RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 6 अभिवृत्ति तथा सामाजिक संज्ञान

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Class 12 Psychology Chapter 6 अभिवृत्ति तथा सामाजिक संज्ञान RBSE Solutions PDF

 

Question 1. पूर्वाग्रह एक प्रकार की -
(अ) अभिवृत्ति है
(ब) भाव है
(स) विचार है
(द) व्यवहार है
Answer: (अ) अभिवृत्ति है
In simple words: पूर्वाग्रह का अर्थ है कि हम किसी व्यक्ति या चीज़ के बारे में बिना किसी ठोस सबूत के पहले से ही कोई राय बना लेते हैं. यह एक प्रकार की सोच या मनोवृत्ति होती है.

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह की परिभाषा देते समय, यह स्पष्ट करें कि यह बिना पर्याप्त जानकारी के बनाई गई नकारात्मक या सकारात्मक मनोवृत्ति होती है.

 

Question 3. मनोवृत्ति के घटक होते हैं –
(अ) 5
(ब) 2
(स) 1
(द) 3
Answer: (द) 3
In simple words: मनोवृत्ति के तीन मुख्य हिस्से होते हैं: संज्ञानात्मक (सोच), भावात्मक (भावनाएँ), और व्यवहारात्मक (कार्य). ये तीनों मिलकर किसी चीज़ के प्रति हमारी मनोवृत्ति बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: मनोवृत्ति के तीन घटकों-संज्ञानात्मक, भावात्मक और व्यवहारात्मक-को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये किसी भी मनोवृत्ति को पूरी तरह से समझने में मदद करते हैं.

 

Question 4. संज्ञानात्मक विसन्नादिता का सिद्धान्त सम्बन्धित है –
(अ) रूढ़िवादिता से
(ब) अभिवृत्ति से
(स) अभिवृत्ति परिवर्तन से
(द) प्रसामाजिक व्यवहार से
Answer: (स) अभिवृत्ति परिवर्तन से
In simple words: संज्ञानात्मक विसन्नादिता तब होती है जब हमारी सोच या व्यवहार में कोई विरोधाभास होता है. यह असुविधा हमें अपनी अभिवृत्ति या व्यवहार बदलने के लिए प्रेरित करती है, ताकि सब कुछ मेल खा जाए.

🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक विसन्नादिता का सिद्धांत यह समझाता है कि लोग असंगति को कम करने के लिए अपनी अभिवृत्तियों को कैसे बदलते हैं. उदाहरणों के साथ इसे याद रखना आसान होगा.

 

Question 5. लक्ष्य के व्यवहार के लिए कारण देना किस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया का मुख्य तत्व है?
(अ) रूढ़िवादिता
(ब) गुणारोपण
(स) पूर्वाग्रह
(द) छवि निर्माण
Answer: (ब) गुणारोपण
In simple words: गुणारोपण एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि कोई व्यक्ति कोई खास व्यवहार क्यों कर रहा है. हम उस व्यवहार का कारण किसी व्यक्ति या स्थिति को देते हैं.

🎯 Exam Tip: गुणारोपण का संबंध हमेशा व्यवहार के पीछे के कारणों को समझने से होता है. यह समझना आवश्यक है कि क्या कारण आंतरिक हैं या बाहरी.

 

Question 6. पूर्वाग्रह की व्यवहारात्मक अभिव्यक्ति कहलाती है –
(अ) अभिवृत्ति
(ब) असमायोजन
(स) सामाजिक दूरी
(द) विभेद
Answer: (द) विभेद
In simple words: जब पूर्वाग्रह के कारण लोग दूसरों के साथ अलग या अनुचित तरीके से व्यवहार करते हैं, तो इसे विभेद कहा जाता है. यह पूर्वाग्रह का एक बाहरी रूप है जो व्यवहार में दिखाई देता है.

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह (मनोवृत्ति) और विभेद (व्यवहार) के बीच का अंतर स्पष्ट रखें. विभेद पूर्वाग्रह का क्रियात्मक रूप है, जो नकारात्मक व्यवहार में प्रकट होता है.

RBSE Class 12 Psychology Chapter 6 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पूर्वाग्रह से आप क्या समझते हैं?
Answer: पूर्वाग्रह एक तरह की मानसिक सोच होती है जो सही तथ्यों पर आधारित नहीं होती. यह सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है. इसमें सोचने का तरीका, भावनाएँ और व्यवहार-संबंधी हिस्से शामिल होते हैं. पूर्वाग्रह समाज के लिए हानिकारक होता है और इसे नियंत्रित करना बहुत जरूरी है. सही समाजीकरण और पूर्वाग्रह वाले लोगों के साथ ठीक से बातचीत करके इसे रोका जा सकता है. 'पूर्वाग्रह' शब्द लैटिन भाषा के 'prejudicium' से आया है, जिसका मतलब है 'पहले से ही कोई राय बना लेना'. इसका मतलब है कि बिना किसी बात को अच्छे से परखे, किसी चीज़ या व्यक्ति के बारे में अपनी राय बना लेना. यह अक्सर गलतफहमी या अपर्याप्त जानकारी के कारण होता है.
In simple words: पूर्वाग्रह बिना किसी ठोस जानकारी के किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में पहले से बनी राय होती है. यह समाज के लिए नुकसानदायक है और इसे सही समाजीकरण से कम किया जा सकता है.

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह को परिभाषित करते समय, 'बिना तथ्यों पर आधारित' और 'पूर्व-निर्णय' जैसे मुख्य शब्दों का उपयोग करें. इसके घटकों (संज्ञानात्मक, भावात्मक, व्यवहारात्मक) का उल्लेख भी जरूरी है.

 

Question 2. गुणारोपण क्या है ?
Answer: गुणारोपण सामाजिक सोच की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. यह हमें यह समझने में मदद करता है कि हम, दूसरे लोग और सामाजिक परिस्थितियाँ कैसे एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. इस प्रक्रिया में हम अलग-अलग जानकारी की व्याख्या, विश्लेषण, याद रखना और उपयोग करना सीखते हैं. गुणारोपण एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे व्यक्ति यह जानने की कोशिश करता है कि उसके या दूसरों के व्यवहार या कार्यों का कारण क्या है. इस दौरान व्यक्ति किसी खास व्यवहार का कारण अपनी तरफ से निर्धारित करता है. इस तरह, गुणारोपण एक जटिल सोचने की प्रक्रिया है जिसके जरिए हमें लोगों के व्यवहार के पीछे के कारणों का पता चलता है. यह एक बुनियादी मानवीय प्रवृत्ति है कि हम दूसरों के कार्यों के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश करते हैं.
In simple words: गुणारोपण वह प्रक्रिया है जिसमें हम दूसरों के व्यवहार के पीछे के कारणों का पता लगाते हैं. हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि कोई व्यक्ति कोई काम क्यों कर रहा है.

🎯 Exam Tip: गुणारोपण के उत्तर में 'व्यवहार के कारणों को समझना' और 'आरोपित करना' जैसे शब्दों पर ध्यान दें. यह सामाजिक संज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

 

Question 4. प्रसामाजिक व्यवहार को संक्षिप्त में समझाइए।
Answer: प्रसामाजिक व्यवहार ऐसे काम होते हैं जिन्हें समाज में अच्छा माना जाता है. ये वे व्यवहार हैं जिनसे दूसरों को फायदा होता है और समाज के लिए उपयोगी होते हैं. व्यक्ति ऐसे व्यवहार अपने फायदे के लिए नहीं करता, बल्कि सामाजिक भलाई को ध्यान में रखकर करता है. उदाहरण के लिए, गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करना, समाज सेवी संस्थाएँ बनाना और रक्तदान करना, ये सभी प्रसामाजिक व्यवहार के उदाहरण हैं. ये व्यवहार समाज में सकारात्मकता फैलाते हैं और लोगों के बीच सहयोग बढ़ाते हैं.
In simple words: प्रसामाजिक व्यवहार वे कार्य हैं जो दूसरों की मदद करते हैं और समाज के लिए अच्छे होते हैं, और व्यक्ति इन्हें बिना किसी स्वार्थ के करता है.

🎯 Exam Tip: प्रसामाजिक व्यवहार की परिभाषा में 'दूसरों को लाभ' और 'स्वार्थरहित' जैसे कीवर्ड्स को शामिल करें. उदाहरणों के साथ अपने उत्तर को और प्रभावी बनाएँ.

