RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Psychology. Our expert-created answers for Class 12 Psychology are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श RBSE Solutions for Class 12 Psychology

For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Psychology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श solutions will improve your exam performance.

Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Psychology Chapter 5 अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 12 Psychology Chapter 5 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. मनश्चिकित्सा का उद्देश्य निम्न में से है –
(अ) आन्तरिक संघर्षों एवं तनाव को कम करना
(ब) कुसमायोजित व्यवहार में परिवर्तन
(स) अंत: शक्ति में वृद्धि
(द) सभी
Answer: (द) सभी
In simple words: मनश्चिकित्सा का मुख्य लक्ष्य व्यक्ति के अंदरूनी झगड़ों और तनाव को कम करना है, जिससे उनके व्यवहार में सुधार हो और वे अपनी छिपी हुई ताकत को पहचान सकें। यह एक संपूर्ण प्रक्रिया है जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।

🎯 Exam Tip: मनश्चिकित्सा के उद्देश्यों को याद करते समय, 'तनाव कम करना', 'व्यवहार में सुधार', और 'आत्म-शक्ति बढ़ाना' इन तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 2. चिकित्सात्मक सम्बन्ध है –
(अ) सेवार्थी-परिवार के बीच का
Answer: (अ) सेवार्थी-परिवार के बीच का

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न अधूरा है और इसका उत्तर स्पष्ट नहीं है। दिए गए विकल्पों में से, 'सेवार्थी-परिवार के बीच का' एकमात्र विकल्प है। हालाँकि, सामान्यतः चिकित्सात्मक सम्बन्ध चिकित्सक और सेवार्थी के बीच होता है।

 

Question 3. मनोगत्यात्मक चिकित्सा के प्रतिपादक हैं –
(अ) कार्ल रोजर्स
(ब) वाटसन
(स) फ्रायड
(द) ओल्प।
Answer: (स) फ्रायड
In simple words: मनोगत्यात्मक चिकित्सा की शुरुआत सिगमंड फ्रायड ने की थी। यह तरीका इंसानों के अनजाने विचारों और भावनाओं पर ध्यान देता है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के प्रतिपादकों के नाम हमेशा याद रखें, जैसे फ्रायड मनोगत्यात्मक चिकित्सा के लिए जाने जाते हैं।

 

Question 4. मनश्चिकित्सा की सबसे प्राचीन विधि है –
(अ) व्यवहार चिकित्सा
(ब) मनोगत्यात्मक चिकित्सा
(स) संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा
(द) मानवतावादी-अस्तित्वपरक चिकित्सा
Answer: (ब) मनोगत्यात्मक चिकित्सा
In simple words: मनोगत्यात्मक चिकित्सा मन के अंदर छुपी हुई बातों को समझने का सबसे पुराना तरीका है। यह विधि लोगों के व्यवहार को समझने में बहुत मदद करती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न चिकित्सा विधियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझना आपको उनकी जड़ें और विकास को पहचानने में मदद करेगा।

 

Question 5. व्यवहार चिकित्सा के मुख्य समर्थक हैं –
(अ) फ्रायड
(ब) ओल्प
(स) युंग
(द) रोजर्स
Answer: (ब) ओल्प
In simple words: व्यवहार चिकित्सा, जो लोगों के व्यवहार को बदलने पर केंद्रित है, ओल्प द्वारा बहुत अधिक समर्थन प्राप्त है। उनका काम इस क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: जब समर्थक या प्रतिपादक का नाम पूछा जाए, तो सीधे उस व्यक्ति का नाम बताएं जिसने उस विधि को प्रमुखता से आगे बढ़ाया हो।

 

Question 6. अलबर्ट एलिस ने किस चिकित्सा विधि का प्रतिपादन किया था?
(अ) व्यवहार चिकित्सा
(ब) रैसनल-इमोटिव चिकित्सा
(स) मॉडेलिंग
(द) विरुचि चिकित्सा
Answer: (ब) रैसनल-इमोटिव चिकित्सा

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न अधूरा है और इसका उत्तर स्पष्ट नहीं है। दिए गए विकल्पों में से, 'रैसनल-इमोटिव चिकित्सा' एकमात्र विकल्प है। अलबर्ट एलिस रैसनल-इमोटिव बिहेवियर थेरेपी (REBT) के प्रतिपादक हैं।

 

Question 8. स्वप्नों के अध्ययन के आधार पर मानसिक विकृति की पहचान किस विधि में होती है?
(अ) व्यवहार चिकित्सा
(ब) मनोविश्लेषणात्मक चिकित्सा
(स) व्यक्ति केन्द्रित चिकित्सा
(द) संज्ञानात्मक चिकित्सा
Answer: (ब) मनोविश्लेषणात्मक चिकित्सा
In simple words: स्वप्न विश्लेषण एक खास तरीका है जिसमें व्यक्ति के सपनों को समझकर उसकी मानसिक समस्याओं का पता लगाया जाता है। यह मन के छिपे हुए हिस्सों को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: मनोविश्लेषणात्मक चिकित्सा को सिगमंड फ्रायड से जोड़ें, और यह याद रखें कि यह विधि अचेतन मन और स्वप्न विश्लेषण पर केंद्रित है।

 

Question 9. गेस्टाल्ट का अर्थ है –
(अ) आधा
(ब) अर्थ
(स) कम
(द) समग्र
Answer: (द) समग्र
In simple words: गेस्टाल्ट शब्द का मतलब है 'पूरा' या 'समग्र'। यह सिद्धांत कहता है कि हम चीजों को उनके अलग-अलग हिस्सों में नहीं, बल्कि पूरे रूप में देखते और समझते हैं।

🎯 Exam Tip: गेस्टाल्ट (Gestalt) शब्द एक जर्मन शब्द है। इसका अर्थ 'रूप', 'आकार', 'समग्र' या 'विन्यास' होता है, जो 'संपूर्णता' की अवधारणा को दर्शाता है।

 

Question 10. वैकल्पिक चिकित्सा का प्रकार नहीं है –
(अ) शेपिंग
(ब) एक्यूपंचर
(स) योग
(द) ध्यान
Answer: (अ) शेपिंग
In simple words: शेपिंग (shaping) व्यवहार चिकित्सा का एक तरीका है, न कि वैकल्पिक चिकित्सा। वैकल्पिक चिकित्सा में योग, ध्यान, और एक्यूपंचर जैसी चीजें आती हैं।

🎯 Exam Tip: 'शेपिंग' एक व्यवहार संशोधन तकनीक है, जबकि 'एक्यूपंचर', 'योग' और 'ध्यान' वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियाँ हैं। इन भेदों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 2. मनश्चिकित्सा के लक्ष्य बताइए।
Answer: मनश्चिकित्सा के कई महत्वपूर्ण लक्ष्य होते हैं, जो व्यक्ति की मानसिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। ये लक्ष्य इस प्रकार हैं:
1. यह लोगों को सही काम करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे वे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।
2. यह भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने में मदद करता है, जिससे तनाव और भावनात्मक दबाव कम होता है।
3. यह व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को छोड़ने और अच्छी आदतें अपनाने में सहायता करता है।
4. यह ज्ञान प्राप्त करने और सही निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे व्यक्ति अधिक जागरूक और सक्षम बन सके।
5. यह शारीरिक समस्याओं पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है, क्योंकि मन और शरीर आपस में जुड़े होते हैं।
6. यह सेवार्थी को अपने सामाजिक माहौल में बदलाव लाने में मदद करता है, ताकि वे बेहतर ढंग से समायोजित हो सकें।
In simple words: मनश्चिकित्सा का लक्ष्य व्यक्ति को सही काम करने के लिए प्रेरित करना, भावनाओं को व्यक्त करके तनाव कम करना, आदतों को बदलना, सही निर्णय लेने में मदद करना, शारीरिक स्थिति सुधारना और सामाजिक माहौल को बेहतर बनाना है।

