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Detailed Chapter 4 मनोवैज्ञानिक विकार RBSE Solutions for Class 12 Psychology
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Class 12 Psychology Chapter 4 मनोवैज्ञानिक विकार RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 अभ्यास प्रश्न
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. मनोविज्ञान में मानव व्यवहार को बाँटा गया है -
(अ) अच्छा-बुरा
(ब) सामान्य-असामान्य
(स) ऊँचा-नीचा
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (ब) सामान्य-असामान्य
In simple words: मनोविज्ञान में इंसान के व्यवहार को दो मुख्य हिस्सों में देखा जाता है - सामान्य और असामान्य। यह हमें समझने में मदद करता है कि लोग क्यों और कैसे अलग-अलग तरह से व्यवहार करते हैं।
🎯 Exam Tip: मानव व्यवहार के वर्गीकरण से संबंधित प्रश्नों में, मुख्य श्रेणियों (जैसे सामान्य-असामान्य) पर ध्यान दें क्योंकि ये मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन का आधार होती हैं।
Question 3. 'Normal' शब्द बना है -
(अ) ग्रीक
(ब) लैटिन
(स) अंग्रेजी
(द) फ्रेंच
Answer: (ब) लैटिन
In simple words: 'नॉर्मल' शब्द लैटिन भाषा से आया है। यह शब्द उस चीज़ को बताता है जो एक तय नियम या मानक के हिसाब से होती है।
🎯 Exam Tip: शब्दों की व्युत्पत्ति (उत्पत्ति) से जुड़े प्रश्नों के लिए, लैटिन और ग्रीक जैसे मूल भाषाओं को याद रखना सहायक होता है।
Question 4. 'मनोव्याधिकी' शब्द का अर्थ है -
(अ) मन का रोग
(ब) देह का रोग
(स) माँसपेशियों का रोग
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) मन का रोग
In simple words: 'मनोव्याधिकी' का मतलब मानसिक बीमारियों या मन से जुड़ी समस्याओं का अध्ययन है। यह शब्द मन की अस्वस्थता को दिखाता है।
🎯 Exam Tip: शब्दावली संबंधी प्रश्नों में, शब्द के मूल (जैसे 'मनो' यानी मन) पर ध्यान केंद्रित करने से सही अर्थ का अनुमान लगाना आसान हो जाता है।
Question 5. कोमर द्वारा बताए गए चार 'D' में से कौन-सा सही है?
(अ) विसामान्यता (Deviance)
(ब) खतरा (Danger)
(स) अपक्रिया (Dysfunction)
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: कोमर ने असामान्य व्यवहार को समझने के लिए चार 'D' बताए थे: विसामान्यता, खतरा, अपक्रिया और परेशानी (Distress, जो इस सूची में नहीं है)। ये सभी एक साथ किसी व्यवहार को असामान्य बताने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के नामों (जैसे कोमर के चार 'D') को उनके घटकों के साथ याद रखें। इन घटकों को संक्षिप्त रूप में याद करने से मदद मिल सकती है।
Question 6. निम्न में से कौन-सा एक दुश्चिता विकृति का प्रकार नहीं है?
(अ) दुर्भीति
(ब) मनोग्रस्ति-बाध्यता
(स) कायरूप विकार
(द) सभी
Answer: (द) सभी
In simple words: दुर्भीति और मनोग्रस्ति-बाध्यता दोनों चिंता से जुड़े विकार हैं। कायरूप विकार एक अलग तरह की समस्या है जहाँ शारीरिक लक्षण होते हैं लेकिन कोई शारीरिक कारण नहीं होता।
🎯 Exam Tip: विकारों के प्रकारों को याद करते समय, उनकी मुख्य विशेषताओं पर ध्यान दें ताकि विभिन्न श्रेणियों के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
Question 8. निम्न में से किसका सम्बन्ध द्रव्य सम्बन्ध विकार से है?
(अ) द्रव्य निर्भरता
(ब) द्रव्य दुरुपयोग
(स) (अ) एवं (ब) दोनों
(द) कोई नहीं
Answer: (स) (अ) एवं (ब) दोनों
In simple words: द्रव्य संबंध विकारों में व्यक्ति या तो किसी पदार्थ पर निर्भर हो जाता है (जैसे नशे की लत लगना) या उसका गलत इस्तेमाल करता है। ये दोनों ही स्थितियाँ इस श्रेणी में आती हैं।
🎯 Exam Tip: 'द्रव्य संबंध विकार' में पदार्थ का उपयोग, दुरुपयोग और उस पर निर्भरता, दोनों ही स्थितियां शामिल होती हैं। इन शब्दों के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 9. निम्न में से किसे भावात्मक रोग कहा जाएगा?
(अ) मनोविदलता
(ब) उत्साह विषाद मनोविकृति
(स) भ्रमासक्ति
(द) मानसिक मंदन
Answer: (ब) उत्साह विषाद मनोविकृति
In simple words: उत्साह विषाद मनोविकृति, जिसे द्विध्रुवी विकार भी कहते हैं, एक ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति के मूड में बहुत बड़े बदलाव आते हैं। इसमें कभी बहुत ज़्यादा उत्साह (उन्माद) होता है तो कभी बहुत ज़्यादा उदासी (विषाद)। यह सीधे भावनाओं से जुड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: भावात्मक रोगों को मूड विकारों के रूप में भी जाना जाता है। इन विकारों में व्यक्ति के मूड (जैसे खुशी, उदासी, उत्साह) में बड़े और असामान्य परिवर्तन होते हैं।
Question 10. बुलिमिया एक रोग है जिसमें रोगी को –
(अ) भूख कम लगती है
(ब) प्यास अधिक लगती है
(स) भूख अधिक लगती है
(द) प्यास कम लगती है
Answer: (स) भूख अधिक लगती है
In simple words: बुलिमिया एक खाने से जुड़ा विकार है जहाँ व्यक्ति बहुत ज़्यादा खाना खाता है और फिर उसे निकालने की कोशिश करता है, जैसे उल्टी करके। इसमें व्यक्ति को बहुत ज़्यादा खाने की इच्छा होती है।
🎯 Exam Tip: बुलिमिया जैसे खाने संबंधी विकारों में रोगी की खाने की आदतों और शारीरिक छवि को लेकर अत्यधिक चिंता रहती है। यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है।
Question 12. विभ्रम तथा भ्रम का सम्बन्ध किस विकृति से है?
(अ) दुश्चिता
(ब) मनोविदलता
(स) विषाद
(द) कायप्रारूप
Answer: (ब) मनोविदलता
In simple words: विभ्रम (ऐसी चीजें देखना या सुनना जो असल में नहीं होतीं) और भ्रम (झूठी मान्यताएं) मनोविदलता के मुख्य लक्षण हैं। इस बीमारी में व्यक्ति की वास्तविकता की समझ बिगड़ जाती है।
🎯 Exam Tip: मनोविदलता (Schizophrenia) एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसमें भ्रम और विभ्रम जैसे लक्षण आम तौर पर देखे जाते हैं।
Question 13. मनोविदलता के धनात्मक लक्षणों में से किसे शामिल करेंगे?
(अ) भ्रमासक्ति
(ब) विभ्रान्ति
(स) असंगठित चिन्तन एवं भाषा
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: मनोविदलता के धनात्मक लक्षणों में वे चीजें आती हैं जो सामान्य व्यक्ति में नहीं होतीं, जैसे भ्रम (झूठी बातें मानना), विभ्रम (झूठी चीज़ें महसूस करना) और असंगठित सोच। ये लक्षण बीमारी के दौरान दिखने लगते हैं।
🎯 Exam Tip: 'धनात्मक लक्षण' का अर्थ वे लक्षण होते हैं जो सामान्य अनुभव में जुड़ जाते हैं, जैसे भ्रम या विभ्रम। इन्हें सकारात्मक इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे कुछ नया जोड़ते हैं, न कि कुछ घटाते हैं।
Question 14. संज्ञानात्मक त्रिक् का सम्बन्ध किस मानसिक विकृति से है?
(अ) विषाद
(ब) दुश्चिता
(स) व्यक्तित्व विकृति
(द) मानसिक मंदता
Answer: (अ) विषाद
In simple words: संज्ञानात्मक त्रिक् (Cognitive Triad) का संबंध विषाद से है, जहाँ व्यक्ति खुद के बारे में, दुनिया के बारे में और भविष्य के बारे में नकारात्मक सोच रखता है। यह नकारात्मक सोच उदासी को बढ़ाती है।
🎯 Exam Tip: संज्ञानात्मक त्रिक् (Beck's Cognitive Triad) को विषाद के मुख्य कारणों में से एक माना जाता है, जिसमें व्यक्ति की सोच नकारात्मक दिशा में बदल जाती है।
Question 15. व्यक्तित्व के विभाजन (splitting of personality) के लिए मनोविदलिता (schizophrenia) पद का प्रयोग सबसे पहले किसने किया?
(अ) ब्लियूलर
Answer: (अ) ब्लियूलर
In simple words: ब्लियूलर नामक मनोवैज्ञानिक ने सबसे पहले 'मनोविदलिता' शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने इस बीमारी को व्यक्तित्व के अलग-अलग हिस्सों में बटने के रूप में समझा था, जिसे आजकल सिज़ोफ्रेनिया कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मनोविज्ञान में महत्वपूर्ण अवधारणाओं को उनके प्रतिपादकों के साथ याद रखना चाहिए। ब्लियूलर ने सिज़ोफ्रेनिया को 'splitting of the mind' के रूप में परिभाषित किया था।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अपसामान्यता का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: अपसामान्यता शब्द को अंग्रेजी में 'एबनॉर्मल' (Abnormal) कहा जाता है। यह शब्द 'ऐब' (Ab) और 'नॉर्मल' (Normal) दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'सामान्य से दूर' होना। इस प्रकार, जो भी व्यवहार सामान्य व्यवहार से अलग या भिन्न होता है, उसे असामान्य व्यवहार कहा जाता है। रीगर के अनुसार, असामान्य व्यवहार वह है जो सामाजिक रूप से गलत, दुखदाई और विकृत सोच के कारण होता है। ऐसे व्यवहार से व्यक्ति को सामान्य ढंग से जीवन जीने में मुश्किल होती है, इसलिए यह अक्सर असंतुलित या गलत समायोजन वाला होता है। यह व्यवहार व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर सकता है।
In simple words: असामान्य व्यवहार वह है जो सामान्य नहीं होता और समाज के नियमों के खिलाफ होता है। यह अक्सर व्यक्ति को दुख देता है और उसे सही ढंग से जीवन जीने से रोकता है।
🎯 Exam Tip: अपसामान्यता की परिभाषा में मुख्य रूप से चार 'D' (Deviance, Distress, Dysfunction, Danger) को शामिल करना चाहिए, जिससे उत्तर अधिक विस्तृत और सटीक बनता है।
Question 2. सामान्य तथा असामान्य व्यवहार में अन्तर बताइए।
Answer: सामान्य और असामान्य व्यवहार में अंतर को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:
A. सामान्य व्यवहार:
1. इसे अंग्रेजी में 'नॉर्मल' (Normal) व्यवहार कहा जाता है।
2. इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के 'नॉर्मल' (Norma) से हुई है, जिसका अर्थ 'बढ़ई का स्केल' है। यह एक मानक या पैमाने की तरह होता है।
3. 'नॉर्मल' शब्द का प्रयोग एक ऐसे पैटर्न या मानक को बताने के लिए किया जाता है जो अपेक्षित और स्वीकार्य होता है। यह व्यवहार समाज द्वारा स्वीकृत नियमों का पालन करता है।
B. असामान्य व्यवहार:
1. इसे अंग्रेजी में 'एबनॉर्मल' (Abnormal) व्यवहार कहा जाता है।
2. 'ऐब' का अर्थ 'दूर होना' है।
3. इस शब्द का प्रयोग ऐसे व्यवहार के लिए किया जाता है जो सामान्य से विचलित या भिन्न होता है और समाज के मानकों के खिलाफ होता है। यह अक्सर व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है।
In simple words: सामान्य व्यवहार वह है जो समाज के नियमों के अनुसार होता है, जबकि असामान्य व्यवहार उन नियमों से अलग होता है। सामान्य व्यवहार लोगों को आसानी से जीने में मदद करता है, लेकिन असामान्य व्यवहार समस्याएं पैदा कर सकता है।
🎯 Exam Tip: सामान्य और असामान्य व्यवहार के बीच के अंतर को स्पष्ट करते समय, समाज, व्यक्ति और कार्यक्षमता के संदर्भ में उदाहरणों के साथ समझाना प्रभावी होता है।
Question 4. दुर्भीति क्या है?
