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Detailed Chapter 11 शैशवावस्था में पोषणं RBSE Solutions for Class 12 Home Science
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Class 12 Home Science Chapter 11 शैशवावस्था में पोषणं RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Home Science Chapter 11 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(i) शिशु के जन्म के बाद 1 वर्ष तक की अवस्था को कहते हैं -
(अ) बाल्यावस्था
(ब) युवावस्था
(स) शैशवावस्था
(द) गर्भावस्था
Answer: (स) शैशवावस्था
In simple words: शिशु के जन्म से लेकर एक साल तक की उम्र को शैशवावस्था कहते हैं, जो बच्चे के शुरुआती विकास का समय होता है।
Question 1. (ii) एक स्वस्थ शिशु की लम्बाई जन्म के समय कितनी होती है?
(अ) 50 - 55 सेमी.
(ब) 30 - 40 सेमी.
(स) 42 - 45 सेमी.
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) 50 - 55 सेमी.
In simple words: जब एक स्वस्थ बच्चा जन्म लेता है, तो उसकी सामान्य लम्बाई 50 से 55 सेंटीमीटर के बीच होती है। यह स्वस्थ विकास का एक संकेत है।
Question 1. (iv) प्रथम 6 माह में शिशु को प्रोटीन की आवश्यकता होती है -
(अ) 1.16 ग्रा. / किलो शरीर भार
(ब) 2.5 ग्रा. / किलो शरीर भार
(स) 2.0 ग्रा. / किलो शरीर भार
(द) 1.0 ग्रा. / किलो शरीर भार
Answer: (अ) 1.16 ग्रा. / किलो शरीर भार
In simple words: जन्म से 6 महीने तक के बच्चे को हर किलो वजन के हिसाब से 1.16 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। यह उसकी तेजी से बढ़ती शरीर के लिए बहुत जरूरी है।
Question 1. (v) स्तनपान छुड़ाने के लिए दिये जाने वाले आहार कहलाते हैं -
(अ) स्तन त्याग आहार
(ब) पूरक आहार
(स) परिपूरक आहार
(द) ये सभी
Answer: (अ) स्तन त्याग आहार
In simple words: जब बच्चे को माँ का दूध छुड़ाकर दूसरा खाना देना शुरू करते हैं, तो उस खाने को स्तन त्याग आहार कहते हैं। यह बच्चे को धीरे-धीरे ठोस खाने की आदत डालने में मदद करता है।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. नवजात की हृदय गति..........होती है।
2. जन्म के समय शिशु के रक्त में हीमोग्लोबिन की सान्द्रता.........तक होती है।
3. 0-12 माह के शिशु को.......कैल्सियम की आवश्यकता होती है।
4. शिशु के जन्म के तुरन्त बाद माँ के स्तनों का पहला स्रवण..........कहलाता है।
5. कोलस्ट्रम में प्रोटीन की मात्रा परिपक्क दूध से....... पायी जाती है।
6. पशु दूध में...................की सान्द्रता बहुत अधिक होती है, जबकि..........की कम।
7. .से तात्पर्य शिशु को घड़ी के अनुसार स्तनपान करना है।
Answer:
1. नवजात की हृदय गति **तेज** होती है।
2. जन्म के समय शिशु के रक्त में हीमोग्लोबिन की सान्द्रता **बहुत अधिक** तक होती है।
3. 0-12 माह के शिशु को **अधिक** कैल्सियम की आवश्यकता होती है।
4. शिशु के जन्म के तुरन्त बाद माँ के स्तनों का पहला स्रवण **कोलस्ट्रम** कहलाता है।
5. कोलस्ट्रम में प्रोटीन की मात्रा परिपक्व दूध से **अधिक** पायी जाती है।
6. पशु दूध में **प्रोटीन, खनिज लवणों** की सान्द्रता बहुत अधिक होती है, जबकि **लैक्टोज** की कम।
7. **समयानुसार स्तनपान** से तात्पर्य शिशु को घड़ी के अनुसार स्तनपान करना है।
In simple words: जन्म के समय बच्चे का दिल तेजी से धड़कता है और खून में हीमोग्लोबिन ज्यादा होता है। पहले साल में उसे बहुत कैल्शियम चाहिए। माँ का पहला दूध कोलस्ट्रम कहलाता है, जिसमें प्रोटीन ज्यादा और लैक्टोज कम होता है। बच्चे को समय पर दूध पिलाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, सुनिश्चित करें कि आप केवल सही शब्द या वाक्यांश का उपयोग करें जो वाक्य को व्याकरणिक रूप से सही और तथ्यात्मक रूप से सटीक बनाता है।
Question 3. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
1. माँग स्तनपान
2. कोलस्ट्रम
3. पूरक आहार।
Answer:
1. माँग स्तनपान: यह वह तरीका है जहाँ शिशु को जब भूख लगे या जब वह रोए, तब उसे दूध पिलाया जाता है। इसे 'माँग स्तनपान' कहते हैं। यदि शिशु भूख के अलावा किसी और वजह से रो रहा हो, जैसे पेट दर्द या गीला बिस्तर, तो माँ को सही कारण पहचानने में मुश्किल हो सकती है। बच्चे की जरूरत के हिसाब से दूध पिलाना उसके लिए सबसे अच्छा होता है।
2. कोलस्ट्रम: यह शिशु के जन्म के ठीक बाद माँ के स्तनों से निकलने वाला पहला गाढ़ा, पीला दूध होता है। इसमें बहुत सारा प्रोटीन और ऐसे तत्व होते हैं जो बच्चे को बीमारियों से बचाते हैं, इसे 'खीस' भी कहते हैं। कोलस्ट्रम पहले 2-3 दिनों तक 10-40 मिलीलीटर की कम मात्रा में निकलता है, फिर धीरे-धीरे सफेद दूध में बदल जाता है। इसे कभी फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि यह नवजात शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है। कोलस्ट्रम में प्रोटीन और विटामिन A तथा E ज्यादा होते हैं, लेकिन वसा कम होती है। यह शिशु के पेट के लिए आसानी से पचने वाला होता है और पहले मल त्याग में मदद करता है।
3. पूरक आहार: पूरक आहार वह प्रक्रिया है जिसमें शिशु को माँ के दूध के साथ-साथ धीरे-धीरे ठोस या अर्ध-ठोस भोजन देना शुरू किया जाता है। शिशु धीरे-धीरे माँ के दूध की जगह परिवार के दूसरे खाद्य पदार्थों को खाना सीखता है। इस दौरान, बच्चे को फलों का रस, दाल का पानी, पतला दूध जैसे तरल पदार्थ पहले दिए जाते हैं, जिससे वह परिवार के भोजन को अपना सके। यह भोजन बच्चे के विकास के लिए माँ के दूध के पोषण को पूरा करता है।
In simple words: माँग स्तनपान का मतलब है जब बच्चा माँगे तब दूध पिलाना। कोलस्ट्रम माँ का पहला पीला दूध है जो शिशु को बीमारियों से बचाता है। पूरक आहार बच्चे को माँ के दूध के साथ धीरे-धीरे दूसरा खाना देना सिखाता है।
🎯 Exam Tip: टिप्पणी लिखते समय, हर बिंदु को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से परिभाषित करें। महत्वपूर्ण शब्दों जैसे 'माँग स्तनपान', 'कोलस्ट्रम' और 'पूरक आहार' पर जोर दें।
Question 4. छ: माह के शिशु के लिये एक दिन की आहार तालिका बनाइये।
Answer:
छ: माह के शिशु के लिए एक दिन का आहार - आयोजन
| समय | आहार |
|---|---|
| प्रातः 6 बजे | स्तनपान |
| 8 बजे | दूध में तैयार पोषक तत्त्व |
| 9 बजे | स्तनपान |
| 11 बजे | फलों का रस (1-3 चाय के चम्मच) |
| दोपहर 12 बजे | स्तनपान |
| 2 बजे | सूजी या चावल की पतली खीर (1-2 चाय के चम्मच) |
| 3 बजे | स्तनपान |
| 5 बजे | दूध के साथ केला या आम या अन्य फल मिलाकर (1-2 चाय के चम्मच) |
| 6 बजे | स्तनपान |
| 8 बजे | दाल/चावल का पानी (1-3 चम्मच) |
| रात्रि 10 बजे | स्तनपान |
In simple words: 6 महीने के बच्चे के लिए, दिन भर माँ का दूध पिलाने के साथ-साथ फलों का रस, पतली खीर, और दाल-चावल का पानी जैसे छोटे-छोटे पूरक आहार भी तय समय पर दिए जाने चाहिए।
🎯 Exam Tip: आहार तालिका बनाते समय, निश्चित समय पर स्तनपान के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के तरल और अर्ध-तरल पूरक आहारों को शामिल करें।
Question 5. शिशु के जीवन में पौष्टिक आहार का क्या महत्त्व है?
