RBSE Solutions Class 12 Home Science Chapter 12 बाल्यावस्था में पोषण

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Detailed Chapter 12 बाल्यावस्था में पोषण RBSE Solutions for Class 12 Home Science

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Class 12 Home Science Chapter 12 बाल्यावस्था में पोषण RBSE Solutions PDF

Rbse Class 12 Home Science Chapter 12 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. (i) 1 वर्ष से लेकर 10-12 वर्ष की आयु तक के बच्चे आते हैं -
(अ) युवावस्था
(ब) शैशवावस्था
(स) बाल्यावस्था
(द) किशोरावस्था।
Answer: (स) बाल्यावस्था
In simple words: 1 से 12 वर्ष तक के बच्चे बाल्यावस्था में आते हैं। इस उम्र में वे शारीरिक और मानसिक रूप से बढ़ते हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चों के आयु वर्गों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि पोषण और विकास की आवश्यकताएँ हर अवस्था में बदलती हैं।

 

Question 1. (ii) प्रारम्भिक बाल्यावस्था को कहते हैं –
(अ) शालीय अवस्था
(ब) पर्वशालीय अवस्था

🎯 Exam Tip: किसी भी विकासात्मक अवस्था के प्रमुख नामों और उपनामों को जानना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. दो वर्ष का होते-होते शिशु स्वयं चलना-फिरना तथा अपने शरीर पर नियन्त्रण करना सीख लेता है।
2. पूर्वशालीय बालक बहुत ही जिज्ञासु एवं नटखट प्रवृत्ति के होते हैं।
3. उत्तर बाल्यावस्था के बालकों में क्रियाशीलता एवं आत्मनिर्भरता बढ़ जाती है।
4. बच्चों को दिनभर में 6-8 गिलास जल एवं तरल पेय पीने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
Answer:
1. शिशु दो साल का होते-होते खुद से चलने और अपने शरीर को नियंत्रित करने लगता है।
2. पूर्व-स्कूली बच्चे बहुत उत्सुक और शरारती होते हैं।
3. उत्तर बाल्यावस्था में बच्चों में काम करने की इच्छा और खुद पर निर्भरता बढ़ जाती है।
4. बच्चों को दिनभर में 6-8 गिलास पानी और अन्य तरल पदार्थ पीने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
In simple words: 2 साल में शिशु चलना सीख जाता है। न खाने वाली चीजें खाने से बच्चों की भूख घटती है। अनाज से ऊर्जा मिलती है। दूध शिशु का मुख्य आहार है। भोजन तय समय पर दें और बच्चों को खाने के लिए प्रोत्साहित करें।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, दिए गए शब्दों का उपयोग करके वाक्य के अर्थ को पूरा करना सुनिश्चित करें।

 

Question 3. पाइका किसे कहते हैं?
Answer: पूर्व-बाल्यावस्था में कुछ बच्चे बड़ों से छिपकर ऐसे पदार्थ खाने लगते हैं जो खाने लायक नहीं होते, जैसे मिट्टी, चूना, पेंट, कागज, मोम, बर्फ या साबुन। इन न खाने लायक चीजों को खाने की बहुत तीव्र इच्छा और कोशिश को पाइका (Pica) कहते हैं। यह अक्सर पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है।
In simple words: पाइका तब होता है जब बच्चे मिट्टी, चूना या कागज जैसी चीजें खाने लगते हैं। यह एक असामान्य खाने की इच्छा है।

🎯 Exam Tip: पाइका एक महत्वपूर्ण पोषण संबंधी समस्या है; इसकी परिभाषा और इससे जुड़े लक्षणों को समझना आवश्यक है।

 

Question 4. बाल्यावस्था क्या है?
Answer: 6 वर्ष की उम्र से किशोरावस्था शुरू होने तक के बच्चे इस समूह में आते हैं। इस उम्र में बच्चे आमतौर पर 6-7 घंटे के लिए स्कूल जाते हैं और औपचारिक शिक्षा पाते हैं। इसलिए, इस अवस्था को स्कूली या शालीय बच्चे की अवस्था भी कहते हैं। इस अवस्था में बच्चे बहुत से नए कौशल सीखते हैं।
In simple words: बाल्यावस्था 6 साल से किशोरावस्था तक की उम्र है, जब बच्चे स्कूल जाते हैं और औपचारिक पढ़ाई करते हैं।

🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था की सही आयु सीमा और इसके मुख्य लक्षणों को याद रखें, विशेषकर शिक्षा से इसका संबंध।

 

Question 5. बाल्यावस्था में प्रोटीन क्यों आवश्यक है? उल्लेख कीजिए।
Answer: बढ़ते बच्चों को प्रोटीन की बहुत जरूरत होती है क्योंकि प्रोटीन शरीर बनाने का काम करता है। प्रोटीन रोज़ होने वाली शारीरिक टूट-फूट की मरम्मत करता है और नए ऊतक भी बनाता है। अच्छे प्रोटीन के लिए बच्चों के खाने में दूध और दूध से बनी चीजें शामिल करनी चाहिए। यह उनके हड्डियों और मांसपेशियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: बच्चों को बढ़ने और शरीर की मरम्मत के लिए प्रोटीन चाहिए। दूध और दूध उत्पाद अच्छे प्रोटीन के स्रोत हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोटीन के महत्व और उसके स्रोतों को हमेशा स्पष्ट रूप से लिखें, विशेषकर बच्चों के विकास के संदर्भ में।

