RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Hindi अपठित गद्यांश here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Hindi. Our expert-created answers for Class 12 Hindi are available for free download in PDF format.

Detailed अपठित गद्यांश RBSE Solutions for Class 12 Hindi

For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these अपठित गद्यांश solutions will improve your exam performance.

Class 12 Hindi अपठित गद्यांश RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board RBSE Class 12 Hindi अपठित गद्यांश

गद्य और पद्य का वह हिस्सा जो पहले कभी न पढ़ा गया हो, 'अपठित' कहलाता है। दूसरे शब्दों में, ऐसा उदाहरण जो पाठ्यक्रम की तय किताबों से न होकर किसी अन्य किताब से लिया गया हो, उसे अपठित अंश माना जाता है।

RBSE Class 12 Hindi अपठित गद्यांश अपठित गद्यांश

अपठित साहित्यिक गद्यांश में गद्य-खंड को पढ़कर उससे जुड़े सवालों के जवाब देने होते हैं। इन सवालों में गद्यांश का शीर्षक, मुख्य विषय और भाषा से जुड़े बिंदु होते हैं। इसके लिए छात्रों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • सबसे पहले गद्य-खंड को कम से कम तीन बार ध्यान से पढ़ना चाहिए। समझ न आने पर घबराना या परेशान नहीं होना चाहिए, बल्कि आत्मविश्वास और धैर्य के साथ फिर से पढ़ना चाहिए।
  • गद्यांश में आए कठिन शब्दों को अलग से लिखकर उनका मतलब समझने की कोशिश करनी चाहिए। अगर सीधे अर्थ समझ न आएं तो वाक्य के संदर्भ से उसका अर्थ और भाव निकाला जा सकता है।
  • गद्यांश को पूरे ध्यान से पढ़ने के बाद उसके मुख्य विचार या संदेश को समझना चाहिए।
  • गद्यांश में इस्तेमाल हुए उद्धरण-चिह्नों (inverted comma) का प्रयोग अपने जवाबों में नहीं करना चाहिए।
  • गद्यांश का शीर्षक बहुत छोटा, अर्थपूर्ण और मुख्य विचार पर आधारित होना चाहिए।
  • अगर गद्यांश में रेखांकित शब्दों का अर्थ या उनकी व्याख्या पूछी जाए, तो संदर्भ के अनुसार ही उनका अर्थ और व्याख्या करनी चाहिए। अपनी तरफ से शब्दों या उदाहरणों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

नोट – विद्यार्थियों की मदद के लिए नीचे कुछ अपठित गद्यांश (हल किए हुए) दिए गए हैं। हर सवाल का जवाब लगभग 30 शब्दों में देना है।

RBSE Class 12 Hindi अपठित गद्यांश प्रश्नोत्तर सहित अपठित गद्यांश

प्रश्न

नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

(1) किसी भी देश की पूरी तरक्की और विकास के लिए देशवासियों में अपने देश के लिए प्रेम होना बहुत जरूरी है। जिस देश के लोगों में देश के हित और राष्ट्र की भलाई की भावना होती है, वह देश हमेशा आगे बढ़ता है। देशप्रेम से भरा व्यक्ति अपने लोगों की भलाई, देश के उद्धार और राष्ट्र की प्रगति के लिए अपना जीवन भी कुर्बान कर देता है। अगर हम अपने देश के इतिहास को देखें, तो ऐसे देशभक्तों की लंबी कतार मिलती है, जिन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर करके देशप्रेम का शानदार उदाहरण दिया है। महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, सरदार भगत सिंह, महारानी लक्ष्मीबाई, लोकमान्य तिलक, महात्मा गाँधी जैसे हजारों देशभक्तों के नाम इस मामले में लिए जाते हैं। हमें अपने देश के इतिहास से देशप्रेम की एक महान परंपरा सीखने को मिलती है और इससे हमें देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने की प्रेरणा मिलती है।

Question 1.
(क) लेखक के अनुसार कौन-सा देश उन्नतिशील होता है?
(ख) 'हमें अपने देश के इतिहास से देशप्रेम की एक गौरवपूर्ण परम्परा मिलती है और इससे हम देशहितार्थ सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।' यह किस प्रकार का वाक्य है, बताते हुए परिभाषा भी लिखें।
(ग) “स्वदेश' शब्द में मूल शब्द व उपसर्ग बताइए।
(घ) अपठित गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
Answer:
(क) लेखक का मानना है कि वह देश हमेशा उन्नति करता है, जिसके नागरिकों में देश के लिए भलाई और राष्ट्र की तरक्की की भावना होती है। ऐसा देश ही सही मायने में प्रगति करता है। देशप्रेम ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होता है।
In simple words: लेखक कहते हैं कि जिस देश के लोग अपने देश की भलाई सोचते हैं, वह देश तरक्की करता है।
(ख) यह एक 'संयुक्त वाक्य' है। संयुक्त वाक्य वह होता है जिसमें एक से ज़्यादा छोटे वाक्य (उपवाक्य) किसी जोड़ने वाले शब्द (जैसे 'और', 'तथा', 'किंतु') से जुड़े होते हैं। ऐसे हर छोटे वाक्य का अपना पूरा मतलब होता है। ऐसे वाक्य दो या दो से अधिक सरल वाक्यों को जोड़कर बनते हैं।
In simple words: यह 'संयुक्त वाक्य' है। इसमें दो या ज़्यादा छोटे वाक्य किसी जोड़ने वाले शब्द से जुड़ते हैं, और सभी का अपना पूरा अर्थ होता है।
(ग) 'स्वदेश' शब्द में मुख्य शब्द 'देश' है और इसके साथ 'स्व' उपसर्ग जुड़ा हुआ है। उपसर्ग वे छोटे शब्द होते हैं जो किसी शब्द के आगे लगकर उसका अर्थ बदल देते हैं।
In simple words: 'स्वदेश' में 'देश' मूल शब्द है और 'स्व' उपसर्ग है।
(घ) इस गद्यांश का सही शीर्षक 'स्वदेश-प्रेम' होगा। यह गद्यांश मुख्य रूप से देश के प्रति प्रेम पर ही आधारित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'स्वदेश-प्रेम' है।

