RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 8 मनोविज्ञान तथा जीवन

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Detailed Chapter 8 मनोविज्ञान तथा जीवन RBSE Solutions for Class 12 Psychology

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Class 12 Psychology Chapter 8 मनोविज्ञान तथा जीवन RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Psychology Chapter 8 अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 12 Psychology Chapter 8 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. हमारे चारों ओर जो कुछ भी है उसे चरितार्थ करने वाला पद है -
(अ) प्रदूषण
(ब) पर्यावरण
(स) शोर
(द) परिवार
Answer: (ब) पर्यावरण
In simple words: हमारे आस-पास की हर चीज़, चाहे वह पेड़-पौधे हों, नदियाँ हों या हवा, यह सब 'पर्यावरण' कहलाती है। यह वह है जो हमें घेरे हुए है।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण की परिभाषा को ठीक से समझें, जिसमें प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों तत्व शामिल हैं, क्योंकि यह अवधारणा का आधार है।

 

Question 2. पर्यावरण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं, स्वाभाविक तथा -
(अ) प्राकृतिक

🎯 Exam Tip: पर्यावरण के मुख्य प्रकारों को पहचानना महत्वपूर्ण है, जैसे प्राकृतिक और मानव निर्मित, जो इसके विभिन्न घटकों को समझने में मदद करता है।

 

Question 3. यह परिप्रेक्ष्य पर्यावरण को मूल्यवान वस्तु के रूप में संदर्भित करता है -
(अ) अल्पतमवादी
(ब) नैमित्तिक
(स) भौतिकवाद
(द) आध्यात्मिक
Answer: (द) आध्यात्मिक
In simple words: आध्यात्मिक नज़रिया पर्यावरण को सिर्फ चीज़ नहीं, बल्कि एक पवित्र और मूल्यवान चीज़ मानता है. यह सोचता है कि हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए क्योंकि यह हमें जीवन देती है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरण के प्रति विभिन्न दृष्टिकोणों को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण जो प्रकृति को एक पवित्र और अमूल्य संसाधन मानता है।

 

Question 4. कोई भी ध्वनि जो खीझ या चिड़चिड़ापन उत्पन्न करे और अप्रिय हो, कहलाती है -
(अ) शोर
(ब) चीख
(स) प्रदूषण
(द) आवाज़
Answer: (अ) शोर
In simple words: जब कोई आवाज़ हमें पसंद नहीं आती या उससे परेशानी होती है, तो उसे शोर कहते हैं. यह हमारे दिमाग पर बुरा असर डालता है.

🎯 Exam Tip: शोर की परिभाषा को याद रखें कि यह सिर्फ तेज़ आवाज़ नहीं, बल्कि कोई भी अप्रिय या परेशान करने वाली ध्वनि है।

 

Question 5. वे व्यवहार जिनका उद्देश्य होता है, पर्यावरण का संरक्षण तथा उन्नत स्वास्थ्य कहलाते हैं -
(अ) मित्रता
(ब) सजगता
(स) पर्यावरण प्रेम
(द) पर्यावरण मैत्री
Answer: (द) पर्यावरण मैत्री
In simple words: जब हम पर्यावरण को बचाने और अपना स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए अच्छे काम करते हैं, तो उसे पर्यावरण मैत्री कहते हैं. इसका मतलब है प्रकृति के साथ दोस्ती करना.

🎯 Exam Tip: 'पर्यावरण मैत्री' शब्द का अर्थ केवल पर्यावरण की सुरक्षा नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवन शैली के लिए आवश्यक व्यवहारों को भी दर्शाता है।

 

Question 6. ऐसा शारीरिक या शाब्दिक व्यवहार जिसका उद्देश्य दूसरों को चोट पहुँचाना होता है -
(अ) अपराध
(ब) घृणा
(स) आक्रामकता
(द) झगड़ा
Answer: (स) आक्रामकता
In simple words: जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे को चोट पहुँचाने की कोशिश करता है, चाहे वो बोलकर हो या शरीर से, तो उसे आक्रामकता कहते हैं. यह व्यवहार गुस्से से जुड़ा होता है.

🎯 Exam Tip: आक्रामकता की परिभाषा को ध्यान से समझें कि इसमें शारीरिक और मौखिक दोनों तरह के व्यवहार शामिल हैं जिनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना है।

 

Question 1. पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?
Answer: पर्यावरण शब्द 'परि' और 'आवरण' दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ क्रमशः 'चारों ओर' और 'ढका हुआ' है. हमारे चारों ओर का वातावरण और परिवेश, जिसमें सभी जीव और प्राणी रहते हैं, उसे पर्यावरण कहते हैं. पर्यावरण का अर्थ बहुत व्यापक है, जिसमें सभी भौतिक चीजें (जैसे हवा, जल, मिट्टी, सड़क, पुल) और जैविक-सामाजिक कारक (जैसे परिवार, समुदाय, व्यवसाय और उद्योग) शामिल हैं. यह व्यवस्था मानव को किसी न किसी तरह से प्रभावित करती है और हमारे जीवन का आधार बनाती है.
In simple words: पर्यावरण वह सब कुछ है जो हमें घेरे हुए है, जिसमें प्राकृतिक चीजें और हमारे समाज दोनों शामिल हैं. यह हमें हर तरह से प्रभावित करता है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरण की परिभाषा देते समय, 'परि' और 'आवरण' शब्दों के अर्थ के साथ-साथ भौतिक और जैविक-सामाजिक दोनों घटकों को शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 2. जनसंचार किसे कहते हैं?
Answer: जनसंचार उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें लोग भाषा, संकेत या चिह्नों का उपयोग करके अपने विचारों और सोच को दूसरों तक पहुँचाते हैं. इसमें एक जीवित प्राणी दूसरे जीवित प्राणी के साथ सामान्य समझ बनाने की कोशिश करता है. जनसंचार प्रक्रिया में दो या दो से अधिक व्यक्ति सूचना और अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं. इस प्रक्रिया में बहुत सारे लोग शामिल होते हैं, और इसके लिए जन-संपर्क के माध्यमों जैसे रेडियो, सिनेमा, टेलीविजन, और दूरदर्शन का उपयोग होता है. आजकल मोबाइल और इंटरनेट जैसे नए माध्यम भी बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं, जिससे सूचनाएँ तेज़ी से फैलती हैं.
In simple words: जनसंचार वह तरीका है जिससे हम अपने विचार और जानकारी बड़े समूह तक पहुँचाते हैं, जैसे रेडियो या इंटरनेट का इस्तेमाल करके.

🎯 Exam Tip: जनसंचार की परिभाषा में, सूचना के आदान-प्रदान और सामूहिक माध्यमों के उपयोग पर जोर दें, साथ ही आधुनिक साधनों का भी उल्लेख करें।

 

Question 3. विभेदीकरण किसे कहते हैं?
Answer: विभेदीकरण का मतलब अलग-अलग घटनाओं में अंतर दिखाना है. जब एक व्यक्ति और दूसरे व्यक्ति के बीच उनकी ऊँचाई, रंग, उम्र जैसे गुणों के आधार पर फर्क किया जाता है, तो उसे व्यक्तिगत विभेदीकरण कहते हैं. वहीं, जब व्यवसाय, रुचि या सामाजिक स्थिति के आधार पर फर्क किया जाता है, तो उसे सामाजिक विभेदीकरण कहते हैं. इसे और स्पष्ट करते हुए, विभेदीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी संस्था के सामाजिक कार्य विभिन्न हिस्सों में बँट जाते हैं. यह समाज में लगातार बढ़ते विशेषीकरण को दिखाता है. अक्सर, जो लोग विभेदीकरण के शिकार होते हैं, वे मानसिक तनाव में रहते हैं क्योंकि उन्हें असमानता का सामना करना पड़ता है.
In simple words: विभेदीकरण का मतलब है लोगों या चीजों में अंतर करना. यह व्यक्तिगत गुणों या सामाजिक भूमिकाओं के आधार पर हो सकता है, जिससे समाज में असमानता पैदा होती है.

