RBSE Solutions Class 12 Practical Geography Chapter 2 आंकड़ों का एकत्रीकरण एवं विश्लेषण

NCERT Solutions for Class 12 Geography: Chapter 02 आंकड़ों का एकत्रीकरण एवं विश्लेषण

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Practice Class 12 Geography Solutions: Chapter 02 आंकड़ों का एकत्रीकरण एवं विश्लेषण

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RBSE Class 12 Practical Geography Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. आँकड़ों से क्या आशय है?
Answer: आँकड़े उन संख्याओं को कहते हैं, जिन्हें किसी खास मकसद से व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा किया जाता है और गणितीय रूप में दिखाया जाता है। इन्हें वास्तविक दुनिया के मापन को बताने वाली संख्याएँ भी कहा जाता है। ये संख्याएँ हमें किसी विषय के बारे में जानकारी देती हैं।
In simple words: आँकड़े वे संख्याएँ हैं जिन्हें किसी खास उद्देश्य के लिए इकट्ठा किया जाता है, जैसे किसी चीज को मापना या किसी जानकारी को दिखाना।

🎯 Exam Tip: आँकड़ों की परिभाषा में उनके उद्देश्यपूर्ण संग्रह और गणितीय प्रदर्शन पर जोर दें, क्योंकि यह डेटा के मूल सिद्धांत को बताता है।

 

प्रश्न 2. प्राथमिक आँकड़े किसे कहते हैं?
Answer: प्राथमिक आँकड़े वे होते हैं जिन्हें कोई शोधकर्ता या संस्था पहली बार खुद इकट्ठा करती है। ये ऐसे आँकड़े होते हैं जो पहले से कहीं भी छपे हुए या मौजूद नहीं होते, बल्कि सर्वेक्षण के अलग-अलग तरीकों से पहली बार प्राप्त किए जाते हैं। इन आँकड़ों को व्यक्ति खुद देखकर, इंटरव्यू लेकर या प्रश्नावली भरकर इकट्ठा करता है। ये आँकड़े सबसे मौलिक जानकारी प्रदान करते हैं।
In simple words: प्राथमिक आँकड़े वे होते हैं जिन्हें कोई व्यक्ति या संस्था पहली बार खुद इकट्ठा करता है, जैसे इंटरव्यू या सर्वेक्षण से।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक आँकड़ों को उनकी "पहली बार इकट्ठा की गई" प्रकृति और प्रत्यक्ष स्रोतों (व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली) के साथ जोड़कर याद रखें।

 

प्रश्न 4. द्वितीयक आँकड़ों से आप क्या समझते हैं?
Answer: द्वितीयक आँकड़े ऐसे आँकड़े होते हैं जिन्हें शोधकर्ता या संस्था खुद इकट्ठा नहीं करते, बल्कि उन्हें किसी और के द्वारा प्रकाशित या अप्रकाशित स्रोतों से प्राप्त करते हैं। ये स्रोत सरकारी और गैर-सरकारी प्रशासन, निजी प्रशासन, अखबारों, पत्रिकाओं और निजी रिकॉर्ड जैसे हो सकते हैं। द्वितीयक आँकड़े हमें किसी मौजूदा जानकारी का उपयोग करने में मदद करते हैं।
In simple words: द्वितीयक आँकड़े वे होते हैं जो किसी और के द्वारा पहले से इकट्ठा किए और प्रकाशित या अप्रकाशित किए जा चुके होते हैं।

🎯 Exam Tip: द्वितीयक आँकड़ों की पहचान उनके "दूसरे स्रोत से प्राप्त" होने और विभिन्न प्रकार के प्रकाशित/अप्रकाशित अभिलेखों से करें।

 

प्रश्न 5. द्वितीयक आँकड़ों की प्राप्ति के स्रोत बताइए।
Answer: द्वितीयक आँकड़े प्रकाशित और अप्रकाशित दोनों तरह के स्रोतों से मिल सकते हैं। प्रकाशित स्रोतों में राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय या स्थानीय स्तर पर छपी हुई सांख्यिकीय रिपोर्टें, सारांश और किताबें शामिल होती हैं। वहीं, अप्रकाशित स्रोतों में सरकारी और निजी रिकॉर्ड शामिल होते हैं, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होते लेकिन उनका उपयोग किया जा सकता है।
In simple words: द्वितीयक आँकड़े हमें प्रकाशित चीजों (जैसे किताबें, रिपोर्ट) और अप्रकाशित चीजों (जैसे निजी रिकॉर्ड) से मिलते हैं।

