RBSE Solutions Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 80-100 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः

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Detailed अपठितावबोधनम् 80-100 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit

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Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम् 80-100 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Sanskrit अपठितावबोधनम 80-100 शब्दपरिमिताः सरलगद्यांशाः

वृक्षाः भू अन्ति। आः में मनुष्य इव भुक्त्वा प्रीत्वा च जीवन्ति मूलाने वृक्षारां मुखानि भवन्ति ते पाद: जलं पिबन्ति अत एव पादपाः कथ्यन्ते तेषां मूलानि भूमितः रसं गृहीत्वा सर्वेषु अवयवेषु नयन्ति, तेन ते प्रवर्धन्तेः पुष्पन्ति, फलन्ति। वृक्षाः अपि वर्षा शीतातपैः प्रभाविताः भवन्ति। तेऽपि सुखानि दुःखानि च अनुभवन्ति। तेषु अपि प्राणाः भवन्ति, अतएव ते प्राणिनः इव जायन्ते, वर्धन्ते, पुष्पन्ति, फलन्ति, म्रियन्ते च। ते कदापि खगमृगजलचरनराः इव न विचरन्ति अतः अचराः कथ्यन्ते। बहूपकुर्वन्ति वृक्षाः प्राणिनाम्। वृक्षाः अशरणानां शरणम्, बुभुक्षितानां भोजनम्, संतप्तानां समाश्रयाः वृष्टिकारकाः सन्ति। वृक्षारोपणं वृक्षरक्षणं च अस्माकं रक्षायै परमावश्यकम्।

हिन्दी अनुवाद-वृक्ष भूमि में उत्पन्न होते हैं। वृक्ष भी मनुष्य के समान खाकर और पीकर जीवित रहते हैं। मूल (जड़े) वृक्षों के मुख होते हैं। वे पैरों से जल पीते हैं, इसीलिए पादपाः' कहे जाते हैं। उनकी जड़े भूमि से रस ग्रहण करके सभी अवयवों में ले जाती हैं, उससे वे बढ़ते हैं, फूल देते हैं और फल देते हैं। वृक्ष भी। वर्षा, सद, गर्मी से प्रभावित होते हैं। वे भी सुख और दुःख का अनुभव करते हैं। उनमें भी प्राण होते हैं, इसीलिए वे प्राणियों के समान उत्पन्न होते हैं, बढ़ते हैं, फूलते हैं, फलते हैं और मरते हैं। वे कभी भी पक्षी, पशु, जलचर और मनुष्यों के समान विचरण नहीं करते हैं, इसलिए अचर' कहे जाते हैं वृक्ष प्राणियों को बहुत उपकार करते हैं। वृक्ष अशरणों के शरणदाता, भूखों का भोजन, संतप्तों के आश्रय तथा वर्षा करने वाले हैं। हमारी रक्षा के लिए वृक्षारोपण और वृक्षों की रक्षा करना परम आवश्यक है।

 

Question 1. कः वृक्षारां मुखानि भवन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: वृक्षों की जड़ें उनके मुख होती हैं। जड़ें धरती से पानी और पोषक तत्व खींचकर पूरे पेड़ तक पहुँचाती हैं, जिससे पेड़ जीवित रहते हैं। पेड़ इसी प्रक्रिया से बढ़ते हैं।
In simple words: वृक्षों की जड़ें ही उनके मुख होती हैं।

🎯 Exam Tip: एक-शब्द के उत्तर के लिए, प्रश्न में से मुख्य संज्ञा या क्रिया को पहचानें और सीधे उसका उत्तर दें।

 

Question 2. वृक्षाः कुत्र उत्पद्यन्ते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: वृक्ष भूमि पर उत्पन्न होते हैं। सभी पेड़-पौधे मिट्टी में ही बढ़ते हैं।
In simple words: वृक्ष धरती पर उगते हैं।

🎯 Exam Tip: "कुत्र" (कहाँ) से शुरू होने वाले प्रश्न का उत्तर आमतौर पर किसी स्थान या जगह को बताता है।

 

Question 3. वृक्षाः पादपाः कथं कथ्यन्ते? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: वृक्षों को 'पादपाः' कहा जाता है क्योंकि वे अपने पैरों (जड़ों) से पानी पीते हैं। इस तरह वे पानी और खनिज तत्वों को अवशोषित करते हैं।
In simple words: वृक्षों को 'पादपाः' कहते हैं क्योंकि वे जड़ों से पानी पीते हैं।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देने के लिए, प्रश्न के सभी मुख्य शब्दों का उपयोग करें और उन्हें एक पूर्ण अर्थ वाले वाक्य में प्रस्तुत करें।

 

Question 4. बहूपकुर्वन्ति वृक्षाः प्राणिनाम् इत्यस्मिन् वाक्ये 'उपकुर्वन्ति' इति क्रिया पदस्य कर्तृपदम् किम?
Answer: इस वाक्य में 'उपकुर्वन्ति' क्रिया पद का कर्ता पद 'वृक्षाः' है। 'वृक्षाः' प्राणियों का बहुत उपकार करते हैं।
In simple words: 'उपकुर्वन्ति' क्रिया का कर्ता 'वृक्षाः' है।

🎯 Exam Tip: क्रिया का कर्ता (subject) पहचानने के लिए "कौन" या "क्या" से प्रश्न पूछें।

 

Question 5. तेषु अपि प्राणाः भवन्ति अस्मिन् वाक्ये 'तेषु' इति सर्वनामपदं कस्य संज्ञा पदस्य स्थाने प्रयुक्तम्?
Answer: इस वाक्य में 'तेषु' यह सर्वनाम पद 'वृक्षेषु' इस संज्ञा पद के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। यह पेड़ों के भीतर जीवन की उपस्थिति को दर्शाता है।
In simple words: 'तेषु' शब्द 'वृक्षेषु' के लिए इस्तेमाल किया गया है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम (pronoun) का संदर्भ पहचानने के लिए, देखें कि यह वाक्य में पहले किस संज्ञा (noun) की जगह ले रहा है।

 

Question 6. 'चराः' इत्यस्य विलोमपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत।
Answer: 'चराः' इस पद का विलोमपद गद्यांश से 'अचराः' है। 'चराः' का अर्थ है चलने वाले और 'अचराः' का अर्थ है जो चल नहीं सकते।
In simple words: 'चराः' का उल्टा शब्द 'अचराः' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द खोजने के लिए, दिए गए शब्द का अर्थ समझें और फिर गद्यांश में विपरीत अर्थ वाला शब्द ढूँढें।

 

Question 7. वृक्षाः वृष्टिकारकाः सन्ति इत्यत्र विशेष्य पदं किम्?
Answer: 'वृक्षाः वृष्टिकारकाः सन्ति' इस वाक्य में विशेष्य पद 'वृक्षाः' है। विशेष्य वह शब्द होता है जिसकी विशेषता बताई जा रही हो।
In simple words: इस वाक्य में 'वृक्षाः' विशेष्य पद है।

🎯 Exam Tip: विशेष्य (noun being described) और विशेषण (adjective) को पहचानने के लिए, यह सोचें कि किसकी विशेषता बताई जा रही है।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'वृक्षाणां महत्त्वम्' है। यह शीर्षक पूरे गद्यांश के मुख्य विषय को दर्शाता है, जो कि पेड़ों का महत्व है।
In simple words: शीर्षक 'वृक्षों का महत्व' है।

🎯 Exam Tip: गद्यांश का शीर्षक हमेशा ऐसा होना चाहिए जो पूरे पाठ का सार संक्षेप में बताता हो।

 

परेषाम् उपकारः परोपकारोऽस्तिष्येभ्यो जीवेभ्यो वा तेषां हितसम्पदानार्थं यत् किंचिंद् दीयते, तेषां साहाय्यं वा क्रियते, तत् सर्वं परोपकारशब्देन गृह्यते। संसारे परोपकार एवं स गुणो विद्यते, येन मनुष्येषु जीवेषु वा सुखस्य प्रतिष्ठा वर्तते समाजसेवायाः भावना, देशप्रेमभावना, देशभक्तिः, दीनोद्धरणभावना, परदुःखकातरता सहानुभूत्यादयश्च परोपकारगुणस्य ग्रहणेनैव भवति। परोपकारकरणेन हृदयं पवित्रं, सत्वभावसमन्वितं सरलं विनयोपेतं सरसं सदयं च भवति। परोपकारिणः परेषां दुःखं स्वीयं दुःखं मत्वा तन्नाशाय प्रयतन्ते। ते दीनेभ्यो दानं ददति, निर्धनेभ्यो धनं, वस्त्रहीनेभ्यो वस्त्रं, पिपासितेभ्यो जलं, बुभुक्षितेभ्योऽन्नं अशिक्षितेभ्यश्च शिक्षा ददति। सजनाः परोपकारेणैव प्रसन्नाः भवन्ति। ते परोपकरणे स्वीयं दुःखं न गणयन्ति। परोपकारेण सुख शान्तिश्च वर्धेते।

हिन्दी अनुवाद-दूसरों का उपकार करना ही परोपकार है। अन्य मनुष्यों अथवा जीवों के लिए उनका भला करने हेतु जो कुछ दिया जाता है अथवा उनकी सहायता की जाती है, वह सब परोपकार शब्द से ग्रहण की जाती है। संसार में परोपकार ही वह गुण है, जिससे मनुष्यों अथवा जीवों में सुख की प्रतिष्ठा है। समाजसेवा की। भावना, देशप्रेम की भावना, देशभक्ति, दीनों का उद्धार करने की भावना, परदुःखकातरता और सहानुभूति आदि परोपकार के गुण को ग्रहण करने से ही होती है। परोपकार करने से हृदयं पवित्र, सत्वभाव से युक्त, सरल, विनम्रता से युक्त, सरस और दयायुक्त होता है। परोपकार करने वाले दूसरों के दुःख को अपना दुःख मानकर उसका विनाश करने के लिए प्रयत्न करते हैं। वे दोनों को दान देते हैं, निर्धनों को धन, वस्त्रहीनों को वस्त्र, प्यासों को जल, भूखों को अन्न और अशिक्षितों को शिक्षा देते हैं। सज्जन परोपकार से ही प्रसन्न होते हैं। वे परोपकार करने में अपने दुःख की परवाह नहीं करते हैं। परोपकार से सुख और शान्ति बढ़ती है।

 

Question 1. कः गुणो मनुष्येषु जीवेषु वा सुखस्य प्रतिष्ठां वर्तते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: परोपकार वह गुण है जिससे मनुष्य और जीवों में सुख की प्रतिष्ठा होती है। यह समाज में प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देता है।
In simple words: परोपकार से मनुष्यों और जीवों को सुख मिलता है।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में "कः" (कौन) के लिए सीधे उत्तर दें, जो गद्यांश के मुख्य विचार को दर्शाता हो।

 

Question 2. हृदयं केन पवित्रं भवति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: हृदय परोपकार से पवित्र होता है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो हमारा मन शुद्ध होता है।
In simple words: परोपकार से हृदय पवित्र होता है।

🎯 Exam Tip: "केन" (किससे) से पूछे गए प्रश्न का उत्तर अक्सर किसी साधन या कारण को बताता है।

 

Question 3. परोपकारकरणेन हृदयं कीदृशं भवति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: परोपकार करने से हृदय पवित्र, सत्वभाव से युक्त, सरल, विनम्र और दयालु होता है। यह हमें एक बेहतर इंसान बनाता है।
In simple words: परोपकार करने से हृदय पवित्र और दयालु बनता है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, गद्यांश से सभी संबंधित विशेषणों को शामिल करें।

 

Question 4. 'ते दीनेभ्यो दानं ददति।' इत्यस्मिन् वाक्ये 'ददति' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'ददति' क्रिया का कर्ता पद 'परोपकारिणः (ते)' है। 'ते' का अर्थ है 'वे', जो परोपकारी लोग हैं।
In simple words: 'ददति' क्रिया का कर्ता 'परोपकारी' (वे) हैं।

