अन्य पक्षियों की तुलना में आपको क्या भिन्नता दिखाई देती है? बत्तख अपने इस भाग का उपयोग करके कौन- सी गतिविधि करने में सक्षम होगी?
Answer: अन्य पक्षियों की तुलना में बत्तख के पंजों में झिल्लीयुक्त पंजे (webbed feet) होते हैं। ये झिल्लीदार पंजे पतवार की तरह काम करते हैं और बत्तख को पानी में आसानी से तैरने में मदद करते हैं। यह उसकी जलीय जीवनशैली के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
In simple words: बत्तख के पंजों में झिल्ली होती है, जिससे वह पानी में आसानी से तैर पाती है। दूसरे पक्षियों के पंजे ऐसे नहीं होते।

🎯 Exam Tip: जीवों में शारीरिक अनुकूलन उनके विशेष आवास और जीवनशैली के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

 

RBSE Class 6 Science Chapter 2 Important Questions In Hindi

 

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. जैव विविधता में शामिल होते हैं-
(अ) पौधे
(ब) जंतु
(स) पौधे व जंतु
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) पौधे व जंतु
In simple words: जैव विविधता का मतलब है एक जगह पर पाए जाने वाले सभी तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु।

🎯 Exam Tip: जैव विविधता एक व्यापक शब्द है जिसमें किसी भी क्षेत्र के सभी जीवित प्राणी शामिल होते हैं।

 

प्रश्न 2. 'झाड़ी' का उदाहरण है-
(अ) आम
(ब) गुलाब
(स) टमाटर
(द) चना
Answer: (ब) गुलाब
In simple words: गुलाब का पौधा झाड़ी कहलाता है क्योंकि इसका तना कठोर और शाखाएँ जमीन के पास से निकलती हैं।

🎯 Exam Tip: झाड़ियाँ मध्यम आकार के पौधे होते हैं जिनके तने शाखाओं के रूप में जमीन के करीब से निकलते हैं।

 

प्रश्न 4. मूसला जड़ पाई जाती है.
(अ) चने में
(ब) गेहूँ में
(स) मक्का में
(द) चावल में
Answer: (अ) चने में
In simple words: चने के पौधे में मूसला जड़ होती है, जिसमें एक मोटी मुख्य जड़ होती है।

🎯 Exam Tip: द्विबीजपत्री पौधों में आमतौर पर मूसला जड़ें पाई जाती हैं, जबकि एकबीजपत्री पौधों में रेशेदार जड़ें होती हैं।

 

प्रश्न 5. एकबीजपत्री पादप की विशेषता है-
(अ) दो बीजपत्र
(ब) जालिकावत शिरा विन्यास
(स) मूसला जड़
(द) झकड़ा जड़
Answer: (द) झकड़ा जड़
In simple words: एकबीजपत्री पौधों की जड़ें रेशेदार होती हैं, जिनमें कोई एक मुख्य जड़ नहीं होती।

🎯 Exam Tip: एकबीजपत्री पौधों की पहचान उनके एक बीजपत्र, समांतर शिरा-विन्यास और रेशेदार जड़ों से होती है।

 

प्रश्न 6. मेंढ़क है-
(अ) जलीय जंतु
(ब) थलीय जंतु
(स) उभयचर जंतु
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) उभयचर जंतु
In simple words: मेंढक पानी और जमीन दोनों जगह रह सकता है, इसलिए इसे उभयचर कहते हैं।

🎯 Exam Tip: उभयचर जंतुओं में अनुकूलन होते हैं जो उन्हें पानी और जमीन दोनों पर जीवित रहने में मदद करते हैं, जैसे नम त्वचा और फेफड़े।

 

प्रश्न 7. वे पौधे जो भूमि की सतह पर फैलकर बढ़ते हैं, कहलाते हैं-
(अ) शाक
Answer: (अ) शाक
In simple words: शाक ऐसे पौधे होते हैं जिनके तने मुलायम और हरे होते हैं, और वे अक्सर जमीन पर फैलकर बढ़ते हैं।

🎯 Exam Tip: शाक छोटे, कोमल तने वाले पौधे होते हैं, जबकि झाड़ियाँ और वृक्षों के तने क्रमशः कठोर और मोटे होते हैं।

 

प्रश्न 8. सरसों के पौधे की विशेषता है-
(अ) जालिकावत शिरा विन्यास व झकड़ा जड़
(ब) समांतर शिरा विन्यास व मूसला जड़
(स) समांतर शिरा विन्यास व झकड़ा जड़
(द) जालिकावत शिरा विन्यास व मूसला जड़
Answer: (द) जालिकावत शिरा विन्यास व मूसला जड़
In simple words: सरसों के पौधे में पत्तों में जाल जैसी नसें होती हैं और उसकी जड़ मोटी और गहरी होती है, जिसे मूसला जड़ कहते हैं।

🎯 Exam Tip: सरसों एक द्विबीजपत्री पौधा है, और द्विबीजपत्री पौधों की पहचान जालिकावत शिरा-विन्यास और मूसला जड़ों से होती है।

 

प्रश्न 9. द्विबीजपत्री पौधे का उदाहरण है-
(अ) ज्वार
(ब) केला
(स) राजमा
(द) मक्का
Answer: (स) राजमा
In simple words: राजमा एक ऐसा पौधा है जिसके बीज में दो हिस्से होते हैं, इसलिए यह द्विबीजपत्री पौधा है।

🎯 Exam Tip: द्विबीजपत्री पौधों के बीज को दो बराबर हिस्सों में बांटा जा सकता है, जबकि एकबीजपत्री पौधों को नहीं।

 

प्रश्न 10. जल में गति करने वाले जंतुओं की विशेषता
(अ) धारारेखित शरीर
(ब) पख
(स) झिल्लीयुक्त पंजे
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: जो जानवर पानी में चलते हैं, उनके शरीर चिकने होते हैं (धारारेखित), उनके पास तैरने के लिए पंख और झिल्लीदार पैर होते हैं।

🎯 Exam Tip: जलीय जीवों के ये सभी अनुकूलन उन्हें पानी में कम प्रतिरोध का सामना करते हुए तेज़ी से चलने में मदद करते हैं।

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

 

प्रश्न 1. आवास की क्षति से __________ को हानि होती है।
Answer: आवास की क्षति से जैव विविधता को हानि होती है।
In simple words: अगर रहने की जगह खराब हो जाती है, तो वहाँ मौजूद सभी तरह के जीवों को नुकसान होता है।

🎯 Exam Tip: आवास की हानि सीधे तौर पर उस क्षेत्र में रहने वाले पौधों और जंतुओं की संख्या और प्रकार को प्रभावित करती है।

 

प्रश्न 3. शिराओं द्वारा दर्शाए गए पैर्टन को __________ कहते हैं।
Answer: शिराओं द्वारा दर्शाए गए पैर्टन को शिरा – विन्यास कहते हैं।
In simple words: पत्तियों में नसों के डिज़ाइन को शिरा-विन्यास कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: शिरा-विन्यास दो प्रकार का होता है - जालिकावत और समांतर, जो पौधों के वर्गीकरण में सहायक है।