 

Question 6. पूर्वशालीय बालकों की आहार – व्यवस्था करते समय किन – किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Answer: शैशवावस्था में बच्चों का मुख्य भोजन दूध होता है। पूर्व-स्कूली अवस्था में बच्चे दूध के साथ-साथ घर में बने अनाज, दाल, फल और सब्जियों जैसे कई तरह के खाद्य पदार्थ भी खाने लगते हैं। इसलिए, पूर्व-स्कूली बच्चों के भोजन का प्रबंध करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. बच्चों को भोजन तभी देना चाहिए जब उन्हें भूख लगी हो, और एक निश्चित समय पर।
2. बच्चों को उनकी पसंद का ही खाना देना चाहिए।
3. बच्चों को सादा और कम मिर्च-मसाले वाला भोजन देना चाहिए।
4. खाद्य पदार्थों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर देना चाहिए ताकि वे गले में न अटकें और आसानी से निगल सकें। यह भोजन को चबाना आसान बनाता है।
5. भोजन थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर (3-4 घंटे में) 5-6 बार देना चाहिए।
6. छोटे बच्चों को कम भूख लगती है, इसलिए उन्हें कम मात्रा में भोजन देना चाहिए ताकि वे जूठन न छोड़ें।
7. छोटे बच्चों की निगलने की क्षमता कम होती है। इसलिए, खाद्य पदार्थों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर देना चाहिए।
8. बच्चों को बहुत मीठे और दांतों में चिपकने वाले खाद्य पदार्थ नहीं देने चाहिए।
9. यदि बच्चे को दूध पसंद न हो, तो दूध में आम, केला, चीकू जैसे फल या शरबत मिलाकर देना चाहिए।
10. हरी पत्तेदार सब्जियां और दालों को भरवां पराठों, कचौड़ी या लड्डू के रूप में भी दिया जा सकता है।
11. बच्चे एक बार में सभी खाद्य पदार्थ नहीं खा सकते, इसलिए मिश्रित खाद्य पदार्थों का उपयोग करना चाहिए।
12. नाश्ते में प्रोटीनयुक्त भोजन जैसे दूध, अंडा और दाल से बने व्यंजन शामिल करने चाहिए।
13. बच्चों को शीतल पेय पदार्थों की जगह सूप, फलों का रस या छाछ देनी चाहिए।
14. एक ही प्रकार का भोजन बार-बार देने के बजाय भोजन बदलते रहना चाहिए।
15. भोजन के रूप और स्वाद में बदलाव करते रहना चाहिए, ताकि बच्चों की रुचि बनी रहे।
In simple words: पूर्व-स्कूली बच्चों के आहार में विविधता होनी चाहिए। उन्हें भूख लगने पर, उनकी पसंद का, कम मसालेदार और छोटे टुकड़ों में भोजन दें। दूध पसंद न हो तो फल मिलाकर दें। हरी सब्जियां रचनात्मक तरीके से खिलाएं और बार-बार भोजन बदलें।

🎯 Exam Tip: आहार योजना बनाते समय, बच्चे की उम्र, पसंद और पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। भोजन को छोटे टुकड़ों में काटने से घुटन का खतरा कम होता है।

 

Question 2. लड़कियों में किशोरावस्था शीघ्र प्रारम्भ होने के कारण बाल्यावस्था समाप्त हो जाती है.
(अ) 9-10 वर्ष के दौरान
(ब) 11-12 वर्ष के दौरान
(स) 6-8 वर्ष के दौरान
(द) 13-15 वर्ष के दौरान
Answer: (अ) 9-10 वर्ष के दौरान
In simple words: लड़कियों में किशोरावस्था जल्दी शुरू हो जाती है, इसलिए उनकी बाल्यावस्था 9-10 साल की उम्र के आसपास खत्म हो जाती है।

🎯 Exam Tip: किशोरों में शारीरिक परिवर्तनों के समय को याद रखें, खासकर लड़कियों और लड़कों के बीच के अंतर को।

 

Question 3. किशोरावस्था में लम्बाई में वृद्धि की दर होती है
(अ) 5 से 6.5 सेमी
(ब) 6-7.5 सेमी
(स) 4 से 5 सेमी
(द) 8-10 सेमी
Answer: (अ) 5 से 6.5 सेमी
In simple words: किशोरावस्था के दौरान, व्यक्ति की लंबाई हर साल 5 से 6.5 सेंटीमीटर तक बढ़ती है। यह एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर है।

🎯 Exam Tip: विकास की विभिन्न अवस्थाओं में वृद्धि की सामान्य दरों को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. 10 से 12 वर्ष की बालिका को कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है ?
(अ) 1870 कैलोरी
(ब) 1970 कैलोरी
(स) 1670 कैलोरी
(द) 1770 कैलोरी
Answer: (ब) 1970 कैलोरी
In simple words: 10 से 12 साल की लड़की को एक दिन में 1970 कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है ताकि वह स्वस्थ रह सके और उसकी शारीरिक गतिविधियां ठीक से चल सकें।

🎯 Exam Tip: आयु वर्ग के अनुसार कैलोरी की आवश्यकता को याद रखना पोषण योजना के लिए आवश्यक है।

 

Question 5. 7 से 9 वर्ष के बालक को संतुलित आहार के आधार पर कितने अनाज की आवश्यकता होगी ?