🎯 Exam Tip: जब कर्ता एक सर्वनाम हो, तो उसके पीछे की संज्ञा (जिसके लिए वह उपयोग हुआ है) को भी समझें।

 

Question 5. ते परोपकरणे...न गणयन्ति इत्यत्र 'ते' इति सर्वनामपदं कस्य संज्ञापदस्य स्थाने प्रयुक्तम् अस्ति?
Answer: यहाँ 'ते' सर्वनाम पद 'सज्जनाः' इस संज्ञा पद के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। इसका मतलब है कि सज्जन लोग परोपकार करते समय अपने दुःख की परवाह नहीं करते।
In simple words: 'ते' शब्द 'सज्जन' के लिए इस्तेमाल किया गया है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम का सही संदर्भ पहचानने के लिए, वाक्य में पहले आने वाली संज्ञा को देखें जिससे सर्वनाम जुड़ा हुआ है।

 

Question 6. 'निर्दयम्' इत्यस्य विलोमपदं गद्यांशात् लिखत।
Answer: 'निर्दयम्' इस पद का विलोमपद गद्यांश से 'सदयम्' है। निर्दय का अर्थ है जिसके मन में दया न हो, और सदय का अर्थ है दयालु।
In simple words: 'निर्दयम्' का उल्टा शब्द 'सदयम्' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 7. 'स्वीयं दुःखम्' इत्यनयोः विशेषणपदं किम्?
Answer: 'स्वीयं दुःखम्' इन पदों में विशेषण पद 'स्वीयम्' है। यह 'दुःख' की विशेषता बता रहा है कि वह अपना है।
In simple words: 'स्वीयम्' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'परोपकारस्य महत्त्वम्' है। यह शीर्षक परोपकार के महत्व को दर्शाता है, जो गद्यांश का केंद्रीय विषय है।
In simple words: शीर्षक 'परोपकार का महत्व' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे गद्यांश का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

मेघदूते कालिदासेन स्वप्रियावियुक्त मनोव्यथायाः चित्रणं कृतम्। अस्य काव्यस्य भागद्वयमस्ति-पूर्वमेघः उत्तरमेघश्च । अलकापुर्याः स्वामी कुबेरः। स्वकर्त्तव्यं प्रति प्रमादिनं यक्षं शपति सः यक्षः एकवर्षपर्यन्तं शापवशात् स्वगृहात् दूरे रामगिरेः आश्रमेषु निवसतियथा कथञ्चिद् अष्टौ मासाः व्यतीताः अनन्तरम् आषाढ़मासः आगच्छतिआषाढ़मासे आकाशे मेधं दृष्ट्रा यक्षः अतीव दुःखितः भवति तस्य विरहवेदना तीव्रा भवति। सः मेघमाध्यमेन अलकापुर्यां स्व प्रिया समीपे संदेशं प्रेषयितुम् इच्छति। मेघं पूजयित्वा सः यक्षः स्व वृत्तान्तं कथयति। पूर्वमेघे सः रामगिरितः अलकापुरी पर्यन्तं मार्गस्य वर्णनं करोति। रामगिरिः महाराष्ट्र प्रदेशे नागपुर-समीपे वर्तते। अलकापुरी च हिमालयपर्वते स्थिता अस्ति। रामगिरितः हिमालयपर्यन्तं मार्गे आगतानां पर्वतानां, नदीनां, वनानां, पुरीणां च वर्णनं कविना कृतम् अस्ति। एवं बाह्य प्रकृत्याः सुन्दरं चित्रणम् अस्ति। कविना नदीषु नायिकानां मेघे च नायकस्य आरोपणं कृत्वा प्रकृत्याः मानवीकरणम् अपि कृतम्।

हिन्दी अनुवाद-मेघदूत में कालिदास ने अपनी प्रियतमा से वियोगी यक्ष की मनोव्यथा का चित्रण किया है। इस काव्य के दो भाग हैं- पूर्वमेघ और उत्तरमेघ अलकापुरी का स्वामी कुबेर अपने कर्तव्य के प्रति असावधान यक्ष को शाप देता है। वह यक्ष एक वर्ष तक शाप के कारण अपने घर से दूर रामगिरि के आश्रमों में रहता है। जैसे तैसे आठ महीने व्यतीत हो गये, इसके बाद आषाढ़ का महीना आता है। आषाढ़-मास में आकाश में मेघ (बादल) देखकर यक्ष अत्यधिक दुःखी होता है। उसकी विरह-वेदना तीव्र हो जाती है। वह मेघ के माध्यम से अलकापुरी में अपनी प्रियतमा के पास सन्देश भेजना चाहता है। मेघ की पूजा करके वह यक्ष अपना वृत्तान्त कहता है। पूर्वमेघ में वह रामगिरि से अलकापुरी तक के मार्ग का वर्णन करता है। रामगिरि महाराष्ट्र प्रदेश में नागपुर के पास है। और अलकापुरी हिमालय पर्वत पर स्थित है। कवि ने रामगिरि से हिमालय तक के मार्ग में आये हुए पर्वतों, नदियों, वनों और नगरों का वर्णन किया है

 

Question 1. कः यक्षं शपति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: कुबेर यक्ष को श्राप देते हैं। कुबेर अलकापुरी के स्वामी हैं, और उन्होंने यक्ष को उसके कर्तव्य में लापरवाही के कारण श्राप दिया।
In simple words: कुबेर ने यक्ष को श्राप दिया।

🎯 Exam Tip: एक-शब्द के उत्तर के लिए, प्रश्नवाचक शब्द "कः" (कौन) के लिए सीधे उत्तर दें।

 

Question 2. अलकापुरी कुत्र स्थिता वर्तते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: अलकापुरी हिमालय पर्वत पर स्थित है। यह एक सुंदर और पौराणिक नगरी है।
In simple words: अलकापुरी हिमालय में है।

🎯 Exam Tip: "कुत्र" (कहाँ) से शुरू होने वाले प्रश्न का उत्तर किसी स्थान या जगह का नाम होता है।

 

Question 3. यक्षः मेघमाध्यमेन किं कर्तुमिच्छति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: यक्ष मेघ के माध्यम से अलकापुरी में अपनी प्रियतमा के पास संदेश भेजना चाहता है। अपनी विरह-वेदना को कम करने के लिए वह ऐसा करता है।
In simple words: यक्ष मेघ से अपनी पत्नी को संदेश भेजना चाहता है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देने के लिए, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें।

 

Question 4. “आषाढ़ मासे .....दुःखितः भवति।” इत्यत्र 'भवति' क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'भवति' क्रिया का कर्ता पद 'यक्षः' है। यक्ष ही आषाढ़ मास में दुखी होता है।
In simple words: 'भवति' क्रिया का कर्ता 'यक्षः' है।

🎯 Exam Tip: क्रिया का कर्ता पहचानने के लिए, यह जानें कि कार्य कौन कर रहा है।

 

Question 5. “अस्य काव्यस्य भागद्वयम् अस्ति” इत्यस्मिन् वाक्ये 'अस्य' इति सर्वनामपदं कस्य संज्ञापदस्य स्थाने प्रयुक्तम् अस्ति?
Answer: इस वाक्य में 'अस्य' यह सर्वनाम पद 'मेघदूतस्य' इस संज्ञा पद के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। यह मेघदूत काव्य की ओर इशारा करता है।
In simple words: 'अस्य' शब्द 'मेघदूत' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 6. 'मन्दा' इत्यस्य विलोमपदं गद्यांशात् लिखत।
Answer: 'मन्दा' इस पद का विलोमपद गद्यांश से 'तीव्रा' है। मन्दा का अर्थ है धीमी और तीव्रा का अर्थ है तीव्र।
In simple words: 'मन्दा' का उल्टा शब्द 'तीव्रा' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द चुनते समय, गद्यांश के संदर्भ में दिए गए शब्द के विपरीतार्थी को खोजें।

 

Question 7. 'अष्टौमासाः' इत्यनयोः पदयोः विशेषणपदं किम्?
Answer: 'अष्टौमासाः' इन पदों में विशेषण पद 'अष्टौ' है। यह 'मासाः' (महीने) की संख्या बता रहा है।
In simple words: 'अष्टौ' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: संख्याएँ अक्सर विशेषण के रूप में कार्य करती हैं जब वे किसी संज्ञा की मात्रा बताती हैं।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'मेघदूतं काव्यम्' है। यह शीर्षक पूरे गद्यांश के मुख्य विषय को दर्शाता है, जो कि मेघदूत काव्य है।
In simple words: शीर्षक 'मेघदूत काव्य' है।

🎯 Exam Tip: गद्यांश का शीर्षक हमेशा ऐसा होना चाहिए जो पूरे पाठ का सार संक्षेप में बताता हो।

 

संस्कृतभाषायां नाटकानां प्रणेतृषु प्रधानान्यतमस्य महाकवेर्भवभूतेः वास्तविक नाम श्रीकण्ठ इत्यासीत्। हर्षचरिते बाणभट्टः भवभूतेर्नाम कीर्तयति। अष्टमशतकोत्पनः वामनश्च तदीयग्रन्थतः स्वग्रन्थे उदाहरणं ददाति। अस्य पिता नीलकण्ठः माता च जातुकर्णी विदर्भराज्ये पद्मपुरेऽयं कविरासीत् अयं महाभागः कान्यकुब्जस्य यशोवर्मणः सभायाम् आसीत् पण्डित प्रकाण्डो यजुर्वेदी चायम्। अयं काश्यपगोत्रीयः कुमारिलस्य शिष्यश्चासीत्। करुणरसप्रवाहपरीक्षयां परीख्यते तर्हि नाटकत्रयेऽस्य उत्तररामचरितमेव सर्वातिशायि। यथाऽत्र करुणरसप्रवाहः तथा नान्यत्र। अतएव कथ्यते यत् कारुण्यं भवभूतिरेव तनुते।”

हिन्दी-अनुवाद-संस्कृत भाषा में नाटकों की रचना करने वालों में प्रमुखतम महाकवि भवभूति का वास्तविक नाम श्रीकण्ठ था। हर्षचरित में बाणभट्ट ने भवभूति के नाम की प्रशंसा की है। अष्टम शताब्दी में उत्पन्न वामन ने उनके ग्रन्थ से अपने ग्रन्थ में उदाहरण दिये हैं। इनके पिता का नाम नीलकण्ठ और माता का नाम जातुकर्णी था। ये कवि विदर्भराज्य के पद्मपुर में रहते थे। ये महोदय कान्यकुब्ज के यशोवर्मा की सभा में थे। यह प्रकाण्ड पण्डित और यजुर्वेदी थे और ये काश्यप गोत्र के कुमारिल के शिष्य थे। यदि करुण-रस के प्रवाह की परीक्षा में परीक्षण किया जाये तो इनके तीन नाटकों में उत्तररामचरित ही सबसे श्रेष्ठ है। जिस प्रकार का इसमें करुण रस का प्रवाह है, वैसा अन्यत्र नहीं है। इसीलिए कहा जाता है कि 'करुण रस में भवभूति ही श्रेष्ठ है।”

 

Question 1. भवभूतेः त्रयेषु नाटकेषु सर्वाधिकं श्रेष्ठं नाटकं किम्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: भवभूति के तीन नाटकों में 'उत्तररामचरितम्' सबसे श्रेष्ठ नाटक है। इस नाटक में करुण रस का विशेष प्रवाह है।
In simple words: उनका सबसे अच्छा नाटक 'उत्तररामचरितम्' है।

🎯 Exam Tip: एक-शब्द के उत्तर में सटीक नाम बताना महत्वपूर्ण है, खासकर साहित्यिक रचनाओं के लिए।

 

Question 2. भवभूतेः वास्तविकं नाम किम्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: भवभूति का वास्तविक नाम 'श्रीकण्ठः' था। यह नाम उनकी पहचान है।
In simple words: उनका असली नाम श्रीकण्ठ था।

🎯 Exam Tip: व्यक्तियों के वास्तविक नाम अक्सर सीधे गद्यांश में दिए होते हैं।

 

