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Detailed Chapter 3 रहीम RBSE Solutions for Class 12 Hindi
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Class 12 Hindi Chapter 3 रहीम RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. रहीम के काव्य की सर्वाधिक प्रमुख विशेषता क्या है -
(अ) सामासिकता
(ब) श्रृंगारिकता
(स) नीति प्रवणता
(द) अनुभव संकुलता।
Answer: (अ) सामासिकता
In simple words: रहीम के काव्य में कई छोटे-छोटे शब्दों का मेल होता है, जिससे वे अपनी बात कम शब्दों में कह पाते हैं। उनका तरीका ऐसा है कि बड़ी बात भी आसानी से समझ आ जाती है।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही विकल्प का चुनाव करते समय, कवि की मुख्य शैलीगत विशेषताओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. काज परे कछ और है, काज सरै कछु और। रहिमन भंवरी के भए, नदी सिरावत मौर॥ प्रस्तुत दोहे के माध्यम से रहीम जी ने मनुष्य की किस प्रवृत्ति का वर्णन किया है? समझाइए।
Answer: रहीम जी ने इस दोहे में मनुष्य के स्वार्थी स्वभाव के बारे में बताया है। जब व्यक्ति को किसी से कोई काम होता है, तो वह उसे बहुत आदर देता है। लेकिन जैसे ही उसका काम पूरा हो जाता है, वह उस व्यक्ति या वस्तु को छोड़ देता है या उसका महत्व कम कर देता है। यह दिखाता है कि लोग अपने फायदे के लिए ही संबंध बनाते हैं।
In simple words: रहीम कहते हैं कि लोग अपने काम के समय किसी और तरह से पेश आते हैं और काम पूरा होने के बाद बदल जाते हैं। वे सिर्फ अपने फायदे के लिए लोगों का उपयोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: दोहे की व्याख्या करते समय, उसमें निहित नैतिक शिक्षा या मानवीय स्वभाव की विशेषता को सरल शब्दों में स्पष्ट करें।
Question 2. कवि के अनुसार बुरे स्वभाव वाले व्यक्ति कैसे अच्छे स्वभाव वाले व्यक्तियों की प्रवृत्ति को बदल नहीं पाते? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवि रहीम ने बताया है कि बुरे स्वभाव वाले लोग अच्छे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रकृति को नहीं बदल पाते। उन्होंने चंदन के पेड़ और जहरीले सांपों का उदाहरण दिया है। जैसे सांप चंदन के पेड़ से लिपटे रहते हैं, लेकिन चंदन अपनी शीतलता नहीं छोड़ता। इसी तरह, बुरे लोगों की संगति से भी सज्जन व्यक्ति के अच्छे स्वभाव पर कोई असर नहीं पड़ता। यह सज्जनता की ताकत को दर्शाता है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि बुरे लोग अच्छे लोगों का स्वभाव नहीं बदल सकते। जैसे सांप चंदन से लिपटा रहता है, फिर भी चंदन अपनी ठंडक नहीं छोड़ता।
🎯 Exam Tip: उदाहरण वाले प्रश्नों में, उदाहरण को स्पष्ट रूप से समझाना और यह बताना कि वह मुख्य बात को कैसे सिद्ध करता है, जरूरी है।
Question 3. रहीम जी ने सज्जन व्यक्ति के रूठ जाने पर भी बार-बार मनाने की बात क्यों कही है।
Answer: रहीम जी के अनुसार, एक अच्छा इंसान मोतियों के हार की तरह कीमती होता है। जैसे मोतियों का हार बार-बार टूट जाने पर भी उसे फेंका नहीं जाता, बल्कि हर बार फिर से पिरोया जाता है। इसी तरह, यदि कोई सज्जन व्यक्ति सौ बार भी रूठ जाए, तो उसे बार-बार मनाना चाहिए क्योंकि उनकी मित्रता बहुत अनमोल होती है और उन्हें खोना बुद्धिमानी नहीं है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि अच्छे इंसान को बार-बार मनाना चाहिए, चाहे वे कितनी भी बार रूठें। वे मोतियों के हार जैसे अनमोल होते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में तुलनात्मक उदाहरण का सही अर्थ समझाना और उससे मिलने वाली शिक्षा को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होता है।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. " थोथे बादर क्वार के........... पाछिली बात" प्रस्तुत दोहे का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस दोहे में रहीम जी ने क्वार (आश्विन) महीने के खाली बादलों की बात की है। क्वार मास में बादल केवल गरजते हैं, बरसते नहीं हैं क्योंकि उनमें पानी नहीं होता। यह उनकी पुरानी (पिछली) भारी वर्षा की याद दिलाता है। रहीम ने इन बादलों की तुलना उन धनहीन व्यक्तियों से की है जो पहले अमीर थे, लेकिन अब नहीं हैं। वे केवल अपनी पुरानी अमीरी की बातें करके वर्तमान स्थिति पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं।
In simple words: रहीम कहते हैं कि क्वार के बादल बिना पानी के सिर्फ गरजते हैं, बरसते नहीं। वे उन लोगों जैसे हैं जो अपनी पिछली अमीरी की बातें करते हैं, लेकिन अब उनके पास कुछ नहीं है।
🎯 Exam Tip: दोहे की व्याख्या करते समय, उसे आज के जीवन से जोड़कर समझाना और उसके प्रतीकात्मक अर्थ को उजागर करना प्रभावी होता है।
Question 3. रहीम ने अपने मन की व्यथा अपने मन तक ही सीमित रखने को क्यों कहा है?
Answer: रहीम ने कहा है कि मनुष्य को अपने मन की पीड़ा को अपने अंदर ही छिपाकर रखना चाहिए। उनका मानना है कि अगर आप अपनी दुख-भरी बातें दूसरों को बताएंगे, तो कोई आपकी मदद करने नहीं आएगा। बल्कि लोग आपकी बात सुनकर हंसी उड़ाएंगे और आपका मजाक बनाएंगे। इससे आपका दुख कम होने की बजाय और बढ़ जाएगा। इसलिए मन की व्यथा को अपने तक ही सीमित रखना समझदारी है।
In simple words: रहीम ने मन की व्यथा को अपने तक ही रखने को कहा है। क्योंकि दूसरे लोग आपका दुख बांटेंगे नहीं, बल्कि उस पर हँसेंगे और आपका मजाक उड़ाएंगे।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में कवि के विचार को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें और उसके पीछे के तर्क को भी समझाएं।
Question 4. “माँगे घटत रहीम पद .तऊ बावनै नाम।” । प्रस्तुत दोहे का कथन स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस दोहे में रहीम जी ने यह बात स्पष्ट की है कि माँगने या याचना करने से व्यक्ति का सम्मान और पद कम हो जाता है। इसके लिए उन्होंने भगवान विष्णु के वामन अवतार का उदाहरण दिया है। जब विष्णु ने बलि से तीन पग धरती मांगी थी, तो इतने विशाल काम करने के बाद भी उन्हें 'वामन' (बौना) नाम से जाना गया। यह दर्शाता है कि माँगने से किसी का भी महत्व घट जाता है, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो। इसलिए व्यक्ति को अपना स्वाभिमान नहीं छोड़ना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि किसी से कुछ माँगने पर व्यक्ति का सम्मान घट जाता है। भगवान विष्णु ने भी वामन रूप में माँगकर अपना पद छोटा कर लिया था।
🎯 Exam Tip: पौराणिक उदाहरणों का उल्लेख करते समय, घटना का संक्षिप्त और सटीक वर्णन करना तथा उसे मूल विचार से जोड़ना आवश्यक है।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम व्याख्यात्मक प्रश्न
Question 1. "मान सहित विष खाय.............राहु कटायो सीस॥ दोहे की सप्रसंग व्याख्या कीजिए। (संकेत- छात्र 'सप्रसंग व्याख्याएँ' शीर्षक के अंतर्गत इस दोहे की व्याख्या का अवलोकन करें और स्वयं व्याख्या लिखें)
🎯 Exam Tip: व्याख्यात्मक प्रश्नों में दोहे का मूल भाव, संदर्भ और कवि की शैली का विस्तार से वर्णन करना चाहिए।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 2. भाँवरें पड़ने के बाद नदी में सिरा देते हैं -
(क) हवन घी भस्म को
(ख) दूल्हे के मौर को
(ग) कंगनों को
(घ) पूजन सामग्री को।
Answer: (ख) दूल्हे के मौर को
In simple words: शादी में दूल्हे के सिर पर एक खास मुकुट जैसा पहनाया जाता है जिसे मौर कहते हैं। शादी खत्म होने और फेरे पड़ने के बाद उसे नदी में बहा देते हैं, क्योंकि अब उसका काम पूरा हो गया है।
🎯 Exam Tip: दोहे में दिए गए उदाहरण के मुख्य बिंदु को पहचानें और उससे संबंधित विकल्प का चुनाव करें।
Question 3. 'काक और पिक' की पहचान होती है -
(क) वर्षा ऋतु में
(ख) वसंत ऋतु में
(ग) शरद ऋतु में
(घ) शीत ऋतु में।
🎯 Exam Tip: कविताओं में प्रयुक्त प्रतीकों को समझें; 'काक' (कौआ) और 'पिक' (कोयल) की तुलना अक्सर उनके स्वभाव को दर्शाती है।
Question 4. मथने पर मक्खन नहीं निकलता
(क) ठंडे दूध से
(ख) गर्म दूध से
(ग) फटे दूध से
(घ) मीठे दूध से।
🎯 Exam Tip: सामान्य ज्ञान और मुहावरों पर आधारित प्रश्नों में, सबसे उपयुक्त और तार्किक विकल्प का चयन करें।
Question 5. जीभ की वकबाद का फल भुगतना पड़ता है -
(क) हाथों को
(ख) पीठ को
(ग) आँखों को
(घ) सिर को।
🎯 Exam Tip: दोहे की गहरी शिक्षा को समझें; वाणी के संयम से जुड़े परिणामों को ध्यान में रखें।
Question 1. रहीम ने छोटे व्यक्तियों के महत्व को किस प्रकार जताया है?