🎯 Exam Tip: संतुलित आहार में अनाज की मात्रा उम्र और लिंग के अनुसार बदलती रहती है, इसलिए सही मात्रा के लिए पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना अच्छा होता है।

 

Question 6. बच्चों को भोजन थोड़े-थोड़े समय के अन्तराल (3-4 घंटों) पर कितनी बार देना चाहिए?
(अ) 2-3 बार
(ब) 4-5 बार
(स) 5-6 बार
(द) 3-4 बार
Answer: (ब) 4-5 बार
In simple words: बच्चों को हर 3-4 घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना देना चाहिए। यह उन्हें ऊर्जावान रखता है और उनका पाचन भी ठीक रहता है।

🎯 Exam Tip: बच्चों को बार-बार छोटे-छोटे भोजन देना उनके चयापचय को बनाए रखने और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है।

 

Question 7. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. दो वर्ष का होते-होते शिशु स्वयं चलना-फिरना तथा अपने शरीर पर नियन्त्रण करना सीख लेता है।
2. अखाद्य पदार्थों को खाने से बालकों की भूख कम हो जाती है।
3. भोजन में अनाज का समावेश ऊर्जा की आपूर्ति के साथ-साथ भूख को भी शान्त रखता है।
4. शैशवावस्था में बालक का मुख्य आहार दूध होता है।
5. बालकों को भोजन नियत समय पर देना चाहिए।
6. छोटे बच्चों को अपने भोजन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
Answer:
1. शिशु दो साल का होते-होते खुद से चलने और अपने शरीर को नियंत्रित करने लगता है।
2. न खाने वाली चीजें खाने से बच्चों की भूख कम हो जाती है।
3. भोजन में अनाज को शामिल करने से ऊर्जा मिलती है और भूख भी शांत होती है।
4. शैशवावस्था में बच्चे का मुख्य भोजन दूध होता है।
5. बच्चों को खाना तय समय पर देना चाहिए।
6. छोटे बच्चों को अपना भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
In simple words: 2 साल में शिशु चलना सीख जाता है। न खाने वाली चीजें खाने से बच्चों की भूख घटती है। अनाज से ऊर्जा मिलती है। दूध शिशु का मुख्य आहार है। भोजन तय समय पर दें और बच्चों को खाने के लिए प्रोत्साहित करें।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, दिए गए शब्दों का उपयोग करके वाक्य के अर्थ को पूरा करना सुनिश्चित करें।

Rbse Class 12 Home Science Chapter 12 अति लघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. बाल्यावस्था से क्या तात्पर्य है?
Answer: बाल्यावस्था का अर्थ है वह समय जो 1 वर्ष की उम्र से लेकर 10-12 वर्ष की आयु तक होता है। इस दौरान बच्चे स्कूल जाते हैं और अपनी औपचारिक पढ़ाई शुरू करते हैं। इस अवस्था में शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है और बच्चे कई नए कौशल सीखते हैं।
In simple words: बाल्यावस्था 1 से 12 साल की उम्र तक का समय है, जब बच्चे स्कूल जाते हैं और सीखते हैं।

🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था की परिभाषा देते समय, इसकी आयु सीमा और मुख्य विकासात्मक विशेषताओं, जैसे औपचारिक शिक्षा की शुरुआत, का उल्लेख करें।

 

Question 3. अनौपचारिक शिक्षा किस प्रकार दी जाती है?
Answer: अनौपचारिक शिक्षा नर्सरी, किंडरगार्टन और प्ले-स्कूल जैसी जगहों पर खेल-खेल में दी जाती है। इसमें बच्चों को खेल, गाने और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सिखाया जाता है। यह बच्चों को सीखने का एक आरामदायक और मजेदार तरीका प्रदान करती है।
In simple words: अनौपचारिक शिक्षा नर्सरी और किंडरगार्टन में खेल के ज़रिए दी जाती है।

🎯 Exam Tip: अनौपचारिक शिक्षा के उदाहरणों और उसकी प्रकृति को स्पष्ट करें, जैसे 'खेल-खेल में सीखना'।

 

Question 4. पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चे के मस्तिष्क का विकास कितने प्रतिशत हो चुका होता है?
Answer: पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास पूरा हो चुका होता है। इस उम्र में मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है जो सीखने और समझने की नींव रखता है।
In simple words: पूर्व-बाल्यावस्था तक बच्चे का 90% मस्तिष्क विकास हो जाता है।

🎯 Exam Tip: मस्तिष्क के विकास के महत्वपूर्ण चरणों और उनकी उम्र सीमा को याद रखें।

 

Question 5. उत्तर-बाल्यावस्था कौन-सी होती है?
Answer: उत्तर-बाल्यावस्था छः वर्ष की उम्र से किशोरावस्था शुरू होने तक की होती है। इस अवस्था में बच्चे स्कूल जाते हैं और सामाजिक कौशल विकसित करते हैं।
In simple words: उत्तर-बाल्यावस्था 6 साल की उम्र से किशोरावस्था तक का समय है।

🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था की विभिन्न उप-अवस्थाओं की आयु सीमा को सटीक रूप से याद करें।

 

