RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 3 निर्वासित (कहानी)

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RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. 'निर्वासित' कहानी की कहानीकार है -
(क) दीपबाला
(ख) वीरबाला
(ग) सूर्यबाला
(घ) राजबाला
Answer: (ग) सूर्यबाला
In simple words: 'निर्वासित' कहानी सूर्यबाला ने लिखी है। उन्होंने कहानी में समाज के एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया है।

🎯 Exam Tip: लेखक और उनकी रचनाओं के नाम याद रखना बहुत ज़रूरी है क्योंकि ये अक्सर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

 

RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 3 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. माँ जी बच्चों को सुलाने के लिए कौन-सी कहानी सुनाती थी?
Answer: माँ जी बच्चों को सुलाने के लिए 'ढाका' और 'बंगाली कौआ' की कहानी सुनाती थीं। यह कहानी बच्चों को बहुत पसंद आती थी।
In simple words: माँ जी बच्चों को सुलाने के लिए 'ढाका' और 'बंगाली कौआ' की कहानी सुनाती थीं।

🎯 Exam Tip: कहानियों के मुख्य पात्रों और घटनाओं को याद रखें, खासकर वे जो बच्चों के बचपन से जुड़ी हों।

 

Question 2. 'निर्वासित' कहानी की प्रारंभ की पंक्तियाँ कौन-से भावों को अभिव्यक्त करती हैं?
Answer: कहानी की शुरुआत की पंक्तियाँ एक बूढ़े पति-पत्नी की गहरी उदासी और दर्द को दिखाती हैं। वे अपने अकेलेपन और निराशा को दर्शाती हैं।
In simple words: कहानी की पहली पंक्तियाँ बूढ़े पति-पत्नी के गहरे दुख और दर्द को दिखाती हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी कहानी के शुरुआती और अंतिम भावों पर ध्यान दें, क्योंकि वे कहानी के मुख्य संदेश को बताते हैं।

 

Question 3. बाबूजी के दोनों बेटों के क्या नाम थे?
Answer: बाबूजी के दोनों बेटों के नाम राजेन और रनधीर थे। उनके बेटे ही उनके जीवन का आधार थे।
In simple words: बाबूजी के दो बेटे थे, उनके नाम राजेन और रनधीर थे।

🎯 Exam Tip: कहानी के सभी मुख्य पात्रों और उनके संबंधों को स्पष्ट रूप से याद रखना चाहिए।

 

RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. बड़े बेटे राजेन के पास जाने को लेकर पड़ोसियों ने क्या कहा?
Answer: राजेन के रिटायर होने के बाद, वह डेढ़ साल तक अपने माता-पिता को पैसे भेजता रहा। फिर एक दिन उसने उन्हें अपने पास आकर रहने के लिए बुलाया। यह बात जब पड़ोसियों को पता चली, तो उन्होंने पति-पत्नी को राजेन के पास रहने के कई फायदे बताए और उन्हें वहाँ जाने के लिए राजी किया। पड़ोसियों ने उनके सामने कई बातें रखीं। लेकिन उनकी एक पड़ोसिन ने उन्हें वहाँ न जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि "सब सुख एक तरफ, और अपना स्वाभिमान एक तरफ।" इस तरह, पड़ोसियों ने उन्हें बड़े बेटे के पास जाने और न जाने दोनों के बारे में समझाया। समाज में ऐसी सलाह देना आम बात है जब कोई बड़ा फैसला लेना हो।
In simple words: जब बड़े बेटे राजेन ने अपने माता-पिता को अपने पास बुलाया, तो पड़ोसियों ने उन्हें वहाँ जाने के फायदे और नुकसान दोनों बताए। एक पड़ोसिन ने उन्हें अपना स्वाभिमान बनाए रखने की सलाह दी।

🎯 Exam Tip: प्रश्नों के उत्तर देते समय, विभिन्न विचारों या पक्षों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है, खासकर जब राय मांगी गई हो।

 

Question 2. पड़ोसियों की राय के विपरीत बूढ़ी दरोगानी ने क्या विचार व्यक्त किये?
Answer: पड़ोसियों की अलग-अलग राय के बावजूद, बूढ़ी दरोगानी ने एक अलग विचार रखा। उन्होंने कहा कि माता-पिता को केवल इसलिए नहीं जाना चाहिए क्योंकि बेटा पैसा भेजता है। उन्होंने तर्क दिया कि बेटों को अपने माता-पिता का ध्यान खुद से रखना चाहिए, चाहे वे कहीं भी रहें। दरोगानी ने कहा कि माता-पिता का सम्मान उनके साथ रहने से ही बढ़ता है, न कि उन्हें दूर भेजने से। उनका मानना था कि अपना घर और अपनी आज़ादी सबसे महत्वपूर्ण होती है, चाहे कितने भी अच्छे रिश्ते हों।
In simple words: बूढ़ी दरोगानी ने कहा कि माता-पिता को बेटों के पैसे पर नहीं निर्भर रहना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि अपना सम्मान और घर सबसे ज़रूरी है, बेटों को माता-पिता का ध्यान रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के विरोधी या वैकल्पिक विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें और बताएं कि वे क्यों अलग हैं।

 

Question 3. 'निर्वासित' कहानी में निहित कहानीकार का उद्देश्य क्या है?
Answer: 'निर्वासित' कहानी एक ऐसे बूढ़े दंपत्ति के दुख को बताती है जो अपने पढ़े-लिखे बेटे-बहू के साथ रहते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वे कहीं और रह रहे हों। कहानीकार दिखाना चाहती है कि कैसे एक जोड़ा अपनी आज़ादी छोड़ देता है और अपने बहू-बेटे की मर्जी के अनुसार जीने लगता है। उन्हें इस वजह से बहुत दर्द होता है। कहानी में यह भी दिखाया गया है कि बेटे अपनी माँ-बाप की भावनाओं को समझे बिना उन्हें आपस में बांट लेते हैं। कहानीकार का मुख्य उद्देश्य इस तरह के दर्द और अकेलेपन की भावना को सामने लाना है जो ऐसी 'निर्वासित' ज़िंदगी जीने से होती है। यह कहानी हमें बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता सिखाती है।
In simple words: कहानीकार का उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे बूढ़े माँ-बाप अपने बेटे-बहू के साथ रहते हुए भी अकेला महसूस करते हैं। बेटों द्वारा उनकी भावनाओं को समझे बिना उन्हें बांटने का दर्द कहानी का मुख्य विषय है।

