RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Psychology. Our expert-created answers for Class 12 Psychology are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव RBSE Solutions for Class 12 Psychology

For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Psychology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव solutions will improve your exam performance.

Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. परिवार किस प्रकार का समूह है?
(अ) आकस्मिक
(ब) औपचारिक
(स) प्राथमिक
(द) द्वितीयक
Answer: (स) प्राथमिक
In simple words: परिवार एक प्राथमिक समूह है जहाँ सदस्य सीधे और करीबी संबंध रखते हैं। यह एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण सामाजिक इकाई है।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह की विशेषताओं को याद रखें जैसे सीधा संपर्क, छोटा आकार और भावनात्मक जुड़ाव, जो परिवार में स्पष्ट रूप से दिखते हैं।

 

Question 2. जब कुछ अजनबी व्यक्ति किसी चौराहे पर किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मदद करने के लिये समूह बना ले तो यह किस प्रकार का समूह कहलाएगा?
(ब) आकस्मिक
Answer: (ब) आकस्मिक
In simple words: जब लोग किसी अचानक स्थिति में मदद करने के लिए एक साथ आते हैं, तो यह एक आकस्मिक समूह होता है। यह समूह बिना किसी पहले से तय योजना के बनता है।

🎯 Exam Tip: आकस्मिक समूहों की पहचान उनकी अनियोजित और तात्कालिक प्रकृति से करें, जो किसी विशेष घटना के जवाब में बनते हैं।

 

Question 3. निम्न में से कौन-सी समूह निर्माण की अवस्था नहीं है?
(अ) निष्पादन अवस्था
(ब) निर्माण अवस्था
(स) सुषुप्त अवस्था
(द) प्रतिमान अवस्था
Answer: (स) सुषुप्त अवस्था
In simple words: समूह निर्माण की कुछ मुख्य अवस्थाएँ होती हैं, जैसे बनाना, बहस करना, नियम बनाना और काम करना। सुषुप्त अवस्था इनमें से एक नहीं है।

🎯 Exam Tip: समूह निर्माण के Tuckman के पाँच चरणों (forming, storming, norming, performing, adjourning) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये मानक मॉडल हैं।

 

Question 4. समूह निर्माण की वह अवस्था जिसमें समूह के नियम या मानक निर्धारित किये जाते हैं, कहलाती है -
(अ) झंझावात अवस्था
(ब) निर्माण अवस्था
(स) समापन अवस्था
(द) प्रतिमान अवस्था
Answer: (द) प्रतिमान अवस्था
In simple words: प्रतिमान अवस्था वह चरण है जहाँ समूह के सदस्य मिलकर यह तय करते हैं कि उन्हें कैसे काम करना चाहिए और क्या नियम मानने चाहिए। यह चरण समूह के सुचारू संचालन के लिए जरूरी है।

🎯 Exam Tip: प्रतिमान अवस्था (Norming stage) में ही समूह के सदस्यों के बीच सहमति बनती है, जिससे समूह के व्यवहार के लिए एक आधार तैयार होता है।

 

Question 5. 'अंगुली पकड़ कर हाथ पकड़ना' सामाजिक प्रभाव की किस तकनीक का उदाहरण है?
(अ) अनुरूपता
(ब) अनुपालन
(स) चाटुकारिता
(द) आज्ञापालन
Answer: (ब) अनुपालन
In simple words: 'अंगुली पकड़ कर हाथ पकड़ना' एक ऐसी तकनीक है जहाँ पहले एक छोटा अनुरोध माना जाता है, और फिर बाद में एक बड़ा अनुरोध स्वीकार करना आसान हो जाता है। यह अनुपालन का एक तरीका है।

🎯 Exam Tip: अनुपालन की तकनीकें लोगों को किसी अनुरोध को स्वीकार करने के लिए राजी करने के विभिन्न तरीके हैं, जिनमें छोटे से शुरू करके बड़े की ओर बढ़ना (foot-in-the-door) शामिल है।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. समूह किसे कहते हैं?
Answer: समूह व्यक्तियों के एक ऐसे एकत्रीकरण को कहते हैं जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपनी कुछ जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरों का सहयोग लेता है। इसमें व्यक्ति एक-दूसरे के साथ सामाजिक रूप से बातचीत करते हैं और सामान्य लक्ष्यों की ओर मिलकर काम करते हैं।
In simple words: समूह वह जगह है जहाँ लोग मिलकर अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए एक-दूसरे की मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: समूह की परिभाषा में 'आपसी सहयोग' और 'आवश्यकताओं की पूर्ति' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 2. प्राथमिक समूह को परिभाषित करें।
Answer: फेयरचाइल्ड के अनुसार, प्राथमिक समूह एक छोटा समूह होता है जिसमें लगभग 2 से 50-60 लोग शामिल होते हैं। इस समूह में सदस्यों के बीच लंबे समय तक चलने वाले और सीधे आमने-सामने के संबंध होते हैं। इन संबंधों का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि विशिष्ट भूमिकाओं और संगठनों के नियुक्त सदस्यों के रूप में भी हो सकता है। प्राथमिक समूह के लिए शारीरिक निकटता, छोटा आकार और संबंधों की लंबी अवधि जैसी विशेषताएँ जरूरी होती हैं। इन तीनों विशेषताओं के मिलने पर प्राथमिक समूह आसानी से विकसित होता है। परिवार एक उत्कृष्ट प्राथमिक समूह का उदाहरण है।
In simple words: प्राथमिक समूह छोटे होते हैं जहाँ लोग लंबे समय तक एक-दूसरे को सीधे जानते हैं। इनमें सदस्यों के बीच बहुत करीबी संबंध होते हैं, जैसे परिवार में।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह की मुख्य विशेषताओं पर ध्यान दें, जैसे सदस्यों की संख्या, संबंधों की प्रकृति और अवधि।

 

Question 3. आकस्मिक एवं प्रयोजनात्मक समूह में क्या अन्तर है?
Answer: आकस्मिक समूह वे होते हैं जो किसी विशेष स्थिति के कारण अचानक बन जाते हैं। इनका निर्माण किसी पहले से तय लक्ष्य के लिए नहीं होता है। उदाहरण के लिए, जब सड़क पर कोई व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, तो लोग उसकी मदद के लिए इकट्ठा हो जाते हैं, यह एक आकस्मिक समूह है। प्रयोजनात्मक समूह वे होते हैं जो किसी निश्चित उद्देश्य के अनुसार बनते हैं। जैसे, स्कूल और स्वयंसेवी संगठन शिक्षा और सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। आकस्मिक समूह अस्थायी होते हैं जबकि प्रयोजनात्मक समूह अधिक संगठित और स्थायी होते हैं।
In simple words: आकस्मिक समूह अचानक बनते हैं, जैसे दुर्घटना पर मदद के लिए लोग इकट्ठा होते हैं। प्रयोजनात्मक समूह किसी खास लक्ष्य के लिए बनाए जाते हैं, जैसे स्कूल।

🎯 Exam Tip: आकस्मिक और प्रयोजनात्मक समूहों के बीच मुख्य अंतर उनके गठन के उद्देश्य में निहित है – एक अचानक बनता है, दूसरा योजनाबद्ध।

 

