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Detailed Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान RBSE Solutions for Class 12 Hindi
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Class 12 Hindi Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. कवियत्री को बार-बार क्या याद आती है?
(अ) युवाकाल का जीवन
(ब) बचपन की मधुर याद
(स) जीवन खूब निराला है।
(द) मन का संताप
Answer: (ब) बचपन की मधुर याद
In simple words: कवयित्री को अपने बचपन के प्यारे और मीठे पल बार-बार याद आते हैं।
🎯 Exam Tip: जब भी कवयित्री के बचपन की यादों का जिक्र हो, हमेशा उसकी मधुरता और खुशी पर ध्यान दें, क्योंकि यही कविता का मुख्य भाव है।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कवयित्री को बचपन में आँसू के मोती आज कैसे लगते हैं?
Answer: कवयित्री को बचपन के आँसुओं के वे मोती आज जयमाला जैसे लगते हैं। यह दिखाता है कि वह अपने बचपन के हर पल को अनमोल मानती हैं।
In simple words: कवयित्री को बचपन के आँसू आज फूलों की माला जैसे प्यारे लगते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रतीकात्मक प्रश्नों में, दिए गए प्रतीक (जैसे 'जयमाला') का अर्थ और भावना स्पष्ट करनी चाहिए।
Question 2. कवयित्री की बिटिया कवयित्री को क्या खिलाना चाहती थी?
Answer: कवयित्री की बिटिया उसे मिट्टी खिलाना चाहती थी। बच्चों का यह भोलापन कवयित्री को बहुत पसंद आता था।
In simple words: कवयित्री की बेटी उन्हें मिट्टी खिलाना चाहती थी।
🎯 Exam Tip: छोटे बच्चों के स्वाभाविक और मासूम क्रियाकलापों पर ध्यान दें, क्योंकि कविता में यह वात्सल्य भाव को दर्शाता है।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. "किलकारी किल्लोल मचाकर सूना घर आबाद किया” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवयित्री को अक्सर अपने बचपन के मीठे जीवन की याद आती रहती थी। उन्हें अपना घर हमेशा खाली-खाली सा लगता था। जब उनकी बेटी आई, तो उसके मीठे किलकारियों और खेलों से घर फिर से खुशियों से भर गया। बेटी ने उनके घर के खालीपन को पूरी तरह से खत्म कर दिया।
In simple words: कवयित्री को अपना घर सूना लगता था। जब बेटी के जन्म के बाद उसकी किलकारियां और खेल घर में गूंजने लगे, तो घर खुशी से भर गया और सूनापन खत्म हो गया।
🎯 Exam Tip: भाव स्पष्ट करते समय, पंक्ति के मुख्य शब्दों (किलकारी, किल्लोल, सूना घर, आबाद) के अर्थ को विस्तार से समझाएं और उनका कविता के संदर्भ में महत्व बताएं।
Question 2. 'नैन नीर युत दमक उठे' का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवयित्री जब बचपन में कभी रोती या जिद करती थी, तो घर के सभी लोग उसे मनाने लगते थे। उसके दादा उसे गोद में लेकर चाँद दिखाते थे ताकि वह चुप हो जाए। उस समय कवयित्री की आँसू भरी आँखें खुशी से चमक उठती थीं और वह मुस्कुराने लगती थी। यह बच्चों के जल्दी खुश हो जाने के स्वभाव को दर्शाता है।
In simple words: जब कवयित्री रोती थी और बड़े उसे बहलाते थे, तो उसकी आँसू भरी आँखें खुशी से चमक उठती थीं।
🎯 Exam Tip: इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते समय, बच्चों की मासूमियत और बड़ों के लाड़-प्यार के प्रभाव पर विशेष ध्यान दें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान निबन्धात्मक प्रश्न
कवयित्री को बार-बार अपने बचपन के दिनों की मधुर यादें आती रहती हैं। उसे लगता है कि बचपन के जाने के साथ, उसके जीवन से सबसे बड़ी खुशी विदा हो गई है। बचपन का निर्भय और स्वच्छंद होकर खेलना-खाना, ऊँच-नीच और छुआ-छूत रहित मस्त जीवन आज भी उसे भूला नहीं है। जब भी कवयित्री रोती-मचलती थी तो उसकी माँ घर के सारे काम-काज छोड़कर उसे मनाने आ जाती थी। उसके दादा भी उसे गोद में लेकर चंदा दिखाया करते थे। बचपन बीता तो पहले किशोरावस्था और फिर जवानी भी आ पहुँची। कवयित्री के हाव-भाव, गतिविधि और रुचियाँ सब कुछ बदल गए। कवयित्री को यौवन का संघर्ष भरा जीवन उबाने लगा। विवाह के पश्चात् उसे घर सूना-सा लगने लगा। तभी उसके घर में एक बेटी ने जन्म लिया और कवयित्री की तो जैसे सारी दुनिया ही बदल गई। बिटिया की 'ओ माँ' पुकार और 'माँ खाओ' जैसी भोली मनुहार ने उसके जीवन में जैसे उसके बचपन को फिर से साकार कर दिया। इस प्रकार सुभद्रा जी का बचपन नया रूप-बेटी-बनकर उन्हें फिर से मिल गया।
Question 2. जीवन में बचपन की ऐसी क्या-क्या विशेषताएँ ऐसी हैं जो हमें आज भी याद आती हैं?
Answer: जीवन में बचपन का भोलापन और अल्हड़ सौंदर्य ऐसा होता है जिसे कोई भी व्यक्ति कभी नहीं भूल पाता। जब भी कोई व्यक्ति बच्चों को खेलते-कूदते, रूठते-मनाते देखता है तो उसे अपना बचपन याद आ जाता है। बचपन की कुछ खास बातें ऐसी हैं जो बड़े होने पर मुश्किल से मिलती हैं। ये हैं बेफिक्री, अल्हड़पन, मस्ती, मासूमियत, बिना भेदभाव के रहना, रूठना और फिर आसानी से मान जाना। जवानी को जीवन में महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इसके साथ चिंताएं, जिम्मेदारियां और चुनौतियां भी आती हैं। ऐसे समय में बचपन की यादें बहुत सुकून देती हैं। व्यक्ति सोचने लगता है कि काश उसे अपना वही प्यारा, बेफिक्र बचपन, जो माता-पिता के प्यार से भरा था, फिर से मिल जाता।
In simple words: बचपन की बेफिक्री, मासूमियत और भेदभाव रहित स्वभाव हमें हमेशा याद आता है। बड़े होने पर जब हम बच्चों को देखते हैं, तो हमें अपना बचपन याद आ जाता है।
🎯 Exam Tip: बचपन की विशेषताओं को बताते समय 'निर्मल', 'भोलापन', 'निश्चिंतता' जैसे शब्दों का प्रयोग करें और उन्हें वर्तमान जीवन की कठिनाइयों से तुलना करके प्रस्तुत करें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान व्याख्यात्मक प्रश्न
Question 1. "ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं ... सूना घर आबाद किया। प्रस्तुत पद की व्याख्या कीजिए।