🎯 Exam Tip: कहानी के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताएं और कहानी की मुख्य घटनाओं और पात्रों से जोड़कर समझाएं।

 

RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 3 निबंधात्मक प्रश्नोत्तर

 

Question 1. पठित कहानी के आधार पर निर्वासित' कहानी की कथावस्तु अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: जेठ की तेज़ गर्मी वाली दोपहर में, राजेन की माँ ने खिड़की बंद की और पुराने दिनों को याद करने लगीं। उन्हें याद आया जब उनके बेटे राजेन और रनधीर छोटे थे। तब घर और बच्चों की देखभाल में उन्हें फुर्सत नहीं मिलती थी। अब यह दोपहर काटना मुश्किल लगता था। उन्होंने चुपचाप अपने काम निपटाए और बैठक में गईं जहाँ बाबूजी सो रहे थे। उन्होंने उनका चश्मा और किताब हटाई, तो वे जाग गए।
बाबूजी के जागने पर उन्होंने उनसे चाय के लिए पूछा और रसोई में चाय बनाने गईं। तभी उनके हाथ से तेल की बोतल फिसलकर गिर गई जिससे उनके बहू-बेटे, राजेन और रीमा जाग गए। रीमा ने माँ के चाय बनाने पर ताना मारा, जिससे माँ को दुख हुआ। वे अपने काम में लग गए। राजेन की माँ फिर पुराने दिनों को सोचने लगी जब रिटायर होने के बाद राजेन ने उन्हें अपने पास बुलाया था। यहाँ आकर वे पहले तो राजेन को अधिकार से बुलाते थे, पर धीरे-धीरे शांत हो गए।
बेटे-बहू ने उनके पूजा-पाठ और बाकी कामों पर भी रोक लगा दी। वे उनके मिलने-जुलने और बातें करने पर भी मज़ाक उड़ाते थे। इसी बीच, छोटा बेटा रनधीर भी आ गया। वह कुछ दिन रहा, सब साथ हंसे-बोले। सब ठीक चल रहा था, तभी एक दिन बाबूजी ने माँ से कहा कि वे छोटे बेटे के साथ रहने जा रहे हैं। माँ जी पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। बाबूजी भी दर्द सह रहे थे, पर उनकी आँखें सब कुछ कह रही थीं। उन्हें लगा जैसे उन्हें किसी अपराध की सज़ा मिल रही हो।
In simple words: कहानी में राजेन की माँ पुरानी यादों में खो जाती हैं, जब उनके बेटे छोटे थे। अब उन्हें अपने बेटे राजेन के घर में बहू के ताने और बेटों द्वारा बांटे जाने का दर्द झेलना पड़ता है। छोटा बेटा रनधीर भी आता है, पर आखिर में माँ-बाप को फिर अलग होना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी कहानी की कथावस्तु लिखते समय, मुख्य घटनाओं को क्रम से बताएं और पात्रों की भावनाओं को भी शामिल करें, जिससे कहानी का सार स्पष्ट हो सके।

 

Question 2. 'निर्वासित' कहानी के कथा शिल्प पर अपने विचार लिखिए।
Answer:
शीर्षक – कहानी का शीर्षक 'निर्वासित' कहानी के कथानक, उसके पूरे भाव और उद्देश्य को साफ-साफ बताता है। कहानी के सभी भाव बूढ़े दंपत्ति के अकेलेपन और दुखों पर आधारित हैं। शीर्षक ही बताता है कि कहानी किस बारे में है।
पात्र संयोजन – कहानी के मुख्य पात्र बूढ़े पति-पत्नी और उनके बेटे-बहू हैं। पौत्री, पड़ोसी और जमना जैसे छोटे पात्र भी हैं। कहानी मुख्य रूप से बूढ़े दंपत्ति और बड़े बेटे-बहू के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में मुख्य पात्रों का चयन बहुत अच्छा है।
संवाद गठन – कहानी के संवाद छोटे और पात्रों के हिसाब से हैं। सूर्यबाला की संवाद योजना बहुत असरदार, गंभीर और गहरी है, जैसे:
- सुनो मैं जा रहा हूँ छोटे के साथ
- कब?
- कल।
- क्यों
- कुछ नहीं, यों ही... काफी दिन हो गए यहाँ रहते। थोड़ा घूम-फिर आना चाहिए।
- मुझे भी तो यहाँ रहते।
- मैं आ जाऊँगा, तब तुम जाओगी।
संवादों से कहानी में जान आ जाती है।
भाषा – शैली – लेखिका सूर्यबाला ने हालात और पात्रों के हिसाब से भाषा शैली का इस्तेमाल किया है। इस कहानी में लेखिका ने व्यंग्य और भावपूर्ण शैली का प्रयोग किया है। इससे भाषा कहीं तीखी और कहीं बहुत भावुक हो जाती है। संवादों के सही चुनाव से कहानी में नाटकपन भी आता है। भाषा सरल और समझने में आसान है।
देशकाल और वातावरण – कहानी में गाँव के आम जीवन से शहरी और आधुनिक जीवन शैली और उनके प्रभावों का साफ-साफ वर्णन है। इस कहानी में अकेलेपन से उपजे दुख से पाठकों को परिचित कराया गया है। इस उद्देश्य के लिए लेखिका ने परिस्थितियों का खास मेल-मिलाप किया है। यह कहानी हमारे समाज की सच्चाई दिखाती है।
उद्देश्य – यह कहानी बूढ़े दंपत्ति द्वारा अपनी इच्छाओं को दबाने और बेटे-बहू के अनुसार खुद को ढालने के दुख और कष्टों को लेखिका ने बहुत अच्छे से दिखाया है। इस कहानी के माध्यम से बड़े-बुजुर्गों की पीड़ा को समझना और उनसे प्यार भरा व्यवहार रखने की सीख मिलती है। यह भी सीख मिलती है कि बुढ़ापे में उन्हें अलग नहीं करना चाहिए। इस प्रकार कहानी का सार और शिल्प दोनों ही बेजोड़ हैं, भाषा आसान और भावों को अच्छे से बताती है। कहानी का अंत दुख भरा है।
In simple words: 'निर्वासित' कहानी का शीर्षक, पात्र, संवाद, भाषा और वातावरण सब कहानी के उद्देश्य को पूरा करते हैं। यह कहानी बूढ़े माँ-बाप के दुख को बहुत अच्छे से दिखाती है और समाज को बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश देती है।