Question 4. औपचारिक समूहों के कुछ उदाहरण दीजिए।
Answer: औपचारिक समूह वे समूह होते हैं जिनका निर्माण विशेष नियमों और कानूनों के अनुसार होता है। इन समूहों में सदस्यों की भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से परिभाषित होती हैं। उदाहरण के लिए, शैक्षणिक संस्थाएँ जैसे कॉलेज और विश्वविद्यालय औपचारिक समूह हैं। इनमें नामांकन प्रणाली, प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षाएँ निश्चित नियमों के तहत होती हैं। मजदूर संघ भी औपचारिक समूह का एक उदाहरण है क्योंकि यह कुछ निश्चित उद्देश्यों और नियमों पर आधारित होता है।
In simple words: औपचारिक समूह नियमों पर चलते हैं और इनके खास उद्देश्य होते हैं, जैसे स्कूल या मजदूर संघ।

🎯 Exam Tip: औपचारिक समूहों को पहचानते समय उनके संगठन, नियमों और पूर्वनिर्धारित उद्देश्यों पर ध्यान दें।

 

Question 5. समूह निर्माण की झंझावात अवस्था को समझाइए।
Answer: 'टकमैन' के अनुसार, समूह निर्माण पाँच विकास चरणों से गुजरता है। झंझावात अवस्था (Storming stage) दूसरा चरण है। इस अवस्था में समूह के सदस्यों के बीच समूह के लक्ष्यों, उनकी प्राप्ति के तरीकों, नियंत्रण, सदस्यों की भूमिकाओं और नीतियों को लेकर संघर्ष और मतभेद होते रहते हैं। सभी सदस्य इन सवालों पर विचार करते हैं और उनके बीच अलग-अलग विचार सामने आते हैं, इसीलिए इसे झंझावात अवस्था कहा जाता है। इस अवस्था में मतभेद को सुलझाना समूह के विकास के लिए आवश्यक है।
In simple words: झंझावात अवस्था में समूह के सदस्य आपस में लड़ते और बहस करते हैं क्योंकि वे लक्ष्यों और काम के तरीकों पर सहमत नहीं हो पाते।

🎯 Exam Tip: झंझावात अवस्था में संघर्ष और मतभेद आम होते हैं, लेकिन इनका समाधान समूह के लिए मजबूत आधार तैयार करता है।

 

Question 6. समूह निर्माण की अवस्थाओं के नाम लिखें।
Answer: समूह निर्माण की अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
1. निर्माण अवस्था (Forming): इस अवस्था में लोग पहली बार मिलते हैं। लक्ष्य के बारे में अनिश्चितता होती है और वे एक-दूसरे को जानने की कोशिश करते हैं। यह समूह के सदस्यों के बीच शुरुआती मेलजोल का चरण है।
2. झंझावात अवस्था (Storming): इस अवस्था में लोगों के सामने अनेक तरह के मतभेद आते हैं और उनके विचार अलग-अलग पाए जाते हैं। यह संघर्ष और असहयोग का चरण होता है।
3. प्रतिमान अवस्था (Norming): इस अवस्था में दूसरे चरण के बाद कुछ निर्णय लिए जाते हैं। ये नियम समूह के सदस्यों के व्यवहार को निर्धारित करने का आधार बनते हैं। इस अवस्था में सदस्य एक-दूसरे को स्वीकार करते हैं।
4. निष्पादन अवस्था (Performing): इस अवस्था तक समूह की संरचना विकसित हो जाती है। अब समूह कार्य करने पर ध्यान केंद्रित करता है। सभी सदस्य लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों को पूरा करते हैं।
5. समापन अवस्था (Adjourning): इस अवस्था में समूह का काम पूरा हो जाने और लक्ष्य की प्राप्ति हो जाने पर समूह भंग हो जाता है या समाप्त हो जाता है। यह समूह के जीवनचक्र का अंतिम चरण होता है।
In simple words: समूह निर्माण की पाँच अवस्थाएँ हैं: निर्माण, झंझावात, प्रतिमान, निष्पादन और समापन। हर अवस्था में समूह का अलग काम होता है।

🎯 Exam Tip: Tuckman के समूह विकास मॉडल के सभी पाँच चरणों को सही क्रम में याद रखें और प्रत्येक चरण की मुख्य विशेषताएँ समझें।

 

Question 8. चाटुकारिता किसे कहते हैं?
Answer: चाटुकारिता एक ऐसी विधि है जिसमें व्यक्ति किसी खास व्यक्ति की बातों में हाँ में हाँ मिलाते हैं और उसकी प्रशंसा करते हैं। ऐसा करने से वह व्यक्ति चाटुकार करने वाले व्यक्ति को पसंद करने लगता है और उसकी इच्छाओं और अनुरोधों को मान लेता है। यह अक्सर स्वार्थ के लिए किया जाता है ताकि कोई लाभ मिल सके। चाटुकारिता की विशेषताएँ:
1. यह स्वार्थ पर आधारित विधि है।
2. इसे आम भाषा में 'चापलूसी' या 'जीहजूरी' भी कहते हैं।
3. ऐसे व्यक्ति अवसरवादी होते हैं।
4. इसमें अपने हित या व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दी जाती है।
In simple words: चाटुकारिता में लोग किसी खास व्यक्ति की तारीफ करते हैं और उसकी हर बात में हाँ मिलाते हैं ताकि वे उस व्यक्ति से कुछ फायदा ले सकें।

🎯 Exam Tip: चाटुकारिता को सामाजिक प्रभाव की एक तकनीक के रूप में पहचानें और इसकी स्वार्थी प्रकृति को हमेशा याद रखें।

 

Question 9. अनुपालन को परिभाषित करें।
Answer: जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के अनुरोध या निवेदन के अनुसार व्यवहार करता है तो उसे अनुपालन (compliance) कहते हैं। इसका मतलब है कि व्यक्ति अपनी बात मनवाने के लिए कई तरीकों और तर्कों का उपयोग करता है। उदाहरण के लिए:
1. बेटी का अपने पिता से कॉलेज ट्रिप पर जाने की बात मनवाने के लिए किया जाने वाला व्यवहार अनुपालन कहलाता है। यह एक अनुरोध को मनवाने का प्रयास है।
2. जब कोई सेल्समैन हमारे घर आता है, तो हम उससे जिस तरह का व्यवहार करते हैं, वह भी अनुपालन का एक अच्छा उदाहरण है। यह किसी बाहरी अनुरोध पर प्रतिक्रिया देना है।
In simple words: अनुपालन तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी और के अनुरोध को मान लेता है। इसमें अपनी बात मनवाने के लिए तर्क या तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुपालन में व्यक्ति बाहरी अनुरोधों या दबाव के कारण व्यवहार बदलता है, जबकि अनुरूपता में समूह के मानकों के कारण व्यवहार बदलता है।

अनुरूपता एवं अनुपालन में निम्न आधारों पर अन्तर को स्पष्ट किया जा सकता है –

 

