RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 17 भारत के संविधान की विशेषताएँ

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Detailed Chapter 17 भारत के संविधान की विशेषताएँ RBSE Solutions for Class 12 Political Science

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Class 12 Political Science Chapter 17 भारत के संविधान की विशेषताएँ RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा अंगीकार किया गया
(अ) 1 मई 1947
(ब) 9 दिसम्बर 1946
(स) 26 नवम्बर 1949
(द) 26 जनवरी 1950
Answer: (स) 26 नवम्बर 1949
In simple words: भारतीय संविधान को संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को स्वीकार कर लिया था. यह वह दिन है जब संविधान बन कर तैयार हो गया था.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि संविधान को अंगीकृत करने की तिथि (26 नवंबर 1949) और लागू करने की तिथि (26 जनवरी 1950) अलग-अलग हैं.

 

Question 2. भारत के संविधान में अनुच्छेद हैं
(अ) 150
(ब) 395
(स) 362
(द) 356
Answer: (ब) 395
In simple words: जब भारत का संविधान बना, तब उसमें कुल 395 अनुच्छेद थे. समय के साथ इसमें कुछ और अनुच्छेद जोड़े गए हैं, लेकिन मूल रूप से इनकी संख्या 395 थी.

🎯 Exam Tip: मूल संविधान में अनुच्छेदों की संख्या याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें हुए संशोधनों के कारण संख्या बढ़ती रहती है.

 

Question 4. राज्यों में संवैधानिक संकट उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति शासन संविधान के किस अनुच्छेद के तहत लगाया जाता है?
(अ) अनुच्छेद 352
(ब) अनुच्छेद 356
(स) अनुच्छेद 362
Answer: (ब) अनुच्छेद 356
In simple words: जब किसी राज्य में सरकार संविधान के नियमों के अनुसार काम नहीं कर पाती, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करके उस राज्य में अपना शासन लगा सकते हैं. यह एक सुरक्षा उपाय है.

🎯 Exam Tip: आपातकालीन प्रावधानों (अनुच्छेद 352, 356, 360) के बीच अंतर को समझें, क्योंकि वे अलग-अलग स्थितियों से संबंधित हैं.

 

Question 5. 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में किन शब्दों को जोड़ा गया है
(अ) गणराज्य
(ब) समाजवादी, पंथ निरपेक्ष तथा अखण्डता को
(स) लोकतंत्र
(द) बन्धुत्व
Answer: (ब) समाजवादी, पंथ निरपेक्ष तथा अखण्डता को
In simple words: 1976 में संविधान में बदलाव करके 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए थे. इन शब्दों से भारत के लक्ष्यों को और स्पष्ट किया गया.

🎯 Exam Tip: 42वें संविधान संशोधन को 'लघु संविधान' भी कहा जाता है क्योंकि इसने संविधान में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए थे, खासकर प्रस्तावना में.

 

Question 6. भारत की संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त “हम भारत के लोग” वाक्यांश से तात्पर्य है
(अ) संविधान सभा के सदस्य।
(ब) प्रारूप समिति के सदस्य
(स) स्वतंत्रता सेनानी
(द) संविधान को स्वीकार करने वाले भारत के नागरिक
Answer: (द) संविधान को स्वीकार करने वाले भारत के नागरिक
In simple words: "हम भारत के लोग" का मतलब है कि भारत का संविधान किसी एक व्यक्ति या समूह ने नहीं बनाया, बल्कि इसे पूरे भारत के लोगों ने मिलकर स्वीकार किया है. यह दिखाता है कि शक्ति लोगों के पास है.

🎯 Exam Tip: "हम भारत के लोग" वाक्यांश भारत की संप्रभुता और लोकतांत्रिक प्रकृति का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि शक्ति का स्रोत जनता है.

 

Question 7. प्रस्तावना न्याय का स्वरूप है
(अ) सामाजिक न्याय
(ब) आर्थिक न्याय
(स) राजनीतिक न्याय
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, तीनों तरह का न्याय मिलेगा. इसका मतलब है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा, सबको बराबर मौके मिलेंगे और सभी को देश के कामों में हिस्सा लेने का अधिकार होगा.

🎯 Exam Tip: प्रस्तावना में उल्लिखित न्याय के तीनों रूपों (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को दर्शाते हैं.

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान के निर्माण में कितना समय लगा?
Answer: भारतीय संविधान के निर्माण में 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन का समय लगा था. यह दुनिया के सबसे लंबे लिखित संविधानों में से एक है, जिसे बनाने में काफी मेहनत और समय लगा.
In simple words: भारत का संविधान बनाने में लगभग तीन साल का समय लगा था.

🎯 Exam Tip: संविधान निर्माण की सटीक अवधि अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछी जाती है, इसलिए इसे याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ हैं?
Answer: भारतीय संविधान में कुल 12 अनुसूचियाँ हैं. इन अनुसूचियों में संविधान के विभिन्न पहलुओं, जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम, भाषाओं, शक्तियों के विभाजन और अन्य महत्वपूर्ण प्रावधानों का विस्तृत विवरण दिया गया है.
In simple words: भारतीय संविधान में 12 खास सूचियां या लिस्ट हैं.

🎯 Exam Tip: मूल संविधान में 8 अनुसूचियां थीं, बाद में संशोधनों के माध्यम से 4 और अनुसूचियां जोड़ी गईं, इस बदलाव को याद रखें.

 

Question 3. भारत के संविधान की प्रस्तावना से क्या अभिप्राय है?
Answer: भारत के संविधान की प्रस्तावना एक परिचय पत्र की तरह है, जो संविधान के मुख्य उद्देश्यों और लक्ष्यों को बताती है. यह संविधान की मूल भावना को दर्शाती है और इसे 'संविधान की आत्मा' भी कहा जाता है. इसमें भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के संकल्प को व्यक्त किया गया है.
In simple words: प्रस्तावना संविधान की शुरुआत है, जो बताती है कि संविधान का लक्ष्य क्या है और यह किस लिए बनाया गया है. इसे संविधान की आत्मा भी कहते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रस्तावना संविधान का संक्षिप्त सार है और इसमें वर्णित आदर्श भारतीय शासन प्रणाली के आधार स्तंभ हैं, जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता, और बंधुत्व.

 

Question 4. संविधान में अब तक कितने संशोधन किये जा चुके हैं?
Answer: संविधान में अब तक 101 संशोधन किए जा चुके हैं. संविधान समय के साथ बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए संशोधित किया जाता है. ये संशोधन भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों के अनुकूल होने में मदद करते हैं.
In simple words: भारत के संविधान में अब तक 101 बार बदलाव किए गए हैं.

🎯 Exam Tip: संविधान में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों और उनके प्रभावों को समझना आवश्यक है, क्योंकि ये भारतीय राजव्यवस्था को आकार देते हैं.

 

Question 5. “प्रस्तावना संविधान की प्रेरणा और प्राण है” क्यों?
Answer: प्रस्तावना को संविधान की प्रेरणा और प्राण इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पूरे संविधान की नींव है. यह संविधान के मूल्यों और आदर्शों को दर्शाती है, जिन पर पूरा संविधान आधारित है. प्रस्तावना के बिना संविधान का कोई खास महत्व नहीं रहता क्योंकि यह उसके मूल दर्शन को स्पष्ट करती है.
In simple words: प्रस्तावना संविधान की मुख्य सोच है, जिस पर पूरा संविधान टिका है. इसलिए इसे संविधान की प्रेरणा और प्राण कहा जाता है.

🎯 Exam Tip: प्रस्तावना में निहित आदर्शों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे संविधान के हर हिस्से को दिशा देते हैं.

 

Question 6. सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
Answer: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. यह नियुक्ति भारत की न्यायिक प्रणाली में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश देश की न्याय व्यवस्था का नेतृत्व करते हैं.
In simple words: भारत के सबसे बड़े कोर्ट के जज को राष्ट्रपति चुनते हैं.

🎯 Exam Tip: न्यायिक नियुक्तियों में राष्ट्रपति की भूमिका और भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को समझना महत्वपूर्ण है.

 

Question 7. देश के किसी हिस्से में सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में किस अनुच्छेद के तहत आपातकाल लागू किया जाता है?
Answer: देश के किसी हिस्से में सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू किया जाता है. यह राष्ट्रीय आपातकाल का एक प्रकार है, जिसका उद्देश्य देश की सुरक्षा और शांति बनाए रखना है जब आंतरिक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो.
In simple words: अगर देश में हथियारबंद लोगों का विद्रोह हो जाए, तो अनुच्छेद 352 के तहत इमरजेंसी लगाई जाती है.

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर लगाया जा सकता है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए है.