🎯 Exam Tip: अपठित गद्यांश के प्रश्नों में शीर्षक हमेशा गद्यांश के मुख्य विषय से संबंधित होना चाहिए।

 

और चोरी को गलत समझता है, दूसरों को पीड़ा पहुँचाने को पाप समझता है। हर आदमी अपने व्यक्तिगत जीवन में इस बात का अनुभव करता है।

Question 2.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) कानून को धर्म के रूप में देखने का क्या आशय है?
(ग) भारतवर्ष के लोग धर्म की किन बातों को आज भी मानते हैं?
(घ) “सम्मान' शब्द से पूर्व जुड़े 'सम' उपसर्ग के स्थान पर एक अन्य ऐसा उपसर्ग जोड़िए कि विलोम शब्द बन जाय।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'धर्म और कानून' है। यह शीर्षक गद्यांश के मुख्य विषय को दर्शाता है, जहाँ धर्म और कानून के महत्व पर बात की गई है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'धर्म और कानून' है।
(ख) भारत में धर्म को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाता था क्योंकि लोग डरते थे। कानून को भी धर्म की तरह ही माना जाता था और उसका पालन करना आवश्यक समझा जाता था। जो लोग धर्म से डरते थे, वे कानून की कमी का फायदा नहीं उठाते थे। यह लोगों के नैतिक मूल्यों को मजबूत करता था।
In simple words: भारत में लोग कानून को धर्म जितना ही मानते थे, इसलिए उसका पालन करते थे और डरते थे कि कोई गलती न हो।
(ग) भारतवर्ष के लोग आज भी धर्म की कई बातें मानते हैं। समाज में ईमानदारी, सच्चाई और आध्यात्मिकता को बहुत महत्व दिया जाता है। मनुष्यों से प्यार करना, महिलाओं का आदर करना, झूठ न बोलना, चोरी न करना और दूसरों को न सताना जैसी धार्मिक शिक्षाओं को लोग आज भी मानते हैं। ये भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांत हैं।
In simple words: भारतीय लोग आज भी ईमानदारी, सच्चाई, प्रेम, महिलाओं का सम्मान और झूठ व चोरी न करने जैसी धार्मिक बातों को मानते हैं।
(घ) 'सम्मान' शब्द से पहले 'सम्' उपसर्ग लगा है। इस 'सम्' को हटाकर उसकी जगह 'अप' उपसर्ग लगाने से 'अपमान' शब्द बनता है, जो 'सम्मान' का उल्टा शब्द है। उपसर्ग बदलने से शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल जाता है।
In simple words: 'सम्मान' शब्द में 'सम्' की जगह 'अप' लगाने से 'अपमान' बनता है, जो उसका विलोम शब्द है।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग बदलकर विलोम शब्द बनाने के लिए सही उपसर्ग का चुनाव करना महत्वपूर्ण है, जो शब्द के अर्थ को सटीक रूप से बदल सके।

 

(3) अगर मनुष्य और पशु में कोई फर्क है, तो वह यह है कि मनुष्य के पास सोचने-समझने की शक्ति (विवेक) है, जबकि पशु के पास नहीं। इसी विवेक के कारण मनुष्य यह जान पाता है कि क्या सही है और क्या गलत। इसी शक्ति से मनुष्य समझता है कि जीवन का मतलब सिर्फ खाना-पीना और सोना नहीं है। सिर्फ अपना पेट भरने से दुनिया के सारे काम पूरे नहीं हो जाते। और अगर हमें इंसान का जीवन मिला है, तो यह सिर्फ यह देखने के लिए नहीं कि दुनिया ने हमें क्या दिया, बल्कि यह सोचने के लिए भी है कि अगर दुनिया ने हमें कुछ नहीं दिया तो हम इस संसार के भले के लिए क्या कर सकते हैं। इंसानियत का एहसास कराने वाले इस 'विवेक' को जन्म देने वाली 'शिक्षा' है। शिक्षा ही वह चीज़ है जो समय के साथ बदलते संसार में जहाँ भी रही है, हमेशा अपना काम करती रही है। यह शिक्षा ही है जिसकी सहारे यह दुनिया चलती है। विवेक से लेकर विज्ञान और ज्ञान तक, शिक्षा ही हर चीज को जन्म देती है। शिक्षा हमारे अंदर वह गुण है जिससे हम बात करते हैं, काम करते हैं, दोस्त और दुश्मन चुनते हैं और मुश्किलों को आसान करते हैं। असल में, सीखने और सिखाने के तरीके को ही शिक्षा कहते हैं। शिक्षा हमें उन बातों और तरीकों का ज्ञान देती है जिन्हें हमारे पूर्वजों ने एक सभ्य और सुखी जीवन जीने के लिए खोजा था। आज अगर हम सुखी जीवन जीना चाहते हैं, तो हमें उन्हीं तरीकों को सीखना होगा और उन तथ्यों को जानना होगा जिन्हें जानने के लिए हमारे पूर्वजों ने निरंतर सदियों तक शोध किया है। जो केवल शिक्षा के द्वारा ही संभव है।

