RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 16 सामाजिक और आर्थिक न्याय एवं महिला आरक्षण

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Detailed Chapter 16 सामाजिक और आर्थिक न्याय एवं महिला आरक्षण RBSE Solutions for Class 12 Political Science

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Class 12 Political Science Chapter 16 सामाजिक और आर्थिक न्याय एवं महिला आरक्षण RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 सामाजिक और आर्थिक न्याय एवं महिला आरक्षण

RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. सामाजिक व आर्थिक न्याय के सम्बन्ध में संविधान के किस भाग में व्यवस्था की गई है?
(अ) भाग एक
(ब) भाग दो
(स) भाग तीन
(द) भाग चार
Answer: (द) भाग चार
In simple words: भारतीय संविधान का भाग चार सामाजिक और आर्थिक न्याय से जुड़े प्रावधानों के बारे में बताता है।

🎯 Exam Tip: संविधान के विभिन्न भागों और उनसे संबंधित प्रमुख प्रावधानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर नीति निर्देशक सिद्धांतों से संबंधित।

 

Question 2. इनमें से कौन - सा कथन सामाजिक न्याय की अवधारणा से मेल नहीं खाता है?
(अ) यह स्वतन्त्रता, समानता व न्याय पर बल देता है।
(ब) यह मानवाधिकारों का पोषण करता है।
Answer: (स) पंचायती राज व्यवस्था
In simple words: सामाजिक न्याय लोगों को आज़ादी, बराबरी और सही व्यवहार दिलाने में मदद करता है। यह इंसानी हकों का भी ध्यान रखता है, लेकिन पंचायती राज व्यवस्था सामाजिक न्याय की सीधी अवधारणा का हिस्सा नहीं है, बल्कि स्थानीय शासन का एक तरीका है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय की मुख्य विशेषताओं को समझें। यह अक्सर समानता, स्वतंत्रता और अधिकारों से जुड़ा होता है।

 

Question 4. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद अवसर की समानता प्रदान करता है?
(अ) अनुच्छेद 15
(ब) अनुच्छेद 16
(स) अनुच्छेद 20
(द) अनुच्छेद 32
Answer: (ब) अनुच्छेद 16
In simple words: अनुच्छेद 16 यह सुनिश्चित करता है कि सभी लोगों को सरकारी नौकरियों और अवसरों में समान अधिकार मिले, किसी के साथ कोई भेदभाव न हो।

🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों और उनसे संबंधित अधिकारों या प्रावधानों को याद रखें।

 

Question 5. निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून किस तिथि से प्रभावी हुआ?
(अ) 26 जनवरी 1950
(ब) 4 अगस्त 2009
(स) 1 अप्रैल 2010
(द) 15 अप्रैल 2015
Answer: (स) 1 अप्रैल 2010
In simple words: बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का कानून 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ, जिससे सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिला।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण कानूनों और अधिनियमों की प्रभावी तिथियों को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।

 

Question 6. “भूख से मर रहे व्यक्ति के लिये लोकतन्त्र का कोई महत्व नहीं है।” यह कथन किसका है?
(अ) बीसांक
(ब) पं. नेहरू
(स) लोहिया
(द) अमर्त्य सेन
Answer: (ब) पं. नेहरू
In simple words: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि अगर लोग भूखे मर रहे हैं, तो उनके लिए लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं होता, क्योंकि उनकी सबसे पहली ज़रूरत भोजन है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के प्रसिद्ध उद्धरणों को उनके नाम के साथ याद रखना चाहिए।

 

Question 7. महिला आरक्षण से संबंधित कौन-सा संविधान संशोधन अधिनियम संसद में अवलम्बित है?
(अ) 108 वाँ
(ब) 118 वाँ
(स) 43 वाँ
(द) 74 वाँ
Answer: (अ) 108 वाँ
In simple words: महिला आरक्षण से जुड़ा 108वाँ संविधान संशोधन अधिनियम अभी भी संसद में लंबित है, यानी इसे अभी तक पारित नहीं किया गया है।

🎯 Exam Tip: संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों और उनके संबंधित संशोधन नंबरों को याद रखें।

 

Question 2. युद्ध या क्रान्ति का मुख्य कारण क्या है?
Answer: जिन राज्यों में सामाजिक न्याय की कमी होती है, वहाँ युद्ध या क्रांति का खतरा बना रहता है। जब लोगों को न्याय नहीं मिलता, तो वे विरोध करते हैं, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं.
In simple words: जिन जगहों पर लोगों को सामाजिक न्याय नहीं मिलता, वहाँ अक्सर युद्ध या क्रांति का डर रहता है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक अन्याय के परिणामों पर ध्यान दें और इसे सामाजिक अस्थिरता से कैसे जोड़ा जाता है, इसे स्पष्ट करें।

 

Question 3. भारतीय सामाजिक व्यवस्था के चार वर्ण कौन से थे?
Answer: भारतीय सामाजिक व्यवस्था के चार वर्ण थे- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। यह प्राचीन भारत में समाज को बांटने का एक तरीका था.
In simple words: भारतीय समाज के चार मुख्य वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र थे।

🎯 Exam Tip: भारतीय समाज की प्राचीन संरचना और उसके मुख्य घटकों को याद रखें।

 

Question 4. आर्थिक स्थिति के आधार पर समाज में कितने वर्ग पाये जाते हैं? नाम बताइए।
Answer: आर्थिक स्थिति के आधार पर समाज में दो मुख्य वर्ग पाए जाते हैं: धनी वर्ग (शोषक) और निर्धन वर्ग (शोषित)। धनी वर्ग संसाधनों पर नियंत्रण रखता है, जबकि निर्धन वर्ग अक्सर उनसे वंचित रहता है.
In simple words: आर्थिक रूप से समाज में दो वर्ग होते हैं: अमीर लोग (जो शोषण करते हैं) और गरीब लोग (जिनका शोषण होता है)।

🎯 Exam Tip: आर्थिक असमानता के आधार पर समाज के विभाजन को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

 

Question 5. भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति कौन थीं?
Answer: भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी थीं। वह सन् 2007 से 2012 तक इस पद पर रहीं। उनका कार्यकाल देश के लिए एक महत्वपूर्ण समय था.
In simple words: भारत की पहली महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल थीं, जो 2007 से 2012 तक इस पद पर रहीं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और उनके कार्यकाल को याद रखना चाहिए।

 

