Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Sanskrit. Our expert-created answers for Class 12 Sanskrit are available for free download in PDF format.
Detailed अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit
For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Sanskrit solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः solutions will improve your exam performance.
Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः
Passage 2
अस्मान् परितः यत् वृत्तं आवृणोति तत् पर्यावरणम् इति कथ्यते। तद् द्विविधं प्रकृतिनिर्मितं मानवनिर्मितञ्च। सम्प्रति संसारे औद्योगिकविकासेन समं पर्यावरणप्रदूषणस्य समस्या सम्मुखीना वर्तते। विविधोद्योगैः नवाविष्कारैश्च वायुमण्डलं, जलं च प्रदूषितं संजातम्। जनसंख्या विस्फोटेन, वनानां विनाशेन, वाहनानामपरिमितेन धूमेन, विषमिश्रितरसायनानामुपयोगेन, ध्वनिप्रदूषणेन च सर्वत्र हाहाकारः रोगाः अशान्तिश्च व्याप्ता दृश्यन्ते। अस्याः प्रदूषणसमस्यायाः निवारणाय पर्यावरणसंरक्षणार्थं अस्माभिः सर्वैरेव प्रयत्नः कर्तव्यः।
हिन्दी-अनुवाद: हमारे चारों ओर जो घेरा घिरा हुआ है वह पर्यावरण कहा जाता है। वह दो प्रकार का है-प्रकृति निर्मित और मानव निर्मित। इस समय संसार में औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण प्रदूषण की समस्या सम्मुख है। विविध उद्योगों और नवीन आविष्कारों से वायुमण्डल और जल प्रदूषित हो गया है। जनसंख्याविस्फोट से, वनों के विनाश से, वाहनों की अपरिमित धुआँ से, विषैले रसायनों के उपयोग से और ध्वनि प्रदूषण से सभी जगह हाहाकार, रोग और अशान्ति व्याप्त दिखाई देती है। इस प्रदूषण की समस्या का निवारण करने के लिए पर्यावरण की सुरक्षा हेतु हम सभी को प्रयत्न करना चाहिए।
Question 1. पर्यावरणं कतिविधम्? (एकपदेन उत्तरम्)
Answer: पर्यावरण दो प्रकार का होता है. ये प्रकृति द्वारा बनाए गए और मानव द्वारा बनाए गए होते हैं.
In simple words: पर्यावरण दो तरह का होता है।
🎯 Exam Tip: एक-शब्द उत्तर प्रश्नों में, केवल सटीक शब्द लिखें और अनावश्यक विस्तार से बचें।
Question 2. कस्याः निवारणाय अस्माभिः सर्वैरेव प्रयत्नः कर्तव्यः? (पूर्णवाक्येन उत्तरम्)
Answer: हम सभी को प्रदूषण की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास करना चाहिए, क्योंकि यह हमारे वायुमंडल, जल और जीवन को प्रभावित करती है.
In simple words: हमें प्रदूषण को रोकने की कोशिश करनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तर प्रश्नों में, उत्तर को पूरा वाक्य बनाकर लिखें, जिसमें प्रश्न का मुख्य भाग भी शामिल हो।
Question 3. “सम्प्रति संसारे . वर्तते।” इत्यत्र 'वर्तते' क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'वर्तते' क्रिया का कर्ता पद 'समस्या' है. यह दर्शाता है कि प्रदूषण की समस्या इस समय मौजूद है.
In simple words: 'वर्तते' का कर्ता 'समस्या' है।
🎯 Exam Tip: क्रिया के कर्तृपद को पहचानने के लिए, 'कौन' या 'क्या' शब्द से प्रश्न करें और वाक्य में क्रिया के साथ उसका संबंध देखें।
Passage 3
मेवाड़ाज्यं बहूनां शूराणां जन्मभूमिः। तस्य,राजा राणा प्रतापः सिंहासनम् आरूढ़वान्। 'हस्तच्युतानां भागानां प्रतिप्राप्तिः कथम्' इति विचिन्त्य सः पुरप्रमुखाणां सभाम् आयोजितवान्। तत्र सः प्रतिज्ञां कृतवान् 'चित्तौड़स्थानं यावत् न प्रतिप्राप्स्यामि तावत् सुवर्णपात्रे भोजनं न करिष्यामि। राजप्रासादे वासं न करिष्यामि। मृदुतल्पे शयनमपि न करिष्यामि" इति। तदा पुरप्रमुखाः अवदन्वयमपि सुखसाधनानि त्यक्ष्यामः। देशाय यथाशक्तिः धनं दास्यामः। अस्मत् पुत्रान् सैन्यं प्रति प्रेषयिष्यामः” इति।
हिन्दी-अनुवाद: मेवाड़ राज्य बहुत-से शूरवीरों की जन्मभूमि है। उसके राजा राणा प्रताप सिंहासन पर बैठे। 'हाथ से निकले हुए भागों को वापस कैसे प्राप्त करें' यह सोचकर उन्होंने नगर के प्रमुखों की सभा बुलाई। वहाँ उन्होंने प्रतिज्ञा की कि 'जब तक चित्तौड़ स्थान को वापस नहीं प्राप्त करूँगा, तब तक सोने के पात्र में भोजन नहीं करूँगा। राजमहल में निवास नहीं करूँगा। कोमल बिस्तर पर शयन भी नहीं करूँगा।' तब नगर प्रमुखों ने कहा- 'हम भी सुख के साधन छोड़ देंगे। देश के लिए यथाशक्ति धन देंगे। अपने पुत्रों को सेना में भेजेंगे।''
Question 1. कः सुवर्णपात्रे भोजनं न करिष्यति? (एकपदेन उत्तरत)।
Answer: राणा प्रताप ने प्रतिज्ञा ली थी कि वे सोने के पात्र में भोजन नहीं करेंगे जब तक वे चित्तौड़ को पुनः प्राप्त न कर लें.
