RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 15 नव सामाजिक आन्दोलन

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Detailed Chapter 15 नव सामाजिक आन्दोलन RBSE Solutions for Class 12 Political Science

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Class 12 Political Science Chapter 15 नव सामाजिक आन्दोलन RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत में सुधारवादी आन्दोलन का एक उदाहरण है
(a) नक्सलवादी आन्दोलन
(b) बेटी बचाओ आन्दोलन
(c) बोडो आन्दोलन
(d) कावेरी जल विवाद
Answer: (b) बेटी बचाओ आन्दोलन
In simple words: "बेटी बचाओ आन्दोलन" भारत में एक सुधारवादी आंदोलन है जो लड़कियों को बचाने और पढ़ाने पर केंद्रित है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, सभी विकल्पों को ध्यान से समझें और फिर सबसे उपयुक्त उदाहरण चुनें।

 

Question 2. इनमें से कौन कृषक अधिकार आन्दोलन से सम्बन्धित नहीं है?
(a) भारतीय किसान संघ
(b) भारतीय किसान यूनियन
(c) पेड़ बचाने वाली संस्था
(d) वनवासी लोग
Answer: (d) वनवासी लोग
In simple words: वनवासी लोग किसानों के अधिकारों के आंदोलन से संबंधित नहीं हैं। वे एक समुदाय हैं, कोई संगठन नहीं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, विकल्पों को ध्यान से देखें और पहचानें कि कौन सा विकल्प दिए गए विषय से सीधा संबंध नहीं रखता है, खासकर जब सूची में संगठन और व्यक्तियों या समुदायों का मिश्रण हो।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किसी एक श्रमिक संघ का नाम बताइए।
Answer: भारत में एक प्रसिद्ध श्रमिक संघ 'भारतीय मजदूर संघ' है। यह संघ श्रमिकों के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों के लिए काम करता है।
In simple words: एक श्रमिक संघ का नाम 'भारतीय मजदूर संघ' है।

🎯 Exam Tip: ऐसे सीधे प्रश्नों में, किसी एक प्रामाणिक उदाहरण का नाम स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 2. नर्मदा बचाओ आन्दोलन' का सम्बन्ध किससे है?
Answer: 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' का संबंध मुख्य रूप से मेधा पाटेकर से है। उन्होंने ही इस आंदोलन का नेतृत्व किया और इसे आगे बढ़ाया।
In simple words: नर्मदा बचाओ आंदोलन मेधा पाटेकर से जुड़ा है। उन्होंने ही इस आंदोलन का नेतृत्व किया था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख आंदोलनों के साथ जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम याद रखें।

 

Question 3. शेतकरी संगठन किस राज्य में सक्रिय है?
Answer: शेतकारी संगठन, जो किसानों के अधिकारों के लिए काम करता है, महाराष्ट्र राज्य में सक्रिय है।
In simple words: शेतकारी संगठन महाराष्ट्र राज्य में सक्रिय है।

🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय आंदोलनों के साथ उनके संबंधित राज्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सुधारवादी आन्दोलनों की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: सुधारवादी आंदोलन वे सामूहिक प्रयास होते हैं जिनमें व्यक्ति या संगठन समाज में कोई विशेष परिवर्तन लाना चाहते हैं। ये आंदोलन अक्सर बड़े और औपचारिक समूहों द्वारा चलाए जाते हैं। इनकी कुछ प्रमुख विशेषताएँ होती हैं।
In simple words: सुधारवादी आंदोलन वे बड़े समूह होते हैं जो समाज में कुछ बदलाव लाना चाहते हैं।

🎯 Exam Tip: सुधारवादी आंदोलनों की विशेषताओं को परिभाषित करते समय, उनके सामूहिक स्वरूप और समाज में परिवर्तन लाने के लक्ष्य पर ध्यान दें।

 

Question 2. किन्हीं दो नारीवादी आन्दोलनों की जानकारी एकत्रित कीजिए।
Answer: स्वतंत्रता के बाद 1950 से 1970 के दौरान, भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई महिला संगठन बने। इन आंदोलनों में महिलाओं की नौकरी और परिवार में उनकी स्थिति जैसे मुद्दे उठाए गए।
1. हिन्दू कोड बिल पर नारी आंदोलन: 1950 के दशक में महिला कार्यकर्ताओं ने हिन्दू कोड बिल को लेकर बहस शुरू की। सरकार ने इस पर एक समिति बनाई, और डॉ. अम्बेडकर ने भी महिलावादियों का साथ दिया। हालांकि कांग्रेस के विरोध के कारण यह बिल पहले पास नहीं हो पाया, लेकिन अंत में 1956 में इसे मंजूरी मिल गई।
2. ताड़ी विरोधी आंदोलन: यह आंदोलन 1990 में आंध्र प्रदेश के नेल्लौर जिले के दुबरगंटा गांव में महिलाओं द्वारा शुरू किया गया था। गांव के पुरुष शराब के आदी हो गए थे, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे थे। शराबखोरी के कारण गांव की आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही थी और कर्ज भी बढ़ रहा था। पुरुष अक्सर काम से अनुपस्थित रहते थे। परेशान होकर महिलाओं ने ताड़ी (शराब) की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने शराब की दुकानें बंद कराने का दबाव डाला। यह खबर फैलने पर लगभग 5000 गांवों की महिलाएं इस आंदोलन में शामिल हो गईं। नेल्लौर जिले में शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल गया, और यह शराब ठेकेदारों और सरकार के खिलाफ था।
In simple words: आजादी के बाद, महिलाओं ने अपनी नौकरियों और परिवार में अपनी स्थिति को लेकर कई आंदोलन चलाए। महिला कार्यकर्ताओं ने 1950 के आसपास हिन्दू कोड बिल को लेकर आवाज उठाई, जो 1956 में पास हो गया। 1990 में आंध्र प्रदेश में महिलाओं ने शराबखोरी के खिलाफ ताड़ी विरोधी आंदोलन चलाया क्योंकि पुरुषों की शराब की लत से परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था खराब हो रही थी।