🎯 Exam Tip: कथा शिल्प का विश्लेषण करते समय, कहानी के अलग-अलग तत्वों जैसे शीर्षक, पात्र, संवाद, भाषा और उद्देश्य को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएं।

 

Question 3. वर्तमान सन्दर्भों में 'निर्वासित' कहानी की प्रासंगिकता सिद्ध कीजिए।
Answer: आज के समय में, 'निर्वासित' कहानी बहुत मायने रखती है। जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को बड़ा किया, वही बच्चे उन्हें अपने साथ रखने में मुश्किल महसूस करते हैं। अगर वे साथ रखते भी हैं, तो अक्सर उनकी भावनाओं का मजाक उड़ाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि बूढ़े दंपत्ति आपस में बात करना तो दूर, अपने सुख-दुख भी बांट नहीं पाते। जिस समय उन्हें सबसे ज़्यादा बातें करनी चाहिए, उस समय उनके बीच खामोशी आ जाती है। वे बच्चों के सामने एक-दूसरे से प्यार जताना और बात करना भी हिचकिचाते हैं। बच्चे उन्हें ऐसे अलग कर देते हैं, जैसे उन्होंने कोई गलती की हो। आजकल अगर दो बेटे हैं, तो वे अलग-अलग माता-पिता को रखते हैं।
वे कुछ समय बाद उनकी अदला-बदली कर लेते हैं। अपनी सुख-सुविधाओं में वे उनके कष्टों को भूल जाते हैं। उन्हें लगता है कि अगर सारी सुविधाएं दे दी जाएं, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इस तरह, वर्तमान समय में यह कहानी पूरी तरह से सही बैठती है। कहानी में भी ऐसे ही बूढ़े पति-पत्नी के दुख का वर्णन है, जिन्हें उनके बेटे आपस में बांटकर अलग कर देते हैं। उनकी भावनाओं को दबा दिया जाता है और उनके स्वभाव-आदतों पर मज़ाक किया जाता है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे समाज में नैतिक मूल्य कम हो रहे हैं और परिवार टूट रहे हैं।
In simple words: 'निर्वासित' कहानी आज के समाज में बहुत प्रासंगिक है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे बच्चे अपने बूढ़े माता-पिता को बोझ समझते हैं, उन्हें बांट देते हैं और उनकी भावनाओं का अनादर करते हैं। यह कहानी परिवार के टूटते रिश्तों और नैतिक मूल्यों की गिरावट को उजागर करती है।

🎯 Exam Tip: किसी कहानी की प्रासंगिकता बताते समय, उसे वर्तमान सामाजिक मुद्दों और वास्तविक जीवन की स्थितियों से जोड़कर समझाना चाहिए।

 