Answer: रहीम ने सुई और तलवार का उदाहरण देकर छोटे या साधारण लोगों का महत्व समझाया है। उन्होंने कहा कि तलवार चाहे कितनी भी बड़ी और शक्तिशाली क्यों न हो, कपड़े सिलने का काम केवल एक छोटी सी सुई ही कर सकती है। यह दिखाता है कि हर छोटे व्यक्ति या वस्तु का अपना विशेष महत्व होता है, और उन्हें कभी कम नहीं आंकना चाहिए।
In simple words: रहीम ने कहा कि सुई और तलवार दोनों का अपना काम है। छोटे लोग भी बड़े काम कर सकते हैं, जैसे सुई तलवार का काम नहीं कर सकती और तलवार सुई का काम नहीं कर सकती।
🎯 Exam Tip: उदाहरण के माध्यम से किसी भी व्यक्ति या वस्तु के महत्व को समझाने के लिए उसे सरल और सुलभ शब्दों में प्रस्तुत करें।
Question 2. वृक्ष को फलता-फूलता बनाने के लिए किसे सींचना चाहिए?
Answer: वृक्ष को फलता-फूलता बनाने के लिए उसकी जड़ को सींचना चाहिए। रहीम कहते हैं कि अगर आप जड़ को पानी देंगे, तो पूरा पेड़ अपने आप हरा-भरा और फलता-फूलता रहेगा। जड़ ही पेड़ का आधार होती है, इसलिए मुख्य चीज पर ध्यान देना सबसे जरूरी है।
In simple words: पेड़ को हरा-भरा रखने के लिए उसकी जड़ को पानी देना चाहिए। जड़ ही पूरे पेड़ को पोषण देती है।
🎯 Exam Tip: किसी भी समस्या का समाधान करते समय, हमेशा उसकी जड़ या मूल कारण पर ध्यान केंद्रित करने का सिद्धांत समझाएं।
Question 3. रहीम ने स्वाति की बूंद के द्वारा क्या-क्या सीख दी है?
Answer: रहीम ने स्वाति नक्षत्र की बूंद का उदाहरण देकर बताया है कि व्यक्ति जैसी संगति करता है, वैसा ही बन जाता है। जैसे स्वाति की बूंद केले में गिरकर कपूर, सीप में गिरकर मोती और सांप के मुंह में गिरकर जहर बन जाती है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा अच्छी संगति करनी चाहिए, क्योंकि संगति का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य पर सीधा पड़ता है।
In simple words: रहीम ने स्वाति बूंद के उदाहरण से सिखाया कि व्यक्ति जैसी संगति करता है, वैसा ही बन जाता है। अच्छी संगति से अच्छा और बुरी संगति से बुरा प्रभाव पड़ता है।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक उदाहरणों की व्याख्या करते समय, उनके विभिन्न रूपों और उनसे मिलने वाली शिक्षा को स्पष्ट करें।
Question 4. कुसंग का प्रभाव किन लोगों पर नहीं पड़ता है?
Answer: रहीम के अनुसार, उत्तम स्वभाव वाले लोगों पर कुसंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उन्होंने चंदन के पेड़ का उदाहरण दिया है, जिस पर सांप लिपटे रहते हैं, लेकिन चंदन अपनी शीतलता और सुगंध नहीं छोड़ता। इसी तरह, जिनका स्वभाव अच्छा और मजबूत होता है, वे बुरे लोगों की संगति में रहकर भी अपने गुणों को नहीं खोते और उन पर बुरा असर नहीं होता।
In simple words: अच्छे स्वभाव वाले लोगों पर बुरी संगति का असर नहीं होता। जैसे सांप चंदन के पेड़ से लिपटा रहता है, पर चंदन की ठंडक नहीं जाती।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में कवि द्वारा दिए गए उदाहरण को स्पष्ट करना और यह बताना कि यह किस प्रकार मूल बात को सिद्ध करता है, महत्वपूर्ण है।
Question 5. सज्जनों की तुलना रहीम ने किससे की है?
Answer: रहीम ने सज्जनों की तुलना मोतियों के हार से की है। उनका मानना है कि जैसे मोतियों का हार टूट जाने पर भी उसे फेंका नहीं जाता, बल्कि बार-बार पिरोया जाता है क्योंकि वह मूल्यवान होता है। उसी तरह, सज्जन व्यक्ति भी बहुत कीमती होते हैं और उनसे रिश्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए, चाहे वे कितनी भी बार रूठें, उन्हें मनाना ही बुद्धिमानी है।
In simple words: रहीम ने अच्छे लोगों की तुलना मोतियों के हार से की है। जैसे हार टूटने पर भी पिरोया जाता है, वैसे ही सज्जन को भी मनाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: तुलना वाले प्रश्नों में, तुलना के आधार और उससे मिलने वाली शिक्षा को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
Question 6. सज्जनों की सम्पत्ति किसके काम आती है?
Answer: सज्जनों की सम्पत्ति दूसरों के भलाई के काम आया करती है। रहीम कहते हैं कि वृक्ष अपने फल खुद नहीं खाते और तालाब अपना पानी खुद नहीं पीते, वे दूसरों के लिए होते हैं। इसी तरह, अच्छे लोग धन इकट्ठा करते हैं ताकि वे दूसरों की मदद कर सकें। उनका धन परोपकार के लिए ही होता है।
In simple words: सज्जनों का धन दूसरों की भलाई के काम आता है। वे अपनी संपत्ति खुद के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की मदद के लिए इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: परोपकार के महत्व को दर्शाने वाले उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएं, जैसा कि कवि ने किया है।
Question 7. धनी व्यक्ति निर्धन हो जाने पर किस बारे में बातें किया करता है?
Answer: धनी व्यक्ति निर्धन हो जाने पर अपनी पिछली अमीरी और संपन्नता की बातें किया करता है। रहीम ने इसकी तुलना क्वार मास के उन बादलों से की है जो गरजते तो हैं पर बरसते नहीं, क्योंकि उनमें पानी नहीं होता। इसी तरह, धनहीन व्यक्ति अपने बीते हुए अच्छे दिनों को याद करके खुद को दिलासा देता है और दूसरों के सामने अपनी वर्तमान स्थिति पर पर्दा डालने का प्रयास करता है।
In simple words: जब कोई अमीर गरीब हो जाता है, तो वह अपनी पिछली अमीरी की बातें करता है। वह अब कुछ नहीं कर पाता, बस अपनी पुरानी बातें याद करता है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में कवि द्वारा दिए गए प्रतीकात्मक वर्णन को समझना और उसके निहितार्थ को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 9. मन की व्यथा दूसरों को बताने पर क्या परिणाम होता है?
Answer: रहीम के अनुसार, मन की व्यथा दूसरों को बताने पर दुख कम नहीं होता, बल्कि लोग दुखी व्यक्ति का उपहास करते हैं और उस पर हँसते हैं। वे उसकी पीड़ा को बाँटने के बजाय उसका मज़ाक उड़ाते हैं, जिससे व्यक्ति का दुख और बढ़ जाता है। इसलिए रहीम सलाह देते हैं कि मन के दुख को अपने भीतर ही छिपाकर रखना चाहिए।
In simple words: मन का दुख दूसरों को बताने पर वे उसे बांटते नहीं, बल्कि हंसते हैं। इससे दुख और बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: मानवीय भावनाओं और सामाजिक व्यवहार पर आधारित प्रश्नों में, कवि के अनुभवों और सलाह को सरल भाषा में व्यक्त करें।
Question 10. रहीम ने कैसे व्यक्ति को दीनबंधु' के समान माना है?
Answer: रहीम ने उस व्यक्ति को 'दीनबंधु' यानी भगवान के समान माना है जो गरीबों और असहाय लोगों पर दया करता है और उनकी मदद करता है। उनका मानना है कि सभी लोग दीन-दुखियों को देखते तो हैं, लेकिन कोई उनकी मदद नहीं करता। जो व्यक्ति ऐसे दीन-दुखियों की सुध लेता है, वह वास्तव में ईश्वर के ही समान होता है।
In simple words: रहीम ने उस व्यक्ति को भगवान जैसा कहा है जो गरीब और असहाय लोगों की मदद करता है। जो दूसरों की मदद करे, वही सच्चा दीनबंधु है।
🎯 Exam Tip: कवि के द्वारा किसी गुण की प्रशंसा वाले प्रश्नों में, उस गुण का महत्व और उसे धारण करने वाले व्यक्ति की विशेषता स्पष्ट करें।
Question 11. कौए और कोयल का अंतर कब ज्ञात होता है?
Answer: कौए और कोयल का अंतर तब पता चलता है जब वसंत ऋतु आती है। वसंत ऋतु में जब दोनों अपनी आवाज में बोलते हैं, तब उनकी आवाज से पहचान हो जाती है। कौआ कर्कश काँव-काँव करता है, जबकि कोयल मधुर आवाज में कूजती है। इससे पहले वे देखने में एक जैसे ही लगते हैं, पर वाणी ही उनके गुणों को उजागर करती है।
In simple words: कौए और कोयल में फर्क तब पता चलता है जब वसंत ऋतु में वे बोलते हैं। कोयल मीठा गाती है और कौआ कड़वा।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक तुलना वाले प्रश्नों में, तुलना के आधार (यहाँ, वाणी) को स्पष्ट करें और उसके महत्व को बताएं।
Question 12. बड़ों की विशेषता क्या होती?