 

Question 5. रूढ़िवादिता को परिभाषित कीजिए।
Answer: रूढ़िवादिता एक प्रकार का पूर्वाग्रह ही है, जिसमें हम किसी समूह के बारे में बहुत ज्यादा सामान्य धारणा बना लेते हैं. यह एक ऐसी मानसिक तस्वीर या विश्वास है जिसे लोग किसी खास समूह के बारे में मानते हैं. सेकर्ड और बैकमैन के अनुसार, रूढ़िवादिता किसी प्रतीकीकरण का एक बढ़ा-चढ़ाकर रूप है, जिसकी तीन मुख्य विशेषताएँ होती हैं:
1. लोग किसी एक समूह के व्यक्तियों को कुछ निश्चित विशेषताओं के आधार पर पहचानते हैं.
2. उन निश्चित विशेषताओं को उस पूरे समूह पर लागू करने के लिए लोग सहमत होते हैं.
3. लोग उस समूह के किसी भी व्यक्ति पर उन विशेषताओं को बिना सोचे-समझे थोप देते हैं.
रूढ़िवादिता अक्सर सच्चाई पर आधारित नहीं होती और बहुत ही स्थिर होती है, जिससे इसे बदलना मुश्किल होता है.
In simple words: रूढ़िवादिता किसी समूह के बारे में एक अति-सामान्य और अक्सर गलत धारणा होती है, जो उस समूह के हर व्यक्ति पर लागू कर दी जाती है.

🎯 Exam Tip: रूढ़िवादिता को 'अति-सामान्यीकरण' और 'मानसिक प्रतिमा' के रूप में परिभाषित करें. इसकी तीन मुख्य विशेषताओं को लिखना न भूलें.

RBSE Class 12 Psychology Chapter 6 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अभिवृत्ति निर्माण किस प्रकार होता है?
Answer: अभिवृत्ति बनने में समाजीकरण एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. हम कई तरीकों से अपनी अभिवृत्तियों को सीखते हैं:
A. साहचर्य:
1. लोग समाज के व्यक्तियों और वस्तुओं के बारे में अपनी राय धीरे-धीरे बनाते हैं.
2. कई बार, किसी एक व्यक्ति या चीज़ के अच्छे या बुरे गुणों के कारण, उससे जुड़ी दूसरी चीज़ों या व्यक्तियों के प्रति भी हमारी राय अच्छी या बुरी हो जाती है.
B. पुरस्कार और दण्ड:
1. अगर किसी मनोवृत्ति को दिखाने के लिए इनाम मिलता है, तो उस मनोवृत्ति को भविष्य में भी दिखाने की संभावना बढ़ जाती है.
2. अगर किसी गलत काम के लिए सज़ा मिलती है, तो वह काम करने की संभावना कम हो जाती है, जिससे अभिवृत्ति में बदलाव आता है.
C. प्रतिरूपण:
1. लोग अपने आसपास के दूसरे लोगों के व्यवहार को देखकर और उनकी नकल करके कई व्यवहार सीखते हैं.
2. किसी और को किसी मनोवृत्ति को दिखाते हुए इनाम या सज़ा मिलने पर, व्यक्ति अपनी खुद की मनोवृत्ति को वैसे ही विकसित कर लेता है.
D. अनुनयात्मक संचार:
जब सूचना देने वाला व्यक्ति विश्वसनीय होता है और विषय का अच्छा ज्ञान रखता है, तो वह अपनी बातों से दूसरों की अभिवृत्ति को बदल सकता है. प्रभावी संचार अभिवृत्ति बनाने और बदलने में मदद करता है.
In simple words: हमारी अभिवृत्तियाँ समाजीकरण के जरिए बनती हैं. हम दूसरों को देखकर, इनाम या सज़ा से, और दूसरों की बातों पर विश्वास करके अपनी सोच बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: अभिवृत्ति निर्माण के चार मुख्य तरीकों (साहचर्य, पुरस्कार और दण्ड, प्रतिरूपण, अनुनयात्मक संचार) को याद रखें और प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दें.

 

Question 2. छवि निर्माण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए।
Answer: छवि निर्माण को व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण भी कहते हैं. इसका मतलब है कि एक व्यक्ति अपने आसपास के दूसरे लोगों के बारे में अपनी राय, विचार या धारणा बनाता है. यह प्रक्रिया सामाजिक होती है. व्यक्ति की यह धारणा उसके अपनी संवेदनाओं पर और दूसरों से मिली जानकारी पर निर्भर करती है.
आम तौर पर, छवि निर्माण तीन बातों पर निर्भर करता है:
1. किसी व्यक्ति के बारे में निर्णय लेते समय हमें कितनी जानकारी मिलती है.
2. देखने वाले व्यक्ति और दूसरे व्यक्ति के बीच किस तरह की बातचीत होती है.
3. देखने वाले व्यक्ति और दूसरे व्यक्तियों के बीच कितनी घनिष्ठता या जुड़ाव है.
छवि निर्माण की कुछ खास बातें:
1. छवि निर्माण में जीवित लोग एक-दूसरे को समझते हैं.
2. यह मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक माहौल से तय होता है, इसलिए इसमें हमेशा बदलाव आते रहते हैं.
3. इसमें व्यक्ति की अपनी मनोवृत्तियाँ, विश्वास और पूर्वाग्रह बहुत अहम होते हैं.
4. कुछ खास कारणों से व्यक्ति का समझना कभी-कभी स्पष्ट नहीं हो पाता है.
5. छवि निर्माण में जानकारी को चुनना, व्यवस्थित करना और अनुमान लगाना भी शामिल होता है.
छवि निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जो सामान्य देखने से काफी अलग होती है, क्योंकि इसमें व्यक्ति की अपनी सोच और भावनाएँ शामिल होती हैं.
In simple words: छवि निर्माण वह प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति दूसरों के बारे में अपनी सोच और राय बनाता है. यह उसकी अपनी समझ और दूसरों से मिली जानकारी पर निर्भर करता है.

🎯 Exam Tip: छवि निर्माण की परिभाषा में 'व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण' शब्द का प्रयोग करें. इसकी निर्भरता और विशेषताओं को बिंदुओं में समझाएँ ताकि उत्तर स्पष्ट और व्यवस्थित लगे.

 

Question 3. अभिवृत्ति परिवर्तन पर चर्चा कीजिए।
Answer: अभिवृत्ति परिवर्तन का मतलब है कि हमारी राय या सोच में बदलाव लाना. इसे दो तरीकों से समझा जा सकता है:
1. कभी-कभी व्यक्ति को ऐसी स्थिति में डाला जाता है जहाँ उसे अपनी राय के विपरीत व्यवहार करना पड़ता है. जब वह अपने व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश करता है, तो उसे अपनी अभिवृत्ति बदलनी पड़ती है. इस तरह, उसकी सोच और व्यवहार में जो असंगति होती है, वह उसे अपनी अभिवृत्ति बदलकर ठीक करता है.
2. अनुनयात्मक संचार:
अनुनय सिद्धांत कहता है कि संचार से अभिवृत्ति तब बदलती है जब व्यक्ति को दो तरह की प्रतिक्रियाएँ मिलती हैं:
* पहली प्रतिक्रिया व्यक्ति को अपनी बात पर संदेह करने पर मजबूर करती है.
* दूसरी प्रतिक्रिया उस सवाल का जवाब देती है.
जब व्यक्ति को नई जानकारी मिलती है और वह अपनी पुरानी सोच पर सवाल उठाना शुरू करता है, तो उसकी अभिवृत्ति बदल जाती है. अनुनयात्मक संचार के चार मुख्य हिस्से होते हैं:
* सूचना का स्रोत: जानकारी देने वाला व्यक्ति विश्वसनीय होना चाहिए.
* संदेश: संदेश स्पष्ट और प्रभावी होना चाहिए.
* लक्षित व्यक्ति: संदेश प्राप्त करने वाला व्यक्ति भी महत्वपूर्ण होता है.
* संचार का माध्यम: संदेश कैसे दिया जा रहा है (कहने या बात करने का तरीका) भी मायने रखता है.
इन सभी कारकों का इस्तेमाल करके लोगों की अभिवृत्तियों को प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है.
In simple words: अभिवृत्ति बदलना मतलब अपनी सोच या राय में बदलाव लाना. यह तब होता है जब हम अपने व्यवहार को सही ठहराते हैं या जब हमें किसी विश्वसनीय स्रोत से नई जानकारी मिलती है.

🎯 Exam Tip: अभिवृत्ति परिवर्तन के दो मुख्य तरीकों (व्यवहार-आधारित असंगति और अनुनयात्मक संचार) को समझें. अनुनयात्मक संचार के चार पक्षों का उल्लेख करना उत्तर को पूर्ण बनाता है.