Question 4. अपनों के मध्य वानप्रस्थ जीवन जीने वाले दम्पत्ति की पीड़ा, संत्रास तथा घुटन की करुण कहानी है। 'निर्वासित'। पठित कहानी के आधार पर उक्त कथन को समझाइये।
Answer: प्रस्तुत कहानी में बूढ़े पति-पत्नी कहने को तो अपने बड़े बेटे और बहू के साथ रहते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें अकेला और 'निर्वासित' जीवन जीना पड़ता है। वे अपनी सारी इच्छाओं को दबा देते हैं और खुद को बेटे-बहू के हिसाब से ढालने की कोशिश करते हैं। सब कुछ होने के बाद भी वे घुटन भरा जीवन जीते हैं। छोटी-सी गलती पर भी उन्हें अपमानित और नीचा दिखाया जाता है। उनके बेटे-बहू उनकी भावनाओं को समझे बिना, उनके एक-दूसरे के प्रति प्यार और लगाव का मज़ाक उड़ाते हैं, उन पर ताने कसते हैं। बच्चों द्वारा उन पर तरह-तरह के नियम लगाए जाते हैं। उन्हें बात-बात पर रोका-टोका जाता है और 'बूढ़े-बुजुर्ग' कहकर बुलाया जाता है।
बच्चों का यह व्यवहार उन्हें बहुत दुख पहुँचाता है। बच्चों के ऐसे व्यवहार के कारण यह दंपत्ति आपस में अपने सुख-दुख बांटने की तो बात दूर, पास बैठकर बात करने में भी झिझकते हैं, जिससे उनके साथ रहते हुए भी अकेलापन महसूस होता है। वे हर पल यह दर्द सहते हैं। एक-दूसरे के साथ समय बिताने की चाह, झिझक में बदल जाती है। उनके साथ रहना और बात करना बच्चों को 'आधुनिक' नहीं लगता।
स्थिति यहाँ तक बिगड़ जाती है कि वे दोनों अपने पुराने घर जाने की चाह पूरी करने में भी खुद को लाचार पाते हैं। बच्चे किसी न किसी बात पर उन्हें ताने कसते रहते हैं, जो उन्हें बहुत बुरा लगता है। फिर भी वे अपने मन की बात एक-दूसरे से नहीं कह पाते और मन ही मन घुटन सहते रहते हैं। यही नहीं, उनके दोनों बेटे उन्हें आपस में बांट देते हैं, जो उनके लिए असहनीय दुख होता है। इस तरह यह बूढ़ा दंपत्ति अपनों के साथ रहते हुए भी अकेला, दुखी और घुटन भरी ज़िंदगी जीते हैं। यह दिखाता है कि कैसे बुजुर्गों को अपनी ही परिवार में अजनबी बना दिया जाता है।
In simple words: 'निर्वासित' कहानी में बूढ़े माता-पिता अपने बेटों के साथ रहते हुए भी अकेलापन, घुटन और दुख महसूस करते हैं। वे अपनी इच्छाएं दबाते हैं, अपमान सहते हैं और बच्चों के नियमों के कारण आपस में भी खुलकर बात नहीं कर पाते। अंत में, बेटों द्वारा उन्हें बांटा जाना सबसे बड़ा दर्द देता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे भावनात्मक विषयों पर लिखते समय, पात्रों की भावनाओं, उनके अनुभवों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 1. लाखेका ने किन शब्दों में पाठ का परिचय दिया है? लिखिए।
Answer: 'निर्वासित' कहानी में, लेखिका ने कहा है कि यह एक बूढ़े दंपत्ति की दर्द भरी कहानी है जो अपना घर छोड़कर बड़े बेटे के घर रहने आए हैं। उन्हें अपनी आज़ादी को छोड़कर अपने बेटे और बहू की इच्छाओं, पसंद और विचारों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। यह उनके लिए बहुत घुटन भरा और दर्दनाक होता है। पति-पत्नी, जो एक-दूसरे के पूरक थे और जिनके सुख-दुख समान थे, उन्हें अलग करके दोनों बेटों के बीच बांटा जाना बहुत कष्टदायी और मन को चोट पहुँचाने वाला था। यह विभाजन उन्हें बहुत परेशान करता है।
In simple words: लेखिका ने 'निर्वासित' कहानी को एक बूढ़े दंपत्ति की दर्द भरी कहानी बताया है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे उन्हें अपनी आज़ादी छोड़नी पड़ती है और बेटों द्वारा बांटा जाना उनके लिए बहुत दुखदायी होता है।

🎯 Exam Tip: जब पाठ के परिचय के बारे में पूछा जाए, तो मुख्य लेखक के शब्दों और कहानी के सार को सटीक रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 2. लेखिका ने पाठ में दोपहरी का कैसा वर्णन किया है? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: लेखिका ने दोपहरी का वर्णन करते हुए बताया कि जेठ की दोपहर में झुलसाने वाली लू के कारण यूक्लिप्टस और केजुरीना के पेड़ों की पत्तियां सिकुड़ गई हैं। गुलाब की क्यारियों की मिट्टी सूखकर फट रही है। लॉन में चारों तरफ सूखे पत्ते बिखरे पड़े हैं। गर्म और सूखी हवा कमरे और बरामदे से होती हुई खिड़की से अंदर आ रही है। जेठ-बैसाख की दोपहर ऐसी ही सुनसान और वीरान लगती है। यह वर्णन गर्मी और अकेलेपन के माहौल को दिखाता है।
In simple words: लेखिका ने बताया है कि जेठ की दोपहर में तेज़ लू चल रही थी, जिससे पेड़ों की पत्तियां सिकुड़ गई थीं और मिट्टी फट गई थी। चारों तरफ सूखे पत्ते बिखरे थे और गर्म हवा आ रही थी। दोपहर बिल्कुल सुनसान थी।

🎯 Exam Tip: किसी स्थान या समय के वर्णन में, पांचों इंद्रियों (देखना, सुनना, सूंघना, छूना, स्वाद लेना) से संबंधित शब्दों का प्रयोग करें ताकि वर्णन सजीव लगे।

 

Question 3. खिड़की के पास खड़ी वह (राजेन की माँ) क्या सोचने लगीं?
Answer: खिड़की से आती गर्म हवा को रोकने के लिए खिड़की बंद करने के बाद, राजेन की माँ खिड़की के पास खड़ी-खड़ी उस समय की जेठ और बैसाख की दोपहर के बारे में सोचने लगीं, जब उनके दोनों बेटे छोटे थे। उस समय भी दोपहर इतनी ही लंबी होती थी, लेकिन उन्हें बच्चों के पीछे भागने, संभालने से फुर्सत नहीं मिलती थी। दो मिनट आराम करने का भी समय नहीं मिलता था। उन्हें पता ही नहीं चलता था कि दोपहर कब बीत जाती थी। यह उनकी पुरानी व्यस्त और अब की खाली ज़िंदगी का फर्क दिखाता है।
In simple words: खिड़की बंद करने के बाद राजेन की माँ को अपने बेटों के बचपन की याद आ गई। उन्हें याद आया कि तब वे कितनी व्यस्त रहती थीं और दोपहर कब बीत जाती थी, पता भी नहीं चलता था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के विचारों या भावनाओं को समझाते समय, उनके अतीत और वर्तमान के अनुभवों की तुलना करें ताकि गहराई स्पष्ट हो सके।

 

Question 4. दोपहर में अपना समय काटने के लिए वह क्या-क्या काम करती हैं?
Answer: दोपहर में अपना समय काटने के लिए वह अपनी पोथी (किताब) निकालकर पढ़ने लगीं। कुछ देर तक पाठ गुनगुनाने के बाद उन्होंने अपनी साड़ी उतारी और धीरे-धीरे उसे तह करने लगीं। फिर उन्होंने अपने बटुए से अपनी माला निकाली और माला फेरने लगीं। बैठे-बैठे उनकी कमर में दर्द होने लगा, तो वे लेट गईं और उन्हें पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई। इस प्रकार, वे कभी कुछ, कभी कुछ काम करके अपना समय बिताने की कोशिश करती रहती थीं। यह दिखाता है कि उनके पास खाली समय कितना ज़्यादा था।
In simple words: दोपहर में अपना समय बिताने के लिए वह किताब पढ़ती थीं, साड़ी तय करती थीं और माला फेरती थीं। जब थक जातीं, तो सो जाती थीं।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के दैनिक कार्यों का वर्णन करते समय, उन कार्यों को उसके आंतरिक मनःस्थिति से जोड़ें।