Question 6. पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत पद आरक्षित हैं?
Answer: पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत पद आरक्षित हैं। यह आरक्षण महिलाओं को स्थानीय शासन में भागीदारी बढ़ाने के लिए दिया गया है.
In simple words: पंचायती राज में महिलाओं के लिए 33% पद आरक्षित हैं।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज व्यवस्था में महिला आरक्षण के प्रतिशत को याद रखें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सामाजिक न्याय का अर्थ बताइए।
Answer: सामाजिक न्याय का अर्थ है कि समाज के सभी लोगों के बीच समानता और एकता स्थापित होनी चाहिए। इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव न हो और सभी को समान अवसर मिलें.
In simple words: सामाजिक न्याय का मतलब है कि समाज में सभी लोगों को बराबर माना जाए और उनके बीच एकता हो।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय की परिभाषा को सरल शब्दों में व्यक्त करें और उसके मुख्य सिद्धांतों पर प्रकाश डालें।

 

Question 2. आर्थिक न्याय की अवधारणा पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: आर्थिक न्याय का अर्थ है आर्थिक असमानता को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि उसे कम करना। समाज में लोगों की आय और संपत्ति में इतनी ज़्यादा असमानता नहीं होनी चाहिए कि उससे सामाजिक भेदभाव पैदा हो। मार्क्सवादी विचारकों के अनुसार, समाज में हमेशा से दो वर्ग रहे हैं - धनी और निर्धन वर्ग, यानी शोषक और शोषित। इन वर्गों के होने के कारण समाज में आर्थिक न्याय स्थापित नहीं हो सकता। भारतीय शासन का एक बड़ा लक्ष्य आर्थिक न्याय स्थापित करना है। आर्थिक असमानता के कारण ही नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, और आतंकवाद जैसी बुराइयाँ बढ़ी हैं, जो भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं। सामाजिक और राजनीतिक न्याय के लिए आर्थिक न्याय बहुत ज़रूरी है। समाज में धन और संपत्ति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी लोगों की न्यूनतम ज़रूरतें पूरी होनी चाहिए। पं. जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, "भूख से मर रहे व्यक्ति के लिए लोकतंत्र का कोई अर्थ और महत्व नहीं है।" डॉ. राधाकृष्णन ने भी कहा था कि गरीब लोग संविधान पर गर्व नहीं कर सकते अगर उनकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी न हों.
In simple words: आर्थिक न्याय का मतलब है कि पैसे की असमानता को कम किया जाए ताकि किसी को आर्थिक वजह से भेदभाव का सामना न करना पड़े। यह सामाजिक न्याय के लिए बहुत ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: आर्थिक न्याय की अवधारणा को समझाते समय उसके अर्थ, महत्व और भारतीय संदर्भ में उसकी चुनौतियों का उल्लेख करें।

 

Question 3. भारत में जातिगत आधार पर आरक्षण की व्यवस्था क्यों की गई?
Answer: भारत में जातिगत आधार पर आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक न्याय के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए की गई है। सामाजिक न्याय का अर्थ है कि समाज में किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी के साथ समानता का व्यवहार होना चाहिए। लेकिन भारतीय समाज का रूढ़िवादी नज़रिया पहले भेदभावपूर्ण था, जहाँ जातीयता और सांप्रदायिकता सामाजिक न्याय की स्थापना में बड़ी बाधाएँ थीं। महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी, कबीर और महात्मा गांधी जैसे कई समाज सुधारकों ने भारतीय समाज में भेदभाव और ऊँच-नीच के सामाजिक ढांचे को सुधारने की कोशिश की। आज़ादी के बाद, संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक न्याय को एक लक्ष्य बनाया गया। इसके लिए संविधान में कई प्रावधान किए गए, जैसे अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को सरकारी नौकरियों और विधायिका में आरक्षण देना, ताकि उन्हें अन्य वर्गों के बराबर लाया जा सके.
In simple words: भारत में जाति के आधार पर आरक्षण इसलिए दिया गया ताकि सामाजिक न्याय मिले और समाज में लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव को खत्म किया जा सके।

🎯 Exam Tip: जातिगत आरक्षण के ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों को समझाएँ, और यह भी बताएं कि इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय की स्थापना कैसे करना है।

 

Question 4. महिला आरक्षण बिल संसद में पारित नहीं होने का मुख्य कारण क्या है?
Answer: महिला आरक्षण विधेयक को पारित होने के लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के साथ-साथ भारत के आधे राज्यों की विधानसभाओं से भी पारित होना ज़रूरी है। उसके बाद ही इसे अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है। लेकिन, दुर्भाग्य से विभिन्न राजनीतिक दलों के अपने स्वार्थ और हठधर्मिता के कारण यह विधेयक अभी तक पारित नहीं हो सका है। यही वजह है कि महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है, जिससे उनके सशक्तिकरण में देरी हो रही है.
In simple words: महिला आरक्षण बिल संसद में राजनीतिक दलों के स्वार्थ और मतभेदों के कारण पारित नहीं हो पाया, जिससे इसे कानूनी रूप नहीं मिल सका।