 

Question 4. प्रसामाजिक व्यवहार क्यों महत्वपूर्ण है ?
Answer: प्रसामाजिक व्यवहार का अर्थ है दूसरों की सहायता करना या उनके साथ सहयोग करना. अधिकतर लोग अपने और दूसरों के हित के लिए काम करना चाहते हैं, और इन्हीं प्रयासों को प्रसामाजिक व्यवहार कहते हैं. यह एक व्यापक श्रेणी है जिसमें वे सभी कार्य और व्यवहार शामिल हैं जिनका उद्देश्य किसी स्वार्थ या लाभ के बिना व्यक्ति, समाज या मानवता की भलाई करना होता है.
प्रसामाजिक व्यवहार निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है -
1. सहायता के लिए: प्रसामाजिक व्यवहार का मुख्य काम समाज के सभी ज़रूरतमंद व्यक्तियों या समूहों की मदद करना है. इससे उनका भला होता है और उन्हें जीवन यापन में सहायता मिलती है. जैसे बाढ़ या भूकंप पीड़ितों की मदद करना, बीमार व्यक्तियों की सहायता करना और सहायता शिविरों का आयोजन करना.
2. समाज का विकास: प्रसामाजिक व्यवहार समाज में अच्छी चीजों को बढ़ावा देते हैं, जिससे व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का पूरा विकास हो सके.
3. स्वेच्छानुसार व्यवहार: प्रसामाजिक व्यवहार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यक्ति इन्हें किसी डर, स्वार्थ या दबाव के बिना अपनी मर्जी से करते हैं.
4. नैतिक कर्त्तव्य: लोग दूसरों की मदद करना अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं, जिससे उन्हें आत्म-संतुष्टि मिलती है.
ये सभी कारण प्रसामाजिक व्यवहार को समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण बनाते हैं, क्योंकि यह लोगों के बीच प्रेम, सहयोग और भलाई की भावना को बढ़ाता है.
In simple words: प्रसामाजिक व्यवहार महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दूसरों की मदद करता है, समाज को बेहतर बनाता है, लोग इसे अपनी इच्छा से करते हैं, और यह एक नैतिक कर्तव्य भी है जिससे आत्म-संतुष्टि मिलती है.

🎯 Exam Tip: प्रसामाजिक व्यवहार के महत्व को समझाने के लिए 'सहायता', 'समाज का विकास', 'स्वेच्छा' और 'नैतिक कर्तव्य' जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें. प्रत्येक बिंदु को एक छोटे वाक्य में समझाएँ.

RBSE Class 12 Psychology Chapter 6 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Psychology Chapter 6 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. जन्म के समय बच्चा होता है –
(अ) सामाजिक
(ब) असामाजिक
(स) नि: सामाजिक
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) नि: सामाजिक
In simple words: जब एक बच्चा पैदा होता है, तो वह समाज के नियमों और व्यवहारों को नहीं जानता. वह धीरे-धीरे सीखकर सामाजिक बनता है, इसलिए जन्म के समय उसे 'नि: सामाजिक' कहा जाता है.

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि जन्म के समय बच्चा सामाजिक गुणों के बिना होता है, और समाजीकरण की प्रक्रिया से ही वह सामाजिक प्राणी बनता है.

 

Question 2. समाजीकरण........... की प्रक्रिया है –
(अ) सामाजिक अधिगम
(ब) वाचिक अधिगम
(स) गत्यात्मक अधिगम
(द) प्रक्रियात्मक अधिगम
Answer: (अ) सामाजिक अधिगम
In simple words: समाजीकरण एक सीखने की प्रक्रिया है जहाँ बच्चे समाज के नियमों, मूल्यों और व्यवहारों को सीखते हैं. यह एक सामाजिक माहौल में होता है जहाँ वे दूसरों से सीखते हैं.

🎯 Exam Tip: समाजीकरण को 'सामाजिक अधिगम' के रूप में परिभाषित करें क्योंकि इसमें व्यक्ति समाज में रहकर मूल्यों और व्यवहारों को सीखता है.

 

Question 3. किस प्रक्रम में व्यक्ति जैविक प्राणी से सामाजिक प्राणी में विकसित हो जाता है –
(अ) विकास
(ब) समाजीकरण
(स) अनुकूलन
(द) अधिगम
Answer: (ब) समाजीकरण
In simple words: समाजीकरण वह तरीका है जिससे एक बच्चा जो सिर्फ एक जैविक प्राणी है, समाज के नियमों और तरीकों को सीखकर एक सामाजिक व्यक्ति बन जाता है.

🎯 Exam Tip: समाजीकरण की प्रक्रिया जैविक प्राणी को सामाजिक प्राणी में बदलने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. इसे समाज के मूल्यों और मानदंडों को सीखने के रूप में समझा जा सकता है.

 

Question 4. प्राथमिक समाजीकरण कहाँ होता है?
(अ) बाहरी समूह में
(ब) व्यावसायिक संघ में
(स) राजनीति में
(द) परिवार में
Answer: (द) परिवार में
In simple words: प्राथमिक समाजीकरण सबसे पहले परिवार में होता है. बच्चे अपने परिवार से बुनियादी बातें और सामाजिक व्यवहार सीखते हैं.

🎯 Exam Tip: प्राथमिक समाजीकरण के स्थान के रूप में परिवार को हमेशा याद रखें क्योंकि यह बच्चे के पहले सामाजिक अनुभव का केंद्र होता है.

 

Question 5. 'समाजीकरण की प्राथमिक पाठशाला' किसे कहा जाता है?
(अ) परिवार
(ब) पड़ोस
(स) समूह
(द) समुदाय
Answer: (अ) परिवार
In simple words: परिवार को समाजीकरण की पहली पाठशाला कहा जाता है क्योंकि बच्चा सबसे पहले अपने परिवार से ही समाज के नियम और कायदे सीखता है.

🎯 Exam Tip: परिवार समाजीकरण का सबसे महत्वपूर्ण और पहला माध्यम है. यह सामाजिक मूल्यों और व्यवहारों की नींव रखता है.

 

Question 6. अभिवृत्ति कैसी होती है?
(अ) प्रदत्त
(ब) अर्जित
(स) दोनों
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) अर्जित
In simple words: अभिवृत्ति जन्म से नहीं मिलती, बल्कि हम अपने अनुभवों और सीखने से इसे प्राप्त करते हैं.

🎯 Exam Tip: अभिवृत्ति को 'अर्जित' मानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि हमारी राय और विचार अनुभवों के माध्यम से बनते और बदलते हैं, जन्मजात नहीं होते.

 

Question 7. अनुनयात्मक संचार के कितने पक्ष होते हैं?
(अ) आठ
(ब) छः
(स) चार
(द) दो
Answer: (स) चार
In simple words: अनुनयात्मक संचार में चार मुख्य भाग होते हैं: जानकारी का स्रोत, संदेश, जिसे संदेश दिया जा रहा है (लक्ष्य), और संदेश देने का तरीका (माध्यम).

🎯 Exam Tip: अनुनयात्मक संचार के चारों पक्षों (स्रोत, संदेश, लक्ष्य, माध्यम) को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सभी अभिवृत्ति परिवर्तन में भूमिका निभाते हैं.

 

Question 8. लोगों के व्यवहार के कारणों को समझना एवं इन कारणों के सम्बन्ध में निर्णय लेना कहलाता है –
(अ) गुणारोपण
(ब) प्रत्यक्षीकरण
(स) विश्लेषण
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) गुणारोपण
In simple words: जब हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि कोई व्यक्ति कोई काम क्यों कर रहा है और उसके पीछे के कारणों का अनुमान लगाते हैं, तो इसे गुणारोपण कहते हैं.

🎯 Exam Tip: गुणारोपण की सही परिभाषा यह है कि यह दूसरों के व्यवहार के कारणों की पहचान करने और उनके आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया है.

 

Question 9. गुणारोपण कैसी प्रक्रिया है?
(अ) एकात्मक
(ब) द्विविमात्मक
(स) त्रिमुखी
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) द्विविमात्मक
In simple words: गुणारोपण एक द्विविमात्मक प्रक्रिया है, जिसका मतलब है कि हम न केवल दूसरों के व्यवहार के कारणों को देखते हैं, बल्कि अपने खुद के व्यवहार के कारणों को भी समझने की कोशिश करते हैं.

🎯 Exam Tip: गुणारोपण के द्विविमात्मक स्वरूप को समझें, जिसमें व्यक्ति अपने और दूसरों के व्यवहार के कारणों का विश्लेषण करता है.