Answer: यह काव्यांश कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'मेरा नया बचपन' से लिया गया है। इसमें कवयित्री अपने बचपन की मधुर यादों के बारे में बता रही हैं। कवयित्री कहती हैं कि उन्हें अपने बचपन की मीठी यादें बार-बार आती रहती हैं। उन्हें लगता है कि बचपन के चले जाने के साथ ही उनके जीवन से सारी मस्ती भी चली गई है। बचपन में वह बिना किसी चिंता के खेलती थी, खाती थी और बिना किसी डर के घूमती थी। वह उस अनोखे बचपन की खुशी को कैसे भूल सकती हैं। उस समय उनके लिए न कोई ऊँचा था और न कोई नीचा।
In simple words: कवयित्री को बचपन की बेफिक्र और भेदभाव रहित मस्ती याद आती है, जो उन्हें लगता है कि जवानी में खो गई है।
🎯 Exam Tip: कविता के मूल भाव को समझाते समय, कवयित्री की भावनाओं और बचपन की विशेषताओं पर केंद्रित रहें। 'ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं' जैसी पंक्तियों के सामाजिक संदर्भ को भी संक्षेप में बताएं।
Question 2. "हुआ प्रफुल्लित हृदय ... फिर से आया ।” पद की व्याख्या कीजिए।
Answer: यह अंश कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'मेरा नया बचपन' से लिया गया है। कवयित्री इसमें अपने बचपन से किशोरावस्था की ओर बढ़ने पर अपने मन में उठने वाली भावनाओं को बता रही हैं। कवयित्री कहती हैं कि जब वह रोती थी, तो उसके दादा उसे चाँद दिखाते थे ताकि वह चुप हो जाए। तब उसकी आँसू भरी आँखों में खुशी की चमक आ जाती थी। उसकी सरल मुस्कान देखकर सभी लोग खुश हो जाते थे। धीरे-धीरे बचपन बीत गया और कवयित्री बड़ी हो गईं। उन्हें लगा जैसे उनकी खुशियाँ छिन गई हैं या किसी ने उन्हें धोखा दिया है। बचपन उनसे दूर हो गया था। तब वह दौड़कर घर के दरवाजे पर खड़ी हो जाती थीं। उनके मन में घर के बाहर की दुनिया को देखने की उत्सुकता भरी रहती थी।
In simple words: कवयित्री अपने बचपन से बड़े होने की भावनाएं बताती हैं। वह याद करती हैं जब उसके दादा उसे चाँद दिखाकर चुप कराते थे और वह खुश हो जाती थी। अब वह बड़ी हो गई है और उसे लगता है कि उसका बचपन खो गया है।
🎯 Exam Tip: व्याख्या करते समय, बचपन से किशोरावस्था तक के परिवर्तन को कवयित्री की भावनाओं और अनुभवों के माध्यम से स्पष्ट करें।
Question 1. बचपन कवयित्री के जीवन से ले गया -
(क) निश्चिन्तता
(ख) खेलकूद
(ग) रोना
(घ) सबसे मस्त खुशी
Answer: (घ) सबसे मस्त खुशी
In simple words: कवयित्री का बचपन उनकी सबसे बड़ी खुशी लेकर चला गया था।
🎯 Exam Tip: कविता के अनुसार, बचपन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 'मस्ती और खुशी' है, जिसे कवयित्री ने बाद में खोया हुआ महसूस किया।
Question 2. बचपन में कवयित्री को ज्ञान नहीं था -
(क) कपड़े पहनने का
(ख) ऊँच-नीच का
(ग) अपने-पराये का
(घ) पढ़ने-लिखने का
Answer: (ख) ऊँच-नीच का
In simple words: बचपन में कवयित्री को लोगों के बीच ऊँच-नीच का कोई ज्ञान नहीं था।
🎯 Exam Tip: बचपन की मासूमियत और भेदभाव रहित स्वभाव पर ध्यान दें, जो कविता में एक महत्वपूर्ण विषय है।
Question 3. बचपन ने कवयित्री को किसमें फंसा दिया -
(क) काम-धंधों में
(ख) चिन्ताओं में
(ग) जवानी के फन्दे में
(घ) दुखों में
Answer: (ग) जवानी के फन्दे में
In simple words: बचपन के बाद कवयित्री जवानी की उलझनों में फंस गईं।
🎯 Exam Tip: कविता में कवयित्री ने बचपन की स्वतंत्रता को जवानी के संघर्षों से तुलना की है। 'जवानी के फन्दे' इसका सीधा प्रतीक है।
Question 4. कवयित्री बचपन से फिर माँगती है –
(क) निर्मल शांति
(ख) मस्ती
(ग) ऊँच-नीच से मुक्ति
(घ) मधुर मुस्कान
Answer: (क) निर्मल शांति
In simple words: कवयित्री अपने बचपन से साफ और शांत जीवन चाहती हैं।
🎯 Exam Tip: कविता में, जवानी की चिंताओं के विपरीत, कवयित्री बचपन की 'निर्मल शांति' को सबसे अधिक महत्व देती हैं।
Question 5. बिटिया कवयित्री को खिलाने आई थी-
(क) रोटी
(ख) मिठाई
(ग) बिस्किट
(घ) मिट्टी
Answer: (घ) मिट्टी
In simple words: कवयित्री की बेटी उन्हें खेलने के लिए मिट्टी खिलाने आई थी।
🎯 Exam Tip: यह बच्चों की मासूमियत का एक महत्वपूर्ण दृश्य है, जो कविता में कवयित्री को अपने बचपन की याद दिलाता है।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कवयित्री बचपन की कौन सी बातें नहीं भूल पाती है?
Answer: कवयित्री अपने बचपन की निश्चिंतता, निडरता और आजादी से घूमने-फिरने की बातें नहीं भूल पाती है। ये सभी बातें उनके लिए बहुत खास थीं।
In simple words: कवयित्री बचपन की बेफिक्री, बहादुरी और घूमने-फिरने की आजादी को नहीं भूल पाती हैं।
🎯 Exam Tip: बचपन की सकारात्मक विशेषताओं को याद रखें जैसे निश्चिंतता, निडरता और स्वच्छंदता, ये ही मुख्य बातें हैं जो कवयित्री को याद आती हैं।
Question 2. 'झोपड़ी और चीथड़ों में रानी' होने का क्या तात्पर्य है?
Answer: इसका मतलब है कि बचपन में कवयित्री को अपने घर की सुंदरता, असुंदरता या कपड़ों की कोई चिंता नहीं थी। वह खुद को एक रानी की तरह खुश महसूस करती थी, भले ही वह सामान्य परिस्थितियों में क्यों न हो।
In simple words: 'झोपड़ी और चीथड़ों में रानी' का मतलब है कि बचपन में कवयित्री अपनी स्थिति से खुश थी और उसे किसी बाहरी चीज़ की परवाह नहीं थी।
🎯 Exam Tip: इस मुहावरे का अर्थ बच्चों के आंतरिक संतोष और दुनियादारी से दूर उनके बेफिक्र स्वभाव से जोड़कर समझाएं।
Question 3. कवयित्री ने सूने घर को कैसे आबाद कर दिया?
Answer: कवयित्री ने अपनी बेटी की किलकारियों और खेलों से अपने सूने घर को खुशियों से भर दिया। बेटी के आने से घर का खालीपन खत्म हो गया।
In simple words: कवयित्री ने अपनी बेटी की आवाज और खेलों से अपने खाली घर को खुशियों से भर दिया।
🎯 Exam Tip: वात्सल्य रस और बच्चों की उपस्थिति कैसे घर में खुशी लाती है, इस पर जोर दें।
Question 4. माँ कवयित्री के आँसुओं से गीले गालों को कैसे सुखाया करती थी?