🎯 Exam Tip: विभेदीकरण को परिभाषित करते समय, व्यक्तिगत और सामाजिक विभेदीकरण के बीच का अंतर स्पष्ट करें और इसके नकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करें।

 

Question 4. आक्रामकता के स्वरूप को समझाइए।
Answer: आक्रामकता एक आम और गंभीर सामाजिक समस्या है जो मानव जीवन पर बहुत बुरा असर डालती है. मनोविज्ञान में आक्रामकता को ऐसे व्यवहार के रूप में बताया गया है जिसका नतीजा दूसरे व्यक्ति के लिए नकारात्मक (नुकसानदायक या दुखदायी) होता है. आक्रामकता सिर्फ इंसानों में ही नहीं, बल्कि जानवरों में भी पाई जाती है. यह व्यवहार अक्सर गुस्से या निराशा की भावना से जुड़ा होता है और इसका उद्देश्य दूसरों को शारीरिक या भावनात्मक रूप से चोट पहुँचाना हो सकता है.
In simple words: आक्रामकता वह व्यवहार है जिसमें कोई व्यक्ति दूसरे को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करता है. यह इंसानों और जानवरों दोनों में दिखती है और समाज के लिए एक बड़ी समस्या है.

🎯 Exam Tip: आक्रामकता की सार्वभौमिक प्रकृति और उसके नकारात्मक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करें, साथ ही यह भी बताएं कि मनोविज्ञान इसे एक हानिकारक व्यवहार के रूप में कैसे परिभाषित करता है।

 

Question 5. प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं?
Answer: प्रदूषण के मुख्य कारण ये हैं:
1. वनों की कटाई से वायुमंडल में गैसों का संतुलन बिगड़ गया है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है. पेड़ों के कटने से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाती है.
2. बड़े उद्योगों से निकलने वाली कई हानिकारक गैसों से भी प्रदूषण की समस्या बढ़ती है. ये गैसें हवा में मिलकर उसे प्रदूषित करती हैं.
3. फसलों पर कीट और खर-पतवारों को नष्ट करने के लिए जो रसायन छिड़के जाते हैं, उनसे भी कई ज़हरीले पदार्थ हवा में फैल जाते हैं, जिससे प्रदूषण होता है. ये रसायन मिट्टी और पानी को भी दूषित करते हैं.
4. मृत पेड़-पौधे, जीव-जंतु, जानवर या मनुष्य आदि वायुमंडल में खुले में छोड़ दिए जाते हैं, जिससे कई तरह के बीमारियों के कीटाणु, जीवाणु और विषाणु पैदा होते हैं और प्रदूषण फैलाते हैं.
In simple words: प्रदूषण के मुख्य कारण पेड़ों का कटना, उद्योगों से निकलने वाली गैसें, फसलों पर डाले जाने वाले ज़हरीले रसायन और मरे हुए जीवों के सड़ने से फैलने वाले कीटाणु हैं. ये सब मिलकर हमारे पर्यावरण को दूषित करते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रदूषण के कारणों को विस्तार से समझाते समय, प्रत्येक कारण के पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे वनों की कटाई से गैसों का असंतुलन।

 

Question 6. भीड़ किसे कहते हैं ?
Answer: सामान्य भाषा में भीड़ शब्द का उपयोग लोगों के एक जगह इकट्ठा होने के लिए किया जाता है. भीड़ लोगों का एक अस्थायी और बिना संगठन वाला समूह है, जो किसी एक खास चीज़ पर ध्यान देने के लिए एक साथ इकट्ठा हो जाता है. भीड़ में एक जैसे भाव और उत्तेजनाएँ होती हैं, और लोगों की अपनी सोच सामूहिक सोच में बदल जाती है. भीड़ के सदस्यों में एक जैसी भावनाएँ भी पाई जाती हैं, जिससे वे एकजुट महसूस करते हैं.
भीड़ के सदस्यों का आपस में गहरा शारीरिक संपर्क होता है. जब आकर्षण का सामान्य केंद्र खत्म हो जाता है, तो लोगों का यह जमावड़ा भी धीरे-धीरे अपने आप खत्म हो जाता है. समाज मनोवैज्ञानिकों ने भीड़ के बनने के लिए पशु जैसी प्रवृत्ति और दूसरों की नकल करने की भावनाओं को ज़िम्मेदार माना है. भीड़ सक्रिय (जैसे दंगा) या बिखरी हुई (जैसे रैली) हो सकती है, या निष्क्रिय और किसी लक्ष्य पर केंद्रित (जैसे श्रोतागण) भी हो सकती है.
In simple words: भीड़ एक साथ जमा हुए लोगों का एक अस्थायी और बिना संगठन वाला समूह है, जो किसी एक चीज़ पर ध्यान केंद्रित करते हैं और एक जैसे भावनाओं को महसूस करते हैं.

🎯 Exam Tip: भीड़ की परिभाषा में उसके अस्थायी, असंगठित स्वभाव और एक सामान्य केंद्र-बिंदु के आसपास एकत्र होने की विशेषता पर जोर दें।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 8 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मानव-पर्यावरण सम्बन्ध को समझाइए। इसे किस प्रकार स्वस्थ बनाया जा सकता है?
Answer: मानव व्यवहार और पर्यावरण के बीच का संबंध हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मनोविज्ञान की एक शाखा, जिसे पर्यावरणीय मनोविज्ञान कहते हैं, मानव व्यवहार पर वातावरण के प्रभावों का अध्ययन करती है. इन सबका मिला-जुला रूप ही मानव निर्मित पर्यावरण है जिसे समग्र रूप से सांस्कृतिक पर्यावरण कहा जाता है. मानव विकसित समाज जीव-जन्तु जल स्रोत पेड़-पौधे मौसम एवं जलवायु जल स्रोत अविकसित समाज

चित्र : मानव व्यवहार के प्रभावी कारक

मानव-पर्यावरण संबंधों को निम्न आधारों पर स्वस्थ बनाया जा सकता है –
1. मानव और पर्यावरण के संबंधों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए दोनों के बीच तालमेल होना बहुत ज़रूरी है. यह तालमेल पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद करता है.
2. मानव को पर्यावरण के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए ज़रूरी है कि वह प्राकृतिक संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करे. हमें संसाधनों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए.
3. अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, जिससे पूरा वातावरण स्वस्थ रहे. पेड़ हवा को साफ करते हैं और पर्यावरण को हरा-भरा रखते हैं.
4. मानव के लिए समय-समय पर पर्यावरण पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे उन्हें इसके बारे में जानकारी मिले और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़े. ऐसे कार्यक्रमों से लोग पर्यावरण के महत्व को समझेंगे.


In simple words: मानव और पर्यावरण का रिश्ता बहुत अहम है. इसे अच्छा बनाने के लिए हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना होगा, संसाधनों का सही इस्तेमाल करना होगा, ज़्यादा पेड़ लगाने होंगे और लोगों को पर्यावरण के बारे में जागरूक करना होगा.

