Download RBSE Solutions for Class 12 Hindi Chapter 03 गौरा
Explore reliable textbook solutions for Chapter 03 गौरा tailored for Class 12 learners. Utilizing these Hindi answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final RBSE evaluations.
Access RBSE Solutions and Answers
Navigate directly to the solved Hindi textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 3 गौरा वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. 'गाय करुणा की कविता है' उक्त कथन है
(a) स्वामी विवेकानन्द का
(b) महात्मा गाँधी का
(c) महादेवी वर्मा का
(d) बर्नाड शॉ का।
Answer: (b) महात्मा गाँधी का
In simple words: यह बात महात्मा गांधी ने कही थी कि गाय करुणा का प्रतीक है, जैसे कोई कविता होती है। उनका मानना था कि गाय बहुत दयालु और शांत होती है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में कथन के साथ विचारक का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, ताकि सही उत्तर का चुनाव किया जा सके।
RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 3 गौरा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गौरा के पुत्र का क्या नाम रखा गया?
Answer: गौरा ने एक बछड़े को जन्म दिया था। वह लाल रंग का था और गेरू के पुतले जैसा दिखता था। इसलिए उसका नाम 'लालमणि' रखा गया था, लेकिन सभी उसे 'लालू' कहकर पुकारते थे। यह नाम उसके लाल रंग के कारण दिया गया था।
In simple words: गौरा के बछड़े का नाम लालमणि रखा गया था, पर सब उसे प्यार से लालू बुलाते थे।
🎯 Exam Tip: चरित्रों के नाम और उनके पीछे की कहानियों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर छोटे प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 2. स्वस्थ पशु के रोमों की क्या विशेषता होती है?
Answer: एक स्वस्थ जानवर के बालों (रोमों) में एक खास चमक होती है। गौरा के रोमों में भी ऐसी ही चमक थी, मानो किसी ने उस पर अभ्रक का पाउडर छिड़क दिया हो। यह चमक जानवर के अच्छे स्वास्थ्य का संकेत होती है।
In simple words: स्वस्थ पशु के बालों में खास चमक होती है, जैसे गौरा के बालों में थी।
🎯 Exam Tip: किसी भी जीव के शारीरिक लक्षणों का वर्णन करते समय, उनके विशिष्ट गुणों को उजागर करें।
Question 3. लेखिका ने किस समस्या के समाधान के लिए ग्वाले को नियुक्त किया?
Answer: गौरा महादेवी वर्मा के घर आ गई थी, लेकिन उसके दूध निकालने की समस्या थी। शहर के नौकर दूध दुहना नहीं जानते थे, और गाँव के नौकरों को भी इसकी आदत नहीं थी, इसलिए वे भी दूध नहीं दुह सकते थे। इस समस्या को हल करने के लिए लेखिका ने एक ग्वाले को काम पर रखा था। वह ग्वाला दूध निकालने का काम करता था।
In simple words: लेखिका ने दूध दुहने की समस्या को सुलझाने के लिए एक ग्वाले को काम पर रखा।
🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख किरदारों से जुड़ी मुख्य समस्याओं और उनके समाधानों पर ध्यान दें।
Question 4. 'जिसकी स्मृति मात्र से आज भी मन सिहर उठता है' लेखिका की वह वेदनामयी स्मृति क्या थी?
Answer: लेखिका को वह दुखद याद सताती थी जब गौरा को गुड़ के साथ एक सुई खिला दी गई थी। वह सुई रक्त के साथ उसके हृदय तक पहुँच गई, जिससे गौरा की मृत्यु से जूझना शुरू हो गया। ग्वाले द्वारा गौरा को सुई खिलाना और गौरा का मौत से संघर्ष करना, यह सब याद करके लेखिका का मन आज भी काँप उठता है। यह घटना लेखिका के लिए बहुत दर्दनाक थी।
In simple words: लेखिका को याद था कि ग्वाले ने गौरा को गुड़ में सुई खिला दी थी, जिससे उसकी मौत से लड़ाई शुरू हुई।
🎯 Exam Tip: कहानी के भावुक और दर्दनाक क्षणों को ध्यान से याद रखें, क्योंकि वे अक्सर प्रतीकात्मक महत्व रखते हैं।
RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 3 गौरा लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. 'गौरा वास्तव में बहुत प्रियदर्शन थी।' -कथन के आधार पर गौरा के बाह्य सौन्दर्य की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: गौरा के सुंदर बाहरी रूप की कई विशेषताएँ थीं। उसके पैर मजबूत और लचीले थे, पुट्ठे भरे हुए थे, और उसकी पीठ चिकनी व भरी हुई थी। उसकी गर्दन लंबी और सुडौल थी, और छोटे-छोटे सींग बाहर निकले हुए थे। उसके कान कमल की दो अधखुली पंखुड़ियों जैसे दिखते थे, जिनमें हल्की लालिमा चमकती थी। उसकी पूँछ लंबी थी, जिसके अंतिम छोर पर काले, घने बाल चामर जैसे लगते थे। गौरा का पूरा शरीर ऐसा लगता था मानो सांचे में ढला हो, और उसके गोरे रंग में एक खास चमक थी, जैसे किसी ने रोमों पर अभ्रक का पाउडर मल दिया हो। उसकी काली, बिल्लौरी आँखें इतनी सुंदर थीं कि देखने वाले को अपनी ओर खींच लेती थीं, और उनमें एक गहरा विश्वास झलकता था। यह सभी विशेषताएँ गौरा को बहुत प्रियदर्शन बनाती थीं।
In simple words: गौरा के पैर मजबूत थे, पीठ चिकनी थी, गर्दन लंबी थी, और उसकी काली आँखों में विश्वास चमकता था। वह देखने में बहुत सुंदर थी।
🎯 Exam Tip: किसी भी पात्र के शारीरिक वर्णन में सभी प्रमुख अंगों की विशेषताओं को विस्तार से लिखें, जिससे एक स्पष्ट चित्र उभर सके।
Question 3. 'अब हमारे घर में दुग्ध-महोत्सव प्रारम्भ हुआ।'-कथन में वर्णित दुग्ध-महोत्सव के अवसर का चित्रण कीजिए।
Answer: गौरा दिन भर में लगभग बारह सेर दूध देती थी। लालमणि (बछड़े) के लिए कुछ सेर दूध छोड़ने के बाद भी बहुत सारा दूध बचता था। यह दूध आस-पास के बच्चों, पालतू कुत्तों और बिल्लियों को दिया जाता, जिससे ऐसा लगता मानो 'दूधो नहाओ' का आशीर्वाद मिल रहा हो। जब दूध दुहा जाता था, तो कुत्ते-बिल्ली गौरा के सामने एक कतार में बैठ जाते थे और महादेव उनके सामने बर्तन रख देते थे। सभी शांति से दूध पीने का इंतजार करते और दूध मिलने पर खुशी मनाते थे। इस प्रकार घर में दूध का उत्सव मनाया जाता था।