Answer: माँ कवयित्री के आँसुओं से गीले गालों को अपने होठों से चूम-चूम कर सुखाया करती थी। यह माँ के अथाह प्यार को दर्शाता है।
In simple words: माँ कवयित्री के गीले गालों को चूमकर उनके आँसू सुखाती थीं।
🎯 Exam Tip: माँ के लाड़-प्यार और वात्सल्य भाव का वर्णन करते समय, छोटे-छोटे शारीरिक हाव-भावों का उल्लेख करें जो प्रेम को दर्शाते हैं।
Question 5. माँ का घर के सारे काम छोड़कर कवयित्री को चुप कराने आ जाना, क्या संकेत करता था।
Answer: माँ का इस तरह आना यह संकेत करता था कि वह अपनी बेटी से बहुत प्यार करती थी और उसकी खुशी उनके लिए किसी भी काम से बढ़कर थी।
In simple words: माँ का सारा काम छोड़कर कवयित्री को चुप कराने आना उनके गहरे लाड़-प्यार को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: यह माँ-बेटी के रिश्ते में बेटी के प्रति माँ की प्राथमिकता और unconditional love (बिना शर्त प्यार) को उजागर करता है।
Question 6. कवयित्री के परिवार के सभी लोगों के चेहरों पर चमक कब आ जाती थी?
Answer: जब कवयित्री अपनी भोली मुस्कान दिखाती थी और अपनी मासूम हरकतों से खुश होती थी, तब उसके परिवार के सभी लोगों के चेहरे खुशी से चमक उठते थे। उसकी खुशी पूरे परिवार को आनंदित करती थी।
In simple words: जब कवयित्री मुस्कुराती थी या खुश होती थी, तो उसके परिवार के सभी लोग खुश हो जाते थे।
🎯 Exam Tip: परिवार के सदस्यों की खुशी का स्रोत बच्चों की मासूमियत होती है, इसे मुख्य बिंदु के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 8. युवावस्था आने पर कवयित्री की आँखों से और मन में क्या भाव उठने लगे?
Answer: युवावस्था आने पर कवयित्री की आँखें थोड़ी लजाने लगीं और मन में एक मीठा उत्साह जागने लगा। यह जवानी के आगमन के साथ स्वाभाविक बदलाव था।
In simple words: जवानी आने पर कवयित्री की आँखें शरमा गईं और मन में नया जोश भर गया।
🎯 Exam Tip: किशोरावस्था से युवावस्था में परिवर्तन के साथ आने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों को ध्यान में रखें।
Question 9. बचपन ने कवयित्री को कैसे ठग लिया?
Answer: बचपन ने कवयित्री को जवानी के संघर्षों भरे जाल में फंसाकर उसकी सारी मस्ती और बेफिक्री छीन ली। कवयित्री को लगा कि जैसे बचपन ने उसे धोखा दे दिया है।
In simple words: बचपन ने कवयित्री को जवानी की उलझनों में डालकर उसकी खुशी और आजादी छीन ली।
🎯 Exam Tip: 'ठग लिया' जैसे प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ स्पष्ट करें और बताएं कि कवयित्री क्यों ऐसा महसूस करती हैं।
Question 10. युवाकाल में मनुष्य के हृदय में किन-किन बातों का उदय हुआ करता है?
Answer: युवाकाल में मनुष्य के हृदय में नई-नई इच्छाएँ, कुछ बड़ा करने की चाह (पुरुषार्थ) और ज्ञान की वृद्धि होती है। यह अवस्था भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होती है।
In simple words: जवानी में इंसान के दिल में नई इच्छाएं, मेहनत करने की भावना और ज्ञान बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: युवाकाल को विकास और संभावनाओं की अवधि के रूप में बताएं, जिसमें व्यक्तिगत विकास पर जोर दिया जाता है।
Question 11. युवावस्था से क्या-क्या झंझट आ जाते हैं?
Answer: युवावस्था में संघर्ष, चिंताएँ और जीवन की चुनौतियों के झंझट मनुष्य को घेर लेते हैं। इस उम्र में जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं।
In simple words: जवानी में संघर्ष, चिंताएं और कई तरह की परेशानियां इंसान को घेर लेती हैं।
🎯 Exam Tip: युवावस्था की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए, उन्हें बचपन की सरलता से विपरीत बताएं।
Question 12. युवा कवयित्री बचपन से क्या-क्या माँगती है?
Answer: युवा कवयित्री बचपन से निर्मल शांति, कष्टों से मुक्ति देने वाला प्राकृतिक आराम, भोली सरलता और बेदाग जीवन वापस माँगती है। वह इन सभी चीजों को जवानी की परेशानियों से बेहतर मानती है।
In simple words: युवा कवयित्री बचपन से साफ शांति, कष्टों से राहत, मासूमियत और एक सीधा-सादा जीवन वापस चाहती हैं।
🎯 Exam Tip: कवयित्री की इच्छाओं को स्पष्ट करते समय, बचपन के उन पहलुओं पर जोर दें जो जवानी में खो गए हैं।
Question 13. जब कवयित्री अपने बचपन को बुला रही थी उस समय अचानक कौन बोल उठा?
Answer: जब कवयित्री अपने बचपन को याद कर रही थी, उस समय अचानक उनकी छोटी-सी बिटिया बोल उठी। बेटी की आवाज सुनकर कवयित्री को अपने बचपन की वापसी का अनुभव हुआ।
In simple words: जब कवयित्री अपने बचपन को याद कर रही थीं, तब उनकी छोटी बेटी अचानक बोल उठी।
🎯 Exam Tip: यह घटना कविता का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो कवयित्री के बचपन की वापसी का प्रतीक है।
Question 15. कवयित्री की बेटी उसे क्या खिलाने आई थी?
Answer: कवयित्री की बेटी उसे मिट्टी खिलाने आई थी। यह बच्चों की मासूम और स्वाभाविक क्रिया है, जो वात्सल्य भाव जगाती है।
In simple words: कवयित्री की बेटी उसे मिट्टी खिलाने आई थी।
🎯 Exam Tip: बच्चों के खेल-कूद और मासूमियत के ऐसे छोटे-छोटे प्रसंग कविता में वात्सल्य रस का संचार करते हैं।
Question 16. मिट्टी खिलाने आई बेटी की छवि कैसी थी?
Answer: मिट्टी खिलाने आई बेटी का पूरा शरीर खुशी से फूला हुआ था और उसकी मासूम आँखों से उत्सुकता झलक रही थी। वह बहुत प्यारी लग रही थी।
In simple words: बेटी का शरीर खुशी से भरा हुआ था और उसकी आँखों में उत्सुकता साफ दिख रही थी।
🎯 Exam Tip: बच्चों की छवि का वर्णन करते समय उनकी मासूमियत, उत्सुकता और आंतरिक खुशी पर जोर दें।
Question 17. बेटी और माँ के बीच का संवाद हुआ?
Answer: माँ ने बेटी से पूछा, 'यह क्या लाई हो?' और बेटी ने जवाब दिया, 'माँ ! खाओ।' यह संवाद माँ-बेटी के प्यार और मासूमियत को दर्शाता है।
In simple words: माँ ने पूछा 'क्या लाई हो', और बेटी ने कहा 'माँ, खाओ'।
🎯 Exam Tip: संवाद को उद्धृत करते समय, उसके माध्यम से व्यक्त होने वाली भावनाओं को संक्षिप्त में बताएं।
Question 18. कवयित्री को अपना बचपन फिर से कैसे मिला?
Answer: कवयित्री को अपना बचपन उनकी नन्ही-सी बिटिया के रूप में फिर से मिल गया। बेटी की मासूमियत और हरकतें उन्हें अपने बचपन की याद दिलाती थीं।
In simple words: कवयित्री को अपना बचपन अपनी छोटी बेटी में ही वापस मिल गया।
🎯 Exam Tip: यह कविता का केंद्रीय विचार है, जिसमें बेटी की भूमिका कवयित्री के बचपन की वापसी के रूप में दिखाई गई है।
Question 19. बेटी के साथ कवयित्री कैसे समय बिताने लगी?