 

Question 10. निम्न में से पूर्वाग्रह क्या है?
(अ) मनोवृत्ति
(ब) चिन्तन प्रवृत्ति
(स) संवेग
(द) अभिप्रेरणा
Answer: (अ) मनोवृत्ति
In simple words: पूर्वाग्रह एक तरह की मनोवृत्ति है. यह किसी व्यक्ति या समूह के प्रति पहले से बनाई गई सोच या भावना होती है, जो अक्सर तथ्यों पर आधारित नहीं होती.

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह को हमेशा एक मनोवृत्ति के रूप में पहचानें, न कि केवल एक विचार या भावना के रूप में, क्योंकि इसमें तीनों घटक शामिल होते हैं.

 

Question 11. वह व्यवहार जो विभेदन पर आधारित हो, कहलाता है –
(अ) पूर्वाग्रह
(ब) समाजीकरण
(स) प्रेरक व्यवहार
(द) सरलीकरण
Answer: (अ) पूर्वाग्रह
In simple words: जब कोई व्यक्ति पूर्वाग्रह के कारण किसी के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करता है, तो उस व्यवहार को पूर्वाग्रह से संबंधित व्यवहार कहते हैं.

🎯 Exam Tip: विभेद (discrimination) पूर्वाग्रह का एक क्रियात्मक रूप है. यदि व्यवहार भेदभावपूर्ण है, तो वह पूर्वाग्रह पर आधारित होता है.

 

Question 12. मूलभूत आवश्यकता क्या है?
(अ) हवा
(ब) पानी
(स) भोजन
(द) कानून
Answer: (स) भोजन
In simple words: भोजन एक मूलभूत आवश्यकता है क्योंकि यह जीवन जीने के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है, जिसके बिना व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता.

🎯 Exam Tip: मूलभूत आवश्यकताओं में वे चीजें शामिल होती हैं जो जीवित रहने और शारीरिक क्रियाओं के लिए आवश्यक होती हैं, जैसे भोजन, पानी और आश्रय.

 

Question 13. पूर्वाग्रह मूलतः किस मूल प्रवृत्ति पर आधारित है?
(अ) जीवन मूल प्रवृत्ति
(ब) प्रेम मूल प्रवृत्ति
(स) सुरक्षा मूल प्रवृत्ति
(द) घृणा मूल प्रवृत्ति
Answer: (द) घृणा मूल प्रवृत्ति
In simple words: पूर्वाग्रह अक्सर घृणा और नापसंदगी जैसी नकारात्मक भावनाओं से पैदा होता है, जिससे किसी समूह या व्यक्ति के प्रति नकारात्मक सोच बन जाती है.

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह अक्सर नकारात्मक भावनाओं जैसे घृणा या भय से जुड़ा होता है, जो इसे बनाए रखने में मदद करती हैं.

 

Question 14. निम्न में से कौन रूढ़ियुक्ति की विशेषता नहीं है?
(अ) यह एक मानसिक प्रतिमा है
(ब) यह अति सामान्यीकरण पर आधारित है
(स) परिवर्तन की विरोधी है
(द) यह सत्यता पर आधारित है
Answer: (द) यह सत्यता पर आधारित है
In simple words: रूढ़ियुक्ति अक्सर सच्चाई पर आधारित नहीं होती, बल्कि यह बिना किसी सबूत के बनाई गई एक सामान्य धारणा होती है.

🎯 Exam Tip: रूढ़ियुक्ति की मुख्य विशेषता यह है कि यह अक्सर तथ्यों पर आधारित नहीं होती और इसमें अति-सामान्यीकरण शामिल होता है.

 

Question 15. निम्नलिखित में से कौन पूर्वाग्रह निर्माण का प्रमुख कारण है?
(अ) सामाजिक दूरियाँ
(ब) श्रेष्ठता की भावनाएँ
(स) सांस्कृतिक भिन्नताएँ
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: सामाजिक दूरी, अपनी श्रेष्ठता की भावना और सांस्कृतिक अंतर, ये सभी पूर्वाग्रह बनने के मुख्य कारण हैं. ये कारक लोगों को दूसरों के प्रति पहले से ही राय बनाने के लिए प्रेरित करते हैं.

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह के कारणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये बताते हैं कि समाज में भेदभाव और नकारात्मक सोच कैसे विकसित होती है. कई कारक एक साथ मिलकर काम करते हैं.

 

Question 16. प्रतिसामाजिक या प्रसामाजिक व्यवहार का अर्थ है –
(अ) समाजोपयोगी व्यवहार करना
(ब) स्वार्थी व्यवहार करना
(स) असामाजिक व्यवहार करना
(द) दूसरों को नुकसान पहुँचाना
Answer: (अ) समाजोपयोगी व्यवहार करना
In simple words: प्रसामाजिक व्यवहार का मतलब है ऐसे काम करना जो समाज के लिए अच्छे हों और दूसरों की मदद करें, बिना किसी व्यक्तिगत लाभ के.

🎯 Exam Tip: प्रसामाजिक व्यवहार हमेशा दूसरों की भलाई के लिए किए गए सकारात्मक कार्यों को संदर्भित करता है, जो समाज में सौहार्द और सहयोग को बढ़ावा देते हैं.

 

Question 17. प्रतिसामाजिक या प्रसामाजिक व्यवहार की कितनी श्रेणियाँ हैं?
(अ) चार
(ब) तीन
(स) दो
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) दो
In simple words: प्रसामाजिक व्यवहार को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है, जो व्यक्ति की प्रेरणा और व्यवहार के तरीके पर निर्भर करती हैं.

🎯 Exam Tip: प्रसामाजिक व्यवहार की श्रेणियों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दूसरों की मदद करने के विभिन्न तरीकों और उनके पीछे की प्रेरणाओं को स्पष्ट करता है.

 

Question 18. प्रसामाजिक व्यवहार के दो प्रकार कौन से हैं?
(अ) सहायतापरक व्यवहार
(ब) परोपकारी व्यवहार
(स) दोनों ही
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) दोनों ही
In simple words: प्रसामाजिक व्यवहार के दो मुख्य प्रकार सहायतापरक व्यवहार (जब कोई मदद माँगता है) और परोपकारी व्यवहार (जब कोई मदद माँगे बिना ही दूसरों की भलाई के लिए काम करता है) हैं.

🎯 Exam Tip: सहायतापरक और परोपकारी व्यवहार के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें. परोपकारी व्यवहार में कोई व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा नहीं होती है.

 

Question 19. कौन-सा उदाहरण प्रसामाजिक व्यवहार का नहीं है?
(अ) बाढ़ पीड़ितों की मदद करना
(ब) गरीबों की मदद करना
(स) दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करना
(द) चोरी में चोर की सहायता करना
Answer: (द) चोरी में चोर की सहायता करना
In simple words: चोरी में चोर की सहायता करना एक गलत काम है और यह समाज के नियमों के खिलाफ है. यह दूसरों को नुकसान पहुँचाता है, इसलिए इसे प्रसामाजिक व्यवहार नहीं कहा जा सकता.

🎯 Exam Tip: प्रसामाजिक व्यवहार हमेशा दूसरों की भलाई और समाज के लिए सकारात्मक होता है. ऐसा कोई भी कार्य जिससे दूसरों को नुकसान हो, वह प्रसामाजिक व्यवहार नहीं कहलाता है.

 

Question 20. सहायतापरक व्यवहार का अर्थ है -
(अ) स्वयं को खतरे में डाले बिना ही दूसरों की मदद करना
(ब) स्वयं को खतरे में डालकर दूसरों की मदद करना
(स) मानकों की अपेक्षा करके दूसरों की मदद करना
(द) स्व हित के लिए दूसरों को मदद करना
Answer: (अ) स्वयं को खतरे में डाले बिना ही दूसरों की मदद करना
In simple words: सहायतापरक व्यवहार का मतलब है कि जब कोई व्यक्ति बिना खुद को किसी बड़े खतरे में डाले दूसरों की मदद करता है.

🎯 Exam Tip: सहायतापरक व्यवहार में सुरक्षा और व्यक्तिगत जोखिम का स्तर महत्वपूर्ण होता है. यह परोपकारी व्यवहार से थोड़ा भिन्न होता है, जहाँ जोखिम अधिक हो सकता है.

