RBSE Solutions Class 12 Home Science Chapter 18 दस्त एवं ज्वर में आहार

NCERT Solutions for Class 12 Home Science: Chapter 18 दस्त एवं ज्वर में आहार

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RBSE Class 12 Home Science Chapter 18 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(i) दीर्घकालीन दस्त के रोगी को कैसा आहार देना चाहिए?
(अ) कार्बोजविहीन
(ब) रेशेविहीन
(स) प्रोटीन विहीन
(द) इनमें से में कोई नहीं
Answer: (ब) रेशेविहीन
In simple words: लंबे समय तक दस्त से पीड़ित व्यक्ति को ऐसा भोजन देना चाहिए जिसमें फाइबर बहुत कम या बिल्कुल न हो, ताकि पाचन तंत्र पर कम भार पड़े और दस्त कम हों। इस तरह के आहार से आंतों को आराम मिलता है।
🎯 Exam Tip: दीर्घकालीन दस्त के रोगियों के लिए रेशेविहीन आहार महत्वपूर्ण है क्योंकि फाइबर मल को भारी बनाता है, जिससे दस्त और बढ़ सकते हैं।

 

Question 1. (ii) अल्पकालीन दस्त की अवधि होती है –
(अ) 4 - 8 घंटे
(ब) 14-18 घंटे
(स) 24 - 48 घंटे
(अ) चिकिन पॉक्स
(ब) टायफाइड
(स) मलेरिया
(द) टी. बी.
Answer: (स) 24 - 48 घंटे
In simple words: थोड़े समय के लिए होने वाले दस्त आमतौर पर एक से दो दिन तक रहते हैं, यानी 24 से 48 घंटे तक। यह आमतौर पर हल्के होते हैं और जल्दी ठीक हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: अल्पकालीन दस्त अक्सर किसी हल्के संक्रमण या पेट खराब होने के कारण होते हैं और आमतौर पर खुद ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए।

 

Question 1. (iii) ज्वर निम्नलिखित में से किस कारण से होता है?
(अ) चिकिन पॉक्स
(ब) टायफाइड
(स) मलेरिया
(द) टी. बी.
Answer: (अ) चिकिन पॉक्स
In simple words: चिकन पॉक्स, जिसे चेचक भी कहते हैं, एक वायरल इन्फेक्शन है जिससे शरीर में बुखार आ जाता है। यह अक्सर छोटे बच्चों में देखा जाता है।
🎯 Exam Tip: ज्वर कई बीमारियों का एक आम लक्षण है, इसलिए सही बीमारी का पता लगाने के लिए अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

 

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. ______ सप्ताह या उससे अधिक अवधि तक रहने वाले दस्त को दीर्घकालीन दस्त कहते हैं।
2. यदि दस्त लम्बे समय तक चलता है तो ______ एवं ______ का क्षय काफी अधिक हो जाता है।
3. द्रव एवं आवश्यक लवणों की कमी से शरीर में ______ हो सकता है।
4. निर्जलीकरण से बचने के लिए W. H. O. द्वारा प्रस्तावित ______ दिया जाना चाहिए।
5. शारीरिक तापक्रम के बढ़ने एवं तंतुओं के अत्यधिक क्षय होने से ऊर्जा की माँग ______ तक बढ़ जाती है।
Answer:
1. दो
2. द्रव, लवण
3. निर्जलीकरण
4. O. R. S.
5. 50 प्रतिशत
In simple words: दो हफ्ते से ज़्यादा रहने वाले दस्त लंबे समय के दस्त कहलाते हैं, और इनमें शरीर से बहुत सारा पानी और जरूरी नमक निकल जाता है, जिससे निर्जलीकरण हो सकता है। इसे रोकने के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने ओ. आर. एस. (ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन) का सुझाव दिया है। बुखार के दौरान, शरीर का तापमान बढ़ने से ऊर्जा की ज़रूरत 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है क्योंकि शरीर अधिक मेहनत करता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, सुनिश्चित करें कि आपका जवाब वाक्य के अर्थ के साथ पूरी तरह से मेल खाता हो, खासकर जब स्वास्थ्य से जुड़े शब्दों का उपयोग कर रहे हों।

 