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत के संविधान की कोई पाँच विशेषताएँ बताइए।
Answer: भारतीय संविधान की पाँच मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **सम्प्रभुता सम्पन्न संविधान:** भारत का संविधान भारतीय जनता द्वारा बनाया गया है और अंतिम शक्ति जनता के पास है. भारत अपने आंतरिक और बाहरी मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र है.
2. **कठोरता व लचीलेपन का मिश्रण:** संविधान में कुछ हिस्से कठोर हैं जिन्हें बदलना मुश्किल है, जबकि कुछ हिस्से लचीले हैं जिन्हें आसानी से बदला जा सकता है. यह संविधान को समय के साथ बदलने में मदद करता है.
3. **विश्वशांति का समर्थक:** भारतीय संविधान विश्व शांति का समर्थन करता है और इसी कारण भारत ने पंचशील व गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई है. यह दिखाता है कि भारत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करता है.
4. **विलक्षण दस्तावेज:** भारतीय संविधान एक अद्वितीय दस्तावेज है जो भारत के मूल मूल्यों और आकांक्षाओं को जगह देता है. इसमें कई देशों के अच्छे प्रावधानों को शामिल किया गया है.
5. **स्वतंत्र न्यायपालिका:** संविधान में प्रजातंत्र की रक्षा और जनता के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है. यह सुनिश्चित करती है कि कानून का शासन बना रहे और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो.
In simple words: भारत का संविधान लोगों ने बनाया है, यह कठोर और लचीला दोनों है, यह दुनिया में शांति चाहता है, यह एक खास तरह का कानून है, और इसकी अदालतें बिल्कुल आज़ाद हैं.

🎯 Exam Tip: इन विशेषताओं को याद करते समय, प्रत्येक विशेषता के पीछे के मूल सिद्धांत को समझें ताकि आप उन्हें अपने शब्दों में समझा सकें.

 

Question 2. संविधान में वयस्क मताधिकार से क्या तात्पर्य है?
Answer: संविधान में वयस्क मताधिकार का अर्थ है कि भारत के सभी नागरिक जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें वोट देने का अधिकार है. यह एक लोकतांत्रिक सिद्धांत है जो सुनिश्चित करता है कि सरकार में जनता की सीधी भागीदारी हो.
इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
1. वोट देने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना ज़रूरी है.
2. 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति वोट दे सकता है.
3. देश में महिलाओं और पुरुषों दोनों को वोट देने का समान अधिकार है.
4. किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति, धर्म या लिंग के आधार पर वोट देने से रोका नहीं जा सकता.
5. पहले वोट देने की आयु 21 वर्ष थी, जिसे 61वें संविधान संशोधन द्वारा घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया.
In simple words: वयस्क मताधिकार का मतलब है कि भारत के सभी 18 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोग वोट डाल सकते हैं, चाहे वे कोई भी हों.

🎯 Exam Tip: वयस्क मताधिकार लोकतंत्र का एक आधार है, जो सभी नागरिकों को सरकार चुनने में समान भागीदार बनाता है, लिंग, जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता.

 

Question 3. पंथनिरपेक्ष राज्य से क्या अभिप्राय है?
Answer: पंथनिरपेक्ष राज्य का मतलब है कि भारत का कोई अपना खास धर्म नहीं है. राज्य सभी धर्मों को समान मानता है और किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं देता. इसका अर्थ यह भी है कि धार्मिक मामलों में सरकार तटस्थ रहती है और किसी भी नागरिक के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती है. 42वें संविधान संशोधन द्वारा 'पंथनिरपेक्ष' शब्द को संविधान की प्रस्तावना में जोड़ा गया था.
In simple words: पंथनिरपेक्ष राज्य वह है जहाँ सरकार का कोई अपना धर्म नहीं होता और वह सभी धर्मों के लोगों को बराबर मानती है.

🎯 Exam Tip: पंथनिरपेक्षता का अर्थ धर्म-विरोधी होना नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के प्रति तटस्थ और समान सम्मान रखना है, जो भारतीय संविधान का एक मूल सिद्धांत है.

 

Question 4. प्रस्तावना को लिखिए।
Answer: भारतीय संविधान की प्रस्तावना इस प्रकार है:
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् 2006 विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं." यह प्रस्तावना भारत के लोकतांत्रिक और गणतंत्रात्मक स्वरूप को दर्शाती है.
In simple words: प्रस्तावना वह खास लेख है जो बताता है कि भारत एक आज़ाद, सबको साथ लेकर चलने वाला, धर्मनिरपेक्ष और जनता का राज वाला देश है, जहाँ सभी को न्याय और आज़ादी मिलेगी.

🎯 Exam Tip: प्रस्तावना में दिए गए सभी प्रमुख शब्दों (जैसे संप्रभुता, समाजवाद, पंथनिरपेक्षता, लोकतंत्र, गणराज्य, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व) के अर्थ को समझें, क्योंकि ये संविधान की मूल भावना हैं.

 

Question 5. संविधान में आपातकालीन उपबंधों से संबंधित अनुच्छेद लिखिए।
Answer: भारतीय संविधान के भाग 18 में राष्ट्रपति के संकटकालीन प्रावधानों का वर्णन किया गया है, जिन्हें आपातकालीन उपबंध कहते हैं. ये निम्नलिखित अनुच्छेदों में दिए गए हैं:
1. **अनुच्छेद 352:** यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को तब राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने की शक्ति देता है जब देश की सुरक्षा को युद्ध, बाहरी आक्रमण, या सशस्त्र विद्रोह के कारण खतरा हो. यह आपातकाल पूरे देश या उसके किसी हिस्से में लगाया जा सकता है.
2. **अनुच्छेद 356:** इस अनुच्छेद के तहत, यदि किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बिगड़ जाए और राज्यपाल या अन्य स्रोतों से जानकारी मिले कि राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चल रहा है, तो राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन (राज्य आपातकाल) की घोषणा कर सकते हैं.
3. **अनुच्छेद 360:** यह अनुच्छेद वित्तीय आपातकाल से संबंधित है. यदि राष्ट्रपति को लगता है कि भारत या उसके किसी हिस्से की वित्तीय स्थिरता खतरे में है, तो वे वित्तीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं. इस स्थिति में केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय मामलों में निर्देश दे सकती है.
In simple words: संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 360 राष्ट्रपति को देश में अलग-अलग तरह की इमरजेंसी लगाने की ताकत देते हैं, जैसे युद्ध, राज्य में गड़बड़ी या पैसों के संकट में.

🎯 Exam Tip: तीनों आपातकालीन अनुच्छेदों - 352 (राष्ट्रीय आपातकाल), 356 (राष्ट्रपति शासन), और 360 (वित्तीय आपातकाल) - के बीच के अंतर और उनके लागू होने की स्थितियों को स्पष्ट रूप से समझें.

 

Question 6. "भारतीय संविधान कठोरता व लचीलेपन का मिश्रण है।” इस पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारतीय संविधान कठोरता और लचीलेपन का एक अच्छा मिश्रण है. इसका मतलब है कि संविधान के कुछ हिस्सों को बदलना मुश्किल है (जैसे अमेरिकी संविधान की तरह कठोर), जबकि कुछ हिस्सों को आसानी से बदला जा सकता है (जैसे ब्रिटिश संविधान की तरह लचीला). अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन की विधि दी गई है. कठोरता सुनिश्चित करती है कि संविधान के मूल सिद्धांतों को आसानी से बदला न जा सके, जबकि लचीलापन यह सुनिश्चित करता है कि संविधान बदलती सामाजिक और राजनीतिक आवश्यकताओं के अनुसार ढल सके. उदाहरण के लिए, कुछ संशोधनों के लिए संसद में विशेष बहुमत और आधे राज्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है, जो कठोरता को दर्शाता है.
In simple words: भारत का संविधान ऐसा है कि कुछ नियम बदलना बहुत मुश्किल है, पर कुछ नियम आसानी से बदले जा सकते हैं. यह मिश्रण इसे स्थिर और साथ ही नए समय के हिसाब से बदलने लायक बनाता है.

🎯 Exam Tip: कठोरता और लचीलेपन के मिश्रण से संविधान को स्थिरता और अनुकूलनशीलता दोनों मिलती है, जो दीर्घकालिक शासन के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 7. लोकतंत्रात्मक गणराज्य से क्या अभिप्राय है?
Answer: लोकतंत्रात्मक गणराज्य का अर्थ है कि भारत में जनता ही शासन की अंतिम स्रोत है. इसका मतलब है कि सरकार 'जनता की, जनता द्वारा और जनता के लिए' है. भारत में, जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है और वे प्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं. गणराज्य का मतलब है कि भारत का राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) सीधे जनता द्वारा नहीं चुना जाता, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से पाँच साल के लिए चुना जाता है. संविधान सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का आश्वासन देता है, और भारत में कोई विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग नहीं है.
In simple words: लोकतंत्रात्मक गणराज्य का मतलब है कि देश में जनता ही मालिक है, वे ही अपनी सरकार चुनते हैं, और देश का मुखिया (राष्ट्रपति) भी जनता के प्रतिनिधियों द्वारा चुना जाता है.

🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक गणराज्य की अवधारणा भारत के शासन की लोकतांत्रिक और गणतंत्रात्मक प्रकृति को दर्शाती है, जहाँ नागरिकों की समानता और राजनीतिक भागीदारी को महत्व दिया जाता है.

