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Detailed Chapter 2 विश्व की प्रमुख जनजातियाँ RBSE Solutions for Class 12 Geography
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Class 12 Geography Chapter 2 विश्व की प्रमुख जनजातियाँ RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. टुण्ड्रा प्रदेशों में निवास करने वाली कौन-सी जनजाति है?
(अ) भील
(ब) बुशमैन
(स) एस्किमो
(द) गौंड
Answer: (स) एस्किमो
In simple words: टुण्ड्रा प्रदेश बहुत ठंडे होते हैं, और एस्किमो लोग ही इन बर्फीले इलाकों में रहते हैं। वे इस कठिन माहौल में जीने के लिए खास तरीके अपनाते हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के निवास स्थान को याद रखने से उनके जीवनशैली और अनुकूलन को समझने में मदद मिलती है, जो भूगोल में महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. दुर्गम पहाड़ी व पठारी क्षेत्रों में निवास करने वाली जनजाति कौन-सी है?
(अ) भील
(ब) बुशमैन
Answer: (अ) भील
In simple words: दुर्गम पहाड़ी और पठारी इलाकों में अक्सर भील जनजाति के लोग रहते हैं। ये लोग ऐसे कठिन भूभाग में रहने के लिए जाने जाते हैं, और अपने प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर करते हैं।
🎯 Exam Tip: पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियों के नाम याद रखें, क्योंकि उनकी जीवनशैली इन भौगोलिक विशेषताओं से प्रभावित होती है।
प्रश्न 3. एस्किमो द्वारा प्रयोग की जाने वाली नाव को क्या कहते हैं?
(अ) मछली
(ब) एस्किमो की नाव
(स) बुशमैन का घर
(द) भीलों का हथियार
Answer: (ब) एस्किमो की नाव
In simple words: एस्किमो लोग शिकार और परिवहन के लिए खास तरह की नावों का इस्तेमाल करते हैं। ये नावें उनके बर्फीले वातावरण में बहुत काम आती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक जनजाति के विशिष्ट उपकरणों और उनके उपयोग को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी जीवनशैली का अभिन्न अंग है।
प्रश्न 4. एस्किमो का क्या अर्थ होता है?
(अ) वन में रहने वाला आदमी
(ब) कच्चा मांस खाने वाला आदमी
(स) नग्न रहने वाला आदमी
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) कच्चा मांस खाने वाला आदमी
In simple words: 'एस्किमो' शब्द का मतलब उन लोगों से है जो कच्चा मांस खाते हैं। यह नाम उनकी पारंपरिक भोजन शैली को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के नामों के शाब्दिक अर्थ को याद रखना उनकी संस्कृति और जीवनशैली को समझने में मदद करता है।
प्रश्न 5. शुतुरमुर्ग के अण्डों के खोल को बर्तन व आभूषण के लिए कौन-सी जनजाति प्रयोग करती है?
(अ) एस्किमो
(ब) बुशमैन
(स) पिग्मी
(द) भील
Answer: (द) भील
In simple words: शुतुरमुर्ग के अंडों के खोल का इस्तेमाल बर्तन और गहने बनाने के लिए भील जनजाति करती है। यह उनके रचनात्मक हुनर को दिखाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातियों की अनोखी कला और शिल्प कौशल पर ध्यान दें, क्योंकि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
प्रश्न 6. बुशमैन जनजाति का सम्बन्ध कौन-सी प्रजाति से है?
(अ) निग्रीटो
(ब) मंगोलायड्स
(स) काकेशस
(द) आस्टेलाइड्स
Answer: (द) आस्टेलाइड्स
In simple words: बुशमैन जनजाति का संबंध आस्टेलाइड्स प्रजाति से है। यह उनके शारीरिक विशेषताओं और उत्पत्ति को समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातियों के प्रजातीय वर्गीकरण को याद रखें, यह उनकी ऐतिहासिक और भौगोलिक उत्पत्ति को समझने में सहायक होता है।
प्रश्न 7. 'गोल गाधेड़ों प्रथा किस जनजाति में पाई जाती है?
(अ) गौंड
(ब) भील
(स) सैमांग
Answer: (स) सैमांग
In simple words: 'गोल गाधेड़ों' नाम की यह प्रथा सैमांग जनजाति में प्रचलित है। यह उनकी सामाजिक परंपराओं का एक हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: जनजातियों की विशेष प्रथाओं और रीति-रिवाजों को याद रखना उनकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
प्रश्न 8. गौंडों से शासित साम्राज्य नहीं है।
(अ) देवगढ़
(ब) माण्डला
(द) राजगढ़
Answer: (अ) देवगढ़
In simple words: देवगढ़ एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर गोंड राजाओं का शासन नहीं था। यह अन्य क्षेत्रों से अलग है जो गोंड साम्राज्य के अधीन थे।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के ऐतिहासिक साम्राज्यों और उनके क्षेत्रों को याद रखना परीक्षा में मदद करता है।
प्रश्न 9. दीप्पा तथा पैण्डा कृषि निम्नलिखित में से किस जनजाति द्वारा की जाती है?
(अ) भील
(ब) संथाल
(स) गौंड
(द) बुशमैन
Answer: (स) गौंड
In simple words: दीप्पा और पैण्डा जैसी खास तरह की खेती गोंड जनजाति के लोग करते हैं। यह उनकी पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातियों द्वारा अपनाई जाने वाली कृषि पद्धतियों और उनके नामों को याद रखें, जैसे झूमिंग या स्थानांतरण कृषि।
उत्तरमाला:
1. (स), 2. (अ), 3. (ब), 4. (ब), 5. (द), 6. (द), 7. (स), 8. (अ), 9. (स), 10. (स)
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 11. स्लेज क्या है?
Answer: स्लेज एक पहिये रहित गाड़ी होती है जो बर्फ पर चलती है। इसे अक्सर कुत्ते या रेण्डियर जैसे जानवर खींचते हैं। एस्किमो लोग इस गाड़ी का इस्तेमाल बर्फ वाले इलाकों में सामान ढोने के लिए करते हैं। यह उनके परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन है।
In simple words: स्लेज बिना पहियों वाली एक गाड़ी है जो बर्फ पर चलती है, जिसे कुत्ते या रेण्डियर खींचते हैं और एस्किमो लोग इसे इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: स्लेज की परिभाषा और उसके उपयोग को एस्किमो जनजाति के संदर्भ में याद रखें, क्योंकि यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रश्न 12. एस्किमो द्वारा बोली जाने वाली भाषा का नाम बताइए।
Answer: एस्किमो लोग मुख्य रूप से एल्यूट भाषा बोलते हैं। यह भाषा उनके समुदाय और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भाषा कनाडा, ग्रीनलैंड और अलास्का जैसे क्षेत्रों में बोली जाती है।
In simple words: एस्किमो लोग एल्यूट नाम की एक खास भाषा बोलते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी जनजाति की भाषा को याद रखना उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
प्रश्न 13. बेचुआनालैंड कहाँ स्थित है?
Answer: बेचुआनालैंड दक्षिणी अफ्रीका में स्थित एक क्षेत्र है। यह कालाहारी मरुस्थल के मध्य में पड़ता है। यह इलाका बुशमैन जनजाति का मुख्य निवास स्थान है।
In simple words: बेचुआनालैंड दक्षिणी अफ्रीका के कालाहारी मरुस्थल में है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी होता है।
प्रश्न 14. बुशमैन जनजाति में स्त्रियों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण वस्त्र कौन-सा होता है?
Answer: बुशमैन जनजाति में स्त्रियों का सबसे महत्वपूर्ण वस्त्र 'चोंगा' होता है। इसे स्थानीय भाषा में 'क्रोस' के नाम से जाना जाता है। यह वस्त्र उन्हें सर्दी और धूल से बचाने में मदद करता है।
In simple words: बुशमैन औरतों का सबसे खास कपड़ा चोंगा है, जिसे 'क्रोस' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के पारंपरिक वस्त्रों के नाम और उनके स्थानीय शब्द याद रखें, यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है।
प्रश्न 15. शबरी का सम्बन्ध किस जनजाति से है?
Answer: शबरी का संबंध भील जनजाति से है। शबरी, भारतीय पौराणिक कथाओं में एक प्रसिद्ध महिला हैं जिन्होंने भगवान राम को बेर खिलाए थे। यह उनके और भील जनजाति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।
In simple words: शबरी भील जनजाति से संबंधित थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातियों से जुड़े महत्वपूर्ण पौराणिक या ऐतिहासिक पात्रों को याद रखना सांस्कृतिक ज्ञान को बढ़ाता है।
प्रश्न 16. भीलों द्वारा पहाड़ी क्षेत्रों में की जाने वाली झूमिंग कृषि को क्या कहते हैं?
Answer: भीलों द्वारा पहाड़ी क्षेत्रों में की जाने वाली झूमिंग कृषि को 'चिमाता' कहते हैं। इस कृषि में पेड़-पौधों को काटकर जलाया जाता है और फिर उस राख पर खेती की जाती है, जिससे मिट्टी उपजाऊ बनती है।
In simple words: भील जनजाति पहाड़ी इलाकों में झूमिंग कृषि करती है जिसे 'चिमाता' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: झूमिंग कृषि के क्षेत्रीय नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत में विभिन्न जनजातियों के बीच भिन्न हो सकता है।
प्रश्न 17. गौंड जनजाति में पुजारी को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: गौंड जनजाति में पुजारी को 'देबारी' कहा जाता है। देबारी धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और समुदाय में उनका विशेष सम्मान होता है।
In simple words: गौंड लोग अपने पुजारी को 'देबारी' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के धार्मिक प्रमुखों के स्थानीय नामों को याद रखना उनकी सामाजिक और धार्मिक संरचना को समझने में मदद करता है।
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 18. एस्किमो के निवास क्षेत्र कौन-से हैं?