Question 3.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) मनुष्य में और पशु में क्या अंतर है तथा क्यों?
(ग) सीखने और सिखाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं? शिक्षा मनुष्य को क्या-क्या सिखाती है?
(घ) 'विज्ञानी' शब्द में मूल शब्द व प्रत्यय बताइए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का सही शीर्षक 'शिक्षा का महत्व' है। यह गद्यांश मुख्य रूप से मनुष्य के जीवन में शिक्षा की भूमिका पर केंद्रित है। शिक्षा ही हमें सही राह दिखाती है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'शिक्षा का महत्व' है।
(ख) मनुष्य और पशु में मुख्य अंतर विवेक का है। मनुष्य के पास सोचने-समझने की शक्ति (विवेक) होती है, जिससे वह अच्छा-बुरा पहचान पाता है, जबकि पशु विवेकहीन होते हैं। इसी विवेक के कारण मनुष्य सही और गलत का विचार कर सकता है, जो पशु नहीं कर पाते।
In simple words: मनुष्य के पास विवेक होता है, जिससे वह सही-गलत समझता है, जबकि पशु के पास यह शक्ति नहीं होती।
(ग) सीखने और सिखाने की प्रक्रिया को 'शिक्षा' कहते हैं। शिक्षा मनुष्य के अंदर समझदारी (विवेक) पैदा करती है। शिक्षा ज्ञान और विज्ञान को जन्म देती है। शिक्षा ही इंसान को अच्छा व्यवहार सिखाती है, दोस्त और दुश्मन को पहचानने में मदद करती है, समस्याओं को सुलझाना बताती है और पूर्वजों की खोजों व उपलब्धियों के बारे में जानकारी देती है। शिक्षा हमें एक बेहतर इंसान बनाती है।
In simple words: शिक्षा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया है, जो मनुष्य को विवेक, अच्छा व्यवहार और ज्ञान देती है।
(घ) 'विज्ञानी' शब्द में मूल शब्द 'विज्ञान' है और इसमें 'ई' प्रत्यय जुड़ा हुआ है। 'विज्ञान' में 'ज्ञान' मूल शब्द है और 'वि' उपसर्ग है। प्रत्यय वे शब्दांश होते हैं जो शब्द के अंत में जुड़कर उसका अर्थ बदल देते हैं।
In simple words: 'विज्ञानी' में मूल शब्द 'विज्ञान' और प्रत्यय 'ई' है। 'विज्ञान' में 'ज्ञान' मूल शब्द और 'वि' उपसर्ग है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक हमेशा गद्यांश के केंद्रीय विचार को दर्शाना चाहिए और प्रश्नों के उत्तर गद्यांश के अंदर से ही ढूंढने चाहिए।

 

(4) जैसे दुख के समय भय होता है, वैसे ही खुशी के समय उत्साह होता है। डर लगने पर हम किसी मुश्किल हालात से बहुत दुखी होते हैं और कभी-कभी उससे दूर भागने की कोशिश करते हैं। उत्साह में हम आने वाली मुश्किल को बहादुरी से सामना करने का मौका मानकर खुशी से काम करने को तैयार रहते हैं। उत्साह में मुश्किलों या नुकसान को झेलने की हिम्मत के साथ-साथ काम करने की खुशी भी शामिल होती है। हिम्मत भरी खुशी के जोश को ही उत्साह कहते हैं। जो लोग कर्म की सुंदरता को महत्व देते हैं, वही असली उत्साही कहलाते हैं।

जिन कामों में किसी भी तरह का दर्द या नुकसान सहने की हिम्मत चाहिए होती है, उन सभी के प्रति जोश और खुशी को उत्साह माना जाता है। दर्द या नुकसान के प्रकार के हिसाब से उत्साह भी कई तरह का होता है। साहित्य के जानकारों ने इसी आधार पर युद्ध-वीर, दान-वीर, दया-वीर आदि जैसे भेद किए हैं। इनमें सबसे पुराना और मुख्य 'युद्ध वीरता' है, जिसमें चोट, दर्द या मौत की परवाह नहीं की जाती। इस तरह की वीरता बहुत पुराने समय से चली आ रही है, जिसमें साहस और कोशिश दोनों अपनी चरम सीमा पर होते हैं। केवल साहस से ही उत्साह पूरा नहीं होता। उसके साथ आनंद से भरा प्रयास या उसकी उत्सुकता भी चाहिए। बिना बेहोश हुए किसी बड़े फोड़े को चीरने के लिए तैयार होना 'साहस' कहलाएगा, लेकिन 'उत्साह' नहीं। इसी तरह चुपचाप बिना हिले-डुले, भारी चोट सहने के लिए तैयार रहना और मुश्किल वार सहकर भी जगह से न हटना 'धीरता' कही जाएगी। ऐसे साहस और धीरता को उत्साह तभी मान सकते हैं, जब साहसी या धैर्यवान व्यक्ति उस काम को खुशी के साथ करता रहे, जिसके कारण उसे इतनी चोटें सहनी पड़ती हैं। सारांश यह है कि उत्साह आनंद भरे प्रयास या उत्सुकता में ही दिखता है, न कि केवल दर्द सहने या चुपचाप हिम्मत दिखाने में। धीरता और साहस दोनों उत्साह के साथ मिलकर काम करते हैं।