Answer: दुर्भीति या फोबिया, चिंता विकृति का एक मुख्य प्रकार है। 'फोबिया' (Phobia) शब्द ग्रीक भाषा के 'फोबोस' (Phobos) शब्द से आया है, जिसका मतलब 'प्रबल भय' होता है। इस अर्थ को देखते हुए, फोबिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति किसी खास चीज़, क्रिया, स्थिति या घटना के प्रति लगातार और बहुत ज़्यादा डर या चिंता महसूस करता है। इसका मतलब यह है कि फोबिया एक ऐसी समस्या है जहाँ रोगी किसी सामान्य, हानिरहित या कम खतरनाक चीज़, स्थिति, घटना या वस्तु के प्रति अनियंत्रित, असंगत और लगातार प्रबल भय दिखाता है। यह डर वास्तविक खतरे से कहीं अधिक होता है।
In simple words: दुर्भीति एक प्रकार का बहुत ज़्यादा डर है जो किसी खास चीज़ या स्थिति से लगता है, भले ही वह असल में खतरनाक न हो। यह डर इतना ज़्यादा होता है कि व्यक्ति अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जी नहीं पाता।
🎯 Exam Tip: दुर्भीति की परिभाषा में 'असंगत' (Irrational) और 'प्रबल' (Intense) शब्दों का प्रयोग महत्वपूर्ण है। उदाहरणों के साथ विभिन्न प्रकार की दुर्भीति (जैसे सामाजिक, विशिष्ट) को समझाना उत्तर को मजबूत बनाता है।
Question 5. भीषिका विकृति को समझाइए।
Answer: भीषिका विकृति को आतंक विकृति (Panic Disorder) भी कहा जाता है। यह एक चिंता विकृति है जिसमें अचानक और अप्रत्याशित रूप से आतंक के दौरे पड़ते हैं, जिनकी कोई स्पष्ट वजह नहीं होती। ये दौरे 5-10 मिनट में अपने चरम पर पहुँच जाते हैं। ये आतंक के दौरे अचानक और बार-बार (सप्ताह में कम-से-कम एक या दो बार) पड़ते हैं और आमतौर पर थोड़ी देर बाद अपने आप समाप्त हो जाते हैं। इन दौरों में व्यक्ति बहुत ज़्यादा डर महसूस करता है, जैसे कि कुछ बुरा होने वाला हो।
आतंक दौरे के लक्षण:
1. पसीना निकलना।
2. दम घुटने जैसा महसूस होना।
3. सीने में तेज़ दर्द या बेचैनी होना।
4. हृदय गति का बढ़ जाना या कम हो जाना।
5. मरने का भय महसूस होना।
In simple words: भीषिका विकृति में व्यक्ति को अचानक और बिना किसी कारण के बहुत ज़्यादा डर लगता है, जिसे आतंक का दौरा कहते हैं। इन दौरों में शारीरिक लक्षण भी दिखते हैं जैसे पसीना आना और दिल की धड़कन तेज़ होना।
🎯 Exam Tip: आतंक विकृति को समझाते समय उसके अप्रत्याशित स्वभाव और शारीरिक लक्षणों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है। यह सामान्य चिंता से अलग है क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट उत्तेजना के होती है।
Question 6. रोगभ्रम को समझाइए।
Answer: रोगभ्रम को स्वकायदुश्चिन्ता रोग (Illness Anxiety Disorder) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें व्यक्ति को यह भ्रम होता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी है, भले ही उसके पास कोई शारीरिक बीमारी के लक्षण न हों। इस विकार में व्यक्ति को हमेशा अपने बीमार होने का डर सताता रहता है। बीमारी के कोई लक्षण न होने के बावजूद, वह अपने स्वास्थ्य को लेकर हमेशा चिंतित रहता है। यह चिंता इतनी प्रबल होती है कि उसकी रोज़मर्रा की दिनचर्या भी इससे प्रभावित हो जाती है और व्यक्ति ठीक से काम नहीं कर पाता। इससे उनके जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
In simple words: रोगभ्रम में व्यक्ति को लगता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी है, जबकि असल में ऐसी कोई बीमारी नहीं होती। यह डर इतना ज़्यादा होता है कि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर पड़ता है।
🎯 Exam Tip: रोगभ्रम में, व्यक्ति की शारीरिक जांच रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद उसे अपनी बीमारी पर गहरा विश्वास बना रहता है। इस विश्वास को गलत समझना महत्वपूर्ण है।
Question 7. कायिक विकार को स्पष्ट कीजिए।
Answer: कायिक विकार को 'काय-आलंबिता विकार' (Somatisation Disorder) के नाम से भी जाना जाता है। इस विकार में व्यक्ति को अनेक शारीरिक लक्षण महसूस होते हैं, जिनकी कोई स्पष्ट शारीरिक वजह नहीं होती। ये लक्षण अक्सर लंबे समय तक चलते हैं। इसमें व्यक्ति को शारीरिक दर्द, थकान या अन्य शारीरिक परेशानियाँ होती हैं, लेकिन डॉक्टर जांच करने पर कोई बीमारी नहीं पाते।
कायिक विकार के लक्षण:
1. इस विकार का कोई शारीरिक आधार नहीं होता है, यानी इसके शारीरिक कारण स्पष्ट नहीं होते।
2. इसमें व्यक्ति की हृदय गति में वृद्धि हो सकती है।
3. व्यक्ति को आमतौर पर सिरदर्द, थकान, पेट या पीठ दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
4. इसमें व्यक्ति अपनी बीमारी को बढ़ा-चढ़ाकर नाटकीय ढंग से दिखाता है।
5. व्यक्ति अपनी छोटी-सी बीमारी को भी बहुत बड़ा दिखाता है और लगातार काफी मात्रा में दवाएँ लेता रहता है। यह विकार व्यक्ति के मानसिक तनाव से जुड़ा होता है।
In simple words: कायिक विकार में व्यक्ति को शारीरिक दर्द या परेशानी महसूस होती है, लेकिन डॉक्टरी जांच में कोई शारीरिक बीमारी नहीं मिलती। ये लक्षण असल में मानसिक तनाव या चिंता के कारण होते हैं।
🎯 Exam Tip: कायिक विकारों को समझते समय, यह ध्यान रखें कि शारीरिक लक्षण वास्तविक होते हैं, भले ही उनका कोई शारीरिक कारण न हो। यह मानसिक तनाव का शारीरिक रूप से प्रकट होना है।
Question 8. विच्छेदी विकार से क्या तात्पर्य है?
Answer: 'विच्छेद' का अर्थ है 'अलग हो जाना'। विच्छेदी विकार (Dissociative Disorder) की मुख्य विशेषता यह है कि व्यक्ति की चेतना में अचानक और अस्थायी बदलाव आते हैं, जो कष्टदायक अनुभवों को रोकने में मदद करते हैं। जो लोग इस विकार से पीड़ित होते हैं, उनमें अपने आसपास के वातावरण के प्रति जागरूकता की कमी पाई जाती है। वे अपनी पहचान भूल सकते हैं, उन्हें अपने बारे में भ्रम होने का डर लगने लगता है, और इसमें व्यक्ति की कई अलग-अलग पहचानें या भूमिकाएँ दिखाई देती हैं। इस प्रकार के विकारों में स्मृतिलोप (याददाश्त खोना), आत्मविस्मृति (अपनी पहचान भूलना) और व्यक्तित्वलोप (अपने शरीर या अस्तित्व से अलग महसूस करना) शामिल होते हैं। यह स्थिति व्यक्ति को वास्तविकता से अलग कर देती है।
In simple words: विच्छेदी विकार में व्यक्ति अपनी याददाश्त, पहचान या चेतना से अस्थायी रूप से अलग हो जाता है। यह अक्सर किसी बड़े तनाव या दुखद घटना के बाद होता है, जिससे व्यक्ति को वास्तविकता से दूर महसूस होता है।
🎯 Exam Tip: विच्छेदी विकारों में व्यक्ति अपने अनुभवों से 'अलग' हो जाता है। इसकी मुख्य विशेषताओं में याददाश्त, पहचान और चेतना में अस्थायी व्यवधान शामिल होते हैं।
Question 9. उन्माद-विषाद का अर्थ बताइए।
Answer: उन्माद-विषाद को अंग्रेजी में 'मैनिया डिसऑर्डर' (Mania Disorder) कहा जाता है। इसका मतलब एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति बहुत ज़्यादा सक्रिय रहता है। यह द्विध्रुवी विकार का एक हिस्सा है, जहाँ व्यक्ति के मूड में बड़े बदलाव आते हैं।
उन्माद-विषाद की विशेषताएँ:
1. इसमें व्यक्ति को बहुत ज़्यादा सतर्क और ऊर्जावान महसूस होता है।
2. व्यक्ति बहुत उत्साहित, जोशीला और अत्यधिक सक्रिय हो जाता है।
3. ऐसे व्यक्ति नींद कम लेते हैं और बहुत तेज़ी से बोलते हैं।
4. वे बड़े-बड़े प्लान बनाते हैं और कभी-कभी जोखिम भरे काम भी कर देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं। यह स्थिति उनके सामान्य जीवन को प्रभावित करती है।
In simple words: उन्माद-विषाद में व्यक्ति बहुत ज़्यादा सक्रिय, उत्साहित और जोशीला हो जाता है। यह एक ऐसा मूड है जिसमें व्यक्ति की ऊर्जा और गतिविधि सामान्य से बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: उन्माद-विषाद (Mania) को द्विध्रुवी विकार के 'उच्च' चरण के रूप में याद रखें, जहाँ व्यक्ति अत्यधिक ऊर्जावान, उत्साहित और कभी-कभी लापरवाह हो जाता है।
मनोविदलता के धनात्मक लक्षणः
1. विभ्रम अर्थात् बिना किसी बाहरी चीज़ के कुछ महसूस करना, जैसे कुछ सुनना या देखना जो असल में नहीं है।
2. इसमें व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार में बहुत ज़्यादा बदलाव दिखाता है।
3. इसमें व्यक्ति को ऐसे गलत विश्वास होते हैं, जिनके गलत होने का सबूत होने पर भी वह उन्हें मानने को तैयार नहीं होता। ये विश्वास वास्तविकता से अलग होते हैं।
मनोविदलता के ऋणात्मक लक्षण:
1. इसमें व्यक्ति विचारों, भावनाओं और व्यवहार में कमी दिखाता है।
2. इसमें व्यक्ति को कोई काम शुरू करने या पूरा करने में मुश्किल महसूस होती है।
3. इसमें व्यक्ति में इच्छा शक्ति की कमी या अभाव पाया जाता है। वे किसी काम को करने की प्रेरणा खो देते हैं।
Question 11. स्वलीन विकार क्या है?