🎯 Exam Tip: नारीवादी आंदोलनों के बारे में बताते समय, उनके उद्देश्यों और उनसे जुड़े प्रमुख मुद्दों को स्पष्ट करें। ऐतिहासिक संदर्भ और उनके प्रभावों का उल्लेख करें।

 

Question 3. विकास परियोजनाओं के विरुद्ध उठ खड़े हुए किन्हीं दो आन्दोलनों के नाम बताइए।
Answer: विकास परियोजनाओं के विरुद्ध उठ खड़े हुए दो आंदोलन निम्नलिखित हैं:
1. नर्मदा बचाओ आंदोलन
2. शांत घाटी आंदोलन
(i) नर्मदा बचाओ आंदोलन: यह आंदोलन विकास परियोजनाओं के नकारात्मक प्रभावों के खिलाफ है। यह गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के विरोध में आदिवासी लोगों, किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं को एक साथ लाता है। शुरुआत में यह आंदोलन बांध के कारण जंगलों के डूबने जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर केंद्रित था, लेकिन बाद में इसका लक्ष्य बांध से विस्थापित गरीब लोगों के लिए सरकार से पूरी तरह से पुनर्वास सुविधाएं प्राप्त करना हो गया है।
(ii) शांत घाटी आंदोलन: शांत घाटी केरल का एक उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन क्षेत्र है। यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार ने पश्चिमी घाट के इस क्षेत्र में एक बड़ी पनबिजली परियोजना स्थापित करने की योजना बनाई थी।
In simple words: विकास परियोजनाओं के विरुद्ध दो आंदोलन हैं: 1. नर्मदा बचाओ आंदोलन (सरदार सरोवर बांध के खिलाफ, पर्यावरण और विस्थापितों के लिए) और 2. शांत घाटी आंदोलन (केरल के सदाबहार वनों और पनबिजली परियोजना के खिलाफ)।

🎯 Exam Tip: विकास परियोजनाओं के विरुद्ध हुए आंदोलनों के नाम और उनके मुख्य कारण तथा उद्देश्य स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 1. भारत में नव सामाजिक आन्दोलनों की प्रवृत्ति व प्रकारों पर विश्लेषणात्मक लेख लिखिए।
Answer: **नव सामाजिक आंदोलनों की प्रवृत्ति:** नए सामाजिक आंदोलनों ने ऐसी मांगों को उठाया जिन्हें पहले के आंदोलनों ने अनदेखा कर दिया था। इनकी मुख्य मांगे पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार, नारीवादी आंदोलन और जन-जागरण से जुड़ी हैं। ये आंदोलन मानव जीवन की गुणवत्ता और अन्याय के प्रति नई जागरूकता पर आधारित हैं। इन आंदोलनों का उद्देश्य केवल राजनीतिक या प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और सामूहिक नैतिकता को भी बढ़ाना है। ये किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के भले के लिए होते हैं। भारत में ये आंदोलन 1960 के दशक में शुरू हुए थे।
**नव सामाजिक आंदोलनों के प्रकार:** नए सामाजिक आंदोलनों के निम्नलिखित प्रकार हैं:
(1) पर्यावरण संरक्षण आंदोलन: आज पर्यावरण एक बड़ा वैश्विक मुद्दा है। ग्लोबल वार्मिंग दुनिया की एक बड़ी समस्या है। भारत में पर्यावरण आंदोलन 1973 में चिपको आंदोलन से शुरू हुआ। पर्यावरण संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी होते रहे हैं, जैसे स्टॉकहोम, रियो डी जनेरियो और पेरिस सम्मेलन। भारत में महिलाओं, गरीब लोगों आदि ने भी पर्यावरण आंदोलनों में हिस्सा लिया है। कर्नाटक में वन कटाई रोकने के लिए अप्पिको आंदोलन चलाया गया। नर्मदा बचाओ आंदोलन भी एक पर्यावरण आंदोलन है।
(2) मानवाधिकार आंदोलन: आज के समय में मानव अधिकारों का बहुत महत्व है, और कई देशों के संविधानों में इन्हें शामिल किया गया है। लोगों को जन्म से ही कुछ अधिकार मिलते हैं। दुख की बात है कि आज भी दुनिया में मानव अधिकारों की अनदेखी हो रही है, और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंसा बढ़ रही है। हर जगह मानव अधिकारों का उल्लंघन देखा जा रहा है। भारत में 1993 में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम पास किया गया।
(3) महिला सशक्तिकरण आंदोलन: भारत में आजादी से पहले भी समाज सुधारक महिलाओं की समस्याओं को लेकर चिंतित थे। आजादी के बाद, कई जन और नागरिक संगठनों ने महिलाओं के मुद्दों को उठाया। संविधान में भी महिलाओं के विकास के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। पितृसत्तात्मक समाज के कारण भारत में महिलाओं की स्थिति हमेशा से कमजोर रही है।
In simple words: **नए सामाजिक आंदोलनों की प्रवृत्ति:** ये आंदोलन पर्यावरण, मानवाधिकार, महिला अधिकार और जन-जागरण पर केंद्रित हैं। इनका लक्ष्य सिर्फ राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि व्यक्तिगत नैतिकता को भी बेहतर बनाना है। ये 1960 के दशक में भारत में शुरू हुए।
**नए सामाजिक आंदोलनों के प्रकार:** इनमें पर्यावरण संरक्षण आंदोलन (जैसे चिपको, अप्पिको), मानवाधिकार आंदोलन (1993 में अधिनियम बना) और महिला सशक्तिकरण आंदोलन शामिल हैं, जो महिलाओं की स्थिति सुधारने पर केंद्रित है।

🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, विषय की स्पष्ट परिभाषा, उसकी मुख्य प्रवृत्तियाँ और विभिन्न प्रकारों का विस्तृत विवरण देना आवश्यक है। प्रत्येक प्रकार के साथ उदाहरण भी दें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. नवीन सामाजिक आन्दोलनों की शुरुआत कब हुई?
(a) 1950 के दशक में
(b) 1930 के दशक में
(c) 1960 के दशक में
(d) 1970 के दशक में
Answer: (c) 1960 के दशक में
In simple words: नए सामाजिक आंदोलन 1960 के दशक में शुरू हुए।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आंदोलनों की ऐतिहासिक समय-सीमाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके शुरुआती दौर को।

 

Question 2. निम्न में से कौन-सा संगठन श्रमिक आन्दोलन से सम्बन्धित है?
(a) राष्ट्र सेवक समिति
(b) वनवासी कल्याण परिषद
(c) स्वदेशी जागरण मंच
(d) शेतकारी संगठन
Answer: (c) स्वदेशी जागरण मंच
In simple words: स्वदेशी जागरण मंच श्रमिक आंदोलनों से जुड़ा एक संगठन है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न सामाजिक आंदोलनों से जुड़े प्रमुख संगठनों के नामों को जानें।

 

Question 4. किसी एक व्यक्ति विशेष या समस्या पर केन्द्रित आन्दोलन कहलाते हैं
(a) परिवर्तनकारी
(b) वैकल्पिक
(c) उपचारवादी
(d) सुधारवादी
Answer: (c) उपचारवादी
In simple words: ऐसे आंदोलन जो एक व्यक्ति या समस्या पर ध्यान देते हैं, उन्हें उपचारवादी आंदोलन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के सामाजिक आंदोलनों की परिभाषाओं को उनके मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली के आधार पर याद रखें।

 

Question 5. निम्न में से किस सामाजिक संगठन ने राज्य की भूमिका व वैधता को चुनौती दिए बिना राज्य के कार्यों को सामाजिक स्तर पर गति प्रदान की है
(a) वनवासी कल्याण परिषद
(b) सेवा भारती
(c) शिक्षा बचाओ आन्दोलन
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: वनवासी कल्याण परिषद, सेवा भारती और शिक्षा बचाओ आंदोलन जैसे संगठनों ने सरकार को चुनौती दिए बिना समाज में अच्छे काम किए हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे संगठनों को पहचानें जो समाज सेवा पर केंद्रित होते हैं और जो राज्य की वैधता या भूमिका पर सवाल नहीं उठाते।

 

Question 6. विकास के दुष्परिणामों के विरुद्ध आन्दोलन से कौन सम्बन्धित है?
(a) नर्मदा बचाओ आन्दोलन
(b) बेटी बचाओ आन्दोलन
(c) कावेरी जल विवाद
(d) सुधारवादी आन्दोलन
Answer: (a) नर्मदा बचाओ आन्दोलन
In simple words: नर्मदा बचाओ आंदोलन बड़े विकास कार्यों के बुरे प्रभावों, जैसे लोगों के विस्थापन और पर्यावरण को नुकसान, के खिलाफ था।

🎯 Exam Tip: विकास परियोजनाओं के विरोध में हुए प्रमुख आंदोलनों के नाम और उनके कारणों को याद रखें।

 

Question 7. भारत में वैकल्पिक आन्दोलन का उदाहरण है
(a) नक्सली आन्दोलन
(b) बेटी बचाओ आन्दोलन
(c) कावेरी जल विवाद
(d) नारीवादी आन्दोलन
Answer: (d) नारीवादी आन्दोलन
In simple words: नारीवादी आंदोलन भारत में वैकल्पिक आंदोलनों का एक उदाहरण है, जो समाज में बड़े बदलाव लाना चाहता है।