Answer: एस्किमो जनजाति मुख्य रूप से आर्कटिक और टुण्ड्रा प्रदेशों में निवास करती है। उनके निवास क्षेत्र ग्रीनलैंड से लेकर अलास्का, बेरिंग जलडमरूमध्य, साइबेरिया के उत्तरी-पूर्वी भाग तक फैले हुए हैं। कुछ एस्किमो समूह एल्यूशियन द्वीप और स्कैण्डिनेविया में भी रहते हैं। यह व्यापक क्षेत्र उनकी ठंडी जलवायु में अनुकूलन की क्षमता को दर्शाता है।
In simple words: एस्किमो जनजाति आर्कटिक और टुण्ड्रा प्रदेशों में रहती है, जिसमें ग्रीनलैंड, अलास्का और साइबेरिया के कुछ हिस्से शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: एस्किमो के निवास स्थानों को विश्व मानचित्र पर इंगित करने का अभ्यास करें, क्योंकि यह प्रश्न अक्सर मानचित्र-आधारित भी होता है।
प्रश्न 19. बुशमैन जनजाति की सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषता बताइए।
Answer: बुशमैन जनजाति में सामाजिक समुदाय छोटे दलों में संगठित होता है। इनकी धार्मिक परंपराओं, संस्कारों और कलाओं में प्राणियों और प्रकृति को विशेष महत्व दिया जाता है। ये लोग जादू-टोने और भूत-प्रेतों में विश्वास रखते हैं, जिससे वे अंधविश्वासी माने जाते हैं। बुशमैन दो भगवानों को मानते हैं - एक पूर्व में और दूसरा पश्चिम में रहता है। बीमारियों और बुरी आत्माओं से बचाने में ओझाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे शुतुरमुर्ग के अंडों के खोल से आभूषण, तीर-कमान, स्कर्ट जैसी चीजें बनाते हैं।
In simple words: बुशमैन छोटे समूहों में रहते हैं, प्रकृति और जानवरों को पूजते हैं, जादू-टोने में विश्वास करते हैं, और अंडों के खोल से चीजें बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी जनजाति की सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं को विस्तृत रूप से लिखें, जिसमें उनकी मान्यताएँ, कलाएँ और समुदाय की संरचना शामिल हो।
प्रश्न 21. गौंड जनजाति के आर्थिक क्रियाकलापों पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: गौंड जनजाति के प्रमुख आर्थिक क्रियाकलाप आखेट (शिकार) और झूमिंग कृषि हैं। ये लोग आत्मनिर्भर होते हैं और वनों से प्राप्त उपजों को इकट्ठा करते हैं। पशुपालन और मछली पकड़ने का काम भी ये लोग करते हैं। वे 'दीप्पा' नामक झूमिंग कृषि करते हैं, जिसमें पेड़ों को जलाकर खेत तैयार किए जाते हैं और फावड़े या हल से बीज बोए जाते हैं। 'पैण्डा' कृषि मध्य प्रदेश के बस्तर में पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेतों में की जाती है। कुरुख, केवट और धीवर वर्ग के लोग मछली पकड़ते हैं, जबकि रावत वर्ग मुख्य रूप से पशुपालन का कार्य करता है। ये लोग जानवरों का शिकार भी करते हैं।
In simple words: गोंड जनजाति के लोग शिकार और झूमिंग कृषि करते हैं। वे आत्मनिर्भर होते हैं, जंगल से चीजें इकट्ठा करते हैं, पशु पालते हैं, और मछली पकड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के आर्थिक क्रियाकलापों में उनके पारंपरिक व्यवसाय, कृषि के प्रकार और आत्मनिर्भरता के पहलुओं को शामिल करें।
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 22. एस्किमो जनजाति पर एक भौगोलिक लेख लिखिए।
अथवा
एस्किमो किस प्रकार कठोर परिस्थितियों के आदी हो गए हैं? समझाइए।
Answer: एस्किमो लोगों द्वारा वातावरण में खुद को ढालने की प्रक्रिया एक अनोखा उदाहरण है। उन्होंने इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी पर्यावरण के साथ अद्भुत तालमेल बिठाया है। वनस्पति और भवन निर्माण सामग्री की कमी के बावजूद, बर्फ से घर बनाना उनकी कार्यकुशलता को दर्शाता है। वे समुद्री जानवरों की हड्डियों से स्लेज बनाते हैं और बिना पहियों के रेण्डियरों से उसे चलाते हैं, जो उनके अनुकूलन का प्रमाण है। हिम झंझाओं और बर्फ पर सूर्य की किरणों से होने वाली चमक से अपनी आँखों को बचाने के लिए वे विशेष कवच का उपयोग करते हैं। यह उनकी वातावरणीय विशिष्टता को दर्शाता है।
In simple words: एस्किमो लोग ठंडी और कठिन जगहों पर रहते हुए भी प्रकृति के साथ ढल गए हैं। वे बर्फ के घर बनाते हैं, हड्डियों से स्लेज गाड़ी बनाते हैं और अपनी आँखों को बर्फ की चमक से बचाते हैं।
🎯 Exam Tip: एस्किमो के अनुकूलन की प्रक्रिया में उनके आवास, परिवहन और सुरक्षा के उपायों को शामिल करते हुए एक विस्तृत उत्तर लिखें।
प्रश्न 23. भील जनजाति के निवास क्षेत्र, अर्थव्यवस्था व सामाजिक रीति-रिवाजों का वर्णन कीजिए।
Answer:
(i) निवास क्षेत्र: भील दुर्गम पहाड़ी और घने वन क्षेत्रों में रहते हैं। ये अरावली, विन्ध्याचल और सतपुड़ा की पहाड़ियों तथा वन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। भारत में भील मुख्यतः राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में मिलते हैं। राजस्थान में बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ उनके मुख्य केंद्र हैं। मध्यप्रदेश में धार, झाबुआ और रतलाम, गुजरात में पंचमहल और बड़ोदरा, तथा महाराष्ट्र के औरंगाबाद, अहमदनगर, जलगाँव, नासिक और धुले जिलों में भी ये रहते हैं।
(ii) अर्थव्यवस्था: वनों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने के कारण भीलों की आजीविका का मुख्य आधार खाद्य संग्रहण, आखेट, आदिम कृषि और पशुपालन है। स्त्रियाँ वनों से कंद-मूल, फूल-फल और पत्तियाँ इकट्ठा करती हैं। पुरुष जंगली पशुओं और पक्षियों का शिकार करते हैं। वे खाद्यान्न, सब्जियाँ और चारे की फसलें उगाते हैं। भेड़-बकरी, गाय-भैंस और कुक्कुट पालन भी करते हैं।
(अ) आखेट: ये जंगलों में तीर-कमान से शिकार करते हैं, और पुरुष तालाबों से मछली भी पकड़ते हैं। पहले वे महान शिकारी थे, लेकिन अब लगभग 80% भील कृषि कार्य करने लगे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों की झूमिंग कृषि को 'चिमाता' और मैदानी भाग में की जाने वाली कृषि को 'दजिया' कहते हैं।
(स) वस्त्र: आजादी से पहले भील बहुत कम कपड़े पहनते थे; पुरुष खाल से नेकर और स्त्रियाँ पेटीकोट पहनती थीं। आजकल पुरुष कमीज, धोती, साफा या पैंट-शर्ट पहनते हैं, और स्त्रियाँ घाघरा, काँचली व लूगड़ी पहनती हैं। लड़के लंगोट पहनते हैं और लड़कियाँ घाघरी व ओढ़नी पहनती हैं। वे चाँदी, पीतल, जस्ता और निकिल के आभूषण पहनते हैं। स्त्रियाँ लाख और काँच की चूड़ियों से खुद को सजाती हैं।
(द) आवास: भीलों के घर बिखरे हुए होते हैं, जिन्हें 'कू' कहा जाता है। ये अधिकतर झोंपड़ियों में रहते हैं, जो घास-फूस और खपरैल से बनी होती हैं। उनके छोटे गाँवों के समूह को 'फला' और बड़े गाँवों को 'पाल' कहते हैं।
(य) औजार व बर्तन: धनुष-बाण, तलवार और खंजर उनके मुख्य हथियार हैं। बाण दो प्रकार के होते हैं- हरियो और रोबदो। पक्षियों को पकड़ने के लिए 'फटकिया' नामक फंदे का उपयोग किया जाता है। संपन्न भील बंदूकें भी इस्तेमाल करते हैं। उनके घरों में मिट्टी के बर्तन, मक्का पीसने की चक्की और बाँस से बना पालना जरूर मिलता है।
(iii) समाज व संस्कृति: भील कई पितृसत्तात्मक समूहों और कुलों में संगठित हैं। प्रत्येक कुल के लोग अलग-अलग गाँवों में रहते हैं और उनका अपना 'गण चिह्न' होता है। युवा या वृद्ध भील पुरुषों की एक पत्नी जरूर होती है, चाहे वह सामान्य विवाह से हो या भगाकर लाई गई हो। उनमें बहु-पत्नी प्रथा भी पाई जाती है। विवाह का प्रस्ताव वर पक्ष की ओर से आता है, और कन्या का मूल्य देना पड़ता है, जिसे 'दापा' प्रथा कहते हैं। 'गोल गाधेड़ों' प्रथा में कोई भी युवक अपनी शूरवीरता और साहस दिखाकर शादी के लिए युवती को चुन सकता है। वे प्रकृति पूजक हैं और कृषि यंत्रों व उपकरणों की भी पूजा करते हैं, क्योंकि अधिकांश भील किसान हैं। वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और नागदेव को भी पूजते हैं। वे अंधविश्वासी होते हैं और भूत-प्रेतों में विश्वास करते हैं। वे मृतकों का दाह-संस्कार करते हैं।
In simple words: भील जनजाति पहाड़ी और वन क्षेत्रों में रहती है। वे शिकार, खेती और पशुपालन से अपना जीवन चलाते हैं। उनके कपड़े, घर और औजार प्रकृति से जुड़े होते हैं। वे प्रकृति पूजक होते हैं और उनके समाज में अपनी खास रीति-रिवाज और मान्यताएँ हैं।
🎯 Exam Tip: भील जनजाति के निवास, अर्थव्यवस्था और सामाजिक रीति-रिवाजों का विस्तृत वर्णन करते समय, प्रत्येक बिंदु को उप-शीर्षकों के साथ व्यवस्थित करें।
प्रश्न 24. विश्व के मानचित्र में एस्किमो व बुशमैन जनजाति के निवास क्षेत्र को दर्शाइए।
Answer: विश्व के मानचित्र पर एस्किमो जनजाति का निवास क्षेत्र आर्कटिक प्रदेश, ग्रीनलैंड, उत्तरी कनाडा, अलास्का और साइबेरिया के उत्तरी भागों में फैला हुआ दिखाया जाता है। बुशमैन जनजाति का निवास क्षेत्र दक्षिणी अफ्रीका में कालाहारी मरुस्थल और उसके आसपास के शुष्क घास के मैदानों में दर्शाया जाता है। ये मानचित्र इन जनजातियों के भौगोलिक वितरण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करते हैं। यह वितरण उनकी जीवनशैली और पर्यावरण के साथ अनुकूलन को दर्शाता है।
In simple words: एस्किमो लोग दुनिया के ठंडे उत्तरी इलाकों जैसे ग्रीनलैंड और साइबेरिया में रहते हैं, जबकि बुशमैन लोग दक्षिणी अफ्रीका के कालाहारी मरुस्थल में रहते हैं।
🎯 Exam Tip: विश्व मानचित्र पर प्रमुख जनजातियों के निवास क्षेत्रों को पहचानना और दर्शाना एक महत्वपूर्ण कौशल है।
प्रश्न 25. भारत के मानचित्र में भील व गौंड जनजाति के निवास क्षेत्रों को दर्शाइए।
Answer: भारत के मानचित्र पर भील जनजाति का निवास क्षेत्र मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में दर्शाया जाता है। गौंड जनजाति का निवास क्षेत्र मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के पहाड़ी और पठारी भागों में फैला हुआ दिखाया जाता है। इन दोनों जनजातियों के क्षेत्र भारत के मध्य और पश्चिमी भागों में केंद्रित हैं। यह उनके वितरण की स्पष्ट तस्वीर देता है।
In simple words: भील जनजाति भारत के पश्चिमी और मध्य राज्यों (राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र) में रहती है, जबकि गौंड जनजाति मध्य और पूर्वी राज्यों (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा) में फैली हुई है।
🎯 Exam Tip: भारत के मानचित्र पर जनजातियों के निवास क्षेत्रों को सटीक रूप से चिह्नित करना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. समशीतोष्ण कटिबंधीय घास क्षेत्रों में निवास करने वाली जनजाति कौन-सी है?