🎯 Exam Tip: मनश्चिकित्सा के लक्ष्यों को याद करते समय, 'प्रेरणा', 'भावनात्मक संतुलन', 'व्यवहार परिवर्तन', 'निर्णय लेने की क्षमता', 'शारीरिक स्वास्थ्य', और 'सामाजिक समायोजन' जैसे मुख्य शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 3. स्थानान्तरण के प्रकार बताइए।
Answer: स्थानान्तरण को अंग्रेजी में 'Transference' भी कहते हैं, जिसका अर्थ है अन्यारोपण। इस प्रक्रिया में, चिकित्सीय सत्र के दौरान जैसे-जैसे सेवार्थी और चिकित्सक के बीच बातचीत बढ़ती है, वैसे-वैसे सेवार्थी अपने जीवन के अन्य महत्वपूर्ण लोगों की तरह ही चिकित्सक के प्रति अपनी भावनाएं और सोच विकसित कर लेता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ पुरानी भावनाएं नए संबंधों पर लागू होती हैं। स्थानान्तरण मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:
1. धनात्मक स्थानान्तरण: इसमें सेवार्थी चिकित्सक के प्रति प्यार, स्नेह और भरोसे जैसी सकारात्मक भावनाएं दिखाता है। यह चिकित्सा के लिए अच्छा होता है क्योंकि इससे मरीज खुल कर बात करता है।
2. ऋणात्मक स्थानान्तरण: इसमें सेवार्थी चिकित्सक के प्रति नकारात्मक भावनाएं, जैसे गुस्सा, नाराजगी, विरोध या अविश्वास व्यक्त करता है। यह चिकित्सा प्रक्रिया में रुकावट डाल सकता है, लेकिन इसे समझना भी उपचार का हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: स्थानान्तरण को 'Transference' के रूप में याद रखें, और इसके धनात्मक व ऋणात्मक दोनों प्रकारों को उनकी भावनाओं के आधार पर पहचानें। यह मानसिक उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 5. व्यवहार चिकित्सा क्या है?
Answer: आइजेंक के अनुसार, व्यवहार उपचार एक ऐसा तरीका है जो इंसान के व्यवहार और भावनाओं को सीखने के नियमों का उपयोग करके अच्छी दिशा में बदलने की कोशिश करता है। यह उपचार विधि कुछ खास बातों पर आधारित है:
1. कभी-कभी लोग सामान्य व्यवहार नहीं सीख पाते या उन्हें सीखने के सही मौके नहीं मिलते, जिससे असामान्य व्यवहार पैदा होता है।
2. उपचार का काम व्यक्ति को सही व्यवहार सीखने के लिए मौके देना है। इससे वे गलत और अस्वस्थ व्यवहार को छोड़कर सही और स्वस्थ व्यवहार अपना सकें। यह सब सीखने के सिद्धांतों पर आधारित है। व्यवहार चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि व्यवहार कैसे सीखे जाते हैं और उन्हें कैसे बदला जा सकता है।
In simple words: व्यवहार चिकित्सा एक तरीका है जो सीखने के नियमों का उपयोग करके लोगों के गलत व्यवहार और भावनाओं को सही करता है। इसका मकसद व्यक्ति को सही प्रतिक्रियाएँ सिखाकर उसे बेहतर बनाना है।

🎯 Exam Tip: व्यवहार चिकित्सा की परिभाषा और उसके दो मुख्य आधारों को स्पष्ट रूप से समझें। यह 'सीखने के नियमों' पर आधारित है और 'असामान्य व्यवहार को बदलने' का लक्ष्य रखती है।

 

Question 6. क्रमबद्ध असंवेदीकरण को समझाइए।
Answer: क्रमबद्ध असंवेदीकरण को अंग्रेजी में 'Systematic desensitisation' कहा जाता है। यह व्यवहार चिकित्सा का एक तरीका है जिसे ओल्प (Wolpe) ने बनाया था। यह 'अन्योन्य प्रावरोध' के सिद्धांत पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार, जब दो विपरीत ताकतें एक साथ मौजूद होती हैं, तो कमजोर ताकत रुक जाती है। इस विधि में प्रति-अनुबन्धन के नियमों का उपयोग करके व्यक्ति में डर या चिंता की जगह आराम पैदा किया जाता है। ओल्प के अनुसार, क्रमबद्ध असंवेदीकरण में तीन मुख्य चरण होते हैं:
1. आराम करने का प्रशिक्षण: इसमें व्यक्ति को गहरी सांस लेने और मांसपेशियों को ढीला करने जैसे तरीकों से आराम करना सिखाया जाता है। यह तनाव कम करने की पहली सीढ़ी है।
In simple words: क्रमबद्ध असंवेदीकरण एक तरीका है जिससे डर या चिंता को कम किया जाता है। इसमें व्यक्ति को आराम करना सिखाया जाता है, और फिर धीरे-धीरे उसे उन चीजों का सामना कराया जाता है जिनसे उसे डर लगता है।

🎯 Exam Tip: क्रमबद्ध असंवेदीकरण की परिभाषा, प्रतिपादक (ओल्प), और 'अन्योन्य प्रावरोध' के सिद्धांत को याद रखें। यह फियर फोबिया के उपचार में उपयोग किया जाता है।

 

Question 8. लोगो चिकित्सा को समझाइए।
Answer: लोगो चिकित्सा दो शब्दों, 'लोगो' और 'चिकित्सा' से मिलकर बनी है। 'लोगो' या 'लोगस' का मतलब 'अर्थ' होता है, और 'चिकित्सा' का मतलब 'उपचार' है। इस तरह, लोगो चिकित्सा का मतलब है वह उपचार जिसमें सेवार्थी के जीवन में अर्थहीनता से पैदा हुई समस्याओं और चिंताओं को दूर करने की कोशिश की जाती है। इस चिकित्सा में व्यक्ति के पिछले जीवन की घटनाओं पर ध्यान देने के बजाय, उसकी वर्तमान आध्यात्मिक समस्याओं और भविष्य के अर्थ को समझने पर जोर दिया जाता है। विक्टर फ्रेंकल ने लोगो चिकित्सा की शुरुआत की थी। यह पूरी तरह से सेवार्थी के जीवन के अर्थ को समझने पर आधारित है। यह लोगों को अपने जीवन का उद्देश्य खोजने में मदद करती है।
In simple words: लोगो चिकित्सा का मतलब है जीवन के अर्थ का उपचार। यह लोगों को अपने जीवन का उद्देश्य और मतलब खोजने में मदद करती है, जिससे उनकी चिंताएँ और समस्याएँ कम होती हैं।

🎯 Exam Tip: लोगो चिकित्सा के अर्थ, प्रतिपादक (विक्टर फ्रेंकल), और 'जीवन के अर्थ' पर इसके केंद्रीय जोर को याद रखें।

 

Question 9. गेस्टाल्ट चिकित्सा के बारे में बताइए।
Answer: गेस्टाल्ट चिकित्सा का मुख्य लक्ष्य सेवार्थी को अपनी जरूरतें, इच्छाएं और डर को समझने और स्वीकार करने में मदद करना है। यह उपचार व्यक्ति को अपनी भावनाओं और अनुभवों के प्रति जागरूक बनाता है, जिससे वे अपने जीवन में अधिक संतुलन और संतुष्टि प्राप्त कर सकें। यह चिकित्सा 'वर्तमान' पर केंद्रित होती है, न कि अतीत की घटनाओं पर। इसमें व्यक्ति को यह सिखाया जाता है कि वह अपने अनुभवों को 'पूरे' रूप में देखे, न कि अलग-अलग हिस्सों में। यह व्यक्ति को अपने अंदर की ताकतों और कमजोरियों को पहचानने में भी सहायता करती है।
In simple words: गेस्टाल्ट चिकित्सा व्यक्ति को अपनी इच्छाओं, जरूरतों और डर को समझने में मदद करती है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के वर्तमान अनुभवों को पूरी तरह से स्वीकार करने में सहायता करती है।