Answer: कवयित्री अपनी बेटी के साथ बच्ची बनकर खेलती, खाती और तुतलाती बोली में बातें करते हुए अपना समय बिताने लगी। वह बेटी के साथ खुद भी बच्ची जैसी बन जाती थी।
In simple words: कवयित्री अपनी बेटी के साथ बच्ची बनकर खेलती, खाती और तुतलाकर बातें करती थी।
🎯 Exam Tip: बताएं कि कवयित्री ने बेटी के साथ कैसे जुड़कर अपने बचपन की भावना को फिर से महसूस किया।
Question 20. कवयित्री को छोड़कर कौन भाग गया था जो उसे बरसों बाद फिर मिल गया?
Answer: कवयित्री का बचपन जो उसे बरसों पहले छोड़कर चला गया था, वह उसे दोबारा मिल गया था। यह बचपन उसकी बेटी के रूप में वापस आया था।
In simple words: कवयित्री का बचपन जो उन्हें छोड़कर चला गया था, वह उन्हें सालों बाद फिर से मिल गया।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, बचपन को एक ऐसे प्रिय मित्र के रूप में व्यक्त करें जो वापस आ गया हो।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. 'मेरा नया बचपन' कविता का कथ्य क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'मेरा नया बचपन' कविता का कथ्य यह है कि कवयित्री अपने बचपन की सुखद यादों को जवानी की चिंताओं और संघर्षों से तुलना करती हैं। वह अपने बचपन की निश्चिंतता, बेफिक्री और मासूमियत को बहुत याद करती हैं। अंत में, उनकी छोटी बेटी उनके जीवन में आती है और उसकी मासूम हरकतों में कवयित्री को अपना खोया हुआ बचपन फिर से मिल जाता है। इस प्रकार, कविता यह संदेश देती है कि वात्सल्य और बच्चों की मासूमियत हमें जीवन के तनावों से मुक्ति दिलाकर एक बार फिर बचपन का सुख दे सकती है।
In simple words: कविता में कवयित्री अपने बचपन की सुखद यादें बताती हैं और जवानी की परेशानियों से तुलना करती हैं। अंत में, उनकी बेटी के आने से उन्हें अपना खोया बचपन फिर से मिल जाता है।
🎯 Exam Tip: कविता का केंद्रीय विचार (कथ्य) स्पष्ट करते समय, बचपन और जवानी के बीच तुलना और बेटी के माध्यम से बचपन की वापसी के प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।
Question 2. कवयित्री को अपने बचपन की याद बार-बार क्यों आती है?
Answer: कवयित्री को अपने बचपन की कई मीठी यादें जुड़ी हुई हैं। उनके अपने शब्दों में, बचपन उनके जीवन की सबसे अधिक मस्ती भरी खुशी लेकर चला गया था। बचपन में कवयित्री बिना किसी चिंता के खेलती थी और जो मन चाहे खाया करती थी, उसे किसी भी तरह का डर नहीं था। भला ऐसा आनंद से भरा बचपन कोई कैसे भूल सकता है। इसी कारण कवयित्री को अपने बचपन की प्यारी यादें बार-बार आती रहती थीं। वह बचपन की निस्वार्थता और स्वतंत्रता को बहुत महत्व देती हैं।
In simple words: कवयित्री को बचपन की बेफिक्री, मस्ती और निडरता बहुत पसंद थी। जवानी में तनाव बढ़ने पर उन्हें उस आनंद भरे बचपन की याद बार-बार आती है।
🎯 Exam Tip: कवयित्री को बचपन की याद आने के कारणों को स्पष्ट करते समय, उस अवस्था की सकारात्मक विशेषताओं और वर्तमान जीवन की तुलना पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. बचपन में कवयित्री का मन सब प्रकार के भेदभाव से रहित था। इस तथ्य को 'मेरा नया बचपन 'कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: मनुष्य जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है, उसके मन में कई तरह के भेदभाव पैदा होते जाते हैं। लेकिन बचपन इन सभी भेदभावों से ऊपर होता है। कवयित्री भी यही बताती हैं कि वह बचपन में यह जानती ही नहीं थी कि कौन बड़ा है और कौन छोटा। उसे यह भी पता नहीं था कि किसे छूना चाहिए और किसे नहीं। उसे यह भी मालूम नहीं था कि वह झोपड़ी में रह रही है या राजमहल में, या उसके शरीर पर कैसे कपड़े हैं। वह तो अपने मन की रानी बनी हुई थी, किसी भी सामाजिक बंधन से मुक्त। बच्चों का यह स्वाभाविक निस्वार्थ स्वभाव ही उन्हें विशेष बनाता है।
In simple words: कविता के अनुसार, बचपन में कवयित्री का मन किसी भी तरह के भेदभाव (ऊँच-नीच, छुआछूत) से दूर था। उसे अपनी स्थिति की परवाह नहीं थी, वह सिर्फ अपने मन की खुशी से जीती थी।
🎯 Exam Tip: भेदभाव रहित बचपन की अवधारणा को समझाने के लिए, कविता से उदाहरण दें कि कैसे बच्चे सामाजिक भेदों को नहीं समझते।
Question 4. सुभद्रा जी का बचपन कैसे बीता था? 'मेरा नया बचपन' कविता के आधार पर लिखिए।
Answer: सुभद्रा जी के बचपन में उनके माता-पिता, दादा और सभी रिश्तेदारों ने उन्हें खूब प्यार दिया था। वह खूब दूध पीती और उसे उगलती भी थी। अपना अंगूठा चूसने में उन्हें अमृत जैसा स्वाद आता था। उनका रोना और जिद करना सभी को आनंद देता था। जब वह रोती थी, तो माँ सारे काम छोड़कर उसे चुप कराने आ जाती थी और दादा उसे चाँद दिखाते थे। इस तरह उनका बचपन लाड़-प्यार और मस्ती से भरा था।
In simple words: सुभद्रा जी का बचपन लाड़-प्यार, दूध पीने, अंगूठा चूसने और जिद करने में बीता था। परिवार के सभी सदस्य उन्हें खूब प्यार करते थे।
🎯 Exam Tip: बचपन का वर्णन करते समय, परिवार के सदस्यों के प्यार और बच्चों के स्वाभाविक क्रियाकलापों पर ध्यान दें।
Question 5. सुभद्रा जी की माँ और उनके दादा उन पर कैसे लाड़ किया करते थे?
Answer: सुभद्रा जी बचपन में सारे घर की प्यारी बेटी थीं। जब वह कभी रोने लगती थीं, तो उनकी माँ घर के सारे काम छोड़कर आ जाती थीं और तुरंत गोद में उठा लेती थीं। माँ उसके शरीर को साफ करतीं और आँसुओं से गीले गालों को चूमने लगती थीं। इस तरह वह अपने होठों से ही सुभद्रा जी के आँसू पोंछ देती थीं। इसी प्रकार, उनके दादा भी उन्हें बहलाने के लिए गोद में लेकर चाँद दिखाया करते थे।
In simple words: सुभद्रा जी की माँ सारे काम छोड़कर उन्हें गोद में लेकर आँसू पोंछती थीं। उनके दादा उन्हें चाँद दिखाकर प्यार करते थे।
🎯 Exam Tip: माँ और दादा के लाड़-प्यार के तरीकों को विस्तार से बताएं, जो बच्चों के प्रति उनके गहरे स्नेह को दर्शाता है।
Question 6. युवावस्था में प्रवेश करने पर सुभद्रा कुमारी चौहान के हाव-भावों और भावनाओं में क्या अंतर आ गया?