Answer: स्वलीन विकार (Autism Spectrum Disorder) बच्चों में पाया जाने वाला एक गंभीर विकार है। इस रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान सबसे पहले लीओ केनर (Leo Kanner) ने की थी। इस रोग में बच्चों में दूसरे लोगों के साथ जुड़ने की कमी पाई जाती है। उन्हें निर्जीव वस्तुओं से अधिक लगाव होता है और वे दूसरे लोगों से आँख मिलाने में भी असफल रहते हैं। ऐसे बच्चों में सही और उपयोगी बातचीत का विकास ठीक से नहीं हो पाता है, और उनमें सीमित और अजीबोगरीब तरीके से बोलने की आदतें पाई जाती हैं। स्वलीनता से ग्रस्त बच्चों में अपने आसपास की चीजों में एकरूपता बनाए रखने की बहुत ज़्यादा इच्छा होती है। ऐसे बच्चों में जीवन की सबसे ज़रूरी क्रियाओं को सीखने और विकसित करने की क्षमता भी बहुत कम होती है। यह एक विकास संबंधी अक्षमता है।
In simple words: स्वलीन विकार एक ऐसी बीमारी है जिसमें बच्चे लोगों से जुड़ नहीं पाते, अजीब व्यवहार करते हैं और सीखने में भी उन्हें परेशानी होती है। वे एक जैसी चीज़ों में बदलाव पसंद नहीं करते।
🎯 Exam Tip: स्वलीन विकार को समझाते समय, सामाजिक संपर्क में कमी, दोहराए जाने वाले व्यवहार और संचार संबंधी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दें।
Question 12. अति क्रियाशील बच्चों की विशेषताओं को बताइए।
Answer: अति क्रियाशील बच्चों की विशेषताएँ:
1. इसे अतिसक्रियता (Hyperactivity) भी कहा जाता है।
2. ये बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से बहुत ज़्यादा सक्रिय होते हैं और शांत नहीं बैठ पाते।
3. इनमें ध्यान केंद्रित करने में बहुत मुश्किल होती है और वे आसानी से विचलित हो जाते हैं।
4. ये बच्चे आवेगपूर्ण व्यवहार दिखाते हैं, यानी बिना सोचे-समझे काम कर देते हैं।
5. इन्हें निर्देशों का पालन करने और अपने व्यवहार को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है, जिससे स्कूल और घर में समस्याएं आ सकती हैं।
In simple words: अति क्रियाशील बच्चे बहुत ज़्यादा चलते-फिरते हैं, एक जगह टिककर नहीं बैठ पाते, उनका ध्यान भटक जाता है, और वे बिना सोचे-समझे काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: अति सक्रियता या ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder) के लक्षणों में ध्यान की कमी, अतिसक्रियता और आवेगशीलता शामिल हैं। इन तीनों को समझना महत्वपूर्ण है।
विकासात्मक विकारों के प्रकार बताइए।
Answer: विकासात्मक विकार ऐसे गंभीर विकार होते हैं जो बच्चों के विकास और व्यवहार से जुड़े होते हैं। यदि इन विकारों पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो उनमें सुधार संभव है। लेकिन, अगर इनकी उपेक्षा की जाए तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ये विकार व्यक्ति के सीखने, सामाजिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित करते हैं।
विकासात्मक विकार के प्रकार:
1. स्वलीनता (Autism) विकार:
यह बच्चों में पाया जाने वाला सबसे गंभीर विकार है। इसमें बच्चे लोगों के साथ घुलने-मिलने के बजाय निर्जीव वस्तुओं में रुचि दिखाते हैं। ऐसे बच्चे बातचीत के दौरान आँखें मिलाने में भी असफल रहते हैं।
2. क्षुधा अभाव (Anorexia Nervosa):
यह भोजन से जुड़ा विकार है। इसमें व्यक्ति की खाना खाने की इच्छा बिल्कुल खत्म हो जाती है। वे मृत्यु के करीब तक खुद को भूखा रखने में सक्षम होते हैं, क्योंकि उन्हें अपने शरीर के वजन बढ़ने का डर होता है।
3. क्षुधातिशयता (Bulimia Nervosa):
इसमें व्यक्ति बहुत ज़्यादा खाना खा लेता है और फिर दवा के ज़रिए उल्टी करके उसे बाहर निकालता है। इससे उसके नकारात्मक भावनाएं कम होती हैं।
In simple words: विकासात्मक विकार बच्चों के बढ़ने और सीखने की क्षमता को प्रभावित करते हैं, जैसे स्वलीनता और खाने से जुड़ी समस्याएं। समय पर मदद न मिलने पर ये गंभीर हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विकासात्मक विकारों को समझाते समय, प्रत्येक प्रकार के मुख्य लक्षणों पर ध्यान दें और यह बताएं कि वे बच्चे के विकास के किस क्षेत्र को प्रभावित करते हैं।
Question 14. मानसिक दुर्बलता के स्तर बताइए।
Answer: मानसिक दुर्बलता को मानसिक मंदन (Intellectual Disability) भी कहते हैं। इसका मतलब है कि व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार में कमी के साथ-साथ औसत से कम बुद्धि होना। परंपरागत रूप से, जिन लोगों का बुद्धिलब्धि (IQ) स्तर 70 से कम होता है, उन्हें मंद बुद्धि माना जाता है। यह स्थिति व्यक्ति के सीखने, समस्या-समाधान और अनुकूलन क्षमता को प्रभावित करती है।
मानसिक दुर्बलता के स्तर:
| बुद्धि-लब्धि स्तर | वर्गीकरण |
|---|---|
| 50 - 70 | साधारण मानसिक दुर्बलता |
| 35 - 50 | औसत मानसिक दुर्बलता |
| 20 - 35 | गम्भीर मानसिक दुर्बलता |
| 20 से कम | अति गम्भीर मानसिक दुर्बलता |
In simple words: मानसिक दुर्बलता का मतलब है कम बुद्धिलब्धि (IQ) और रोज़मर्रा के काम करने में दिक्कत होना। इसे बुद्धिलब्धि के हिसाब से अलग-अलग स्तरों में बांटा जाता है, जैसे साधारण, औसत, गंभीर और अति गंभीर।
🎯 Exam Tip: मानसिक दुर्बलता को समझाते समय, बुद्धिलब्धि (IQ) स्तर और अनुकूलन क्षमता पर ध्यान दें। विभिन्न वर्गीकरणों को उनके IQ श्रेणियों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
दुरुपर्युक्त मादक द्रव्य/पदार्थ निम्न प्रकार हैं –
1. कैफीन – कॉफी, चाय, कोको व चॉकलेट।
2. निकोटीन – सिगरेट व तम्बाकू।
3. कोकीन।
4. फेनसाइक्लिडाइन।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. सामान्यतया एवं असामान्यता की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए, असामान्यता के मॉडल बताइए।
Answer: सामान्य और असामान्य व्यवहार की अवधारणाएं मनोविज्ञान में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
सामान्यता व्यवहार की अवधारणा:
1. सामान्य व्यक्ति समझदारी से व्यवहार करता है।
2. सामान्य व्यक्ति सामाजिक रूप से संतुलित समायोजन कर पाता है।
3. सामान्य व्यक्ति को वास्तविकता की सही जानकारी होती है। सामान्य व्यक्ति समाज के नियमों और अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार करता है।
असामान्यता की अवधारणा:
1. असामान्य व्यक्ति में समझदारी वाला व्यवहार कम होता है या बिल्कुल नहीं होता।
2. ऐसे व्यक्ति का व्यवहार अजीब और अनुचित होता है।
3. असामान्य व्यक्ति को वास्तविकता की सही जानकारी नहीं होती है। यह व्यवहार व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता है।
असामान्यता के मॉडल:
1. मनोवैज्ञानिक मॉडल- इस मॉडल के अनुसार, असामान्य व्यवहार अचेतन मन में होने वाले मानसिक संघर्षों का नतीजा है। इसका संबंध बचपन या शुरुआती अवस्था से होता है।
2. मानवतावादी-अस्तित्वपरक मॉडल- इस मॉडल के अनुसार, मनोवैज्ञानिक कष्ट व्यक्ति के अकेलेपन, जीवन के अर्थ को समझने और सच्ची संतुष्टि पाने में अक्षमता की भावनाओं के कारण होते हैं।
3. संज्ञानात्मक मॉडल- जब व्यक्ति अपने बारे में गलत तरीके से सोचता है, तो कई तरह के असामान्य व्यवहार उत्पन्न हो जाते हैं। व्यक्ति की गलत सोच ही उसकी समस्याओं की जड़ होती है।
4. व्यवहारात्मक मॉडल- इस मॉडल के अनुसार, मनोवैज्ञानिक विकार गलत तरीके से व्यवहार करना सीखने का परिणाम हैं। उदाहरण के लिए, किसी बुरे अनुभव से डर सीख लेना।
अतः उपरोक्त कारणों से स्पष्ट होता है कि इन समस्त कारकों से व्यक्ति में असामान्य व्यवहार उत्पन्न होता है। यह सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि कई कारकों का परिणाम है।
In simple words: सामान्य व्यवहार समाज के नियमों के अनुसार होता है, जबकि असामान्य व्यवहार इनसे अलग होता है। इसे समझने के लिए मनोवैज्ञानिक, मानवतावादी, संज्ञानात्मक और व्यवहारात्मक जैसे अलग-अलग मॉडल हैं, जो बताते हैं कि असामान्य व्यवहार क्यों होता है।
🎯 Exam Tip: सामान्य और असामान्य व्यवहार की अवधारणाओं को स्पष्ट करते समय, इनकी परिभाषाओं, विशेषताओं और अलग-अलग मॉडलों (जैसे मनोवैज्ञानिक, संज्ञानात्मक) का उल्लेख करना आवश्यक है। प्रत्येक मॉडल को संक्षेप में समझाएं।
Question 3. मनोविदलिता पर लेख लिखिए।
Answer: मनोविदलिता (Schizophrenia) एक गंभीर मनोविकृति है। इसे पहले 'डिमेंशिया प्रीकॉक्स' (dementia praecox) कहा जाता था। ब्लियूलर ने इस मानसिक रोग को 'सिज़ोफ्रेनिया' का नाम दिया, जो आज भी प्रचलित है। मनोविदलिता असल में एक प्रकार की मनोविकृति (Psychosis) है। इसका शाब्दिक अर्थ है-'व्यक्तित्व विभाजन' (splitting of personality) होता है। इसमें रोगी में गंभीर संज्ञानात्मक, भावनात्मक और व्यवहारिक विकृतियाँ विकसित होती हैं। इसमें लक्षण व्यामोह और सुनने वाले विभ्रमों के एक क्रमबद्ध और संगठित रूप में होते हैं। इसमें सजा देने वाले व्यामोह की प्रबलता होती है, और इसमें ईर्ष्या तथा संदेह का व्यामोह भी पाया जाता है।
मनोविदलिता के प्रमुख प्रकार:
1. विसंगठित प्रकार: इसमें व्यक्ति की भाषा और व्यवहार असंगठित होते हैं, और उसकी भावनाएं कुंठित होती हैं, जो कैटाटोनिक लक्षण नहीं हैं।
2. कैटाटोनिक प्रकार: इस मनोविदलिता का सबसे मुख्य लक्षण शारीरिक शिथिलता (Motor disturbance) है। रोगी कभी-कभी बहुत उत्तेजित होकर अलग-अलग तरह की शारीरिक क्रियाएं करता है, तो कभी एक ही तरह की शारीरिक क्रिया में कई घंटों तक खड़ा रहता है।
3. अविभेदित प्रकार: यह व्यक्ति मनोविदलिता की किसी एक तय श्रेणी में फिट नहीं होते, या फिर कई श्रेणियों से मिलते-जुलते होते हैं।