Question 3. अष्टमशतकोत्पन्नः वामनः भवभूतेः ग्रंथतः स्वग्रंथे उदाहरणं ददाति। (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: आठवीं शताब्दी में उत्पन्न वामन ने भवभूति के ग्रंथ से अपने ग्रंथ में उदाहरण दिए हैं। यह भवभूति की महत्ता को दर्शाता है।
In simple words: वामन ने भवभूति की किताबों से उदाहरण लिए।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देने के लिए, प्रश्न में दिए गए सभी महत्वपूर्ण तत्वों को वाक्य में शामिल करें।

 

Question 4. 'पण्डितप्रकाण्डः' इति पदं कस्य विशेषणम् अस्ति?
Answer: 'पण्डितप्रकाण्डः' यह पद 'भवभूतेः' का विशेषण है। इसका अर्थ है कि भवभूति एक महान विद्वान थे।
In simple words: 'पण्डितप्रकाण्डः' भवभूति के लिए विशेषण है।

🎯 Exam Tip: विशेषण के प्रश्न में, पहचानें कि कौन सा व्यक्ति या वस्तु उस विशेषता को दर्शा रहा है।

 

Question 5. हर्षचरिते बाणभट्टः भवभूतेर्नाम कीर्तयति” इत्यत्र 'कीर्तयति' क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में 'कीर्तयति' क्रिया का कर्ता पद 'बाणभट्टः' है। बाणभट्ट ही भवभूति के नाम की प्रशंसा करते हैं।
In simple words: 'कीर्तयति' क्रिया का कर्ता 'बाणभट्ट' है।

🎯 Exam Tip: कर्ता-क्रिया संबंध को पहचानने के लिए, क्रिया को करने वाले पर ध्यान दें।

 

Question 6. “अयं महाभागः कान्यकुब्जस्य:::आसीत्' इत्यस्मिन् वाक्ये 'अयम्' इति सर्वनामपदं कस्य संज्ञा-पदस्य स्थाने प्रयुक्तम् अस्ति?
Answer: इस वाक्य में 'अयम्' यह सर्वनाम पद 'भवभूतिः' इस संज्ञा पद के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। यह महाकवि भवभूति को दर्शाता है।
In simple words: 'अयम्' शब्द 'भवभूति' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 7. 'नैष्ट्रयम्' इत्यस्य विलोमपदं गद्यांशात् लिखत।
Answer: 'नैष्ट्रयम्' इस पद का विलोमपद गद्यांश से 'कारुण्यम्' है। नैष्ट्रय का अर्थ है कठोरता और कारुण्य का अर्थ है दया या करुणा।
In simple words: 'नैष्ट्रयम्' का उल्टा शब्द 'कारुण्यम्' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश के संदर्भ में दिए गए शब्द के विपरीतार्थी को खोजें।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'महाकविः भवभूतिः' है। यह शीर्षक पूरे गद्यांश के मुख्य विषय को दर्शाता है, जो कि महाकवि भवभूति के जीवन और कार्यों के बारे में है।
In simple words: शीर्षक 'महाकवि भवभूति' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे गद्यांश का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

विठ्ठलभाई पटेलमहोदयः वाक्कीलता व्यवसायं न अमन्यत एवं सामाजिकसेवाम् अजानात्। एकदा पटेलो मुम्बईनगरे कस्यापि अभियोगस्य पक्षे स्वकार्यम् अकरोत् फौजदार्याः महान् अभियोग आसीत्। लेशमात्रत्रुट्या स मृत्युदण्डं प्राप्तुं विवशः अभवत्। पटेलोऽभियोगे स्वपक्षमस्थापयत् तथैव कोऽपि जनः तस्मैः पत्रमेकमयच्छत् पटेलः पत्रं पठित्वा वादे लीनः संजातः। कमपि भावं न प्रकटितवान्। स्वतर्कशक्त्या साक्ष्येण च सः स्वपक्षमजयत्। न्यायालयाद् बहिः आगतं तं यदा तस्ये मित्रं पत्रविषयेऽपृच्छत् तदा सोऽसूचयत् यत् पत्रे तस्य पल्याः मृत्योः सूचनाऽस्ति तन्मित्रमपृच्छत् पत्याः मृत्योः सूचना प्राप्यापि भवता न्यायालये वादो न. त्यक्तः, कथमपि कष्टभावो न लब्धः। गंभीरवचसा पटेलः प्रत्युत्तरं ददौ'पत्नी तु गता परं कथं मेऽभियोज्योऽपि मृत्युमाप्नुयात्? पटेलस्य मित्रम् अवाक् अभवत्।

हिन्दी-अनुवाद-विठ्ठलभाई पटेल महोदय वकालत को व्यवसाय नहीं मानते थे, अपितु उसे सामाजिक सेवा जानते थे। एक बार पटेल ने मुम्बई नगर में किसी अभियोग के पक्ष में अपना कार्य किया। फौजदारी का बहुत बड़ा अभियोग (दावा) था। लेशमात्र गलती से वह मृत्युदण्ड को प्राप्त करने के लिए विवश हो गया था। पटेल ने अभियोग में अपना पक्ष प्रस्तुत किया, तभी किसी व्यक्ति ने उसको एक पत्र दिया। पटेल पत्र पढ़करं वाद में लीन हो गया। किसी भी भाव को प्रकट नहीं किया। अपनी तर्क शक्ति और साक्ष्य से अपने पक्ष को जिताया। न्यायालय से बाहर आने पर उससे जब उसके मित्र ने पत्र के विषय में पूछा तो उसने बताया कि पत्र में उसकी पत्नी की मृत्यु की सूचना थी। उसके मित्र ने पूछा कि पत्नी की मृत्यु की सूचना पाकर भी आपने न्यायालय में वाद को नहीं छोड़ा और किसी भी तरह का कष्ट भाव प्राप्त नहीं किया। गम्भीर वचनों से पटेल ने उत्तर दिया पत्नी तो चली गई किन्तु क्या मेरा अभियोगी भी मृत्यु को प्राप्त करता?" पटेल का मित्र अवाक् हो गया।

 

Question 1. पटेलः किं न अमन्यत? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: पटेल वकालत को केवल व्यवसाय नहीं मानते थे, बल्कि इसे सामाजिक सेवा मानते थे। वह अपने काम को समाज की भलाई के लिए करते थे।
In simple words: पटेल वकालत को व्यवसाय नहीं मानते थे।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में "किं" (क्या) के लिए, गद्यांश से सीधे जानकारी प्रदान करें।

 

Question 2. कस्य नगरस्य अभियोगस्य पक्षे स्वकार्यम् अकरोत्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: उन्होंने मुंबई नगर में एक मुकदमे के पक्ष में अपना काम किया। मुंबई एक बड़ा और महत्वपूर्ण शहर है।
In simple words: उन्होंने मुंबई शहर में काम किया।

🎯 Exam Tip: "कस्य" (किसका) से पूछे गए प्रश्न में, संबंधित संज्ञा को पहचानकर उत्तर दें।

 

Question 3. पटेलः मित्रं प्रत्युत्तरं ददौ यत् किं? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: पटेल ने अपने मित्र को उत्तर दिया कि "पत्नी तो चली गई पर क्या मेरा अभियोगी (जिसका मैं केस लड़ रहा हूँ) भी मृत्यु को प्राप्त करे?" यह उनके कर्तव्यनिष्ठा को दिखाता है।
In simple words: पटेल ने कहा कि पत्नी तो चली गई, पर क्या उनका मुवक्किल भी मर जाए?

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देने के लिए, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक कथन उद्धृत करें।

 

Question 4. 'अभ्यन्तर'-पदस्य विलोमपदं कित्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'अभ्यन्तर' इस पद का विलोमपद 'बहिः' प्रयुक्त हुआ है। अभ्यन्तर का अर्थ है भीतर और बहिः का अर्थ है बाहर।
In simple words: 'अभ्यन्तर' का उल्टा शब्द 'बहिः' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द के प्रश्नों में, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 5. 'अधिगत्य' इस पद का पर्याय पद कौन सा है?
Answer: 'अधिगत्य' इस पद का पर्याय 'प्राप्य' प्रयुक्त हुआ है। दोनों का अर्थ है 'प्राप्त करके'।
In simple words: 'अधिगत्य' का पर्यायवाची 'प्राप्य' है।

🎯 Exam Tip: समानार्थी शब्द पहचानने के लिए, दिए गए शब्द के अर्थ को समझें और फिर गद्यांश में समान अर्थ वाले शब्द को खोजें।

 

Question 6. 'तस्य मित्रं पत्र-विषयेऽपृच्छत्'-अत्र 'तस्य' इति सर्वनामपदं कस्मै. प्रयुक्तम्?
Answer: इस वाक्य में 'तस्य' यह सर्वनाम पद 'विठ्ठलभाईपटेलमहोदयाय' के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह पटेल के मित्र की बात कर रहा है।
In simple words: 'तस्य' शब्द 'विठ्ठलभाई पटेल' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 7. 'महान् अभियोगः आसीत्’-अत्र विशेषणं किम्?
Answer: 'महान् अभियोगः आसीत्' इस वाक्य में विशेषण पद 'महान्' है। यह 'अभियोग' की विशेषता बता रहा है कि वह बड़ा था।
In simple words: 'महान्' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 8. अस्य अनुच्छेदस्य कृते उपयुक्तं शीर्षकं संस्कृतेन लिखत।
Answer: इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक 'विठ्ठलभाई पटेलमहोदयः' है। यह शीर्षक पूरे अनुच्छेद के मुख्य विषय को दर्शाता है, जो विठ्ठलभाई पटेल की कर्तव्यनिष्ठा है।
In simple words: शीर्षक 'विठ्ठलभाई पटेल' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

एकदा भीमराव अम्बेडकरमहोदयः उच्चशिक्षार्थं लन्दननगरं गतः। तत्र स साधारणं शाकादिभोजनम् अकरोत् अल्पमूल्यानि वस्त्राणि च अधारयत्। यच्च धनं शिष्टमभवत् तेन पुस्तकानि अक़ीणात्। एकदा तस्मै अर्थशास्त्रपुस्तकस्य आवश्यकता अभवत् तत् च बहुमूल्यम् आसीत्। अतः स पुरातनपुस्तक-विक्रेतुः विपणिं गतवान्। तत् पुस्तकं तत्र अवलोक्य स भृशं प्रासीदत्। स्वसमीपवर्ति सर्वं धनं दत्त्वा स तत् क्रीतवान्। पुस्तकं पठन् स भोजनालये आसन्ह्याम् उपविष्टः। यदैव स भोजनदातारं दृष्टवान् तर्हि ध्यातवान् धनं तु तत्समीपे नास्ति। झटिति उत्थाय तं कथितवान् क्षम्यतां तावदद्य तु मम व्रतमस्ति। भोजनालयाद् निर्गत्य स्वप्रकोष्ठमधिगतवान् सप्ताहैकं यावद् अल्पाहारमेवकरोत् यतो हि सप्ताहैकं भोजनमूल्येन स पूर्वमेव क्रीतवान् अर्थशास्त्रस्य पुरातनपुस्तकम्।

हिन्दी-अनुवाद-एक बार भीमराव अम्बेडकर महोदय उच्च शिक्षा के लिए लन्दन नगर में गए। वहाँ उन्होंने साधारण शाकाहारी भोजन किया और अल्पमूल्य के वस्त्र धारण किए। और जो धन बचा उससे पुस्तकें खरीदीं। एक बार उन्हें अर्थशास्त्र की पुस्तक की आवश्यकता हुई और वह बहुमूल्य थी। इसलिए वे पुरानी पुस्तकों के बेचने वालों के बाजार में गए। वह पुस्तक वहाँ देखकर वे बहुत प्रसन्न हुए। अपने पास का सम्पूर्ण धन देकर उन्होंने वह पुस्तक खरीद ली। पुस्तक पढ़ते हुए वे भोजनालय में कुर्सी पर बैठे थे। जैसे ही उन्होंने भोजन देने वाले को देखा वैसे ही उन्हें ध्यान आया कि उनके पास धन तो नहीं है। शीघ्र ही उठकर उससे कहा-क्षमा कीजिए, आज तो मेरा व्रत है। भोजनालय से निकलकर अपने कमरे पर आ गए और एक सप्ताह तक अल्पाहार ही किया, क्योंकि एक सप्ताह के भोजन-मूल्य से तो उन्होंने पहले ही वह अर्थशास्त्र की पुरानी पुस्तक खरीद ली थी।