(अ) किरगीज
(ब) एस्किमो
(स) पिग्मी
(द) लैप्स
Answer: (अ) किरगीज
In simple words: किरगीज जनजाति समशीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदानों में रहती है। वे घुमंतू जीवन जीते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जलवायु क्षेत्रों और उनसे संबंधित जनजातियों के नामों को याद रखें।
प्रश्न 3. दो छिद्रों से एस्किमो द्वारा शिकार करने की विधि कहलाती है –
(अ) हारफून
(ब) माउपाक
(स) इतुरपाक
(द) उमियाक
Answer: (स) इतुरपाक
In simple words: एस्किमो लोग शिकार करने के लिए 'इतुरपाक' नामक विधि का उपयोग करते हैं, जिसमें वे दो छेदों का इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: एस्किमो द्वारा शिकार की विभिन्न विधियों और उनके नामों को याद रखना आवश्यक है।
प्रश्न 4. एस्किमो द्वारा किये जाने वाले बसन्तकालीन आखेट को क्या कहते हैं?
(अ) कयाक
(ब) उतोक
(स) तिमियाक
(द) इग्लू
Answer: (ब) उतोक
In simple words: एस्किमो द्वारा बसंत ऋतु में किए जाने वाले शिकार को 'उतोक' कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: मौसमी शिकार पद्धतियों के स्थानीय नामों को याद रखें, क्योंकि ये जनजातियों की अनुकूलन क्षमता दर्शाते हैं।
प्रश्न 5. बुशमैन मुख्यतः किस महाद्वीप के निवासी हैं?
(अ) एशिया
(ब) यूरोप
(स) अफ्रीका
(द) ऑस्ट्रेलिया
Answer: (स) अफ्रीका
In simple words: बुशमैन लोग मुख्य रूप से अफ्रीका महाद्वीप में, खासकर कालाहारी मरुस्थल में रहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख जनजातियों और उनके संबंधित महाद्वीपों को याद रखना परीक्षा में मदद करता है।
प्रश्न 6. भील शब्द की उत्पत्ति किस भाषा से मानी गई है?
(अ) हिन्दी
(ब) संथाली
(स) मलयालम
(द) द्राविड़ियन
Answer: (द) द्राविड़ियन
In simple words: 'भील' शब्द द्राविड़ियन भाषा से आया है, जो उनकी भाषाई जड़ों को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के नामों की व्युत्पत्ति को याद रखना उनकी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों को समझने में सहायक होता है।
प्रश्न 8. भीलों में पाल के मुखिया को क्या कहते हैं?
(अ) पटेल
(ब) गमेती
(स) बोलावा
(द) भांजगडिया
Answer: (ब) गमेती
In simple words: भील जनजाति में 'पाल' नाम के बड़े गाँव के मुखिया को 'गमेती' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातीय सामाजिक संरचना और मुखिया के स्थानीय नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 9. विश्व का सबसे बड़ा जनजातीय समूह कौन-सा है?
(अ) भील
(ब) एस्किमो
(स) गौंड
(द) नागा
Answer: (स) गौंड
In simple words: गौंड जनजाति दुनिया के सबसे बड़े जनजातीय समूहों में से एक है।
🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख जनजातीय समूहों के नाम और उनकी जनसंख्या संबंधी जानकारी को याद रखें।
प्रश्न 10. पैंडा कृषि कहाँ की जाती है?
(अ) राजस्थान में
(ब) गुजरात में
(स) मध्यप्रदेश में
(द) उड़ीसा में
Answer: (स) मध्यप्रदेश में
In simple words: 'पैण्डा कृषि' मुख्यतः मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में की जाती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कृषि पद्धतियों और उनके भौगोलिक वितरण को याद रखें, खासकर जनजातीय संदर्भ में।
उत्तरमाला:
1. (अ), 2. (द), 3. (स), 4. (ब), 5. (स), 6. (द), 7. (स), 8. (ब), 9. (स), 10. (स)
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
निम्नलिखित में स्तम्भ 'अ' को स्तम्भ 'ब' से सुमेलित कीजिए –
(क)
| स्तम्भ (अ) (जनजाति) | स्तम्भ (ब) (मुख्य निवास क्षेत्र) |
|---|---|
| (v) किरगीज | (य) मलेशिया |
| (vi) भील | (र) केन्या |
| (vii) नागा | (ल) उत्तरी साइबेरिया |
Answer:
(i) (ल) उत्तरी साइबेरिया (यह एस्किमो जनजाति से संबंधित है, जो उत्तरी साइबेरिया में पाई जाती है)
(ii) (य) मलेशिया (यह सेमांग जनजाति से संबंधित है, जो मलेशिया में पाई जाती है)
(iii) (अ) कालाहारी मरुस्थल (यह बुशमैन जनजाति से संबंधित है, जो कालाहारी मरुस्थल में पाई जाती है)
(iv) (र) केन्या (यह मसाई जनजाति से संबंधित है, जो केन्या में पाई जाती है)
(v) (स) मध्य एशिया (किरगीज मध्य एशिया में पाए जाते हैं, हालाँकि विकल्प में 'स' नहीं दिया गया है, इसलिए मूल उत्तरमाला का पालन किया जाएगा।)
(vi) (द) राजस्थान (भील मुख्यतः राजस्थान में पाए जाते हैं)
(vii) (ब) पूर्वोत्तर भारत (नागा मुख्यतः पूर्वोत्तर भारत में पाए जाते हैं)
मूल उत्तरमाला के अनुसार: (i) ल (ii) य (iii) अ (iv) र (v) स (vi) द (vii) ब।
In simple words: विभिन्न जनजातियों को उनके मुख्य निवास क्षेत्रों से मिलाया जाता है, जैसे किरगीज मध्य एशिया में, भील राजस्थान में और नागा पूर्वोत्तर भारत में।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में प्रत्येक जनजाति को उसके सही निवास क्षेत्र से मिलाएं। यदि कोई विकल्प अनुपलब्ध हो तो निकटतम सही क्षेत्र को चुनें।
(ख)
| स्तम्भ (अ) (स्थान का नाम) | स्तम्भ (ब) (सम्बन्धित क्षेत्र) |
|---|---|
| (i) डगासिया | (अ) उदयपुर |
| (ii) बासिया | (ब) डूंगरपुर |
| (iii) कोटिया | (स) बाँसवाडा |
| (iv) देआवा | (द) कोटा |
Answer:
(i) (ब) डूंगरपुर
(ii) (स) बाँसवाडा
(iii) (द) कोटा
(iv) (अ) उदयपुर
मूल उत्तरमाला के अनुसार: (i) ब (ii) स (iii) द (iv) अ।
In simple words: राजस्थान के विभिन्न जनजातीय स्थानों को उनके संबंधित जिलों से मिलाया गया है, जैसे डगासिया डूंगरपुर में, बासिया बाँसवाडा में, कोटिया कोटा में और देआवा उदयपुर में।
🎯 Exam Tip: स्थानीय जनजातीय नामों और उनके संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों को सही ढंग से मिलाएं, क्योंकि यह अक्सर क्षेत्रीय भूगोल के प्रश्नों में पूछा जाता है।
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. जनजातियाँ क्या होती हैं?
Answer: जनजातियाँ ऐसे मानव समूह होते हैं जो मुख्य रूप से शीत प्रदेशों, घने जंगलों, गर्म व सूखे मरुस्थलों, घास के मैदानों, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और बहुत अधिक वर्षा वाले इलाकों में निवास करते हैं। ये लोग अपनी विशिष्ट संस्कृति, रीति-रिवाजों और जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। जनजातियाँ अक्सर बाहरी दुनिया से कम संपर्क रखती हैं और प्रकृति पर अधिक निर्भर करती हैं।
In simple words: जनजातियाँ लोगों के समूह होते हैं जो पहाड़ों, जंगलों या मरुस्थलों जैसे खास इलाकों में रहते हैं, जिनकी अपनी अलग संस्कृति होती है।
🎯 Exam Tip: जनजातियों की परिभाषा में उनके निवास स्थान, सामाजिक संरचना और बाहरी दुनिया से उनके अलगाव को शामिल करें।
प्रश्न 3. जनजातियों की अर्थव्यवस्था का आधार क्या है?
Answer: जनजातियों की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खाद्य संग्रहण (भोजन इकट्ठा करना), आखेट व शिकार, घुमक्कड़ जीवन-यापन (एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमना), पशुचारण (पशु पालना) और आदिम ढंग की निर्वाह कृषि है। ये सभी क्रियाकलाप उनकी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किए जाते हैं। इनकी अर्थव्यवस्था प्रकृति पर बहुत अधिक निर्भर करती है।
In simple words: जनजातियाँ खाने की चीजें इकट्ठा करती हैं, शिकार करती हैं, पशु पालती हैं और सरल खेती करके अपना जीवन चलाती हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातियों की अर्थव्यवस्था के प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें और उनके प्रकृति पर निर्भरता पर जोर दें।
प्रश्न 4. एस्किमो जनजाति की जीविका का आधार क्या है?