 

प्रश्न 4. केले और घास की पत्तियाँ __________ शिरा – विन्यास को प्रदर्शित करती हैं।
Answer: केले और घास की पत्तियाँ समांतर शिरा – विन्यास को प्रदर्शित करती हैं।
In simple words: केले और घास के पत्तों की नसें एक दूसरे के समानांतर चलती हैं।

🎯 Exam Tip: समांतर शिरा-विन्यास एकबीजपत्री पौधों की एक प्रमुख विशेषता है।

 

प्रश्न 5. मरुस्थल में पाए जाने वाले पौधों के मांसल तने __________ को संग्रहित कर सकते हैं।
Answer: मरुस्थल में पाए जाने वाले पौधों के मांसल तने जल को संग्रहित कर सकते हैं।
In simple words: रेगिस्तान के पौधों के मोटे तने में पानी जमा होता है।

🎯 Exam Tip: मांसल तने और पत्तियां मरुस्थलीय पौधों में जल संचय के लिए महत्वपूर्ण अनुकूलन हैं।

 

प्रश्न 6. ऊँट अपने __________ में भोजन संचित करते हैं।
Answer: ऊँट अपने कूबड़ में भोजन संचित करते हैं।
In simple words: ऊँट अपने कूबड़ में खाना जमा करके रखते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊँट का कूबड़ वसा का भंडार होता है, जो उन्हें लंबे समय तक बिना भोजन के जीवित रहने में मदद करता है।

 

निम्न में से सत्य / असत्य कथन छांटिए

 

प्रश्न 1. आवास किसी क्षेत्र की जैव विविधता को निर्मित करने में में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (सत्य / असत्य)
Answer: सत्य
In simple words: किसी जगह का वातावरण वहाँ मौजूद सभी जीवों के प्रकार को तय करने में बहुत ज़रूरी होता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी क्षेत्र की जैव विविधता सीधे तौर पर उसके आवास के प्रकार, जलवायु और संसाधनों से प्रभावित होती है।

 

प्रश्न 2. ऐसे पौधे जिनके तने, कोमल और हरे होते हैं, झाड़ी कहलाते हैं। (सत्य / असत्य)
Answer: असत्य
In simple words: जिन पौधों के तने मुलायम और हरे होते हैं, वे झाड़ी नहीं, बल्कि शाक कहलाते हैं।

🎯 Exam Tip: शाक, झाड़ी और वृक्ष के बीच का मुख्य अंतर तने की कठोरता और जीवन चक्र पर आधारित होता है।

 

प्रश्न 3. ठंडे मरुस्थल के ऊँटों की ऊँचाई और पैर गरम मरुस्थल के ऊँटों की तुलना में छोटे होते हैं। (सत्य / असत्य)
Answer: सत्य
In simple words: ठंडी जगहों के ऊँट गरम जगहों के ऊँटों से छोटे होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह शारीरिक अनुकूलन ठंडे वातावरण में शरीर की गर्मी को कम होने से बचाने में मदद करता है।

 

प्रश्न 1.
कॉलम 1
(1) विसर्पी लता
(2) शाक
(3) झाड़ी
(4) वृक्ष
कॉलम 2
(A) आम
(B) बेर
(C) अंगूर
(D) टमाटर
Answer:

कॉलम 1कॉलम 2
(1) विसर्पी लता(C) अंगूर
(2) शाक(D) टमाटर
(3) झाड़ी(B) बेर
(4) वृक्ष(A) आम
यह मिलान पौधों के प्रकारों और उनके उदाहरणों के बीच संबंध स्थापित करता है।
In simple words: विसर्पी लता अंगूर है, शाक टमाटर है, झाड़ी बेर है, और वृक्ष आम है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में प्रत्येक श्रेणी की परिभाषा को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे विसर्पी लता जमीन पर फैलती है, शाक का तना कोमल होता है, आदि।

 

प्रश्न 2.
कॉलम 1
(1) कूबड़
(2) पख
(3) झिल्लीयुक्त पंजे
(4) खुर
कॉलम 2
(A) बकरी
(B) ऊँट
(C) मछली
(D) बत्तख
Answer:

कॉलम 1कॉलम 2
(1) कूबड़(B) ऊँट
(2) पख(C) मछली
(3) झिल्लीयुक्त पंजे(D) बत्तख
(4) खुर(A) बकरी
यह मिलान जानवरों के शरीर के अंगों और उनके संबंधित जानवरों के बीच सही संबंध दर्शाता है।
In simple words: ऊँट में कूबड़ होता है, मछली में पंख होते हैं, बत्तख में झिल्लीदार पंजे होते हैं, और बकरी में खुर होते हैं।

🎯 Exam Tip: जानवरों के शारीरिक अंग अक्सर उनके रहने की जगह और जीवन शैली के हिसाब से होते हैं, जैसे पंख तैरने के लिए और खुर चलने के लिए।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. जैव विविधता किसे कहते हैं?
Answer: किसी खास जगह पर पाए जाने वाले अलग-अलग तरह के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की कुल संख्या और प्रकारों को उस क्षेत्र की जैव विविधता कहते हैं। यह जीवों के बीच प्राकृतिक भिन्नता को दिखाता है।
In simple words: किसी जगह पर जितने तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु मिलते हैं, वही उस जगह की जैव विविधता है।

🎯 Exam Tip: जैव विविधता में केवल प्रजातियों की संख्या ही नहीं, बल्कि आनुवंशिक विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता भी शामिल होती है।

 

प्रश्न 2. पौधों एवं जंतुओं का समूह बनाने का क्या महत्त्व है?
Answer: पौधों और जंतुओं को समूहों में बाँटने से उनकी समानताओं और अंतरों के आधार पर उन्हें समझना और पढ़ना बहुत आसान हो जाता है। इससे हम हर जीव को अलग-अलग याद रखने की बजाय, पूरे समूह की विशेषताओं को जान पाते हैं।
In simple words: पौधों और जानवरों को समूहों में बाँटने से उन्हें समझना और पढ़ना आसान हो जाता है, क्योंकि हम उनकी एक जैसी और अलग विशेषताओं को देख पाते हैं।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण से जीवों का अध्ययन व्यवस्थित हो जाता है और उनके विकासवादी संबंधों को समझने में भी मदद मिलती है।

 

प्रश्न 3. आरोही लता (क्लाइम्बर) किसे कहते हैं?
Answer: वे पौधे जिनके तने बहुत कमजोर होते हैं और उन्हें ऊपर चढ़ने और बढ़ने के लिए किसी सहारे की ज़रूरत होती है, उन्हें आरोही लता (क्लाइम्बर) कहते हैं। ये सहारे के बिना सीधे खड़े नहीं हो पाते।
In simple words: कमजोर तने वाले पौधे जो ऊपर बढ़ने के लिए सहारे पर चढ़ते हैं, उन्हें आरोही लता कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आरोही लताएँ अक्सर विशेष संरचनाओं जैसे प्रतान (tendrils) या जड़-तनों (rootlets) का उपयोग करके सहारे से चिपक जाती हैं।

 