 

Question 1. पुस्तकं कीदृशम् आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: पुस्तक बहुमूल्यम् थी। यह अर्थशास्त्र की एक महत्वपूर्ण और महंगी किताब थी।
In simple words: किताब बहुत महंगी थी।

🎯 Exam Tip: एक-शब्द के उत्तर में, प्रश्न में "कीदृशम्" (कैसा) के लिए सही विशेषण चुनें।

 

Question 2. पुस्तकाय सर्वं किं दत्त्वा स तत् क्रीतवान्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: उन्होंने पुस्तक खरीदने के लिए अपना सारा धन दे दिया था। यह उनकी शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
In simple words: उन्होंने पूरी रकम देकर किताब खरीदी।

🎯 Exam Tip: "किं" (क्या) के लिए सीधे जवाब दें, जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से बताया गया हो।

 

Question 3. डॉ. भीमराव अम्बेडकरमहोदयः सप्ताहैकपर्यन्तम् अल्पाहारम् अकरोत् यतो हि स सप्ताहैक भोजनमूल्येन अर्थशास्त्रस्य पुरातनपुस्तकं पूर्वमेव क्रीतवान्। (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: डॉ. भीमराव अम्बेडकर महोदय ने एक सप्ताह तक अल्पाहार किया क्योंकि उन्होंने एक सप्ताह के भोजन के मूल्य से अर्थशास्त्र की पुरानी पुस्तक पहले ही खरीद ली थी। यह उनकी त्याग भावना को दर्शाता है।
In simple words: उन्होंने एक हफ्ते तक कम भोजन किया क्योंकि उन्होंने भोजन के पैसों से किताब खरीद ली थी।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, कारण (यतो हि) को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 6. 'क्रेतुः' इति पदस्य विलोमपदं किमत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'क्रेतुः' इस पद का विलोमपद यहाँ 'विक्रेतुः' प्रयुक्त हुआ है। 'क्रेतुः' का अर्थ है खरीदने वाला और 'विक्रेतुः' का अर्थ है बेचने वाला।
In simple words: 'क्रेतुः' का उल्टा शब्द 'विक्रेतुः' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द खोजने के लिए, दिए गए शब्द का अर्थ समझें और फिर गद्यांश में विपरीत अर्थ वाला शब्द ढूँढें।

 

Question 7. 'वस्त्राणि' इत्यस्य विशेषणं किम्?
Answer: 'वस्त्राणि' इस पद का विशेषण 'अल्पमूल्यानि' है। इसका अर्थ है कि वस्त्र कम मूल्य के थे।
In simple words: 'अल्पमूल्यानि' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 8. अस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं संस्कृतेन लिखत।
Answer: इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक 'भीमराव अम्बेडकर' है। यह शीर्षक पूरे अनुच्छेद के मुख्य विषय को दर्शाता है, जो भीमराव अम्बेडकर के शिक्षा के प्रति समर्पण के बारे में है।
In simple words: शीर्षक 'भीमराव अम्बेडकर' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

स्वतन्त्रता अस्माकं जीवनस्य शोभा कोऽपि जनः परतन्त्रः भवितुं न इच्छति। बहूनि वर्षाणि अस्माकं देश वैदेशिकानां शासनम् अभवत् पूर्व वाणिज्याय एव ते अत्र आगतः। अत्र तै संगठनस्य अभावः दृष्टः। अतः अचिरादेव ते अस्माकं शासकाः अभवन् वयं भारतीयाः स्वमूर्खतया परतन्त्राः जाताः। एतस्याः पराधीनतायाः दूरीकरणाय असंख्यैः जनैः प्राणाः अर्पिताः। एषा स्वतन्त्रता महता मूल्येन अस्माभिः प्राप्ता। अस्माकं पूर्वजैः पराधीनतायाः कष्टं, घोरः अपमानः च अनुभूतः परन्तु अस्माभिः स्वतन्त्रतायाः प्राप्त्यै किमपि कष्टं न अनुभूतम्, अतः वयं स्वतन्त्रतायाः मूल्यं सम्यक् न जानीमः। स्वतन्त्रतायै वीरैः कृतः श्रमः अनुभूताः यातनाः च वृथा न भवेयुः। देशस्य गौरवस्य सदा रक्षणम् एव अस्माकं सर्वेषां परम कर्त्तव्यम्।

हिन्दी-अनुवाद-स्वतन्त्रता हमारे जीवन की शोभा है। कोई भी व्यक्ति परतन्त्र होना नहीं चाहता। बहुत वर्षों तक हमारे देश में विदेशियों का शासन था। पहले वे व्यापार के लिए ही यहाँ आये थे। यहाँ उन्होंने संगठन का अभाव देखा। अतः शीघ्र ही वे हमारे शासक हो गए। हम भारतीय अपनी मूर्खता से ही गुलाम हो गए। इस गुलामी को दूर करने के लिए असंख्य लोगों ने प्राण दे दिए। यह स्वतन्त्रता बहुत मूल्य से हमने प्राप्त की है। हमारे पूर्वजों ने गुलामी के कष्टों और घोर अपमान का अनुभव किया है, परन्तु हमारे द्वारा स्वतन्त्रता की प्राप्ति के लिए कुछ भी कष्ट का अनुभव नहीं किया गया इसलिए हम स्वतन्त्रता के मूल्य को अच्छी प्रकार से नहीं जानते हैं। स्वतन्त्रता के लिए वीरों के द्वारा किया गया श्रम और अनुभव की गई यातना व्यर्थ नहीं होनी चाहिए। देश के गौरव की सदा रक्षा करना ही हम सबका परम कर्तव्य है।

 

Question 1. विदेशिकाः अत्र किमर्थम् आगतः? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: विदेशी यहाँ पहले व्यापार के लिए आए थे। उनका मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक लाभ प्राप्त करना था।
In simple words: विदेशी यहाँ व्यापार करने आए थे।

🎯 Exam Tip: "किमर्थम्" (किस लिए) का उत्तर कारण बताता है।

 

Question 2. अस्माभिः किं सम्यक् न जानीमः? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: हम स्वतंत्रता का मूल्य ठीक से नहीं जानते हैं। हमारे पूर्वजों ने इसके लिए बहुत कष्ट सहे।
In simple words: हम स्वतंत्रता का मूल्य नहीं जानते।

🎯 Exam Tip: "किं" (क्या) के लिए, गद्यांश से सीधे जानकारी प्रदान करें।

 

Question 3. महता मूल्येन प्राप्ता स्वतन्त्रता देशस्य च गौरवस्य रक्षणम् एव अस्माकं सर्वेषां परमं कर्त्तव्यम् (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: हमें बहुत मूल्य से प्राप्त स्वतंत्रता और देश के गौरव की रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है। यह हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
In simple words: स्वतंत्रता और देश के गौरव की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक कथन उद्धृत करें।

 

Question 6. 'इच्छति' इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
Answer: 'इच्छति' इस क्रियापद का कर्ता पद 'जनः' है। 'जनः' (लोग) ही कुछ चाहते हैं।
In simple words: 'इच्छति' क्रिया का कर्ता 'जनः' है।

🎯 Exam Tip: क्रिया का कर्ता पहचानने के लिए, यह जानें कि कार्य कौन कर रहा है।

 

Question 7. 'चिरादेव' इत्यस्य किं विलोमपदम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'चिरादेव' इस पद का विलोमपद यहाँ 'अचिरादेव' प्रयुक्त हुआ है। चिरादेव का अर्थ है बहुत समय बाद और अचिरादेव का अर्थ है शीघ्र ही।
In simple words: 'चिरादेव' का उल्टा शब्द 'अचिरादेव' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 8. अस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक 'जीवनस्य शोभा-स्वतन्त्रता' है। यह शीर्षक स्वतंत्रता के महत्व और उसकी शोभा को दर्शाता है।
In simple words: शीर्षक 'जीवन की शोभा-स्वतंत्रता' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

संसारे जनानां विविधानि रूपाणि दृश्यन्ते। केचन सन्ति महापुरुषाः। ते स्वार्थं परित्यज्य अपि परोपकारं कुर्वन्ति। सामान्याः जनाः स्वहितम् अपि पश्यन्ति परहितम् अपि चिन्तयन्ति। केचन राक्षसाः स्वार्थसाधनाय सर्वेषाम् अहितम् एव कुर्वन्ति परन्तु केचन तु परमनीचाः निरर्थकम् एव सर्वेषां हानि कुर्वन्ति, तेषां कृते तु वस्तुतः शब्दः एव नास्ति। कामं मम एकं नेत्रं नश्येत् परन्तु अपरस्य नेत्रद्वयमेव अवश्यं नश्येत् इत्येव तेषां भावना। ईर्ष्या द्वेषस्य जननी अस्ति। द्वेषः नरं विनाशाय प्रेरयति अद्य सर्वत्र एतादृशाः एव जनाः दृश्यन्ते। स्वार्थसाधनस्य सीमा एवं नास्ति। स्मरणीयं तावत् व्यासस्य वचनद्वयम् “परोपकारः पुण्याय, पापाय परपीडनम्।”

हिन्दी-अनुवाद-संसार में लोगों के विविध रूप दिखाई देते हैं। कुछ महापुरुष हैं। वे स्वार्थ को छोड़कर भी परोपकार करते हैं। सामान्य लोग अपना हित भी देखते हैं। और दूसरों का हित भी सोचते हैं। कुछ राक्षस स्वार्थ सिद्ध करने के लिए सभी का अहित ही करते हैं, किन्तु कुछ तो अत्यन्त नीचे होते हैं जो निरर्थक ही सभी की हानि करते हैं, उनके लिए तो वास्तव में शब्द ही नहीं है। चाहे मेरी एक नेत्र नष्ट हो जाये किन्तु दूसरे के दोनों ही नेत्र नष्ट अवश्य ही होवें, ऐसी ही उनकी भावना होती है। ईष्या द्वेष की जननी है। द्वेष मनुष्य को विनाश के लिए प्रेरित करता है। आज सभी जगह ऐसे ही लोग दिखाई देते हैं। स्वार्थ सिद्ध करने की सीमा ही नहीं है। व्यास के दो वचन स्मरण करने चाहिए 'परोपकार पुण्य के लिए तथा दूसरों को पीड़ित करना पाप के लिए होता है।”

 

Question 1. ईर्ष्या कस्य जननी अस्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: ईर्ष्या द्वेष की जननी है। ईर्ष्या से ही द्वेष उत्पन्न होता है, जो विनाशकारी होता है।
In simple words: ईर्ष्या से द्वेष पैदा होता है।

🎯 Exam Tip: "कस्य" (किसकी) से पूछे गए प्रश्न का उत्तर अक्सर संबंधवाचक संज्ञा में होता है।

 

Question 2. कीदृशाः जनाः स्वार्थसाधनाय सर्वेषाम् अहितम् एव कुर्वन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: राक्षसवत् लोग अपने स्वार्थ के लिए सभी का अहित करते हैं। ऐसे लोग केवल अपने लाभ के बारे में सोचते हैं।
In simple words: राक्षस जैसे लोग दूसरों का बुरा करते हैं।

🎯 Exam Tip: "कीदृशाः" (कैसे/किस प्रकार के) से पूछे गए प्रश्न का उत्तर विशेषण या तुलनात्मक शब्द में होता है।

 

Question 3. महापुरुषाः किं परित्यज्य अपि परोपकारं कुर्वन्ति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: महापुरुष अपने स्वार्थ को छोड़कर भी परोपकार करते हैं। वे हमेशा दूसरों की भलाई के लिए सोचते हैं।
In simple words: महापुरुष अपना स्वार्थ छोड़कर परोपकार करते हैं।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक जानकारी दें।