Answer: एस्किमो जनजाति की जीविका का मुख्य आधार आखेट (शिकार करना), मछली पकड़ना और वस्तु संग्रहण है। वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन्हीं क्रियाकलापों पर निर्भर रहते हैं। उनका जीवन पूरी तरह से बर्फीले वातावरण में उपलब्ध संसाधनों पर आधारित है।
In simple words: एस्किमो लोग शिकार, मछली पकड़ने और चीजें इकट्ठा करके अपना जीवन चलाते हैं।
🎯 Exam Tip: एस्किमो की जीविका के विशिष्ट साधनों को याद रखें, क्योंकि ये उनके ठंडे वातावरण के अनुकूल होते हैं।
प्रश्न 5. एस्किमो किस प्रजाति से सम्बन्धित है?
Answer: एस्किमो जनजाति मंगोल प्रजाति से संबंधित है। उनकी शारीरिक बनावट, जैसे चपटा चेहरा, पीली भूरी त्वचा, और सीधी काली आँखें, मंगोल प्रजाति की विशेषताओं से मिलती जुलती हैं। यह उनकी वंशावली और भौगोलिक उत्पत्ति को दर्शाता है।
In simple words: एस्किमो लोग मंगोल प्रजाति से संबंधित हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख जनजातियों के प्रजातीय वर्गीकरण को याद रखें, यह उनकी उत्पत्ति और शारीरिक विशेषताओं को समझने में मदद करता है।
प्रश्न 6. एस्किमो का स्वभाव कैसा होता है?
Answer: एस्किमो जनजाति के लोग मानसिक रूप से बहुत मजबूत होते हैं। वे अत्यधिक संकट की स्थिति में भी अपनी स्थिरता, गंभीरता और विवेक को बनाए रखते हैं। उनका स्वभाव सरल और हँसमुख प्रवृत्ति का होता है। यह उनकी कठिन जीवनशैली में उन्हें धैर्यवान और खुश रहने में मदद करता है।
In simple words: एस्किमो लोग मजबूत दिमाग वाले, शांत, बुद्धिमान और खुशमिजाज स्वभाव के होते हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के मानवीय गुणों और स्वभाव को दर्शाना उनके जीवन के प्रति दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है।
प्रश्न 7. एस्किमो को प्रादेशिक आधार पर किन-किन नामों से जाना जाता है?
Answer: एस्किमो को प्रादेशिक आधार पर कई नामों से जाना जाता है। टुण्ड्रा प्रदेश के निवासियों को 'इन्यूत' कहते हैं। साइबेरिया में रहने वाले एस्किमो समूह को 'युइत, तुंग, चकची, युकाघीर और याकूत' के नाम से जाना जाता है। स्कैण्डिनेविया में रहने वाले एस्किमो को 'लैप्स' के नाम से जाना जाता है। यह नामकरण विभिन्न क्षेत्रों में उनके स्थानीय पहचान को दर्शाता है।
In simple words: एस्किमो को अलग-अलग जगहों पर इन्यूत, युइत, तुंग, चकची, युकाघीर, याकूत और लैप्स जैसे नामों से बुलाया जाता है।
🎯 Exam Tip: एस्किमो जनजाति के क्षेत्रीय नामों को याद रखें, क्योंकि यह उनकी भौगोलिक विविधता को दर्शाता है।
Question 9. हारफून क्या है?
Answer: हारफून एक विशेष भाला होता है. एस्किमो जनजाति के लोग इसका उपयोग शिकार करने के लिए करते हैं. यह भाला शिकारियों को पानी में या बर्फ में छिपे जानवरों को पकड़ने में मदद करता है.
In simple words: हारफून एक भाला है जिसका इस्तेमाल एस्किमो लोग शिकार के लिए करते हैं.
🎯 Exam Tip: जब भी किसी उपकरण के बारे में पूछा जाए, उसका नाम, उसका उपयोग और कौन-सी जनजाति उसका उपयोग करती है, ये तीनों बातें जरूर लिखें.
Question 10. माउपाक से क्या अभिप्राय है?
Answer: माउपाक एस्किमो लोगों की शिकार करने की एक खास तरीका है. इस तरीके का मतलब 'इंतजार करना' होता है. इसमें शिकारी बर्फ के छिद्रों के पास छिपकर बैठते हैं और शिकार के आने का इंतजार करते हैं.
In simple words: माउपाक एस्किमो लोगों की शिकार की एक विधि है, जिसमें वे इंतजार करते हैं.
🎯 Exam Tip: शिकार की विधियों के नाम और उनके अर्थ या तरीके को स्पष्ट रूप से समझाएँ.
Question 11. इतुरपाक से क्या आशय है?
Answer: इतुरपाक भी एस्किमो जनजाति द्वारा सर्दी के मौसम में शिकार करने की एक विधि है. इसमें शिकारी दो छेद बनाते हैं. एक छेद से एक व्यक्ति सील को चारा डालकर बुलाता है, और दूसरे छेद से दूसरा व्यक्ति संकेत मिलने पर भाले से शिकार करता है. यह टीम वर्क का एक अच्छा उदाहरण है.
In simple words: इतुरपाक शिकार करने का एक तरीका है, जिसमें दो लोग मिलकर दो छेदों का उपयोग करके सील मछली का शिकार करते हैं.
🎯 Exam Tip: माउपाक और इतुरपाक के बीच के अंतर को स्पष्ट रखें, खासकर उनके तरीकों को लेकर.
Question 12. कयाक क्या है?
Answer: कयाक एस्किमो लोगों द्वारा बसंत के मौसम में शिकार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक प्रकार की नाव है. यह नाव चमड़े से बनी होती है और इसकी लम्बाई लगभग 5 मीटर व चौड़ाई 1.45 मीटर होती है. यह उन्हें पानी पर आसानी से चलने में मदद करती है.
In simple words: कयाक एस्किमो की चमड़े की बनी नाव है, जिसका उपयोग वे शिकार के लिए करते हैं.
🎯 Exam Tip: नाव के नाम के साथ उसकी सामग्री और उपयोग को भी उल्लेख करें.
Question 13. तिमियाक व अनोहाक क्या हैं?
Answer: तिमियाक एस्किमो लोगों द्वारा पहना जाने वाला जर्सी जैसा एक बाँहदार कपड़ा है. अनोहाक वह कपड़ा होता है जिसे तिमियाक के ऊपर पहना जाता है. ये कपड़े उन्हें ठंड से बचाते हैं.
In simple words: तिमियाक एस्किमो की जर्सी है और अनोहाक उसके ऊपर पहना जाने वाला कपड़ा है.
🎯 Exam Tip: वस्त्रों के नामों के साथ उनके प्रकार और उपयोग को बताएं.
Question 16. कर्मक क्या है?
Answer: कर्मक एस्किमो जनजाति के घर का एक प्रकार है. यह घर जमीन से 5 से 6 फीट नीचे और 2 से 3 फीट ऊपर बना होता है. इसे बनाने के लिए लकड़ी और ह्वेल मछली की हड्डियों का इस्तेमाल किया जाता है. ये घर उन्हें ठंडी जलवायु से बचाते हैं.
In simple words: कर्मक एस्किमो का एक प्रकार का घर है जो लकड़ी और ह्वेल की हड्डियों से बनता है.
🎯 Exam Tip: घरों के प्रकारों के नाम के साथ उनकी बनावट और सामग्री को स्पष्ट करें.
Question 17. उमियाक क्या है?
Answer: उमियाक एक बड़ी नाव है जिसका उपयोग एस्किमो जनजाति ह्वेल मछली का शिकार करते समय करती है. यह कयाक से बड़ी होती है और शिकार के दौरान समूह में काम करने आती है.
In simple words: उमियाक एक बड़ी नाव है जो एस्किमो जनजाति ह्वेल मछली के शिकार के लिए उपयोग करती है.
🎯 Exam Tip: कयाक और उमियाक के बीच के अंतर को स्पष्ट करें - कयाक छोटी और उमियाक बड़ी नाव है.
Question 18. कालाहारी के मरुस्थल की जनजाति को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: कालाहारी मरुस्थल में रहने वाली जनजाति को बुशमैन, सॉन, रत्वी और बसारवा जैसे कई नामों से जाना जाता है. ये सभी नाम एक ही जनजाति के अलग-अलग स्थानीय रूप हैं.
In simple words: कालाहारी मरुस्थल की जनजाति को बुशमैन, सॉन, रत्वी और बसारवा कहते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी विशेष क्षेत्र की जनजाति के सभी प्रसिद्ध नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 19. बुशमैन का शारीरिक स्वरूप कैसा मिलता है?
Answer: बुशमैन लोग कद में छोटे होते हैं. उनके जबड़े और मोटे होंठ बाहर नहीं निकले होते हैं. उनके नितंब (कमर का निचला हिस्सा) बहुत भारी होते हैं और उनकी आँखें चौड़ी नहीं होतीं. उनका शरीर अक्सर मजबूत और हृष्ट-पुष्ट होता है.
In simple words: बुशमैन कद में छोटे होते हैं, उनके होंठ और जबड़े सामान्य होते हैं, और नितंब भारी होते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी जनजाति के शारीरिक विशेषताओं का वर्णन करते समय प्रमुख और विशिष्ट बिंदुओं पर ध्यान दें.
Question 20. बुशमैन जनजाति कहाँ रहती है?
Answer: बुशमैन जनजाति अफ्रीका महाद्वीप के कालाहारी मरुस्थल में रहती है. यह क्षेत्र 18° दक्षिणी अक्षांश से 24° दक्षिणी अक्षांश के बीच बेचुआनोलैंड में स्थित है. यह एक गर्म और शुष्क वातावरण है.
In simple words: बुशमैन जनजाति अफ्रीका के कालाहारी मरुस्थल में रहती है.
🎯 Exam Tip: निवास क्षेत्र का उल्लेख करते समय महाद्वीप और विशिष्ट भौगोलिक स्थान को जरूर बताएं.
Question 21. बुशमैन का प्रिय भोजन क्या है?
Answer: बुशमैन लोग सब कुछ खाने वाले होते हैं. उन्हें शिकार, मछली, पौधों की जड़ें, बेर और शहद बहुत पसंद हैं. दीमक, चींटियाँ और उनके अंडे भी उनके पसंदीदा भोजन हैं. वे ताजा या बासी भोजन की परवाह नहीं करते हैं और सब कुछ खाते हैं. ये एक बार में आधी भेड़ तक खा सकते हैं, जिससे उनकी सर्वभक्षी प्रकृति का पता चलता है.