Question 10. अनुरूपता एवं अनुपालन में क्या अंतर है?
Answer: अनुपालन और अनुरूपता में निम्नलिखित अंतर हैं:
A. अनुपालन:
1. इसमें अनुरोध या निवेदन को प्राथमिकता दी जाती है।
2. इसमें व्यक्ति अपनी बात मनवाने के लिए कई तरीकों का उपयोग करता है।
3. इसमें व्यक्ति विनम्र व्यवहार दिखाते हैं। अनुपालन में व्यक्ति किसी बाहरी अनुरोध का पालन करता है।
B. अनुरूपता:
1. इसका मतलब है सदस्यों का नियमों के अनुसार व्यवहार करना।
2. कभी-कभी व्यक्ति अपनी इच्छा से समूह के निर्णय या नियमों को स्वीकार कर लेता है।
3. अनुरूपता के तहत निर्णय लेते समय व्यक्ति को मानसिक संघर्ष या दबाव का सामना करना पड़ता है। अनुरूपता में व्यक्ति समूह के मानकों के अनुरूप व्यवहार करता है।
In simple words: अनुपालन तब होता है जब हम किसी की बात मानते हैं, जबकि अनुरूपता तब होती है जब हम समूह के नियमों का पालन करते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुरूपता (conformity) समूह के मानदंडों का पालन है, जबकि अनुपालन (compliance) किसी विशिष्ट अनुरोध को मानना है।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. समूह क्या है? समूह की विभिन्न विशेषताओं को समझाइए।
Answer: समूह तब बनता है जब दो या दो से अधिक व्यक्ति एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और सामान्य हितों के लिए एक-दूसरे के साथ सार्थक बातचीत करके संबंध स्थापित करते हैं। समूह की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. प्रत्येक समूह का निर्माण किसी-न-किसी उद्देश्य के लिए होता है। इस उद्देश्य को पाने के लिए समूह के सदस्यों के बीच काम बाँट दिया जाता है। हर सदस्य की भूमिका तय होती है।
2. किसी भी समूह की स्थापना उन्हीं व्यक्तियों द्वारा होती है जिनकी रुचि और हित एक जैसे हों। अलग-अलग हित वाले व्यक्ति समूह नहीं बना सकते।
3. समूह की सदस्यता अपनी इच्छा पर निर्भर करती है। व्यक्ति सभी समूहों का सदस्य नहीं बनता, बल्कि उन्हीं समूहों का सदस्य बनता है जिससे उसके हित, आवश्यकताएँ और रुचियाँ पूरी हों।
4. समूहों में सभी व्यक्ति समान पदों पर नहीं होते, बल्कि वे अलग-अलग पद और भूमिकाएँ निभाते हैं। इसलिए समूह में पदों का एक क्रम होता है।
5. प्रत्येक समूह में सामूहिक आदर्श और प्रतिमान होते हैं जो सदस्यों के आपसी व्यवहारों को तय करते हैं और उन्हें एक निश्चित सीमा में रखते हैं। ये समूह की पहचान होते हैं।
6. समूह में सिर्फ व्यक्तियों का होना काफी नहीं है, बल्कि उनके बीच सामाजिक संबंध होना भी बहुत जरूरी है। आपसी बातचीत और जुड़ाव समूह को मजबूत बनाते हैं।
In simple words: समूह तब बनता है जब लोग मिलकर एक लक्ष्य के लिए काम करते हैं। इसकी पहचान आपसी संबंधों, साझा उद्देश्यों और तय किए गए नियमों से होती है।

🎯 Exam Tip: समूह की परिभाषा और उसकी विशेषताओं को स्पष्ट रूप से समझें, खासकर उसके उद्देश्य-उन्मुख और संबंध-आधारित प्रकृति को।

 

Question 2. समूह के विभिन्न प्रकारों को उदाहरण देते हुए समझाइए।
Answer: समूह के विभिन्न प्रकारों का वर्णन इस प्रकार है:
A. प्राथमिक समूह:
ये वे समूह होते हैं जिनके सदस्यों के बीच सीधा और करीबी संबंध होता है। वे आपस में गहराई से जुड़े होते हैं।
उदाहरण:
1. परिवार: परिवार प्राथमिक समूहों का सबसे अच्छा उदाहरण है क्योंकि इसके सदस्यों के बीच सीधे और आमने-सामने के संबंध होते हैं। यह बच्चों को सामाजिक कौशल सिखाता है।
2. मित्र-मंडली: इसे भी प्राथमिक समूह माना जाता है क्योंकि यहाँ बच्चे सहयोग, आपसी मेलजोल और अन्य गहरी भावनाओं को सीखते हैं।
B. द्वितीयक समूह:
ये वे समूह होते हैं जिनके सदस्यों के बीच अवैयक्तिक (impersonal) संबंध होते हैं। इन समूहों में सदस्यों के बीच शारीरिक निकटता का होना अनिवार्य नहीं है।
उदाहरण:
विश्वविद्यालय: इन्हें द्वितीयक समूहों का एक उत्तम उदाहरण माना जाता है क्योंकि इनके सदस्यों के बीच अवैयक्तिक जुड़ाव कम होता है, और संबंध अक्सर किसी विशिष्ट उद्देश्य पर आधारित होते हैं।
C. औपचारिक समूह:
ये वे समूह होते हैं जो नियमों के आधार पर संचालित होते हैं। इनमें संरचना और नियम स्पष्ट होते हैं।
उदाहरण:
1. मजदूर संघ: इसे औपचारिक समूह कहा जाता है क्योंकि ये संघ कुछ निश्चित उद्देश्यों और नियमों पर आधारित होते हैं, जैसे श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना।
D. अनौपचारिक समूह:
ये वे समूह होते हैं जिनके निर्माण में नियमों और कानूनों का अधिक महत्व नहीं होता है। इनका गठन अक्सर सामाजिक संबंधों या साझा रुचियों के आधार पर होता है।
In simple words: समूह कई तरह के होते हैं, जैसे परिवार (प्राथमिक), विश्वविद्यालय (द्वितीयक), मजदूर संघ (औपचारिक) और दोस्तों का समूह (अनौपचारिक)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के समूह की मुख्य विशेषताओं और उनके उदाहरणों को ध्यान में रखें, खासकर उनके गठन के तरीके और सदस्यों के संबंधों की प्रकृति पर।

 

Question 3. समूह निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
Answer: समूह निर्माण, आराम और सुरक्षित महसूस करने के लिए होता है। 'टकमैन' के अनुसार, समूह निर्माण की प्रक्रिया पाँच विकास चरणों से गुजरती है, जो इस प्रकार हैं:
1. निर्माण अवस्था (Forming Stage): इस अवस्था में लोग पहली बार मिलते हैं और लक्ष्यों के बारे में अनिश्चित होते हैं। वे एक-दूसरे को जानने की कोशिश करते हैं।
2. झंझावात अवस्था (Storming Stage): इस अवस्था में समूह के सदस्यों के बीच लक्ष्यों, उनकी प्राप्ति के तरीकों, नियंत्रण और भूमिकाओं को लेकर संघर्ष चलता रहता है। इनमें मतभेद भी सामने आते हैं।
3. प्रतिमान अवस्था (Norming Stage): इस अवस्था में दूसरे चरण के बाद कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। ये नियम समूह के सदस्यों के व्यवहार को तय करने का आधार बनते हैं।
4. निष्पादन अवस्था (Performing Stage): इस अवस्था तक समूह की संरचना पूरी तरह विकसित हो जाती है। अब समूह का काम करने का समय होता है। सभी सदस्य लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी निर्धारित जिम्मेदारियाँ पूरी करते हैं।
5. समापन अवस्था (Adjourning Stage): इस अवस्था में समूह का कार्य पूरा हो जाने और लक्ष्य की पूर्ति हो जाने पर समूह भंग हो जाता है या समाप्त हो जाता है।
In simple words: समूह बनने की प्रक्रिया पाँच चरणों में होती है: बनना, बहस करना, नियम बनाना, काम करना और खत्म होना। हर चरण का अपना खास काम होता है।