 

Question 1. समाजीकरण की प्रक्रिया का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें बच्चे विभिन्न माध्यमों और लोगों के जरिए सामाजिक-सांस्कृतिक जीवनशैली सीखते हैं. इसी प्रक्रिया के कारण एक बच्चा अपने समाज या समूह के सामाजिक-सांस्कृतिक तत्वों को अपना पाता है. आसान शब्दों में, समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिससे एक जैविक प्राणी सामाजिक प्राणी में बदलता है. इस प्रक्रिया में व्यक्ति दूसरे लोगों के साथ बातचीत करता है और समाज के मूल्यों, अपेक्षाओं, और व्यवहारों के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है. इस तरह वह समाज के अनुकूल ढलना सीखता है. यह एक सतत प्रक्रिया है जो जन्म से मृत्यु तक चलती रहती है और व्यक्ति को समाज का एक सक्रिय सदस्य बनाती है.
In simple words: समाजीकरण वह प्रक्रिया है जहाँ एक बच्चा समाज के नियम, मूल्य और व्यवहार सीखकर एक सामाजिक व्यक्ति बन जाता है. यह उसे समाज में ढलने में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: समाजीकरण की परिभाषा में 'सामाजिक अधिगम', 'जैविक से सामाजिक प्राणी में विकास' और 'जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें.

 

Question 2. समाजीकरण की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: समाजीकरण की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. समाजीकरण एक सीखने की प्रक्रिया है, जहाँ व्यक्ति समाज में रहकर कई तरह के काम और गतिविधियों को करना सीखता है.
2. यह एक इंटरैक्टिव प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति दूसरों के साथ बातचीत करके सीखता है.
3. यह जन्म से शुरू होकर जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है.
4. इस प्रक्रिया में व्यक्ति समाज के सांस्कृतिक नियमों और तत्वों को अपनाता है, जिससे सांस्कृतिक संरचना बनती है.
5. समाजीकरण व्यक्ति के विकास और बदलाव की प्रक्रिया है, क्योंकि इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व में सुधार होता है.
6. समाजीकरण अनुकूलन की प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति समाज या सामाजिक समूह के व्यवहार, मूल्यों, और विश्वासों को स्वीकार करता है और उनके साथ ढलना सीखता है.
ये सभी विशेषताएँ मिलकर समाजीकरण को एक जटिल और महत्वपूर्ण प्रक्रिया बनाती हैं जो व्यक्ति को समाज में सफल बनाती है.
In simple words: समाजीकरण एक जीवन भर चलने वाली सीखने की प्रक्रिया है. यह हमें समाज के नियमों को अपनाने और दूसरों के साथ बातचीत करके ढलने में मदद करती है.

🎯 Exam Tip: समाजीकरण की विशेषताओं को स्पष्ट और संक्षिप्त बिंदुओं में लिखें. 'सतत प्रक्रिया', 'सामाजिक अधिगम', और 'अनुकूलन' जैसे शब्दों का उपयोग करें.

 

Question 3. छवि निर्माण की विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: छवि निर्माण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. छवि निर्माण में जीवित लोग एक-दूसरे को देखते और समझते हैं. यह सिर्फ वस्तुओं को देखने जैसा नहीं होता.
2. छवि निर्माण को व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी कहते हैं.
3. इसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के बारे में अपनी राय या निर्णय बनाता है. इसलिए इसे निर्णय प्रक्रिया भी कहा जाता है. जब हम किसी व्यक्ति के बारे में सोचते हैं, तो हम उसकी एक मानसिक छवि बनाते हैं, जिसके आधार पर हम उससे बातचीत करते हैं.
ये विशेषताएँ दर्शाती हैं कि छवि निर्माण एक गतिशील और व्यक्तिपरक प्रक्रिया है, जो सामाजिक बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
In simple words: छवि निर्माण तब होता है जब लोग एक-दूसरे को देखते और समझते हैं, उनके बारे में राय बनाते हैं. यह एक निर्णय लेने की प्रक्रिया भी है, जहाँ हर व्यक्ति दूसरे की एक मानसिक छवि बनाता है.

🎯 Exam Tip: छवि निर्माण की विशेषताओं में 'व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण' और 'निर्णय प्रक्रिया' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें. स्पष्ट करें कि इसमें जीवित व्यक्तियों के बीच की बातचीत शामिल होती है.

 

Question 4. गुणारोपण की प्रकृति या स्वरूप का विवेचन करें।
Answer: गुणारोपण की प्रकृति को कई तरीकों से समझा जा सकता है:
1. गुणारोपण एक जटिल संज्ञानात्मक प्रक्रिया है. इसमें लोग दूसरों के व्यवहार और कार्यों के पीछे के कारणों को जानने की कोशिश करते हैं. यह केवल सतही जानकारी पर आधारित नहीं होता बल्कि गहन सोच और विश्लेषण की आवश्यकता होती है.
2. गुणारोपण का संबंध व्यवहार के 'क्यों' पक्ष से होता है. यह जानने का प्रयास करता है कि कोई व्यक्ति कोई काम क्यों कर रहा है.
3. गुणारोपण एक द्विविमात्मक प्रक्रिया है. इसमें व्यक्ति न केवल दूसरों के व्यवहार के कारणों को समझने की कोशिश करता है, बल्कि अपने खुद के व्यवहार के कारणों को भी समझता है और उससे संबंधित निर्णय लेता है.
4. गुणारोपण का संबंध सांकेतिक निर्णय से होता है. इसमें व्यक्ति केवल व्यवहार के कारण को समझने की कोशिश नहीं करता, बल्कि उसी संदर्भ में अपनी तरफ से कोई निर्णय भी लेता है.
यह प्रक्रिया हमें सामाजिक दुनिया को समझने और दूसरों के व्यवहार की भविष्यवाणी करने में मदद करती है.
In simple words: गुणारोपण एक जटिल प्रक्रिया है जहाँ हम व्यवहार के 'क्यों' कारणों को समझते हैं. इसमें हम दूसरों और अपने व्यवहार दोनों के कारणों का पता लगाकर निर्णय लेते हैं.

🎯 Exam Tip: गुणारोपण की प्रकृति का वर्णन करते समय 'जटिल संज्ञानात्मक', 'क्यों पक्ष', 'द्विविमात्मक' और 'सांकेतिक निर्णय' जैसे शब्दों का प्रयोग करें. इन बिंदुओं को स्पष्ट रूप से समझाएँ.

 

Question 5. छवि-निर्माण में अशाब्दिक संकेतों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: छवि-निर्माण में अशाब्दिक संकेत (जैसे हाव-भाव, आँखों का संपर्क) कई कारणों से बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. ये मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. जब लोग आमने-सामने बातचीत करते हैं, तो वे अपनी सच्ची भावनाओं को शब्दों में छिपा सकते हैं. लेकिन उनके अशाब्दिक व्यवहार से उनकी भावनाएँ काफी हद तक ज़ाहिर हो जाती हैं. इससे छवि बनाने में आसानी होती है, क्योंकि हमें व्यक्ति की सच्ची मंशा का अंदाजा मिल जाता है.
2. जब किसी व्यक्ति के बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाती है, तो अशाब्दिक संकेत छवि-निर्माण का आधार बनते हैं. ये संकेत तब और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि इनके आधार पर हम उन छिपी हुई बातों को पहचान सकते हैं जो आमने-सामने की स्थिति को जटिल बना रही थीं. अशाब्दिक संकेत अक्सर व्यक्ति की वास्तविक भावनाओं और इरादों का संकेत देते हैं, जो मौखिक संचार से स्पष्ट नहीं होते.
इस प्रकार, अशाब्दिक संकेत लोगों को बेहतर ढंग से समझने और उनके बारे में सही छवि बनाने में मदद करते हैं, खासकर उन स्थितियों में जहाँ जानकारी सीमित हो.
In simple words: अशाब्दिक संकेत छवि-निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये लोगों की सच्ची भावनाओं को बताते हैं, खासकर जब शब्द पर्याप्त नहीं होते या भावनाओं को छिपाया जा रहा होता है.

🎯 Exam Tip: अशाब्दिक संकेतों के महत्व को 'छिपी हुई भावनाओं को प्रकट करना' और 'सीमित जानकारी में मददगार' जैसे बिंदुओं से समझाएँ. उदाहरण के तौर पर हाव-भाव या आँख के संपर्क का उल्लेख करें.