🎯 Exam Tip: द्वितीयक आँकड़ों के स्रोतों को याद करते समय "प्रकाशित" और "अप्रकाशित" श्रेणियों में बांटें, और प्रत्येक के कुछ प्रमुख उदाहरण दें।

 

प्रश्न 6. द्वितीयक आँकड़ों के प्रकाशित स्रोत बताइए।
Answer: द्वितीयक आँकड़ों के प्रकाशित स्रोतों में राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर जारी की गई सांख्यिकीय रिपोर्टें, सारांश और किताबें शामिल हैं। कुछ मुख्य प्रकाशित स्रोत इस प्रकार हैं:

  • अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन: संयुक्त राष्ट्र संघ के तहत काम करने वाली कई संस्थाएँ, जैसे खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), अंतर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय (ILO), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या गतिविधि (UNFPA), अलग-अलग देशों से समय-समय पर आँकड़े प्रकाशित करती हैं। 'द यू. एन. स्टेटिस्टीकल इयर बुक' इसका एक अच्छा उदाहरण है।
  • राष्ट्रीय प्रकाशन: केंद्र और राज्य सरकारों के अलग-अलग विभागों द्वारा प्रकाशित रिपोर्टें और बुलेटिन इसके अंतर्गत आते हैं। ये देश के भीतर के महत्वपूर्ण आँकड़े होते हैं।
  • स्थानीय प्रकाशन: बड़े शहरों के नगर निगम, नगर परिषद्, नगरपालिकाएँ, जिला परिषद् और ऐसे ही अन्य स्थानीय निकाय जो रिपोर्टें और बुलेटिन प्रकाशित करते हैं, वे भी इसके अंतर्गत आते हैं। ये स्थानीय स्तर की जानकारी देते हैं।

In simple words: द्वितीयक आँकड़ों के प्रकाशित स्रोत अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, राष्ट्रीय और राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों द्वारा छापी गई रिपोर्टें, किताबें और बुलेटिन होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रकाशित स्रोतों को अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तरों में बाँटकर याद करें और प्रत्येक के कम से कम दो उदाहरण दें।

 

प्रश्न 7. द्वितीयक आँकड़ों के अप्रकाशित स्रोत बताइये।
Answer: द्वितीयक आँकड़ों के अप्रकाशित स्रोतों में वे रिकॉर्ड और दस्तावेज़ आते हैं जो सार्वजनिक रूप से छपे हुए नहीं होते। इनमें मुख्य रूप से सरकारी और निजी अभिलेख, साथ ही अप्रकाशित शोध प्रबंध शामिल होते हैं:

  • सरकारी अभिलेख: केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों के पास बहुत से आँकड़े रिकॉर्ड के रूप में होते हैं जो प्रकाशित नहीं किए जाते, लेकिन अध्ययन के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।
  • निजी अभिलेख: विभिन्न कंपनियाँ, व्यापार संघ और व्यापारी अपने निजी इस्तेमाल के लिए जो रिकॉर्ड रखते हैं, वे भी अप्रकाशित आँकड़ों के स्रोत होते हैं। ये रिकॉर्ड उनके अंदरूनी कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

In simple words: द्वितीयक आँकड़ों के अप्रकाशित स्रोत वे रिकॉर्ड होते हैं जो छपे नहीं होते, जैसे सरकारी विभागों के अंदरूनी दस्तावेज़ और कंपनियों के निजी रिकॉर्ड।

🎯 Exam Tip: अप्रकाशित स्रोतों को याद करते समय "सरकारी" और "निजी" अभिलेखों पर ध्यान दें, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होते।

 