🎯 Exam Tip: वैकल्पिक आंदोलनों को उनके व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन के लक्ष्यों के आधार पर पहचानें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. सामाजिक आन्दोलन का प्रमुख उद्देश्य क्या होता है?
Answer: सामाजिक आंदोलनों का मुख्य लक्ष्य कमजोर और वंचित समूहों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना है। साथ ही, इनका उद्देश्य समाज में एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जो सभी के लिए न्यायपूर्ण हो।
In simple words: सामाजिक आंदोलनों का मुख्य मकसद कमजोर लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और समाज में न्याय स्थापित करना है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आंदोलनों के उद्देश्यों को बताते समय, 'वंचित समूह', 'हितों की रक्षा', 'न्यायपूर्ण व्यवस्था' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 3. क्या'सामाजिक आन्दोलन' व 'लोककल्याणकारी राज्य' की अवधारणाएँ एक-दूसरे के विपरीत हैं?
Answer: नहीं, 'सामाजिक आंदोलन' और 'लोककल्याणकारी राज्य' की अवधारणाएं एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। दरअसल, सामाजिक आंदोलन जनता के भले के लिए ही एक प्रयास होता है।
In simple words: नहीं, सामाजिक आंदोलन और लोककल्याणकारी राज्य एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि सहायक हैं। सामाजिक आंदोलन लोगों की भलाई के लिए होते हैं।

🎯 Exam Tip: 'पूरक' और 'विपरीत' जैसे शब्दों का सही उपयोग करके अवधारणाओं के बीच संबंध स्पष्ट करें।

 

Question 4. सामाजिक आन्दोलनों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: सामाजिक आंदोलनों को मुख्य रूप से चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
1. परिवर्तनकारी
2. सुधारवादी
3. उपचारवादी
4. वैकल्पिक
In simple words: सामाजिक आंदोलनों को चार भागों में बांट सकते हैं: परिवर्तनकारी, सुधारवादी, उपचारवादी और वैकल्पिक।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आंदोलनों के वर्गीकरण को याद रखें और प्रत्येक प्रकार के नाम को सूचीबद्ध करें।

 

Question 5. परिवर्तनकारी आन्दोलन की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: परिवर्तनकारी आंदोलनों की दो मुख्य विशेषताएं हैं:
1. ये आंदोलन समाज की मौजूदा व्यवस्थाओं और संस्थाओं में पूरे बदलाव के समर्थक होते हैं।
2. कभी-कभी ये आंदोलन हिंसक भी हो सकते हैं, ताकि तेजी से परिवर्तन लाया जा सके।
In simple words: परिवर्तनकारी आंदोलन समाज की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदलना चाहते हैं। कभी-कभी ये हिंसक भी हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: परिवर्तनकारी आंदोलनों की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, विशेषकर उनके लक्ष्यों और तरीकों को।

 

Question 7. वैकल्पिक आन्दोलन से आप क्या समझते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
Answer: वैकल्पिक आंदोलन वे होते हैं जो समाज की पूरी सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था में बदलाव लाकर एक नया विकल्प लाना चाहते हैं। इसमें समाज के मूल्यों को बदलना भी शामिल है। उदाहरण के लिए, नारीवादी आंदोलन एक वैकल्पिक आंदोलन है।
In simple words: वैकल्पिक आंदोलन समाज की पूरी व्यवस्था को बदलकर एक नया तरीका लाना चाहते हैं। नारीवादी आंदोलन इसका एक अच्छा उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: वैकल्पिक आंदोलनों को परिभाषित करते समय, 'संपूर्ण परिवर्तन' और 'नए विकल्प' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें और एक प्रासंगिक उदाहरण अवश्य दें।

 

Question 8. नव सामाजिक आन्दोलन का आरम्भ कब हुआ?
Answer: नए सामाजिक आंदोलन 1960 के दशक में शुरू हुए। इस समय कई नई सामाजिक और राजनीतिक विचारधाराएं सामने आईं।
In simple words: नए सामाजिक आंदोलन 1960 के दशक में शुरू हुए।

🎯 Exam Tip: किसी भी आंदोलन के बारे में बताते समय, उसके शुरुआती समय का उल्लेख करना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 9. नव सामाजिक आन्दोलन की शुरुआत सर्वप्रथम कहाँ हुई?
Answer: नए सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत सबसे पहले पश्चिमी औद्योगिक समाजों में हुई थी। ये वे जगहें थीं जहाँ उत्तर-औद्योगिक, उत्तर-भौतिकवादी और उत्तर-आधुनिकतावादी जैसी नई समस्याएं सामने आने लगी थीं।
In simple words: नए सामाजिक आंदोलन सबसे पहले पश्चिमी देशों में शुरू हुए, जहाँ नई तरह की समस्याएं सामने आने लगी थीं।

🎯 Exam Tip: आंदोलनों की शुरुआत के भौगोलिक संदर्भ और उनके पीछे के कारणों को याद रखना सहायक होता है।

 

Question 10. नव सामाजिक आन्दोलन की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: नए सामाजिक आंदोलनों की दो विशेषताएं ये हैं:
1. ये अक्सर वामपंथी विचारों की ओर झुकते हैं।
2. ये समाज के पढ़े-लिखे और सक्रिय युवाओं की आदर्शवादी सोच का उपयोग करते हुए उन्हें अपने प्रयासों में शामिल करते हैं।
In simple words: नए सामाजिक आंदोलन अक्सर वामपंथी होते हैं और पढ़े-लिखे युवाओं को अपने साथ जोड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी आंदोलन की विशेषताओं को बताते समय, उनकी विचारधारा और उसमें शामिल होने वाले समूहों पर ध्यान दें।

 