🎯 Exam Tip: गेस्टाल्ट चिकित्सा के 'समग्र' दृष्टिकोण और 'वर्तमान' पर इसके फोकस को याद रखें। इसका लक्ष्य आत्म-जागरूकता और आत्म-स्वीकृति बढ़ाना है।

 

Question 10. अस्तित्ववादी चिकित्सा का अर्थ स्पष्ट करें।
Answer: अस्तित्ववादी चिकित्सा एक ऐसा उपचार है जो सेवार्थी के निजी अनुभवों और स्वतंत्र विचारों पर बहुत जोर देता है। इस चिकित्सा में व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता का सही उपयोग करके अपनी बीमारियों का इलाज करने और जीवन का एक नया तरीका खोजने का मौका दिया जाता है। यह चिकित्सा इंसान के अस्तित्व के मूल अर्थ से जुड़ी है। इस उपचार विधि के अनुसार, लोगों की मानसिक समस्याओं का कारण उनका अकेलापन, दूसरों के साथ खराब रिश्ते और अपने जीवन का सही अर्थ न समझ पाना है। यह विचारधारा मानती है कि इंसान में व्यक्तिगत विकास और आत्म-सिद्धि की इच्छा होती है, और वह भावनात्मक रूप से बढ़ने की प्राकृतिक आवश्यकता से प्रेरित होता है। इस थेरेपी का उद्देश्य व्यक्ति को अपने जीवन में अर्थ और उद्देश्य खोजने में मदद करना है।
In simple words: अस्तित्ववादी चिकित्सा लोगों के अकेलेपन, खराब रिश्तों और जीवन के अर्थहीनता जैसी समस्याओं को ठीक करती है। यह व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करके अपने जीवन का उद्देश्य खोजने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: अस्तित्ववादी चिकित्सा को 'जीवन के अर्थ', 'स्वतंत्रता', और 'अकेलेपन' जैसे प्रमुख अवधारणाओं से जोड़ें। यह व्यक्ति को अपनी पहचान और उद्देश्य खोजने में मदद करती है।

 

Question 11. परामर्श को परिभाषित कीजिए।
Answer: परामर्श एक बहुआयामी प्रक्रिया है, जिसमें अलग-अलग तरीकों और तकनीकों का इस्तेमाल करके व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास किया जाता है, उनकी समस्याओं को सुलझाया जाता है, और उन्हें सहज, उद्देश्यपूर्ण और संतोषजनक जीवन जीने में मदद की जाती है। यह मनोविज्ञान की एक शाखा है, जिसमें ऐसी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है जिनके माध्यम से मनोवैज्ञानिक किसी ऐसे व्यक्ति को विशेष सलाह देते हैं, जो सामान्य समायोजन संबंधी समस्याओं से जूझ रहा हो। इसका उद्देश्य व्यक्ति को अपनी समस्याओं से खुद निपटने के लिए सशक्त बनाना है। इसलिए, परामर्श एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें कई तरह की गतिविधियां शामिल होती हैं।
In simple words: परामर्श एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ एक प्रशिक्षित व्यक्ति दूसरों को उनकी समस्याओं को हल करने और बेहतर जीवन जीने में मदद करता है। इसमें व्यक्ति के विकास और समायोजन पर ध्यान दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: परामर्श को एक 'बहुआयामी प्रक्रिया' के रूप में परिभाषित करें जो 'व्यक्ति के विकास' और 'समस्या समाधान' पर केंद्रित है, और यह एक 'सतत' प्रक्रिया है।

 

Question 12. परामर्श के उद्देश्य बताइए।
Answer: परामर्श के निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य हैं:
1. मानसिक स्वास्थ्य: परामर्श का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखना है, ताकि व्यक्ति की मानसिक स्थिति मजबूत बनी रहे। यह व्यक्ति को भावनात्मक रूप से स्थिर रखने में मदद करता है।
2. व्यक्ति के संसाधन का संवर्धन: परामर्श के माध्यम से व्यक्ति की आंतरिक शक्तियों और संसाधनों को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे वह अपनी समस्याओं का सामना करने में अधिक सक्षम बन सके। यह आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करता है।
In simple words: परामर्श का मुख्य लक्ष्य व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखना और उसकी आंतरिक शक्तियों को बढ़ाना है। यह उसे अपनी समस्याओं से निपटने के लिए तैयार करता है।

🎯 Exam Tip: परामर्श के उद्देश्यों को 'मानसिक स्वास्थ्य' और 'संसाधन संवर्धन' के रूप में याद रखें। ये दो मुख्य स्तंभ हैं जिन पर परामर्श की प्रक्रिया आधारित होती है।

 

RBSE Class 12 Psychology Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. मनश्चिकित्सा की प्रकृति एवं प्रक्रिया को बताते हुए, चिकित्सात्मक सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मनश्चिकित्सा की प्रकृति और प्रक्रिया को हम इन बिंदुओं से समझ सकते हैं:
1. इस चिकित्सा में विभिन्न सिद्धांतों के नियम लागू होते हैं, जो व्यक्ति की समस्या को समझने और उसका समाधान करने में मदद करते हैं।
2. मनश्चिकित्सा केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसने इसकी ट्रेनिंग ली हो, कोई भी इसे नहीं कर सकता। यह एक विशेष ज्ञान और कौशल की मांग करता है।
3. मनश्चिकित्सा में दो लोग होते हैं: एक चिकित्सक और एक सेवार्थी। सेवार्थी अपनी भावनात्मक समस्याओं के समाधान के लिए चिकित्सक की मदद लेने आता है। यह एक सहयोगात्मक प्रयास है।
4. चिकित्सक और सेवार्थी के बीच एक खास रिश्ता बनता है जिसे 'चिकित्सात्मक सम्बन्ध' कहते हैं। यह रिश्ता गोपनीय, व्यक्तिगत और गतिशील होता है। यह विश्वास और समझ पर आधारित होता है।
चिकित्सात्मक सम्बन्ध:
यह संबंध चिकित्सक और सेवार्थी के बीच होता है। एक अच्छे चिकित्सीय संबंध में ये बातें शामिल होती हैं:
1. चिकित्सक अपने शब्दों और व्यवहार से यह बताता है कि वह सेवार्थी का मूल्यांकन नहीं कर रहा है, बल्कि उसका सम्मान करता है।
2. चिकित्सक सेवार्थी के प्रति सहानुभूति दिखाता है। यह सहानुभूति संबंध को मजबूत करती है और उसे एक स्वस्थ रिश्ते में बदल देती है।
3. यह संबंध तब तक चलता है जब तक सेवार्थी अपनी समस्याओं से खुद निपटने में सक्षम न हो जाए और अपने जीवन को नियंत्रित न कर ले।
4. एक अच्छे चिकित्सीय संबंध में दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसका मतलब है कि चिकित्सक और सेवार्थी दोनों चिकित्सा को सफल बनाने के लिए व्यक्तिगत प्रयास करते हैं।
In simple words: मनश्चिकित्सा एक प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया है जिसमें एक चिकित्सक और एक मरीज के बीच खास रिश्ता बनता है। इस रिश्ते में गोपनीयता, सहानुभूति और आपसी प्रयास शामिल होते हैं, जिससे मरीज अपनी समस्याओं को सुलझा सके।

🎯 Exam Tip: मनश्चिकित्सा की प्रकृति को 'विशेषज्ञता' और 'द्वि-व्यक्तिगत' प्रक्रिया के रूप में याद रखें। चिकित्सात्मक संबंध की विशेषताओं में 'गोपनीयता', 'सहानुभूति', और 'पारस्परिक प्रयास' प्रमुख हैं।

 