Answer: बड़ों की विशेषता यह होती है कि वे कभी भी अपने मुख से अपनी बड़ाई नहीं करते और न ही शेखी बघारते हैं। रहीम कहते हैं कि जो व्यक्ति वास्तव में बड़ा होता है, उसके गुण अपने आप ही दिख जाते हैं। जैसे हीरा कभी अपनी कीमत खुद नहीं बताता, बल्कि उसके गुण ही उसे अमूल्य बनाते हैं। सच्चे बड़े लोग शांत और विनम्र होते हैं।
In simple words: बड़े लोग अपनी तारीफ खुद नहीं करते और न ही दिखावा करते हैं। उनके गुण अपने आप दिख जाते हैं, जैसे हीरा खुद अपनी कीमत नहीं बताता।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति की विशेषता को समझाने के लिए, कवि द्वारा दिए गए उदाहरणों और नैतिक मूल्यों पर ध्यान दें।
Question 13. 'बिगरी बात बनै नहीं' कवि रहीम के इस कथन का आशय क्या है?
Answer: कवि रहीम के इस कथन का आशय है कि एक बार कोई बात बिगड़ जाए, तो उसे फिर से ठीक करना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने फटे दूध का उदाहरण दिया है कि एक बार दूध फट जाए, तो उसे कितना भी मथा जाए, उससे मक्खन नहीं निकाला जा सकता। इसी तरह, जब किसी व्यक्ति की छवि या संबंध बिगड़ जाते हैं, तो उन्हें पहले जैसा बनाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसलिए बातों को बिगड़ने नहीं देना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि एक बार कोई बात बिगड़ जाए, तो उसे ठीक करना बहुत मुश्किल है। जैसे फटे दूध से मक्खन नहीं निकलता, वैसे ही बिगड़ी बात सुधरती नहीं।
🎯 Exam Tip: मुहावरेदार कथन वाले प्रश्नों में, उसका गहरा अर्थ और जीवन में उसका महत्व समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 14. बुरे दिन आने का मनुष्य के धन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: रहीम के अनुसार, जब मनुष्य पर बुरे दिन या विपत्ति आती है, तो उसका सारा धन नष्ट हो जाता है। चाहे वह कितना भी करोड़पति क्यों न हो, विपत्ति के समय उसका धन उसके काम नहीं आता। उन्होंने सुबह होने पर आकाश से तारों के छिप जाने का उदाहरण दिया है। जैसे रात के समय करोड़ों तारे होते हैं, लेकिन सुबह होते ही वे सब गायब हो जाते हैं, वैसे ही बुरे समय में धन भी साथ छोड़ देता है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि बुरे दिन आने पर मनुष्य का सारा धन खत्म हो जाता है। चाहे वह कितना भी अमीर हो, विपत्ति में धन काम नहीं आता, जैसे सुबह होने पर तारे छिप जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जीवन की अस्थिरता और धन के क्षणभंगुर स्वभाव पर कवि के विचारों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
Question 16. बिना मान के अमृत पीने का दैत्य राहु को क्या परिणाम भोगना पड़ा?
Answer: बिना मान के अमृत पीने का दैत्य राहु को यह परिणाम भोगना पड़ा कि भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर उसे पहचान लिया। अमृतपान करते समय जब उसकी असलियत सामने आई, तो विष्णु ने अपने चक्र से उसका सिर काट डाला। इस घटना से यह सीख मिलती है कि सम्मान के बिना प्राप्त की गई कोई भी वस्तु अंततः हानिकारक ही होती है।
In simple words: राहु ने बिना मान के अमृत पीया था, इसलिए भगवान विष्णु ने उसका सिर काट दिया। बिना सम्मान के कोई भी चीज अच्छी नहीं होती।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं पर आधारित प्रश्नों में, कथा का सार और उससे मिलने वाली शिक्षा को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 17. जीभ की करतूत का फल किसे और कैसे भोगना पड़ता है?
Answer: जीभ की करतूत का फल सिर को भोगना पड़ता है। रहीम कहते हैं कि जीभ बिना सोचे-समझे अपशब्द बोलकर अंदर तो हो जाती है, लेकिन उसके कारण सिर को जूतों से मार खानी पड़ती है, यानी अपमान सहना पड़ता है। यह वाणी के संयम का महत्व बताता है कि व्यक्ति को बोलने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए, वरना उसका परिणाम पूरे सम्मान पर पड़ता है।
In simple words: जीभ गलत बातें बोलती है, तो उसका नतीजा सिर को भुगतना पड़ता है, यानी अपमान होता है। इसलिए सोच समझकर बोलना चाहिए।
🎯 Exam Tip: मुहावरेदार भाषा का उपयोग करने वाले दोहों की व्याख्या करते समय, उसके लाक्षणिक अर्थ को सरल शब्दों में समझाएं।
Question 18. मधुर वार्तालाप के बीच क्रोध को रहीम ने कैसा बताया है?
Answer: रहीम ने मधुर बातचीत के बीच क्रोध को मिश्री में मिली हुई बाँस की नीरस फाँस (तीली) के समान बताया है। जैसे मीठी मिश्री में बाँस की पतली तीली आ जाए, तो उसका स्वाद बिगड़ जाता है। उसी तरह, मधुर वार्तालाप के दौरान क्रोध का आना पूरी बात को कड़वा और बेस्वाद बना देता है। यह शांति और मधुरता के महत्व को दर्शाता है।
In simple words: रहीम ने मधुर बातों के बीच क्रोध को मिश्री में मिली बाँस की तीली जैसा बताया है। क्रोध अच्छी बात को भी खराब कर देता है।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक तुलना वाले प्रश्नों में, तुलना के दोनों तत्वों (यहाँ, मिश्री और क्रोध) को स्पष्ट करते हुए उनका गहरा अर्थ समझाएं।
Question 19. संकलित दोहों के आधार पर बताइए कि रहीम का इन दोहों की रचना के पीछे क्या उद्देश्य है?
Answer: संकलित दोहों की रचना के पीछे रहीम का मुख्य उद्देश्य हमें उत्तम जीवन मूल्यों और लोक व्यवहार में उपयोगी नीतियों का ज्ञान कराना था। उन्होंने अपने अनुभवों और विभिन्न विषयों पर आधारित दोहों के माध्यम से लोगों को ईमानदारी, परोपकार, विनम्रता और सही संगति का महत्व सिखाया है। उनके दोहे जीवन के हर मोड़ पर सही मार्ग दिखाते हैं।
In simple words: रहीम ने ये दोहे हमें अच्छे जीवन के तरीके और समाज में सही व्यवहार सिखाने के लिए लिखे हैं। वे चाहते थे कि लोग सही रास्ते पर चलें।
🎯 Exam Tip: कवि के उद्देश्य को स्पष्ट करते समय, उनके दोहों की मुख्य शिक्षाओं और नैतिक संदेशों को संक्षेप में बताएं।
Question 20. पाठ्यपुस्तक में संकलित दोहों के अध्ययन से रहीम के व्यक्तित्व के बारे में क्या बातें ज्ञात होती हैं।
Answer: पाठ्यपुस्तक में संकलित दोहों के अध्ययन से रहीम के व्यक्तित्व के बारे में कई बातें ज्ञात होती हैं। इससे पता चलता है कि रहीम एक श्रेष्ठ कवि, उदार हृदय वाले इंसान, अनुभवी पुरुष और नीतिज्ञ विद्वान थे। वे जीवन के हर पहलू को गहराई से समझते थे और अपने अनुभवों को सरल तथा प्रभावी ढंग से व्यक्त करने में माहिर थे। उनकी रचनाएँ उनकी गहरी सोच और मानवीय स्वभाव की समझ को दर्शाती हैं।
In simple words: रहीम के दोहों से पता चलता है कि वे एक महान कवि, दयालु और अनुभवी व्यक्ति थे। उन्हें जीवन के बारे में बहुत ज्ञान था।
🎯 Exam Tip: कवि के व्यक्तित्व पर आधारित प्रश्नों में, उनके गुणों और उनकी रचनाओं से प्राप्त जानकारियों को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।” कवि रहीम ने ऐसा क्यों कहा है? लिखिए।