 

Question 8. प्रस्तावना में प्रयुक्त समाजवाद शब्द की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
Answer: समाजवाद शब्द को 42वें संविधान संशोधन द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना में जोड़ा गया था. समाजवाद का अर्थ है कि सरकार ऐसी नीतियाँ बनाएगी जिससे समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों का जीवन स्तर सुधरे और आर्थिक असमानता कम हो. भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई है, जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र साथ मिलकर काम करते हैं. समाजवाद का उद्देश्य धन के केंद्रीकरण को रोकना और सभी नागरिकों के बीच संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करना है.
समाजवाद शब्द का उल्लेख निम्नलिखित उद्देश्यों से संबंधित है:
1. भारतीय जनता की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए.
2. समाज में गरीबी को खत्म करने के लिए.
3. देश की संपत्ति का उपयोग सभी वर्गों और व्यक्तियों के हितों को ध्यान में रखकर करना.
संक्षेप में, समाजवादी शब्द समाज से संबंधित ऐसी अवधारणा है जो सभी व्यक्तियों के विकास के लिए मार्ग प्रशस्त करती है.
In simple words: समाजवाद का मतलब है कि सरकार सबको बराबर मौके दे और अमीरी-गरीबी का अंतर कम करे, ताकि सभी लोग अच्छे से रह सकें.

🎯 Exam Tip: भारतीय समाजवाद लोकतांत्रिक समाजवाद है, जिसका अर्थ है कि यह गरीबी, असमानता और बीमारी को खत्म करने के लिए लोकतांत्रिक साधनों का उपयोग करता है, न कि राज्य-नियंत्रित समाजवाद.

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताओं का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ इसे दुनिया के सबसे अनूठे और सफल संविधानों में से एक बनाती हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. **लिखित एवं निर्मित संविधान:** भारत का संविधान लिखित है और इसका निर्माण संविधान सभा द्वारा 2 वर्ष 11 महीने 18 दिनों में किया गया था. यह दुनिया का सबसे विशाल लिखित संविधान है.
2. **संपूर्ण प्रभुता संपन्न संविधान:** भारतीय संविधान जनता की सर्वोच्च इच्छा का परिणाम है. अंतिम शक्ति जनता में निहित है और भारत अपने आंतरिक व बाहरी मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र है, किसी बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करता.
3. **कठोरता व लचीलेपन का मिश्रण:** संविधान में संशोधन की प्रक्रिया कुछ मामलों में बहुत कठिन है (कठोरता), जबकि कुछ मामलों में आसान है (लचीलापन). यह इसे स्थायी और परिवर्तनशील दोनों बनाता है.
4. **संसदीय शासन व्यवस्था:** भारत में ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली को अपनाया गया है, जहाँ राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख होता है और वास्तविक शक्तियाँ प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं, जो लोकसभा के प्रति जवाबदेह होते हैं.
5. **मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य:** संविधान के भाग 3 में नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार दिए गए हैं (पहले 7 थे, संपत्ति का अधिकार हटा दिया गया). ये अधिकार व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक हैं. साथ ही, 42वें संशोधन द्वारा 10 मूल कर्तव्य भी जोड़े गए (वर्तमान में 11 हैं) जो नागरिकों को देश के प्रति उनकी जिम्मेदारियाँ याद दिलाते हैं.
6. **राज्य के नीति-निर्देशक तत्व:** संविधान के भाग 4 में नीति-निर्देशक तत्वों का समावेश है, जो सरकारों के लिए दिशा-निर्देश का काम करते हैं ताकि वे लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना कर सकें. ये लागू करने योग्य नहीं हैं, लेकिन शासन में महत्वपूर्ण हैं.
7. **स्वतंत्र न्यायपालिका:** भारत में एक स्वतंत्र न्यायपालिका है, जो संविधान की व्याख्या करती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय इसकी मुख्य इकाइयाँ हैं, जो कार्यपालिका और विधायिका के हस्तक्षेप से मुक्त हैं.
8. **पंथनिरपेक्ष राज्य:** भारतीय राज्य का कोई अपना धर्म नहीं है और यह सभी धर्मों को समान सम्मान देता है. नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, और धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता.
9. **एकल नागरिकता:** भारत में नागरिकों को केवल भारतीय नागरिकता मिलती है, राज्यों की अलग नागरिकता नहीं होती. यह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है.
10. **वयस्क मताधिकार:** सभी 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के भारतीय नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के वोट देने का अधिकार है, जो लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करता है.
11. **विश्वशांति का समर्थन:** भारत का संविधान 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धांत का पालन करता है और विश्वशांति व गुटनिरपेक्षता की नीति का समर्थन करता है. भारत किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता और न ही सहन करता है.
12. **अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्गों के कल्याण की विशेष व्यवस्था:** संविधान में अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जैसे शिक्षा, रोजगार और विधायिका में आरक्षण.
In simple words: भारत का संविधान लिखित है, इसमें कठोर और लचीले नियम मिले हुए हैं, यहाँ संसद वाली सरकार है, लोगों को खास अधिकार और कर्तव्य मिले हैं, सरकार के लिए दिशा-निर्देश हैं, अदालतें आज़ाद हैं, सरकार का कोई धर्म नहीं है, सबकी एक ही नागरिकता है, 18 साल के ऊपर सभी वोट दे सकते हैं, और यह पूरी दुनिया में शांति चाहता है. यह सभी बातें मिलकर इसे एक मजबूत और खास संविधान बनाती हैं.

🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में सभी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करना और प्रत्येक विशेषता को संक्षिप्त रूप से समझाना आवश्यक है ताकि उत्तर पूर्ण और व्यापक लगे.

 

Question 2. 'भारतीय संविधान की विशेषताएँ भारत को विश्व के सफलतम लोकतंत्रों में से एक बनाने में सहायक सिद्ध हुई हैं। इस कथन की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान की कई विशेषताएँ भारत को दुनिया के सबसे सफल लोकतंत्रों में से एक बनाने में महत्वपूर्ण रही हैं. ये विशेषताएँ जनता की भागीदारी, न्याय और कल्याण को सुनिश्चित करती हैं. इनकी विस्तृत व्याख्या इस प्रकार है:
1. **जनता का शासन:** भारतीय लोकतंत्र का अर्थ है संपूर्ण जनता का शासन, जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार मिलते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि सरकार किसी विशेष जाति, भाषा या संस्कृति के लोगों की नहीं, बल्कि सभी की हो.
2. **संसदीय शासन व्यवस्था:** संविधान ने संसदीय प्रणाली प्रदान की है, जहाँ कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) विधायिका (लोकसभा) के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह होती है. प्रधानमंत्री सरकार का नेतृत्व करते हैं, और राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं. यह व्यवस्था राज्यों में भी लागू है, जो जनता के प्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाती है.
3. **मौलिक अधिकार व कर्तव्य:** संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करके उनके हितों की रक्षा करता है. ये अधिकार व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं. साथ ही, नागरिकों के कर्तव्य भी निर्धारित किए गए हैं, जो एक सफल लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये नागरिकों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करते हैं.
4. **नीति निर्देशक तत्वों का समावेश:** संविधान में लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए नीति-निर्देशक तत्वों को शामिल किया गया है. ये सरकारों को अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के लिए दिशा-निर्देश देते हैं, जिससे समाज में न्याय और समानता को बढ़ावा मिलता है. ये तत्व सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र की नींव रखते हैं.
5. **जन कल्याणकारी भावना:** संविधान में सरकार का हर कार्य जनता के कल्याण को ध्यान में रखकर किया जाता है. लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है और उसका मुख्य लक्ष्य जन-कल्याण सुनिश्चित करना है. यह विशेषता सुनिश्चित करती है कि नीतियाँ जनता के हित में हों.
6. **कार्यकुशल शासन:** भारतीय संविधान ने एक कार्यकुशल शासन प्रणाली प्रदान की है. सरकार के सभी निर्णय सोच-समझकर और जनहित में लिए जाते हैं, जिससे देश का प्रशासन प्रभावी ढंग से चलता है.
7. **नैतिक शिक्षा का साधन:** लोकतांत्रिक शासन नागरिकों को नैतिक शिक्षा भी प्रदान करता है. यह व्यक्ति को परिवार की संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर सार्वजनिक हित के लिए काम करने, सहयोग, सहिष्णुता और सहानुभूति जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे एक जिम्मेदार समाज का निर्माण होता है.
8. **स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायपालिका की स्थापना:** संविधान ने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका की स्थापना की है. यह जनता को कार्यपालिका और विधायिका के अत्याचारों से बचाती है और व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करती है, जिससे कानून का शासन बना रहता है.
9. **विश्वशांति का समर्थन:** 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धांत को अपनाते हुए, भारतीय संविधान विश्वशांति का समर्थन करता है. भारत किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता और न ही सहन करता है. यह नीति गुटनिरपेक्षता को बढ़ावा देती है.
10. **अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्गों के कल्याण की विशेष व्यवस्था:** संविधान ने अल्पसंख्यकों के धार्मिक, भाषायी और सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए हैं. साथ ही, अनुसूचित जनजातियों और जातियों के लिए लोकसभा, विधानसभाओं व राजकीय सेवाओं में आरक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में शामिल किया जा सके.
11. **पंथ निरपेक्ष राज्य:** भारतीय संविधान ने धर्म के क्षेत्र में प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता प्रदान की है. राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है और यह सभी धर्मों को समान संरक्षण देता है. धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक से भेदभाव नहीं किया जा सकता.
अतः निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि भारतीय संविधान की इन विशेषताओं ने भारत को विश्व का सफलतम लोकतंत्र बनाने में अत्यधिक सहायता की है.
In simple words: भारत का संविधान ऐसा बनाया गया है कि यहाँ जनता की सरकार चलती है, अदालतें आज़ाद हैं, सबको अधिकार और कर्तव्य मिले हैं, और सरकार सबके भले के लिए काम करती है. ये सभी बातें मिलकर भारत को दुनिया का एक सफल लोकतंत्र बनाती हैं.

