RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Sanskrit. Our expert-created answers for Class 12 Sanskrit are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit

For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Sanskrit solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य solutions will improve your exam performance.

Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 10 वस्तुनिष्ठप्रश्नाः

 

Question 1. तमसा, मुरला च का स्तः?
(क) लताद्वयम्
(ख) पात्रद्वयम्
(ग) नदीद्वयम्
(घ) सखिद्वयम्
Answer: (ग) नदीद्वयम्
In simple words: तमसा और मुरला दोनों नदियाँ हैं। इस पाठ में वे दो मित्र नदियों के रूप में दिखाई गई हैं।

🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही उत्तर का विकल्प ध्यान से चुनें, क्योंकि कई बार विकल्प मिलते-जुलते होते हैं।

 

Question 2. परित्यागोपरान्तः सीता आत्मानं कुत्र निक्षिप्तवती?
(क) गोदावरीप्रवाहे
Answer: दिए गए प्रश्न में विकल्प अपूर्ण हैं, लेकिन सीता ने त्याग के बाद स्वयं को गोदावरी नदी के प्रवाह में समर्पित किया था। यह उसकी निराशा और दुख को दर्शाता है।
In simple words: सीता ने अपने आप को गोदावरी नदी में छोड़ दिया था।

🎯 Exam Tip: जब भी किसी घटना का स्थान पूछा जाए, तो कथा के अनुसार सटीक स्थान का उल्लेख करें।

 

Question 3. छायारूपिणी सीता रामं कुत्र अमिलत्?
(क) दण्डकारण्ये
(ख) जनस्थाने
(ग) पञ्चवटीवने
(घ) आश्रमे
Answer: (ग) पञ्चवटीवने
In simple words: सीता ने छाया के रूप में राम से पञ्चवटी वन में मुलाकात की थी। यह वह स्थान था जहाँ वे पहले साथ रहे थे।

🎯 Exam Tip: नाटक या कहानी के महत्वपूर्ण स्थलों को याद रखना सहायक होता है, क्योंकि उनसे सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

 

Question 4. सीता कस्य प्रसादात् अदृश्याऽभवत्?
(क) लोपामुद्राप्रसादात्
(ख) तमसाप्रसादात्
(ग) वनदेवताप्रसादात्।
(घ) भगीरथीप्रसादात्
Answer: (घ) भगीरथीप्रसादात्
In simple words: सीता, भगीरथी के आशीर्वाद से अदृश्य हो गई थी। यह उसे राम के सामने आने से बचाने के लिए था।

🎯 Exam Tip: चरित्रों के संबंध और उन्हें प्राप्त वरदान या आशीर्वाद याद रखें, ये कथा के महत्वपूर्ण मोड़ होते हैं।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक-प्रश्नाः

 

Question 1. विदेहराजपुत्री का आसीत्?
Answer: विदेहराजपुत्री सीता आसीत्। सीता राजा जनक की पुत्री थीं, इसलिए उन्हें विदेहराजपुत्री कहा जाता है।
In simple words: विदेहराजपुत्री सीता थीं।

🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं में चरित्रों के विभिन्न नामों और उपाधियों को याद रखें, जैसे सीता को जानकी और वैदेही भी कहा जाता है।

 

Question 2. सीतायाः पुत्रयोः किम् अभिधानम्?
Answer: सीतायाः पुत्रयोः नाम कुशः लवः च आसीत्। ये दोनों राम और सीता के जुड़वां पुत्र थे, जिनका पालन-पोषण महर्षि वाल्मीकि ने किया था।
In simple words: सीता के पुत्रों के नाम कुश और लव थे।

🎯 Exam Tip: जब भी किसी चरित्र के परिवार या संबंधियों के बारे में पूछा जाए, तो उनके नामों का सही-सही उल्लेख करें।

 