In simple words: गौरा बहुत दूध देती थी, जो बछड़े, बच्चों, कुत्तों और बिल्लियों में बँटता था। दूध दुहते समय सब कतार में बैठते और खुशी से पीते, जिससे घर में दूध का एक उत्सव जैसा माहौल बन जाता था।
🎯 Exam Tip: ऐसे वर्णनात्मक प्रश्नों में घटना के हर छोटे-बड़े पहलू को क्रमबद्ध तरीके से लिखें, ताकि पूरा दृश्य स्पष्ट हो सके।
Question 4. गौरा को मृत्यु से बचाने के लिए लेखिका ने क्या-क्या प्रयत्न किये? संक्षेप में लिखिए।
Answer: जब गौरा ने खाना-पीना बंद कर दिया और कमजोर होने लगी, तो महादेवी वर्मा को बहुत चिंता हुई। उन्होंने तुरंत पशु-चिकित्सकों को बुलाया। डॉक्टरों ने जाँच और एक्स-रे करके पता लगाया कि गौरा को गुड़ में मिलाकर सुई खिलाई गई थी। उसे बचाने के लिए सेब का रस पिलाया गया, इंजेक्शन लगाए गए और कई दवाएँ दी गईं। इस प्रकार गौरा को मौत के मुँह से निकालने के लिए लेखिका ने बहुत कोशिशें कीं। हालाँकि, सारे प्रयासों के बावजूद, गौरा को बचाया नहीं जा सका।
In simple words: गौरा के बीमार पड़ने पर लेखिका ने डॉक्टरों को बुलाया, उसे सेब का रस, इंजेक्शन और दवाएँ दीं, लेकिन उसे बचा नहीं पाईं।
🎯 Exam Tip: कहानी में किसी समस्या के समाधान के लिए किए गए प्रयासों को क्रमवार और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें।
Question 5. 'गाय करुणा की कविता है।' –उक्त कथन के आलोक में 'गौरा' रेखाचित्र की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए।
Answer: गाय को करुणा की साक्षात मूर्ति और भावों की कविता माना गया है, क्योंकि उसके हृदय में दया और प्रेम का झरना हमेशा बहता रहता है। गौरा भी एक बहुत संवेदनशील और परोपकारी गाय थी। वह अपना दूध दुहवा कर दूसरों को भी पिलाती थी। पशु-पक्षी उसके साथ खेलते थे; कुत्ते-बिल्ली उसके पेट के नीचे और पैरों के बीच घूमते थे। पक्षी उसकी पीठ और माथे पर बैठकर उसके कान और आँखें खुजाते थे, और वह शांत खड़ी रहती थी। उसे यह स्नेह अच्छा लगता था। बीमार होने पर उसने इंजेक्शन का दर्द भी सहा। कभी-कभी उसकी आँखों में करुणा और विश्वास के भाव झलकते थे। इस प्रकार गौरा का चरित्र गाय की करुणा, संवेदनशीलता और निस्वार्थ प्रेम को दर्शाता है।
In simple words: गाय दया और प्रेम का प्रतीक है, और गौरा भी ऐसी ही थी। वह अपना दूध दूसरों को देती, पशु-पक्षियों के साथ खेलती और दर्द सहती थी, जो उसकी करुणा और संवेदनशीलता दिखाता है।
🎯 Exam Tip: किसी कथन के संदर्भ में पात्र के गुणों को उजागर करते हुए कहानी के मुख्य संदेश को स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 3 गौरा निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. गौरा रेखाचित्र की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: महादेवी वर्मा द्वारा रचित 'गौरा' रेखाचित्र भाषा और शैली दोनों ही दृष्टियों से अपनी खास विशेषताएँ रखता है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएँ नीचे दी गई हैं:
भाषा: रेखाचित्र की भाषा बहुत सरल और साहित्यिक है। इसमें संस्कृत के कई शब्द (तत्सम शब्दावली) जैसे 'वयः संधि', 'प्रतिफलित', 'साहचर्य', 'पयस्विनी' आदि का प्रयोग हुआ है। कहीं-कहीं मुहावरों का उपयोग भी देखने को मिलता है। भावनात्मकता के कारण भाषा कभी-कभी थोड़ी गंभीर भी हो जाती है। अलंकारिक भाषा के प्रयोग से इसमें बहुत सुंदर वर्णन मिलता है। भाषा में प्रतीकात्मकता का उपयोग भी किया गया है, जिससे अर्थ गहरा हो जाता है।
मानवीय संवेदना: इस रेखाचित्र में मानवीय संवेदना का बहुत सुंदर चित्रण है। जब गौरा बीमार हो जाती है और खाना कम कर देती है, तो महादेवी की उसके प्रति दया और चिंता बहुत बढ़ जाती है। वे रात में भी कई बार उसे देखने जाती थीं। जब गौरा के प्राण निकलने लगे, तो महादेवी का हृदय रो पड़ा। गौरा ने उनके कंधे पर सिर रखकर अपने प्राण त्याग दिए। तब उनके मन से यह सवाल निकला कि यह कैसा 'गोपालक देश' है, जहाँ गायों की ऐसी क्रूर हत्या की जाती है। मानवीय संवेदना ही इस कहानी का मुख्य भाव है।
आलंकारिक शैली: रेखाचित्र में अलंकारिक शैली का भरपूर प्रयोग किया गया है। उपमा और उत्प्रेक्षा जैसे अलंकारों का उपयोग अधिक है। गौरा के छोटे कानों की तुलना अधखुली पंखुड़ियों से की गई है। उसके शरीर की चमक की तुलना इटैलियन मार्बल से की गई है। उसकी आँखों पर दीपक की लौ पड़ने पर ऐसा लगता था मानो कई दीपक टिमटिमा रहे हों या काली लहर पर कई दीपक बह रहे हों। माथे पर आँखों का सुंदर अलंकारिक वर्णन है; वे ऐसी लगती हैं मानो बर्फ के नीचे पानी के कुंड हों। तेज और धीमी गति के लिए बाण की तेज गति और धीमी हवा की गति से तुलना की गई है।
चित्रोपमता: इस रेखाचित्र की भाषा में चित्रोपमता बहुत अधिक है। जहाँ गौरा के शरीर और आँखों का वर्णन किया गया है, उसे पढ़कर एक सुंदर गाय का चित्र आँखों के सामने उभर आता है। गौरा के पैर, पीठ, कंधों, सींग, पूँछ आदि का वर्णन पढ़कर गौरा का स्पष्ट चित्र दिमाग में बन जाता है। यह एक शब्दचित्र है जिसे महादेवी जी ने अपनी कला से प्रस्तुत किया है। वे शब्दों के द्वारा ऐसा वर्णन करती हैं कि आँखों के सामने एक जीवंत तस्वीर उभर आती है। इसे बिम्ब योजना भी कह सकते हैं। लालमणि का भी इसी तरह से चित्रात्मक वर्णन किया गया है।
यथार्थता: रेखाचित्र में मनुष्य के मन के यथार्थ का चित्रण भी हुआ है। इसमें दिखाया गया है कि स्वार्थी व्यक्ति अपने फायदे के लिए कैसे जघन्य पाप कर देते हैं। ग्वाले ने अपने फायदे के लिए गौरा को सुई खिला दी, यह स्वार्थी और ईर्ष्यालु व्यक्ति का यथार्थ चित्रण है। अपनों से लगाव होने का सुख और बिछड़ने का दर्द भी इसमें सच्चाई से दिखाया गया है। गौरा के मरने पर घर वाले फिर से दूध लेना शुरू कर देते हैं।