In simple words: बुशमैन सब कुछ खाते हैं, जिसमें शिकार, मछली, पौधे, शहद और कीड़े-मकोड़े शामिल हैं.
🎯 Exam Tip: किसी जनजाति के भोजन का वर्णन करते समय मुख्य खाद्य पदार्थों और उनकी खाने की आदतों को स्पष्ट करें.
Question 23. भील शब्द की उत्पत्ति व भावार्थ को स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'भील' शब्द की उत्पत्ति द्राविड़ियन भाषा के 'बीलू' शब्द से हुई है. 'बीलू' का अर्थ 'तीरंदाज' होता है. इससे पता चलता है कि भील जनजाति तीरंदाजी में बहुत कुशल थी और तीर-कमान का उपयोग करती थी. यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.
In simple words: भील शब्द 'बीलू' से आया है, जिसका मतलब तीरंदाज होता है, जो उनकी तीर चलाने की कला को दिखाता है.
🎯 Exam Tip: शब्द की उत्पत्ति बताते समय मूल भाषा और उसका अर्थ दोनों को स्पष्ट करें.
Question 24. दजिया एवं चिमाता क्या हैं?
Answer: दजिया और चिमाता भील जनजाति द्वारा की जाने वाली खेती के प्रकार हैं. मैदानी इलाकों में की जाने वाली स्थानांतरण कृषि को 'दजिया' कहा जाता है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में की जाने वाली इसी तरह की कृषि को 'चिमाता' कहते हैं. इन दोनों में पेड़ों को जलाकर जमीन साफ करके खेती की जाती है.
In simple words: दजिया मैदानी भाग की झूमिंग कृषि है और चिमाता पहाड़ी भाग की झूमिंग कृषि है, दोनों भीलों द्वारा की जाती हैं.
🎯 Exam Tip: दोनों कृषि पद्धतियों के नाम और वे कहाँ की जाती हैं, ये स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 25. फला व पाल में क्या अन्तर है?
Answer: भील जनजाति में गाँवों के समूह को 'फला' और 'पाल' कहा जाता है. छोटे गाँवों के समूह को 'फला' कहते हैं, जबकि बड़े गाँवों के समूह को 'पाल' कहा जाता है. ये उनकी बस्तियों के आकार को दर्शाते हैं. ये बस्तियाँ अक्सर बिखरी हुई होती हैं.
In simple words: 'फला' छोटे भील गाँवों का समूह है, और 'पाल' बड़े भील गाँवों का समूह है.
🎯 Exam Tip: भीलों के ग्रामीण संगठन के इन दोनों शब्दों के अर्थ और उनके बीच का अंतर जरूर स्पष्ट करें.
Question 26. फटकिया किसे कहते हैं।
Answer: फटकिया एक प्रकार का फंदा या जाल है, जिसका उपयोग भील जनजाति के लोग पक्षियों को पकड़ने के लिए करते हैं. यह एक साधारण उपकरण होता है जो उन्हें शिकार में मदद करता है.
In simple words: फटकिया एक फंदा है जिसका उपयोग भील पक्षियों को पकड़ने के लिए करते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी भी उपकरण के नाम के साथ उसका कार्य और किस जनजाति द्वारा उपयोग किया जाता है, यह बताएं.
Question 27. दापा प्रथा से क्या तात्पर्य है?
Answer: दापा प्रथा भील जनजाति में विवाह से जुड़ी एक परम्परा है. इस प्रथा के तहत, शादी के समय वर पक्ष (लड़के वाले) को वधू पक्ष (लड़की वाले) को कन्या का मूल्य चुकाना पड़ता है. यह कन्या मूल्य एक प्रकार से लड़की के पालन-पोषण का मुआवजा होता है.
In simple words: दापा प्रथा में लड़के का परिवार शादी के लिए लड़की के परिवार को पैसे देता है.
🎯 Exam Tip: सामाजिक प्रथाओं का वर्णन करते समय उनका नाम, उनका उद्देश्य और किस जनजाति से संबंधित हैं, ये बताएं.
Question 30. भीलों का रणघोष कौन-सा है?
Answer: भील जनजाति का रणघोष 'फाइ-फाइरे' है. यह एक ऐसा नारा है जिसका उपयोग वे युद्ध या किसी सामूहिक कार्य के समय जोश भरने और एक-दूसरे को संगठित करने के लिए करते हैं. यह उनकी एकता और शौर्य का प्रतीक है.
In simple words: 'फाइ-फाइरे' भीलों का युद्ध का नारा या जोश भरने वाला घोष है.
🎯 Exam Tip: किसी भी जनजाति के रणघोष को याद रखें और उसके महत्व को संक्षेप में बताएँ.
Question 31. गमेती व बोलावा में क्या अन्तर है?
Answer: भील जनजाति में 'गमेती' और 'बोलावा' दोनों महत्वपूर्ण पद हैं. 'गमेती' पाल का मुखिया होता है, जो गाँवों के समूह का शासक या मुख्य नेता होता है. वहीं, 'बोलावा' वह व्यक्ति होता है जो मार्गदर्शक या संदेशवाहक का कार्य करता है, अक्सर शादी या अन्य आयोजनों में लोगों को बुलाने के लिए. इस तरह, गमेती नेतृत्व करता है जबकि बोलावा सूचना का आदान-प्रदान करता है.
In simple words: गमेती भीलों के पाल का मुखिया है, जबकि बोलावा संदेश देने या रास्ता दिखाने वाला व्यक्ति होता है.
🎯 Exam Tip: दोनों पदों की भूमिका और उनके बीच के अंतर को स्पष्ट करें, खासकर उनकी जिम्मेदारियों के संदर्भ में.
Question 32. गौंड शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई है?"
Answer: 'गौंड' शब्द की उत्पत्ति 'खोण्डा' शब्द से हुई है. 'खोण्डा' का अर्थ 'पहाड़ी' होता है. इसलिए, गौंड उन लोगों को कहा जाता है जो मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. यह नाम उनके भौगोलिक निवास स्थान को दर्शाता है.
In simple words: गौंड शब्द 'खोण्डा' से बना है, जिसका अर्थ पहाड़ी होता है, क्योंकि यह जनजाति पहाड़ों में रहती है.
🎯 Exam Tip: शब्द की उत्पत्ति के साथ उसके अर्थ और जनजाति के निवास स्थान से उसके जुड़ाव को स्पष्ट करें.
Question 33. गौंड अपने आपको क्या कहते हैं?
Answer: गौंड जनजाति के लोग अपने आप को 'कोइटुर' या 'कोल' भी कहते हैं. ये नाम उनकी अपनी पहचान और सामुदायिक गौरव को दर्शाते हैं. यह उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है.
In simple words: गौंड लोग खुद को 'कोइटुर' या 'कोल' भी कहते हैं.
🎯 Exam Tip: जनजाति के स्वयं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नामों को याद रखें.
Question 34. गौंड जनजाति कहाँ निवास करती है?
Answer: गौंड जनजाति प्रायद्वीपीय भारत में प्रमुख रूप से निवास करती है. वे मुख्य रूप से सतपुड़ा और मैकाल पहाड़ियों, सोन-देवगढ़ के ऊँचे पठारी क्षेत्रों और बस्तर तथा गढ़जात पहाड़ियों में रहते हैं. यह उनके पहाड़ी और पठारी जीवन शैली को दर्शाता है.
In simple words: गौंड जनजाति भारत के सतपुड़ा, मैकाल, सोन-देवगढ़ और बस्तर जैसे पहाड़ी-पठारी क्षेत्रों में रहती है.
🎯 Exam Tip: जनजाति के निवास स्थानों का वर्णन करते समय प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं और पठारों को शामिल करें.
Question 36. गौंड जनजाति मिट्टी की आर्द्रता बनाए रखने के लिए क्या करती है?
Answer: गौंड जनजाति मिट्टी की नमी (आर्द्रता) बनाए रखने के लिए एक खास तरीका अपनाती है. वे निचले ढलानों पर लकड़ी के लट्ठे रख देते हैं. इससे मिट्टी का कटाव रुकता है और जमीन में नमी बनी रहती है, जो खेती के लिए फायदेमंद है. यह उनकी पारंपरिक कृषि पद्धतियों का हिस्सा है.
In simple words: गौंड जनजाति मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए ढलानों पर लकड़ी के लट्ठे रखती है ताकि मिट्टी का कटाव न हो.
🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जनजातीय प्रथाओं का उल्लेख करते समय उनके लाभों को स्पष्ट करें.
Question 37. पटेल अथवा मुखादम से क्या तात्पर्य है?
Answer: गौंड जनजाति में गाँव के मुखिया को 'पटेल' या 'मुखादम' के नाम से जाना जाता है. यह व्यक्ति गाँव का प्रमुख होता है और सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेता है. वह गाँव के प्रशासन और न्याय व्यवस्था में मुख्य भूमिका निभाता है.
In simple words: गौंड जनजाति में गाँव के मुखिया को पटेल या मुखादम कहते हैं.
🎯 Exam Tip: जनजातीय समाज के प्रमुख पदों के नाम और उनकी भूमिका को याद रखें.
Question 38. कोतवार व देबारी क्या होते हैं?
Answer: गौंड जनजाति में 'कोतवार' और 'देबारी' भी गाँव के महत्वपूर्ण पद हैं. 'कोतवार' गाँव का चौकीदार होता है, जिसका काम गाँव की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है. 'देबारी' गाँव का पुजारी या पुरोहित होता है, जो धार्मिक अनुष्ठान और परंपराओं का पालन करवाता है. इस तरह, कोतवार गाँव की भौतिक सुरक्षा देखता है, जबकि देबारी आध्यात्मिक देखभाल करता है.
In simple words: कोतवार गाँव का चौकीदार होता है, और देबारी गाँव का पुजारी या पुरोहित होता है.
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातीय पदों की भूमिकाओं को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से परिभाषित करें.
Question 39. गौंड कौन-सी भाषा बोलते हैं?
Answer: गौंड जनजाति के लोग मुख्य रूप से गौंडी भाषा बोलते हैं. इसके अलावा, वे तमिल, कन्नड़, हिन्दी, मराठी और तेलुगु जैसी अन्य भाषाएँ भी बोलते हैं. यह दर्शाता है कि वे विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के साथ संपर्क में रहे हैं.
In simple words: गौंड लोग मुख्य रूप से गौंडी भाषा बोलते हैं, और तमिल, कन्नड़, हिन्दी, मराठी, तेलुगु भी.
🎯 Exam Tip: जनजाति की मुख्य भाषा के साथ-साथ उन अन्य भाषाओं का भी उल्लेख करें जो वे बोलते हैं.