Question 2. मनोगत्यात्मक चिकित्सा का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: मनोगत्यात्मक चिकित्सा एक उपचार विधि है जो लोगों के मन के गहरे और अनजाने हिस्सों को समझने पर केंद्रित है। इसमें निम्नलिखित मुख्य प्रक्रियाएं शामिल हैं:
1. मनोविश्लेषण उपचार में 'मुक्त साहचर्य' विधि का उपयोग किया जाता है। इसमें व्यक्ति को बिना किसी रोक-टोक के अपने मन में आने वाले सभी विचार चिकित्सक को बताने होते हैं। चिकित्सक इन विचारों का विश्लेषण करके सेवार्थी की भावनाओं को पहचानता है और उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान करने में मदद करता है, जिससे उनके व्यक्तित्व का विकास हो सके।
2. दिन-प्रतिदिन के व्यवहारों की व्याख्या: फ्रायड ने अपनी किताब 'The Psychopathology of Everyday Life' में बताया कि रोजमर्रा के व्यवहार भी व्यक्ति के अनजाने झगड़ों और बचाव के तरीकों को दिखाते हैं। जैसे नाम भूल जाना या चीजें गलत जगह रख देना, ये सब अनजाने मन की गतिविधियों और स्थितियों को समझने में मदद करते हैं।
3. अन्यारोपण की प्रक्रिया: अन्यारोपण की प्रक्रिया में 'प्रतिरोध' भी होता है। क्योंकि अन्यारोपण अनजाने इच्छाओं और झगड़ों को बाहर लाता है, जिससे व्यक्ति का कष्ट बढ़ जाता है, इसलिए सेवार्थी इसका विरोध करता है। चिकित्सक इस प्रतिरोध से उत्पन्न चिंता, भय और शर्म जैसी भावनाओं को दूर करने की कोशिश करता है। इस तरह, मनोगत्यात्मक विधियां व्यक्ति की मानसिक स्थिति को सुधारने में बहुत फायदेमंद होती हैं।
In simple words: मनोगत्यात्मक चिकित्सा मन के अनजाने हिस्सों को समझकर समस्याओं को ठीक करती है। इसमें 'मुक्त साहचर्य' से विचार व्यक्त करना, रोजमर्रा के व्यवहारों की व्याख्या करना, और अन्यारोपण व प्रतिरोध की प्रक्रियाओं को समझना शामिल है।

🎯 Exam Tip: मनोगत्यात्मक चिकित्सा के प्रमुख घटकों - 'मुक्त साहचर्य', 'दिन-प्रतिदिन के व्यवहार की व्याख्या', और 'अन्यारोपण व प्रतिरोध' - को याद रखें। ये सभी सिगमंड फ्रायड के कार्यों से संबंधित हैं।

 

Question 3. व्यवहार चिकित्सा पर लेख लिखिए।
Answer: सरासन और सरासन के अनुसार, व्यवहार चिकित्सा में व्यवहार को सुधारने के कई तरीके शामिल हैं। ये तरीके प्रयोगों से मिले सीखने और अनुकूलन के सिद्धांतों पर आधारित हैं। व्यवहार चिकित्सा में व्यक्ति के बाहरी व्यवहार को उसके अंदर की बातों पर ध्यान दिए बिना बदला जाता है। इस उपचार की कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:
1. असामान्य व्यवहार इसलिए होता है क्योंकि व्यक्ति अपेक्षित व्यवहार को नहीं सीख पाता, या उसे गलत व्यवहार सिखाया जाता है, या उसे सीखने के सही मौके नहीं मिलते।
2. चिंता वाले गलत व्यवहार जो किसी खास स्थिति में सीखे जाते हैं, वे सामान्यीकरण के कारण दूसरी स्थितियों में भी दिखने लगते हैं। उपचार का काम सेवार्थी को सही व्यवहार सीखने के मौके देना है, ताकि वह गलत और अस्वस्थ व्यवहार को छोड़कर सही और स्वस्थ व्यवहार अपना सके।
3. इस प्रकार यह स्पष्ट है कि व्यवहार चिकित्सा व्यक्ति के व्यवहार का विश्लेषण करने में मदद करती है, जिसके लिए व्यवहार चिकित्सक कई तकनीकों का उपयोग करते हैं। ये तकनीकें व्यक्ति को अधिक सकारात्मक और अनुकूल व्यवहार अपनाने में सहायता करती हैं।
In simple words: व्यवहार चिकित्सा एक ऐसा तरीका है जो सीखने के नियमों का उपयोग करके लोगों के गलत व्यवहार को बदलता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को सही व्यवहार सिखाना और उसकी समस्याओं को ठीक करना है।

🎯 Exam Tip: व्यवहार चिकित्सा की परिभाषा, उसके सिद्धांतों ('अधिगम' और 'अनुकूलन') पर आधारित होने, और 'बाहरी व्यवहार को बदलने' पर उसके जोर को याद रखें।

 

Question 4. क्लायट केन्द्रित चिकित्सा की आलोचनात्मक व्याख्या करें।
Answer: क्लायट केन्द्रित चिकित्सा को 'कार्ल रोजर्स' ने विकसित किया था। इस विधि को सेवार्थी केन्द्रित या अनिर्देशन पद्धति भी कहते हैं, क्योंकि उपचार को सफल बनाने और सुधार की जिम्मेदारी सेवार्थी पर ही होती है। क्लायट केन्द्रित चिकित्सा की आलोचनात्मक व्याख्या हम इन बिंदुओं से कर सकते हैं:
1. इस चिकित्सा में सेवार्थी पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता है, यानी केवल सेवार्थी को ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
2. इस विधि में चिकित्सक को कम महत्वपूर्ण माना जाता है, उसे सेवार्थी से कम दर्जा दिया जाता है।
3. सेवार्थी को अपने सभी काम करने की पूरी आजादी दी जाती है, जैसे अपने निर्णय खुद लेना, जो कभी-कभी अव्यावहारिक हो सकता है।
4. इस चिकित्सा में चिकित्सक की भूमिका को नजरअंदाज किया गया है। उसे केवल सेवार्थी की मदद करने का एक साधन माना जाता है।
5. चिकित्सक को सेवार्थी को कोई सलाह या निर्देश देने का अधिकार नहीं होता है।
6. मनोचिकित्सक को इसमें किसी को मनाने का अधिकार नहीं होता है। सेवार्थी अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी निर्णय या काम कर सकता है, उस पर कोई दबाव नहीं होता।
7. इस विधि में चिकित्सक सेवार्थी की भावनाओं को न तो सही कह सकता है और न ही गलत, बल्कि वह उन्हें सिर्फ स्वीकार करता है। यह तटस्थता sometimes मदद नहीं कर पाती है।
In simple words: क्लायट केन्द्रित चिकित्सा में सेवार्थी को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है, और चिकित्सक की भूमिका कम होती है। इसमें सेवार्थी को पूरी आजादी मिलती है, जिससे कभी-कभी उपचार की दिशा भटक सकती है।

🎯 Exam Tip: क्लायट केन्द्रित चिकित्सा की आलोचनाओं को याद करते समय, 'सेवार्थी पर अत्यधिक जोर', 'चिकित्सक की सीमित भूमिका', और 'निर्णय लेने में सेवार्थी की पूर्ण स्वतंत्रता' पर ध्यान दें।

 

