RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 22 भारत भी महाशक्ति बन सकता है।

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Class 12 Hindi Chapter 22 भारत भी महाशक्ति बन सकता है। RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 भारत भी महाशक्ति बन सकता है।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. सोने की चिड़िया किस देश को कहा जाता था?
(क) चीन
(ख) जापान
(ग) अमेरिका
(घ) भारत
Answer: (घ) भारत
In simple words: भारत को सोने की चिड़िया कहते थे क्योंकि यहाँ बहुत धन-दौलत और समृद्धि थी।

🎯 Exam Tip: इस तरह के सामान्य ज्ञान-आधारित प्रश्नों में देश या व्यक्ति का सही नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. राष्ट्रनिष्ठ खण्डोबल्लाल पुस्तक के लेखक हैं
(क) तुलसीदास
Answer: (क) तुलसीदास
In simple words: 'राष्ट्रनिष्ठ खण्डोबल्लाल' नामक पुस्तक तुलसीदास जी ने लिखी है।

🎯 Exam Tip: पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम याद रखना साहित्य से जुड़े प्रश्नों के लिए जरूरी है।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था?
Answer: भारत में बहुत अधिक धन और ऐश्वर्य था। यहाँ सोना, चाँदी और मोती भरपूर मात्रा में मिलते थे। इसी कारण भारत को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था। यह देश अपार सम्पदा से भरा हुआ था।
In simple words: भारत में बहुत धन-दौलत और कीमती चीजें थीं, इसलिए इसे सोने की चिड़िया कहते थे।

🎯 Exam Tip: जब 'क्यों' वाले प्रश्न हों, तो कारण स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में लिखें।

 

Question 2. परमाणु परीक्षण करने पर भारत पर लगाए गए वैश्विक प्रतिबन्धों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर लगाए गए वैश्विक प्रतिबन्धों का देश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हमारे देश का कोई भी काम नहीं रुका। देश के लोगों को किसी भी तरह की खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। भारत ने इन चुनौतियों का सामना दृढ़ता से किया।
In simple words: परमाणु परीक्षण के बाद लगे प्रतिबन्धों का भारत पर कोई असर नहीं हुआ, देश के काम नहीं रुके।

🎯 Exam Tip: नकारात्मक प्रभावों के बजाय, भारत की आत्मनिर्भरता और दृढ़ता पर जोर दें।

 

Question 3. भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति को किसने तहस-नहस किया?
Answer: अंग्रेजों ने एक सोची-समझी योजना के तहत हमारी पुरानी शिक्षा पद्धति को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। उन्होंने अपनी शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा दिया।
In simple words: अंग्रेजों ने भारत की पुरानी शिक्षा को जानबूझकर खत्म कर दिया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक प्रश्नों में सही व्यक्ति या समूह का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत की प्राकृतिक संपदा का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में प्राकृतिक चीज़ों का बहुत बड़ा खजाना है। यहाँ हमेशा बहने वाली नदियाँ हैं, कई तरह के जंगल हैं और बहुत सारे खनिज मिलते हैं। उत्तर भारत का विशाल मैदान उपजाऊ मिट्टी से ढका है जो अनाज का बड़ा भंडार है। गंगा-यमुना जैसी बड़ी नदियाँ भारत के लोगों का माँ की तरह पालन-पोषण करती हैं। इन बड़ी नदियों पर कई बड़े प्रोजेक्ट बनाए गए हैं, जिनसे जंगल बढ़ते हैं, मछली पालन होता है, मिट्टी का कटाव रुकता है और बिजली बनती है। भारत की अलग-अलग जलवायु के कारण कई तरह की फसलें उगती हैं। इस प्रकार, भारत की प्राकृतिक संपदा बहुत अधिक है।
In simple words: भारत में नदियाँ, जंगल, खनिज और उपजाऊ ज़मीन बहुत है। यहाँ कई तरह की फसलें उगती हैं, जिससे देश प्राकृतिक रूप से बहुत समृद्ध है।

🎯 Exam Tip: वर्णन वाले प्रश्नों में, मुख्य बिंदुओं को अलग-अलग करके लिखें ताकि उत्तर स्पष्ट लगे।

 

Question 2. विश्व के लोग भारतीयों पर क्या-क्या आरोप लगाते हैं?
Answer: यह प्रश्न अधूरा है और स्रोत में इसका पूरा उत्तर नहीं दिया गया है।
In simple words: यह प्रश्न पूरा नहीं है।

🎯 Exam Tip: हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आप केवल पूर्ण प्रश्नों का उत्तर दें। यदि कोई प्रश्न अधूरा है, तो उसे इंगित करें।

 

Question. भारत की दुर्गति होने का क्या कारण है?
Answer: भारत की बुरी हालत का मुख्य कारण भारतीयों में आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान की कमी है। हमारी समस्या गलत रास्ता चुनने की है। हमने आजादी के बाद भारत को बेहतर बनाने की कोशिश नहीं की। हमने अपनी प्राथमिकताएँ तय नहीं कीं। यहाँ की स्थिति, समाज और ज़रूरतें अलग हैं। हमने अपनी भौगोलिक स्थिति और समाज की मानसिकता के अनुसार विकास का तरीका नहीं अपनाया। हमने सत्ता को ही सब कुछ मान लिया और नैतिकता छोड़ दी। इसके लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। चारों ओर भ्रष्टाचार फैला है। जिन पर व्यवस्था सँभालने की जिम्मेदारी है, वे ही गड़बड़ी फैला रहे हैं। इसी वजह से भारत की दुर्गति हो रही है।
In simple words: भारत की खराब हालत का मुख्य कारण हमारा आत्मविश्वास में कमी, गलत रास्ते चुनना, भ्रष्टाचार और व्यवस्था में गड़बड़ी है, जिसके लिए हम खुद जिम्मेदार हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे विश्लेषण वाले प्रश्नों में, मुख्य कारणों को सूचीबद्ध करें और प्रत्येक को संक्षेप में समझाएँ।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत अब भी महाशक्ति बन सकती है। समझाइए।
Answer: यदि हम अपने इतिहास को देखें, तो हमें पता चलता है कि हमारा देश वही भारत है जिसे 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था। विश्व में किसी भी देश के पास ऐसी ज़मीन और साधन नहीं हैं जो उसे हर तरह से समृद्ध बना सकें। हमें अपनी ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। हमने परमाणु परीक्षण करके विश्व को अपनी ताकत का एहसास कराया है। आज का युग विज्ञान का युग है, और यह कहना कि विज्ञान पश्चिम की देन है, एक गलत विचार है। भारत के विद्वानों ने जीवन के हर क्षेत्र में शानदार आविष्कार किए हैं। चाहे अंतरिक्ष विज्ञान हो, रसायन विज्ञान हो, भौतिक विज्ञान हो, चिकित्सा विज्ञान हो या निर्माण विज्ञान, भारत ने सभी क्षेत्रों में काम किया है। सर जे.सी. बोस, सी.वी. रमन, डॉ. होमी जहाँगीर भाभा, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को भूला नहीं जा सकता। भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत कम खर्च में अपना स्वदेशी उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजा, जिससे आज भी पूरा विश्व हैरान है। विदेशी हमारी बौद्धिक क्षमता से डरते हैं। भारत ने इतने बड़े काम किए हैं। बस हमें आत्मविश्वास की ज़रूरत है। विश्व के किसी भी देश के पास ऐसी ज़मीन और साधन नहीं हैं। ये साधन हमारे पास हैं, जिनके दम पर हम फिर से वही समृद्धि पा सकते हैं। हमें बस संसाधनों का सही उपयोग करना है और अपनी ज़रूरतों के हिसाब से उनका इस्तेमाल करना है। जब हम ज़रूरी संतुलन बना लेंगे, तो हमें अपनी पुरानी शान फिर से मिल जाएगी। इस तरह भारत महाशक्ति बन सकता है।
In simple words: भारत अपने इतिहास, साधनों और वैज्ञानिकों की वजह से आज भी महाशक्ति बन सकता है। हमें बस खुद पर भरोसा करना होगा और अपने संसाधनों का सही उपयोग करना होगा।

🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, अपने विचारों को तार्किक क्रम में प्रस्तुत करें और मुख्य बिंदुओं को उदाहरणों से पुष्ट करें।

 

Question 2. भारत को महाशक्ति बनने से रोकने में बाधक तत्वों का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत को महाशक्ति बनने से रोकने में सबसे बड़ी बाधा हमारे आत्मविश्वास की कमी है। हम यह सोचते हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता, सब कुछ गलत हो रहा है और इस देश का भगवान ही मालिक है। चारों ओर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। व्यवस्था सँभालने वाले लोग खुद ही अव्यवस्था फैला रहे हैं। हमारा नज़रिया नकारात्मक हो गया है। भारतीय भविष्य की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्या हो चुका है, क्या हो रहा है और क्या किया जा सकता है, इस पर कोई ध्यान नहीं देता। भारत में प्राकृतिक सम्पदा भरपूर है। यदि हम इसे सही ढंग से इस्तेमाल करें तो देश महाशक्ति बन सकता है।
In simple words: आत्मविश्वास की कमी, भ्रष्टाचार, नकारात्मक सोच और भविष्य पर ध्यान न देना भारत को महाशक्ति बनने से रोकते हैं।

🎯 Exam Tip: बाधक तत्वों का वर्णन करते समय, प्रत्येक तत्व को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और संक्षेप में समझाएँ कि वह कैसे बाधा बनता है।

 