🎯 Exam Tip: मानव-पर्यावरण संबंध की व्याख्या करते समय, संतुलन, विवेकपूर्ण उपयोग, वृक्षारोपण और जागरूकता जैसे प्रमुख बिंदुओं पर जोर दें, और आरेख को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 2. जनसंचार का मानव व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जनसंचार का मानव व्यवहार पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है –
1. सामान्य बोध: जनसंचार मानव व्यवहार में एक जीवित प्राणी को दूसरे जीवित प्राणी के साथ सामान्य समझ स्थापित करने में मदद करता है. इससे लोग एक-दूसरे के विचारों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं.
2. विचारों का विनिमय: जनसंचार एक विनिमय प्रक्रिया है, जहाँ लोग अपने विचारों, सूचनाओं और अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं. यह व्यक्ति को दूसरों के व्यवहार को समझने में सहायता करता है. इस प्रक्रिया से समाज में ज्ञान का प्रवाह बढ़ता है.
3. सृजनात्मकता में कमी: जनसंचार के साधनों, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अत्यधिक उपयोग से लोगों और बच्चों की रचनात्मकता कम हो जाती है. वे खुद से नए काम करने में रुचि नहीं लेते हैं, जिससे उनका सही विकास नहीं हो पाता.
4. ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता: इन साधनों के कारण व्यक्ति अपना ध्यान किसी भी काम पर केंद्रित नहीं कर पाते हैं. वे आसानी से विचलित हो जाते हैं और उनकी एकाग्रता शक्ति कम हो जाती है.
5. जनसंचार साधनों का व्यक्तियों के स्वभाव पर अनुकूल व्यवहार पाया जाता है, वहीं लोगों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव भी दृष्टिगोचर होता है. बच्चों के व्यवहार पर सर्वाधिक रूप से इसका प्रभाव पड़ता है, वे ज्यादातर अपना समय टी. वी. आदि कार्यक्रमों को देखने में ही व्यतीत कर देते हैं.
In simple words: जनसंचार से लोग एक-दूसरे को समझते हैं और अपने विचार बाँटते हैं, लेकिन ज़्यादा इस्तेमाल से लोगों की रचनात्मकता और ध्यान कम हो सकता है, खासकर बच्चों में.

🎯 Exam Tip: जनसंचार के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों को विस्तार से बताएं, जिसमें सामान्य बोध, विचारों का विनिमय, सृजनात्मकता में कमी और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता जैसे बिंदु शामिल हों।

 

Question 3. प्राकृतिक आपदाएँ किस प्रकार से जीवन को प्रभावित करती हैं?
Answer: प्राकृतिक आपदाएँ, जैसे आग, भूकंप, बाढ़, सूखा और चक्रवात या तूफान, जन-जीवन को कई तरह से बुरी तरह प्रभावित करती हैं –
1. मूलभूत आवश्यकताओं की कमी: प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को रोटी, कपड़ा, मकान और चिकित्सा सहायता की ज़रूरत होती है. इसके साथ-साथ उन्हें भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहायता भी चाहिए होती है. इन आवश्यकताओं को पूरा करने की ज़िम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की होती है. जब कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो व्यक्ति का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और वह अपनी बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर पाता. ऐसी आपदाएँ जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती हैं.
2. भौतिक हानि/प्रभाव: बारिश के मौसम में जब बाढ़ आती है, तो फसलें नष्ट हो जाती हैं. बाढ़ के साथ आने वाली मिट्टी खड़ी फसलों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है. पानी के दबाव से बाँध टूट जाते हैं और भू-स्खलन होता है. इससे संपत्ति और कृषि को भारी नुकसान होता है.
3. बीमारियों का संचार: प्राकृतिक आपदाओं के परिणामस्वरूप, विषैले पदार्थों के सड़ने से लोगों में महामारी, वायरल संक्रमण, पेचिश और मलेरिया जैसी कई बीमारियाँ बढ़ जाती हैं. स्वच्छता की कमी और दूषित पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
4. अन्य प्रभाव: प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोग बहुत परेशान हो जाते हैं. ऐसे चिंताग्रस्त व्यक्तियों में कभी-कभी सामान्यीकृत चिंता विकार विकसित हो जाता है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है.
In simple words: प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़ या भूकंप, लोगों की बुनियादी ज़रूरतें छीन लेती हैं, खेतों को बर्बाद करती हैं, बीमारियाँ फैलाती हैं और मानसिक तनाव बढ़ाती हैं.

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को समझाते समय, न केवल भौतिक नुकसान पर, बल्कि मानवीय आवश्यकताओं, स्वास्थ्य जोखिमों और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर भी ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 4. गरीबी तथा भेदभाव को कैसे कम किया जा सकता है?
Answer: गरीबी और भेदभाव को कम करने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं –
1. सबसे पहले तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाने के तरीकों को अपनाना चाहिए, क्योंकि अधिक जनसंख्या संसाधनों पर दबाव डालती है.
2. आर्थिक विकास की गति को तेज़ करना चाहिए, जिससे लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ें और आय में वृद्धि हो.
3. योजनाओं की कमियों को दूर करना चाहिए और देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए प्रयास करने चाहिए. सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास ज़रूरी है.
4. देश के उपलब्ध प्राकृतिक साधनों का पूरा उपयोग करना चाहिए, जिससे अधिकतम लाभ मिल सके.
5. सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त करना चाहिए, जैसे दहेज प्रथा और बाल विवाह, जो भेदभाव को बढ़ावा देती हैं.
6. उत्पादन के साधनों और लाभों का समाज के सभी लोगों में बराबर वितरण करना चाहिए. धन का केंद्रीकरण नहीं होना चाहिए.
7. औद्योगिक और सामान्य शिक्षा का प्रसार करना चाहिए, जिससे एक ओर रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे तो दूसरी ओर अज्ञानता, रूढ़ियों और सामाजिक कुरीतियों से छुटकारा मिलेगा. शिक्षा लोगों को सशक्त करती है.
8. भेदभाव को समाप्त करने के लिए अंतरजातीय विवाहों को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे सामाजिक बंधनों को तोड़ने और एकता को बढ़ावा देने में मदद मिलती है.
9. भेदभाव को समाप्त करने के लिए यह ज़रूरी है कि क्षेत्रीय और प्रांतीय संगठनों पर रोक लगा दी जाए, क्योंकि ये संगठन ही भेदभाव की भावना को पैदा करने और उभारने के लिए ज़िम्मेदार हैं. ऐसे संगठन समाज को बाँटते हैं.
10. समाज में विभिन्न लोगों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक समानता लाना आवश्यक है. सभी को समान अवसर मिलने चाहिए.
11. कृषि के पारंपरिक तरीकों की जगह नए तरीकों, उन्नत बीज, खाद और नई सिंचाई के साधनों का उपयोग करना चाहिए, जिससे कृषि उत्पादन बढ़े और किसानों की आय में सुधार हो.
12. बचत की आदत को बढ़ावा देना चाहिए, इससे पूँजी की वृद्धि होगी और पूँजी को उत्पादन कार्यों में लगाया जा सकेगा, जिससे व्यक्ति और देश की आय बढ़ेगी. यह आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है.
In simple words: गरीबी और भेदभाव को कम करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण, आर्थिक विकास, शिक्षा का प्रसार, सामाजिक कुप्रथाओं का अंत और संसाधनों का समान वितरण जैसे कई कदम उठाने होंगे.