🎯 Exam Tip: महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने के कारणों पर ध्यान दें, खासकर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं पर।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. “सामाजिक न्याय की अवधारणा समता मूलक सामाजिक ढाँचे में ही सम्भव है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? सम्पूर्ण अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
Answer: हाँ, यह कथन सही है कि सामाजिक न्याय की अवधारणा समता मूलक सामाजिक ढांचे में ही संभव है। सामाजिक न्याय की अवधारणा इस बात पर आधारित है कि सभी मनुष्यों को समान माना जाए। इसके तहत, सामाजिक समानता के सिद्धांतों के अनुसार नियम और कानून लागू करने का समर्थन किया जाता है। इसका मतलब है कि समाज के सभी लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाए। अगर किसी भी आधार पर किसी व्यक्ति या समूह के साथ भेदभाव होता है, तो वह उस व्यक्ति या समूह के साथ अन्याय होगा, और ऐसे में सामाजिक न्याय की कल्पना नहीं की जा सकती। सामाजिक न्याय की अवधारणा का मुख्य लक्ष्य समतामूलक समाज की स्थापना करना है। भारतीय समाज का पारंपरिक स्वरूप भेदभावपूर्ण असमानता पर आधारित था। जातीयता और सांप्रदायिकता भारत में सामाजिक न्याय की स्थापना में सबसे बड़ी बाधाएँ रही हैं, जो समानता पर आधारित समाज की स्थापना को रोक रही हैं। महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी, कबीर, बाबा रामदेव और महात्मा गांधी जैसे कई समाज सुधारकों ने भारतीय समाज से भेदभाव और ऊँच-नीच को खत्म कर समतामूलक समाज बनाने का प्रयास किया ताकि सामाजिक न्याय स्थापित हो सके। सामाजिक भेदभाव एक प्रकार का सामाजिक अन्याय है जो असंतोष और विद्रोह पैदा करता है। यही कारण है कि भेदभाव या असमानता पर आधारित राज्य अस्थिर साबित हुए हैं। इतिहास भी इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय समाज पहले वर्ण व्यवस्था पर आधारित था, जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जैसे चार वर्ण थे। शूद्रों की स्थिति बहुत खराब थी। धीरे-धीरे वर्ण व्यवस्था जाति व्यवस्था में बदल गई। जाति व्यवस्था की रूढ़िवादिता ने असमानता, अलगाववाद, क्षेत्रवाद और सामाजिक ऊँच-नीच को जन्म दिया, जिसका फायदा विदेशी आक्रमणकारियों ने उठाया। अंग्रेजों ने 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाकर भारत को गुलाम बनाए रखा। आज़ादी के बाद, संविधान निर्माताओं ने सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी और समानता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया। उनका मानना था कि समानता के अधिकार से ही स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। इसी कारण अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को सरकारी नौकरियों और विधायिका में आरक्षण दिया गया ताकि उन्हें अन्य वर्गों के बराबर लाकर सामाजिक न्याय की स्थापना की जा सके.
In simple words: सामाजिक न्याय का मतलब है कि सभी को बराबर माना जाए और भेदभाव न हो। यह तभी संभव है जब समाज में सभी को समान अवसर मिलें। जातिगत भेदभाव और असमानता सामाजिक न्याय के रास्ते में बड़ी रुकावटें थीं, जिन्हें सुधारकों और संविधान ने दूर करने की कोशिश की।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में सामाजिक न्याय की अवधारणा, उसके लक्ष्य, ऐतिहासिक संदर्भ, बाधाएँ, और संवैधानिक प्रावधानों को व्यवस्थित रूप से समझाएँ।

 

Question 3. महिला आरक्षण दिशा व दशा पर एक लेख लिखिए।
Answer: भारतीय समाज पितृसत्तात्मक रहा है, इसलिए महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पुरुषों के बराबर नहीं रही है। जब तक महिलाएं पुरुषों के बराबर नहीं आतीं, तब तक न तो देश का विकास संभव है और न ही महिलाओं की तरक्की। महिलाओं को सभी क्षेत्रों में पुरुषों के समान सुविधाएं मिलनी चाहिएं ताकि वे समान स्तर पर आकर विकास कर सकें। इसी उद्देश्य से सरकारी नौकरियों और राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। भारतीय सेना-थल, जल और वायु सेना भी भारतीय महिलाओं को आंशिक कमीशन के द्वारा नियुक्त कर रही है। अन्य सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं का प्रतिशत बढ़ रहा है, लेकिन फिर भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण: भारतीय समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर लाने के लिए संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई पद सभी श्रेणियों की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इस व्यवस्था से महिलाओं का सामाजिक और राजनीतिक सशक्तिकरण हुआ है। उन्होंने पंचायती क्षेत्र के विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरक्षण के परिणामस्वरूप पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी 42.3 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है। संसद और विधानसभा में आरक्षण की मांग: महिलाओं के सही और पूरे विकास के लिए और उन्हें पुरुषों के बराबर लाने के लिए संसद और विधानसभा में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वे स्वयं अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें। इस मांग को समय-समय पर उठाया जाता रहा है और इस दिशा में प्रयास भी किए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, महिला आरक्षण विधेयक को 1996, 1998, 1999, 2003, 2008, 2010 में बार-बार पेश किया गया, लेकिन दुर्भाग्य से राजनीतिक दलों की स्वार्थपरता और हठधर्मिता के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। वर्तमान में भी इसकी मांग जारी है और महिलाओं के उत्थान के लिए अन्य प्रयास किए जा रहे हैं.
In simple words: महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को समाज और राजनीति में पुरुषों के बराबर लाना है। पंचायती राज में उन्हें आरक्षण मिला है, लेकिन संसद में महिला आरक्षण बिल राजनीतिक कारणों से पारित नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी पूरी भागीदारी अभी भी अधूरी है।

🎯 Exam Tip: महिला आरक्षण की आवश्यकता, पंचायती राज में इसकी स्थिति और संसद में लंबित विधेयक के कारणों पर विस्तार से लिखें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निम्न में से किसका उल्लेख है?
(अ) सामाजिक न्याय
(ब) राजनीतिक न्याय
Answer: (अ) सामाजिक न्याय (ब) राजनीतिक न्याय
In simple words: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय दोनों का जिक्र है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी नागरिकों को इन दोनों प्रकार के न्याय मिलें।

🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित सभी प्रकार के न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक) और उनकी प्रासंगिकता को याद रखें।

 

Question 3. संविधान के किस भाग में मौलिक अधिकार वर्णित हैं?
(अ) भाग एक
(ब) भाग दो
(स) भाग तीन
(द) भाग चार
Answer: (स) भाग तीन
In simple words: भारतीय संविधान का भाग तीन नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बारे में बताता है, जो सरकार से उन्हें मिले महत्वपूर्ण अधिकार हैं।

🎯 Exam Tip: संविधान के विभिन्न भागों और उनसे संबंधित मुख्य विषयों (जैसे मौलिक अधिकार) को याद रखना ज़रूरी है।

 

Question 4. संविधान के किस अनुच्छेद में सभी नागरिकों को विधि के समक्ष समान माना गया है?
(अ) अनुच्छेद 14
(ब) अनुच्छेद 15
(स) अनुच्छेद 16
(द) अनुच्छेद 17
Answer: (अ) अनुच्छेद 14
In simple words: अनुच्छेद 14 कहता है कि कानून की नज़र में सभी नागरिक बराबर हैं, चाहे वे कोई भी हों, उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

🎯 Exam Tip: समानता के अधिकार से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद (अनुच्छेद 14-18) को ध्यान से पढ़ें और याद रखें।

 

