Download RBSE Solutions for Class 12 Hindi Chapter 09 भोर का तारा (एकांकी)
Review structured textbook solutions for Class 12 Hindi Chapter 09 भोर का तारा (एकांकी). Built according to RBSE guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.
Access RBSE Solutions and Answers
View or download the dedicated Chapter 09 भोर का तारा (एकांकी) solution resource below. Engaging with these textbook answers under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026-27 curriculum for Hindi.
Question 1. दया सज्जनता को -
(अ) भूषण है
(ब) मूल्य है
(स) उपहार है
(द) रूप है।
Answer: (अ) भूषण है
In simple words: दयालुता एक अच्छे इंसान के लिए गहने जैसी होती है। यह उसके स्वभाव की सुंदरता को बढ़ाती है, ठीक वैसे ही जैसे गहने शरीर की सुंदरता बढ़ाते हैं।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सबसे सटीक विकल्प चुनें जो प्रश्न के अर्थ को पूरी तरह से स्पष्ट करता हो।
Question 2. छाया के अनुसार प्रत्येक पुरुष के लिए स्त्री है –
(अ) पत्नी
(ब) एक कविता
(स) शक्ति का स्रोत
(द) प्रेरणा
Answer: (ब) एक कविता
In simple words: छाया मानती है कि जैसे कविता मन को खुश करती है, वैसे ही स्त्री भी पुरुष के जीवन को खुशियों से भर देती है। वह जीवन को सुंदर और प्रेरणादायक बनाती है।
🎯 Exam Tip: एकांकी में पात्रों के संवादों और विचारों को ध्यान से समझें, क्योंकि वे अक्सर उनके दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
Question 3. गुप्त साम्राज्य में कौन-सा संकट उपस्थित हुआ?
(अ) अकाल का
(ब) बाढ़ का
(स) तोरमाण के आक्रमण का
(द) गृहयुद्ध का
Answer: (स) तोरमाण के आक्रमण का
In simple words: गुप्त साम्राज्य पर तोरमाण नाम के हूण सरदार ने हमला कर दिया था। यह हमला उस समय का सबसे बड़ा संकट था जिसने पूरे साम्राज्य को खतरे में डाल दिया था।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक नाटकों में प्रमुख घटनाओं और पात्रों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे कहानी का आधार होते हैं।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एकांकी में वर्णित गुप्त साम्राज्य का शासक कौन था?
Answer: एकांकी में वर्णित गुप्त साम्राज्य का शासक सम्राट स्कन्दगुप्त थे। वे एक शक्तिशाली और न्यायप्रिय राजा थे।
In simple words: नाटक में गुप्त साम्राज्य के राजा का नाम स्कन्दगुप्त था।
🎯 Exam Tip: छोटे उत्तरों में, मुख्य जानकारी को सीधा और स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 2. देवदत्त कौन था?
Answer: एकांकी के आरंभ में देवदत्त सम्राट स्कन्दगुप्त का मंत्री था। बाद में वह तक्षशिला का क्षत्रप बना और वह छाया का भाई भी था। देवदत्त एक वीर और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति था।
In simple words: देवदत्त, राजा स्कन्दगुप्त का मंत्री था और बाद में तक्षशिला का शासक बना, वह छाया का भाई भी था।
🎯 Exam Tip: पात्रों के संबंधों और उनके बदलते पदों को याद रखें, क्योंकि यह कहानी के विकास में मदद करता है।
Question 3. माधव ने शेखर को तक्षशिला से आकर क्या सूचना दी?
Answer: माधव ने शेखर को बताया कि देश और गुप्त साम्राज्य खतरे में है। उसने यह भी बताया कि देवदत्त युद्ध में शहीद हो चुके हैं। यह सूचना बहुत दुखद और महत्वपूर्ण थी।
In simple words: माधव ने शेखर को बताया कि देश संकट में है और देवदत्त शहीद हो गए हैं।
🎯 Exam Tip: कहानी में महत्वपूर्ण संदेश या सूचना देने वाले पात्रों और उनके संवादों पर विशेष ध्यान दें।
Question 4. तोरमाण कौन था?
Answer: तोरमाण हूणों का सरदार था। वह एक क्रूर और शक्तिशाली आक्रमणकारी था, जिसने गुप्त साम्राज्य पर हमला किया था।
In simple words: तोरमाण हूणों का मुखिया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख नकारात्मक पात्रों की पहचान और उनकी भूमिका को समझें।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. शेखर को राजकवि क्यों बनाया गया?
Answer: एक उत्सव के दौरान, छाया ने मधुर गीत गाए जिससे सम्राट स्कन्दगुप्त बहुत खुश हुए। जब सम्राट ने गीत के लेखक का नाम पूछा, तो छाया ने शेखर का नाम बताया और उसे राजकवि बनाने के लिए कहा। छाया की बात मानकर और शेखर के सुंदर गीत से प्रभावित होकर सम्राट ने उसे राजकवि बना दिया। शेखर की प्रतिभा और छाया के सुझाव का यह परिणाम था।
In simple words: सम्राट स्कन्दगुप्त छाया के गाने से खुश हुए। छाया ने शेखर का नाम बताया और उसे राजकवि बनाने को कहा, तो सम्राट ने शेखर को राजकवि बना दिया।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में घटनाओं का क्रम और उनके पीछे के कारण स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. शेखर छाया को कौन-सा भेद बताता है?
Answer: शेखर छाया को यह भेद बताता है कि उसकी कृति 'भोर का तारा' उन दोनों के प्रेम का प्रतीक है। वह इस कृति के पूरा होने का रहस्य बताता है जो उनके प्रेम की गहराई को दर्शाता है।
In simple words: शेखर छाया को बताता है कि उसकी लिखी कविता 'भोर का तारा' उन दोनों के प्यार की निशानी है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के संवादों में छिपे हुए गहरे अर्थों को पहचानें और उन्हें सरल शब्दों में व्यक्त करें।
Question 4. “देश तुमसे यह बलिदान माँगता है” का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: शेखर एक मधुर गीत गाने वाला कवि है जिसकी कविताएँ प्रेम और सुंदरता पर आधारित हैं, और उसकी वाणी बहुत प्रभावशाली है। माधव उससे कहता है कि देश की रक्षा के लिए उसे अपनी कविता का विषय प्रेम से बदलकर देशप्रेम कर देना चाहिए। उसे अपनी कविताओं से लोगों को देश की रक्षा के लिए प्रेरित करने को कहा जाता है। यह एक कवि के रूप में उसका सबसे बड़ा बलिदान होगा।
In simple words: इसका मतलब है कि शेखर को अपने प्रेम के बारे में लिखने की बजाय देश की रक्षा के लिए कविताएँ लिखनी चाहिए। उसे अपनी कविताओं से लोगों में देशप्रेम जगाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: उद्धरण वाले प्रश्नों में, पहले उद्धरण का अर्थ स्पष्ट करें और फिर उसे कहानी के संदर्भ में समझाएं।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 9 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. प्रस्तुत एकांकी के किस पात्र ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया? सकारण लिखो।
Answer: प्रस्तुत एकांकी 'भोर का तारा' में मुझे 'शेखर' ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। कहानी की शुरुआत में शेखर एक साधारण कवि होता है जो अपनी प्रेमिका के लिए कविताएँ लिखता है। वह अपनी कविताओं को पैसे कमाने का ज़रिया नहीं मानता, और अपनी गरीबी के कारण छाया से शादी की उम्मीद नहीं रखता। वह हमेशा अपनी मर्यादा में रहकर छाया से प्यार करता है। छाया ही उसे राजकवि बनाती है और उनकी शादी भी हो जाती है।