🎯 Exam Tip: गरीबी और भेदभाव को कम करने के उपायों को समझाते समय, जनसंख्या नियंत्रण, आर्थिक विकास, शिक्षा और सामाजिक समानता जैसे व्यापक दृष्टिकोणों को शामिल करें।

 

Question 5. पर्यावरण मैत्री व्यवहार उन्नयन के कुछ प्रमुख बिन्दु बताइए।
Answer: पर्यावरण-मैत्रीपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए कई ऐसे उपाय या बिंदु हैं जिन्हें आम लोग आसानी से अपनाकर पर्यावरण संरक्षण, सुधार और पर्यावरण-मैत्रीपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं –
1. पर्यावरण-मैत्रीपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए यह ज़रूरी है कि आम जनता में जागरूकता पैदा की जाए, जो पर्यावरण शिक्षा के बिना संभव नहीं है. लोगों को पर्यावरण के महत्व के बारे में शिक्षित करना चाहिए.
2. कल-कारखानों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि उनके प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य और स्थानीय पर्यावरण पर सीधा असर न पड़े. औद्योगिक कचरे का उचित निपटान ज़रूरी है.
3. कठोर कानूनों की मदद से शोर की तीव्रता, स्थान और समय सभी पर नियंत्रण रखा जा सकता है. शोर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम बनाना चाहिए.
4. वृक्षारोपण करना और पेड़ों की देखभाल करना चाहिए. पेड़ हवा को साफ करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और पर्यावरण को हरा-भरा रखते हैं.
5. मोटर वाहनों से ज़्यादा आवाज़ वाले हॉर्न बजाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, क्योंकि यह शोर प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत है.
6. ट्रैफिक जाम के समय वाहनों से ज़हरीली गैसें निकलती रहती हैं. इसलिए, वाहनों के हल्के-भारी और ओवरलोडिंग पर नियंत्रण होना चाहिए. इससे वायु प्रदूषण कम होगा.
7. कोई भी नया उद्योग लगाने के साथ ही उपचार संयंत्र (Treatment Plants) भी लगाए जाने चाहिए, जिससे वायु और जल में अवशिष्टों की इतनी मात्रा ही जा सके, जो हानिकारक न हो. यह पर्यावरण को बचाने के लिए ज़रूरी है.
In simple words: पर्यावरण को बचाने के लिए हमें लोगों को जागरूक करना होगा, कारखानों को दूर लगाना होगा, शोर कम करना होगा, पेड़ लगाने होंगे, वाहनों के प्रदूषण को नियंत्रित करना होगा और उद्योगों में प्रदूषण रोकने वाले उपकरण लगाने होंगे.

🎯 Exam Tip: पर्यावरण मैत्री व्यवहार उन्नयन के उपायों को सूचीबद्ध करते समय, जागरूकता, प्रदूषण नियंत्रण (शोर, वायु), वृक्षारोपण, और औद्योगिक नीतियों जैसे विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दें।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 8 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Psychology Chapter 8 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. पर्यावरण का दोहन कौन कर रहा है?
(अ) मानव
(ब) जानवर
(स) ईश्वर
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) मानव
In simple words: पर्यावरण का सबसे ज़्यादा नुकसान इंसान कर रहे हैं. उनकी गतिविधियों से प्रकृति को हानि पहुँच रही है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरण दोहन के पीछे मुख्य कारण मानव गतिविधियाँ हैं, इस तथ्य को पहचानें और पर्यावरणीय समस्याओं पर इसके प्रभाव को समझें।

 

Question 2. पर्यावरणीय मनोविज्ञान का जन्म कब हुआ?
(अ) 1955
(ब) 1960
(स) 1973
(द) 1970
Answer: (ब) 1960
In simple words: पर्यावरणीय मनोविज्ञान की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी. यह लोगों और उनके वातावरण के बीच के संबंध को समझने का विज्ञान है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरणीय मनोविज्ञान के जन्म का वर्ष याद रखें, क्योंकि यह इस क्षेत्र के इतिहास को समझने में मदद करता है।

 

Question 3. वायु प्रदूषण से सबसे पहले प्रभावित होता है -
(अ) पेट
(ब) सिर
(स) फेफड़ा
(द) पर्यावरणीय मनोविज्ञान
Answer: (स) फेफड़ा
In simple words: जब हवा गंदी होती है, तो सबसे पहले हमारे फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है. गंदी हवा में साँस लेने से फेफड़े बीमार हो सकते हैं.

🎯 Exam Tip: वायु प्रदूषण के तत्काल शारीरिक प्रभावों को पहचानें, विशेष रूप से श्वसन प्रणाली पर, क्योंकि यह मानव स्वास्थ्य के लिए इसके खतरे को उजागर करता है।

 

Question 4. प्राणी के व्यवहार पर उसके वातावरण के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है -
(अ) सामान्य मनोविज्ञान
(ब) सामाजिक मनोविज्ञान
(स) नैदानिक मनोविज्ञान
(द) पर्यावरणीय मनोविज्ञान
Answer: (द) पर्यावरणीय मनोविज्ञान
In simple words: पर्यावरणीय मनोविज्ञान वह पढ़ाई है जो देखती है कि हमारे आस-पास का माहौल हमारे व्यवहार को कैसे बदलता है. यह माहौल के असर को समझने में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरणीय मनोविज्ञान की परिभाषा को ध्यान से समझें कि यह वातावरण और मानव व्यवहार के बीच के संबंधों का अध्ययन है, न कि केवल सामान्य मनोविज्ञान।

 

Question 5. जल प्रदूषण से होने वाला रोग है -
(अ) पीलिया
(ब) एड्स
(स) कैंसर
(द) डायबिटीज
Answer: (अ) पीलिया
In simple words: गंदा पानी पीने से पीलिया जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं. इसलिए, साफ पानी पीना बहुत ज़रूरी है.

🎯 Exam Tip: जल प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के उदाहरण याद रखें, जैसे पीलिया, जो दूषित पानी पीने से होता है और एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।

 

Question 6. ध्वनि प्रदूषण के फलस्वरूप स्वरूप उत्पन्न हो सकता है -
(अ) बेरोजगारी
(ब) बहरापन व रक्तचाप में वृद्धि
(स) अशिक्षा
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) बहरापन व रक्तचाप में वृद्धि
In simple words: जब बहुत ज़्यादा शोर होता है, तो इससे लोगों को सुनने में परेशानी हो सकती है, यानी वे बहरे हो सकते हैं. साथ ही, इससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) भी बढ़ सकता है.

🎯 Exam Tip: ध्वनि प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को समझें, विशेष रूप से सुनने की क्षमता और हृदय स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक असर को पहचानें।

 

Question 7. निम्नलिखित में से कौन पर्यावरण प्रदूषण से सम्बन्धित है?
(अ) वृक्षारोपण
(ब) जैविक खाद
(स) औद्योगिक अपशिष्ट
(द) धुआँरहित वाहन
Answer: (स) औद्योगिक अपशिष्ट
In simple words: औद्योगिक कचरा यानी फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पदार्थ पर्यावरण को प्रदूषित करता है. यह हवा, पानी और मिट्टी तीनों को खराब करता है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरण प्रदूषण के स्रोतों को पहचानें, विशेष रूप से औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले कचरे को, जो एक प्रमुख प्रदूषक है।

 

Question 9. पर्यावरणीय मनोविज्ञान किसकी शाखा है?
(अ) व्यावहारिक मनोविज्ञान
(ब) नैदानिक मनोविज्ञान
(स) दोनों
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) व्यावहारिक मनोविज्ञान
In simple words: पर्यावरणीय मनोविज्ञान, व्यावहारिक मनोविज्ञान का एक हिस्सा है. यह देखता है कि हमारे आस-पास का माहौल हमारे सोचने और व्यवहार करने के तरीके को कैसे प्रभावित करता है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरणीय मनोविज्ञान को व्यावहारिक मनोविज्ञान की एक शाखा के रूप में पहचानें, जो वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए सिद्धांतों को लागू करता है।

 

Question 10. मानव पर्यावरण सम्बन्ध को लेकर कितने दृष्टिकोण प्रचलित हैं?
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) छः
Answer: (ब) तीन
In simple words: मानव और पर्यावरण के बीच के संबंध को समझने के लिए तीन मुख्य विचार या दृष्टिकोण हैं. ये विचार हमें बताते हैं कि इंसान प्रकृति के साथ कैसे जुड़े हुए हैं.