Question 3. भारत के गौरवमयी अतीत का वर्णन कीजिए।
Answer: यदि हम अपने पुराने इतिहास को देखें तो पता चलेगा कि भारत 'सोने की चिड़िया' कहलाता था। हमारे सभी प्राचीन ग्रंथों में सुख-शांति, अपार धन और समृद्धि का वर्णन मिलता है। हमारी इसी समृद्धि ने विदेशी हमलावरों को भारत की ओर खींचा था। वे यहाँ लूटने के इरादे से आए थे। ये हमलावर यहाँ से बहुत सारा सोना-चाँदी, हीरे-मोती लूटकर ले गए। महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर की अपार सम्पत्ति लूटकर ले गया था। भारत की चमक देखकर अंग्रेज भी भारत आए और यहाँ की अपार सम्पदा इंग्लैण्ड ले गए। यह हमारी समृद्धि लूट का परिणाम नहीं थी, बल्कि संसाधनों के सही उपयोग का नतीजा थी। जीवन के सभी क्षेत्रों में भारत के विद्वानों ने अद्भुत आविष्कार किए। चाहे अंतरिक्ष विज्ञान हो, रसायन विज्ञान हो, भौतिक विज्ञान हो, चिकित्सा विज्ञान हो या निर्माण विज्ञान, सभी क्षेत्रों में यहाँ के वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिखाया है।
In simple words: भारत का अतीत गौरवशाली था, यहाँ बहुत धन-दौलत थी, जिससे विदेशी आकर्षित हुए और लूटपाट की। हमारे वैज्ञानिकों ने कई क्षेत्रों में शानदार आविष्कार किए थे।

🎯 Exam Tip: अतीत का वर्णन करते समय, ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमुख उपलब्धियों को शामिल करें।

 

Question 4. आपकी दृष्टि में क्या भारत विश्वशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। विचार प्रस्तुत कीजिए।
Answer: भारत का भविष्य बहुत उज्ज्वल दिख रहा है। भारत की राजनीतिक, सामाजिक और वैज्ञानिक स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि निकट भविष्य में भारत सिर्फ एशिया में ही नहीं, बल्कि विश्व में महाशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है। दूसरे देशों के उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में स्थापित किया जा रहा है, जिससे भारत की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हो रहा है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का छठा स्थान है। हम खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुके हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सहयोग से त्रिशूल, पृथ्वी, अग्नि, आकाश जैसी मिसाइलें बनाई गईं। मंगल ग्रह की खोज के लिए एक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा गया। इसरो ने तीन बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार की हैं जो युद्धपोत से ज़मीन और हवा में मार कर सकती हैं। यह सुविधा केवल अमेरिका और रूस के पास है। चीन की तरह समुद्री प्लेटफार्म बनाने की कोशिश की जा रही है। आधुनिक हथियारों में ऑटोमैटिक लेजर गन खरीदी गई हैं जो रात में भी निशाना लगा सकती हैं। भारत इस तकनीक को बनाने की कोशिश कर रहा है। जापान के साथ बुलेट ट्रेन का समझौता हुआ है। सुखोई-30 फाइटर प्लेन की तकनीक रूस के साथ मिलकर विकसित की जा रही है। बहुत कम खर्च में अपना स्वदेशी उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजा गया जो वहाँ की मिट्टी का अध्ययन करेगा। इस प्रकार, कहा जा सकता है कि भारत विश्वशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है।
In simple words: भारत राजनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से बहुत आगे बढ़ रहा है। मिसाइल, अंतरिक्ष अभियान और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में विकास के कारण भारत विश्वशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है।

🎯 Exam Tip: ऐसे विचारात्मक प्रश्नों में, अपने तर्क को मजबूत करने के लिए वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के उदाहरण दें।

 

Question 5. निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(क) यदि हम अपने इतिहास ................केंद्र हुआ करता था।
(ख) हिंदुस्तानी मूढ़ भी नह...............हुराष्ट्रीय कंपनियाँ डेरा क्यों लगाती हैं?
Answer: इस प्रश्न में गद्यांश अधूरे दिए गए हैं, अतः उनकी सप्रसंग व्याख्या करना संभव नहीं है।
In simple words: गद्यांश पूरे नहीं होने के कारण, उनकी व्याख्या नहीं की जा सकती।

🎯 Exam Tip: सप्रसंग व्याख्या करने के लिए हमेशा पूरा गद्यांश उपलब्ध होना चाहिए। अधूरे गद्यांशों के लिए, अपनी असमर्थता स्पष्ट रूप से बताएं।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. “अबे कुछ नहीं हो सकता- इस देश का भगवान ही मालिक है' देशवासियों की यह धारणा लेखक को -
(क) निराशा कर देती है।
(ख) झकझोर देती है।
(ग) उद्वेलित कर देती है।
(घ) भावुक कर देती है।
Answer: (ख) झकझोर देती है।
In simple words: लेखक को यह सुनकर दुख होता है कि लोग देश के बारे में नकारात्मक सोचते हैं।

🎯 Exam Tip: कथन आधारित प्रश्नों में, लेखक की भावना या प्रतिक्रिया को सही विकल्प के साथ जोड़ना सीखें।

 

Question 2. विदेशों में भारत का डंका बजा रहे हैं –
(क) भारतीय वैज्ञानिक
(ख) भारतीय छात्र
(ग) भारतीय विद्वान
(घ) भारतीय उद्योगपति
Answer: (घ) भारतीय उद्योगपति
In simple words: विदेशों में भारतीय व्यापारी अपनी मेहनत और सफलता से भारत का नाम ऊँचा कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: यह एक तथ्य आधारित प्रश्न है, जिसमें दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनना होता है।

 

Question 3. भारत को पुनः महाशक्ति एवं विश्वगुरु बनाने के लिए आवश्यक है –
(क) आत्मविश्वास जगाने की
(ख) वैज्ञानिक शक्ति बढ़ाने की
(ग) उद्योगों को बढ़ाने की
(घ) हथियारों की वृद्धि की।
Answer: (क) आत्मविश्वास जगाने की
In simple words: भारत को फिर से महान बनाने के लिए लोगों में खुद पर विश्वास जगाना सबसे ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: 'आवश्यक' जैसे शब्दों वाले प्रश्नों में, मूल और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता को पहचानें।

 

Question 4. जिनके जिम्मे व्यवस्था संभालने का दायित्व है वे फैला रहे हैं -
(क) भ्रष्टाचार
(ख) अनैतिकता
(ग) अव्यवस्था
Answer: (क) भ्रष्टाचार
In simple words: जिन लोगों को व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी दी गई है, वे ही भ्रष्टाचार फैला रहे हैं।

🎯 Exam Tip: विकल्पों में से सबसे सटीक उत्तर चुनें, जो दिए गए कथन के साथ मेल खाता हो।

 

Question 5. सभ्य कहे जाने वाला उच्च वर्ग हो गया है
(क) स्वार्थी।
(ख) भ्रष्ट
(ग) अनैतिक
(घ) अत्याचारी
Answer: (क) स्वार्थी।
In simple words: समाज का पढ़ा-लिखा और सभ्य वर्ग अब स्वार्थी हो गया है, सिर्फ अपने बारे में सोचता है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक टिप्पणी वाले प्रश्नों में, समाज के एक वर्ग के व्यवहार का सबसे सही वर्णन करने वाला विकल्प चुनें।

 

Question 6. क्या-क्या हो चुका है, क्या-क्या हो रहा है, क्या-क्या किया जा सकता है, इसका भारतीय विचार नहीं करता, क्योंकि उसका सोच हो गया है।
(क) भावात्मक
(ख) सकारात्मक
(ग) नकारात्मक
(घ) विचारात्मक
Answer: (ग) नकारात्मक
In simple words: भारतीय इन बातों पर विचार नहीं करते क्योंकि उनकी सोच नकारात्मक हो गई है।

🎯 Exam Tip: दिए गए कथन के प्रभाव या स्थिति को सही ढंग से व्यक्त करने वाले विकल्प का चुनाव करें।

 

Question 7. यदि हम अपने इतिहास पर दृष्टि डालें तो पता चलेगा कि हमारा देश था –
(क) जगत गुरु
(ख) सोने की चिड़िया
(ग) अध्यात्मवादी
(घ) वैज्ञानिकों का गढ़
Answer: (ख) सोने की चिड़िया
In simple words: अपना इतिहास देखने पर हमें पता चलता है कि भारत पहले 'सोने की चिड़िया' कहलाता था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़े प्रश्नों में, सही ऐतिहासिक उपनाम या विवरण का चयन करें।

 

Question 8. विदेशी आक्रमणकारियों को हिन्दुस्तान की ओर आकर्षित किया था -
(क) विज्ञान ने
(ख) वैभव ने
(ग) धर्म ने।
(घ) दर्शन ने
Answer: (ख) वैभव ने
In simple words: भारत की धन-दौलत और समृद्धि ने विदेशी हमलावरों को अपनी ओर खींचा था।

🎯 Exam Tip: कारण-परिणाम वाले प्रश्नों में, दिए गए परिणाम का सबसे सटीक कारण चुनें।

 

Question 9. विदेशी आक्रमणकारी किस उद्देश्य से भारत आए थे?
(क) ग्रन्थ पढ़ने के लिए।
(ख) ज्ञान प्राप्त करने के लिए।
(ग) लूटने के लिए
(घ) व्यापार करने के लिए।
Answer: (ग) लूटने के लिए
In simple words: विदेशी हमलावर भारत में सिर्फ धन-दौलत लूटने के इरादे से आए थे।