🎯 Exam Tip: समूह निर्माण के सभी पाँच चरणों को सही क्रम में याद रखें और प्रत्येक चरण में होने वाली मुख्य गतिविधियों का वर्णन करने के लिए तैयार रहें।

 

Question 4. समूह दबाव किसे कहते हैं? समूह दबाव पर किये गये प्रयोग को समझाइए।
Answer: समूह दबाव का मतलब उस दबाव से है जो समूह के भीतर प्रत्येक सदस्य अपने ऊपर महसूस करता है। इसका अर्थ है कि सामाजिक बातचीत के ज़रिए एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करता है। यह प्रभाव या दबाव समूहों पर दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी शादी में बुफे की व्यवस्था हो और किसी को ज़मीन पर बैठकर खाना पसंद हो, तो वह व्यक्ति समूह के दबाव में आकर नियमों के अनुसार बुफे में ही खाना खाएगा। इसी तरह, यदि कोई हेलमेट पहनना पसंद नहीं करता, तो भी वह दंड से बचने के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करता है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि व्यक्ति समूह से जुड़े होने के कारण लगातार दबाव में रहता है और नियमों के अनुसार ही व्यवहार करता है। इस दबाव को समझना सामाजिक मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: समूह दबाव तब होता है जब समूह के लोग एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और व्यक्ति समूह के नियमों के अनुसार काम करता है, भले ही वह व्यक्तिगत रूप से ऐसा न चाहे।

🎯 Exam Tip: समूह दबाव के उदाहरणों को याद रखें और समझें कि यह कैसे व्यक्तियों के व्यवहार को समूह के मानदंडों के अनुरूप ढालता है।

 

Question 5. सामाजिक प्रभाव के मुख्य प्रकार कौन-से हैं? अनुरूपता की तकनीकों को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: सामाजिक प्रभाव के तहत व्यक्ति मुख्य रूप से तीन प्रकारों से प्रभावित होते हैं:
1. अनुरूपता (Conformity): यह तब होता है जब व्यक्ति समूह के मानदंडों के अनुसार अपना व्यवहार बदलता है।
2. अनुपालन (Compliance): यह तब होता है जब व्यक्ति किसी विशिष्ट अनुरोध के जवाब में अपना व्यवहार बदलता है।
3. आज्ञापालन (Obedience): यह तब होता है जब व्यक्ति किसी प्राधिकारी व्यक्ति के आदेश का पालन करता है।
अनुरूपता की तकनीकें:
सोलोमन ऐश द्वारा किए गए प्रयोग में, 7 व्यक्तियों के एक समूह में एक व्यक्ति वास्तविक प्रायोज्य था और बाकी 6 प्रयोगकर्ता के साथी थे। सभी प्रतिभागियों को एक मानक रेखा दिखाई गई और उन्हें 3 अलग-अलग लंबाई की रेखाओं (A, B, C) से तुलना करके बताना था कि कौन सी रेखा मानक रेखा के समान लंबाई की है। सभी प्रतिभागियों ने जानबूझकर गलत उत्तर दिया, लेकिन वास्तविक प्रायोज्य को लगा कि उत्तर गलत है। लगभग 67% प्रायोज्यों ने समूह के दबाव में आकर वही गलत उत्तर दिया जो समूह ने दिया था, जिससे अनुरूपता दिखी। यह दिखाता है कि लोग समूह के साथ मेल खाने के लिए अपने निर्णयों को बदलते हैं।
In simple words: सामाजिक प्रभाव के तीन मुख्य प्रकार हैं: अनुरूपता (समूह के साथ चलना), अनुपालन (अनुरोध मानना) और आज्ञापालन (आदेश मानना)। ऐश के प्रयोग ने दिखाया कि कैसे लोग समूह के दबाव में आकर गलत उत्तर दे सकते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक प्रभाव के तीनों मुख्य प्रकारों को याद रखें और ऐश के अनुरूपता प्रयोग को एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उल्लेख करें।

 

Question 6. अनुपालन की बहुल तकनीकों के विभिन्न प्रकारों को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: अनुपालन की बहुल तकनीकों का वर्णन इस प्रकार है:
1. चाटुकारिता तकनीक: इस तकनीक में व्यक्ति किसी खास व्यक्ति की प्रशंसा करते हैं। इससे वह व्यक्ति उन्हें पसंद करने लगता है और उनके अनुरोधों को स्वीकार कर लेता है। उदाहरण के लिए, एक कंपनी में कर्मचारी प्रमोशन के लिए अधिकारी की चापलूसी कर सकते हैं। यह तकनीक रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
2. पारस्परिकता तकनीक: इसका आधार यह विचार है कि जब हम किसी को कोई लाभ पहुँचाते हैं, तो वह भविष्य में हमें लाभ पहुँचा सकता है। इसमें किसी से कोई काम करवाने के लिए पहले उसके छोटे-मोटे अनुरोधों को मान लिया जाता है। उदाहरण के लिए, एक पड़ोसी से अच्छे संबंध बनाए रखने से भविष्य में मदद मिल सकती है।
3. बहल निवेदन (Multiple Requests): इसमें अनेक तकनीकें शामिल हैं:
A. अंगुली पकड़कर हाथ पकड़ना (Foot-in-the-Door): इसमें पहले छोटे अनुरोध किए जाते हैं जिन्हें व्यक्ति आसानी से मान लेता है। लक्षित व्यक्ति फिर अपने बड़े अनुरोधों को भी स्वीकार कर लेता है। यह तब काम करता है जब लोग एक बार किसी अनुरोध को मान लेते हैं, तो वे उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध महसूस करते हैं।
In simple words: अनुपालन की कई तकनीकें हैं जैसे चाटुकारिता (तारीफ करना), पारस्परिकता (मदद के बदले मदद) और बहल निवेदन (पहले छोटा अनुरोध फिर बड़ा अनुरोध)। ये तरीके लोगों को आपकी बात मनवाने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुपालन की तकनीकों को याद रखें और प्रत्येक तकनीक के पीछे के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत को उदाहरणों के साथ समझाएँ।

 

Question 7. आज्ञापालन किसे कहते हैं? आज्ञापालन पर मिलर द्वारा किये गए प्रयोग को समझाइए।
Answer: आज्ञापालन (obedience) में व्यक्ति को किसी आदेश का पालन करना ही होता है। जबकि अनुरूपता और अनुपालन में व्यक्ति के पास अनुरोध का पालन करने या न करने की स्वतंत्रता होती है।
आज्ञापालन के अध्ययन के लिए मनोवैज्ञानिक स्टेनले मिलग्राम ने एक प्रसिद्ध प्रयोग किया था। मिलग्राम के प्रयोग में, एक वास्तविक प्रायोज्य को एक उपकरण के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को बिजली का झटका देने का आदेश दिया गया। वास्तव में, किसी को कोई बिजली का झटका नहीं दिया गया था, बल्कि सामने वाला व्यक्ति सिर्फ अभिनय कर रहा था कि उसे झटके लग रहे हैं। उसे ज़ोर से चिल्लाने और पैर पटकने जैसे शारीरिक संकेत दिखाने को कहा गया। प्रायोज्य को धीरे-धीरे बिजली का झटका देना प्रयोग के लिए ज़रूरी था। इस प्रयोग से पता चला कि कई लोगों ने मिलग्राम के आदेश का पालन किया। मिलग्राम ने यह निष्कर्ष निकाला कि किसी व्यक्ति से कोई काम करवाने के लिए आज्ञापालन भी एक प्रभावी तकनीक है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी व्यक्ति द्वारा कार्य करवाने और मानकों के अनुसार व्यवहार करने के लिए कई तकनीकें और विधियाँ होती हैं। यह प्रयोग दिखाता है कि सत्ता के सामने लोग कैसे व्यवहार करते हैं।
In simple words: आज्ञापालन का मतलब आदेश मानना है। मिलग्राम के प्रयोग में लोगों ने दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले आदेशों का भी पालन किया, यह दर्शाता है कि लोग सत्ता के सामने कितना झुकते हैं।

