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Detailed Chapter 17 विशिष्ट अवस्था में पोषण- धात्रीवस्था RBSE Solutions for Class 12 Home Science
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Class 12 Home Science Chapter 17 विशिष्ट अवस्था में पोषण- धात्रीवस्था RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Home Science Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित में में से सही उत्तर चुनें –
(i) नवजात शिशु केवल माँ के दूध पर पलता है –
(अ) प्रथम 3 माह
(ब) प्रथम 4 माह
(स) प्रथम 6 माह
(द) प्रथम 1 वर्ष
Answer: (अ) प्रथम 3 माह
In simple words: जन्म के बाद शुरुआती तीन महीने तक शिशु पूरी तरह माँ के दूध पर निर्भर रहता है। यह उसके विकास के लिए बहुत जरूरी होता है।
🎯 Exam Tip: नवजात शिशु के लिए माँ का दूध सबसे उत्तम पोषण होता है, क्योंकि इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में मौजूद होते हैं जो शिशु के विकास के लिए जरूरी हैं।
Question 1. (ii) एक स्वस्थ महिला प्रारम्भ में दूध स्रावित करती है –
(अ) 750 मिली.
(ब) 900 मिली.
(स) 1000 मिली.
Question 1. (iv) आजकल धात्री माताएँ पारम्परिक व्यंजनों का उपयोग नहीं करती हैं, क्योंकि वे हो जाएँगी –
(अ) मोटी
(ब) बेडौल
(स) थुलथुल
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: आजकल दूध पिलाने वाली माताएँ पारंपरिक भोजन इसलिए नहीं खातीं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे वे मोटी, बेडौल और थुलथुल हो जाएंगी। वे अपने शरीर के आकार को लेकर चिंतित रहती हैं।
🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य गलतफहमी है कि पारंपरिक पौष्टिक भोजन से वजन बहुत बढ़ जाता है, जबकि ये खाद्य पदार्थ धात्री माताओं को आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. धात्रीवस्था शिशु के जन्म से...........करवाने तक बनी रहती है।
2. धात्रीवस्था में...........लवण की अतिरिक्त आवश्यकता प्रस्तावित नहीं की गई है।
3. पारम्परिक देशी दवाइयों के सेवन से मातृ दुग्ध के...........व...........में वृद्धि होती है।
4...........को अपने आहार में प्रोटीन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मिश्रित भोज्य पदार्थ; जैसे – अनाज-दाल / अनाज-दूध / दाल-दूध का उपभोग करना चाहिए।
Answer:
1. स्तनपान
2. लौह
3. निर्माण, स्रावण
4. शाकाहारी महिला।
In simple words: यह अवस्था शिशु के जन्म से स्तनपान तक होती है। इस समय आयरन जैसे कुछ पोषक तत्वों की अधिक जरूरत नहीं होती है। कुछ घरेलू दवाएँ दूध बनाने और उसे बाहर निकालने में मदद करती हैं, और शाकाहारी महिलाओं को प्रोटीन के लिए दाल-अनाज के मिश्रण खाने चाहिए।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, वाक्य के संदर्भ को ध्यान में रखें और सबसे उपयुक्त शब्द का चयन करें जो वाक्य को पूरा करता हो।
Question 3. स्तनपान कराना धात्री माँ के लिये भी लाभप्रद है, समझाइये।
Answer:
• गर्भावस्था के दौरान माँ के शरीर में जमा हुई वसा का उपयोग स्तनपान से होता है, जिससे माँ 6-10 महीने में ही गर्भावस्था से पहले के आकार में वापस आ जाती है।
• स्तनपान से माँ और शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है।
• स्तनपान कराने से माँ को शांति और सुख मिलता है, जिससे माँ और शिशु दोनों को खुशी मिलती है।
• स्तनपान से माँ अपने शिशु को पूरा और संतुलित आहार दे सकती है।
• शिशु के आहार पर माँ को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता है।
• धात्री अवस्था में स्तनपान से गर्भाशय जल्दी ही अपने पुराने आकार में लौट आता है।
• स्तनपान कराने से माँ को स्तन-कैंसर का खतरा कम हो जाता है। माँ को शिशु के पोषण की जिम्मेदारी होती है।
In simple words: स्तनपान कराने से माँ का वजन कम होता है, माँ और बच्चे का रिश्ता गहरा होता है, माँ को शांति मिलती है, बच्चे को पूरा पोषण मिलता है और पैसों की बचत होती है। यह गर्भाशय को ठीक करता है और स्तन कैंसर का जोखिम भी कम करता है।