Question 3. O.R.S. क्या है? इसकी बनाने की विधि लिखिए।
Answer: ओ.आर.एस. (O.R.S.) का मतलब ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन है। यह निर्जलीकरण से बचने और शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को पूरा करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) द्वारा सुझाया गया एक घोल है।
ओ.आर.एस. घोल बनाने की विधि:
इस घोल को बनाने के लिए सबसे पहले पानी को उबालकर ठंडा करना चाहिए। फिर, 200 मिलीलीटर (लगभग एक गिलास) पानी में ओ.आर.एस. का एक छोटा पैकेट (5.7 ग्राम) डालना चाहिए और इसे अच्छी तरह मिलाना चाहिए। यदि बड़े पैकेट (28.5 ग्राम) का उपयोग कर रहे हैं, तो उसे एक लीटर पानी में घोलना चाहिए। ओ.आर.एस. घोल बनाने के बाद इसे 24 घंटे के अंदर ही इस्तेमाल कर लेना चाहिए। 24 घंटे से पुराना घोल उपयोग में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह खराब हो सकता है।
In simple words: ओ.आर.एस. एक खास तरह का पानी है जिसमें नमक और चीनी होते हैं, जो दस्त के कारण शरीर से निकले हुए पानी और लवणों को वापस भरने में मदद करता है। इसे बनाने के लिए उबले और ठंडे पानी में ओ.आर.एस. पाउडर को ठीक से घोलना चाहिए और 24 घंटे के अंदर इस्तेमाल कर लेना चाहिए।
🎯 Exam Tip: ओ.आर.एस. घोल बनाते समय पानी की मात्रा और ओ.आर.एस. पाउडर की मात्रा का सही अनुपात बनाए रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि गलत अनुपात से घोल बेअसर या हानिकारक हो सकता है।

 

Question 4. अल्पकालीन दस्त एवं दीर्घकालीन दस्त में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: अल्पकालीन दस्त और दीर्घकालीन दस्त में निम्नलिखित अंतर होते हैं:

क्र.सं.अल्पकालीन दस्तदीर्घकालीन दस्त
1.यह दस्त अचानक से शुरू होते हैं और इनमें पानी जैसा, बिना आकार वाला मल बहुत बार निकलता है। इनकी तीव्रता काफी ज्यादा होती है।यह दस्त लंबे समय तक रहते हैं। इस प्रकार के दस्त की तीव्रता थोड़ी कम होती है।
2.रोगी एक घंटे में कई बार शौच जाता है।रोगी एक दिन में 4-5 बार बिना आकार वाला मल निकालता है।
3.दस्त के साथ-साथ पेट दर्द, ऐंठन, कमजोरी, बुखार और उल्टी जैसी सामान्य समस्याएं होती हैं।इस स्थिति में भोजन छोटी आंत से बहुत तेज़ी से गुज़र जाता है, जिससे पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित होने का समय नहीं मिलता और कुपोषण से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
4.अल्पकालीन दस्त आमतौर पर 24 से 48 घंटे तक रहते हैं।यह दस्त दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बने रहते हैं।
5.इस दौरान निर्जलीकरण का डर रहता है, इसलिए पानी और खनिज लवणों की पूर्ति बहुत जरूरी होती है। हालांकि, पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना उतना महत्वपूर्ण नहीं होता।इस स्थिति में पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना और अतिरिक्त पोषक तत्वों की पूर्ति करना जरूरी होता है, ताकि शरीर में हुई कमी की भरपाई हो सके।

In simple words: अल्पकालीन दस्त कुछ दिनों तक चलते हैं और तीव्र होते हैं, जबकि दीर्घकालीन दस्त लंबे समय तक (दो सप्ताह से अधिक) रहते हैं और इनकी तीव्रता कम होती है। दोनों में ही पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होती है, लेकिन दीर्घकालीन दस्त में कुपोषण का खतरा अधिक होता है।
🎯 Exam Tip: दस्त के प्रकारों का अंतर स्पष्ट करते समय, अवधि, तीव्रता, लक्षणों और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के बिंदुओं को प्रमुखता से उजागर करें।

 

Question 5. ज्वर क्या है? ज्वर की स्थिति में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।
Answer: ज्वर या बुखार तब होता है जब शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, आमतौर पर 98.4°F (36.9°C) से ऊपर। यह शरीर की किसी संक्रमण या बीमारी से लड़ने की प्रतिक्रिया होती है।
ज्वर की स्थिति में शरीर में होने वाले शारीरिक परिवर्तन निम्नलिखित हैं:
• ज्वर के दौरान शरीर की आहारीय उपापचय दर (खाने से ऊर्जा बनाने की गति) बढ़ जाती है।
• ग्लाइकोजन (शरीर में संग्रहित चीनी) और वसीय ऊतकों (फैट) का क्षय होने लगता है, जिससे शरीर के ऊर्जा भंडार में कमी आ जाती है।
• सांस लेने की गति बढ़ जाती है, जिससे फेफड़ों और रक्त परिसंचरण प्रणाली पर अधिक काम का बोझ पड़ता है।
• पाचन तंत्र में समस्याएं आती हैं, जिससे भूख कम लगती है और भोजन धीरे पचता है।
• भोजन को देखकर भी उल्टी जैसा महसूस हो सकता है और खाने की इच्छा खत्म हो जाती है।
• लंबे समय तक बुखार रहने से व्यक्ति कुपोषित हो सकता है।
• शारीरिक कमजोरी बढ़ती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है।
In simple words: बुखार का मतलब है शरीर का तापमान सामान्य से ऊपर जाना। जब ऐसा होता है, तो शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है, अंदर की ऊर्जा खत्म होने लगती है, सांस तेज़ हो जाती है, पाचन खराब हो जाता है, और कमजोरी महसूस होती है।
🎯 Exam Tip: ज्वर के शारीरिक परिवर्तनों का वर्णन करते समय, उपापचय दर, ऊर्जा भंडार, पाचन क्रिया और प्रतिरक्षा प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझाना चाहिए।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 18 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. आमाशय एवं आंत्र की मांसपेशियों की सामान्य क्रियाशीलता के लिए अत्यन्त आवश्यक है -
(अ) सोडियम
(ब) पोटेशियम
(स) क्लोराइड
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ब) पोटेशियम
In simple words: पेट और आंतों की मांसपेशियों को ठीक से काम करने के लिए पोटेशियम बहुत जरूरी होता है। यह एक खनिज है जो शरीर के कार्यों को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों और तंत्रिका कार्यों के लिए पोटेशियम एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है, और इसकी कमी से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