🎯 Exam Tip: यह निबंधात्मक प्रश्न भारतीय संविधान की कार्यप्रणाली और उसकी सफलता पर केंद्रित है; इसलिए, प्रत्येक विशेषता को लोकतंत्र के संदर्भ में समझाना महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. 'संविधान की प्रस्तावना भारतीय संविधान का सार है।' समझाइए।
Answer: भारतीय संविधान की प्रस्तावना, जिसे उद्देशिका भी कहते हैं, पूरे संविधान का सार है. यह उन उच्च मूल्यों और दार्शनिक सिद्धांतों को दर्शाती है जिन पर हमारा संविधान आधारित है. प्रस्तावना बताती है कि भारत की जनता संप्रभु है और एक पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक गणराज्य के माध्यम से न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता व अखंडता जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहता है.
प्रस्तावना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. **'हम भारत के लोग'**: इन शब्दों में तीन मुख्य बातें निहित हैं:
* संविधान द्वारा अंतिम शक्ति जनता में निहित की गई है.
* संविधान के निर्माता जनता के प्रतिनिधि थे.
* भारतीय संविधान भारतीय जनता की इच्छा का परिणाम है.
2. **न्याय**: प्रस्तावना सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का आश्वासन देती है. सामाजिक न्याय का अर्थ है बिना किसी भेदभाव के समानता. आर्थिक न्याय का अर्थ है कि धन का वितरण निष्पक्ष हो और किसी को गरीबी का सामना न करना पड़े. राजनीतिक न्याय का अर्थ है कि सभी नागरिकों को राजनीति में भाग लेने का समान अवसर मिले.
3. **स्वतंत्रता**: इसमें विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता शामिल है. यह केवल नियंत्रण की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि व्यक्तियों को अपनी क्षमताओं का विकास करने के लिए सकारात्मक वातावरण प्रदान करती है.
4. **समानता**: प्रस्तावना प्रतिष्ठा और अवसर की समानता पर जोर देती है. सभी नागरिक कानून की नजर में समान हैं और उन्हें बिना किसी भेदभाव के राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं, जैसे चुनाव प्रक्रिया में भाग लेना.
5. **बंधुत्व**: प्रस्तावना में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता व अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुत्व की भावना को बढ़ाने का संकल्प लिया गया है. यह भाईचारे की भावना को बढ़ावा देती है.
निष्कर्ष रूप में, प्रस्तावना संविधान के मूलभूत आदर्शों को दर्शाती है और भारतीय संविधान का संक्षिप्त सार है.
In simple words: प्रस्तावना संविधान का सबसे ज़रूरी हिस्सा है. यह बताती है कि भारत के लोग कैसे हैं, भारत कैसा देश है (आज़ाद, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, जनता का राज), और यह सबको न्याय, आज़ादी और बराबरी देना चाहता है, ताकि सब मिल-जुल कर रहें.

🎯 Exam Tip: प्रस्तावना को 'संविधान की आत्मा' या 'संविधान की कुंजी' के रूप में संदर्भित किया जाता है क्योंकि यह संविधान के मूल दर्शन और लक्ष्यों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती है.

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान के किस भाग को डॉ. के. एम. मुंशी ने संविधान की राजनीतिक कुंडली कहा है?
(अ) प्रस्तावना
(ब) मूल अधिकार
(स) नीति निर्देशक तत्व
(द) मूल कर्तव्य
Answer: (अ) प्रस्तावना
In simple words: डॉ. के. एम. मुंशी ने प्रस्तावना को संविधान की 'राजनीतिक कुंडली' कहा था, क्योंकि यह संविधान के भविष्य और उसके लक्ष्यों को दिखाती है.

🎯 Exam Tip: यह कथन प्रस्तावना के महत्व को दर्शाता है, क्योंकि यह संविधान के निर्माण के पीछे की विचारधारा और भविष्य की दिशा को स्पष्ट करती है.

 

Question 2. भारतीय संविधान के कितने भाग हैं
(अ) 20
(ब) 22
(स) 25
(द) 7
Answer: (ब) 22
In simple words: जब भारतीय संविधान बना था, तब इसमें 22 भाग थे. इन भागों में अलग-अलग तरह के नियम और कानून लिखे गए हैं.

🎯 Exam Tip: मूल संविधान में भागों की संख्या 22 थी, हालाँकि संशोधनों के माध्यम से उप-भाग जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 25 हो गई है, लेकिन मूल भागों की संख्या 22 ही रहती है.

 

Question 4. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषता है
(अ) विश्व का विशालतम संविधान
(ब) लिखित व निर्मित संविधान
(स) विलक्षण दस्तावेज
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: भारत का संविधान दुनिया में सबसे बड़ा लिखित कानून है. यह हाथ से लिखा गया था और यह एक बहुत ही खास दस्तावेज है. यह सभी बातें भारतीय संविधान को खास बनाती हैं.

🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान की कई अनूठी विशेषताओं के कारण यह दुनिया के अन्य संविधानों से अलग है, जो इसकी व्यापकता और महत्व को दर्शाती हैं.

 

Question 5. सम्पत्ति का अधिकार है
(अ) कानूनी अधिकार
(ब) मूल अधिकार
(स) नीति निर्देशक तत्व
(द) मूल कर्तव्य
Answer: (अ) कानूनी अधिकार
In simple words: पहले संपत्ति का अधिकार लोगों का मूल अधिकार था, लेकिन अब इसे बदलकर केवल कानूनी अधिकार बना दिया गया है. इसका मतलब है कि सरकार कुछ खास नियमों के तहत आपकी संपत्ति ले सकती है.

🎯 Exam Tip: संपत्ति के अधिकार को 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया गया था, यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक परिवर्तन है.

 

Question 6. मूल अधिकारों का वर्णन संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है
(अ) 10 - 15
(ब) 12 - 35
(स) 12-40
(द) 12 - 36
Answer: (ब) 12 - 35
In simple words: संविधान में लोगों के मूल अधिकार अनुच्छेद 12 से 35 तक बताए गए हैं. ये अधिकार हर भारतीय नागरिक को मिलते हैं, जिनकी सरकार रक्षा करती है.

🎯 Exam Tip: मौलिक अधिकार संविधान के भाग III में निहित हैं और न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं, जिसका अर्थ है कि यदि इनका उल्लंघन होता है तो नागरिक अदालत जा सकते हैं.

 

Question 7. वर्तमान में मूल अधिकारों की संख्या है
(अ) 7
(ब) 6
(स) 5
Answer: (ब) 6
In simple words: आज के समय में भारत के लोगों के पास कुल 6 मूल अधिकार हैं. पहले 7 थे, लेकिन संपत्ति के अधिकार को हटा दिया गया है.

🎯 Exam Tip: भारत में वर्तमान में समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार, और संवैधानिक उपचारों का अधिकार, ये छह मूल अधिकार हैं.

 

Question 9. संविधान के किस भाग में नीति निर्देशक तत्वों का वर्णन किया गया है?
(अ) भाग 2
(ब) भाग 3
(स) भाग 4
(द) भाग 5
Answer: (स) भाग 4
In simple words: संविधान के चौथे भाग में नीति निर्देशक तत्व लिखे गए हैं. ये सरकार को बताते हैं कि लोगों का भला कैसे किया जाए.

🎯 Exam Tip: नीति निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं और हालाँकि वे अदालतों में लागू नहीं किए जा सकते, वे सरकार के लिए एक नैतिक मार्गदर्शक का काम करते हैं.

 

Question 10. भारत में मताधिकार की न्यूनतम आयु निर्धारित की गयी है
(अ) 20 वर्ष
(ब) 21 वर्ष
(स) 19 वर्ष
(द) 18 वर्ष।
Answer: (द) 18 वर्ष
In simple words: भारत में कोई भी व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 साल या उससे ज़्यादा है, वोट दे सकता है. पहले यह उम्र 21 साल थी, जिसे बाद में कम कर दिया गया.

🎯 Exam Tip: मताधिकार की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष 61वें संविधान संशोधन (1989) द्वारा की गई थी, यह भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण कदम था.

 

Question 11. किस अनुच्छेद के अनुसार वित्तीय संकट उत्पन्न होने पर संपूर्ण देश या किसी भाग में आपातकाल लागू किया जा सकता है?
(अ) अनुच्छेद 352
(ब) अनुच्छेद 356
(स) अनुच्छेद 357
(द) अनुच्छेद 360
Answer: (द) अनुच्छेद 360
In simple words: अगर देश को पैसों का बहुत बड़ा संकट आ जाए, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 360 का इस्तेमाल करके 'वित्तीय आपातकाल' लगा सकते हैं.