मुझे उसके चरित्र की सबसे ज़्यादा प्रभावित करने वाली बात यह है कि जब माधव उससे देश की रक्षा के लिए मदद माँगने आता है, तो वह अपनी उस अमर प्रेम की निशानी 'भोर का तारा' को आग में जला देता है, जिसे उसने छाया के प्यार के प्रतीक के रूप में बनाया था। वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपने प्रेम के प्रतीक की बजाय अपनी मातृभूमि को चुनता है और अपनी कविताओं से लोगों में देशप्रेम की भावना जगाने के लिए निकल पड़ता है। यह उसका महान बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा दिखाता है।
In simple words: मुझे शेखर ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। वह पहले प्रेम पर कविताएँ लिखता था, लेकिन जब देश पर संकट आया, तो उसने अपनी प्रेम कविता 'भोर का तारा' जला दी और देश के लिए लड़ने निकल पड़ा। उसने प्रेम से बढ़कर देश को चुना।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, अपने पसंदीदा पात्र को चुनने का कारण स्पष्ट रूप से लिखें और उसके चरित्र के विभिन्न पहलुओं का वर्णन करें।
जगदीश चंद्र माथुर एक प्रसिद्ध एकांकीकार थे जिनका जन्म 16 जुलाई 1917 को खुर्जा, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा खुर्जा और उच्च शिक्षा इलाहाबाद में प्राप्त की। उन्होंने बिहार में शिक्षा सचिव और आकाशवाणी के महासंचालक सहित कई सरकारी पदों पर काम किया। माथुर जी ने छात्र जीवन से ही लिखना शुरू कर दिया था। वे मुख्य रूप से नाटककार थे, जिन्होंने आधुनिक समाज और ऐतिहासिक गौरव दोनों पर लिखा। उनके सामाजिक नाटक आधुनिक समाज की समस्याओं को उजागर करते हैं, जबकि ऐतिहासिक नाटक अतीत के गौरव को दर्शाते हैं। उनके एकांकी जीवन की गहरी भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम हैं और पात्रों को स्वतंत्र व्यक्तित्व और विशिष्ट चरित्र देते हैं। श्री माथुर का निधन 14 मई 1978 को हुआ। वे छायावादी संवेदनाओं के रचनाकार थे, और उनके नाटक मंच पर बहुत लोकप्रिय हुए। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'भोर का तारा', 'कोणार्क', 'ओ मेरे सपने', 'शारदीया', 'दस तस्वीरें', 'परंपराशील नाट्य', 'पहला राजा', और 'जिन्होंने जीना जाना' शामिल हैं। एक कवि समाज को जागरूक करने और लोगों को उनके कर्तव्यों का एहसास कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शेखर भी एक ऐसा ही कवि है। वह सुख के समय राजा को प्रेमपूर्ण कविताएँ सुनाकर खुश करता है; लेकिन जैसे ही उसे अपने देश, राज्य और सम्राट पर संकट का पता चलता है, वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी और अपनी पत्नी के प्रेम की याद में तैयार अपनी रचना 'भोर का तारा' को फाड़कर जला देता है। वह अपनी कविता के माध्यम से लोगों को अपने देश और सम्राट के प्रति उनके कर्तव्यों की याद दिलाता है। वह अपनी जोशीली आवाज में उन्हें देश की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। वह युवाओं को हथियार उठाकर दुश्मनों का सामना करने का जोश दिलाता है। इस तरह, वह स्थिति के अनुसार अपनी कविता का विषय बदलकर अपने कवि-कर्म का निर्वाह करता है।
Question 3. 'भोर का तारा' एकांकी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'भोर का तारा' एक ऐतिहासिक एकांकी है। इसका मुख्य उद्देश्य निजी प्रेम से बढ़कर देशप्रेम के महत्व और देश के प्रति कर्तव्यों को दिखाना है। एकांकीकार ने शेखर के व्यक्तित्व, उसके गुणों और स्वराष्ट्र की रक्षा में उसके योगदान को गुप्त साम्राज्य के बचाव के संदर्भ में चित्रित किया है। एकांकी में कवि के कर्तव्य को सही तरीके से समझाया गया है। एक कवि का काम केवल अपने संरक्षक को खुश करना नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपनी कविताओं से लोगों में जागरूकता पैदा करना भी होता है। कवि को अपने निजी प्रेम को त्यागने में भी संकोच नहीं करना चाहिए।
एकांकी का नायक शेखर भी अपनी और अपनी प्रेमिका और पत्नी छाया के प्रेम की याद में 'भोर के तारे' से प्रेरित होकर एक रचना लिखता है, जिसे वह राजा को भेंट करना चाहता है। लेकिन जब उसे अपने देश और राजा पर आए संकट का पता चलता है, तो वह अपनी इस कृति को आग के हवाले कर देता है। वह अपनी ओजपूर्ण कविताओं से लोगों में जागरूकता जगाने के लिए अपने घर से निकल पड़ता है। जब वह अपने प्रेम की याद को जला देता है, तो उसकी पत्नी छाया उसके मित्र माधव को उसका "प्रभात नष्ट करने" का दोष देती है; लेकिन माधव उसे शेखर का असली रूप बताता है। वह कहता है कि प्रभात अभी होगा और शेखर जो अब तक भोर का तारा था, अब प्रभात का सूरज होगा। इस प्रकार, एकांकीकार अपने एकांकी के उद्देश्य में सफल होता है।
In simple words: 'भोर का तारा' एकांकी का लक्ष्य यह दिखाना है कि देश का प्यार अपने व्यक्तिगत प्यार से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। कवि शेखर अपने प्रेम कविता को त्याग कर देश को बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करता है।
🎯 Exam Tip: एकांकी के उद्देश्य को स्पष्ट करते समय, मुख्य संदेश को कहानी के प्रमुख पात्रों और घटनाओं से जोड़कर समझाएं।
RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 9 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Question 1. शेखर के घर की स्थिति कैसी है?
Answer: शेखर अपनी रचना (कविता) लिखने में पूरी तरह व्यस्त है। वह कभी गुनगुनाते हुए टहलता है तो कभी तख्त पर बैठ जाता है। वह जो गुनगुना रहा है, उसे साथ-साथ लिखता भी जा रहा है। उसका कमरा सजा हुआ और साफ है, दीवारों पर चित्र हैं, कोने में फूलों का गुलदस्ता रखा है। सामने एक तख्त है जिस पर चटाई और लिखने-पढ़ने का सामान रखा है, और पास में कुछ किताबें भी हैं। दूसरी तरफ एक कलात्मक अंगीठी भी है और दीवार पर धोतियाँ टँगी हैं। यह घर एक साधारण कवि के लिए आरामदायक माहौल दर्शाता है।
In simple words: शेखर अपने घर में कविता लिखने में व्यस्त है। उसका घर सजा और साफ है, जहाँ वह बैठकर लिखता है और गुनगुनाता है।
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के परिवेश का वर्णन करते समय, छोटी-छोटी डिटेल्स को शामिल करें ताकि चित्र स्पष्ट हो सके।
Question 3. शेखर जब कविता लिखने में तल्लीन था, उस समय उससे मिलने कौन आता है? वह क्या कार्य करता है?
Answer: जब शेखर कविता लिखने में व्यस्त था, तब उसका मित्र माधव उससे मिलने आता है। एकांकी की शुरुआत में माधव राजा स्कन्दगुप्त के दरबार में एक दरबारी था। बाद में वह देवदत्त के साथ उसका मंत्री बनकर तक्षशिला चला जाता है। माधव हमेशा शेखर का शुभचिंतक और मार्गदर्शक रहा है।
In simple words: शेखर से मिलने उसका दोस्त माधव आता है। माधव पहले राजा का दरबारी था और बाद में तक्षशिला में देवदत्त का मंत्री बन गया।
🎯 Exam Tip: पात्रों के परिचय और उनके संबंधों को स्पष्ट रूप से दर्शाना कहानी को समझने में मदद करता है।
Question 4. शेखर माधव को भोर के तारे के विषय में क्या बताता है?