Question 5. अस्पृश्यता का निषेध किस अनुच्छेद के द्वारा किया गया है?
(अ) अनुच्छेद 16
(ब) अनुच्छेद 17
(स) अनुच्छेद 15
(द) अनुच्छेद 18
Answer: (ब) अनुच्छेद 17
In simple words: अनुच्छेद 17 छुआछूत को खत्म करता है और इसे किसी भी रूप में मानना एक अपराध बनाता है, जिससे सभी को सम्मान मिले।

🎯 Exam Tip: अस्पृश्यता उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों को उनके संबंधित अनुच्छेद के साथ याद रखें।

 

Question 6. निम्न में से प्रमुख समाज सुधारक हैं
(अ) महात्मा गाँधी
(ब) महाली स्वामी
(स) कबीर
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: महात्मा गांधी और कबीर जैसे लोग भारतीय समाज में बड़े सुधारक रहे हैं।

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख समाज सुधारकों और उनके योगदानों को जानें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 16 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान के किस भाग में सामाजिक व आर्थिक न्याय की व्यवस्था की गई है?
Answer: भारतीय संविधान के भाग चार के अन्तर्गत सामाजिक व आर्थिक न्याय की व्यवस्था की गई है। यह भाग राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों से संबंधित है.
In simple words: सामाजिक और आर्थिक न्याय की व्यवस्था भारतीय संविधान के भाग चार में है।

🎯 Exam Tip: संविधान के विभिन्न भागों में उल्लिखित प्रमुख प्रावधानों को याद रखें।

 

Question 2. सामाजिक न्याय का क्या अर्थ है?
Answer: सामाजिक न्याय का अर्थ है-समतामूलक समाज की स्थापना, यानी ऐसे समाज की स्थापना जिसमें सभी व्यक्तियों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाए। इसका उद्देश्य सभी को समान अवसर देना है.
In simple words: सामाजिक न्याय का मतलब है कि समाज में सभी के साथ समानता और बिना भेदभाव के व्यवहार हो।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय की सरल और स्पष्ट परिभाषा दें, जिसमें समानता और भेदभाव रहित व्यवहार पर ज़ोर हो।

 

Question 3. भारत में जाति – व्यवस्था की उत्पत्ति का क्या कारण है?
Answer: प्राचीन भारत में समाज वर्ण व्यवस्था के आधार पर चार वर्णों में बंटा हुआ था। ये वर्ण थे – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र। बाद में धीरे-धीरे वर्ण व्यवस्था बिगड़ कर जाति व्यवस्था में बदल गई, जिससे समाज में भेदभाव बढ़ा.
In simple words: भारत में जाति व्यवस्था की शुरुआत वर्ण व्यवस्था से हुई, जो बाद में बदल कर जातियों में बंट गई।

🎯 Exam Tip: वर्ण और जाति व्यवस्था के बीच अंतर को स्पष्ट करें और उनके विकास क्रम को समझाएँ।

 

Question 4. भारतीय समाज पर जाति व्यवस्था का क्या प्रभाव हुआ?
Answer: जाति व्यवस्था के प्रभाव से भारतीय समाज में असमानता, अलगाववाद, क्षेत्रवाद और सामाजिक ऊँच-नीच की भावना उत्पन्न हो गई, जिसका लाभ विदेशियों द्वारा उठाया गया। इसने समाज को कमज़ोर किया.
In simple words: जाति व्यवस्था के कारण भारतीय समाज में भेदभाव और अलगाव बढ़ा, जिसका फायदा विदेशियों ने उठाया।

🎯 Exam Tip: जाति व्यवस्था के नकारात्मक सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों को सूचीबद्ध करें।

 

Question 5. भारतीय संविधान निर्माताओं में से किन्हीं दो के नाम दीजिए।
Answer: भारतीय संविधान के निर्माण में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और डॉ. भीमराव अम्बेडकर का बहुत खास योगदान रहा। वे दोनों संविधान सभा के महत्वपूर्ण सदस्य थे.
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारतीय संविधान बनाने वाले प्रमुख लोग थे।

🎯 Exam Tip: संविधान निर्माण में प्रमुख व्यक्तियों के योगदान को याद रखें।

 

Question 6. किस अधिकार के अभाव में सामाजिक न्याय सम्भव नहीं है?
Answer: समानता के अधिकार के अभाव में सामाजिक न्याय की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जब तक सभी को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्चा न्याय स्थापित नहीं हो सकता.
In simple words: अगर सबको समानता का अधिकार नहीं मिलेगा, तो सामाजिक न्याय कभी नहीं हो सकता।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय के लिए समानता के अधिकार के महत्व पर ज़ोर दें।

 

Question 8. भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन किस भाग के अन्तर्गत किया गया है?
Answer: भारतीय संविधान के भाग-तीन में मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। यह भाग नागरिकों को प्राप्त महत्वपूर्ण अधिकारों की सूची देता है.
In simple words: मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के भाग तीन में दिए गए हैं।

🎯 Exam Tip: संविधान के किस भाग में कौन से प्रमुख प्रावधान हैं, यह याद रखना चाहिए।

 

Question 9. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 में क्या प्रावधान किया गया है?
Answer: अनुच्छेद 15 में यह बताया गया है कि 'धर्म, मूलवंश (नस्ल), जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव निषेध है।' यह समानता के अधिकार को सुनिश्चित करता है.
In simple words: अनुच्छेद 15 कहता है कि धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 15 के मुख्य प्रावधानों को याद रखें, विशेषकर 'भेदभाव निषेध' के संदर्भ में।

 

Question 10. भारतीय संविधान का कौन - सा अनुच्छेद कारखानों में बच्चों से कार्य कराने का निषेध करता है?
Answer: अनुच्छेद 24 कारखानों आदि में बच्चों से काम कराने (बालश्रम) पर रोक लगाता है। यह बच्चों के शोषण को रोकने और उनके बचपन को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है.
In simple words: अनुच्छेद 24 बच्चों से कारखानों में काम कराने पर रोक लगाता है, इसे बालश्रम कहते हैं।

🎯 Exam Tip: बालश्रम निषेध से संबंधित अनुच्छेद को याद रखें और उसके महत्व को समझाएँ।

 

Question 11. संविधान के 86वें संशोधन के तहत क्या व्यवस्था की गई है?
Answer: संविधान के 86वें संशोधन के तहत यह व्यवस्था की गई है कि राज्य कानून बनाकर यह तय करेगा कि 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को मौलिक अधिकार के रूप में अनिवार्य व निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। यह शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाता है.
In simple words: 86वें संशोधन से 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार मिला।

