NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit: Chapter 11 नीत्या स्वकार्यं साधनीयम्
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Practice Class 12 Sanskrit Solutions: Chapter 11 नीत्या स्वकार्यं साधनीयम्
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RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 11 वस्तुनिष्ठप्रश्नाः
Question 1. 'नीत्या स्वकार्यं साधनीयम्' पाठः समुद्धृतोऽस्ति?
(क) पञ्चतन्त्रात्
(ख) हितोपदेशात्
(ग) दशकुमारचरितात्
(घ) कादम्बरीतः
Answer: (क) पञ्चतन्त्रात्
In simple words: 'नीत्या स्वकार्यं साधनीयम्' पाठ "पंचतंत्र" नामक ग्रंथ से लिया गया है। यह कहानी सिखाती है कि बुद्धि का उपयोग करके अपने काम कैसे पूरे करें।
🎯 Exam Tip: संस्कृत साहित्य में "पञ्चतन्त्र" और "हितोपदेश" जैसे नीतिग्रंथों के नाम और उनकी मुख्य शिक्षाएँ याद रखें।
Question 2. पञ्चतन्त्रस्य रचयिता वर्तते?
Answer: विष्णुशर्मा
In simple words: "पञ्चतन्त्र" नामक कहानी संग्रह को विष्णुशर्मा ने लिखा था। उन्होंने यह ग्रंथ राजकुमारों को शिक्षा देने के लिए बनाया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख संस्कृत ग्रंथों और उनके लेखकों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. भो भगिनीसुत कथमतिचिरात् दृष्टोऽसि? अत्र' भगिनीसुत' शब्दः प्रयुक्तोऽस्ति
(क) सिंहाय।
(ख) जम्बुकाय
(ग) चित्रकाये
(घ) व्याघ्राय।
Answer: (ग) चित्रकाये
In simple words: "भो भगिनीसुत कथमतिचिरात् दृष्टोऽसि?" इस वाक्य में 'भगिनीसुत' शब्द तेंदुए (चित्रक) के लिए इस्तेमाल किया गया है। यह शब्द मामा द्वारा अपने भांजे के लिए उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: कहानी के पात्रों के लिए उपयोग किए गए विशेषण और संबोधन शब्दों को ध्यान से समझें, क्योंकि वे अक्सर उनके संबंधों या गुणों को दर्शाते हैं।
Question 4. 'नाहमन्येन हतं सत्त्वं कदाचिदपि भक्षयामि'- इति कस्य कथनम्?
(क) सिंहस्य
(ख) चित्रकस्य।
(ग) शृगालस्य
(घ) व्याघ्रस्य।
Answer: (क) सिंहस्य
In simple words: "नाहमन्येन हतं सत्त्वं कदाचिदपि भक्षयामि" का अर्थ है "मैं किसी और के मारे हुए जीव को कभी नहीं खाता"। यह बात शेर (सिंह) ने कही थी।
🎯 Exam Tip: कथानक में प्रमुख संवादों को याद रखें और यह भी पहचानें कि कौन सा संवाद किस पात्र द्वारा कहा गया है।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 11 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नाः
Question 1. वनप्रदेशे किम् नाम शृगालः वसति स्म?
Answer: वन में महाचतुरक नाम का एक सियार रहता था। यह सियार बहुत होशियार था और अपनी बुद्धि से मुश्किलों को हल करता था।
In simple words: जंगल में महाचतुरक नाम का एक चालाक सियार रहता था।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों और उनके नामों को याद रखें।
Question 2. महाचतुरकः अरण्ये स्वयं कः प्राप्तः?
Answer: महाचतुरक को जंगल में खुद ही एक मरा हुआ हाथी मिला। यह उसके लिए एक बड़ा अवसर था।
In simple words: महाचतुरक को जंगल में एक मरा हुआ हाथी मिला।
🎯 Exam Tip: कहानी की प्रमुख घटनाओं और उनके क्रम को याद रखें।
Question 3. 'स्वामिन् त्वदीयोऽहं लागुडिकः स्थितः .....' इति कः कथयति?