🎯 Exam Tip: जब उद्देश्य पूछा जाए, तो दिए गए विकल्पों में से सबसे मुख्य और सही उद्देश्य का चयन करें।

 

Question 10. विदेशों की अपेक्षा भारत को सब प्रकार से सम्पन्न बनाने वाली कौन सी चीज है?
(क) विज्ञान और अध्यात्म
(ख) धर्म और दर्शन
(ग) ग्रन्थ और मनीषी
(घ) भूमि और संसाधन
Answer: (घ) भूमि और संसाधन
In simple words: भारत को पूरी तरह से समृद्ध बनाने के लिए अपनी ज़मीन और प्राकृतिक साधन सबसे महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: किसी देश की समृद्धि के मूल कारणों की पहचान करें, जो अक्सर उसके प्राकृतिक साधनों से जुड़े होते हैं।

 

Question 11. अपनी आवश्यकता के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाला देश स्वीकार करता है
(क) अवांछित समझौता
(ख) अवांछित नीति
(ग) अवांछित शासन
(घ) अवांछित वस्तुएँ।
Answer: (क) अवांछित समझौता
In simple words: जो देश अपनी ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है, उसे अक्सर ऐसे समझौते करने पड़ते हैं जो वह नहीं चाहता।

🎯 Exam Tip: निर्भरता के नकारात्मक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करें, जैसे कि अवांछित शर्तें स्वीकार करना।

 

Question 12. आज भी हम जिस कारण अपनी सम्पन्नता को अर्जित कर सकते हैं, वह है –
(क) आध्यात्मिकता
(ख) वैज्ञानिक शक्ति
(ग) भूमि और संसाधन
(घ) प्राकृतिक साधन
Answer: (ग) भूमि और संसाधन
In simple words: आज भी हम अपनी ज़मीन और प्राकृतिक साधनों का सही उपयोग करके फिर से समृद्ध बन सकते हैं।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न देश के आंतरिक संसाधनों के महत्व पर केंद्रित है।

 

Question 13. भारतीय वैज्ञानिकों ने न्यूनतम खर्च में अपना स्वदेशी उपग्रह भेजा था
(क) शुक्र ग्रह पर
(ख) मंगल ग्रह पर
(ग) बृहस्पति ग्रह पर
(घ) शनि ग्रह पर
Answer: (ख) मंगल ग्रह पर
In simple words: भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत कम पैसे में अपना खुद का उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजा था।

🎯 Exam Tip: अंतरिक्ष कार्यक्रमों से जुड़े महत्वपूर्ण मिशनों के नाम और उनके लक्ष्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. हमारे विकास में अवरोध पैदा करने वाली समस्या है
(क) वैज्ञानिक सोच की कमी
(ख) संसाधनों का अभाव
(ग) धन का अभाव
(घ) आत्मविश्वास की कमी
Answer: (घ) आत्मविश्वास की कमी
In simple words: हमारे देश की तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट लोगों के आत्मविश्वास की कमी है।

🎯 Exam Tip: आंतरिक बाधाओं और बाहरी चुनौतियों के बीच अंतर को समझें, और सबसे महत्वपूर्ण बाधा को पहचानें।

 

Question 15. हमने सर्वोपरि लिया है –
(क) सत्ता को
(ख) धन को
(ग) भ्रष्टाचार को
(घ) स्वार्थ को
Answer: (क) सत्ता को
In simple words: हमने सत्ता और पद को सबसे ऊपर मान लिया है।

🎯 Exam Tip: नैतिक मूल्यों और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच के अंतर पर विचार करें।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. श्रीधर पराड़कर ने अनुभूत साहित्य का सृजन करने के लिए क्या किया?
Answer: श्रीधर पराड़कर ने अपने अनुभव से साहित्य रचने के लिए इंग्लैण्ड, श्रीलंका और अन्य देशों की यात्रा की। साथ ही, उन्होंने भारत में भी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए यात्राएँ कीं। इन यात्राओं से उन्हें गहरी समझ मिली।
In simple words: श्रीधर पराड़कर ने अपने अनुभव से साहित्य लिखने के लिए कई देशों और भारत में यात्राएँ कीं।

🎯 Exam Tip: लेखक से संबंधित प्रश्नों में, उनके कार्यों और उनके पीछे के उद्देश्यों का उल्लेख करें।

 

Question 2. 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबन्ध का मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
Answer: 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध का मुख्य उद्देश्य भारतीयों के मन से देश के प्रति निराशा और गलतफहमी को दूर करना है। लेखक का लक्ष्य आशा और उत्साह जगाकर लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना भरना है। यह निबंध लोगों को सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करता है।
In simple words: इस निबंध का मुख्य उद्देश्य भारतीयों में देश के प्रति आशा और राष्ट्रप्रेम जगाना है, और उनकी निराशा को दूर करना है।

🎯 Exam Tip: किसी निबंध या पाठ के मुख्य उद्देश्य को बताते समय, उसके केंद्रीय विचार और लेखक के संदेश को स्पष्ट करें।

 

Question 4. भारत को महाशक्ति और विश्वगुरु बनाने के लिए क्या करना चाहिए?
Answer: भारत को महाशक्ति और विश्वगुरु बनाने के लिए भारतीयों को विदेशों की ओर देखना बंद करके खुद पर विश्वास और आत्म-सम्मान की भावना जगानी चाहिए। हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना होगा।
In simple words: भारत को महान बनाने के लिए हमें दूसरों पर निर्भर रहना छोड़ना होगा और अपने आत्मविश्वास को जगाना होगा।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, केवल उपाय बताने के बजाय, उन उपायों के पीछे की मूल भावना को भी समझाएँ।

 

Question 5. देश की परिस्थिति के बारे में सामान्य आदमी क्या सोचता है?
Answer: सामान्य आदमी की सोच है कि अब कुछ नहीं हो सकता, सब गड़बड़ हो रहा है। वह मानता है कि इस देश का भगवान ही मालिक है। यह निराशावादी सोच है।
In simple words: आम आदमी सोचता है कि देश की हालत खराब है और कुछ नहीं सुधर सकता।

🎯 Exam Tip: एक सामान्य व्यक्ति के विचारों का वर्णन करते समय, उनकी निराशा और असहायता की भावना को दर्शाएँ।

 

Question 6. देश के विकास के प्रति सामान्य आदमी की नकारात्मक सोच क्या है?
Answer: सामान्य आदमी अपना आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान खो चुका है। वह अपने चारों ओर फैले भ्रष्टाचार को देखता है। इसके अलावा, जिन पर व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वे खुद ही गड़बड़ी फैला रहे हैं। इसी कारण उसकी सोच नकारात्मक हो गई है।
In simple words: आम आदमी का आत्मविश्वास कम हो गया है। वह भ्रष्टाचार और अव्यवस्था देखकर देश के विकास के प्रति नकारात्मक सोच रखता है।

🎯 Exam Tip: नकारात्मक सोच के कारणों को स्पष्ट करें, जिसमें भ्रष्टाचार और कुप्रशासन जैसे मुद्दे शामिल हों।

 

Question 7. सामान्य आदमी किस बात पर विचार नहीं कर रहा है?
Answer: सामान्य आदमी इस बात पर विचार नहीं कर रहा है कि क्या-क्या हो चुका है, क्या-क्या हो रहा है और क्या-क्या किया जा सकता है। वह इन बातों पर ध्यान नहीं देता और न ही उसे वास्तविकता की सही जानकारी होती है। इससे उसकी सोच सीमित रहती है।
In simple words: आम आदमी यह नहीं सोच रहा कि देश में क्या बदलाव हो चुके हैं, क्या हो रहे हैं और क्या संभव है।

🎯 Exam Tip: 'किस बात पर विचार नहीं कर रहा' जैसे प्रश्नों में, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान न देने को उजागर करें।

 

Question 8. हमारे प्राचीन ग्रन्थों में किस बात का वर्णन मिलता है?
Answer: हमारे सभी प्राचीन ग्रंथों में सुख-शांति, अपार धन-दौलत और समृद्धि का वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ भारत के गौरवशाली अतीत के प्रमाण हैं।
In simple words: हमारे पुराने ग्रंथों में सुख, शांति और बहुत सारी धन-दौलत के बारे में लिखा है।

🎯 Exam Tip: प्राचीन ग्रंथों के महत्व और उनमें वर्णित मुख्य विषयों को संक्षेप में बताएं।

 

Question 9. आक्रमणकारी किस उद्देश्य से भारत आए थे?
Answer: हमारे देश के वैभव ने आक्रमणकारियों को भारत की ओर खींचा था। वे यहाँ लूटने के इरादे से आए थे। हर बार हर आक्रमणकारी अपने साथ यहाँ से बेशुमार सोना-चाँदी, हीरे-मोती लूटकर ले गए। उनका मुख्य उद्देश्य भारत की धन-सम्पत्ति हथियाना था।
In simple words: विदेशी हमलावर भारत की धन-दौलत लूटने के लिए आए थे।

🎯 Exam Tip: आक्रमणकारियों के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें लूटपाट पर विशेष जोर दें।

 

Question 10. अंग्रेज भारत क्यों आए थे?
Answer: अंग्रेज भारत की चमक से हैरान होकर यहाँ आए थे। वे यहाँ की अपार सम्पदा को इंग्लैण्ड ले गए। शुरुआत में वे व्यापार के बहाने आए, पर उनका असली मकसद यहाँ के धन को लूटना था।
In simple words: अंग्रेज भारत की दौलत और समृद्धि से आकर्षित होकर यहाँ आए थे ताकि उसे लूट सकें।