4. अवशिष्ट प्रकार: अवशिष्ट मनोविदलता के लिए यह ज़रूरी है कि इससे पीड़ित व्यक्ति को अतीत में कम-से-कम एक बार मनोविदलता का अनुभव हो चुका हो, और वर्तमान में कोई सकारात्मक लक्षण न हों, लेकिन नकारात्मक लक्षण दिखाई दें।
अतः उपरोक्त प्रकारों से यह स्पष्ट होता है कि मनोविदलता एक गंभीर मानसिक रोग है जिससे व्यक्ति को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह व्यक्ति की वास्तविकता की समझ और कार्यक्षमता को बहुत प्रभावित करता है।
In simple words: मनोविदलिता एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसे सिज़ोफ्रेनिया भी कहते हैं। इसमें व्यक्ति की सोच, भावनाएं और व्यवहार बिगड़ जाते हैं। उसे भ्रम (झूठे विश्वास) और विभ्रम (झूठी संवेदनाएं) हो सकती हैं, और वह वास्तविकता से दूर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: मनोविदलिता पर लेख लिखते समय, इसके अर्थ, ब्लियूलर द्वारा दिए गए नाम, और इसके धनात्मक (भ्रम, विभ्रम) व ऋणात्मक (प्रेरणा की कमी, सामाजिक अलगाव) लक्षणों को विस्तार से बताएं।
Question 4. व्यवहारात्मक एवं विकासात्मक विकारों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: व्यवहारात्मक और विकासात्मक विकार मुख्य रूप से बच्चों के व्यवहार और विकास से जुड़े होते हैं। यदि इन विकारों पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो उनमें सुधार संभव है। लेकिन, अगर इनकी उपेक्षा की जाए तो भविष्य में इनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो बच्चे के जीवन को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकते हैं। व्यवहारात्मक विकारों को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है –
A. बहिःकरण विकार (Externalizing Disorders):
इन्हें अनियंत्रित विकार भी कहते हैं। इन विकारों में वे व्यवहार शामिल हैं जो विनाशकारी और आक्रामक होते हैं। इनमें कुछ प्रमुख विकार शामिल हैं:
1. विरुद्धक अवज्ञाकारी विकार (Oppositional Defiant Disorder): ऐसे बच्चे चिड़चिड़े, अवज्ञाकारी और शत्रुतापूर्ण तरीके से व्यवहार करते हैं। वे बड़े लोगों की बात नहीं मानते और बहस करते हैं।
B. आन्तरिकीकरण विकार (Internalizing Disorders):
इसमें ऐसी आंतरिक स्थितियाँ शामिल होती हैं जो दूसरों को दिखाई नहीं देतीं, जैसे अलगाव चिंता (Separation Anxiety) और अवसाद (Depression)। बच्चा अंदर से परेशान रहता है।
विकासात्मक विकार (Developmental Disorders):
बच्चों में पाए जाने वाले गंभीर विकारों को व्यापक विकासात्मक विकार कहा जाता है। इसमें अनेक विकार शामिल होते हैं:
1. स्वलीनता (Autism): इस विकार में बच्चे बातचीत के दौरान निर्जीव वस्तुओं को अधिक महत्व देते हैं। ऐसे बच्चों में सीखने और विकास की क्षमता काफी कम होती है।
2. अनियंत्रित भोजन (Binge Eating Disorder): इस विकार में व्यक्ति या बच्चे में अत्यधिक भोजन करने की प्रवृत्ति सबसे ज़्यादा पाई जाती है। वे बिना नियंत्रण के खाते रहते हैं।
3. क्षुधतिशयता (Bulimia Nervosa): इस विकार में व्यक्ति इतना ज़्यादा खाना खा लेता है कि उसे दवा की मदद से उल्टी करके बाहर निकालना पड़ता है। इससे उसकी नकारात्मक भावनाएं कुछ समय के लिए कम हो सकती हैं।
4. क्षुधा अभाव (Anorexia Nervosa): इस विकार में व्यक्ति की खाना खाने की इच्छा बिल्कुल खत्म हो जाती है। वह बिना भोजन के लंबे समय तक जीवन जी सकता है। ऐसा व्यक्ति मृत्यु के करीब तक खुद को भूखा रखने में सक्षम होता है।
In simple words: व्यवहारात्मक और विकासात्मक विकार बच्चों को प्रभावित करते हैं, जिससे उनके व्यवहार और विकास में समस्याएं आती हैं। इनमें गुस्से और आज्ञा न मानने जैसे बहिःकरण विकार, या चिंता और उदासी जैसे आन्तरिकीकरण विकार शामिल हैं। स्वलीनता और खाने से जुड़े विकार भी इसके उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: व्यवहारात्मक और विकासात्मक विकारों का वर्णन करते समय, उन्हें बहिःकरण (आक्रामक) और आन्तरिकीकरण (चिंतित) भागों में बांटें। प्रत्येक भाग के तहत कम से कम एक उदाहरण दें।
Question 5. दुश्चिता विकार से आप क्या समझते हैं ? इसके विभिन्न प्रकारों की व्याख्या करें।
Answer: जब व्यक्ति में चिंता की भावना अवास्तविक और अतार्किक रूप से इतनी बढ़ जाती है कि उसका सामान्य जीवन नकारात्मक रूप से प्रभावित होने लगता है और उसका व्यवहार अनुपयोगी हो जाता है, तो इसे 'दुश्चिता विकार' (Anxiety Disorder) कहा जाता है। इस विकार के लक्षण व्यक्ति मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में स्पष्ट दिखाता है। यह स्थिति व्यक्ति को लगातार बेचैन रखती है।
दुश्चिता विकार के प्रकार:
1. सामान्यीकृत चिन्ता विकृति (Generalized Anxiety Disorder): इसमें चिंता इतनी ज़्यादा, लंबे समय तक चलने वाली और फैली हुई होती है कि यह बिना किसी खास वजह के महसूस होती है। यह एक अस्पष्ट, अवर्णनीय और तीव्र भय होता है जो किसी खास चीज़ से जुड़ा नहीं होता है।
इसमें व्यक्ति को कुछ ऐसी चीज़ों या स्थितियों के प्रति बहुत ज़्यादा या अनुचित डर लगता है, जो असल में खतरनाक नहीं होतीं। यह तीन प्रकार की होती है –
- विवृत्ति भीति (Agoraphobia): इसमें व्यक्ति को अपरिचित स्थितियों में जाने का डर लगता है, जिससे उसकी सामान्य गतिविधियों को करने की क्षमता बहुत सीमित हो जाती है।
- सामाजिक दुर्भीति (Social Phobia): इसमें व्यक्ति दूसरों के साथ बातचीत करने और ऐसी सामाजिक स्थितियों में जाने से डरता है जहाँ उसे लगता है कि उसका मूल्यांकन किया जा सकता है।
- विशिष्ट दुर्भीति (Specific Phobia): इसमें व्यक्ति को किसी खास वस्तु या स्थिति से बहुत ज़्यादा डर लगता है, जैसे कुछ खास पशु, पक्षी, रंग या बीमारी से।
4. मनोग्रस्त बाध्यता विकार (Obsessive Compulsive Disorder - OCD): इसमें व्यक्ति बार-बार कुछ अतार्किक और असंगत विचारों को दोहराता रहता है, भले ही वह न चाहे। पीड़ित व्यक्ति इन विचारों से छुटकारा पाना चाहता है, लेकिन लाचार रहता है, जिससे उसकी मानसिक शांति इस हद तक भंग हो जाती है कि उसका समायोजन बिगड़ जाता है। यह दो प्रकार के होते हैं -
- बाध्यता- इसमें रोगी अपनी इच्छा के खिलाफ किसी काम को बार-बार करने के लिए मजबूर महसूस करता है।
- आघातीय प्रतिबल विकृति- इसमें व्यक्ति किसी घटना से इतना पीड़ित हो जाता है कि उसका समायोजन बिगड़ जाता है। उसका मानसिक स्तर भावनात्मक शून्यता पर पहुँच जाता है।
In simple words: दुश्चिता विकार में व्यक्ति को बिना किसी खास वजह के बहुत ज़्यादा चिंता होती है, जो उसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर बुरा असर डालती है। इसके कई प्रकार हैं, जैसे सामान्य चिंता, दुर्भीति (किसी खास चीज़ से डर) और मनोग्रस्त बाध्यता (बार-बार एक ही काम करना या सोचना)।
🎯 Exam Tip: दुश्चिता विकार का वर्णन करते समय, इसके सामान्यीकृत स्वरूप (GAD) और विशिष्ट प्रकारों जैसे दुर्भीति (फोबिया) तथा मनोग्रस्त बाध्यता विकार (OCD) के प्रमुख लक्षणों को समझाना चाहिए। प्रत्येक प्रकार के मुख्य अंतरों को स्पष्ट करें।
Question 6. कायरूप विकार एवं विच्छेदी विकार की विवेचना कीजिए।
Answer:
कायरूप विकार (Somatic Symptom Disorder): इसे शरीर प्रारूपी विकार भी कहा जाता है। यह एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति शारीरिक कष्ट के लक्षण दिखाता है, लेकिन उसके इन शारीरिक लक्षणों का कोई जैविक आधार नहीं होता। इसका मतलब है कि शारीरिक जांच में कोई बीमारी नहीं मिलती, फिर भी व्यक्ति को दर्द या अन्य शारीरिक परेशानी महसूस होती है। यह अक्सर मानसिक तनाव से जुड़ा होता है। इसके चार प्रकार होते हैं –
1. पीड़ा विकार (Pain Disorder): इस विकार की उत्पत्ति तनाव या किसी अन्य मानसिक आधार पर होती है। इसमें रोगी को असहनीय दर्द की शिकायत होती है, जिसके लिए कोई शारीरिक कारण नहीं मिलता।
2. काय-आलम्बिता विकार (Somatization Disorder): इसमें किसी तरह का स्पष्ट शारीरिक आधार नहीं होता है। इसमें व्यक्ति नाटकीय तरीके से अपनी बीमारी को दिखाता है।
3. परिवर्तन विकार (Conversion Disorder): इस विकार में व्यक्ति अपने तनाव, मानसिक संघर्ष आदि को शारीरिक लक्षणों के माध्यम से व्यक्त करता है। उदाहरण के लिए, मानसिक तनाव के कारण व्यक्ति को लकवा या अंधापन हो सकता है।
4. स्वकायदुश्चिता रोग (Illness Anxiety Disorder): इसमें व्यक्ति को हमेशा खुद को बीमार होने का डर सताता रहता है। वह सदैव अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहता है, भले ही कोई बीमारी न हो।
विच्छेदी विकार (Dissociative Disorder): 'विच्छेद' का अर्थ 'अलग हो जाना' है। चेतना में अचानक और अस्थायी बदलाव, जो कष्टदायक अनुभवों को रोकने में मदद करते हैं, विच्छेदी विकार की मुख्य विशेषता होती है। इसमें व्यक्ति अपनी याददाश्त, पहचान या चेतना से अलग महसूस करता है। यह अक्सर किसी बड़े आघात या तनाव के बाद होता है।
In simple words: कायरूप विकार में व्यक्ति को शारीरिक परेशानियाँ होती हैं, लेकिन कोई शारीरिक कारण नहीं होता, जबकि विच्छेदी विकार में व्यक्ति अपनी याददाश्त या पहचान से अलग हो जाता है। दोनों ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं जो व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती हैं।
🎯 Exam Tip: कायरूप विकारों में शारीरिक लक्षणों पर जोर दें, और विच्छेदी विकारों में चेतना, पहचान और याददाश्त में व्यवधान पर ध्यान केंद्रित करें। प्रत्येक के मुख्य प्रकारों का संक्षिप्त उल्लेख करें।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. मानसिक क्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किस विषय में किया जाता है?