In simple words: राणा प्रताप।
🎯 Exam Tip: एक-शब्द उत्तर देते समय, सुनिश्चित करें कि आपका उत्तर सीधे प्रश्न का जवाब दे।
Question 2. किं विचिन्त्य प्रतापः पुरप्रमुखाणां सभाम् आयोजितवान्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: प्रताप ने 'हाथ से निकले हुए भागों को वापस कैसे प्राप्त करें' यह सोचकर नगर के प्रमुखों की सभा आयोजित की, ताकि इस समस्या का समाधान मिल सके.
In simple words: उन्होंने सोचा कि खोए हुए राज्य के हिस्सों को वापस कैसे पाएं।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तरों में, प्रश्न से महत्वपूर्ण शब्दों को शामिल करें ताकि उत्तर स्पष्ट और पूरा लगे।
Question 3. तदा पुरप्रमुखाः सुखसाधनानि त्यक्ष्यामः' इत्यत्र 'त्यक्ष्यामः इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'त्यक्ष्यामः' क्रिया का कर्तृपद 'पुरप्रमुखाः' है. पुरप्रमुखों ने ही सुख के साधन त्यागने की प्रतिज्ञा की थी.
In simple words: 'त्यक्ष्यामः' का कर्ता 'पुरप्रमुखाः' है।
🎯 Exam Tip: क्रिया के कर्तृपद को पहचानने के लिए, यह देखें कि क्रिया को कौन कर रहा है या किसके बारे में बात की जा रही है।
Passage 4
अस्ति मगधदेशे अतीव सुन्दरः मनोहरः रमणीयः जलाशयः। तस्य तोये सुरभीणि कमलानि आसन्। तत्र तड़ागे हंसौ अवसताम्। कम्बुग्रीवो नाम कुर्मः तयोः मित्रमासीत्। एकदा केचित् धीवरास्तत्रागत्य श्वो जलचराणां ग्रहणाय निश्चयमकुर्वन्। तेषां निश्चयं ज्ञात्वा कूर्मस्य नयनाभ्याम् अश्रूणि अगलन्। हंसौ तम् उपायमेकं बोधितवन्तौ।
हिन्दी-अनुवाद: मगध देश में अत्यन्त सुन्दर, मनोहर और रमणीय तालाब था। उसके जल में सुगन्धित कमल थे। वहाँ तालाब में दो हंस रहते थे। कम्बुग्रीव नामक कछुआ उन दोनों का मित्र था। एक बार कुछ मछुआरों ने वहाँ आकर कल जलचरों को पकड़ने का निश्चय किया। उनका निश्चय जानकर कछुए के नेत्रों से आँसू निकलने लगे। दोनों हंसों ने उसको एक उपाय बताया।
Question 1. हंसयो: मित्रं कः आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: कम्बुग्रीव नामक कछुआ हंसों का मित्र था. वे सब एक साथ तालाब में रहते थे.
In simple words: कम्बुग्रीवः कुर्मः।
🎯 Exam Tip: जब 'कः' (कौन) से प्रश्न पूछा जाए, तो उत्तर में व्यक्ति या वस्तु का नाम दें।
Question 2. जलाशयस्य तोये कानि आसन् ? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: तालाब के जल में सुगंधित कमल खिले हुए थे. ये कमल तालाब की सुंदरता बढ़ाते थे.
In simple words: तालाब में सुगंधित कमल थे।
🎯 Exam Tip: 'कानि' (क्या) से पूछे गए प्रश्नों में, उत्तर में वस्तु या चीजों का उल्लेख करें।
Question 3. एकदा केचित् धीवराः निश्चयमकुर्वन्' इत्यत्र 'अकुर्वन्' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'अकुर्वन्' क्रिया का कर्तृपद 'धीवराः' है. मछुआरों ने ही जलचरों को पकड़ने का निश्चय किया था.
In simple words: 'अकुर्वन्' का कर्ता 'धीवराः' है।
🎯 Exam Tip: क्रिया के कर्तृपद को पहचानने के लिए, देखें कि वाक्य में क्रिया को कौन-सा संज्ञा शब्द कर रहा है।
Passage 5
हिन्दी-अनुवाद: हमारा पुस्तकालय नगर के रमणीय स्थान पर है। इसका भवन विशाल और सुन्दर है। इस पुस्तकालय में दस हजार पुस्तकें हैं और विभिन्न पत्र-पत्रिकाएँ प्रतिदिन आती हैं। बहुत से लोग, छात्र और युवतियाँ यहाँ आकर स्वाध्याय करते हैं। हमारे ज्ञान-वर्धन और बौद्धिक विकास के लिए पुस्तकालयों की महान् भूमिका है।
Question 1. अस्माकं पुस्तकालयस्य भवनं कीदृशं वर्तते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: हमारे पुस्तकालय का भवन विशाल और सुन्दर है. यह देखने में बहुत आकर्षक लगता है.