🎯 Exam Tip: आज्ञापालन की परिभाषा और मिलग्राम के प्रसिद्ध प्रयोग के मुख्य निष्कर्षों को याद रखें, जो सत्ता के प्रभाव को उजागर करते हैं।

 

Question 8. समूह द्वन्द्व किसे कहते हैं? समूह द्वन्द्व का समाधान कैसे किया जा सकता है?
Answer: समूह द्वन्द्व का मतलब है कि समूह के सदस्यों के बीच अलग-अलग लक्ष्यों, विचारों या नेतृत्व के फैसलों पर मतभेद होने के कारण समूह में झगड़ा होना। जब समूहों में असमानता होती है या सदस्यों में आपसी विश्वास कम होता है, तो द्वन्द्व बढ़ जाता है। समूह द्वन्द्व को दूर करने के लिए निम्नलिखित प्रयास किए जा सकते हैं:
1. दोनों पक्षों की बातचीत में स्वीकार्य हल ढूँढ़ने का प्रयास किया जाए, जिससे सभी सहमत हों।
2. समूह की सीमाओं का फिर से निर्धारण करने से हर सदस्य को अपनी जिम्मेदारियों, अधिकारों और सीमाओं का ज्ञान होगा, जिससे गलतफहमी कम होगी।
समूह में उचित बातचीत की कमी भी द्वन्द्व का कारण बन सकती है। इसलिए, इन कारणों को समझना और उन्हें दूर करना ज़रूरी है।
In simple words: समूह द्वन्द्व तब होता है जब समूह के सदस्यों के बीच लक्ष्यों या विचारों को लेकर झगड़ा होता है। इसे बातचीत और स्पष्ट नियम तय करके सुलझाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: समूह द्वन्द्व के कारणों और उसके समाधान के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करें, खासकर संचार और भूमिका स्पष्टता के महत्व पर।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. मनुष्य एक......... प्राणी है –
(अ) सामाजिक
(ब) असामाजिक
(स) असभ्य
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) सामाजिक
In simple words: मनुष्य सामाजिक प्राणी है क्योंकि वह समाज में रहता है और दूसरों के साथ जुड़कर ही विकसित होता है।

🎯 Exam Tip: यह एक मौलिक सामाजिक अवधारणा है; मनुष्य को सामाजिक प्राणी के रूप में पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. समूह की सदस्यता कैसी होती है?
(अ) अनिवार्य
(ब) ऐच्छिक
(स) दोनों
(द) कोई भी
Answer: (ब) ऐच्छिक
In simple words: समूह में शामिल होना आमतौर पर हमारी अपनी पसंद पर निर्भर करता है, यानी यह हमारी इच्छा पर आधारित होता है।

🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि अधिकांश समूह सदस्यताएँ स्वैच्छिक होती हैं, जो व्यक्तिगत हितों और उद्देश्यों पर आधारित होती हैं।

 

Question 3. इसमें से कौन-सा कथन समूह की विशेषता को व्यक्त नहीं करता?
(अ) व्यक्तियों का समूह होना आवश्यक है
(ब) एकता की भावना आवश्यक है
(स) समूह की सदस्यता अनिवार्य होती है
(द) सामाजिक सम्बन्धों का होना अनिवार्य है
Answer: (स) समूह की सदस्यता अनिवार्य होती है
In simple words: समूह की एक विशेषता यह नहीं है कि इसमें शामिल होना जरूरी हो। आमतौर पर समूह में लोग अपनी मर्जी से जुड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: समूह की वास्तविक विशेषताओं को याद रखें, जैसे आपसी जुड़ाव और साझा लक्ष्य, और जानें कि कौन सी विशेषता समूह पर लागू नहीं होती।

 

Question 5. कौन-सी विशेषता प्राथमिक समूह से सम्बन्धित नहीं है?
(अ) शारीरिक समीपता
(ब) समूह का लघु आकार
(स) सम्बन्धों की लम्बी अवधि
(द) अवैयक्तिक सम्बन्ध
Answer: (द) अवैयक्तिक सम्बन्ध
In simple words: प्राथमिक समूहों में लोग एक-दूसरे को बहुत करीब से जानते हैं और उनके संबंध व्यक्तिगत होते हैं, अवैयक्तिक नहीं।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, जो सीधे, व्यक्तिगत और करीबी संबंधों पर केंद्रित होती हैं, न कि अवैयक्तिक संबंधों पर।

 

Question 6. राजनीतिक दल किस प्रकार के समूह का उदाहरण है?
(अ) क्षेत्रीय समूह
(ब) प्राथमिक समूह
(स) द्वितीयक समूह
(द) सन्दर्भ समूह
Answer: (स) द्वितीयक समूह
In simple words: राजनीतिक दल एक बड़ा समूह होता है जहाँ सदस्यों के संबंध सीधे और व्यक्तिगत नहीं होते, बल्कि किसी खास उद्देश्य के लिए होते हैं।

🎯 Exam Tip: द्वितीयक समूहों को उनके बड़े आकार, अवैयक्तिक संबंधों और विशिष्ट लक्ष्यों के आधार पर पहचानें।

 

Question 7. परिवार एवं पड़ोस किस प्रकार के समूह के अन्तर्गत आते हैं?
(अ) प्राथमिक समूह
(ब) द्वितीयक समूह
(स) हित समूह
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) प्राथमिक समूह
In simple words: परिवार और पड़ोस दोनों ही प्राथमिक समूह हैं क्योंकि इनमें लोग एक-दूसरे को सीधे और करीब से जानते हैं, और संबंध व्यक्तिगत होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह के उदाहरणों में परिवार और पड़ोस जैसे करीबी, व्यक्तिगत रूप से जुड़े समूह शामिल हैं।

 

Question 9. निम्नलिखित में से द्वितीयक समूह का चयन कीजिए -
(अ) पड़ोस
(ब) श्रमिक संघ
(स) परिवार
(द) क्लब
Answer: (ब) श्रमिक संघ
In simple words: श्रमिक संघ एक द्वितीयक समूह है क्योंकि इसके सदस्य किसी खास उद्देश्य (जैसे कामगारों के हक) के लिए जुड़ते हैं और संबंध व्यक्तिगत से ज्यादा औपचारिक होते हैं।

🎯 Exam Tip: द्वितीयक समूहों की पहचान उनके विशिष्ट उद्देश्यों और अक्सर अधिक औपचारिक संबंधों से करें।

 

Question 10. सामाजिक प्रभाव के कितने प्रकार हैं?
(अ) पाँच
(ब) चार
(स) तीन
(द) दो
Answer: (स) तीन
In simple words: सामाजिक प्रभाव मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: अनुरूपता, अनुपालन और आज्ञापालन। ये तरीके बताते हैं कि लोग एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक प्रभाव के तीनों मुख्य प्रकारों (अनुरूपता, अनुपालन, आज्ञापालन) को याद रखें।

 