प्रश्न 8. खण्डित श्रेणी क्या है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: खण्डित श्रेणी में डेटा के अलग-अलग मूल्यों को छोटे-छोटे हिस्सों या खंडों में दिखाया जाता है। इसका मतलब है कि अगर कोई आँकड़ा कई बार आ रहा है, तो उसे बार-बार लिखने की बजाय सिर्फ एक बार लिखा जाता है और वह जितनी बार आया है, उस संख्या को उसकी 'आवृत्ति' (frequency) के रूप में बताया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि एक कक्षा में 15 विद्यार्थियों को 8 अंक मिले हैं, तो हम इसे '8 अंक' और उसकी आवृत्ति '15' के रूप में लिखते हैं। यह तरीका डेटा को संक्षिप्त और समझने योग्य बनाता है।
In simple words: खण्डित श्रेणी वह होती है जहाँ डेटा के मानों को उनकी आवृत्ति के साथ दिखाया जाता है; यदि कोई मान कई बार आता है, तो उसे एक बार लिखकर उसकी कुल संख्या बता दी जाती है।

🎯 Exam Tip: खण्डित श्रेणी को परिभाषित करते समय "पुनरावृत्ति" और "आवृत्ति" शब्दों का उपयोग सुनिश्चित करें, साथ ही एक स्पष्ट उदाहरण भी दें।

 

प्रश्न 9. सतत श्रेणी किसे कहते हैं?
Answer: सतत (अखण्डित) श्रेणी वह होती है जहाँ चर मूल्यों में एक निरंतरता या लगातार बदलाव होता है। ऐसी श्रेणियों में चर मूल्यों को अलग-अलग वर्गों या समूहों में बाँट दिया जाता है। हर वर्ग में कितनी इकाइयाँ शामिल हैं, उसे आवृत्ति के रूप में लिखा जाता है। यह श्रेणी बड़े डेटा सेट को संभालने और उसे समझने में मदद करती है। उदाहरण के लिये –

प्राप्तांकविद्यार्थी
10-2015
20-308

In simple words: सतत श्रेणी वह होती है जहाँ डेटा के मानों को लगातार वर्गों में बांटा जाता है, और हर वर्ग में कितने मान आते हैं, उसे उसकी आवृत्ति के रूप में दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी की परिभाषा में "निरंतरता", "वर्गों में विभाजन" और "आवृत्ति" शब्दों का प्रयोग करें, साथ ही एक सारणीबद्ध उदाहरण भी दें।

 

निम्नलिखित सारणी से माध्यिका ज्ञात कीजिये।

प्राप्तांकपरीक्षार्थियों की संख्या
0-1016
10-2060
20-3080
30-4024
40-5020

Answer:
हल:

 

प्राप्तांक (x)परीक्षार्थियों की संख्या (f)संचयी आवृत्ति (cf)
0-101616
10-206076
20-3080156
30-4024180
40-5020200
 \( \Sigma f = 200 \) 


माध्यिका की गणना करने के लिए, सबसे पहले संचयी आवृत्ति (cumulative frequency) निकालते हैं। इसके बाद, \( \frac { N }{ 2 } \)वें पद का मान ज्ञात करते हैं। यहाँ \( N = 200 \) है, तो
\( M = \left( \frac { N }{ 2 } \right) \) वाँ पद \( = \left( \frac { 200 }{ 2 } \right) = 100 \) वाँ पद
100 वाँ पद संचयी आवृत्ति 156 में आता है, जो वर्ग 20-30 के सामने है। इसका मतलब है कि माध्यिका वर्ग 20-30 होगा। माध्यिका का मान निकालने के लिए निम्न सूत्र का उपयोग करते हैं:
\( M = L_1 + \frac { \frac { N }{ 2 } - C }{ f } \times i \)
यहाँ: \( L_1 = 20 \) (माध्यिका वर्ग की निचली सीमा)
\( N/2 = 100 \)
\( C = 76 \) (माध्यिका वर्ग से ठीक पहले के वर्ग की संचयी आवृत्ति)
\( f = 80 \) (माध्यिका वर्ग की आवृत्ति)
\( i = 10 \) (माध्यिका वर्ग का अंतराल)

तो,
\( = 20 + \frac { 100 - 76 }{ 80 } \times 10 \)
\( = 20 + \frac { 24 }{ 80 } \times 10 \)
\( = 20 + \frac { 240 }{ 80 } \)
\( = 20 + 3 \)
\( M = 23 \) अंक
In simple words: माध्यिका निकालने के लिए, पहले संचयी आवृत्ति की तालिका बनाते हैं। फिर \( N/2 \) का मान देखते हैं कि वह किस संचयी आवृत्ति में आ रहा है, और उस वर्ग को माध्यिका वर्ग मानते हैं। आखिर में, माध्यिका के सूत्र में मान रखकर उत्तर निकालते हैं।