(अ) मनोविज्ञान
(ब) रसायन विज्ञान
(स) भौतिक विज्ञान
(द) कोई भी नहीं।
Answer: (अ) मनोविज्ञान
In simple words: मानसिक क्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन मनोविज्ञान में किया जाता है, क्योंकि यह विषय सीधे तौर पर दिमाग और व्यवहार का अध्ययन करता है।
🎯 Exam Tip: मनो-विज्ञान हमेशा व्यक्ति के मन और व्यवहार का व्यवस्थित अध्ययन करता है, जिससे यह विषय मानसिक प्रक्रियाओं के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
Question 3. 'ऐब' का क्या अर्थ है?
(अ) पास
(ब) समीप
(स) दूर
(द) निकट
Answer: (स) दूर
In simple words: 'ऐब' शब्द का मतलब किसी चीज से 'दूर' या 'अलग' होना है। यह 'नॉर्मल' के विपरीत होता है।
🎯 Exam Tip: मनोविज्ञान में 'ऐब' शब्द का उपयोग 'असामान्य' (abnormal) व्यवहार को दर्शाने के लिए किया जाता है, जिसका अर्थ सामान्य से विचलन है।
Question 4. विचलित का क्या अर्थ है?
(अ) पथभ्रष्ट होना
(ब) भटक जाना
(स) डगमगाना
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: विचलित होने का मतलब है किसी सही रास्ते से भटक जाना या अपने लक्ष्य से दूर हो जाना। यह सभी विकल्प एक ही अर्थ को बताते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी प्रश्न में "उपर्युक्त सभी" या "All of the options" विकल्प होने पर, सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ना चाहिए ताकि सही उत्तर का चुनाव किया जा सके।
Question 5. कोमर ने असामान्य व्यवहार को कितने भागों में बाँटा है?
(अ) पाँच
(ब) चार
(स) तीन
(द) दो
Answer: (ब) चार
In simple words: कोमर ने असामान्य व्यवहार को समझने के लिए चार मुख्य हिस्सों में बांटा है। यह ढाँचा असामान्यताओं की पहचान में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: कोमर के 'फोर-डी' (Four-D) मॉडल के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है: विसामान्यता (Deviance), अपक्रिया (Dysfunction), कष्ट (Distress) और खतरा (Danger)।
Question 6. APA का पूर्ण नाम क्या है?
(अ) Adult Physical Association
(ब) Adult Psychological Association
(स) American Psychiatric Association
(द) American Psychological Association
Answer: (द) American Psychological Association
In simple words: APA एक बहुत बड़ी संस्था है जो मनोविज्ञान के क्षेत्र में काम करती है। इसका पूरा नाम अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन है।
🎯 Exam Tip: पूर्ण नाम (Full Form) वाले प्रश्नों में अक्सर मिलते-जुलते विकल्प दिए जाते हैं, इसलिए सही स्पेलिंग और अर्थ पर ध्यान दें।
Question 7. फ्रॉयड के अनुसार विकृत व्यक्तित्व में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है -
(अ) लेबिस
(ब) मूरे
(स) मोरेल
(द) फ्रॉयड
Answer: (द) फ्रॉयड
In simple words: सिगमंड फ्रॉयड ने व्यक्तित्व के विकारों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके सिद्धांतों से व्यक्तित्व के विकास और विकृतियों को समझने में मदद मिलती है।
🎯 Exam Tip: जब किसी विचारक के सिद्धांतों पर आधारित प्रश्न हो, तो उस विचारक के नाम को पहचानना और उसके मूल विचारों को समझना महत्वपूर्ण होता है।
Question 8. डायथिसिस का क्या अर्थ है?
(अ) विकृति
(ब) असामान्य व्यवहार
(स) दोनों
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) दोनों
In simple words: डायथिसिस का मतलब है किसी समस्या या असामान्य व्यवहार के लिए शरीर की एक अंदरूनी तैयारी या झुकाव। यह विकृति और असामान्य व्यवहार दोनों से जुड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: डायथिसिस-स्ट्रेस मॉडल को समझते समय याद रखें कि यह किसी अंतर्निहित कमजोरी (डायथिसिस) और पर्यावरणीय तनाव (स्ट्रेस) के संयोजन से मानसिक विकारों की व्याख्या करता है।
Question 9. असामान्य व्यवहार के कितने कारक पाए जाते हैं?
(अ) तीन
(ब) चार
(स) दो
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) तीन
In simple words: असामान्य व्यवहार को प्रभावित करने वाले मुख्य रूप से तीन प्रकार के कारण होते हैं। इन कारणों में जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक-सांस्कृतिक कारक शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: असामान्य व्यवहार के कारणों को जैविक, मनोसामाजिक और सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों के रूप में वर्गीकृत करना इस विषय को समझने में मदद करता है।
Question 10. शरीर की संरचना किसके द्वारा निर्धारित होती है?
(अ) हृदय
(ब) आनुवंशिकता
(स) विभिन्न अंग
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) आनुवंशिकता
In simple words: हमारे शरीर का आकार और बनावट मुख्य रूप से हमारे माता-पिता से मिलने वाले गुणों यानी आनुवंशिकता से तय होते हैं। यही कारण है कि बच्चे अपने माता-पिता जैसे दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: आनुवंशिकता न केवल शारीरिक बनावट बल्कि कुछ मानसिक विकारों और व्यवहारों की प्रवृत्ति को भी प्रभावित करती है।
Question 12. हवा से होने वाली दुर्भीति को क्या कहा जाता है?
(अ) पायराफोबिया
(ब) नोसोफोबिया
(स) हाइड्रोफोबिया
(द) ऐरोफोबिया
Answer: (द) ऐरोफोबिया
In simple words: अगर किसी को हवा से बहुत ज्यादा डर लगता है, तो इस डर को ऐरोफोबिया कहते हैं। यह एक प्रकार का विशिष्ट डर होता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के फोबिया (दुर्भीति) और उनके कारणों को याद रखना मनोविज्ञान में महत्वपूर्ण है। जैसे, हाइड्रोफोबिया पानी से डर को दर्शाता है।
Question 13. PTSD का पूरा नाम बताइए
(अ) Post Traumatic Stress Disorder
(ब) Pre Traumatic Stress Disorder
(स) Prime Traumatic Stress Disorder
(द) Primary Traumatic Stress Disorder
Answer: (अ) Post Traumatic Stress Disorder
In simple words: PTSD का मतलब है 'पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर'। यह एक ऐसी समस्या है जो किसी बहुत दर्दनाक या भयानक घटना के बाद होती है।
🎯 Exam Tip: PTSD के लक्षण और उपचार विधियाँ मानसिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।
Question 14. विच्छेद का क्या अर्थ है?
(अ) अलग होना
(ब) दूर होना
(स) जुदा होना
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: विच्छेद का मतलब है किसी चीज से अलग हो जाना या कट जाना। इसमें अलग होना, दूर होना और जुदा होना जैसे सभी भाव शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: विच्छेदी विकारों में व्यक्ति अपनी पहचान, यादें या चेतना से अलग महसूस करता है, इसलिए यह अर्थ महत्वपूर्ण है।
Question 16. एक ध्रुवीय विषाद किसे कहा जाता है?
(अ) Major depressive disorder
(ब) Minor depressive disorder
(स) Most depressive disorder
(द) कोई भी नहीं।
Answer: (अ) Major depressive disorder
In simple words: 'मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर' को एक ध्रुवीय विषाद कहते हैं। इसमें व्यक्ति लगातार उदास और दुखी महसूस करता है।
🎯 Exam Tip: एकध्रुवीय विषाद केवल उदासी की अवस्थाओं से जुड़ा है, जबकि द्विध्रुवीय विकार में उन्माद (mania) और अवसाद (depression) दोनों के एपिसोड होते हैं।
Question 17. उन्माद (Mania) में रोगी की स्थिति कैसी होती है?
(अ) अति सक्रिय
(ब) अति उत्साही
(स) जोशीली
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: उन्माद की स्थिति में रोगी बहुत ज़्यादा सक्रिय, उत्साही और जोशीला महसूस करता है। इसमें व्यक्ति की ऊर्जा का स्तर बहुत बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: उन्माद एक मानसिक विकार का चरण है जिसमें व्यक्ति का मूड, ऊर्जा और गतिविधि का स्तर असामान्य रूप से बढ़ा हुआ होता है।
Question 18. अवधान न्यूनता किसमें पायी जाती है?
(अ) ADHD
(ब) DDHA
(स) ADBD
(द) ADCD
Answer: (अ) ADHD
In simple words: अवधान न्यूनता बच्चों और कभी-कभी वयस्कों में भी पाई जाने वाली एक समस्या है जिसे ADHD कहते हैं। इसमें ध्यान लगाने में परेशानी और बहुत ज़्यादा सक्रियता होती है।
🎯 Exam Tip: ADHD (Attention-Deficit/Hyperactivity Disorder) एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है जो ध्यान, अतिसक्रियता और आवेग से संबंधित समस्याओं का कारण बनता है।
Question 19. ODD का पूर्ण नाम क्या है?