🎯 Exam Tip: 86वें संविधान संशोधन के मुख्य प्रावधान को याद रखें, जो शिक्षा के अधिकार से संबंधित है।

 

Question 12. संविधान का 86वाँ संशोधन कब लागू हुआ?
Answer: संविधान का 86 वाँ संशोधन अधिनियम 4 अगस्त 2009 को पारित हुआ और 1 अप्रैल 2010 को लागू हुआ। इस तिथि से शिक्षा का अधिकार एक कानून बन गया.
In simple words: 86वाँ संशोधन अधिनियम 4 अगस्त 2009 को बना और 1 अप्रैल 2010 से लागू हो गया।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों की तारीखों को अधिनियमित होने और लागू होने की तिथि के साथ याद रखें।

 

Question 13. आर्थिक न्याय का क्या अर्थ है?
Answer: आर्थिक न्याय का अर्थ है – आर्थिक असमानता व विषमता को कम करना। इसका मतलब है कि समाज में सभी लोगों को अपनी ज़रूरतें पूरी करने और सम्मान से जीने के लिए पर्याप्त आर्थिक अवसर मिलें.
In simple words: आर्थिक न्याय का मतलब है कि पैसे की असमानता को कम किया जाए।

🎯 Exam Tip: आर्थिक न्याय की संक्षिप्त और सटीक परिभाषा दें।

 

Question 15. भारत में निरन्तर बढ़ती हुई आर्थिक विषमता का क्या परिणाम हुआ है?
Answer: भारत के विभिन्न राज्यों में लगातार बढ़ती हुई आर्थिक असमानता के कारण ही नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, राजनीति का अपराधीकरण, तस्करी व आतंकवाद जैसी बुरी प्रवृत्तियाँ बढ़ी हैं। यह समाज में असंतोष और अस्थिरता को बढ़ाता है.
In simple words: भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता से नक्सलवाद, भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी गंभीर समस्याएँ बढ़ी हैं।

🎯 Exam Tip: आर्थिक विषमता के सामाजिक और राजनीतिक परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 16. यह कथन किसका है -“आर्थिक सुरक्षा एवं आर्थिक स्वतन्त्रता के बिना कोई भी व्यक्ति सच्ची स्वतन्त्रता प्राप्त नहीं कर सकता।”
Answer: यह कथन संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति रहे फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वास्तविक स्वतंत्रता के लिए आर्थिक सुरक्षा ज़रूरी है.
In simple words: यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने कही थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के प्रसिद्ध उद्धरणों को उनके नाम के साथ याद रखें।

 

Question 17. भारतीय संविधान के कौन - से अनुच्छेद नीति निर्देशक तत्वों से सम्बन्धित हैं?
Answer: भारतीय संविधान के भाग चार में अनुच्छेद 36 से 51 नीति निर्देशक तत्वों से संबंधित हैं। ये तत्व सरकार के लिए कुछ मार्गदर्शन सिद्धांत हैं, जो सामाजिक और आर्थिक न्याय स्थापित करने में मदद करते हैं.
In simple words: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 36 से 51 नीति निर्देशक तत्वों से जुड़े हैं।

🎯 Exam Tip: नीति निर्देशक तत्वों से संबंधित अनुच्छेदों की सीमा (36-51) को याद रखें।

 

Question 18. देशी राजाओं के प्रिवीपर्स एवं जमीदारी प्रथा को समाप्त करने का मूल कारण क्या रहा है?
Answer: देशी राजाओं के प्रिवीपर्स और जमीदारी प्रथा को समाप्त करने का मूल कारण देश में आर्थिक न्याय की स्थापना करना था। यह कदम आर्थिक असमानता को कम करने और संसाधनों का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था.
In simple words: देशी राजाओं के प्रिवीपर्स और जमीदारी प्रथा को खत्म करने का मुख्य कारण देश में सबको आर्थिक न्याय दिलाना था।

🎯 Exam Tip: प्रिवीपर्स और जमींदारी प्रथा को समाप्त करने के पीछे के आर्थिक और सामाजिक न्याय के उद्देश्यों को समझाएँ।

 

Question 19. डिजिटल डिवाइड क्या है?
Answer: इंटरनेट व प्रौद्योगिकी का अभी तक गाँवों में उतना फैलाव नहीं हुआ है जितना शहरों में। इसे गाँव व शहर के बीच भेद करने वाली घटना के रूप में डिजिटल डिवाइड के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब है कि तकनीक तक पहुँच में असमानता है.
In simple words: डिजिटल डिवाइड का मतलब है कि गाँव और शहर के लोगों के बीच इंटरनेट और टेक्नोलॉजी तक पहुँच में अंतर है।

🎯 Exam Tip: डिजिटल डिवाइड की परिभाषा और उसके मुख्य कारणों (जैसे ग्रामीण-शहरी अंतर) पर प्रकाश डालें।

 

Question 20. किन संवैधानिक संशोधनों के द्वारा भारतीय महिलाओं को पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण प्रदान किया गया है?
Answer: भारतीय संविधान के 73वें एवं 74वें संवैधानिक संशोधनों के द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 1 / 3 पद आरक्षित किए गए हैं। इन संशोधनों ने स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया है.
In simple words: 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों से महिलाओं को पंचायती राज में एक-तिहाई पद आरक्षित किए गए।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधनों (73वें और 74वें) को याद रखें।

 

Question 2. अंग्रेज भारत को पराधीन बनाने में क्यों सफल हो सके?
Answer: भारतीय समाज शुरू में वर्ण व्यवस्था पर आधारित था। समाज चार वर्णों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में बंटा हुआ था। समय के साथ, वर्ण व्यवस्था बिगड़ कर जाति व्यवस्था में बदल गई। यह जाति व्यवस्था रूढ़िवादी थी, जिसके कारण समाज में असमानता, अलगाववाद, क्षेत्रवाद और सामाजिक ऊँच-नीच के कारण बँटवारा हुआ। इसका फायदा विदेशी आक्रमणकारियों ने उठाया। अंग्रेजों ने भी भारतीय समाज के इस विभाजन का लाभ उठाते हुए 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाई और भारत को गुलाम बनाने में सफल रहे.
In simple words: अंग्रेजों को भारत को गुलाम बनाने में इसलिए सफलता मिली क्योंकि भारतीय समाज जाति व्यवस्था के कारण बँटा हुआ था, जिसका उन्होंने 'फूट डालो और राज करो' की नीति से फायदा उठाया।