Question 6. बाल्यावस्था वाले बालक को विद्यालयी बालक क्यों कहते हैं?
Answer: बाल्यावस्था में बच्चे नियमित रूप से स्कूल जाकर औपचारिक शिक्षा प्राप्त करते हैं। इसी कारण इस अवस्था के बच्चों को 'विद्यालयी बालक' कहते हैं। स्कूल जाना उनके सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे स्कूल जाते हैं और औपचारिक शिक्षा लेते हैं, इसलिए उन्हें विद्यालयी बालक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: 'विद्यालयी बालक' शब्द की परिभाषा और इसके पीछे के कारण को स्पष्ट करें।

 

Question 7. बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि और विकास दर किस प्रकार की होती है?
Answer: बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि और विकास दर कुछ धीमी, स्थिर और रैखिक (Steady and Linear) होती है। इसका मतलब है कि वृद्धि एक समान गति से होती है, जिसमें अचानक कोई बड़ा बदलाव नहीं आता।
In simple words: बाल्यावस्था में शरीर की वृद्धि और विकास धीमी और एक जैसी गति से होता है।

🎯 Exam Tip: विकास की विभिन्न अवस्थाओं में वृद्धि की गति के प्रकारों को याद रखें (जैसे, रैखिक, तीव्र, आदि)।

 

Question 8. यदि बालक को कोई व्यंजन पसन्द न आये तो क्या करना चाहिए?
Answer: यदि बच्चे को कोई व्यंजन पसंद न आए, तो उसे बनाने की विधि में बदलाव कर देना चाहिए। जैसे, उसकी पसंदीदा चटनी या मसालों का इस्तेमाल करके उसे स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। यह बच्चों को नए खाद्य पदार्थों को आज़माने में मदद करता है।
In simple words: अगर बच्चे को कोई खाना पसंद नहीं आता, तो उसे बनाने का तरीका बदल देना चाहिए।

🎯 Exam Tip: बच्चों की खाने की पसंद को ध्यान में रखते हुए, व्यंजनों में रचनात्मक बदलाव करने के तरीकों पर जोर दें।

 

Question 10. बाल्यावस्था की एक समस्या बताइए।
Answer: बाल्यावस्था में बच्चे खेलों में ज्यादा रुचि दिखाते हैं और भोजन के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। इससे उनके पोषण पर असर पड़ सकता है। उन्हें सही समय पर खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चे खाने के प्रति लापरवाह होकर खेलों में ज्यादा रुचि दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चों की पोषण संबंधी समस्याओं में उनकी खेल-कूद की आदत और भोजन के प्रति लापरवाही को शामिल करें।

 

Question 11. बच्चों को दिनभर में कितने गिलास जल - पीना चाहिए ?
Answer: बच्चों को दिनभर में पर्याप्त 6-8 गिलास पानी पीना चाहिए। पानी शरीर के कार्यों के लिए बहुत ज़रूरी है, जैसे तापमान को नियंत्रित करना और पोषक तत्वों को पहुंचाना। पर्याप्त पानी पीने से वे स्वस्थ रहते हैं।
In simple words: बच्चों को दिनभर में 6-8 गिलास पानी पीना चाहिए।

🎯 Exam Tip: पानी के महत्व और उसकी दैनिक आवश्यकता को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 12. बाल्यावस्था को कितने भागों में बाँटा गया?
Answer: बाल्यावस्था को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया है:
• प्रारंभिक बाल्यावस्था
• उत्तर-बाल्यावस्था
यह विभाजन बच्चों के विकास और सीखने की आवश्यकताओं के अनुसार किया गया है।
In simple words: बाल्यावस्था को दो मुख्य भागों में बांटा गया है: प्रारंभिक बाल्यावस्था और उत्तर-बाल्यावस्था।

🎯 Exam Tip: बाल्यावस्था के उप-विभाजनों को याद रखें और प्रत्येक की मुख्य विशेषताएँ समझें।

 

Question 13. लड़कियों के वजन में वृद्धि किस कारण से होती है?
Answer: लड़कियों के वजन में वृद्धि वसीय ऊतकों (फैट टिश्यूज) में बढ़ोत्तरी के कारण होती है। किशोरावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तनों के कारण उनके शरीर में वसा का जमाव बढ़ जाता है।
In simple words: लड़कियों का वजन वसीय ऊतकों (फैट) के बढ़ने से बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: लिंग-विशिष्ट शारीरिक परिवर्तनों के कारणों को याद रखें, विशेषकर वसा के जमाव का संबंध।

 

Question 14. 1-3 वर्ष के बच्चे को प्रतिदिन कितनी प्रोटीन की आवश्यकता होती है?
Answer: 1-3 वर्ष तक के बच्चे को प्रतिदिन 22 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। प्रोटीन उनके तेजी से बढ़ते शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मांसपेशियों और अन्य ऊतकों के निर्माण और मरम्मत में मदद करता है।
In simple words: 1-3 साल के बच्चे को रोज़ 22 ग्राम प्रोटीन चाहिए।

🎯 Exam Tip: विभिन्न आयु वर्गों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा, विशेषकर प्रोटीन, को सटीक रूप से याद रखें।

Rbse Class 12 Home Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न (Sa-I)

 