In simple words: विशालं सुन्दरं च।
🎯 Exam Tip: एक-शब्द उत्तरों में, प्रश्न में पूछे गए विशेषण को सीधे बताएँ।
Question 2. अस्माकं ज्ञानवर्धनाय बौद्धिकविकासाय च केषां महती भूमिका वर्तते? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)।
Answer: हमारे ज्ञानवर्धन और बौद्धिक विकास के लिए पुस्तकालयों की बहुत बड़ी भूमिका होती है. वे हमें ज्ञान प्राप्त करने में मदद करते हैं.
In simple words: हमारे ज्ञान और बुद्धि के विकास के लिए पुस्तकालय बहुत महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तरों में, प्रश्न के मुख्य बिंदुओं को शामिल करते हुए एक पूर्ण कथन बनाएँ।
Question 3. 'दशसहस्राणि पुस्तकानि” इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: इस वाक्यांश में 'दशसहस्राणि' विशेषण पद है, जो 'पुस्तकानि' संज्ञा की संख्या बताता है.
In simple words: 'दशसहस्राणि' विशेषण है।
🎯 Exam Tip: विशेषण पद वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है (जैसे संख्या, गुण, रंग आदि)।
Passage 6
अस्माकं देशे षड् ऋतवः नवचेतनासञ्चरणाय समायान्ति। तत्रापि। वर्षाकालं दृष्ट्वा सर्वे नन्दन्ति। अयं ग्रीष्मानन्तरं समायाति। वर्षाकाले आकाशे मेघाः आयान्ति। ते गर्जन्ति वर्षन्ति च। सौदामिन्यः स्फुरन्ति। सर्वत्र जलं भवति। वर्षाजलैः स्नाता वसुन्धरा मोदते। सर्वत्र हरीतिमा विभाति। वर्षाकाले मण्डूकाः रटन्ति। मयूराः नृत्यन्ति। वृक्षाः पल्लविताः भवन्ति। निर्झराः मधुरं नदन्ति, नद्यः वेगेन प्रवहन्ति। वर्षाकाले ग्रामे मार्गाः पङ्कमयाः भवन्ति। जलाशयाः, कूपाः अपि पूर्णाः भवन्ति।
हिन्दी-अनुवाद: हमारे देश में छः ऋतुएँ नवीन चेतना का संचार करने के लिए आती हैं। उनमें भी वर्षा-काल को देखकर सभी आनन्दित होते हैं। यह ग्रीष्म ऋतु के बाद आता है। वर्षाकाल में आकाश में बादल आते हैं। वे गर्जन करते हैं और वर्षा करते हैं। बिजलियाँ चमकती हैं। सभी जगह जल होता है। वर्षा के जल से स्नान की हुई पृथ्वी प्रसन्न होती है। सभी जगह हरियाली सुशोभित होती है। वर्षाकाल में मेंढक टर्राते हैं। मोर नाचते हैं। वृक्ष नवीन पत्तों से युक्त होते हैं। झरने मधुर नाद करते हैं, नदियाँ वेग से बहती हैं। वर्षाकाल में गाँव में रास्ते कीचड़युक्त हो जाते हैं। तालाब, कुएँ भी जल से पूर्ण हो जाते हैं।
Question 1. कं कालं दृष्ट्रा सर्वे नन्दन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: सभी लोग वर्षाकाल को देखकर प्रसन्न होते हैं. यह ऋतु सबको नई ऊर्जा देती है.
In simple words: वर्षाकालम्।
🎯 Exam Tip: 'कं' (किसे/किसको) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में उस वस्तु या समय का उल्लेख करें जिसकी बात हो रही है।
Question 2. अस्माकं देशे षड् ऋतवः किं कर्तुं समायान्ति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: हमारे देश में छह ऋतुएँ नई चेतना का संचार करने के लिए आती हैं. प्रत्येक ऋतु अपने साथ नयापन लाती है.
In simple words: हमारे देश में छह ऋतुएँ नई ऊर्जा लाने आती हैं।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तरों में, प्रश्न में दिए गए मुख्य वाक्यांशों को अपने उत्तर में दोहराएँ।
Question 3. 'अयं ग्रीष्मानन्तरं समायाति' इत्यस्मिन् वाक्ये 'अयं सर्वनाम पदस्थाने 'संज्ञापदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'अयं' सर्वनाम पद के स्थान पर 'वर्षाकालम्' संज्ञापद आएगा. 'अयं' वर्षाकाल को ही दर्शाता है.
In simple words: 'अयं' की जगह 'वर्षाकालम्' आएगा।
🎯 Exam Tip: सर्वनाम के स्थान पर संज्ञापद पहचानते समय, यह देखें कि सर्वनाम किस संज्ञा की जगह उपयोग किया गया है।
Passage 7
एकः कपोतपालकः आसीत्। तस्य समीपे बहवः कपोताः आसन्। सः तान् उपदिशति स्म-वने व्याधः आगमिष्यति, जालं प्रसारयिष्यति, तण्डुलान्, विकरिष्यति परन्तु युष्माभिः तत्र न गन्तव्य्। रटत-“वयं तत्र न गमिष्यामः, जाले न पतिष्यामः'। कपोताः तथैव पाठं रटितवन्तः, प्रतिदिनमेव पाठं कृतवन्तः। एकस्मिन् दिने यावत् ते सर्वे आकाशे विहरन्ति स्म, तावद् एकस्मिन् स्थाने जालस्य उपरि तण्डुलकणान् दृष्ट्वा झटिति अवातरन्। जाले बद्धाः अपि ते तथैव वदन्ति स्म-'वयं जाले न पतिष्यामः " नूनं ज्ञानं भारः क्रिया विना।
हिन्दी-अनुवाद: एक कबूतर-पालक था। उसके पास बहुत-से कबूतर थे। वह उनको उपदेश देता था कि-वन में शिकारी आयेगा, जाल फैलायेगा, चावलों को बिखेरेगा, किन्तु तुम्हें वहाँ नहीं जाना चाहिए। रटो–“हम वहाँ नहीं जायेंगे, जाल में नहीं गिरेंगे।” कबूतरों ने उसी प्रकार पाठ को रटा, रोजाना ही पाठ करते थे। एक दिन जब वे सभी आकाश में उड़ रहे थे, तभी एक स्थान पर जाल के ऊपर चावलों के कणों को देखकर शीघ्र ही नीचे उतर गये। जाल में बन्द होने पर भी वे उसी प्रकार बोल रहे थे–'हम जाल में नहीं गिरेंगे:।" निश्चय ही क्रिया के बिना ज्ञान भार ही होता है।
Question 1. कपोताः कस्य उपरि तण्डुलकणान् अपश्यन्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: कबूतरों ने जाल के ऊपर चावल के दाने देखे, जो उन्हें फंसाने के लिए बिछाए गए थे.