🎯 Exam Tip: वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) का प्रावधान गंभीर आर्थिक अस्थिरता की स्थिति में केंद्र सरकार को वित्तीय नियंत्रण मजबूत करने की शक्ति देता है, हालाँकि भारत में इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है.

 

Question 12. पंथ निरपेक्ष राज्य से आशय है
(अ) धर्म का सम्मान करना
(ब) राज्य का धर्मविहीन होना
(स) धार्मिक मामलों में तटस्थ रहना
(द) इसमें से कोई नहीं।
Answer: (द) इसमें से कोई नहीं
In simple words: पंथनिरपेक्ष राज्य का मतलब है कि सरकार सभी धर्मों को समान मानती है, खुद का कोई धर्म नहीं रखती और धार्मिक मामलों में किसी का पक्ष नहीं लेती. ऊपर दिए गए विकल्पों में से कोई भी इस पूरी बात को ठीक से नहीं बताता.

🎯 Exam Tip: पंथनिरपेक्षता एक जटिल अवधारणा है जिसमें धर्म का सम्मान, राज्य की तटस्थता और धर्म के आधार पर भेदभाव न करना, सभी शामिल हैं.

 

Question 13. संविधान में विश्व शांति व सुरक्षा सम्बन्धी प्रावधान किस अध्याय में हैं?
Answer: संविधान में विश्व शांति व सुरक्षा संबंधी प्रावधान नीति निर्देशक तत्वों (भाग 4) में दिए गए हैं, विशेष रूप से अनुच्छेद 51 में.
In simple words: संविधान के चौथे भाग में ऐसे नियम हैं जो बताते हैं कि भारत कैसे दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में मदद करेगा.

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 51 अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंध बनाए रखने, और अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करने का निर्देश देता है.

 

Question 14. संविधान को वह प्रावधान जो राष्ट्र की एकता का परिचायक है
(अ) एकल नागरिकता
(ब) मूल कर्त्तव्य
(स) नीति निर्देशक तत्व
(द) मूल अधिकार
Answer: (अ) एकल नागरिकता
In simple words: भारत में लोगों को सिर्फ एक ही देश की नागरिकता मिलती है, राज्यों की अलग से नहीं. यह दिखाता है कि हम सब एक देश के नागरिक हैं, जो देश की एकता को मजबूत करता है.

🎯 Exam Tip: एकल नागरिकता का प्रावधान भारत को एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र बनाने में मदद करता है, जिससे क्षेत्रीय या राज्य-स्तर पर विभाजन की भावना कम होती है.

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किस देश के संविधान को जीवंत संविधान का दर्जा दिया गया है?
Answer: भारत के संविधान को जीवंत संविधान का दर्जा दिया गया है. इसका मतलब है कि यह समय के साथ बदलती जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता रखता है, जिससे यह हमेशा प्रासंगिक बना रहता है.
In simple words: भारत के संविधान को 'जीवंत संविधान' कहा जाता है, क्योंकि यह समय के साथ बदलता रहता है.

🎯 Exam Tip: 'जीवंत संविधान' का अर्थ है कि इसमें संशोधन की प्रक्रिया मौजूद है, जिससे यह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलावों के साथ सामंजस्य बिठा सकता है.

 

Question 2. भारतीय संविधान की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: भारतीय संविधान की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **विश्व का सबसे विशाल संविधान:** यह दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसमें कई विस्तृत प्रावधान शामिल हैं.
2. **संसदीय शासन व्यवस्था:** भारत में ब्रिटेन की तरह संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है, जहाँ राष्ट्रपति नाममात्र के मुखिया होते हैं और प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी शक्ति रखते हैं.
In simple words: भारत का संविधान दुनिया में सबसे बड़ा है और यहाँ की सरकार संसद के नियमों से चलती है.

🎯 Exam Tip: किसी भी दो विशेषताओं को विस्तार से समझाते समय, उनके मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से उजागर करें.

 

Question 3. भारतीय संविधान द्वारा अंतिम शक्ति किसके हाथ में निहित की गयी है?
Answer: भारतीय संविधान द्वारा अंतिम शक्ति भारतीय जनता के हाथ में निहित की गई है. संविधान की प्रस्तावना 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है, जो इस बात पर जोर देती है कि जनता ही सर्वोच्च है और सरकार उसकी इच्छा पर आधारित है.
In simple words: भारत में सबसे ज़्यादा ताकत लोगों के पास है, क्योंकि वे ही अपनी सरकार चुनते हैं.

🎯 Exam Tip: 'जनता की संप्रभुता' भारतीय संविधान का एक मूल सिद्धांत है, जिसका अर्थ है कि सत्ता का स्रोत जनता है, न कि कोई बाहरी शक्ति या शासक.

 

Question 4. प्रस्तावना को किस विद्वान ने संविधान की राजनीतिक कुंडली कहा है?
Answer: डॉ. के. एम. मुंशी ने प्रस्तावना को संविधान की 'राजनीतिक कुंडली' कहा है. उनका मानना था कि प्रस्तावना संविधान के आदर्शों और लक्ष्यों का एक प्रकार का भविष्यफल है, जो उसके मूल दर्शन को दर्शाता है.
In simple words: डॉ. के. एम. मुंशी नाम के एक विद्वान ने प्रस्तावना को संविधान की 'राजनीतिक कुंडली' कहा था.

🎯 Exam Tip: यह कथन प्रस्तावना के महत्व को रेखांकित करता है कि यह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र के राजनीतिक भविष्य का एक दार्शनिक मार्गदर्शक भी है.

 

Question 6. 101वाँ संवैधानिक संशोधन किससे संबंधित है?
Answer: संविधान का 101वाँ संशोधन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित है। इस संशोधन ने देश भर में एक समान अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू की।
In simple words: 101वाँ संविधान संशोधन जीएसटी से जुड़ा है, जो एक प्रकार का टैक्स है।

🎯 Exam Tip: संवैधानिक संशोधनों के क्रमांक और उनके मुख्य विषय को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. विश्व का सबसे विशाल संविधान किस देश का है?
Answer: विश्व का सबसे विशाल संविधान भारत का है। इसमें बहुत सारे अनुच्छेद, भाग और अनुसूचियाँ हैं, जिससे यह बहुत विस्तृत बन जाता है।
In simple words: भारत के संविधान में बहुत सारी बातें लिखी हैं, इसलिए यह दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है।

🎯 Exam Tip: भारत के संविधान की विशालता के मुख्य कारण जैसे विविधता और संघवाद को समझें।

 

Question 8. दक्षिण अफ्रीका के संविधान में कितने अनुच्छेद हैं।
Answer: दक्षिण अफ्रीका के संविधान में 153 अनुच्छेद हैं। यह संख्या अन्य प्रमुख देशों के संविधानों से अलग है।
In simple words: दक्षिण अफ्रीका के संविधान में कुल 153 कानून (अनुच्छेद) हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न देशों के संविधानों में अनुच्छेदों की संख्या की तुलना करके उनकी संरचना को समझें।

 

Question 9. संविधान में नागरिकों को कुल कितने मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं?
Answer: संविधान में नागरिकों को कुल छः मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं। ये अधिकार नागरिकों को जीवन की स्वतंत्रता और सुरक्षा देते हैं।
In simple words: भारत के संविधान में लोगों को 6 खास अधिकार मिले हैं।

🎯 Exam Tip: भारत के संविधान में शुरू में 7 मूल अधिकार थे, लेकिन संपत्ति के अधिकार को बाद में हटा दिया गया, जिससे अब 6 बचे हैं।

 

Question 10. संविधान द्वारा प्रदत्त किन्हीं दो मौलिक अधिकारों के नाम लिखिए।
Answer: संविधान द्वारा प्रदत्त किन्हीं दो मौलिक अधिकार हैं:
1. समता का अधिकार,
2. शोषण के विरुद्ध अधिकार। ये अधिकार नागरिकों की समानता और न्याय सुनिश्चित करते हैं।
In simple words: दो खास अधिकार हैं: सबको बराबर मानना और किसी का शोषण न करना।

🎯 Exam Tip: सभी मौलिक अधिकारों के नाम और उनके मुख्य उद्देश्यों को याद रखें।

 

Question 11. वर्तमान में मूल कर्तव्यों की संख्या कितनी है?
Answer: वर्तमान में मूल कर्तव्यों की संख्या ग्यारह है। ये कर्तव्य नागरिकों को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ याद दिलाते हैं।
In simple words: अभी भारत के लोगों के 11 मूल कर्तव्य हैं।

🎯 Exam Tip: मूल कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, और बाद में एक और कर्तव्य 86वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया।

 

Question 13. किस संविधान संशोधन द्वारा 21 वर्ष की आयु को घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया?
Answer: संविधान में 61वें संशोधन द्वारा मतदान की आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। यह संशोधन युवाओं को देश की राजनीति में अधिक भागीदारी देने के लिए किया गया था।
In simple words: 61वें संविधान संशोधन से वोट देने की उम्र 21 से घटाकर 18 साल कर दी गई।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि 61वां संशोधन राजीव गांधी सरकार के समय 1989 में हुआ था।