 

Question 2. दस्त होने पर शरीर में निम्न विटामिनों की कमी पाई जाती है -
(अ) राइबोफ्लेविन, विटामिन A, विटामिन C
(ब) विटामिन D, विटामिन B6, विटामिन K
(स) विटामिन B12, फोलिक एसिड, नियासिन
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (स) विटामिन B12, फोलिक एसिड, नियासिन
In simple words: दस्त होने पर शरीर में विटामिन B12, फोलिक एसिड और नियासिन जैसे जरूरी विटामिनों की कमी हो सकती है। ये विटामिन पानी में घुलनशील होते हैं और दस्त के दौरान तेजी से बाहर निकल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: दस्त के दौरान विटामिनों की कमी को रोकने के लिए, डॉक्टर की सलाह पर विटामिन सप्लीमेंट्स लेना या ऐसे आहार का सेवन करना महत्वपूर्ण है जो इन पोषक तत्वों से भरपूर हो।

 

Question 3. दीर्घकालीन दस्त की अवधि होती है -
(अ) दो सप्ताह या उससे अधिक
(ब) 1 सप्ताह या उससे अधिक
(स) 3 सप्ताह या उससे अधिक
(द) चार सप्ताह या उससे अधिक
Answer: (अ) दो सप्ताह या उससे अधिक
In simple words: जब दस्त दो हफ्तों से ज्यादा समय तक चलते रहते हैं, तो उन्हें दीर्घकालीन दस्त कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है।
🎯 Exam Tip: दीर्घकालीन दस्त के लिए तत्काल चिकित्सा सलाह लेना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कुपोषण और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

 

Question 4. अल्पकालीन दस्त में रोगी कितने बार मल विसर्जित करता है?
(अ) 4 - 5 बार
(ब) अनेक बार
(स) 6 - 7 बार
(द) 3 - 4 बार
Answer: (ब) अनेक बार
In simple words: अल्पकालीन दस्त में रोगी एक दिन में कई बार शौचालय जा सकता है। यह दर्शाता है कि पाचन तंत्र बहुत सक्रिय हो गया है।
🎯 Exam Tip: अल्पकालीन दस्त की पहचान अक्सर मल त्याग की बहुत अधिक आवृत्ति से होती है, जिसमें शरीर से बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ का नुकसान होता है।

 

Question 5. कमजोरी एवं शारीरिक वजन में कमी की पूर्ति हेतु ऊर्जा की माँग में कितनी अतिरिक्त वृद्धि की जानी चाहिए?
(अ) 10 - 15 प्रतिशत
(ब) 5 - 10 प्रतिशत
(स) 10 - 20 प्रतिशत
(द) 20 - 25 प्रतिशत
Answer: (स) 10 - 20 प्रतिशत
In simple words: जब व्यक्ति कमजोर होता है या उसका वजन घटता है, तो शरीर को ठीक होने के लिए 10 से 20 प्रतिशत अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। यह अतिरिक्त ऊर्जा शरीर को ताकत देती है।
🎯 Exam Tip: पोषण संबंधी उपचार में, ऊर्जा की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए उच्च-कैलोरी और पोषक तत्वों से भरपूर आहार देना महत्वपूर्ण है, खासकर बीमारी से उबरने के दौरान।

 

Question 6. शरीर का सामान्य तापक्रम होता है -
(अ) 98.4°F
(ब) 97°F
(स) 97.4°F
(द) 99°F
Answer: (अ) 98.4°F
In simple words: एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर का सामान्य तापमान लगभग 98.4 डिग्री फारेनहाइट होता है। इसमें थोड़ा-बहुत बदलाव सामान्य होता है।
🎯 Exam Tip: शरीर का सामान्य तापमान जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बुखार या हाइपोथर्मिया जैसी स्थितियों का पता लगाने का आधार प्रदान करता है।