In simple words: जालस्य।
🎯 Exam Tip: 'कस्य' (किसके) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में संबंधवाचक शब्द दें।
Question 2. कः कपोतान् उपदिशति स्म? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: कबूतर पालक कबूतरों को उपदेश देता था, उन्हें शिकारी के जाल से बचने के लिए सावधान करता था.
In simple words: कबूतरों का पालक उन्हें सिखाता था।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तरों में, प्रश्न से मुख्य क्रिया और विषय को शामिल करें।
Question 3. 'नीचैः' इति पदस्य किं विलोमपदम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'नीचैः' पद का विलोमपद 'उपरि' है. यह विपरीत अर्थ वाले शब्द हैं.
In simple words: 'नीचैः' का उल्टा 'उपरि' है।
🎯 Exam Tip: विलोमपद प्रश्नों में, दिए गए शब्द का ठीक विपरीत अर्थ वाला शब्द चुनें।
Passage 9
भारतं शान्तेः भूमिः। अत्र अस्माकं पूर्वजाः ऋषयः मुनयः च विश्वं कुटुम्बवत् पश्यन्ति स्म। ऋषिः व्यासः अपि अकथयत्-'परोपकारः पुण्याय, पापाय परपीडनम्' इति एतद् वाक्यद्वयमेव सर्वेषां धर्मग्रन्थानां सारः। उपनिषत्सु अपि वर्णितम्-यः मानवः सर्वान् आत्मवत् पश्यति सः एव वस्तुतः पश्यति। इदानीं केचन शिक्षिताः अपि मार्गभ्रष्टाः भृत्वा समाजविरोधिकार्याणि कुर्वन्ति इति खेदस्य विषयः। अतः शिक्षायाम् नैतिकमूल्यानां विकासाय अधिकाधिकः प्रयत्नः करणीयः। येन विद्या संस्कार दद्यात्, विनयं वर्धयेत्, शीलं च विकासयेत्।
हिन्दी-अनुवाद: भारत शान्ति की भूमि है। यहाँ हमारे पूर्वज ऋषि और मुनि संसार को परिवार के समान देखते थे। ऋषि व्यास ने भी कहा है- 'परोपकार पुण्य के लिए तथा दूसरों को पीड़ित करना पाप के लिए होता है।” ये दो वाक्य ही सभी, धर्मग्रन्थों का सार है। उपनिषदों में भी वर्णन किया गया है जो मनुष्य सभी को अपने समान देखता है, वही वास्तव में देखता है। इस समय कुछ शिक्षित लोग भी मार्गभ्रष्ट होकर समाज-विरोधी कार्य करते हैं, यह खेद का विषय है। इसलिए शिक्षा में नैतिक मूल्यों के विकास के लिए अधिक से अधिक प्रयत्न करने चाहिए। जिससे विद्या संस्कार प्रदान करे, विनम्रता बढ़ावे और चरित्र का विकास करे।
Question 1. शिक्षायां केषां विकासाय प्रयत्नः करणीयः? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: शिक्षा में नैतिक मूल्यों के विकास के लिए प्रयास करना चाहिए, जिससे व्यक्ति का चरित्र उज्ज्वल हो.
In simple words: नैतिकमूल्यानाम्।
🎯 Exam Tip: 'केषां' (किनके) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में उन गुणों या विशेषताओं का उल्लेख करें।
Question 2. के विश्वं कुटुम्बवत् पश्यन्ति स्म? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: हमारे पूर्वज ऋषि और मुनि पूरे विश्व को एक परिवार के समान देखते थे. यह उनकी महान सोच थी.
In simple words: हमारे पूर्वज ऋषि और मुनि पूरे विश्व को परिवार मानते थे।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तरों में, प्रश्न में दिए गए वाक्यांश 'विश्वं कुटुम्बवत् पश्यन्ति स्म' को शामिल करना सहायक होता है।
Question 3. 'शिक्षिताः' इति विशेष्यस्य विशेषणं किम्?
Answer: 'शिक्षिताः' विशेष्य का विशेषण 'केचन' है. यह बताता है कि कुछ शिक्षित लोग.