In simple words: 'गौरा' रेखाचित्र में सरल भाषा, मानवीय दया, सुंदर वर्णन और सच्ची घटनाओं का चित्रण है। लेखिका ने शब्दों से गौरा और उसके आसपास का जीवंत चित्र खींचा है, साथ ही यह भी दिखाया है कि लोग अपने स्वार्थ के लिए कितने गिर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, दिए गए विषय के सभी प्रमुख पहलुओं को उप-शीर्षकों के साथ विस्तार से समझाएँ और उदाहरण दें।
RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 3 गौरा वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. गौरा रेखाचित्र में रेखांकित हुई है –
(a) मानवीय क्रूरता
(b) मानवीय संवेदना
(c) मानवीय स्वार्थ
(d) मानवीय ईर्ष्या
Answer: (d) मानवीय ईर्ष्या
In simple words: गौरा रेखाचित्र में लोगों की ईर्ष्या और जलन को दिखाया गया है, जिससे गौरा को नुकसान पहुँचता है।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य संदेश या केंद्रीय भाव को हमेशा ध्यान में रखें, क्योंकि ये अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों का आधार होते हैं।
Question 2. गौरा गोवत्सों से विशिष्ट हो गई थी –
(a) प्रियदर्शन के कारण।
(b) सीधी होने के कारण
(c) दुलार में पलने के कारण
(d) आकार के कारण।
Answer: (c) दुलार में पलने के कारण
In simple words: गौरा को बहुत प्यार मिला, इसलिए वह दूसरे बछड़ों से खास बन गई थी।
🎯 Exam Tip: कहानी के पात्रों की विशिष्टता के कारणों को पहचानें, खासकर जब तुलनात्मक प्रश्न हों।
Question 3. महादेवी ने छोटी बहिन को अपने से बहुत बड़ा माना। इसका कारण था?
(a) लौकिक बुद्धि
(b) व्यावहारिकता
(c) प्रबन्ध क्षमता
(d) गृह संचालन।
Answer: (a) लौकिक बुद्धि
In simple words: महादेवी अपनी छोटी बहन को इसलिए बड़ा मानती थीं, क्योंकि उसकी सोच दुनियादारी और व्यवहारिक ज्ञान से भरी थी।
🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के संबंधों और उनके गुणों के आधार पर ऐसे प्रश्नों का उत्तर दें।
Question 5. गाय के नेत्रों में हिरन के नेत्रों का सा भावे नहीं रहता बल्कि रहता है –
(a) विश्वास
(b) विस्मय
(c) आतंक
(d) भय।
Answer: (a) विश्वास
In simple words: गाय की आँखों में हिरन जैसी हैरानी नहीं होती, बल्कि गहरा विश्वास झलकता है।
🎯 Exam Tip: पशुओं के व्यवहार और उनकी आँखों के भावों को कहानी के संदर्भ में समझें।
Question 6. 'जिसकी कल्पना भी मेरे लिए सम्भव नहीं थी। वह कौन सी कल्पना थी?
(a) ग्वाला विश्वासघात करेगा
(b) गौरा दूध नहीं देगी।
(c) गौरा नहीं बचेगी
(d) ग्वाला दूध नहीं निकालेगा।
Answer: (a) ग्वाला विश्वासघात करेगा
In simple words: लेखिका को यह कल्पना भी नहीं थी कि ग्वाला धोखा देगा और गौरा को नुकसान पहुँचाएगा।
🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ और पात्रों के अप्रत्याशित व्यवहार को याद रखना आवश्यक है।
Question 7. 'मेरे पास पहुँचते ही उसकी आँखों में प्रसन्नता की छाया-सी तैरने लगती थी' कारण था –
(a) स्नेह
(b) आत्मीयता
(c) हाथ फेरना
(d) निकटता
Answer: (b) आत्मीयता
In simple words: गौरा लेखिका के पास आते ही खुश हो जाती थी क्योंकि उसे लेखिका से अपनापन महसूस होता था।
🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के भावनात्मक संबंध को समझने से ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना आसान हो जाता है।
Question. उत्तर:
1. (ख)
2. (ग)
3. (क)
4. (घ)
5. (क)
6. (क)
7. (ख)
Answer: दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर हैं:
1. (ख) महात्मा गाँधी का
2. (ग) दुलार में पलने के कारण
3. (क) लौकिक बुद्धि
4. (घ) गृह संचालन। (Note: This is an unlisted question (4) from the source. Since it's provided as an answer in the key, I am including it as such.)
5. (क) विश्वास
6. (क) ग्वाला विश्वासघात करेगा
7. (ख) आत्मीयता
In simple words: यह दिए गए सभी बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तरों की सूची है।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तरों को ध्यान से मिलाएँ, ताकि कोई गलती न हो।
RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 3 गौरा अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. छोटी बहिन ने महादेवी को क्या समझाया और उसका क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: महादेवी की छोटी बहन ने उनसे कहा कि जब वे इतने सारे पशु-पक्षी पालती हैं, तो एक गाय (गौरा) क्यों नहीं पालतीं। बहन के गाय की उपयोगिता से जुड़े भाषण को सुनकर महादेवी तुरंत गौरा को अपने बंगले पर ले आईं। बहन की बातों का महादेवी पर तुरंत असर हुआ।
In simple words: छोटी बहन ने महादेवी से गाय पालने को कहा, और महादेवी उनकी बात सुनकर गौरा को घर ले आईं।
🎯 Exam Tip: कहानी में किसी पात्र के संवाद और उनके प्रभावों को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 3. गौरा के वर्ण की क्या विशेषता थी?
Answer: गौरा का रंग सफेद था। उसके शरीर की चमक और उज्ज्वलता ऐसी थी कि मानो किसी ने उसके रोमों पर अभ्रक का पाउडर मल दिया हो। उसके बालों में एक खास चमक थी, और जहाँ भी प्रकाश पड़ता था, वहाँ एक विशेष चमक उत्पन्न हो जाती थी। यह उसकी सुंदरता का एक महत्वपूर्ण पहलू था।
In simple words: गौरा सफेद रंग की थी, और उसके शरीर में ऐसी चमक थी जैसे उस पर अभ्रक का पाउडर लगा हो।
🎯 Exam Tip: पात्रों के शारीरिक लक्षणों का वर्णन करते समय उनकी विशेष और अनूठी विशेषताओं पर जोर दें।
Question 4. गौरा के बंगले पर आने पर लोगों ने क्या किया?