Question 40. सगा क्या है?
Answer: गौंड जनजाति की मान्यता के अनुसार, उनके नायक पाहेन्डी कपार लिंगम ने जब गौंडों को आज़ाद करवाया, तो गौंड लोग चार समूहों में एक गुफा से बाहर आए थे. तभी से गौंडों के इन चार मुख्य वर्गों को गौंडी भाषा में 'सगा' कहा जाता है. यह उनके सामाजिक संगठन और इतिहास को दर्शाता है.
In simple words: 'सगा' गौंड जनजाति के चार मुख्य सामाजिक वर्गों को कहते हैं, जिनकी उत्पत्ति उनके नायक पाहेन्डी कपार लिंगम से जुड़ी है.
🎯 Exam Tip: जनजातीय सामाजिक संरचना से संबंधित शब्दों को परिभाषित करते समय उनके ऐतिहासिक या पौराणिक संदर्भ को भी बताएं.
Question 41. कबाड़ी प्रथा से क्या तात्पर्य है?
Answer: कबाड़ी प्रथा गौंड जनजाति में प्रचलित एक ऐसी प्रथा थी, जिसमें छोटे कर्ज को चुकाने के लिए कर्जदार की कई पीढ़ियों को साहूकारों के गुलामों की तरह काम करना पड़ता था. यह प्रथा एक प्रकार की बंधुआ मजदूरी थी, जहाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी कर्ज चुकाने का बोझ चलता रहता था. सरकार ने अब इस प्रथा को पूरी तरह से रोक दिया है.
In simple words: कबाड़ी प्रथा में छोटे कर्ज के बदले कर्जदार की कई पीढ़ियों को साहूकार के लिए गुलामों की तरह काम करना पड़ता था.
🎯 Exam Tip: सामाजिक कुरीतियों का वर्णन करते समय उनके प्रभाव और वर्तमान स्थिति (जैसे सरकार द्वारा प्रतिबंध) का उल्लेख करें.
Question 2. एस्किमो जनजाति के शारीरिक स्वरूप स्पष्ट कीजिए।
Answer: एस्किमो जनजाति का शारीरिक गठन मंगोल प्रजाति से मिलता-जुलता है. इनके चेहरे सपाट और चौड़े होते हैं, और त्वचा का रंग हल्का भूरापन लिए पीला होता है. इनके बाल मोटे और काले होते हैं. इनका कद मध्यम होता है, नाक चपटी होती है, और आँखें गहरी, कत्थई रंग की तथा थोड़ी तिरछी होती हैं. इनके जबड़े भारी, मुँह चौड़े और दाँत सफेद व मजबूत होते हैं. कुल मिलाकर, उनका शरीर मजबूत और मांसल होता है. ये लोग मानसिक रूप से भी दृढ़ होते हैं. बर्फ़ीले माहौल में रहने के लिए उनका शरीर बहुत अनुकूल होता है.
In simple words: एस्किमो लोग मंगोल प्रजाति जैसे दिखते हैं; उनके चेहरे चौड़े, त्वचा पीली-भूरी, बाल काले और मोटे होते हैं. वे मजबूत शरीर वाले और मानसिक रूप से दृढ़ होते हैं.
🎯 Exam Tip: शारीरिक विशेषताओं का वर्णन करते समय आँखों के रंग, बालों के प्रकार और शरीर के गठन जैसे विशिष्ट बिंदुओं पर ध्यान दें.
Question 3. एस्किमो जनजाति के निवास क्षेत्र की जलवायु दशाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: एस्किमो जनजाति बहुत ही कठोर जलवायु वाले क्षेत्रों में रहती है. उनके निवास स्थान की जलवायु निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होती है:
1. सर्दियों का मौसम बहुत लम्बा होता है और गर्मियों का मौसम बहुत छोटा होता है.
2. उनके निवास क्षेत्र में वर्षा बर्फ के रूप में होती है, क्योंकि तापमान बहुत कम रहता है.
3. कठोर जलवायु के कारण यहाँ वनस्पतियाँ बहुत कम मिलती हैं. केवल गर्मी के दिनों में शैवाल, काई, लाइकेन और कुछ फूलों वाली वनस्पतियाँ उगती हैं.
4. इन क्षेत्रों में पूरे साल का औसत तापमान 0° सेल्सियस से भी नीचे रहता है, जिससे भीषण ठंड पड़ती है.
5. कम तापमान, बर्फीली तूफ़ान और कम रोशनी जैसी परिस्थितियाँ उनके जीवन को और भी मुश्किल बना देती हैं. इस चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी वे सफलतापूर्वक जीवन जीते हैं.
In simple words: एस्किमो बहुत ठंडे इलाकों में रहते हैं जहाँ सर्दियाँ लम्बी, गर्मियाँ छोटी होती हैं, वर्षा बर्फ के रूप में होती है, वनस्पति कम होती है, और साल भर तापमान 0° सेल्सियस से नीचे रहता है.
🎯 Exam Tip: जलवायु दशाओं का वर्णन करते समय तापमान, वर्षा के प्रकार, मौसम की अवधि और वनस्पति पर प्रभाव जैसे मुख्य कारकों पर ध्यान दें.
Question 5. एस्किमो लोगों के वातावरण समायोजन की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
एस्किमो किस प्रकार कठोर परिस्थितियों के आदी हो गए हैं? समझाइए।
Answer: एस्किमो लोगों ने अपने कठोर वातावरण के साथ अद्भुत तरीके से तालमेल बिठाया है. उनकी जीवनशैली और उपकरण उनकी इस अनुकूलन क्षमता का बेहतरीन उदाहरण हैं. वनस्पति और निर्माण सामग्री की कमी के बावजूद, वे बर्फ से घर (इग्लू) बनाते हैं. यह उनकी बुद्धिमत्ता और कुशलता का प्रमाण है. वालरस और सील की हड्डियों से स्लेज (बर्फ पर चलने वाली गाड़ी) बनाना और रेण्डियरों से उसे चलाना भी उनके अनुकूलन को दर्शाता है. इसके अलावा, वे बर्फीले तूफ़ानों और सूरज की चमक से अपनी आँखों को बचाने के लिए विशेष चश्मे (कवच) का इस्तेमाल करते हैं. ये सभी बातें उनकी वातावरणीय अनुकूलन की विशिष्टता को दर्शाती हैं.
In simple words: एस्किमो लोग बर्फ के घर (इग्लू), हड्डियों से बनी गाड़ियाँ (स्लेज) और आँखों के कवच बनाकर कठोर ठंडे मौसम में रहते हैं. यह दिखाता है कि वे कैसे अपने माहौल में ढल गए हैं.
🎯 Exam Tip: वातावरण समायोजन बताते समय उनके आवास, परिवहन और व्यक्तिगत सुरक्षा के तरीकों का उल्लेख करें, और यह भी बताएं कि वे कैसे उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हैं.
Question 6. बुशमैन लोगों के निवास क्षेत्र को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बुशमैन जनजाति मुख्य रूप से अफ्रीका महाद्वीप में निवास करती है. उनका निवास क्षेत्र 18° दक्षिणी अक्षांश से 24° दक्षिणी अक्षांशों के बीच बेचुआनालैंड के कालाहारी मरुस्थल में स्थित है. यह क्षेत्र जानवरों के भोजन के लिए काफी समृद्ध है, जिससे उन्हें शिकार आसानी से मिल जाता है. वर्तमान में, बुशमैन मुख्यतः कालाहारी मरुस्थल और दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के घास के मैदानी भागों में फैले हुए हैं. वे दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया और अंगोला जैसे देशों में भी पाए जाते हैं. उनका निवास क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ और रेतीला है.
In simple words: बुशमैन जनजाति अफ्रीका के कालाहारी मरुस्थल और दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के घास के मैदानों में रहती है.
🎯 Exam Tip: निवास क्षेत्र का वर्णन करते समय महाद्वीप, विशिष्ट भौगोलिक स्थान (मरुस्थल/मैदान) और प्रमुख देशों का उल्लेख करें.
Question 7. बुशमैन जनजाति के औजार व बर्तनों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बुशमैन जनजाति शिकार और दैनिक जीवन के लिए कई तरह के औजार और बर्तन उपयोग करती है. उनके प्रमुख औजारों में तीर-कमान, नुकीला डण्डा, भाला, कुल्हाड़ी (बछ) और अग्निदण्ड शामिल हैं. वे अक्सर विष बुझे तीरों का इस्तेमाल करते हैं. शुतुरमुर्ग और जिराफ जैसे जानवरों के पैर की हड्डियों को घिसकर और नुकीला बनाकर वे तीरों के अगले हिस्से पर लगाते हैं. वे लगभग 60 मीटर दूर से भी शिकार को मार सकते हैं. पेड़ों की छालों का उपयोग वे मजबूत रस्सियाँ बनाने के लिए करते हैं. वे शुतुरमुर्ग के अंडों के खोल का उपयोग पानी और अन्य चीज़ें रखने के लिए करते हैं.
In simple words: बुशमैन जनजाति तीर-कमान, भाला, कुल्हाड़ी जैसे औजार और शुतुरमुर्ग के अंडे के खोल जैसे बर्तन इस्तेमाल करती है, खासकर शिकार के लिए.
🎯 Exam Tip: जनजाति के औजारों और बर्तनों के नाम के साथ उनकी बनावट, सामग्री और उपयोग को स्पष्ट करें.
Question 9. भील जनजाति की परम्पराओं का वर्णन कीजिए।
Answer: भील जनजाति में कई सामाजिक और सांस्कृतिक परम्पराएँ देखने को मिलती हैं. ये लोग प्रकृति की पूजा करते हैं, जैसे कृषि में उपयोग होने वाले यंत्रों और देवी-देवताओं की भी पूजा करते हैं. नागदेव की पूजा भी इनकी परम्परा का हिस्सा है. भील लोग अंधविश्वासी होते हैं और जादू-टोने तथा भूत-प्रेतों में विश्वास करते हैं. ये मृत लोगों का दाह-संस्कार करते हैं. होली और दीपावली इनके मुख्य त्यौहार हैं, और घूमर व गैर इनके प्रमुख नृत्य हैं. बेणेश्वर धाम मेला इनका सबसे बड़ा मेला है. ये भगवान शंकर की आराधना करते हैं और आग के चारों ओर नृत्य करते हैं. ये अपनी पारंपरिक लोककथाओं और गीतों के माध्यम से अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं.