Answer: 'स्वामिन् त्वदीयोऽहं लागुडिकः स्थितः .....' यह वाक्य सियार (शृगालः) कहता है। वह अपनी बुद्धिमत्ता से दूसरों को धोखा देने के लिए इस बात का उपयोग करता है।
In simple words: "हे स्वामी, मैं आपका पहरेदार हूँ..." यह बात सियार कहता है।
🎯 Exam Tip: यह ध्यान दें कि कहानी में कौन सा पात्र कौन सा संवाद कहता है और किस उद्देश्य से कहता है।
Question 5. गते व्याघ्र तत्र कः समायातः?
Answer: जब शेर चला गया, तो वहाँ एक तेंदुआ (चित्रकः) आया। वह भी उस मरे हुए हाथी को खाने की उम्मीद में आया था।
In simple words: शेर के जाने के बाद, वहाँ एक तेंदुआ आया।
🎯 Exam Tip: कहानी में पात्रों के आने-जाने के क्रम को याद रखें, क्योंकि यह घटनाओं के विकास में महत्वपूर्ण होता है।
Question 6. भो भागिनेय देहि में प्राणदक्षिणाम् इति कस्य कथनमस्ति?
Answer: 'भो भागिनेय देहि में प्राणदक्षिणाम्' यह कथन तेंदुए (चित्रकस्य) का है। वह सियार से अपने प्राण बचाने की भीख मांगता है।
In simple words: "हे भांजे, मेरे प्राणों की रक्षा करो" यह बात तेंदुआ कहता है।
🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख संवादों को याद रखें और यह भी पहचानें कि कौन सा संवाद किस पात्र द्वारा कहा गया है।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्नाः
Question 1. पञ्चतन्त्रस्य रचयितुः परिचयो दीयताम्?
Answer: पञ्चतन्त्र के रचयिता विष्णुशर्मा थे। वे एक महान नीतिज्ञ, कुशल शिक्षक और विद्वान व्यक्ति थे। उनकी शिक्षा से राजा अमरशक्ति के तीन मूर्ख पुत्र बहुत कम समय में ही विद्वान और नीति-निपुण बन गए थे। उन्होंने कहानियों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान दिया।
In simple words: पञ्चतन्त्र को विष्णुशर्मा ने लिखा था। वे एक महान शिक्षक और विद्वान थे, जिन्होंने राजा अमरशक्ति के बेटों को कहानियों से बुद्धिमान बनाया।
🎯 Exam Tip: जब किसी लेखक का परिचय देना हो, तो उनके मुख्य कार्यों, गुणों और प्रमुख योगदानों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. पञ्चतन्त्रस्य किं वैशिष्ट्यम्?
Answer: पञ्चतन्त्र नीति-कथा साहित्य का पहला ग्रंथ है। इसमें पशु-पक्षियों की रोचक कहानियों के माध्यम से नीतिगत व्यवहार की प्रेरणा दी गई है। पञ्चतन्त्र की कथात्मक शिक्षा से लोग बहुत कम समय में ही विद्वान और नीति-निपुण बन जाते हैं। यह ग्रंथ जीवन के सिद्धांतों को मनोरंजक तरीके से सिखाता है।
In simple words: पञ्चतन्त्र नीति-कथाओं का पहला ग्रंथ है। यह पशु-पक्षियों की कहानियों से लोगों को अच्छे व्यवहार और ज्ञान की शिक्षा देता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी ग्रंथ की विशेषताएँ बताते समय, उसकी शैली, विषय-वस्तु और उसके मुख्य उद्देश्य पर ध्यान दें।
Question 3. महाचतुरेण शृगालेन सिंहः कथम् अपवारितः?