Answer: गौरा के बंगले पर आने पर लोगों के दिलों में श्रद्धा और उत्साह उमड़ पड़ा। गौरा को गुलाबों की माला पहनाई गई, उसके माथे पर केसर-रोली का टीका लगाया गया, और चार मुख वाले दीपक से उसकी आरती उतारी गई। उसे दही-पेड़ा खिलाया गया और उसका नाम 'गौरांगिनी' रखा गया। यह सब एक उत्सव जैसा माहौल बना दिया गया था।
In simple words: गौरा के घर आने पर लोगों ने उसका स्वागत माला पहनाकर, टीका लगाकर, आरती उतारकर और दही-पेड़ा खिलाकर किया, और उसे गौरांगिनी नाम दिया।
🎯 Exam Tip: किसी घटना या आगमन के बाद होने वाली प्रतिक्रियाओं और रीति-रिवाजों का वर्णन विस्तार से करें।
Question 5. स्वागत का गौरा पर क्या प्रभाव पड़ा और उसकी आँखें कैसी दिखीं?
Answer: स्वागत से गौरा बहुत खुश हुई। जब उसकी काली आँखों पर दीपक की लौ का प्रतिबिंब पड़ा, तो ऐसा लगा मानो कई दीपक जल रहे हों। रात में उसकी काली आँखों में ऐसा लगता था जैसे काली लहर पर कई दीपक बह रहे हों। यह उसकी सुंदरता को और बढ़ा देता था।
In simple words: स्वागत से गौरा खुश हो गई, और उसकी आँखों में दीपक की रोशनी ऐसे चमक रही थी जैसे कई दीपक जल रहे हों।
🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं और उनके शारीरिक हाव-भाव को घटना के संदर्भ में व्यक्त करें।
Question 6. गौरा की बिल्लौरी आँखों के बारे में क्या कल्पना की गई है?
Answer: गौरा की काली बिल्लौरी आँखों की तरल सुंदरता देखने वाले को अपनी ओर खींच लेती थी। उसके मुख पर आँखें ऐसी लगती थीं जैसे बर्फ के नीचे पानी के कुंड हों, और उनमें गहरा विश्वास झलकता था। यह आँखों का वर्णन उसकी मासूमियत और आकर्षण को दर्शाता है।
In simple words: गौरा की काली आँखें बर्फ के नीचे पानी के कुंड जैसी लगती थीं, और उनमें विश्वास भरा था।
🎯 Exam Tip: काव्य-शैली या कल्पनात्मक वर्णन वाले प्रश्नों में, मूल कल्पना को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 7. गाँधी ने गाय को करुणा की कविता क्यों कहा है?
Answer: गौरा की चाल धीमी और शांत थी। उसकी चाल की तुलना किसी से नहीं की जा सकती थी। लेखिका ने कल्पना की है कि उसकी यह धीमी चाल उस हवा जैसी थी जो फूलों के समूह के ऊपर धीरे-धीरे बहती है और सबको अपनी ओर आकर्षित करती है। गाय स्वभाव से बहुत शांत और दयालु होती है, इसलिए गाँधीजी ने उसे करुणा की कविता कहा।
In simple words: गाय की चाल बहुत शांत और धीमी थी, जिसे लेखिका ने फूलों पर बहती हवा जैसा बताया है। गांधीजी ने गाय को करुणा की कविता कहा क्योंकि वह स्वभाव से दयालु होती है।
🎯 Exam Tip: किसी कथन के पीछे के गहरे अर्थ को समझाते हुए, उसके प्रतीकात्मक महत्व को स्पष्ट करें।
Question 9. महादेवी के आने और समय पर भोजन न मिलने पर गौरा क्या करती थी?
Answer: जब महादेवी की मोटर फाटक पर आती थी, तो गौरा 'बाँ-बाँ' की आवाज करने लगती थी। यदि उसे समय पर भोजन नहीं मिलता था, तो थोड़ी देर इंतजार करने के बाद वह जोर-जोर से रंभाने लगती थी और अपना सिर घर के ऊपर उठा लेती थी, जैसे शिकायत कर रही हो।
In simple words: महादेवी के आने पर गौरा बाँ-बाँ करती थी, और भोजन न मिलने पर रंभाने लगती थी और अपना सिर घर के ऊपर उठा लेती थी।
🎯 Exam Tip: पात्रों के व्यवहार और उनकी आदतों का वर्णन करते समय, उनकी प्रतिक्रियाओं को स्पष्ट करें।
Question 10. 'गौरा हमसे मानवीय स्नेह के समान ही निकटता चाहती थी।' इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जब महादेवी गौरा के पास पहुँचती थीं, तो वह प्यार पाने के लिए अपनी गर्दन आगे बढ़ा देती थी। महादेवी के हाथ फेरने पर वह अपना चेहरा उनके कंधे पर रख लेती और आँखें बंद कर लेती थी, जिससे लगता था कि उसे मानवीय स्नेह पर भरोसा है। वह हमेशा स्नेह की उम्मीद करती थी, और जब लेखिका दूर जाती थीं तो वह मुड़-मुड़कर उन्हें देखती थी। यह सब दिखाता है कि गौरा मनुष्यों के स्नेह और निकटता की कितनी भूखी थी।
In simple words: गौरा को मानवीय प्यार बहुत पसंद था। महादेवी के पास आने पर वह गर्दन आगे करती, कंधे पर सिर रखती और आँखें बंद कर लेती थी, जिससे उसका स्नेह झलकता था।
🎯 Exam Tip: कथन को स्पष्ट करते समय, कहानी से जुड़े उदाहरणों का प्रयोग करें ताकि भाव को गहराई से समझाया जा सके।
Question 11. गौरा के वत्स का लालमणि नाम क्यों रखा गया?
Answer: गौरा के बछड़े का रंग लाल था। उसके लाल रंग के कारण वह गेरू के पुतले जैसा दिखता था। उसके पैरों के खुरों के ऊपर सफेद घेरे थे, जो ऐसे लगते थे मानो गेरू की बनी मूर्ति को चाँदी के आभूषणों से सजाया गया हो। इसी कारण उसका नाम लालमणि रखा गया था, जो उसके लाल रंग और सुंदरता को दर्शाता था।
In simple words: गौरा के बछड़े का रंग लाल था, इसलिए उसका नाम लालमणि रखा गया।
🎯 Exam Tip: नामों के पीछे के कारणों को स्पष्ट करें, खासकर जब वे किसी विशिष्ट विशेषता पर आधारित हों।
Question 12. दुग्ध दोहन के समय जो दृश्य उपस्थित होता, उसे लिखिए।
Answer: जब दूध दुहा जाता था, तो कुत्ते-बिल्ली गौरा के सामने एक कतार में बैठ जाते थे। महादेव उनके सामने बर्तन रख देते थे। वे सभी मेहमानों की तरह बहुत शांति से इंतजार करते थे और दूध पीने के बाद खुशी से उछलते-कूदते थे। यह दृश्य घर में एक छोटे से उत्सव जैसा लगता था।
In simple words: दूध दुहते समय कुत्ते-बिल्ली गौरा के सामने कतार में बैठते थे, दूध पीते थे और फिर खुशी से उछलते-कूदते थे।
🎯 Exam Tip: किसी भी घटना का वर्णन करते समय, उसमें शामिल सभी पात्रों की भूमिका और गतिविधियों को शामिल करें।
RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 3 गौरा लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गौरा महादेवी के बंगले पर कैसे आई?