 

Question 14. संविधान में संघ शब्द के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता है?
Answer: संविधान में 'संघ' शब्द के लिए 'union of states' शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसका मतलब है कि भारत राज्यों का एक संघ है और कोई भी राज्य इससे अलग नहीं हो सकता।
In simple words: संविधान में 'संघ' की जगह 'राज्यों का संघ' शब्द इस्तेमाल होता है।

🎯 Exam Tip: 'Union of states' शब्द भारत की अखंडता और राज्यों के संघ से अविभाज्य संबंध पर जोर देता है।

 

Question 15. अवशिष्ट शक्तियाँ किसके पास होती हैं?
Answer: अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास होती हैं। इसका मतलब है कि जो विषय संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में नहीं आते, उन पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार का होता है।
In simple words: वे शक्तियाँ जो किसी सूची में नहीं हैं, केंद्र सरकार के पास होती हैं।

🎯 Exam Tip: अवशिष्ट शक्तियों का यह प्रावधान केंद्र को मजबूत बनाता है, जो भारतीय संघीय व्यवस्था की एक विशेषता है।

 

Question 16. भारतीय संविधान में संशोधन विधि किस अनुच्छेद में दी गई है?
Answer: भारतीय संविधान में संशोधन विधि अनुच्छेद 368 में दी गई है। यह अनुच्छेद संविधान में बदलाव करने की प्रक्रिया बताता है ताकि समय के साथ संविधान को प्रासंगिक रखा जा सके।
In simple words: संविधान में बदलाव करने का तरीका अनुच्छेद 368 में बताया गया है।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 368 संविधान को कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण बनाता है, जिससे उसमें आसानी से बदलाव नहीं किए जा सकते, पर जरूरत पड़ने पर किए भी जा सकते हैं।

 

Question 17. भारतीय संविधान में कठोरता व लचीलेपन को किन देशों के संविधान से लिया गया है?
Answer: भारतीय संविधान में कठोरता को संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से और लचीलेपन को ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है। यह मिश्रण भारतीय संविधान को विशेष बनाता है, ताकि वह स्थिर भी रहे और बदलती जरूरतों के हिसाब से ढल भी सके।
In simple words: कठोरता अमेरिका से और लचीलापन ब्रिटेन से लिया गया है।

🎯 Exam Tip: कठोरता और लचीलेपन का संतुलन भारतीय संविधान की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जिससे वह स्थिर और गतिशील दोनों बना रहता है।

 

Question 18. “भारतीय संविधान अधिक कठोर तथा अधिक लचीले के मध्य एक अच्छा संतुलन स्थापित करता है।" यह किस विद्वान का कथन है?
Answer: यह कथन डॉ. ह्वीयर का है। उन्होंने भारतीय संविधान की अनोखी प्रकृति को पहचाना जो इसे बहुत मजबूत बनाती है।
In simple words: डॉ. ह्वीयर ने कहा था कि भारत का संविधान न ज्यादा कठोर है और न ज्यादा लचीला, बल्कि दोनों का अच्छा मेल है।

🎯 Exam Tip: संविधान से जुड़े महत्वपूर्ण विचारकों और उनके कथनों को याद रखना उत्तरों को अधिक प्रभावशाली बनाता है।

 

Question 19. हमारे संविधान में किसे सर्वोच्च स्थान प्राप्त है?
Answer: हमारे संविधान में संसद को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। संसद भारतीय लोकतंत्र का मुख्य स्तंभ है, जहाँ देश के लिए कानून बनाए जाते हैं।
In simple words: हमारे संविधान में संसद को सबसे ऊपर माना गया है।

🎯 Exam Tip: संसद की सर्वोच्चता का अर्थ है कि वह कानूनों का निर्माण कर सकती है, लेकिन न्यायिक समीक्षा द्वारा उसकी शक्तियों को सीमित किया जा सकता है।

 

Question 21. संविधान के किस भाग में आपातकालीन उपबन्धों का उल्लेख किया गया है?
Answer: संविधान के भाग -18 में आपातकालीन उपबन्धों का उल्लेख किया गया है। ये उपबंध देश की सुरक्षा और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए राष्ट्रपति को विशेष शक्तियाँ देते हैं।
In simple words: आपातकाल से जुड़ी बातें संविधान के 18वें भाग में लिखी हैं।

🎯 Exam Tip: आपातकालीन प्रावधानों में मुख्य रूप से अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल), 356 (राज्य आपातकाल), और 360 (वित्तीय आपातकाल) शामिल हैं।

 

Question 22. भारतीय संविधान द्वारा किस प्रकार के शासन की व्यवस्था की गई है?
Answer: भारतीय संविधान द्वारा संघात्मक शासन की व्यवस्था की गई है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बंटवारा होता है।
In simple words: भारत में केंद्र और राज्यों की सरकारें मिलकर काम करती हैं, इसे संघात्मक शासन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: संघात्मक शासन के बावजूद, भारतीय संविधान में कुछ एकात्मक विशेषताएँ भी हैं जो केंद्र को मजबूत बनाती हैं।

 

Question 23. भारत में किस प्रकार की नागरिकता का प्रावधान है।
Answer: भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति केवल भारत का नागरिक होता है, न कि किसी विशेष राज्य का।
In simple words: भारत में सभी लोग केवल एक ही नागरिकता रखते हैं, जो कि भारतीय नागरिकता है।

🎯 Exam Tip: एकल नागरिकता देश की एकता और अखंडता को बढ़ावा देती है, क्योंकि यह क्षेत्रीय भेदों को कम करती है।

 

Question 24. अनुसूचित जातियों के आरक्षण की व्यवस्था किस अनुच्छेद में की गई है?
Answer: अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था अनुच्छेद 330 में की गई है। यह अनुच्छेद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करता है।
In simple words: अनुसूचित जातियों को आरक्षण अनुच्छेद 330 के तहत मिलता है।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 330 और 332 क्रमशः लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित हैं।

 

Question 25. अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सरकारी (केन्द्र) सेवाओं में कितने प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है?
Answer: अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केन्द्र सरकार की सेवाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है। यह आरक्षण सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को समान अवसर देने के लिए है।
In simple words: केंद्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता है।

🎯 Exam Tip: इस आरक्षण का प्रावधान मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया गया था और यह सामाजिक न्याय के उद्देश्यों को पूरा करता है।

 

Question 26. 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में कौन - से शब्द जोड़े गए हैं?
Answer: 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में 'समाजवाद', 'पंथनिरपेक्षता' और 'अखण्डता' शब्द जोड़े गए हैं। इन शब्दों ने भारतीय संविधान के मूल ढांचे को और मजबूत किया।
In simple words: 42वें संशोधन से संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवाद', 'धर्मनिरपेक्षता' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।

🎯 Exam Tip: 42वें संविधान संशोधन को 'लघु संविधान' भी कहा जाता है क्योंकि इसने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए थे।

 

Question 27. व्यवस्थापिका के प्रति मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व भारतीय संविधान की किस विशेषता को प्रदर्शित करता है।
Answer: व्यवस्थापिका के प्रति मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व भारतीय संविधान की संसदीय शासन व्यवस्था को प्रदर्शित करता है। इसका अर्थ है कि मंत्रिपरिषद तब तक ही सत्ता में रहती है जब तक उसे लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है।
In simple words: जब मंत्री एक साथ मिलकर काम करते हैं और संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं, तो यह संसदीय शासन दिखाता है।

🎯 Exam Tip: सामूहिक उत्तरदायित्व यह सुनिश्चित करता है कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह बनी रहे और एक टीम के रूप में कार्य करे।

 

Question 29. भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था को क्यों अपनाया गया है?
Answer: समाज में आर्थिक विषमता को दूर करने के लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया है। इस व्यवस्था में सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों मिलकर काम करते हैं, जिससे विकास और समानता दोनों हासिल हो सकें।
In simple words: देश में अमीर-गरीब का अंतर कम करने के लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई गई।

🎯 Exam Tip: मिश्रित अर्थव्यवस्था पूंजीवादी और समाजवादी दोनों प्रणालियों के गुणों को मिलाकर बनती है, जिससे आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण दोनों का लक्ष्य रखा जाता है।

 

Question 30. बंधुत्व का आदर्श कितने आधारों पर टिका है?
Answer: बंधुत्व का आदर्श दो आधारों-राष्ट्र की एकता व व्यक्ति की गरिमा पर टिका है। बंधुत्व की भावना लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है और राष्ट्र को मजबूत बनाती है।
In simple words: भाईचारे का विचार देश की एकता और हर व्यक्ति के सम्मान पर टिका है।

🎯 Exam Tip: बंधुत्व भारतीय संविधान की प्रस्तावना के चार मुख्य स्तंभों (न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व) में से एक है।

 

Question 31. कार्यपालिका के आदेशों को कौन अवैध घोषित कर सकता है?
Answer: सर्वोच्च न्यायालय कार्यपालिका के आदेशों को अवैध घोषित कर सकता है। यदि कार्यपालिका के आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं, तो न्यायपालिका उन्हें रद्द कर सकती है।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय सरकार के गलत आदेशों को रद्द कर सकता है।