In simple words: 'शिक्षिताः' का विशेषण 'केचन' है।
🎯 Exam Tip: विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है) और विशेषण (जो विशेषता बता रहा है) को वाक्य में उनके संबंध से पहचानें।
Passage 10
उत्साहः, उदासीनता, निराशा चेति तिस्रः मनसः अवस्थाः। शिशवः सदा उत्साहशीलाः इति विदितमेव। युवानः अपि प्रायेण स्वभाव है। वह मन और शरीर के विकास के लिए होता है। बालक उत्साह से सब कुछ ग्रहण करने, सब कुछ खाने के लिए और सभी के साथ खेलने में प्रवृत्त होता है, रोकने पर रोता है। उपहास करने पर क्रोध प्रकट करता है किन्तु निराश नहीं होता है।
हिन्दी-अनुवाद: उत्साह, उदासीनता और निराशा ये तीन मन की अवस्थाएँ हैं। बच्चे हमेशा उत्साही होते हैं, यह तो सभी जानते हैं। युवा भी प्रायः स्वभाव से उत्साहित होते हैं। यह मन और शरीर के विकास के लिए होता है। बालक उत्साह से सब कुछ ग्रहण करने, सब कुछ खाने के लिए और सभी के साथ खेलने में प्रवृत्त होता है, रोकने पर रोता है। उपहास करने पर क्रोध प्रकट करता है किन्तु निराश नहीं होता है।
Question 1. मनसः कति अवस्थाः सन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: मन की तीन अवस्थाएँ होती हैं: उत्साह, उदासीनता और निराशा. ये हमारे विचारों और भावनाओं को दर्शाती हैं.
In simple words: तिस्रः (तीन)।
🎯 Exam Tip: 'कति' (कितने) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में सही संख्या दें।
Question 2. मनसः तिस्रः अवस्थाः काः? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: मन की तीन अवस्थाएँ हैं: उत्साह, उदासीनता और निराशा. ये मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती हैं.
In simple words: उत्साह, उदासीनता और निराशा मन की तीन अवस्थाएँ हैं।
🎯 Exam Tip: जब 'काः' (कौन-सी) से प्रश्न हो, तो सभी संबंधित वस्तुओं या गुणों को सूचीबद्ध करें।
Question 3. अनेके वृद्धाः'-इत्यनयोः पदयोः विशेषणपदं किम्?
Answer: 'अनेके वृद्धाः' इन पदों में 'अनेके' विशेषण पद है, जो 'वृद्धाः' संज्ञा की संख्या बता रहा है.
In simple words: 'अनेके' विशेषण पद है।
🎯 Exam Tip: विशेषण पद हमेशा उस संज्ञा के साथ होता है जिसकी यह विशेषता बताता है, चाहे वह संख्या हो या गुण।
Passage 12
यत् परितः अस्मान् आवृणोति तत् पर्यावरणं कथ्यते। पृथ्वीजलाकाशवनस्पतयः जीवाश्च पर्यावरणसर्जकाः सन्ति। वर्तमानकाले प्राकृतिसंसाधनानां असन्तुलितदोहनेन औद्योगिक-विस्तारेण च पर्यावरण प्रदूषितं जातम्। अद्य वायु-जल-ध्वनिप्रदूषणेन मानवजीवनं दुःखमयं सज्जातम्। अद्य मानवसभ्यतायाः संरक्षणार्थं स्वास्थ्य संवर्द्धनार्थञ्च पर्यावरणस्य सन्तुलनं संरक्षणं च आवश्यकं वर्तते।
हिन्दी-अनुवाद: जो चारों ओर से हमें ढकता है, उसे पर्यावरण कहा जाता है। पृथ्वी, जल, आकाश, वनस्पतियों और जीव पर्यावरण को बनाने वाले होते हैं। वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों के असन्तुलित दोहन से और औद्योगिक विस्तार से पर्यावरण प्रदूषित हो गया है। आज वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण से मानव-जीवन दुःखमय हो गया है। आज मानव-सभ्यता की सुरक्षा के लिए और स्वास्थ्य के संवर्द्धन के लिए पर्यावरण का सन्तुलन और संरक्षण आवश्यक है।
Question 1. यत् परितः अस्मान् आवृणोति तत् किं कथ्यते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: जो हमें चारों ओर से घेरता है उसे पर्यावरण कहते हैं. यह हमारे जीवन का आधार है.
In simple words: पर्यावरणम्।
🎯 Exam Tip: 'किं' (क्या) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में उचित संज्ञापद का प्रयोग करें।
Question 2. किमर्थं पर्यावरणस्य सन्तुलनं संरक्षणं च आवश्यकं वर्तते? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: पर्यावरण का संतुलन और संरक्षण मानव सभ्यता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है. यह हमें एक स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है.
In simple words: मानव सभ्यता की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण का संतुलन और संरक्षण जरूरी है।
🎯 Exam Tip: 'किमर्थं' (किस लिए) से प्रश्न होने पर, उत्तर में कारण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।
Question 3. उपर्युक्त अनुच्छेदे 'सुखमयम्' इति पदस्य विलोमशब्दः कः?
Answer: उपर्युक्त अनुच्छेद में 'सुखमयम्' शब्द का विलोम 'दुःखमयम्' है, जो विपरीत अर्थ को दर्शाता है.