Question 1. पूर्ण बाल्यावस्था में होने वाले शारीरिक वृद्धि एवं विकास के प्रमुख लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि एवं विकास शैशवावस्था की तुलना में थोड़ा कम और स्थिर होता है। 2-3 वर्ष की उम्र के बीच 20 अस्थायी दांत निकल आते हैं। बाल्यावस्था के दौरान प्रमुख शारीरिक परिवर्तन इस प्रकार हैं:
• वजन में वृद्धि की दर लगभग 2 किग्रा/वर्ष से बढ़कर 4 किग्रा/वर्ष तक हो जाती है।
• लंबाई में वृद्धि की दर 5 से 6.5 सेमी/वर्ष होती है, जो लड़कियों में लड़कों की तुलना में अधिक होती है।
• बच्चों के अस्थायी दांतों की जगह स्थायी दांत आने लगते हैं।
• शारीरिक विकास की गति किशोरावस्था की तीव्र गति की तुलना में धीमी होती है।
• छः वर्ष की उम्र में जो लड़कियां लड़कों की तुलना में वजन में हल्की और कद में छोटी थीं, वे दस वर्ष की उम्र होते-होते लड़कों की अपेक्षा वजन में भारी और अधिक लंबी हो जाती हैं। यह वृद्धि बच्चों को मजबूत और स्वस्थ बनाती है।
In simple words: बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि धीमी, स्थिर होती है। वजन 2-4 किग्रा/वर्ष, लंबाई 5-6.5 सेमी/वर्ष बढ़ती है। अस्थायी दांतों की जगह स्थायी दांत आते हैं। लड़कियों का विकास लड़कों से पहले होता है।

🎯 Exam Tip: शारीरिक वृद्धि और विकास के विभिन्न पहलुओं (जैसे वजन, लंबाई, दांत) को आयु वर्ग के अनुसार स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. बाल्यावस्था में पोषण सम्बन्धी समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: बाल्यावस्था में पोषण संबंधी कई समस्याएं होती हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. क्रियाशीलता एवं आत्मनिर्भरता में वृद्धि: बच्चे अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ जाती है।
2. खेलों के प्रति अधिक अभिरुचि: खेलकूद में ज्यादा समय देने से वे खाने पर कम ध्यान देते हैं।
3. भोजन के प्रति अधिक अरुचि: बच्चों को कुछ खाद्य पदार्थ पसंद नहीं आते, जिससे उनका आहार असंतुलित हो सकता है।
4. दांत क्षय की समस्या: मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से दांत खराब हो सकते हैं।
5. कक्षा में प्रतिस्पर्धा की भावना एवं सहपाठियों के समायोजन के कारण बालक तनाव की स्थिति में रहते हैं: सामाजिक तनाव भी खाने की आदतों को प्रभावित कर सकता है। बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य का पोषण पर सीधा असर पड़ता है।
In simple words: बाल्यावस्था में पोषण की समस्याओं में अधिक सक्रियता, खाने में अरुचि, दांतों का खराब होना और तनाव शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: पोषण संबंधी समस्याओं को सूचीबद्ध करते समय, उनके कारणों और प्रभावों को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 3. बाल्यावस्था में ऊर्जा की आवश्यकता को समझाइये।
Answer: बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि, विकास और सक्रियता को बनाए रखने के लिए बच्चों को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। जो बच्चे तेजी से शारीरिक वृद्धि कर रहे हैं, बहुत सक्रिय हैं या ठंडे इलाकों में रहते हैं, उन्हें ज़्यादा ऊर्जा चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके शरीर में ऊर्जा का उपयोग (उपापचय) अधिक होता है। ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनाज, गुड़, शक्कर और वसा जैसे कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ भरपूर मात्रा में शामिल करने चाहिए। खाने में पर्याप्त अनाज होने से ऊर्जा मिलती है और भूख भी शांत होती है, साथ ही यह प्रोटीन को ऊर्जा के लिए इस्तेमाल होने से बचाता है।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चों को बढ़ने, खेलने और शरीर को गरम रखने के लिए बहुत ऊर्जा चाहिए। उन्हें अनाज, गुड़ और वसा से बनी चीजें खानी चाहिए।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की आवश्यकताओं को समझाते समय, इसे शारीरिक गतिविधि, वृद्धि और जलवायु से जोड़ें, और ऊर्जा के मुख्य स्रोतों का उल्लेख करें।

 

Question 4. पूर्व-बाल्यावस्था में बालकों की पोषण सम्बन्धी समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चों को तेजी से शारीरिक वृद्धि के कारण अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। लेकिन इस उम्र में उन्हें कई पोषण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर बच्चे चीजों को मुंह में डालने की आदत रखते हैं, जिसके चलते वे मिट्टी, चूना, कागज, साबुन जैसी न खाने वाली चीजें खाने की कोशिश करते हैं। इस समस्या को पाइका (Pica) कहते हैं। ऐसी चीजों को खाने से बच्चों की भूख कम हो जाती है और उनका पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। इन वस्तुओं को खाने की इच्छा का कारण उनके भोजन में पोषक तत्वों, गुणवत्ता और स्वाद की कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बच्चों को प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण, रक्ताल्पता (एनीमिया), रतौंधी, रिकेट्स, स्कर्वी, बेरी-बेरी, एराइबोफ्लेविनोसिस और पैलाग्रा जैसे रोग हो सकते हैं। एक संतुलित आहार इन समस्याओं को रोकने में मदद करता है।
In simple words: पूर्व-बाल्यावस्था में बच्चों को पाइका (न खाने वाली चीजें खाना) जैसी पोषण समस्याएँ होती हैं, जिससे भूख कम होती है और बीमारियाँ हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: पूर्व-बाल्यावस्था की पोषण संबंधी समस्याओं का वर्णन करते समय पाइका और उससे जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों (जैसे कुपोषण, एनीमिया) पर जोर दें।