 

Question 4. 'प्रेरयति' क्रियायाः कर्तृपदम् किम्?
Answer: 'प्रेरयति' क्रिया का कर्ता पद 'द्वेषः' है। द्वेष ही मनुष्य को विनाश की ओर प्रेरित करता है।
In simple words: 'प्रेरयति' क्रिया का कर्ता 'द्वेष' है।

🎯 Exam Tip: कर्ता-क्रिया संबंध को पहचानने के लिए, क्रिया को करने वाले पर ध्यान दें।

 

Question 5. 'पुण्याय' इति पदस्य विलोमपदं किम्?
Answer: 'पुण्याय' इस पद का विलोमपद 'पापाय' है। पुण्य अच्छे कर्मों का फल है, जबकि पाप बुरे कर्मों का।
In simple words: 'पुण्याय' का उल्टा शब्द 'पापाय' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 6. 'ते' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
Answer: 'ते' यह सर्वनाम पद 'महापुरुषेभ्यः' के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह महापुरुषों के परोपकारी स्वभाव को दर्शाता है।
In simple words: 'ते' शब्द 'महापुरुषों' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 7. 'विविधानि' इति पदं कस्य विशेषणपदम् अस्ति?
Answer: 'विविधानि' यह पद 'रूपाणि' का विशेषण है। इसका अर्थ है कि संसार में लोगों के विभिन्न रूप दिखाई देते हैं।
In simple words: 'विविधानि' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'परोपकारः पुण्याय' है। यह शीर्षक परोपकार के महत्व और उसके पुण्यफल को दर्शाता है।
In simple words: शीर्षक 'परोपकार पुण्य के लिए' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

केचने जनाः केवलं धनमिच्छन्ति। जीवनस्य निर्वाहाये धनं नूनम् आवश्यकं परन्तु धनम् एव न प्रधानम्। यदि धनस्य अर्जनम् एव जीवनस्य लक्ष्यं भवति तर्हि नरः अधिकाधिकं धनं प्राप्तुं लोभं करोति। तेन मनसः शान्तिः भग्ना भवति। कर्तव्यस्य अकर्तव्यस्य च विवेकः नश्यति। धनमेव सर्वम् इति मत्वा जनाः अंधमकार्याणि कुर्वन्ति किं बहुना, राष्ट्रस्य कल्याणार्थं स्वीकृतं धनमपि राजकीयाः कर्मचारिणः आत्मनः स्वार्थपूर्तये प्रयुज्जते यदि वयं देशस्य उन्नतिम् इच्छामः तदा धने आसक्ति विहाय राष्ट्रस्य सम्माने यशसि च आसक्ताः भवेम। स्वकीयकर्तव्यपालनं निष्ठया कुर्याम। ये जनाः ज्ञानं प्राप्ये महत् कार्यं कुर्वन्ति, कीर्तिसम्पादने आसक्ताः भवन्ति, धनमपि देशस्य उन्नत्यै सहायकपरूपेण प्राप्तुमिच्छन्ति, नूनम् ते एव उत्तमाः जनाः। यतः मानो हि महतां धनम्।

हिन्दी-अनुवाद-कुछ लोग केवल धन चाहते हैं। जीवन के निर्वाह के लिए निश्चय ही धन आवश्यक है, परन्तु धन ही प्रधान नहीं है। यदि धन का संग्रह करना ही जीवन का लक्ष्य होता है तो मनुष्य अधिक से अधिक धन प्रान्त करने के लिए लोभ करता है। उससे मन की शान्ति भंग होती है। कर्तव्य और अकर्तव्य का विवेक नष्ट होता है। धन ही सब कुछ है ऐसा मानकर लोग नीच कार्य करते हैं। अधिक क्या, राष्ट्र के कल्याण के लिए स्वीकृत धन को भी सरकारी कर्मचारी अपनी स्वार्थपूर्ति के प्रयोग में लेते हैं। यदि हम देश की उन्नति चाहते हैं तो धन में आसक्ति को छोड़कर राष्ट्र के सम्मान और यश में आसक्त होना चाहिए। अपना कर्तव्य-पालन निष्ठा से करना चाहिए। जो लोग ज्ञान प्राप्त करके महान् कार्य करते हैं, कीर्ति प्राप्त करने में आसक्त होते हैं, धन भी देश की उन्नति के लिए सहायक के रूप में प्राप्त करना चाहते हैं, निश्चय ही वे ही उत्तम लोग हैं। क्योंकि स्वाभिमान ही महापुरुषों की धन है।

 

Question 1. जीवने किम् एव न प्रधानम्? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: जीवन में केवल धन ही प्रधान नहीं है। जीवन के लिए धन आवश्यक है, पर वह सब कुछ नहीं है।
In simple words: जीवन में धन ही सबसे महत्वपूर्ण नहीं है।

🎯 Exam Tip: "किम्" (क्या) से पूछे गए प्रश्न का उत्तर सीधे गद्यांश से प्राप्त करें।

 

Question 2. देशस्य उन्नतिकृते वयं निष्ठया किं कुर्याम? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: देश की उन्नति के लिए हमें निष्ठा से अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। कर्तव्यपालन ही प्रगति का मार्ग है।
In simple words: देश की उन्नति के लिए हमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: "किं" (क्या) से पूछे गए प्रश्न का उत्तर सीधे गद्यांश से प्राप्त करें।

 

Question 3. अधिकाधिकलोभेन कस्य कस्य विवेकः नश्यति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: अत्यधिक लोभ से कर्तव्य और अकर्तव्य का विवेक नष्ट हो जाता है। लोभ मनुष्य को गलत निर्णय लेने पर मजबूर करता है।
In simple words: ज्यादा लालच से सही-गलत का ज्ञान खत्म हो जाता है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक जानकारी दें।

 

Question 4. 'तेन' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
Answer: 'तेन' यह सर्वनाम पद 'लोभाय' के लिए प्रयुक्त हुआ है। इसका अर्थ है कि लोभ के कारण मन की शांति भंग होती है।
In simple words: 'तेन' शब्द 'लोभ' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 5. राजकीयाः कर्मचारिणः आत्मनः स्वार्थपूर्तये प्रयुज्जते इत्यत्र कर्तृपदं किम्?
Answer: इस वाक्य में कर्ता पद 'कर्मचारिणः' है। 'कर्मचारिणः' का अर्थ है कर्मचारी।
In simple words: 'कर्मचारिणः' इस वाक्य में कर्ता पद है।

🎯 Exam Tip: कर्ता-क्रिया संबंध को पहचानने के लिए, क्रिया को करने वाले पर ध्यान दें।

 

Question 6. 'कीर्तिसम्पादने' इति पदस्य विशेषणपदं किम्?
Answer: 'कीर्तिसम्पादने' इस पद का विशेषण पद 'कार्यम्' है। यह बताता है कि ज्ञान से महान कार्य किए जाते हैं।
In simple words: 'कार्यम्' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 7. 'प्रधानम्' इत्यस्य विलोमपदं किम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'प्रधानम्' इस पद का विलोमपद यहाँ 'अप्रधानम्' है। गद्यांश में 'प्रधानम्' के विपरीत अर्थ में 'अप्रधानम्' का प्रयोग किया गया है।
In simple words: 'प्रधानम्' का उल्टा शब्द 'अप्रधानम्' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'मानो हि महतां धनम्' है। यह शीर्षक स्वाभिमान के महत्व और ज्ञान को महापुरुषों का धन मानने पर केंद्रित है।
In simple words: शीर्षक 'स्वाभिमान ही महापुरुषों का धन है' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

जीवने किञ्चिद् ध्येयं परमावश्यकम्। ध्येयप्राप्तौ दृढ़निश्चयः अस्मान् पतनाद् रक्षति दृढ़निश्चयेन जीवनम् उन्नतिपथम् आरोहति। स्वीकृतस्य लक्ष्यस्य पूर्त्यर्थं निरन्तरं परिश्रमः अनिवार्यः। कामं मार्गे कण्टकाः भवेयुः, लक्ष्मीः आयातु गच्छतु वा, मृत्युः अपि भवेत् परन्तु धीराः जनाः स्वकीयं निश्चितमार्गं न त्यजन्ति। राष्ट्रस्य उन्नत्यै एष एव मन्त्रः आवश्यकः। राष्ट्रभवनस्य वयमेव इष्टिकाः। अस्माकं परस्परं स्नेहः सद्भावना चे अत्र सिमेण्टचूर्णम्। अस्मासु मतभेदे सति अपि मनोमालिन्यं न भवेत्। असमाकम् ऐक्यम् अभेद्यम् अजेयं च भवेत्। जीवनस्य विभिन्नेषु क्षेत्रेषु ये महापुरुषाः देशस्य गौरवाय प्रयत्नम् अकुर्वन् तत्रापि मूलं कारणम् अस्ति तेषां कर्तव्यनिष्ठा। अनेकानि कष्टानि सोढ्वा अपि ते ध्येयं प्रति निरन्तर प्रयत्नम् अकुर्वन्, विजयश्रियं च लब्ध्वा देशस्य गौरवं वर्धितवन्तः। एतादृशाः महापुरुषाः एव भारतस्य रत्नानि।

हिन्दी-अनुवाद-जीवन में कुछ ध्येय अत्यन्त आवश्यक हैं। ध्येय-प्राप्ति में दृढ़निश्चय हमारी पतन से रक्षा करता है। दृढ़निश्चय से जीवन उन्नति के मार्ग पर चढ़ता है। स्वीकृत लक्ष्य की पूर्ति के लिए निरन्तर परिश्रम अनिवार्य है। चाहे मार्ग में काँटे होवें, लक्ष्मी आवे या जावे, मृत्यु भी चाहे हो जावे किन्तु धैर्यशाली लोग अपने निश्चित मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। राष्ट्र की उन्नति के लिए यही मन्त्र आवश्यक है। राष्ट्र रूपी भवन की हम ही ईंटें हैं। हमारा परस्पर का स्नेह और सद्भावना यहाँ सिमेण्ट का चूर्ण है। हममें मतभेद होने पर भी मन में मलिनता नहीं होनी चाहिए। हमारी एकता अभेद्य एवं अजेय होनी चाहिए। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जिन महापुरुषों ने देश के गौरव के लिए प्रयत्न किये हैं, उसमें भी मूल कारण उनकी कर्तव्यनिष्ठा है। अनेक कष्टों को सहन करके भी उन्होंने लक्ष्य के प्रति निरन्तर प्रयत्न किये और विजयश्री को प्राप्त करके देश के गौरव को बढ़ाया। इस प्रकार के महापुरुष ही भारत के रत्न हैं।

 

Question 1. लक्ष्यस्य पूर्त्यर्थं कः अनिवार्यः? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: लक्ष्य की पूर्ति के लिए निरंतर परिश्रम अनिवार्य है। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।
In simple words: लक्ष्य पाने के लिए मेहनत बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: "कः" (कौन) के लिए सीधे उत्तर दें जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से बताया गया हो।

 

Question 2. अस्मासु मतभेदे जाते सति किं न भवेत्? (एकपदेन उत्तरत्)
Answer: हममें मतभेद होने पर भी मन में मनोमालिन्य (मन की कटुता) नहीं होना चाहिए। हमें आपस में सद्भाव बनाए रखना चाहिए।
In simple words: मतभेद होने पर भी मन में बैर नहीं होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: "किं न भवेत्" (क्या नहीं होना चाहिए) के लिए सीधे निषेधात्मक उत्तर दें।

 

Question 3. ध्येयप्राप्तौ अस्मान् पतनात् कः रक्षति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: ध्येयप्राप्ति में दृढ़निश्चय हमें पतन से बचाता है। मजबूत इरादे हमें सही रास्ते पर रखते हैं।
In simple words: लक्ष्य पाने में दृढ़निश्चय हमें गिरने से बचाता है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक जानकारी दें।

 

