RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 12 मातृवन्दना-गीतिः

Official RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit: Chapter 12 मातृवन्दना-गीतिः

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Chapter-wise Solutions for Sanskrit: Chapter 12 मातृवन्दना-गीतिः

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RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 12 वस्तुनिष्ठप्रश्नाः

 

Question 1. सुदर्शना, सुवत्सला का कथिता?
(क) प्रदेशभूः
(ख) मातृभूः
(ग) माता
(घ) स्वसृ
Answer: (ख) मातृभूः
In simple words: प्रश्न पूछता है कि "सुदर्शना" और "सुवत्सला" किसे कहा गया है। दिए गए विकल्पों में से, "मातृभूः" (मातृभूमि) सही उत्तर है।

🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सीधे अर्थ पर ध्यान दें और कविता/पाठ के मुख्य विषय से जुड़े शब्दों को पहचानें। अक्सर, शीर्षक या मुख्य विचार ही सही उत्तर की ओर संकेत करता है।

 

Question 2. पाठानसारेण किं वर्तताम?
Answer: (यह प्रश्न अधूरा है और इसका उत्तर पाठ में दिए गए संदर्भ के बिना स्पष्ट नहीं है।)
In simple words: अधूरा प्रश्न होने के कारण इसका सही उत्तर नहीं दिया जा सकता।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में, यदि कोई प्रश्न अधूरा या अस्पष्ट लगे, तो उसमें दिए गए शब्दों के आधार पर सबसे संभावित अर्थ निकालने का प्रयास करें या यदि विकल्प हों तो सबसे उपयुक्त चुनें।

 

Question 3. समस्त-सम्प्रदाय-भूषणम् किं नु भवेत्?
(क) मनुष्यता
(ख) सदाशयता
(ग) भ्रष्टता
(घ) बन्धुता
Answer: (क) मनुष्यता
In simple words: सवाल पूछता है कि सभी धर्मों और समुदायों का गहना क्या होना चाहिए। इसका सही जवाब है "मनुष्यता", यानी इंसानियत।

🎯 Exam Tip: पाठ के केंद्रीय संदेश को समझें। ऐसे प्रश्न अक्सर नैतिकता, मूल्यों या सार्वभौमिक गुणों पर आधारित होते हैं जो सभी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

 

Question 4. शस्त्रिणां महाव्रतं किं अस्ति?
(क) रक्त मण्डनं
(ख) दीनलोकमोषणं
(ग) शान्ति-खण्डनं
(घ) विपन्नरक्षणं
Answer: (घ) विपन्नरक्षणं
In simple words: प्रश्न पूछता है कि शस्त्र धारण करने वालों का सबसे बड़ा कर्तव्य क्या है। इसका सही उत्तर है "विपन्नरक्षणं", यानी गरीबों और संकटग्रस्त लोगों की रक्षा करना।

🎯 Exam Tip: 'महाव्रत' जैसे शब्द पर ध्यान दें, जो किसी समूह के सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य या सिद्धांत को दर्शाता है। यह अक्सर सुरक्षा, न्याय या सेवा से संबंधित होता है।

 

Question 5. रिक्तस्थानपूर्तिः क्रियताम् (Fill in the blanks):
(क) समृद्धि-बुद्धि-शक्तिदा __________
(ख) __________ क्षणेन लीयताम्
(ग) न दीनलोकमोषणं __________ न शोषणम्
(घ) धीयतां __________ विधीयताम्
Answer:
(क) समृद्धि-बुद्धि-शक्तिदा सदैव मुक्तश्रृङ्खला
(ख) अन्धतामसीघृणानिशा क्षणेन लीयताम्
(ग) न दीनलोकमोषणं न हीनभावपोषणम् न शोषणम्
(घ) धीयतां वीतकल्मषं हि लोकशासनम् विधीयताम्
In simple words: इन वाक्यों में खाली जगह भरनी है। हर खाली जगह में पाठ के अनुसार सही शब्द या वाक्यांश भरना था ताकि वाक्य का पूरा मतलब समझ में आए।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरने वाले प्रश्नों में, पूरे वाक्य को पढ़ें और पाठ के संदर्भ से सबसे उपयुक्त शब्द या वाक्यांश चुनें जो व्याकरणिक रूप से सही हो और अर्थ भी पूरा करता हो।