Question 3. रामस्य अश्वमेध-सहधर्मचारिणी का आसीत्?
Answer: रामस्य अश्वमेध-सहधर्मचारिणी सीता आसीत्। सीता के त्याग के बाद भी, राम ने उनके प्रति निष्ठा दिखाते हुए अश्वमेध यज्ञ में उनकी स्वर्ण प्रतिमा को अपनी सहधर्मचारिणी के रूप में रखा था।
In simple words: अश्वमेध यज्ञ में सीता राम की सहधर्मचारिणी थीं।

🎯 Exam Tip: धार्मिक अनुष्ठानों में चरित्रों की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब प्रश्न उनके व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ा हो।

 

Question 5. 'कपीन्द्र' शब्दः कस्य कृते प्रयुक्त?
Answer: 'कपीन्द्र' शब्दः सुग्रीवस्य कृते प्रयुक्त। सुग्रीव वानरों के राजा थे और राम के परम मित्र एवं सहायक थे।
In simple words: 'कपीन्द्र' शब्द सुग्रीव के लिए उपयोग किया गया है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत साहित्य में, उपनामों और विशिष्ट शब्दों का उपयोग अक्सर चरित्रों की पहचान के लिए किया जाता है। उन्हें याद रखें।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 10 लघूत्तरात्मक-प्रश्नाः

 

Question 1. गोदावरीहृदात् आगच्छती सीता कीदृशी आसीत्?
Answer: गोदावरी नदी के ह्रद से आती हुई सीता बहुत उदास और कमजोर दिख रही थी। उनका चेहरा पीला, दुर्बल और गालों पर सुन्दर लटकते केशों से ढका हुआ था। वह करुणा की साक्षात मूर्ति और विरह के दुख से भरी हुई लग रही थी।
In simple words: सीता गोदावरी नदी से बहुत दुखी और कमजोर हालत में आ रही थी, वह विरह की मूर्ति जैसी दिख रही थी।

🎯 Exam Tip: जब किसी चरित्र के शारीरिक या मानसिक विवरण के बारे में पूछा जाए, तो उनके सभी प्रमुख गुणों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. रामाय सीतायाः स्पर्शः कीदृशः आसीत्?
Answer: राम के लिए सीता का स्पर्श पहले से परिचित, जीवन देने वाला और मन को अत्यधिक संतुष्टि देने वाला था। सीता का स्पर्श राम के लिए केवल शारीरिक अनुभूति नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक था।
In simple words: राम के लिए सीता का स्पर्श जाना-पहचाना, जीवन देने वाला और मन को खुशी देने वाला था।

🎯 Exam Tip: भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और उनके कारणों को गहराई से समझने और व्यक्त करने का अभ्यास करें।

 

Question 3. तमसा सीतां कुत्र अनयत्?
Answer: तमसा सीता को राम के पास ले गई। तमसा सीता की सखी थी और उसने सीता को राम के पास ले जाकर उन्हें सांत्वना देने का प्रयास किया।
In simple words: तमसा सीता को राम के पास ले गई थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों और उनके कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह घटनाओं के क्रम को समझने में मदद करता है।

 

Question 4. रामचन्द्रेण कृतानि सीतायाः सम्बोधननामानि लिखत।
Answer: रामचन्द्र ने सीता को कई नामों से संबोधित किया था, जैसे- देवी, दण्डकारण्यप्रियसखी (दण्डकारण्य की प्रिय सखी), विदेहराजपुत्री (विदेहराज की पुत्री), जानकी (जनक की पुत्री), नन्दिनी (आनंद देने वाली), और वैदेही (विदेह की राजकुमारी)। ये सभी नाम सीता के विभिन्न गुणों और उनके जीवन से जुड़े स्थानों को दर्शाते हैं।
In simple words: रामचन्द्र सीता को देवी, दण्डकारण्यप्रियसखी, विदेहराजपुत्री, जानकी, नन्दिनी, और वैदेही कहकर बुलाते थे।