🎯 Exam Tip: धात्री माँ के लिए स्तनपान के लाभों को सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य पहलुओं में बांटकर याद रखें ताकि कोई भी बिंदु छूटे नहीं।
Question 4. कम दुग्ध स्रावण के कारणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: कम दुग्ध स्रावण के कारण (Causes of Low Secretion of Breast Milk):
• धात्री अवस्था में माँ की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। यदि ये जरूरतें पूरी नहीं होतीं, तो दूध कम बनने लगता है।
• आजकल की आधुनिक माताएँ स्तनपान को कम महत्व देती हैं। इसलिए, यदि शिशु को स्तनपान नहीं कराया जाता, तो भी दूध कम बनता है।
• यदि माँ स्वयं कमजोर या दुबली-पतली है, तो वह पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं बना पाती।
• कामकाजी महिलाओं को 6-7 घंटे घर से बाहर रहना पड़ता है। इस लंबे समय तक शिशु को दूध नहीं पिला पाने के कारण भी दूध कम बन जाता है।
• यदि माँ व्रत या उपवास के कारण खाना नहीं खाती, तो भी दूध कम बनने लगता है।
• यदि माँ तनाव में या परेशान रहती है, तो भी दूध का स्राव कम हो जाता है।
• यदि माँ स्तनपान की अवधि बहुत ज्यादा बढ़ा देती है, तो भी दूध का स्राव कम हो सकता है।
• यदि शिशु का होंठ कटा हो या उसे कोई और समस्या हो, जिससे वह स्तनपान नहीं कर पाता, तो दूध का स्राव कम हो जाता है।
• यदि माँ के निप्पल अंदर की ओर धंसे हुए हों या फट गए हों, तो भी दूध का स्राव प्रभावित होता है।
• यदि दूध बनाने वाले हॉर्मोन पर्याप्त मात्रा में सक्रिय या स्रावित नहीं होते, तो भी दूध कम बनता है। दूध बनाने की प्रक्रिया में कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: कम दूध बनने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे माँ की खराब डाइट, स्तनपान न कराना, माँ की कमजोरी, काम के कारण बच्चे से दूर रहना, उपवास, तनाव, शिशु के मुंह की समस्याएँ, निप्पल की दिक्कतें और हॉर्मोन की कमी।
🎯 Exam Tip: कम दूध स्रावण के कारणों को शारीरिक, भावनात्मक और बाहरी कारकों में वर्गीकृत करके याद रखें।
Question 5. धात्रीवस्था में आहार आयोजन करते समय आप किन बातों को ध्यान में रखेंगी?
Answer:
• विटामिन 'बी' समूह के पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए अंकुरित अनाज और खमीरीकृत (फर्मेंटेड) खाद्य पदार्थों को पर्याप्त मात्रा में शामिल करना चाहिए।
• प्रोटीन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मिश्रित खाद्य समूह जैसे अनाज-दाल, दूध-अनाज या दाल-दूध का उपयोग करना चाहिए।
• सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अन्य सब्जियाँ और फलों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए, ताकि अतिरिक्त विटामिन और खनिज लवणों की जरूरत पूरी हो सके।
• आहार में चीनी और घी-तेल का सामान्य से कुछ अधिक उपयोग करें, लेकिन भोजन तला, भुना या गरिष्ठ (भारी) नहीं होना चाहिए।
• प्रसव के बाद 1 महीने तक देशी दवाएँ जैसे अजवाइन, हल्दी, सोंठ, गुड़, गोंद, लोध, बत्तीसा और सूखे मेवों से बने देशी व्यंजन सुबह-सुबह गुनगुने दूध के साथ देने चाहिए।
• 1-2 महीने तक अधिक घी में बना हुआ, कम मिर्च-मसालों वाला, आसानी से पचने वाला भोजन देना चाहिए।
• धात्री माता को 5-6 बार में थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर भोजन देना चाहिए।
• धात्री माता के भोजन में आहार की मात्रा सामान्य से बढ़ा देनी चाहिए।
• प्रचुर मात्रा में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दूध, छाछ, अंडा, मांस, मछली और दालों का प्रयोग करना चाहिए।
• 1-2 माह के बाद भी धात्री माता को अधिक आहार की आवश्यकता होती है, जब तक वह शिशु को स्तनपान कराती है। पौष्टिक आहार मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: धात्री अवस्था में आहार में विटामिन बी, प्रोटीन के लिए अनाज-दाल, सलाद, फल और सब्जियाँ ज्यादा होनी चाहिए। घी-तेल ज्यादा पर तला हुआ नहीं। प्रसव के बाद शुरुआती महीनों में पारंपरिक देशी दवाएँ और हल्का भोजन दें। दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाएँ और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ बढ़ाएँ।