Answer: गौरा महादेवी की छोटी बहन के घर में लाड़-प्यार से पली हुई बछड़ी थी। बहन ने महादेवी से कहा कि जब वे इतने सारे पशु-पक्षी पालती हैं, तो एक गाय क्यों नहीं पालतीं। बहन के गाय पालने के फायदे बताने वाले भाषण को सुनकर महादेवी पर उसका प्रभाव पड़ा। उन्होंने सोचा कि गाय पालना अच्छा रहेगा, और इस तरह गौरा उनके बंगले पर आ गई।
In simple words: महादेवी की बहन ने उन्हें गाय पालने को कहा, और महादेवी मान गईं, इसलिए गौरा उनके बंगले पर आई।
🎯 Exam Tip: किसी घटना की शुरुआत या पात्र के आगमन के कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 3. महादेवी ने गौरा की आँखों की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
Answer: महादेवी ने गौरा की काली बिल्लौरी आँखों की कई विशेषताओं का उल्लेख किया है। उसकी आँखें सांचे में ढले मुख पर ऐसी लगती थीं मानो बर्फ के नीचे पानी के कुंड हों, जिनमें एक गहरा विश्वास झलकता था। उसकी आँखों में हिरन जैसी चकित करने वाली उत्सुकता नहीं थी, बल्कि गहरा अपनापन और भरोसा था। उसकी बड़ी चमकीली और काली आँखों पर जब आरती के दीये का प्रतिबिंब पड़ता था, तो ऐसा लगता था मानो कई दीये जल रहे हों या रात में काली लहर पर कई दीये बह रहे हों। इस प्रकार महादेवी ने गौरा की आँखों का बहुत ही सुंदर और अलंकारिक वर्णन किया है।
In simple words: महादेवी ने गौरा की काली आँखों को बर्फ के नीचे पानी के कुंड जैसा बताया है, जिनमें विश्वास झलकता था। दीये की रोशनी पड़ने पर वे कई जलते दीयों जैसी दिखती थीं।
🎯 Exam Tip: किसी पात्र के अंगों के विशेष वर्णन में, उपमाओं और अलंकारों का प्रयोग करें ताकि वर्णन अधिक प्रभावी लगे।
Question 4. “उस पशु को मनुष्य से यातना ही नहीं, निर्मम मृत्यु तक प्राप्त होती है।” किस पशु की ओर कैसी निर्मम मृत्यु? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन में 'गौरा' पशु की ओर संकेत किया गया है, जिसे महादेवी ने अपनी छोटी बहन से प्राप्त किया था। गौरा एक सुंदर, करुणा की मूर्ति, और संवेदनशील गाय थी, जिसकी आँखों में अपनापन और आत्मविश्वास झलकता था। उसकी निर्मम मृत्यु हुई जब एक स्वार्थी ग्वाले ने, जिसे महादेवी ने दूध दुहने के लिए रखा था, उसे गुड़ में सुई मिलाकर खिला दी। धीरे-धीरे वह कमजोर होती गई और असहनीय कष्ट सहने के बाद अंत में मौत की नींद सो गई। यह अमानवीय कृत्य उस मासूम पशु को सहन करना पड़ा, और इस यातना से महादेवी को भी बहुत पीड़ा हुई।
In simple words: यह कथन गौरा गाय के बारे में है, जिसे स्वार्थी ग्वाले ने गुड़ में सुई मिलाकर मार दिया था। गौरा ने बहुत कष्ट सहे और महादेवी को यह देखकर बहुत दुख हुआ।
🎯 Exam Tip: उद्धृत वाक्यों के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए, घटना के कारणों और परिणामों को विस्तार से समझाएँ।
Question 5. गौरा महादेवी के बंगले पर आकर परिवार में हिल-मिल गई थी। स्पष्ट कीजिए।
Answer: गौरा कुछ ही दिनों में महादेवी के परिवार में पूरी तरह घुलमिल गई थी। पशु-पक्षी भी अपनी उम्र और आकार का अंतर भूल गए थे। कुत्ते-बिल्ली उसके पेट के नीचे और पैरों के बीच खेलते थे। पालतू पक्षी उसकी पीठ और माथे पर बैठकर उसके कान और आँखें खुजलाते थे, और वह शांत खड़ी रहती थी। वह किसी भी तरह की चंचलता नहीं दिखाती थी। गौरा उनकी उपस्थिति का आनंद आँखें मूँदकर लेती थी। दूध दुहते समय यदि कुत्ते-बिल्ली आने में देर करते थे, तो वह रंभा-रंभा कर उन्हें बुला लेती थी। वह महादेवी की आवाज और पैरों की आहट को पहचान लेती थी।
In simple words: गौरा जल्दी ही परिवार में घुलमिल गई। कुत्ते-बिल्ली और पक्षी उसके साथ खेलते थे, और वह उनसे प्यार पाती थी। वह शांत रहती और परिवार के सदस्यों को पहचानती थी।
🎯 Exam Tip: पात्रों के सामाजिक संबंधों और उनके आपसी जुड़ाव को समझाते हुए उदाहरणों का प्रयोग करें।
Question 7. दुग्ध दोहन के समय एक परिवार का सा दृश्य देखने को मिलता। स्पष्ट कीजिए।
Answer: दूध दुहने के बाद, लालमणि (बछड़े) के लिए कई सेर दूध छोड़ा जाता था, फिर भी पर्याप्त दूध बचता था। कुछ दूध आस-पास के बच्चों को दिया जाता था, और कुत्ते-बिल्लियों को भी 'दूधो नहाओ' का आशीर्वाद मिलता था। परिवार के सदस्यों की तरह कुत्ते-बिल्ली एक कतार में शांति से बैठ जाते थे। महादेव सबके सामने बर्तन रख देते थे। सभी को नाप-नापकर दूध दिया जाता था। वे अतिथियों की तरह शिष्टता का परिचय देते थे। दूध पीने के बाद सभी अपने-अपने स्वर में कृतज्ञता व्यक्त करते और गौरा के चारों ओर उछलते-कूदते थे। यदि उनके आने में देर होती, तो गौरा रंभा-रंभाकर सबको बुलाती थी, जैसे परिवार में सबको बुलाया जाता है। इस प्रकार दूध दुहने के समय एक परिवार जैसा सुंदर दृश्य देखने को मिलता था।
In simple words: दूध दुहते समय, कुत्ते-बिल्ली कतार में बैठते, दूध पीते और खुशी से खेलते थे, जैसे कोई परिवार का उत्सव हो। गौरा उन्हें बुलाती भी थी।
🎯 Exam Tip: घटना के दौरान उत्पन्न होने वाले माहौल और भावनाओं का वर्णन स्पष्टता से करें।
Question 8. दुग्ध दोहन की क्या समस्या थी और उसका समाधान कैसे हुआ? अन्ततोगत्वा इसका क्या परिणाम निकला?