🎯 Exam Tip: अंग्रेजों के भारत आने के पीछे के वास्तविक मकसद को समझाएं, जिसमें आर्थिक शोषण प्रमुख था।

 

Question 12. परमाणु परीक्षण पर प्रतिबन्ध के बाद भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: परमाणु परीक्षण के बाद विश्व द्वारा लगाए गए प्रतिबन्धों का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हमारे देश का कोई भी काम नहीं रुका। देशवासियों को किसी विशेष कष्ट का सामना नहीं करना पड़ा। भारत ने इन चुनौतियों को सफलतापूर्वक संभाला।
In simple words: परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर लगे प्रतिबन्धों का कोई बुरा असर नहीं हुआ, देश के काम नहीं रुके।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, भारत की आत्मनिर्भरता और दृढ़ इच्छाशक्ति को उजागर करें।

 

Question 13. भारत पुरानी सम्पन्नता कैसे अर्जित कर सकता है?
Answer: भारत के पास उपजाऊ ज़मीन और पर्याप्त प्राकृतिक साधन हैं। हमें बस उनका सही तरीके से इस्तेमाल करने की ज़रूरत है। यदि इन साधनों का सही उपयोग किया जाए, तो भारत अपनी पुरानी समृद्धि फिर से प्राप्त कर सकता है। सही प्रबंधन और नियोजन महत्वपूर्ण है।
In simple words: भारत अपनी उपजाऊ ज़मीन और साधनों का सही इस्तेमाल करके फिर से समृद्ध बन सकता है।

🎯 Exam Tip: 'कैसे' वाले प्रश्नों में, स्पष्ट और व्यवहार्य समाधान प्रस्तुत करें।

 

Question 14. 'यह एक मिथक है।' क्या मिथक है?
Answer: यह कहना कि विज्ञान पश्चिम की देन है और आज के सारे ज्ञात आविष्कार अधिकतर पश्चिम में ही हुए हैं, एक गलत धारणा या मिथक है। भारत में प्राचीन काल से ही विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण खोजें हुई हैं।
In simple words: यह गलत धारणा है कि सारा विज्ञान पश्चिम से आया है; भारत का भी विज्ञान में बड़ा योगदान रहा है।

🎯 Exam Tip: मिथक को स्पष्ट करते समय, उसे तोड़ना और सही जानकारी देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. हमारी दुर्गति का कारण संसाधनों की कमी, मूढ़ता, आलस्य, अकर्मण्यता नहीं है बल्कि आत्मविश्वास की कमी और आत्मप्रत्यय का अभाव है। इसलिए हमारी दुर्गति है।
Answer: हमारी बुरी हालत का कारण संसाधनों की कमी, मूर्खता, आलस या निष्क्रियता नहीं है। असली वजह आत्मविश्वास की कमी और खुद पर भरोसे का अभाव है। इसी कारण हमारी यह दुर्गति हुई है। हमें अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानना होगा।
In simple words: हमारी बुरी हालत संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की कमी और खुद पर भरोसा न होने के कारण है।

🎯 Exam Tip: आत्म-विश्लेषण वाले प्रश्नों में, बाहरी कारकों के बजाय आंतरिक कारकों पर ध्यान केंद्रित करें।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत का व्यक्ति हताशा और निराशा भरे उद्गार क्यों प्रकट कर रहा है?
Answer: भारत का आम व्यक्ति निराश और हताश है क्योंकि वह चारों ओर फैला भ्रष्टाचार देखता है। जिन लोगों को व्यवस्था सँभालने की जिम्मेदारी दी गई है, वे ही गड़बड़ी फैलाने में सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं। जिन पर देश के लिए नीतियाँ बनाने का काम है, उनमें नैतिकता की कमी दिखती है। जो लोग सभ्य माने जाते हैं, वे भी सिर्फ अपने स्वार्थ पूरे करने में लगे रहते हैं। इन्हीं सब कारणों से चिंतित होकर वह कहता है कि अब कुछ नहीं हो सकता, सब गड़बड़ हो रहा है और इस देश का भगवान ही मालिक है। इसी कारण वह बहुत निराश है।
In simple words: भारतीय व्यक्ति भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और स्वार्थ के कारण निराश है, उसे लगता है कि कुछ भी ठीक नहीं हो सकता।

🎯 Exam Tip: व्यक्ति की हताशा के सामाजिक और राजनीतिक कारणों को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question 3. भारत के अतीत के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: भारत का अतीत बहुत गौरवशाली था। यह देश धन-धान्य से भरा-पूरा था और 'सोने की चिड़िया' कहलाता था। प्राचीन ग्रंथों को पढ़ने से पता चलता है कि यहाँ सुख-शांति फैली हुई थी और अपार धन-दौलत व समृद्धि थी। विदेशी हमलावर इसी धन-दौलत को लूटने के लिए यहाँ आए थे। यही नहीं, जीवन के सभी क्षेत्रों में भारत के विद्वानों ने अद्भुत आविष्कार किए। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान और निर्माण विज्ञान में कमाल के आविष्कार किए। इन उपलब्धियों से भारत का अतीत बहुत गौरवशाली था।
In simple words: भारत का अतीत बहुत महान था, यह धन-धान्य से भरा था और हमारे वैज्ञानिकों ने कई क्षेत्रों में अद्भुत आविष्कार किए थे।

🎯 Exam Tip: अतीत का वर्णन करते समय, ऐतिहासिक तथ्यों के साथ-साथ सांस्कृतिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी शामिल करें।

 

Question 4. श्रीधर पराड़कर ने भारतीयों को क्या सन्देश दिया है?
Answer: श्रीधर पराड़कर ने भारतीयों को अपनी नकारात्मक सोच बदलने का सन्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि हमें अपने आत्म-सम्मान और स्वाभिमान को नहीं भूलना चाहिए। हमें अपने गौरवपूर्ण और वास्तविक इतिहास को जानने की कोशिश करनी चाहिए। हमारे विद्वानों ने जीवन के हर क्षेत्र में अद्भुत आविष्कार किए हैं, हमें उन्हें जानने का प्रयास करना चाहिए। आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों जैसे सर जे.सी. बोस, सी.वी. रमन, होमी जहाँगीर भाभा, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम आदि की वैज्ञानिक उपलब्धियों को हमें नहीं भूलना चाहिए। भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत कम खर्च में जो स्वदेशी उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजा, उस पर भी ध्यान देना चाहिए। हमें अपनी सोच को बदलकर देश की उपलब्धियों पर ध्यान देना चाहिए। यही उनका मुख्य सन्देश है।
In simple words: श्रीधर पराड़कर ने भारतीयों को अपनी नकारात्मक सोच छोड़ने, आत्म-सम्मान जगाने और देश की उपलब्धियों पर गर्व करने का सन्देश दिया है।

🎯 Exam Tip: लेखक के सन्देश को बताते समय, उसके मूल तत्वों को स्पष्ट और प्रेरणादायक ढंग से प्रस्तुत करें।

 

Question 5. हिन्दुस्तान का आदमी कायर, मूढ़, निकम्मा है। यह धारणा गलत है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: हिन्दुस्तान का आदमी कायर, मूढ़ या निकम्मा नहीं है। विदेशों में भारतीय विद्वानों का बहुत सम्मान है। अमेरिका भी हमारी बौद्धिक क्षमता से डरता है। यदि भारतीय सचमुच मूर्ख होते तो विश्व में भारतीय वैज्ञानिकों की इतनी माँग क्यों होती? आज विश्व के हर देश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ हिन्दुस्तानियों ने सँभाली हुई हैं। विश्व के जाने-माने विद्यालयों में हिन्दुस्तानी अध्यापक पढ़ा रहे हैं। विश्व की अधिकतर प्रयोगशालाओं में भारतीय वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और सांसद भारतीय या भारतीय मूल के व्यक्ति हैं। अतः यह कहना गलत है कि भारतीय कायर, मूढ़ और अकर्मण्य हैं। भारतीय अपनी मेहनत और बुद्धि से विश्व में अपना लोहा मनवा रहे हैं।
In simple words: यह सोचना गलत है कि भारतीय कायर या मूर्ख हैं, क्योंकि वे विदेशों में बड़े पदों पर काम कर रहे हैं और अपनी बुद्धि का लोहा मनवा रहे हैं।

🎯 Exam Tip: किसी धारणा को गलत साबित करते समय, पुख्ता उदाहरणों और तथ्यों का उपयोग करें।

 

Question 7. विदेश में भारतीयों की जो स्थिति है, उसे स्पष्ट कीजिए।
Answer: विदेश में भारतीय विद्वानों ने अपनी एक खास पहचान बनाई है। अमेरिका हमारी बौद्धिक क्षमता से भयभीत है। विदेश में भारतीय विद्वानों की माँग लगातार बढ़ रही है। सभी विकसित देशों में हिन्दुस्तानियों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सँभाली हुई हैं। विश्व के जाने-माने विश्वविद्यालयों में हिन्दुस्तानी अध्यापक ही पढ़ा रहे हैं। विश्व की अधिकतर प्रयोगशालाओं में भारतीय वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी भारतीय या भारतीय मूल के हैं। कई देशों की संसद में भारतीयों ने जनप्रतिनिधि बनकर वहाँ के समाज में अपना महत्व साबित किया है। यह सब दिखाता है कि विदेश में भारतीयों की स्थिति बहुत अच्छी है।
In simple words: विदेश में भारतीय विद्वानों और पेशेवरों की बहुत माँग है, वे बड़े पदों पर काम कर रहे हैं और हर जगह भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: विदेश में भारतीयों की स्थिति का वर्णन करते समय, उनके विभिन्न क्षेत्रों में योगदान और सम्मान का उल्लेख करें।