🎯 Exam Tip: आहार आयोजन के समय, पोषक तत्वों की बढ़ी हुई आवश्यकताओं, पाचन क्षमता और पारंपरिक मान्यताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. प्रथम 12 माह में धात्री माँ को आहार में दी जाने वाली पारम्परिक देशी दवाओं के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: धात्री अवस्था में, खासकर पहले 1 महीने में, महिलाओं को उच्च ऊर्जा और उच्च प्रोटीन वाले संतुलित भोजन की आवश्यकता होती है। इस दौरान धात्री महिलाओं को पारंपरिक दवाएँ, जैसे अजवाइन, सोंठ, लोद, कमरकस, गोंद, सुपारी, हल्दी, बत्तीसा आदि से बने मीठे व्यंजन विशेष रूप से खाने के लिए दिए जाते हैं। ये व्यंजन बहुत ज्यादा गुड़, घी, चीनी और सूखे मेवों जैसे- काजू, किशमिश, बादाम, अखरोट, पिस्ता, मखाने आदि से मिलकर बनाए जाते हैं। ये व्यंजन उच्च चीनी, प्रोटीन, वसा और खनिज लवण से भरपूर होते हैं, जो महिला को दूध बनाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व प्रदान करते हैं। साथ ही, ये दवा के रूप में भी उपयोगी होते हैं। यह माँ को तेजी से ठीक होने में मदद करते हैं।
इन पारंपरिक दवाओं के उपयोग से माँ के दूध का निर्माण और स्राव बढ़ता है। ये दवाएँ धात्री महिला की शारीरिक कमजोरी को दूर करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में भी उपयोगी होती हैं। इनके सेवन से धात्री महिला को हाथ-पैरों, कमर और पैरों के दर्द और ऐंठन में आराम मिलता है। इन दवाओं की गर्मी से गर्भाशय से होने वाले रक्तस्राव पर नियंत्रण होता है, गर्भाशय को फिर से सिकोड़ने और सफाई की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे महिलाएँ खुद को स्वस्थ महसूस करने लगती हैं।
इन दवायुक्त व्यंजनों को सुबह और रात को गर्म दूध के साथ दिया जाना चाहिए, जो उसे विशेष पोषण प्रदान करता है। अजवाइन और बत्तीसा का पानी उबालकर देने से धात्री अवस्था में महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। बत्तीसा में बत्तीस जड़ी-बूटियाँ होती हैं।
In simple words: धात्री माताओं को शुरुआत में उच्च ऊर्जा और प्रोटीन वाला पारंपरिक भोजन दिया जाता है। पारंपरिक देशी दवाएँ, जैसे अजवाइन, सोंठ और मेवे, दूध बनाने में मदद करती हैं और माँ को ताकत देती हैं। ये दवाएँ शारीरिक कमजोरी दूर करती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं, दर्द कम करती हैं और गर्भाशय को जल्दी ठीक करती हैं। इन्हें गर्म दूध के साथ लेना चाहिए और अजवाइन-बत्तीसा का पानी पीने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: पारंपरिक देशी दवाओं के महत्व को पोषण और स्वास्थ्य दोनों लाभों में बाँटकर समझाएँ, साथ ही उनके मुख्य घटकों का भी उल्लेख करें।
Question 2. एक स्वस्थ भारतीय महिला प्रतिदिन कितना दूध स्रावित करती है?
(अ) 750 मिली
(ब) 500 मिली
(स) 850 मिली
(द) 950 मिली
Answer: (स) 850 मिली
In simple words: एक स्वस्थ भारतीय महिला औसतन 850 मिलीलीटर दूध प्रतिदिन बनाती है। यह मात्रा शिशु के पोषण के लिए पर्याप्त होती है।
🎯 Exam Tip: दुग्ध स्रावण की मात्रा व्यक्ति की पोषण स्थिति, शिशु की मांग और स्तनपान की आवृत्ति पर निर्भर करती है।
Question 3. धात्रीवस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढ़ाने के लिये किसका पानी उबालकर दिया जाता है?
(अ) मेथी का
(ब) धनिये का
(स) सोंठ का
(द) अजवाइन का
Answer: (द) अजवाइन का
In simple words: धात्री अवस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अजवाइन का पानी उबालकर दिया जाता है। यह पाचन में भी मदद करता है।
🎯 Exam Tip: अजवाइन का पानी पारंपरिक रूप से प्रसव के बाद माताओं को दिया जाता है क्योंकि यह पाचन में सुधार करता है और संक्रमण से बचाता है।
Question 4. धात्री महिला के लिये दैनिक संतुलित आहार में दूध की कितनी अतिरिक्त मात्र दी जानी चाहिए?