 

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 12 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नाः

 

Question 2. कस्य दूषणं न भवेत्?
Answer: सच्चरित्रस्य दूषणं न भवेत्।
In simple words: सवाल है कि किसका नुकसान नहीं होना चाहिए। जवाब है, अच्छे चरित्र वाले इंसान का नुकसान नहीं होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: 'कस्य' (किसका) जैसे प्रश्नवाचक शब्दों पर ध्यान दें, जो उत्तर में संबंधवाचक शब्द की अपेक्षा करते हैं। उत्तर में हमेशा एकवचन या बहुवचन का सही प्रयोग करें।

 

Question 3. कस्य मोषणं न भवितव्यम्?
Answer: दीनलोकस्य मोषणं न भवितव्यम्।
In simple words: प्रश्न है कि किसकी चोरी नहीं होनी चाहिए। जवाब है, गरीब लोगों का सामान नहीं लूटना चाहिए या उनकी संपत्ति पर कब्जा नहीं करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: 'मोषणं' शब्द का अर्थ केवल चोरी नहीं, बल्कि छल या बल से किसी की संपत्ति हड़पना भी है। इसलिए, उत्तर में गरीबों के शोषण को रोकने का भाव आता है।

 

Question 4. लोकशासनं कीदृशं विधीयताम्?
Answer: लोकशासनं वीतकल्मषम् विधीयताम्।
In simple words: सवाल है कि जनता का शासन कैसा होना चाहिए। जवाब है, जनता का शासन ऐसा होना चाहिए जिसमें कोई गलती या बुराई न हो, यानी वह पूरी तरह से निष्कलंक हो।

🎯 Exam Tip: 'कीदृशं' (कैसा) जैसे प्रश्नवाचक शब्द गुणवाचक विशेषण की अपेक्षा करते हैं। ऐसे प्रश्नों में पाठ में वर्णित आदर्श स्थिति को दर्शाने वाले विशेषण का उपयोग करें।

 

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 12 लघूत्तरात्मक-प्रश्नाः

 

Question 1. मातृभूः विशेषणानां वर्णनं कुरुत।
Answer: यह मातृभूमि कर्मभूमि, पुरानी, मंगलमय, प्रसिद्ध, तपस्या वाली, सुंदर, ममतामयी, अनादि धर्मों से भरी हुई, अनन्त पुण्य देने वाली, समृद्धि, बुद्धि और शक्ति प्रदान करने वाली तथा सभी बंधनों से मुक्त है। मातृभूमि हमारे लिए माता के समान है, जो हमें सब कुछ देती है।
In simple words: मातृभूमि को कर्मभूमि, पुरानी, पवित्र, प्रसिद्ध, तपस्या वाली, सुंदर, ममतामयी, धर्मों वाली, पुण्यशालिनी, समृद्धि-बुद्धि-शक्ति देने वाली और स्वतंत्र कहा गया है।

🎯 Exam Tip: जब विशेषणों का वर्णन पूछा जाए, तो पाठ में दिए गए सभी गुणों को विस्तार से लिखें। उत्तर में केवल विशेषणों की सूची नहीं, बल्कि प्रत्येक का संक्षिप्त भाव भी स्पष्ट करें।

 

Question 2. संस्कृतेः किं विभूषणम् ?
Answer: 'अनेकतासु एकता' (अनेकताओं में एकता) ही हमारी संस्कृति का आभूषण है। भारत की यह विशेषता दुनिया में अनूठी है।
In simple words: भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खूबी और उसका गहना है 'अनेकताओं में एकता'।

🎯 Exam Tip: 'विभूषणम्' (आभूषण) जैसे शब्दों के उत्तर में हमेशा उस प्रमुख विशेषता को बताएं जो पाठ में मुख्य रूप से उजागर की गई हो। अक्सर, यह एक मुहावरा या एक महत्वपूर्ण विचार होता है।