🎯 Exam Tip: माध्यिका की गणना करते समय संचयी आवृत्ति की सही गणना, माध्यिका वर्ग का चयन, और सूत्र में सही मानों को सावधानीपूर्वक रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 11. निम्नलिखित सारणी में दिये गये मूल्यों के आधार पर समान्तर माध्य ज्ञात करिये।

संचित क्षेत्र (हेक्टेयर)आवृत्ति
5-1015
10-1525
15-2030
20-2535
25-3028
30-3520
35-4017

Answer:
समान्तर माध्य की गणना के लिए, पहले वर्ग अंतराल का मध्यबिंदु (x) ज्ञात करते हैं। फिर, प्रत्येक मध्यबिंदु को उसकी आवृत्ति (f) से गुणा करके \( fx \) निकालते हैं। इन सभी \( fx \) मानों का योग (\( \Sigma fx \)) ज्ञात करते हैं, और सभी आवृत्तियों का योग (\( N = \Sigma f \)) भी निकालते हैं।

वर्गआवृत्ति (f)मध्यबिंदु (x)\( fx \)
5-10157.5112.5
10-152512.5312.5
15-203017.5525
20-253522.5787.5
25-302827.5770
30-352032.5650
35-401737.5637.5
 \( N = 170 \) \( \Sigma fx = 3795 \)

सूत्र का प्रयोग करके समान्तर माध्य ज्ञात करते हैं:
\( \overline{X} = \frac { \Sigma fx }{ N } \)
\( \implies \overline{X} = \frac { 3795 }{ 170 } \)
\( \implies \overline{X} = 22.32 \) हेक्टेयर
In simple words: समान्तर माध्य निकालने के लिए, पहले हर वर्ग का बीच का मान निकालते हैं। फिर इस मान को उसकी आवृत्ति से गुणा करते हैं। सभी गुणा किए हुए मानों को जोड़कर, कुल आवृत्तियों की संख्या से भाग दे देते हैं।

🎯 Exam Tip: समान्तर माध्य की गणना में, वर्ग के मध्यबिंदु (x) की सही गणना और \( \Sigma fx \) और \( N \) के मानों को सूत्र में सही तरीके से रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 12. निम्न समंकों के लिये मानक विचलन ज्ञात कीजिये - 3, 5, 8, 12, 16, 13, 18, 4, 21, 10
Answer:
हल:
मानक विचलन ज्ञात करने के लिए, सबसे पहले दिए गए आँकड़ों का समान्तर माध्य (\( \overline{X} \)) निकालते हैं। फिर, प्रत्येक पद (\( x \)) का माध्य से विचलन (\( d = x - \overline{X} \)) ज्ञात करते हैं, और इन विचलनों का वर्ग (\( d^2 \)) निकालते हैं। इन सभी \( d^2 \) मानों का योग (\( \Sigma d^2 \)) ज्ञात करते हैं।
 

क्र.सं.पद (x)माध्य से विचलन (d)विचलन का वर्ग (\( d^2 \))
13-864
25-636
38-309
412101
516525
613204
718749
84-749
92110100
1010-101
\( N = 10 \)\( 110 \) \( 338 \)


पहले समान्तर माध्य (\( \overline{X} \)) की गणना करते हैं:
\( \overline{X} = \frac { \Sigma x }{ N } = \frac { 110 }{ 10 } = 11 \)

अब मानक विचलन (\( \sigma \)) का सूत्र का उपयोग करते हैं:
मानक विचलन \( \sigma = \sqrt { \frac { \Sigma d^{2} }{ N } } \)
\( \implies \sigma = \sqrt { \frac { 338 }{ 10 } } \)
\( \implies = \sqrt { 33.8 } \)
\( \implies \sigma = 5.814 \)
In simple words: मानक विचलन निकालने के लिए, पहले डेटा का औसत निकालते हैं। फिर हर संख्या का औसत से अंतर देखते हैं, उन अंतरों का वर्ग करते हैं, उन वर्गों को जोड़ते हैं, कुल संख्याओं से भाग देते हैं, और फिर उसका वर्गमूल निकालते हैं।