Answer: कवि रहीम ने यह बात इसलिए कही है क्योंकि जब किसी व्यक्ति की जान-पहचान बड़े लोगों से हो जाती है, तो वह छोटे या सामान्य स्तर के साथियों की उपेक्षा करने लगता है। रहीम इसे बुद्धिमानी नहीं मानते क्योंकि छोटा व्यक्ति या छोटी वस्तु भी वह काम कर सकती है जो बड़ा व्यक्ति या बड़ी वस्तु नहीं कर पाती। जैसे सुई का काम तलवार नहीं कर सकती। इसलिए किसी को भी कम नहीं आंकना चाहिए।
In simple words: रहीम ने कहा है कि बड़े लोगों को देखकर छोटे लोगों को छोड़ना नहीं चाहिए। छोटे लोग भी बड़े काम कर सकते हैं, जैसे सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
🎯 Exam Tip: दोहे की शिक्षा को जीवन के व्यावहारिक पक्ष से जोड़कर समझाएं और उसके महत्व पर जोर दें।
Question 3. 'स्वाति एक गुन तीन' इस कथन का तात्पर्य क्या है? लिखिए।
Answer: 'स्वाति एक गुन तीन' कथन का तात्पर्य यह है कि स्वाति नक्षत्र में गिरने वाली वर्षा की एक ही बूंद अलग-अलग वस्तुओं के संपर्क में आकर तीन अलग-अलग रूप धारण कर लेती है। उदाहरण के लिए, वही बूंद केले पर पड़ने से कपूर, सीप में गिरने से मोती और सांप के मुंह में गिरने से विष बन जाती है। इससे रहीम यह सीख देते हैं कि व्यक्ति जिसकी संगति करता है, वैसा ही बन जाता है। इसलिए हमेशा अच्छी संगति करनी चाहिए।
In simple words: 'स्वाति एक गुन तीन' का मतलब है कि स्वाति नक्षत्र की एक बूंद तीन तरह की बन जाती है, जैसी जगह गिरती है। इससे रहीम ने सिखाया कि जैसी संगत होती है, व्यक्ति वैसा ही बन जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक दोहों की व्याख्या में, प्रतीक का अर्थ और उससे मिलने वाली नैतिक शिक्षा को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 4. सामान्य व्यक्ति स्वभाव से स्वार्थी होता है' रहीम ने इस तथ्य के समर्थन में क्या दृष्टांत दिया है। संकलित दोहे के आधार पर लिखिए।
Answer: रहीम ने यह बताने के लिए कि सामान्य व्यक्ति स्वभाव से स्वार्थी होता है, विवाह की रीतियों का उदाहरण दिया है। वे कहते हैं कि विवाह के समय वर-वधू एक-दूसरे के वस्त्र में गाँठ बाँधकर फेरे लेते हैं, अग्नि की परिक्रमा करते हैं और दूल्हे के मौर को बहुत सम्मान दिया जाता है। लेकिन विवाह सम्पन्न होने के बाद, उसी मौर को नदी में बहा दिया जाता है। यह दिखाता है कि जब तक काम होता है, तब तक व्यक्ति को महत्व दिया जाता है, और काम निकल जाने पर उसे भुला दिया जाता है।
In simple words: रहीम ने दिखाया कि लोग स्वार्थी होते हैं। उन्होंने शादी में दूल्हे के मौर का उदाहरण दिया है - काम होने तक सम्मान, काम पूरा होने पर उसे फेंक देना।
🎯 Exam Tip: मानवीय स्वभाव पर कवि के विचारों को स्पष्ट करते समय, दिए गए उदाहरण को पूरी तरह से समझाएं और उसे मुख्य बिंदु से जोड़ें।
Question 5. चंदन के वृक्ष और सर्पों को कवि रहीम ने किस संदर्भ में उल्लेख किया है। संकलित दोहों के आधार पर लिखिए।
Answer: कवि रहीम ने चंदन के वृक्ष और सर्पों का उल्लेख उत्तम स्वभाव वाले पुरुषों की विशेषता बताने के संदर्भ में किया है। वे कहते हैं कि चंदन का वृक्ष शीतल होता है और उस पर विषैले सर्प लिपटे रहते हैं। लेकिन उन सर्पों के विष का चंदन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, चंदन अपनी शीतलता नहीं छोड़ता। इसी तरह, जिनका स्वभाव अच्छा और मजबूत होता है, उन पर बुरे लोगों की संगति का कोई असर नहीं होता और वे अपने गुणों को बनाए रखते हैं।
In simple words: रहीम ने चंदन और सांपों का उदाहरण अच्छे लोगों का स्वभाव समझाने के लिए दिया है। जैसे सांप चंदन को जहरीला नहीं बना पाते, वैसे ही बुरे लोग अच्छे लोगों का स्वभाव नहीं बिगाड़ पाते।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक उदाहरणों की व्याख्या करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप प्रतीक और उसके निहितार्थ को स्पष्ट रूप से समझा रहे हैं।
Question 6. रहीम अपने पाठकों को सज्जनों के प्रति कैसा व्यवहार रखने का परामर्श देते हैं? लिखिए।
Answer: रहीम अपने पाठकों को सलाह देते हैं कि सज्जनों के प्रति बहुत सम्मान और सावधानी से व्यवहार करना चाहिए। उनका कहना है कि अगर कोई सज्जन किसी बात पर रूठ जाए, तो उसे सौ बार भी मनाना चाहिए। उन्होंने मोतियों के हार का उदाहरण दिया है कि जैसे हार टूट जाने पर भी उसे फेंका नहीं जाता, बल्कि बार-बार पिरोया जाता है। इसी तरह, सज्जनों की मित्रता बहुत मूल्यवान होती है, और उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहिए।
In simple words: रहीम पाठकों को सलाह देते हैं कि अच्छे लोगों को बार-बार मनाना चाहिए, अगर वे रूठ जाएं। उनकी दोस्ती मोतियों के हार जैसी अनमोल होती है।
🎯 Exam Tip: कवि की सलाह को स्पष्ट करते समय, उसके पीछे के तर्क और दिए गए उदाहरणों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।
Question 7. रहीम के अनुसार सज्जन लोग सम्पत्ति को संचय किसलिए किया करते हैं? इसके पक्ष में कवि ने कौन से उदाहरण दिए हैं? लिखिए।
Answer: रहीम के अनुसार सज्जन लोग अपनी सम्पत्ति का संचय अपने सुख के लिए नहीं करते, बल्कि केवल परोपकार के लिए धन अर्जित करते हैं। वे दूसरों की भलाई के लिए धन इकट्ठा करते हैं। इसके पक्ष में कवि ने वृक्षों और सरोवरों का उदाहरण दिया है। वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते, बल्कि ये सभी दूसरों के काम आते हैं। इसी प्रकार, अच्छे लोग भी अपना धन दूसरों की सेवा के लिए उपयोग करते हैं।
In simple words: रहीम कहते हैं कि सज्जन लोग धन दूसरों की भलाई के लिए इकट्ठा करते हैं। जैसे पेड़ अपने फल नहीं खाते और तालाब अपना पानी नहीं पीते, वैसे ही सज्जन अपना धन परोपकार में लगाते हैं।
🎯 Exam Tip: परोपकार के महत्व को स्पष्ट करते हुए कवि द्वारा दिए गए प्राकृतिक उदाहरणों को ठीक से समझाएं।
Question 8. क्वार मास के बादलों के बारे में रहीम ने क्या कहा है? लिखिए।
Answer: रहीम ने क्वार (आश्विन) मास के बादलों के बारे में कहा है कि वे केवल गरजते हैं, बरसते नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें वर्षा का जल नहीं होता, वे खाली होते हैं। रहीम ने इन बादलों की तुलना उन धनहीन व्यक्तियों से की है जो कभी अमीर थे, लेकिन समय के साथ गरीब हो गए। ऐसे लोग अपनी वर्तमान गरीबी को छिपाने के लिए हमेशा अपनी पिछली अमीरी की बातें करते रहते हैं, जैसे क्वार के बादल बिना पानी के गरजकर अपने पिछले रूप की याद दिलाते रहते हैं।
In simple words: रहीम ने कहा है कि क्वार के बादल सिर्फ गरजते हैं, बरसते नहीं। वे उन गरीब लोगों जैसे हैं जो अपनी पिछली अमीरी की बातें करते रहते हैं, क्योंकि उनके पास अब कुछ नहीं बचा है।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक दोहों की व्याख्या करते समय, प्रतीक (यहाँ, बादल) के वास्तविक और लाक्षणिक अर्थ दोनों को स्पष्ट करें।
Question 9. "जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ॥” रहीम ने यह पंक्ति किस संदर्भ में और क्या सीख देने के लिए कही है?