 

Question 3. शस्त्रिण महाव्रतं किं अस्ति?
Answer: सदैव विपन्नरक्षणं शस्त्रिण महाव्रतम् अस्ति। शस्त्र धारण करने वालों का परम कर्तव्य हमेशा संकटग्रस्त लोगों की रक्षा करना होता है, यह उनकी सेवा भावना को दर्शाता है।
In simple words: शस्त्र धारण करने वालों का सबसे बड़ा कर्तव्य हमेशा गरीब और संकट में पड़े लोगों की रक्षा करना है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में मुख्य क्रिया (अस्ति) और मुख्य विषय (महाव्रतम्) को पहचानकर सीधा और स्पष्ट उत्तर दें। किसी भी अतिरिक्त जानकारी से बचें जो प्रश्न में न पूछी गई हो।

 

 निबन्धात्मक प्रश्नाः

 

Question 2. सुराष्ट्रस्य लोकशासनस्य च किं अवधारणास्ति?
Answer: पाठ के अनुसार, हमारा अच्छा राष्ट्र हमेशा तरक्की करे। यहां गरीब लोगों का शोषण न हो, हीन भावना का विकास न हो, हिंसा, धोखा और अन्याय कभी भी न हो। हमेशा सबका भला सोचा जाए। भारत एक कांटे रहित और भयमुक्त जंगल की तरह हो, और जनता का शासन दोषमुक्त हो। एक आदर्श राष्ट्र में, हर नागरिक शांति और सम्मान से रहता है।
In simple words: एक अच्छे राष्ट्र में गरीबों का शोषण न हो, हीन भावना न हो, हिंसा या धोखा न हो, सबका भला हो और शासन पूरी तरह से निष्पक्ष और दोष रहित हो।

🎯 Exam Tip: 'अवधारणा' जैसे प्रश्नों में, पाठ में वर्णित आदर्श स्थिति या सिद्धांतों को विस्तार से बताएं। सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को संक्षेप में शामिल करें।

 

Question 3. संस्कृतेः संरक्षणाय किं कर्तव्यम्?
Answer: पाठ के अनुसार, संस्कृति की रक्षा के लिए किसी भी तरह की भ्रष्टता या अच्छे चरित्र का नुकसान नहीं होना चाहिए। मनुष्यता सभी धर्मों का आभूषण बने। सभी लोग अलग-अलग रास्ते पर चलकर भी एक-दूसरे से बंधुता (भाईचारे) का व्यवहार करें। अनेकताओं में एकता ही हमारी संस्कृति की शोभा बने। सभी लोग हमेशा भाईचारे की अमृतमयी भावना का पान करें। संस्कृति को बचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
In simple words: संस्कृति की रक्षा के लिए हमें ईमानदारी, अच्छा चरित्र, मनुष्यता, भाईचारा और अनेकता में एकता की भावना रखनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: 'किं कर्तव्यम्' (क्या करना चाहिए) जैसे प्रश्नों में, पाठ में बताए गए उपायों, मूल्यों और कार्यों की सूची बनाएं। उत्तर में क्रमबद्धता और स्पष्टता रखें।

 

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 12 व्याकरणात्मक-प्रश्नाः

 

Question 1. अधोलिखितेषु पदेषु नामोल्लेखपुरस्सरसन्धिः कार्यः (निम्नलिखित पदों में सन्धि करके नाम लिखिए):
Answer:

पदानिसन्धिःसन्धिनाम
(क) \( एव + इति \)\( एवेति \)गुणसन्धिः
(ख) \( सन्निपत्य + अभियुक्तः \)\( सन्निपत्याभियुक्तः \)दीर्घसन्धिः
(ग) \( कुतो + नु + एष \)\( कुतोन्वेष \)यण्सन्धिः
(घ) \( निः + अनुक्रोशा \)\( निरनुक्रोशा \)रुत्वसन्धिः
(ङ) \( आर्यपुत्रस्य + उल्लापाः \)\( आर्यपुत्रस्योल्लापाः \)गुणसन्धिः