 

Question 5. दोपहर में ऐसी कौन-सी घटना हुई जिससे उनके बेटे वे बहू की नींद खुल गई?
Answer: दोपहर में जब राजेन की माँ को नींद नहीं आई, तो वह बैठक में पहुँची जहाँ राजेन के बाबूजी किताब पढ़ते-पढ़ते सो गए थे। उनकी किताब और चश्मा हटाने के बाद, माँ जी चाय बनाने रसोई में गईं। तभी स्टोव में तेल डालते समय मिट्टी के तेल की बोतल उनके हाथ से फिसलकर नीचे गिर गई। बोतल गिरने की आवाज़ से उनके बेटे और बहू की नींद खुल गई। यह एक छोटी सी घटना थी, पर इसका बड़ा असर हुआ।
In simple words: दोपहर में राजेन की माँ से रसोई में मिट्टी के तेल की बोतल गिर गई। इस आवाज़ से उनके बेटे और बहू की नींद खुल गई।

🎯 Exam Tip: कहानी में किसी महत्वपूर्ण घटना को स्पष्ट रूप से बताएं और उसके तात्कालिक प्रभाव को भी समझाएं।

 

Question 6. माँ जी झेंपकर पूजा वाले कमरे की ओर क्यों चली गईं?
Answer: माँ जी के हाथ से मिट्टी के तेल की बोतल गिरने की आवाज़ से उनके बेटे-बहू की नींद खुल गई थी। वे दोनों अपने कमरे में बूढ़े दंपत्ति के प्यार भरे संबंधों और उनके द्वारा किए जा रहे कामों का मज़ाक उड़ा रहे थे। यह सब सुनकर माँ जी का चाय बनाने का उत्साह कम हो गया। वे चुपचाप बैठक की ओर जा रही थीं, तभी उन्हें राजेन और बहू के ज़ोर से हंसने की आवाज़ सुनाई दी। यह सुनकर माँ जी को बहुत शर्म आई और वे पूजा वाले कमरे की ओर चली गईं। वे अपनी भावनाओं को छुपाना चाहती थीं।
In simple words: माँ जी के हाथ से तेल की बोतल गिरने के बाद, जब उन्होंने अपने बेटे-बहू को मज़ाक उड़ाते सुना, तो उन्हें बहुत शर्मिंदगी हुई और वे पूजा वाले कमरे में चली गईं।

🎯 Exam Tip: पात्रों के व्यवहार के पीछे के भावनात्मक कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएं, खासकर जब उनके कार्य शर्मिंदगी या दुख से प्रेरित हों।

 

Question 7. इतना अखबार उन्होंने जीवन में कभी नहीं पढ़ा था जितना पिछले ढाई सालों में। इसका क्या कारण था?
Answer: राजेन के रिटायर होने के डेढ़ साल बाद ही पिताजी को राजेन ने अपने पास रहने के लिए बुला लिया था। यहाँ आकर उनके पास कोई और काम नहीं था। वे अपना ज़्यादातर समय अखबार पढ़कर ही बिताया करते थे। यही वजह है कि लेखिका ने कहा कि उन्होंने जीवन में इतना अखबार कभी नहीं पढ़ा था जितना पिछले ढाई सालों में। खालीपन और व्यस्तता की कमी इस बात का मुख्य कारण थी।
In simple words: रिटायर होने के बाद, राजेन के पिताजी के पास कोई काम नहीं था, इसलिए वे अपना ज़्यादातर समय अखबार पढ़ने में बिताते थे। यही कारण था कि उन्होंने पिछले ढाई सालों में बहुत अखबार पढ़े।

🎯 Exam Tip: किसी विशेष कथन या टिप्पणी के पीछे के कारण को स्पष्ट करें और उसे कहानी के संदर्भ से जोड़कर बताएं।

 

Question 8. एक दिन बहू ने उन्हें समझाते हुए क्या कहा?
Answer: एक दिन उनकी बहू ने बहुत ही प्यार से उन्हें समझाते हुए कहा, "माँ जी, बाबूजी से कहिएगा कि इतनी ज़ोर से पाठ न किया करें।" उसने कहा कि वह घर पहले की बात थी, यहाँ आसपास सभी सरकारी अधिकारी रहते हैं। उसने यह भी कहा कि भगवान तो सब जगह हैं, और कबीरदास ने भी कहा है कि मस्जिद से अज़ान देने की क्या ज़रूरत है, क्या खुदा बहरा है? उसने सलाह दी कि वे और बाबूजी मन ही मन में पूजा कर लिया करें, क्योंकि इससे बाकी लोगों को गुस्सा आता है। यह उनकी आधुनिक सोच को दिखाता है।
In simple words: बहू ने माँ जी से धीरे से कहा कि बाबूजी से कहें कि ज़ोर से पाठ न करें, क्योंकि आसपास सभी अधिकारी रहते हैं और इससे लोगों को गुस्सा आता है। उसने मन में पूजा करने की सलाह दी।