Answer: युवावस्था में प्रवेश करने पर सुभद्रा कुमारी चौहान के हाव-भाव और भावनाओं में काफी अंतर आ गया। बचपन की निश्चिंतता और बेफिक्री की जगह उनके मन में लज्जा, उत्साह और नई जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। उनकी आँखें अब कुछ शरमाई हुई लगने लगीं और मन में एक मीठा-सा उमंग भर गया, जो बचपन की मासूमियत से बिलकुल अलग था।
In simple words: जवानी आने पर सुभद्रा कुमारी चौहान के व्यवहार और सोच में बदलाव आया। बचपन की बेफिक्री की जगह अब उनमें लज्जा और नया उत्साह आ गया था।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में बचपन और युवावस्था के बीच के contrast (अंतर) को स्पष्ट करें, खासकर हाव-भाव और आंतरिक भावनाओं के स्तर पर।
Question 7. छैल-छबीली सुभद्रा जी के मन में कौन-सी पहेली थी? 'मेरा नया बचपन' कविता के आधार पर लिखिए।
Answer: युवती हो जाने के बाद सुभद्रा जी के मन में कई सवाल उठे। वह सोचती थीं कि इतने लोगों के बीच रहते हुए भी उन्हें अकेलेपन का अनुभव क्यों हो रहा है? वह अपने मन की दुविधाएं दूसरों से साझा करने में क्यों हिचकिचा रही थीं? इस पहेली का उन्हें कोई हल नहीं मिल रहा था। यह एक आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है।
In simple words: युवा होने के बाद सुभद्रा जी के मन में यह पहेली थी कि इतने लोगों के बीच रहकर भी वह अकेलापन क्यों महसूस करती हैं और अपनी बातें दूसरों से क्यों नहीं कह पाती हैं।
🎯 Exam Tip: 'पहेली' शब्द का अर्थ स्पष्ट करें और बताएं कि यह कवयित्री के आंतरिक संघर्ष और एकाकीपन को कैसे दर्शाता है।
Question 8. सुभद्रा जी ने अपने बचपन पर क्या आरोप लगाया और क्यों?
Answer: युवावस्था के नए अनुभव सुभद्रा जी के लिए एक पहेली जैसे थे। जब यह पहेली सुलझी तो उन्हें पता चला कि वह अब जवान हो चुकी हैं। जवानी के साथ-साथ नई उलझनें, चुनौतियां और संघर्ष भी उन्हें परेशान करने लगे। उन्हें लगा कि बचपन ने उन्हें जवानी की मुश्किलों में फंसाकर ठग लिया है। सुख के बदले बचपन ने उन्हें संघर्ष भरी जवानी दे दी है।
In simple words: सुभद्रा जी ने बचपन पर आरोप लगाया कि उसने उन्हें जवानी की उलझनों में डालकर उनकी बेफिक्री छीन ली है, क्योंकि उन्हें जवानी का जीवन संघर्ष भरा लगा।
🎯 Exam Tip: 'आरोप' शब्द का प्रयोग यहां प्रतीकात्मक है; इसे बचपन की सरल खुशी की तुलना में जवानी के संघर्षों को उजागर करने के लिए उपयोग करें।
Question 9. सुभद्रा कुमारी जी के मन ने उन्हें किस फंदे में फंसा दिया था? स्पष्ट कीजिए।
Answer: सुभद्रा जी अपने मन से बहुत नाराज थीं क्योंकि उनके मन ने उनके भोले-भाले और मस्त जीवन को छीनकर उन्हें जवानी के मायाजाल में फंसा दिया था। उन्हें नई ताकत और ज्ञान का अनुभव तो हो रहा था, लेकिन बचपन की आजादी और मस्ती की जगह अब जीवन संघर्षों से भर गया था। उन्हें लगा कि यह एक महंगा सौदा था, जिसमें उन्होंने बहुत कुछ खो दिया।
In simple words: सुभद्रा जी के मन ने उन्हें जवानी के संघर्षों और जिम्मेदारियों के जाल में फंसा दिया था। उन्हें लगा कि उन्होंने बचपन की मस्ती और आजादी खो दी है।
🎯 Exam Tip: 'फंदा' का अर्थ स्पष्ट करें और यह बताएं कि यह कैसे बचपन की स्वतंत्रता के विपरीत, जवानी की कठिनाइयों का प्रतीक है।
Question 10. जवानी के झंझटों से घबराकर सुभद्रा जी बचपन से क्या अनुरोध कर रही है? 'मेरा नया बचपन' कविता के आधार पर बताइए।
Answer: जब सुभद्रा जी के सामने जवानी की कठिन सच्चाई आई तो वह बहुत व्याकुल हो उठीं। उन्होंने अपने प्यारे मित्र 'बचपन' से विनती की, 'हे मेरे प्यारे बचपन! तुम एक बार फिर से मेरे जीवन में आ जाओ। अपनी निर्मल शांति और स्वाभाविक आराम से मुझे जवानी की इस थका देने वाली यात्रा से मुक्ति दिला दो। बताओ, क्या तुम फिर से अपनी प्यारी, भोली-भाली सरलता और बेदाग रूप में आकर, मेरे मन के दुख को दूर नहीं कर सकते?'
In simple words: जवानी की परेशानियों से तंग आकर सुभद्रा जी बचपन से प्रार्थना करती हैं कि वह वापस आकर उन्हें निर्मल शांति, स्वाभाविक आराम और बेफिक्र जीवन दे।
🎯 Exam Tip: अनुरोध को स्पष्ट करते समय, कवयित्री की जवानी की पीड़ा और बचपन की आदर्श स्थिति को तुलनात्मक रूप से प्रस्तुत करें।
Question 11. सुभद्रा जी की छोटी-सी कुटिया को किसने और कैसे 'नंदनवन' के समान बना दिया? लिखिए।
Answer: जब सुभद्रा जी जवानी के बोझ से परेशान होकर बचपन को याद कर रही थीं, तभी उनकी नन्ही-सी बिटिया ने अपनी तुतलाती बोली से उन्हें पुकारा। बेटी की मासूमियत और खेल-कूद ने उनकी छोटी-सी कुटिया को स्वर्ग के नंदनवन जैसा खुशहाल बना दिया। बेटी के आने से घर में फिर से खुशियाँ और मस्ती भर गई, जिससे कवयित्री को अपने बचपन की वापसी का अनुभव हुआ।
In simple words: सुभद्रा जी की छोटी-सी कुटिया को उनकी नन्ही बेटी ने अपनी तुतलाती बोली और मासूमियत से 'नंदनवन' जैसा खुशहाल बना दिया, जिससे घर में खुशियाँ लौट आईं।
🎯 Exam Tip: 'नंदनवन' के रूपक को समझाएं और बताएं कि कैसे बच्चों की मासूमियत और वात्सल्य की भावना घर को खुशियों से भर देती है।
Question 13. सुभद्रा कुमारी चौहान को अपना बचपन फिर से कैसे मिला? 'मेरा नया बचपन' कविता के आधार पर लिखिए।
Answer: मिट्टी खिलाने आई बेटी को देखकर कवयित्री को लगा कि उनका अपना बचपन ही एक छोटे बच्चे के रूप में उनके सामने मुस्कुरा रहा है। बचपन ने उनकी पुकार को मान लिया था। वह बेटी का रूप धारण करके सुभद्रा जी के जीवन को फिर से शांत, बेफिक्र और मस्ती भरा बनाने के लिए आ गया था। इस प्रकार, बेटी की मासूमियत और हरकतों में उन्हें अपना खोया हुआ बचपन फिर से मिल गया।
In simple words: सुभद्रा कुमारी चौहान को अपना बचपन अपनी बेटी के रूप में फिर से मिल गया। बेटी की मासूमियत और खेल-कूद ने उनके जीवन में बचपन की शांति और मस्ती वापस ला दी।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में कविता के मुख्य विषय को स्पष्ट करें कि कैसे एक बेटी की उपस्थिति ने कवयित्री को अपने अतीत से फिर से जोड़ा।