Answer: महाचतुर सियार ने सिंह को सामनीति (शांतिपूर्ण छल) से दूर भगाया। उसने आते हुए सिंह को देखकर प्रणाम किया और उससे कहा, "स्वामी, मैं आपका पहरेदार हूँ और आपके लिए इस हाथी की रक्षा कर रहा हूँ। आप इसे खा सकते हैं।" उसकी विनम्रता देखकर सिंह वहाँ से चला गया। सियार की चतुराई ने उसे बिना किसी लड़ाई के अपना काम पूरा करने में मदद की।
In simple words: चालाक सियार ने सिंह को आदर और छल से दूर भगाया। उसने सिंह को अपना सेवक बताया और कहा कि वह हाथी की रक्षा कर रहा है, जिससे सिंह संतुष्ट होकर चला गया।
🎯 Exam Tip: पात्रों के व्यवहार और उनकी रणनीतियों का विश्लेषण करें, खासकर जब वे किसी समस्या को हल करते हैं।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्नाः
Question 1. 'नीत्या स्वकार्यं साधनीयम्' कथानुसारेण शृगालस्य चरित्र-चित्रणं कुरुत?
Answer: प्रस्तुत कथा के अनुसार, महाचतुरक नामक सियार बहुत बुद्धिमान, महाचतुर, नीतिज्ञ, कुशल वक्ता और पराक्रमी था। उसे जंगल में एक मरा हुआ हाथी मिला, लेकिन वह उसकी मोटी चमड़ी को नहीं भेद पा रहा था। तभी वहाँ एक सिंह आया। उसे देखकर सियार ने सामनीति का प्रयोग किया, उसे प्रणाम किया और अपनी वाक्पटुता से सिंह को प्रसन्न करके उसे वहाँ से भगा दिया। इसके बाद एक बाघ आया। उस शूर बाघ को भी सियार ने भेदनीति (भेदभाव की नीति) और अपनी बुद्धिमत्ता से दूर भगा दिया। फिर एक तेंदुआ आया, जो मजबूत दाँतों वाला था। सियार ने दाननीति (दान का छल) और अपनी वाक्पटुता से उस तेंदुए से हाथी की खाल कटवा ली और सिंह के डर से उसे भी भगा दिया। अंत में, एक और सियार आया। उसे देखकर महाचतुरक ने अपने पराक्रम से उसे भी हरा दिया और सुखपूर्वक लंबे समय तक हाथी का मांस खाया। यह दिखाता है कि बुद्धि और रणनीति से कठिन काम भी किए जा सकते हैं।
In simple words: कहानी के अनुसार, महाचतुरक सियार बहुत चालाक, बुद्धिमान और निपुण था। उसने अपनी बातों और चालों से पहले सिंह, फिर बाघ और तेंदुए को भगाया, और अंत में हाथी का मांस खुद खाया।
🎯 Exam Tip: चरित्र चित्रण करते समय, पात्र के गुणों, कार्यों और कहानी में उसकी भूमिका को विस्तार से समझाएँ।
Question 2. पञ्चतन्त्र ग्रन्थस्य परिचयं लिखत।
Answer: पञ्चतन्त्र नीति-कथा साहित्य का पहला ग्रंथ है। इसके रचनाकार विष्णुशर्मा थे। पञ्चतन्त्र में पहले बारह भाग थे, लेकिन आजकल केवल पाँच भाग ही मिलते हैं - मित्रभेद, मित्रलाभ, सन्धिविग्रह, लब्धप्रणाश और अपरीक्षितकारकम्। पूरे पञ्चतन्त्र में गद्य के साथ श्लोक और उपकथाएँ भी हैं। पञ्चतन्त्र का पहला अनुवाद छठी शताब्दी में पहलवी भाषा में हुआ था। विद्वानों के अनुसार, पञ्चतन्त्र की रचना ईसवीय तीसरी शताब्दी में हुई थी। यह ग्रंथ व्यवहारिक ज्ञान और नैतिकता सिखाता है।
In simple words: पञ्चतन्त्र विष्णुशर्मा द्वारा लिखा गया नीति-कथा साहित्य का पहला ग्रंथ है। इसमें पाँच मुख्य भाग हैं जो गद्य और श्लोकों में नीति सिखाते हैं। इसका पहला अनुवाद छठी शताब्दी में हुआ था।
🎯 Exam Tip: ग्रंथ परिचय में लेखक, रचनाकाल, मुख्य विषय-वस्तु, प्रमुख भाग और उसका महत्व शामिल करें।
Question 3. उपायचतुष्टयस्य वर्णनं कुरुत?