Question 5. मानवतावादी अस्तित्वपरक चिकित्सा का वर्णन कीजिए।
Answer: मानवतावादी अस्तित्वपरक चिकित्सा का वर्णन हम इन बिंदुओं के माध्यम से कर सकते हैं:
1. इस चिकित्सा में सेवार्थी के व्यक्तिगत अनुभवों और स्वतंत्र विचारों पर बहुत जोर दिया जाता है। यह व्यक्ति की अनूठी पहचान को महत्व देता है।
2. इसमें सेवार्थी को नियंत्रित स्वतंत्रता दी जाती है, जिससे उसे अपनी बीमारी का इलाज करने और एक नई जीवन-शैली खोजने का अवसर मिलता है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के लिए जिम्मेदार महसूस कराता है।
3. यह चिकित्सा इंसान के अस्तित्व के मूल अर्थ से जुड़ी है, जो व्यक्ति को अपने होने का मतलब समझने में मदद करती है।
4. इस विधि के अनुसार, व्यक्ति की मानसिक बीमारियों का कारण उसका अकेलापन, दूसरों से खराब संबंध और अपने जीवन का अर्थ न समझ पाना है।
5. यह विधि मानती है कि इंसान में व्यक्तिगत विकास और आत्म-सिद्धि की इच्छा होती है, और वह भावनात्मक रूप से बढ़ने की प्राकृतिक आवश्यकता से प्रेरित होता है।
6. चिकित्सा के दौरान एक स्वीकार्य, गैर-निर्णयात्मक और सुरक्षित माहौल बनाया जाता है, जिसमें सेवार्थी अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सके और संतुलन प्राप्त कर सके।
7. इस विधि में चिकित्सक केवल एक सहायक और मार्गदर्शक के रूप में काम करता है, जो सेवार्थी को अपनी समस्याओं का समाधान खुद खोजने में मदद करता है।
8. जब सेवार्थी अपने जीवन में आत्म-सिद्धि की बाधाओं को दूर करने में सक्षम हो जाता है, तो उसका उपचार पूरा माना जाता है। इस चिकित्सा का लक्ष्य व्यक्ति को स्वयं के बारे में गहरी समझ विकसित करने में मदद करना है।
In simple words: मानवतावादी अस्तित्वपरक चिकित्सा व्यक्ति के अकेलेपन, खराब रिश्तों और जीवन के अर्थहीनता को दूर करती है। यह व्यक्ति को अपने अनुभवों को समझने, स्वतंत्रता का उपयोग करने और आत्म-सिद्धि प्राप्त करने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: मानवतावादी अस्तित्वपरक चिकित्सा की विशेषताओं को याद करते समय 'व्यक्तिगत अनुभव', 'आत्म-सिद्धि', 'स्वतंत्रता', और 'गैर-निर्णयात्मक वातावरण' जैसे कीवर्ड्स पर ध्यान दें।

 

RBSE Class 12 Psychology Chapter 5 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Psychology Chapter 5 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. चिकित्सात्मक प्रक्रिया में कितने लोग शामिल होते हैं?
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच
Answer: (अ) दो
In simple words: चिकित्सा प्रक्रिया में मुख्य रूप से दो लोग होते हैं: एक चिकित्सक जो मदद करता है और दूसरा सेवार्थी जो मदद चाहता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि चिकित्सात्मक प्रक्रिया में हमेशा दो मुख्य प्रतिभागी होते हैं - चिकित्सक और सेवार्थी।

 

Question 2. चिकित्सात्मक सम्बन्ध कैसा होता है?
(अ) गोपनीय
(ब) अन्तर्वैयक्तिक
(स) गत्यात्मक
(द) सभी
Answer: (द) सभी
In simple words: एक अच्छा चिकित्सीय संबंध गोपनीय, व्यक्तिगत और गतिशील होता है। इसका मतलब है कि इसमें विश्वास, आपसी समझ और समय के साथ बदलाव शामिल होते हैं।

🎯 Exam Tip: चिकित्सात्मक संबंध की सभी प्रमुख विशेषताओं - गोपनीयता, अंतर्वैयक्तिक और गत्यात्मक - को ध्यान में रखें, क्योंकि ये सभी इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं।

 

Question 3. मनश्चिकित्सा की शुरुआत किससे होती है?
(अ) चिकित्सकीय समझौते से
Answer: (अ) चिकित्सकीय समझौते से

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न अधूरा है और इसका उत्तर स्पष्ट नहीं है। दिए गए विकल्पों में से, 'चिकित्सकीय समझौते से' एकमात्र विकल्प है। मनश्चिकित्सा की शुरुआत एक चिकित्सकीय समझौते (Therapeutic Contract) से होती है, जो उपचार के लक्ष्यों और नियमों को तय करता है।

 

Question 4. चिकित्सीय सम्बन्ध में किसके कल्याण को प्राथमिकता दी जाती है?
(अ) चिकित्सक
(ब) समूह
(स) सेवार्थी
(द) कोई नहीं
Answer: (स) सेवार्थी
In simple words: चिकित्सीय संबंध का मुख्य उद्देश्य सेवार्थी की भलाई करना है। चिकित्सक का काम हमेशा सेवार्थी की मदद करना होता है।

🎯 Exam Tip: चिकित्सीय संबंध हमेशा 'सेवार्थी-केंद्रित' होता है; सेवार्थी का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

Question 5. "चिकित्सकीय सम्बन्ध में अलगाव का सन्तुलन होना चाहिए।" यह कथन किसका है?
(अ) सरासन
(ब) फ्रायड
(स) आइजेंक
(द) कोरचीन
Answer: (द) कोरचीन
In simple words: कोरचीन ने कहा था कि चिकित्सक और सेवार्थी के रिश्ते में दूरी और नजदीकी का सही संतुलन होना चाहिए। इससे यह रिश्ता काम कर पाता है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिकों के कथनों को याद रखना आपके उत्तरों को अधिक सटीक बना सकता है।

 

Question 6. मनश्चिकित्सा को कितने व्यापक समूह में वर्गीकृत किया जा सकता है?
(अ) पाँच
(ब) चार
(स) तीन
(द) दो
Answer: (स) तीन
In simple words: मनश्चिकित्सा को मुख्य रूप से तीन बड़े समूहों में बांटा जा सकता है। यह हमें अलग-अलग तरीकों को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: मनश्चिकित्सा के प्रमुख वर्गीकरणों की संख्या और उनके नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. कौन-सी चिकित्सा व्यक्तिगत संवृद्धि को मुख्य लाभ मानती है?
(अ) मानवतावादी चिकित्सा
(ब) अस्तित्ववादी चिकित्सा
(स) मानवतावादी अस्तित्वपरक चिकित्सा
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) मानवतावादी अस्तित्वपरक चिकित्सा
In simple words: मानवतावादी अस्तित्वपरक चिकित्सा यह मानती है कि व्यक्ति की आत्म-विकास और वृद्धि सबसे महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: मानवतावादी और अस्तित्वपरक चिकित्सा हमेशा 'व्यक्तिगत संवृद्धि' और 'आत्म-वास्तविकता' पर केंद्रित होती है।

 

Question 9. चिकित्सा की किस प्रक्रिया में प्रतिरोध होता है?
(अ) अन्यारोपण
(ब) स्थानान्तरण
(स) दोनों में
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) दोनों में
In simple words: चिकित्सा के दौरान, अन्यारोपण और स्थानान्तरण दोनों ही प्रक्रियाओं में प्रतिरोध (resistance) दिख सकता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति बदलाव का विरोध कर सकता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि 'अन्यारोपण' और 'स्थानान्तरण' दोनों में प्रतिरोध एक सामान्य घटना है, जिसे चिकित्सक को समझना होता है।

 

Question 10. निर्वचन की कितनी तकनीकें हैं?
(अ) दो
(ब) चार
(स) छः
(द) आठ
Answer: (अ) दो
In simple words: निर्वचन की मुख्य रूप से दो तकनीकें होती हैं। ये तकनीकें व्यक्ति की बातों को समझने और उनका अर्थ निकालने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: निर्वचन की प्रमुख तकनीकों की संख्या और उनके नाम याद रखना आपके लिए उपयोगी होगा।

 

Question 11. व्याख्या की तकनीकें कौन-सी हैं?
(अ) प्रतिरोध
(ब) स्पष्टीकरण
(स) दोनों ही
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) दोनों ही
In simple words: व्याख्या करने के लिए प्रतिरोध और स्पष्टीकरण दोनों ही महत्वपूर्ण तकनीकें हैं। ये दोनों हमें किसी स्थिति को गहराई से समझने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: 'प्रतिरोध' और 'स्पष्टीकरण' को व्याख्या की दो मुख्य तकनीकों के रूप में याद रखें, जो एक दूसरे की पूरक हैं।

 