🎯 Exam Tip: भारतीय समाज की आंतरिक कमजोरियों (जैसे जाति व्यवस्था) और अंग्रेजों की नीतियों (फूट डालो और राज करो) के बीच संबंध को समझाएँ।

 

Question 3. सामाजिक न्याय की प्रकृति पर प्रकाश डालिए।
Answer: सामाजिक न्याय की प्रकृति यह है कि सामाजिक स्थिति के आधार पर लोगों के बीच कोई भेदभाव न हो और सभी को विकास के समान अवसर मिलें। किसी भी व्यक्ति का किसी भी तरह से शोषण नहीं होना चाहिए। व्यक्ति स्वयं में एक लक्ष्य है, किसी बड़े लक्ष्य को पाने का साधन मात्र नहीं। राजनीतिक सत्ता की ज़िम्मेदारी है कि वह एक समान समाज की स्थापना करे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान में सामाजिक न्याय के आदर्शों को कई तरीकों से स्वीकार किया गया है। उदाहरण के तौर पर, मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्वों से संबंधित अनुच्छेद इसी दिशा में किए गए अच्छे प्रयास हैं.
In simple words: सामाजिक न्याय की प्रकृति यह है कि हर व्यक्ति को सम्मान मिले, किसी का शोषण न हो, और सबको विकास के समान अवसर मिलें। संविधान में भी इसे मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों में शामिल किया गया है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय की मौलिक प्रकृति को समझाएँ, जिसमें व्यक्ति की गरिमा और समान अवसरों पर ज़ोर हो।

 

Question 4. सामाजिक न्याय की स्थापना हेतु भारतीय संविधान में क्या प्रावधान किये गए हैं?
Answer: सामाजिक न्याय की स्थापना हेतु भारतीय संविधान में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
1. समानता के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल किया गया है, जिससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें.
2. अनुसूचित जातियों व जनजातियों की स्थिति सुधारने और उनके हितों की रक्षा के लिए उन्हें सरकारी नौकरियों व विधायिका में आरक्षण प्रदान किया गया है, ताकि वे मुख्यधारा में आ सकें.
3. संविधान के भाग – चार के अनुच्छेद 38 में सामाजिक न्याय का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राज्य ऐसी सामाजिक व्यवस्था की, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को प्रेरणा दे, पूरी कोशिश करके स्थापना और संरक्षण करे और लोककल्याण की उन्नति का प्रयास करे। इसका मतलब है कि राज्य की यह ज़िम्मेदारी है कि वह लोगों के भले के लिए काम करे.
संविधान निर्माताओं ने यह स्पष्ट रूप से समझ लिया था कि सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए समानता के साथ-साथ न्याय भी बहुत ज़रूरी है.
In simple words: भारतीय संविधान ने सामाजिक न्याय के लिए कई नियम बनाए हैं, जैसे समानता का अधिकार देना, अनुसूचित जाति और जनजातियों को आरक्षण देना, और राज्य को सामाजिक व आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने का निर्देश देना।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय के लिए संविधान में किए गए विभिन्न प्रावधानों (मौलिक अधिकार, आरक्षण, नीति निर्देशक तत्व) को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 5. भारत में सामाजिक न्याय की व्यावहारिक स्थिति क्या है?
Answer: भारत में सामाजिक न्याय की व्यावहारिक स्थिति- भारत में सामाजिक न्याय की स्थापना करने के लिए संविधान के तहत कई व्यवस्थाएँ की गई हैं, लेकिन समाज का एक वर्ग आज भी सुविधाओं से वंचित है। संविधान के तहत पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है, लेकिन व्यवहार में इसका लाभ कुछ ही लोगों को मिल पा रहा है। इसका कारण यह है कि सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों में एक ऐसा खास वर्ग बन गया है, जिसने सरकारी नौकरियों व राजनीति में बार-बार फायदा उठाकर अपना स्थान पक्का कर लिया है। एक ही परिवार के लोगों द्वारा बार-बार लाभ उठाने से दूसरे लोग वंचित रह गए हैं। खासकर पढ़े-लिखे लोगों को ही इसका ज़्यादा फायदा मिल सका है। सामाजिक रूप से अलग रहने वाली आदिवासी जनजातियाँ और बेसहारा वंचित अनुसूचित जातियाँ इन सुविधाओं का थोड़ा ही फायदा ले पाई हैं। भारत की राजनीतिक दलों ने वोट बैंक की राजनीति को बढ़ावा देकर सामाजिक न्याय को गलत दिशा में मोड़ दिया है। कानूनों को लागू करने के बाद भी वंचितों को दी जाने वाली सुविधाएँ दया, सहानुभूति और करुणा का बीज बन जाती हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। सामाजिक न्याय के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि वंचित वर्ग का सामाजिक उत्थान हो। सिर्फ आरक्षण देने से ही सामाजिक न्याय स्थापित नहीं हो सकता। वंचित वर्ग के मानसिक व शैक्षणिक विकास के लिए लगातार और सार्थक प्रयास ही उन्हें छोटे-मोटे सामाजिक कामों से दूर रख सकेंगे.
In simple words: भारत में सामाजिक न्याय के लिए कानून तो बने हैं, लेकिन उसका पूरा फायदा सभी को नहीं मिल रहा है। कुछ खास वर्ग ही इसका लाभ उठा रहे हैं, जबकि असली वंचित अभी भी पीछे हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय की संवैधानिक प्रावधानों और वास्तविक परिणामों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, साथ ही चुनौतियों और सुधार के उपायों को भी बताएं।

 

Question 6. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 में सामाजिक न्याय को स्थापित करने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं?
Answer: 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 में सामाजिक न्याय को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इस संशोधन के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसे मौलिक अधिकार बना दिया गया, जिससे शिक्षा तक पहुंच को सुनिश्चित किया जा सके। यह प्रावधान समाज के सभी वर्गों, विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखता है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। शिक्षा के माध्यम से, इन वर्गों को समाज में बेहतर स्थिति प्राप्त करने और मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर मिलता है, जिससे आर्थिक और सामाजिक असमानता को कम करने में मदद मिलती है.
In simple words: 86वें संविधान संशोधन 2002 में 6 से 14 साल के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया, ताकि सभी को शिक्षा का समान अवसर मिल सके और सामाजिक न्याय स्थापित हो।