🎯 Exam Tip: मानव-पर्यावरण संबंधों को समझने वाले विभिन्न दृष्टिकोणों की संख्या याद रखें, क्योंकि यह इस क्षेत्र में सैद्धांतिक विविधता को दर्शाता है।

 

Question 11. APS का पूर्ण नाम क्या है?
(अ) Air Pollution Solution
(ब) Air Pollute Syndrome
(स) Air Pollution Syndrome
(द) इनमें से कोई भी नहीं
Answer: (स) Air Pollution Syndrome
In simple words: APS का पूरा नाम Air Pollution Syndrome है. यह एक ऐसी स्थिति है जो वायु प्रदूषण के कारण होती है.

🎯 Exam Tip: APS जैसे संक्षिप्त नामों का पूरा रूप याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे पर्यावरण से संबंधित हों।

 

Question 12. सांस्कृतिक आत्मसातीकरण के द्वारा क्या कम किया जा सकता है?
(अ) स्तरीकरण
Answer: (अ) स्तरीकरण
In simple words: सांस्कृतिक आत्मसातीकरण से समाज में स्तरीकरण (भेदभाव) को कम किया जा सकता है. जब अलग-अलग संस्कृतियों के लोग एक-दूसरे को अपनाते हैं, तो उनके बीच का फर्क कम हो जाता है.

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक आत्मसातीकरण के सामाजिक प्रभावों को पहचानें, विशेष रूप से स्तरीकरण को कम करने की इसकी क्षमता, जो सामाजिक समानता को बढ़ावा देती है।

 

Question 13. आक्रामकता क्या है ?
(अ) व्यवहार
(ब) आदत
(स) जरूरत
(द) प्रवृत्ति
Answer: (अ) व्यवहार
In simple words: आक्रामकता एक प्रकार का व्यवहार है. इसमें किसी दूसरे को चोट पहुँचाने की कोशिश की जाती है.

🎯 Exam Tip: आक्रामकता की मूल प्रकृति को व्यवहार के रूप में समझें, जिसमें जानबूझकर नुकसान पहुँचाने का इरादा शामिल होता है।

 

Question 14. बैण्डुरा कौन थे?
(अ) समाजशास्त्री
(ब) मानवशास्त्री
(स) मनोवैज्ञानिक
(द) राजनीतिज्ञ
Answer: (स) मनोवैज्ञानिक
In simple words: बैण्डुरा एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे. उन्होंने सामाजिक सीखने के सिद्धांत पर काम किया था.

🎯 Exam Tip: प्रमुख व्यक्तित्वों और उनके संबंधित क्षेत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे बैण्डुरा एक मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने सामाजिक सीखने के सिद्धांत में योगदान दिया।

 

Question 15. आक्रामकता का क्या कारण है?
(अ) कुंठा
(ब) डर
(स) दोनों
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) कुंठा
In simple words: कुंठा (निराशा) आक्रामकता का एक मुख्य कारण है. जब हम अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाते, तो हमें गुस्सा आता है और यह आक्रामकता में बदल सकता है.

🎯 Exam Tip: आक्रामकता के प्रमुख कारणों में से एक के रूप में कुंठा को समझें, क्योंकि यह अक्सर निराशा और लक्ष्य प्राप्ति में बाधाओं से उत्पन्न होती है।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 8 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पर्यावरणीय मनोविज्ञान का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: सामान्य शब्दों में, पर्यावरणीय मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो व्यक्ति पर पर्यावरण के पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करता है. यह मानव व्यवहार पर वातावरण के प्रभावों का अध्ययन करती है. इसका मतलब है कि यह देखता है कि हमारा आस-पास का माहौल, चाहे वह प्राकृतिक हो या मानव निर्मित, हमारे सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को कैसे प्रभावित करता है. इस क्षेत्र में, मनोवैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि लोग अपने पर्यावरण के साथ कैसे बातचीत करते हैं और यह बातचीत उनके जीवन को कैसे आकार देती है.
In simple words: पर्यावरणीय मनोविज्ञान वह पढ़ाई है जो यह समझने में मदद करती है कि हमारे आस-पास का माहौल हमारे व्यवहार और सोच को कैसे प्रभावित करता है.

🎯 Exam Tip: पर्यावरणीय मनोविज्ञान की परिभाषा देते समय, मानव व्यवहार पर पर्यावरण के प्रभावों पर जोर दें और यह बताएं कि यह एक विशिष्ट वैज्ञानिक क्षेत्र है।

 

Question 2. प्राकृतिक एवं निर्मित पर्यावरण को समझाइए।
Answer:
1. प्राकृतिक पर्यावरण: प्राकृतिक पर्यावरण में ज़मीन, पहाड़, नदियाँ, समुद्र, जल और वायु जैसी भौगोलिक चीज़ों का अध्ययन किया जाता है. यह भी देखा जाता है कि ये चीज़ें मानव व्यवहार को कैसे प्रभावित करती हैं. पृथ्वी पर पानी के दो मुख्य स्रोत हैं -
• भूमिक स्रोत (भूमिगत जल)
• पृष्ठ स्रोत (नदियों, झीलों, तालाबों का जल)
इन स्रोतों से प्राप्त जल से मानव अपनी ज़रूरतें पूरी करता है. सभी जल शुद्ध नहीं होते; कुछ जल दूषित होते हैं. दूषित जल के उपयोग से बीमारियाँ फैलती हैं. जल प्रदूषण की तरह वायु भी प्रदूषित होती है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.
2. निर्मित पर्यावरण: जो कुछ भी मानव द्वारा बनाया गया है, वह निर्मित पर्यावरण कहलाता है. जैसे-नगर, मकान, पुल, सड़कें, बाँध और वाहन आदि. जितना बड़ा शहर होता है, वहाँ उतना ही ज़्यादा निर्मित पर्यावरण होता है. आजकल लोग इन साधनों की ओर ज़्यादा आकर्षित हो रहे हैं. इन सभी साधनों का मानव के व्यवहार पर प्रभाव देखा जाता है. उदाहरण के लिए, शहरीकरण से लोगों के जीवन शैली में बदलाव आता है.
In simple words: प्राकृतिक पर्यावरण में प्रकृति की बनाई चीजें आती हैं, जैसे पहाड़ और नदियाँ. निर्मित पर्यावरण में इंसान की बनाई चीजें आती हैं, जैसे शहर और सड़कें. दोनों ही इंसान के व्यवहार को प्रभावित करते हैं.

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक और निर्मित पर्यावरण के बीच का अंतर स्पष्ट करें, प्रत्येक के उदाहरण दें, और समझाएं कि दोनों मानव व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं।

 

Question 3. भीड़ को परिभाषित कीजिए।
Answer: समूहों का एक वर्गीकरण उनके स्थायित्व के आधार पर भी किया जाता है. भीड़ एक अस्थायी और असंगठित समूह है. आम भाषा में भीड़ शब्द का उपयोग लोगों के एक जगह इकट्ठा होने के लिए करते हैं. टर्नर के अनुसार, "भीड़ लोगों का एक ऐसा समूह है जो उत्तेजना, घनिष्ठता, नकल, संकेत और गुमनामी (Anonymity) जैसी प्रक्रियाओं से प्रभावित रहता है."
इसलिए, भीड़ लोगों का एक अस्थायी और असंगठित समूह है, जो किसी एक खास बिंदु पर ध्यान देने के लिए इकट्ठा हो जाता है. भीड़ में एक जैसे भाव और उत्तेजनाएँ पाई जाती हैं, और व्यक्तिगत चेतना सामूहिक चेतना में बदल जाती है. भीड़ के सदस्यों में समान भावनाएँ भी पाई जाती हैं, जिससे वे एक साथ काम करने को प्रेरित होते हैं.
In simple words: भीड़ लोगों का एक अस्थायी और बिना संगठन वाला समूह है जो किसी एक चीज़ पर ध्यान देने के लिए एक साथ जमा हो जाते हैं और एक जैसी भावनाएँ महसूस करते हैं.