🎯 Exam Tip: न्यायिक समीक्षा की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक बनाती है और सरकार की मनमानी पर रोक लगाती है।

 

Question 32. राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है।
Answer: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। राज्यपाल राज्य में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
In simple words: राज्यपाल को राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, लेकिन वास्तविक शक्तियाँ मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 Laghuttratmak Prashn

 

Question 1. भारतीय संविधान अन्य देशों के संविधानों से श्रेष्ठ है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान ने दुनिया की लगभग सभी शासन प्रणालियों और संविधानों के अच्छे गुणों को अपनाया है ताकि इसे सबसे बेहतर बनाया जा सके। हमारे संविधान बनाने वालों ने दुनिया के सभी मुख्य संविधानों का अध्ययन किया और उनके उपयोगी तत्वों को अपनी जरूरतों के अनुसार अपनाया, साथ ही उनके दोषों से बचने की कोशिश भी की। भारत किसी दूसरे देश या किसी बाहरी नियंत्रण से पूरी तरह आज़ाद है और अपने अंदरूनी मामलों में किसी की दखलंदाजी स्वीकार नहीं करता। भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था अपनाई गई है, जिसका मतलब है कि शासन चलाने की सारी शक्ति जनता के हाथ में है। जनता अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए करती है। इसके लिए संविधान द्वारा नागरिकों को वयस्क मताधिकार दिया गया है। भारत की यह व्यवस्था इसे विश्व के सबसे सफल लोकतंत्रों में से एक बनाती है।
In simple words: भारतीय संविधान कई देशों के अच्छे नियमों को मिलाकर बनाया गया है, जिससे यह बहुत मजबूत और बेहतर है। यह पूरी तरह से स्वतंत्र है और जनता द्वारा शासित होता है।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में भारतीय संविधान की 'उधार ली गई विशेषताओं' और 'लोकतांत्रिक स्वरूप' को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. "भारत का संविधान विश्व का सबसे विशाल संविधान है।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत का संविधान विश्व का सबसे विशाल संविधान है। जहां संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में 07 अनुच्छेद, कनाडा के संविधान में 147 अनुच्छेद, ऑस्ट्रेलिया के संविधान में 128 अनुच्छेद और दक्षिण अफ्रीका के संविधान में 153 अनुच्छेद हैं, वहीं हमारा संविधान बहुत बड़ा और विस्तृत है। इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 12 अनुसूचियां और 05 परिशिष्ट हैं। इसमें अब तक 101 से अधिक संशोधन हो चुके हैं और संशोधन की यह प्रक्रिया जरूरत पड़ने पर आगे भी जारी रहेगी। इसी कारण भी इसका स्वरूप विशाल हो जाता है। हमारा संविधान संघात्मक है। इसमें संघ और राज्यों के बीच संबंधों का बहुत व्यापक वर्णन किया गया है। संविधान के एक अध्याय में तो राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का ही उल्लेख है जो ज्यादातर देशों के संविधान में नहीं है। संविधान की इसी विशालता को देखकर हरिविष्णु कामथ ने कहा था कि हमें इस बात का गर्व है कि हमारा संविधान विश्व का सबसे विशाल संविधान है। यह इसकी व्यापकता और विस्तृत दायरे को दर्शाता है।
In simple words: भारत का संविधान दुनिया में सबसे बड़ा है क्योंकि इसमें बहुत सारे अनुच्छेद, भाग और अनुसूचियां हैं। इसमें कई संशोधन भी हुए हैं, और यह केंद्र-राज्य संबंधों का भी विस्तार से वर्णन करता है।

🎯 Exam Tip: संविधान की विशालता के पीछे भारत की भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता भी एक प्रमुख कारण है, जिसे कवर करना आवश्यक था।

 

Question 4. भारत में 'संसदीय शासन व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत में संसदीय शासन व्यवस्था में कार्यपालिका का दोहरा रूप पाया जाता है। भारत में राष्ट्रपति केवल संवैधानिक अध्यक्ष के रूप में शासक हैं, हालांकि संविधान द्वारा कार्यपालिका संबंधी सभी शक्तियां राष्ट्रपति में निहित हैं, लेकिन वे उनका उपयोग मंत्रिमंडल के माध्यम से ही करते हैं। प्रधानमंत्री संसद के निचले सदन में बहुमत दल का नेता होता है और वे अपने मंत्रिमंडल का गठन संसद के दोनों सदनों में से करते हैं। मंत्रिमंडल के सभी सदस्य सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत पर अपना काम करते हैं और व्यवस्थापिका के प्रति भी उनका उत्तरदायित्व सामूहिक होता है। संसद का विश्वास खत्म होने पर मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ता है। इस व्यवस्था में प्रधानमंत्री ही मंत्रिमंडल का नेतृत्व करता है। भारत में संसदीय व्यवस्था को केंद्र के साथ राज्यों में भी अपनाया गया है, जहां राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होता है। यह व्यवस्था जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
In simple words: भारत में संसदीय शासन में राष्ट्रपति केवल नाममात्र का मुखिया होता है, जबकि प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल असली काम करते हैं। वे संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं।

🎯 Exam Tip: संसदीय शासन प्रणाली में कार्यपालिका और विधायिका के बीच घनिष्ठ संबंध होता है, और मंत्रिपरिषद विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।

 

Question 6. भारतीय संविधान में नीति निर्देशक तत्वों को क्यों स्थान दिया गया है?
Answer: वर्तमान समय में राज्य को एक लोक कल्याणकारी राज्य के रूप में स्वीकार किया जाता है। हमारे देश के संविधान निर्माताओं को इस बात का अच्छी तरह से पता था कि भारत में आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विषमताएं बहुत गंभीर रूप से मौजूद हैं। यदि ये विषमताएं बनी रहतीं, तो सामान्य नागरिकों के लिए अधिकारों का कोई मूल्य नहीं होता। संविधान द्वारा ऐसी व्यवस्था करना जरूरी था जिससे सरकार चाहे किसी भी दल की हो, व्यक्ति की मूलभूत जरूरतों को पूरा करना सभी का समान उद्देश्य रहे। राज्य के नीति-निर्देशक तत्व इसी उद्देश्य को पूरा करने में एक कोशिश के रूप में देखे जाते हैं। आयरलैंड के संविधान से प्रेरणा लेकर हमारे संविधान के भाग-4 में नीति-निर्देशक तत्वों की व्याख्या की गई है, जो सरकारों को जनता के कल्याण के लिए दिशा-निर्देश देते हैं।
In simple words: नीति निर्देशक तत्व इसलिए रखे गए ताकि सरकारें सभी लोगों के लिए अच्छा काम करें और देश की गरीबी-अमीरी जैसी असमानताओं को खत्म कर सकें।

🎯 Exam Tip: नीति निर्देशक तत्व न्याय योग्य नहीं होते, यानी इन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन ये शासन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।

 

Question 7. भारतीय संविधान में एकात्मक शासन के कौन-कौन से तत्व पाए जाते हैं?
Answer: संविधान निर्माताओं के सामने देश की एकता और अखंडता की सबसे बड़ी समस्या थी। इसलिए उन्होंने संघीय सरकार को शक्तिशाली बनाया। हमारे संविधान में निम्नलिखित कारक एकात्मक शासन से संबंधित हैं। भारत एक संघात्मक राज्य है। संविधान में 'संघ' शब्द के स्थान पर 'यूनियन ऑफ स्टेट्स' शब्द का प्रयोग किया गया है। संविधान के पहले अनुच्छेद में ही कहा गया है कि भारत राज्यों का एकक होगा, जिसे आमतौर पर राज्यों का संघ भी कहा जाता है। भारतीय संविधान में संघात्मक शासन के निम्नलिखित तत्व पाए जाते हैं:
1. भारत में सम्पूर्ण देश के लिए एक ही संविधान है।
2. अवशिष्ट विषयों पर कानून निर्माण का अधिकार संघीय सरकार को है।
3. केंद्र व राज्यों के मध्य शक्तियों का विभाजन
4. निष्पक्ष व स्वतंत्र न्यायपालिका,
5. संविधान की सर्वोच्चता
6. एकल नागरिकता,
7. केन्द्रीय व्यवस्थापिका में राज्यों का सदन – राज्यसभा,
8. राज्यपाल का पद,
9. एकात्मकता का प्रभुत्व। भारतीय संविधान में ये तत्व केंद्र सरकार को अधिक शक्ति देते हैं।
In simple words: भारतीय संविधान में केंद्र सरकार को ज्यादा ताकत देने वाले कई नियम हैं, जैसे पूरे देश के लिए एक संविधान, बची हुई शक्तियां केंद्र के पास होना, और राज्यपाल का पद।

🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन के इन तत्वों के बावजूद, भारत का ढांचा मूल रूप से संघीय है, जो विविधता को समायोजित करता है।

 