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. दस्त एवं ज्वर सामान्य रूप से...........रोग है।
2. शिशु एवं बच्चों के लिए दस्त...........बन सकते हैं।
3. ऊर्जा की बढ़ी हुई माँग को पूरा करने के लिए उच्च...........युक्त आहार लेना चाहिए।
4. दीर्घकालीन ज्वर की तीव्रता अपेक्षाकृत........... है।
5. अवधि एवं तीव्रता के आधार पर ज्वर को...........प्रकारों में बाँटा जा सकता है।
6. ज्वर में फेफड़े तथा रक्त...........तंत्र को...........कार्य करना पड़ता है।
Answer:
1. सामान्य
2. जानलेवा
3. प्रोटीन
4. कम
5. तीन
6. परिसंचरण, अधिक
In simple words: दस्त और बुखार आम बीमारियाँ हैं जो बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती हैं। बढ़ी हुई ऊर्जा की ज़रूरत को पूरा करने के लिए प्रोटीन युक्त खाना खाना चाहिए। लंबे बुखार की तीव्रता कम होती है। बुखार को उसके समय और गंभीरता के हिसाब से तीन तरह का बताया गया है। बुखार होने पर फेफड़ों और खून को पूरे शरीर में घुमाने वाले सिस्टम पर ज्यादा काम का बोझ पड़ता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, प्रत्येक वाक्य के संदर्भ को ध्यान से समझें ताकि सबसे उपयुक्त और सटीक शब्द का चयन किया जा सके, जिससे जानकारी सही बनी रहे।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 18 अति लघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. दूषित वायु एवं जल से होने वाले रोगों के नाम लिखिए।
Answer: दूषित हवा और पानी से होने वाले कुछ रोग हैं:
• दस्त
• ज्वर
In simple words: गंदी हवा और पानी से दस्त और बुखार जैसी बीमारियाँ होती हैं। इसलिए साफ-सफाई बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: दूषित जल और वायु से होने वाले रोगों के नाम बताते समय, प्रमुख जलजनित और वायुजनित बीमारियों को शामिल करना चाहिए।

 

Question 2. दस्त की अवस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन लिखिए।
Answer: दस्त की अवस्था में शरीर में कई परिवर्तन होते हैं। इस स्थिति में, विभिन्न कीटाणु और बाहरी तत्व पेट और आंतों की अंदरूनी परत में जलन और सूजन पैदा कर देते हैं। इससे पाचन क्रिया पर सीधा असर पड़ता है और शरीर से तरल पदार्थ का तेजी से नुकसान होता है।
In simple words: दस्त होने पर कीटाणु पेट और आंतों में सूजन कर देते हैं, जिससे शरीर से बहुत सारा पानी निकल जाता है। यह पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: दस्त के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तनों को समझाते समय, आंतों की सूजन और तरल पदार्थ की हानि पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जो निर्जलीकरण का मुख्य कारण है।

 

Question 3. अवधि एवं तीव्रता के आधार पर दस्त कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: अवधि और गंभीरता के आधार पर दस्त दो प्रकार के होते हैं:
• अल्पकालीन दस्त (जो कम समय तक रहते हैं)
• दीर्घकालीन दस्त (जो लंबे समय तक रहते हैं)
In simple words: दस्त को उनके रहने के समय और कितनी तेजी से होते हैं, इसके आधार पर दो मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है- अल्पकालीन और दीर्घकालीन। अल्पकालीन दस्त थोड़े समय के लिए होते हैं, जबकि दीर्घकालीन दस्त लंबे समय तक रहते हैं।
🎯 Exam Tip: दस्त के प्रकारों को परिभाषित करते समय, अल्पकालीन और दीर्घकालीन के बीच अवधि और तीव्रता के अंतर को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. पानी की कमी एवं लवणों के असंतुलन से शरीर में होने वाली समस्याएँ लिखिए।
Answer: शरीर में पानी की कमी और लवणों के असंतुलन से कई समस्याएं होती हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. भूख न लगना
2. उल्टी होना
3. सुस्ती और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
In simple words: जब शरीर में पानी और नमक कम हो जाते हैं, तो भूख नहीं लगती, उल्टी आती है और शरीर बहुत कमजोर महसूस होता है। यह निर्जलीकरण के लक्षण हैं।
🎯 Exam Tip: पानी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के लक्षणों को सूचीबद्ध करते समय, भूख न लगना, उल्टी और मांसपेशियों की कमजोरी जैसे आम संकेतों को शामिल करें, जो निर्जलीकरण को दर्शाते हैं।

 

Question 6. दस्त के समय रोगी को भूखा क्यों नहीं रखना चाहिए?
Answer: दस्त के समय रोगी को भूखा नहीं रखना चाहिए क्योंकि इस दौरान शरीर से बहुत अधिक मात्रा में पानी, लवण और ऊतक प्रोटीन निकल जाते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) हो जाती है। शरीर को पोषण और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए रोगी को थोड़े-थोड़े समय बाद तरल और सुपाच्य भोज्य पदार्थ अवश्य देने चाहिए। इससे शरीर को हाइड्रेटेड रखने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिलती है।
In simple words: दस्त होने पर शरीर से पानी और ताकत निकल जाती है, इसलिए रोगी को कमजोर होने से बचाने के लिए भूखा नहीं रखना चाहिए। उसे थोड़ी-थोड़ी देर में हल्का तरल खाना देना चाहिए।
🎯 Exam Tip: दस्त के दौरान रोगी को पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थ देना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि निर्जलीकरण और कुपोषण को रोका जा सके।