In simple words: 'सुखमयम्' का विलोम 'दुःखमयम्' है।
🎯 Exam Tip: विलोम शब्द पहचानते समय, दिए गए शब्द के अर्थ के ठीक विपरीत अर्थ वाले शब्द को खोजें।
Passage 13
अस्माकं भारतवर्षः प्राकृतिक सुषमायाः भण्डारो वर्तते। अत्र प्रकृति नटी प्रतिक्षणं नव्यं भव्यं च नाटयति। अत्र एकस्मिन् वर्षे षड्तवो भवन्ति वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरत्, शिशिर, हेमन्तश्च। एषु वसन्तस्यैव प्राधान्यं वर्तते। समागमे वसन्ते नातिशीतं नात्युष्णं भवति। साधुः एष ऋतुः ऋतुषु ऋतुराज इति कथ्यते। अस्मिन् ऋतौ वसुन्धरा सुसज्जितं मनोरमं रूपं धारयति। सर्वमपि चारुतरं प्रतिभाति।
हिन्दी-अनुवाद: हमारा भारतवर्ष प्राकृतिक सौन्दर्य का भण्डार है। यहाँ प्रकृति रूपी नायिका प्रत्येक क्षण नवीन और भव्य रूप धारण करती है। यहाँ एक वर्ष में छः ऋतुएँ होती हैं-वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरत्, शिशिर और हेमन्त ऋतु। इनमें वसन्त की ही प्रधानता है। वसन्त ऋतु के आने पर न अधिक गर्मी रहती है और न अधिक सर्दी रहती है। वह श्रेष्ठ ऋतु ऋतुओं में 'ऋतुराज' कही जाती है। इस ऋतु में पृथ्वी सुसज्जित और मनोरम रूप को धारण करती है। सभी कुछ सुन्दर प्रतीत होता है।
Question 1. अत्र एकस्मिन् वर्षे कति ऋतवो भवन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: हमारे देश में एक वर्ष में छह ऋतुएँ होती हैं, जिनमें वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर और हेमंत शामिल हैं.
In simple words: षड् (छह)।
🎯 Exam Tip: 'कति' (कितने) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में संख्यावाचक शब्द दें।
Passage 14
यदि स्वजनः एव लोभी भूत्वा शत्रुभिः सह मिलति तदा नाशः एव भवति। कोऽपि जनः आत्मानं तस्मात् नाशात् रक्षितुं समर्थः न भवति। एकः मनुष्यः कुठारं रचितवान्। प्रयोगार्थं तत्र काष्ठदण्डम् योजितवान् ततः सः कुठारं नीत्वा वनम् अगच्छत्। तत्र कुठारेण वृक्षस्य छेदनं कर्तुं प्रारभत। तदा वृक्षः काष्ठदण्डं सम्बोध्य अवदत्-भो विभीषणः नूनं त्वमेव मम नाशस्य कारणम् इति।
हिन्दी-अनुवाद: यदि अपना ही व्यक्ति लोभी होकर शत्रुओं के साथ मिलता है तो विनाश ही होता है। कोई भी व्यक्ति स्वयं को उस विनाश से बचाने में समर्थ नहीं होता है। एक मनुष्य ने कुठार का निर्माण किया.., काम में लेने के लिए उसे लकड़ी के दण्डे से जोड़ा। तब वह कुठार (कुल्हाड़ी) को लेकर वन में गया। वहाँ कुल्हाड़ी से वृक्ष काटने लगा। तब वृक्ष ने लकड़ी के दण्डे को सम्बोधित करके कहा-अरे विभीषण! निश्चय तुम ही मेरे विनाश का कारण हो।
Question 1. वृक्षः कं विभीषणः!' इति सम्बोधयति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: वृक्ष अपने लकड़ी के डंडे को 'विभीषण' कहकर संबोधित करता है, क्योंकि वही उसके विनाश का कारण बनता है.
In simple words: काष्ठदण्डम् (लकड़ी का डंडा)।
🎯 Exam Tip: 'कं' (किसे) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में उस व्यक्ति या वस्तु का उल्लेख करें जिसे संबोधित किया गया है।
Question 2. वृक्षः काष्ठदण्डं सम्बोध्य किं वदति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: वृक्ष लकड़ी के डंडे को संबोधित करते हुए कहता है कि 'हे विभीषण! निश्चय ही तुम मेरे विनाश का कारण हो.' यह विश्वासघात को दर्शाता है.
In simple words: वृक्ष ने कहा कि लकड़ी का डंडा ही उसके विनाश का कारण है।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तरों में, मुख्य कथन को सीधे उद्धृत करें या उसका सार प्रस्तुत करें।
Question 3. आनीय' इति पदस्य किं विलोमपदम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'आनीय' पद का विलोमपद 'नीत्वा' है, जिसका अर्थ है 'लेकर'. यह दोनों विपरीत क्रियाओं को दर्शाते हैं.