Answer: शिशु के जन्म से लेकर 1 वर्ष तक की अवस्था को शैशवावस्था कहते हैं, और जन्म के 1 माह बाद वह शिशु कहलाता है। शिशु को ऊर्जा की जरूरत वयस्कों से प्रति यूनिट शारीरिक भार के हिसाब से ज्यादा होती है। जन्म के बाद पहले 6 माह में, शिशु को अधिकतम 92 किलो कैलोरी/किलोग्राम शरीर भार की ऊर्जा चाहिए, जो 6 माह बाद घटकर 80 किलो कैलोरी/किलोग्राम शरीर भार हो जाती है। यह ऊर्जा बच्चे को माँ के दूध और पूरक आहार में मौजूद प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट से मिलती है। बच्चे के पौष्टिक आहार में प्रोटीन की आवश्यकता एक सामान्य व्यक्ति से अधिक होती है, क्योंकि यह बच्चे का शारीरिक वजन बढ़ाने, मांसपेशियों का विकास करने और मस्तिष्क के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। माँ के दूध में सभी खनिज लवण और विटामिन्स होते हैं, जो बच्चे की सभी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करते हैं, सिवाय विटामिन D के। इसलिए, 6 माह तक केवल माँ का दूध ही शिशु के लिए सबसे अच्छा होता है और उसके बाद पूरक आहार दिया जा सकता है।
In simple words: बच्चे के लिए पौष्टिक आहार बहुत जरूरी है क्योंकि यह उसके शारीरिक विकास, मांसपेशियों की मजबूती और दिमाग के सही विकास में मदद करता है। माँ का दूध पहले 6 महीने तक सबसे अच्छा पोषण देता है, उसके बाद पूरक आहार भी देना चाहिए।
🎯 Exam Tip: पौष्टिक आहार के महत्व को समझाते समय, शिशु की ऊर्जा और प्रोटीन की आवश्यकताओं, माँ के दूध की भूमिका, और पूरक आहार के लाभों को विस्तार से बताएं।
Question 6. "माँ का दूध सर्वोत्तम आहार है” समझाइये।
Answer: माँ का दूध शिशु के लिए अमृत समान और प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। नवजात शिशु के लिए यह सबसे अच्छा और पौष्टिक आहार होता है, क्योंकि कोई और चीज़ इतनी फायदेमंद नहीं होती। यह शिशु के विकास और वृद्धि के लिए सबसे उत्तम है। माँ के दूध में सभी जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, पानी, खनिज लवण और विटामिन्स, जो शिशु के सही विकास के लिए आवश्यक हैं। नवजात शिशु के पाचन अंग अभी पूरी तरह से विकसित नहीं होते, लेकिन वे माँ के दूध को आसानी से पचा लेते हैं। शुरुआत में माँ का दूध पतला होता है, लेकिन शिशु के पाचन अंगों के मजबूत होने के साथ-साथ यह गाढ़ा होता जाता है और शिशु की जरूरत के हिसाब से बढ़ता है। माँ के दूध में मौजूद कार्बोहाइड्रेट लैक्टोज के रूप में होता है, जो आसानी से पच जाता है और शिशु के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसलिए, मानव शिशु के लिए माँ का दूध सबसे अच्छा आहार है। यह दूध साफ, कीटाणु-रहित, आसानी से पचने वाला, पौष्टिक, सही तापमान पर और हमेशा उपलब्ध होता है। किसी और दूध की तुलना इससे नहीं की जा सकती। यह शिशु की शारीरिक और पोषण संबंधी जरूरतों के लिए भगवान का दिया हुआ वरदान है। माँ के दूध की मात्रा शिशु की भूख के अनुसार बनती है। पहले 2-3 दिनों में कोलस्ट्रम कम मात्रा में होता है और 10-15 दिनों में यह सफेद दूध में बदल जाता है। नवजात शिशु का पेट छोटा होता है, इसलिए शुरुआत में माँ को हर आधे-एक घंटे में दूध पिलाना चाहिए।
In simple words: माँ का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा खाना है। इसमें सारे पोषक तत्व होते हैं, यह आसानी से पच जाता है, और बीमारियों से बचाता है। यह साफ, सुरक्षित और हमेशा तैयार रहता है, जो बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: माँ के दूध को सर्वोत्तम आहार बताते हुए, उसके पोषण संबंधी लाभ, पाचन में आसानी, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उपलब्धता जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 11 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Home Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. नवजात शिशु के आमाशय की क्षमता होती है -
(अ) 10 - 12 मिली.
(ब) 12 - 14 मिली.
(स) 8 - 10 मिली.
(द) 6 - 8 मिली.
Answer: (अ) 10 - 12 मिली.
In simple words: एक नए जन्मे शिशु का पेट बहुत छोटा होता है, उसकी क्षमता सिर्फ 10 से 12 मिलीलीटर दूध या तरल पदार्थ रखने की होती है।
🎯 Exam Tip: नवजात शिशु के शारीरिक अंगों की क्षमता से संबंधित तथ्यों को सही संख्यात्मक मानों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. प्रथम 6 माह में शिशुओं को ऊर्जा की आवश्यकता होती है -
(अ) 110 किलो कैलोरी / किलो शरीर भार
(ब) 108 किलो कैलोरी / किलो शरीर भार
(स) 102 किलो कैलोरी / किलो शरीर भार
(द) 107 किलो कैलोरी / किलो शरीर भार
Answer: (द) 107 किलो कैलोरी / किलो शरीर भार
In simple words: जन्म के बाद पहले छह महीनों में, बच्चे को अपने वजन के हर किलोग्राम के लिए 107 किलो कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है। यह उसकी तेजी से बढ़ने के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: शिशु के लिए ऊर्जा की आवश्यकताओं को याद करते समय, 'प्रति किलो शरीर भार' इकाई को ध्यान में रखें और शुरुआती महीनों के लिए सही कैलोरी मान बताएं।
Question 3. शारीरिक वृद्धि व विकास के अनुसार एक स्वस्थ शिशु का जन्म भार होता है -
(अ) 2.2 किलोग्राम
(ब) 3.2 किलोग्राम
(स) 4.2 किलोग्राम
(द) 2.3 किलोग्राम
Answer: (ब) 3.2 किलोग्राम
In simple words: एक स्वस्थ बच्चे का जन्म के समय सामान्य वजन लगभग 3.2 किलोग्राम होता है, जो उसके अच्छे शारीरिक विकास को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: शिशु के जन्म के वजन से संबंधित जानकारी को सही संख्यात्मक मान के साथ प्रस्तुत करें, क्योंकि यह स्वस्थ विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक है।
Question 5. कोलस्ट्रम में जिंक की मात्रा होती है -
(अ) 10 मिग्रा. / लीटर
(ब) 15 मिग्रा. / लीटर
(स) 25 मिग्रा. / लीटर
(द) 20 मिग्रा. / लीटर
Answer: (द) 20 मिग्रा. / लीटर
In simple words: माँ के पहले दूध (कोलस्ट्रम) में 20 मिलीग्राम जिंक प्रति लीटर होता है। जिंक बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: कोलस्ट्रम में पोषक तत्वों की मात्रा, विशेषकर सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जिंक, को सही इकाई (मिग्रा./लीटर) के साथ याद रखें।
Question 6. पूरक आहार शिशु को दिया जाता है -
(अ) 0-3 माह के बाद
(ब) 6 माह के बाद
(स) 9 माह के बाद
(द) 1 वर्ष के बाद
Answer: (ब) 6 माह के बाद
In simple words: बच्चे को माँ के दूध के साथ पूरक आहार 6 महीने की उम्र के बाद देना शुरू करना चाहिए, ताकि उसे अतिरिक्त पोषण मिल सके।
🎯 Exam Tip: पूरक आहार शुरू करने की सही उम्र को हमेशा याद रखें, क्योंकि यह शिशु के स्वस्थ विकास के लिए एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. दो वर्ष का होते-होते शिशु.........चलना-फिरना सीख जाता है।
2. एक वर्ष के अन्त तक शिशु की.. ..का विकास पूरा हो जाता है।
3. नवजात का उत्सर्जन तंत्र तथा वृक्क.........होते हैं।
4. माँ के स्तनों से .....का स्राव प्रारंभिक दिनों में 10 - 40 मिली. होता है।
5. स्तनपान कराने से माता को....... तृप्ति मिलती है।
6. स्तनपान शिशु की....... दर को कम करता है।
Answer:
1. दो वर्ष का होते-होते शिशु **स्वयं** चलना-फिरना सीख जाता है।
2. एक वर्ष के अन्त तक शिशु की **माँसपेशियों** का विकास पूरा हो जाता है।
3. नवजात का उत्सर्जन तंत्र तथा वृक्क **अपरिपक्व** होते हैं।
4. माँ के स्तनों से **कोलस्ट्रम** का स्राव प्रारंभिक दिनों में 10 - 40 मिली. होता है।
5. स्तनपान कराने से माता को **तृप्ति** मिलती है।
6. स्तनपान शिशु की **वृद्धि** दर को कम करता है।
In simple words: दो साल तक बच्चा खुद चलना सीख जाता है, एक साल में मांसपेशियों का विकास पूरा हो जाता है। नवजात शिशु के उत्सर्जन अंग अपरिपक्व होते हैं। माँ के दूध से माँ को संतुष्टि मिलती है, और यह शिशु की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
🎯 Exam Tip: खाली स्थान भरते समय, शिशु के विकास के चरणों और संबंधित शारीरिक प्रक्रियाओं के सही शब्दों का उपयोग करें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 11 अति लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. शैशवावस्था किसे कहते हैं?