प्रश्न 5. 'मूसला जड़' से क्या तात्पर्य है?
Answer: पौधों में जड़ों का वह प्रकार जिसमें एक मुख्य, मोटी जड़ होती है और उससे कई छोटी-छोटी पतली जड़ें निकलती हैं, उसे मूसला जड़ कहते हैं। यह मुख्य जड़ जमीन में गहराई तक जाती है।
In simple words: मूसला जड़ वह होती है जिसमें एक मोटी जड़ नीचे जाती है और उससे कई पतली जड़ें निकलती हैं।

🎯 Exam Tip: मूसला जड़ें पानी और पोषक तत्वों को गहराई से सोखने में मदद करती हैं और पौधे को मिट्टी में मज़बूती से जमाए रखती हैं।

 

प्रश्न 6. पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले देवदार वृक्ष की क्या विशेषताएँ होती हैं?
Answer: देवदार के पेड़ शंकु के आकार के होते हैं और इनकी शाखाएँ लचीली तथा नीचे की ओर झुकी हुई होती हैं। यह बनावट उन्हें बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जीवित रहने में मदद करती है, क्योंकि बर्फ आसानी से फिसल जाती है।
In simple words: देवदार के पेड़ शंकु जैसे होते हैं और उनकी शाखाएँ नीचे झुकी होती हैं, ताकि बर्फ उन पर टिक न सके।

🎯 Exam Tip: शंकुधारी वृक्षों की यह विशेषता उन्हें भारी बर्फबारी से होने वाले नुकसान से बचाती है।

 

प्रश्न 7. 'अनुकूलन' किसे कहते हैं?
Answer: वे खास विशेषताएँ जो पौधों और जंतुओं को किसी विशेष जगह पर जीवित रहने और अच्छी तरह से बढ़ने में सक्षम बनाती हैं, उन्हें अनुकूलन कहते हैं। यह विशेषताएँ समय के साथ विकसित होती हैं।
In simple words: अनुकूलन का मतलब है कि कोई जीव किसी खास जगह पर रहने के लिए अपने शरीर में कुछ बदलाव करता है।

🎯 Exam Tip: अनुकूलन जीवों को भोजन, पानी, आश्रय खोजने और शिकारियों से बचने में मदद करते हैं।

 

प्रश्न 8. उभयचर जंतु क्या होते हैं?
Answer: वे जंतु जो पानी के साथ-साथ जमीन पर भी रह सकते हैं, उन्हें उभयचर जंतु कहते हैं। ये अपनी जीवन का कुछ हिस्सा पानी में और कुछ हिस्सा जमीन पर बिताते हैं।
In simple words: उभयचर वह जानवर हैं जो पानी और जमीन दोनों जगह रह सकते हैं।

🎯 Exam Tip: उभयचरों की त्वचा आमतौर पर नम होती है और वे अपने जीवन चक्र में पानी पर निर्भर रहते हैं, खासकर प्रजनन के लिए।

 

प्रश्न 9. हमें अपने ग्रह को जीवन से परिपूर्ण बनाए रखने के लिए क्या करने की आवश्यकता है?
Answer: अपने ग्रह को हमेशा जीवन से भरा-पूरा रखने के लिए हमें जैव विविधता की रक्षा करनी होगी। इसका मतलब है सभी तरह के पौधों और जानवरों को बचाना और उनके प्राकृतिक घरों को सुरक्षित रखना।
In simple words: पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए हमें पेड़-पौधों और जानवरों की सुरक्षा करनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: जैव विविधता का संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन, खाद्य श्रृंखला और पर्यावरणीय सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 10. 'समूहन' किसे कहते हैं?
Answer: पौधों और जंतुओं को उनकी एक जैसी विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में व्यवस्थित करने के तरीके को समूहन कहते हैं। यह हमें जीवों को आसानी से पहचानने और उनका अध्ययन करने में मदद करता है।
In simple words: समूहन का मतलब है कि पौधों और जानवरों को उनकी समानताओं के हिसाब से अलग-अलग समूह में बाँटना।

🎯 Exam Tip: समूहन से वैज्ञानिक जीवों का वर्गीकरण कर पाते हैं और उनके बीच के संबंधों को समझ पाते हैं।

 

प्रश्न 11. प्रकृति की सैर (नेचर वॉक) का क्या उद्देश्य होता है?
Answer: प्रकृति की सैर (नेचर वॉक) का मुख्य उद्देश्य प्रकृति में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की सुंदरता और उनकी विविधता को करीब से देखना और अनुभव करना है। इससे हमें प्रकृति से जुड़ने का मौका मिलता है।
In simple words: प्रकृति की सैर का मकसद पेड़-पौधों और जानवरों की खूबसूरती और उनके प्रकारों को समझना है।

🎯 Exam Tip: नेचर वॉक हमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्राकृतिक दुनिया की सराहना करने में मदद करती है।

 

प्रश्न 13. 'जानकी अम्माल' कौन थी?
Answer: जानकी अम्माल एक भारतीय वनस्पतिशास्त्री थीं। उन्होंने 'साइलेंट वैली बचाओ' आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
In simple words: जानकी अम्माल भारत की एक पौधे वैज्ञानिक थीं जिन्होंने 'साइलेंट वैली' को बचाने में मदद की थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके द्वारा चलाए गए आंदोलनों को।

 

प्रश्न 14. 'भारत का पक्षी पुरुष' (बर्ड मैन ऑफ इंडिया) के रूप में किसे जाना जाता है?
Answer: 'सालिम अली' को भारत का पक्षी पुरुष (बर्ड मैन ऑफ इंडिया) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने पक्षियों के अध्ययन और संरक्षण में बहुत बड़ा योगदान दिया था।
In simple words: सालिम अली को 'भारत के पक्षी पुरुष' कहते हैं क्योंकि उन्होंने पक्षियों के बारे में बहुत काम किया।

🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है, जिसे हमेशा याद रखना चाहिए।

 

प्रश्न 15. मछली में जल में गति करने के लिए क्या विशेषताएँ होती हैं?
Answer: मछली में पानी में चलने के लिए उसका शरीर धारारेखित (स्ट्रीमलाइन्ड) होता है, यानी आगे और पीछे से पतला और बीच में चौड़ा। साथ ही, उसके शरीर पर पंख (फिन) होते हैं। ये विशेषताएँ उसे पानी के बहाव में आसानी से तैरने में मदद करती हैं।
In simple words: मछली का शरीर पानी में आसानी से तैरने के लिए चिकना और पतला होता है, और उसके पास तैरने के लिए पंख होते हैं।

🎯 Exam Tip: धारारेखित शरीर पानी के प्रतिरोध को कम करता है, जिससे मछली को कम ऊर्जा खर्च करके तेज़ी से तैरने में मदद मिलती है।

 

प्रश्न 16. राजस्थान के मरुस्थलों में पाये जाने वाले नागफनी के पौधे के तने की क्या विशेषता होती है?
Answer: नागफनी का तना मोटा और मांसल होता है। यह विशेषता उसे पानी को अपने अंदर जमा करके रखने में मदद करती है। इससे वह रेगिस्तान के सूखे वातावरण में भी जीवित रह पाता है।
In simple words: नागफनी का तना मोटा होता है और उसमें पानी जमा रहता है, जिससे वह रेगिस्तान में रह पाता है।