Question 11. सामाजिक आन्दोलनों का नागरिक समाज पर क्या प्रभाव हुआ है?
Answer: सामाजिक आंदोलनों ने आधुनिक राज्यों में नागरिक समाज की समझ को और मजबूत किया है। इन आंदोलनों ने लोगों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया है।
In simple words: सामाजिक आंदोलनों ने नागरिक समाज की अवधारणा को और ताकत दी है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आंदोलनों और नागरिक समाज के बीच के संबंध को स्पष्ट करें, खासकर यह कैसे एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।

 

Question 14. नव कृषक आन्दोलन कब आरम्भ हुए? इनका प्रमुख उद्देश्य क्या था?
Answer: नए किसान आंदोलन 1991 के बाद शुरू हुए। इनका मुख्य मकसद वैश्वीकरण और निजीकरण के समय खुले बाजार में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना था।
In simple words: नए किसान आंदोलन 1991 के बाद शुरू हुए। इनका लक्ष्य खुले बाजार में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना था।

🎯 Exam Tip: किसान आंदोलनों की शुरुआत का समय और उनके मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताएं, खासकर वैश्वीकरण के संदर्भ में।

 

Question 15. नव कृषक आन्दोलन से सम्बन्धित तीन कृषक समूहों के नाम लिखिए।
Answer: नए किसान आंदोलन से जुड़े तीन प्रमुख किसान समूह हैं: भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन और शेतकारी संगठन। ये संगठन किसानों के अधिकारों के लिए काम करते हैं।
In simple words: नए किसान आंदोलनों से जुड़े तीन समूह हैं: भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन और शेतकारी संगठन।

🎯 Exam Tip: प्रमुख किसान संगठनों के नाम याद रखें जो भारत में किसान आंदोलनों से जुड़े हैं।

 

Question 16. परम्परावादी श्रमिक आन्दोलन के विषय में आप क्या जानते हैं?
Answer: परंपरागत श्रमिक आंदोलन मुख्य रूप से वामपंथी समूहों पर आधारित थे। इन आंदोलनों ने अपना ध्यान केवल औद्योगिक कंपनियों और सरकारों के साथ सामूहिक सौदेबाजी (यानी मिलकर बातचीत करने) तक सीमित रखा था।
In simple words: पुराने श्रमिक आंदोलन वामपंथी थे। वे कंपनियों और सरकार के साथ बातचीत करके मजदूरों के लिए सौदेबाजी तक ही सीमित थे।

🎯 Exam Tip: परंपरागत श्रमिक आंदोलनों की विशेषताओं, उनकी विचारधारा (वामपंथी) और उनके सीमित लक्ष्यों को ध्यान में रखें।

 

Question 17. वर्तमान में महिला सशक्तिकरण आन्दोलन चलाने वाले भारत के किसी एक प्रमुख समूह का नाम बताइए।
Answer: वर्तमान में कई समूह महिला सशक्तिकरण के लिए सफल आंदोलन चला रहे हैं। इनमें से 'राष्ट्र सेविका समिति' एक प्रमुख नाम है। यह समिति महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए काम करती है।
In simple words: आज कई समूह महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम कर रहे हैं। 'राष्ट्र सेविका समिति' इसका एक उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रमुख संगठनों का नाम याद रखें।

 

Question 19. क्या नर्मदा बचाओ आन्दोलन के तहत परियोजना का विरोध अनुचित था?
Answer: नर्मदा बचाओ आंदोलन में पूरी परियोजना का विरोध किया गया था, सिर्फ विस्थापितों की समस्या का नहीं। आलोचकों का मानना था कि यह तरीका पूरी तरह से सही नहीं था।
In simple words: नर्मदा बचाओ आंदोलन ने पूरी परियोजना का विरोध किया, न कि सिर्फ विस्थापितों की समस्या का। कुछ लोगों का मानना था कि यह तरीका सही नहीं था।

🎯 Exam Tip: आंदोलनों की आलोचनात्मक विश्लेषण करते समय, विरोध के दायरे और उसके औचित्य पर ध्यान दें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. परिवर्तनकारी एवं सुधारवादी सामाजिक आन्दोलनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: परिवर्तनकारी और सुधारवादी सामाजिक आंदोलनों में अंतर है:
**परिवर्तनकारी सामाजिक आंदोलन:**
1. ये आंदोलन समाज की मौजूदा संस्थाओं और व्यवस्थाओं में पूरी तरह बदलाव लाने के समर्थक होते हैं।
2. ये कभी-कभी हिंसक भी हो सकते हैं; नक्सलवादी और वामपंथी आंदोलन इसके उदाहरण हैं।
3. नक्सलवादी आंदोलन और वामपंथी आंदोलन परिवर्तनकारी आंदोलनों के मुख्य उदाहरण हैं।
**सुधारवादी सामाजिक आंदोलन:**
1. सुधारवादी आंदोलन समाज की मौजूदा समस्याओं में धीरे-धीरे सुधार लाने का समर्थन करते हैं।
2. ये आमतौर पर संवैधानिक और संसदीय तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
3. अधिकांश गैर-सरकारी संगठन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
In simple words: परिवर्तनकारी आंदोलन समाज को पूरी तरह बदलना चाहते हैं, कभी-कभी हिंसा से भी। नक्सलवादी आंदोलन इसका उदाहरण है। सुधारवादी आंदोलन समाज में धीरे-धीरे बदलाव लाते हैं और अक्सर सरकारी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार के आंदोलनों के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे उनके लक्ष्य (पूर्ण परिवर्तन बनाम धीरे-धीरे सुधार) और उनके तरीके (हिंसक बनाम संवैधानिक)।