Question 4.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) उत्साह क्या है तथा उत्साही किसको कहते हैं?
(ग) साहस और धीरता को उत्साह के अन्तर्गत किस दशा में लिया जा सकता है ?
(घ) 'अपेक्षित' का विलोम शब्द लिखिए तथा उसका अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'उत्साह' है। यह गद्यांश मुख्य रूप से उत्साह के अर्थ और उसके विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'उत्साह' है।
(ख) उत्साह हिम्मत भरी खुशी के जोश को कहते हैं। उत्साह में मुश्किलों को मजबूती से सहना और काम करने में खुशी महसूस करना दोनों शामिल होते हैं। जो व्यक्ति मुश्किलों को सहते हुए भी काम में लगे रहकर खुशी का अनुभव करता है, उसे उत्साही कहते हैं। उत्साह हमें हर चुनौती का सामना करने की प्रेरणा देता है।
In simple words: उत्साह हिम्मत भरी खुशी का जोश है। जो मुश्किलों में भी खुशी से काम करे, वह उत्साही है।
(ग) साहस और धीरता को उत्साह तब माना जा सकता है, जब कोई साहसी और धैर्यवान व्यक्ति किसी काम को खुशी के साथ लगातार करता रहे, भले ही उसे उस काम के कारण कितनी भी मुश्किलें झेलनी पड़ें। सिर्फ हिम्मत दिखाने से काम नहीं बनता, उसमें खुशी भी होनी चाहिए।
In simple words: साहस और धीरता उत्साह तभी हैं जब व्यक्ति खुशी से मुश्किलों का सामना करे।
(घ) 'अपेक्षित' का विलोम शब्द 'अनपेक्षित' है।
वाक्य प्रयोग: अचानक आई बारिश एक अनपेक्षित घटना थी। इससे किसी को भी बहुत हैरानी हो सकती है।
In simple words: 'अपेक्षित' का उल्टा 'अनपेक्षित' होता है। वाक्य: अचानक बारिश आना अनपेक्षित था।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय ध्यान रखें कि दिया गया शब्द संज्ञा है या विशेषण, और उसी के अनुसार उसका विलोम लिखें।

 

विध्वंस के लिए वे हाथ निर्माण के लिए नहीं होते। यह भीड़ एक अंधी गली से दूसरी गली की ओर जाता है, क्योंकि भीड़ में शामिल लोगों का आपस में कोई संबंध नहीं होता। वे एक-दूसरे को जानते तक नहीं। सभी अनजान लोग एक साथ मिलकर चीजों को तोड़ने-फोड़ने में लग जाते हैं, क्योंकि जिन इमारतों, बसों या ट्रेनों को वे नुकसान पहुँचाते हैं, वे उनकी अपनी नहीं होतीं और न ही उनमें सफर करने वाले उनके अपने लोग होते हैं। बड़े शहरों में लोग एक ही बिल्डिंग में पड़ोसी बनकर रहते तो हैं, लेकिन यह पड़ोसीपन भी बिना किसी रिश्ते का होता है। पुराने समय में दही जमाने के लिए जामन मांगने पड़ोस में लोग जाते थे, अब हर फ्लैट में फ्रिज है, इसलिए जामन मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। सारा पड़ोसीपन और सभी रिश्ते इस फ्रिज में 'फ्रीज' होकर रह गए हैं, यानी उनमें गर्माहट और जुड़ाव खत्म हो गया है।

Question 5.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) 'महानगरों में भीड़ होती है, समाज या लोग नहीं बसते'-इस वाक्य का आशय क्या है?
(ग) सारे संबंध इस फ्रिज में फ्रीज' रहते हैं-ऐसा क्यों कहा जाता है ?
(घ) “निर्माण' शब्द का विलोम लिखिए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'महानगरों में असामाजिक संस्कृति' है। यह शहरी जीवन में कम होते सामाजिक संबंधों को दर्शाता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'महानगरों में असामाजिक संस्कृति' है।
(ख) महानगरों में बहुत सारे लोग रहते हैं, लेकिन उनके बीच आपसी सामाजिक संबंध नहीं होते। वे एक-दूसरे को जानते नहीं, न ही आपस में मिलते-जुलते हैं। पास-पास रहने के बावजूद भी वे एक-दूसरे के पड़ोसी नहीं होते, बल्कि अजनबी जैसे रहते हैं। यह शहरी जीवन की एक कड़वी सच्चाई है।
In simple words: महानगरों में लोग बहुत होते हैं पर आपस में रिश्ते नहीं होते, वे एक-दूसरे को जानते तक नहीं।
(ग) फ्रिज एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग खाने की चीज़ों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। इसका मतलब है कि आधुनिक समाज में लोगों के आपसी रिश्तों में अब पहले जैसी गर्माहट और नजदीकी नहीं रही है। लोग एक ही इमारत में रहते हैं, लेकिन पड़ोसियों से उनके कोई संबंध नहीं होते और वे एक-दूसरे को जानते भी नहीं हैं, जैसे चीजें फ्रिज में ठंडी होकर अलग पड़ी रहती हैं। इस तुलना से रिश्तों की कमी दर्शाई गई है।
In simple words: फ्रिज में संबंध 'फ्रीज' रहते हैं, इसका मतलब है कि लोगों के रिश्ते ठंडे और दूरी वाले हो गए हैं।
(घ) 'निर्माण' शब्द का विलोम 'विध्वंस' है। 'निर्माण' का अर्थ बनाना होता है, जबकि 'विध्वंस' का अर्थ नष्ट करना।
In simple words: 'निर्माण' का उल्टा शब्द 'विध्वंस' है।

🎯 Exam Tip: मुहावरों और प्रतीकात्मक वाक्यों का अर्थ गद्यांश के संदर्भ में ही समझना चाहिए, ताकि सही आशय स्पष्ट हो सके।

 

(6) भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है जो कुछ दिन भूखा रह सकता है। 'जीवन का आनंद त्याग के साथ लेना चाहिए।' यह सिर्फ धार्मिक सलाह नहीं है, क्योंकि संयम के साथ चीजों का आनंद लेने से जीवन में जो खुशी मिलती है, वह सिर्फ भोग करने वाले व्यक्ति को नहीं मिल पाती। अकबर ने तेरह साल की उम्र में अपने पिता के दुश्मन को हरा दिया था, जिसका कारण था कि अकबर रेगिस्तान में पैदा हुए थे और उनके पिता के पास एक कस्तूरी के सिवा कोई और संपत्ति नहीं थी। महाभारत में ज्यादातर शूरवीर कौरवों की तरफ थे, लेकिन पांडवों की जीत हुई क्योंकि उन्होंने लाक्षागृह की मुसीबत झेली थी और वनवास के खतरों का सामना किया था। श्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि जीवन का सबसे बड़ा गुण हिम्मत है। इंसान के बाकी सारे अच्छे गुण उसके साहसी होने से ही पैदा होते हैं।