Question 11. इसमें से मनोवेगा है –
(अ) शेरीफ
(ब) रोजनबर्ग
(स) दुर्थीम
(द) ऐश
Answer: (स) दुर्थीम
In simple words: मनोविज्ञानी के रूप में, दुर्थीम एक समाजशास्त्री थे, जबकि शेरीफ और ऐश प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक हैं जिन्होंने सामाजिक प्रभाव पर काम किया।

🎯 Exam Tip: विभिन्न सामाजिक वैज्ञानिकों और उनके संबंधित क्षेत्रों को जानना महत्वपूर्ण है। दुर्थीम का संबंध समाजशास्त्र से है।

 

Question 12. मिलग्राम ने निम्न में से किस पर प्रायोगिक अध्ययन किया है –
(अ) निर्णय-प्रक्रिया
(ब) अनुरूपता
(स) अनुपालन
(द) आज्ञापालन
Answer: (द) आज्ञापालन
In simple words: मिलग्राम ने अपने प्रसिद्ध प्रयोगों में यह पता लगाया कि लोग आदेशों का कितना पालन करते हैं, भले ही वे नैतिक रूप से गलत हों।

🎯 Exam Tip: स्टेनले मिलग्राम का नाम हमेशा आज्ञापालन के प्रयोग से जुड़ा है, जो सामाजिक मनोविज्ञान में एक महत्वपूर्ण अध्ययन है।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. समूह किसे कहते हैं? समूह की प्रकृति स्पष्ट कीजिए।
Answer: समूह व्यक्तियों का ऐसा जमावड़ा है जहाँ सभी एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं ताकि अपनी ज़रूरतों को पूरा कर सकें. समूह की प्रकृति इस बात पर निर्भर करती है कि इसमें शामिल सदस्य एक-दूसरे के साथ कैसे जुड़े हैं. उदाहरण के लिए, एक परिवार एक समूह होता है क्योंकि सभी सदस्य एक-दूसरे की मदद करते हैं और एक-दूसरे के करीब रहते हैं.
In simple words: समूह वह जगह है जहाँ लोग मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं.

🎯 Exam Tip: समूह की परिभाषा में 'आपसी सहयोग' और 'आवश्यकता पूर्ति' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. समूह सम्बन्ध का क्या अर्थ है ?
Answer: समूह संबंध का मतलब यह है कि समूह के सदस्यों के बीच किस तरह के रिश्ते हैं. ये रिश्ते कई बातों से प्रभावित होते हैं, जैसे समूह कितना बड़ा है, क्या यह हमेशा एक जैसा रहता है, और इसके लक्ष्य क्या हैं. इसमें सदस्यों की उम्र भी मायने रखती है. शोध से पता चला है कि छोटे समूहों में रिश्ते सीधे और अनौपचारिक होते हैं, जबकि बड़े समूहों में वे औपचारिक होते हैं.
In simple words: समूह संबंध बताता है कि समूह के लोग एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं और उनके रिश्ते किन बातों पर निर्भर करते हैं.

🎯 Exam Tip: समूह के आकार और संबंधों की प्रकृति (सीधी/अप्रत्यक्ष, औपचारिक/अनौपचारिक) का उल्लेख करना आवश्यक है.

 

Question 3. सामाजिक मानकों या प्रतिमानों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: सामाजिक मानक या प्रतिमान वे नियम, आदर्श, मूल्य और परंपराएं होती हैं जो समाज में लोगों के व्यवहार को तय करती हैं. ये समाज में मेलजोल के दौरान बनते हैं और लोगों को सही तरीके से जीने में मदद करते हैं. ये मानक समूह के सदस्यों पर बहुत असर डालते हैं और उन्हें इनका पालन करना ज़रूरी होता है. ये मानक समाज में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने में बहुत सहायक होते हैं.
In simple words: सामाजिक मानक वे नियम होते हैं जो समाज के लोग अपने व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए अपनाते हैं.

🎯 Exam Tip: सामाजिक मानकों के 'नियंत्रण' और 'नियमन' के कार्य को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है.

 

Question 5. प्राथमिक समूह एवं द्वितीयक समूह में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्राथमिक समूह और द्वितीयक समूह में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
**प्राथमिक समूह:**
1. इसमें लोगों के बीच सीधा संबंध होता है.
2. इनका आकार छोटा होता है.
3. सदस्यों के लक्ष्य अक्सर एक जैसे होते हैं.
4. इनके संबंध लंबे समय तक चलने वाले होते हैं.
5. इनमें अनौपचारिकता बहुत ज़्यादा होती है. जैसे परिवार या दोस्तों का समूह.
**द्वितीयक समूह:**
1. इसमें लोगों के बीच संबंध सीधे नहीं होते हैं.
2. इनका आकार बड़ा होता है.
3. सदस्यों के लक्ष्य अक्सर अलग-अलग हो सकते हैं.
4. इनके संबंध अस्थायी होते हैं.
5. इनमें औपचारिकता ज़्यादा होती है. जैसे एक विश्वविद्यालय या एक बड़ी कंपनी.
In simple words: प्राथमिक समूह छोटे होते हैं और उनमें सीधे संबंध होते हैं, जबकि द्वितीयक समूह बड़े होते हैं और उनमें संबंध औपचारिक होते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रत्येक अंतर बिंदु को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में लिखें और प्रत्येक प्रकार के समूह का एक-एक उदाहरण दें.

 

Question 6. निर्वैयक्तिकता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: निर्वैयक्तिकता एक मनोवैज्ञानिक अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपनी पहचान और आत्म-जागरूकता खो देता है. ऐसा तब होता है जब व्यक्ति किसी समूह में पूरी तरह घुल-मिल जाता है. इस स्थिति में, लोग समूह के नियमों और व्यवहारों के अनुसार काम करने लगते हैं, भले ही वे व्यक्तिगत रूप से वैसा न करना चाहते हों. यह स्थिति अक्सर भीड़ या बड़े समूह में देखी जाती है.
In simple words: निर्वैयक्तिकता का मतलब है कि जब कोई व्यक्ति समूह में इतना घुल जाए कि अपनी पहचान भूल जाए.

🎯 Exam Tip: 'व्यक्तिगत पहचान खोना' और 'समूह के साथ पूर्णतः घुलना' इन दो मुख्य बिंदुओं को उजागर करना महत्वपूर्ण है.

 

Question 8. प्राथमिक समूहों को 'प्राथमिक' क्यों कहा जाता है?
Answer: प्राथमिक समूहों को 'प्राथमिक' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये व्यक्ति के जीवन में सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. परिवार, पड़ोस और मित्र-मंडली जैसे समूह व्यक्ति के बचपन में ही बनते हैं और उसके व्यक्तित्व को आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं. ये समूह व्यक्ति को संस्कृति, मूल्य और आदर्श सिखाते हैं, जो उसके सामाजिकरण के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं. इन समूहों से व्यक्ति सामाजिक व्यवहार और आचरण सीखता है.
In simple words: प्राथमिक समूह व्यक्ति के जीवन में सबसे पहले आते हैं और उसके व्यक्तित्व, मूल्यों और सामाजिकरण को बनाने में बहुत खास होते हैं.

🎯 Exam Tip: 'जीवन में सबसे पहले' और 'व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान' इन कारणों पर ज़ोर देना चाहिए.