Answer: उपायचतुष्टय का अर्थ है चार उपाय - साम, दाम, दण्ड और भेद। साम नीति में प्रेम और सद्भावना से काम लिया जाता है, दाम नीति में धन या उपहार देकर कार्य सिद्ध किया जाता है। दण्ड नीति में बलपूर्वक या दंड देकर काम करवाया जाता है, जबकि भेद नीति में फूट डालकर या मतभेद पैदा करके उद्देश्य प्राप्त किया जाता है। इन चारों उपायों का उपयोग परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है।
In simple words: उपायचतुष्टय का अर्थ है चार तरीके - साम (प्यार से), दाम (पैसे से), दण्ड (सजा से), और भेद (फूट डालकर)। इनसे काम पूरा किया जाता है।
🎯 Exam Tip: 'साम, दाम, दण्ड, भेद' इन चारों उपायों को याद रखें और प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दें। यह रणनीति अक्सर राजनीति और व्यवहारिक जीवन में काम आती है।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 11 व्याकरणात्मक-प्रश्नाः
Question (क) अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा नामापि लेख्यम्
| पदम् | सन्धिविच्छेदः | सन्धिनाम |
|---|---|---|
| इतश्चेतश्च | इतश्चेतः + च | विसर्ग-सत्व |
| तस्याभिमुखो | तस्य + अभिमुखो | दीर्घसन्धिः |
| वनेऽपि | वने + अपि | पूर्वरूपसन्धिः |
| निर्व्याघ्रम् | निः + व्याघ्रम् | रुत्वसन्धिः |
| कश्चित् | कः + चित् | सत्वसन्धिः |
| व्यचिन्तयत् | वि + अचिन्तयत् | यण्सन्धिः |
| पार्श्वदस्य | पार्श्वत् + अस्य | जश्त्वसन्धिः |
🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद करते समय, शब्दों को उनके मूल भागों में तोड़ें और फिर सन्धि के नियमों के आधार पर उसका नाम पहचानें। स्वर, व्यंजन और विसर्ग सन्धि के प्रमुख भेदों को याद रखना सहायक होगा।
Question (ख) अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा तस्ये नामापि लेखनीयम्
| सामासिकपदम् | समासविग्रहः | समासनाम |
|---|---|---|
| संयोजितकरयुगलः | संयोजितं करयुगलं येन सः | बहुव्रीहिः |
| मृगमांसभक्ष्याः | मृगाणां मांसं भक्षकाः ते | बहुव्रीहिः |
| वशकारकः | वशं कारयति यःसः | बहुव्रीहिः |
| सर्वगुणसम्पन्नः | सर्वैः गुणैः सम्पन्नः | कर्मधारयः |
| उन्नतकन्धरा | उन्नतः कन्धरः यस्य सः | बहुव्रीहिः |
| अल्पप्रदानेन | अल्पेन प्रदानेन | कर्मधारयः |
| भगिनीसुत | भगिन्याः सुतः | तत्पुरुषः |
| अश्रद्धेयम् | न श्रद्धेयम् | नञ्तत्पुरुषः |
| सानन्दम् | आनन्देन सहितम् | कर्मधारयः |
🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, पद के अर्थ को समझें और फिर देखें कि पद किस संबंध को दर्शाता है। इससे समास के प्रकार को पहचानने में आसानी होगी।
Question (घ) अधोलिखितपदानां धातुः लकाराः पुरुषः वचनञ्च लेखनीयम्
| पदम् | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् |
|---|---|---|---|---|
| आसीत् | अस् | लङ् | प्रथमः | एकवचनम् |
| परिभ्रमति | परि+भ्रम् | लट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| उवाच | ब्रूञ् | लिट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| भक्षयतु | भक्ष | लोट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| भविष्यति | भू | लृट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| देहि | दा | लोट् | मध्यमः | एकवचनम् |