Answer: शिशु के जन्म से लेकर एक वर्ष तक की उम्र को शैशवावस्था कहते हैं। इस दौरान बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बहुत तेजी से होता है।
In simple words: जन्म से एक साल तक की उम्र शैशवावस्था कहलाती है।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था की परिभाषा बताते समय, 'जन्म से एक वर्ष तक' की अवधि को स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
Question 2. गर्भावस्था के पश्चात शिशु का वृद्धि व विकास किस अवस्था में सबसे तीव्र गति से होता है?
Answer: गर्भावस्था के बाद शिशु का सबसे तेज वृद्धि और विकास शैशवावस्था में होता है। इस अवस्था में शिशु हर दिन नई चीजें सीखता है और उसका शरीर भी तेजी से बढ़ता है।
In simple words: बच्चे का सबसे तेज विकास शैशवावस्था में होता है।
🎯 Exam Tip: विकास की तीव्र गति वाली अवस्था का नाम स्पष्ट रूप से बताएं, जो शैशवावस्था है।
Question 3. नवजात शिशु के रक्त में हीमोग्लोबिन की सान्द्रता कितनी होती है?
Answer: नवजात शिशु के रक्त में हीमोग्लोबिन की सान्द्रता 18-20 ग्राम / 100 मिली. रक्त होती है। यह वयस्कों की तुलना में अधिक होती है।
In simple words: नए जन्मे बच्चे के खून में हीमोग्लोबिन 18-20 ग्राम / 100 मिलीलीटर होता है।
🎯 Exam Tip: हीमोग्लोबिन की सान्द्रता बताते समय, 'ग्राम / 100 मिली. रक्त' की इकाई का सही उपयोग करें।
Question 4. प्रथम 6 माह में शिशु को कितनी प्रोटीन की आवश्यकता होती है?
Answer: जन्म के बाद पहले 6 माह में शिशु को 2.05 ग्राम / किग्रा वजन के अनुपात में प्रोटीन की आवश्यकता होती है। यह मात्रा शिशु के तेजी से विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: पहले 6 महीने में बच्चे को हर किलो वजन पर 2.05 ग्राम प्रोटीन चाहिए।
🎯 Exam Tip: शिशु की प्रोटीन आवश्यकताओं को 'ग्राम / किग्रा वजन' की इकाई के साथ सही संख्यात्मक मान में प्रस्तुत करें।
Question 5. कितने माह तक के शिशु की सभी पोषणिक आवश्यकताएँ मातृ दूध से पूर्ण हो जाती हैं?
Answer: शिशु की सभी पोषण संबंधी आवश्यकताएँ 6 माह तक माँ के दूध से पूरी हो जाती हैं। इसके बाद पूरक आहार की जरूरत पड़ती है।
In simple words: 6 महीने तक माँ का दूध बच्चे की सभी पोषण जरूरतें पूरी करता है।
🎯 Exam Tip: माँ के दूध की पूर्ण पोषण अवधि बताते समय '6 माह' के समय-सीमा पर जोर दें।
Question 6. माँ का दूध ही शिशु के लिए श्रेष्ठ क्यों है?
Answer: माँ का दूध शिशु के लिए श्रेष्ठ है क्योंकि यह स्वच्छ, जीवाणु और कीटाणु रहित, आसानी से पचने वाला और पौष्टिक होता है। यह बच्चे को बीमारियों से भी बचाता है।
In simple words: माँ का दूध सबसे अच्छा है क्योंकि यह साफ, सुरक्षित, आसानी से पचने वाला और पौष्टिक होता है।
🎯 Exam Tip: माँ के दूध की श्रेष्ठता के कारणों को बताते समय, उसके सभी मुख्य गुणों जैसे स्वच्छता, पाचनशक्ति और पोषण मूल्य को संक्षेप में उल्लेख करें।
Question 7. माँग स्तनपान से क्या तात्पर्य है?
Answer: माँग स्तनपान का मतलब है कि शिशु को जब भी भूख लगे या वह रोए, तब उसे दूध पिलाना। यह शिशु की जरूरत के अनुसार होता है।
In simple words: माँग स्तनपान मतलब बच्चे की भूख या रोने पर उसे दूध पिलाना।
🎯 Exam Tip: माँग स्तनपान की परिभाषा में 'शिशु की आवश्यकतानुसार' दूध पिलाने के सिद्धांत को स्पष्ट करें।
Question 8. स्तनपान के बाद शिशु को कंधे पर लेकर क्यों थपथपाना चाहिए?
Answer: स्तनपान के बाद शिशु को कंधे पर लेकर उसकी पीठ थपथपानी चाहिए ताकि दूध पीते समय पेट में चली गई हवा बाहर निकल जाए। इससे शिशु को पेट दर्द से राहत मिलती है।
In simple words: दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे पर थपथपाना चाहिए ताकि पेट की हवा निकल जाए।
🎯 Exam Tip: स्तनपान के बाद बच्चे को थपथपाने का कारण बताते समय 'पेट में फँसी हवा निकालने' के महत्व पर जोर दें।
Question 9. शिशु को पशु - दूध, पानी और शक्कर मिलाकर क्यों देना चाहिए?
Answer: पशु के दूध में प्रोटीन और खनिज लवणों की मात्रा बहुत अधिक होती है, जबकि शक्कर की कमी होती है। इसलिए, शिशु को पशु दूध देने पर उसमें पानी और शक्कर मिलाकर दिया जाता है, ताकि यह माँ के दूध के करीब हो सके और बच्चे को आसानी से पच जाए।
In simple words: पशु दूध में प्रोटीन ज्यादा और शक्कर कम होती है, इसलिए इसे पानी और शक्कर मिलाकर देते हैं ताकि यह बच्चे के लिए सही रहे।
🎯 Exam Tip: पशु दूध में पानी और शक्कर मिलाने का कारण बताते समय, प्रोटीन और शक्कर की सान्द्रता के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 10. फॉर्मूला दूध किसे कहते हैं?