In simple words: यहां दिए गए अलग-अलग शब्दों को जोड़कर सन्धि बनाई गई है और फिर बताया गया है कि वह कौन सी सन्धि है, जैसे स्वर सन्धि का एक प्रकार गुणसन्धि या व्यंजन सन्धि का रुत्वसन्धि।
🎯 Exam Tip: सन्धि करते समय स्वरों और व्यंजनों के मेल के नियमों को ध्यान से याद रखें। प्रत्येक सन्धि का सही नाम बताना भी आवश्यक है।

 

Question 2. अधो-निर्दिष्टानां सन्धिपदानां सन्धि-नाम-निर्देशपूर्वक-विच्छेदो विधेयः (निम्नलिखित सन्धिपदों का सन्धि नाम बताते हुए विच्छेद कीजिए):
Answer:

सन्धिपदम्विच्छेदःसन्धिनाम
(क) हुतात्मभिः\( हुत + आत्मभिः \)दीर्घसन्धिः
(ख) भवेन्न\( भवेत् + न \)जश्त्व.
(ग) चैकता\( च + एकता \)वृद्धि.
(घ) संस्कृतेर्विभूषणं\( संस्कृतेः+विभूषणम् \)रुत्व.
(ङ) \( + इयम् \)(अधूरा)रुत्व.


In simple words: यहां जुड़े हुए शब्दों को अलग-अलग करके दिखाया गया है, जिसे सन्धि-विच्छेद कहते हैं, और साथ ही यह भी बताया गया है कि किस नियम से वे शब्द जुड़े थे।
🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद करते समय मूल शब्दों की पहचान करना महत्वपूर्ण है। विच्छेद के बाद भी दोनों शब्दों का अर्थ स्पष्ट होना चाहिए और सन्धि के नियम का पालन होना चाहिए।

 

समास विग्रह और समास नाम

 

Question: निम्नलिखित पदों के समास विग्रह और समास के नाम लिखिए।
Answer:

पदम्विग्रहःसमासनाम
(ख) अकण्टकम्न कण्टकम्नञ् तत्पुरुषः
(ग) वीतकल्मषम्वीतं कल्मषं यस्य तम्कर्मधारयः
(घ) लोकशासनम्लोकस्य शासनम्षष्ठी तत्पुरुषः
(ङ) मातृवन्दनामातुः वन्दनाषष्ठी तत्पुरुषः


In simple words: यहां कुछ शब्दों को उनके अर्थ के अनुसार अलग-अलग करके दिखाया गया है, जिसे समास-विग्रह कहते हैं। साथ ही, यह भी बताया गया है कि वह किस तरह का समास है, जैसे 'तत्पुरुष' या 'कर्मधारय'।
🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, पद के अर्थ को समझना और कारक चिह्नों (जैसे 'का', 'की', 'के') पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। इससे सही समास का प्रकार पहचानने में मदद मिलती है।

 

Question 4. अधोनिर्दिष्टेषु पदेषु शब्द-विभक्ति-वचन-निर्देशं कुरुत – (निम्नलिखित पदों में मूल शब्द, विभक्ति और वचन बताइए):
Answer:

पदम्शब्दःविभक्तिःवचनम्
(क) स्वरेणस्वरतृतीयाएकवचनम्
(ख) दिक्षुदिशन्सप्तमीबहुवचनम्
(ग) शस्त्रिणाम्शस्त्रिन्षष्ठीबहुवचनम्
(घ) काननम्काननद्वितीयाएकवचनम्
(ङ) सुपर्णकैःसुपर्णकतृतीयाबहुवचनम्


In simple words: इस तालिका में दिए गए शब्दों का मूल रूप, वे कौन सी विभक्ति में हैं (जैसे कर्ता, कर्म, करण) और वे एकवचन में हैं या बहुवचन में, यह बताया गया है।
🎯 Exam Tip: शब्द-रूपों को याद रखना इस प्रकार के प्रश्नों के लिए आवश्यक है। प्रत्येक विभक्ति और वचन के प्रत्ययों को पहचानना सीखें।