🎯 Exam Tip: मरुस्थलीय पौधों में जल संचय और वाष्पोत्सर्जन को कम करने के लिए विशेष अनुकूलन होते हैं, जैसे पत्तों का काँटों में बदलना और मांसल तने।

 

प्रश्न 17. बाघ परियोजना' (प्रोजेक्ट टाइगर) से आप क्या समझते हैं?
Answer: 'बाघ परियोजना' (प्रोजेक्ट टाइगर) 1973 में शुरू की गई एक योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य बंगाल टाइगर की घटती संख्या को बचाना और उन्हें संरक्षित करना है। यह भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण प्रयास है।
In simple words: बाघ परियोजना 1973 में शुरू हुई थी, ताकि बंगाल टाइगर को खत्म होने से बचाया जा सके।

🎯 Exam Tip: ऐसे राष्ट्रीय संरक्षण कार्यक्रमों के नाम, वर्ष और मुख्य उद्देश्य को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 18. चीता पुनर्वास परियोजना (चीता रीइन्ट्रोडक्शन प्रोजेक्ट) कब प्रारम्भ की गई?
Answer: चीता पुनर्वास परियोजना 2022 में शुरू की गई थी, जिसका लक्ष्य भारत में चीतों की संख्या को फिर से स्थापित करना है। इसके तहत चीतों को दूसरे देशों से भारत लाया गया है।
In simple words: चीता पुनर्वास योजना 2022 में शुरू हुई थी, ताकि भारत में चीतों को वापस लाया जा सके।

🎯 Exam Tip: पुनर्वास परियोजनाओं का उद्देश्य उन प्रजातियों को उनके पुराने आवासों में वापस लाना होता है जो वहाँ से विलुप्त हो गई थीं।

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. पौधों में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की विशेषताएँ बताइए जो उनके समूह बनाने में उपयोगी हो ?
Answer: पौधों में कई तरह की विशेषताएँ होती हैं जो उन्हें अलग-अलग समूहों में बाँटने में मदद करती हैं: 1. तने का प्रकार: तना लंबा या छोटा हो सकता है, कठोर या कोमल हो सकता है। 2. पत्तियों की बनावट: पत्तियाँ अलग-अलग आकार की हो सकती हैं, और तने पर उनके लगने का तरीका भी अलग हो सकता है। 3. फूलों की विशेषताएँ: फूल अलग-अलग रंग, आकार और खुशबू वाले हो सकते हैं। ये सभी विशेषताएँ वैज्ञानिकों को पौधों को बेहतर तरीके से समझने और वर्गीकृत करने में सहायता करती हैं।
In simple words: पौधों को उनके तने की लंबाई, कठोरता, पत्तों के आकार और लगने के तरीके, और फूलों के रंग-रूप-खुशबू के आधार पर समूह में बाँटा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: पौधों के वर्गीकरण में तने, पत्तियाँ और फूल सबसे महत्वपूर्ण संरचनाएँ हैं, जिनके आधार पर वे शाक, झाड़ी या वृक्ष में वर्गीकृत होते हैं।

 

प्रश्न 2. कौन से पौधे 'वृक्ष' कहलाते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
Answer: ऐसे पौधे जो बहुत ऊँचे होते हैं, जिनके तने मोटे, कठोर, भूरे रंग के और लकड़ी वाले होते हैं, उन्हें 'वृक्ष' कहते हैं। इनकी शाखाएँ तने के ऊपरी हिस्से से निकलना शुरू होती हैं, न कि जमीन के पास से। उदाहरण के लिए, आम का पेड़ एक वृक्ष है।
In simple words: वृक्ष वे पौधे होते हैं जो बहुत ऊँचे होते हैं, जिनका तना मोटा और लकड़ी जैसा होता है, और जिनकी शाखाएँ ऊपर से निकलती हैं। जैसे आम का पेड़।

🎯 Exam Tip: वृक्षों का तना कई वर्षों तक जीवित रहता है और हर साल मोटा होता जाता है, जो शाक और झाड़ियों से भिन्न होता है।

 

प्रश्न 3. आरोही लता (क्लाइम्बर) तथा विसर्पी लता (क्रीपर) में अन्तर बताइए।
Answer: आरोही लता (क्लाइम्बर) और विसर्पी लता (क्रीपर) दोनों कमजोर तने वाले पौधे हैं, लेकिन उनके बढ़ने के तरीके में अंतर होता है: * **आरोही लता (क्लाइम्बर):** वे पौधे जिनके तने कमजोर होते हैं और उन्हें ऊपर की ओर चढ़ने और बढ़ने के लिए किसी सहारे (जैसे दीवार, पेड़ या छड़ी) की ज़रूरत होती है। ये सहारे से लिपटकर ऊपर चढ़ते हैं। * **विसर्पी लता (क्रीपर):** वे पौधे जिनके तने भी कमजोर होते हैं, लेकिन वे जमीन की सतह पर फैलकर बढ़ते हैं। उन्हें ऊपर चढ़ने के लिए किसी सहारे की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि वे जमीन पर ही फैलते रहते हैं। दोनों ही प्रकार की लताएँ कमजोर तनों के कारण सीधे खड़े नहीं हो पातीं।
In simple words: आरोही लताएँ कमजोर होती हैं और ऊपर चढ़ने के लिए सहारा लेती हैं, जैसे अंगूर की बेल। विसर्पी लताएँ भी कमजोर होती हैं लेकिन वे जमीन पर फैलकर बढ़ती हैं, जैसे कद्दू।

🎯 Exam Tip: आरोही लताएँ ऊपर की ओर बढ़ती हैं, जबकि विसर्पी लताएँ क्षैतिज रूप से जमीन पर फैलती हैं।

 

प्रश्न 4. 'जालिकारूपी शिरा विन्यास' से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।
Answer: जब पत्ती में शिराएँ (नसें) एक मोटी बीच वाली शिरा से निकलकर, छोटी-छोटी शिराओं का एक जाल जैसा पैटर्न बनाती हैं, तो इस पैटर्न को जालिकारूपी शिरा-विन्यास कहते हैं। यह शिरा-विन्यास पत्ती को संरचनात्मक सहायता देता है और पानी व पोषक तत्वों को पूरे पत्ती में पहुँचाता है। उदाहरण के लिए, गुड़हल की पत्तियाँ।
In simple words: जालिकारूपी शिरा-विन्यास का मतलब है जब पत्ती में नसें एक जाल जैसा डिज़ाइन बनाती हैं, जैसे गुड़हल के पत्ते में।

🎯 Exam Tip: जालिकारूपी शिरा-विन्यास द्विबीजपत्री पौधों की एक मुख्य विशेषता है, जबकि एकबीजपत्री पौधों में समांतर शिरा-विन्यास होता है।

 