🎯 Exam Tip: भीड़ की परिभाषा देते समय, उसके अस्थायी और असंगठित स्वरूप पर जोर दें, साथ ही यह भी बताएं कि यह एक सामान्य केंद्र-बिंदु पर ध्यान केंद्रित करती है और इसमें सामूहिक भावनाएं होती हैं।

 

Question 4. भीड़ एवं जनता में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: भीड़ और जनता में कुछ प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं –
3. भीड़ में विचार-विमर्श की आमतौर पर कोई संभावना नहीं होती है, जबकि जनता में ऐसा होता है. जनता के सदस्य मुद्दों पर चर्चा और बहस कर सकते हैं.
4. भीड़ की गतिविधियाँ ज़्यादातर बिना सोचे-समझे होती हैं, जबकि जनता की गतिविधियाँ तार्किक और विवेकपूर्ण होती हैं. जनता सोच-समझकर निर्णय लेती है.
5. जनता की तुलना में भीड़ के सदस्यों की संख्या कम होती है. भीड़ एक सीमित समूह होती है, जबकि जनता एक बड़ा और बिखरा हुआ समूह हो सकता है. यह अंतर उनके व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है.
In simple words: भीड़ में लोग बिना सोचे-समझे काम करते हैं और कम संख्या में होते हैं, जबकि जनता विचार-विमर्श करती है और ज़्यादा बड़ी होती है.

🎯 Exam Tip: भीड़ और जनता के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से बताएं, विशेष रूप से विचार-विमर्श की क्षमता और निर्णय लेने की प्रकृति पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 5. प्राकृतिक आपदाएँ क्या हैं? समझाइए।
Answer: प्राकृतिक आपदाएँ प्रकृति द्वारा उत्पन्न ऐसी आकस्मिक विपत्तियाँ हैं, जो किसी क्षेत्र में रहने या काम करने वाले लोगों की एक बड़ी संख्या को विस्थापित करती हैं. विस्थापन में लोगों की मृत्यु, आजीविका या संपत्ति का नुकसान और मानवीय कष्ट शामिल होते हैं. ये आपदाएँ अचानक आती हैं और भारी तबाही मचाती हैं. आपदा के स्वरूप का वर्णन निम्न प्रकार है –
1. सामान्य कार्यकलाप का विस्थापन: एक आपदा प्राकृतिक संसाधनों और जान-माल को नष्ट कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप समाज के सामान्य कार्यकलाप बाधित हो जाते हैं. इससे रोज़मर्रा के काम रुक जाते हैं.
2. आपदा कार्य परिणाम: आपदा या परिणाम प्रभावित क्षेत्र की जनसंख्या के घनत्व पर निर्भर करता है. ज़्यादा घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नुकसान ज़्यादा होता है.
3. आपदा का परिणाम: आपदा का एक प्रमुख पर्यावरणीय परिणाम यह होता है कि नदियों और भू-जल का प्रदूषण होता है, तथा वायुमंडल में धूल और गर्मी के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है. इससे पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ता है.
4. आपदा का प्रभाव: धँसाव जैसी आपदाओं ने पहले भी बड़े-बड़े समुदायों को प्रभावित किया है. ये आपदाएँ अचानक आती हैं और व्यापक विनाश का कारण बनती हैं.
In simple words: प्राकृतिक आपदाएँ प्रकृति द्वारा होने वाली अचानक की बड़ी घटनाएँ हैं जो बहुत से लोगों को विस्थापित करती हैं, जान-माल का नुकसान करती हैं और सामान्य जीवन को रोक देती हैं.

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक आपदाओं को परिभाषित करते समय, उनके आकस्मिक, विस्थापनकारी और हानिकारक प्रभावों पर जोर दें, और उनके विभिन्न प्रकारों और परिणामों को बताएं।

 

Question 6. अभिघातज अनुभव (Traumatic Experiences) किसे कहते हैं?
Answer: अभिघातज अनुभव एक प्रकार की प्राकृतिक विपदाएँ हैं, जो विपदा के बाद जीवित व्यक्तियों के लिए भावनात्मक रूप से आहत करने वाले और स्तब्ध करने वाले होते हैं. इसका मतलब यह है कि जब प्रकृति का कहर आता है, तो उसे देखने वाले, महसूस करने वाले और उससे जूझने वाले व्यक्तियों के लिए वह अनुभव बहुत ही कष्टदायक होता है. यह इतना गहरा अनुभव होता है जिसे वे कभी भूल नहीं पाते हैं. इसी स्थिति को अभिघातज अनुभव कहते हैं. यह अनुभव अक्सर PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसे मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों को जन्म दे सकता है.
In simple words: अभिघातज अनुभव उन भयानक घटनाओं को कहते हैं जो लोगों को भावनात्मक रूप से बहुत गहरा सदमा पहुँचाती हैं, जिससे वे उन्हें कभी भूल नहीं पाते.

🎯 Exam Tip: अभिघातज अनुभव को परिभाषित करते समय, उसके भावनात्मक रूप से आहत करने वाले और स्थायी प्रभावों पर जोर दें, और यह भी बताएं कि यह प्राकृतिक आपदाओं के बाद कैसे उत्पन्न होता है।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 8 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 8. जनसंचार साधनों के लाभ बताइए।
Answer: जनसंचार साधनों के कई लाभ हैं, जिन्हें निम्नलिखित बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है –
1. विभिन्न सूचनाएँ: जनसंचार साधनों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इनके माध्यम से समाज के सभी नागरिकों को देश-विदेश की सभी गतिविधियों और क्रियाकलापों की सूचनाएँ या जानकारी आसानी से मिल जाती है. इससे लोग दुनिया भर में होने वाली घटनाओं से अवगत रहते हैं.
2. परिवर्तन लाने का माध्यम: जनसंचार के साधन समाज में परिवर्तन लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं. इंटरनेट और मास मीडिया जैसे साधनों ने समाज को बदलने में अहम भूमिका निभाई है. ये लोगों की सोच और जीवनशैली को प्रभावित करते हैं.
3. सोच या मानसिकता में बदलाव: जनसंचार के साधन नागरिकों की मानसिकता में बदलाव लाते हैं. ये उन्हें तार्किक आधार पर सोचने के अवसर प्रदान करते हैं, जिससे व्यक्तियों को सही या गलत के बारे में उचित जानकारी मिल सके. इससे लोग ज़्यादा जागरूक और समझदार बनते हैं.
In simple words: जनसंचार हमें दुनिया भर की खबरें देता है, समाज में बदलाव लाने में मदद करता है और लोगों की सोच को बेहतर बनाता है.

🎯 Exam Tip: जनसंचार के लाभों को समझाते समय, सूचना प्रसार, सामाजिक परिवर्तन और मानसिकता में बदलाव जैसे प्रमुख बिंदुओं को विस्तृत करें, और उनके महत्व को स्पष्ट करें।

पर्यावरणीय मनोविज्ञान की प्रमुख विशेषताएँ

1. पर्यावरण और व्यवहार के सम्बन्धों का अध्ययन: इसमें पर्यावरण और व्यवहार के सम्बन्धों का एक इकाई के रूप में अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन मुख्य रूप से इस समस्या पर केन्द्रित होता है कि अलग-अलग प्रकार का पर्यावरण मानव व्यवहार को कैसे और कितनी हद तक प्रभावित करता है।

2. वैज्ञानिक प्रकृति: पर्यावरणीय मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक है। इसकी अध्ययन विधियाँ और विषय-वस्तु वैज्ञानिक होती हैं। इस मनोविज्ञान में विज्ञान की सभी विशेषताएँ पाई जाती हैं।

3. व्यावहारिक: इसमें जितने भी अध्ययन किए जाते हैं, वे आमतौर पर व्यावहारिक होते हैं। इनके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार को समझने में बहुत मदद मिलती है।