🎯 Exam Tip: 86वें संविधान संशोधन के मुख्य उद्देश्य और शिक्षा के अधिकार के रूप में उसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 7. “आर्थिक न्याय से तात्पर्य व्यक्ति की न्यूनतम आवश्यकताएँ पूर्ण करने से है।” स्पष्ट कीजिए। अथवा आर्थिक न्याय का अर्थ बताइए।
Answer: मानव समाज में धन और संपत्ति का हमेशा से ही बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा पाने में धन और संपत्ति की अहम भूमिका होती है। किसी भी राज्य या समाज में धन - संपत्ति का समान वितरण न होने पर आर्थिक असमानता की स्थिति उत्पन्न होती है। इसलिए कहा जा सकता है कि धन-संपदा का न्यायपूर्ण वितरण ही आर्थिक न्याय है। समाज में सभी की न्यूनतम ज़रूरतें पूरी होनी चाहिएं। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा था कि "भूख से मर रहे व्यक्ति के लिए लोकतंत्र का कोई अर्थ और महत्व नहीं है।" डॉ. राधाकृष्णन ने भी कहा था कि जो लोग गरीबी से जूझ रहे हैं, जिन्हें कोई मज़दूरी नहीं मिलती और जो भूखे हैं, वे संविधान या उसके कानूनों पर गर्व नहीं कर सकते। इन विचारों से स्पष्ट होता है कि आर्थिक न्याय का मतलब सिर्फ़ संपत्ति का समान वितरण नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतें (जैसे भोजन, वस्त्र, आवास) पूरी हों, ताकि वह सम्मानजनक जीवन जी सके और समाज में पूरी तरह से भागीदारी कर सके.
In simple words: आर्थिक न्याय का मतलब है कि हर व्यक्ति की कम से कम ज़रूरतें पूरी हों, ताकि समाज में कोई गरीब और भूखा न रहे।

🎯 Exam Tip: आर्थिक न्याय की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए उसके महत्व और न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति से संबंध को समझाएँ।

 

Question 8. आर्थिक न्याय के सन्दर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 में क्या प्रावधान किए गए हैं?
Answer: आर्थिक न्याय के संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जो निम्नलिखित हैं:
1. समान रूप से महिला व पुरुष सभी नागरिकों को जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो। इसका मतलब है कि सभी को जीने के लिए काम और रोज़गार के अवसर मिलें.
2. समुदाय की भौतिक संपत्ति का स्वामित्व एवं नियंत्रण इस प्रकार बंटा हो जिससे कि सभी का ज़्यादा से ज़्यादा भला हो। संसाधनों का कुछ ही लोगों के हाथ में जमा न हो.
3. पुरुष और महिलाओं दोनों को समान काम के लिए समान वेतन मिले। वेतन में कोई लिंग-भेदभाव न हो.
4. आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार से चले कि धन और उत्पादन-साधनों व संसाधनों का एक जगह जमा न हो। शक्ति का केंद्रीकरण न हो.
5. श्रमिक पुरुष एवं महिलाओं के स्वास्थ्य एवं शक्ति और बच्चों की कोमल अवस्था का दुरुपयोग न हो एवं आर्थिक ज़रूरत के कारण नागरिकों को ऐसे रोज़गार में जाने के लिए मजबूर न होना पड़े जो उनकी उम्र और शक्ति के अनुकूल न हो। बच्चों और मज़दूरों का शोषण न हो.
In simple words: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 में प्रावधान हैं कि सभी को जीविका के समान साधन मिलें, संपत्ति कुछ लोगों के पास न रहे, स्त्री-पुरुष को समान काम के लिए समान वेतन मिले, और मज़दूरों व बच्चों का शोषण न हो।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 39 के विभिन्न खंडों को विस्तार से समझाएँ, जो आर्थिक न्याय के विभिन्न पहलुओं को कवर करते हैं।

 

Question 9. भारतीय संविधान में आर्थिक न्याय के बारे में क्या कहा गया है? अथवा भारत में आर्थिक न्याय की संकल्पना को व्यवहार रूप में सफल बनाने के लिए संविधान में कौन-कौन से प्रावधान किए गए हैं?
Answer: भारत में आर्थिक न्याय की संकल्पना को व्यवहार में सफल बनाने के लिए संविधान में कई प्रावधान किए गए हैं। अनुच्छेद 39 इस संबंध में सबसे खास है। नीति निर्देशक तत्व भी आर्थिक न्याय को सुनिश्चित करते हैं। आर्थिक न्याय की स्थापना के उद्देश्य से ही जमींदारी प्रथा और प्रिवीपर्स को खत्म कर दिया गया। ये कदम आर्थिक असमानता को कम करने और संसाधनों का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए थे। अनुच्छेद 41 और 42 में संविधान ने राज्यों को यह ज़िम्मेदारी दी है कि वे काम की सही और मानवीय दशाएँ सुनिश्चित करें और प्रसूति सहायता दें। अनुच्छेद 43 में श्रमिकों के निर्वाह और मज़दूरी से संबंधित प्रावधान हैं। अनुच्छेद 44 का संबंध नागरिकों के लिए समान व्यवहार संहिता से है। अनुच्छेद 45 में अनुसूचित जातियों, जनजातियों और कमज़ोर वर्गों के लिए शिक्षा एवं अर्थ संबंधी हितों की बात कही गई है। अनुच्छेद 47 के अनुसार सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार लाना राज्य का कर्तव्य है। इन सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं के बावजूद, सामाजिक न्याय का लक्ष्य अभी भी पूरी तरह से प्राप्त नहीं हो सका है।
In simple words: भारतीय संविधान में आर्थिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं, जैसे अनुच्छेद 39, जमींदारी प्रथा और प्रिवीपर्स को खत्म करना, श्रमिकों के अधिकार और शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देना।

🎯 Exam Tip: आर्थिक न्याय के लिए संवैधानिक प्रावधानों को विस्तृत रूप से समझाएँ और उनके क्रियान्वयन की स्थिति पर भी संक्षेप में चर्चा करें।

 

Question 10. भारत में आर्थिक न्याय की स्थापना करने के लिए क्या व्यवस्थाएँ की गई हैं?
Answer: भारत में आर्थिक न्याय लाने के लिए कई व्यवस्थाएँ की गई हैं। इनमें प्रमुख हैं:
1. आर्थिक गैर-बराबरी को कम करना।
2. बहुत ज़्यादा संपत्ति रखने के अधिकार पर रोक लगाना।
3. हर नागरिक को काम देकर उसकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
4. धन को सही तरीके से सबमें बांटना।
5. गरीबों की भलाई के लिए नई योजनाएँ बनाना और लागू करना।
6. टैक्स के सिस्टम को मज़बूत और बेहतर बनाना।
7. आरक्षण को राजनीतिक कारणों के बजाय आर्थिक ज़रूरतों के आधार पर देना।
In simple words: भारत में आर्थिक न्याय लाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जैसे गरीबों की मदद करना, संपत्ति के नियम बनाना और सबको काम देना।