| सन्ति | अस् | लट् | प्रथमः | बहुवचनम् |
🎯 Exam Tip: क्रियापदों का विश्लेषण करते समय, मूल धातु को पहचानें और फिर लकार (काल), पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) निर्धारित करें।
Question (ङ) निम्नलिखितेषु पदेषु प्रकृतिः प्रत्ययश्च पृथक् लिख्यताम्
| पदम् | प्रकृतिः | प्रत्ययः |
|---|---|---|
| भेत्तुम् | भिद् | तुमुन् |
| अभिभूता | अभि + भू | क्त |
| श्रुत्वा | श्रु | क्त्वा |
| तृप्तिम् | तृप् | क्तिन् |
| कार्यम् | कृ | ण्यत् |
🎯 Exam Tip: प्रकृति और प्रत्यय को अलग करते समय, शब्द के मूल रूप (प्रकृति) को पहचानें और फिर उसमें जुड़े प्रत्यय को अलग करें। कृत् प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय के नियमों को याद रखें।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 11 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
1. शब्दार्थाः
Question 1. अधोलिखितशब्दानाम् हिन्द्याम् अर्थं लिखत
| शब्दाः | अर्थाः |
|---|---|
| (i) समन्तात् | चारों ओर |
| (ii) इतश्चेतः | इधर-उधर |
| (iii) लागुडिकः | पहरेदार |
| (iv) बुभुक्षिताः | भूखे |
| (v) नियुज्य | नियुक्त करके |
| (vi) भागिनेयः | भानजा (बहिन पुत्र) |
| (vii) द्वीपीः | चीता |
| (viii) जम्बुकः | शृगाल |
| (ix) चित्रकः | चीता |
| (x) समायाति | आता है |
🎯 Exam Tip: कठिन शब्दों के अर्थों को याद करना संस्कृत भाषा को समझने और बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
2. प्रश्ननिर्माणम्
Question 2. रेखांङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्न निर्माणं कुरुत
(i) शृगालेन अरण्ये मृतो गजः समासादितः।
(ii) परं सः कठिनां त्वचं भेत्तुं न शक्नोति।
(iii) इतस्ततः विचरन् कश्चित् सिंहः तत्र समाययौ।
(iv) बुभुक्षिताः अपि सिंहाः तृणं न चरन्ति।
(v) कुलीनाः नीतिमार्गं न परिलङ्घयन्ति।
(vi) सिंह गते कश्चित् व्याघ्रः समाययौ।
(vii) एकस्तावद् दुरात्मा प्रणिपातेन अपवाहितः।
(viii) जीवन्नरो भद्रशतानि पश्यति।
(ix) विस्रब्धो भूत्वा भक्षय त्वम्।
(x) सिंहस्य आगमनं तवाहं निवेदयिष्यामि।
(xi) तद् श्रुत्वा चित्रको दूरं प्रनष्टः।
(xii) तदैव अतिसंक्रुद्धः शृगालः समाययौ।
(xiii) समशक्तिं पराक्रमैः योजयेत्।
(xiv) उत्तमं प्रणिपातेन योजयेत्।
Answer:
1. शृगालेन अरण्ये कः समासादितः?
2. परं सः कां भेत्तुं न शक्नोति?
3. इतस्ततः विचरन् कः तत्र समाययौ?
4. बुभुक्षिताः अपि के तृणं न चरन्ति?
5. कुलीनाः किम् न परिलङ्घयन्ति?
6. सिंह गते कः समाययौ?
7. एकस्तावद् दुरात्मा केन अपवाहितः?
8. शूरोऽयं कम् विना साध्यो न भविष्यति?
9. सर्वगुणसम्पन्नोऽपि केन बध्यते?
10. एषः गजः केन व्यापादितः।
11. तद्धिनादारभ्य कान् प्रति प्रकुपितोऽस्मि?
12. गते व्याघ्र तत्र कः समायातः?
13. कस्य मांस भक्षयित्वा द्रुततरं व्रज?
14. जीवन्नरो कानि पश्यति?
15. कीदृशो भूत्वा भक्षय त्वम्?