RBSE Class 12 Psychology Chapter 7 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. समूह के कार्यों की सविस्तार विवेचना कीजिए।
Answer: समूह के कार्य कई आधारों पर समझाए जा सकते हैं:
1. **आवश्यकताओं की सन्तुष्टि:** समूह लोगों की प्राथमिक ज़रूरतें, जैसे रोटी, कपड़ा, मकान और सुरक्षा को पूरा करते हैं. साथ ही, ये लोगों की पहचान और सम्मान जैसी दूसरी ज़रूरतों को भी पूरा करते हैं. एक समूह अपने सदस्यों को एक-दूसरे के साथ रहकर सुरक्षा और समर्थन का एहसास कराता है.
2. **समूह लक्ष्य की प्राप्ति:** समूह का मुख्य उद्देश्य किसी खास लक्ष्य को हासिल करना होता है. जैसे, स्कूल पढ़ाई के लिए, कंपनियां काम के लिए और धार्मिक समूह प्रार्थना के लिए बनते हैं. सभी सदस्य मिलकर इन लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करते हैं.
3. **विचारों का आदान-प्रदान और सुरक्षा:** समूह अपने सदस्यों को नई बातें सीखने और उनके विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है. सदस्य समूह के विचारों को सीखते हैं और उसी के अनुसार व्यवहार करते हैं. इस तरह, समूह अपनी विचारधारा को सुरक्षित रखता है और उसे आगे बढ़ाता है.
In simple words: समूह लोगों की ज़रूरतें पूरी करते हैं, उनके लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करते हैं और उन्हें एक साथ मिलकर जीने का तरीका सिखाते हैं.

🎯 Exam Tip: समूह के सभी प्रमुख कार्यों को स्पष्ट रूप से समझाएं और प्रत्येक कार्य के साथ एक छोटा उदाहरण दें.

 

Question 2. समूह निर्माण के कारकों का उल्लेख कीजिए।
Answer: समूह के बनने में कई बातें असर डालती हैं:
1. **स्थानिक समीपता:** जब लोग एक ही जगह पर रहते हैं, तो वे एक-दूसरे के करीब आते हैं और उनके बीच की दूरी कम हो जाती है. इससे वे एक समूह में शामिल हो जाते हैं. पड़ोस के लोग इसका अच्छा उदाहरण हैं, जो अक्सर अलग-अलग समूह बनाते हैं.
2. **मनोवृत्तियों और व्यवहारों में समानता:** जिन लोगों के विचार और व्यवहार एक जैसे होते हैं, वे एक-दूसरे की ओर ज़्यादा आकर्षित होते हैं और जल्दी समूह बना लेते हैं. ऑफिस में काम करने वाले लोग जिनके विचार मिलते हैं, वे अक्सर दोस्त बन जाते हैं.
3. **कार्यात्मक एकता:** इसका मतलब है कि लोग एक ही काम या उद्देश्य के लिए सहमत होते हैं. जब सदस्यों में एक ही काम को लेकर एकता होती है, तो वे अपनी छोटी-मोटी बातों को भूलकर एक समूह बना लेते हैं.
4. **पारस्परिक क्रिया:** जब दो या ज़्यादा लोग अपने विचार और व्यवहार आपस में बांटते हैं, तो उसे पारस्परिक क्रिया कहते हैं. जो लोग ज़्यादा बातें करते हैं, उनके बीच लगाव भी ज़्यादा होता है, जिससे वे एक-दूसरे को बेहतर समझ पाते हैं.
5. **असुरक्षा तथा चिन्ता का भाव:** जब लोगों को असुरक्षा या चिंता महसूस होती है, तो वे ज़्यादा से ज़्यादा दूसरे लोगों के साथ रहना चाहते हैं ताकि सुरक्षित महसूस कर सकें. यह भावना भी समूह बनाने में मदद करती है.
In simple words: समूह तब बनते हैं जब लोग एक जगह पर होते हैं, उनके विचार मिलते हैं, वे एक ही काम करते हैं, आपस में बातें करते हैं या असुरक्षित महसूस करते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रत्येक कारक को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और संक्षेप में समझाएं कि वह समूह निर्माण में कैसे योगदान देता है.

 

Question 3. प्राथमिक समूहों की आन्तरिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: प्राथमिक समूहों की कुछ अंदरूनी विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. **उद्देश्यों की समानता:** प्राथमिक समूह में हर सदस्य दूसरे के भले को ही अपना लक्ष्य मानता है. सब एक-दूसरे के लिए काम करते हैं और एक का लक्ष्य दूसरे का लक्ष्य बन जाता है. इस तरह, सबमें 'हम' की भावना बहुत मजबूत होती है. एक परिवार में सभी सदस्य एक-दूसरे की भलाई के लिए ही काम करते हैं.
2. **संबंध सम्पूर्ण होते हैं:** प्राथमिक समूहों में संबंध पूरे होते हैं, यानी व्यक्ति के जीवन का कोई एक हिस्सा ही नहीं, बल्कि पूरा व्यक्ति इसमें शामिल होता है. इन संबंधों से जुड़े लोग एक-दूसरे को बहुत लंबे समय से जानते होते हैं और पूरी तरह समझते हैं.
3. **संबंधों का स्वतः विकास:** ये संबंध अपने आप बनते हैं, किसी दबाव से नहीं. प्राथमिक संबंध व्यक्ति की अपनी इच्छा से बनते हैं, कोई उन्हें जबरदस्ती नहीं बनवा सकता.
4. **संबंध वैयक्तिक होते हैं:** इसका मतलब है कि समूह में हर व्यक्ति की रुचि दूसरे व्यक्ति में होती है, न कि उसके किसी पद या चीज़ में. ये संबंध एक से दूसरे को नहीं दिए जा सकते. जैसे एक दोस्त या माता-पिता की जगह कोई दूसरा नहीं ले सकता.
5. **प्राथमिक संबंधों की नियंत्रण शक्ति:** इन संबंधों की मजबूती और गहराई के कारण व्यक्ति अक्सर प्राथमिक समूह में इतना घुल जाता है कि वह समूह के दूसरे सदस्यों को बुरा लगने वाला कोई काम नहीं करता या समूह के नियमों को नहीं तोड़ता. समूह अपने सदस्यों के व्यवहार को चुपचाप नियंत्रित करता है.
In simple words: प्राथमिक समूह के लोगों के लक्ष्य एक जैसे होते हैं, उनके रिश्ते पूरे और गहरे होते हैं, वे अपने आप बनते हैं, व्यक्तिगत होते हैं और एक-दूसरे को नियंत्रित करते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रत्येक विशेषता को स्पष्ट करें और उदाहरण के साथ समझाएं कि यह समूह को कैसे प्रभावित करती है.