(अ) Opposite Defiant Disorder
(ब) Oppostional Defiant Disorder
(स) Odd Definant Disorder
Answer: (अ) Opposite Defiant Disorder
In simple words: ODD का पूरा नाम है 'ऑपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर'। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे या किशोर बड़ों के निर्देशों को मानने से इनकार करते हैं और अक्सर गुस्सा दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: ODD के लक्षण अक्सर बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं और इसमें अवज्ञाकारी, विद्रोही तथा शत्रुतापूर्ण व्यवहार शामिल होता है।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. असामान्य व्यवहार के लक्षण बताइए।
Answer: असामान्य व्यवहार के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
1. यह एक प्रकार से समाज विरोधी व्यवहार होता है, जो सामाजिक नियमों और मूल्यों के खिलाफ होता है।
2. इसमें व्यक्ति सही तरीके से माहौल में ढल नहीं पाता, जिससे उसे अपर्याप्त समायोजन की समस्या होती है।
3. इसमें व्यक्ति का व्यक्तित्व ठीक से संगठित नहीं होता, या वह टूटा हुआ महसूस करता है।
4. व्यक्ति में हमेशा असुरक्षा की भावना रहती है और वह खुद को असुरक्षित महसूस करता है।
5. ऐसे व्यक्ति में सामाजिक परिस्थितियों में घुलने-मिलने या ठीक से प्रतिक्रिया देने की क्षमता कम होती है। यह व्यवहार व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है।
In simple words: असामान्य व्यवहार वह होता है जो समाज के नियमों के खिलाफ हो, व्यक्ति माहौल में ढल न पाए, और उसे असुरक्षित महसूस हो। इसमें व्यक्ति का व्यक्तित्व भी टूटा हुआ सा लगता है।
🎯 Exam Tip: असामान्य व्यवहार को पहचानते समय व्यक्ति के सामाजिक, व्यक्तिगत और भावनात्मक समायोजन पर ध्यान देना चाहिए।
Question 2. कोमर के द्वारा दिए गए Four - D को स्पष्ट कीजिए।
Answer: कोमर ने असामान्य व्यवहार को 'चार डी' के माध्यम से समझाया है, जो इस प्रकार हैं:
1. **विदलन (Deviance):** इसमें ऐसे असामान्य व्यवहार आते हैं जो सामाजिक नियमों और अपेक्षाओं से अलग होते हैं। ये व्यवहार अक्सर अजीब या असामान्य माने जाते हैं।
2. **तकलीफ (Distress):** इसमें वे असामान्य व्यवहार शामिल हैं जिनसे व्यक्ति को खुद बहुत ज़्यादा मानसिक या भावनात्मक कष्ट होता है। यह कष्ट व्यक्तिगत अनुभव पर निर्भर करता है।
3. **दुष्क्रिया (Dysfunction):** यह वह स्थिति है जब असामान्य व्यवहार व्यक्ति को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के काम ठीक से करने से रोकता है। इससे व्यक्ति की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
In simple words: कोमर ने असामान्य व्यवहार को चार मुख्य भागों में बांटा है: विदलन (जब व्यवहार अलग हो), तकलीफ (जब व्यक्ति को दुःख हो), और दुष्क्रिया (जब व्यक्ति अपने काम ठीक से न कर पाए)। ये बिंदु असामान्य व्यवहार को समझने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: 'फोर-डी' मॉडल असामान्य व्यवहार को समझने का एक महत्वपूर्ण ढाँचा है। प्रत्येक 'डी' (Deviance, Distress, Dysfunction, Danger) का अर्थ स्पष्ट रूप से समझना चाहिए।
Question 3. मनोवैज्ञानिक विकार से व्यक्ति को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है –
Answer: मनोवैज्ञानिक विकार से व्यक्ति को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
1. मनोवैज्ञानिक विकार व्यक्ति के व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं में गड़बड़ी पैदा करते हैं, जिससे व्यक्ति का व्यक्तित्व टूट जाता है।
2. इस विकार के कारण व्यक्ति का सामाजिक समायोजन खराब हो जाता है, जिससे उसे लोगों के साथ घुलने-मिलने में परेशानी होती है।
3. इस विकार से व्यक्ति का व्यवहार असंतुलित या गलत हो जाता है, जिससे वह अपने कार्यों को ठीक से नहीं कर पाता।
4. इससे व्यक्ति और दूसरे लोगों का जीवन नकारात्मक रूप से प्रभावित होने लगता है, जिससे तनाव और चिंता बढ़ती है। मनोवैज्ञानिक विकार व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को काफी कम कर सकते हैं।
In simple words: मनोवैज्ञानिक विकार व्यक्ति के व्यक्तित्व को तोड़ देते हैं, सामाजिक जीवन को बिगाड़ देते हैं, व्यवहार को गलत दिशा देते हैं, और व्यक्ति व दूसरों के जीवन पर बुरा असर डालते हैं।
🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक विकारों के नकारात्मक प्रभावों को सूचीबद्ध करते समय, हमेशा व्यक्ति के आंतरिक अनुभव (व्यक्तित्व), सामाजिक संबंधों और बाहरी व्यवहार के संदर्भ में सोचना चाहिए।
Question 4. मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण से क्या आशय है?
Answer: मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण से तात्पर्य मानसिक विकारों को समझने के लिए उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटना है। इससे विकारों को आसानी से समझा और प्रबंधित किया जा सकता है। मानसिक विकारों के वर्गीकरण का श्रेय मुख्य रूप से दो प्रमुख संस्थाओं - 'अमरीकी मनोरोग संघ' (APA) और 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' (WHO) को जाता है। APA ने DSM – Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders को प्रकाशित किया, जबकि WHO ने ICD – International Classification of Diseases को प्रकाशित किया। यह वर्गीकरण डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को एक समान भाषा में विकारों पर चर्चा करने में मदद करता है।
In simple words: मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण का मतलब है मानसिक बीमारियों को अलग-अलग समूहों में बांटना ताकि उन्हें बेहतर समझा जा सके। APA और WHO जैसी संस्थाएँ इसके लिए नियम और किताबें बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: मानसिक विकारों के वर्गीकरण में DSM और ICD जैसे मैनुअल की भूमिका को हमेशा उजागर करें, क्योंकि ये नैदानिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ हैं।
Question 5. रोगोन्मुखता दबाव मॉडल को समझाइए।
Answer: रोगोन्मुखता दबाव मॉडल को अंग्रेजी में 'डाईथिसिस स्ट्रेस मॉडल' (Diathesis Stress Model) कहा जाता है। 'डाईथिसिस' का अर्थ है किसी बीमारी या असामान्य व्यवहार के प्रति व्यक्ति का पहले से मौजूद झुकाव (predisposition)। इस मॉडल के अनुसार, असामान्यता या मानसिक विकार केवल तभी उत्पन्न होते हैं जब व्यक्ति में पहले से मौजूद झुकाव और बाहरी तनाव दोनों एक साथ काम करते हैं। अकेले कोई भी कारक मानसिक बीमारी पैदा करने में सक्षम नहीं होता है। यह मॉडल समझाता है कि कुछ लोग तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों होते हैं।
In simple words: डाईथिसिस स्ट्रेस मॉडल बताता है कि मानसिक बीमारी तब होती है जब व्यक्ति में बीमारी का पहले से झुकाव हो और उस पर तनाव का दबाव पड़े। दोनों मिलकर बीमारी पैदा करते हैं।
🎯 Exam Tip: डाईथिसिस-स्ट्रेस मॉडल का वर्णन करते समय, 'पूर्ववृत्ति' (predisposition) और 'तनाव' (stress) के परस्पर प्रभाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही इस मॉडल का मुख्य सिद्धांत है।
Question 7. आरम्भिक वंचन से क्या अभिप्राय है?
Answer: आरम्भिक वंचन या आघात को अंग्रेजी में 'अर्ली डिप्रिवेशन ऑर ट्रॉमा' (Early deprivation or trauma) कहा जाता है। इसका मतलब है कि जब बच्चों के व्यक्तित्व के विकास की शुरुआत में किसी कारण से उन्हें पर्याप्त देखभाल या अनुभव नहीं मिलते हैं, तो उनका व्यक्तित्व ठीक से विकसित नहीं हो पाता है। इसके कारण कई तरह के असामान्य व्यवहार उत्पन्न हो सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से तीन बातें शामिल हैं:
1. **संस्थानीकरण:** जब बच्चों को परिवार या विवाह जैसी संस्थाओं में बदलाव के कारण मानसिक स्थिरता नहीं मिल पाती।
2. **घर में वंचन:** जब माता-पिता बच्चों की उपेक्षा करते हैं या अपने कामों में व्यस्त रहते हैं, तो घर में बच्चों को पर्याप्त ध्यान नहीं मिलता।
3. **बाल्यावस्था में सदमा:** बचपन में बच्चों के मन में कुछ ऐसी बातें या अनुभव बैठ जाते हैं जिससे उनके दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। ये अनुभव बच्चों के भावनात्मक विकास को बाधित करते हैं।
In simple words: आरम्भिक वंचन का मतलब है बचपन में सही देखभाल या अनुभव न मिलने से बच्चे का व्यक्तित्व ठीक से विकसित न होना। इसमें घर में उपेक्षा, संस्थागत बदलाव या बचपन के सदमे शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: आरम्भिक वंचन के दीर्घकालिक प्रभावों पर ध्यान दें, क्योंकि ये बच्चों के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
Question 8. तीव्र मनोवैज्ञानिक प्रतिबल किसे कहते हैं?
Answer: तीव्र मनोवैज्ञानिक प्रतिबल को अंग्रेजी में 'सीवियर साइकोलॉजिकल स्ट्रेस' (Severe Psychological Stress) कहते हैं। यह आज के जीवन में असफलता, निराशा, तनाव, दबाव और चिंता जैसी चीजों के कारण होता है। ये तनाव तब और गंभीर हो जाते हैं जब इनकी तीव्रता बहुत बढ़ जाती है और व्यक्ति का उन पर से नियंत्रण कम हो जाता है। इससे व्यक्ति की रोजमर्रा की गतिविधियाँ भी प्रभावित होने लगती हैं। तीव्र मनोवैज्ञानिक प्रतिबल किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में बाधा डाल सकते हैं और असामान्य व्यवहार का कारण बन सकते हैं। इससे व्यक्ति में भावनात्मक अपरिपक्वता, आत्मसम्मान की कमी और अत्यधिक संवेदनशीलता जैसी समस्याएँ भी पैदा हो सकती हैं। ये कारक व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
In simple words: तीव्र मनोवैज्ञानिक प्रतिबल वह बहुत ज़्यादा तनाव और दबाव है जो असफलता या निराशा से पैदा होता है। इससे व्यक्ति का व्यक्तित्व विकास रुक सकता है और असामान्य व्यवहार हो सकता है।
🎯 Exam Tip: तीव्र मनोवैज्ञानिक प्रतिबल के लक्षणों में दैनिक कार्यों में कठिनाई, भावनात्मक अस्थिरता और तनावपूर्ण स्थितियों से बचने की प्रवृत्ति शामिल है।
Question 10. दुर्भीति के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: दुर्भीति (Phobia) का अर्थ किसी वस्तु या परिस्थिति के प्रति अत्यधिक और अनुपयुक्त डर है, जो वास्तव में खतरनाक नहीं होती। इसे तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
1. **विवृत्तिभीति दुर्भीति (Agoraphobia):** इसमें व्यक्ति अपरिचित स्थितियों या भीड़-भाड़ वाली जगहों में जाने से डरता है। इसलिए उसकी सामान्य गतिविधियों को करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है।
2. **सामाजिक दुर्भीति (Social Phobia):** इसमें व्यक्ति दूसरों के साथ बातचीत करने या ऐसी सामाजिक परिस्थितियों में जाने से डरता है जहाँ उसे लगता है कि उसका मूल्यांकन किया जा सकता है।
3. **विशिष्ट दुर्भीति (Specific Phobia):** इसमें व्यक्ति किसी खास वस्तु या परिस्थिति से बहुत डरता है। जैसे कुछ लोगों को विशेष पशुओं, पक्षियों, रंगों या बीमारियों से बहुत ज़्यादा डर लगता है। यह डर वास्तविक खतरे से कहीं ज़्यादा होता है।
In simple words: दुर्भीति किसी चीज़ से बेवजह बहुत ज़्यादा डर लगना है। इसके तीन प्रकार हैं: भीड़-भाड़ से डर (विवृत्तिभीति), लोगों से बात करने में डर (सामाजिक दुर्भीति), और किसी खास चीज़ से डर (विशिष्ट दुर्भीति)।
🎯 Exam Tip: दुर्भीति के विभिन्न प्रकारों को उनके विशिष्ट लक्षणों और उन स्थितियों के आधार पर याद रखें जिनसे डर जुड़ा होता है।
Question 11. मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार क्या है?