 

Question 5. निम्नलिखितानां तिङन्तपदानां धातुः लकारः पुरुषः वचनञ्च पृथक निर्दिश्यताम् – (निम्नलिखित क्रियापदों में धातु, लकार, पुरुष और वचन अलग-अलग करके बताइए):
Answer:

तिङन्तपदम्धातुःलकारःपुरुषःवचनम्
(क) चीयताम्चिलोट्प्रथमःएकवचनम्
(ख) समाहृतम्सम्, आ\(+हृ\)लङ्प्रथमःएकवचनम्
(क्तप्रत्यय)
(ग) वर्तताम्वृत्लोट्प्रथमःएकवचनम्
(घ) प्रवर्धताम्प्र \(+ वर्ध\)लोट्प्रथमःएकवचनम्
(ङ) विधीयताम्वि \(+ धी\)लोट्प्रथमःएकवचनम्
(च) भवेत्भूविधिलिङ्प्रथमःएकवचनम्


In simple words: यह तालिका क्रियापदों को तोड़कर उनके मूल धातु (क्रिया का जड़), लकार (काल), पुरुष (पहला, दूसरा, तीसरा व्यक्ति) और वचन (एकवचन, बहुवचन) को दिखाती है।
🎯 Exam Tip: धातु-रूपों को याद रखना और उनके विभिन्न लकारों, पुरुषों और वचनों को पहचानना इस प्रकार के प्रश्नों के लिए अत्यंत आवश्यक है। मूल धातु को पहचानना पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

 

Question 6. निम्नलिखितेषु पदेषु प्रकृतिः प्रत्ययश्च पृथक् लिख्यताम् (निम्नलिखित पदों में प्रकृति (मूल शब्द) और प्रत्यय अलग करके लिखिए):
Answer:

पदम्प्रकृतिःप्रत्ययः
(घ) मनुष्यतामनुष्यतल्
(ङ) भारतम्भृअण्, क्त


In simple words: इस तालिका में कुछ शब्दों को उनके मूल हिस्से (प्रकृति) और बाद में जुड़े हुए भाग (प्रत्यय) में बांटा गया है, जिससे उनका अर्थ या व्याकरणिक रूप बदल जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रकृति-प्रत्यय के प्रश्नों में, मूल शब्द या धातु को सही ढंग से पहचानना सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्यय अक्सर शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ या व्याकरणिक श्रेणी को बदलते हैं।

 

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 12 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

1. शब्दार्थः

 

Question 1. अधोलिखितशब्दानां हिन्द्याम् अर्थं लिखत (निम्नलिखित शब्दों का हिंदी में अर्थ लिखिए):
Answer:

शब्दाःअर्थाः
(i) कर्मभूःकर्मभूमि
(ii) मुक्तश्रृङ्खलास्वतन्त्रता
(iii) भृशम्अत्यधिक
(iv) दिक्षुदिशाओं में
(v) सुपर्णकैःगरुड़ पक्षियों द्वारा
(vi) हुतात्मभिःकान्तिमानों (बलिदानियों) द्वारा
(vii) प्रभारतम्कान्तिमान्
(viii) भ्रष्टताभ्रष्टाचार
(ix) मण्डनाःसुशोभित
(x) सुधाअमृत
(xi) मुदाप्रसन्नतापूर्वक
(xii) मोषणम्ठगना, नष्ट करना।

In simple words: इस तालिका में संस्कृत शब्दों को उनकी हिंदी में बताया गया है, जिससे पाठ को समझना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: शब्दार्थ याद रखना पाठ को समझने और प्रश्नों का उत्तर देने की नींव है। कठिन शब्दों के अर्थ को बार-बार दोहराएं।

 

2. प्रश्ननिर्माणम्प्रश्नः

 