Rbse Class 12 Home Science Chapter 12 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. बाल्यावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर प्रकाश डालिए। अथवा बाल्यावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकता का उल्लेख करते हुए आठ वर्षीय बालक की एक दिन की आहार-तालिका का निर्माण कीजिए।
Answer: बाल्यावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकताएं (Needs of Nutrition During Childhood) बच्चों की सक्रियता, जलवायु और स्वास्थ्य के अनुसार बदलती रहती हैं। बच्चों को संतुलित आहार देना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक है। एक दिन के लिए पोषक तत्वों की प्रस्तावित मात्रा तालिका नीचे दी गई है, जो विभिन्न आयु समूहों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को दर्शाती है। यह तालिका बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक पोषण संबंधी दिशानिर्देश प्रदान करती है।

भोज्य समूहआयु वर्ग10-12 वर्ष
1-3 वर्ष4-6 वर्ष7-9 वर्षबालकबालिका
वसा (ग्रा.)2525252222
कैल्सियम (मिग्रा.)400400400600600
लौह तत्व (मिग्रा.)1218263419
बीटा कैरोटीन (मिग्रा.)16001600240024002400
थायमिन (मिग्रा.)0-60-91-01-11-0
राइबोफ्लेविन (मिग्रा.)0-71-01-21-31-2
नियासिन (मिग्रा.)811131513
पिरीडॉक्सिन (मिग्रा.)0-90-91-61-61-6
विटामिन 'सी' (मिग्रा.)4040404040
फोलिक अम्ल (मिग्रा.)3040607070
विटामिन बी-12 (मिग्रा.)0-2-1-00-2-1-00-2-1-00-2-1-00-2-1-0

बाल्यावस्था में बच्चों को सबसे ज्यादा प्रोटीन की जरूरत होती है। दूध, दही, छेना, अंडा, मांस, मछली जैसे उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को सही मात्रा में देना चाहिए। हड्डियों और दांतों के विकास के लिए भी खनिज लवणों की आवश्यकता होती है।
In simple words: बाल्यावस्था में बच्चों को पोषण की बहुत ज़रूरत होती है। उनकी सक्रियता और उम्र के हिसाब से उन्हें अलग-अलग पोषक तत्व चाहिए। प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन जैसे ज़रूरी तत्व उनके खाने में सही मात्रा में होने चाहिए ताकि उनका विकास अच्छे से हो सके।

🎯 Exam Tip: पोषण संबंधी आवश्यकताओं को सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत करना और प्रमुख पोषक तत्वों के महत्व को स्पष्ट करना उत्तर को प्रभावी बनाता है।

 

Question 2. विद्यालयी बालक की आहार व्यवस्था करते समय किन - किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Answer: यदि प्रारंभिक बाल्यावस्था में भोजन संबंधी अच्छी और स्वस्थ आदतें विकसित हो चुकी हैं, तो उत्तर बाल्यावस्था में वे और परिपक्व हो जाती हैं। इसलिए, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए आहार व्यवस्था करते समय इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:
1. बच्चों को भोजन शांत और प्यार भरे माहौल में परिवार के सदस्यों के साथ ही देना चाहिए।
2. सुबह का नाश्ता पौष्टिक होना चाहिए और ऐसा हो जिसे खाने में कम समय लगे, जैसे पराठा या सैंडविच दूध के साथ।
3. बच्चों को स्कूल जाते समय टिफिन अवश्य देना चाहिए, और उसमें पौष्टिक, सुपाच्य, स्वादिष्ट और रुचिकर खाद्य पदार्थ रखे जाने चाहिए।
4. बच्चों को सादा और कम मिर्च-मसाले वाला तथा आकर्षक तरीके से भोजन देना चाहिए।
5. आहार में प्रतिदिन कोई नया और रुचिकर व्यंजन शामिल करना चाहिए।
6. यदि बच्चे कोई व्यंजन अस्वीकार कर देते हैं, तो उन्हें डांटने या परेशान किए बिना, उसके रूप, रंग या पकाने की विधि में बदलाव करना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि पालक या मेथी की सब्जी पसंद न हो, तो उसे आटे में गूंथकर पराठे बनाकर खिलाया जा सकता है। यह खाने में विविधता लाता है।
In simple words: स्कूली बच्चों को शांत माहौल में, पसंदीदा और पौष्टिक खाना दें। नाश्ता और टिफिन में स्वादिष्ट और पौष्टिक चीजें दें। अगर कोई खाना पसंद न आए, तो उसे बनाने का तरीका बदलें।

🎯 Exam Tip: बच्चों के आहार प्रबंधन में उनकी पसंद, पोषक तत्वों की आवश्यकता और भोजन के प्रति सकारात्मक रवैया बनाने पर ध्यान दें।

Rbse Class 12 Home Science Chapter 12 प्रायोगिक कार्य

 

Question 1. बाल्यावस्था में बालकों की वृद्धि एवं विकास के अनुसार दैनिक संतुलित आहार-तालिका का निर्माण कीजिए।
Answer: बाल्यावस्था में बच्चों की वृद्धि और विकास के लिए दैनिक संतुलित आहार-तालिका नीचे दी गई है। यह बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती है और उन्हें स्वस्थ रखती है।