🎯 Exam Tip: संवादों को हू-ब-हू याद रखने की बजाय, उनके मुख्य संदेश और पात्रों के इरादों को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. आप लोग भी चाहें तो बैठे, बाबूजी! राजेन के इस कथन में क्या संकेत छिपा हुआ था?
Answer: खाना खाने के बाद राजेन ने रनधीर को बात करने से रोका। माँ और बाबूजी भी वहीं उनके पास बैठे थे, जिससे वे सब आपस में खुलकर बात करने में असहज महसूस कर रहे थे। राजेन उन्हें सीधे तौर पर उठकर जाने के लिए कहना ठीक नहीं समझा। इसलिए राजेन ने इशारे में कहा कि "आप लोग भी चाहें तो बैठे", जिसका मतलब था कि आप लोग भी उठकर अपने-अपने कमरे में चले जाएं। यह उनकी असुविधा को दर्शाता है।
In simple words: राजेन ने इशारे में अपने माता-पिता से कहा कि वे चाहें तो बैठ सकते हैं, जिसका असली मतलब था कि उन्हें उठकर अपने कमरे में चले जाना चाहिए। वह उन्हें सीधा जाने को नहीं कह पा रहा था।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के शब्दों के पीछे छिपे अर्थ और उसके अप्रत्यक्ष संकेत को पहचानें और समझाएं।

 

Question 10. बाहर उनके दोनों बेटे और बड़ी बहू किस बात पर खिलखिलाकर हँस रहे थे?
Answer: बाहर उनके दोनों बेटे और बड़ी बहू बूढ़े दंपत्ति के आपस में प्यार भरे संबंध और उनके द्वारा किए जा रहे कामों का मज़ाक उड़ा रहे थे। वे इस बात पर खिलखिलाकर हँस रहे थे कि माँ जी चाय बनाने के लिए रसोई में गई थीं। वे बूढ़े लोगों को 'बुजुर्ग' कहकर पुकार रहे थे और उन्हें काम बढ़ाने वाला बता रहे थे। यह उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
In simple words: दोनों बेटे और बहू, बूढ़े माता-पिता के आपस के प्यार और उनके कामों पर मज़ाक उड़ाकर हंस रहे थे, खासकर माँ जी के चाय बनाने पर।

🎯 Exam Tip: पात्रों के नकारात्मक व्यवहार का वर्णन करते समय, उनके कार्यों के पीछे की मानसिकता और उसके प्रभाव को भी बताएं।

 

Question 11. राजेन की माँ का मन पूजा करने में क्यों नहीं लग रहा था?
Answer: राजेन की माँ जब पूजा कर रही थीं, तब डाइनिंग रूम से बाबूजी की अपने बच्चों के साथ हंसने और बातें करने की आवाज़ें आ रही थीं। उनका ध्यान पूजा में नहीं लग रहा था। उनका मन उन्हीं लोगों पर लगा हुआ था। वे आज बहुत खुश और आज़ाद महसूस कर रहे थे और बच्चों की बातों का खूब आनंद ले रहे थे। इससे भी ज़्यादा खुशी उन्हें अपने बेटों के मुँह से 'बाबूजी' शब्द सुनकर हो रही थी। इन सब बातों के कारण पूजा करते हुए भी वे बीते समय को याद करने लगीं, जब उनके बेटे जीतकर आने की बातें अपने पिता को सुनाते थे। यह खुशी और पुरानी यादें उनके मन को शांत नहीं होने दे रही थीं।
In simple words: राजेन की माँ का मन पूजा में इसलिए नहीं लग रहा था, क्योंकि उन्हें डाइनिंग रूम से बाबूजी और बच्चों की हंसने-बोलने की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। बाबूजी का बेटों के साथ खुश देखना और 'बाबूजी' शब्द सुनना उन्हें पुरानी यादों में ले जा रहा था।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र की आंतरिक मनःस्थिति और उसके कार्यों पर बाहरी प्रभावों को समझाते समय, भावनात्मक गहराई को दर्शाएं।

 

Question 12. ऐसी क्या बात हुई जिसने उन दोनों को अन्दर तक झकझोर दिया?
Answer: डाइनिंग रूम से अंदर आकर बाबूजी ने उन्हें अपने छोटे बेटे रनधीर के साथ उसके घर जाने की बात बताई। उन्होंने कहा कि वे वहाँ अकेले जाएंगे और उन्हें (राजेन की माँ को) बड़े बेटे के पास रहना होगा। इस अचानक बात ने उन दोनों को अंदर तक हिला दिया। एक-दूसरे के बिना रहने की कल्पना ने ही उन्हें अंदर से तोड़ दिया। वहाँ दोनों के बीच खामोशी थी, लेकिन वे साथ तो थे। यह उनके लिए असहनीय दुख था। इस बात ने उन्हें बहुत अकेला महसूस कराया।
In simple words: बाबूजी ने राजेन की माँ को बताया कि वे छोटे बेटे रनधीर के घर जा रहे हैं और माँ जी को बड़े बेटे के पास रहना होगा। इस बात ने उन दोनों को अंदर से तोड़ दिया, क्योंकि उन्हें एक-दूसरे से अलग होने का दर्द सता रहा था।

🎯 Exam Tip: कहानी के मोड़ या महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन करते समय, पात्रों पर उनके भावनात्मक प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

RBSE Class 12 Hindi मंदाकिनी Chapter 3 निबंधात्मक प्रश्नोत्तर

 