 

Question 8. स्पष्ट कीजिए कि हिन्दुस्तानी मूढ़ नहीं हैं।
Answer: हम निष्क्रिय, आलसी या मूर्ख नहीं हैं। यदि भारतीय सच में मूर्ख होते, तो विदेशों में उनकी इतनी माँग नहीं होती। अमेरिका जैसा विकसित देश भारतीय बौद्धिक क्षमता से डरता है। यदि भारतीय मूर्ख होते तो वे विदेशों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के पद कैसे सँभालते? भारत के प्रमुख औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के बाहर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ क्यों डेरा डालती हैं? विश्व की अनेक प्रयोगशालाओं में भारतीय वैज्ञानिक काम क्यों करते? यदि भारतीय मूर्ख होते तो वे विदेशों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सांसद और प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कैसे काम करते? अतः यह स्पष्ट है कि भारतीय मूर्ख नहीं हैं, वे विद्वान हैं और हर विकसित देश यहाँ के विद्वानों को गौरव दे रहा है। भारतीय अपनी प्रतिभा से दुनिया को हैरान कर रहे हैं।
In simple words: भारतीय मूर्ख नहीं हैं, क्योंकि वे विदेशों में बड़े पदों पर हैं, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उन्हें चाहती हैं, और वे वैज्ञानिक कामों में भी आगे हैं।

🎯 Exam Tip: 'मूढ़ नहीं हैं' सिद्ध करने के लिए, भारतीय पेशेवरों की वैश्विक पहचान और उपलब्धियों को प्रमुखता से बताएं।

 

Question 9. भारत की दुर्गति का कारण यहाँ के लोग ही हैं। स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत की बुरी हालत के जिम्मेदार यहाँ के निवासी ही हैं। हमारी ज़मीन उपजाऊ है और साधन भी बहुत हैं। हम मूर्ख, आलसी और निष्क्रिय भी नहीं हैं, फिर भी हमारी दुर्गति है। इसका कारण यह है कि हम विदेशों की नकल कर रहे हैं। पहले हम भारत को रूस बनाना चाहते थे, अब अमेरिका बनाना चाहते हैं। विदेशों के विकास के तरीके यहाँ के लिए ठीक नहीं हो सकते। यहाँ की परिस्थितियाँ, समाज की बनावट और हमारी ज़रूरतें अलग हैं। इसी कारण हमारी दुर्गति हो रही है। हमें अपने देश की परिस्थिति, भौगोलिक स्थिति, समाज की सोच और ज़रूरतों के अनुसार विकास का तरीका तैयार करना होगा, तभी हमारी दुर्गति दूर हो सकती है। हमें दूसरों की नकल करना छोड़ना होगा। हमारी मुख्य प्राथमिकता केवल सत्ता पाना हो गया है। इसके लिए हम स्वयं दोषी हैं। यदि हम सत्ता के पीछे भागना छोड़ दें और जनहित में काम करें, विद्वानों का सम्मान करें तो हमारी प्रगति हो सकती है क्योंकि हमारी जैसी भूमि, हमारे जैसे संसाधन और हमारी जैसी जलवायु किसी देश के पास नहीं है।
In simple words: भारत की बुरी हालत का कारण यहाँ के लोग ही हैं क्योंकि हम नकल करते हैं, अपने साधनों का सही उपयोग नहीं करते और सत्ता के पीछे भागते हैं।

🎯 Exam Tip: 'भारत की दुर्गति के कारण' जैसे प्रश्नों में, आंतरिक सामाजिक-राजनीतिक कारकों और नकल की प्रवृत्ति पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 11. आपकी दृष्टि में क्या भारत आज भी महाशक्ति बनने की क्षमता रखता है। विचार प्रकट कीजिए।
Answer: इसमें कोई शक नहीं कि भारत आज भी महाशक्ति बन सकता है। हमें बस आत्मविश्वास जगाने की ज़रूरत है। हमारे पास विदेशों से भी अच्छी ज़मीन और साधन हैं, बस हमें उनका सही तरीके से उपयोग करना है। हमारे पास बौद्धिक क्षमता की भी कमी नहीं है। हमारे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों से निकले मेधावी छात्रों को लेने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हमेशा तैयार रहती हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान और निर्माण विज्ञान में अद्भुत आविष्कार किए हैं। आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों में सर जे.सी. बोस, सी.वी. रमन, डॉ. होमी जहाँगीर भाभा, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम आदि की वैज्ञानिक उपलब्धियों को हम कैसे भूल सकते हैं? भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत कम खर्च में अपना स्वदेशी उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजकर विश्व को हैरान कर दिया है। इसलिए हम कह सकते हैं कि भारत आज भी महाशक्ति बन सकता है। इसके लिए केवल दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
In simple words: भारत आज भी महाशक्ति बन सकता है क्योंकि हमारे पास संसाधन, बौद्धिक क्षमता और वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हैं; हमें बस आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की ज़रूरत है।

🎯 Exam Tip: 'क्या भारत महाशक्ति बन सकता है' जैसे प्रश्नों में, संभावनाओं का समर्थन करने वाले ठोस तर्कों और उपलब्धियों को प्रस्तुत करें।

 

Question 12. आक्रमणकारियों के भारत में आने के कारण पर विचार कीजिए।
Answer: प्राचीन काल में भारत को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था। यहाँ की भव्यता और समृद्धि ने विदेशियों को आकर्षित किया। विदेशी आक्रमणकारी यहाँ लूटने के उद्देश्य से आए थे। उन्होंने यहाँ से अपार सोना-चाँदी, हीरे-मोती लूटे और अपने साथ ले गए। मुहम्मद गजनवी सोमनाथ मंदिर की बेशुमार सम्पत्ति को लूटकर ले गया। अंग्रेज भारत की चमक से चकित होकर यहाँ आए और यहाँ की अपार सम्पदा को लूटकर अपने साथ इंग्लैण्ड ले गए। आक्रमणकारियों का मुख्य उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि भारत को लूटना था। उन्होंने भारत को गुलाम बनाकर भी लूटा।
In simple words: आक्रमणकारी भारत की धन-दौलत और समृद्धि को देखकर यहाँ आए थे, उनका मुख्य उद्देश्य लूटपाट करना था।

🎯 Exam Tip: आक्रमणकारियों के कारणों पर विचार करते समय, धन-सम्पत्ति के आकर्षण और लूटपाट के इरादे पर जोर दें।

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 22 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबन्ध के मूल कथ्य को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध में लेखक ने भारतीयों के मन से देश के प्रति निराशा और भ्रम को दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने भारतीय लोगों में आशा, उत्साह और राष्ट्रप्रेम जगाने का प्रयास किया है। देशवासियों का यह सोचना गलत है कि अब कुछ नहीं हो सकता, सब कुछ गड़बड़ हो रहा है और इस देश का भगवान ही मालिक है। भारत का अतीत 'सोने की चिड़िया' के रूप में बहुत गौरवशाली रहा है, जिसे भूलकर हमने अपना आत्म-सम्मान और स्वाभिमान खो दिया है। आज भी विदेशों में भारतीय विद्वानों की धाक है।
In simple words: यह निबंध भारतीयों को अपनी निराशा छोड़ कर देश की महानता और संभावनाओं पर विश्वास करने और राष्ट्रप्रेम जगाने का संदेश देता है।

🎯 Exam Tip: निबंध के मूल कथ्य को संक्षेप में और अपने शब्दों में प्रस्तुत करें, जिसमें लेखक का मुख्य संदेश शामिल हो।

 

Question 2. देश की परिस्थिति के बारे में सामान्य व्यक्ति के क्या विचार हैं?
Answer: देश की परिस्थिति के बारे में सामान्य व्यक्ति के विचार निराशाजनक हैं। वह सोचता है कि अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता, सब गड़बड़ हो रहा है और इस देश का भगवान ही मालिक है। वह अपने चारों ओर फैले भ्रष्टाचार को देखता है। जो व्यवस्थापक हैं, वे खुद ही अव्यवस्था फैला रहे हैं। जिन पर देश की नीतियाँ बनाने की जिम्मेदारी है, उनमें नैतिकता की कमी दिखती है। जो लोग सभ्य कहलाते हैं, वे भी अपने स्वार्थ पूरे करने में लगे हुए हैं। देश के साधनों का सही उपयोग नहीं हो रहा है। मेधावी छात्र विदेशों की ओर भाग रहे हैं, जिससे देश को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसी कारण देश की दुर्गति हो रही है। ऐसे ही निराशा भरे विचार सामान्य व्यक्ति के मन में हैं।
In simple words: आम आदमी देश की हालत को लेकर बहुत निराश है। वह भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और स्वार्थी लोगों को देखता है, और सोचता है कि अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता।