भोज्य समूहआयु वर्ग10-12 वर्ष
1-3 वर्ष4-6 वर्ष7-9 वर्षबालकबालिका
अनाज120210270330270
दालें3045606060
दूध (मिली.)500500500500500
कंदमूल50100100100100
हरी पत्तेदार सब्जियां5050100100100
अन्य सब्जियाँ50100100100100
फल100100100100100
शक्कर2530303530
घी/तेल2025252525

नोट – मांसाहारी बालक को 30 ग्राम दाल के बदले 50 ग्राम अंडा / मांस / मछली दे सकते हैं।
In simple words: बच्चों के लिए संतुलित भोजन तालिका उनकी उम्र और लिंग के हिसाब से पोषक तत्वों की सही मात्रा बताती है। यह तालिका अनाज, दाल, दूध, सब्जियां, फल, शक्कर और घी की दैनिक मात्रा दर्शाती है। यदि बच्चा मांसाहारी है, तो दाल की जगह अंडा, मांस या मछली दे सकते हैं।

🎯 Exam Tip: आहार तालिका बनाते समय, विभिन्न आयु वर्गों के लिए पोषक तत्वों की मात्रा को सटीक रूप से याद रखें और शाकाहारी/मांसाहारी विकल्पों को भी ध्यान में रखें।

 

Question 2. बाल्यावस्था के लिए संतुलित आहार भोज्य तालिका का निर्माण कीजिए।
Answer: बाल्यावस्था के लिए संतुलित आहार भोज्य तालिका वही है जो प्रश्न 1 में दी गई है। यह बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक व्यापक योजना है।
नोट-मांसाहारी बालकों को दाल की एक इकाई (30 ग्राम) के बदले में अंडा / मांस / मछली की एक इकाई (50 ग्राम) दे सकते हैं।
In simple words: बाल्यावस्था के लिए संतुलित आहार तालिका वही है जो हमने पहले प्रश्न में देखी थी। मांसाहारी बच्चों के लिए दाल की जगह अंडा, मांस या मछली दे सकते हैं।

🎯 Exam Tip: यदि समान प्रश्न दोहराया जाता है, तो पहले दिए गए विस्तृत उत्तर का संदर्भ देना पर्याप्त होता है, और किसी भी अतिरिक्त जानकारी को शामिल करें।

 

Question 3. तीन वर्षीय बालक के एक दिन के भोजन की भोज्य इकाइयों का विभाजन एवं उनके कुल योग की तालिका का निर्माण करिए।
Answer: तीन वर्षीय बालक के एक दिन के भोजन की भोज्य इकाइयों का विभाजन और उनका कुल योग नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है। यह तालिका बच्चे की दैनिक पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक विस्तृत आहार योजना प्रस्तुत करती है। यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे को सही समय पर सही मात्रा में सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलें।

समयव्यंजनमात्रासामग्री (भोज्य समूह)मात्रा (ग्राम)इकाई
7:00 बजेउपमा1 प्लेटशक्कर51
सूजी (अनाज)451/2
गाजर, प्याज (कंदमूल)10-
टिफिन
11:00 बजे
बथुए का पराठा2तेल2-51/2
गेहूँ का आटा (अनाज)602
बथुआ (हरी पत्तेदार सब्जियाँ)501/2
तेल51
गाजर मटर की सब्जी1 कटोरीगाजर (कंदमूल)501/2
मटर (अन्य सब्जियाँ)251/4
तेल2-51/2
खोए की मिठाई1 टुकड़ामावा (दूध)251
शक्कर51
नारियल बूरा5-
दोपहर का भोजन
2:00 बजे
चपाती2गेहूं का आटा (अनाज)602
घी2-51/2
चावल1/2 प्लेटचावल (अनाज)301
दाल1 कटोरीतुअर (दाल)301
घी2-51/2
भिण्डी की सब्जी1/2 कटोरीभिण्डी (अन्य सब्जियाँ)501/2
तेल2-51/2
रायता1 कटोरीदही (दूध)501/2
पालक (हरी पत्तेदार सब्जियाँ)251/4
शाम की चाय
5:00 बजे
भेल पूरी1 प्लेटचावल के मुरमुरे (अनाज)151/2
आलू, प्याज (कंदमूल)251/4
रात्रि का भोजन
10:00 बजे
बाटी2गेहूं का आटा (अनाज)602
घी2-51/2
दाल1 कटोरीउड़द, चना, मूंग (दाल)301
चूरमे का लड्डू1 लड्डूघी2-51/2
गेहूँ का आटा (अनाज)151/2
शक्कर102
सलाद1/2 प्लेटघी7-51/2
चुकन्दर (कंदमूल)251/4
खीरा (अन्य सब्जियाँ)501/2
हरे धनिए की चटनी1 बड़ाहरा धनिया, पुदीना (हरी पत्तेदार सब्जियाँ)251/4
रात्रि सोते समय
10 बजे
दूध3/4 गिलासदूध1501/2
शक्कर51

In simple words: तीन साल के बच्चे के लिए पूरे दिन की खाने की योजना इस तालिका में दी गई है। इसमें हर भोजन और उसके घटकों की मात्रा बताई गई है, ताकि बच्चे को पर्याप्त पोषण मिले।

🎯 Exam Tip: आहार तालिका बनाते समय, भोजन के समय, व्यंजन, मात्रा और सामग्री को स्पष्ट रूप से दर्शाएं ताकि एक पूर्ण और संतुलित योजना प्रस्तुत की जा सके।