 

Question 2. उपचारवादी एवं वैकल्पिक आंदोलन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: उपचारवादी और वैकल्पिक आंदोलनों में अंतर निम्नलिखित है:
**उपचारवादी आंदोलन:** ये आंदोलन किसी एक खास व्यक्ति या समस्या पर केंद्रित होते हैं, और इनका उद्देश्य उस विशेष समस्या से छुटकारा दिलाना होता है।
**वैकल्पिक आंदोलन:** ये आंदोलन समाज की पूरी सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था में बदलाव लाकर एक नया विकल्प स्थापित करने की बात करते हैं। इसमें सामाजिक मूल्यों को बदलना भी शामिल है। नारीवादी आंदोलन इसका एक अच्छा उदाहरण है।
In simple words: उपचारवादी आंदोलन किसी एक खास समस्या को ठीक करने पर ध्यान देते हैं। वैकल्पिक आंदोलन समाज की पूरी व्यवस्था को बदलना चाहते हैं, जैसे नारीवादी आंदोलन।

🎯 Exam Tip: उपचारवादी और वैकल्पिक आंदोलनों के अंतर को उनके उद्देश्य के आधार पर स्पष्ट करें: क्या वे किसी विशेष समस्या का समाधान कर रहे हैं या पूरी व्यवस्था को बदल रहे हैं।

 

Question 4. भारत में हुए महिला आन्दोलन के मुख्य उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।
Answer: महिला आंदोलन शुरुआत में कई उद्देश्यों से प्रेरित था, जिनमें घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न और परिवार व बाहर होने वाली यौन हिंसा को खत्म करना शामिल था। 1980 के दशक तक, परिवार और बाहर होने वाली यौन हिंसा को समाप्त करना इसका मुख्य फोकस बन गया था। लैंगिक समानता के लिए कई कानूनों की मांग की गई। महिला आंदोलन का एक फायदा यह हुआ कि समाज में महिलाओं के मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ी। महिलाओं में भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ा। यह जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ती गई और 1990 के दशक तक महिला आंदोलन समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करने लगा। 73वें और 74वें संशोधन के तहत महिलाओं को स्थानीय राजनीतिक संस्थाओं में आरक्षण दिया गया। बाद में संसद और विधानसभाओं में भी आरक्षण की मांग उठी। 'अखिल भारतीय महिला परिषद' और कई अन्य महिला संगठन आज भी महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों और लैंगिक असमानता के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। महिलाओं का उत्पीड़न, अत्याचार और भेदभाव के मुद्दे आज भी सबसे जटिल समस्याओं में से हैं।
In simple words: महिला आंदोलनों का मुख्य लक्ष्य घरेलू हिंसा, दहेज और कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न खत्म करना था। वे महिलाओं को बराबरी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाना चाहते थे। इन आंदोलनों से महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी।

🎯 Exam Tip: महिला आंदोलनों के उद्देश्यों को सूचीबद्ध करते समय, उनके सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक पहलुओं को शामिल करें।

 

Question 5. क्या आन्दोलन और विरोध की कार्यवाहियों से देश का लोकतंत्र मजबूत होता है ? अपने उत्तर की पुष्टि में उदाहरण दीजिए।
Answer: हाँ, आंदोलन और विरोध की कार्यवाहियों से देश का लोकतंत्र मजबूत होता है। सामाजिक आंदोलनों का इतिहास हमें लोकतांत्रिक राजनीति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। इन आंदोलनों का लक्ष्य राजनीतिक दलों की कमियों को दूर करना था। उन्होंने समाज के गहरे तनावों और जनता के गुस्से को एक सही दिशा देकर लोकतंत्र की रक्षा की है। लोगों की सक्रिय भागीदारी के नए तरीकों ने भारतीय लोकतंत्र के आधार को मजबूत किया है। अहिंसक और शांतिपूर्ण आंदोलनों से देश का लोकतंत्र और मजबूत होता है।
**उदाहरण के तौर पर:** ताड़ी विरोधी आंदोलन ने शराबबंदी और नशा मुक्ति के मुद्दों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके कारण महिलाओं से जुड़ी कई समस्याएं, जैसे यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा और विधायिकाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की मांग भी उठीं। परिणामस्वरूप, संविधान में कुछ संशोधन किए गए और नए कानून बनाए गए।
In simple words: हाँ, आंदोलन और विरोध से लोकतंत्र मजबूत होता है। ये सरकार की कमियों को दिखाते हैं और जनता की आवाज को सही दिशा देते हैं। ताड़ी विरोधी आंदोलन ने शराबबंदी जैसे मुद्दों पर ध्यान खींचकर लोकतंत्र को मजबूत किया और महिलाओं की समस्याओं को उठाया।

🎯 Exam Tip: लोकतंत्र पर आंदोलनों के सकारात्मक प्रभावों की व्याख्या करते समय, यह बताएं कि वे कैसे राजनीतिक भागीदारी बढ़ाते हैं, सरकार को जवाबदेह बनाते हैं और सामाजिक मुद्दों को उजागर करते हैं।