Question 6.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) भोजन का असली स्वाद किसको मिलता है?
(ग) जीवन का भोग त्याग के साथ करो'-आशय स्पष्ट कीजिए।
(घ) 'वनवास' पद का विग्रह कर समास का नामोल्लेख कीजिए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'जीवन में त्याग का महत्व' है। यह गद्यांश त्याग और संयम के महत्व को दर्शाता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'जीवन में त्याग का महत्व' है।
(ख) भोजन का असली स्वाद उसी व्यक्ति को मिलता है जो कुछ दिनों तक भूखा रह सकता है। जब हम भूख महसूस करते हैं, तभी हमें खाने का सही आनंद मिलता है।
In simple words: भोजन का असली स्वाद उसे मिलता है जो कुछ दिन भूखा रह सकता है।
(ग) 'जीवन का भोग त्याग के साथ करो' का मतलब है कि जीवन के सुखों का आनंद त्याग की भावना के साथ लेना चाहिए। यदि हम केवल भोग करने के बजाय कुछ त्याग करके उनका आनंद लेते हैं, तो वह सच्चा आनंद होता है। इससे जीवन में संतुलन बना रहता है।
In simple words: इसका मतलब है कि जीवन के सुखों का आनंद त्याग के साथ लेने पर सच्चा सुख मिलता है।
(घ) 'वनवास' पद का विग्रह 'वन में वास' है और यह 'तत्पुरुष समास' का उदाहरण है। तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है और कारक चिह्नों का लोप होता है।
In simple words: 'वनवास' का विग्रह 'वन में वास' है और यह 'तत्पुरुष समास' है।

🎯 Exam Tip: समास-विग्रह करते समय शब्द के अर्थ को सही ढंग से समझना और उसके अनुसार ही समास का प्रकार बताना महत्वपूर्ण है।

 

(7) शहादत (बलिदान) और चुपचाप की गई सेवा! जिस बलिदान को पहचान मिली, जो मशहूर हुआ, वह तो किसी इमारत का शिखर या मंदिर का कलश जैसा है। हाँ, ऐसी शहादत और शांत सेवा ही समाज की असली नींव होती है। ईसा मसीह के बलिदान ने ईसाई धर्म को अमर बना दिया। लेकिन मेरे विचार से ईसाई धर्म को उन लोगों ने अमर बनाया जिन्होंने इस धर्म के प्रचार में अपना नाम उजागर किए बिना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उनमें से कितने ही लोगों को जिंदा जलाया गया, कितनों को सूली पर चढ़ाया गया, कितने जंगल-जंगल भटकते हुए जंगली जानवरों का शिकार बने, कितने ही भयानक भूख-प्यास के शिकार हुए। शायद उनके नाम कहीं लिखे नहीं गए होंगे, उनकी चर्चा भी शायद ही होती होगी, लेकिन ईसाई धर्म उन्हीं के पुण्य और प्रभाव से फल-फूल रहा है। वे धर्म की नींव की ईंटें थे, और गिरजाघरों के कलश उन्हीं के बलिदान से चमकते हैं। आज हमारा देश सिर्फ उन लोगों के बलिदान से आजाद नहीं हुआ, जिन्होंने इतिहास में जगह बनाई है, बल्कि उन अनदेखे बलिदानों से भी, जिसे हम देख नहीं पाते। यह एक ऐसी शांत धारणा है कि सच ढूंढने से ही मिलता है। हमारा काम और धर्म है कि ऐसी नींव की ईंटों पर ध्यान दें। सदियों बाद हमने नए समाज को बनाने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है।

Question 7.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) समाज की आधारशिला किसको कहा गया है?
(ग) अपने को अनाम उत्सर्ग कर देने का क्या तात्पर्य है?
(घ) निम्न विदेशी शब्दों के अर्थ बताइये-शहादत, शोहरत।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'नींव की ईंट' है। यह उन गुमनाम बलिदानों को दर्शाता है जो समाज की नींव रखते हैं।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'नींव की ईंट' है।
(ख) जो लोग बिना किसी प्रचार की इच्छा के शांतिपूर्वक देश और समाज के लिए अपना बलिदान देते हैं, उन्हीं के इस आत्मबलिदान को समाज की आधारशिला कहा गया है। ऐसे निस्वार्थ कार्य ही समाज को मजबूत बनाते हैं।
In simple words: बिना प्रचार के देश और समाज के लिए दिए गए बलिदान को समाज की नींव कहा गया है।
(ग) 'अपने को अनाम उत्सर्ग कर देना' का मतलब है कि सच्चा त्यागी व्यक्ति प्रचार की इच्छा नहीं रखता। जो व्यक्ति अपने देश, अपने धर्म और अपने समाज की भलाई के लिए चुपचाप अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है, और लोग उसका नाम भी नहीं जानते, ऐसे त्याग को 'अनाम उत्सर्ग' कहते हैं। यह निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है।
In simple words: इसका मतलब है कि बिना नाम बताए या प्रचार किए अपना सब कुछ देश और समाज के लिए न्योछावर कर देना।
(घ) शहादत का अर्थ है 'बलिदान'। शोहरत का अर्थ है 'प्रसिद्धि'। ये दोनों शब्द अक्सर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होते हैं जिन्होंने महान कार्य किए हों।
In simple words: शहादत = बलिदान, शोहरत = प्रसिद्धि।

🎯 Exam Tip: विदेशी शब्दों के अर्थ याद रखें, क्योंकि ये अक्सर गद्यांश आधारित प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

 