Answer: रहीम ने यह पंक्ति दुखी व्यक्तियों के संदर्भ में कही है और सीख दी है कि मन के दुख को अपने भीतर ही छिपाकर रखना चाहिए। उनका कहना है कि जब व्यक्ति के मन में दुख होता है, तो उसकी आँखों से आंसू निकल आते हैं, जिससे मन का सारा भेद खुल जाता है। रहीम कहते हैं कि जिसे तुम घर से निकालोगे, वह बाहर जाकर तुम्हारे घर के सारे भेद बता देगा। इसलिए रहीम सलाह देते हैं कि दुख को धैर्यपूर्वक सहना चाहिए और आंसू बहाकर अपना स्वाभिमान नहीं खोना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि आंसू मन का भेद खोल देते हैं। अगर किसी को घर से निकालोगे, तो वह तुम्हारे भेद बता देगा। इसलिए दुख को छिपाना और धैर्य रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: दोहे की व्याख्या करते समय, संदर्भ को स्पष्ट करें और कवि द्वारा दी गई व्यावहारिक सीख को रेखांकित करें।
Question 10. "दीन सबन को....... सम होय ॥” इस दोहे में निहित आलंकारिक विशेषता पर प्रकाश डालिए।
Answer: इस दोहे में श्लेष अलंकार की प्रमुख विशेषता है, जिससे कथन चमत्कारी बन गया है। इसका एक अर्थ यह है कि दीन (गरीब) व्यक्ति सभी की ओर आशा भरी दृष्टि से देखता है, लेकिन उसकी ओर कोई ध्यान नहीं देता। दूसरा अर्थ यह है कि दीन (ईश्वर) सबको देखता है और सब पर ध्यान देता है, लेकिन कोई भी उसे देख नहीं पाता। जो दीन व्यक्ति की मदद करता है, वह ईश्वर के समान है। इस प्रकार, दीन शब्द के दो अर्थ होने से दोहे में चमत्कार पैदा होता है और ईश्वर की सर्वव्यापकता भी समझाई गई है।
In simple words: इस दोहे में 'दीन' शब्द के दो अर्थ हैं- गरीब और भगवान। यह दिखाता है कि गरीब सबकी ओर देखता है पर कोई उसे नहीं देखता, और भगवान सबको देखते हैं पर कोई उन्हें नहीं देख पाता।
🎯 Exam Tip: अलंकार वाले प्रश्नों में, अलंकार का नाम बताएं, उसकी परिभाषा दें और समझाएं कि वह दोहे में कैसे प्रयुक्त हुआ है।
Question 12. रहीम ने बड़प्पन का आधार किसे माना है? हीरा अत्यन्त मूल्यवान क्यों है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: रहीम ने बड़प्पन या महानता का आधार व्यक्ति या वस्तु के गुणों को माना है, न कि उसके दिखावे को। वे कहते हैं कि जो वास्तव में बड़ा होता है, वह अपनी बड़ाई खुद नहीं करता। लोग उसके गुणों के कारण ही उसे बड़ा मानते हैं। हीरे का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि हीरा अपने लाखों रुपए की कीमत खुद नहीं बताता। उसके रूप, रंग और अनोखी विशेषताएं ही उसे बहुत मूल्यवान बनाती हैं। यह दिखाता है कि असली महत्व बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक गुणों में होता है।
In simple words: रहीम ने बड़प्पन का आधार गुणों को माना है। हीरा अपने गुणों के कारण ही कीमती होता है, न कि खुद अपनी तारीफ करने से।
🎯 Exam Tip: उदाहरण वाले प्रश्नों में, उदाहरण को विस्तार से समझाएं और उसे मुख्य सिद्धांत (यहाँ, बड़प्पन का आधार) से जोड़ें।
Question 13. 'बिगरी बात बनै नहीं' बात बिगड़ने से कवि रहीम का आशय क्या है? इसका परिणाम क्या होता है? लिखिए।
Answer: 'बिगरी बात बनै नहीं' कथन से कवि रहीम का आशय है कि जब कोई बात बिगड़ जाती है, तो उसे फिर से ठीक करना असंभव हो जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति की छवि धूमिल हो जाती है और सम्मान चला जाता है। एक बार अगर किसी का वचन टूट जाए या कोई संबंध खराब हो जाए, तो उसे वापस पहले जैसा बनाना बहुत मुश्किल होता है। रहीम ने फटे दूध का उदाहरण देकर समझाया है कि फटे दूध को कितना भी मथा जाए, उससे मक्खन नहीं निकलता।
In simple words: रहीम का मतलब है कि एक बार बात बिगड़ जाए तो उसे ठीक करना नामुमकिन है। इससे सम्मान चला जाता है, जैसे फटे दूध से मक्खन नहीं निकलता।
🎯 Exam Tip: दोहे की गहरी शिक्षा को जीवन के व्यावहारिक अनुभवों से जोड़कर समझाएं और उसके दूरगामी परिणामों पर जोर दें।
Question 14. विपत्ति आने पर मनुष्य के जीवन पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है? कवि रहीम ने इस विषय में क्या कहा है? लिखिए।
Answer: कवि रहीम अपने अनुभव के आधार पर कहते हैं कि जब मनुष्य पर विपत्ति या बुरे दिन आते हैं, तो उसकी सारी संपत्ति नष्ट हो जाती है। चाहे वह कितना भी लखपति या करोड़पति क्यों न हो, विपत्ति के समय वह गरीब हो जाता है और उसका धन उसके काम नहीं आता। रहीम इस तथ्य के समर्थन में कहते हैं कि जैसे सुबह होते ही आकाश के असंख्य तारे छिप जाते हैं और आकाश का सारा वैभव समाप्त हो जाता है, वैसे ही बुरे वक्त में मनुष्य का धन भी साथ छोड़ देता है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि विपत्ति आने पर मनुष्य का सारा धन नष्ट हो जाता है, चाहे वह कितना भी अमीर हो। बुरे वक्त में धन काम नहीं आता, जैसे सुबह होने पर तारे छिप जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जीवन की सच्चाई पर आधारित प्रश्नों में, कवि के अनुभवों और तुलनात्मक उदाहरणों का प्रभावी ढंग से वर्णन करें।
Question 15. "माँगे घटत.............वामनै नाम।।" रहीम के इस दोहे में निहित पौराणिक घटना का संक्षिप्त परिचय दीजिए?
Answer: रहीम के इस दोहे में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पौराणिक घटना का उल्लेख है। दैत्यों से त्रस्त देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन (बौना छात्र) का रूप धारण किया और दैत्यराज बलि के पास पहुँचे। विष्णु ने बलि से केवल तीन पग धरती मांगी। बलि ने वचन देने पर विष्णु ने अपना विराट रूप धारण कर लिया और अपने तीन कदमों से सारी पृथ्वी को नाप लिया। बलि को पाताल में रहना पड़ा। रहीम कहते हैं कि इतने बड़े काम के बाद भी विष्णु को 'वामन' (बौना) नाम से जाना गया, क्योंकि उन्होंने माँगकर कुछ प्राप्त किया था। यह घटना दिखाती है कि माँगने से व्यक्ति का पद घट जाता है।
In simple words: इस दोहे में वामन अवतार की कहानी है। भगवान विष्णु ने बौना रूप लेकर बलि से तीन पग धरती मांगी थी। इतना बड़ा काम करने पर भी उन्हें 'वामन' कहा गया, क्योंकि उन्होंने मांगा था।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं को समझाते समय, कहानी के मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में बताएं और उसका दोहे से संबंध स्पष्ट करें।
Question 17. 'रहिमन जिह्वा बाबरी खात कपाल ॥” इस दोहे के माध्यम से कवि रहीम ने क्या संदेश देना चाहा है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस दोहे के माध्यम से कवि रहीम ने वाणी पर संयम रखने का संदेश दिया है। वे कहते हैं कि व्यक्ति को बोलते समय विवेक का प्रयोग करना चाहिए और ऐसी बातें नहीं बोलनी चाहिए जो दूसरों को बुरी लगें। यदि कोई अपशब्दों का प्रयोग करता है, तो जीभ का तो कुछ नहीं बिगड़ता क्योंकि वह अंदर हो जाती है, लेकिन उसका परिणाम सिर (सम्मान) को भुगतना पड़ता है। यानी व्यक्ति को अपमान सहना पड़ता है। रहीम ने बड़े ही रोचक ढंग से वाणी के संयम की सीख दी है।
In simple words: रहीम ने इस दोहे से सिखाया है कि हमें सोच-समझकर बोलना चाहिए। अगर जीभ गलत बोले, तो उसका अपमान सिर को भुगतना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: दोहे की शिक्षा को जीवन के व्यावहारिक पक्ष से जोड़कर समझाएं और उसके नैतिक महत्व पर जोर दें।
Question 18. कवि रहीम ने 'मिश्री' के माध्यम से क्या सीख दी है? संकलित दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवि रहीम ने 'मिश्री' के माध्यम से मीठी और विनम्र वाणी का महत्व सिखाया है। वे कहते हैं कि जैसे मिश्री बनाने में बाँस की बारीक तीलियों का प्रयोग होता है, वैसे ही मधुर बातचीत में क्रोध का अंश आने पर आनंद किरकिरा हो जाता है। कवि ने मीठे स्वाद वाली मिश्री में बाँस की फाँसों को भी वैसा ही नीरस बताया है। इस प्रकार वे क्रोध से बचे रहने और हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करने की सीख देते हैं।
In simple words: रहीम ने मिश्री के उदाहरण से मीठी बात बोलने की सीख दी है। उन्होंने कहा कि क्रोध अच्छी बात को भी खराब कर देता है, जैसे मिश्री में तीली।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक तुलना वाले प्रश्नों में, कवि के प्रतीकों के प्रयोग और उससे निकलने वाली सीख को सरल भाषा में व्यक्त करें।
Question 19. संकलित दोहों के आधार पर बताइए कि रहीम का इन दोहों की रचना के पीछे क्या उद्देश्य है?