Question. रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए):
Answer:
1. का मधुरस्वरेण गीयताम्?
2. मातृभूमिः कीदृशी अस्ति?
3. इयं भूः का वर्तते?
4. का सदैव स्वतन्त्रता अस्ति?
5. भारतीयशः कुत्र चीयताम्?
6. कैः स्वतन्त्रतामृतं समाहृतम्?
7. हुतात्मभिः किं समर्पितम्?
8. तत्र किम् न भवेत्?
9. विपन्नरक्षणं केषां महाव्रतं भवेत्?
10. का क्षणेन लीयताम्?
11. कचित् का न भवेत्?
12. किम् समस्तसम्प्रदायभूषणं भवेत्?
13. का सदैव पीयताम्?
14. किम् प्रवर्धताम्?
15. कीदृशं लोकशासनं विधीयताम्?
In simple words: यहां दिए गए वाक्यों में कुछ शब्दों को हटाकर प्रश्नवाचक शब्द लगाकर प्रश्न बनाए गए हैं, जैसे 'कौन', 'कैसा', 'क्या' आदि।

🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, रेखांकित शब्द की विभक्ति और वचन को पहचानें और उसके अनुसार उचित प्रश्नवाचक शब्द (किम्, कः, का, कुत्र, कदा, कथम् आदि) का प्रयोग करें।

 

3. भावार्थलेखनम्

 

Question 3. अधोलिखितवाक्यानां हिन्दीभाषया भावार्थं लिखत (निम्नलिखित वाक्यों का हिंदी भाषा में भावार्थ लिखिए):
(i) मातृभूरियं कर्मभूः पुराणमङ्गला।
(ii) हुतात्मभिः समर्पितं प्रभारतं सुभारतम्।
(iii) मनुष्यता भवेत् समस्तसम्प्रदायभूषणम्।
(iv) अनेकतासु चैकता हि संस्कृतेर्विभूषणम्।
Answer:
(i) मातृभूरियं कर्मभूः पुराणमङ्गला
भावार्थ- यह पंक्ति 'मातृवन्दना-गीति' पाठ से ली गई है। यह पाठ डॉ. हरिराम आचार्य द्वारा लिखे गए 'मधुच्छन्दा' नामक गीतिकाव्य का हिस्सा है। इस पंक्ति में मातृभूमि की प्रशंसा करते हुए उसके स्वरूप और उसकी खासियतों को बताया गया है। इसका मतलब है कि यह मातृभूमि हमारी कर्मभूमि है, जहां हम काम करते हैं, और यह प्राचीन काल से ही शुभ और पवित्र है।

(ii) हुतात्मभिः समर्पितं प्रभारतं सुभारतम्।
भावार्थ- इस पंक्ति का भाव यह है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने कई सालों की गुलामी के बाद इस तेजस्वी भारत को आजाद कराया और हमें समर्पित किया है। इसलिए अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस देश की रक्षा करें। हमें उनके बलिदानों को बेकार नहीं जाने देना चाहिए। हमें भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करके सभी जगह भाईचारे की भावना फैलानी चाहिए और इस तेजस्वी भारत की शान बढ़ानी चाहिए। वीर बलिदानियों का यह त्याग भारत को और मजबूत बनाता है।

(iii) मनुष्यता भवेत् समस्तसम्प्रदायभूषणम्।
भावार्थ- 'मातृवन्दना-गीति' पाठ की इस पंक्ति में इसके लेखक डॉ. हरिराम आचार्य कहते हैं कि भारत जैसे देश में सभी धर्मों और समुदायों का गहना इंसानियत होनी चाहिए। मानव मात्र का कल्याण करने की भावना ही सभी धर्मों का मूल आधार होना चाहिए। कोई भी समुदाय इंसानियत के बिना शोभा नहीं पाता। इसलिए, हमें एक-दूसरे से नफरत छोड़ कर मानवता के धर्म को अपनाना चाहिए और भाईचारे से रहना चाहिए, तभी हमारा राष्ट्र एक अच्छा राष्ट्र बन पाएगा। इंसानियत ही समाज को एक सूत्र में बांधती है।