16. कस्य आगमनं तवाहं निवेदयिष्यामि?
17. तद् श्रुत्वा कः दूरं प्रनष्टः?
18. तदैव कीदृशः शृगालः समाययौ?
19. समशक्तिं कैः योजयेत्?
20. कम् प्रणिपातेन योजयेत्?
In simple words: दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों की जगह प्रश्नवाचक शब्द लगाकर, ऐसे प्रश्न बनाएँ जिनका उत्तर वही रेखांकित शब्द हो। इससे वाक्य का अर्थ भी समझ आता है।
🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, रेखांकित पद के लिंग, वचन और विभक्ति को पहचानें और उसी के अनुसार उचित 'किम्' शब्द का प्रयोग करें।
3. भावार्थलेखनम्
प्रस्तुत पद्यांश 'नीत्या स्वकार्यं साधनीयम्' शीर्षक पाठ से उद्धृत है। मूलतः इस पाठ में वर्णित कथा 'पञ्चतन्त्र' से संकलित है। इसमें प्रेरणा दी गई है कि बुद्धिमान् व्यक्ति नीतिपूर्वक अपना कार्य सिद्ध करते हैं। एक चतुर शृगाल को वन में एक मरा हुआ हाथी प्राप्त होता है। तभी वहाँ एक सिंह आ जाता है। उसे दूर हटाने के लिए शृगाल सामनीति का प्रयोग करता है। वह अत्यन्त विनम्रतापूर्वक सिंह को प्रणाम करके उस मरे हुए हाथी को खाने का निवेदन करता है। सिंह उसकी विनम्रता से प्रसन्न होकर कहता है कि मैं अन्य किसी के द्वारा मारा गया जीव नहीं खाता हूँ। इसी प्रसंग में प्रस्तुत कथन सिंह द्वारा कहा गया है। इसका भाव यह है कि वन में मृगों को स्वयं मारकर उनका मांस खाने वाले सिंह भूखे होने पर भी कभी घास नहीं खाते हैं। अर्थात् सिंह चाहे भूख से पीड़ित ही क्यों न हो वे अपने श्रेष्ठ स्वभाव का त्याग नहीं करते हैं।
Question 3. भावार्थलेखनम्
(i) वनेऽपि सिंहा मृगमांसभक्ष्याः बुभुक्षिताः तृणं न चरन्ति।
(ii) एवं कुलीना: नीतिमार्गं न परिलङ्घयन्ति।
(iii) जीवन्नरो भद्रशतानि पश्यति।
Answer:
(i) इस पंक्ति का भाव यह है कि जंगल में, हिरण का मांस खाने वाले शेर, भले ही भूखे हों, कभी घास नहीं खाते। इसका मतलब है कि महान व्यक्ति अपना स्वभाव नहीं छोड़ते, चाहे कितनी भी कठिनाई हो।
(ii) इस पंक्ति का भाव यह है कि महान कुल में उत्पन्न होने वाले लोग हमेशा नीति के मार्ग का पालन करते हैं। वे कठिन से कठिन विपत्तियों से पीड़ित होने पर भी नीति के मार्ग का उल्लंघन नहीं करते हैं। जैसे वन में जीवों को स्वयं मारकर उनका मांस खाने वाला सिंह भूख से पीड़ित होने पर भी घास नहीं खाता है, उसी प्रकार कुलीन व्यक्ति विपत्तिग्रस्त होने पर भी अपने महान् नीतिमार्ग का त्याग नहीं करते हैं।
(iii) इस पंक्ति का भाव यह है कि जो व्यक्ति जीवित रहता है, वह सैकड़ों शुभ अवसरों को देखता है। अर्थात् यदि व्यक्ति जीवित ही नहीं रहेगा तो सभी सुख व्यर्थ हैं। यदि जीवित है तो अनेकों सुखों का वह उपभोग कर सकता है। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति अपने प्राणों की रक्षा करता है। थोड़े से लालच में जीवन को व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए। कहा भी गया है- "जान है तो जहान है।"