 

Question 7. W. H. O. से क्या अभिप्राय है?
Answer: W.H.O. का मतलब विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो दुनिया भर में स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर काम करती है।
In simple words: डब्ल्यू.एच.ओ. का मतलब विश्व स्वास्थ्य संगठन है, जो पूरी दुनिया में लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने वाली एक बड़ी संस्था है।
🎯 Exam Tip: डब्ल्यू.एच.ओ. का पूर्ण रूप लिखते समय "World Health Organisation" का सही स्पेलिंग सुनिश्चित करें।

 

Question 8. ओ. आर. एस. का पूरा नाम लिखिए।
Answer: ओ.आर.एस. (O.R.S.) का पूरा नाम ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन (Oral Rehydration Solution) है। यह दस्त के कारण हुए निर्जलीकरण का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
In simple words: ओ.आर.एस. का पूरा नाम ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन है, जिसका इस्तेमाल शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: ओ.आर.एस. का पूर्ण रूप लिखते समय स्पेलिंग और अंग्रेजी शब्दों का सही उपयोग सुनिश्चित करें।

 

Question 9. दस्त की स्थिति में सुधार होने पर दिया जाने वाला आहार लिखिए।
Answer: दस्त की स्थिति में सुधार होने पर रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर में कम मात्रा में तरल और अर्द्ध ठोस, आसानी से पचने योग्य भोज्य पदार्थ देने चाहिए। इसमें हल्के सूप, चावल का पानी, पतला दलिया और नरम फल शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य धीरे-धीरे रोगी के पाचन तंत्र को सामान्य स्थिति में लाना होता है।
In simple words: दस्त ठीक होने लगे तो रोगी को धीरे-धीरे हल्का और आसानी से पचने वाला तरल या थोड़ा ठोस खाना देना चाहिए।
🎯 Exam Tip: दस्त से उबरने के दौरान आहार में धीरे-धीरे परिवर्तन करना महत्वपूर्ण है, जिससे पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

 

Question 10. ज्वर क्या है?
Answer: शरीर के तापमान का सामान्य स्तर (98.4°F) से अधिक हो जाना ज्वर या बुखार कहलाता है। यह अक्सर शरीर में किसी संक्रमण या बीमारी की प्रतिक्रिया होती है।
In simple words: जब शरीर का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है, तो उसे बुखार कहते हैं। यह आमतौर पर शरीर में किसी बीमारी का संकेत होता है।
🎯 Exam Tip: ज्वर की परिभाषा में शरीर के तापमान की सामान्य सीमा और बढ़ी हुई स्थिति दोनों का उल्लेख करना चाहिए।

 

Question 11. अल्पकालीन ज्वर के दो उदाहरण लिखिए।
Answer: अल्पकालीन ज्वर के दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:
• चिकन पॉक्स (चेचक)
• टाइफाइड की स्थिति में आने वाले ज्वर
In simple words: चिकन पॉक्स और टाइफाइड के शुरुआती दिनों में आने वाला बुखार अल्पकालीन ज्वर के उदाहरण हैं। ये बीमारियाँ कुछ समय के लिए ही बुखार पैदा करती हैं।
🎯 Exam Tip: अल्पकालीन ज्वर के उदाहरणों में ऐसी बीमारियाँ शामिल करनी चाहिए जिनकी बुखार की अवधि अपेक्षाकृत छोटी होती है, जैसे सामान्य फ्लू या वायरल संक्रमण।

 

Question 13. ज्वर की स्थिति में ऊर्जा, प्रोटीन, कार्बोज, खनिज लवण एवं विटामिन की माँग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: ज्वर की स्थिति में शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है क्योंकि शरीर का तापमान बढ़ने से उपापचय दर बढ़ जाती है। इसी कारण, ऊर्जा, प्रोटीन, कार्बोज (कार्बोहाइड्रेट), खनिज लवण और विटामिन ए एवं सी जैसे पोषक तत्वों की माँग बढ़ जाती है। प्रोटीन की बढ़ी हुई माँग इसलिए भी होती है क्योंकि बीमारी के दौरान शरीर के ऊतकों का क्षय होता है।
In simple words: बुखार में शरीर को ज्यादा ऊर्जा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज और विटामिन ए व सी चाहिए होते हैं क्योंकि शरीर बीमारी से लड़ने के लिए अधिक काम करता है।
🎯 Exam Tip: ज्वर के दौरान पोषक तत्वों की बढ़ी हुई मांग का वर्णन करते समय, प्रत्येक पोषक तत्व की आवश्यकता बढ़ने का कारण भी स्पष्ट करना चाहिए (जैसे उपापचय दर में वृद्धि, ऊतक क्षय)।