🎯 Exam Tip: मानक विचलन की गणना में, समान्तर माध्य की सही गणना, प्रत्येक पद से विचलन (\( d \)) और उसके वर्ग (\( d^2 \)) को सही ढंग से निकालना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 13. निम्नलिखित वर्गीकृत आँकड़ों के लिए समान्तर माध्य और मानक विचलन ज्ञात कीजिए।

वर्गआवृत्ति
10-2009
20-3012
30-4014
40-5018
50-6016
60-7012
70-8008

Answer:
वर्गीकृत आँकड़ों के लिए समान्तर माध्य और मानक विचलन ज्ञात करने के लिए, हमें पहले वर्ग मध्यबिंदु (\( x \)), \( fx \), माध्य से विचलन (\( d \)), और \( fd^2 \) की गणना करनी होगी।

वर्गआवृत्ति (f)मध्य बिन्दु (x)\( fx \)माध्य से विचलन (d)\( d^2 \)\( fd^2 \)
10-200915135-29.88892.818035.29
20-301225300-19.88395.214742.52
30-401435490-9.8897.611366.54
40-5018458100.12.01440.25
50-60165588010.12102.411638.56
60-70126578020.12404.814857.72
70-80087560030.12907.217257.68
 \( N = 89 \) \( \Sigma fx = 3995 \)  \( \Sigma fd^2 = 27898.56 \)

पहले समान्तर माध्य (\( \overline{X} \)) की गणना करते हैं:
समान्तर माध्य \( \overline{X} = \frac { \Sigma fx }{ N } \)
\( \implies \overline{X} = \frac { 3995 }{ 89 } \)
\( \implies \overline{X} = 44.88 \)

अब मानक विचलन (\( \sigma \)) का सूत्र का उपयोग करते हैं:
मानक विचलन \( \sigma = \sqrt { \frac { \Sigma fd^{2} }{ N } } \)
\( \implies = \sqrt { \frac { 27898.56 }{ 89 } } \)
\( \implies = \sqrt { 313.4 } \)
\( \implies = 17.7 \)
मानक विचलन \( = 17.7 \)
In simple words: वर्गीकृत डेटा का समान्तर माध्य निकालने के लिए, पहले वर्ग मध्यबिंदु और \( fx \) की गणना करें, फिर \( \Sigma fx \) को \( N \) से भाग दें। मानक विचलन के लिए, हर मध्यबिंदु का माध्य से विचलन निकालें, उसका वर्ग करें, आवृत्ति से गुणा करें, योग करें और फिर सूत्र में मान रखकर वर्गमूल लें।

🎯 Exam Tip: वर्गीकृत डेटा के लिए समान्तर माध्य और मानक विचलन की गणना करते समय, मध्यबिंदु (\( x \)) की सही पहचान, \( fx \) और \( fd^2 \) की गणना, और सभी योगों को सही ढंग से सूत्र में रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 14. एक विद्यार्थी के सात प्रश्न पत्रों के प्राप्त 42, 48, 53, 62, 67, 70, 76 हैं तो उनका समान्तर माध्य प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विधि से ज्ञात कीजिये।
Answer:
हल:
समान्तर माध्य की गणना प्रत्यक्ष विधि द्वारा –
प्रत्यक्ष विधि में सभी प्रेक्षणों (यहाँ, प्राप्तांकों) का योग करके उनकी कुल संख्या से भाग देते हैं।
सूत्र \( \overline{X} = \frac { \Sigma x }{ N } \)
यहाँ \( \Sigma x = 42+48+53+62+67+70+76 = 418 \) और \( N = 7 \)
\( \overline{X} = \frac { 418 }{ 7 } = 59.71 \)

अब अप्रत्यक्ष विधि (कल्पित माध्य विधि) द्वारा समान्तर माध्य की गणना –
अप्रत्यक्ष विधि में, हम पहले एक कल्पित माध्य (\( A \)) मानते हैं, और फिर प्रत्येक प्रेक्षण से कल्पित माध्य का विचलन (\( dx \)) निकालते हैं।

क्र.सं.\( X \)\( dx = X - A \) (जहाँ \( A = 62 \))
142-20
248-14
353-9
4620
5675
6708
77614
\( N = 7 \) \( \Sigma dx = +27 - 43 = -16 \)