Answer: गौरा के दूध दुहने की समस्या यह थी कि शहर के नौकर दूध दुहना नहीं जानते थे, और गाँव के नौकरों को भी इसका अभ्यास नहीं था, इसलिए उन्होंने दूध दुहने से मना कर दिया। इस समस्या को हल करने के लिए एक ग्वाले को रखा गया। ग्वाले ने कुछ दिनों तक तो ठीक से दूध दुहा, लेकिन बाद में अपने स्वार्थ के लिए गौरा को गुड़ में मिलाकर सुई खिला दी। इसका परिणाम यह हुआ कि महादेवी को अपनी प्यारी गाय गौरा को खोना पड़ा, और यह दुख उन्हें अंत तक सताता रहा। ग्वाले का विश्वासघात गौरा की मौत का कारण बना।
In simple words: दूध दुहने की समस्या थी, जिसे हल करने के लिए एक ग्वाला रखा गया। लेकिन ग्वाले ने गौरा को सुई खिला दी, जिससे गौरा मर गई और महादेवी को बहुत दुख हुआ।
🎯 Exam Tip: समस्या, समाधान और उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से क्रमबद्ध तरीके से बताएँ।
Question 9. "मुझे कष्ट और आश्चर्य दोनों की अनुभूति हुई।” महादेवी को कष्ट और आश्चर्य क्यों हुआ?
Answer: गौरा, जो सबके साथ बहुत घुलमिल गई थी, जब बीमार हो गई और इलाज के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ, तो महादेवी को बहुत कष्ट हुआ। जाँच करने पर पता चला कि उसे सुई खिलाई गई है, जो रक्त संचार के साथ उसके हृदय तक पहुँच चुकी थी, जिससे उसकी मृत्यु निश्चित थी। यह जानकर महादेवी को बहुत दुख हुआ। उन्हें आश्चर्य इस बात पर हुआ कि जिस ग्वाले पर उन्होंने दूध दुहने का भरोसा किया था, उसी ने अपने स्वार्थ के लिए गौरा को सुई खिलाकर धोखा दिया। यह सोचकर महादेवी को आश्चर्य हुआ कि मनुष्य इतना स्वार्थी और नीच कैसे हो सकता है। सुंदर गाय की मृत्यु की कल्पना उनके लिए कष्टकारक बन गई, और ग्वाले के इस कृत्य से उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ।
In simple words: गौरा के मरने से महादेवी को दुख हुआ। उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि जिस ग्वाले पर उन्होंने भरोसा किया था, उसने ही गौरा को सुई खिलाकर मार डाला था।
🎯 Exam Tip: किसी पात्र की भावनाओं को समझाते हुए, उनके कारणों और परिस्थितियों का स्पष्टीकरण दें।
Question 11. "गौरा को मृत्यु से संघर्ष आरम्भ हुआ।” महादेवी ने गौरा को मृत्यु के संघर्ष से बचाने के लिए क्या किया?
Answer: जब गौरा ने खाना-पीना बंद कर दिया और कमजोर होने लगी, तो महादेवी ने उसे बचाने के लिए चिकित्सकों से सलाह ली। डॉक्टरों ने बताया कि उसे गुड़ के साथ सुई खिलाई गई है, जो रक्त संचार के साथ हृदय तक पहुँच गई थी और कभी भी उसकी मृत्यु हो सकती थी। उपचार के लिए, डॉक्टरों ने सेब का रस पिलाने की सलाह दी ताकि सुई पर कैल्शियम जम जाए और वह चुभे नहीं। उसे खूब सारा सेब का जूस पिलाया गया और शक्ति के लिए इंजेक्शन भी दिए गए। यह इंजेक्शन शल्य चिकित्सा के दर्द जैसा था, जिसे गौरा ने सहा। लेकिन इन सबके बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ और गौरा मौत के करीब आती चली गई। दूर-दूर के डॉक्टरों को भी बुलाया गया, पर गौरा को बचाया नहीं जा सका।
In simple words: गौरा को बचाने के लिए महादेवी ने डॉक्टरों की सलाह ली। उसे सेब का रस, इंजेक्शन और दवाएँ दी गईं ताकि सुई का असर कम हो, पर वह बच न सकी।
🎯 Exam Tip: किसी समस्या के समाधान के लिए किए गए सभी प्रयासों को क्रमबद्ध तरीके से और विस्तार से लिखें।
Question 12. गौरा की अस्वस्थता से अनभिज्ञ लालमणि की क्रियाओ का वर्णन कीजिए।
Answer: लालमणि (बछड़ा) अपनी माँ गौरा की बीमारी और उसकी मौत के करीब होने से अनजान था। उसे दूसरी गाय का दूध पिलाया जाता था, जो उसे पचता नहीं था। वह अपनी माँ का दूध पीना चाहता था और उसके साथ खेलना भी चाहता था। वह गौरा के पास पहुँचता और अपना सिर मार-मारकर उसे उठाना चाहता था। वह खेलने के लिए उसके चारों ओर उछलता-कूदता रहता था। लेकिन उसे अपनी माँ की गंभीर बीमारी का कोई अंदाजा नहीं था। गौरा इतनी कमजोर हो गई थी कि वह उठ नहीं सकती थी और न ही लालमणि को अपनी मजबूरी बता पाती थी। वह उसे कैसे बताती कि उसका अंतिम समय आ गया है और वह उसे छोड़कर जा रही है।
In simple words: लालमणि अपनी बीमार माँ गौरा की हालत से अनजान था। वह अपनी माँ का दूध पीना और उसके साथ खेलना चाहता था, पर गौरा बहुत कमजोर थी और उसे कुछ बता नहीं पाती थी।
🎯 Exam Tip: पात्रों की मासूमियत या अज्ञानता को दर्शाते हुए, उनके व्यवहार का वर्णन भावनात्मक रूप से करें।
Question 13. "अब मेरी एक ही इच्छा थी।” महादेवी की इच्छा क्या थी? गौरा की मृत्यु का उन पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: जब गौरा की आँखें धीरे-धीरे चमक खोने लगीं और सेब का रस भी उसके गले से नहीं उतर रहा था, तब महादेवी की इच्छा थी कि वे गौरा के अंतिम समय में उसके पास रहें। वे रात-दिन कई बार उसे देखने जाती थीं। अंत में ब्रह्ममुहूर्त में जब महादेवी उसे देखने गईं, तो गौरा ने हमेशा की तरह अपना सिर उठाकर उनके कंधे पर रखा और थोड़ी देर बाद उसके प्राण निकल गए। उसका सिर पत्थर जैसा भारी होकर जमीन पर फिसल गया। महादेवी पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। वे बहुत भावुक हो उठीं। गौरा को ले जाते समय उनके हृदय में करुणा का समुद्र उमड़ पड़ा। उनके मन में यह भाव आया कि यह कैसा गोपालक देश है, जहाँ गायों की ऐसी क्रूर हत्या की जाती है। यह घटना उन्हें भीतर तक झकझोर गई।
In simple words: महादेवी चाहती थीं कि गौरा के अंतिम समय में वे उसके पास रहें। गौरा की मृत्यु से महादेवी बहुत दुखी हुईं और सोचने लगीं कि यह कैसा देश है जहाँ गायों की ऐसी क्रूर हत्या होती है।
🎯 Exam Tip: पात्रों की अंतिम इच्छाओं और किसी घटना के भावनात्मक प्रभावों को स्पष्ट और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करें।