 

Question 6. कृषक अधिकार आन्दोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारत में किसान अधिकार आंदोलन 1991 के बाद शुरू हुए। 1991 में नई आर्थिक नीति अपनाने के बाद भारत वैश्वीकरण और उदारीकरण की प्रक्रिया से जुड़ गया था। इसके बाद, भारतीय किसानों, खासकर छोटे किसानों के हितों की रक्षा के लिए ये आंदोलन होते रहे हैं। इन आंदोलनों का मुख्य उद्देश्य वैश्वीकरण और निजीकरण के समय खुली बाजार व्यवस्था में भारतीय हितों की रक्षा करना था। भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन और शेतकारी संगठन जैसे समूह इन प्रयासों के प्रमुख उदाहरण हैं।
In simple words: किसान अधिकार आंदोलन 1991 में वैश्वीकरण और निजीकरण के बाद शुरू हुए। इनका लक्ष्य खुले बाजार में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना था। भारतीय किसान संघ और शेतकारी संगठन इसके उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: कृषक अधिकार आंदोलन पर टिप्पणी लिखते समय, उसकी शुरुआत का समय, मुख्य उद्देश्य (वैश्वीकरण के संदर्भ में) और प्रमुख संगठनों का उल्लेख करें।

 

Question 7. “भारत में सामाजिक आन्दोलन लोकतंत्र में बाधक होने की अपेक्षा उसके विस्तार में सहायक रहते हैं।” व्याख्या कीजिए।
Answer: भारत में सामाजिक आंदोलन लोकतंत्र को कमजोर करने के बजाय उसे मजबूत करने में मदद करते हैं। इसके समर्थन में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं:
(i) जन-आंदोलनों का इतिहास हमें लोकतांत्रिक राजनीति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। गैर-दलीय आंदोलन राजनीतिक दलों की कमियों को दूर करते हैं।
(ii) सामाजिक आंदोलनों ने समाज के उन नए समूहों की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को उठाया, जिन्हें चुनावी राजनीति में जगह नहीं मिल पा रही थी।
(iii) इन आंदोलनों ने समाज के गहरे तनावों और जनता के गुस्से को एक सही दिशा देकर लोकतंत्र की रक्षा की है। इन्होंने भारतीय लोकतंत्र के आधार को भी मजबूत किया है।
In simple words: सामाजिक आंदोलन भारत में लोकतंत्र को मजबूत करते हैं। वे हमें राजनीति को बेहतर समझने में मदद करते हैं, नई समस्याओं को उठाते हैं और जनता के गुस्से को सही रास्ता दिखाते हैं, जिससे लोकतंत्र का आधार मजबूत होता है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आंदोलनों के लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों की व्याख्या करते समय, सकारात्मक तर्कों पर ध्यान केंद्रित करें और उदाहरणों के साथ अपने बिंदुओं को पुष्ट करें।

 

Question 8. 'नर्मदा बचाओ आन्दोलन' के पक्ष और विपक्ष में कोई दो-दो तर्क दीजिए।
Answer: नर्मदा बचाओ आंदोलन के पक्ष और विपक्ष में तर्क इस प्रकार हैं:
**पक्ष में तर्क:**
1. बांध के समर्थकों का कहना था कि इसके निर्माण से तीन पड़ोसी राज्यों को पीने का पानी, सिंचाई और बिजली मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादन भी बढ़ेगा।
2. उनका यह भी मानना था कि बांध बनने से बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं को रोका जा सकेगा। इसलिए, समर्थकों के अनुसार, नर्मदा बचाओ आंदोलन को नहीं चलाना चाहिए था, क्योंकि बांध से कई लाभ मिलते।
**विपक्ष में तर्क:**
1. बांध से संबंधित राज्यों के 245 गांवों के डूबने का खतरा था, जिससे लगभग ढाई लाख लोग विस्थापित हो सकते थे।
2. आलोचकों का तर्क था कि ऐसी परियोजनाओं का लोगों के स्वास्थ्य, उनकी आजीविका, संस्कृति और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है।
In simple words: नर्मदा बचाओ आंदोलन के पक्ष में था कि बांध से पानी, बिजली और खेती में फायदा होगा, और बाढ़ रुकेगी। विपक्ष में था कि बांध से 245 गांव डूब जाएंगे, ढाई लाख लोग बेघर होंगे, और पर्यावरण व लोगों के जीवन पर बुरा असर पड़ेगा।