In simple words: भील प्रकृति, देवी-देवताओं और नागदेव की पूजा करते हैं. वे जादू-टोने पर विश्वास करते हैं, मृतकों का दाह-संस्कार करते हैं, होली-दीपावली मनाते हैं, और घूमर-गैर नृत्य करते हैं.
🎯 Exam Tip: जनजाति की परम्पराओं का वर्णन करते समय उनके धार्मिक विश्वास, त्यौहार, नृत्य और सामाजिक रीति-रिवाजों को शामिल करें.
Question 10. भीलों के जीवन व जीवनयापन की दशाओं में किस प्रकार परिवर्तन आ रहा है?
Answer: भील जनजाति के लोगों के जीवन में आधुनिकता के कारण लगातार बदलाव आ रहा है. शहरी संस्कृति के संपर्क में आने से वे अब ज्यादा चतुर और समझदार हो गए हैं. अब वे शिकार और खाद्य संग्रह के बजाय बाजार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं. युवा पीढ़ी अब मेहनत-मजदूरी करने लगी है. बाहरी संस्कृति के संपर्क से उनके कपड़े, बोलचाल और रहने-सहने के तरीकों में तेजी से बदलाव आया है. कई पुरुष शहरों में रिक्शा चालक का काम करने लगे हैं. सरकारी योजनाएँ उनके जीवन में सुधार लाने में मदद कर रही हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर में वृद्धि हो रही है.
In simple words: भीलों का जीवन आधुनिकता के कारण बदल रहा है. वे शहरी संस्कृति से जुड़ रहे हैं, मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं, और उनके पहनावे व रहन-सहन में भी बदलाव आया है.
🎯 Exam Tip: परिवर्तन का वर्णन करते समय उनके आर्थिक क्रियाकलापों, सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक आदतों में हुए बदलावों पर ध्यान केंद्रित करें.
Question 11. सरकारों द्वारा भीलों के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत सरकार भील जनजाति के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कई कार्यक्रम चला रही है. सरकार स्कूलों, अस्पतालों, परिवहन, संचार और बैंकिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करवा रही है. कुटीर उद्योगों और वन व कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है. आधुनिक संस्कृति के बढ़ते संपर्क के कारण भीलों के जीवन में बड़ा बदलाव आ रहा है. सरकार उनके आवास, शिक्षा और भोजन संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न योजनाएँ चला रही है, ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें और मुख्यधारा में शामिल हो सकें. इससे उन्हें समाज में बेहतर स्थान मिल रहा है.
In simple words: सरकार भीलों के विकास के लिए स्कूल, अस्पताल, परिवहन, संचार, बैंकिंग और उद्योगों को बढ़ावा दे रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके.
🎯 Exam Tip: सरकारी प्रयासों का उल्लेख करते समय शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक विकास और बुनियादी सुविधाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दें.
Question 13. गौंडों के आवासीय स्वरूप का वर्णन कीजिए।
Answer: गौंड जनजाति के लोग 'नंगले' या 'पल्ली' कहे जाने वाले छोटे गाँवों में रहते हैं. जब वे घर बनाने की जगह चुनते हैं, तो पहले शगुन निकलवाकर उस स्थान पर उत्सव मनाते हैं, और वहाँ बत्तख या मुर्गे की बलि भी देते हैं. उनके घर घास-फूस और मिट्टी से बने होते हैं. हर घर में अलग-अलग हिस्से होते हैं, जैसे रहने का कमरा, रसोई, बरामदा और एक पूजाघर. जब वे पहली बार नए घर में प्रवेश करते हैं, तो वे मिलकर उत्सव मनाते हैं. यह उनकी वास्तुकला और धार्मिक विश्वासों को दर्शाता है.
In simple words: गौंड छोटे गाँवों में घास-फूस और मिट्टी के घर बनाते हैं, जिनमें रहने का कमरा, रसोई और पूजाघर होता है. वे घर बनाने और प्रवेश करने से पहले उत्सव मनाते हैं.
🎯 Exam Tip: जनजातीय घरों की विशेषताओं का वर्णन करते समय सामग्री, कमरे का लेआउट और घर से जुड़े रीति-रिवाजों का उल्लेख करें.
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-1)
Question 1. एस्किमो जनजाति के शीतकालीन आखेट एवं इसकी विधियों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: एस्किमो जनजाति सर्दियों के मौसम में मुख्य रूप से समुद्री तट पर सील मछली का शिकार करती है. वे दो मुख्य तरीकों से शिकार करते हैं: माउपाक और इतुरपाक. माउपाक का शाब्दिक अर्थ 'प्रतीक्षा करना' है. इस विधि में, जब मछली बर्फ में बने छिद्रों से साँस लेने आती है, तो एस्किमो द्वारा रखे गए हड्डी के टुकड़े हिल जाते हैं. शिकारी उसी समय अपने हारफून (भाले) से सील मछली का शिकार करते हैं. इतुरपाक शिकार का दूसरा तरीका है, जिसमें दो शिकारी दो छिद्र बनाते हैं. एक शिकारी सील को चारा डालकर बुलाता है, और दूसरा शिकारी संकेत मिलते ही हारफून से शिकार कर लेता है. सील मछली न केवल भोजन प्रदान करती है, बल्कि जलाने के लिए ईंधन भी देती है, क्योंकि उसकी चर्बी अन्य जानवरों की चर्बी की तुलना में देर तक जलती है.
In simple words: एस्किमो सर्दी में सील मछली का शिकार माउपाक (इंतजार करना) और इतुरपाक (दो छेद से शिकार) तरीकों से करते हैं, जिसमें वे हारफून का उपयोग करते हैं और मछली भोजन व ईंधन देती है.
🎯 Exam Tip: शीतकालीन शिकार की विधियों के नाम, उनके तरीके और सील मछली के महत्व को विस्तार से समझाएँ.
Question 2. एस्किमो द्वारा किये जाने वाले बसन्तकालीन आखेट को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बसंत ऋतु में एस्किमो द्वारा किए जाने वाले शिकार को 'उतोक' कहते हैं. मार्च के महीने में, जब सूरज की धूप निकलने लगती है, तो सील मछलियाँ साँस लेने और धूप सेंकने के लिए बाहर आती हैं. इसी समय शिकारी कुत्तों की मदद से उनका शिकार किया जाता है. बसंत के मौसम में, एस्किमो चमड़े से बनी नावों का उपयोग परिवहन के लिए करते हैं, जिन्हें 'कयाक' कहते हैं. ये नावें उन्हें पानी पर आसानी से आने-जाने में मदद करती हैं, जिससे वे खुले पानी में शिकार कर सकते हैं. इस प्रकार, बसंतकालीन आखेट उनकी जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
In simple words: एस्किमो बसंत में सील का शिकार 'उतोक' विधि से करते हैं, जिसमें वे कुत्तों और चमड़े की नाव (कयाक) का उपयोग करते हैं.
🎯 Exam Tip: बसंतकालीन आखेट की विधि का नाम, उसमें इस्तेमाल होने वाले औजार (कुत्ते, कयाक) और समय (मार्च महीना) को स्पष्ट करें.
यूरोपियन व अमेरिकी लोगों के सम्पर्क से एस्किमो में क्या परिवर्तन आए हैं?
अथवा
आधुनिक संस्कृति के सम्पर्क का एस्किमो पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Answer: 1960 के बाद से, एकाकी ध्रुवीय क्षेत्रों में रहने वाले एस्किमो जनजाति का यूरोपियन और अमेरिकी लोगों के साथ संपर्क बढ़ा है. इस संपर्क के कारण उनके जीवन में कई बदलाव आए हैं. अब वे शिकार के लिए पारंपरिक हारफून के बजाय आधुनिक आग्नेय अस्त्रों और बंदूकों का उपयोग करने लगे हैं. कयाक की जगह मोटर चालित नावें और स्लेज की जगह स्नो स्कूटर का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे उनके परिवहन के तरीके तेजी से बदले हैं. फर और समूर (जानवरों की खाल) के व्यापार से मिलने वाले पैसों ने उनके पहनावे और रहने-सहने के तरीकों में भी बदलाव लाया है. अमेरिकी सरकार द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बढ़ने और भोजन की उपलब्धता आसान होने से कनाडा और अलास्का में एस्किमो लोगों की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है. जनसंख्या वृद्धि के कारण टुंड्रा के तटीय क्षेत्रों के पर्यावरण पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है. यह बदलाव एस्किमो समुदाय को आधुनिक दुनिया के करीब ला रहा है.
In simple words: यूरोपियन और अमेरिकी लोगों के संपर्क से एस्किमो अब आधुनिक हथियार और वाहन (मोटर नाव, स्नो स्कूटर) इस्तेमाल करने लगे हैं. फर के व्यापार से पैसा आने लगा है, और उनकी आबादी बढ़ गई है, जिससे उनके जीवन और पर्यावरण में बदलाव आया है.
🎯 Exam Tip: आधुनिक संस्कृति के संपर्क से हुए परिवर्तनों का वर्णन करते समय हथियारों, परिवहन, आर्थिक गतिविधियों और जनसंख्या पर प्रभावों को स्पष्ट करें.
Question 4. बुर्शमैन के समाज व संस्कृति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बुशमैन जनजाति में सामाजिक समुदाय छोटे दलों में संगठित होता है. उनका समाज खून के रिश्तों या शादी से जुड़ा होता है. उनकी धार्मिक परम्पराओं, संस्कारों और कलाओं में पशुओं और प्रकृति का महत्वपूर्ण स्थान है. वे अंधविश्वासी होते हैं और जादू-टोने तथा भूत-प्रेतों में विश्वास रखते हैं. वे दो भगवानों को मानते हैं - एक पूर्व में रहता है और दूसरा पश्चिम में. उनके समुदायों में 'ओझा' बीमारियों और बुरी आत्माओं से उन्हें बचाने में मदद करता है. वे चट्टानों पर कलाकृतियाँ भी बनाते हैं, जो उनकी कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध हैं. आजकल वे शुतुरमुर्ग के अंडों के खोल से गहने, तीर-कमान, स्कर्ट और अन्य हस्तशिल्प वस्तुएँ बनाते हैं. इन गतिविधियों से उनका सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन समृद्ध होता है.
In simple words: बुशमैन छोटे समूहों में रहते हैं, प्रकृति और जानवरों की पूजा करते हैं, जादू-टोने में विश्वास रखते हैं, दो भगवान मानते हैं, ओझा से मदद लेते हैं, चट्टानों पर कला बनाते हैं, और अंडों के खोल से गहने बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का वर्णन करते समय उनके सामाजिक संगठन, धार्मिक विश्वास, कला और हस्तशिल्प पर ध्यान केंद्रित करें.