(iv) अनेकतासु चैकता हि संस्कृतेर्विभूषणम्
भावार्थ- 'मातृवन्दना-गीति' पाठ की यह पंक्ति भारतीय संस्कृति की खासियत को बताती है। इसका मतलब है कि 'अनेकता में एकता' ही भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा आभूषण है। पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति को सबसे ऊंचा स्थान इसीलिए मिला है क्योंकि यहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग रहते हुए भी सब एक हैं। सभी धर्मों का मूल लक्ष्य इंसानियत है। इसलिए यहां अनेकता में भी एकता दिखती है। सभी लोग अपने-अपने धर्म का पालन करते हुए भी भारत के लिए समर्पित हैं। एकता की भावना ही भारतीय संस्कृति की सुंदरता है। यह विविधता में भी सामंजस्य बनाए रखती है।
In simple words: भावार्थ में बताया गया है कि मातृभूमि कर्मभूमि और पवित्र है, शहीदों ने हमें तेजस्वी भारत दिया है, मनुष्यता सभी धर्मों का गहना है, और अनेकता में एकता ही भारतीय संस्कृति की पहचान है।

🎯 Exam Tip: भावार्थ लिखते समय, पहले पंक्ति का सीधा अर्थ बताएं, फिर उसके गहरे अर्थ और पाठ के संदर्भ में उसके महत्व को स्पष्ट करें। वाक्य को सरल और समझने योग्य बनाएं।

 

4. पाठ्यपुस्तकाधारितं भाषिककार्यम्

 

(क) कर्तृक्रियापदयोः चयनं कुरुत (कर्ता और क्रिया पदों का चयन कीजिए)

 

Question. निम्नलिखित वाक्यों में कर्ता और क्रिया पदों का चयन कीजिए।
(i) अद्य
(ii) मातृभूरियं हि पुराणमङ्गला वर्तते।
(iii) भारतीयशो भृशं समस्तदिक्षु चीयताम्।
(iv) भवेत् कचिन्न भ्रष्टता।
(v) मनुष्यता भवेत् समस्तसम्प्रदायभूषणम्।
(vi) हितैषितैव वर्तताम्।
(vii) सुराष्ट्रकं प्रवर्धताम्।
Answer:
(i) कर्ता: अद्य (यह अधूरा पद है, इसे पूर्ण वाक्य के रूप में नहीं लिया जा सकता।)
(ii) कर्ता: मातृभूरियम्, क्रिया: वर्तते
(iii) कर्ता: भारतीयशः, क्रिया: चीयताम्
(iv) कर्ता: भ्रष्टता, क्रिया: भवेत्
(v) कर्ता: मनुष्यता, क्रिया: भवेत्
(vi) कर्ता: हितैषिता, क्रिया: वर्तताम्
(vii) कर्ता: सुराष्ट्रकम्, क्रिया: प्रवर्धताम्
In simple words: हर वाक्य में यह पहचानना था कि काम करने वाला कौन है (कर्ता) और क्या काम हो रहा है (क्रिया)।

🎯 Exam Tip: कर्ता वह होता है जो क्रिया को करता है, और क्रिया वह होती है जो काम या स्थिति को दर्शाती है। संस्कृत में कर्ता अक्सर प्रथमा विभक्ति में होता है।

 

(ख) विशेषणविशेष्यचयनम्

 

Question (i). 'मधुस्वरेण गीयताम्' इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: मधु
In simple words: 'मधुस्वरेण गीयताम्' में 'मधु' शब्द विशेषण है, क्योंकि यह 'स्वर' (आवाज) की विशेषता बता रहा है कि वह मधुर है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए। विशेष्य वह होता है जिसकी विशेषता बताई जाए।

 

Question (ii). 'मातृभूरियं हि कर्मभूः' इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: मातृभूः।
In simple words: 'मातृभूरियं हि कर्मभूः' वाक्य में 'मातृभूः' विशेष्य है, क्योंकि इसकी विशेषता 'कर्मभूः' के रूप में बताई गई है।

🎯 Exam Tip: विशेष्य को खोजने के लिए, पहले विशेषण को पहचानें। विशेषण जिस शब्द के बारे में बता रहा हो, वही विशेष्य होता है।

 