अप्रत्यक्ष विधि का सूत्र है: \( \overline{X} = A + \frac { \Sigma dx }{ N } \)
\( \implies \overline{X} = 62 + \frac { -16 }{ 7 } \)
\( \implies \overline{X} = 62 - 2.28 \)
\( \implies \overline{X} = 59.71 \)
दोनों विधियों से समान्तर माध्य 59.71 प्राप्त होता है, जो सही है।
In simple words: समान्तर माध्य को सीधा सभी संख्याओं को जोड़कर कुल संख्या से भाग देकर निकालते हैं। अप्रत्यक्ष विधि में एक अनुमानित माध्य (कल्पित माध्य) लेकर हर संख्या का उससे अंतर निकालते हैं, फिर उन अंतरों का औसत कल्पित माध्य में जोड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: समान्तर माध्य की दोनों विधियों के चरणों को स्पष्ट रूप से समझें और सुनिश्चित करें कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों विधियों से परिणाम एक समान आए।

 

प्रश्न 15. निम्न आँकड़ों से माध्यिका ज्ञात कीजिये - 7, 25, 52, 14, 1, 19, 39, 27, 9, 47, 66
Answer:
हल:
माध्यिका (median) ज्ञात करने के लिए, सबसे पहले दिए गए आँकड़ों को आरोही (बढ़ते क्रम) या अवरोही (घटते क्रम) में व्यवस्थित करना होता है। यहाँ हम आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित कर रहे हैं:
1, 7, 9, 14, 19, 25, 27, 39, 47, 52, 66
 

क्र.स.पद
11
27
39
414
519
625
727
839
947
1052
1166
\( N = 11 \) 


यहाँ कुल पदों की संख्या \( N = 11 \) है, जो एक विषम संख्या है। माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र है:
सूत्र \( M = \left( \frac { N+1 }{ 2 } \right) \) वाँ पद
\( \implies M = \left( \frac { 11+1 }{ 2 } \right) \) वाँ पद
\( \implies M = \frac { 12 }{ 2 } \) वाँ पद
\( \implies = 6 \) वाँ पद
व्यवस्थित क्रम में 6 वें पद का मान 25 है।
अतः माध्यिका 25 होगी।
In simple words: माध्यिका निकालने के लिए, पहले सभी संख्याओं को छोटे से बड़े क्रम में जमाते हैं। अगर संख्याओं की संख्या विषम हो, तो बीच वाली संख्या माध्यिका होती है।

🎯 Exam Tip: माध्यिका निकालते समय, आँकड़ों को सही क्रम में व्यवस्थित करना पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है, और फिर पदों की संख्या (सम या विषम) के आधार पर सही सूत्र का प्रयोग करें।

 

प्रश्न 16. निम्न आँकड़ों के लिये बहुलक ज्ञात कीजिये –

प्राप्तांकविद्यार्थी संख्या
10-207
20-3012
30-4019
40-5014
50-608


Answer:
हल:
बहुलक ज्ञात करने के लिए, हम एक समूहन सारणी (Grouping Table) बनाते हैं और फिर अधिकतम आवृत्ति वाले वर्ग को पहचानते हैं।

प्राप्तांकमूल आवृत्तिदो-दो के जोड़ेतीन-तीन के जोड़ेमिलान रेखामिलान रेखाओं का योग
  IIIIIIIVV  
10-207 7 7  1
20-3012 \( f_0 \)19 12 38 2
30-4019 \( f_1 \) 31 19 45 5
40-5014 \( f_2 \)33  14 39 3
50-608 20  6 1


उपर्युक्त सारणी से यह स्पष्ट है कि वर्ग (30-40) में अधिकतम मिलान रेखाएँ 5 हैं। इसलिए, यही वर्ग बहुलक वर्ग होगा। बहुलक (Z) ज्ञात करने का सूत्र है:
सूत्र \( Z = L_1 + \frac { f_1 - f_0 }{ 2f_1 - f_0 - f_2 } \times i \)
यहाँ:
\( L_1 = 30 \) (बहुलक वर्ग की निचली सीमा)
\( f_1 = 19 \) (बहुलक वर्ग की आवृत्ति)
\( f_0 = 12 \) (बहुलक वर्ग से ठीक पहले के वर्ग की आवृत्ति)
\( f_2 = 14 \) (बहुलक वर्ग से ठीक बाद के वर्ग की आवृत्ति)
\( i = 10 \) (वर्ग अंतराल)