In simple words: यह भाग श्लोकों के गहरे अर्थ समझाता है। यह बताता है कि महान लोग मुश्किल में भी अपने नियम नहीं तोड़ते और जीवन की कीमत सबसे ऊपर है।
🎯 Exam Tip: भावार्थ लिखते समय, मूल श्लोक या वाक्य का गहरा अर्थ सरल भाषा में समझाएँ, और यदि संभव हो तो उसका नैतिक या व्यावहारिक संदेश भी दें।
5. पाठ्यपुस्तकाधारितं भाषिककार्यम्
Question (क) कर्तक्रियापदचयनम्प्रश्नः-अधोलिखितवाक्येषु कर्तृक्रियापदयोः चयनं कुरुत
(i) सः तस्य समन्तात् परिभ्रमति।
(ii) कश्चित् सिंहस्तत्रैव प्रदेशे समाययौ।
(iii) कुलीनाः नीतिमार्गं न परिलङ्घयन्ति।
(iv) शृगालः आह।
(v) व्याघ्रः समाययौ।
(vi) असौ व्यचिन्तयत्।
(vii) द्वीपीः समायातः।
(viii) नरः पश्यति।
(ix) त्वम् भक्षय।
(x) तद् श्रुत्वा चित्रको दूरं प्रनष्टः।
| कर्तृपदम् | क्रियापदम् |
|---|---|
| (i) सः | परिभ्रमति |
| (ii) सिंहः | समाययौ |
| (iii) कुलीनाः | परिलंघयन्ति |
| (iv) शृगालः | आह |
| (v) व्याघ्रः | समाययौ |
| (vi) असौ | व्यचिन्तयत् |
| (vii) द्वीपीः | समायातः |
| (viii) नरः | पश्यति |
| (ix) त्वम् | भक्षय |
| (x) चित्रकः | प्रनष्टः |
🎯 Exam Tip: किसी भी संस्कृत वाक्य में, कर्ता (क्रिया करने वाला) और क्रियापद (जो कार्य किया गया) की पहचान करना वाक्य संरचना को समझने की कुंजी है।
(ख) विशेषणविशेष्यचयनम्
Question (i) 'तेन अरण्ये मृतो गजः समासादितः। इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: मृतः।
In simple words: यहाँ 'मृतः' शब्द 'गजः' की विशेषता बता रहा है, कि हाथी मरा हुआ था।
🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, जैसे रंग, आकार, स्थिति।
Question (ii) 'परं कठिनां त्वचं भेत्तुं न शक्नोति। इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: त्वचम्।
In simple words: यहाँ 'त्वचम्' (चमड़ी) वह शब्द है जिसकी विशेषता 'कठिनां' (कठिन) शब्द बता रहा है।
🎯 Exam Tip: विशेष्य वह शब्द है जिसकी विशेषता विशेषण बताता है। विशेषण और विशेष्य का लिंग, वचन और विभक्ति समान होते हैं।
Question (iii) 'संयोजितकरयुगलः शृगालः तमुवाच।' इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: संयोजितकरयुगलः।
In simple words: 'संयोजितकरयुगलः' शब्द सियार की विशेषता बताता है, जिसका अर्थ है 'हाथ जोड़े हुए'।
🎯 Exam Tip: विशेषण को पहचानने के लिए देखें कि कौन सा शब्द संज्ञा के बारे में अधिक जानकारी दे रहा है।
(द) असौ व्यचिन्तयत् दृढदंष्ट्रोऽयं चित्रकः।
| विशेषणपदम् | विशेष्यपदम् |
|---|---|
| (अ) उन्नतकन्धरः | शृगालः |
| (ब) एषः | गज: |
| (स) सन्त्रस्तः | व्याघ्रः |
| (द) दृढदंष्ट्रः | चित्रकः |
🎯 Exam Tip: विशेषण और विशेष्य का सही मिलान करने के लिए, वाक्य के संदर्भ को समझें और पहचानें कि कौन सा शब्द किसकी विशेषता बता रहा है।
(ग) सर्वनाम-प्रयोगः -
Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखांङ्कित सर्वनामपदस्य स्थाने संज्ञापदस्य प्रयोगं कृत्वा वाक्यं पुनः लिखत
1. तेन अरण्ये मृतो गजः समासादितः।
2. तद् एनं भक्षयतु स्वामी।
3. तं प्रणतं दृष्ट्वा सिंहः प्राह।
4. अहम् अन्येन हतं सत्वं न भक्षयामि।
5. येन वनमिदं मया निर्व्याघ्रं कर्त्तव्यम्।
6. भो भागिनेयः देहि मे प्राणदक्षिणीम्।
7. मामयद्येवं तन्न कार्यं मे मांसाशनेन।
8. तस्य आगमनं दूरतोऽहं निवेदयिष्यामि।
Answer:
1. शृगालेन अरण्ये मृतो गजः समासादितः।
2. तद् मृतगजं भक्षयतु स्वामी।
3. शृगालं प्रणतं दृष्ट्वा सिंहः प्राहः।
4. सिंहः अन्येन हतं सत्वं न भक्षयति।
5. येन वनमिदं सिंहेन निर्व्याघ्रं कर्त्तव्यम्।
6. भो भागिनेय देहि व्याघ्राय प्राणदक्षिणाम्।
7. मामयद्येवं तन्न कार्यं चित्रकस्य मांसाशनेन।
8. सिंहस्य आगमनं दूरतोऽहं निवेदयिष्यामि।
In simple words: दिए गए वाक्यों में जो सर्वनाम शब्द (जैसे वह, मैं) हैं, उन्हें हटाकर उनकी जगह सही संज्ञा शब्द (जैसे सियार, सिंह) का प्रयोग करके वाक्य को दोबारा लिखें।
🎯 Exam Tip: सर्वनाम के स्थान पर संज्ञा का प्रयोग करते समय, संज्ञा को सही लिंग, वचन और विभक्ति में रखना सुनिश्चित करें ताकि वाक्य का अर्थ सही बना रहे।
(घ) समानविलोमपदचयनम्
Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां पर्यायबोधकपदानि लिखत
1. तेन अरण्ये मृतो गजः समासादितः।
2. त्वदीयोऽहं लागुडिकः गजमिमं रक्षामि।
3. तत् श्रुत्वा शृगालः सानन्दमाह।
4. एषः गजः सिंहेन व्यापादितः।
5. तत्र कश्चित् द्वीपी: समायोतः।
6. भो भागिनेयदेहि मे प्राणदक्षिणाम्।
Answer:
1. वने (जंगल)
2. प्रहरी (रक्षक)
3. सानन्दम् (प्रसन्नतापूर्वक)
4. हतः (मारा गया)
5. व्याघ्रः (चीता)
6. प्राणदानम् (जीवनदान)
In simple words: दिए गए वाक्यों में कुछ शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द (पर्यायवाची) ढूँढकर लिखें।
🎯 Exam Tip: पर्यायवाची शब्द याद रखना शब्दावली बढ़ाने और भाषा की समझ को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां विलोमार्थकपदानि लिखत
1. तेन स्वयं मृतो गजः समासादितः।
2. तदेनं भक्षयतु स्वामी।
3. बभुक्षिताः सिंहा तृणं नैव चरन्ति।
4. कुलीना: नीतिमार्गं न परिलंघयन्ति।
5. एकस्तावद् दुरात्मा प्रणिपातेन अपवाहितः।
6. सः मामेतद् रक्षणे नियुज्य नद्यां स्नानार्थं गतः।
Answer:
1. जीवितः (जीवित)
2. भृत्यः (दास/सेवक)
3. तृप्ताः (संतुष्ट)
4. अकुलीनाः (नीच कुल के)
5. महात्मा (महान आत्मा)
6. भक्षणे (खाने में)
In simple words: दिए गए वाक्यों में कुछ शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द (विलोम शब्द) ढूँढकर लिखें।
🎯 Exam Tip: विलोम शब्द याद रखना भाषा में विरोधाभासी अर्थों को समझने और सही शब्द का चुनाव करने में मदद करता है।
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