Answer: शेखर माधव को बताता है कि 'भोर का तारा' एक रात की युवती का सोना है, जिसने अपने प्रेमी प्रभात से मिलने के लिए गहरे नीले रंग के कपड़े पहने थे। जैसे ही वह प्रभात के पास पहुँची, वह शर्माकर भाग गई, तब प्रभात ने अपनी उँगलियों से उसके नीले वस्त्र का किनारा नीचे खींच लिया। यह कल्पना शेखर के प्रेम और काव्य-दृष्टि को दर्शाती है।
In simple words: शेखर माधव को बताता है कि भोर का तारा एक रात की युवती का सोना है, जो अपने प्रेमी प्रभात से मिलने गई थी और शर्माकर भाग गई।
🎯 Exam Tip: पात्रों द्वारा की गई कल्पनाओं या प्रतीकात्मक वर्णनों को उनके संदर्भ में स्पष्ट करें।
Question 5. माधव शेखर से कविता के विषय में क्या कहता है?
Answer: माधव शेखर से कहता है कि कविता केवल कोमल हृदय वाले लोगों के लिए है, यानी कवियों और कोमल मन वाले लोगों के लिए। यह मेहनती, राजनीतिज्ञों और सैनिकों के लिए नहीं है। माधव का मानना है कि ऐसे लोगों के संपर्क में आने से कविता अपनी कोमलता खो देगी और नीरस हो जाएगी। वह कला की पवित्रता को बनाए रखने पर जोर देता है।
In simple words: माधव शेखर से कहता है कि कविता सिर्फ भावुक लोगों के लिए है, न कि नेताओं या सैनिकों के लिए, क्योंकि उनके साथ यह नीरस हो जाएगी।
🎯 Exam Tip: संवादों में व्यक्त विभिन्न दृष्टिकोणों को पहचानें और उन पर आधारित विचारों को स्पष्ट करें।
Question 6. माधव के द्वारा यह कहने पर कि राजनीतिज्ञ रात-दिन लोगों को उनकी उलझनों से बाहर निकालने का कार्य करते हैं। इस पर शेखर ने क्या टिप्पणी की?
Answer: माधव की बात सुनकर शेखर ने उससे कहा कि तुम जैसे राजनीतिज्ञ और मंत्री बड़ी सादगी से ऐसा दिखावा करते हो, जैसे गरीबों की समस्याओं, युद्ध और शांति के मुद्दों को सुलझा दोगे। लेकिन ऐसा कभी नहीं होता है। शेखर का मानना है कि यह काम तो कवि करता है, जबकि नेता सिर्फ लोगों को मूर्ख बनाते हैं। यह शेखर के आदर्शवादी स्वभाव को दर्शाता है।
In simple words: माधव ने कहा कि नेता लोगों की समस्याएँ सुलझाते हैं, तो शेखर ने जवाब दिया कि वे सिर्फ दिखावा करते हैं, असल में कवि यह काम करते हैं, और नेता लोगों को बेवकूफ बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में पात्रों के संवादों और उनके द्वारा दिए गए तर्क को ध्यान से समझकर लिखें।
Question 7. माधव शेखर की टिप्पणी की किस प्रकार अवहेलना करता है?
Answer: माधव शेखर की टिप्पणी को यह कहकर नजरअंदाज करता है कि शेखर अपने विचारों में इतना लीन है कि वह वास्तविक दुनिया को भूल चुका है। माधव शेखर को समझाने की कोशिश करता है कि राजनेताओं का काम भी महत्वपूर्ण होता है, भले ही वह कविताओं जितना सुंदर न हो। वह शेखर को यथार्थवादी बनने का सुझाव देता है।
In simple words: माधव शेखर की बात को अनसुना कर देता है और कहता है कि शेखर अपनी दुनिया में इतना खोया है कि असलियत से दूर हो गया है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच मतभेदों को स्पष्ट रूप से बताएं और समझाएं कि वे एक-दूसरे के विचारों को कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।
Question 10. माधव 'देवी' और 'पुजारी' कहकर किनकी ओर संकेत कर रहा है? यह देवी वास्तव में कौन है? उसका शेखर से क्या संबंध है?
Answer: माधव 'देवी' और 'पुजारी' कहकर छाया और शेखर की ओर इशारा कर रहा है। वास्तव में यह देवी छाया है, जो सम्राट स्कन्दगुप्त के मंत्री देवदत्त की बहन है। छाया शेखर की प्रेयसी और प्रेरणा है। शेखर ने छाया को आधार बनाकर ही अपनी रचना 'भोर का तारा' लिखी है। छाया शेखर के जीवन में प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
In simple words: माधव 'देवी' और 'पुजारी' से छाया और शेखर की बात कर रहा है। छाया असल में देवदत्त की बहन और शेखर की प्रेमिका है, जिसकी प्रेरणा से शेखर ने 'भोर का तारा' लिखा।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ स्पष्ट करें और उन्हें कहानी के पात्रों से जोड़कर समझाएं।
Question 11. माधव शेखर को क्या सूचना देने आया था?
अथवा
माधव को शेखर से मिलने आना में क्या प्रयोजन था?
Answer: माधव शेखर को एक खास खबर देने आया था। उसने शेखर को बताया कि एक उत्सव में एक युवती द्वारा गाए गए गीत को सुनकर सम्राट स्कन्दगुप्त इतने मुग्ध हो गए थे कि उन्होंने गीतकार को अपना राजकवि नियुक्त कर लिया था। माधव ने यह भी बताया कि वह युवती छाया थी और वह कवि कोई और नहीं, स्वयं शेखर ही था। यह सूचना शेखर के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाती है।
In simple words: माधव शेखर को यह बताने आया था कि सम्राट स्कन्दगुप्त ने उसके गीत से प्रभावित होकर उसे राजकवि बना दिया है, और यह युवती छाया ही थी।
🎯 Exam Tip: जब कोई पात्र महत्वपूर्ण सूचना लाता है, तो उसकी पूरी जानकारी और उसका कहानी पर प्रभाव बताएं।
Question 12. “हम दोनों नदी के किनारे हैं, जो एक-दूसरे की ओर मुड़ते हैं, पर मिल नहीं सकते।” शेखर ने ऐसा क्यों कहा?
Answer: इस कथन से शेखर का मतलब छाया और खुद से है। छाया सम्राट स्कन्दगुप्त के मंत्री देवदत्त की बहन है और शेखर एक साधारण कवि है। एक मामूली व्यक्ति का मंत्री की बहन से क्या संबंध हो सकता है? जैसे नदी के किनारे एक-दूसरे की ओर मुड़ते तो हैं पर मिल नहीं पाते, उसी तरह वे दोनों दूर से एक-दूसरे से प्रेम तो कर सकते हैं, लेकिन उनका विवाह (मिलन) संभव नहीं था। शेखर अपनी सामाजिक स्थिति के कारण ऐसा सोचता था।
In simple words: शेखर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह एक साधारण कवि था और छाया एक मंत्री की बहन थी, इसलिए वे सामाजिक रूप से एक नहीं हो सकते थे।
🎯 Exam Tip: लाक्षणिक वाक्यों का अर्थ स्पष्ट करते समय, पात्रों की सामाजिक स्थिति और उनके भावनाओं को भी ध्यान में रखें।
Question 13. शेखर किसकी की परवाह करता है? एकांकी के आधार पर लिखिए।
Answer: माधव के अनुसार शेखर छाया को तीन अलग-अलग तरीकों से देखता है:
1. दिन में वह उसे पेड़ों के नीचे फैली हुई देखता है।
2. वह उसे दर्पण में चमकती हुई देखता है।
3. वह उसे हमेशा अपने हृदय में देखता है।
शेखर प्रकृति की सुंदरता, फूलों की पंखुड़ियों पर ओस की बूँदों और संध्या में सूर्य की किरणों को अपनी गोद में समेटे बादलों के टुकड़ों की परवाह करता है। संक्षेप में, वह सुंदरता और प्रेम की परवाह करता है। वह इन्हीं बातों में अपनी कला और प्रेरणा पाता है।
In simple words: शेखर सुंदरता और प्रेम की परवाह करता है। वह प्रकृति की खूबसूरत चीजों और छाया को अपने दिल में देखता है।
🎯 Exam Tip: जब किसी पात्र की भावनाओं या परवाह का वर्णन करना हो, तो उसके कार्यों और विचारों से उदाहरण दें।
Question 15. एकांकी के दूसरे दृश्य का आरंभ कहाँ से होता है?