 

Question 6. पूर्वाग्रह की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: पूर्वाग्रह की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. पूर्वाग्रह में अति-सामान्यीकरण का गुण पाया जाता है. इसका मतलब है कि किसी एक समूह के बारे में बिना सोचे-समझे बहुत व्यापक धारणाएँ बना ली जाती हैं.
2. पूर्वाग्रह में कठोरता अधिक होती है और इसमें लचीलापन कम होता है. इसे आसानी से बदला नहीं जा सकता.
3. पूर्वाग्रह व्यक्ति के देखने के तरीके, सोचने, याद रखने और भावनाओं को प्रभावित करता है, जिससे उसकी धारणाएँ प्रभावित होती हैं.
4. पूर्वाग्रह में बदलाव की संभावना बहुत कम होती है. लोग अपनी पूर्वाग्रहपूर्ण सोच को आसानी से छोड़ना नहीं चाहते, भले ही उन्हें नए तथ्य मिलें.
ये विशेषताएँ बताती हैं कि पूर्वाग्रह कितनी गहराई तक व्यक्ति की सोच और व्यवहार को प्रभावित करता है और क्यों इसे बदलना इतना मुश्किल होता है. यह समाज में भेदभाव और संघर्ष का एक बड़ा कारण बनता है.
In simple words: पूर्वाग्रह बहुत सामान्य, कठोर होता है और इसे बदलना मुश्किल होता है. यह हमारी सोच और भावनाओं को प्रभावित करता है, जिससे अक्सर गलत धारणाएँ बनती हैं.

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह की विशेषताओं में 'अति-सामान्यीकरण', 'कठोरता', 'परिवर्तन में न्यूनतम संभावना' और 'प्रत्यक्षीकरण को प्रभावित करना' जैसे मुख्य बिंदुओं पर जोर दें.

रूढ़ियुक्तियों की प्रकृति

 

प्रश्न 8. पूर्वाग्रह तथा रूढ़िवादी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता में कुछ खास अंतर होते हैं, जिन्हें नीचे दी गई तालिका में समझाया गया है। पूर्वाग्रह एक तरह की सोच है जो किसी व्यक्ति या समूह के प्रति हो सकती है, जबकि रूढ़िवादिता एक सामान्य धारणा है।

पूर्वाग्रहरूढ़ियुक्ति/रूढ़िवादी
1. पूर्वाग्रह एक मनोवृत्ति है।1. रूढ़ियुक्ति एक धारणा या प्रतिमा है।
2. पूर्वाग्रह अनुकूल अथवा प्रतिकूल होते हैं।2. रूढ़ियुक्ति में यह विशेषता नहीं पायी जाती है।
3. पूर्वाग्रह में रूढ़ियुक्तियों की अपेक्षा स्थिरता कम होती है।3. रूढ़ियुक्तियों में तुलनात्मक रूप से अधिक स्थिरता पायी जाती है।
4. पूर्वाग्रह विरोधी अभिवृत्ति या विरोधी भाव है।4. रूढ़ियुक्ति पूर्व कल्पित मतों का संकेत देती है।
5. ये सामाजिक एकता व संगठन को बनाये रखने में बाधक होते हैं।5. ये सामाजिक एकता व संगठन को बनाये रखने में सहायक होते हैं।

In simple words: पूर्वाग्रह एक सोच है जो किसी खास व्यक्ति या समूह के बारे में होती है, जबकि रूढ़ियुक्ति किसी चीज के बारे में एक आम धारणा होती है। पूर्वाग्रह बदल सकता है, लेकिन रूढ़ियुक्ति आमतौर पर ज्यादा पक्की होती है।

🎯 Exam Tip: जब भी दो अवधारणाओं में अंतर पूछा जाए, तो उन्हें एक तालिका में प्रस्तुत करना सबसे अच्छा तरीका है। यह तुलना को स्पष्ट और समझने में आसान बनाता है, जिससे पूरे अंक मिलने की संभावना बढ़ती है।

 

प्रश्न 9. प्रसामाजिक व्यवहार की प्रकृति पर प्रकाश डालिए।
Answer: प्रसामाजिक व्यवहार ऐसे काम होते हैं जो दूसरों की मदद के लिए किए जाते हैं, बिना किसी स्वार्थ के। इस व्यवहार में कई अच्छी बातें होती हैं जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए फायदेमंद होती हैं। इसकी प्रकृति को निम्नलिखित विशेषताओं से समझा जा सकता है:
1. यह समाज में विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के बजाय समाज के अनुकूल कामों को प्रोत्साहित करता है। इससे व्यक्ति, समाज और देश का पूरा विकास हो पाता है।
2. लोग प्रसामाजिक व्यवहार किसी डर, स्वार्थ या जल्दबाजी में नहीं करते। बल्कि वे इसे अपनी इच्छा से करते हैं।
3. इसे महत्वपूर्ण मानने का एक कारण यह भी है कि लोग दूसरों की मदद करना अपना सबसे बड़ा नैतिक कर्तव्य समझते हैं। इसी भावना से वे दूसरों की सहायता करते हैं।
4. ऐसा व्यवहार करने वाले व्यक्ति इसे अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं और ऐसा करके उन्हें अंदर से खुशी मिलती है। समाज में शांति और सहयोग बढ़ाने के लिए यह व्यवहार बहुत जरूरी है।
In simple words: प्रसामाजिक व्यवहार मतलब बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करना। यह समाज के विकास में मदद करता है, लोग इसे अपनी खुशी और कर्तव्य मानकर करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रसामाजिक व्यवहार की परिभाषा देते समय 'निस्वार्थ' और 'दूसरों की भलाई' जैसे प्रमुख शब्दों का प्रयोग अवश्य करें। उदाहरण देकर स्पष्ट करें कि यह कैसे समाज के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 10. अनुकरण व प्रतिरूपण की अवधारणा को समझाइए।
Answer: अनुकरण और प्रतिरूपण दोनों ही सीखने के तरीके हैं, खासकर समाजीकरण की प्रक्रिया में। ये दोनों ही हमें दूसरों के व्यवहार को देखकर या उनकी नकल करके सीखने में मदद करते हैं।
A. अनुकरण:
1. यह समाजीकरण की एक मुख्य तकनीक है।
2. दूसरों के व्यवहारों को जान-बूझकर या अनजाने में नकल करना ही अनुकरण कहलाता है।
3. अनुकरण के द्वारा व्यक्ति सहयोग, परोपकार और अन्य सामाजिक व्यवहारों को सीखता है। बच्चे अपने बड़ों को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं।
B. प्रतिरूपण:
1. यह वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने लिए एक या इससे भी बेहतर आदर्श मॉडल चुनता है और उनके व्यवहार को देखकर उसकी नकल करता है। यहां सीखना थोड़ा अधिक सोच-समझकर होता है।
2. बच्चे अक्सर अपने माता-पिता को ही अपना आदर्श मानते हैं। वे उनके व्यवहार को ध्यान से देखते हैं और वैसा ही व्यवहार खुद भी सीखते हैं। यह एक तरह का मॉडलिंग या रोल-मॉडलिंग है।
In simple words: अनुकरण का मतलब है दूसरों के काम देखकर वैसा ही करना। प्रतिरूपण का मतलब है किसी को अपना आदर्श मानकर उसके जैसा व्यवहार सीखना।

🎯 Exam Tip: अनुकरण और प्रतिरूपण दोनों ही सीखने के महत्वपूर्ण तरीके हैं। अंतर को स्पष्ट करने के लिए, अनुकरण को "सीधी नकल" और प्रतिरूपण को "आदर्श व्यक्ति से सीखना" के रूप में समझें।

 