Question 1. बुजुर्गों का परिवार में क्या महत्त्व है? वर्तमान समय में उनकी भयावह स्थिति पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: परिवार में बूढ़े लोगों को बुजुर्ग कहते हैं, चाहे वे हमारे माता-पिता हों या दादा-दादी। परिवार के बुजुर्ग घर की नींव के पत्थर की तरह होते हैं, जिस पर परिवार का महल टिका रहता है। हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं। बुजुर्गों की उम्र और उनके अनुभव परिवार के दूसरे सदस्यों से बहुत ज़्यादा होते हैं, जिनकी ज़रूरत परिवार को हर कदम पर पड़ती है। उनकी मौजूदगी परिवार को हमेशा चिंता और तनाव से दूर रखती है। वे परिवार को मार्गदर्शन देते हैं।
हमारे देश में सदियों से संयुक्त परिवार की परंपरा को महत्व दिया जाता रहा है। समाज में प्रचलित रीति-रिवाजों और परंपराओं की जानकारी हमें परिवार के बड़े-बुजुर्गों से ही मिलती है। अगर परिवार में बुजुर्ग न हों, तो हमें कई रीति-रिवाजों के बारे में पता ही नहीं चलेगा। सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम भी परिवार के बुजुर्ग ही करते हैं। परिवार के छोटे बच्चों की देखभाल करने से लेकर बड़े सदस्यों को सलाह देने का काम भी बुजुर्ग ही करते हैं। वे घर को जोड़े रखते हैं।
लेकिन आज की आधुनिक समस्याएं-शहरों का बढ़ना, छोटे घर और सिकुड़ती सोच ने बुजुर्गों को अकेला और 'निर्वासित' जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है। घर के बूढ़े दंपत्ति या तो अकेले जीवन जीते हैं, या उनकी संतान उन्हें आपस में बांट लेती है। उन्हें अपनी ज़रूरतों, इच्छाओं और भावनाओं को सीमित करना पड़ता है। उन्हें लगता है कि वे सिर्फ़ मौत का इंतज़ार कर रहे हैं।
In simple words: बुजुर्ग परिवार की नींव होते हैं और अपनी उम्र और अनुभव से परिवार को दिशा देते हैं। वे हमारी संस्कृति के संरक्षक भी हैं। लेकिन आज के आधुनिक समय में, छोटे घर और बदलती सोच के कारण बुजुर्ग अकेलापन और उपेक्षा झेलते हैं। उन्हें अक्सर अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है या उन्हें बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: बुजुर्गों के महत्व को बताते हुए, उनके विभिन्न योगदानों (सांस्कृतिक, भावनात्मक, मार्गदर्शक) को स्पष्ट करें और फिर वर्तमान चुनौतियों से उनकी तुलना करें।

 

Question 2. वृद्ध माता-पिता के प्रति संतान के दायित्वों का वर्णन कीजिए।
Answer: इंसान का जीवन कई उतार-चढ़ावों से भरा होता है। वह बचपन से लेकर बुढ़ापे तक कई अनुभवों से गुज़रता है। अपने जीवन में वह कई तरह के काम और जिम्मेदारियां निभाता है। लेकिन अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को वह जीवन भर नहीं चुका सकता। माता-पिता से संतान को जो कुछ मिलता है, वह अनमोल है। माँ का प्यार और पिता का अनुशासन किसी भी इंसान के व्यक्तित्व को बनाने में सबसे खास भूमिका निभाते हैं। इसलिए संतान का यह कर्तव्य है कि हम अपनी मेहनत और लगन से अच्छे काम करें, जिससे हमारे माता-पिता का नाम रोशन हो।
हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे हमारे माता-पिता को लोगों के सामने शर्मिंदा होना पड़े। आज की दुनिया में, शादी के बाद युवा अपनी स्वार्थ में इतना डूब जाते हैं कि वे अपने बूढ़े माता-पिता की सेवा करना तो दूर, उनकी उपेक्षा करना शुरू कर देते हैं। यह वास्तव में निंदनीय काम है। उनके कर्मों और संस्कारों का असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ता है। यही कारण है कि समाज में नैतिक मूल्य कम हो रहे हैं। टूटते घर-परिवार और समाज, सभी इसी अलगाववादी सोच के बुरे नतीजे हैं।
इसलिए, इंसान को जीवन भर अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों को निभाना चाहिए। माता-पिता की सेवा ही सच्ची सेवा है। उनकी सेवा से बढ़कर कोई और पुण्य काम नहीं है। हमारे माता-पिता हमारी खुशियों और तरक्की के लिए अपनी सारी खुशियों का त्याग तक कर देते हैं। इसलिए यह हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है कि हम उन्हें पूरा सम्मान दें और जहाँ तक हो सके, उन्हें खुशियां दें।
In simple words: माता-पिता के प्रति संतान का कर्तव्य है कि उन्हें हमेशा सम्मान दे, उनकी सेवा करें और ऐसा कोई काम न करें जिससे उन्हें शर्मिंदगी हो। माता-पिता का त्याग अनमोल है, इसलिए बच्चों को हमेशा उनकी खुशियों का ध्यान रखना चाहिए, खासकर आज के समय में जहां नैतिक मूल्य घट रहे हैं।

🎯 Exam Tip: संतान के कर्तव्यों का वर्णन करते समय, माता-पिता के त्याग और बच्चों की नैतिक जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 3. बुजुर्गों के प्रति युवा पीढ़ी (वर्ग) का क्या नजरिया होता है? युवा वर्ग और बुजुर्गों की सोच और व्यवहार में अंतर भी स्पष्ट करें। इस अंतर को किस प्रकार दूर किया जा सकता है?
Answer: हर संतान की सफलता या असफलता और उसके व्यक्तित्व के निर्माण में माता-पिता का योगदान बहुत अहम होता है। अगर संतान की सफलता का श्रेय माता-पिता को मिलता है, तो उसके चरित्र के पतन या व्यक्तित्व के विकास में बाधा के लिए भी माता-पिता ही जिम्मेदार होते हैं। लेकिन आज का युवा वर्ग अलग तरीके से सोचता है। वह सफलता का श्रेय सिर्फ अपनी मेहनत और लगन को देता है और असफलता के लिए बुजुर्गों को जिम्मेदार ठहराता है। आज के युवाओं के लिए बुजुर्ग घर में रखी मूर्ति जैसे होते हैं, जिन्हें बस दो वक्त की रोटी, कपड़े और दवा-दारू की ज़रूरत होती है।
युवाओं की नज़र में बुजुर्ग लोग अपना जीवन जी चुके होते हैं, उनकी ज़रूरतें, इच्छाएं और भावनाएं सीमित होती हैं, और अब उन्हें सिर्फ मौत का इंतज़ार होता है। आज का युवा अपने बुजुर्ग के तानाशाही स्वभाव के आगे झुकना नहीं चाहता। सिर्फ बुजुर्ग होने के कारण उनकी अतार्किक बातों को मानना उसके लिए असहनीय होता है।
इस अंतर को दूर करने के लिए हमें बुजुर्गों को शर्तों के आधार पर नहीं रखना चाहिए। उन्हें संतान के दुख में भागीदार बनना चाहिए, न कि उनके दोष गिनाना चाहिए। परिवार में मुश्किल के समय में सही सलाह देने से बुजुर्गों का सम्मान बढ़ता है और परिवार में उनकी भूमिका अहम हो जाती है। उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है और वे खुद को परिवार पर बोझ नहीं समझते। युवाओं को यह समझना होगा कि बुजुर्गों का अनुभव और ज्ञान उनके लिए फायदेमंद है। दोनों पीढ़ियों को एक-दूसरे की बात सुननी चाहिए और सम्मान करना चाहिए।
In simple words: आज के युवा बुजुर्गों को घर की मूर्ति जैसा समझते हैं, जिनकी केवल बुनियादी ज़रूरतें पूरी होनी चाहिए। वे बुजुर्गों की बातों को तानाशाही मानते हैं। इस अंतर को दूर करने के लिए युवाओं को बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए, उनकी सलाह सुननी चाहिए और उन्हें परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समझना चाहिए, ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो।