4. कार्य-कारण सम्बन्धों का अध्ययन: पर्यावरणीय मनोविज्ञान में कार्य-कारण सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। कार्य-कारण सम्बन्धों का अध्ययन मुख्य रूप से प्रयोगात्मक विधि के द्वारा किया जाता है।

5. व्यावसायिक: पर्यावरणीय मनोविज्ञान में कुछ उच्च-स्तरीय अनुसंधान व्यावसायिक कार्यक्रमों से जुड़े हुए हैं। इससे ऐसे तथ्य सामने आते हैं जिनसे व्यवसाय को बढ़ावा मिलता है। वायु-प्रदूषण को जांचने के लिए कई यंत्र और उपकरण बाजार में इन्हीं अध्ययनों के नतीजों के रूप में उपलब्ध हैं।

6. उदारवादी: पर्यावरणीय मनोविज्ञान का दृष्टिकोण बहुत ही उदारवादी है। पर्यावरणीय मनोवैज्ञानिक आजकल सामाजिक मनोवैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों और व्यावहारिक मनोवैज्ञानिकों से महत्वपूर्ण तरीके से जुड़े हुए हैं। वे इनके सिद्धांतों, अध्ययन विधियों और तकनीकों का उपयोग करके पर्यावरणीय मनोविज्ञान को और अधिक उपयोगी और व्यावहारिक बना रहे हैं।

 

Question 2. वायु-प्रदूषण के कारणों तथा उसके नियंत्रण के उपायों के विषय में विवेचना कीजिए।
Answer: जब कारखानों, वाहनों और अन्य स्रोतों से निकलने वाला धुआँ और जहरीली गैसें हवा को गंदा करके इंसानों को नुकसान पहुँचाने लगती हैं, तो इस स्थिति को वायु प्रदूषण कहते हैं। वायु प्रदूषण कई तरह से पर्यावरण को हानि पहुँचाता है, जिससे साँस लेने में दिक्कत और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं।
वायु-प्रदूषण के कारण:
वैज्ञानिकों ने इसके स्रोतों को दो मुख्य भागों में बाँटा है:
1. मानव-निर्मित प्रदूषण: यह खास तौर पर शहरों और औद्योगिक इलाकों में देखा जाता है। जहाँ खाना बनाने के लिए अभी भी पुराने तरीके जैसे लकड़ी, कोयला और गोबर का इस्तेमाल होता है, वहाँ चूल्हों से निकलने वाला धुआँ बहुत जहरीला होता है और हवा को प्रदूषित करता है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय:
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं:
1. कारखानों की चिमनियों में ऐसे यंत्र लगाने चाहिए जो धुएँ को साफ करें।
2. डीजल में ऐसी चीजें मिलानी चाहिए जिससे प्रदूषण कम हो।
3. बिना लेड (सीसा) और सल्फर वाला पेट्रोल इस्तेमाल करना चाहिए।
4. फैक्ट्रियों की चिमनियों को बहुत ऊँचा बनाना चाहिए।
5. ज्यादा धुआँ छोड़ने वाले वाहनों पर रोक लगानी चाहिए।
6. वायु-प्रदूषण रोकने और नियंत्रित करने वाले कानूनों के बारे में लोगों को ज्यादा बताना चाहिए।
7. अधिक पेड़ लगाकर वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
In simple words: वायु प्रदूषण तब होता है जब कारखानों और गाड़ियों से निकलने वाला धुआँ हवा को जहरीला बना देता है। इसे रोकने के लिए हमें पेड़ लगाने चाहिए और कम प्रदूषण फैलाने वाले साधनों का उपयोग करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय, वायु प्रदूषण के कारणों और नियंत्रण उपायों को स्पष्ट बिन्दुओं में प्रस्तुत करें, जिससे जानकारी व्यवस्थित लगे।

 

Question 3. प्राकृतिक आपदाओं के निवारण के उपाय बताइए।
Answer: प्राकृतिक आपदाओं को रोकने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, जिससे नुकसान को कम किया जा सके:
1. सूचना का तुरंत प्रसार: भूकंप, सुनामी, बाढ़, सूखा और आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं के होने पर तुरंत संबंधित लोगों तक जानकारी पहुँचानी चाहिए। जितनी जल्दी और सही जानकारी मिलेगी, पीड़ित लोग उतनी ही जल्दी स्थिति के अनुसार खुद को ढालने का प्रयास कर पाएँगे।
2. सहायता और विश्वास: आपदा से प्रभावित लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि उन्हें जरूरी मदद जल्द से जल्द मिल रही है। ऐसे समय में शांति, भाईचारा और सहायतापूर्ण व्यवहार बनाए रखना बहुत जरूरी है।
3. संगठनों की भूमिका: सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को चाहिए कि वे पीड़ित लोगों की अधिक से अधिक मदद समय पर करें, ताकि उनकी जरूरतें पूरी हो सकें और उनका जीवन सामान्य रह सके।
4. जागरूकता अभियान: प्राकृतिक आपदाओं के समय सही दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रचार-प्रसार करना चाहिए, जिससे लोगों को सही समय पर सही और सच्ची मदद मिल सके। आपदा के बारे में सही जानकारी होने से लोग बेहतर तैयारी कर सकते हैं।
5. समस्याओं का समाधान: आपदाग्रस्त क्षेत्र के लोगों को आपदा से उत्पन्न समस्याओं को हल करने के उपाय समझाए जाने चाहिए। उन्हें आपदा से संबंधित जानकारी देकर जागरूक करना चाहिए, ताकि वे भविष्य में बेहतर ढंग से सामना कर सकें।
In simple words: प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए, लोगों को समय पर जानकारी दें, उन्हें भरोसा दिलाएँ और सरकार व संस्थाओं को मिलकर मदद करनी चाहिए। जागरूकता और सही तैयारियों से नुकसान कम किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक आपदाओं के निवारण उपायों को हमेशा व्यावहारिक और समुदाय-आधारित दृष्टिकोण से समझाएँ, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कैसे सामूहिक प्रयास काम करते हैं।

 

Question 4. निर्धनता के दुष्प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
Answer: गरीबी के कई बुरे प्रभाव होते हैं जो समाज और व्यक्ति दोनों को प्रभावित करते हैं:
1. सामाजिक प्रभाव: गरीबी व्यक्ति की समाज में इज़्ज़त, पद और भूमिका को प्रभावित करती है। गरीब होने का मतलब अक्सर समाज में निचली जगह पर होना है। ज्यादातर अपराधी, बाल-अपराधी, आवारा और मानसिक रूप से परेशान लोग गरीब परिवारों से ही आते हैं। गरीबी सामाजिक असमानता को बढ़ाती है और लोगों के बीच खाई पैदा करती है।
2. बुरी आदतों में वृद्धि: गरीबी के कारण लोग मानसिक तनाव और निराशा में डूब जाते हैं। कई लोग तनाव कम करने के लिए शराब पीने लगते हैं और जुआ जैसी कई बुरी आदतों में पड़ जाते हैं।
3. नैतिक पतन: गरीबी के कारण अच्छा चरित्र बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। पैसे की कमी के चलते कभी-कभी मजबूर होकर महिलाएँ अपना शरीर बेचने लगती हैं, और कुछ महिलाएँ तो गरीबी के कारण ही वेश्यावृत्ति अपनाने लगती हैं।
4. भिक्षावृत्ति: गरीबी भीख माँगने की समस्या को पैदा करने का एक बड़ा कारण है।
5. गरीबी, गरीबी को जन्म देती है: गरीबी एक दुष्चक्र की तरह है। लोग इसलिए बीमार रहते हैं क्योंकि वे गरीब हैं, और वे गरीब इसलिए हैं क्योंकि वे बीमार हैं। प्रोफेसर नर्कसे ने कहा था कि कोई देश इसलिए गरीब है क्योंकि वह गरीब है।
6. मानसिक प्रभाव: गरीबी कुपोषण का कारण बनती है, और कुपोषण से मानसिक कमजोरियाँ आती हैं। गरीबी के कारण व्यक्ति की मानसिक स्थिति खराब होती जाती है और वह तनाव या कुंठा की समस्या से ग्रस्त हो जाता है।
7. शारीरिक प्रभाव: गरीबी से शारीरिक कमजोरियाँ भी पैदा होती हैं। टी.बी. जैसी बीमारियों को अक्सर गरीबों की बीमारी माना जाता है। लंबी बीमारी और काम न कर पाने की क्षमता भी लोगों को गरीब बनाती है।
8. अन्य दुष्प्रभाव: गरीबी से शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनस्तर पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
In simple words: गरीबी के कई बुरे असर होते हैं, जैसे समाज में कम इज़्ज़त, बुरी आदतें, नैतिक पतन और बीमारियाँ। गरीबी का चक्र चलता रहता है, जिससे लोगों का जीवन और मुश्किल हो जाता है।