RBSE Class 12 Psychology Chapter 6 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. समाजीकरण की प्रमुख प्रविधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: मनोवैज्ञानिकों ने समाजीकरण की कई मुख्य विधियाँ बताई हैं जिनसे बच्चे और व्यक्ति समाज में घुलना-मिलना सीखते हैं। यह प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है। ये प्रविधियाँ इस प्रकार हैं:
1. सुझाव: सुझाव समाजीकरण का एक अहम तरीका है। बचपन से ही बच्चों को अपने माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त और शिक्षकों से समय-समय पर सलाह मिलती है। ये सलाहें न केवल व्यक्तित्व के विकास में मदद करती हैं, बल्कि उनके समाजीकरण में भी बहुत काम आती हैं। ये हमें सही और गलत का भेद सिखाती हैं।
2. सहानुभूति: सहानुभूति भी समाजीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सहानुभूति से व्यक्ति में कई भावनाएं विकसित होती हैं। इसके जरिए व्यक्ति कई अच्छे व्यवहार सीखता है। रिसर्च से पता चला है कि जिन लोगों में बचपन से ही सहानुभूति होती है, उनका समाजीकरण बेहतर तरीके से होता है।
3. पुरस्कार एवं दंड: समाजीकरण की प्रक्रिया में पुरस्कार और दंड का बहुत महत्व होता है। जब कोई अच्छा व्यवहार करता है, तो उसे पुरस्कार मिलता है, जिससे वह उस व्यवहार को दोहराना चाहता है। वहीं, गलत व्यवहार पर दंड मिलने से व्यक्ति उसे दोबारा करने से बचता है।
4. प्रतियोगिता: समाजीकरण की प्रक्रिया में प्रतियोगिता का भी बड़ा योगदान है। प्रतिस्पर्धा वाले व्यवहारों के दौरान व्यक्ति अपने आप कई सामाजिक व्यवहार सीख लेता है। इससे उसके समाजीकरण की प्रक्रिया तेज और विविध हो जाती है। यह हमें मिलकर काम करना भी सिखाता है।
5. पालन-पोषण की प्रणाली: पालन-पोषण का तरीका समाजीकरण की सबसे महत्वपूर्ण विधि है। पालन-पोषण की व्यवस्थाएं ही बच्चों के सामाजिक विकास की दिशा तय करती हैं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती हैं। परिवार का माहौल और माता-पिता का व्यवहार बच्चों के समाजीकरण पर गहरा असर डालता है।
इस तरह यह साफ है कि व्यक्ति का समाजीकरण कई तरीकों से पूरा होता है। हर तरीका बच्चे को समाज का एक अच्छा हिस्सा बनने में मदद करता है।
In simple words: समाजीकरण वह तरीका है जिससे हम समाज में रहना सीखते हैं। इसमें सुझाव, सहानुभूति, इनाम-सजा, प्रतियोगिता और परिवार का साथ जैसी चीजें शामिल होती हैं।

🎯 Exam Tip: समाजीकरण की प्रविधियों का वर्णन करते समय प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट रूप से समझाएँ और उदाहरण दें। यह उत्तर को प्रभावी बनाता है और अच्छे अंक दिलाता है।

 

प्रश्न 2. छवि निर्माण (व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण) तथा वस्तु प्रत्यक्षीकरण (वस्तु-निर्माण) में अन्तर बताइए।
Answer: छवि निर्माण (जिसे व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण भी कहते हैं) और वस्तु प्रत्यक्षीकरण दोनों ही यह समझने के तरीके हैं कि हम दुनिया को कैसे देखते हैं। हालांकि, इनमें कुछ खास अंतर होते हैं। वस्तु प्रत्यक्षीकरण निर्जीव चीजों को समझने पर केंद्रित होता है, जबकि व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण लोगों को समझने पर केंद्रित होता है। मनोवैज्ञानिकों ने इन दोनों के बीच कुछ मुख्य अंतर बताए हैं:
1. अमूर्त विशेषताओं के प्रत्यक्षण के आधार पर: व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण में हम दूसरे व्यक्ति की अंदरूनी बातें जैसे गुण, भावनाएं, सोच और बुद्धिमत्ता को समझने की कोशिश करते हैं। इसके उलट, वस्तु प्रत्यक्षीकरण में हम किसी ठोस चीज या उद्दीपक को देखते या महसूस करते हैं।
2. स्पष्टता का स्तर: व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण में अक्सर स्पष्टता कम होती है, क्योंकि लोगों के विचारों और भावनाओं को पूरी तरह समझना मुश्किल होता है। जबकि वस्तु प्रत्यक्षीकरण में स्पष्टता अधिक होती है क्योंकि चीजें अक्सर जैसी दिखती हैं वैसी ही होती हैं।
3. पक्षपात की संभावना: व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण में पक्षपात होने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि हमारे अपने अनुभव और पूर्वाग्रह दूसरे व्यक्ति को देखने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं। इसके विपरीत, वस्तु प्रत्यक्षीकरण में गलतियों और पक्षपातों की संभावना कम होती है।
4. सक्रिय कारक: व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण में 'प्रकार्यात्मक कारक' ज्यादा सक्रिय होते हैं, यानी हमारी अपनी जरूरतें और लक्ष्य दूसरे व्यक्ति को देखने के तरीके को प्रभावित करते हैं। जबकि वस्तु प्रत्यक्षीकरण में 'संरचनात्मक कारक' अधिक सक्रिय होते हैं, यानी वस्तु की बनावट और उसके भौतिक गुण उसे देखने के तरीके को प्रभावित करते हैं।
In simple words: व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण में हम लोगों को समझते हैं, जो थोड़ा मुश्किल और पक्षपात भरा हो सकता है। वस्तु प्रत्यक्षीकरण में हम चीजों को समझते हैं, जो ज्यादा सीधा और साफ होता है।

🎯 Exam Tip: व्यक्ति और वस्तु प्रत्यक्षीकरण में अंतर स्पष्ट करते समय, यह याद रखें कि लोगों को समझना अधिक जटिल होता है, जबकि निर्जीव वस्तुओं को समझना अपेक्षाकृत सरल होता है। तालिका या बिंदुओं का उपयोग करके अंतर को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 3. पूर्वाग्रह के स्वरूप पर प्रकाश डालिए।
Answer: पूर्वाग्रह एक तरह की सोच या भावना है जो किसी व्यक्ति या समूह के प्रति पहले से ही बनी होती है, अक्सर बिना किसी ठोस जानकारी के। इसके स्वरूप को इन मुख्य बातों से समझा जा सकता है:
1. पूर्वाग्रह अर्जित होता है: पूर्वाग्रह जन्म से नहीं होते, बल्कि इन्हें धीरे-धीरे सीखा जाता है। जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता है, सीखने की प्रक्रिया में ये तेज होते जाते हैं। लोग समाजीकरण के साधनों जैसे परिवार, पड़ोस और संस्कृति से पूर्वाग्रहों को सीखते हैं और किसी खास समूह या समुदाय के प्रति उन्हें अपना लेते हैं।
2. पूर्वाग्रह सकारात्मक या नकारात्मक होता है: पूर्वाग्रह अच्छे या बुरे दोनों तरह के हो सकते हैं। जैसे, 'कुछ लोग आलसी होते हैं' एक नकारात्मक पूर्वाग्रह है। वहीं, 'कुछ लोग बहुत मेहनती होते हैं' एक सकारात्मक पूर्वाग्रह हो सकता है।
3. पूर्वाग्रह एक अंतर्समूह घटना है: पूर्वाग्रह का असल संबंध किसी समूह, वर्ग या समुदाय से होता है। एक पूर्वाग्रही व्यक्ति की सोच किसी एक व्यक्ति की ओर नहीं, बल्कि पूरे समूह की ओर होती है। इस वजह से वह व्यक्तिगत अंतरों को अनदेखा कर देता है।
4. पूर्वाग्रह का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता है: पूर्वाग्रह अक्सर तथ्यों पर आधारित नहीं होते हैं, बल्कि मनगढ़ंत धारणाओं पर आधारित होते हैं। इनमें सच्चाई कम और कल्पना ज्यादा होती है।
5. अन्य आधार:
• पूर्वाग्रह स्थिर और पक्के होते हैं।
• पूर्वाग्रह अक्सर अधूरे और पक्षपात भरे होते हैं।
• पूर्वाग्रह का एक खास महत्व भी होता है (जैसे अपने समूह को बेहतर समझना)।
• पूर्वाग्रह अक्सर बुरे विचारों पर आधारित होते हैं।
• पूर्वाग्रह चेतन (पता) और अचेतन (अनजाने) दोनों हो सकते हैं।
• पूर्वाग्रह गलत धारणाओं और पक्की सामान्यीकरण पर आधारित होते हैं।
In simple words: पूर्वाग्रह वह सोच है जो हम बिना किसी जानकारी के बनाते हैं। इसे सीखा जाता है, यह अच्छा या बुरा हो सकता है, अक्सर किसी समूह के बारे में होता है, और सच नहीं होता। यह हमारी सोच को बहुत प्रभावित करता है।