Question 6. जनसंख्या के बढ़ने और मनुष्यों द्वारा अधिक सुविधाजनक जीवन की चाह में विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों की कटाई की जा रही है। यह हमारे आस-पास के परिवेश को कैसे प्रभावित कर सकता है? आपके विचार से हम इस चुनौती का निदान कैसे कर सकते हैं?
Answer: बढ़ती जनसंख्या और सुविधापूर्ण जीवन की इच्छा के कारण वनों की कटाई हो रही है। इससे हमारे आस-पास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। वनों के कटने से वन्य जीवों के घर, भोजन और बाकी संसाधन कम हो रहे हैं, जिससे जैव विविधता पर बुरा असर पड़ रहा है। यह जीवों और पौधों की संख्या में कमी के रूप में दिख रहा है। वनों के महत्व को समझना और उनका संरक्षण करना भविष्य के लिए आवश्यक है।
हम इस चुनौती को इन तरीकों से हल कर सकते हैं:
1. जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय अपनाने चाहिए।
2. वन संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।
3. वनों को समुदाय के साथ मिलकर पवित्र उपवनों की तरह बचाना चाहिए।
4. जिन जगहों पर पहले वन थे, वहाँ नए पेड़ लगाकर वनों को फिर से स्थापित करना चाहिए।
In simple words: लोग बढ़ने और आरामदायक जीवन की चाह में पेड़ काट रहे हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है और जानवरों के घर-भोजन कम हो रहे हैं, जिससे प्रकृति की विविधता घट रही है। इस समस्या को रोकने के लिए हमें जनसंख्या नियंत्रण करना होगा, वनों का समझदारी से उपयोग करना होगा, पेड़ों को बचाना होगा और नए पेड़ लगाने होंगे।

🎯 Exam Tip: वनों की कटाई के पर्यावरणीय प्रभावों को सूचीबद्ध करें और प्रत्येक समाधान के साथ उसके महत्व को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 7. फ्लोचार्ट का विश्लेषण करें। इसमें 'क' और 'ख' के कौन-कौन से उदाहरण हो सकते हैं?
Answer: दिए गए फ्लोचार्ट के अनुसार:
1. यदि किसी पौधे में पत्तियाँ हैं और उन पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास है, तो वह 'क' समूह में आएगा। जालिकारूपी शिरा-विन्यास का मतलब है कि पत्तियों में शिराएँ एक जाल जैसा पैटर्न बनाती हैं।
2. यदि किसी पौधे में पत्तियाँ हैं, लेकिन उनमें जालिकारूपी शिरा-विन्यास नहीं है (यानी समांतर शिरा-विन्यास है), तो वह 'ख' समूह में आएगा। समांतर शिरा-विन्यास में शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं।
उदाहरण:
'क' (जालिकारूपी शिरा-विन्यास वाले पौधे) के उदाहरण: आम, चना, राजमा, मूली, गुड़हल।
'ख' (समांतर शिरा-विन्यास वाले पौधे) के उदाहरण: गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा, घास, केला।
In simple words: फ्लोचार्ट हमें पौधों को उनकी पत्तियों के शिरा-विन्यास के आधार पर बांटना सिखाता है। 'क' वे पौधे हैं जिनकी पत्तियों में जाल जैसा पैटर्न होता है, जैसे आम। 'ख' वे पौधे हैं जिनकी पत्तियों में शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं, जैसे गेहूँ।

🎯 Exam Tip: फ्लोचार्ट को ध्यान से समझें और प्रत्येक शर्त के लिए सही उत्तर के प्रकार के उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 8. मरुस्थल में ऊँटों को जीवित रहने में कौन-सी विशेषताएँ सहायक होती हैं?
Answer: मरुस्थल के कठिन वातावरण में ऊँटों को जीवित रहने में उनकी कुछ खास विशेषताएँ मदद करती हैं:
1. उनके पैर लंबे होते हैं और खुर चौड़े होते हैं, जिससे वे रेत में बिना धंसे आसानी से चल पाते हैं। यह उन्हें गर्म रेत पर चलने में भी मदद करता है।
2. ऊँट अपने कूबड़ में भोजन को चर्बी के रूप में जमा करते हैं। यह उन्हें बिना खाना-पानी के लंबे समय तक जीवित रहने में सहायक होता है।
3. ऊँट बहुत कम मात्रा में पेशाब करते हैं, उनका गोबर भी सूखा होता है, और उन्हें पसीना भी नहीं आता है। ये सभी चीजें उनके शरीर में पानी बचाने में मदद करती हैं।
In simple words: ऊँटों के लंबे पैर रेत में चलने और कूबड़ भोजन जमा करने में मदद करते हैं। वे पानी भी बहुत कम बर्बाद करते हैं, जिससे वे मरुस्थल में आसानी से रह पाते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊँट की प्रत्येक शारीरिक विशेषता को उसके कार्य से जोड़कर याद रखें, जैसे लंबे पैर-रेत पर चलना, कूबड़-भोजन संग्रह।

 

Question 9. देवदार के पेड़ और बुरांस (रोडोडेंड्रॉन) में कौन से अनुकूलन पाये जाते हैं जो उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं?
Answer: पर्वतीय क्षेत्रों में देवदार के पेड़ और बुरांस (रोडोडेंड्रॉन) कुछ खास तरीकों से अपने आप को ढालते हैं:
1. देवदार के पेड़ का आकार शंकु जैसा होता है और उनकी शाखाएँ नीचे की ओर झुकी हुई होती हैं। यह बनावट बर्फ को उन पर जमा होने नहीं देती, बल्कि उसे आसानी से फिसलने देती है।
2. बुरांस के पौधों की ऊँचाई कम होती है और उनकी पत्तियाँ छोटी होती हैं। यह उन्हें पहाड़ों की चोटियों पर चलने वाली तेज़ हवाओं में भी आसानी से टिके रहने में मदद करता है।
ये अनुकूलन उन्हें ठंडे और बर्फीले पहाड़ी वातावरण में जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं।
In simple words: देवदार के पेड़ का शंकु आकार बर्फ को फिसलने में मदद करता है। बुरांस के छोटे पत्ते और कम ऊँचाई उसे तेज हवाओं में बचाती है।

🎯 Exam Tip: पर्वतीय पौधों के अनुकूलन बताते समय, उनके आकार और पत्तियों की विशेषताओं को बर्फ और हवा जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों से जोड़कर समझाएँ।

 