🎯 Exam Tip: आर्थिक न्याय के प्रावधानों को लिखते समय, संविधान में दिए गए अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण की व्यवस्था पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था इसलिए की गई ताकि महिलाएँ ठीक से विकसित हो सकें और गाँव के स्तर पर सरकार चलाने में हिस्सा ले सकें। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संशोधन में यह तय किया गया कि पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई (1/3) सीटें सभी श्रेणियों की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस प्रावधान से महिलाओं की भागीदारी बहुत बढ़ी है, जिससे उन्हें सामाजिक और राजनीतिक रूप से मज़बूती मिली है। उन्होंने गाँव के विकास कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
In simple words: महिलाओं को पंचायतों में 33% सीटें दी गई हैं ताकि वे आगे बढ़ें और गाँव के कामों में खुलकर हिस्सा ले सकें, जिससे उनका और समाज का विकास हो।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज में महिला आरक्षण के बारे में लिखते समय, 73वें और 74वें संविधान संशोधनों का उल्लेख करना और इसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर प्रकाश डालना आवश्यक है।

 

Question. महिलाओं को आरक्षण की आवश्यकता क्यों है? बताइए।
Answer: महिलाओं को आरक्षण की ज़रूरत इसलिए है क्योंकि सामाजिक कारणों से वे अभी तक पूरी तरह से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। समाज की पुरुष-प्रधान मानसिकता उनके विकास के रास्ते में बाधाएँ डालती रही है। आरक्षण से समाज की सभी रुकावटें और बाधाएँ हटेंगी, जिससे महिलाएँ राजनीति और समाज में खुलकर योगदान दे सकेंगी। यह उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा। लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है जो भारत के लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया को और अधिक मज़बूत करेगा।
In simple words: महिलाओं को आगे बढ़ाने और समाज में उनकी रुकावटों को दूर करने के लिए आरक्षण ज़रूरी है, ताकि वे हर क्षेत्र में बराबरी से हिस्सा ले सकें।

🎯 Exam Tip: महिला आरक्षण की आवश्यकता के कारणों में सामाजिक बाधाओं, पुरुष-प्रधान मानसिकता और राजनीतिक सशक्तिकरण के महत्व को शामिल करें।

Rbse Class 12 Political Science Chapter 16 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान में सामाजिक न्याय के आदर्श को किस प्रकार स्वीकार किया गया है?
Answer: भारतीय संविधान ने सामाजिक न्याय के विचार को बहुत महत्व दिया है। संविधान बनाने वालों का मानना था कि एक कल्याणकारी लोकतंत्र के लिए सामाजिक न्याय सबसे ज़रूरी है। इसे संविधान में कई तरीकों से शामिल किया गया है:
1. **प्रस्तावना में उल्लेख:** भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की बात कही गई है।
2. **समानता का अधिकार:** संविधान यह मानता है कि सामाजिक न्याय तभी संभव है जब समाज में सभी को समान माना जाए। इसलिए, समानता के अधिकार को मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया। इसका मतलब है कि समाज के सभी लोगों के बीच बिना किसी भेदभाव के बराबरी और एकता होनी चाहिए।
3. **विभिन्न अनुच्छेद:** * अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के सामने बराबर मानता है। * अनुच्छेद 15 धर्म, वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को मना करता है। * अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में सभी नागरिकों को समान अवसर देता है। * अनुच्छेद 17 छुआछूत को पूरी तरह खत्म करता है। * अनुच्छेद 23(1) बंधुआ मजदूरी और बेगार (बिना मजदूरी के काम) पर रोक लगाता है। * अनुच्छेद 24 बच्चों को कारखानों आदि में काम करने से रोकता है।
इन सभी प्रावधानों से संविधान में सामाजिक न्याय के आदर्श को स्वीकार किया गया है।
In simple words: भारतीय संविधान सामाजिक न्याय को बहुत ज़रूरी मानता है। इसने संविधान की प्रस्तावना में ही सामाजिक न्याय की बात कही है और कई कानूनों (जैसे अनुच्छेद 14 से 24) के ज़रिए सभी लोगों को बराबर अधिकार दिए हैं, भेदभाव को रोका है और सभी को समान अवसर देने की कोशिश की है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय के संवैधानिक प्रावधानों को लिखते समय, प्रस्तावना में इसके उल्लेख, मौलिक अधिकारों में समानता के अधिकार को शामिल करने, और अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 23, 24 जैसे विशिष्ट अनुच्छेदों का हवाला देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. भारत में आर्थिक न्याय की व्यावहारिक स्थिति क्या है?
Answer: भारत में आर्थिक न्याय स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संविधान में भी कई प्रावधान (जैसे अनुच्छेद 39 और नीति-निर्देशक तत्व) किए गए हैं। देश से ज़मींदारी प्रथा और प्रिवीपर्स को खत्म कर दिया गया है। भारत एक तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बन गया है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालाबाजारी और आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी जैसा बड़ा कदम भी उठाया।
इन सबके बावजूद, भारत में आर्थिक असमानता और उससे जुड़ी समस्याएँ अभी भी हैं। आर्थिक विकास का फायदा सभी लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुँच रहा है। आज भी धनी लोग और धनी होते जा रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब हो रहे हैं। आर्थिक न्याय तभी संभव होगा जब विकास का लाभ समाज के हर वर्ग को मिले।
In simple words: भारत में आर्थिक न्याय लाने के लिए बहुत कोशिशें की गई हैं, संविधान में भी नियम हैं और नोटबंदी जैसे कदम भी उठाए गए हैं। लेकिन फिर भी, अमीर और अमीर हो रहे हैं, गरीब और गरीब। असली आर्थिक न्याय तभी मिलेगा जब तरक्की का फायदा सबको बराबर मिले।

🎯 Exam Tip: आर्थिक न्याय की व्यावहारिक स्थिति का वर्णन करते समय, संवैधानिक प्रावधानों के साथ-साथ वर्तमान चुनौतियों (जैसे असमानता) और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों (जैसे नोटबंदी) दोनों का उल्लेख करें।

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