Question 4. 'त्यजन्ति' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: 'त्यजन्ति' इस क्रिया का कर्ता पद 'धीरजनाः' है। धीरजन ही अपने निश्चित मार्ग को नहीं छोड़ते हैं।
In simple words: 'त्यजन्ति' क्रिया का कर्ता 'धीरजन' हैं।

🎯 Exam Tip: कर्ता-क्रिया संबंध को पहचानने के लिए, क्रिया को करने वाले पर ध्यान दें।

 

Question 5. 'मूलं' पदं कस्य विशेषणम् अस्ति?
Answer: 'मूलं' यह पद 'कारणं' का विशेषण है। यह बताता है कि कर्तव्यनिष्ठा ही सफलता का मूल कारण है।
In simple words: 'मूलं' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 6. 'अवनत्यै' इत्यस्य विलोmपदं किम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'अवनत्यै' इस पद का विलोमपद यहाँ 'उन्नत्यै' प्रयुक्त हुआ है। अवनति का अर्थ है गिरावट और उन्नति का अर्थ है प्रगति।
In simple words: 'अवनत्यै' का उल्टा शब्द 'उन्नत्यै' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 7. 'तेषाम्' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
Answer: 'तेषाम्' यह सर्वनाम पद 'महापुरुषेभ्यः' के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह महापुरुषों के प्रयासों और त्याग को दर्शाता है।
In simple words: 'तेषाम्' शब्द 'महापुरुषों' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'ध्येयस्य आवश्यकता' है। यह शीर्षक जीवन में लक्ष्य और दृढ़निश्चय के महत्व को दर्शाता है।
In simple words: शीर्षक 'लक्ष्य की आवश्यकता' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

'ऊटी' अथवा 'उद्गमण्डलम्' इति नाम्ना प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटनस्थलं दूरस्थान् समीपस्थान् च पर्यटकान् आकर्षति एतत् स्थल दक्षिणभारते तमिलनाडु-राज्यान्तर्गतं वर्तते। इदं नीलगिरीपर्वतमध्ये समुद्रतलात् 2240 मीटरमितं तुङ्गतायां स्थितम् अस्ति। अस्य प्रदेशस्य अनिन्द्यं प्राकृतिक सौन्दर्यं वीक्ष्य पं. जवाहरलाल नेहरू 'ऊटी' पर्वतीयस्थलानां राज्ञा इति अवदत् एतत् स्थलं 'टोडा' नाम्ना प्रसिद्धआदिवासीनाम् मूलस्थानम् अस्ति। अत्र अनेकानि दर्शनीय स्थानानि सन्ति, यथा महान् सरोवरः (लेक), गोल्फक्रीड़ा स्थलम्, राजकीय संग्रहालयः, वानस्पतिक-उद्यानम्, कालाहाटी जलप्रपातः, भृदुमलाई -नामकं जीवकेन्दम्, लघुबलरेलयानम् आदिनि। वनस्पतिक-उद्यानस्य दिव्या रमणीयता दर्शकान् मन्त्रमुग्धान् करोति।

'अस्य पर्यटनस्थलस्य स्वास्थ्यकेन्दस्य च मूल विकासः आग्लाना शासनकाले अभवत् जाहनसुलीवानः 1819 तमे वर्षे अस्यनिर्माणे संलग्नः जातः। अस्य स्थानस्य मूलतः विकासाय स एव श्रेयोभागी। इत्थम् अद्य 'ऊटी' दर्शनीय स्थलेषु अतीव आकर्षम् स्थानम् अस्ति।

हिन्दी-अनुवाद-'ऊटी' अथवा 'उदगमण्डल' नामक प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थल दूर और समीप के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह स्थान दक्षिण भारत में तमिलनाडु राज्य के अन्तर्गत है। यह नीलगिरी पर्वत के मध्य में समुद्रतल से 2240 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस प्रदेश के अलौकिक प्राकृतिक सौन्दर्य को देखकर पं. जवाहरलाल नेहरू ने 'ऊटी' को पर्वतीय-स्थलों का राजा कहा था। यह स्थान टोडा' नाम से प्रसिद्ध आदिवासियों का मूल स्थान है। यहाँ अनेक दर्शनीय स्थान हैं, जैसे-महान् सरोवर (लेक), गोल्फ क्रीड़ा-स्थल, राजकीय संग्रहालय, वनस्पतिउद्यान, कालाहाटी झरना, भृदुमलाई नामक जीवकेन्द्र, लघुबलरेलयान आदि। वनस्पतिउद्यान की दिव्य रमणीयता दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर देती है।

इस पर्यटन स्थल और स्वास्थ्य केन्द्र का मूल विकास अंग्रेजों के शासनकाल में : हुआ था। जाहनसुलीवान सन् 1819 ई. में इसके निर्माण में संलग्न हुआ था। इस स्थान के मूल विकास के लिए वही श्रेय का भागी है। इस प्रकार 'ऊटी' दर्शनीय स्थलों में अत्यन्त आकर्षक स्थान है।

 

Question 1. ऊटी' कुत्र स्थितम् अस्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: ऊटी तमिलनाडु राज्य में स्थित है। यह दक्षिण भारत का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।
In simple words: ऊटी तमिलनाडु में है।

🎯 Exam Tip: "कुत्र" (कहाँ) से शुरू होने वाले प्रश्न का उत्तर किसी स्थान या जगह का नाम होता है।

 

Question 2. ऊटी' समुद्रतलात् कति मीटरमितं तुङ्गतायां स्थितम् अस्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: ऊटी समुद्रतल से 2240 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह नीलगिरी पर्वत में आता है।
In simple words: ऊटी समुद्र से 2240 मीटर ऊपर है।

🎯 Exam Tip: संख्यात्मक उत्तर के लिए, गद्यांश से सटीक संख्या ढूंढें।

 

Question 3. अस्य पर्वतीस्थलस्य द्वयोः दर्शनीय स्थानयोः महान् सरोवरः राजकीय संग्रहालयः स्तः। (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: इस पर्वतीय स्थल के दो दर्शनीय स्थान महान सरोवर (झील) और राजकीय संग्रहालय हैं। ये दोनों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
In simple words: यहाँ महान झील और सरकारी संग्रहालय देखने लायक हैं।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक जानकारी दें।

 

Question 4. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'तमिलनाडुराज्यस्य दर्शनीयस्थानानि' है। यह शीर्षक ऊटी और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों को दर्शाता है।
In simple words: शीर्षक 'तमिलनाडु के दर्शनीय स्थान' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

Question 5. 'दूरस्थान्' इति पदं कस्य विशेषणपदम् अस्ति?
Answer: 'दूरस्थान्' यह पद 'पर्यटकान्' का विशेषण पद है। इसका अर्थ है कि ऊटी दूर से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।
In simple words: 'दूरस्थान्' इस वाक्य में विशेषण पद है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 6. 'सः' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
Answer: 'सः' यह सर्वनाम पद 'जाहनसुलीवानाय' के लिए प्रयुक्त हुआ है। जाहनसुलीवान ने ही ऊटी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
In simple words: 'सः' शब्द 'जाहनसुलीवान' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 7. 'आकर्षति' क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
Answer: 'आकर्षति' इस क्रिया का कर्ता पद 'पर्यटन-स्थलं' है। यह पर्यटन स्थल ही पर्यटकों को आकर्षित करता है।
In simple words: 'आकर्षति' क्रिया का कर्ता 'पर्यटन स्थल' है।

🎯 Exam Tip: कर्ता-क्रिया संबंध को पहचानने के लिए, क्रिया को करने वाले पर ध्यान दें।

 

Question 8. 'निन्द्यम्' इत्यस्य विलोमपदं किम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'निन्द्यम्' इस पद का विलोमपद यहाँ 'अनिन्द्यम्' प्रयुक्त हुआ है। निन्द्य का अर्थ है निंदा के योग्य और अनिन्द्य का अर्थ है प्रशंसा के योग्य।
In simple words: 'निन्द्यम्' का उल्टा शब्द 'अनिन्द्यम्' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

अस्मिन् जगति विद्यायाः अतिमहत्त्वम् अस्ति। विधत्ते सदसदज्ञानम्, सा हि विद्या कथ्यते विद्या विनयं ददाति। अतः विद्यायुक्ताः मानवाः विनीताः भवन्ति मानवाः विनयात् पात्र पात्रता प्राप्नुवन्ति। पात्रत्वात् धनं प्राप्यते। ततः च सुखम् इति।

अस्मिन् संसारे विद्यामानेषु धनेषु विद्यैव सर्वप्रधानं धनं विद्यते यो हि व्ययकृते नित्यं वर्धते, संचये कृते नश्यति इति अपूर्वः नियमः। चौराः विद्याम् चोरयितुं न शक्नुवन्ति विद्या भ्रातृषु अपि न विभज्यते नृपोऽपि न हरति विद्या सर्वेषां जनानां भूषणम् अस्ति। विद्या कल्पलतेव सर्वं साधयति विद्यया मानवः सर्वत्र आदरं लभते। अतएव विद्याविहीनः जनः पशुवत् भवति। सर्वेषां एतत् कर्त्तव्यमस्ति यत् ते परिश्रमेण विद्याध्ययनं कुर्युः।

हिन्दी-अनुवाद-इस संसार में विद्या का अत्यधिक महत्त्व है। जो सत् और असत् का ज्ञान कराती है, वही विद्या कही जाती है। विद्या विनम्रता देती है। इसलिए विद्या से युक्त मनुष्य विनम्र होते हैं। मनुष्य विनम्रता से योग्यता प्राप्त करते हैं। योग्यता (पात्रता) से धन प्राप्त होता है और उससे सुख प्राप्त होता है। इस संसार में विद्यमान सभी धनों में विद्या ही सबसे प्रधान धन है। जो कि खर्च करने पर हमेशा बढ़ता है और संचय करने से नष्ट होता है, यह अनोखा नियम है। चोर विद्या को चुरा नहीं सकते हैं। विद्या को भाइयों में भी बाँटा नहीं जा सकता है। राजा भी अपहरण नहीं कर सकता है। विद्या सभी लोगों का आभूषण है। विद्या कल्पलता के समान सब कुछ सिद्ध करती है। विद्या से मनुष्य सभी जगह आदर प्राप्त करता है। इसीलिए विद्या से रहित मनुष्य पशु के समान होता है। सभी का यह कर्तव्य है कि वे परिश्रम के साथ विद्याध्ययन करें।

 

Question 1. विद्या कस्मै ददाति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: विद्या विनम्रता देती है। विनम्रता से ही ज्ञान बढ़ता है।
In simple words: विद्या विनम्रता देती है।

🎯 Exam Tip: "कस्मै" (किसको) से शुरू होने वाले प्रश्न का उत्तर आमतौर पर चतुर्थी विभक्ति में होता है।

 

Question 2. मानवः विद्यायाः किं लभते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: मानव विद्या से आदर प्राप्त करता है। विद्यावान व्यक्ति का हर जगह सम्मान होता है।
In simple words: इंसान विद्या से इज्जत पाता है।

🎯 Exam Tip: "किं" (क्या) के लिए, गद्यांश से सीधे जानकारी प्रदान करें।

 

Question 3. विद्यते सदसद्ज्ञानम्, सा हि विद्या कथ्यते। (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: जो सत् (सही) और असत् (गलत) का ज्ञान कराती है, वही विद्या कही जाती है। यह हमें सही मार्ग पर चलने में मदद करती है।
In simple words: जो सही-गलत का ज्ञान कराए, वही विद्या है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक कथन उद्धृत करें।

 

Question 4. के विद्यां चोरयितुं न शक्नुवन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: चोर विद्या को चुरा नहीं सकते। विद्या एक ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।
In simple words: चोर विद्या नहीं चुरा सकते।

🎯 Exam Tip: "के" (कौन) के लिए सीधे उत्तर दें जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से बताया गया हो।

 

Question 5. कीदृशः नियमः अस्ति यत् विद्या व्ययकृते वर्धते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: यह एक अपूर्वः (अनोखा) नियम है कि विद्या खर्च करने पर हमेशा बढ़ती है। अन्य धन खर्च करने पर घटता है।
In simple words: यह एक अनोखा नियम है।