अथवा
शेखर और छाया के नए निवास स्थान का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: शेखर और छाया उज्जयिनी में मंत्री देवदत्त के भवन में रहते हैं। उनका कमरा सजा हुआ और साफ है। दीवारों पर कुछ चित्र हैं, कोने में एक फूलों का गुलदस्ता रखा है। सामने एक तख्त है जिस पर चटाई और लिखने-पढ़ने का सामान है। पास ही में एक छोटी चौकी पर कुछ किताबें रखी हैं। दूसरी ओर एक छोटा स्टूल और उसके पास एक सुंदर अंगीठी रखी है। दीवार पर कपड़े टाँगने की जगह पर धोतियाँ आदि टँगी हैं। यह घर उनके शांत और साहित्यिक जीवन को दर्शाता है।
In simple words: एकांकी का दूसरा दृश्य शेखर और छाया के नए घर में शुरू होता है। उनका कमरा साफ-सुथरा है, जिसमें लिखने-पढ़ने का सामान और एक अंगीठी भी है।
🎯 Exam Tip: नाटक के दृश्यों का वर्णन करते समय, स्थान और माहौल की जानकारी को विस्तार से दें।
Question 16. छाया कैसी स्त्री है? वह क्या कर रही है?
Answer: छाया सौंदर्य की मूर्ति, चंचलता, अलमस्ती, गंभीरता और स्त्री-सुलभ भावों का मिश्रण है। वह घर की चीजों को उनके सही स्थान पर संभाल कर रख रही है और साथ ही कुछ गुनगुना भी रही है। ठंड से बचने के लिए उसने अंगीठी भी जला रखी है। वह एक आदर्श पत्नी और गृहणी की भूमिका निभा रही है।
In simple words: छाया सुंदर, चंचल और गंभीर स्वभाव की स्त्री है। वह घर का काम करते हुए गुनगुना रही है और ठंड के लिए अंगीठी जला रही है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र का वर्णन उनके कार्यों और गुणों के आधार पर करें।
Question 17. छाया द्वारा गुनगुनाए जाने वाले गीत की पंक्तियाँ लिखिए।
Answer: गीत की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं: “प्यार की है क्या पहचान? चाँदनी का पाकर नव-स्पर्श, चमक उठते पत्ते नादान पवन की परम सलिल की लहर, नृत्य में हो जाती लयमान सूर्य को सुन कोमल पदचाप फूल उठता चिड़ियों का गान तुम्हारी तो प्रिय केवल याद, जगाती मेरे सोये प्राण, प्यार की है क्या पहचान?” यह गीत प्रेम और प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन करता है।
In simple words: छाया जो गीत गुनगुना रही थी, उसकी पंक्तियाँ प्यार और प्रकृति की सुंदरता के बारे में थीं, जैसे चाँदनी, हवा, फूल और चिड़ियों का गान।
🎯 Exam Tip: कविता या गीत की पंक्तियों को उद्धृत करते समय, उन्हें ठीक वैसे ही लिखें जैसे वे स्रोत में दी गई हैं।
Question 18. शेखर छाया को किसकी कहानी सुनाता है? छाया कहानी के पात्रों की पहचान किन रूपों में करती है?
Answer: शेखर राजमहल से लौटकर एक कवि की कहानी सुनाता है। वह छाया से कहता है कि एक राजा के दरबार में एक कवि रहता था। वह युवक और भावुक था। राज-भवन के सभी लोग उसे बहुत प्रेम करते थे, महल का राजा उस कवि से प्रतिदिन सुबह एक नई और सुंदर कविता सुना करता था। परन्तु उस कवि में एक बुराई थी। वह राजा को अपनी कविता केवल सुबह के समय ही सुनाता था। राजा ने रात के तीसरे पहर वेश बदलकर कवि के घर जाकर देखा कि कवि अपनी लेखनी पकड़कर लिखने को तैयार बैठा था। तभी राजा को कहीं से किसी स्त्री का बहुत सुरीला स्वर सुनाई पड़ा, जिसे सुनकर राजा झूमने लगा। उसने देखा कि गीत की आवाज आते ही कवि की लेखनी भी स्वत: चलने लगी। इस प्रकार राजा को उस कवि के तीसरे पहर में कविता लिखने और केवल सुबह के समय कविता सुनाने का कारण समझ आ गया। छाया इस कहानी के पात्रों को स्वयं से जोड़कर देखती है।
In simple words: शेखर छाया को एक कवि की कहानी सुनाता है जो रात में एक स्त्री के गीत सुनकर कविता लिखता था और सुबह राजा को सुनाता था। छाया इस कहानी को अपने और शेखर से जोड़कर समझती है।
🎯 Exam Tip: कहानी के भीतर कहानी वाले प्रश्नों में, मुख्य कहानी और उप-कहानी के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।
Question. 'प्रत्येक पुरुष के लिए स्त्री एक कविता है'- छाया अपने इस कथन को कैसे स्पष्ट करती है?
अथवा
छाया के अनुसार स्त्री पुरुष के जीवन में क्या महत्व रखती है?
Answer: छाया के अनुसार, जैसे कविता पुरुष के सूने मन को खुश कर देती है, वैसे ही स्त्री भी पुरुष के थके हुए मन को बहलाने का साधन है। जब पुरुष जीवन के संघर्षों का सामना करते हुए थक जाता है, तब स्त्री उस पर अपना सारा प्रेम और अरमान लुटाती है। जैसे उसके जीवन में स्त्री से अधिक महत्वपूर्ण और कुछ नहीं है। लेकिन जैसे कविता नीरस होने पर पुरुष उससे दूर भागता है, वैसे ही स्त्री से ऊब जाने पर वह पुनः अपने कामों में लग जाता है। स्त्री एक पुरुष के जीवन में प्रेरणा और सुख का स्रोत होती है।
In simple words: छाया कहती है कि जैसे कविता मन को खुश करती है, वैसे ही स्त्री पुरुष के थके मन को शांत करती है। वह जीवन को सुंदर बनाती है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के दर्शन को समझाते समय, उनके तर्कों और उपमाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करें।
Question 20. शेखर छाया को क्या दिखाता है कि वह आश्चर्यचकित हो जाती है; किंतु कुछ क्षण बाद उदास भी। ऐसा क्यों? लिखिए।
Answer: शेखर छाया को अपने और उसके प्रेम की याद के रूप में अपनी कृति 'भोर का तारा' दिखाता है। इसे देखकर छाया बहुत आश्चर्यचकित हो जाती है। थोड़ी देर बाद वह उस कृति के नष्ट होने और चोरी हो जाने के डर से उदास हो जाती है। यह उसके प्रेम के प्रति गहरे लगाव और उसकी चिंता को दर्शाता है।
In simple words: शेखर ने छाया को अपनी लिखी प्रेम कविता 'भोर का तारा' दिखाई, जिसे देखकर वह पहले खुश हुई, लेकिन फिर उसे खो जाने के डर से उदास हो गई।
🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं को व्यक्त करते समय, उनके पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 21. जब शेखर और छाया अपने सुख की कल्पना से प्रसन्न थे, उसी क्षण उनके घर में कौन प्रवेश करता है? वह उन दोनों को क्या सूचना देता है?