Question 13. क्रमिक असंवेदनीकरण चिकित्सा किस सिद्धान्त पर आधारित है?
(अ) विमुखता
(ब) अस्तित्ववादी
(स) अन्योन्य
(द) अन्योन्य प्रावरोध
Answer: (द) अन्योन्य प्रावरोध
In simple words: क्रमिक असंवेदनीकरण चिकित्सा 'अन्योन्य प्रावरोध' के सिद्धांत पर काम करती है। इसका मतलब है कि जब दो विरोधी चीजें एक साथ आती हैं, तो कमजोर वाली रुक जाती है।

🎯 Exam Tip: क्रमिक असंवेदनीकरण को 'अन्योन्य प्रावरोध' के सिद्धांत से सीधे जोड़ें, क्योंकि यही इसका आधार है।

 

Question 14. क्रमिक विश्राम प्रशिक्षण के प्रतिपादक कौन हैं?
(अ) ओल्प
(ब) जैकोवसन
(स) युंग
(द) रोजर्स
Answer: (ब) जैकोवसन
In simple words: क्रमिक विश्राम प्रशिक्षण, जो शरीर को धीरे-धीरे आराम देने का तरीका है, जैकोवसन ने दिया था। यह तनाव कम करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: क्रमिक विश्राम प्रशिक्षण के प्रतिपादक के रूप में जैकोवसन का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. क्रमिक विश्राम प्रशिक्षण किस वर्ष प्रतिपादित किया गया?
(अ) 1930
(ब) 1934
(स) 1936
(द) 1938
Answer: (द) 1938
In simple words: क्रमिक विश्राम प्रशिक्षण को 1938 में पहली बार बताया गया था। यह तनाव को कम करने का एक प्रभावी तरीका है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण सिद्धांतों और तकनीकों के प्रतिपादन वर्ष को याद रखना आपके ऐतिहासिक ज्ञान को दर्शाता है।

 

Question 16. 'फ्लडिंग' किस नियम पर आधारित है?
(अ) टोकेन
Answer: (अ) टोकेन

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न अधूरा है और इसका उत्तर स्पष्ट नहीं है। दिए गए विकल्पों में से, 'टोकेन' एकमात्र विकल्प है। फ्लडिंग आमतौर पर 'विलोपन' (extinction) के नियम पर आधारित होती है, जहाँ व्यक्ति को डरावनी स्थिति का लंबे समय तक सामना कराया जाता है जब तक कि डर खत्म न हो जाए।

 

Question 17. संज्ञानात्मक त्रिक किसके द्वारा कहा गया है?
(अ) एलिस
(ब) युंग
(स) बेक
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) बेक
In simple words: बेक ने संज्ञानात्मक त्रिक की अवधारणा दी। इस त्रिक में व्यक्ति के स्वयं, संसार और भविष्य के बारे में नकारात्मक विचार शामिल होते हैं।

🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक त्रिक को याद रखने के लिए, बेक के नाम को उससे जोड़ें और इसके तीन मुख्य घटकों – स्वयं, संसार और भविष्य – पर ध्यान दें।

 

Question 18. CBT क्या है?
(अ) मनोविकृति
(ब) नियम
(स) प्रारूप
(द) उपागम
Answer: (द) उपागम
In simple words: CBT एक इलाज का तरीका है जो सोच और व्यवहार को सुधारता है।

🎯 Exam Tip: CBT (Cognitive Behavioral Therapy) को एक उपचार विधि (approach) के रूप में समझें, न कि बीमारी या नियम के रूप में।

 

Question 19. 'अर्थ निर्माण की प्रक्रिया' के प्रतिपादक कौन हैं?
(अ) युंग
(ब) फ्रॉयड
(स) फ्रेंकल
(द) रोजर्स
Answer: (स) फ्रेंकल
In simple words: विक्टर फ्रेंकल ने 'अर्थ निर्माण' के विचार को शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: विक्टर फ्रेंकल को लोगोथेरेपी (अर्थ चिकित्सा) और जीवन में अर्थ खोजने के महत्व से जोड़कर याद रखें।

 

Question 20. 'गैस्टाल्ट' किस भाषा का शब्द है?
(अ) जर्मन
(ब) स्पेनिश
(स) ग्रीक
(द) लैटिन
Answer: (अ) जर्मन
In simple words: गैस्टाल्ट एक जर्मन शब्द है जिसका मतलब पूरा होता है।

🎯 Exam Tip: गैस्टाल्ट शब्द की उत्पत्ति और उसके अर्थ 'समग्र' को ध्यान में रखें, क्योंकि यह गैस्टाल्ट चिकित्सा के मूल सिद्धांत को दर्शाता है।

 

Question 1. मनोश्चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: मनश्चिकित्सा के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। सबसे पहले, यह लोगों को उनकी भावनात्मक परेशानियों को हल करने में मदद करती है। दूसरा, यह व्यक्ति को जीवन की मुश्किलों के साथ तालमेल बिठाने में सहायता करती है। तीसरा, व्यक्ति खुद को बेहतर समझ पाता है और आत्म-ज्ञान प्राप्त करता है। चौथा, मनश्चिकित्सा व्यक्ति के असामान्य व्यवहार को नियंत्रित करने में भी सहायक होती है, जिससे वे स्वस्थ जीवन जी सकें।
In simple words: मनश्चिकित्सा भावनाओं की समस्याओं को सुलझाती है, जीवन में समायोजन में मदद करती है, खुद को समझने में सहायता करती है और गलत व्यवहार को रोकती है।

🎯 Exam Tip: मनश्चिकित्सा के महत्व को बताते समय, इसके चार मुख्य लाभों – भावनात्मक समाधान, समायोजन, आत्म-ज्ञान और असामान्य व्यवहार पर नियंत्रण – को याद रखें।

 

Question 2. मनोवैज्ञानिक समस्याएँ किन कारणों से उत्पन्न होती है?
Answer: मनोवैज्ञानिक समस्याएं कई कारणों से पैदा हो सकती हैं। पहला कारण दमित इच्छाएं हैं; जब किसी व्यक्ति की इच्छाओं को दबा दिया जाता है, तो इससे असामान्य या मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। दूसरा, विभिन्न स्थितियों के कारण लोगों के जीवन में अक्सर संघर्ष की भावना आ जाती है, जिससे मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा होती हैं। तीसरा, दोषपूर्ण सीखने की प्रक्रिया है, जहां व्यक्ति के व्यवहार और सोच में गलत तरीके से सीखने के कारण समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह बचपन के अनुभवों से भी प्रभावित हो सकता है।
In simple words: मनोवैज्ञानिक समस्याएं दबी हुई इच्छाओं, जीवन में संघर्ष और गलत सीखने के तरीकों के कारण पैदा होती हैं।

🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक समस्याओं के कारणों को समझाते समय, 'दमित इच्छाएँ', 'संघर्ष' और 'दोषपूर्ण अधिगम' जैसे मुख्य बिंदुओं को याद रखें।

 

Question 3. व्यवहार चिकित्सा की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: व्यवहार चिकित्सा की कुछ खास बातें हैं। पहली बात यह है कि यह ग्राहक को गलत और बेमेल प्रतिक्रियाओं को छोड़कर सही और समायोजित प्रतिक्रियाओं को अपनाना सिखाती है। दूसरी बात, इस चिकित्सा में 'संबंध प्रत्यावर्तन' (classical conditioning) के सिद्धांत का उपयोग होता है। तीसरी बात, ग्राहक अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात कर सकता है, और चिकित्सक सिर्फ एक मार्गदर्शक के रूप में काम करता है। चौथी बात, इस विधि में व्यक्ति के व्यक्तित्व को फिर से बनाने का प्रयास किया जाता है, जिससे वह बेहतर जीवन जी सके।
In simple words: व्यवहार चिकित्सा गलत प्रतिक्रियाओं को सही करना सिखाती है, 'संबंध प्रत्यावर्तन' का उपयोग करती है, ग्राहक खुलकर बात करते हैं और यह व्यक्तित्व को सुधारने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: व्यवहार चिकित्सा की विशेषताओं को बताते समय, मुख्य सिद्धांतों जैसे 'संबंध प्रत्यावर्तन', 'अनुकूलन' और 'पुनर्गठन' पर जोर दें।

 