🎯 Exam Tip: किसी भी विवादास्पद आंदोलन के पक्ष और विपक्ष में तर्कों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करें, जिसमें विभिन्न हितधारकों के दृष्टिकोण शामिल हों।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 15 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. सामाजिक आन्दोलन क्या हैं? सामाजिक आन्दोलनों का श्रेणी विभाजन कीजिए।
Answer: **सामाजिक आंदोलन क्या हैं?** सामाजिक आंदोलन ऐसे संगठित प्रयास होते हैं जो किसी विशेष सामाजिक समस्या को हल करने या समाज को एक नई दिशा देने के लिए चलाए जाते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य वंचित समूहों के हितों की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना है। ये उन सामाजिक समूहों और हितों से संबंधित होते हैं जिन्हें आम तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। सामाजिक आंदोलन एक सचेत, सामूहिक और संगठित मानव प्रयास है जिसका लक्ष्य एक नई व्यवस्था स्थापित करना या पुरानी व्यवस्था में बदलाव लाना है। ये समाज में समय के साथ मानवीय और अन्य वांछित परिवर्तन लाने के लिए सामूहिक प्रयास हैं।
**सामाजिक आंदोलनों का श्रेणी विभाजन:** सामाजिक आंदोलनों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
(i) **परिवर्तनकारी आंदोलन:** ये प्रचलित सामाजिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं में पूरी तरह से बदलाव के पक्षधर होते हैं। नक्सलवादी आंदोलन और वामपंथी आंदोलन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(ii) **सुधारवादी आंदोलन:** ये समाज में प्रचलित असमानताओं और समस्याओं में धीरे-धीरे सुधार के समर्थक होते हैं। आमतौर पर संवैधानिक और संसदीय परंपराओं का उपयोग किया जाता है। अधिकांश गैर-सरकारी संगठन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(iii) **उपचारवादी आंदोलन:** ये आंदोलन किसी एक व्यक्ति विशेष या समस्या पर केंद्रित होते हैं, और इनका उद्देश्य उस विशेष समस्या से मुक्ति दिलाना होता है।
(iv) **वैकल्पिक आंदोलन:** ये आंदोलन पूरी सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था में बदलाव लाकर एक अलग विकल्प स्थापित करने की बात करते हैं। इसमें सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन भी शामिल होता है। नारीवादी आंदोलन इसका एक उदाहरण है।
In simple words: **सामाजिक आंदोलन क्या हैं?** सामाजिक आंदोलन वे प्रयास हैं जो समाज में समस्याओं को ठीक करने या बदलाव लाने के लिए किए जाते हैं। इनका लक्ष्य कमजोर लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें आवाज देना है।
**सामाजिक आंदोलनों के प्रकार:** इन्हें चार भागों में बांटा जा सकता है: (i) परिवर्तनकारी आंदोलन (समाज को पूरी तरह बदलना चाहते हैं, जैसे नक्सलवादी)। (ii) सुधारवादी आंदोलन (समाज में धीरे-धीरे सुधार लाना चाहते हैं)। (iii) उपचारवादी आंदोलन (किसी एक खास समस्या को ठीक करते हैं)। (iv) वैकल्पिक आंदोलन (समाज के लिए नया रास्ता सुझाते हैं, जैसे नारीवादी आंदोलन)।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आंदोलनों को परिभाषित करते समय, उनके उद्देश्य और कार्यप्रणाली को स्पष्ट करें। उनके वर्गीकरण को प्रत्येक प्रकार के नाम और एक संक्षिप्त विवरण के साथ प्रस्तुत करें।

 

Question 2. नर्मदा बचाओ आन्दोलन क्या था? इसके विरुद्ध क्या आलोचना की गयी? अथवा नर्मदा बचाओ आन्दोलन से क्या तात्पर्य है? इसकी आलोचना के प्रमुख बिन्दु बताइए। अथवा नर्मदा बचाओ आन्दोलन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
Answer: **नर्मदा बचाओ आंदोलन क्या था?** नर्मदा बचाओ आंदोलन का मतलब बीसवीं सदी के आठवें दशक की शुरुआत में नर्मदा घाटी में शुरू हुई एक विकास परियोजना से है। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरने वाली नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों पर 30 बड़े, 135 मध्यम और 300 छोटे बांध बनाने का प्रस्ताव था। नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्ययोजना से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार थीं:
(i) गुजरात में सरदार सरोवर और मध्य प्रदेश में नर्मदा सागर बांध को दो सबसे बड़ी और बहुउद्देशीय परियोजनाओं के रूप में तय किया गया था। नर्मदा नदी को बचाने के लिए नर्मदा बचाओ आंदोलन चलाया गया। इस आंदोलन ने बांधों के निर्माण का विरोध किया और देश में चल रही विकास परियोजनाओं की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए।
(ii) सरदार सरोवर परियोजना एक बहुत बड़ा बहुउद्देशीय बांध बनाने का प्रस्ताव था। बांध समर्थकों का कहना था कि इसके निर्माण से गुजरात के एक बड़े हिस्से सहित तीन पड़ोसी राज्यों को पीने का पानी, सिंचाई और बिजली मिलेगी, और कृषि उत्पादन में भी सुधार होगा। बांध की उपयोगिता को इस बात से भी जोड़ा जा रहा था कि इससे बाढ़ और सूखे को नियंत्रित किया जा सकेगा।
In simple words: **नर्मदा बचाओ आंदोलन क्या था?** यह आंदोलन 1980 के दशक में नर्मदा नदी पर कई बड़े बांध बनाने की योजना के खिलाफ था। इसमें मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में बांध बनने थे। आंदोलन ने बांधों का विरोध किया और विकास परियोजनाओं की जरूरत पर सवाल उठाए। बांध के समर्थकों का कहना था कि इससे पीने का पानी, सिंचाई और बिजली मिलेगी, और बाढ़ व सूखा रुकेगा।

🎯 Exam Tip: नर्मदा बचाओ आंदोलन की पृष्ठभूमि, उसके उद्देश्य, प्रमुख कार्य और बांध के पक्ष और विपक्ष में तर्कों को स्पष्ट करें।

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