Question 2. बिम्ब को परिभाषित करते हुए सिद्ध कीजिए कि 'गौरा' रेखाचित्र में बिम्ब प्रधान शैली का प्रयोग किया गया
Answer: बिम्ब शब्द का प्रयोग साहित्य में काव्य-बिम्ब के लिए होता है। हिंदी में बिम्ब शब्द का उपयोग अंग्रेजी के 'इमेज' शब्द के पर्याय के रूप में किया जाता है, जिसका अर्थ है किसी वस्तु या दृश्य का मानसिक चित्र बनाना।
'गौरा' रेखाचित्र में बिम्ब प्रधान शैली का प्रयोग किया गया है। गौरा और लालमणि का जो शब्द चित्र महादेवी जी ने खींचा है, वह एक जीवंत बिम्ब प्रस्तुत करता है। गौरा स्वस्थ थी, उसके गोरे रंग में एक खास चमक थी, मानो किसी ने उसके रोमों पर अभ्रक का पाउडर मल दिया हो, जो प्रकाश में विशेष रूप से चमकता था। उसका शरीर एक सांचे में ढला हुआ लगता था। उसके पैर मजबूत और लचीले थे, पुट्ठे भरे हुए थे, पीठ चिकनी और गर्दन लंबी व सुडौल थी। छोटे-छोटे सींग बाहर निकले हुए थे, और अंदर की लालिमा झलकते कमल की अधखुली पंखुड़ियों जैसे कान थे। उसकी लंबी पूँछ थी जिसके छोर पर काले-काले बाल थे। इस वर्णन को पढ़कर गौरा बछड़ी का रूप आँखों के सामने आ जाता है। यदि कोई चित्रकार इसे चित्र बनाना चाहे, तो वह इसे पढ़कर चित्र भी बना सकता है। यह वर्णन मन में एक स्पष्ट चित्र उभार देता है।
लालमणि का चित्रांकन भी इसी प्रकार का है। उसका रंग लाल गेरू के पुतले जैसा लगता है। माथे पर पान के आकार का सफेद टीका है। पैरों में खुरों के पास सफेद घेरे हैं, ऐसा लगता है कि गेरू की बनी मूर्ति को चाँदी के आभूषणों से सजाया गया हो। वह किस तरह उछलता-कूदता है, माँ का दूध पीने के लिए किस प्रकार गौरा को उठाने का प्रयास करता है। यह सारा वर्णन भी आँखों के सामने उभर आता है। चित्रकार रेखाओं से चित्र बनाता है, जबकि महादेवी ने शब्दों की रेखाओं से चित्र बनाया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि 'गौरा' एक सफल रेखाचित्र है जो बिम्ब प्रधान शैली का उपयोग करता है।
In simple words: बिम्ब का मतलब है मन में चित्र बनाना। 'गौरा' रेखाचित्र में लेखिका ने शब्दों से गौरा और लालमणि का ऐसा वर्णन किया है कि उनका पूरा चित्र आँखों के सामने आ जाता है, जैसे किसी चित्रकार ने बनाया हो।
🎯 Exam Tip: बिम्ब प्रधान शैली वाले प्रश्नों में, बिम्ब की परिभाषा देकर कहानी के उदाहरणों के साथ उसकी पुष्टि करें।
Question 3. रेखाचित्र किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए कि महादेवी का 'गौरा' एक रेखाचित्र है।
Answer: किसी वस्तु का केवल रेखाओं से बनाया गया चित्र रेखाचित्र कहलाता है। इसे स्केच या खाका भी कहते हैं। जैसे एक चित्रकार अपनी कलम से रेखाएँ खींचकर किसी चित्र को इस तरह उतार देता है कि वह सच्चा लगे और उसमें वर्णित वस्तु हमारी आँखों के सामने उभरकर आ जाए, ठीक वैसे ही रेखाचित्र शब्दों से ऐसा ही प्रभाव उत्पन्न करता है। हमें ऐसा लगता है मानो हम अपनी आँखों से उस वस्तु को देख रहे हों।
महादेवी ने भी 'गौरा' में शब्दों की रेखाओं द्वारा गौरा और लालमणि का ऐसा चित्रण किया है कि उन्हें पढ़कर ऐसा लगता है मानो वे हमारे सामने ही खड़े हों। गौरा की रोमावलियों में चमक है, उसका शरीर उज्ज्वल और सफेद है। पैर लचीले और मजबूत हैं, पुट्ठे भरे हुए हैं, पीठ पर चिकनाहट है, गर्दन लंबी और सुडौल है, सींग छोटे-छोटे निकले हुए हैं, और कान कमल की दो अधखुली पंखुड़ियों जैसे हैं। पूँछ लंबी है और छोर पर काले बाल चामर जैसे लगते हैं। पूरे शरीर पर एक तेज है। उसकी बड़ी चमकीली और काली आँखों पर जब आरती की लौ पड़ती है तो ऐसा लगता है मानो बहुत से दीये झिलमिला रहे हों या काली लहर पर कई दीये बह रहे हों। आँखों में आत्मविश्वास झलकता है। हाथ फेरने पर गौरा महादेवी के कंधे पर अपना मुख रख देती है। गौरा के अंतिम क्षणों का चित्रण भी बहुत वास्तविक है। वह कमजोर और शिथिल हो गई है। अंतिम समय में महादेवी के कंधे पर सिर रख देती है। शब्दों द्वारा इस प्रकार वर्णन किया गया है कि गौरा का चित्र आँखों के सामने उभरकर आ जाता है। लगता है जैसे गौरा हमारे सामने है और हम उसे स्वस्थ रूप में और अंतिम समय के रूप में देख रहे हैं। महादेवी के शब्दों में वह शक्ति है जो एक चित्र उभार देती है।
लालमणि का चित्रांकन भी इसी प्रकार का है। उसका वर्ण लाल गेरू के पुतले जैसा लगता है। माथे पर पान के आकार का सफेद टीका है। पैरों में खुरों के पास सफेद वलय हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि गेरू की वत्समूर्ति को चाँदी के आभूषणों से अलंकृत कर दिया गया है। वह किस तरह उछलता-कूदता है। माँ का दूध पीने के लिए किस प्रकार गौरा को उठाने का प्रयत्न करता है। सारा वर्णन आँखों के सामने उभर आता है। चित्रकार रेखाओं से चित्र बनाता है। महादेवी ने शब्दों की रेखाओं से चित्र बनाया है। अतः स्पष्ट है कि यह एक सफल रेखाचित्र है।
In simple words: रेखाचित्र शब्दों से किसी चीज का ऐसा चित्र बनाना है, जो बिलकुल असली लगे। महादेवी ने 'गौरा' में शब्दों के ऐसे चित्र बनाए हैं, जिनसे गौरा और लालमणि हमारे सामने जीवित लगते हैं।
🎯 Exam Tip: रेखाचित्र की परिभाषा देकर, कहानी के उदाहरणों से समझाएँ कि कैसे शब्दों से चित्र बनाया जाता है।
Question 4. 'गौरा रेखाचित्र में गाय के अंतरंग व बाह्य सौन्दर्य के साथ मानवीय संवेदना का रेखांकन है।' स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'गौरा' रेखाचित्र में गाय के बाहरी और आंतरिक सौंदर्य के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का भी चित्रण किया गया है। गौरा का बाहरी सौंदर्य जितना आकर्षक था, उसका आंतरिक स्वभाव भी उतना ही संवेदनशील था। गौरा एक स्वस्थ गाय थी, और उसके गोरे रंग में एक खास चमक थी, जिससे वह बहुत सुंदर लगती थी। उसकी उज्ज्वलता और सफेद रंग को देखकर ऐसा लगता था, मानो किसी ने उसके रोमों पर अभ्रक का पाउडर मल दिया हो।