Answer: बाजार में उपलब्ध डिब्बाबंद दूध जिसमें सभी संघटक माँ के दूध जैसे ही होते हैं, उसे फॉर्मूला दूध (Formula Milk) कहते हैं। यह उन शिशुओं के लिए होता है जो माँ का दूध नहीं पी पाते।
In simple words: डिब्बे वाला दूध जो माँ के दूध जैसा होता है, उसे फॉर्मूला दूध कहते हैं।
🎯 Exam Tip: फॉर्मूला दूध की परिभाषा में 'माँ के दूध के समान संघटक' और 'बाजार में उपलब्ध डिब्बाबंद' जैसे मुख्य शब्दों का उपयोग करें।
Question 11. पूरक आहार किसे कहते हैं?
Answer: शिशु की वृद्धि और विकास की गति को बनाए रखने के लिए माँ के दूध के अलावा दिए जाने वाले आहार को पूरक आहार कहते हैं। यह बच्चे को पर्याप्त पोषण देने में मदद करता है।
In simple words: माँ के दूध के साथ बच्चे को दिया जाने वाला अतिरिक्त खाना पूरक आहार कहलाता है।
🎯 Exam Tip: पूरक आहार की परिभाषा में 'स्तन दूध के अतिरिक्त' और 'वृद्धि व विकास को बनाए रखने' जैसे बिंदुओं पर जोर दें।
Question 12. स्तन त्याग से क्या तात्पर्य है?
Answer: माता द्वारा शिशु को दो बार के स्तनपान के बीच में ठोस आहार देने की प्रक्रिया को स्तन त्याग (Weaning) कहते हैं। यह एक क्रमिक प्रक्रिया है।
In simple words: स्तन त्याग मतलब माँ के दूध के साथ बच्चे को धीरे-धीरे ठोस खाना देना शुरू करना।
🎯 Exam Tip: स्तन त्याग की परिभाषा में 'स्तनपान के समयान्तराल में ऊपरी आहार' देने की प्रक्रिया को स्पष्ट करें।
Question 13. स्तनपान छुड़ाने के समय दिये जाने वाले आहार को क्या कहते हैं?
Answer: स्तनपान छुड़ाने के समय दिये जाने वाले आहार को स्तन त्याग आहार (Weaning Foods) कहते हैं। ये आहार बच्चे को पोषण प्रदान करते हैं और उसे धीरे-धीरे माँ के दूध से अलग होने में मदद करते हैं।
In simple words: जब बच्चे का दूध छुड़ाते हैं, तब दिए जाने वाले खाने को स्तन त्याग आहार कहते हैं।
🎯 Exam Tip: स्तनपान छुड़ाने के समय दिए जाने वाले आहार को 'स्तन त्याग आहार' के नाम से सही ढंग से उल्लेख करें।
Question 15. अर्द्ध ठोस भोज्य पदार्थों में कौन-से भोज्य पदार्थ सम्मिलित हैं?
Answer: अर्द्ध ठोस भोज्य पदार्थों में सूजी की खीर, पतली खिचड़ी और दलिया जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। ये आसानी से पचने वाले होते हैं।
In simple words: सूजी की खीर, पतली खिचड़ी और दलिया अर्द्ध ठोस खाने के उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: अर्द्ध ठोस भोज्य पदार्थों के उदाहरण देते समय, नरम और आसानी से पचने योग्य विकल्पों को शामिल करें।
Question 16. ठोस मुलायम भोज्य एवं पूर्ण भोज्य पदार्थों के नाम लिखिए।
Answer:
ठोस मुलायम भोज्य पदार्थ - मसला हुआ केला, उबला और मसला हुआ आलू, मसले हुए दाल-चावल और सब्जी में मसली हुई रोटी ठोस मुलायम भोज्य पदार्थ हैं। ये बच्चे के लिए आसानी से चबाने और निगलने में आसान होते हैं।
पूर्ण ठोस भोज्य पदार्थ - चपाती, बिस्कुट, मठरी, टोस्ट, सेब आदि पूर्ण ठोस भोज्य पदार्थ हैं। ये थोड़े मजबूत होते हैं और बच्चे को चबाने की आदत डालते हैं।
In simple words: मसला केला और दाल-चावल मुलायम ठोस खाना हैं। चपाती, बिस्कुट और सेब पूरी तरह से ठोस खाना हैं।
🎯 Exam Tip: ठोस मुलायम और पूर्ण ठोस भोज्य पदार्थों के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग श्रेणियों में प्रस्तुत करें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 11 लघूत्तरीय प्रश्न (SA - 1)
Question 1. शैशवावस्था में शिशु में कौन-कौन से शारीरिक परिवर्तन होते हैं?
Answer: शैशवावस्था में शिशु में निम्नलिखित शारीरिक परिवर्तन होते हैं -
• शारीरिक वृद्धि और विकास बहुत तेजी से होता है।
• पाचन क्रिया शुरू होने लगती है।
• रक्त परिसंचरण तंत्र तेजी से काम करने लगता है।
• मल-मूत्र का उत्सर्जन होने लगता है।
• पोषण संबंधी आवश्यकताएँ बढ़ने लगती हैं।
इन परिवर्तनों से शिशु का शरीर और अंग कार्यशील होने लगते हैं।
In simple words: शैशवावस्था में बच्चे का शरीर तेजी से बढ़ता है, पाचन और खून का संचार शुरू हो जाता है, मल-मूत्र निकलने लगता है, और उसे ज्यादा पोषण की जरूरत होती है।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को बिंदुवार और स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे वृद्धि, पाचन और परिसंचरण।
Question 2. शैशवावस्था में पोषण स्तर किन कारकों से प्रभावित होता है?