Question 14. बेटी के आगमन से सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन में क्या परिवर्तन आ गया? 'मेरा नया बचपन' कविता के आधार पर लिखिए।
Answer: बेटी के आने से सुभद्रा जी का जीवन आनंद से भर गया। बेटी के रूप में बचपन फिर से घर आया, जिसका उन्होंने जी भरकर आनंद लिया। वह बेटी के साथ खेलती और खाती थी, उसी की तरह तुतलाकर बातें करती थी। वह उस बच्ची के साथ खुद भी एक बच्ची जैसी बन जाती थीं। उनके मन में बहुत संतोष का अनुभव हो रहा था। उन्हें जवानी में भी बचपन जैसी स्वतंत्रता और मस्ती का अनुभव हो रहा था। बेटी के आने से उनके जीवन में एक नया उत्साह भर गया था।
In simple words: बेटी के आने से सुभद्रा जी का जीवन खुशियों से भर गया। वह अपनी बेटी के साथ बच्ची बनकर खेलती-खाती और बातें करती थी, जिससे उन्हें बचपन जैसी आजादी और संतोष मिला।
🎯 Exam Tip: बेटी के आगमन को कवयित्री के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में प्रस्तुत करें, जो उनके जीवन को आनंद और बचपन की पुनरावृत्ति से जोड़ता है।
Question 15. यदि सुभद्रा कुमारी चौहान के घर बेटी के बजाय बेटे ने जन्म लिया होता, तो भी क्या उन्हें उतना ही आनंद अनुभव होता? अपना मत लिखिए।
Answer: वैसे तो एक माँ को बेटी या बेटे में कोई फर्क नहीं करना चाहिए, क्योंकि सच यह है कि बेटी के प्रति माँ के हृदय में एक खास जगह होती है। चाहे बेटी हो या बेटा, बच्चों की मासूम हरकतें हर माँ को प्यार से भर देती हैं। लेकिन इस कविता के संदर्भ में थोड़ा अंतर है। क्योंकि सुभद्रा जी ने खुद एक बेटी के रूप में बचपन बिताया था, इसलिए बेटी के रूप में बचपन को देखना उनके लिए ज्यादा स्वाभाविक था। बेटे के रूप में अपने बचपन को स्वीकार करना शायद उनके लिए कुछ मुश्किल लगता। यह एक व्यक्तिगत भावना है, जो माँ के अपने अनुभवों से जुड़ी है।
In simple words: माँ को बेटी या बेटे में फर्क नहीं करना चाहिए, पर कवयित्री के लिए बेटी के रूप में बचपन को देखना ज्यादा स्वाभाविक था, क्योंकि वह खुद एक बेटी थीं। बेटे के रूप में बचपन को स्वीकार करना उनके लिए शायद मुश्किल होता।
🎯 Exam Tip: यह एक राय-आधारित प्रश्न है। अपने उत्तर को कविता के संदर्भ और कवयित्री के व्यक्तिगत अनुभव से जोड़कर प्रस्तुत करें, माँ के वात्सल्य के सार्वभौमिक पहलू को भी ध्यान में रखें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 9 सुभद्रा कुमारी चौहान निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. 'मेरा नया बचपन' का कथ्य क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: कविता हमें यह संदेश देती है कि हमें पूरी उम्र अपने बचपन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाकर रखना चाहिए। हमें एक बड़े बच्चे की तरह रहना चाहिए ताकि हम तनाव-मुक्त, सहज मस्ती और बिना भेदभाव के जीवन का आनंद ले सकें। इस कविता में वात्सल्य की भावना को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है, जहाँ कवयित्री अपनी बेटी में अपना बचपन फिर से पाती हैं। यह कविता हमें सिखाती है कि बच्चों की मासूमियत हमें जीवन के संघर्षों से मुक्ति दिलाकर खुशी दे सकती है।
In simple words: कविता कहती है कि हमें अपने अंदर के बचपन को हमेशा जिंदा रखना चाहिए, ताकि हम तनाव मुक्त और खुशहाल जीवन जी सकें। बेटी के रूप में कवयित्री को अपना बचपन वापस मिलता है, जो वात्सल्य का सुख दिखाता है।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में कविता के मुख्य संदेश, केंद्रीय भाव और उससे मिलने वाली सीख को विस्तार से समझाएं।
सुभद्रा कुमारी चौहान कवयित्री-परिचय
झाँसी की रानी' जैसी जन-मन में स्वतंत्रता की आग जलाने वाली लोकप्रिय रचना की लेखिका कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 ई. में प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ था। आपने अपनी शुरुआती शिक्षा इलाहाबाद में ही पाई थी। पाँच वर्ष की उम्र में ही कविता लिखकर आपने कवयित्री के रूप में अपनी पहचान बना ली थी। सुभद्रा जी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और कई बार जेल भी गईं। सुभद्रा जी ने दो तरह की रचनाएं की हैं- पहली राष्ट्रीय भावनाओं से भरी और दूसरी घरेलू जीवन पर आधारित। उनकी खास बात यह थी कि वे जटिल विषयों को भी सरल भाषा में बता देती थीं। भावों को पूरी तरह से व्यक्त करने के लिए, सही शब्दों का चुनाव करने में वे बहुत कुशल थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान ने कहानियां और निबंध भी लिखे हैं। उनकी कहानियों पर उन्हें दो बार सेकसरिया पुरस्कार भी मिला।
सुभद्रा जी का देहावसान एक मोटर दुर्घटना में सन् 1948 में हो गया।
सुभद्रा कुमारी चौहान कवयित्री पाठ-परिचय
'मेरा नया बचपन' कविता में कवयित्री को अपनी छोटी-सी बेटी को खेलते देखकर अपने बचपन की याद आ जाती है। वह बहुत भावुक होकर अपने बचपन की बातों को याद करने लगती हैं। बचपन में वह कैसे बिना चिंता के खेलती-खाती और घूमती थीं, वे सभी घटनाएं उनके मन में छा जाती हैं। किलकारी मारकर हंसना, कभी मोतियों जैसे आँसू बहाना, कवयित्री को देखकर घर के सभी लोगों का खुश होना आदि बातें उनके सामने स्पष्ट हो जाती हैं।
कुछ बड़े होने पर उनके व्यवहार में बदलाव आने लगे। वह लजाने लगीं। मन में एक नई भावना उठने लगी। लेकिन बचपन से उनका बिछोह उन्हें बहुत भारी पड़ा। जवानी के झंझटों ने उन्हें घेर लिया। अब कवयित्री चाहती थीं कि उनका बचपन उन्हें फिर मिल जाए। कवयित्री की यह इच्छा उनकी पुत्री के रूप में फिर से पूरी हो गई। बेटी की तुतलाती बातों ने उन्हें उनका खोया बचपन फिर लौटा दिया।
काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ-