Question 4. मुक्त साहचर्य की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
Answer: मुक्त साहचर्य मनोविश्लेषण उपचार की एक महत्वपूर्ण विधि है जहाँ व्यक्ति को चिकित्सक के सामने बिना किसी रोक-टोक के अपने सभी विचार, भावनाएँ और यादें बतानी होती हैं। इसमें कोई क्रम या तर्क सोचने की जरूरत नहीं होती। चिकित्सक इन विचारों का विश्लेषण करके व्यक्ति की दबी हुई इच्छाओं और अचेतन संघर्षों को समझने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया से व्यक्ति को अपनी समस्याओं के प्रति नई समझ (अंतर्दृष्टि) मिलती है।
In simple words: मुक्त साहचर्य में, लोग बिना सोचे-समझे अपने मन में आने वाली हर बात डॉक्टर को बताते हैं ताकि डॉक्टर उनके गहरे विचारों को समझ सके।

🎯 Exam Tip: मुक्त साहचर्य में रोगी को बिना किसी संकोच के अपने विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता होती है, और चिकित्सक इन विचारों का विश्लेषण करके रोगी के अचेतन मन को समझता है।

 

Question 5. फ्रायड के स्वप्न विश्लेषण पर प्रकाश डालिए।
Answer: सिगमंड फ्रायड का मानना था कि सपने हमारे अचेतन मन की दबी हुई इच्छाओं और भावनाओं को दिखाते हैं। उनका विचार था कि सपने में दिखने वाली चीजें असल में हमारी ऐसी इच्छाएं होती हैं जिन्हें हम खुले तौर पर पूरा नहीं कर सकते। इसलिए, हमारा मन उन्हें प्रतीकात्मक या छिपे हुए रूप में सपने में दिखाता है। चिकित्सक का काम इन प्रतीकों को समझना और सपनों के पीछे छिपी प्रेरणाओं को उजागर करना होता है, ताकि व्यक्ति अपनी समस्याओं को समझ सके। फ्रायड ने अपनी मशहूर किताब 'स्वप्न विश्लेषण' (The Interpretation of Dreams) में इस बारे में विस्तार से बताया है।
In simple words: फ्रायड के अनुसार, सपने हमारी दबी हुई इच्छाओं का छिपा हुआ रूप होते हैं। चिकित्सक इन सपनों का मतलब समझते हैं ताकि व्यक्ति अपनी समस्याओं को जान सके।

🎯 Exam Tip: फ्रायड के स्वप्न विश्लेषण को याद करते समय, 'अचेतन मन', 'दमित इच्छाएँ', 'प्रतीकात्मक रूप' और 'चिकित्सक द्वारा विश्लेषण' जैसे मुख्य शब्दों पर ध्यान दें।

 

Question 6. समाकलन कार्य को परिभाषित कीजिए।
Answer: मनोविश्लेषण में 'समाकलन कार्य' उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें रोगी प्रतिरोध, स्पष्टीकरण और व्याख्या के माध्यम से मिली जानकारी को अपनी समझ का हिस्सा बनाता है। यह ग्राहक को अपनी समस्याओं के मूल कारण और खुद को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है। इस प्रक्रिया के अंत में, ग्राहक को अपनी भावनात्मक मुश्किलों और आंतरिक संघर्षों के अचेतन कारणों की गहरी समझ मिल जाती है, जिसे 'अंतर्दृष्टि' या 'सूझ' कहते हैं। यह अंतर्दृष्टि ग्राहक के आत्म-प्रत्यक्षण और दूसरों को देखने के तरीके में सकारात्मक बदलाव लाती है।
In simple words: समाकलन कार्य वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति मनोविश्लेषण के दौरान मिली जानकारी को समझकर अपनी समस्याओं के मूल कारणों को पहचानता है और खुद में बदलाव लाता है।

🎯 Exam Tip: समाकलन कार्य को मनोविश्लेषण के अंतिम चरण के रूप में देखें, जहाँ रोगी को अपनी समस्याओं की गहरी समझ (अंतर्दृष्टि) मिलती है और वह आत्म-सुधार की ओर बढ़ता है।

 

Question 7. टोकेन किसे कहते हैं?
Answer: व्यवहार चिकित्सा में 'टोकेन' एक खास तरह का इनाम होता है, जिसका उपयोग 'मुद्रा मितव्ययिता' (token economy) नामक तकनीक में किया जाता है। जब कोई व्यक्ति अपने बुरे व्यवहार को छोड़कर अच्छा या सही व्यवहार करता है, तो उसे एक छोटा कार्ड, नकली सिक्का या पोकर चिप जैसी कोई चीज दी जाती है। इस टोकन को बाद में किसी असली इनाम, जैसे पसंदीदा चीज या गतिविधि के लिए बदला जा सकता है। यह सकारात्मक पुनर्बलन की एक विधि है।
In simple words: व्यवहार चिकित्सा में, 'टोकेन' एक छोटा इनाम होता है जो व्यक्ति को अच्छा व्यवहार करने पर मिलता है, जिसे बाद में किसी और चीज के लिए बदला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: टोकेन अर्थव्यवस्था (Token Economy) व्यवहार चिकित्सा की एक प्रभावी तकनीक है, जहाँ टोकेन का उपयोग वांछित व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए एक माध्यम के रूप में किया जाता है।

 

Question 9. परामर्श के लक्ष्य बताइए।
Answer: परामर्श के मुख्य उद्देश्य कई हैं। पहला, मुश्किल समय में तुरंत मदद और प्रबंधन करना। दूसरा, व्यक्ति को अपने आसपास और खुद के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायता करना। तीसरा, जीवन में एक सही मकसद और मतलब ढूंढने में मदद करना। चौथा, व्यवहार को बेहतर बनाना और व्यक्तित्व में बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहन देना। पांचवां, व्यक्ति में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना। छठा, व्यक्ति को खुद को गहराई से समझने (आत्म-बोध) में सहायता करना।
In simple words: परामर्श का लक्ष्य मुश्किलों में मदद करना, सकारात्मक सोच बनाना, जीवन का अर्थ खोजना, व्यवहार सुधारना, स्वस्थ आदतें सिखाना और आत्म-ज्ञान देना है।

🎯 Exam Tip: परामर्श के उद्देश्यों को याद करते समय, आपातकालीन सहायता, सकारात्मक दृष्टिकोण, जीवन के अर्थ, व्यवहार परिवर्तन और आत्म-बोध जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 10. परामर्शदाता के कार्यों पर प्रकाश डालिए।
Answer: परामर्शदाता के कई महत्वपूर्ण काम होते हैं। उनका मुख्य काम व्यक्ति को सही रास्ता दिखाना और उसकी मदद करना है। वे व्यक्ति की समस्याओं को हल करने के लिए सही विकल्प ढूंढने में सहायता करते हैं। इसके अलावा, परामर्शदाता व्यक्ति के उपचार के लिए सबसे अच्छी तकनीकों का पता लगाते हैं और उन्हें लागू करते हैं। वे व्यक्ति को उचित सलाह भी देते हैं, जिससे व्यक्ति के अंदर जीवन के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह पैदा होता है।
In simple words: परामर्शदाता लोगों को सही रास्ता दिखाते हैं, समस्याओं के विकल्प बताते हैं, सही उपचार विधि खोजते हैं और उन्हें जीवन में नई ऊर्जा देते हैं।

🎯 Exam Tip: परामर्शदाता की भूमिका को एक मार्गदर्शक और सहायक के रूप में समझें, जो व्यक्ति को अपनी समस्याओं का सामना करने और समाधान खोजने में मदद करता है।