Question 10. 'आवास' किसे कहते हैं? पौधों एवं जंतुओं के लिए आवास किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है?
Answer: आवास वह जगह है जहाँ कोई पौधा या जंतु रहता है। यह उन्हें जीवित रहने के लिए खाना, पानी, हवा, रहने की जगह और दूसरी ज़रूरी चीजें देता है। पौधे और जंतु अलग-अलग जगहों पर रहते हैं, और कई बार एक ही जगह पर कई तरह के पौधे और जंतु भी मिल जाते हैं। इस तरह, आवास किसी भी क्षेत्र की जैव विविधता को बनाने में एक बहुत ही खास भूमिका निभाता है। यह प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: आवास वह जगह है जहाँ जीव रहते हैं और अपनी ज़रूरतें पूरी करते हैं। यह पौधों और जानवरों को भोजन, पानी और रहने की जगह देता है और जैव विविधता के लिए बहुत ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: आवास की परिभाषा और पौधों व जंतुओं के लिए उसकी उपयोगिता को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 12. यदि किसी पौधे या जंतु का आवास क्षतिग्रस्त हो जाए तो क्या होगा?
Answer: अगर किसी पौधे या जंतु का आवास खराब हो जाता है, तो उन्हें रहने की जगह, खाने और बाकी ज़रूरी चीज़ें नहीं मिल पातीं। इससे वे बेघर हो जाते हैं और उनकी जान को भी खतरा हो सकता है। अंत में, उस क्षेत्र की जैव विविधता को बहुत नुकसान होता है क्योंकि पौधे और जंतु वहाँ से गायब होने लगते हैं।
In simple words: जब किसी जीव का घर टूटता है, तो उसे खाने, रहने की जगह नहीं मिलती और वह खत्म हो सकता है। इससे प्रकृति की विविधता घट जाती है।

🎯 Exam Tip: आवास के नुकसान के सीधे प्रभावों (घर, भोजन की कमी) और बड़े प्रभावों (जैव विविधता की हानि) दोनों को बताएं।

 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न 1. 'पवित्र उपवन' (सेक्रेड ग्रोव्स) से आप क्या समझते हैं?
Answer: पवित्र उपवन ऐसे वन क्षेत्र होते हैं जो इंसानों द्वारा छुए नहीं जाते, मतलब जहाँ कोई पेड़ नहीं काटता या जानवर को नुकसान नहीं पहुँचाता। ये छोटे से लेकर बहुत बड़े भी हो सकते हैं और पूरे भारत में पाए जाते हैं। ये कई तरह के औषधीय पौधों और अलग-अलग जीवों का घर होते हैं। स्थानीय लोग इनकी रक्षा करते हैं और किसी को भी यहाँ के जीवों या पेड़ों को नुकसान पहुँचाने की इजाजत नहीं देते। इस तरह, पवित्र उपवन एक खास तरह की जैव संपदा हैं जिसकी रक्षा समुदाय मिलकर करता है।
In simple words: पवित्र उपवन ऐसे जंगल होते हैं जहाँ पेड़ काटने या शिकार करने की मनाही होती है, क्योंकि लोग इन्हें पवित्र मानते हैं। ये कई पौधों और जानवरों का घर होते हैं और समुदाय मिलकर इनकी रक्षा करता है।

🎯 Exam Tip: पवित्र उपवन की परिभाषा, उनकी विशेषताएँ और संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करें।

 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न 2. जैव विविधता से क्या तात्पर्य है? किसी क्षेत्र की जैव विविधता में उसके सदस्यों की क्या भूमिका होती है?
Answer: जैव विविधता का मतलब है किसी खास जगह पर पाए जाने वाले सभी पौधों और जंतुओं की किस्में। किसी क्षेत्र की जैव विविधता में हर सदस्य की एक अलग भूमिका होती है। उदाहरण के लिए, पेड़ कई पक्षियों और जानवरों को भोजन और रहने की जगह देते हैं। जानवर फल खाकर बीज फैलाने में मदद करते हैं। इस तरह, सभी जीव और पौधे एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं, जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहता है। यह जटिल संबंध पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
In simple words: जैव विविधता का अर्थ है किसी जगह पर पौधों और जानवरों की अलग-अलग प्रजातियाँ। हर जीव का अपना एक काम होता है, जैसे पेड़ भोजन देते हैं और जानवर बीज फैलाते हैं। सभी जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

🎯 Exam Tip: जैव विविधता की स्पष्ट परिभाषा दें और फिर यह समझाने के लिए विशिष्ट उदाहरणों का उपयोग करें कि विभिन्न सदस्य एक पारिस्थितिकी तंत्र में कैसे योगदान करते हैं।

 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न 3. हम पौधों के समूह शाक, झाड़ी और वृक्ष के रूप में कैसे बना सकते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: हम पौधों को उनके तने की बनावट, ऊँचाई और शाखाओं के पैटर्न के आधार पर शाक, झाड़ी और वृक्ष के रूप में बाँट सकते हैं:
1. **शाक:** ये वे पौधे होते हैं जो आकार में छोटे होते हैं। इनके तने बहुत कोमल और हरे रंग के होते हैं, जिन्हें आसानी से मोड़ा जा सकता है। ये आमतौर पर कुछ ही महीने जीवित रहते हैं।
उदाहरण: टमाटर, धनिया, पुदीना।
In simple words: शाक छोटे और हरे तने वाले पौधे होते हैं, जैसे टमाटर।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक समूह (शाक, झाड़ी, वृक्ष) की मुख्य विशेषताओं (ऊँचाई, तने की प्रकृति, शाखाएँ) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और प्रत्येक के लिए उपयुक्त उदाहरण दें।

 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न 4. क्या किसी पौधे की पत्ती में शिरा-विन्यास के प्रकार और उसकी जड़ के प्रकार के मध्य कोई संबंध होता है? उदाहरण देकर समझाइए।
Answer: हाँ, किसी पौधे की पत्ती के शिरा-विन्यास के प्रकार और उसकी जड़ के प्रकार के बीच गहरा संबंध होता है। इसे समझने के लिए हम सदाबहार (द्विबीजपत्री) और लेमन घास (एकबीजपत्री) के पौधों का उदाहरण ले सकते हैं:
1. सदाबहार जैसे द्विबीजपत्री पौधों में मूसला जड़ें पाई जाती हैं, जहाँ एक मुख्य मोटी जड़ होती है और उससे पतली जड़ें निकलती हैं। इनकी पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है, जिसमें शिराएँ एक जाल जैसा पैटर्न बनाती हैं।
2. दूसरी ओर, लेमन घास जैसे एकबीजपत्री पौधों में झकड़ा जड़ें होती हैं, जहाँ जड़ें एक गुच्छे के रूप में फैली होती हैं। इनकी पत्तियों में समांतर शिरा-विन्यास होता है, जिसमें शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं।
इस तरह, जिन पौधों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है, उनमें आमतौर पर मूसला जड़ें होती हैं, और जिन पौधों में समांतर शिरा-विन्यास होता है, उनमें झकड़ा जड़ें होती हैं। यह प्राकृतिक संबंध पौधों के वर्गीकरण में मदद करता है।
In simple words: हाँ, पत्तियों में शिराओं का पैटर्न और जड़ों का प्रकार जुड़े होते हैं। जिन पौधों की पत्तियों में जाल जैसा पैटर्न होता है, उनकी जड़ें मूसला होती हैं (जैसे सदाबहार)। और जिनकी पत्तियों में समांतर रेखाएँ होती हैं, उनकी जड़ें झकड़ा होती हैं (जैसे घास)।

🎯 Exam Tip: शिरा-विन्यास और जड़ के प्रकार के बीच संबंध को समझाने के लिए द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री पौधों के विशिष्ट उदाहरणों का उपयोग करें।