Question 1. बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥
Answer:
संदर्भ तथा प्रसंग: प्रस्तुत काव्यांश कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'मेरा नया बचपन' से लिया गया है। इस अंश में कवयित्री को अपने बचपन की मीठी यादें आ रही हैं।
व्याख्या: कवयित्री कहती हैं कि उन्हें अपने बचपन की मधुर यादें बार-बार आती रहती हैं। उन्हें लगता है कि बचपन के चले जाने के साथ ही उनके जीवन से सारी मस्ती और खुशी भी चली गई है। बचपन में वह बिना किसी चिंता के खेलती और खाया करती थी। वह बिना किसी डर के घूमती थी। भला उस अनोखे बचपन के आनंद को कैसे भूला जा सकता है। उस समय उनके लिए न कोई ऊँचा था न कोई नीचा।
आज की तरह उनके मन में किसी के प्रति भेदभाव का भाव भी नहीं था। उस समय वह खुद को एक झोपड़ी और पुराने कपड़ों में पली-बढ़ी रानी से कम नहीं समझती थीं। यह बच्चों के आत्म-संतोष को दर्शाता है।
विशेष:
(i) कवयित्री ने इन पंक्तियों में बचपन की निर्भीकता, मस्ती और स्वतंत्रता का सच्चा चित्र प्रस्तुत किया है।
(ii) कवयित्री ने संकेत दिया है कि बच्चों के मन में ऊँच-नीच और छुआछूत जैसी कोई भावना नहीं होती। ये सभी बातें तो बड़ों के संकुचित मन में ही रहती हैं।
(iii) 'झोपड़ी और चीथड़ों की रानी' कथन द्वारा कवयित्री ने बाल मनोविज्ञान में अपनी गहरी समझ दिखाई है।
(iv) भाषा बहुत सरल है। कहने का तरीका भावुकता से भरा है।
(v) "बनी हुई...चीथड़ों में रानी" में कहावत का प्रयोग और उपमा का सौंदर्य है। कवयित्री ने यहाँ बचपन की तुलना एक अनुपम खजाने से की है जो खो गया है।
In simple words: कवयित्री को बचपन की मीठी यादें आती हैं। वह कहती हैं कि बचपन ने उनकी सबसे बड़ी खुशी छीन ली है। बचपन में वह बेफिक्र और बिना भेदभाव के रहती थीं, खुद को रानी मानती थीं।
🎯 Exam Tip: काव्यांश की व्याख्या करते समय, 'संदर्भ-प्रसंग' और 'व्याख्या' के बाद 'विशेष' बिंदुओं को स्पष्ट रूप से बताएं, जो कविता के शिल्प और भाव सौंदर्य को उजागर करते हैं।
Question 2. किए दूध के कुल्ले मैंने चूस अँगूठा सुधा पिया। किलकारी किल्लोल मचाकर, सूना घर आबाद किया॥ रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिलाते थे। बड़े-बड़े मोती से आँसू जयमाला पहनाते थे॥ मैं रोई, माँ काम छोड़ कर आई, मुझको उठा लिया। झाड़-पोंछ कर चूम-चूम, गीले गालों को सुखा दिया॥
Answer:
संदर्भ तथा प्रसंग: प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'मेरा नया बचपन' से लिया गया है। इस अंश में कवयित्री ने बच्चों के प्यारे खेलों का एक सजीव चित्र प्रस्तुत किया है।
कठिन शब्दार्थ: दूध के कुल्ले = बच्चों द्वारा दूध को मुँह से बाहर निकालना। किलकारी = छोटे बच्चों की खुशी भरी आवाज। किल्लोल = बच्चों के खेल। आबाद = भरा-पूरा। जयमाला = जीत की माला, बच्चों के रोने से अपनी बात मनवा लेना। सुखा दिया = (आँसू) होठों से पोंछ डाले।
व्याख्या: जब कभी कवयित्री रोने लगती थीं तो उनकी माँ घर के सारे काम छोड़कर तुरंत आकर उन्हें गोद में भर लेती थीं और उनके आँसू से भीगे गालों को अपने होठों से चूम-चूमकर ही सुखा दिया करती थीं। कवयित्री बचपन की ऐसी हरकतों को याद करती हैं जब वह दूध के कुल्ले करती, अंगूठा चूसती, किलकारी मारकर खेलती और रो-रोकर अपनी बातें मनवा लेती थीं। उनके आँसू भी माँ के लिए मोतियों जैसे थे, जो प्यार से पोंछ दिए जाते थे। माँ का यह व्यवहार उनके बचपन के सुखद क्षणों को दर्शाता है।
In simple words: कवयित्री बचपन की यादें साझा करती हैं जब वह दूध के कुल्ले करती, अंगूठा चूसती, खेलती और रोती थीं। उनकी माँ सारे काम छोड़कर उन्हें प्यार से चुप कराती और आँसू पोंछती थीं।
🎯 Exam Tip: यह व्याख्या करते समय, बच्चों की मासूम गतिविधियों को वात्सल्य रस के साथ जोड़कर बताएं। कठिन शब्दों का अर्थ भी स्पष्ट करें।
Question 3. दादा ने चंदा दिखलाया, नैन नीर-युत दमक उठे।
धुली हुई मुस्कान देखकर, सबके चेहरे चमक उठे।
वह सुख का साम्राज्य छोड़कर, मैं मतवाली बड़ी हुई।
लुटी हुई कुछ ठगी हुई सी, दौड़ द्वार पर खड़ी हुई॥
लाज भरी आँखें थी मेरी, मन में उमंग रँगीली थी।
तान रसीली थी कानों में, मैं चंचल छैल छबीली थी॥
Answer: कवयित्री कहती हैं कि जब वे बचपन में रोती थीं, तो उनके दादाजी उन्हें चाँद दिखाकर चुप कराते थे। इससे उनकी आँसुओं से भरी आँखों में खुशी आ जाती थी और वे मुस्कुराने लगती थीं। उनकी मासूम मुस्कान देखकर घर के सभी लोग खुश हो जाते थे। धीरे-धीरे कवयित्री का बचपन बीत गया और वे बड़ी हो गईं, उन्हें लगा कि उनका बचपन, जो खुशियों से भरा साम्राज्य था, उनसे छिन गया है। अब वे अपने मन में एक चंचलता और उत्साह महसूस करती थीं और घर के बाहर की दुनिया को देखने के लिए उत्सुक रहती थीं। यह दर्शाता है कि बचपन कैसे शुद्ध आनंद और मासूमियत लाता है, जो बड़े होने पर बदल जाता है।
In simple words: कवयित्री बताती हैं कि बचपन में दादाजी उन्हें चाँद दिखाकर चुप कराते थे। बड़े होने पर उन्हें लगा कि उनका खुशियों भरा बचपन खो गया है। अब वे बड़ी हो गई थीं और बाहर की दुनिया को देखने के लिए उत्सुक रहती थीं।
🎯 Exam Tip: जब कविता की पंक्तियों की व्याख्या करें, तो हर पंक्ति का सरल अर्थ बताएँ और फिर पूरे पद का भाव स्पष्ट करें।
Question 4. दिल में एक चुभन सी थी, यह दुनिया अलबेली थी।
मन में एक पहेली थी, मैं सबके बीच अकेली थी।
मिला, खोजती थी जिसको, हे बचपन! ठगा दिया तूने।
अरे! जवानी के फंदे में, मुझको हँसा दिया तूने॥
माना, मैंने, युवाकाल का जीवन खूब निराला है।
आकांक्षा, पुरुषार्थ, ज्ञान का उदय मोहने वाला है।