(अ) 300 मिली
(ब) 200 मिली
(स) 400 मिली
(द) 500 मिली
Answer: (अ) 1800 मिग्रा
In simple words: धात्री महिला के लिए प्रतिदिन के संतुलित आहार में दूध की अतिरिक्त मात्रा के साथ-साथ कुछ खास पोषक तत्वों की भी अधिक आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, कैल्शियम जैसे खनिज की मात्रा 1800 मिग्रा तक बढ़ाई जा सकती है।
🎯 Exam Tip: धात्री महिलाओं की पोषक तत्वों की आवश्यकताएँ सामान्य महिलाओं से अधिक होती हैं, क्योंकि उन्हें अपने शरीर के साथ-साथ शिशु के पोषण का भी ध्यान रखना होता है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. स्तनपान से माँ व शिशु में...........सम्बन्ध कायम होते हैं।
2. स्तनपान करने से माँ को स्तन...........होने की संभावना कम हो जाती है।
3. धात्रीवस्था में तले हुए व मिर्च मसाले युक्त आहार से...........सम्बन्धी परेशानियाँ हो जाती हैं।
4. स्तन दुग्ध निर्माण व...........के लिये माँ को पर्याप्त मात्रा में जल व तरल भोज्य पदार्थ देने चाहिए।
5. धात्री माँ को आहार दिन में 3-4 बार की अपेक्षा...........बार में थोडे-थोडे अन्तराल पर देना चाहिए।
6. धात्री अवस्था में दाल की अतिरिक्त मात्रा की पूर्ति...........से की जा सकती है।
Answer:
1. भावनात्मक
2. कैंसर
3. पाचन
4. स्रावण
5. 5-6
6. मेवों
In simple words: स्तनपान से माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता बनता है और माँ में स्तन कैंसर का खतरा कम होता है। धात्री अवस्था में तला-भुना खाने से पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। दूध बनाने के लिए माँ को पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेने चाहिए। दिन में 3-4 बार के बजाय 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाने से धात्री माँ को फायदा होता है। दालों की अतिरिक्त मात्रा की पूर्ति सूखे मेवों से की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, प्रत्येक वाक्य के अर्थ और उसके संदर्भ को समझें ताकि सही शब्द का चयन किया जा सके।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 17 अति लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. धात्री अवस्था किसे कहते हैं?
Answer: धात्री अवस्था, जिसे स्तनपान अवस्था भी कहा जाता है, वह समय होता है जब एक महिला अपने नवजात शिशु को अपने स्तनों से निकला हुआ ताजा दूध पिलाती है। इस अवस्था में माँ और शिशु का गहरा संबंध होता है।
In simple words: धात्री अवस्था वह समय है जब माँ अपने बच्चे को स्तनपान कराती है।
🎯 Exam Tip: धात्री अवस्था की परिभाषा में स्तनपान और नवजात शिशु के पोषण पर जोर दें।
Question 2. धात्री अवस्था की अवधि कितनी होती है?
Question 4. धात्री अवस्था में स्तन दूध निर्माण एवं स्रावण किस पर निर्भर करता है?
Answer: धात्री अवस्था में स्तन दूध का निर्माण और स्राव दर, साथ ही दूध का संगठन, माता के पोषण-स्तर पर निर्भर करता है। माँ का स्वस्थ और संतुलित आहार दूध की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है।
In simple words: माँ कितना और कैसा दूध बनाएगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि माँ कितना अच्छा खाती है।
🎯 Exam Tip: स्तन दूध के निर्माण और स्राव को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में माँ का पोषण स्तर सबसे महत्वपूर्ण है।
Question 5. धात्री अवस्था में माता को कैसा भोजन ग्रहण करना चाहिए?
Answer: धात्री अवस्था में स्तन दूध के निर्माण और स्राव के लिए माता को पौष्टिक तत्वों से भरपूर भोजन के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल भोज्य पदार्थ भी ग्रहण करने चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है।
In simple words: धात्री माँ को पौष्टिक खाना और खूब सारा पानी व तरल चीजें खानी चाहिए।
🎯 Exam Tip: धात्री माताओं के लिए पर्याप्त हाइड्रेशन (तरल पदार्थ का सेवन) उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि संतुलित पोषण, क्योंकि दूध में पानी की मात्रा अधिक होती है।
Question 6. माता के स्तनों में कम दुग्ध स्रावण के कोई दो कारण लिखिए।
Answer:
• धात्री अवस्था में पोषण संबंधी जरूरतों की पूर्ति न होना।
• दूध निर्माण के लिए जिम्मेदार हॉर्मोन का पर्याप्त रूप से सक्रिय और स्रावित न होना।
In simple words: माँ के स्तनों में कम दूध बनने के दो मुख्य कारण हैं- माँ को पूरा पोषण न मिलना और दूध बनाने वाले हॉर्मोन का सही से काम न करना।
🎯 Exam Tip: कम दुग्ध स्रावण के कारणों में पोषण संबंधी कमी और हॉर्मोनल असंतुलन प्रमुख हैं, इन्हें हमेशा ध्यान रखें।
Question 7. धात्रीवस्था में अतिरिक्त लौह तत्व की मात्रा प्रस्तावित क्यों नहीं की गई है?