🎯 Exam Tip: प्रमुख पात्रों के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न संबोधनों या उपनामों की सूची बनाना उन्हें याद रखने में मदद कर सकता है।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 10 निबन्धात्मक-प्रश्नाः

 

Question 1. रामानुसारेण सीतायाः प्राप्ति विषये के के व्यर्थाः अभवन्? अस्मिन् पाठे करुणरसस्य विश्लेषणं कुरुत।
Answer: इस पाठ में, सीता के त्याग के बाद राम जब शम्बूकवध के प्रसंग में दण्डकारण्य आते हैं, तो वे वहाँ वनवास के समय सीता के साथ बिताए गए स्थानों को देखकर बहुत दुखी होते हैं। राम के विरह के दर्द और उनके विलाप का वर्णन किया गया है। इसके साथ ही, अदृश्य रूप में वहाँ आई सीता की करुण दशा का भी वर्णन है, जब वह राम की पीड़ा देखती है। कवि ने राम और सीता दोनों की करुण दशा का बहुत ही हृदयस्पर्शी वर्णन किया है, जिससे पाठ में करुण रस की प्रधानता दिखाई देती है। राम के मन का दुख अंदर ही अंदर पकता रहता है, जैसे पुटपाक में औषधि पकती है।
In simple words: राम सीता को त्यागने के बाद बहुत दुखी थे। दण्डकारण्य में पुराने स्थान देखकर उन्हें सीता की याद आती है। सीता भी राम को देखकर दुखी होती हैं। कवि ने इस पाठ में उनके गहरे दुख और करुण रस को दिखाया है।

🎯 Exam Tip: निबन्धात्मक प्रश्नों में, पाठ के मुख्य विषय, प्रमुख पात्रों की भावनाओं और साहित्यिक रस (जैसे करुण रस) का विश्लेषण करते हुए विस्तृत उत्तर लिखें।

 

Question 3. 'छायाङ्क' इति नाम्नः सार्थकता प्रतिपादयतु।
Answer: उत्तररामचरित नाटक के तीसरे अंक का नाम 'छायाङ्क' है। इस अंक में राम जब दण्डकारण्य में अपने पुराने परिचित दृश्यों को देखते हुए सीता को याद करके दुखी विलाप करते हैं, तभी सीता वहाँ छाया के रूप में आती हैं। छाया रूप में राम के प्रति सीता का प्रेम देखकर सीता को अलौकिक आनंद का अनुभव होता है। इस अंक में सीताराम की करुण दशा का जो चित्रण कवि ने किया है, वह सीता के छाया रूप में ही संभव था। छाया-दृश्य की यह कल्पना कवि की अद्भुत प्रतिभा का प्रमाण है और यह प्रसंग के बिल्कुल अनुकूल भी है।
In simple words: नाटक के तीसरे भाग का नाम 'छायाङ्क' है क्योंकि सीता इस भाग में राम से छाया बनकर मिलती हैं। राम को देखकर सीता को बहुत खुशी होती है। यह छाया का विचार कवि की खास सोच को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: किसी नाटक के नामकरण की सार्थकता बताते समय, नाटक की मुख्य घटनाओं और पात्रों के व्यवहार से उसका संबंध स्पष्ट करें।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 10 व्याकरणात्मक-प्रश्नाः

 

Question 1. अधो-लिखितेषु पदेषु नामोल्लेखपुरस्सरसन्धिः क
Answer: इस प्रश्न के लिए आवश्यक जानकारी (जैसे पूर्ण प्रश्न या उत्तर) स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है। अतः इसका उत्तर नहीं दिया जा सकता।
In simple words: इस सवाल का पूरा जवाब उपलब्ध नहीं है।

🎯 Exam Tip: व्याकरण के प्रश्नों में, संधि विच्छेद करते समय स्वरों और व्यंजनों के नियमों का ध्यान रखें, और संधि के प्रकार का सही नाम लिखें।

 