🎯 Exam Tip: "कीदृशः" (कैसा/किस प्रकार का) से पूछे गए प्रश्न का उत्तर विशेषण में होता है।

 

Question 6. 'या' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
Answer: 'या' यह सर्वनाम पद 'विद्या' के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह विद्या के गुणों का वर्णन करता है।
In simple words: 'या' शब्द 'विद्या' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 7. 'विद्यायुक्तः' इत्यस्य विलोमपदं किम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: 'विद्यायुक्तः' इस पद का विलोमपद यहाँ 'विद्याविहीनः' प्रयुक्त हुआ है। विद्यायुक्त का अर्थ है विद्या से युक्त और विद्याविहीन का अर्थ है विद्या से रहित।
In simple words: 'विद्यायुक्तः' का उल्टा शब्द 'विद्याविहीनः' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 8. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'विद्यायाः महत्त्वम्' है। यह शीर्षक विद्या के महत्व और उसके लाभों को दर्शाता है।
In simple words: शीर्षक 'विद्या का महत्व' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

अयम् अस्माकं भारतदेशः अस्ति। यत्र भरतनामकः राजा वसति स्म। तस्य सम्बन्धात् अस्य नाम भारतम् इति। अस्य उत्तरस्यां दिशि हिमालयः पर्वतः, दक्षिणस्याम् च हिन्दमहासागरः अस्ति। अत्र गंगायमुनासरयूगोदावरीप्रभृतयः देवनद्यः प्रवहन्ति, यासां जलेन भारतभूमिः शस्यश्यामला अस्ति इयं वीरप्रसूता भूमि अस्ति।

विविधतायाम् एकता भारतस्य विशेषता अस्ति। अस्माकं राष्ट्रध्वज त्रिवर्णात्मकः। राष्ट्रियवाक्यम्-'सत्यमेव जयते नानृतम्'। राष्ट्रियचिह्नम् सिंहशीर्षम्, राष्ट्रगीतं, राष्ट्रभाषा च अस्य राष्ट्रीयतायाः मुख्यधाराः सन्ति। संस्कृतभाषा एव अस्य प्राचीनतमा भाषा अस्ति। अस्य देशस्य गौरवम् प्राचीनम् अस्ति। ज्ञानविज्ञाने अयम् देशः विश्वगुरुः इति कथ्यते भारतस्य उन्नत्यै एव अस्माकं समयस्य, धनस्य च अधिकतमः उपयोगः भवेत् इति अयम् अस्माकं संकल्पः। प्रत्येक नागरिकः भारतदेशस्य विकासाय प्रयत्नशीलो भवेत्। यतोहि”जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।”

हिन्दी-अनुवाद-यह हमारा भारत देश है। जहाँ भारत नाम का राजा रहता था। उसके सम्बन्ध से ही इसका नाम 'भारत' है। इसकी उत्तर दिशा में हिमालय पर्वत है और दक्षिण दिशा में हिन्दमहासागर है। यहाँ गंगा, यमुना, सरयू, गोदावरी आदि देवनदियाँ बहती हैं, जिनके जल से भारत की भूमि धन-धान्य से पूर्ण व हरीभरी है। यह वीरों को जन्म देने वाली भूमि है।

विभिन्नता में एकता भारत की विशेषता है हमारा राष्ट्रीय ध्वज तीन वर्षों का है। राष्ट्रीय वाक्य-'सत्यमेव जयते नानृतम्' (सत्य की ही विजय होती है असत्य, की नहीं)। इसका राष्ट्रीय-चिह्न सिंह का सिर' है, राष्ट्रगीत और राष्ट्रभाषा इसकी राष्ट्रीयता की मुख्य धारा है। संस्कृत भाषा ही इसकी सबसे प्राचीन भाषा है। इस देश का गौरव प्राचीन है। ज्ञान-विज्ञान में यह देश विश्व-गुरु कहा जाता है। भारत

 

Question 1. भारतस्य कस्यां दिशि हिमालय पर्वतः वर्तते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: भारत की उत्तर दिशा में हिमालय पर्वत है। यह भारत की प्राकृतिक शोभा बढ़ाता है।
In simple words: हिमालय पर्वत भारत की उत्तर दिशा में है।

🎯 Exam Tip: "कस्यां दिशि" (किस दिशा में) के लिए, सीधे दिशा का नाम बताएं।

 

Question 2. ज्ञानविज्ञाने भारतदेशः कः कथ्यते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: ज्ञान-विज्ञान में भारतदेश 'विश्वगुरुः' कहलाता है। यह प्राचीन काल से ही ज्ञान का केंद्र रहा है।
In simple words: भारत ज्ञान-विज्ञान में विश्वगुरु कहलाता है।

🎯 Exam Tip: "कः" (कौन) के लिए, सीधे विशेषण या संज्ञा पद का उपयोग करें।

 

Question 3. अस्माकं राष्ट्रियवाक्यं किमस्ति ? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: हमारा राष्ट्रीय वाक्य 'सत्यमेव जयते नानृतम्' है। इसका अर्थ है सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं।
In simple words: हमारा राष्ट्रीय वाक्य 'सत्यमेव जयते नानृतम्' है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय, प्रश्न के सभी मुख्य भागों को शामिल करें और गद्यांश से सटीक कथन उद्धृत करें।

 

Question 4. 'देवनद्यः' इति कर्तृषदस्य क्रियापदं किम् प्रयुक्तम्?
Answer: 'देवनद्यः' इस कर्ता पद के लिए क्रियापद 'प्रवहन्ति' प्रयुक्त हुआ है। देव नदियाँ ही बहती हैं।
In simple words: 'देवनद्यः' का क्रियापद 'प्रवहन्ति' है।

🎯 Exam Tip: कर्ता के अनुसार सही क्रियापद पहचानने के लिए, वाक्य में कर्ता-क्रिया के समन्वय पर ध्यान दें।

 

Question 5. 'वीरप्रसूता' इति विशेषणस्य विशेष्यपदं किम्?
Answer: 'वीरप्रसूता' इस विशेषण का विशेष्य पद 'भूमिः' है। यह बताता है कि भारत की भूमि वीरों को जन्म देने वाली है।
In simple words: 'वीरप्रसूता' का विशेष्य 'भूमिः' है।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा की विशेषता बताता है।

 

Question 6. 'तस्य सम्बन्धात्’-अत्र 'तस्य' इति सर्वनामपदस्थाने संज्ञापदं किम्?
Answer: 'तस्य' इस सर्वनाम पद के स्थान पर 'भरतराज्ञः' (भरत राजा) संज्ञापद प्रयुक्त हुआ है। भारत का नाम भरत राजा के नाम पर पड़ा है।
In simple words: 'तस्य' शब्द 'भरत राजा' के लिए इस्तेमाल हुआ है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के संदर्भ को समझने के लिए, उसके पहले के संदर्भ में संज्ञा को देखें।

 

Question 7. 'असत्यम्' इति पदस्य विलोमपदमत्र किम् प्रयुक्तम्?
Answer: 'असत्यम्' इस पद का विलोमपद यहाँ 'सत्यम्' प्रयुक्त हुआ है। असत्य का अर्थ है झूठ और सत्य का अर्थ है सच।
In simple words: 'असत्यम्' का उल्टा शब्द 'सत्यम्' है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द ढूँढते समय, गद्यांश में दिए गए विपरीतार्थी शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 8. उपर्युक्तगद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'अस्माकं भारतदेशः' है। यह शीर्षक भारत देश के महत्व और उसकी विशेषताओं को दर्शाता है।
In simple words: शीर्षक 'हमारा भारत देश' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो पूरे अनुच्छेद का मुख्य विचार संक्षेप में प्रस्तुत करे।

 

Question 1. कस्य प्रगतिः नारीप्रगत्याधीना वर्तते? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: समाजस्य।
In simple words: समाज की उन्नति नारी की उन्नति पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: When asked for a one-word answer, identify the core subject of the verb in the question.

 

Question 2. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र के रमन्ते? (एकपदेन उत्तरत)।
Answer: देवताः।
In simple words: जहाँ नारियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता प्रसन्न होते हैं।

🎯 Exam Tip: This is a direct quote from the passage. Always aim for precise extraction for such questions.

 

Question 3. जीवनरथस्य कौ द्वौ चक्रौ? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: नरो नारी चेति जीवनरथस्य द्वौ चक्रौ। जीवन का रथ पुरुष और नारी-ये दो पहिए हैं। दोनों मिलकर जीवन को आगे बढ़ाते हैं, जैसे रथ के दो पहिए होते हैं।
In simple words: पुरुष और नारी जीवन के रथ के दो पहिए हैं।

🎯 Exam Tip: For complete sentence answers, identify both the subjects and the predicate as mentioned in the passage.

 

Question 4. 'विपद्भयः रक्षति'-अत्र 'रक्षति' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: नारीशक्तिः। नारीशक्ति ही विपत्तियों से रक्षा करती है।
In simple words: 'रक्षा करती है' क्रिया का कर्ता 'नारीशक्ति' है।

🎯 Exam Tip: To find the subject (कर्ता) of a verb (क्रिया), ask "who performs the action?" in the context of the sentence.

 

Question 5. 'सर्वेषु क्षेत्रेषु'-अत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: क्षेत्रेषु। 'सर्वेषु' विशेषण है, और 'क्षेत्रेषु' वह शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है।
In simple words: 'क्षेत्रेषु' शब्द विशेष्य है, जिसकी विशेषता 'सभी' शब्द बता रहा है।

🎯 Exam Tip: A 'विशेष्य' is the noun being described, and a 'विशेषण' is the describing word.

 

Question 6. 'एतासाम्' इति सर्वनामस्थाने संज्ञापदं किम्?
Answer: नारीणाम्। 'एतासाम्' सर्वनाम 'नारीणाम्' संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ 'स्त्रियों का' है।
In simple words: 'एतासाम्' सर्वनाम 'नारीणाम्' संज्ञा के लिए आया है।

🎯 Exam Tip: Identify the noun that the pronoun refers to in the given context of the passage.

 

Question 7. 'नरः' इति पदस्य विलोमपदं चित्वो लिखत।
Answer: नारी। 'नरः' का अर्थ 'पुरुष' है, और इसका विलोम 'नारी' या 'स्त्री' होता है।
In simple words: 'नरः' का उल्टा शब्द 'नारी' है।

🎯 Exam Tip: When finding antonyms, think of the opposite meaning of the word in its general sense.

 

Question 8. उपर्युक्तगद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: नारी-महिमा। यह गद्यांश नारियों के महत्व और उनके योगदान पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का सही शीर्षक 'नारी का गौरव' है।

🎯 Exam Tip: The title should reflect the main theme or central idea of the entire passage.

 

Question 1. सर्वासु भाषासु का प्राचीनतमा भाषा अस्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: संस्कृतभाषा। सभी भाषाओं में संस्कृत सबसे पुरानी भाषा है।
In simple words: संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे पुरानी है।

🎯 Exam Tip: The answer should be a direct and precise extraction from the opening statement of the passage.

 

Question 2. कस्य व्याकरणम् अद्वितीयम् अस्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: संस्कृतस्य। संस्कृत का व्याकरण अनुपम और बेजोड़ है।
In simple words: संस्कृत का व्याकरण सबसे खास है।

🎯 Exam Tip: Look for keywords like 'अद्वितीयम्' (unique) in relation to 'व्याकरणम्' to find the answer.

 

Question 3. किमर्थं संस्कृतज्ञानम् आवश्यकं वर्तते? (पूर्णवाक्येन उत्तरंत)
Answer: स्वसंस्कृतेः ज्ञानार्थं संस्कृतज्ञानम् आवश्यकं वर्तते। अपनी संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत का ज्ञान जरूरी है।
In simple words: अपनी संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत का ज्ञान जरूरी है।

🎯 Exam Tip: Ensure the answer explains 'why' (किमर्थं) by stating the reason provided in the passage.