 

Question 14. ज्वर उतर जाने की स्थिति में रोगी को कैसा आहार देना चाहिए?
Answer: ज्वर उतर जाने के बाद रोगी को ऊर्जा से भरपूर आहार दिया जाना चाहिए। इस आहार में आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और स्वस्थ वसा शामिल होने चाहिए ताकि शरीर की खोई हुई ऊर्जा और शक्ति को फिर से प्राप्त किया जा सके। धीरे-धीरे, ठोस और पौष्टिक भोजन देना शुरू कर देना चाहिए।
In simple words: बुखार ठीक होने के बाद रोगी को ताकत देने वाला और आसानी से पचने वाला भोजन देना चाहिए, ताकि शरीर फिर से मजबूत बन सके।
🎯 Exam Tip: ज्वर के बाद दिए जाने वाले आहार में ऊर्जा-सघन और प्रोटीन-समृद्ध खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए ताकि शरीर की रिकवरी को बढ़ावा मिले।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 18 लघुत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. ज्वर की स्थिति में रोगी व्यक्ति को भोजन देते समय किन-किन महत्त्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
Answer: ज्वर की स्थिति में रोगी व्यक्ति को भोजन देते समय निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:
• ज्वर के दौरान रोगी को वसा युक्त भोजन नहीं देना चाहिए, क्योंकि वसा को पचाना मुश्किल होता है।
• भोजन में अधिक मिर्च-मसालों का प्रयोग नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह पेट में जलन पैदा कर सकते हैं।
• भोजन संतुलित होना चाहिए, जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में हों।
• भोजन में सादे तरल पेय पदार्थों को शामिल करना चाहिए, जैसे सूप, जूस या नारियल पानी, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं।
• आहार में अधिक ऊर्जा और अधिक प्रोटीनयुक्त भोजन पदार्थों का समावेश होना चाहिए, ताकि शरीर की ऊर्जा और ऊतक क्षति की भरपाई हो सके।
• भोजन में पर्याप्त नमक और फलों का रस देना चाहिए, जिससे पसीने के रूप में निकलने वाले खनिज लवणों और पानी की अत्यधिक हानि की पूर्ति हो सके।
In simple words: बुखार के मरीज को वसा और मसाले वाला खाना नहीं देना चाहिए। उसे संतुलित, तरल और ऊर्जा व प्रोटीन से भरपूर भोजन देना चाहिए, जिसमें नमक और फलों का रस भी शामिल हो ताकि शरीर में पानी और नमक की कमी न हो।
🎯 Exam Tip: ज्वर के रोगी के आहार को प्लान करते समय, आसानी से पचने योग्य, संतुलित, हाइड्रेटिंग और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें, जबकि मसालेदार और वसायुक्त भोजन से बचें।

 

Question 2. किन परिस्थितियों में ऊर्जा की माँग 50% तक बढ़ जाती है?
Answer: ऊर्जा की माँग निम्नलिखित परिस्थितियों में 50% तक बढ़ जाती है:
• ज्वर में शारीरिक तापक्रम बढ़ने से, क्योंकि शरीर को अपने तापमान को बनाए रखने और संक्रमण से लड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
• ऊतकों के अत्यधिक क्षय के कारण, क्योंकि शरीर को क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत और नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए होती है।
• उपापचय दर में वृद्धि के कारण, क्योंकि बीमारी के दौरान शरीर की आंतरिक क्रियाएं तेज हो जाती हैं।
• बेचैनी एवं अस्थिरता के कारण, क्योंकि तनाव और शारीरिक गतिविधि भी ऊर्जा की खपत को बढ़ाती है।
In simple words: जब बुखार में शरीर का तापमान बढ़ जाता है, ऊतक खराब होने लगते हैं, शरीर की अंदरूनी क्रियाएं तेज़ हो जाती हैं, और व्यक्ति बेचैन रहता है, तो उसे 50% अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा की मांग में वृद्धि की स्थितियों का वर्णन करते समय, प्रत्येक कारण को स्पष्ट रूप से जोड़ें कि वह शरीर की ऊर्जा खपत को क्यों बढ़ाता है (जैसे बुखार में मेटाबॉलिक दर का बढ़ना)।

 