RBSE Class 12 Psychology Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. मनश्चिकित्सा की प्रकृति एवं प्रक्रिया को बताते हुए, चिकित्सात्मक सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मनश्चिकित्सा की प्रकृति और प्रक्रिया को कई बिंदुओं से समझा जा सकता है। पहला, इस चिकित्सा में कई मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों और नियमों का उपयोग किया जाता है। दूसरा, केवल वही लोग मनश्चिकित्सा कर सकते हैं जिन्होंने इसका सही प्रशिक्षण लिया हो; यह हर कोई नहीं कर सकता। तीसरा, मनश्चिकित्सा की प्रक्रिया में दो लोग शामिल होते हैं: एक चिकित्सक और एक ग्राहक (सेवार्थी)। ग्राहक अपनी भावनात्मक समस्याओं को हल करने के लिए चिकित्सक की मदद लेता है। चौथा, चिकित्सक और ग्राहक के बीच एक खास 'चिकित्सात्मक संबंध' बनता है। यह संबंध गोपनीय, व्यक्तिगत और गतिशील होता है, जो इलाज के लिए बहुत जरूरी है।
चिकित्सात्मक संबंध चिकित्सक और ग्राहक के बीच बनता है। एक अच्छे चिकित्सात्मक संबंध में कई गुण होते हैं: 1. चिकित्सक अपने शब्दों और कामों से यह दिखाता है कि वह ग्राहक को जज नहीं कर रहा है, बल्कि उसे बिना शर्त सकारात्मक सम्मान दे रहा है। 2. चिकित्सक ग्राहक के प्रति गहरी समझ (तदनुभूति) रखता है। यह समझ संबंध को मजबूत और स्वस्थ बनाती है। 3. यह संबंध तब तक बना रहता है जब तक ग्राहक अपनी समस्याओं का सामना करने और अपने जीवन को नियंत्रित करने में सक्षम न हो जाए। 4. एक अच्छे चिकित्सात्मक संबंध में दोनों की 'भूमिका भागीदारी' होती है, जिसका मतलब है कि चिकित्सक और ग्राहक दोनों चिकित्सा को सफल बनाने के लिए मिलकर प्रयास करते हैं। यह संबंध रोगी के विश्वास को बढ़ाता है।
In simple words: मनश्चिकित्सा में नियमों का उपयोग होता है, सिर्फ प्रशिक्षित लोग ही इसे कर सकते हैं, इसमें चिकित्सक और ग्राहक होते हैं। चिकित्सात्मक संबंध गोपनीय, व्यक्तिगत और गतिशील होता है, जिसमें चिकित्सक ग्राहक का सम्मान करता है, उसे समझता है, और दोनों मिलकर इलाज को सफल बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: मनश्चिकित्सा की प्रक्रिया में चिकित्सक-ग्राहक संबंध की गोपनीयता, सहानुभूति, और बिना शर्त स्वीकृति को महत्वपूर्ण बिंदुओं के रूप में याद रखें।

 

Question 2. बेक् की संज्ञानात्मक चिकित्सा का वर्णन कीजिए।
Answer: बेक की संज्ञानात्मक चिकित्सा मुख्य रूप से अवसाद (विषाद) से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब इसका उपयोग कई अन्य मानसिक समस्याओं के लिए भी किया जाता है। एरॉन बेक के अनुसार, बहुत सी मानसिक दिक्कतें, खासकर डिप्रेशन, व्यक्ति के खुद के बारे में, दुनिया के बारे में और भविष्य के बारे में नकारात्मक विचारों और गलत विश्वासों की वजह से पैदा होती हैं। बेक ने इन गलत और अतार्किक सोच पैटर्न को 'संज्ञानात्मक त्रिक' (Cognitive triad) कहा है। यह त्रिक व्यक्ति की नकारात्मक सोच को दिखाता है। बेक ने विषादी रोगियों में विकृत सोच के कई प्रकार बताए हैं, जिनमें से प्रमुख हैं: 1. **आवर्धन (Magnification):** इसमें व्यक्ति किसी छोटी घटना को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर देखता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति यह सोचता है कि उसका पूरा घर बेकार हो गया है क्योंकि उसमें मेहमानों के लिए एक खास कमरा नहीं बन पाया। 2. **न्यूनीकरण (Minimization):** इसमें व्यक्ति किसी बड़ी घटना को छोटा करके या कम महत्व का मानता है, जिसके कारण वह उसके बारे में गलत तरीके से सोचता है। यह आवर्धन के बिल्कुल उलट है। यह चिकित्सा इन नकारात्मक विचारों को बदलने पर ध्यान केंद्रित करती है, जिससे व्यक्ति की मानसिक स्थिति सुधर सके।
In simple words: बेक की संज्ञानात्मक चिकित्सा डिप्रेशन के लिए बनी थी, यह मानती है कि नकारात्मक विचार और गलत सोच मानसिक समस्याओं का कारण हैं। इसके तहत व्यक्ति अपनी छोटी समस्याओं को बढ़ा-चढ़ाकर देखता है या बड़ी समस्याओं को कम आंकता है। इसका लक्ष्य इन गलत विचारों को बदलना है।

🎯 Exam Tip: बेक की संज्ञानात्मक चिकित्सा में 'संज्ञानात्मक त्रिक' (स्वयं, संसार, भविष्य के बारे में नकारात्मक विचार) और 'विकृत सोच' के प्रकारों जैसे आवर्धन और न्यूनीकरण को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. योग एवं ध्यान की पद्धति पर प्रकाश डालिए।
Answer: योग और ध्यान वैकल्पिक चिकित्सा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, और इन्होंने दुनिया भर में बहुत लोकप्रियता हासिल की है। योग एक बहुत पुरानी भारतीय पद्धति है जो प्रकृति के नियमों पर आधारित है, और इसका श्रेय महर्षि पतंजलि को दिया जाता है।
योग चिकित्सा के कई फायदे हैं: 1. यह मन को शांत और प्रशिक्षित करने में मदद करती है। 2. यह व्यक्ति की गहरी प्रवृत्तियों और प्रेरणाओं को एक साथ लाती है। 3. योग व्यक्ति को पूरी तरह से स्वस्थ बनाता है, जिससे वह परम शांति प्राप्त कर सके। 4. योग चिकित्सा वैज्ञानिक और सैद्धांतिक आधारों पर टिकी है और व्यक्तित्व को बनाने में सहायक है। 5. यह व्यक्ति का संपूर्ण विकास करती है। 6. इससे व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक क्रियाएं शुद्ध होती हैं और एकाग्रता बढ़ती है, जिससे वह अपनी समस्याओं को पहचान कर खुद ही समाधान ढूंढ सके। 7. योग में आसन, श्वास लेने की तकनीकें (श्वसन) और प्राणायाम जैसे तरीके शामिल होते हैं। 8. ध्यान में व्यक्ति थोड़ी देर के लिए जानबूझकर जीवन की भागदौड़ से दूर रहता है, जिससे उसकी एकाग्रता बढ़ती है। 9. ध्यान के दौरान व्यक्ति अपने शरीर की संवेदनाओं और विचारों को बिना किसी प्रतिक्रिया के सिर्फ देखता है। 10. योग से व्यक्ति का समग्र स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिति, मानसिक एकाग्रता और तनाव सहने की क्षमता बढ़ती है। 11. योग अनिद्रा (नींद न आने की समस्या) का इलाज करने में भी मदद कर सकता है।
In simple words: योग और ध्यान वैकल्पिक चिकित्सा के लोकप्रिय तरीके हैं। योग पतंजलि द्वारा शुरू की गई एक प्राचीन भारतीय विधि है जो मन को प्रशिक्षित करती है, व्यक्तित्व का विकास करती है और शारीरिक-मानसिक शुद्धिकरण में मदद करती है। ध्यान एकाग्रता बढ़ाता है और अनिद्रा का इलाज करता है।

🎯 Exam Tip: योग और ध्यान के महत्व को समझाते समय, उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभों के साथ-साथ पतंजलि के योगदान को भी उल्लेख करें।

Free study material for Psychology

RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Psychology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Psychology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Psychology Class 12 Solved Papers

Using our Psychology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Psychology are as per latest RBSE curriculum.

Are the Psychology RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Psychology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Psychology. You can access RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Psychology RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 5 चिकित्सात्मक उपागम एवं परामर्श in printable PDF format for offline study on any device.