 

Question 4. तीन वर्षीय बालक के एक दिन के भोजन की भोज्य इकाइयों का विभाजन एवं उनके कुल योग की तालिका का निर्माण करिए।
Answer: तीन वर्षीय बालक के एक दिन के भोजन की भोज्य इकाइयों का विभाजन और कुल योग की तालिका प्रश्न 3 में विस्तृत रूप से प्रस्तुत की गई है। वही तालिका इस प्रश्न के लिए भी लागू होती है, जो बच्चे की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक सटीक योजना प्रदान करती है।
In simple words: तीन साल के बच्चे के खाने की तालिका वही है जो हमने प्रश्न 3 में बनाई थी।

🎯 Exam Tip: यदि समान प्रश्न दोहराया जाता है, तो पिछले विस्तृत उत्तर का संदर्भ देना और आवश्यकतानुसार संक्षेप में दोहराना प्रभावी होता है।

 

Question 5. एक नौ वर्षीय विद्यालयी बालक के लिए एक दिन का आहार-आयोजन आप किस प्रकार करेंगे?
Answer: एक नौ वर्षीय विद्यालयी बालक के लिए एक दिन का आहार-आयोजन तालिका नीचे दी गई है, जिसमें अलग-अलग समय पर दिए जाने वाले भोज्य समूह और उनकी मात्राएँ शामिल हैं। यह तालिका बच्चे की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती है, जिससे उसे दिन भर ऊर्जा मिलती है।

भोज्य समूहसुबह 8 बजेनाश्ता 9 बजेदोपहर का भोजन 12:30 बजेदोपहर के बाद 3 बजेशाम की चाय 5 बजेरात्रि का भोजन 7:30 बजेरात्रि सोने से पूर्व 8:30 बजेकुल योग
अनाज11/2114
दालें1/212
दूध111115
कंदमूल1/41/41/2
हरी पत्तेदार सब्जियां1/21/2
अन्य सब्जियाँ1/41/4
फल3/41/41
शक्कर111115
घी/तेल1/21/2114
In simple words: यह तालिका दिखाती है कि 9 साल के स्कूली बच्चे को पूरे दिन में अलग-अलग समय पर कौन-कौन से खाद्य पदार्थ कितनी मात्रा में देने चाहिए, ताकि उसे सही पोषण मिल सके।

🎯 Exam Tip: दैनिक आहार तालिका बनाते समय बच्चे की उम्र, लिंग, शारीरिक गतिविधि और जलवायु को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सभी कारक पोषण की आवश्यकता को प्रभावित करते हैं।

 

Question 6. नौ वर्षीय बालक के एक दिन के भोजन की भोज्य इकाइयों का विभाजन एवं उनके कुल योग की तालिका का निर्माण करिए।
Answer: नौ वर्षीय बालक के लिए एक दिन के भोजन की भोज्य इकाइयों का विभाजन और कुल योग की तालिका इस प्रकार है। इसमें विभिन्न भोजन समयों पर परोसे जाने वाले व्यंजन और उनकी सामग्री की मात्राएं दी गई हैं, जो बच्चे की ऊर्जा और वृद्धि की जरूरतों को पूरा करती हैं।

भोजन का समय / मुख्य व्यंजनमात्रासामग्री / विवरणसामग्री की मात्राकुल/हिस्सा
दोपहर का भोजन 2:00 बजे
चपाती2गेहूं का आटा (अनाज)602
घी2.51/2
चावल1/2 प्लेटचावल (अनाज)301
दाल1 कटोरीतुअर (दाल)301
घी2.51/2
भिण्डी की सब्जी1/2 कटोरीभिण्डी (अन्य सब्जियाँ)501/2
तेल2.51/2
रायता1 कटोरीदही (दूध)501/2
पालक (हरी पत्तेदार सब्जियाँ)251/4
शाम की चाय 5:00 बजे
भेल पूरी1 प्लेटचावल के मुरमुरे (अनाज)151/2
आलू, प्याज (कंदमूल)251/4
टमाटर (फल)251/4
रात्रि का भोजन
फलों का रस1/2 गिलासअनानास (फल)2001
बाटी2गेहूं का आटा (अनाज)602
घी2.51/2
दाल1 कटोरीउड़द, चना, मूँग (दाल)301
घी2.51/2
चूरमे का लड्डू1 लड्डूगेहूं का आटा (अनाज)151/2
शक्कर102
घी7-51/2
सलाद1/2 प्लेटचुकन्दर (कंदमूल)251/4
खीरा (अन्य सब्जियाँ)501/2
हरे धनिए की चटनी1 बड़ाहरा धनिया, पुदीना (हरी पत्तेदार सब्जियाँ)251/4
रात्रि सोते समय 10 बजे
दूध3/4 गिलासदूध1501/2
शक्कर51
In simple words: यह तालिका बताती है कि 9 साल के बच्चे के लिए पूरे दिन के भोजन में क्या-क्या खाद्य पदार्थ कितनी मात्रा में शामिल होने चाहिए। इससे बच्चे को स्वस्थ रहने के लिए सभी ज़रूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

🎯 Exam Tip: इस तरह की तालिका बनाते समय, भोजन की विविधता और बच्चे की पसंद का ध्यान रखें। बच्चे के आहार में सभी प्रमुख खाद्य समूहों को शामिल करना सुनिश्चित करें।

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