Answer: मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार को अंग्रेजी में 'ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर' (Obsessive Compulsive Disorder - OCD) कहते हैं। इसमें व्यक्ति बार-बार कुछ ऐसे विचारों को मन में दोहराता रहता है जो अतार्किक और बेतुके होते हैं, भले ही वह उन्हें न चाहे। पीड़ित व्यक्ति इन विचारों से छुटकारा पाना चाहता है, लेकिन वह मजबूर महसूस करता है। इससे उसकी मानसिक शांति इतनी खराब हो जाती है कि उसे रोजमर्रा के जीवन में परेशानी होती है।
**बाध्यता (Compulsion)** एक तरह की क्रियात्मक प्रतिक्रिया होती है। इसमें रोगी अपनी इच्छा के खिलाफ बार-बार कोई क्रिया करने के लिए मजबूर महसूस करता है। उदाहरण के लिए, साफ कपड़ों को बार-बार धोना, हाथों को कई बार साफ करना, और दरवाजे बंद करने के बाद भी बार-बार खींचकर देखना। ये सभी क्रियाएँ अतार्किक और बेतुकी होती हैं। OCD व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित करता है।
In simple words: मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार में व्यक्ति को अजीब विचार बार-बार परेशान करते हैं (मनोग्रस्ति) और वह अपनी इच्छा के खिलाफ कुछ काम बार-बार करता है (बाध्यता)।
🎯 Exam Tip: OCD में मनोग्रस्ति (obsession) और बाध्यता (compulsion) के बीच के संबंध को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये दोनों लक्षण एक दूसरे से जुड़े होते हैं।
Question 13. आत्महत्या का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: आत्महत्या सामान्यतः भावनात्मक दशा विकारों से जुड़ी होती है। यह एक ऐसी क्रिया है जिसमें व्यक्ति जानबूझकर और चेतन प्रयास से अपनी जिंदगी को खत्म करने की कोशिश करता है। आत्महत्या को प्रेरित करने वाले कई कारक होते हैं, जिनमें तनावपूर्ण घटनाएँ, मनोदशा और विचारों में बदलाव, शराब का उपयोग, सामाजिक दबाव, मानसिक बीमारियाँ और आधुनिक जीवन की नई चुनौतियाँ शामिल हैं। विभिन्न समाजों और व्यक्तियों में उम्र और लिंग के आधार पर आत्महत्या की दर और कोशिशें अलग-अलग पाई जाती हैं। वर्तमान समाज में आत्महत्या एक जटिल और गंभीर समस्या है, जिससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाना इसमें मदद कर सकता है।
In simple words: आत्महत्या का मतलब है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर अपनी जान लेने की कोशिश करता है। यह तनाव, मानसिक समस्याओं और सामाजिक दबाव जैसे कई कारणों से होता है।
🎯 Exam Tip: आत्महत्या के कारणों और रोकथाम के उपायों पर चर्चा करते समय, व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समर्थन और संकटकालीन हस्तक्षेप के महत्व को उजागर करें।
Question 14. विभिन्न प्रकार की भ्रमासक्तियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भ्रमासक्ति (Delusion) का अर्थ है जब कोई व्यक्ति किसी ऐसी बात पर दृढ़ता से विश्वास करता है जो वास्तविकता में गलत होती है, और सबूत होने पर भी वह अपना विचार नहीं बदलता। विभिन्न प्रकार की भ्रमासक्तियाँ इस प्रकार हैं:
1. **अत्यहमन्यता भ्रमासक्ति (Delusion of Grandeur):** इसमें व्यक्ति खुद को बहुत शक्तिशाली, महान या किसी विशेष प्रतिभा से संपन्न मानता है, भले ही ऐसा न हो।
2. **नियंत्रण भ्रमासक्ति (Delusion of Control):** इसमें व्यक्ति यह मानता है कि उसके विचार, भावनाएँ या क्रियाएँ किसी बाहरी शक्ति द्वारा नियंत्रित की जा रही हैं।
3. **घ्राण विभ्रांति (Olfactory Hallucination):** इसमें व्यक्ति को ऐसी गंध महसूस होती है जो वास्तव में मौजूद नहीं होती है, जैसे धुएँ या ज़हर की गंध। यह एक प्रकार की संवेदी भ्रान्ति है।
In simple words: भ्रमासक्ति का मतलब है गलत बात पर पक्का विश्वास रखना। इसके प्रकारों में खुद को महान समझना, महसूस करना कि कोई और हमें नियंत्रित कर रहा है, और ऐसी गंध महसूस करना जो है ही नहीं, शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: भ्रमासक्ति (delusion) और विभ्रम (hallucination) के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। भ्रम गलत विश्वास हैं, जबकि विभ्रम वास्तविक उत्तेजना के बिना संवेदी अनुभव हैं।
Question 15. वियोगज दुश्चिता विकार का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: वियोगज दुश्चिता विकार को अंग्रेजी में 'सेपरेशन एंजायटी डिसऑर्डर' (Separation Anxiety Disorder) भी कहा जाता है। इस विकार में बच्चे अपने माता-पिता या अन्य मुख्य देखभालकर्ता से अलग होने पर बहुत ज़्यादा डर या चिंता महसूस करते हैं। वे अकेले रहने में, अकेले आने-जाने में या नई जगहों पर जाने से घबराते हैं, और हमेशा अपने माता-पिता के साथ रहने की कोशिश करते हैं। ऐसे बच्चे वियोग की स्थिति से बचने के लिए चिल्लाते हैं, रोते हैं या खुद को नुकसान पहुँचाने की धमकी भी दे सकते हैं। यह विकार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुँचाता है और उनके व्यक्तित्व के विकास में बाधा डालता है।
In simple words: वियोगज दुश्चिता विकार में बच्चे अपने माता-पिता से अलग होने पर बहुत ज़्यादा चिंतित और डरे हुए महसूस करते हैं। वे हमेशा उनके साथ रहना चाहते हैं।
🎯 Exam Tip: वियोगज दुश्चिता विकार के लक्षणों में अत्यधिक चिंता, भय, और देखभालकर्ता से अलग होने पर शारीरिक शिकायतें शामिल हैं।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 4 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. असामान्य व्यवहार की विशेषताओं का सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: असामान्य व्यवहार की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **समाज विरोधी व्यवहार:** असामान्य व्यवहार समाज के नियमों, रीति-रिवाजों और उम्मीदों के खिलाफ होता है। ऐसा व्यवहार अक्सर सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं होता है।
2. **परिस्थिति के प्रतिकूल व्यवहार:** असामान्य व्यवहार वास्तविकता से मेल नहीं खाता और परिस्थितियों के अनुसार नहीं होता। व्यक्ति का व्यवहार उस स्थिति के लिए गलत होता है जिसमें वह मौजूद है।
3. **मानसिक असंतुलन:** असामान्य व्यवहार करने वाले व्यक्ति मानसिक रूप से असंतुलित होते हैं। ऐसे लोगों के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके में अस्थिरता और असंगति होती है।
4. **अनियमितता या अप्रासंगिकता:** असामान्य व्यक्ति के व्यवहार में कोई नियमितता या प्रासंगिकता नहीं होती। वे अक्सर अजीब और अप्रत्याशित तरीके से व्यवहार करते हैं, जैसे धूप में घूमना या एक पैर पर खड़े रहना।
5. **अपर्याप्त समायोजन:** असामान्य व्यक्तियों में माहौल के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता कम होती है। उनकी भावनात्मक स्थिति स्थिर नहीं रहती, जिससे सामाजिक और घरेलू जीवन में समायोजन मुश्किल हो जाता है। इन विशेषताओं के आधार पर एक असामान्य व्यक्ति की पहचान की जा सकती है।
In simple words: असामान्य व्यवहार समाज के खिलाफ होता है, परिस्थितियों के अनुकूल नहीं होता, और मानसिक रूप से असंतुलित होता है। इसमें व्यवहार में कोई नियम या मतलब नहीं होता और व्यक्ति माहौल से तालमेल नहीं बिठा पाता है।
🎯 Exam Tip: असामान्य व्यवहार की विशेषताओं को याद रखने के लिए, यह सोचें कि व्यक्ति समाज, अपनी भावनाओं और आसपास की दुनिया के साथ कैसे जुड़ता है।
Question 2. असामान्यता के प्रति पायी जाने वाली भ्रामक धारणाओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: सामान्य लोग असामान्यता के बारे में कई गलत धारणाएँ रखते हैं। ये भ्रामक धारणाएँ निम्नलिखित हैं:
1. **असामान्यता एक संक्रामक तथा आनुवंशिक रोग है:** यह एक आम गलत धारणा है कि सभी मानसिक रोग आनुवंशिक होते हैं और संक्रामक होते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि मनोविदलता (Schizophrenia) और उन्माद अवसाद मनस्ताप (Manic Depressive Psychosis) के अलावा अधिकांश मानसिक विकारों की उत्पत्ति में आनुवंशिकता का कोई बड़ा हाथ नहीं होता। मानसिक रोग संक्रामक भी नहीं होते हैं।
2. **असामान्यता असाध्य है:** यह मानना भी एक गलत धारणा है कि मानसिक विकृतियाँ ठीक नहीं हो सकतीं। वास्तविकता इसके विपरीत है, क्योंकि आधुनिक मानसिक चिकित्सालयों में कुशल उपचार उपलब्ध है जिससे कई लोग ठीक हो जाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए विभिन्न प्रकार के उपचार उपलब्ध हैं।
3. **असामान्य व्यवहार सदैव विचित्र एवं बेतुका होता है:** यह एक और गलत धारणा है कि सभी असामान्य रोगी हमेशा अजीब, बेतुका, अतार्किक और असंगत व्यवहार करते हैं। मानसिक विकृतियाँ कई प्रकार की होती हैं। कुछ विशेष प्रकार की असामान्यता वाले लोग अजीब व्यवहार करते हैं, लेकिन अधिकांश रोगी सामान्य व्यक्तियों की तरह ही अपना जीवन जीते हैं।
4. **मनोरोग अत्यधिक कामुकता के परिणाम होते हैं:** यह भ्रांति भी है कि मानसिक विकार कामुक विचारों या अधिक कामुकता के कारण होते हैं। वास्तव में, मनोरोग अदमनीय काम-प्रवृत्ति, अपराधबोध और आत्म-घृणा के कारण अधिक उत्पन्न होते हैं।
In simple words: लोग सोचते हैं कि मानसिक बीमारियाँ फैलने वाली और आनुवंशिक होती हैं, कभी ठीक नहीं होतीं, और हमेशा अजीब व्यवहार दिखाती हैं, या सिर्फ कामुकता से होती हैं। ये सभी बातें गलत हैं।
🎯 Exam Tip: इन भ्रामक धारणाओं का खंडन करते समय, वैज्ञानिक तथ्यों और वर्तमान चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित सही जानकारी प्रदान करें।