🎯 Exam Tip: पूर्वाग्रह के स्वरूप को बताते समय यह ध्यान रखें कि यह जन्मजात नहीं होता, बल्कि सीखा जाता है। इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 4. समाज में रूढ़िवादी विचारधारा के विकास के कारण या उसके स्रोतों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: समाज में रूढ़िवादी विचारधारा यानी पुरानी और घिसी-पिटी सोच कई कारणों से विकसित होती है। ये कारण हमें यह समझने में मदद करते हैं कि कुछ विचार समाज में क्यों टिके रहते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहते हैं। इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. प्रतिष्ठा और सुझाव: समाज में जो प्रतिष्ठित लोग होते हैं, उनके विचारों का बहुत प्रभाव पड़ता है। अगर वे किसी रूढ़िवादी विचार पर भरोसा करते हैं और उसे मानते हैं, तो दूसरे लोग भी धीरे-धीरे उन विचारों को सीख लेते हैं और अपना लेते हैं।
2. परम्परा एवं लोकरीतियाँ: समाजीकरण की प्रक्रिया में बच्चों को सिखाया जाता है कि उन्हें अपने समूह की परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करना चाहिए। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए, समूह के सदस्य समूह में प्रचलित रूढ़िवादी विचारों को अपना लेते हैं और उन्हें सुरक्षित रखते हैं। इस तरह ये विचार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलते रहते हैं।
3. अज्ञानता: जब लोगों के पास पर्याप्त और सही जानकारी नहीं होती, तो वे अक्सर दूसरों की पहले से बनी धारणाओं पर भरोसा कर लेते हैं। धीरे-धीरे ये धारणाएं उनके दिमाग में एक तस्वीर बना लेती हैं। यह तस्वीर उनकी सोचने और तर्क करने की क्षमता को प्रभावित करती है, और वे अपने मन में रूढ़िवादी विचार बना लेते हैं जो अक्सर तर्क पर आधारित नहीं होते।
4. जनसमूह माध्यम: रूढ़िवादिताओं के बनने और फैलने में जनसंचार माध्यमों का भी बड़ा हाथ होता है। किताबें, रेडियो, टीवी और सिनेमा जैसे माध्यम विभिन्न समूहों और समुदायों के प्रति अलग-अलग रूढ़िवादिताओं को सिखाते हैं। ये माध्यम बड़े पैमाने पर लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं।
5. कटु अनुभव: व्यक्ति के बुरे और दुखद अनुभव भी कई रूढ़िवादिताओं को जन्म देते हैं और उन्हें मजबूत करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी को किसी विशेष समूह के व्यक्ति से बुरा अनुभव हुआ हो, तो वह उस पूरे समूह के प्रति एक नकारात्मक रूढ़िवादिता विकसित कर सकता है।
इस प्रकार यह स्पष्ट है कि रूढ़िवादिताओं के उद्भव, विकास और पोषण में अलग-अलग कारण या स्रोत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: समाज में पुरानी सोच इसलिए बनती है क्योंकि बड़े लोग उसे मानते हैं, परंपराएं उसे बनाए रखती हैं, लोग सही जानकारी नहीं रखते, मीडिया उसे फैलाता है, और बुरे अनुभव भी इसे जन्म देते हैं।

🎯 Exam Tip: रूढ़िवादी विचारधारा के कारणों का वर्णन करते समय, प्रत्येक कारण को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें। उदाहरणों का उपयोग कर अपने बिंदुओं को और अधिक प्रभावी बनाएं।

 

प्रश्न 5. अभिवृत्तियों की प्रकृति/विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: अभिवृत्तियाँ हमारे सोचने और महसूस करने के तरीके को दिखाती हैं। वे हमारी पसंद और नापसंद को बताती हैं। अभिवृत्तियों की प्रकृति या विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. संबंध स्पष्ट करना: कोई भी खास चीज, व्यक्ति, समूह, संस्था, मूल्य या मान्यता के प्रति हमारा झुकाव या राय, यह साफ करती है कि हमारा उन सबके प्रति कैसा संबंध है।
2. अर्जित प्रवृत्ति: कोई भी अभिवृत्ति हमें जन्म से नहीं मिलती, बल्कि हम इसे अपने अनुभवों से सीखते हैं। यह जन्मजात प्रेरणाओं से अलग होती है। जैसे, भूख जन्मजात होती है, लेकिन किसी खास तरह के भोजन के प्रति हमारी पसंद एक सीखी हुई आदत होती है।
3. लचीलापन: अभिवृत्तियों में बदलाव और सुधार की गुंजाइश होती है। इसलिए वे बहुत लचीली होती हैं और किसी एक स्थिति तक सीमित नहीं होतीं।
4. दिशा और परिणाम: अभिवृत्तियों में दिशा (सकारात्मक या नकारात्मक) और परिणाम दोनों होते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी चीज की ओर आकर्षित होता है, तो वह सकारात्मक अभिवृत्ति कहलाती है। और जब वह उससे दूर भागना चाहता है, तो वह नकारात्मक अभिवृत्ति कहलाती है। अभिवृत्तियों में भावनाओं की तीव्रता भी जुड़ी होती है, जिससे पता चलता है कि यह प्रवृत्ति कितनी मजबूत है।
In simple words: अभिवृत्तियाँ हमारी पसंद-नापसंद बताती हैं। ये जन्म से नहीं मिलतीं, बल्कि सीखी जाती हैं और बदल भी सकती हैं। ये हमारी भावनाओं और व्यवहार की दिशा तय करती हैं।

🎯 Exam Tip: अभिवृत्तियों की विशेषताओं का वर्णन करते समय, 'अर्जित' और 'लचीलापन' जैसे मुख्य बिंदुओं पर जोर दें। यह स्पष्ट करें कि अभिवृत्तियाँ किसी व्यक्ति के संबंध को कैसे दर्शाती हैं।

 

प्रश्न 6. व्यक्ति या बालक की अभिवृत्तियों में किस प्रकार से बदलाव लाया जा सकता है?
Answer: व्यक्ति या बच्चों की अभिवृत्तियों को कई तरीकों से बदला जा सकता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। अभिवृत्तियों में बदलाव लाने के मुख्य तरीके इस प्रकार हैं:
1. सर्वांगीण विकास: अभिवृत्तियों का विकास बच्चे/व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास से जुड़ा होता है। इसलिए यह कोशिश करनी चाहिए कि बच्चे का पूरा विकास ठीक से हो सके। जब बच्चा स्वस्थ और खुश रहता है, तो वह नई और सकारात्मक अभिवृत्तियों को आसानी से अपनाता है।
2. आत्म-प्रतिष्ठा और अहंकार: अभिवृत्तियों का संबंध व्यक्ति के आत्म-सम्मान और अहंकार से भी गहरा होता है। कोई भी व्यक्ति ऐसी अभिवृत्ति नहीं अपनाना चाहेगा जिससे उसकी प्रतिष्ठा या सम्मान पर आंच आए। इसलिए अभिवृत्तियों में बदलाव लाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति का आत्म-सम्मान बना रहे।
3. सामाजिक वातावरण: अभिवृत्तियाँ सामाजिक माहौल में ही बनती और बढ़ती हैं। इसलिए इस वातावरण से जुड़ी सभी चीजों को इस तरह नियंत्रित करना चाहिए जिससे अच्छी और मनचाही अभिवृत्तियाँ विकसित हो सकें। स्कूल, दोस्त और समाज का प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण होता है।
4. परिवार का मार्गदर्शन: अभिवृत्तियाँ घर और परिवार से ही शुरू होती हैं। इसलिए माता-पिता और परिवार के सदस्यों को सही मार्गदर्शन देना चाहिए ताकि बच्चों में अच्छी अभिवृत्तियाँ विकसित हों। परिवार का माहौल भी ऐसा बने कि सभी बड़े सदस्य खुद में सुधार करें, जिसका असर छोटे सदस्यों पर पड़े और उनकी अभिवृत्तियों में सही बदलाव आए।
5. सकारात्मकता को बढ़ावा: यह ध्यान रखना चाहिए कि सकारात्मक अभिवृत्तियों का विकास, नकारात्मक अभिवृत्तियों के विकास से ज्यादा आसान होता है। उदाहरण के लिए, ईमानदारी या लोकतंत्र के प्रति अच्छी अभिवृत्ति विकसित करना बेईमानी या तानाशाही के प्रति बुरी अभिवृत्ति विकसित करने से ज्यादा आसान है। हमें हमेशा सकारात्मक बदलाव को प्राथमिकता देनी चाहिए।
In simple words: लोगों की सोच बदलने के लिए हमें उनके पूरे विकास पर ध्यान देना चाहिए, उनके आत्म-सम्मान का ख्याल रखना चाहिए, अच्छा सामाजिक माहौल बनाना चाहिए, परिवार से सही सीख देनी चाहिए और हमेशा सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देना चाहिए।

🎯 Exam Tip: अभिवृत्तियों में परिवर्तन लाने के तरीकों को समझाते समय, यह दर्शाना महत्वपूर्ण है कि यह एक बहुआयामी प्रक्रिया है। परिवार, समाज और व्यक्तिगत विकास सभी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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