Answer: संकलित दोहों की रचना के पीछे कवि रहीम का मुख्य उद्देश्य हमें उत्तम जीवन मूल्यों और लोक व्यवहार में उपयोगी नीतियों का ज्ञान कराना था। उन्होंने विभिन्न विषयों पर आधारित दोहों के माध्यम से लोगों को सही-गलत का ज्ञान कराया है। रहीम ने अपने अनुभवों को सरल भाषा में प्रस्तुत करके हमें परोपकार, विनम्रता, संगति का प्रभाव, स्वाभिमान और वाणी के संयम जैसे महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाए हैं।
In simple words: रहीम ने ये दोहे हमें अच्छे जीवन के तरीके और सही व्यवहार सिखाने के लिए लिखे हैं। उनका मकसद था कि लोग इन नीतियों से जीवन में अच्छा करें।
🎯 Exam Tip: कवि के उद्देश्य को स्पष्ट करते समय, उनके दोहों की मुख्य शिक्षाओं और नैतिक संदेशों को संक्षेप में बताएं।
Question 20. 'रहीम उदार धार्मिक दृष्टिकोण वाले कवि थे। उन संकलित दोहों का उल्लेख कीजिए जो इस कथन का समर्थन करते हैं।
Answer: रहीम उदार धार्मिक दृष्टिकोण वाले कवि थे, यह उनके कई दोहों से स्पष्ट होता है। यद्यपि वे मुसलमान थे, फिर भी उनके मन में सभी धर्मों के प्रति आदर का भाव था और उन्होंने हिन्दू धर्म ग्रंथों का भी अध्ययन किया था। 'माँगे घटत... वामनै नाम' दोहे में उन्होंने भगवान विष्णु के वामन अवतार का उल्लेख किया है। इसी प्रकार, 'मान सहित... कटायो सीस' दोहे में उन्होंने समुद्र मंथन और राहु के सिर कटने की पौराणिक घटना का वर्णन किया है। ये सभी उदाहरण उनके उदार धार्मिक विचारों और ज्ञान को दर्शाते हैं।
In simple words: रहीम बहुत उदार और धार्मिक थे, चाहे वे मुसलमान थे। उनके दोहे जैसे 'वामनै नाम' और 'राहु कटायो सीस' बताते हैं कि उन्हें हिन्दू धर्म की कहानियों का भी ज्ञान था।
🎯 Exam Tip: कवि के गुणों को सिद्ध करने के लिए उनके काव्य से उचित उदाहरणों का चुनाव करें और उन्हें संक्षिप्त में समझाएं।
RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 3 रहीम लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अपनी पाठ्यपुस्तक में संकलित रहीम के तीन दोहों का चयन कीजिए और उनके विषयों तथा विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: मेरे द्वारा चुने गए तीन दोहे और उनकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:
पहला दोहा: "रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥"
विषय: यह दोहा छोटे लोगों के महत्व को बताता है।
विशेषता: कवि ने सुई और तलवार के उदाहरण से समझाया है कि बड़े लोगों से दोस्ती होने पर छोटों को नहीं भूलना चाहिए। छोटे व्यक्ति भी ऐसे काम कर सकते हैं जो बड़े नहीं कर सकते। जैसे कपड़े सिलने में सुई काम आती है, तलवार नहीं। यह दोहा व्यावहारिक सलाह देता है।
दूसरा दोहा: "बिपति भए धन ना रहै, रहे जो लाख करोर। नभ तारे छिपि जात हैं, ज्यों रहीम भए भोर॥"
विषय: यह दोहा विपत्ति के समय धन की क्षणभंगुरता को बताता है।
विशेषता: रहीम ने बताया है कि धनवान व्यक्ति को अपने धन पर ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए। विपत्ति आने पर लाखों-करोड़ों का धन भी साथ छोड़ जाता है। जैसे सुबह होने पर आकाश के सारे तारे छिप जाते हैं, वैसे ही बुरे समय में धन भी गायब हो जाता है। यह दोहा धन के प्रति मोह छोड़ने की सीख देता है।
तीसरा दोहा: "बड़े बड़ाई ना करें, बड़ो न बोलैं बोल। रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल॥"
विषय: यह दोहा सच्चे बड़प्पन और अहंकार से दूर रहने की बात कहता है।
विशेषता: कवि रहीम कहते हैं कि जो लोग सच में बड़े होते हैं, वे कभी अपनी तारीफ खुद नहीं करते और न ही बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। हीरे का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि हीरा कभी अपनी कीमत लाखों में खुद नहीं बताता, उसके गुण ही उसे अमूल्य बनाते हैं। यह दोहा विनम्रता और आत्म-प्रशंसा से बचने की सीख देता है।
In simple words: मैंने रहीम के तीन दोहे चुने हैं। पहला, छोटों का महत्व (सुई-तलवार का उदाहरण)। दूसरा, बुरे वक्त में धन का साथ छोड़ना (तारों का उदाहरण)। तीसरा, बड़े लोग अपनी बड़ाई नहीं करते (हीरे का उदाहरण)।
🎯 Exam Tip: तीन दोहों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक दोहे का विषय, उसके निहितार्थ और कवि की शैलीगत विशेषताओं को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।
Question 2. संगति के प्रभाव के बारे में कवि रहीम के विचार क्या हैं? लिखिए।
Answer: कवि रहीम के अनुसार, संगति का प्रभाव बहुत गहरा और व्यापक होता है। न केवल मनुष्य, बल्कि जीव-जंतु और वनस्पतियां भी संगति से प्रभावित होती हैं। वे स्वाति नक्षत्र की बूंद का उदाहरण देते हैं। वही बूंद केले पर पड़कर कपूर, सीप में गिरकर मोती और सांप के मुंह में पड़कर विष बन जाती है। इससे पता चलता है कि जैसी संगति होती है, वैसा ही फल मिलता है।
हालांकि, रहीम एक अपवाद भी बताते हैं। वे कहते हैं कि जिनका स्वभाव उत्तम होता है, उन पर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे चंदन का पेड़ शीतल स्वभाव का होता है, उस पर सांप लिपटे रहते हैं, लेकिन चंदन अपनी शीतलता नहीं छोड़ता। इसी तरह, मजबूत स्वभाव वाले लोग बुरे माहौल में भी अपने अच्छे गुणों को बनाए रखते हैं।
In simple words: रहीम कहते हैं कि संगति का बड़ा असर होता है, जैसा स्वाति बूंद के उदाहरण से दिखता है। लेकिन अच्छे स्वभाव वाले लोगों पर बुरी संगति का असर नहीं होता, जैसे चंदन पर सांप का विष असर नहीं करता।
🎯 Exam Tip: संगति के प्रभाव पर आधारित प्रश्नों में, कवि के विचारों को उदाहरणों के साथ समझाएं और अपवादों का भी उल्लेख करें।
Question 4. पाठ्यपुस्तक में संकलित रहीम के दोहों के आधार पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के गुणों का परिचय दीजिए।
Answer: पाठ्यपुस्तक में संकलित दोहों के आधार पर रहीम के व्यक्तित्व और कृतित्व के कई गुण सामने आते हैं। वे अकबर के नवरत्नों में से एक थे, जो अपनी विद्वत्ता, उदारता, वीरता और दानशीलता के लिए जाने जाते थे। उनके दोहे उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और काव्य-कौशल का परिचय देते हैं। वे एक विद्वान पुरुष थे जिन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था और उन्होंने रामायण, गीता, पुराण जैसे हिन्दू ग्रंथों का भी अध्ययन किया था, जैसा कि उनके दोहों में वामन अवतार और मान सहित विष खाने के संदर्भों से स्पष्ट होता है। वे एक उदार हृदय व्यक्ति थे, जो गुणों की कद्र करते थे और दानशील थे। जीवन के हर पक्ष का उन्हें गहरा अनुभव था, जिससे उनके दोहे व्यावहारिक और नीतिपरक बन पाए। एक कवि के रूप में, वे ब्रज भाषा पर पूर्ण अधिकार रखते थे और नीति जैसे नीरस विषय को भी रोचक शैली में प्रस्तुत करते थे। उन्होंने अपनी बात को दृष्टांतों और उदाहरणों से सिद्ध करने में कुशलता दिखाई है।
In simple words: रहीम एक महान कवि और ज्ञानी व्यक्ति थे। वे उदार, वीर और दानशील स्वभाव के थे, जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथों का भी ज्ञान था। उनके दोहों में उनके अनुभव और काव्य-कौशल साफ दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: कवि के व्यक्तित्व और उनके कार्यों (कृतित्व) को समझाने के लिए, उनके जीवन की घटनाओं और दोहों के विशिष्ट उदाहरणों का प्रयोग करें।
Question 5. क्या आप मानते हैं कि रहीम की रचनाएँ वर्तमान समय में भी प्रसंगिक और पठनीय हैं? संकलित दोहों के आधार पर लिखिए।
Answer: हाँ, रहीम की रचनाएँ वर्तमान समय में भी पूरी तरह से प्रासंगिक और पठनीय हैं। नीति-काव्य का सीधा संबंध मानव जीवन से होता है, और रहीम की नीतियां, शिक्षाएं तथा उपदेश उनके अनुभवों पर आधारित हैं। उनके दोहे हमें कई महत्वपूर्ण सीख देते हैं जो आज भी उतनी ही उपयोगी हैं। जैसे, छोटे व्यक्तियों का महत्व, बुरे समय में धैर्य रखना, धन का परोपकार के लिए उपयोग, स्वार्थी व्यवहार से बचना, अच्छी संगति का महत्व, वाणी का संयम और सज्जनों के प्रति उचित व्यवहार। ये सभी नीतिवचन, सीखें और सुझाव आज भी उतने ही उपयोगी हैं, क्योंकि मानवीय स्वभाव और सामाजिक चुनौतियां बदलती नहीं हैं, केवल उनका स्वरूप बदलता है।
In simple words: हाँ, रहीम के दोहे आज भी काम के हैं। उनकी सीख जैसे छोटे लोगों का महत्व, वाणी का संयम और परोपकार आज भी हमारे जीवन में बहुत उपयोगी हैं।
🎯 Exam Tip: कवि की रचनाओं की प्रासंगिकता पर तर्क देते समय, उनके दोहों की मुख्य शिक्षाओं को वर्तमान जीवन से जोड़कर समझाएं।
Question 6. संकलित दोहों के आधार पर कवि रहीम की काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: कवि रहीम की कविता अपनी विशिष्ट गुणों के कारण हमेशा लोकप्रिय रही है। संकलित दोहों में अधिकतर नीतिपरक बातें हैं, जिनके आधार पर उनकी काव्यगत विशेषताएं इस प्रकार हैं:
भाषा- कवि रहीम ने अपने दोहों की रचना सरस, साहित्यिक और प्रौढ़ ब्रजभाषा में की है। वे गूढ़ विषयों को भी सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर थे। उनकी भाषा में तद्भव, तत्सम और आंचलिक शब्दों का सुंदर मेल मिलता है।
कथन शैली- कवि ने अपनी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए दृष्टांतों और उदाहरणों का प्रयोग किया है। वे अपनी बात को गहराई और प्रामाणिकता देने के लिए व्यंग्य, परिहास और उपदेश सभी का प्रयोग प्रभावी ढंग से करते हैं।
अलंकार- कवि ने अलंकारों का प्रयोग स्वाभाविक रूप से किया है। अनुप्रास, उपमा, रूपक और दृष्टांत अलंकार उनके काव्य की शोभा बढ़ाते हैं।
छंद- दोहा कवि रहीम का सिद्ध छंद है। इस छोटे से छंद में कवि ने गहरे विचारों, अनुभवों और शिक्षाओं को भरने में पूरी सफलता पाई है।
विषय- कवि ने नीति, लोक व्यवहार, उपदेश, मानवीय मनोभाव और हास-परिहास जैसे विभिन्न विषयों को अपनी सहज कुशलता से छोटे छंद में पिरोया है।
In simple words: रहीम की कविता की कई खास बातें हैं। उनकी भाषा ब्रजभाषा है, वे दृष्टांतों का अच्छा उपयोग करते हैं, अलंकार उनके दोहों को सुंदर बनाते हैं, और उन्होंने छोटे दोहों में जीवन के बड़े पाठ दिए हैं।
🎯 Exam Tip: कवि की काव्यगत विशेषताओं को बताते समय, प्रत्येक विशेषता को उदाहरणों के साथ समझाएं और उनकी शैलीगत कुशलता पर जोर दें।
रहीम कवि परिचय
रहीम नाम से हिन्दी काव्य जगत में प्रसिद्ध, नीतिपरक दोहों के अप्रतिम रचयिता का पूरा नाम, अब्दुर्रहीम खानखाना था। इनका जन्म सन् 1556 ई. में हुआ था। इनके पिता बैरम खाँ अकबर के संरक्षक थे। रहीम कई भाषाओं के ज्ञाता, विद्वान और उदार हृदय, पुरुष थे। बादशाह अकबर से इन्हें पूरा सम्मान मिला। रहीम उदार धार्मिक दृष्टिकोण के अनुकरणीय उदाहरण थे। आपने हिन्दू देवताओं के प्रति पूर्ण आदर प्रकट किया। आपका देहावसान सन् 1626 ई. में हुआ। रहीम लोकप्रिय कवि रहे हैं। उनके नीतिपरक
रहीम पाठ परिचय
हमारी पाठ्यपुस्तक में कवि रहीम के 19 दोहे दिए गए हैं। इन दोहों में जीवन से जुड़ी कई उपयोगी बातें सिखाई गई हैं। जैसे व्यवहार में समझदारी, दयालुता, दूसरों के प्रति सहानुभूति, परोपकार, अपनी इज़्ज़त बनाए रखना, अच्छी संगति, बड़प्पन और ऐसे ही कई अच्छे इंसानी गुण इन दोहों में शामिल हैं। रहीम जी कहते हैं कि जब बड़े लोगों से जान-पहचान हो जाए तो छोटों को भूलना नहीं चाहिए। वे यह भी बताते हैं कि संगति का कैसा फल मिलता है, काम निकल जाने पर लोगों का व्यवहार कैसे बदल जाता है, और परोपकारी लोग कैसे होते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि अपने मन का दुख अपने तक ही सीमित रखना चाहिए, अपनी गरिमा बनाए रखना कितना जरूरी है। वे यह भी बताते हैं कि बिगड़ी बात को फिर से ठीक करना बहुत मुश्किल होता है और मांगने से व्यक्ति का सम्मान घटता है। साथ ही, सोच-समझकर बोलना ही बुद्धिमानी है। कवि की ये सभी रचनाएं नीति संबंधी ज्ञान से भरपूर और बहुत खूबसूरत हैं।
काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ
Question 1. रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥ एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। रहिमन मूलहिं सचिबो, फूलै फलै अघाय॥
Answer: इस दोहे में कवि रहीम ने हमें छोटे लोगों के महत्व और एक काम पर ध्यान देने की सीख दी है। रहीम जी कहते हैं कि यदि आपकी जान-पहचान बड़े लोगों से हो जाए, तो अपने छोटे साथियों या साधारण चीज़ों को छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है। इसे समझाते हुए वे उदाहरण देते हैं कि जहाँ सुई का काम होता है, वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती। यानी हर व्यक्ति या वस्तु का अपना खास महत्व होता है। इसी तरह, कवि कहते हैं कि हमें केवल एक ही मुख्य काम पर ध्यान देना चाहिए। जो व्यक्ति एक ही समय में कई कामों को साधने की कोशिश करता है, वह किसी भी काम में सफल नहीं हो पाता। ठीक वैसे ही जैसे पेड़ की सिर्फ़ जड़ को सींचने से ही वह खूब फलता-फूलता है। अगर आप पत्तियों और डालियों को अलग से सींचेंगे तो वे सूख भी सकती हैं। यह दोहा हमें सिखाता है कि जीवन में हर छोटी चीज़ की अपनी जगह होती है और हमें अपने प्रयासों को एक सही दिशा में लगाना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि बड़ों को देखकर छोटों को मत छोड़ो, क्योंकि सुई का काम तलवार नहीं कर सकती। हमें एक ही मुख्य काम पर ध्यान देना चाहिए, जैसे पेड़ की जड़ को सींचने से ही वह फलता-फूलता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के दोहों की व्याख्या करते समय, कवि के मुख्य संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत करें और दिए गए उदाहरणों का उल्लेख ज़रूर करें ताकि बात स्पष्ट हो।
Question 2. कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुनं तीन। जैसी संगति बैठिए, तै सोई फल दीन॥ काज परे कछ और है, काज सरै कछु और। रहिमन भंवरी के भए, नदी सिरावत मौर॥
Answer: इन दोहों में रहीम ने संगति के प्रभाव और स्वार्थपूर्ण व्यवहार के बारे में बताया है। पहले दोहे में वे कहते हैं कि स्वाति नक्षत्र की एक बूंद, जब अलग-अलग चीज़ों पर गिरती है, तो अलग-अलग रूप ले लेती है। केले पर गिरने से वह कपूर बन जाती है, सीप में पड़ने पर मोती और सांप के मुंह में जाने पर विष बन जाती है। इससे यह पता चलता है कि हम जैसी संगति करते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। दूसरे दोहे में कवि इंसानों के स्वार्थी स्वभाव पर व्यंग्य करते हैं। वे कहते हैं कि जब किसी से काम होता है तो लोग उसका बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन काम निकल जाने पर वही व्यवहार बदल जाता है। इसका उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि शादी के समय दूल्हे के सिर पर बँधे मौर (मुकुट) का बहुत सम्मान होता है, लेकिन जब फेरे पड़ जाते हैं और शादी पूरी हो जाती है, तो उसे नदी में बहा दिया जाता है। आज भी हमें अपने आसपास ऐसे स्वार्थी लोग देखने को मिलते हैं।
In simple words: रहीम कहते हैं कि हम जैसी संगति करते हैं, वैसे ही बन जाते हैं। साथ ही, लोग काम निकलने पर अपना व्यवहार बदल लेते हैं, जैसे शादी के बाद दूल्हे का मौर फेंक दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: संगति के प्रभाव और स्वार्थपूर्ण व्यवहार के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएं। दोनों दोहों के बीच के संबंध को दिखाएं।
Question 3. जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥ रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार। रहिमन फिरि-फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार ॥
Answer: इन दोहों में रहीम ने अच्छे स्वभाव वाले व्यक्तियों की दृढ़ता और सज्जन लोगों के महत्व को बताया है। पहले दोहे में वे कहते हैं कि जिनका स्वभाव अच्छा होता है, बुरी संगति भी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती। इसका उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि जिस तरह चंदन के पेड़ पर सांप लिपटे रहते हैं, फिर भी चंदन पर सांप के विष का कोई असर नहीं होता, वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता। दूसरे दोहे में रहीम जी सलाह देते हैं कि यदि कोई सज्जन व्यक्ति रूठ जाए, तो उसे सौ बार भी मना लेना चाहिए। वे कहते हैं कि सज्जन लोगों की दोस्ती मोतियों के हार जैसी मूल्यवान होती है। जैसे मोतियों का हार बार-बार टूटने पर भी उसे फेंका नहीं जाता, बल्कि हर बार फिर से पिरो लिया जाता है, वैसे ही सज्जनों की मित्रता को भी हमें हमेशा सहेज कर रखना चाहिए। इससे हमें पता चलता है कि अच्छे लोगों का साथ कितना जरूरी होता है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि अच्छे स्वभाव वाले पर बुरी संगति का असर नहीं होता, जैसे चंदन पर सांप के विष का। सज्जन व्यक्ति के रूठने पर उसे सौ बार मनाओ, जैसे मोतियों का हार बार-बार पिरोया जाता है।
🎯 Exam Tip: अच्छे स्वभाव और सज्जन लोगों की तुलना को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें। नैतिकता और संबंध बनाए रखने के महत्व पर जोर दें।
Question 4. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरबर पियहिं न पान। कहि रहीम पर-काज हित, संपति सँचहिं सुजान॥ थोथे बादर काँर के, ज्यों रहीम घहरात। धनी पुरुष निर्धन भये, करै पाछिली बात ॥