In simple words: 'आनीय' का विलोम 'नीत्वा' है।
🎯 Exam Tip: विलोमपद प्रश्नों में, दिए गए शब्द के विपरीतार्थक शब्द को पहचानें।
Passage 15
आँग्लदेशीयाः पूर्वम् भारतदेशे शासनम् अकुर्वन्। स्वाधीनतायै अनेकानि आन्दोलनानि अभवन्। लक्ष्मीबाई एका प्रमुखा सेनानायिका आसीत्। तस्याः जनकः जननी च बिठूरराज्ये अवसताम्। लक्ष्मीबाई शस्त्रज्ञाने अश्वारोहणे च निपुणा आसीत्। तस्याः विवाहः गंगाधरेण सह अभवत्। गंगाधरस्य असमये एवं मृत्युः अभवत्। आँग्लसेनानायकः यूरोजः अकथयत्-'राज्ञी आत्मसमर्पण करोतु' इति। लक्ष्मीबाई अवदत्-'झाँसीराज्यं मम अस्ति। अहं झाँसी-राज्यं न दास्यामि' इति। सा अँग्लैः सह भीषणं युद्धम् अकरोत्। अन्ते सा प्राणान् अत्यजत्।
हिन्दी-अनुवाद: पहले भारत में अंग्रेज शासन करते थे। स्वतन्त्रता के लिए अनेक आन्दोलन हुए। लक्ष्मीबाई एक प्रमुख सेनानायिका थी। उसके माता-पिता बिठूर राज्य में रहते थे। लक्ष्मीबाई शस्त्र-ज्ञान और अश्वारोहण में निपुण थी। उसका विवाह गंगाधर के साथ हुआ था। गंगाधर की असमय मृत्यु हो गई। अंग्रेज सेनानायक यूरोज ने कहा- 'रानी आत्मसमर्पण करे।' लक्ष्मीबाई ने कहा- 'झाँसी राज्य मेरा है। मैं झाँसी राज्य नहीं दूँगी।' उन्होंने अंग्रेजों के साथ भीषण युद्ध किया। अंत में उन्होंने प्राण त्याग दिए।
Question 1. ऑग्लदेशीयाः पूर्वम् कुत्र शासनम् अकुर्वन्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: अंग्रेज पहले भारत देश में शासन करते थे. उन्होंने लंबे समय तक भारत पर अपना अधिकार जमाए रखा.
In simple words: भारतदेशे।
🎯 Exam Tip: 'कुत्र' (कहाँ) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में स्थान का नाम दें।
Question 2. लक्ष्मीबाई कस्मिन् निपुणा आसीत् ? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: लक्ष्मीबाई शस्त्र ज्ञान और घुड़सवारी दोनों में निपुण थीं. वे एक कुशल योद्धा थीं.
In simple words: लक्ष्मीबाई शस्त्र चलाने और घोड़े की सवारी में निपुण थीं।
🎯 Exam Tip: 'कस्मिन्' (किसमें) से प्रश्न होने पर, उत्तर में कौशल या विशेषता का उल्लेख करें।
Question 3. “सा आँग्लैः सह भीषणं युद्धम् अकरोत्' उपर्युक्तवाक्ये सर्वनामपदं 'सा' स्थाने संज्ञापदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'सा' सर्वनाम पद के स्थान पर 'लक्ष्मीबाई' संज्ञापद आएगा, क्योंकि 'सा' उन्हीं को संदर्भित करता है.
In simple words: 'सा' की जगह 'लक्ष्मीबाई' आएगा।
🎯 Exam Tip: सर्वनाम के स्थान पर सही संज्ञापद की पहचान करने के लिए, वाक्य में सर्वनाम किस संज्ञा के लिए प्रयुक्त हुआ है, यह ज्ञात करें।
Passage 17
शिष्यः गुरुम् अपृच्छत्-'महोदय! सुखसुविधयोः को भेदः?” गुरुः अवदत्-अहम् एकदा एकस्य थनिनो गृहे अतिथिः अभवम् तस्य आतिथ्यगृहं दृष्ट्ा मनसि अतिव्यथितः आसम्। तत्र सर्वतः बहुमूल्यानि उपकरणानि आसन्, भ्रमणेऽपि अवधानतायाः आवश्यकता अभवत्, कदाचित् किमपि उपकरणं त्रुटितं न स्यात्। आसीत् तत्र सर्वा सुखसामग्री परम् आनन्दस्य ने अवर्तत कोऽपि उपभोक्ता। आतिथ्यस्थानं नासीद् उपवेष्टु योग्यम् एवमुक्त्वा गुरुः शिष्यं समबोधयत्-'उपकरणैः प्राप्यते नैव सुखम्। तत् तु मनसः आनन्देन एव जायते।”
हिन्दी-अनुवाद: शिष्य ने गुरु से पूछा-'महोदय ! सुख और सुविधा में क्या भेद है?" गुरु ने कहा- "मैं एक बार एक धनवान् के घर अतिथि के रूप में गया। उसका आतिथ्य-गृह देखकर मन में बहुत दुःखी था। वहाँ सभी ओर बहुमूल्य उपकरण थे, भ्रमण में भी सावधानी की आवश्यकता हुई कि कभी कोई उपकरण टूट न जाये। वहाँ सभी सुख-सामग्री थी, किन्तु परम आनन्द को भोगने वाला कोई नहीं था। आतिथ्य का स्थान बैठने योग्य नहीं था।” ऐसा कहकर गुरु ने शिष्य को समझाया-“उपकरणों से सुख प्राप्त नहीं होता है। वह तो मन के आनन्द से ही उत्पन्न होता है।
Question 1. शिष्यः कयोः भेदम् अपृच्छत्? (एकपदेन उत्तरत)।
Answer: शिष्य ने गुरु से सुख और सुविधा के बीच का भेद पूछा, क्योंकि उसे इन दोनों का अंतर स्पष्ट नहीं था.
In simple words: सुखसुविधयोः।
🎯 Exam Tip: 'कयोः' (किन दो के बीच) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में दोनों वस्तुओं या अवधारणाओं का उल्लेख करें।
Question 2. सुखसामग्याः आनन्दस्य कः न आसीत्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: सुख-सुविधाओं का आनंद लेने वाला कोई उपभोक्ता नहीं था, क्योंकि सुख भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि मन से आता है.
In simple words: सुख-सुविधाओं का आनंद लेने वाला कोई नहीं था।
🎯 Exam Tip: पूर्ण-वाक्य उत्तरों में, प्रश्न से मुख्य विचार को लेते हुए एक स्पष्ट कथन बनाएँ।
Question 3. 'अभवम्' इति क्रियापदस्य किं कर्तृपदम्?