अथवा
माधव शेखर के पास क्यों आता है? वह छाया और शेखर को क्या सूचना देता है?
अथवा
माधव शेखर से क्या सहायता माँगने आया था?
Answer: जब शेखर और छाया अपने सुख की कल्पना में प्रसन्न थे, तभी पसीने से लथपथ और भयभीत माधव उनके घर में प्रवेश करता है। वह उन दोनों को सूचना देता है कि गुप्त साम्राज्य और सम्राट स्कन्दगुप्त संकट में हैं। इस समय उनके राज्य और देश को शेखर की जोशीली आवाज की ज़रूरत है। शेखर ही वह व्यक्ति है जो अपनी कविता से लोगों में चेतना जगाकर उन्हें स्वदेश की रक्षा के लिए प्रेरित कर सकता है। माधव देश की सुरक्षा के लिए शेखर से मदद मांगने आता है।
In simple words: जब शेखर और छाया खुश थे, माधव उनके घर आता है। वह उन्हें बताता है कि गुप्त साम्राज्य खतरे में है और शेखर को अपनी कविताओं से लोगों में देशभक्ति जगाने की ज़रूरत है।
🎯 Exam Tip: कहानी के मोड़ को स्पष्ट करें और समझाएं कि कैसे एक अप्रत्याशित घटना पात्रों के जीवन को बदल देती है।
Question 22. माधव शेखर और छाया को किसकी मृत्यु का समाचार सुनाता है? उन्होंने किस प्रकार वीरगति प्राप्त की?
Answer: माधव शेखर और छाया को तक्षशिला के नए क्षत्रप और छाया के भाई देवदत्त की मृत्यु का समाचार सुनाता है। देवदत्त ने अपने सैनिकों को हूणों के चंगुल से बचाने के लिए स्वयं के प्राण दाँव पर लगा दिए और हूणों के विरुद्ध युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
In simple words: माधव शेखर और छाया को देवदत्त की मृत्यु की खबर सुनाता है। देवदत्त ने अपने सैनिकों को बचाने के लिए हूणों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी थी।
🎯 Exam Tip: युद्ध या बलिदान से संबंधित घटनाओं का वर्णन करते समय, पात्रों की वीरता और उनके त्याग पर जोर दें।
एकांकीकार जगदीश चन्द्र माथुर का जन्म 16 जुलाई 1917 ई. को खुर्जा, बुलन्दशहर (उत्तरप्रदेश) में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा खुर्जा एवं उच्च शिक्षा इलाहाबाद में हुई थी। यह बिहार में शिक्षा सचिव व आकाशवाणी के महा संचालक सहित अनेक राजकीय पदों पर प्रतिष्ठित हुए। माथुर जी अपने विद्यार्थी जीवन में ही रचना कर्म में लीन हो गए थे। माथुर जी मूल रूप से नाटककार थे। इन्होंने वर्तमान समाज व इतिहास दोनों पर लिखा। उनके सामाजिक नाटक आधुनिक समाज की विडम्बनापूर्ण स्थिति को उभारते हैं तो वहीं ऐतिहासिक नाटकों में अतीत के गौरव को। इनके एकांकी जीवन की यथार्थ संवेदनाओं को उभारने में सक्षम में हैं तथा पात्र अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व और चारित्रिक विशेषताएँ रखते हैं। श्री माथुर का देहावसान 14 मई 1978 ई. में हुआ। श्री माथुर छायावादी संवेदना के रचनाकार थे। इनके नाटक मंचीय लोकप्रियता को प्राप्त हुए। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीया, दस तस्वीरें, परम्पराशील नाट्य, पहला राजा, जिन्होंने जीना जाना। एक जागरूक कवि समाज में लोगों को उनके कर्तव्यों के प्रति प्रेरित करने की क्षमता रखता है।
Question 2. 'भोर का तारा' एकांकी का नायक कौन है? उसका चरित्र-चित्रण लिखिए।
अथवा
उन गुणों का उल्लेख कीजिए जो शेखर को इस एकांकी का नायक सिद्ध करते हैं?
Answer: 'भोर का तारा' एकांकी का नायक शेखर है। वह एक सहृदय कवि, सच्चा प्रेमी, राष्ट्रभक्त, कर्तव्य के प्रति सजग और त्याग के लिए तैयार रहने वाला युवक है। उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. सहृदय कवि: शेखर एक संवेदनशील कवि है। वह प्रकृति के हर तत्व में सुंदरता देखता है। उसे राजपथ पर भीख माँगने वाली स्त्री में भी कला दिखाई देती है। उसके मधुर गीतों से सम्राट मुग्ध होकर उसे राजकवि नियुक्त कर लेते हैं। वह अपनी कला से दूसरों को प्रभावित करता है।
2. भावुक व्यक्ति: शेखर एक भावुक इंसान है। वह अपनी भावनाओं को अपनी कविताओं से व्यक्त करता है। जब माधव छाया का नाम लेकर उसे छेड़ता है, तो वह शर्म से लाल हो जाता है। उसकी भावनाएँ गहरी और सच्ची हैं।
3. सच्चा प्रेमी: शेखर एक सच्चा प्रेमी है। वह छाया से प्यार करता है, लेकिन उसे पाने की उम्मीद नहीं करता क्योंकि वह उनके बीच के सामाजिक अंतर को जानता है। वह हमेशा अपनी सीमा में रहकर छाया को चाहता है। उसके प्रेम की पराकाष्ठा यह है कि वह छाया के प्रेम से प्रेरणा लेकर 'भोर का तारा' रचना लिखता है।
4. राजभक्त: राजकवि नियुक्त होने पर वह अपने कवि-कर्म से राजा को खुश करता है। वह उनके लिए कविताएँ लिखता है। इतना ही नहीं, वह अपनी प्रेम की अमर कृति को उन्हें भेंट करने की बात कहता है। लेकिन जब उसे पता चलता है कि देश पर संकट है, तो वह अपनी इस रचना को आग के हवाले कर देता है।
5. कर्तव्य के प्रति सजग व त्याग को तत्पर: शेखर अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक है। देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए वह त्याग करने से भी पीछे नहीं हटता है। जिस कृति को वह संभालकर रखने का छाया से वादा करता है, उसी को वह अपने देश के लिए आग के हवाले कर देता है। यह दिखाता है कि उसके लिए देश सर्वोपरि है।
In simple words: शेखर 'भोर का तारा' का नायक है। वह एक संवेदनशील कवि, सच्चा प्रेमी, देशप्रेमी और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति है। वह अपनी भावनाओं को कविताओं में व्यक्त करता है, देश के लिए अपने प्रेम का त्याग करता है और राजा के प्रति वफादार है।
🎯 Exam Tip: किसी पात्र का चरित्र-चित्रण करते समय, उसके विभिन्न गुणों को उदाहरणों के साथ बिंदुवार समझाएं।
Question 3. 'भोर का तारा' एक निजी प्रेम प्रधान एकांकी है या देश-प्रेम प्रधान एकांकी है। कारण सहित उत्तर दीजिए।
Answer: माधव शेखर से अपनी प्रभावशाली आवाज में देश के युवकों में देशप्रेम और चेतना जगाने को कहता है, ताकि वे स्वदेश की रक्षा के लिए तैयार रहें। वे अपने-अपने हाथों में हथियार लेकर स्वदेश और राष्ट्र के दुश्मनों का सामना कर सकें। माधव की इन देशभक्तिपूर्ण बातों को सुनकर और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध होने पर शेखर अपने निजी प्रेम की निशानी, अपनी प्रिय कृति 'भोर का तारा' को आग के हवाले कर देता है। उसे जला देता है। इस प्रकार, निजी प्रेम राष्ट्रप्रेम के सामने कमजोर पड़ जाता है और एकांकी अंत तक आते-आते देशप्रेम प्रधान एकांकी का रूप ले लेता है। यह नाटक हमें सिखाता है कि व्यक्तिगत मोह से बढ़कर राष्ट्रीय कर्तव्य होता है।