(8) अहिंसा और कायरता एक साथ नहीं चल सकतीं। मैं पूरी तरह से हथियार से लैस इंसान के दिल में डर की कल्पना कर सकता हूँ। हथियार रखना कायरता नहीं है, लेकिन डरपोक होना तो डर को साफ दिखाता है। सच्ची अहिंसा बिना किसी डर के संभव नहीं है।

क्या मुझमें बहादुरों वाली अहिंसा है? यह सिर्फ मेरी मौत ही बताएगी। अगर कोई मुझे मारे और मैं अपने हत्यारे के लिए प्रार्थना करते हुए, भगवान का नाम जपते हुए और दिल में उसकी मौजूदगी महसूस करते हुए मरूं, तभी कहा जाएगा कि मुझमें बहादुरों की अहिंसा थी। मैं अपनी सारी ताकत खोकर एक हारे हुए आदमी की तरह अपाहिज होकर मरना नहीं चाहता। अगर किसी हत्यारे की गोली मेरे जीवन का अंत कर दे, तो मैं उसका स्वागत करूंगा। लेकिन सबसे ज्यादा तो मैं सिर्फ अपनी इच्छा से मरना पसंद करूंगा।

Question 8.
(क) इस गद्यांश को उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) महात्मा गांधी सच्ची अहिंसा के लिए मनुष्य में किस गुण का होना आवश्यक मानते हैं ? इस प्रकार की अहिंसा को उन्होंने क्या नाम दिया है ?
(ग) गांधीजी को किस प्रकार मरना पसन्द था ?
(घ) शस्त्र-सज्जित का विग्रह करके समास का नाम लिखिए
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'सच्चे अहिंसावादी गांधी जी' है। यह गद्यांश गांधीजी के अहिंसा के विचार और उनकी निर्भयता को स्पष्ट करता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'सच्चे अहिंसावादी गांधी जी' है।
(ख) महात्मा गांधी का मानना है कि सच्ची अहिंसा के लिए इंसान में निडरता होनी बहुत ज़रूरी है। उन्होंने इस तरह की अहिंसा को 'बहादुरों की अहिंसा' कहा है। हथियार रखने वाले व्यक्ति के मन में डर या कायरता हो सकती है, लेकिन जो व्यक्ति सच्चा अहिंसक होता है, वह हमेशा निडर रहता है। सच्ची अहिंसा बिना डर के ही संभव है।
In simple words: गांधीजी सच्ची अहिंसा के लिए मनुष्य में निडरता को ज़रूरी मानते थे और इसे 'बहादुरों की अहिंसा' कहते थे।
(ग) गांधीजी को अपना कर्तव्य निभाते हुए मरना पसंद था। वे अपनी शक्ति खोकर, एक हारे हुए और अपाहिज आदमी की तरह मरना नहीं चाहते थे। उन्हें अपने हत्यारे को माफ करके, भगवान को अपने दिल में रखकर और भगवान का नाम जपते हुए मरना पसंद था। यह उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।
In simple words: गांधीजी अपना कर्तव्य निभाते हुए, निडर होकर, हत्यारे को माफ करते हुए और भगवान का नाम लेते हुए मरना पसंद करते थे।
(घ) 'शस्त्र-सज्जित' का विग्रह 'शस्त्र से सज्जित' (शस्त्रों से सुसज्जित) है। इसमें 'तत्पुरुष समास' है। तत्पुरुष समास में कारक चिह्नों का लोप होता है।
In simple words: 'शस्त्र-सज्जित' का विग्रह 'शस्त्र से सज्जित' है और यह 'तत्पुरुष समास' है।

🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि कारक चिह्न (जैसे 'से', 'में') क्या हैं, ताकि सही समास प्रकार बताया जा सके।

 

(9) आज के समाज में हर तरफ नैतिक मूल्यों की गिरावट दिख रही है। भोग-विलास और पैसों के लालच में लोग बेतहाशा पैसा कमाने की अंधी दौड़ में शामिल हो गए हैं। आज का इंसान स्वार्थी हो चुका है कि उसे सही-गलत और नैतिक-अनैतिक का फर्क नहीं दिख रहा। किसी एक व्यक्ति के निजी स्वार्थ से समाज को कितना नुकसान हो रहा है, इसका शायद किसी को एहसास भी नहीं है। आज के माता-पिता भी पैसे कमाने और भौतिक चीजें जुटाने में इतने व्यस्त हैं कि उनके बच्चों के लिए प्यार का झरना ही सूख गया है। उनकी इस अनदेखी ने मासूम बच्चों के दिलों को बहुत गहरा दुख पहुँचाया है। आज का बच्चा अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए या तो घर पर टीवी के गंदे कार्यक्रम देखता है या गलत संगत में पड़कर अपना जीवन बर्बाद कर लेता है। समाज के इस मुश्किल दौर में छात्र कौन से जीवन मूल्य सीख पाएगा, यह कहना बहुत मुश्किल है।

जब-जब समाज रास्ता भटका है, तब-तब युग सर्जक की भूमिका का निर्वाह शिक्षकों ने बखूबी किया है। आज की स्थिति में भी जीवन मूल्यों की रक्षा करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों पर ही है। मौजूदा हालात में जीवन मूल्यों को स्थापित करने का भार शिक्षकों पर है, क्योंकि आज का परिवार बच्चे के लिए अच्छे गुणों की पाठशाला जैसी संस्था नहीं रहा, जहाँ से बालक एक संतुलित व्यक्तित्व की शिक्षा पा सके। विद्यालय में शिक्षक छात्र के लिए एक आदर्श होता है।