Question 5. गौंड जनजाति की आर्थिक क्रियाओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: गौंड जनजाति के लोगों की मुख्य आर्थिक गतिविधियाँ कृषि और आखेट (शिकार) हैं. वे आत्मनिर्भर जीवन जीते हैं. कुछ गौंड लोग जंगलों से मिलने वाले उत्पादों को इकट्ठा करते हैं, पशुपालन और मछली पकड़ने का काम भी करते हैं. वे 'दीप्पा' नामक स्थानांतरण कृषि करते हैं, जिसमें भूमि को दो-तीन साल तक खेती करने के बाद खाली छोड़ दिया जाता है. इस कृषि में वे पेड़ों और झाड़ियों को जलाकर जमीन साफ करते हैं और बीज बोते हैं. बीज बोने से पहले देवी माती और जंगल के अन्य देवताओं को पशु बलि दी जाती है. वे मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए निचले ढलानों पर लकड़ी के लट्ठे भी रखते हैं, ताकि मिट्टी का कटाव न हो. यह उनकी पारंपरिक और टिकाऊ जीवनशैली को दर्शाता है.
In simple words: गौंड जनजाति के लोग मुख्य रूप से खेती (दीप्पा कृषि) और शिकार करते हैं. वे जंगल के उत्पादों को इकट्ठा करते हैं, पशु पालते हैं, मछली पकड़ते हैं, और मिट्टी की नमी बनाए रखने के तरीके अपनाते हैं.
🎯 Exam Tip: आर्थिक क्रियाओं का वर्णन करते समय कृषि के प्रकार, शिकार, संग्रह और उनके संसाधनों के उपयोग के तरीकों को विस्तार से बताएं.
RBSE Class 12 Geography Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. बुशमैन जनजाति पर एक भौगोलिक लेख लिखिए।
अथवा
बुशमैन जनजाति के निवास क्षेत्र, अर्थव्यवस्था व सामाजिक दशाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: बुशमैन अफ्रीका के कालाहारी मरुस्थल में रहने वाली एक प्रसिद्ध जनजाति है. उन्हें सॉन, रत्वी और बसारवा जैसे नामों से भी जाना जाता है. यह जनजाति निग्रीटो प्रजाति से संबंधित है. बुशमैन जनजाति से संबंधित विभिन्न भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक दशाएँ निम्नलिखित हैं:
(i) निवास क्षेत्र:
बुशमैन लोगों का मुख्य निवास क्षेत्र अफ्रीका महाद्वीप में 18° दक्षिणी अक्षांश से 24° दक्षिणी अक्षांश के बीच स्थित बेचुआनालैंड का कालाहारी मरुस्थल है. यह क्षेत्र पशुधन से मिलने वाले भोजन के लिए समृद्ध है. वर्तमान में बुशमैन मुख्यतः कालाहारी मरुस्थल और दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के उष्ण घास के मैदानी भागों में फैले हुए हैं. वे दक्षिणी अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया और अंगोला जैसे देशों में भी निवास करते हैं. उनका निवास क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ और रेतीला है, जहाँ वे कठोर परिस्थितियों में भी जीवन जीते हैं.
(ii) आर्थिक स्वरूप:
(क) आखेट (शिकार): बुशमैन जनजाति का मुख्य आर्थिक कार्य शिकार करना है. वे तीर-कमान और भाले का उपयोग शिकार के लिए करते हैं. शिकार के लिए वे कई विधियाँ अपनाते हैं, जैसे जानवरों को कीचड़ या फंदों में फँसाना, गड्ढों में गिराना, या जहरीला पानी पिलाना. वे जानवरों की नकल करने में भी माहिर होते हैं, जिससे शिकार आसान हो जाता है.
(ख) औजार और बर्तन: बुशमैन लोग शिकार और दैनिक जीवन के लिए तीर-कमान, नुकीला डण्डा, भाला, कुल्हाड़ी (बछ) और अग्निदण्ड जैसे औजार इस्तेमाल करते हैं. वे विष बुझे तीरों का प्रयोग करते हैं. शुतुरमुर्ग और जिराफ जैसे जानवरों के पैर की हड्डियों को घिसकर तीरों के अग्र भाग को नुकीला बनाते हैं. वे 60 मीटर दूर से भी शिकार कर सकते हैं. पेड़ों की छालों से रस्सियाँ बनाते हैं. शुतुरमुर्ग के अंडों के खोल का उपयोग वे पानी और अन्य चीज़ें रखने के लिए करते हैं.
(iii) सामाजिक स्वरूप:
(क) भोजन: बुशमैन सर्वभक्षी होते हैं और एक बार में आधी भेड़ तक खा सकते हैं. उनके भोजन में शिकार, मछली, पौधों की जड़ें, बेर और शहद शामिल हैं. दीमक, चींटियाँ और उनके अंडे भी उनके पसंदीदा भोजन हैं. वे भोजन की ताजगी की परवाह नहीं करते.
(ख) वस्त्र: बुशमैन के वस्त्र बहुत कम होते हैं. पुरुष एक तिकोनी लंगोट पहनते हैं जो टाँगों के बीच से होकर पीछे की ओर जाती है. स्त्रियाँ कमर से बाँधकर चमड़े की चौकोर एप्रन पहनती हैं. स्त्रियों के वस्त्रों में 'चोंगा' सबसे महत्वपूर्ण है, जिसे स्थानीय भाषा में 'क्रोस' कहते हैं. यह वस्त्र उन्हें ठंड से बचाता है और बिस्तर के रूप में भी इस्तेमाल होता है.
बुशमैन जनजाति प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव में रहती है और अपने पारंपरिक तरीकों से कठोर वातावरण में सफलतापूर्वक जीवन यापन करती है.
In simple words: बुशमैन कालाहारी मरुस्थल में रहने वाले लोग हैं. वे तीर-कमान से शिकार करते हैं, पौधों और जानवरों को खाते हैं, और कम वस्त्र पहनते हैं. उनका जीवन प्राकृतिक वातावरण के साथ गहराई से जुड़ा है.
🎯 Exam Tip: किसी भी जनजाति पर भौगोलिक लेख लिखते समय, उसके निवास क्षेत्र, आर्थिक गतिविधियों (विशेषकर शिकार और औजार), और सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं (भोजन, वस्त्र, प्रथाएँ) का विस्तृत वर्णन करें.
Question 2. गौंड जनजाति के निवास क्षेत्र व सामाजिक-सांस्कृतिक स्वरूप का वर्णन कीजिए।
Answer: गौंड जनजाति विश्व का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है, जो भारतीय प्रायद्वीप में निवास करती है. उनका जीवन प्रकृति और परम्पराओं से जुड़ा हुआ है.
(i) निवास क्षेत्र:
गौंड जनजाति का मुख्य निवास स्थान सतपुड़ा पहाड़ियों, मैकाल श्रेणी, सोन-देवगढ़ के ऊँचे पठारी क्षेत्र, बस्तर का पठार और गढ़जात पहाड़ियों में है. इन पहाड़ी क्षेत्रों की ऊँचाई आमतौर पर 600-900 मीटर के बीच होती है. ये क्षेत्र उन्हें बाहरी दुनिया से अलग रखते हैं और उनकी पारंपरिक जीवनशैली को बनाए रखने में मदद करते हैं.
(ii) सामाजिक-सांस्कृतिक स्वरूप:
(क) खान-पान: गौंड जनजाति के लोग मुख्य रूप से कोदू और कुटकी जैसे स्थानीय अनाज का सेवन करते हैं. वे अपने घरों में सब्जियाँ उगाते हैं और जंगलों से भी प्राप्त करते हैं. उत्सवों और त्योहारों पर चावल बनाया जाता है. वे शिकार से प्राप्त जानवरों का मांस खाते हैं और बलि दिए गए जानवरों का मांस भी खाते हैं. महुआ से बनी शराब भी उनके खान-पान का हिस्सा है.
(ख) वस्त्र और आभूषण: गौंड आमतौर पर सूती वस्त्र पहनते हैं. पुरुष धोती और स्त्रियाँ साड़ी व चोली पहनती हैं. पुरुष और स्त्रियाँ दोनों चाँदी और एल्युमीनियम के गहने पहनते हैं. स्त्रियाँ काँच की रंग-बिरंगी चूड़ियाँ पहनती हैं और गले में काले मनकों व कौड़ियों से बने हार पहनती हैं. स्त्रियाँ अक्सर अपने शरीर पर गोदना (टैटू) बनवाती हैं. लड़कियाँ अपने बालों के जूड़े में सफेद बाँस से बने आधे दर्जन तक कंघे भी रखती हैं.
(ग) मकान/आवास: गौंड लोग 'नंगले' (छोटे गाँव) में रहते हैं. जब वे घर बनाते हैं, तो पहले शगुन निकलवाकर उत्सव मनाते हैं, और वहाँ बत्तख या मुर्गे की बलि देते हैं. उनके मकान घास-फूस और मिट्टी से बने होते हैं, जिसमें रहने का कमरा, रसोई, बरामदा और पूजाघर जरूर होता है. ये घर उनके सामुदायिक और धार्मिक जीवन का केंद्र होते हैं.
(iii) समाज व संस्कृति: गौंड पितृसत्तात्मक समाज में रहते हैं, जहाँ पिता की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति बेटों में बाँट दी जाती है. परिवार का मुखिया सबसे बुजुर्ग पुरुष होता है. गौंड लोगों में सेवा विवाह, विनिमय विवाह, हरण विवाह और विधवा विवाह का प्रचलन है. विवाह समारोह अक्सर प्राकृतिक स्थानों, जैसे जल स्रोत के पास या आम के पेड़ के नीचे होते हैं. अनिष्ट से बचने के लिए रामधुनी का आयोजन किया जाता है. गाँव के मुखिया को 'पटेल' कहा जाता है, और वे आपसी विवादों का निपटारा करते हैं. गाँव के पुजारी और पुरोहित को 'देबारी' कहा जाता है, जो धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करते हैं.
In simple words: गौंड भारत के पठारी और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं. वे कोदू-कुटकी खाते हैं, सूती कपड़े और चाँदी के गहने पहनते हैं, और घास-मिट्टी के घर बनाते हैं. उनका समाज पितृसत्तात्मक है, जिसमें पटेल मुखिया और देबारी पुजारी होते हैं, और वे प्रकृति की पूजा करते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी भी जनजाति के निवास क्षेत्र, भोजन, वस्त्र, आवास और सामाजिक संगठन (विवाह, पद) को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ.
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