 

Question 4. अनौपचारिक समूहों के महत्व की विवेचना कीजिए।
Answer: अनौपचारिक समूहों का महत्व कई बातों से समझा जा सकता है:
1. **घनिष्ठ संबंध और सहयोग:** इन समूहों के सदस्यों के बीच गहरे संबंध और आपसी सहयोग होता है. वे आपस में बात करते हैं, मज़ाक करते हैं, विचार बांटते हैं और एक-दूसरे के प्रति स्नेह और सहानुभूति रखते हैं. इससे व्यक्ति को मानसिक शांति और संतोष मिलता है. दोस्ती के समूह इसका एक अच्छा उदाहरण हैं.
2. **सामाजिक नियमों का पालन:** ये समूह सामाजिक नियमों को बनाए रखने में भी मदद करते हैं. कोई भी व्यक्ति अपने परिवार, दोस्तों या पड़ोसियों की नज़रों में गिरना नहीं चाहता, इसलिए वह ऐसे काम नहीं करता जिन्हें गलत समझा जाता है. इस तरह, ये समूह समाज में अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
3. **व्यक्ति और समाज के बीच कड़ी:** ये समूह व्यक्ति और समाज को जोड़ने का काम करते हैं. समाज का पूरा विकास इन्हीं समूहों पर निर्भर करता है. वे लोगों को एक-दूसरे से जोड़कर रखते हैं.
4. **मनोवैज्ञानिक सुरक्षा:** ये समूह अपने सदस्यों को मानसिक सुरक्षा भी देते हैं. हर सदस्य जानता है कि मुश्किल समय में उसे समूह से मदद मिल सकती है. इससे व्यक्ति को अपनी पहचान और सुरक्षा का एहसास होता है.
In simple words: अनौपचारिक समूह लोगों को मानसिक शांति, सामाजिक नियमों का पालन, समाज से जुड़ाव और सुरक्षा का एहसास देते हैं.

🎯 Exam Tip: अनौपचारिक समूहों के भावनात्मक और सामाजिक नियंत्रण वाले पहलुओं पर विशेष ध्यान दें.

 

Question 5. सामाजिक मानक/प्रतिमान की विशेषताएँ पर प्रकाश डालिए।
Answer: सामाजिक मानक या प्रतिमान की कुछ खास विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. **व्यवहार नियंत्रण:** सामाजिक मानक हमारे व्यवहार को नियंत्रित करने का एक तरीका है, जो अक्सर हमारी अपनी इच्छा से होता है. व्यक्ति खुद अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखता है और सामाजिक मानकों का उल्लंघन करने से बचता है. जैसे, लोग अपनी संस्कृति के अनुसार ही त्योहार मनाते हैं.
2. **स्तरीकरण:** मानकों में अलग-अलग स्तर होते हैं, जैसे रीति-रिवाज, परंपराएं, धर्म, कानून और फैशन. हर समाज में इन सभी के लिए अलग-अलग मानक होते हैं.
3. **रूढ़िवादी प्रकृति:** ज़्यादातर मानक पुराने विचारों वाले होते हैं. कानून और फैशन जैसे मानकों में बदलाव आसान होता है, लेकिन रीति-रिवाज़, परंपराएं और धर्म जैसे मानकों में बदलाव लाना बहुत मुश्किल होता है. कभी-कभी इन बदलावों के लिए समाज सुधारकों को बहुत संघर्ष करना पड़ता है.
4. **लिखित/अलिखित:** कुछ सामाजिक मानक, जैसे परंपराएं या फैशन, लिखे हुए नहीं होते, जबकि कुछ आदर्श नियम, जैसे कानून, लिखित रूप में होते हैं. जैसे, शादी की रस्में अलिखित होती हैं, लेकिन ट्रैफिक नियम लिखे होते हैं.
5. **धीरे-धीरे विकास:** सामाजिक मानक अचानक नहीं बनते, बल्कि समाज में लोगों के आपस में मेलजोल के दौरान धीरे-धीरे विकसित होते हैं. लोग धीरे-धीरे इन नियमों को मानते हैं और जब वे इन्हें अपना कर्तव्य समझने लगते हैं, तभी उनका सही विकास माना जाता है.
In simple words: सामाजिक मानक हमारे व्यवहार को नियंत्रित करते हैं, अलग-अलग स्तरों के होते हैं, अक्सर पुराने विचारों वाले होते हैं, कुछ लिखे होते हैं और कुछ नहीं, और ये समाज में धीरे-धीरे विकसित होते हैं.

🎯 Exam Tip: मानकों की प्रकृति (जैसे रूढ़िवादी, लिखित/अलिखित) और उनके विकास की प्रक्रिया को स्पष्ट करें.

 

Question 6. समूह द्वन्द्व के उत्पत्ति के कारणों की व्याख्या कीजिए।
Answer: समूह में झगड़े या मतभेद कई कारणों से होते हैं:
1. **विभिन्न लक्ष्य:** समूह में कई सदस्य होते हैं, और कभी-कभी कुछ सदस्यों के लक्ष्य दूसरों से अलग होते हैं. ऐसी स्थिति में समूह में मतभेद पैदा हो जाते हैं, जो झगड़े का कारण बनते हैं. जैसे, एक टीम में अगर कुछ खिलाड़ी सिर्फ अपने लिए खेलना चाहें और कुछ टीम के लिए, तो झगड़ा हो सकता है.
2. **विभिन्न कार्य प्रणाली:** जब समूह में सदस्यों की संख्या ज़्यादा होती है, तो काम करने का तरीका भी प्रभावित होता है. अगर समूह में कुछ सदस्यों का काम करने का तरीका दूसरों से अलग हो, तो सदस्यों के बीच झगड़े की स्थिति बन जाती है.
3. **निर्णयों में अन्तर:** कई बार समूह के सदस्य किसी निर्णय को लेकर एकमत नहीं होते हैं. कुछ सदस्य निर्णय को मान लेते हैं, लेकिन कुछ सहमत नहीं होते. इससे समूह में दरार आ जाती है और झगड़ा बढ़ जाता है.
4. **उपसमूहों का निर्माण:** कभी-कभी समूह के अंदर छोटे-छोटे उपसमूह बन जाते हैं. ये उपसमूह अपने खास हितों को पूरा करने के लिए मुख्य समूह से बहस करने लगते हैं, जिससे उनके बीच झगड़ा हो जाता है. जैसे, एक बड़ी कंपनी में अलग-अलग विभागों के बीच लक्ष्य को लेकर टकराव.
5. **प्रतिस्पर्धा:** समूह के सदस्यों के बीच अक्सर प्रतियोगिता होती है. इस प्रतियोगिता के कारण सदस्यों में स्वार्थ की भावना बढ़ जाती है और कुछ सदस्य सिर्फ अपने हितों को पूरा करने में लग जाते हैं. इससे दूसरे सदस्य सहमत नहीं होते और झगड़ा हो जाता है.
6. **संसाधनों का विभाजन:** समूह के सदस्यों के बीच भौतिक और सामाजिक संसाधनों (जैसे पैसे या पद) के बंटवारे को लेकर भी झगड़े हो सकते हैं. अगर संसाधन बराबर नहीं बांटे जाते, तो लोगों में असंतोष बढ़ता है.
7. **उचित बातचीत की कमी:** कई बार समूह के सदस्यों के बीच ठीक से बातचीत नहीं हो पाती, जिससे गलतफहमी पैदा होती है और झगड़े बढ़ जाते हैं.
In simple words: समूह में झगड़े तब होते हैं जब लोगों के लक्ष्य अलग हों, काम करने के तरीके अलग हों, वे निर्णय पर सहमत न हों, छोटे समूह बन जाएं, आपस में प्रतियोगिता करें, संसाधनों का बंटवारा सही न हो या वे ठीक से बात न करें.

🎯 Exam Tip: प्रत्येक कारण को एक स्पष्ट बिंदु के रूप में प्रस्तुत करें और संक्षेप में समझाएं कि यह कैसे समूह द्वन्द्व को जन्म देता है.

Free study material for Psychology

RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Psychology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Psychology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Psychology Class 12 Solved Papers

Using our Psychology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Psychology are as per latest RBSE curriculum.

Are the Psychology RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Psychology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Psychology. You can access RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Psychology RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 7 समूह प्रक्रियाएँ एवं सामाजिक प्रभाव in printable PDF format for offline study on any device.