Answer: इन दोहों में रहीम ने परोपकारी स्वभाव और बीते समय की बातों पर घमंड करने वालों के बारे में बताया है। पहले दोहे में वे प्रकृति का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते और तालाब अपना पानी खुद नहीं पीते। इसी तरह, सज्जन लोग धन जमा करते हैं तो वह दूसरों के भले के लिए ही होता है। यानी परोपकारी व्यक्ति अपनी संपत्ति का उपयोग दूसरों की मदद के लिए करते हैं। दूसरे दोहे में कवि उन लोगों पर कटाक्ष करते हैं जो कभी अमीर थे लेकिन अब गरीब हो गए हैं। वे कहते हैं कि आश्विन (क्वार) मास के बादल सिर्फ़ गरजते हैं, बरसते नहीं क्योंकि उनमें पानी नहीं होता। ये बादल सिर्फ़ गरजकर अपने पिछले रूप की याद दिलाते हैं। वैसे ही, अमीर से गरीब हुए लोग सिर्फ़ अपने बीते समय की अमीरी की बातें करते रहते हैं, अपनी मौजूदा हालत पर पर्दा डालने के लिए। यह हमें सिखाता है कि सच्चा बड़प्पन दूसरों की मदद करने में है, न कि दिखावे में।
In simple words: रहीम कहते हैं कि पेड़ और तालाब की तरह सज्जन लोग भी संपत्ति दूसरों के लिए जमा करते हैं। जैसे क्वार के खाली बादल गरजते हैं, वैसे ही गरीब हुए अमीर लोग बस पुरानी बातें करते हैं।
🎯 Exam Tip: परोपकार के उदाहरणों को समझाएं और बताएं कि कैसे धनी व्यक्तियों के बारे में रहीम की बात आज भी सच है। तुलनात्मक शैली का ध्यान रखें।
Question 5. रहिमन अँसुआ नैन ढरि, जिय दुःख प्रकट करे। जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कहि देइ॥ रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि अठिलैहैं लोग सब, बॉटि न लैहैं कोय॥
Answer: इन दोहों में रहीम ने हमें अपने मन के दुख को दूसरों से छुपाकर रखने की सलाह दी है। पहले दोहे में वे कहते हैं कि आँखों से बहने वाले आँसू हमारे मन के दुख को सबके सामने प्रकट कर देते हैं। इसका उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि जिस व्यक्ति को घर से निकाल दिया जाता है, वह भला घर के भेद दूसरों को क्यों नहीं बताएगा? यानी, आँसू बाहर आकर हमारे भीतर के दुख की कहानी कह देते हैं। दूसरे दोहे में रहीम जी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि हमें अपने मन के कष्ट को अपने भीतर ही छिपाकर रखना चाहिए। इसका कारण यह है कि जब हम अपना दुख दूसरों को बताते हैं, तो वे उसे बांटते नहीं हैं। बल्कि, अधिकतर लोग इसे सुनकर हम पर हँसते हैं और हमारा मजाक उड़ाते हैं। इससे हमारा दुख कम होने की बजाय और बढ़ जाता है। इसलिए आत्म-सम्मान के साथ दुख को झेलना ही बेहतर होता है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि आँखों से आँसू बहने पर मन का दुख दिख जाता है। इसलिए अपने मन का दुख दूसरों से छुपाओ, क्योंकि लोग उसे बाँटेंगे नहीं बल्कि हँसी उड़ाएँगे।
🎯 Exam Tip: मन के दुख को गुप्त रखने के महत्व को स्पष्ट करें। तुलना को प्रभावी ढंग से समझाने के लिए आँसू और घर से निकाले गए व्यक्ति के उदाहरण का प्रयोग करें।
Question 6. दीन संबन को लखत है, दीनहिं लखै न कोय। जो रहीम दीनहिं लखै, दीनबंधु सम होय ॥ दोनों रहिमन एक से, जौ लौं बोलत नाहिं। जोन परत हैं काक पिक, ऋतु बसन्त के माँहिं ॥
Answer: इन दोहों में रहीम ने दीन-हीनों की सहायता करने वाले व्यक्ति के महत्व और गुणों को पहचानने की सीख दी है। पहले दोहे में वे कहते हैं कि गरीब व्यक्ति सबकी ओर मदद की आस से देखता है, लेकिन कोई भी उसकी तरफ ध्यान नहीं देता। कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति गरीबों की मदद करता है, वह ईश्वर यानी 'दीनबंधु' के समान होता है। दूसरे दोहे में रहीम जी कहते हैं कि कौआ और कोयल, दोनों देखने में एक जैसे लगते हैं और तब तक उनका अंतर पता नहीं चलता, जब तक वे बोलते नहीं। वसंत ऋतु आने पर जब वे बोलते हैं, तभी पता चलता है कि कौन कौआ है (जो कर्कश बोलता है) और कौन कोयल (जो मधुर बोलती है)। इस तरह, व्यक्ति के बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उसके गुणों और व्यवहार से उसकी सच्ची पहचान होती है। यह हमें सिखाता है कि हमें सिर्फ दिखावे पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि गरीब सबकी ओर देखते हैं, पर उनकी कोई नहीं देखता। जो गरीबों की मदद करे, वह भगवान जैसा है। कौए और कोयल का अंतर वसंत में बोलने पर ही पता चलता है।
🎯 Exam Tip: दोनों दोहों के नैतिक संदेशों को स्पष्ट करें, खासकर दयालुता और गुणों के आधार पर पहचान के महत्व को। कौए और कोयल के उदाहरण का सही इस्तेमाल करें।
Question 7. बड़े बड़ाई ना करें, बड़ो न बोलैं बोल। रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल॥ बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय। रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥
Answer: इन दोहों में रहीम ने सच्चे बड़प्पन और बिगड़ी बात को सुधारने की असंभवता के बारे में बताया है। पहले दोहे में वे कहते हैं कि जो लोग सचमुच बड़े और महान होते हैं, वे कभी अपनी तारीफ खुद नहीं करते और न ही बड़ी-बड़ी बातें बोलते हैं। इसका उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि हीरा, जो लाखों Rs का होता है, कभी खुद यह नहीं बताता कि उसका मूल्य कितना है। उसकी कीमत उसके गुण और चमक से ही पता चलती है। दूसरे दोहे में कवि कहते हैं कि एक बार कोई बात बिगड़ जाए, तो उसे फिर से ठीक करना बहुत मुश्किल होता है, चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें। इसे समझाने के लिए वे फटे हुए दूध का उदाहरण देते हैं। वे कहते हैं कि फटे हुए दूध को कितना भी मथा जाए, उससे मक्खन नहीं निकलता। यानी, कुछ चीजें एक बार खराब हो जाएं तो उन्हें वापस पहले जैसा नहीं किया जा सकता। यह हमें विनम्रता और अपने शब्दों व कर्मों में सावधानी रखने की सीख देता है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि बड़े लोग अपनी तारीफ नहीं करते, जैसे हीरा अपनी कीमत खुद नहीं बताता। एक बार बिगड़ी बात फिर नहीं बनती, जैसे फटे दूध से मक्खन नहीं निकलता।
🎯 Exam Tip: दोनों दोहों के मुख्य संदेश - विनम्रता और सावधानी - को स्पष्ट करें। हीरे और फटे दूध के उदाहरणों का उपयोग कर अपनी व्याख्या को मजबूत करें।
Question 8. विपति भए धन ना रहै, रहे जो लाख करोर। नभ तारे छिपि जात हैं, ज्यों रहीम भए भोर॥ माँगे घटत रहीम पद, कितौ करौ बढ़ि काम। तीन पैग बसुधा करो, तऊ बावनै नाम॥
Answer: इन दोहों में रहीम ने विपत्ति में धन के खत्म होने और मांगने से सम्मान घटने के बारे में बताया है। पहले दोहे में वे कहते हैं कि जब व्यक्ति पर संकट आता है, तो उसका लाखों-करोड़ों Rs का धन भी साथ छोड़ देता है। यह ऐसे ही है जैसे सुबह होते ही आसमान के सारे तारे छिप जाते हैं। यानी, धन-दौलत विपत्ति में साथ नहीं देती। दूसरे दोहे में कवि कहते हैं कि मांगने से व्यक्ति का सम्मान और पद घट जाता है, चाहे उसने कितने भी महान काम क्यों न किए हों। इसका उदाहरण देते हुए वे भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा सुनाते हैं। वे कहते हैं कि विष्णु ने तीन पग में पूरी पृथ्वी को नाप लिया था, फिर भी मांगने के कारण उनका नाम 'बौना' ही पड़ा। यह कथा हमें सिखाती है कि धन-दौलत क्षणिक है, लेकिन आत्म-सम्मान जीवन भर का होता है, इसलिए कभी हाथ नहीं फैलाना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि विपत्ति में धन साथ नहीं देता, जैसे सुबह होने पर तारे छिप जाते हैं। मांगने से सम्मान घटता है, जैसे विष्णु ने तीन पग धरती नापी, फिर भी वामन कहलाए।
🎯 Exam Tip: दोनों दोहों के संदेश को स्पष्ट करें: धन की क्षणभंगुरता और मांगने से होने वाले सम्मान के नुकसान को। वामन अवतार का पौराणिक उदाहरण अवश्य बताएं।
Question 9. मान सहित बिस खाय के, संभु भये जगदीश। बिना मान अमृत पिये, राहु कटायौ सीस॥ रहिमन जिह्वा बाबरी, कहि गई सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।
Answer: इन दोहों में रहीम ने सम्मान के साथ काम करने और वाणी के संयम का महत्व बताया है। पहले दोहे में वे कहते हैं कि भगवान शिव ने सम्मान के साथ विष पीकर 'जगदीश' (संसार के स्वामी) कहलाए, जबकि राहु ने बिना सम्मान के अमृत पीकर अपना सिर कटवा लिया। इसका अर्थ है कि सम्मान के साथ किया गया कोई भी काम महान होता है, जबकि अपमान के साथ मिली चीज़ का कोई मोल नहीं होता। दूसरे दोहे में कवि कहते हैं कि हमारी जीभ बहुत नादान होती है। यह कुछ भी अनुचित और बेमतलब बोल जाती है। जीभ तो बोलने के बाद अंदर ही रहती है, लेकिन उसके बुरे शब्दों का फल सिर को जूतियाँ खाकर भुगतना पड़ता है। इसका मतलब है कि वाणी का असंयम हमें अपमानित कर सकता है। इसलिए हमें बोलने से पहले बहुत सोच-समझकर बोलना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि सम्मान से विष पीने पर शिव भगवान बने, पर बिना सम्मान अमृत पीने पर राहु का सिर कटा। जीभ कुछ भी बोल देती है, पर उसकी वजह से सिर को जूतियाँ खानी पड़ती हैं।
🎯 Exam Tip: दोनों दोहों के गहरे नैतिक संदेशों को स्पष्ट करें: सम्मान के महत्व और वाणी पर नियंत्रण की आवश्यकता। पौराणिक उदाहरणों को ठीक से समझाएं।
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