🎯 Exam Tip: सामान्य व्यक्ति के विचारों का वर्णन करते समय, उनकी निराशा के मुख्य कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 3. उन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जिससे भारत महाशक्ति बन सकता है।
Answer: भारत एक बहुत बड़ा देश है जिसका अतीत गौरवशाली रहा है। यह आज भी महाशक्ति बन सकता है। इसके पास ऐसी ज़मीन और साधन तथा जलवायु है जो विश्व में किसी देश के पास नहीं है, बस उनका सही उपयोग करने की ज़रूरत है। हमारी वैज्ञानिक शक्ति अपार है। आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों में सर जे.सी. बोस, सी.वी. रमन, डॉ. होमी जहाँगीर भाभा, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम आदि की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ बहुत महत्वपूर्ण हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत कम खर्च में अपना स्वदेशी उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजकर विश्व को हैरान कर दिया है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का छठा स्थान है। इससे संस्थान के माध्यम से भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य देशों के उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में स्थापित किया जा रहा है। खाद्यान्न उत्पादन में हम आत्मनिर्भर हो चुके हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सहयोग से त्रिशूल, पृथ्वी, अग्नि, आकाश जैसी मिसाइलें बनाई गईं। इसरो ने तीन बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार की हैं जो किसी भी युद्धपोत से ज़मीन और हवा में मार कर सकती हैं। समुद्री प्लेटफार्म बनाने की कोशिश की जा रही है। आधुनिक हथियारों के क्षेत्र में ऑटोमैटिक लेजर गन खरीदी जा रही है। इन विशेषताओं के आधार पर कहा जा सकता है कि भारत भी महाशक्ति बन सकता है।
In simple words: भारत अपने विशाल साधनों, वैज्ञानिक उपलब्धियों (जैसे अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा), आत्मनिर्भर खाद्यान्न उत्पादन और आधुनिक हथियारों के दम पर महाशक्ति बन सकता है।

🎯 Exam Tip: भारत की विशेषताओं का उल्लेख करते समय, विभिन्न क्षेत्रों में उसकी क्षमताओं और उपलब्धियों को विस्तार से बताएं।

 

Question 4. क्या भारत दुर्गति की ओर अग्रसर है? अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: यह विचार कि भारत दुर्गति की ओर बढ़ रहा है, गलत है। हम अपना आत्मविश्वास खो चुके हैं और हममें आत्म-सम्मान की कमी हो गई है। इसी कारण हमारी सोच नकारात्मक हो गई है। हमारा अतीत गौरवशाली था। हम 'सोने की चिड़िया' थे और आज भी 'सोने की चिड़िया' बन सकते हैं। हमारे पास उपजाऊ ज़मीन और अपार साधन हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने हर क्षेत्र में नए-नए आविष्कार किए हैं। भारत धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति में समृद्ध होता जा रहा है। ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सहयोग से त्रिशूल, पृथ्वी, अग्नि, आकाश जैसी मिसाइलें बनाई गईं। मंगल की जलवायु और मिट्टी की जानकारी के लिए एक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा गया। इन सभी प्रगति के कारण भारत का भविष्य उज्ज्वल है।
In simple words: भारत दुर्गति की ओर नहीं बढ़ रहा है, यह सिर्फ हमारे आत्मविश्वास की कमी का नतीजा है। भारत के पास पर्याप्त संसाधन और वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हैं जो उसे प्रगति की ओर ले जा रही हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे विचारात्मक प्रश्नों में, नकारात्मक धारणाओं का खंडन करने के लिए ठोस सबूत और सकारात्मक उपलब्धियाँ प्रस्तुत करें।

लेखक – परिचय:

श्रीधर पराड़कर का जन्म 15 मार्च, 1954 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उनके पिता का नाम गोविन्द भाई पराड़कर और माता का नाम श्रीमती इन्द्राबाई पराड़कर था। उन्होंने वाणिज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त की और एक ऑडिटर के रूप में सरकारी सेवा में काम करना शुरू किया। लेकिन, राष्ट्रप्रेम की भावना से प्रेरित होकर, श्रीधर जी ने 1986 में सरकारी नौकरी छोड़ दी और अपना जीवन राष्ट्रोत्थान के काम में लगा दिया।

उन्होंने साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की अलख जगाई। श्रीधर जी ने इंग्लैण्ड, श्रीलंका और अन्य देशों की यात्राएँ कीं। साथ ही, उन्होंने भारत में भी साहित्यिक विकास यात्राएँ कीं ताकि वे अपने अनुभवों से अच्छा साहित्य लिख सकें। श्रीधर ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित 'प्रतिसाद', महान संत स्वामी रामतीर्थ पर 'अद्भुत संत स्वामी रामतीर्थ', महान क्रान्ति दृष्टा राष्ट्रसंत तुकडी जी, राष्ट्रनिष्ठ खण्डोबल्लाल, सिद्ध योगी उत्तम स्वामी और अन्य महापुरुषों के जीवन पर आधारित पुस्तकें लिखीं। उन्होंने दत्तोपंत ठेगड़े की पुस्तक 'सामाजिक क्रान्ति की यात्रा' और डॉ. अम्बेडकर की पुस्तक का मराठी से हिन्दी में अनुवाद भी किया।

पाठ – सार

एक आम आदमी का मानना है कि अब कुछ नहीं हो सकता, सब कुछ गड़बड़ हो रहा है और इस देश का भगवान ही मालिक है। उसकी चिंता का मुख्य कारण देश में फैला भ्रष्टाचार है और यह भी कि व्यवस्था चलाने वाले खुद ही अव्यवस्था फैला रहे हैं। नीति बनाने वाले लोग भी अनैतिक हो गए हैं। सभ्य समाज के लोग अपने स्वार्थ साधने में लगे हैं। इसी वजह से व्यक्ति निराश है।

आम आदमी की सोच नकारात्मक है। वह भविष्य की बातों पर ध्यान नहीं देता। वह इस बात पर विचार नहीं करता कि क्या हो चुका है, क्या हो रहा है और क्या किया जा सकता है। उसे वास्तविकता का ज्ञान भी नहीं है। हमारा देश 'सोने की चिड़िया' कहलाता था। हमारे पुराने ग्रंथों में सुख-शान्ति, बहुत धन और ऐश्वर्य का वर्णन मिलता है। यहाँ के धन-वैभव को देखकर विदेशी लोग यहाँ आकर्षित हुए थे। शुरुआत में आक्रमणकारी लूटने के मकसद से यहाँ आए थे। हर बार हर आक्रमणकारी यहाँ से बहुत सारी संपत्ति लूटकर ले गया। अंग्रेजों ने यहाँ की संपत्ति इंग्लैण्ड ले जाई। यह सब विदेशियों के लिए भारत के आकर्षण का केंद्र था।

विश्व के किसी भी देश के पास भारत जैसी भूमि और संसाधन नहीं हैं। हर देश को अपनी ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसकी वजह से उन्हें झुकना पड़ता है और ऐसे समझौते करने पड़ते हैं जो वे नहीं चाहते। हमारी ऐसी कोई मजबूरी नहीं है। परमाणु परीक्षण के बाद दुनिया ने हम पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन हमारे देश का कोई काम रुका नहीं। देशवासियों को किसी खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हमारे देश की संपन्नता लूट का नतीजा नहीं है। यह सब कुछ अपने ही देश में पैदा किया गया था। वह भूमि और संपत्ति हमारे पास है, जिससे हम फिर से संपन्नता प्राप्त कर सकते हैं। हमें बस उनका सही उपयोग करना है। अगर हम ज़रूरी संतुलन बना लें, तो हम अपनी पुरानी संपन्नता को फिर से पा सकते हैं।

हमारे आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों ने सर जे.सी. बोस, सी.वी. रमन, डॉ. होमी जहाँगीर भाभा, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे आविष्कार किए हैं, जिन्हें हम भूल नहीं सकते। भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत कम खर्च में अपना खुद का उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजा, जिससे पूरी दुनिया हैरान रह गई। आज ज़रूरत है कि हम अपने पुराने ज्ञान और विज्ञान की खोज करें। इससे सबका भला होगा।

यह कहा जाता है कि भारत का आदमी कायर, मूर्ख और निकम्मा है। यह एक गलत धारणा है। 1962 में चीन का सामना इसी देश के बहादुरों ने किया था। 1971 में पाकिस्तान को इसी देश के बहादुरों ने धूल चटाई थी। हिन्दुस्तानी मूर्ख नहीं हैं। आज दुनिया में भारतीय विद्वानों की बहुत मांग है। विदेशों में महत्वपूर्ण पदों पर भारतीय विद्वान काम कर रहे हैं। विश्व की अधिकांश प्रयोगशालाओं में भारतीय वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और सांसद भारतीय मूल के ही व्यक्ति हैं। प्रश्न यह है कि इतना सब कुछ होते हुए भी हमारी बुरी हालत क्यों है? इसका कारण संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि हमारे आत्मविश्वास की कमी है।

मूल समस्या गलत दिशा चुनने की है। स्वतंत्रता के बाद भारत को भारत बनाने की कोशिश नहीं की गई, हमने अपनी प्राथमिकता तय नहीं की। विदेशों की परिस्थितियाँ अलग हैं। हमें अपने देश की परिस्थिति, भौगोलिक स्थिति और समाज की मानसिकता के अनुसार विकास की योजना बनानी होगी। चीन का उदाहरण हमारे सामने है। हमारे राजनेता और प्रशासनिक अधिकारियों की आँखों पर अंग्रेजों की नकल का चश्मा चढ़ा है। हमने सत्ता को सबसे ऊपर मान लिया है। हमने अच्छे-बुरे का अंतर भुला दिया है। नैतिकता खो दी और सत्ता ही सब कुछ हो गई है। इसके लिए हम खुद ज़िम्मेदार हैं। आज भी हम महाशक्ति बन सकते हैं, बस दृढ़ संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति की ज़रूरत है।

कठिन शब्दार्थ:

(पृष्ठ 132-133) स्वाभाविक - स्वभाव से, प्राकृतिक, नैसर्गिक। चहुँओर - चारों ओर, हर जगह। सक्रियता - जो क्रियात्मक रूप में हो, जिसमें कुछ करके दिखाया जाए। नीति - राज्य या राष्ट्र द्वारा जनता के लिए तय किया गया व्यवहार। निर्धारण - कोई बात निश्चित करना। उद्गार - विचार, भाव। वास्तविकता - सच्चाई। नकारात्मक - नहीं का बोध कराने वाला, निराशाजनक। प्राचीन - पुराने। अकूत - अपार। बेहिसाब - बिना हिसाब के, असीम। संपदा - धन, दौलत, संपत्ति। वैभव - संपदा, धन, दौलत। योजनापूर्वक - योजना के अनुसार। भ्रम का निर्माण - गलतफहमी पैदा करना। साजिश - किसी के खिलाफ कोई काम करने में सहयोग देना, चाल। पद्धति - रीति। तहस-नहस - नष्ट करना। (पृष्ठ 134-135) विकृत - दूषित। विडम्बना - किसी का मजाक उड़ाना, दुर्भाग्य। प्रमाण - सबूत। मनीषियों - बुद्धिमानों, ज्ञानियों। उपलब्धि - प्राप्ति। विस्मृत - भूलना। न्यूनतम - कम से कम, बहुत कम। संकुचित - जो दूसरों के विचार स्वीकार न करे, अनुदार। दुर्गति - बुरी दशा। संसाधन - पूरा करना, तैयारी, अंजाम देना। अकर्मण्य - निकम्मा, बेकार। आत्मप्रत्यय - आत्मविश्वास। सर्वोपरि - सबसे ऊपर। तिलांजलि - त्याग कर। प्रारूप - ढाँचा, स्वरूप।

महत्त्वपूर्ण गद्यांशों की सन्दर्भ एवं प्रसंग सहित व्याख्याएँ।

 

Question 1. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: 'यहाँ की अपार संपदा को इंग्लैण्ड ले गए। विश्वास ही नहीं होता। आज बात-बात में विदेशों की ओर देखने वाला भारत, कभी विदेशियों के आकर्षण का केन्द्र हुआ करता था। (पृष्ठ 133)'
Answer: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्रीधर पराड़कर हैं। लेखक यह बता रहे हैं कि पुराने समय में भारत बहुत अमीर था। इसकी चमक देखकर विदेशी यहाँ आए और बहुत सारी संपत्ति लूटकर ले गए। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए लेखक कहते हैं:
अगर हम अपने पुराने इतिहास को देखें तो हमें पता चलेगा कि भारत एक समय 'सोने की चिड़िया' कहलाता था। हमारे पुराने ग्रंथों में सुख-शांति, बहुत धन और ऐश्वर्य का वर्णन मिलता है। हमारे इसी धन-वैभव को देखकर विदेशी आक्रमणकारी भारत की ओर आकर्षित हुए और उन्होंने हमला किया। इन हमलावरों का मकसद भारत को लूटना था। वे यहाँ से सोना, चाँदी, हीरे-मोती लूटकर ले गए। यह संपत्ति भारत ने खुद कमाई थी, जिसे लुटेरे आक्रमणकारी चुराकर ले गए। इतिहास गवाह है कि मोहम्मद गजनवी ने हमला करके सोमनाथ मंदिर को लूटा और उसकी बेशकीमती संपत्ति ले गया। भारत की संपत्ति, वैभव और ऐश्वर्य को देखकर अंग्रेज भी लालच में आ गए। वे यहाँ आए और यहाँ की अपार संपत्ति इंग्लैण्ड ले गए। इन लुटेरों ने भारत की संपत्ति को लूटकर इसे खोखला करने की कोशिश की। जो भारत कभी विदेशियों को आकर्षित करता था, आज वही भारत छोटी-छोटी बातों के लिए भी विदेशों की ओर देखता है।
विशेष:
1. भारत की संपन्नता का वर्णन किया गया है।
2. आक्रमणकारियों द्वारा भारत की संपत्ति लूटने का वर्णन है।
3. यह बताया गया है कि भारत आज छोटी-छोटी बातों पर भी विदेशों की ओर देख रहा है।
4. सोमनाथ की बेशकीमती संपत्ति की लूट का वर्णन है।
In simple words: लेखक बताते हैं कि हमारा देश पहले बहुत अमीर था, जिसे विदेशी हमलावर लूटकर ले गए। आज हम छोटी-छोटी चीज़ों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं, जबकि पहले हमारी अमीरी सबको अपनी ओर खींचती थी।

🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या करते समय, पहले संदर्भ और प्रसंग बताएं। फिर, गद्यांश के मुख्य विचारों को सरल भाषा में समझाएं और अंत में उससे जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को 'विशेष' के रूप में लिखें।

 

Question 2. क्या उसके सोचे की दिशा सही है? गम्भीरता से विचार करने पर ध्यान में आएगा कि सामान्य आदमी परिस्थितियों के केवल नकारात्मक पक्ष को लेकर अपने विचार प्रकट करता है। भविष्य की बात करते समय जिन बातों पर विचार किया जाना चाहिए उस ओर उसका ध्यान ही नहीं होता। क्या-क्या हो चुका है, क्या-क्या हो रहा है, क्या-क्या किया जा सकता है, इसका न तो वह विचार करता है और न ही उसे वास्तविकता का भान ही होता है। (पृष्ठ 133)
Answer: प्रस्तुत गद्यांश 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध से लिया गया है, जिसके लेखक श्रीधर पराड़कर हैं। यह निबंध हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित है। लेखक स्पष्ट कर रहे हैं कि हम निराश हो गए हैं और हमारी सोच नकारात्मक हो गई है। भारत में क्या तरक्की हुई है और हो रही है, इस पर हमारा ध्यान ही नहीं है।
अगर सामान्य आदमी अपनी तरक्की को समझे और भविष्य के बारे में सोचे तो उसकी नकारात्मक सोच सकारात्मक हो जाएगी। अगर वह भारत की परिस्थितियों पर विचार करे और उसकी प्रगति को समझे तो सच्चाई सामने आ जाएगी। उसे पता चलेगा कि हम कितनी दूर आ चुके हैं और आगे बढ़ने के लिए क्या कोशिशें कर रहे हैं। इसलिए यह तय है कि उसकी सोच सही नहीं है। उसे भारत की वास्तविक स्थिति का ज्ञान नहीं है।
विशेष:
1. भारतीयों के नकारात्मक पक्ष को दर्शाया गया है।
2. सकारात्मक सोच की ज़रूरत बताई गई है।
3. भविष्य की योजनाओं पर विचार करना आवश्यक है।
4. भारत की परिस्थितियों से परिचित होना ज़रूरी है।
In simple words: आम आदमी केवल समस्याओं पर ध्यान देता है, भविष्य की संभावनाओं पर नहीं। लेखक कहते हैं कि अगर हम अपनी प्रगति को देखें और सही सोच रखें तो निराशा दूर हो सकती है।

🎯 Exam Tip: किसी विचार या धारणा पर आधारित गद्यांश की व्याख्या करते समय, उसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Question 3. हमारी जिस सम्पन्नता का वर्णन इतिहास में मिलता है, वह कहीं से लूटकर तो नहीं लाए थे। सब कुछ अपने ही देश में उत्पन्न किया था। भूमि संसाधन वे आज भी हमारे पास हैं, जिनके बल पर हम फिर से उसी सम्पन्नता को अर्जित कर सकते हैं। केवल संसाधनों के उचित दोहन व अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयोग करने की है। जैसे ही हम आवश्यक संतुलन बना लेंगे, हम अपना पुराना वैभव फिर से प्राप्त कर लेंगे। (पृष्ठ 133)
Answer: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्रीधर पराड़कर हैं। हमारी संपन्नता लूट का परिणाम नहीं थी। अगर हम अपने संसाधनों का सही उपयोग करें तो हम अपनी पुरानी संपन्नता को फिर से पा सकते हैं। हमें सिर्फ उनका सही इस्तेमाल करना है।
इतिहास बताता है कि हम पुराने समय में बहुत संपन्न थे, 'सोने की चिड़िया' कहलाते थे। यह संपन्नता किसी लूट का नतीजा नहीं थी, बल्कि हमने अपनी मेहनत से यह संपन्नता हासिल की थी। वह उपजाऊ भूमि और वे संसाधन आज भी हमारे पास हैं, जिनके आधार पर हमने संपन्नता पाई थी। उन्हीं के दम पर हम आज भी संपन्न बन सकते हैं। हमें सिर्फ उन संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल करना है। उनका अपनी ज़रूरत के हिसाब से उपयोग करना है। अगर हम अपनी ज़रूरत के हिसाब से उनका उपयोग कर लें तो हम फिर से संपन्न हो सकते हैं। यदि आज हम उनका सही संतुलन बना लें तो इसमें कोई शक नहीं कि हम फिर से अपना पुराना वैभव पा लेंगे। हम दोबारा वैभवशाली हो जाएंगे और 'सोने की चिड़िया' कहलाने लगेंगे।
विशेष:
1. हमारी संपन्नता लूट का नतीजा नहीं थी।
2. इस तथ्य से सबको परिचित कराया गया है।
3. संसाधनों के सही उपयोग पर जोर दिया गया है।
In simple words: लेखक बताते हैं कि भारत की पुरानी अमीरी हमारी अपनी मेहनत का नतीजा थी, लूट का नहीं। आज भी हमारे पास सभी संसाधन हैं, बस हमें उनका सही इस्तेमाल करना है ताकि हम फिर से समृद्ध बन सकें।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित गद्यांशों की व्याख्या करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप लेखक के विचारों को स्पष्ट रूप से समझाएं और वर्तमान संदर्भ से जोड़ें।