Question 3. दुर्भीति के उपचार में प्रयुक्त विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: दुर्भीति (Phobia) के उपचार में कई विधियाँ प्रयोग की जाती हैं, जिनमें प्रमुख इस प्रकार हैं:
1. **जैविक या मेडिकल प्रविधि:** इसमें चिंता-विरोधी दवाएँ जैसे बारबिट्रेट (barbiturate) और प्रोपेनडियोल्स (Propanediols) का उपयोग किया जाता है। ये दवाएँ डर और चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं।
2. **मनोविश्लेषणात्मक चिकित्सा:** इस विधि में रोगी के फोबिया के मूल कारण को समझने का प्रयास किया जाता है। चिकित्सक स्वतंत्र साहचर्य (free association) और स्वप्न विश्लेषण (dream analysis) जैसी विधियों का उपयोग करके रोगी की अंतर्दृष्टि विकसित करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया से रोगी को अपने डर के वास्तविक स्रोत का पता चलता है।
3. **व्यवहारवादी चिकित्सा:** इसमें दुर्भीति के उपचार के लिए कई विधियाँ अपनाई जाती हैं:
A. **व्यनुकूलन (Counterconditioning):** इसमें भय पैदा करने वाली स्थिति को किसी सुखद स्थिति से जोड़ा जाता है। इससे रोगी के फोबिया की गंभीरता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
B. **असंवेदीकरण (Systematic Desensitization):** यह एक प्रभावी विधि है। इसमें रोगी को धीरे-धीरे भय पैदा करने वाली स्थिति के प्रति संवेदनशील बनाना कम किया जाता है, जिससे डरने की आदत कम होती है।
C. **फ्लडिंग (Flooding):** इस विधि में रोगी को दुर्भीति उत्पन्न करने वाली परिस्थिति में तब तक रखा जाता है, जब तक उसका डर खुद-ब-खुद कम या समाप्त न हो जाए। यह एक त्वरित लेकिन तीव्र विधि है।
D. **मॉडलिंग (Modeling):** इसमें रोगी के सामने किसी ऐसे व्यक्ति को दिखाया जाता है जो उसके फोबिया से जुड़ी स्थिति में सामान्य व्यवहार करता है। इसे देखकर रोगी को लगता है कि डरना बेकार है, जिससे उसके डर के लक्षण कम होने लगते हैं।
इस प्रकार, दुर्भीति के कई नैदानिक लक्षण होते हैं, जो विभिन्न कारकों से उत्पन्न होते हैं और विभिन्न विधियों से इनका इलाज किया जा सकता है।
In simple words: दुर्भीति के इलाज में दवाएँ, मनोविश्लेषण से डर का कारण समझना, और व्यवहार बदलने वाली तकनीकें जैसे कि डर वाली चीज़ से दूर करना, धीरे-धीरे सामना कराना, एक साथ बहुत ज़्यादा सामना कराना, या किसी को देखकर सीखना शामिल है।
🎯 Exam Tip: दुर्भीति के उपचार विधियों का वर्णन करते समय, प्रत्येक विधि के पीछे के सिद्धांत और उसके उपयोग के तरीके को स्पष्ट करें, खासकर व्यवहारवादी तकनीकों को।
Question 4. मनोव्याधिकी के मानवतावादी-अस्तित्ववादी विचारधारा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके गुण व दोषों पर प्रकाश डालिए।
Answer: मनोव्याधिकी के मानवतावादी-अस्तित्ववादी मॉडल मानव व्यवहार को समझने का एक तरीका है। यह मॉडल मानता है कि व्यक्ति अपने जीवन का अर्थ और उद्देश्य खोजने के लिए जिम्मेदार है, और मानसिक कष्ट तब होता है जब व्यक्ति इस जिम्मेदारी से दूर भागता है या अकेलापन महसूस करता है। इस मॉडल का विकास मनोगत्यात्मक और व्यवहारवादी मॉडल के बाद हुआ।
**गुण:**
1. इस मॉडल का एक बड़ा फायदा यह है कि यह मानव व्यवहार को समझने के लिए एक आशावादी दृष्टिकोण अपनाता है। यह मानता है कि हर इंसान में खुद को सुधारने और बढ़ने की क्षमता होती है।
2. यह मॉडल व्यक्ति के अध्ययन में स्वयं उसके दृष्टिकोण को महत्व देता है। इसमें व्यक्ति की भावनाओं और विचारों को प्राथमिकता दी जाती है।
3. इसमें प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अनुभूतियों को महत्व दिया जाता है, क्योंकि हर इंसान का अनुभव अलग होता है।
**दोष:**
1. यह मॉडल वैज्ञानिक नहीं है क्योंकि इसमें व्यक्तिपरक अनुभवों पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है, जिन्हें मापना मुश्किल है।
2. यह मॉडल अस्पष्ट है और आत्मनिष्ठ भी है। इसे ठीक से समझा नहीं जा सकता और न ही परिकल्पना बनाकर इसका वैज्ञानिक सत्यापन किया जा सकता है।
3. इस मॉडल में व्यक्ति की मूल प्रवृत्तियों, प्रासंगिकता और जैविक कारकों की पूरी तरह से उपेक्षा की गई है, जो तर्कसंगत नहीं है। यह मानता है कि सभी समस्याएँ व्यक्ति की आत्म-खोज में कमी के कारण हैं।
In simple words: मानवतावादी-अस्तित्ववादी मॉडल कहता है कि मानसिक समस्या तब आती है जब व्यक्ति जीवन का अर्थ नहीं खोज पाता। इसके अच्छे गुण हैं कि यह आशावादी है और व्यक्ति के अनुभवों पर ज़ोर देता है। लेकिन इसके दोष हैं कि यह वैज्ञानिक नहीं है और जैविक कारणों को नज़रअंदाज़ करता है।
🎯 Exam Tip: मानवतावादी-अस्तित्ववादी मॉडल का वर्णन करते समय, उसके मुख्य सिद्धांतों (स्वतंत्र इच्छा, आत्म-वास्तविकीकरण) और साथ ही उसकी आलोचनाओं को भी शामिल करें।
Question 5. व्यामोही विकृति के लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: व्यामोही विकृति (Paranoid Disorder) एक मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति को गंभीर संदेह और अविश्वास की भावना होती है। इस विकृति से पीड़ित रोगियों में निम्नलिखित लक्षण पाए जाते हैं:
1. **व्यामोह (Delusions):** व्यामोही विकृति का मुख्य लक्षण विभिन्न प्रकार के स्थायी और व्यवस्थित व्यामोह होते हैं। इनमें दंड का व्यामोह (जैसे यह मानना कि कोई उसे नुकसान पहुँचाना चाहता है), महानता का व्यामोह (खुद को बहुत महत्वपूर्ण समझना), और ईर्ष्या का व्यामोह (अपने साथी पर बेवजह शक करना) शामिल हैं। दंड का व्यामोह इस रोग का केंद्रीय लक्षण होता है।
2. **विभ्रम की कमी (Lack of Hallucinations):** इस रोग में आमतौर पर विभ्रम (hallucinations) नहीं पाए जाते हैं। अगर कभी विभ्रम के लक्षण दिखाई भी देते हैं तो वे अधिकतर श्रव्य (Auditory) होते हैं, यानी व्यक्ति को ऐसी आवाज़ें सुनाई देती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं।
3. **स्थायी भ्रान्ति की कमी (Lack of Persistent Disorientation):** व्यामोही विकृति के रोगियों को स्थान, समय और स्वयं का पूरी तरह से ज्ञान होता है। उन्हें यह पता होता है कि वे कहाँ हैं, कौन हैं, और क्या समय है। वे वास्तविक दुनिया से पूरी तरह कटे हुए नहीं होते, बस उनकी सोच में गड़बड़ी होती है।
In simple words: व्यामोही विकृति में व्यक्ति को हमेशा शक रहता है और उसे लगता है कि कोई उसे नुकसान पहुँचाना चाहता है। इसमें अक्सर झूठे विश्वास (व्यामोह) होते हैं, लेकिन आवाज़ें सुनाई देना (विभ्रम) कम होता है, और व्यक्ति को समय-स्थान का पूरा ज्ञान होता है।
🎯 Exam Tip: व्यामोही विकृति के लक्षणों को स्पष्ट करते समय, व्यामोह के प्रकारों और व्यक्ति की वास्तविकता के प्रति जागरूकता को प्रमुखता से बताएं।
प्रश्न 6. वर्तमान में युवाओं में बढ़ते मादक पदार्थों के प्रयोग के कारणों की विवेचना कीजिए।
Answer: वर्तमान समय में युवा वर्ग में मादक पदार्थों के उपयोग में वृद्धि के कई कारण हैं। ये कारण इस प्रकार हैं:
1. आज की युवा पीढ़ी निराशा और कुंठा से ग्रस्त है। इन मुश्किलों के कारण युवाओं का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। जब उनका व्यक्तित्व कमजोर होता है, तो उनकी इच्छाएँ भी बढ़ जाती हैं। ऐसी निराशाजनक स्थितियों में कई युवा मादक पदार्थों को एक सहारे के रूप में अपना लेते हैं ताकि वे अपनी परेशानियों से अस्थायी राहत पा सकें।
2. जब कोई व्यक्ति अपने युवा साथी को मादक पदार्थ का सेवन करते हुए देखता है, तो वह भी ऐसा करने लगता है ताकि वह अपनी पहचान बना सके। उसे लगता है कि यह एक रोमांचक काम है, एक नया अनुभव है, और दूसरों के साथ घुलने-मिलने का एक तरीका है। आज स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों में इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने में मादक द्रव्य पदार्थों का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
3. पश्चिमी संस्कृति और शहरी जीवनशैली के कारण शहरों में लोग और युवा इसे एक फैशन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। शहरों की चमक-धमक और व्यस्त जीवनशैली ने भी इसके उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
4. वर्तमान युग में नैतिक मूल्य तेजी से गिर रहे हैं। जहाँ पहले नशीले पदार्थों का उपयोग एक बुराई माना जाता था, अब उसे संयम और सदाचार की पुरानी सोच समझा जाता है। अश्लील साहित्य, डेटिंग सेंटर और रोमांटिक मनोरंजन के प्रभाव से भी मादक द्रव्य पदार्थों को बढ़ावा मिल रहा है।
5. जो लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं, वे आसानी से मादक पदार्थों की ओर आकर्षित हो जाते हैं। उन्हें सही और गलत का अंतर पता नहीं होता और वे इन पदार्थों का सेवन करके अपने दोस्तों और समाज के बीच बहुत लोकप्रिय बनना चाहते हैं। इस तरह, असामान्य व्यक्तित्व वाले युवा अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए मादक पदार्थों का सेवन शुरू कर देते हैं।
In simple words: युवा वर्ग में बढ़ती निराशा, दोस्तों का प्रभाव, आधुनिक जीवनशैली, गिरते नैतिक मूल्य और मानसिक कमजोरी मादक पदार्थों के सेवन के मुख्य कारण हैं। यह उनके जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में सभी संभावित कारणों को सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक कारण को संक्षेप में समझाएँ और यह भी बताएँ कि ये कारण क्यों बढ़ते जा रहे हैं।
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