In simple words: 'भोर का तारा' एक देशप्रेम प्रधान एकांकी है। शुरुआत में भले ही इसमें प्रेम कहानी दिखे, लेकिन अंत में शेखर अपने प्रेम को त्यागकर देश की रक्षा के लिए खड़ा हो जाता है, जिससे यह देशप्रेम की कहानी बन जाती है।
🎯 Exam Tip: किसी एकांकी के मुख्य विषय को निर्धारित करते समय, कहानी के विकास और पात्रों के प्रमुख परिवर्तनों पर ध्यान दें।
Question 4. एकांकी के आधार पर 'माधव' का चरित्र-चित्रण लिखिए।
Answer: माधव भी एकांकी का एक महत्वपूर्ण पात्र है। वह पाठकों को प्रभावित करने में पूरी तरह सफल होता है। उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सच्चा व सहृदय मित्र: माधव एक सच्चा और सहृदय मित्र है। वह शेखर को हमेशा आगे बढ़ता देखना चाहता है और हमेशा उसकी प्रशंसा करता है। वह अपने मित्र शेखर के राजकवि बनाए जाने पर बहुत खुश होता है और शेखर को यह खुशखबरी देने स्वयं जाता है।
2. ऊँच-नीच की भावना से रहित: माधव ऊँच-नीच की भावना से मुक्त व्यक्ति है। उसकी दृष्टि में सभी समान हैं। यही कारण है कि एक राजदरबारी होने पर भी वह शेखर जैसे साधारण कवि का मित्र है। उसे अपने पद का घमंड नहीं है।
3. मनोविनोदपूर्ण व्यवहार: माधव का व्यवहार मनोरंजक है। वह शेखर को उसकी कविताओं और कल्पनाओं को लेकर उससे व्यंग्य करता रहता है। यहाँ तक कि वह उसे उसकी प्रेयसी का नाम लेकर छेड़ता रहता है। वह एक राजनीतिज्ञ होने पर भी हँसी-मजाक करने का मौका नहीं छोड़ता है।
4. देशभक्त: माधव एक देशभक्त है। अपने देश को संकट में जानकर वह अपने प्राणों तक की बाजी लगाने को तैयार हो जाता है, लेकिन देवदत्त के आदेश पर वह शांत हो जाता है और अपने देश की रक्षा के लिए सभी ओर से सहायता जुटाने का प्रयास करता है।
5. कर्तव्य के प्रति सजग: माधव अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह सजग है। वह तक्षशिला से उज्जयिनी आकर शेखर को उसके कर्तव्य का बोध कराता है और उसे अपनी कविता को देश-रक्षा के लिए उपयोग करने को कहता है। वास्तव में शेखर को प्रभात का सूर्य बनाने का श्रेय माधव को ही जाता है। वह एक स्नेही मित्र और एक देशभक्त है।
In simple words: माधव एक सच्चा और सहृदय मित्र, ऊँच-नीच की भावना से रहित, विनोदपूर्ण व्यवहार वाला देशभक्त है। वह अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक रहता है और शेखर को सही रास्ता दिखाता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी सहायक पात्र का चरित्र-चित्रण करते समय, उसके मुख्य गुणों और कहानी में उसकी भूमिका को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 5. शेखर छाया को क्या कहानी सुनाता है? अपने शब्दों में लिखो।
Answer: शेखर राजमहल से लौटकर छाया को एक कवि की कहानी सुनाता है। वह छाया से कहता है कि एक राजा के दरबार में एक कवि रहता था। वह युवक और भावुक था। राज-भवन के सभी लोग उसे बहुत प्रेम करते थे। महल का राजा उस कवि से प्रतिदिन सुबह एक नई और सुंदर कविता सुना करता था। परन्तु उस कवि में एक बुराई थी। वह राजा को अपनी कविता केवल सुबह के समय ही विचार करके सुनाता था। रात का तीसरा पहर होते ही राजा वेश बदलकर उस कवि के घर पहुँच गया और उसके घर की खिड़की के नीचे बैठ गया। राजा ने देखा कि कवि अपनी लेखनी पकड़कर लिखने को तैयार बैठा है। तभी राजा को कहीं से किसी स्त्री का बहुत सुरीला स्वर सुनाई पड़ा, जिसे सुनकर राजा झूमने लगा। उसने देखा कि गीत की आवाज आते ही कवि की लेखनी भी स्वत: चलने लगी। इस प्रकार राजा को उस कवि के तीसरे पहर में कविता लिखने और केवल सुबह के समय कविता सुनाने का कारण समझ आ गया।
In simple words: शेखर छाया को एक कवि की कहानी सुनाता है। उस कवि को सुबह सिर्फ तभी कविता आती थी जब रात में एक स्त्री गाती थी, जिसे सुनकर वह लिखता था। राजा ने यह भेद जान लिया।
🎯 Exam Tip: कहानियों को अपने शब्दों में व्यक्त करते समय, मुख्य घटनाओं और उनके परिणाम पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 6. 'भोर का तारा' एकांकी के कथा-संगठन की समीक्षा कीजिए।
अथवा
'भोर का तारा' एकांकी के कथा-संगठन पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: 'भोर का तारा' एकांकी में निजी प्रेम से बढ़कर देशप्रेम की महत्ता को दर्शाया गया है। पूरी एकांकी में एक कवि की भावनाओं का वर्णन किया गया है और अंत में स्वराष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का बोध कराया गया है।
1. सुगठित कथानक: इस एकांकी की कहानी पूरी तरह से जुड़ी हुई है। एक के बाद दूसरी घटना इस प्रकार पिरोई हुई है कि उसमें कहीं भी कोई ढीलापन नहीं आता। कोई भी अनावश्यक घटना नहीं जोड़ी गई है। इसलिए 'भोर का तारा' एकांकी की कहानी बहुत सुव्यवस्थित और सुगठित है।
2. विकास-क्रम: 'भोर का तारा' एकांकी की कहानी का विकास भी बहुत स्वाभाविक तरीके से हुआ है। शुरुआत में माधव के आने से शेखर की कवि प्रवृत्ति का पता चलता है। माधव की बातों से पता चलता है कि शेखर अब साधारण कवि नहीं, बल्कि राजकवि बन गया है। उसकी प्रेयसी छाया उसकी पत्नी के रूप में उसके जीवन में आती है। उनके प्रेम का परिणाम शेखर द्वारा एक काव्य रचना के रूप में होता है। माधव का फिर से आना कहानी को एक नया मोड़ देता है। इस प्रकार पूरी कहानी धीरे-धीरे विकसित होती है।
3. संकलन त्रय: इस एकांकी में संकलन-त्रय का पूरा ध्यान रखा गया है। पूरी एकांकी दो दृश्यों में जीवन के सभी पहलुओं को दर्शाती है। यह एकता, समय और कार्य की भावना को बनाए रखता है।
4. रोचक और जिज्ञासापूर्ण संक्षिप्त कथानक: 'भोर का तारा' एकांकी का कथानक बहुत रोचक और जिज्ञासापूर्ण है। माधव का दोनों बार आना जिज्ञासा बढ़ाता है। पूरी एकांकी में उत्सुकता बनी रहती है। कहानी बहुत संक्षिप्त होते हुए भी रोचकता से भरी हुई है।
5. निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि 'भोर का तारा' एकांकी की कहानी संक्षिप्त, रोचक और सुगठित है। इसमें एक कवि की भावनाओं का सजीव चित्रण है। पाठक पर इसका सहज ही प्रभाव अंकित हो जाता है।
In simple words: 'भोर का तारा' एकांकी की कहानी बहुत अच्छी तरह से लिखी गई है। इसमें सभी घटनाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हैं और कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। यह कहानी रोचक और छोटी है जो कवि की भावनाओं को अच्छे से दिखाती है।
🎯 Exam Tip: कथा-संगठन की समीक्षा करते समय, कहानी के तत्वों जैसे कथानक, विकास, और रोचकता पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 7. छाया माधव पर उसका प्रभात नष्ट करने का आरोप क्यों लगाती है? माधव किस प्रकार उसके दोष को गलत सिद्ध करता है?