Answer: शैशवावस्था में पोषण स्तर तीन मुख्य कारकों से प्रभावित होता है -
• गर्भावस्था और धात्रीवस्था के दौरान माता का पोषण स्तर: यदि माँ गर्भावस्था और दूध पिलाने के दौरान पौष्टिक भोजन करती है, तो शिशु का पोषण बेहतर होता है।
• स्तनपान या ऊपरी दूध व भोजन की पर्याप्तता: शिशु को पर्याप्त मात्रा में माँ का दूध या सही पूरक आहार मिल रहा है या नहीं, यह भी पोषण स्तर को प्रभावित करता है।
• माता या पिता से प्राप्त जन्मजात विशेषताएँ जैसे-छोटे कद वाले माता-पिता, मोटे माता-पिता: आनुवंशिक कारक भी शिशु के पोषण और विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
ये सभी कारक मिलकर शिशु के संपूर्ण पोषण और स्वास्थ्य को निर्धारित करते हैं।
In simple words: बच्चे का पोषण माँ के अच्छे खाने, पर्याप्त दूध मिलने और माता-पिता के आनुवंशिक गुणों पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: पोषण स्तर को प्रभावित करने वाले कारकों को बताते समय, माँ के स्वास्थ्य, आहार की उपलब्धता और आनुवंशिक प्रभावों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. शैशवावस्था में शिशु को ऊर्जा की आवश्यकता का विवरण दीजिए।
Answer: शैशवावस्था में शिशु को ऊर्जा की आवश्यकता वयस्कों की तुलना में प्रति यूनिट शारीरिक भार के हिसाब से अधिकतम होती है। जन्म के बाद पहले 6 माह में शिशु को अधिकतम 92 किलो कैलोरी/किलोग्राम शरीर भार की ऊर्जा चाहिए होती है, जो अगले 6 माह (6-12 माह) में घटकर 80 किलो कैलोरी/किलोग्राम शरीर भार रह जाती है। यह ऊर्जा शिशु को माँ के दूध और पूरक आहार में मौजूद प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त होती है। तेजी से वृद्धि और विकास के लिए पर्याप्त ऊर्जा बहुत जरूरी है।
In simple words: बच्चे को पहले 6 महीने में हर किलो वजन पर 92 किलो कैलोरी ऊर्जा चाहिए, फिर अगले 6 महीने में 80 किलो कैलोरी। यह ऊर्जा उसे माँ के दूध और दूसरे खाने से मिलती है।
🎯 Exam Tip: शैशवावस्था में शिशु की ऊर्जा आवश्यकताओं को बताते समय, 'प्रति किलोग्राम शरीर भार' के हिसाब से कैलोरी मान और विभिन्न आयु समूहों के लिए आवश्यकताओं का उल्लेख करें।
Question 4. शैशवावस्था में शिशु को प्रोटीन की आवश्यकता का विवरण दीजिए।
Answer: बढ़ते हुए शरीर के निर्माण के लिए प्रोटीन की आवश्यकता शिशु को पहले 6 माह में सबसे ज्यादा (2.05 ग्राम/किग्रा भार) होती है। 6 से 12 माह में यह थोड़ी कम (1.65 ग्राम/किग्रा भार) हो जाती है, लेकिन फिर भी यह अन्य सभी अवस्थाओं से अधिक होती है। प्रोटीन नई कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों के विकास और शरीर की मरम्मत के लिए जरूरी है।
In simple words: पहले 6 महीने में बच्चे को हर किलो वजन पर 2.05 ग्राम प्रोटीन चाहिए, और 6 से 12 महीने में 1.65 ग्राम। यह उसके शरीर को बनाने के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: शिशु की प्रोटीन आवश्यकताओं को 'ग्राम/किग्रा भार' में स्पष्ट रूप से बताएं और विभिन्न आयु वर्गों के लिए प्रोटीन की मात्रा को अलग-अलग लिखें।
Question 5. माता के 100 ग्राम दूध में विद्यमान पोषक तत्वों की तालिका बनाइए।
Answer:
माता के 100 ग्राम दूध में विद्यमान पोषक तत्त्व
| पोषक तत्त्व | प्रोटीन (ग्राम) | वसा (ग्राम) | कार्बोहाइड्रेट (ग्राम) | कैल्सियम (मिग्रा.) | फॉस्फोरस (मिग्रा.) | लोहा (मिग्रा.) | विटामिन 'ए' (मिग्रा.) | थायमिन (मिग्रा.) | राइबो- फ्लेविन (मिग्रा.) | विटामिन 'सी' |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मात्रा | 1.1 | 3.4 | 7.4 | 28 | 11 | - | 137 | 0.02 | 0.02 | 3 |
In simple words: माँ के 100 ग्राम दूध में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन 'ए', थायमिन, राइबोफ्लेविन और विटामिन 'सी' जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
🎯 Exam Tip: तालिका बनाते समय, प्रत्येक पोषक तत्व का नाम और उसकी सही मात्रा को उचित इकाइयों (ग्राम, मिग्रा.) के साथ प्रस्तुत करें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-II)
Question 1. शैशवावस्था के दौरान शारीरिक वृद्धि एवं विकास की प्रक्रिया के बारे में समझाइए।
Answer: एक स्वस्थ शिशु का जन्म लगभग 3 किलोग्राम वजन का होता है। जन्म का वजन गर्भावस्था के दौरान माँ के पोषण पर निर्भर करता है। जन्म के बाद पहले 2-3 दिनों में शिशु का वजन 100-200 ग्राम तक कम हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिशु के शरीर से पानी कम होता है और वह बाहरी वातावरण से तालमेल बिठाने की कोशिश करता है। इसके बाद शिशु के वजन में तेजी से वृद्धि होती है, और 4-6 महीने में जन्म के वजन का दुगना और 1 वर्ष में तिगुना हो जाता है। एक वर्ष में शिशु की लम्बाई जन्म की लम्बाई की लगभग 1.5 गुनी हो जाती है। शैशवावस्था में शिशु के मस्तिष्क का विकास 90 प्रतिशत तक पूरा हो जाता है और सिर की गोलाई भी तेजी से बढ़ती है। जन्म के समय छाती और सिर के घेरे का अनुपात जो एक से भी कम था, शैशवावस्था खत्म होते-होते एक से अधिक बढ़ जाता है, जो शिशु के सही विकास का संकेत है।
In simple words: शैशवावस्था में बच्चे का वजन और लंबाई तेजी से बढ़ती है, मस्तिष्क का विकास लगभग पूरा हो जाता है, और शरीर के अनुपात में भी बदलाव आता है। यह समय बच्चे के शारीरिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
🎯 Exam Tip: शिशु के शारीरिक वृद्धि और विकास की प्रक्रिया को समझाते समय, जन्म के वजन में परिवर्तन, लंबाई में वृद्धि, मस्तिष्क के विकास और शरीर के अनुपातों में बदलाव जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।
Question 3. माता के दूध के सर्वोत्तम होने के कारण लिखिए।
Answer: माता का दूध निम्न कारणों से सर्वोत्तम होता है -
1. माता का दूध आसानी से पच जाता है, जिससे शिशु को पेट संबंधी कोई समस्या नहीं होती।
2. माता के दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है, जो शिशु को कई बीमारियों से बचाता है।
3. माता का दूध पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें शिशु के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में होते हैं।
4. माता का दूध बलवर्धक और लाभदायक होता है, यह शिशु के मानसिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
5. माता के दूध में कोलस्ट्रम के रूप में रोग प्रतिरोधक तत्व मौजूद होते हैं, जो शिशु की शुरुआती सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
6. माता के दूध से शिशु को अत्यधिक ऊर्जा मिलती है, क्योंकि इसमें अन्य दूधों की तुलना में वसा की मात्रा अधिक होती है।
7. माता के दूध में उत्तम प्रकार का प्रोटीन होता है, जो शिशु के विकास के लिए जरूरी है।
8. माता का दूध रोगाणुरहित होता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
9. माता का दूध हमेशा ताजा होता है, जिसे गर्म करने या तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती।
10. माता के दूध को बार-बार गर्म करने की जरूरत नहीं होती है, जिससे उसके पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।
इन सभी कारणों से माँ का दूध शिशु के लिए एक पूर्ण और सुरक्षित आहार है।
In simple words: माँ का दूध सबसे अच्छा है क्योंकि यह आसानी से पचता है, बीमारियों से बचाता है, पोषक तत्वों से भरपूर है, दिमाग के विकास में मदद करता है, और हमेशा ताजा व साफ रहता है।
🎯 Exam Tip: माँ के दूध को सर्वोत्तम आहार साबित करने के लिए, उसके प्रत्येक लाभ को बिंदुवार और स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे पाचन क्षमता, रोग प्रतिरोधक गुण और पोषण मूल्य।
Question 4. वे कौन-सी बाधाएँ हैं जिनके कारण माता अपने शिशु को स्तनपान नहीं कराती है?
Answer: स्तनपान में आने वाली बाधाएँ - निम्नलिखित कारणों से शिशु को स्तनपान नहीं करवाया जा पाता है -
1. माता के स्तनों में पर्याप्त दूध का निर्माण न होना, जिससे शिशु को पर्याप्त दूध नहीं मिल पाता।
2. माता के स्तनों से दूध का स्राव पर्याप्त मात्रा में न होना, जिससे शिशु को पूरी तरह पोषण नहीं मिलता।
3. शिशु के कटे होंठ (Hare Lip) या फटी तालू (Cleft Palate) का होना, जिससे उसे दूध चूसने में कठिनाई होती है।
4. माता के अतिशीघ्र दूसरा गर्भ धारण कर लेने पर शिशु को स्तनपान नहीं करवाया जाता है, क्योंकि माँ को अगले बच्चे की तैयारी करनी होती है।
5. माता के स्तनों में दूध न होना और निप्पल का सही विकास न होने के कारण भी माताएँ स्तनपान नहीं करवा पाती हैं।
इन सभी स्थितियों में माता को शिशु को बोतल से दूध या पूरक आहार देना पड़ सकता है।
In simple words: कई बार माँ के दूध की कमी, बच्चे के होंठ या तालू में समस्या, या माँ के दोबारा गर्भवती होने जैसे कारणों से स्तनपान कराना मुश्किल हो जाता है।
🎯 Exam Tip: स्तनपान न करा पाने की बाधाओं को बताते समय, शारीरिक, स्वास्थ्य संबंधी और सामाजिक कारणों को स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
Question 5. शिशु को गाय के दूध में शक्कर एवं पानी किस अनुपात में मिलाकर देना चाहिए?