वह बहुत स्नेहमयी और ममतामयी थी। बंगले पर आते ही वह सबसे घुलमिल गई थी। पशु-पक्षी उसके साथ खेलने लगे थे। कुत्ते-बिल्ली उसके पेट के नीचे और पैरों के बीच खेलते थे, और पक्षी उसकी पीठ पर बैठकर उसके कान और आँखें खुजाते थे। वह मानवीय स्नेह की भूखी थी। महादेवी की मोटर जैसे ही आती, वह 'बाँ-बाँ' करके पुकारती थी। पास आने पर गर्दन आगे बढ़ा देती, और हाथ फेरने पर अपना चेहरा महादेवी के कंधे पर रख आँखें बंद कर लेती थी। जब महादेवी दूर जाती थीं, तो वह मुड़-मुड़कर उन्हें देखती थी। दूध दुहते समय कुत्ते-बिल्ली के देर से आने पर वह रंभा-रंभाकर उन्हें बुलाती थी। यह आत्मीयता उसका सौंदर्य थी। उसका आंतरिक अपनापन इन्हीं भावनाओं से भरा था। अंतिम समय में भी उसने महादेवी के कंधे पर अपना मुख रखकर प्राण त्याग दिए।
रेखाचित्र का अंतिम भाग मानवीय संवेदना से भरा है। गौरा के बीमार होने पर महादेवी चिंतित हो गईं। उन्होंने उसके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। वे रात-दिन उसे बार-बार देखने जाती थीं। अंतिम समय में वे उसके पास रहना चाहती थीं। गौरा को ले जाते समय महादेवी के हृदय में करुणा का समुद्र उमड़ आया। उन्हें बहुत पीड़ा हुई। 'गौरा' रेखाचित्र मानवीय संवेदना का एक सुंदर उदाहरण है।
In simple words: 'गौरा' रेखाचित्र में गाय की बाहरी सुंदरता (सफेद रंग, चमकती आँखें) और अंदर की दयालुता, स्नेह (पशु-पक्षियों से लगाव, मानवीय प्रेम की चाह) को दिखाया गया है। साथ ही, गौरा की बीमारी और मृत्यु पर महादेवी की गहरी मानवीय संवेदना और दुख को भी बहुत अच्छे से व्यक्त किया गया है।
🎯 Exam Tip: पात्र के बाहरी और आंतरिक गुणों को एक साथ समझाएँ, और उन्हें मानवीय भावनाओं से जोड़कर रेखाचित्र के मुख्य संदेश को स्पष्ट करें।
गौरा (रेखाचित्र) लेखिका परिचय
छायावादी कवयित्री और गद्य लेखिका के रूप में प्रसिद्ध महादेवी वर्मा का जन्म 1907 ई. में फर्रुखाबाद में एक संपन्न परिवार में हुआ। वे हिंदी के छायावादी काव्य-आंदोलन के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनकी कविता में वेदना और करुणा की प्रधानता है। इन्हें आधुनिक युग की मीरा भी कहा जाता है। महादेवी की चिंतन वृत्ति साहित्य और समाज दोनों दिशाओं में प्रवाहित हुई है। उनका व्यक्तित्व सरलता, उदारता, संवेदनशीलता, आत्मीयता एवं सात्विकता से ओत-प्रोत है। उन्होंने हिंदी संस्मरण और रेखाचित्र विधा को अप्रतिम ऊँचाई दी। महादेवी वर्मा का गद्य भाव एवं भाषा की दृष्टि से अनुपम है। चित्रकला और संगीत कला में भी इन्होंने दक्षता प्राप्त की। इन्होंने 'चाँद' पत्रिका का संपादन भी किया और हिंदी लेखकों के सहायतार्थ 'साहित्यकार संसद' नामक संस्था की स्थापना की। इनकी मृत्यु सन् 1987 में हुई। इनकी प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं।
कविता संग्रह-
नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा आदि। संस्मरण एवं रेखाचित्र-अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, मेरा परिवार। निबंध संग्रह-श्रृंखला की कड़ियाँ, साहित्यकार की आस्था एवं अन्य निबंध।
In simple words: महादेवी वर्मा एक प्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं, जो 1907 में फर्रुखाबाद में पैदा हुई थीं। उनकी कविताओं में दुख और दया ज्यादा दिखती है, और उन्हें 'आधुनिक मीरा' भी कहते हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में बहुत योगदान दिया और 'चाँद' पत्रिका का संपादन भी किया।
🎯 Exam Tip: किसी भी लेखक का परिचय देते समय, उनके जन्म-मृत्यु, साहित्यिक योगदान, और प्रमुख रचनाओं को शामिल करें।
गौरा (रेखाचित्र) पाठ-सारांश
'गौरा' एक गाय थी जो महादेवी की बहन के घर पली थी और लाड़-प्यार के कारण वह अन्य गोवत्साओं से विशिष्ट थी। वह बहन के घर से ही महादेवी के घर आई थी। बहन ने उसकी उपयोगिता बताई थी जो महादेवी को उचित लगी। तभी वे उसे अपने घर ले आईं। गाय के शारीरिक सौन्दर्य ने महादेवी को प्रभावित किया। वह गौर वर्ण की थी। वह अत्यन्त सुन्दर एवं चित्ताकर्षक थी।
In simple words: 'गौरा' कहानी एक गाय की है जो महादेवी की बहन के घर पली थी। महादेवी अपनी बहन की बात मानकर उसे अपने घर ले आईं। गौरा बहुत सुंदर और प्यारी गाय थी।
🎯 Exam Tip: पाठ-सारांश में कहानी की मुख्य घटनाओं और पात्रों का संक्षिप्त परिचय दें।
Free study material for Hindi
Step-by-Step Textbook Answers: Class 12 Hindi Chapter 03 गौरा
Chapter Exercise Answers for Class 12 Hindi
Access structured RBSE textbook solutions for Chapter 03 गौरा. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 12 Hindi, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.
Detailed Answer Guides for Chapter 03 गौरा
Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 12 Hindi module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for RBSE exams.
Complete Preparation Kit for Class 12 Exams
Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 12 Hindi.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 3 गौरा is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Hindi are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 3 गौरा as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 3 गौरा will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Hindi. You can access RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 3 गौरा in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 3 गौरा in printable PDF format for offline study on any device.