Question 9.
(क) प्रस्तुत गद्यांश के लिए उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) आज के समाज में बालकों के सामने क्या समस्या है तथा इसका कारण क्या है?
(ग) बदलते परिवेश का परिवार नामक संस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है?
(घ) विलोम शब्द लिखिए-(i) संयुक्त, (ii) अतीत, (iii) उच्च, (iv) पाश्चात्य।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'नैतिक मूल्यों का ह्रास' है। यह गद्यांश समाज में नैतिक गिरावट पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'नैतिक मूल्यों का ह्रास' है।
(ख) आज समाज में बच्चों के सामने अकेलेपन की समस्या है। इसका मुख्य कारण यह है कि माता-पिता भौतिक सुख-सुविधाएँ जुटाने और पैसा कमाने में इतने व्यस्त रहते हैं कि उनके पास अपने बच्चों के साथ समय बिताने का समय ही नहीं है। बच्चे भावनात्मक सहारे के बिना बड़े हो रहे हैं।
In simple words: आज बच्चे अकेले हैं क्योंकि माता-पिता पैसा कमाने और भौतिक चीज़ों में व्यस्त रहते हैं, बच्चों को समय नहीं दे पाते।
(ग) बदलते परिवेश का परिवार नामक संस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है। संयुक्त परिवार आधुनिकता के कारण खत्म हो गए और उनकी जगह एकल परिवार बढ़ गए हैं। अब तो एकल परिवार पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों के साथ समय नहीं बिता पाते, जिससे बच्चों में अकेलेपन की भावना बढ़ रही है।
In simple words: परिवार पर बहुत बुरा असर पड़ा है; संयुक्त परिवार खत्म हो गए, और एकल परिवार में भी बच्चे अकेले पड़ रहे हैं।
(घ) (i) संयुक्त - एकल, (ii) अतीत - वर्तमान, (iii) उच्च - निम्न, (iv) पाश्चात्य - पौर्वात्य।
In simple words: संयुक्त का एकल, अतीत का वर्तमान, उच्च का निम्न और पाश्चात्य का पौर्वात्य विलोम शब्द हैं।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्दों के लिए, सटीक विपरीत अर्थ वाले शब्द चुनें और उनके लिंग व वचन का भी ध्यान रखें।

 

(10) आइए देखें, जीवन क्या है? जीवन का मतलब सिर्फ जीना, खाना, सोना और मर जाना नहीं है। यह तो पशुओं का जीवन होता है। इंसान के जीवन में भी ये सारी आदतें होती हैं, क्योंकि वह भी एक प्राणी है। लेकिन इन सबके अलावा भी कुछ और होता है। इंसान में कुछ ऐसी भावनाएं होती हैं, जो प्रकृति के साथ हमारे तालमेल में रुकावट डालती हैं, और कुछ ऐसी होती हैं जो इसमें मदद करती हैं। जिन आदतों से प्रकृति के साथ हमारा तालमेल बढ़ता है, वे अच्छी होती हैं। जिनसे तालमेल में रुकावट आती है, वे खराब होती हैं। अहंकार, गुस्सा या नफरत हमारे मन की ऐसी बुरी आदतें हैं जो रुकावट पैदा करती हैं। अगर हम इन्हें बिना रोक-टोके चलने दें, तो ये हमें बर्बादी और पतन की ओर ले जाएंगी। इसलिए हमें इन पर लगाम लगानी पड़ती है और खुद को रोकना पड़ता है, ताकि ये अपनी सीमा से बाहर न निकलें। हम इन पर जितना ज़्यादा नियंत्रण रख पाते हैं, हमारा जीवन उतना ही खुशहाल होता है।

लेकिन शरारती लड़कों को डांटकर कहना- "तुम बड़े बदमाश हो, हम तुम्हारे कान पकड़कर उखाड़ देंगे"- अक्सर बेकार होता है। बल्कि यह उनके गलत स्वभाव को और मजबूत बना देता है। ज़रूरत यह है कि बच्चे में जो अच्छी आदतें हैं, उन्हें इस तरह से बढ़ावा दिया जाए कि बुरी आदतें अपने आप शांत हो जाएं। इसी प्रकार, इंसान को भी अपने अंदर के विकास के लिए संयम की ज़रूरत होती है। साहित्य ही हमारी भावनाओं के रहस्यों को उजागर करके अच्छी आदतों को जगाता है। सच को हम कहानियों और कविताओं (रसों) के ज़रिए जितनी आसानी से समझ सकते हैं, उतना ज्ञान और विवेक से नहीं समझ पाते। ठीक वैसे ही जैसे दुलार-पुचकारकर बच्चों को जितनी सफलता से वश में किया जा सकता है, डांट-फटकार से सम्भव नहीं। कौन नहीं जानता कि प्रेम से कठोर-से-कठोर स्वभाव को भी नरम किया जा सकता है। साहित्य दिमाग की चीज़ नहीं, बल्कि दिल की चीज़ है। जहाँ ज्ञान और उपदेश काम नहीं आते, वहाँ साहित्य अपना जादू चला देता है और जीत जाता है।