Question 4. ज्वर से क्या अभिप्राय है? ज्वर को कितने प्रकारों में बाँटा जा सकता है?
Answer: शरीर के तापमान का सामान्य स्तर (98.4°F) से अधिक हो जाना ज्वर या बुखार कहलाता है। यह शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है जो किसी संक्रमण या बीमारी के जवाब में होती है।
ज्वर के प्रकार:
अवधि और तीव्रता के आधार पर ज्वर को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है:
(क) अल्पकालीन ज्वर:
इस प्रकार के ज्वर की तीव्रता बहुत अधिक होती है, लेकिन यह कम समय तक ही रहता है। इसके उदाहरणों में सर्दी, जुकाम, चिकन पॉक्स (चेचक) और टाइफाइड जैसे संक्रमणों से होने वाला बुखार शामिल है।
(ख) दीर्घकालीन ज्वर:
इस प्रकार के ज्वर की तीव्रता अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन यह काफी लंबे समय तक बना रहता है। इसके उदाहरण तपेदिक (टीबी) या राजयक्ष्मा रोग में होने वाले ज्वर हैं।
(ग) मध्यमकालीन ज्वर:
यह ज्वर न तो बहुत तीव्र होता है और न ही बहुत लंबे समय तक चलता है। इसका एक उदाहरण मलेरिया रोग में आने वाला ज्वर है।
In simple words: बुखार का मतलब है जब शरीर का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाए। बुखार को उसके रहने के समय और कितनी तेजी से आता है, इसके आधार पर तीन तरह का बताया गया है: अल्पकालीन (जैसे जुकाम का बुखार), दीर्घकालीन (जैसे टीबी का बुखार) और मध्यमकालीन (जैसे मलेरिया का बुखार)।
🎯 Exam Tip: ज्वर के प्रकारों को समझाते समय, प्रत्येक प्रकार (अल्पकालीन, दीर्घकालीन, मध्यमकालीन) की अवधि, तीव्रता और संबंधित बीमारियों के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 5. अल्पकालीन ज्वर एवं दीर्घकालीन ज्वर में अन्तर स्पष्ट करिए।
Answer: अल्पकालीन ज्वर और दीर्घकालीन ज्वर में निम्नलिखित अंतर होते हैं:
• अल्पकालीन ज्वर की तीव्रता अधिक होती है और रोगी कभी-कभी बेहोशी की अवस्था में भी जा सकता है। इसके विपरीत, दीर्घकालीन ज्वर की स्थिति में रोगी आमतौर पर असामान्य स्थिति (बेहोशी) में नहीं होता है, क्योंकि इसकी तीव्रता कम होती है।
In simple words: अल्पकालीन बुखार बहुत तेज होता है और कभी-कभी मरीज बेहोश भी हो सकता है, जबकि दीर्घकालीन बुखार कम तेज होता है और मरीज अक्सर सामान्य होश में रहता है।
🎯 Exam Tip: अल्पकालीन और दीर्घकालीन ज्वर के बीच अंतर करते समय, तीव्रता और रोगी की चेतना की स्थिति जैसे प्रमुख भेदकों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 18 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. ज्वर की स्थिति में विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
Answer: ज्वर की स्थिति में शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न पोषक तत्वों की माँग बढ़ जाती है:
(1) ऊर्जा:
ज्वर में शरीर का तापमान बढ़ने और ऊतकों के अत्यधिक क्षय के कारण ऊर्जा की माँग 50% तक बढ़ जाती है। रोग की प्रकृति और गंभीरता भी ऊर्जा की आवश्यकता को प्रभावित करती है। बेचैनी और अस्थिरता भी ऊर्जा की खपत को बढ़ाती है।
(2) प्रोटीन:
प्रोटीन का उपापचय बढ़ जाने के कारण प्रोटीन की माँग बढ़ जाती है। यदि ज्वर लंबे समय तक रहता है, तो एक वयस्क व्यक्ति के लिए आहार में प्रोटीन की मात्रा 100 ग्राम या इससे अधिक करने का सुझाव दिया गया है।
(3) कार्बोज:
ज्वर की स्थिति में यकृत और वसीय ऊतकों में संग्रहित ग्लाइकोजन (ऊर्जा भंडार) की कमी आने से कार्बोज (कार्बोहाइड्रेट) की माँग बढ़ जाती है। यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
(4) जल एवं खनिज लवण:
शरीर से पसीने के रूप में पानी और खनिज लवणों का उत्सर्जन होता है, इसलिए इनकी माँग भी बढ़ जाती है। पानी की कमी को रोकने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ देना महत्वपूर्ण है।
(5) विटामिन:
ज्वर में विटामिन ए और सी की माँग बढ़ जाती है, साथ ही ऊर्जा की बढ़ी हुई माँग के अनुपात में बी-समूह के कुछ विटामिनों की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। ये विटामिन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं।
In simple words: बुखार में शरीर को ज्यादा ऊर्जा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, पानी, खनिज और विटामिन ए, सी, और बी-समूह की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का तापमान बढ़ने, ऊतक खराब होने और उपापचय दर बढ़ने से इनकी खपत बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: ज्वर के दौरान प्रत्येक पोषक तत्व की बढ़ी हुई मांग को समझाते समय, उनके शारीरिक कार्यों और बीमारी की प्रतिक्रिया के साथ उनके संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 2. ज्वर में पोषणिक आवश्यकताओं का उल्लेख करिए।
Answer: ज्वर में पोषण संबंधी आवश्यकताएँ निम्नलिखित हैं:
• ज्वर में भूख कम लगने के कारण, रोगी का आहार संतुलित और स्वादिष्ट होना चाहिए ताकि वह उसे आसानी से खा सके और पोषण प्राप्त कर सके।
• बुखार कम होने पर, आहार में धीरे-धीरे बदलाव करके उसे सामान्य आहार पर लाना चाहिए।
• अत्यधिक तेज ज्वर की स्थिति में, ग्लूकोज का पानी, फलों का रस, सब्जियों और दालों का सूप जैसे सादे तरल पेय पदार्थ दिए जाने चाहिए।
• पाचन तंत्र पर अनावश्यक भार न पड़े और शरीर को पर्याप्त संतुलित आहार मिलता रहे, इसके लिए 2-3 घंटे के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा आहार देते रहना चाहिए।
• ज्वर से ग्रस्त व्यक्ति को तले-भुने और मिर्च-मसाले वाले पदार्थ नहीं देने चाहिए, क्योंकि ये पचाने में मुश्किल होते हैं और पेट में जलन पैदा कर सकते हैं।
• शरीर से पसीने के रूप में पानी और खनिज लवणों के अत्यधिक नुकसान की भरपाई के लिए भोजन में पर्याप्त नमक और फलों का रस दिया जाना चाहिए।
In simple words: बुखार में रोगी को संतुलित, स्वादिष्ट और आसानी से पचने वाला खाना देना चाहिए। उसे तरल पदार्थ, सूप, और फलों का रस थोड़े-थोड़े समय पर देना चाहिए। मिर्च-मसाले और तले हुए खाने से बचना चाहिए, और नमक व फलों का रस देकर पानी और लवणों की कमी पूरी करनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: ज्वर के रोगी की पोषण आवश्यकताओं का वर्णन करते समय, आहार की प्रकृति (संतुलित, तरल, सुपाच्य), भोजन की आवृत्ति, और किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, इन सभी बिंदुओं को शामिल करें।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 18 प्रयोगात्मक प्रश्न