Answer: 'अभवम्' क्रियापद का कर्तृपद 'अहम्' है, क्योंकि गुरु स्वयं अतिथि बने थे.
In simple words: 'अभवम्' का कर्ता 'अहम्' है।
🎯 Exam Tip: क्रियापद के कर्तृपद को पहचानने के लिए, यह देखें कि वाक्य में क्रिया को कौन-सा सर्वनाम या संज्ञा कर रहा है।
Passage 18
हिन्दी-अनुवाद: हमारा विद्यालय दूसरी काशी के नाम से विख्यात जयपुर नगर के मध्य रमणीय स्थान पर है। यह उच्च माध्यमिक विद्यालय है। इसका भवन दुमंजिला, विस्तृत, भव्य और सुसज्जित है। इसके पुस्तकालय में दस हजार पुस्तकें हैं, और विभिन्न पत्र-पत्रिकाएँ आती हैं। यह विद्यालय पठन-पाठन की दृष्टि से सुव्यवस्थित और सुशासित है। यहाँ के छात्र योग्यतम हैं। यह आदर्श विद्यालय है।
Question 1. अपरा काशी नाम्ना कः विख्यातः? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: जयपुर नगर को 'दूसरी काशी' के नाम से जाना जाता है. यह अपनी सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत के कारण प्रसिद्ध है.
In simple words: जयपुरनगरम्।
🎯 Exam Tip: 'कः' (कौन) से प्रश्न पूछे जाने पर, उत्तर में व्यक्ति या स्थान का नाम दें।
Question 2. विद्यालयस्य भवनं कीदृशम् अस्ति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत),
Answer: विद्यालय का भवन दुमंजिला, विस्तृत, भव्य और सुसज्जित है. यह छात्रों के लिए एक आरामदायक और प्रेरक वातावरण प्रदान करता है.
In simple words: विद्यालय का भवन दुमंजिला, बड़ा, सुंदर और सुसज्जित है।
🎯 Exam Tip: 'कीदृशम्' (कैसा) से प्रश्न होने पर, उत्तर में वस्तु के गुणों या विशेषताओं का वर्णन करें।
Question 3. “अस्य पुस्तकालये दशसहस्राणि पुस्तकानि सन्ति।” उपर्युक्तवाक्ये विशेष्यपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'पुस्तकानि' विशेष्यपद है, जिसकी विशेषता 'दशसहस्राणि' (दस हजार) बताई जा रही है. यह पुस्तकालय की समृद्धता को दर्शाता है.
In simple words: 'पुस्तकानि' विशेष्य है।
🎯 Exam Tip: विशेष्य वह शब्द होता है जिसकी विशेषता बताई जाती है, और विशेषण वह शब्द जो विशेषता बताता है।
Passage 19
परेषाम् प्राणिनामुपकारः परोपकारोऽस्ति। परस्य हितसम्पादनं मनसा वाचा कर्मणा चान्येषां हितानुष्ठानमेव परोपकारशब्देन गृह्यते। संसारे परोपकारः एव स गुणो विद्यते, येन मनुष्येषु सुखस्य प्रतिष्ठा वर्तते। परोपकारेण हृदयं पवित्रं सरलं सरसं सदयं च भवति सत्पुरुषाः कदापि न स्वार्थतत्पराः भवन्ति। ते परेषां दुःखं स्वीयं दुःखं मत्वा तन्नाशाय यतन्ते। ये दीनेभ्यो दानं ददति, निर्धनेभ्यो धनम्, वस्त्रहीनेभ्यो वस्त्रम्, पिपासितेभ्यो जलम्, बुभुक्षितेभ्योऽन्नम्, अशिक्षितेभ्यश्च शिक्षा ददति।
हिन्दी-अनुवाद: दूसरे प्राणियों का उपकार करना परोपकार कहा जाता है। मन, वचन और धर्म से दूसरों का हित करना और अन्य लोगों के हित को सोचना ही परोपकार शब्द से ग्रहण किया जाता है। संसार में परोपकार ही वह गुण है, जिससे मनुष्यों में सुख की प्रतिष्ठा है। परोपकार से हृदय पवित्र, सरल, सरस और दयायुक्त होता है। सत्पुरुष कभी भी स्वार्थ में तत्पर नहीं होते हैं। वे दूसरों के दुःख को अपना दुःख मानकर उसके विनाश के लिए प्रयत्न करते हैं। वे दोनों के लिए दान देते हैं, निर्धनों के लिए धन, वस्त्रहीनों को वस्त्र, प्यासों को जल, भूखों को अन्न तथा अशिक्षितों को शिक्षा देते हैं।
Question 2. कः परोपकारोऽस्ति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: दूसरों का उपकार करना ही परोपकार कहलाता है. इसमें मन, वचन और कर्म से दूसरों का हित करना शामिल है.
In simple words: दूसरे प्राणियों की मदद करना ही परोपकार है।
🎯 Exam Tip: 'कः' (कौन) से पूछे गए प्रश्नों में, उत्तर में उचित परिभाषा या व्यक्ति का उल्लेख करें।
Free study material for Sanskrit
RBSE Solutions Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः
Students can now access the RBSE Solutions for अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Sanskrit textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Sanskrit chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Sanskrit Class 12 Solved Papers
Using our Sanskrit solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Sanskrit are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sanskrit. You can access RBSE Solutions Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 40-60 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः in printable PDF format for offline study on any device.