Answer: एकांकी के दूसरे अंक में जब माधव प्रवेश करता है, उस समय छाया और शेखर अपने सुखमय जीवन पर विचार करके प्रसन्न थे। माधव शेखर से कहता है कि वह अपनी प्रभावशाली आवाज से देश के युवकों में देशप्रेम और चेतना जगाए, जिससे वे स्वदेश की रक्षा के लिए तैयार हो जाएँ। माधव के इस प्रकार शेखर को देशरक्षा के लिए कवि कर्म करने के लिए प्रेरित किए जाने पर शेखर अपने और छाया के प्रेम की प्रतीक रचना 'भोर का तारा' को फाड़कर जलती अंगीठी में डाल देता है। यह दृश्य देखकर छाया के शोक की सीमा नहीं रहती। वह माधव को इसका दोषी ठहराते हुए उसे उसका प्रभात अर्थात् सुख और उनके प्रेम का प्रतीक नष्ट करने वाला कहती है।
इस बात को सुनकर माधव रुक जाता है। वह खिड़की खोलकर छाया को वहाँ से आती हुई शेखर की ओजभरी आवाज सुनाता है। वह खिड़की को बंद करके छाया से कहता है कि उसने उसका (छाया का) प्रभात नष्ट नहीं किया है। क्योंकि वास्तविक प्रभात तो अब होगा। शेखर जो अब तक भोर का तारा था वह अब प्रभात का सूरज बनेगा। इस प्रकार माधव छाया के दोषारोपण को गलत सिद्ध करता है। वह बताता है कि देश के लिए कर्तव्य सबसे बड़ा सुख है।
In simple words: छाया माधव पर आरोप लगाती है कि उसने उसके और शेखर के प्रेम के सुख को नष्ट कर दिया। माधव यह कहकर उसका आरोप गलत साबित करता है कि अब शेखर 'भोर का तारा' नहीं, बल्कि 'प्रभात का सूरज' बनेगा, यानी देश के लिए काम करेगा।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पात्रों के तर्क-वितर्क को स्पष्ट रूप से समझाएं और उनके दृष्टिकोणों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करें।
Question 8. पठित एकांकी के आलोक में जगदीश चन्द्र माथुर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: जगदीश चन्द्र माथुर रंगमंच कला के माहिर कलाकार हैं। उन्होंने अपने सामाजिक एकांकियों में समाज की बुराईयों, रूढ़िवाद और नारी के प्रति गलत सोच का चित्रण करते हुए इनकी आलोचना की है तथा इसका समाधान ढूँढ़ने का प्रयास किया है। ऐसी ही सामाजिक एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' में उन्होंने उसकी प्रमुख नारी पात्र के माध्यम से वर पक्ष वालों द्वारा कन्या पक्ष की नाप-तौल और स्त्री को भेड़-बकरी या बिकने वाली वस्तु माने जाने पर करारा प्रहार किया है।
वहीं अपनी ऐतिहासिक एकांकियों में इन्होंने त्याग, बलिदान और उत्सर्ग का चित्रण किया है। आवश्यकता पड़ने पर प्रेम-गीत गाने वाले इनके पात्र अपने प्रेम को तिनके के बराबर भी न समझते हुए देश-प्रेम के लिए अपना सब कुछ समर्पण कर देने को तैयार हो जाते हैं और सिंहनाद करते हुए युद्ध-भूमि में कूद पड़ते हैं।
प्रस्तुत एकांकी के संदर्भ में श्री जगदीश चन्द्र माथुर ने एक कवि को एक ऐसे नि:शस्त्र सैनिक के रूप में प्रस्तुत किया है, जो अपनी ओजपूर्ण वाणी से जनता के हृदय में देश के प्रति प्रेम, भक्ति और सब कुछ बलिदान करने की भावना को जाग्रत करता है। वह अपने देश के लिए अपने निजी प्रेम की कोमल भावनाओं पर आधारित अपनी रचना तक को फाड़कर जला देता और देश रक्षण के लिए लोगों को चैतन्य करने की दिशा की ओर चल पड़ता है। जगदीश चन्द्र माथुर एक दूरदर्शी और समाज सुधारक लेखक थे।
In simple words: जगदीश चन्द्र माथुर एक कुशल नाटककार थे। उन्होंने सामाजिक नाटकों में समाज की बुराइयों पर और ऐतिहासिक नाटकों में त्याग व बलिदान पर लिखा। 'भोर का तारा' में उन्होंने दिखाया कि एक कवि भी अपनी वाणी से देश के लिए लड़ सकता है।
🎯 Exam Tip: लेखक के व्यक्तित्व और कृतित्व का वर्णन करते समय, उनकी रचनाओं से उदाहरण दें और उनके संदेश को स्पष्ट करें।
पाठ-सारांश :
'भोर का तारा' जगदीश चन्द्र माथुर द्वारा लिखित गुप्त वंश के अन्तिम प्रतापी शासक स्कन्दगुप्त के शासन काल से सम्बन्धित ऐतिहासिक एकांकी है। कहानी का नायक शेखर एक राजकवि है और अपनी प्रेयसी व पत्नी के प्रेम से प्रेरित होकर 'भोर का तारा' नामक रचना लिखता है। किन्तु अपने राज्य को संकट में देखकर वह अपनी कृति को आग के हवाले कर देता है। यह एकांकी हमें देशप्रेम का महत्व सिखाती है।
दृश्य : एक
शेखर अपने घर में बैठा कविता लिखने में तल्लीन है। उसी समय उसका मित्र माधव शेखर के घर में प्रवेश करता है। कविता लिखने में तल्लीन शेखर उस पर ध्यान नहीं देता है, तब माधव के पुकारने पर वह उसे देखता है और उसे अपनी कविता की पंक्तियाँ सुनाता है।
दृश्य : दो
अपने नए घर (देवदत्त के महल) में छाया शेखर द्वारा रचित गीत को गुनगुना रही है और घर के छोटे-छोटे काम निपटा रही है। शेखर अपने काम से लौटकर दरवाजे पर खड़ा चुपचाप छाया को गुनगुनाता हुआ देख रहा था। बड़े स्नेह के साथ आया को पुकारता है; किन्तु अपनी धुन में गुनगुनाने और काम करने में सुन नहीं पाती है। वह पुनः उसे बुलाता है। वह चौंककर उसे देखती है। शेखर अपना दुशाला और ग्रंथ रखकर छाया को एक कहानी सुनाता है। छाया पहचान जाती है कि शेखर उसे कहानी के बहाने अपनी और उसी की बातें बता रहा है। शेखर उससे कहता है कि वह (छाया) ही उसकी कविता है, जब तक वह है, तब तक उसकी कविता जीवित है।
उसकी बात सुनकर छाया भावुक हो उठती है। वह शेखर से कहती है कि वह जीवित रहे न रहे पर उसकी कविता सदैव जीवित रहेगी। शेखर छाया को अपने और प्रेम पर आधारित रचना 'भोर का तारा' दिखाता है। उस कृति को देखकर छाया आश्चर्यचकित हो जाती है। छाया शेखर की इस कृति को उन दोनों के प्रेम की कृति बताती है। शेखर छाया से कहता है कि वह अपनी इस कृति को सम्राट स्कन्दगुप्त को भेंट करेगा और प्रतिदिन इसमें संकलित गीत सम्राट को सुनाया करेगा।
वह अपने भविष्य की कामना करता हुआ छाया से कहता है कि बहुत वर्षों बाद लोग कविकुलशिरोमणि शेखर द्वारा रचित 'भोर का तारा' रचना को पढ़कर विभोर हो जाएँगे और वे दोनों उस क्षण को याद करने लगते हैं, जब उन दोनों ने एक-दूसरे को देखा था। छाया शेखरे से अपनी इस कृति (भोर का तारा) को सँभालकर रखने की प्रार्थना करती है। शेखर उसे विश्वास दिलाता है कि वह अपनी कृति को सँभालकर रखेगा। दोनों अपने सुखी जीवन पर विचार करके प्रसन्नतापूर्वक हँसते हैं।