Answer: कवयित्री बताती हैं कि जवानी में कदम रखते ही उनकी भावनाएँ बदलने लगीं। उनके मन में एक अजीब सी बेचैनी उठने लगी। जवानी की दुनिया उन्हें अनोखी और आकर्षक लगी, पर उनके मन में जीवन को लेकर कई सवाल और जिज्ञासाएँ थीं। उन्हें महसूस हुआ कि इतने सारे अपनों के बीच भी वे अकेली थीं और अपनी भावनाओं को किसी से साझा नहीं कर पा रही थीं। कवयित्री को लगा कि बचपन ने उन्हें धोखा दिया है और जवानी के मोहक जाल में फँसा दिया है। हालांकि, जवानी का समय नया अनुभव, इच्छाओं, कोशिशों और ज्ञान से भरा होता है और यह सचमुच मन को मोह लेने वाला होता है। बचपन की मासूमियत से जवानी की उलझनों में बदलना अक्सर उत्साह और बीते हुए समय की यादों का मिश्रण लेकर आता है।
In simple words: कवयित्री को जवानी में आकर मन में बेचैनी महसूस हुई। उन्हें लगा कि जवानी ने उन्हें अकेला कर दिया है और बचपन ने उन्हें ठगा है। जवानी का समय इच्छाओं और ज्ञान से भरा तो होता है, पर इसमें कई सवाल भी उठते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी कविता की व्याख्या करते समय, कवि की भावनाओं को सरल शब्दों में व्यक्त करें और बताएं कि वह क्या महसूस कर रहे हैं।
Question 5. किन्तु यह झंझट भारी, युद्ध क्षेत्र संसार बना।
चिंता के चक्कर में पड़ कर, जीवन भी है भार बना॥
आजा बचपन एक बार फिर, दे दे अपनी निर्मल शांति।
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली, वह अपनी प्राकृत विश्रांति॥
वह भोली सी मधुर सरलता, वह प्यारा जीवन निष्पाप।
क्या आकर फिर मिटा सकेगा, तू मेरे मन का संताप।
Answer: कवयित्री स्वीकार करती हैं कि युवावस्था में नई इच्छाएँ, पुरुषार्थ और ज्ञान बढ़ते हैं, पर इस उम्र में कई बड़ी मुश्किलें भी आती हैं। इस दौर में सांसारिक जीवन चुनौतियों और संघर्षों से भरा युद्धक्षेत्र जैसा लगता है। युवावस्था में नई जिम्मेदारियों के आने से मन चिंतित रहता है और जीवन कभी-कभी बोझ-सा लगने लगता है। जवानी की इन परेशानियों से घबराकर कवयित्री बचपन को याद करती हैं। वे कहती हैं, "हे मेरे प्यारे बचपन! तुम एक बार फिर से आ जाओ और मेरे चिंता भरे जीवन को अपनी शुद्ध शांति से भर दो।" वे चाहती हैं कि बचपन वापस आकर उनके मन की सारी व्याकुलता और कष्ट दूर कर दे। यह एक सामान्य मानवीय भावना को दर्शाता है कि जब वयस्क जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता है तो बचपन के चिंतामुक्त दिनों में लौटने की इच्छा होती है।
In simple words: कवयित्री को जवानी का जीवन परेशानियों और संघर्षों से भरा लगता है। वे अपने बचपन की शुद्ध शांति, स्वाभाविक आराम और मासूम सरलता को वापस बुलाती हैं ताकि उनके मन का दुख दूर हो सके।
🎯 Exam Tip: जब कोई कवि अपनी पिछली अवस्था (जैसे बचपन) को याद करता है, तो उसके कारणों और वर्तमान स्थिति से तुलना पर ध्यान दें।
Question 6. मैं बचपन को बुला रही थी, बोल उठी बिटिया मेरी॥
नंदन वन-सी फूल उठी, वह छोटी-सी कुटिया मेरी॥
माँ ओ! कहकर बुला रही थी, मिट्टी खाकर आई थी।
कुछ मुँह में, कुछ लिए हाथ में, मुझे खिलाने आई थी।
Answer: जब कवयित्री अपने बचपन को वापस आने के लिए बुला रही थीं, तभी उनकी छोटी बेटी ने अचानक "ओ माँ" कहकर आवाज दी। कवयित्री ने अचानक बेटी की ओर देखा तो उसे देखती ही रह गईं। बेटी के बोलने से उनका छोटा सा घर खुशियों से भर गया, जैसे स्वर्ग का नंदनवन खिल उठा हो। बेटी मिट्टी खाकर आई थी। उसके मुँह में और हाथों में थोड़ी मिट्टी लगी हुई थी, जिसे वह अपनी माँ को खिलाने आई थी। मिट्टी चखने की रोमांचक खुशी उसके पूरे शरीर पर दिख रही थी और उसकी आँखों में मासूम जिज्ञासा थी। उसका चेहरा खुशी से लाल था और उसे शायद अपने इस "मिट्टी खाने" के काम पर बहुत गर्व हो रहा था। बच्चे के मासूम कार्य और साधारण पुकार अक्सर हमारे अपने खोए हुए आनंद और बचपन की सादगी को फिर से जगा देते हैं।
In simple words: कवयित्री जब बचपन को याद कर रही थीं, तब उनकी बेटी ने "माँ ओ!" कहकर पुकारा। बेटी मिट्टी खाकर आई थी और अपनी माँ को भी खिलाने लगी। उसकी मासूमियत देखकर कवयित्री का घर खुशी से भर गया।
🎯 Exam Tip: बाल-मनोविज्ञान से संबंधित कविता में, बच्चे की मासूम हरकतों और उनके पीछे की भावनाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है।
Question 7. मैंने पूछा, यह क्या लायी? बोल उठी वह 'माँ काओ'।
हुआ प्रफुल्लित हृदय खुशी से, मैंने कहा तुम्हीं खाओ॥
पाया मैंने बचपन फिर से, बचपन बेटी बन आया।
उसकी मंजुल मूर्ति देखकर, मुझमें नवजीवन आया।
मैं भी उसके साथ खेलती-खाती हूँ, तुतलाती हूँ।
मिलकर उसके साथ स्वयं मैं भी बच्ची बन जाती हूँ॥
जिसे खोजती थी बरसों से, अब जाकर उसको पाया।
भाग गया था मुझे छोड़कर, वह बचपन फिर से आया॥
Answer: कवयित्री ने अपनी बेटी से पूछा कि वह क्या लाई है, तो बेटी ने अपनी तोतली आवाज में जवाब दिया, "माँ! खाओ।" यह सुनकर कवयित्री का हृदय खुशी से भर गया और उन्होंने बेटी से कहा, "तुम ही खाओ।" कवयित्री को महसूस हुआ कि उन्हें अपना बचपन फिर से मिल गया है, क्योंकि उनका बचपन ही उनकी बेटी के रूप में वापस आ गया था। बेटी की प्यारी और सुंदर छवि देखकर उनमें एक नई जान आ गई। अब वे भी अपनी बेटी के साथ खेलती-खाती हैं और तुतलाती हैं। उनके साथ रहकर वे खुद भी एक छोटी बच्ची बन जाती हैं। वह बचपन, जिसे वे इतने सालों से ढूँढ रही थीं, अब उन्हें अपनी बेटी के रूप में वापस मिल गया है, जो उन्हें छोड़कर चला गया था। यह संवाद दर्शाता है कि कैसे अपने बच्चे के प्रति प्यार किसी के भीतर के भूले हुए हिस्सों, खासकर बचपन की मासूमियत को फिर से जगा सकता है।
In simple words: कवयित्री ने बेटी से पूछा कि वह क्या लाई है, तो बेटी ने "माँ खाओ" कहा। यह सुनकर कवयित्री बहुत खुश हुईं और उन्हें लगा कि उनका बचपन बेटी के रूप में वापस आ गया है। वे भी बेटी के साथ बच्ची बनकर खेलती और तुतलाती हैं।
🎯 Exam Tip: यह पद वात्सल्य रस का सुंदर उदाहरण है। जब माँ और बच्चे के बीच का संवाद हो, तो उनकी भावनाओं और आपसी प्रेम को स्पष्ट करें।
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