Question 2. अधो-निर्दिष्टानां सन्धिपदानां सन्धि-नाम-निर्देशपूर्वक-विग्रहो विधेयः
Answer:

सन्धिपदम्विग्रहःसन्धिनाम

(क) सम्भ्रान्तेव

सम्भ्रान्ता + इव

गुणसन्धिः

(ख) खल्वेतत्

खलु + एतत्

यण्सन्धिः

(ग) तत्रैष

तत्र + एष

वृद्धिसन्धिः

(घ) वर्धितोऽभूत्

वर्धितः + अभूत्

उत्वसन्धिः

(ङ) प्रागावृणोति

प्राक् + आवृणोति

जश्त्वसन्धिः


In simple words: ऊपर दी गई तालिका में संस्कृत के कुछ शब्दों को अलग-अलग करके दिखाया गया है। हर शब्द को दो भागों में बांटा गया है और बताया गया है कि उनमें कौन सी संधि हुई है, जैसे गुण संधि या यण संधि। संधि शब्दों को तोड़ना और उनके प्रकार को पहचानना व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत संधियों में, नियमों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर स्वर संधि और व्यंजन संधि के विभिन्न प्रकारों के लिए।

 

Question 4. अधोनिर्दिष्टेषु पदेषु शब्द-विभक्ति-वचन-निर्देशं कुरुत
Answer:

पदम्शब्दःविभक्तिःवचनम्

(क) रामभद्रेण

रामभद्र

तृतीया

एकवचनम्

(ख) भगवतीभ्याम्

भगवती

तृतीया

द्विवचनम्

(ग) त्रैलोक्यस्य

त्रैलोक्य

षष्ठी

एकवचनम्

(घ) मनसः

मनम्

षष्ठी

एकवचनम्

(ङ) वध्वा

वधू

तृती

एकवचनम्

(च) माम्

अस्मद्

द्वितीया

एकवचनम्


In simple words: ऊपर दी गई तालिका में संस्कृत के कुछ शब्द दिए गए हैं। हर शब्द के मूल रूप, उसमें लगी विभक्ति (कारक का रूप) और वचन (एकवचन, द्विवचन) को बताया गया है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि शब्द का प्रयोग वाक्य में कैसे किया जाता है।

🎯 Exam Tip: शब्द रूपों (विभक्ति और वचन) को याद करने के लिए, विभिन्न लिंगों और वचनों में प्रमुख शब्दों के उदाहरणों का अभ्यास करें।

 

Question 5. निम्नलिखितानां तिङन्तपदानां धातुः लकारः पुरुषः वचनं च पृथक् निर्दिश्यताम्-
Answer:

तिङन्तपदम्धातुःलकारःपुरुषःवचनम्

(क) करोमि

कृ

लट्

उत्तम

एकवचनम्

(ख) अस्ति

अस्

लट्

प्रथमः

एकवचनम्

(ग) आज्ञापयति

आ + ज्ञप्

लट्

प्रथमः

एकवचनम्

(घ) ग्लपयति

ग्लप्

लट्

प्रथमः

एकवचनम्

(ङ) भविष्यामि

भू

लृट्

उत्तमः

एकवचनम्

(च) गच्छावः

गम्

लट्

उत्तमः

द्विवचनम्


In simple words: इस तालिका में संस्कृत की क्रियाओं (तिङन्त पदों) को उनके मूल धातु, लकार (काल), पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और वचन के अनुसार अलग-अलग करके दिखाया गया है। यह क्रिया के रूप को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न धातुओं के लकारों (जैसे लट्, लृट्) और पुरुषों (प्रथम, मध्यम, उत्तम) में क्रिया रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. निम्नलिखितेषु पदेषु प्रकृतिः प्रत्ययश्च पृथक् पृथक् लिख्यताम्
Answer:
(च) निक्षिप्तवती - नि + क्षिप् + क्तवतु
In simple words: 'निक्षिप्तवती' शब्द 'नि' उपसर्ग, 'क्षिप्' धातु और 'क्तवतु' प्रत्यय से मिलकर बना है। प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ को बदल देता है।