Answer: माँ के दूध में लौह तत्व बहुत कम मात्रा में होता है, और इस अवस्था में मासिक धर्म नहीं होता है, जिससे लौह तत्व की हानि नहीं होती। इसलिए अतिरिक्त लौह तत्व की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती।
In simple words: धात्री अवस्था में अतिरिक्त आयरन की सलाह इसलिए नहीं दी जाती क्योंकि माँ के दूध में आयरन कम होता है और मासिक धर्म नहीं होता, जिससे आयरन की कमी नहीं होती।
🎯 Exam Tip: लौह तत्व की आवश्यकता मासिक धर्म और रक्तस्राव पर निर्भर करती है, जो धात्री अवस्था में अनुपस्थित होते हैं।
Question 8. दुग्धपान कराने वाली माता को अतिरिक्त पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer: दुग्धपान कराने वाली माता पर न सिर्फ अपने शरीर के पोषण की जिम्मेदारी होती है, बल्कि शिशु के पोषण की भी जिम्मेदारी होती है। बच्चे के विकास के लिए उसे माँ के दूध से ही सारे पोषक तत्व मिलते हैं।
In simple words: दूध पिलाने वाली माँ को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है क्योंकि उसे अपने साथ-साथ बच्चे के पोषण का भी ध्यान रखना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: अतिरिक्त पोषक तत्वों की आवश्यकता माँ के स्वास्थ्य और शिशु के इष्टतम विकास दोनों के लिए आवश्यक है।
Question 10. धात्री अवस्था में प्रथम छः माह तक कितना अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता होती है?
Answer: धात्री अवस्था में प्रथम छः माह तक 25 ग्राम प्रतिदिन अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता होती है। यह दूध उत्पादन और माँ के शरीर की मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: धात्री माँ को पहले छह महीने तक हर दिन 25 ग्राम ज्यादा प्रोटीन खाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन दूध उत्पादन और माँ के ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक है, इसलिए इसकी अतिरिक्त मात्रा महत्वपूर्ण है।
Question 11. दूध को सम्पूर्ण आहार क्यों माना जाता है?
Answer: दूध को एक सम्पूर्ण आहार माना जाता है, क्योंकि इसमें वे सभी पौष्टिक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं जो शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। इसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज सभी पाए जाते हैं।
In simple words: दूध को पूरा खाना माना जाता है क्योंकि इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व होते हैं।
🎯 Exam Tip: दूध को सम्पूर्ण आहार कहने का मुख्य कारण उसमें मौजूद सभी प्रमुख पोषक तत्वों का संतुलन है, जो किसी भी एक खाद्य पदार्थ में दुर्लभ है।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 17 लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. धात्री माता का स्वस्थ एवं तन्दुरुस्त होना क्यों आवश्यक है?
Answer: जन्म के बाद शिशु का पहला और सबसे जरूरी भोजन माँ का दूध ही होता है। नवजात शिशु 6 महीने तक केवल माँ के दूध पर ही निर्भर रहता है और उसी से पोषण प्राप्त करता है। यदि माँ कमजोर या बीमार होगी, तो शिशु को पूरा पोषण नहीं मिलेगा और उसके विकास में बाधा आएगी। इसलिए, माँ का स्वस्थ और तंदुरुस्त होना बहुत जरूरी है ताकि वह बच्चे को पर्याप्त दूध दे सके।
In simple words: माँ का स्वस्थ और मजबूत होना जरूरी है क्योंकि बच्चा शुरुआती 6 महीने सिर्फ माँ के दूध पर निर्भर रहता है। अगर माँ स्वस्थ नहीं होगी, तो बच्चे को पूरा पोषण नहीं मिल पाएगा और उसका विकास रुक जाएगा।
🎯 Exam Tip: माँ के स्वास्थ्य और शिशु के पोषण के बीच सीधा संबंध स्थापित करें, यह दर्शाते हुए कि माँ का स्वास्थ्य शिशु के विकास के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
Question 2. धात्री माता की पोषणिक आवश्यकताओं पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