 

Question 4. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: 'अन्धकार युग का नाम दिया और बाद में किए सारे कार्यों को अपना बताया। (पृष्ठ 133-34)'
Answer: प्रस्तुत गद्यांश पाठ्यपुस्तक के 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्रीधर पराड़कर हैं। अंग्रेज सरकार ने हमारी शिक्षा पद्धति को हम पर थोपकर हमें भ्रमित किया। उन्होंने हमारे इतिहास को गलत तरीके से दिखाया और भारत के अतीत को 'अंधकार युग' कहा।
अंग्रेजों ने अपनी चालाकी से भारतीय शिक्षा पद्धति को खत्म कर दिया। उन्होंने इसे खराब बताया और अपनी शिक्षा पद्धति हम पर थोप दी। हमें वही पढ़ाया और सिखाया गया जो अंग्रेज चाहते थे। उन्होंने हमारी सोच को बदलने की पूरी कोशिश की। उन्होंने विज्ञान के नाम पर 19वीं सदी के अपने आविष्कारों को ही पढ़ाया। हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश करके हमारे आत्मसम्मान को नष्ट कर दिया। हमें आत्म-विस्मृति की गहरी खाई में धकेल दिया। हम अपने गौरव को भूल गए। हमें यह सिखाया गया कि भारत में पहले कुछ नहीं था और इसे अंधकार युग कहा गया। जो भी तरक्की हुई उसे अंग्रेजों का अपना प्रयास बताया गया। यह अंग्रेजों की एक चाल थी, जिसके ज़रिए उन्होंने भारतीयों को अंधेरे में रखा, ताकि हम अपने गौरव और विकास को भूल जाएं।
विशेष:
1. अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा पद्धति को नष्ट कर दिया।
2. भारतीय इतिहास को गलत तरीके से दिखाया गया।
3. अंग्रेजों ने अपने आविष्कारों को ही महत्व दिया।
In simple words: लेखक बताते हैं कि अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा और इतिहास को बिगाड़ दिया। उन्होंने हमारी उपलब्धियों को नज़रअंदाज़ किया और सब कुछ अपना बताकर हमें यह महसूस कराया कि हम हमेशा पिछड़े हुए थे।

🎯 Exam Tip: किसी बाहरी ताकत या संस्कृति के प्रभाव से संबंधित गद्यांश की व्याख्या करते समय, उस प्रभाव के कारणों और परिणामों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 5. हिन्दुस्तानी मूढ़ भी नहीं हैं। यदि ऐसा होता तो विश्व में भारतीय विद्वानों की माँग क्यों होती? आज ऐसा कौनसा विकसित देश है जहाँ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ हिन्दुस्तानी न संभाले हुए हों? विश्व के सभी जाने-माने विश्वविद्यालयों में अध्यापन का कार्य करने वालों में हिन्दुस्तानी अध्यापकों की संख्या कम नहीं है। विश्व की अधिकांश प्रयोगशालाओं में भारतीय वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं। कई देशों के राष्ट्रपति, मन्त्री, प्रशासनिक अधिकारी भारतीय अथवा भारतीय मूल के हैं। कई देशों की संसद में भारतीयों ने जनप्रतिनिधि बनकर वहाँ के समाज-जीवन में अपने महत्व को प्रतिपादित किया है। यह सब क्या मूढ़ कही जाने वाली जाति के लोग कर सकते हैं? यदि भारतीय मूढ़ हैं तो देश के प्रमुख औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं के बाहर बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ डेरा क्यों लगाती हैं? (पृष्ठ 134)
Answer: प्रस्तुत गद्यांश श्रीधर पराड़कर द्वारा रचित 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध से लिया गया है। यह निबंध हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित है। भारतीय लोग मूर्ख नहीं हैं। उन्होंने अपनी विद्वत्ता के बल पर विदेशों में अपनी पहचान बनाई है और उच्च पदों पर काम कर रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ यहाँ के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के छात्रों को खुशी-खुशी नौकरी देती हैं।
यह धारणा कि हिन्दुस्तानी मूर्ख हैं, गलत है। अगर भारतीय मूर्ख होते तो दुनिया में भारतीय विद्वानों की इतनी माँग क्यों होती? आज ऐसा कौन सा विकसित देश है जहाँ हिन्दुस्तानियों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ नहीं संभाली हैं? दुनिया के सभी बड़े विश्वविद्यालयों में भारतीय अध्यापकों की संख्या बहुत है। दुनिया की ज़्यादातर प्रयोगशालाओं में भारतीय वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी भारतीय या भारतीय मूल के लोग हैं। कई देशों की संसदों में भारतीयों ने जनप्रतिनिधि बनकर समाज में अपना महत्व साबित किया है। यह सब क्या मूर्ख कहलाने वाले लोग कर सकते हैं? अगर भारतीय मूर्ख होते तो देश के प्रमुख औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के बाहर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ क्यों डेरा डालतीं और उन्हें नौकरी क्यों देतीं? अतः यह धारणा गलत है कि भारतीय मूर्ख या अयोग्य हैं।
विशेष:
1. भारतीयों के प्रति मूर्खता की धारणा गलत है।
2. विदेशों में भारतीय उच्च पदों पर काम कर रहे हैं।
3. विदेशी विश्वविद्यालयों में भारतीय अध्यापक हैं।
4. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारतीय छात्रों को नौकरी दे रही हैं।
In simple words: लेखक कहते हैं कि भारतीय मूर्ख नहीं हैं, क्योंकि वे दुनिया भर में ऊँचे पदों पर काम कर रहे हैं, पढ़ा रहे हैं और वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। अगर वे मूर्ख होते, तो उन्हें इतनी इज़्ज़त और अवसर नहीं मिलते।

🎯 Exam Tip: किसी धारणा को खंडित करते हुए गद्यांश की व्याख्या करते समय, तार्किक दलीलें और उदाहरणों का प्रयोग करें ताकि आपका जवाब मज़बूत लगे।

 

Question 6. हमारी एक कठिनाई यह भी है कि हमने सत्ता को सब कुछ समझ लिया है। हमारे लिए सत्ता सर्वोपरि हो चुकी है। योग्यता अब सत्ता की कसौटी नहीं रह गई। अच्छे या बुरे का अन्तर हमने भुला दिया। नैतिकताओं को लगभग तिलांजलि देकर सत्ता प्राप्ति ही मुख्य ध्येय हो गया। इसके लिए अन्य कोई नहीं हम स्वयं ही दोषी है। अतः कहना होगा कि एक समय भारत महाशक्ति था और अब भी महाशक्ति बनने की पूरी क्षमता, योग्यता व जरूरी संसाधनों से परिपूर्ण है। कमी केवल महाशक्ति बनने के लिए आवश्यक दृढ़ इच्छा शक्ति की है।
Answer: प्रस्तुत गद्यांश 'भारत भी महाशक्ति बन सकता है' निबंध से लिया गया है। इस निबंध के लेखक श्रीधर पराड़कर हैं। यह निबंध हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित है। हम सत्ता के लालची हो गए हैं। हमने नैतिकता छोड़ दी है। हमारी दुर्दशा के लिए हम खुद ही ज़िम्मेदार हैं। हममें दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी है।
हमारी सबसे बड़ी कमी यह है कि हम सत्ता के लालची हो गए हैं। हम सत्ता के पीछे भाग रहे हैं। हमने सत्ता को ही सब कुछ मान लिया है। योग्यता के बजाय सत्ता अब महत्वपूर्ण हो गई है। यह ऐसा नहीं रहा कि योग्य व्यक्ति ही सत्ता संभाले। कौन अच्छा है और कौन बुरा, इसका भेद हमने भुला दिया है। हमने नैतिकता छोड़ दी है और सत्ता पाने के लिए दौड़ना शुरू कर दिया है। सत्ता पाने के लिए नैतिकता को भी भुला दिया है। साम, दाम, दण्ड, भेद जैसे किसी भी तरीके से सत्ता पा लेनी चाहिए। भले ही हम नैतिकता के स्तर पर कितना भी गिर जाएं। इसके लिए कोई और नहीं बल्कि हम खुद दोषी हैं। किसी और को दोष देना गलत है। इसलिए यह कहना कि भारत एक समय महाशक्ति था और अब महाशक्ति नहीं बन सकता, गलत है। भारत के पास महाशक्ति बनने की क्षमता, योग्यता और ज़रूरी संसाधन आज भी हैं। महाशक्ति बनने के लिए केवल दृढ़ इच्छाशक्ति की ज़रूरत है। यदि भारतीय लोग दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास जगा लें तो आज भी भारत महाशक्ति बन सकता है।
विशेष:
1. भारतीय सत्ता के प्रति लालची हो गए हैं।
In simple words: लेखक कहते हैं कि हमारी सबसे बड़ी समस्या सत्ता का लालच है, जिससे हमने नैतिकता को भुला दिया है। लेकिन भारत में आज भी महाशक्ति बनने की पूरी क्षमता है, हमें सिर्फ मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास की ज़रूरत है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक या नैतिक मुद्दों पर आधारित गद्यांश की व्याख्या करते समय, समस्याओं की पहचान करें और उनके संभावित समाधानों या जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से बताएं।

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