Question (iii). 'भारतीयशो भृशं चीयताम्' इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: यशः
In simple words: 'भारतीयशो भृशं चीयताम्' में 'यशः' विशेष्य है, क्योंकि 'भारतीय' और 'भृशं' इसके विशेषण हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कृत में विशेषण और विशेष्य में लिंग, वचन और विभक्ति की समानता होती है, जिससे उन्हें पहचानना आसान हो जाता है।

 

Question (iv). 'समर्पितं प्रभारतं सुभारतम्' इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: प्रभारतम्
In simple words: 'समर्पितं प्रभारतं सुभारतम्' में 'प्रभारतम्' विशेषण है, जो 'सुभारतम्' की विशेषता बता रहा है।

🎯 Exam Tip: कई बार एक शब्द दूसरे शब्द का विशेषण बन सकता है, खासकर जब दोनों किसी चीज के गुणों का वर्णन कर रहे हों।

 

Question (v). 'अन्धतामसीघृणानिशा क्षणेन लीयताम्' इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: निशा।
In simple words: 'अन्धतामसीघृणानिशा क्षणेन लीयताम्' वाक्य में 'निशा' विशेष्य है, क्योंकि 'अन्धतामसीघृणा' उसकी विशेषता बता रहा है।

🎯 Exam Tip: लंबे सामासिक पदों में, अंतिम पद अक्सर विशेष्य होता है, और उससे पहले के पद विशेषण के रूप में कार्य करते हैं।

 

Question (vi). 'अकण्टकं नु भारतं भवेत्' इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: अकण्टकम्
In simple words: 'अकण्टकं नु भारतं भवेत्' में 'अकण्टकम्' विशेषण है, जो 'भारतं' की विशेषता बता रहा है।

🎯 Exam Tip: विशेषण को पहचानने का एक और तरीका यह है कि यह आमतौर पर 'कैसा', 'कितना' या 'कौन सा' का जवाब देता है।

 

(ग) समानविलोमपदचयनम्

 

Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां पर्यायबोधकपदानि लिखत (निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों के पर्यायवाची शब्द लिखिए):
Answer:
1. सुविख्याता (सुविश्रुता का पर्यायवाची)
2. मतिः (बुद्धि का पर्यायवाची)
3. स्वतन्त्रता (मुक्तश्रृङ्खला का पर्यायवाची)
4. अत्यधिकम् (भृशं का पर्यायवाची)
5. कान्तिमत् (प्रभारतम् का पर्यायवाची)
6. रात्रिः (निशा का पर्यायवाची)
In simple words: यहां दिए गए शब्दों के समान अर्थ वाले दूसरे शब्द बताए गए हैं, जिन्हें पर्यायवाची कहते हैं।

🎯 Exam Tip: पर्यायवाची शब्द याद करते समय, उन शब्दों के विभिन्न संदर्भों को भी समझें जहां उनका उपयोग किया जा सकता है। इससे वाक्य में सही शब्द का चयन करने में मदद मिलती है।

 

Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां विलोमपदानि लिखत (निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों के विलोम शब्द लिखिए):
Answer:
1. शान्ति-खण्डनम् \( \implies \) अशान्ति-निर्माणम्
2. विपन्न-रक्षणं \( \implies \) समृद्ध-त्यागः
3. सच्चरित्र-दूषणम् \( \implies \) दुश्चरित्र-भूषणम्
4. अनेकतासु \( \implies \) एकत्वे
5. बन्धु-भावना \( \implies \) शत्रुता-भावना
6. हीनभाव-पोषणम् \( \implies \) उच्चभाव-प्रसारणम्
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए शब्दों के ठीक उलट अर्थ वाले शब्द बताए गए हैं, जिन्हें विलोम शब्द कहते हैं।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय, मूल शब्द के अर्थ को सटीक रूप से समझें और फिर उसके विपरीत अर्थ वाले शब्द को चुनें। ध्यान रखें कि संस्कृत में विलोम शब्द अक्सर उपसर्ग (जैसे अ-, दु-) लगाकर भी बनते हैं।

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