Answer:
आयु के अनुसार शिशु को गाय का दूध निम्न अनुपात में पानी एवं शक्कर मिलाकर देना चाहिए -
| आयु | दूध एवं पानी का अनुपात | शक्कर प्रति 100 मिली. तैयार दूध |
|---|---|---|
| 0-15 दिन | एक भाग दूध +1 भाग पानी | \( \frac { 1 }{ 3 } \) चाय का चम्मच |
| 2-6 सप्ताह | 2 भाग दूध + 1 भाग पानी | \( \frac { 1 }{ 2 } \) चाय का चम्मच |
| 1-3 माह | 3 भाग दूध + 1 भाग पानी | \( \frac { 3 }{ 4 } \) चाय का चम्मच |
| 3 माह से अधिक | बिना पानी वाला दूध | \( \frac { 1 }{ 4 } \) चाय का चम्मच |
In simple words: शिशु को गाय का दूध देते समय, उसकी उम्र के हिसाब से पानी और शक्कर की सही मात्रा मिलानी चाहिए। छोटे बच्चों के लिए ज्यादा पानी और कम शक्कर, और बड़े बच्चों के लिए कम पानी और ज्यादा दूध दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: गाय के दूध में पानी और शक्कर के अनुपात को उम्र के अनुसार सही ढंग से तालिकाबद्ध करें, संख्यात्मक मानों और इकाइयों पर विशेष ध्यान दें।
Question 6. एक से तीन माह के बच्चे की दैनिक आवश्यकताओं की तालिका बनाइए।
Answer:
| पोषक तत्त्व | मात्रा |
|---|---|
| कैल्सियम | 10 ग्राम |
| विटामिन 'ए' | 2000 I.U. (आई.यू.) |
| विटामिन 'बी1' (थायमीन) | 0.06 मिलीग्राम |
| विटामिन 'बी2' (रीबोफ्लेविन) | 0.09 मिलीग्राम |
| विटामिन 'बी3' (नियासिन) | 0.60 मिलीग्राम |
| विटामिन 'सी' | 350 मिलीग्राम |
| विटामिन 'डी' | 1000 I.U. (आई.यू.) |
In simple words: एक से तीन महीने के बच्चे को हर दिन कैल्शियम, विटामिन ए, बी1, बी2, बी3, सी और डी की सही मात्रा में जरूरत होती है ताकि उसका शरीर ठीक से बढ़ सके।
🎯 Exam Tip: दैनिक आवश्यकताओं की तालिका में प्रत्येक पोषक तत्व की मात्रा को सही इकाइयों (ग्राम, I.U., मिलीग्राम) के साथ प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. शिशु की बढ़ती उम्र के साथ - साथ कौन - कौन से पूरक आहार देने चाहिए?
Answer:
शिशु की बढ़ती उम्र के साथ - साथ निम्नलिखित पूरक आहार शिशु को दिए जाने चाहिए -
| आयु | पूरक आहार |
|---|---|
| 5-6 माह | ताजे फल, जैसे- संतरे, मौसमी का रस, ऊपरी दूध, नारियल पानी, टमाटर एवं गाजर का रस, दाल-चावल का पानी आदि। |
| 6-7 माह | सूजी की पतली खीर, दाल/सब्जियों का सूप, पतली खिचड़ी/दलिया, दही, उबालकर मसला हुआ आलू, केला, पपीता, बाजार में उपलब्ध डिब्बाबंद पूरक आहार आदि। |
| 7-8 माह | घर में पकाये हुए विविध भोज्य; जैसे- दाल, सब्जी, रायता, मसली हुई मुलायम चपाती या चावल के साथ अंडे की जर्दी, कुरकुरे बिस्कुट, टोस्ट, मठरी, गाजर, सेब या अन्य फलों की फाँक आदि। |
| 8-10 माह | उपर्युक्त के अतिरिक्त मांसाहारी व्यक्ति उबला अंडा तथा मांस का शोरबा या सूप सम्मिलित कर सकते हैं। |
| 10-12 माह | घर में बनने वाले सभी प्रकार के भोज्य पदार्थों के साथ-साथ मुलायम, पका हुआ माँस/मछली आदि भी सम्मिलित कर सकते हैं। |
In simple words: बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसे माँ के दूध के अलावा फलों का रस, खीर, दाल का पानी जैसे तरल और अर्ध-ठोस आहार धीरे-धीरे देना चाहिए। फिर, वह मसले हुए ठोस भोजन और अंत में परिवार के सामान्य भोजन को खाना सीखता है।
🎯 Exam Tip: पूरक आहारों को उम्र के हिसाब से तालिकाबद्ध करते समय, तरल से ठोस की ओर बढ़ने के क्रम और प्रत्येक आयु वर्ग के लिए उपयुक्त खाद्य पदार्थों को स्पष्ट रूप से दिखाएं।
Question 8. शैशवावस्था (6-12 माह) के लिए दैनिक सन्तुलित आहार तालिका बनाइये।
Answer:
6-12 माह के शिशु के लिए दैनिक सन्तुलित आहार तालिका:
| पोषक तत्त्व | मानव | गाय | बकरी |
|---|---|---|---|
| दूध (मिली) | 100 | 500 | 500 |
| कंदमूल | 100 | 0.5 | 50 |
| हरी पत्तेदार सब्जियाँ | 100 | 0.25 | 25 |
| अन्य सब्जियाँ | 100 | 0.25 | 25 |
| फल | 100 | 1 | 100 |
| शक्कर | 5 | 5 | 25 |
| घी/तेल | 5 | 2 | 10 |
In simple words: 6 से 12 महीने के बच्चे के लिए, एक संतुलित आहार तालिका में दूध, कंदमूल, पत्तेदार और अन्य सब्जियाँ, फल, शक्कर और घी/तेल को सही मात्रा में शामिल करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: दैनिक संतुलित आहार तालिका में प्रत्येक खाद्य समूह की मात्रा को सही संख्यात्मक मान के साथ प्रस्तुत करें ताकि यह स्पष्ट हो कि बच्चे को क्या और कितना मिलना चाहिए।
प्रश्न 9. नौ माह के शिशु के लिए दिन का आहार-आयोजन तालिका बनाइए।
Answer: नौ माह के शिशु के लिए दिन का आहार-आयोजन इस प्रकार है:
| समय | आहार |
|---|---|
| प्रातः 6 बजे | स्तनपान |
| 8 बजे | दूध में तैयार पोषक |
| 11 बजे | स्तनपान (ऊपरी दूध) |
| दोपहर 1 बजे | पतली खिचड़ी/दलिया/दाल-चावल/दाल-रोटी/सब्जी-रोटी आदि मसलकर। |
| 3 बजे | स्तनपान/ऊपरी दूध |
| शाम 5 बजे | फलों का रस/मसला हुआ फल/आलू/मुलायम पका अण्डा आदि। |
| 7 बजे | दूध में तैयार पूरक आहार/सूजी का हलुआ/साबूदाने की खीर आदि। |
| रात्रि 9 बजे | घर में बना विविध प्रकार का भोजन - दाल चावल/दाल-रोटी/रोटी-सब्जी मसलकर। |
| 10 बजे | स्तनपान |
In simple words: नौ महीने के बच्चे के लिए सुबह से रात तक दूध और ठोस आहार का एक खास समय तय किया जाता है, जिसमें फल, दाल-चावल और सब्जियां शामिल होती हैं। यह तालिका बच्चे को नियमित पोषण देने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: आहार तालिका बनाते समय बच्चे की उम्र और उसकी पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखें, खासकर ठोस और अर्ध-ठोस आहार को शामिल करते हुए।
प्रश्न 10. एक वर्ष के शिशु के लिए एक दिन की आहारे-तालिका बनाइए।
Answer: एक वर्ष के शिशु के लिए दिन का आहार-आयोजन तालिका इस प्रकार है:
| समय | आहार |
|---|---|
| दोपहर 1 बजे | दाल-चावल/रोटी-सब्जी/दाल-रोटी/खिचड़ी आदि। |
| 4 बजे | ऊपरी दूध स्तनपान |
| शाम 6 बजे | ताजा फल/फलों का रस |
| रात्रि 8 बजे | घर में बना भोजन |
| 10-11 बजे | स्तनपान |
In simple words: एक साल के बच्चे के लिए दिनभर में कई बार दूध और अलग-अलग तरह के ठोस खाने जैसे दाल-चावल, रोटी-सब्जी, फल और फलों का रस देना चाहिए। यह उसे बढ़ने के लिए ज़रूरी ऊर्जा और पोषक तत्व देता है।
🎯 Exam Tip: बच्चे की आयु के अनुसार आहार की मात्रा और प्रकार में बदलाव करें, और सुनिश्चित करें कि सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलें।