Question 9. भारत में न्यायिक स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कौन-कौन से प्रावधान किए गए हैं?
अथवा
भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारत में न्यायिक स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निम्न व्यवस्थाएं की गई हैं:
1. भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती है। कदाचार में लिप्त पाए जाने पर उन्हें संसद में महाभियोग द्वारा ही पद से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया न्यायाधीशों को सुरक्षा देती है।
2. न्यायाधीशों को पर्याप्त वेतन एवं वेतन संबंधी संरक्षण प्राप्त है। इससे वे बिना किसी दबाव के काम कर सकते हैं।
3. कार्यपालिका के आदेश एवं व्यवस्थापिका के कानून यदि सांविधानिक प्रावधानों के प्रतिकूल हैं तो न्यायालय उन्हें अवैध घोषित कर सकता है। यह शक्ति न्यायिक पुनरावलोकन कहलाती है।
4. नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 32 के अंतर्गत पुनरावलोकन द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण, अधिकार पृच्छा जैसे लेखों को न्यायालय जारी कर सकता है। यह नागरिकों को न्याय पाने में मदद करता है।
5. न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय कार्यपालिका के उन आदेशों एवं संसद द्वारा निर्मित उन कानूनों को अवैध घोषित कर सकता है, जो संविधान की भावना के अनुरूप न हों।
6. पिछले कुछ वर्षों में न्यायिक सक्रियता के कारण न्यायपालिका की शक्ति में पर्याप्त वृद्धि हुई है।
In simple words: भारत में न्यायाधीशों को राष्ट्रपति चुनते हैं, उन्हें अच्छी सैलरी मिलती है और वे सरकार के गलत कामों को रोक सकते हैं। ये सभी बातें न्यायपालिका को स्वतंत्र बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: न्यायिक पुनरावलोकन और न्यायिक सक्रियता जैसे शब्द स्वतंत्र न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 11. संविधान में अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्गों ने कल्याण के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?
अथवा
संविधान में अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्गों की सुरक्षा के लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है?
Answer: अल्पसंख्यक / पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान/व्यवस्थाएं की गई हैं:
1. संविधान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक, भाषाई तथा सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
2. संविधान द्वारा अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के क्षेत्रों के नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं, विधानमंडलों और अन्य क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षण प्रदान किया गया है।
3. संविधान के भाग 16 के अनुच्छेद 330 से लेकर 342 तक विशेष प्रावधान किए गए हैं।
4. संविधान के अनुच्छेद 330 व 332 के तहत अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों को लोकसभा व विधानसभाओं में आरक्षण प्रदान किया गया है। यह व्यवस्था 25 जनवरी 2020 तक बढ़ा दी गई है।
5. अनुच्छेद 335 में अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
6. अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केंद्र सरकार की सेवाओं में सितंबर 1993 से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। ये प्रावधान इन वर्गों को समाज में आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करते हैं।
In simple words: संविधान ने अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों के लिए धर्म, भाषा और संस्कृति की रक्षा के साथ-साथ नौकरियों और चुनावों में आरक्षण की व्यवस्था की है।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय और समानता स्थापित करना है, न कि केवल विशेष सुविधा देना।

 

Question 12. भारतीय संविधान की प्रस्तावना / उद्देशिका के विवरणात्मक भाग को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान की प्रस्तावना/उद्देशिका का विवरणात्मक भाग, इसके मुख्य बिंदुओं के अंतर्गत स्पष्ट किया गया है:
1. सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक न्याय – सामाजिक न्याय का अर्थ है कि सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समानता प्राप्त हो। आर्थिक न्याय का अर्थ है कि राज्य अपनी नीति का संचालन इस प्रकार करे कि सभी नागरिकों को आजीविका के साधन प्राप्त करने का अधिकार हो। राजनीतिक न्याय का अभिप्राय है कि सभी नागरिकों को राजनीतिक गतिविधियों में समान और स्वतंत्र रूप से भाग लेने का अवसर प्राप्त हो। न्याय लोगों के जीवन में संतुलन लाता है।
2. स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व – भारत के संविधान में नागरिकों को विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म व उपासना की स्वतंत्रता प्राप्त होगी एवं बंधुत्व की भावना को सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है।
4. संविधान की प्रस्तावना में देश में सभी नागरिकों को न्याय का आश्वासन दिया गया है। न्याय को स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व की अपेक्षा अधिक उच्च स्थान प्रदान किया गया है।
5. प्रस्तावना में न्याय को तीन रूपों में परिभाषित किया गया है – सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय एवं राजनीतिक न्याय। सामाजिक और आर्थिक न्याय को राजनीतिक न्याय से उच्चतर स्थान प्रदान किया गया है।
6. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित स्वतंत्रता शब्द का अभिप्राय केवल नियंत्रण या आधिपत्य का अभाव ही नहीं अपितु यह विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म एवं उपासना की स्वतंत्रता के अधिकार की सकारात्मक संकल्पना है।
7. समानता से तात्पर्य है कि देश के सभी नागरिक कानून की नजर में समान हैं तथा उन्हें कानून द्वारा समान संरक्षण प्राप्त है। सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के चुनाव प्रक्रिया व शासन की प्रक्रिया में भाग लेने हेतु समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं।
8. प्रस्तावना में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता की भावना बढ़ाने के लिए संकल्प लिया गया है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रस्तावना में संविधान के मूलभूत आदर्शों को दर्शाया गया है। यह भारतीय संविधान का सार है।
3. सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय-प्रस्तावना के अंतर्गत इन शब्दों के आधार पर संविधान के लक्ष्य का वर्णन किया गया है:
(i). सामाजिक न्याय का अर्थ है कि सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समानता प्राप्त है। व्यक्तियों के मध्य जाति, धर्म, वर्ग, लिंग, नस्ल, संपत्ति या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
(ii). आर्थिक न्याय का अर्थ है कि समाज में अधिक अमीरी और गरीबी न हो। वर्ग भेद न्यूनतम हो एवं प्रत्येक व्यक्ति की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति की जाये तथा पुरुष व महिलाओं को समान कार्यों के लिए समान वेतन मिले।
(iii) राजनीतिक न्याय का अर्थ है कि सभी नागरिकों को राजनीतिक क्षेत्र में समान और स्वतंत्र रूप से भाग लेने का अवसर हो। भारतीय संविधान संवैधानिक उपचारों द्वारा राजनीतिक न्याय के आदर्श को साकार करता है।
4. स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व-
(i) स्वतंत्रता – भारतीय संविधान में नागरिकों को विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
(ii) समानता – देश के सभी नागरिकों को प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्रदान की गई है।
(iii) बंधुत्व – प्रस्तावना में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता तथा अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता की भावना बढ़ाने के लिए संकल्प लिया गया है।
5. व्यक्ति की गरिमा – संविधान के अनुच्छेद 17 में दिए गए मूल अधिकार का उद्देश्य अस्पृश्यता के आचरण का अंत करना है, जो मानव की गरिमा के विरुद्ध है। इसी प्रकार व्यक्ति की गरिमा को बनाए रखने के लिए अनुच्छेद 32 में भी पर्याप्त प्रावधान हैं।
6. राष्ट्र की एकता एवं अखंडता-हमारे संविधान निर्माता यह चाहते थे कि हमारे नागरिक क्षेत्रीयता, प्रांतीयवाद, भाषावाद व सांप्रदायिकता को महत्व न देकर देश की एकता के भाव को अपनाएं। 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में “अखंडता” शब्द को सम्मिलित किया गया है। इसका मूल भारत की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करना है। एकता एवं अखंडता के बिना हम लोकतंत्र या राष्ट्र की स्वाधीनता तथा नागरिकों के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकते हैं। इसलिए अनुच्छेद 51 (क) में सभी नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें।
In simple words: संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे जैसे महत्वपूर्ण आदर्श बताए गए हैं। यह हर नागरिक के सम्मान और देश की एकता पर जोर देती है।

🎯 Exam Tip: प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है, और इसके प्रत्येक शब्द का गहरा अर्थ और महत्व है जिसे समझना आवश्यक है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 Anya Mahattvapurn Prashnottar

RBSE Class 12 Political Science Chapter 17 Bahuchayanatmak Prashn

 

Question 1. भारतीय संविधान के किस भाग को डॉ. के. एम. मुंशी ने संविधान की राजनीतिक कुंडली कहा है?
(अ) प्रस्तावना
(ब) मूल अधिकार
(स) नीति निर्देशक तत्व
(द) मूल कर्तव्य
Answer: (अ) प्रस्तावना
In simple words: डॉ. के. एम. मुंशी ने प्रस्तावना को संविधान की राजनीतिक कुंडली कहा है क्योंकि यह संविधान के मुख्य विचारों को बताती है।

🎯 Exam Tip: प्रस्तावना को भारतीय संविधान का सार माना जाता है, क्योंकि यह इसके उद्देश्यों और दर्शन को संक्षेप में प्रस्तुत करती है।

 

Question 2. भारतीय संविधान के कितने भाग हैं
(अ) 20
(ब)つつ
Answer: (ब)つつ
In simple words: भारतीय संविधान को कुल "つつ" हिस्सों में बांटा गया है।

🎯 Exam Tip: मूल संविधान में 22 भाग थे, लेकिन संशोधनों के बाद उनकी संख्या बढ़ गई है।

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