🎯 Exam Tip: युवा और बुजुर्ग पीढ़ी के बीच के मतभेदों को स्पष्ट रूप से समझाएं और उन्हें दूर करने के लिए व्यावहारिक सुझाव दें।

 

Question 4. हमें बुजुर्गों के प्रति कैसा रवैया अपनानी चाहिए? निर्वासित' पाठ के आधार पर अपने विचार लिखिए।
Answer: माता-पिता हमेशा अपनी संतान को खुश और सफल देखना चाहते हैं। वे उनके विकास और अच्छे जीवन के लिए अपना सब कुछ त्याग देते हैं। इसके उलट, वही संतान उन्हें बोझ समझती है। वे घर की किसी वस्तु या संपत्ति की तरह उन्हें बांट देती है। उनकी भावनाओं और इच्छाओं का अपमान करती है। इस कहानी में भी पति-पत्नी ने बच्चों के पालन-पोषण में अपनी दिन-रात की शांति और आराम खोया, उन्हें जीवन में सफल बनाया। उन्हीं बेटों ने उन्हें तब बांटा जब उन्हें उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी। यह दंपत्ति अपने परिवार के साथ रहते हुए भी हमेशा 'निर्वासित' होने का दर्द सहते रहे, लेकिन कभी शिकायत नहीं की।
जब उन्हें आपस में बैठकर सबसे ज़्यादा समय बिताना चाहिए था, तब बेटे-बहू के तानों और मज़ाक के कारण उन्होंने आपस में बात करना भी बंद कर दिया। उनके दोनों बेटों ने अपनी सुविधा के हिसाब से उन्हें बांट लिया, लेकिन इस बात पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया कि उनके इस फैसले से उनके बूढ़े माता-पिता को कितना गहरा दुख पहुंचा। यह बहुत गलत व्यवहार है। संतान को चाहिए कि वह अपने बुजुर्गों के प्रति बहुत संवेदनशील रहे। उनकी भावनाओं को समझे, न कि उनका मज़ाक उड़ाए और उनके साथ बैठकर समय बिताए।
हमें अपने अनुभवों को उनके साथ बांटना चाहिए और उनके अनुभवों को अपनी ज़रूरत के हिसाब से ढालकर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए। इस उम्र में माता-पिता को अपनी संतान के प्यार और अपनेपन के साथ-साथ एक-दूसरे के साथ की भी ज़रूरत होती है। इसलिए संतान को कभी भी उन्हें एक-दूसरे से अलग करके जीवन जीने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए, क्योंकि यही वह समय होता है जब वे बीते समय की मधुर यादों को फिर से जीते हैं। इसलिए हमें अपने माता-पिता से प्यार और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि कभी भी उनके दुख का कारण न बनें।
In simple words: हमें बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील और प्यार भरा रवैया अपनाना चाहिए। हमें उनकी भावनाओं को समझना चाहिए, उनका सम्मान करना चाहिए और उन्हें कभी अकेलापन महसूस नहीं कराना चाहिए। उन्हें परिवार का एक अहम हिस्सा मानना चाहिए और उनके अनुभवों से सीखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: बुजुर्गों के प्रति सही व्यवहार का वर्णन करते समय, सम्मान, संवेदनशीलता, प्रेम और समर्थन जैसे मूल्यों पर जोर दें।

 

Question 5. 'निर्वासित' कहानी की लेखिका 'सूर्यबाला' का जीवन-परिचय लिखिए।
Answer: हिन्दी कहानी की सशक्त लेखिका सूर्यबाला का जन्म 25 अक्टूबर 1943 को उत्तरप्रदेश के बनारस में हुआ था। इनके अब तक 150 से ज़्यादा उपन्यास, कहानियां और व्यंग्य आदि प्रकाशित हो चुके हैं। इनका पहला उपन्यास 'मेरे सन्धि पत्र' सन् 1975 ई. में प्रकाशित हुआ। जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों को गहराई से समझने वाली लेखिका के पास गांधीवादी सोच है। उनकी रचनाएं समाज को आईना दिखाती हैं।
In simple words: सूर्यबाला एक प्रसिद्ध हिन्दी लेखिका हैं, जिनका जन्म 1943 में बनारस में हुआ था। उन्होंने 150 से ज़्यादा उपन्यास, कहानियां और व्यंग्य लिखे हैं। उनका पहला उपन्यास 'मेरे सन्धि पत्र' 1975 में आया था। उनकी सोच गांधीवादी है।

🎯 Exam Tip: किसी भी लेखक का जीवन-परिचय लिखते समय, उनके जन्म स्थान, जन्म तिथि, प्रमुख रचनाएं और उनकी साहित्यिक विशेषताओं को संक्षेप में बताएं।

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