 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न 5. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-
(i) थलीय आवास
(ii) जलीय आवास
(iii) उभयचर जंतु
Answer:
(i) **थलीय आवास-** थलीय आवास उन जगहों को कहते हैं जहाँ पौधे और जंतु जमीन पर रहते हैं। इसमें वन (जंगल), घास के मैदान, मरुस्थल (रेगिस्तान) और पर्वतीय (पहाड़ी) क्षेत्र जैसे विभिन्न प्रकार के भू-भाग शामिल हैं। विभिन्न थलीय आवासों में रहने वाले जीवों में अलग-अलग अनुकूलन पाए जाते हैं।
(ii) **जलीय आवास-** जलीय आवास उन जगहों को कहते हैं जहाँ पौधे और जंतु पानी में रहते हैं। इसमें तालाब, झील, नदियाँ और महासागर जैसे पानी के बड़े स्रोत शामिल हैं। यहाँ के जीव पानी में रहने के लिए खास तरह से ढले होते हैं, जैसे मछलियों में गलफड़े और पंख होते हैं।
(iii) **उभयचर जंतु-** उभयचर जंतु वे प्राणी होते हैं जो अपना जीवन पानी और जमीन दोनों पर गुजार सकते हैं। ये आमतौर पर अंडे पानी में देते हैं और उनके बच्चे पानी में विकसित होते हैं, जबकि वयस्क जमीन पर रहते हैं।
उदाहरण: मेंढक, मगरमच्छ, कछुआ।
In simple words: थलीय आवास जमीन पर है (जैसे जंगल), जलीय आवास पानी में है (जैसे नदी), और उभयचर जंतु पानी और जमीन दोनों पर रहते हैं (जैसे मेंढक)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक टिप्पणी के लिए स्पष्ट परिभाषा दें, उसके प्रमुख विशेषताओं को बताएं और कम से कम एक उदाहरण अवश्य दें।

 

निबन्धात्मक प्रश्न 1. शिरा-विन्यास किसे कहते हैं? इसके प्रकारों का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।
Answer: पत्तियों में शिराओं (नसें) द्वारा बनाया गया पैटर्न या डिज़ाइन शिरा-विन्यास कहलाता है। यह पत्तियों में भोजन और पानी पहुँचाने का काम करता है। शिरा-विन्यास दो मुख्य प्रकार का होता है:
(i) **जालिकारूपी शिरा-विन्यास:** जब पत्ती की शिराएँ एक-दूसरे से जुड़कर जाल जैसा पैटर्न बनाती हैं, तो इसे जालिकारूपी शिरा-विन्यास कहते हैं। इसमें एक मोटी मध्य शिरा होती है, जिससे छोटी-छोटी शिराएँ निकलकर जाल बनाती हैं।
उदाहरण: गुड़हल की पत्ती, आम की पत्ती।
(ii) **समांतर शिरा-विन्यास:** जब पत्ती की शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं और एक-दूसरे से नहीं जुड़तीं, तो इसे समांतर शिरा-विन्यास कहते हैं।
उदाहरण: केले की पत्ती, घास की पत्ती।
आप चित्र में देख सकते हैं कि गुड़हल की पत्ती में शिराएँ जाल बनाती हैं, जबकि केले की पत्ती में शिराएँ समानांतर चलती हैं।
In simple words: पत्तियों में नसों का जो पैटर्न होता है, उसे शिरा-विन्यास कहते हैं। यह दो तरह का होता है- जालिकारूपी (जाल जैसा) जैसे गुड़हल में और समांतर (सीधी रेखाओं वाला) जैसे केले में।

🎯 Exam Tip: शिरा-विन्यास की परिभाषा स्पष्ट करें और दोनों प्रकारों का वर्णन करते समय उनके प्रमुख अंतरों और उदाहरणों पर विशेष ध्यान दें।

 

निबन्धात्मक प्रश्न 2. पौधों में पाई जाने वाली जड़ों के प्रकारों को नामांकित चित्र सहित वर्णन करते हुए समझाइए।
Answer: पौधों में मुख्य रूप से दो प्रकार की जड़ें पाई जाती हैं, जो उन्हें जमीन से पानी और पोषक तत्व लेने में मदद करती हैं और पौधे को सहारा देती हैं:
1. **मूसला जड़ (Taproot):** इस प्रकार की जड़ में एक मुख्य, मोटी जड़ होती है जो सीधी नीचे जाती है। इससे छोटी-छोटी पतली जड़ें अगल-बगल से निकलती हैं। यह जड़ें जमीन में गहराई तक जाकर पौधे को मजबूत सहारा देती हैं।
उदाहरण: सरसों, गुड़हल, चना।
2. **झकड़ा जड़ या रेशेदार जड़ (Fibrous root):** इस प्रकार की जड़ में कोई एक मुख्य जड़ नहीं होती, बल्कि पौधे के तने के आधार से समान आकार की पतली जड़ों का एक गुच्छा निकलता है। ये जड़ें जमीन में ज्यादा गहराई तक नहीं जातीं, बल्कि मिट्टी की ऊपरी परत में फैल जाती हैं।
उदाहरण: गेहूँ, घास, मक्का।
सरसों के पौधे में मूसला जड़ और सामान्य घास के पौधे में झकड़ा (रेशेदार) जड़तंत्र देखा जा सकता है।
In simple words: पौधों में दो तरह की जड़ें होती हैं। मूसला जड़ में एक मोटी सीधी जड़ होती है, जिससे दूसरी जड़ें निकलती हैं (जैसे सरसों)। झकड़ा जड़ में पतली जड़ों का गुच्छा होता है (जैसे घास)।

🎯 Exam Tip: जड़ों के दोनों प्रकारों- मूसला जड़ और झकड़ा जड़- को उनकी संरचना और उदाहरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

निबन्धात्मक प्रश्न 3. बीजपत्र के आधार पर पौधों को कितने समूहों में बाँटा जाता है? प्रत्येक समूह को समझाते हुए एकबीजपत्री बीज तथा द्विबीजपत्री बीज का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: बीजपत्र (Cotyledon) के आधार पर पौधों को दो मुख्य समूहों में बाँटा जाता है:
(i) **द्विबीजपत्री पौधे (Dicotyledonous Plants):** ऐसे पौधे जिनके बीजों में दो बीजपत्र होते हैं, उन्हें द्विबीजपत्री पौधे कहते हैं। ये बीज अंकुरण के बाद दो पत्तियाँ बनाते हैं। इन पौधों की पत्तियों में आमतौर पर जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है और जड़ों में मूसला जड़ तंत्र पाया जाता है।
उदाहरण: चना, आम, राजमा।
(ii) **एकबीजपत्री पौधे (Monocotyledonous Plants):** ऐसे पौधे जिनके बीजों में केवल एक बीजपत्र होता है, उन्हें एकबीजपत्री पौधे कहते हैं। इन पौधों की पत्तियों में आमतौर पर समांतर शिरा-विन्यास होता है और जड़ों में झकड़ा जड़ तंत्र पाया जाता है।
उदाहरण: मक्का, गेहूँ, चावल।
चने का बीज एक द्विबीजपत्री बीज है जिसे दो बराबर हिस्सों में बाँटा जा सकता है, जबकि मक्के का बीज एक एकबीजपत्री बीज है और इसे दो हिस्सों में नहीं बाँटा जा सकता।
In simple words: पौधों को बीजपत्रों के आधार पर दो भागों में बांटते हैं: द्विबीजपत्री (दो बीजपत्र वाले, जैसे चना) और एकबीजपत्री (एक बीजपत्र वाले, जैसे मक्का)।

🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार के पौधों की परिभाषा दें, उनके बीजपत्रों की संख्या बताएं और प्रत्येक के दो-तीन उदाहरण अवश्य दें।

 

निबन्धात्मक प्रश्न 4. एक क्षेत्र की जैव विविधता अन्य क्षेत्रों की जैव विविधता से अलग क्यों होती है? उदाहरण द्वारा समझाइए।
Answer: एक क्षेत्र की जैव विविधता दूसरे क्षेत्रों से अलग इसलिए होती है क्योंकि हर जगह की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियाँ अलग होती हैं। तापमान, वर्षा, मिट्टी और धूप जैसे कारक यह तय करते हैं कि कौन से पौधे और जंतु वहाँ जीवित रह सकते हैं।
उदाहरण के लिए:
1. **मरुस्थलीय क्षेत्र:** इन भागों में पानी बहुत कम होता है। दिन में भयंकर गर्मी और रात में बहुत ठंड होती है। यहाँ पाए जाने वाले नागफनी जैसे पौधों का तना मोटा और मांसल होता है ताकि वे पानी को जमा कर सकें। ऊँट जैसे जानवर अपने कूबड़ में पानी और भोजन जमा करते हैं और कम पानी बर्बाद करते हैं।
2. **पर्वतीय क्षेत्र:** ये ठंडे और बर्फीले होते हैं। यहाँ देवदार जैसे वृक्षों की आकृति शंकु जैसी होती है और शाखाएँ नीचे की ओर झुकी होती हैं, ताकि बर्फ उन पर न रुके। बुरांस के पौधे छोटे और उनके पत्ते छोटे होते हैं, जिससे वे तेज़ हवाओं में भी टिके रहते हैं।
इस प्रकार, अलग-अलग स्थानों की जैव विविधता उन खास पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण एक-दूसरे से बहुत भिन्न होती है जो वहाँ के जीवों के अनुकूलन को प्रभावित करती हैं।
In simple words: हर जगह की जलवायु और पर्यावरण अलग होने के कारण जैव विविधता भी अलग होती है। जैसे रेगिस्तान में पानी की कमी के कारण खास तरह के पौधे और ऊँट होते हैं, जबकि पहाड़ों में बर्फ और ठंड के कारण देवदार जैसे पेड़ पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों (जैसे मरुस्थल और पर्वत) की पर्यावरणीय स्थितियों और वहाँ पाए जाने वाले जीवों के विशिष्ट अनुकूलनों का वर्णन करें।

 

निबन्धात्मक प्रश्न 5. राजस्थान के गरम मरुस्थल के ऊँट और लद्दाख के ठंडे मरुस्थल के ऊँट में क्या अंतर दिखाई देते हैं? इन अंतरों के कारण ऊँटों को क्या लाभ होते हैं?
Answer: राजस्थान के गरम मरुस्थल के ऊँट और लद्दाख के ठंडे मरुस्थल के ऊँट में कई अंतर होते हैं, जो उन्हें अपने-अपने वातावरण में जीवित रहने में मदद करते हैं:
**गरम मरुस्थल के ऊँट (राजस्थान):**
1. इनके पैर लंबे होते हैं और खुर चौड़े होते हैं, जिससे ये रेत में बिना धंसे आसानी से चल पाते हैं।
2. इनके शरीर पर बाल छोटे होते हैं।
3. इनके कूबड़ में एक ही उभार होता है, जहाँ ये भोजन जमा करते हैं।
**ठंडे मरुस्थल के ऊँट (लद्दाख):**
1. इनकी ऊँचाई और पैर गरम मरुस्थल के ऊँटों की तुलना में छोटे होते हैं, जो उन्हें पहाड़ी और बर्फीले क्षेत्रों में चलने में सक्षम बनाते हैं।
2. इनके सिर से लेकर गर्दन और शरीर के निचले भाग तक लंबे, घने बाल होते हैं, जो उन्हें लद्दाख के ठंडे मौसम में गर्म रखते हैं।
3. इनके कूबड़ में दो उभार होते हैं (दो कूबड़ वाले ऊँट), जो सर्दियों में अतिरिक्त भोजन संग्रह में मदद करते हैं।
इन शारीरिक अंतरों से ऊँटों को अपने कठोर वातावरण में ढलने और जीवित रहने में मदद मिलती है।
In simple words: गरम रेगिस्तान के ऊँटों के पैर लंबे और खुर चौड़े होते हैं, और उनका एक कूबड़ होता है। वहीं, ठंडे रेगिस्तान के ऊँटों के पैर छोटे, शरीर पर लंबे बाल और दो कूबड़ होते हैं। ये अंतर उन्हें अपने-अपने मौसम में जीवित रहने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार के ऊँटों की विशेषताओं को सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत करें और प्रत्येक विशेषता का उल्लेख करें कि वह ऊँट को अपने विशिष्ट वातावरण में कैसे मदद करती है।

RBSE Class 6 Science Chapter 2 Notes in Hindi

  • हम अपने आस-पास कई तरह के पौधों और जीवों से घिरे हुए हैं। किसी विशेष जगह पर पाए जाने वाले पौधों और जीवों की अलग-अलग किस्में ही उस जगह की जैव विविधता कहलाती हैं।
  • हम पौधों और जंतुओं को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समूहों में बाँट सकते हैं।
  • पौधों में उनके तने, पत्तियों, फूलों आदि से जुड़ी विशेषताओं में अंतर होता है।
  • अलग-अलग जानवरों में अलग-अलग तरह से चलने की क्षमता होती है। उनके चलने के तरीके के आधार पर भी उन्हें समूहों में बांटा जा सकता है।
  • पौधों और जंतुओं को उनकी एक जैसी खासियतों के आधार पर अलग-अलग समूहों में रखने का तरीका समूहन कहलाता है।
  • पौधों को उनकी ऊँचाई, तने के प्रकार और शाखाओं के पैटर्न के आधार पर शाक (छोटे पौधे), झाड़ी और वृक्ष (पेड़) में बांटा जा सकता है।
  • पौधों को उनके बीज में बीजपत्रों की संख्या के आधार पर एकबीजपत्री (एक बीजपत्र वाले) और द्विबीजपत्री (दो बीजपत्र वाले) पौधों के समूहों में बाँटा जा सकता है।
  • एकबीजपत्री पौधों की पत्तियों में आमतौर पर शिराएँ समानांतर चलती हैं और जड़ें झकड़ा होती हैं; जबकि द्विबीजपत्री पौधों की पत्तियों में शिराएँ जाल जैसी होती हैं और जड़ें मूसला होती हैं।
  • अलग-अलग क्षेत्रों की जैव विविधता वहाँ की अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण एक-दूसरे से भिन्न होती है।

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