 

Question 1. दस्त के रोगी की परिवर्तित आहार – तालिका बनाइए।
Answer: दस्त के रोगी के लिए परिवर्तित आहार-तालिका इस प्रकार है:

आहार ग्रहण करने का समयवर्तमान आहार (सामान्य)दस्त में परिवर्तित आहार
प्रातः 7 बजेचायचाय नींबू की
प्रातः 8 बजेब्रेड, पोहाशहद के साथ, नारंगी का जूस
प्रातः 10.30 बजेठंडाईमूंग की दाल का पानी, गाजर का सूप
दोपहर 12.30 बजेचपाती, नान, शाही पुलाव, दाल-मखनी, हरी सब्ज़ियाँ, बेक्ड शिमला मिर्च, श्रीखण्डगाजर का सूप, मिश्रित सब्जियों का छना हुआ जल, अनन्नास का जूस
सायंकालीन चाय/नाश्ता 4 बजेसन्तरे का रस-कटलेटनींबू के साथ फ्रूट जैली
रात्रि का भोजन 7 बजेटमाटर का सूप, चपाती, पालक पनीर की सब्ज़ी, नवरत्न कोरमा, पापड़, फ्रूट, सलाद।नान शुगर कैन्डी, पालक का छना हुआ पानी, कॉफी

In simple words: दस्त के रोगी के लिए आहार में बदलाव किया जाता है। सामान्य खाने की चीजों की जगह ऐसे भोजन और पेय दिए जाते हैं जो हल्के हों, आसानी से पचें और शरीर को ताकत दें, जैसे नींबू वाली चाय, जूस, सूप और उबली हुई सब्जियाँ।
🎯 Exam Tip: दस्त के रोगी के लिए आहार तालिका बनाते समय, खाद्य पदार्थों को उनकी सुपाच्यता और पोषक तत्वों की पूर्ति के आधार पर चुनें, और धीरे-धीरे ठोस आहार की ओर बढ़ें।

 

Question 3. छात्राएँ अध्यापिका की सहायता से कक्षा में जीवन-रक्षक घोल बनाएँ।
Answer: छात्राएँ अध्यापिका की सहायता से कक्षा में जीवन-रक्षक घोल (ओ.आर.एस.) तैयार करेंगी। इसमें पानी, चीनी और नमक का सही अनुपात मिलाकर घोल बनाया जाता है, जो निर्जलीकरण को रोकने में मदद करता है।
In simple words: छात्राएँ अपनी टीचर की मदद से क्लास में ओ.आर.एस. का घोल बनाएँगी, जो शरीर में पानी की कमी होने पर मदद करता है।
🎯 Exam Tip: जीवन-रक्षक घोल (ओ.आर.एस.) बनाने की प्रक्रिया में स्वच्छता और सामग्री के सही अनुपात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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