🎯 Exam Tip: प्रकृति और प्रत्यय को अलग करते समय, धातु, उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान सही ढंग से करें।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 10 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1. शब्दार्थाः

 

Question 1. अधोलिखितशब्दानाम् हिन्द्याम् अर्थं लिखत
Answer:
(i) दाक्षिण्यम् - उदारता ।
(ii) दारुणः - कठोर।
(iii) धर्मः - धूप ।
(iv) करिकलभकः - हाथी का बच्चा।
(v) निर्घोषः - स्वर।
(vi) सपदि - शीघ्र ही।
(vii) परिहृत्य - दूर
(viii) उपसृत्य - पास जाकर।
(ix) प्रेक्ष्य - देखकर ।
(x) उल्लापाः - विलाप ।
(xi) हरीणाम् - वानरों का।
(xii) शल्यम् - कांटा।
In simple words: यह सूची संस्कृत के शब्दों और उनके हिन्दी अर्थों को दिखाती है। इससे हमें नए संस्कृत शब्द सीखने और उनके मतलब जानने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: नए शब्दों के अर्थ याद करने के लिए उन्हें अपनी भाषा में लिखकर और छोटे वाक्य बनाकर अभ्यास करें।

2. प्रश्ननिर्माणम्

 

Question 2. रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
Answer:
1. रामस्य करुणः रमः कीदृशः वर्तते?
2. केन परिक्षीणो रामभद्रः?
3. कस्य मोहे मोहे जीवं तर्पय?
4. सीता संवेगादात्मानं कुत्र निक्षिप्तवती?
5. अहमप्येतं वृत्तान्तं कस्यै निवेदयामि?
6. शरीरिणी विरहव्यथेव का वनमेति?
7. कीदृशी सीता प्रविशति?
8. अयं कया सार्धं पयसि विहरति?
9. केन एवैतद् व्याहृतम्?
10. कः माम् प्राक् आवृणोति?
11. त्वमेव ननु कम् संजीवयः?
12. ततः भूम्यां निपतितः कः प्रविशति?
13. हा धिक्, को मां मार्गिष्यते?
14. अहमेवैतस्य किम् जानामि?
15. कः तवानुकूलो भविष्यति?
In simple words: यहाँ दिए गए वाक्य ऐसे प्रश्न हैं जो मूल वाक्यों के रेखांकित भागों पर आधारित हैं। प्रश्न बनाने से हमें वाक्य के महत्वपूर्ण हिस्सों को समझने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, सही प्रश्नवाचक शब्द (जैसे 'किम्', 'कस्य', 'कुत्र', 'का') का प्रयोग करें और वाक्य संरचना को बनाए रखें।

3. भावार्थलेखनम्

 