Answer: धात्री माता पर न सिर्फ अपने शरीर के पोषण की जिम्मेदारी होती है, बल्कि अपने शिशु के पोषण की भी जिम्मेदारी होती है। धात्री अवस्था में माँ के सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है। स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध बनाने और उसका स्राव करने के लिए उचित मात्रा में पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है। इस अवस्था में लौह तत्व की अधिक आवश्यकता नहीं होती है। धात्री अवस्था में माँ को विशेष रूप से तरल पदार्थों जैसे- दूध, छाछ, सूप और फलों का रस का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
In simple words: धात्री माँ को अपने और बच्चे के लिए ज्यादा पोषण चाहिए होता है। उसे दूध बनाने के लिए सभी पोषक तत्व सही मात्रा में लेने चाहिए और साथ ही खूब सारे तरल पदार्थ जैसे दूध, छाछ और फलों का रस पीना चाहिए।
🎯 Exam Tip: धात्री माँ की पोषण संबंधी जरूरतों को समझाते समय, कैलोरी, प्रोटीन और तरल पदार्थ के महत्व पर विशेष ध्यान दें।
Question 3. प्रसव के उपरान्त पहले डेढ़ माह तक धात्री महिला की किस प्रकार की देखभाल करनी आवश्यक है? समझाइये।
Answer: प्रसव के बाद पहले डेढ़ महीने तक धात्री महिला की विशेष देखभाल की जाती है, जिसमें तेल की मालिश, गर्म पानी से नहाना और पूरा आराम शामिल है। इस दौरान अजवाइन, सोंठ, लोद, बत्तीसा, कमरकस, गोंद, सुपारी, हल्दी आदि से बने मीठे व्यंजन खास तौर पर खाने के लिए दिए जाते हैं। इन व्यंजनों में चीनी और गुड़ होते हैं, जिससे धात्री महिला का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और उसे ताकत मिलती है।
In simple words: बच्चे के जन्म के बाद पहले डेढ़ महीने तक धात्री महिला की खास देखभाल की जाती है। इसमें तेल मालिश, गर्म पानी से स्नान और आराम के साथ-साथ अजवाइन, सोंठ और गुड़ वाले पारंपरिक मीठे व्यंजन खाने को दिए जाते हैं, जो उसके स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रसवोपरांत देखभाल में शारीरिक आराम, स्वच्छता और पारंपरिक पौष्टिक आहार के महत्व को विस्तार से समझाएँ।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 17 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. धात्री अवस्था में दैनिक प्रस्तावित आहारिक मात्राओं की तालिका बनाइये।
Answer: धात्री अवस्था में दैनिक प्रस्तावित आहारिक मात्रा तालिका क्रियाशीलता के अनुसार नीचे दी गई है। यह तालिका विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यक मात्रा को दर्शाती है।
| पोषक तत्त्व | क्रियाशीलता | अतिरिक्त आवश्यकता | |||
|---|---|---|---|---|---|
| कम | मध्यम | अधिक | 0-6 | 6-12 | |
| ऊर्जा (कि. कैलोरी) | 1900 | 2230 | 2850 | + 600 | + 520 |
| प्रोटीन (ग्राम) | 55 | 55 | 55 | + 19 | + 13 |
| प्रत्यक्ष वसा (ग्राम) | 20 | 25 | 30 | 30 | 30 |
| कैल्शियम (मिग्रा) | 600 | 600 | 600 | 1200 | 1200 |
| लौह तत्त्व (मिग्रा) | 21 | 21 | 21 | – | – |
| बीटा कैरोटीन (मा. ग्रा.) | 4800 | 4800 | 4800 | 7600 | 7600 |
| थायमिन (मिग्रा) | 1-0 | 1-1 | 1.4 | + 0.3 | + 0.2 |
| राइबोफ्लेविन (मिग्रा) | 1-1 | 1-3 | 1-7 | + 0.4 | + 0.3 |
| नियासिन (मिग्रा) | 12 | 14 | 16 | + 4 | + 3 |
| पिरीडॉक्सिन (मिग्रा) | 2 | 2 | 2 | 2.5 | 2.5 |
| विटामिन 'सी' (मिग्रा) | 40 | 40 | 40 | 80 | 80 |
| फोलिक अम्ल (मा. ग्रा.) | 200 | 200 | 200 | 300 | 300 |
| विटामिन बी-12 (मा. ग्रा.) | 1 | 1 | 1 | 1-5 | 1.5 |
| मैग्नीशियम (मि. ग्रा.) | 310 | 310 | 310 | 310 | 310 |
| जिंक | 10 | 10 | 10 | 12 | 12 |
In simple words: धात्री माताओं को उनकी शारीरिक गतिविधि के अनुसार अलग-अलग मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत होती है। दूध पिलाने के शुरुआती 6 महीने और उसके बाद की जरूरतों के लिए अतिरिक्त पोषक तत्वों की मात्रा भी अलग होती है, जिसे इस तालिका में दिखाया गया है।