मानों को सूत्र में रखने पर:
\( = 30 + \frac { 19-12 }{ (2 \times 19)-12-14 } \times 10 \)
\( = 30 + \frac { 7 }{ 38-12-14 } \times 10 \)
\( = 30 + \frac { 7 }{ 12 } \times 10 \)
\( = 30 + \frac { 70 }{ 12 } \)
\( = 30 + 5.83 \)
\( \implies Z = 35.83 \)
In simple words: बहुलक निकालने के लिए, पहले एक समूह बनाने वाली तालिका बनाते हैं ताकि सबसे ज़्यादा आवृत्ति वाला वर्ग मिल सके। फिर, उस वर्ग की जानकारी (निचली सीमा, आवृत्ति, आस-पास के वर्गों की आवृत्ति) को बहुलक के सूत्र में रखकर उसका मान निकालते हैं।

🎯 Exam Tip: बहुलक की गणना में, समूहन सारणी से बहुलक वर्ग की सही पहचान, \( f_0, f_1, f_2 \) और \( i \) के मानों को सही ढंग से निर्धारित करना और सूत्र में त्रुटिहीन गणना करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 17. निम्न श्रेणियों में स्पियरमैन की कोटि अंतर विधि से सह-सम्बन्ध ज्ञात कीजिये –

\( X \) श्रेणी\( Y \) श्रेणी
1580
1675
1760
1840
1930
2015


Answer:
हल:
स्पियरमैन की कोटि अंतर विधि से सह-सम्बन्ध (rank correlation) ज्ञात करने के लिए, हमें पहले \( X \) और \( Y \) श्रेणियों के लिए कोटियाँ (ranks) निर्धारित करनी होंगी। फिर, प्रत्येक जोड़ी के लिए कोटियों का अंतर (\( D \)) और उसके वर्ग (\( D^2 \)) की गणना करनी होगी।

मूल्य \( X \)\( X \) श्रेणी कोटि (\( R_X \))मूल्य \( Y \)\( Y \) श्रेणी कोटि (\( R_Y \))कोटि अन्तर \( D = R_X - R_Y \)कोटि अन्तरों के वर्ग \( D^2 \)
156801525
165752309
174603101
183404-101
192305-39
201156-525
\( N = 6 \)    \( \Sigma D^2 = 70 \)


कोटि सह-सम्बन्ध गुणांक (\( p \)) का सूत्र है:
\( p = 1 - \frac { 6 \Sigma D^2 }{ N^3 - N } \)
यहाँ \( \Sigma D^2 = 70 \) और \( N = 6 \)। मानों को सूत्र में रखने पर:
\( = 1 - \frac { 6 \times 70 }{ (6)^3 - 6 } \)
\( = 1 - \frac { 420 }{ 216 - 6 } \)
\( = 1 - \frac { 420 }{ 210 } \)
\( = 1 - 2 \)
\( p = -1 \)
यहाँ, प्राप्त सह-सम्बन्ध गुणांक \( -1 \) है, जिसका अर्थ है कि \( X \) और \( Y \) श्रेणियों के बीच पूर्ण ऋणात्मक सह-सम्बन्ध है। इसका मतलब है कि जब एक श्रेणी बढ़ती है, तो दूसरी श्रेणी उसी अनुपात में घटती है।
In simple words: स्पियरमैन सह-सम्बन्ध निकालने के लिए, पहले दोनों श्रेणियों की रैंक (पद) निकालते हैं। फिर उन रैंकों के अंतर का वर्ग करके जोड़ते हैं, और इस मान को सूत्र में रखकर सह-सम्बन्ध गुणांक ज्ञात करते हैं।

🎯 Exam Tip: स्पियरमैन कोटि अंतर सह-सम्बन्ध में, कोटियों का सही निर्धारण (आरोही या अवरोही क्रम में), कोटि अंतर (\( D \)) और उनके वर्गों (\( D^2 \)) की सही गणना, और सूत्र में मानों को सावधानीपूर्वक रखना आवश्यक है।

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