Question 3. अधोलिखितवाक्यानां हिन्दीभाषया भावार्थं लिखत
(i) पुटपाकप्रतीकाशी रामस्य करुणो रसः।
(ii) ईदृशानां विपाकोऽपि जायते परमाद्भुतः।
(iii) प्रियस्पर्शी हि पाणिस्ते तत्रैष निरतो जनः।
Answer:
(i) पुटपाकप्रतीकाशी रामस्य करुणो रसः:
इस कथन का अर्थ है कि राम का दुख पुटपाक (एक प्राचीन औषधीय विधि जहाँ औषधि को अंदर ही अंदर पकाया जाता है) के समान है। लोक निंदा के कारण सीता को छोड़ने के बाद राम अंदर से बहुत दुखी थे, लेकिन अपने गंभीर स्वभाव के कारण वे इस दुख को बाहर प्रकट नहीं करते थे। यह दुख अंदर ही अंदर बढ़ता रहता था, जैसे वैद्य औषधि को पात्र में रखकर धीमी आंच पर पकाते हैं। यह राम के आंतरिक, गहरे और अव्यक्त दुख को दर्शाता है।
(ii) ईदृशानां विपाकोऽपि जायते परमाद्भुतः:
इस वाक्यांश का अर्थ है कि राम और सीता जैसे महान व्यक्तियों पर आई विपत्तियां भी बहुत अद्भुत होती हैं। यह पाठ दिखाता है कि कैसे श्रीराम को अपनी पत्नी सीता का त्याग करना पड़ा और सीता को भी गंगाजी के प्रवाह में कूदना पड़ा। ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी, गंगा और पृथ्वी जैसी अलौकिक शक्तियां उनकी सहायता करती हैं। यानी, जब महान लोग मुश्किल में होते हैं, तो उन्हें दिव्य शक्तियां मानव रूप में मदद करती हैं, जिससे यह घटना और भी असाधारण बन जाती है।
(iii) प्रियस्पर्शी हि पाणिस्ते तत्रैष निरतो जनः:
यह वाक्य तमसा सीता से कहती है, जिसका अर्थ है कि 'तुम्हारा हाथ का स्पर्श श्रीराम को बहुत प्रिय है और वे इसके अभ्यस्त हैं।' सीता को त्यागने के बाद राम बहुत दुखी थे और मूर्छित हो गए थे। तमसा सीता से राम को होश में लाने के लिए अपने हाथ से स्पर्श करने का अनुरोध करती है। सीता के पवित्र और शीतल स्पर्श से ही राम को होश में लाया जा सकता था, क्योंकि राम ने सीता के अलावा किसी और का स्पर्श इस तरह से अनुभव नहीं किया था। सीता के स्पर्श से राम के हृदय में अद्भुत आनंद का संचार होता था।
In simple words: (i) राम का दुख ऐसा था जैसे अंदर ही अंदर पक रहा हो, जिसे वे बाहर नहीं दिखाते थे। (ii) महान लोगों पर आईं मुसीबतें भी खास होती हैं, जिनमें उन्हें अदृश्य मदद मिलती है। (iii) सीता का हाथ राम को बहुत पसंद था, और उनका स्पर्श राम को खुशी देता था, जिससे उन्हें होश आता था।

🎯 Exam Tip: भावार्थ लिखते समय, मूल पंक्ति के शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ उसके पीछे के गहरे भावनात्मक और दार्शनिक अर्थ को भी स्पष्ट करें।

4. अन्वयलेखनम्

 

Question. अधोलिखितश्लोकानाम् अन्वयं लिखत
(i) अनिर्भिन्नो
(ii) ईदृशानां विपाको
(iii) परिपाण्डु
(iv) अपरिस्फुट
(v) त्वमेव नेनु
Answer: स्रोत सामग्री के अनुसार, इन श्लोकों का अन्वय (गद्य क्रम) पाठ के हिन्दी अनुवाद के साथ ही अन्यत्र दिया गया है। इसलिए, यहाँ विस्तृत अन्वय प्रदान नहीं किया जा सकता है। छात्रों को संबंधित पाठ भाग का संदर्भ लेना चाहिए।
In simple words: इस सवाल का जवाब किताब में किसी और जगह पर हिन्दी अनुवाद के साथ दिया गया है। आपको वहाँ देखना होगा।

🎯 Exam Tip: श्लोकों का अन्वय लिखते समय, पहले प्रत्येक पद का अर्थ समझें, फिर उन्हें व्याकरणिक रूप से सही गद्य क्रम में व्यवस्थित करें ताकि अर्थ स्पष्ट हो सके।

Question 5. पाठ्यपुस्तकाधारितं भाषिककार्यम्

 

Question (i) 'प्रेषितास्मि सरिद्वरा गोदावरीमभिधातुम्'-इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: विशेष्यपदम् 'गोदावरीम्' अस्ति। 'सरिद्वरा' विशेषण है, जो गोदावरी की विशेषता बता रहा है।
In simple words: 'गोदावरीम्' यहाँ मुख्य शब्द है जिसकी बात हो रही है।