🎯 Exam Tip: तालिका को सटीक रूप से प्रस्तुत करें और सुनिश्चित करें कि सभी कॉलम और पंक्तियाँ सही ढंग से मैप की गई हैं। अतिरिक्त आवश्यकता को '0-6 माह' और '6-12 माह' की अवधियों के लिए याद रखें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 17 प्रयोगात्मक प्रश्न
Question 1. धात्री अवस्था में संतुलित आहार भोज्य इकाइयों की तालिका का निर्माण कीजिए।
Answer: जन्म से 6 महीने तक और 6 से 12 महीने तक, शिशु पूरी तरह या आंशिक रूप से माँ के दूध पर निर्भर रहता है। माँ के स्तनों से पर्याप्त दूध निकलता रहे, इसके लिए माँ को अपने और शिशु दोनों के लिए पूर्ण संतुलित आहार तालिका के अनुसार भोजन ग्रहण करना चाहिए। धात्री अवस्था में संतुलित आहार भोज्य इकाई तालिका नीचे दी गई है:
| भोज्य समूह | क्रियाशीलता | अतिरिक्त आवश्यकता | ||
|---|---|---|---|---|
| कम | मध्यम | अधिक | ||
| अनाज | 270 | 330 | 480 | + 30 |
| दालें | 60 | 75 | 90 | + 60 |
| दूध (मिली) | 300 | 300 | 300 | + 200 |
| कंद मूल | 200 | 200 | 200 | – |
| हरी पत्तेदार सब्जियाँ | 100 | 100 | 100 | + 50 |
| अन्य सब्जियाँ | 200 | 200 | 200 | – |
| फल | 100 | 100 | 100 | + 100 |
| शर्करा | 20 | 30 | 45 | – |
| घी/तेल | 20 | 25 | 30 | + 10 |
| दूध (मिली.) | 100 | 3 | 3 | 3 | + 2 |
|---|---|---|---|---|---|
| कंदमूल | 100 | 2 | 2 | 2 | – |
| हरी पत्तेदार सब्जियाँ | 100 | 1 | 1 | 1 | + 0.5 |
| अन्य सब्जियाँ | 100 | 2 | 2 | 2 | – |
| फल | 100 | 1 | 1 | 1 | + 1 |
| शर्करा | 5 | 4 | 6 | 9 | – |
| घी/तेल | 5 | 4 | 5 | 6 | + 2 |
• माँसाहारी धात्री महिलाएँ दाल की इकाई (30 ग्राम) के बदले अण्डा / मांस / मछली की एक इकाई (50 ग्राम) का उपभोग कर सकती हैं।
• धात्रीवस्था में दाल की अतिरिक्त इकाई की आपूर्ति सूखे मेवों से पूरी की जा सकती है।
• 6 -12 माह की धात्री अवस्था के दौरान माँ को धीरे-धीरे अपने आहार को कम करते हुए सामान्य अवस्था के अनुसार कर लेना चाहिए। उक्त तालिका के आधार पर एक साधारण श्रम करने वाली धात्री महिला की 2 – 6 माह की स्तनपान की अवस्था तथा मध्यम श्रम करने वाली महिला की 6 -12 माह की स्तनपान की अवस्था के लिए एक दिन का आहार आयोजन किया गया है।
In simple words: शिशु के शुरुआती 12 महीनों तक माँ के दूध पर निर्भरता को देखते हुए, माँ को संतुलित आहार लेना चाहिए। ऊपर दी गई तालिका में विभिन्न खाद्य समूहों की आवश्यक मात्राएँ और अतिरिक्त आवश्यकताएँ बताई गई हैं। यदि माँसाहारी हैं, तो दाल की जगह अंडे या मछली का सेवन कर सकती हैं। दाल की कमी को सूखे मेवों से भी पूरा किया जा सकता है। 6-12 महीने के बाद माँ को धीरे-धीरे सामान्य आहार पर लौट जाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: खाद्य समूहों की तालिका बनाते समय, प्रत्येक समूह में खाद्य पदार्थों की मात्रा और क्रियाशीलता के अनुसार उनकी भिन्नता को स्पष्ट करें। माँसाहारी विकल्पों और दाल के पूरक के रूप में सूखे मेवों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. कम श्रम करने वाली धात्री महिला का (2 – 6 माह) के लिये एक दिन की आहार आयोजन की तालिका बनाइये।
Answer: कम श्रम करने वाली धात्री महिला के लिए 2-6 माह की स्तनपान की अवस्था के लिए एक दिन का आहार आयोजन तालिका नीचे दी गई है। यह आहार संतुलित और माँ तथा शिशु दोनों के लिए पौष्टिक है।
| समय | नाश्ता | मात्रा | सामग्री | मात्रा | इकाई |
|---|---|---|---|---|---|
| 7:00 बजे | नमकीन बिस्कुट | 4 | गेहूँ का आटा | 30 | 1 |
| नाश्ता 8:30 बजे | दूध | 1 गिलास | दूध | 200 | 2 |
| शक्कर | 2.5 | 1/2 | |||
| लड्डू | 1 | गेहूं का आटा (अनाज) | 30 | 1 | |
| घी | 10 | 2 | |||
| शक्कर | 10 | 2 | |||
| घी, काजू, बादाम, किशमिश, खोपरा, गोंद, पिस्ता, फूल-मखाने (सूखे मेवे) | 30 | – | |||
| मध्य कालीन नाश्ता 11:00 बजे | नमकीन दलिया | 1 कटोरी | दलिया (अनाज) | 30 | 1 |
| मूंग दाल (दाल) | 15 | 1/2 | |||
| लौकी | 50 | 1/2 | |||