 

Question 4. 'शिक्षाम् ददाति'-अत्र 'ददाति' क्रियायाः कर्तृपदं किं प्रयुक्तम्?
Answer: संस्कृतसाहित्यम्। 'ददाति' (देता है) क्रिया का कर्ता 'संस्कृतसाहित्यम्' है, क्योंकि यह व्यावहारिक और नैतिक शिक्षा देता है।
In simple words: 'शिक्षा देता है' क्रिया का कर्ता 'संस्कृत साहित्य' है।

🎯 Exam Tip: The subject usually precedes the verb and performs the action. Identify what 'gives education' in the passage.

 

Question 5. 'प्राचीनतमा भाषा'-इत्यनयोः पदयोः विशेषणपदं किम्?
Answer: प्राचीनतमा। 'प्राचीनतमा' विशेषण है जो 'भाषा' (संज्ञा) की विशेषता बताता है कि वह सबसे पुरानी है।
In simple words: 'प्राचीनतमा' शब्द विशेषण है।

🎯 Exam Tip: The adjective (विशेषण) describes the quality of the noun (विशेष्य).

 

Question 6. 'अनया भारतम्'- अत्र 'अनया' इति सर्वनामस्थाने संज्ञापदं किम्?
Answer: संस्कृतभाषा। 'अनया' सर्वनाम 'संस्कृतभाषा' के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ 'इस संस्कृत भाषा से' है।
In simple words: 'अनया' सर्वनाम 'संस्कृतभाषा' के लिए उपयोग हुआ है।

🎯 Exam Tip: Trace the pronoun back to the noun it refers to in the sentence.

 

Question 7. 'रामवत्' इति पदस्य विलोमपदं चित्वा लिखत।
Answer: रावणादिवत्। 'रामवत्' का अर्थ 'राम के समान' है, और इसका विलोम 'रावणादिवत्' (रावण के समान) है जैसा कि गद्यांश में उल्लेख है।
In simple words: 'रामवत्' का उल्टा शब्द 'रावणादिवत्' है।

🎯 Exam Tip: Find the contrasting word explicitly mentioned in the passage in the context of behavior.

 

Question 8. उपर्युक्तगद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: संस्कृतस्य महत्त्वम्। यह गद्यांश संस्कृत भाषा के महत्व और उसके गुणों पर आधारित है।
In simple words: इस गद्यांश का शीर्षक 'संस्कृत का महत्व' है।

🎯 Exam Tip: The title should capture the main subject and message of the passage.

 

Question 1. का संस्कृतिः? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: भारतीयसंस्कृतिः। संस्कृति मन और आत्मा को पवित्र करती है।
In simple words: भारतीय संस्कृति।

🎯 Exam Tip: The passage specifically describes Indian culture, making it the most direct answer.

 

Question 2. कः परमो धर्मः? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: अहिंसा। अहिंसा को भारतीय संस्कृति में सबसे बड़ा धर्म माना जाता है।
In simple words: अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है।

🎯 Exam Tip: This is a direct quote from the ideal sayings in the passage.

 

Question 3. काः भावनाः भारतीयसंस्कृतौ उपलभ्यन्ते? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: विश्वहितस्य मूलभूताः भावनाः भारतीयसंस्कृतौ उपलभ्यन्ते। भारतीय संस्कृति में विश्व कल्याण की मौलिक भावनाएँ मिलती हैं।
In simple words: भारतीय संस्कृति में विश्व कल्याण की भावनाएँ मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: The answer should explain what kind of feelings (भावनाः) are found in Indian culture.

 

Question 4. 'भवन्तु' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: सर्वे। 'भवन्तु' (हों) क्रिया का कर्ता 'सर्वे' (सभी) है, जैसे 'सभी सुखी हों'।
In simple words: 'हों' क्रिया का कर्ता 'सभी' है।

🎯 Exam Tip: In the phrase "सर्वे भवन्तु सुखिनः", 'सर्वे' is the subject of 'भवन्तु'.

 

Question 5. 'प्रमुखाः सिद्धान्ताः'-अत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: सिद्धान्ताः। 'सिद्धान्ताः' (सिद्धांत) विशेष्य है, और 'प्रमुखाः' (प्रमुख) उसकी विशेषता बताता है।
In simple words: 'सिद्धान्ताः' शब्द विशेष्य है।

🎯 Exam Tip: The noun being described by an adjective is the 'विशेष्य'.

 

Question 6. 'अस्याः प्रमुखाः'-अत्र 'अस्याः' इति सर्वनामस्थाने संज्ञापदं किम्?
Answer: भारतीयसंस्कृतेः। 'अस्याः' सर्वनाम 'भारतीयसंस्कृतेः' के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ 'इस भारतीय संस्कृति के' है।
In simple words: 'अस्याः' सर्वनाम 'भारतीय संस्कृति' के लिए आया है।

🎯 Exam Tip: Identify the specific noun to which the possessive pronoun refers.

 

Question 7. 'हिंसायाः' इति पदस्य विलोमपदं चित्वा लिखत।
Answer: अहिंसा। 'हिंसायाः' का अर्थ 'हिंसा का' है, और इसका विलोm 'अहिंसा' (अहिंसा का) है, जैसा कि गद्यांश में आदर्श वाक्य में उल्लेख है।
In simple words: 'हिंसायाः' का उल्टा शब्द 'अहिंसा' है।

🎯 Exam Tip: The antonym is directly provided in the passage's list of ideals.

 

Question 8. उपर्युक्तगद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: भारतीयसंस्कृतिः। यह गद्यांश पूरी तरह से भारतीय संस्कृति के बारे में है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'भारतीय संस्कृति' है।

🎯 Exam Tip: The main subject of the passage should be the title.

 

Question 1. मानवस्योपरि कस्य प्रबलः प्रभावो भवति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: संसर्गस्य। मनुष्य पर संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है।
In simple words: मनुष्य पर संगति का बहुत असर होता है।

🎯 Exam Tip: Identify what has a strong influence on humans as stated in the passage.

 

Question 2. केषां संसर्गेण अनेके लाभाः सन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: सज्जनानाम्। सज्जनों की संगति से कई लाभ होते हैं।
In simple words: सज्जनों की संगति से कई फायदे होते हैं।

🎯 Exam Tip: Look for the type of company that brings many benefits.

 

Question 3. अस्माभिः किं विहाय का करणीया? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: अस्माभिः कुसंगतिं विहाय सत्संगतिः करणीया। हमें बुरी संगति छोड़कर अच्छी संगति करनी चाहिए।
In simple words: हमें बुरी संगति छोड़कर अच्छी संगति करनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: The answer clearly states what should be avoided and what should be adopted.

 

Question 4. उन्नतिपदं प्राप्नोति'-अत्र 'प्राप्नोति' क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: मानवः। 'प्राप्नोति' (प्राप्त करता है) क्रिया का कर्ता 'मानवः' (मनुष्य) है, क्योंकि मनुष्य ही उन्नति प्राप्त करता है।
In simple words: 'प्राप्त करता है' क्रिया का कर्ता 'मानव' है।

🎯 Exam Tip: The subject is the entity performing the action of 'achieving progress'.

 

Question 5. यादृशैः बालकैः' अत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: बालकैः। 'बालकैः' (बालकों) विशेष्य है, जिसकी विशेषता 'यादृशैः' (जैसे) शब्द बताता है।
In simple words: 'बालकैः' शब्द विशेष्य है।

🎯 Exam Tip: 'विशेष्य' is the noun being qualified by the adjective 'यादृशैः'.

 

Question 6. 'तस्य विद्या कीर्तिश्च वर्धेते'-अत्र 'तस्य' इति सर्वनामस्थाने संज्ञापदं किम्?
Answer: मानवस्य। 'तस्य' सर्वनाम 'मानवस्य' (मनुष्य का) के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ 'उस मनुष्य का' है।
In simple words: 'तस्य' सर्वनाम 'मानव' के लिए आया है।

🎯 Exam Tip: Identify the noun that the possessive pronoun refers to in the sentence.

 

Question 7. 'सज्जनः' इति पदस्य विलोमपदं चित्वा लिखत।
Answer: दुर्जनः। 'सज्जनः' का अर्थ 'अच्छा व्यक्ति' है, और इसका विलोम 'दुर्जनः' (बुरा व्यक्ति) है, जैसा कि गद्यांश में विरोधाभास में उल्लेख है।
In simple words: 'सज्जनः' का उल्टा शब्द 'दुर्जनः' है।

🎯 Exam Tip: The passage explicitly contrasts 'सज्जन' with 'दुर्जन'.

 

Question 8. उपर्युक्तगद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: सत्संगतिः। यह गद्यांश सत्संगति के महत्व और उसके प्रभावों पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'सत्संगति' है।

🎯 Exam Tip: The title should clearly indicate the central theme of the passage, which is the importance of good company.

 

Question 1. श्रमेणैव सर्वत्र किं मिलति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: साफल्यम्। श्रम से ही हर जगह सफलता मिलती है।
In simple words: मेहनत से ही हर जगह सफलता मिलती है।

🎯 Exam Tip: The passage directly states that 'saaphalyam' (success) is achieved everywhere through labor.

 

Question 2. व्यर्थं परिश्रमं कुर्वन् नरः कीदृशः भवति? (एकपदेन उत्तरत)
Answer: पापभाक्। व्यर्थ का परिश्रम करने वाला व्यक्ति पापी होता है।
In simple words: बेकार मेहनत करने वाला व्यक्ति पापी बन जाता है।

🎯 Exam Tip: The passage mentions the consequence of fruitless labor as becoming 'paapabhaak' (sinful).

 

Question 3. जनैः सदा कीदृशः श्रमः कर्त्तव्यः? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
Answer: जनैः सदा स्वस्य लोकस्य चोन्नतये श्रमः कर्त्तव्यः। लोगों को हमेशा अपनी और समाज की उन्नति के लिए मेहनत करनी चाहिए।
In simple words: लोगों को हमेशा अपनी और संसार की उन्नति के लिए मेहनत करनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: The answer should explain the purpose of continuous effort as described in the passage.

 

Question 4. वाञ्छति' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
Answer: जनः। 'वाञ्छति' (चाहता है) क्रिया का कर्ता 'जनः' (मनुष्य) है, क्योंकि मनुष्य ही सुख चाहता है।
In simple words: 'चाहता है' क्रिया का कर्ता 'मनुष्य' है।

🎯 Exam Tip: The subject performs the action of 'desiring' or 'wishing'.

 

Question 5. 'सर्वेषु कार्येषु' अत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: सर्वेषु। 'सर्वेषु' (सभी) विशेषण है जो 'कार्येषु' (कार्यों) की विशेषता बताता है।
In simple words: 'सर्वेषु' शब्द विशेषण है।

🎯 Exam Tip: The adjective ('विशेषण') describes the noun ('विशेष्य').

 

Question 6. 'तस्य दक्षतामापादयति' अत्र 'तस्य' इति सर्वनामस्थाने संज्ञापदं किम्?
Answer: मानवस्य। 'तस्य' सर्वनाम 'मानवस्य' (मनुष्य का) के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ 'उस मनुष्य का' है।
In simple words: 'तस्य' सर्वनाम 'मानव' के लिए आया है।

🎯 Exam Tip: Identify the noun that the possessive pronoun refers to in the sentence.

 

Question 7. 'जनः' इति पदस्य पर्यायशब्दं चित्वा लिखते।
Answer: नरः। 'जनः' और 'नरः' दोनों का अर्थ 'मनुष्य' होता है, और 'नरः' शब्द गद्यांश में प्रयुक्त हुआ है।
In simple words: 'जनः' का पर्यायवाची शब्द 'नरः' है।

🎯 Exam Tip: Look for a synonym with the same meaning as 'जनः' within the passage.

 

Question 8. उपर्युक्तगद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
Answer: श्रमस्य महत्त्वम्। यह गद्यांश श्रम के महत्व और उससे मिलने वाले लाभों पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'श्रम का महत्व' है।

🎯 Exam Tip: The title should summarize the main theme of the entire passage.

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