Rbse Class 12 Home Science Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद् 1989 में शैशवावस्था के लिए पौष्टिक तत्त्वों से युक्त कैसी दैनिक आहारिक मात्राएँ प्रस्तावित की हैं? तालिका द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् ने 1989 में शैशवावस्था के लिए दैनिक पोषण संबंधी कुछ खास मात्राएँ बताई हैं। इन मात्राओं में ऊर्जा, प्रोटीन और कई विटामिन शामिल हैं, जो बच्चे की उम्र के हिसाब से तय किए गए हैं। यह तालिका स्पष्ट करती है कि बच्चे के सही विकास के लिए किन पोषक तत्वों की कितनी मात्रा जरूरी है। शैशवावस्था में सही पोषण बच्चे के स्वास्थ्य की नींव रखता है।
| शैशवावस्था के लिए पौष्टिक तत्वों की दैनिक प्रस्तावित आहार-तालिका | ||
|---|---|---|
| पोषक तत्त्व | शिशु की आयु | |
| 0-6 माह | 6-12 माह | |
| ऊर्जा (कि. कै./किग्रा. वजन) | 108 | 98 |
| प्रोटीन (ग्रा./किग्रा.) | 2.05 | 1.65 |
| कैल्सियम (मिग्रा.) | 500 | 500 |
| बीटा कैरोटीन (मा. ग्रा.) | 1400 | 1400 |
| थायमिन (मा. ग्रा./किग्रा.) | 55 | 50 |
| राइबोफ्लेविन (मा.ग्रा./किग्रा.) | 65 | 60 |
| नियासिन (मा.ग्रा./किग्रा.) | 710 | 650 |
| पिरीडॉक्सिन (मिग्रा.) | 0.1 | 0.4 |
| विटामिन 'सी' (मिग्रा.) | 25 | 25 |
| फोलिक अम्ल (मा.ग्रा.) | 25 | 25 |
| विटामिन 'बी-12' (मा.ग्रा.) | 0.2 | 0.2 |
In simple words: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् ने बच्चों की उम्र के हिसाब से हर दिन कितनी ऊर्जा, प्रोटीन और विटामिन चाहिए, इसकी मात्रा बताई है। यह चार्ट दिखाता है कि नवजात बच्चों के लिए सही पोषण बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में तालिका को सही ढंग से बनाना और सभी पोषक तत्वों की मात्रा को उम्र के अनुसार दर्शाना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3. शिशु का स्तनपान किस प्रकार छुड़ाना चाहिए? अचानक स्तनपान छुड़ाने से शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है ? स्पष्ट कीजिए।
Answer: शिशु का स्तनपान धीरे-धीरे छुड़ाना चाहिए, क्योंकि अचानक ऐसा करने से माँ और बच्चे दोनों पर बुरा असर पड़ता है। जब बच्चा दाँत निकालने लगता है, तो माँ की दूध पिलाने की क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में माँ को बच्चे को स्तनपान कराना धीरे-धीरे कम कर देना चाहिए। यदि माँ दूध पिलाना जारी रखती है, तो उसे उल्टियाँ या कब्ज जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। बच्चे के दाँत निकलने का मतलब है कि वह अब ठोस आहार पचाने के लिए तैयार है। शुरू में बच्चे को बोतल से पानी और फिर दूध देना चाहिए, जिससे वह आसानी से ऊपरी दूध पीना सीख जाए। यह प्रक्रिया बच्चे को शारीरिक और भावनात्मक रूप से मदद करती है।
In simple words: बच्चे को दूध पिलाना धीरे-धीरे बंद करना चाहिए, एकदम से नहीं। अचानक बंद करने से माँ और बच्चे को परेशानी हो सकती है। जब बच्चे के दाँत आ जाएँ, तो उसे धीरे-धीरे बोतल से पानी और फिर दूध देना शुरू कर दें।
🎯 Exam Tip: स्तनपान छुड़ाने की प्रक्रिया को हमेशा क्रमिक रखें और बच्चे के भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
प्रश्न 4. स्तनपान छुड़ाने में क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए? स्तनपान छोड़ने के पश्चात शिशु का आहार किस प्रकार का होना चाहिए?
Answer: स्तनपान छुड़ाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।
1. स्तनपान को अचानक नहीं छोड़ना चाहिए। अगर ऐसा किया जाए, तो बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है और उदास महसूस कर सकता है। इससे माँ को भी परेशानी होती है, क्योंकि उसके स्तनों में दूध इकट्ठा हो सकता है।
2. नए खाद्य-पदार्थ खाते समय बच्चे को उनकी आदत न होने से पाचन में दिक्कत आ सकती है।
3. बच्चे को एकदम से ऊपरी दूध देने पर उसे अपच हो सकती है। इसे रोकने के लिए उसे हल्के और आसानी से पचने वाले ठोस पदार्थ धीरे-धीरे देने चाहिए। यह बच्चे को नए स्वाद और बनावट से परिचित होने में मदद करता है।
स्तनपान छोड़ने के बाद शिशु का आहार पौष्टिक और सही नियमों के अनुसार होना चाहिए। जो बच्चा अभी तक माँ का दूध पीता था, वह सभी तरह के खाद्य पदार्थों को तुरंत पचा नहीं पाएगा। इसलिए बच्चे का आहार ऐसा होना चाहिए जो उसकी सभी पोषण संबंधी ज़रूरतों को पूरा कर सके।
1. कार्बोज: बच्चे को कार्बोज की बहुत ज़रूरत होती है, क्योंकि वह बहुत सक्रिय रहता है। हर 100 ग्राम शारीरिक भार के लिए 10 से 15 ग्राम कार्बोज की ज़रूरत होती है। कार्बोज के अच्छे स्रोत डबलरोटी, दलिया, कॉर्नफ्लेक्स, सूखे फल, फेरेक्स और शक्कर हैं।
2. वसा: वसा शरीर को गर्मी और शक्ति देती है। इसलिए बच्चे के आहार में घी, तेल और मक्खन ज़रूर शामिल करने चाहिए। ज़्यादा वसा देने से बच्चे को कब्ज हो सकता है।
In simple words: स्तनपान धीरे-धीरे बंद करना चाहिए, वरना बच्चा और माँ दोनों परेशान हो सकते हैं। जब बच्चा दूध छोड़ दे, तो उसे ऐसे खाने देने चाहिए जो पचने में आसान और पौष्टिक हों, जैसे कार्बोज वाले खाद्य पदार्थ और थोड़ी वसा। नए खाने धीरे-धीरे शुरू करने चाहिए।
🎯 Exam Tip: स्तनपान छुड़ाने के बाद बच्चे को पोषक तत्वों से भरपूर, आसानी से पचने वाले और नए खाद्य-पदार्थ धीरे-धीरे देना शुरू करें, ताकि पाचन संबंधी समस्याएँ न हों।
प्रश्न 5. विभिन्न आयु वर्ग वाले बच्चों के लिए कैलोरी की आवश्यकता का विवरण दीजिए।
Answer: बच्चे बहुत सक्रिय होते हैं, इसलिए उन्हें बढ़ने और खेलने के लिए ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है। इसी वजह से उन्हें वयस्क लोगों की तुलना में अधिक कैलोरी चाहिए होती है। अलग-अलग उम्र के बच्चों को उनके शरीर के वजन के हिसाब से कैलोरी की मात्रा देनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चे को पर्याप्त कैलोरी मिले, जिससे उसके शरीर में ऊर्जा और ताकत बनी रहे।
| आयु | शारीरिक भार के अनुसार कैलोरी की आवश्यकता प्रति किलोग्राम |
|---|---|
| एक वर्ष से कम | 98 |
| एक वर्ष से अधिक | 95 |
| दो वर्ष से पाँच वर्ष तक | 76 |
In simple words: बच्चों को उनकी उम्र और वजन के हिसाब से कैलोरी चाहिए होती है, क्योंकि वे बहुत खेलते और बढ़ते हैं। अगर उन्हें कम कैलोरी मिले, तो उनकी ताकत कम हो सकती है।
🎯 Exam Tip: बच्चों की कैलोरी ज़रूरतें उनकी शारीरिक गतिविधि और विकास दर पर निर्भर करती हैं, इसलिए उनकी बढ़ती उम्र के साथ आहार में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है।
प्रश्न 6. महिला द्वारा पूरक आहार घर पर किस प्रकार तैयार किया जा सकता है एवं बढ़ती उम्र के साथ-साथ शिशु को कौन-कौन से पूरक आहार दिये जा सकते हैं?