| घी | 2.5 | 1/2 | |||
| दोपहर का भोजन 1:30 बजे | चपाती | 4 | गेहूँ का आटा (अनाज) | 120 | 4 |
| घी | 2.5 | 1/2 | |||
| तोरई की सब्जी | 1 कटोरी | तोरई (अन्य सब्जी) | 100 | 1 | |
| तेल | 2.5 | 1/2 | |||
| अरबी की सूखी सब्जी | 1 कटोरी | अरबी (कंदमूल) | 100 | 1 | |
| तेल | 2.5 | 1/2 | |||
| सलाद | 1 प्लेट | मूंग दाल (दाल) | 100 | 1 | |
| पापड़ | 1 बड़ा | मूंग दाल (दाल) | 15 | 1/2 | |
| भोजन के बाद 4:00 बजे | फल | अनार | अनार | 100 | 1 |
| शाम की चाय 5:30 बजे | चाय | 1 कप | दूध | 50 | 1/2 |
| शक्कर | 2.5 | 1/2 | |||
| अंकुरित मूँग | 1 प्लेट | अंकुरित मूंग (दाल) | 30 | 1 | |
| तेल | 2.5 | 1/2 | |||
| भोजन से पूर्व 7:00 बजे | गाजर एवं टमाटर का सूप | 1 गिलास | टमाटर (फल) | 100 | 1 |
| गाजर (कंदमूल) | – | – | |||
| रात्रि भोजन 8:30 बजे | चपाती | 3 | गेहूँ का आटा (अनाज) | 90 | 3 |
| घी | 2.5 | 1/2 | |||
| मूंग की दाल | 1 कटोरी | मूंग छिलका (दाल) | 30 | 1 | |
| घी | 2.5 | 1/2 | |||
| पालक, आलू टमाटर की सब्जी | 1 कटोरी | पालक (हरी सब्जी) | 150 | 1 | |
| आलू (कंदमूल) | 50 | 1/2 | |||
| तेल | 2.5 | 1/2 | |||
| सलाद | 1/2 प्लेट | खीरा (अन्य सब्जी) | 50 | 1/2 | |
| पापड़ | 1 बड़ा | मूंग दाल (दाल) | 15 | 1/2 | |
| रात्रि सोने से पूर्व 9:00 बजे | दूध | 1 गिलास | दूध | 200 | 2 |
| शक्कर | 5 | 1 |
In simple words: 2 से 6 महीने की स्तनपान कराने वाली माँ जो कम शारीरिक श्रम करती है, उसके लिए एक दिन का संतुलित आहार योजना ऊपर तालिका में दी गई है। इस योजना में दिन भर में कई बार विभिन्न खाद्य पदार्थ शामिल हैं ताकि माँ और शिशु दोनों को पर्याप्त पोषण मिल सके।
🎯 Exam Tip: आहार तालिका बनाते समय, भोजन के समय, प्रत्येक भोजन में सामग्री की मात्रा, और उनके संबंधित खाद्य समूह इकाइयों को ध्यान से भरें। प्रत्येक भोजन को संतुलित और पौष्टिक बनाने का प्रयास करें।
Question 4. मध्यम श्रम करने वाली महिला (6-12 माह) के लिये एक दिन की आहार-आयोजन की तालिका बनाइये।
Answer: मध्यम श्रम करने वाली धात्री महिला के लिए 6-12 माह की स्तनपान की अवस्था के लिए एक दिन का आहार आयोजन तालिका नीचे दी गई है। यह आहार संतुलित पोषण और ऊर्जा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
| भोज्य समूह | सुबह की | मध्यकालीन | दोपहर का | शाम की | रात्रि का | रात्रि सोने | भोज्य समूह की इकाई कुल योग | |||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चाय 7.00 बजे | नाश्ता 8.30 बजे | नाश्ता 11.00 बजे | भोजन 1.30 बजे | भोजन से पश्चात | चाय 5.30 बजे | की चाय | भोजन 8.30 बजे | से पूर्व | 9.30 बजे | |||
| अनाज | 1 | 1 | 1 | 4 | – | 1 | – | 4 | – | – | 12 | |
| दालें | – | 1 | – | 1+½+½ | – | 1 | – | ½ | – | – | 4½ | |
| दूध | ½ | ½ | 1 | 1 | – | – | – | – | 2 | – | 5 | |
| कंदमूल | – | ½ | – | 1 | – | 1 | ½ | – | – | – | 2 | |
| हरी पत्तेदार सब्जियाँ | – | ¼ | – | – | 1 | – | 1 | – | – | – | 2¼ | |
| अन्य सब्जियाँ | – | – | – | 1 | – | – | ½ | 1½ | – | – | 2½ | |
| फल | – | – | – | – | 1 | – | 1 | – | – | – | 2 | |
| शक्कर | 1/2 | 1/2 | ½ | 1½ | – | 1/2 | – | 1 | – | – | 4 | |
| घी/तेल | – | 1/2 | ½ | 1½ | – | 1/2 | – | 1½ | – | – | 6 | |
In simple words: मध्यम श्रम करने वाली धात्री महिला के लिए 6 से 12 महीने की अवधि के लिए एक दिन का आहार योजना ऊपर तालिका में दर्शाई गई है। इसमें विभिन्न खाद्य समूहों को दिन के अलग-अलग समय पर शामिल किया गया है, ताकि माँ को पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्व मिलें।
🎯 Exam Tip: मध्यम श्रम वाली धात्री महिला के लिए आहार तालिका बनाते समय, कैलोरी और पोषक तत्वों की जरूरतों को ध्यान में रखें, खासकर दालें, दूध और अनाज की मात्रा पर विशेष ध्यान दें।
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