तभी बाहर से आते शोर और घोड़ों की टापों की आवाज सुनकर शेखर द्वार खोलता है। पसीने से लथपथ और शस्त्रों से सुसज्जित माधव शेखर के घर में प्रवेश करता है। वह बहुत चिन्तित और भयभीत है। उसे ऐसी स्थिति में देखकर शेखर और छाया दोनों किसी अनिष्ट की संभावना से काँपने लगते हैं। माधव भयभीत आँखों से कभी उन दोनों को तो कभी उनके घर को देखता है। भय के कारण बोल पाने में असमर्थ होने पर वह अपनी पूरी शक्ति एकत्र करके शेखर और छाया से कहता है कि वह उन दोनों से भीख माँगने आया है। माधव की यह बात सुनकर उन दोनों के आश्चर्य की सीमा न रही।
उन्होंने माधव से पूरी बात बताने को कहा। तब माधव ने बताया कि गुप्त राज्य संकट में है। हूणों के सरदार तोरमाण ने भारत में प्रवेश करके अम्भी राज्य को नष्ट कर दिया है। अब उसकी सेना तक्षशिला को नष्ट कर रही है। माधव के मुख से तक्षशिला के नष्ट होने की बात सुनकर छाया भयभीत हो उठती है। माधव अपनी बात जारी रखता है। वह बताता है कि पूरा पंचनद उसके भय से काँप रहा है। गाँव जलाए जा रहे हैं। लोगों पर अत्याचार और अन्याय हो रहे हैं। वह उन दोनों से इस संकट काल में शेखर से मदद करने को कहता है। वह कहता है ऐसे समय में केवल शेखर ही है जो लोगों को जगा सकता है, युवकों में देशभक्ति की भावना पैदा कर सकता है। उनमें अपने राज्य और देश की रक्षा के लिए जोश भर सकता है। शेखर मस्तक पर हाथ रखकर माधव की बातों को सुन रहा है। माधव शेखर से कहता है कि वह अपनी कविता के माध्यम से जन-जन में
शेखर अपने और छाया के प्रेम के प्रतीक अपनी रचना 'भोर का तारा' को फाड़-फाड़कर जलती अँगीठी में डाल रहा था। उसे ऐसा करते देखकर छाया दुःखी होकर जमीन पर गिर पड़ती है। शेखर अपनी जलती हुई कृति और छाया की ओर देखकर मुस्कराता हुआ बाहर चला जाता है। माधव भी उसके पीछे चल देता है। छाया माधव से कहती है कि उसने उसको प्रभात अर्थात् सुख और उनके प्रेम का प्रतीक नष्ट कर दिया। उसकी यह बात सुनकर माधव रुक जाता है। वह खिड़की खोलकर छाया को वहाँ से आती हुई शेखर की ओजभरी आवाज सुनाता है। वह खिड़की को बन्द करके छाया से कहता है कि उसने उसका (छाया का) प्रभात नष्ट नहीं किया है। क्योंकि वास्तविक प्रभात तो अब होगा। शेखर जो अब तक भोर का तारा था वह अब प्रभात का सूरज बनेगा। इस प्रकार एकांकी समाप्त होती है।
कठिन शब्दार्थ :
गृह = घर। अस्त-व्यस्त = तितर-बितर। मैली = गंदी। लेखनी = कलम, पैन। पात्र = बर्तन। तिपाही = जिसके तीन पैर हों। आले = दीवार में बनी, छोटी-छोटी अलमारियाँ। तल्लीन = विचारमग्न। आतुर = बेचैन। द्वार = दरवाजा। भोर = सुबह, प्रभात। एकटक = स्थिर नजर से। रजनी = रात। बाला = कन्या। लाज = शर्म। पट = वस्त्र। छोर = किनारी। कण = टुकड़ा। प्रियतम = प्रेमी। निहारना = स्नेह के साथ देखना।
कोसना = मन ही मन किसी के लिए गलत बात सोचना। अठखेलियाँ = हँसी-मजाक। राजनीतिज्ञ = राजनीति को जानने वाला। उलझन = परेशानी। मार्ग = रास्ता। उद्योग = परिश्रम। अभिनय करना = नाटक करना। प्रयत्न = प्रयास। अवहेलना = अवज्ञा करना। सौन्दर्य = सुन्दरता। भिखमंगिन = भिखारिन। भूषण = गहना, आभूषण। बेबस = लाचार। एकटक = बिना पलक झपकाए। शिल्पी = कलाकार।
पैबन्द = फटे हुए कपड़े पर कपड़े का जोड़, थेकड़ी। प्रशंसा = बढ़ाई। सरलभाव = सामान्य। झैपना = शर्माना। मन्द = धीमा। गहरे = गंभीर। आशा = उम्मीद। व्यर्थ = बेकार। मामूली = साधारण। खबर = समाचार। युवती = युवा स्त्री। रीझना = मोहित होना। उकताकर = परेशान होकर। बुद्ध = मूर्ख। बूता = हिम्मत। क्षत्रप = राजा। परवाह करना = चिन्ता करना। भावोद्रेक = भावों की अधिकता। संध्या = शाम, साँझ। दर्पण = शीशा।
पीढ़ा = बैठने की चौकी। रक्खी = रखी। अलगनी = कपड़े टाँगने की खुटी। प्रतिमा = मूर्ति। चांचल्य = चंचल। उन्माद = अलमस्ती। गाम्भीर्य = गंभीरता। अग्नि = आग। प्रज्ज्वलित करना = जलाना। गान = गाना गाना। संलग्न = व्यस्त करेगा। नव = नया। स्पर्श = छूकर। सलिल = नदी। पदचाप = पैरों की आवाज। परिणत होना = बदल जाना। उलाहना = ताना। ऊबे = बोरियत। निछावर करना = लुटाना। अरमान = इच्छाएँ। नीरव = नीरस। वाटिका = उद्याने। भेद = रहस्य। तनिक = जरा। दुशाला = दुपट्टा।
प्रारंभ करना = शुरुआत करना। समाप्त होना = खत्म होना। स्मृति = याद। चाव से = रुचि से। लगन = इच्छा। गद्गद् = प्रसन्न। सिरमौर = सबसे बढ़कर। विभोर = प्रसन्नचित्त। सहसा = अचानक। दृष्टि = नजर। क्षत्रप = राजा। मग्नावस्था = मग्न होने,
Free study material for Hindi
Step-by-Step Textbook Answers: Class 12 Hindi Chapter 09 भोर का तारा (एकांकी)
Official RBSE Solutions for Chapter 09 भोर का तारा (एकांकी)
Explore reliable textbook solutions for Chapter 09 भोर का तारा (एकांकी) tailored for Class 12 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official RBSE standards for Hindi.
Step-by-Step Explanations for Chapter 09 भोर का तारा (एकांकी)
Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 12 Hindi text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.
Next Steps in Your Hindi Revision
Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 12 Hindi.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 9 भोर का तारा (एकांकी) is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Hindi are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 9 भोर का तारा (एकांकी) as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 9 भोर का तारा (एकांकी) will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Hindi. You can access RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 9 भोर का तारा (एकांकी) in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 9 भोर का तारा (एकांकी) in printable PDF format for offline study on any device.