🎯 Exam Tip: विशेषण और विशेष्य की पहचान करते समय, याद रखें कि विशेष्य वह शब्द होता है जिसकी विशेषता बताई जाती है।

 

Question (ii) 'कम्पितमिव कुसुमसमबन्धनं मे हृदयम्’-इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: विशेषणपदम् 'कुसुमसमबन्धनम्' अस्ति। यह हृदय की विशेषता बता रहा है कि वह फूलों के बंधन जैसा कांप रहा है।
In simple words: 'कुसुमसमबन्धनम्' यहाँ विशेषण शब्द है जो हृदय की खासियत बता रहा है।

🎯 Exam Tip: विशेषण शब्द अक्सर किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुणों या विशेषताओं का वर्णन करते हैं।

 

Question (iii) 'महाप्रमादानि शोकस्थानानि शंकनीयानि’-इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: विशेष्यपदम् 'शोकस्थानानि' अस्ति। 'महाप्रमादानि' शोकस्थानों की विशेषता बता रहा है कि वे बड़ी भूलें या आपदाएँ हैं।
In simple words: 'शोकस्थानानि' यहाँ वह मुख्य शब्द है जिसकी बात हो रही है।

🎯 Exam Tip: विशेषण और विशेष्य की पहचान करते समय, ध्यान दें कि विशेषण हमेशा विशेष्य के साथ आता है और उसकी विशेषता बताता है।

 

Question (v) अधोलिखितवाक्येषु विशेषणविशेष्यपदचयनं कुरुत
Answer:

विशेषणपदम्विशेष्यपदम्

1. भगवत्यै

लोपामुद्रायै

2. विलोलकबरीकम्

आननम्

3. परिपाण्डुक्षामम्

शरीरम्

4. पुष्पावचयव्यग्रा

सीता

5. प्रियसखी

वासन्ती


In simple words: इस तालिका में कुछ वाक्यों से विशेषण और विशेष्य शब्दों को अलग किया गया है। विशेषण वह शब्द है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, और विशेष्य वह शब्द है जिसकी विशेषता बताई जाती है।

🎯 Exam Tip: वाक्यों में विशेषण और विशेष्य की सही पहचान करने के लिए, हमेशा 'कैसा' या 'कितना' जैसे प्रश्न पूछकर अभ्यास करें।

(ग) सर्वनाम-संज्ञा-प्रयोगः

 

Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखांकित सदनामपदस्य स्थाने संज्ञापदस्य प्रयोगं कृत्वा वाक्यं पुनः लिखत
Answer:
1. परित्रायस्व सीतायाः तं पुत्रकम्।
2. एतावदेदानीं सीतायाः बहुतरम्।
3. अद्याप्यानन्दयति रामं त्वम्।
4. ने रामम् एवं विधं त्यक्तुमर्हसि।
5. तदनुजानीहि रामं गमनाय।
In simple words: इन वाक्यों में, रेखांकित सर्वनाम शब्दों की जगह पर संज्ञा शब्दों का उपयोग किया गया है। इससे वाक्य का अर्थ अधिक स्पष्ट और सीधा हो जाता है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के स्थान पर संज्ञा का प्रयोग करते समय, यह सुनिश्चित करें कि संज्ञा शब्द सर्वनाम के लिए उचित प्रतिस्थापन है और वाक्य का व्याकरण सही रहता है।

(घ) समानविलोमपदचयनम्-

 

Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां पर्यायबोधकपदानि लिखत
1. प्रेषितास्मि अगस्त्यस्य पत्या गोदावरीमभिधातुम्।
2. अनीर्भिन्नो गभीरत्वादन्तगूढधनव्यथः।
3. स्वैरं स्वैरं प्रेरितैस्तर्पयेति।
4. उचितमेव दाक्षिण्यं स्नेहस्य।
5. तदैव तत्र द्वारकद्वयं प्रसूता।
6. किं भणसि अपरिस्फुटेति।
7. वत्से समाश्वसिहि ।
8. आर्यपुत्रस्योपरि निरनुक्रोशा भविष्यामि।
Answer:
1. (पर्यायबोधक पद स्रोत में उपलब्ध नहीं है)
2. (पर्यायबोधक पद स्रोत में उपलब्ध नहीं है)
3. (पर्यायबोधक पद स्रोत में उपलब्ध नहीं है)
4. औदार्यम्
5. पुत्रद्वयम्
6. कथयसि
7. धैर्य धारयतु
8. निर्दया।
In simple words: यहाँ कुछ वाक्यों के रेखांकित शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द दिए गए हैं। यह हमें शब्दों के अर्थ और उनके पर्यायवाची जानने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: पर्यायवाची शब्द ढूंढते समय, सुनिश्चित करें कि नया शब्द संदर्भ में मूल शब्द के समान अर्थ रखता हो।

 

Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां विलोमार्थकपदानि लिखते
Answer:
1. उचितमेव दाक्षिण्यं स्नेहस्य। - अनुचितमेव
2. सञ्जीवनोपायः तु रामभद्रस्याद्य संनिहितः। - मारणोपायः
3. विमानराज अत्रैव स्थीयताम्। - गम्यताम्
4. एतावदेदानीं मम बहुतरम्। - न्यूनतरम्
5. असदृशं खल्वेतस्य वृत्तान्तस्य। - सदृशम्
6. जन्मान्तरेष्वपि दुर्लभं दर्शनमस्य माम्। - सुलभम्
7. आर्यपुत्रस्योपरि निरनुक्रोशा भविष्यामि। - सानुक्रोशा
8. दु:खाय एवेदानीम् रामदर्शनम्। - सुखाय
In simple words: यहाँ वाक्यों में रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द (विलोम शब्द) दिए गए हैं। विलोम शब्द हमें शब्दों के उल्टे अर्थ को समझने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय, हमेशा मूल शब्द के विपरीत अर्थ वाले शब्द का चयन करें।

(ङ) कः कस्मै कथयतिप्रश्नः-अधोलिखित वाक्यानि कः कस्मै कथयति

 

Question. अधोलिखित वाक्यानि कः कस्मै कथयति
(i) किं भणसि अपरिस्फुटेति?
(ii) त्वमेव ननु कल्याणि! संजीवय जगत्पतिम्।
(iii) भगवति! मां प्रेक्ष्य राजाधिकं कोपिष्यति।
(iv) अहमेवैतस्य हृदयं जानामि।
Answer:
(i) सीता - तमसायै
(ii) तमसा - सीतायै
(iii) सीता - तमसायै
(iv) सीता - तमसायै
(v) रामः - सीतायै
(vi) रामः - वासन्तीं प्रति
(vii) वासन्ती - रामाय ।
In simple words: यह सूची बताती है कि कौन सा वाक्य किसने किससे कहा है। यह जानकारी नाटक के संवादों और पात्रों के बीच के संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: संवादों के प्रश्नों में, वाक्य किसने कहा और किससे कहा, इसका सटीक उल्लेख करें। इससे पात्रों की भूमिका स्पष्ट होती है।

There is no educational content (questions or answers) located between page 15 and page 16 in the provided document. Page 15 contains website navigation links, and page 16 consists solely of a watermark.

Free study material for Sanskrit

RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Sanskrit textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Sanskrit chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Sanskrit Class 12 Solved Papers

Using our Sanskrit solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Sanskrit are as per latest RBSE curriculum.

Are the Sanskrit RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sanskrit. You can access RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sanskrit RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 10 कारुण्यं रामभद्रस्य in printable PDF format for offline study on any device.