🎯 Exam Tip: निर्धनता के दुष्प्रभावों को लिखते समय सामाजिक, नैतिक और आर्थिक पहलुओं को अलग-अलग बिन्दुओं में समझाएँ, ताकि उत्तर व्यापक और स्पष्ट हो सके।

 

Question 5. ध्वनि प्रदूषण क्या है? इसके कारणों तथा नियंत्रण के उपायों का उल्लेख कीजिए।
Answer: जब बहुत तेज आवाज़ जो आमतौर पर कानों को अच्छी नहीं लगती, 'शोर' की सीमा में आ जाती है, तो उसे "ध्वनि प्रदूषण" कहा जाता है। ध्वनि को मापने की इकाई डेसीबल है। 70 डेसीबल से ज्यादा की ध्वनि कानों को खराब लगती है और इंसान के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। ध्वनि प्रदूषण हमारे सुनने की क्षमता को नुकसान पहुँचा सकता है और तनाव बढ़ा सकता है।

विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न ध्वनि की मात्रा और उसके प्रभाव नीचे तालिका में स्पष्ट किए गए हैं –

ध्वनि का स्रोतध्वनि की मात्राध्वनि का प्रभाव
मोटर साइकिल एवं ट्रक का शोर90-100 डेसीबलहानिप्रद, कर्कश
जेट विमान अथवा सायरन150-160 डेसीबलबहरापन व रक्तचाप में वृद्धि
वेक्यूम क्लीनर80 डेसीबलमानसिक तनाव
सड़क यातायात व भारी वाहन80-100 डेसीबलहानिप्रद, कर्कश
अंतरिक्षयान की प्रारम्भिक उड़ान140-170 डेसीबलरक्तचाप में वृद्धि
बिजली की कड़क120 डेसीबलमानसिक तनाव

ध्वनि प्रदूषण के कारण:
1. परिवहन के साधन-ट्रक, कारें, स्कूटर, हवाई जहाज आदि से निकलने वाला शोर।
2. घरेलू सामान-मिक्सी, प्रेशर कुकर, कूलर्स आदि से निकलने वाली आवाज़।
3. कारखाने व उद्योग-मशीनें, जनरेटर्स तथा सायरन का शोर।
4. प्राकृतिक प्रकोप-आँधी, तूफान, बिजली की गड़गड़ाहट आदि।

ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय:
1. ध्वनि के स्रोतों पर नियंत्रण रखना, जैसे कम शोर वाले उपकरण उपयोग करना।
2. शहरों की योजना में बदलाव करना, जैसे आवासीय क्षेत्रों से दूर उद्योग लगाना।
In simple words: ध्वनि प्रदूषण तेज और अप्रिय आवाज़ को कहते हैं जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती है। इसे रोकने के लिए हमें शोर पैदा करने वाले साधनों को नियंत्रित करना चाहिए और ध्वनि-प्रदूषण कम करने के उपाय अपनाने चाहिए।

🎯 Exam Tip: ध्वनि प्रदूषण को समझाते समय, परिभाषा, इकाई (डेसीबल), स्वास्थ्य प्रभावों और फिर कारणों व नियंत्रण उपायों को तालिका सहित स्पष्ट करें।

 

Question 6. भीड़ की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: भीड़ एक ऐसी चीज़ है जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं, और इसकी कुछ खास बातें होती हैं:
1. सीधा सम्पर्क: भीड़ में लोग एक-दूसरे के बहुत पास होते हैं और किसी एक घटना या चीज़ के इर्द-गिर्द जमा होते हैं। इसलिए, वे एक-दूसरे से सीधे जुड़े होते हैं। यह सामाजिक एकजुटता का एक अस्थाई रूप होता है।
2. समानता: भीड़ में कोई खास व्यवस्था नहीं होती है, जहाँ लोगों को उनकी सामाजिक स्थिति के हिसाब से पद या जगह मिले। भीड़ में सभी लोगों के अधिकार एक जैसे होते हैं।
3. अनामिकता: भीड़ में कोई भी व्यक्ति आमतौर पर दूसरे लोगों के नाम या सामाजिक पद को नहीं जान पाता। यही वजह है कि व्यक्ति भीड़ में निडर होकर ऐसे काम भी कर बैठता है जो वह सामान्य हालत में कभी नहीं कर सकता।
4. अपने आप बनती है: भीड़ कोई योजना बनाकर नहीं बनती, बल्कि अपने आप ही इकट्ठी हो जाती है। भीड़ के लिए कोई खास समय या जगह तय नहीं होती। किसी भी समय और जगह पर कोई घटना, दुर्घटना, तमाशा या अजीब स्थिति होने पर लोग जमा हो जाते हैं और भीड़ बन जाती है।
5. आपस का प्रभाव: भीड़ में शारीरिक निकटता और एक-दूसरे से कंधे से कंधा लगने के कारण लोग एक-दूसरे को जल्दी प्रभावित करते हैं। इस प्रभाव की वजह से भीड़ के लोग कभी-कभी ऐसे काम भी कर बैठते हैं जो गलत या नामुमकिन लगते हैं।
6. सामूहिक शक्ति का अहसास: शारीरिक निकटता और सीधे सम्बन्ध के कारण भीड़ के लोगों को लगता है कि उनके पास एक सामूहिक शक्ति है। भीड़ में आकर व्यक्ति मारपीट, दंगा, अपराध आदि भी कर बैठता है। उसे लगता है कि पूरा समूह उसके साथ है और वह समूह की शक्ति को अपनी ही शक्ति समझने लगता है।
7. असंगठित: भीड़ असंगठित होती है। इसका कोई नेता हो सकता है, लेकिन इसमें काम का बँटवारा या पदों की कोई व्यवस्था नहीं होती। इसका न कोई निश्चित स्थान होता है और न समय। इसकी आपसी क्रियाएँ अनियंत्रित होती हैं। इसकी सदस्यता के कोई नियम नहीं होते। कोई भी व्यक्ति जब चाहे इसमें शामिल हो सकता है और जब चाहे छोड़ सकता है।
In simple words: भीड़ एक अस्थायी जमावड़ा है जहाँ लोग एक खास चीज़ या घटना के लिए इकट्ठा होते हैं। इसमें लोग एक-दूसरे को जल्दी प्रभावित करते हैं और कभी-कभी ऐसे काम भी कर देते हैं जो वे अकेले में नहीं करते।

🎯 Exam Tip: भीड़ की विशेषताओं को स्पष्ट और अलग-अलग बिन्दुओं में समझाएँ, खासकर 'अनामिकता' और 'सामूहिक शक्ति के अहसास' जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दें।

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Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 8 मनोविज्ञान तथा जीवन will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 8 मनोविज्ञान तथा जीवन in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Psychology. You can access RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 8 मनोविज्ञान तथा जीवन in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Psychology RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 8 मनोविज्ञान तथा जीवन in printable PDF format for offline study on any device.