Answer: पूरक आहार देने की प्रक्रिया 6 महीने से शुरू होकर लगभग 12 महीने तक चलती है। इस दौरान माँ बच्चे को घर पर बने विविध प्रकार के खाद्य पदार्थ देती है। माँ घर पर फलों का रस, दाल का पानी और दूध जैसे तरल खाद्य पदार्थों से शुरू कर सकती है। इसके बाद वह सूजी की खीर, पतली खिचड़ी और दलिया जैसे अर्ध-ठोस खाद्य पदार्थ दे सकती है। फिर, मसला हुआ केला, उबला आलू, मसले हुए दाल-चावल और सब्जी में मसली हुई रोटी जैसे ठोस मुलायम खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। अंत में, चपाती, बिस्कुट, मठरी, टोस्ट और सेब जैसे पूर्ण ठोस खाद्य पदार्थ भी दिए जा सकते हैं। कोई भी माँ घर पर आसानी से यह पूरक आहार तैयार कर सकती है। बच्चे को सही पोषण देने के लिए घर पर बना आहार बहुत अच्छा होता है।
विधिः
1. गेहूँ को तवे पर अच्छी प्रकार से भून लें।
2. भुने हुए चनों को रगड़कर उनके छिलके उतारें।
3. भुने हुए गेहूँ एवं चनों को अलग-अलग बारीक पीस लें।
4. स्वादानुसार पिसी हुई शक्कर मिला दें।
5. इस पोषक / पूरक आहार को दूध, छाछ या गर्म पानी में गाढ़ा घोल बनाकर शिशु को खिलाएँ।
6. इससे लड्डू, बर्फी, हलुआ आदि बनाकर खिलाएँ।
7. बिना शक्कर पोषक को आटे या बेसन की तरह काम में लेकर पूरी अथवा पराठा बना लें।
8. गेहूँ एवं चने के स्थान पर घर में उपलब्ध अन्य अनाज अथवा दलहन को सिकवाकर प्रयोग कर सकते हैं।
9. इसे और अधिक पौष्टिक बनाने के लिए मूंगफली / तिल / सोयाबीन व दुग्ध पाउडर भी मिला सकते हैं।
छः माह के शिशु को 2-2 घंटे के अन्तराल में बारी-बारी से पूरक आहार एवं स्तनपान देना चाहिए। धीरे-धीरे 12 माह के शिशु के लिए अन्तराल बढ़ाकर 3-4 घंटे पर पूरक आहार एवं स्तनपान देना चाहिए।
In simple words: घर पर माँ 6 महीने से बच्चे को अलग-अलग तरह के खाने देना शुरू कर सकती है। पहले फलों का रस और दाल का पानी जैसे पतले खाने, फिर सूजी की खीर जैसे थोड़े गाढ़े खाने, और फिर मसला केला या दाल-चावल जैसे ठोस खाने दे सकती है। ये सभी आसानी से घर पर बन जाते हैं और बच्चे को बढ़ने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: पूरक आहार को धीरे-धीरे और बच्चे की उम्र के अनुसार शुरू करें, ताकि वह नए खाद्य पदार्थों को आसानी से स्वीकार कर सके। घर पर बना भोजन सबसे अच्छा होता है।
प्रश्न 7. शिशु को पूरक आहार देते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? समझाइए।
Answer: जब माँ बच्चे को सिर्फ स्तनपान से पूरा नहीं कर पाती है, तो उसे पूरक आहार देना पड़ता है। इसका मतलब है कि अगर माँ के दूध से बच्चे की भूख शांत नहीं होती है, तो बच्चे के वजन के हिसाब से उसे बोतल से दो-तीन बार दूध दिया जा सकता है। स्तनपान छुड़ाना और पूरक आहार देना दोनों एक-दूसरे के साथ-साथ चलते हैं। पूरक आहार देने की प्रक्रिया 6 महीने से शुरू होकर 12 महीने तक चलती है। पूरक आहार देते समय माँ को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. शुरुआत में बच्चा खाने को मुँह से बाहर निकाल सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि उसे खाना पसंद नहीं आया, बल्कि यह है कि शुरुआत में उसे निगलना नहीं आता।
2. माँ को शुरुआत में तरल खाद्य पदार्थ देने चाहिए और फिर धीरे-धीरे कुछ ठोस खाद्य पदार्थ देने चाहिए।
3. माँ को पूरक आहार स्तनपान से पहले देना चाहिए, क्योंकि स्तनपान के बाद बच्चा पेट भरा होने के कारण पूरक आहार नहीं खाएगा।
4. शुरुआत में बच्चे की स्वाद की पहचान ज़्यादा विकसित नहीं होती है। इसलिए बच्चे को रोज़ नए खाद्य पदार्थ खिलाने चाहिए, ताकि वह बड़ा होकर विविधतापूर्ण भोजन ग्रहण करे।
5. माँ को बच्चे को एक बार में केवल एक ही नया भोजन देना चाहिए। जब बच्चा इसे पचाने लगे, तभी दूसरा भोजन शुरू करें।
6. पूरक आहार देते समय खाने में नमक और शक्कर की मात्रा कम रखनी चाहिए। मीठे खाद्य पदार्थ भी कम ही देने चाहिए।
7. जब बच्चा चबाना सीख जाए, तो उसे फलों और रोटी के टुकड़े देने चाहिए।
8. बीमारियों से बचाने के लिए बच्चे का भोजन बहुत साफ-सुथरे बर्तनों में बनाना और खिलाना चाहिए।
9. अरुचिकर खाद्य पदार्थ को कुछ समय के लिए बंद करके, उसे किसी और रूप में बनाकर खिलाने की कोशिश करनी चाहिए।
10. बच्चे का आहार न तो बहुत ठंडा होना चाहिए और न ही बहुत गर्म।
11. खाते समय बच्चे को टोकना नहीं चाहिए और न ही ज़्यादा खाने के लिए मजबूर करना चाहिए, नहीं तो वह चिड़चिड़ा हो जाएगा।
12. बच्चे को खाना देते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि गिलास, कटोरी और प्याली काँच की न हो और उनके किनारे नुकीले न हों।
13. स्वयं खाने का प्रयास करने पर बच्चे के हाथ में रोटी का टुकड़ा या चम्मच पकड़ा देना चाहिए, ताकि वह खुद खा सके।
14. जब बच्चे के दाँत निकल रहे हों, तो माँ को कोई कड़ी चीज़ खाने के लिए हाथ में देनी चाहिए, जिससे मसूड़ों के दर्द में आराम मिले।
In simple words: पूरक आहार देते समय माँ को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को धीरे-धीरे नए खाने दें, पहले तरल और फिर ठोस। उसे जबरदस्ती न खिलाएँ और खाने को साफ-सुथरा रखें। नमक और चीनी कम रखें और बच्चे को खुद खाने का मौका दें।
🎯 Exam Tip: पूरक आहार शुरू करते समय, बच्चे की सहनशीलता, उम्र के अनुसार खाद्य पदार्थों का चयन, स्वच्छता और बच्चे को स्वतंत्र रूप से खाने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।
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