Question 10.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) मनुष्य की वे कौन-सी प्रवृत्तियाँ हैं जिन पर संयम रखना आवश्यक है तथा क्यों ?
(ग) सद्वृत्तियों को जगाने में साहित्य का क्या योगदान है ?
(घ) 'बाजी मारना' मुहावरे का अर्थ लिखकर उसका स्व-रचित वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'सवृत्तियों का प्रेरक साहित्य' है। यह साहित्य के माध्यम से अच्छी आदतों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'सवृत्तियों का प्रेरक साहित्य' है।
(ख) अहंकार, क्रोध और द्वेष जैसी कुछ मानवीय बुरी आदतें हैं। इन पर नियंत्रण या संयम रखना बहुत ज़रूरी है। ये आदतें प्रकृति के साथ मनुष्य के तालमेल में रुकावट डालती हैं। अगर इन्हें बिना नियंत्रण के चलने दिया जाए, तो इंसान का जीवन बर्बादी और विनाश की खाई में गिर सकता है। संयम से हम एक बेहतर जीवन जी सकते हैं।
In simple words: अहंकार, क्रोध और द्वेष जैसी बुरी आदतों पर नियंत्रण ज़रूरी है, क्योंकि ये जीवन में बाधा डालती हैं और बर्बादी ला सकती हैं।
(ग) साहित्य हमारे मन की भावनाओं (मनोविकारों) के रहस्यों को उजागर करके अच्छी आदतों (सद्वृत्तियों) को जगाता है। साहित्य कहानियों और कविताओं (रसों) के माध्यम से सच्चाई को बहुत आसानी से हम तक पहुँचाता है। जहाँ ज्ञान और उपदेश काम नहीं आते, वहाँ साहित्य अपने प्रभाव से सकारात्मक बदलाव लाता है।
In simple words: साहित्य हमारी भावनाओं को जगाकर अच्छी आदतें सिखाता है, और ज्ञान से जो न हो पाए वो कहानियों से करवाता है।
(घ) 'बाजी मारना' मुहावरे का अर्थ है 'जीत जाना' या 'लाभ उठाना'।
वाक्य प्रयोग: रमेश ने कड़ी मेहनत करके परीक्षा में बाजी मार ली। यह दिखाता है कि कड़ी मेहनत से सफलता जरूर मिलती है।
In simple words: 'बाजी मारना' का अर्थ है 'जीत जाना'। वाक्य: रमेश ने परीक्षा में बाजी मार ली।

🎯 Exam Tip: मुहावरों और उनके वाक्यों का प्रयोग हमेशा प्रसंग के अनुसार करें, ताकि अर्थ स्पष्ट हो।

 

(11) अपने इतिहास के ज़्यादातर समय में भारत एक ही सांस्कृतिक इकाई होते हुए भी आपसी लड़ाइयों से कमजोर होता रहा। यहाँ के राजा शासन चलाने में चालाक और लापरवाह थे। समय-समय पर यहाँ अकाल, बाढ़ और महामारियां आती रहीं, जिनसे हज़ारों लोगों की मौत हुई।

जन्म से मिली असमानता को धर्म के अनुसार सही माना गया, जिसके फलस्वरूप निचले कुल के लोगों का जीवन एक अभिशाप जैसा हो गया। इन सबके बावजूद भी हमारा मानना है कि पुराने समय में दुनिया के किसी भी हिस्से में इंसान-से-इंसान और इंसान के शासन में इतने सुंदर और मानवीय संबंध नहीं थे। किसी भी दूसरी प्राचीन सभ्यता में गुलामों की संख्या उतनी कम नहीं थी जितनी भारत में थी। न ही 'अर्थशास्त्र' जैसा कोई प्राचीन न्याय ग्रंथ मानवीय अधिकारों को इतनी सुरक्षा देता था। मनु जैसे किसी दूसरे प्राचीन कानून बनाने वाले ने युद्ध में न्याय के इतने ऊँचे आदर्शों की बात नहीं कही। हिंदू काल के भारत के युद्धों के इतिहास में ऐसी कोई कहानी नहीं मिलती, जहाँ पूरे-के-पूरे शहर को तलवार के घाट उतार दिया गया हो या शांतिप्रिय नागरिकों का सामूहिक नरसंहार किया गया हो। असीरिया के राजाओं की भयानक क्रूरता, जहाँ वे अपने बंदियों की खालें खींच लेते थे, प्राचीन भारत में बिल्कुल नहीं दिखती। बेशक, कहीं-कहीं क्रूरता और कठोर व्यवहार था, लेकिन यह दूसरी शुरुआती सभ्यताओं की तुलना में बहुत कम था। हमारे लिए प्राचीन भारतीय सभ्यता की सबसे खास बात उसकी इंसानियत है।

Question 11.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) इतिहास के अधिकांश काल में भारत के कमजोर बने रहने का क्या कारण है?
(ग) प्राचीन भारतीय सभ्यता को सर्वाधिक मानवीय कैसे कहा जा सकता है?
(घ) “तलवार के घाट उतारना' मुहावरे का अर्थ लिखकर उसका अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'प्राचीन भारतीय सभ्यता और मानवीयता' है। यह प्राचीन भारत की मानवीय विशेषताओं पर प्रकाश डालता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'प्राचीन भारतीय सभ्यता और मानवीयता' है।
(ख) इतिहास के ज़्यादातर समय में भारत कमजोर इसलिए रहा क्योंकि यहाँ के शासक शासन चलाने में अकुशल और लापरवाह थे। वे अक्सर छोटी-छोटी बातों पर आपस में लड़ते रहते थे। इस कारण आम जनता बाढ़, अकाल और महामारियों जैसी प्राकृतिक आपदाओं से परेशान रहती थी। राजाओं की कमजोरी से प्रजा को भुगतना पड़ा।
In simple words: भारत के कमजोर रहने का कारण शासकों की अकुशलता और आपसी लड़ाई थी, जिससे प्रजा को प्राकृतिक आपदाएं झेलनी पड़ीं।
(ग) प्राचीन भारतीय सभ्यता अपने समय की दूसरी सभ्यताओं की तुलना में सबसे ज़्यादा मानवीय थी। 'अर्थशास्त्र' और 'मनुस्मृति' जैसे न्याय ग्रंथों में इंसानों के अधिकारों को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है। भारत के इतिहास में ऐसे उदाहरण नहीं मिलते जहाँ विदेशी शासकों ने शांतिप्रिय नागरिकों का सामूहिक नरसंहार किया हो या अमानवीय तरीके से उन्हें दबाया हो। यह हमारी संस्कृति की महानता दिखाता है।
In simple words: प्राचीन भारतीय सभ्यता सबसे ज़्यादा मानवीय थी क्योंकि यहाँ मानवीय अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया था और क्रूर दमन के उदाहरण नहीं मिलते।
(घ) 'तलवार के घाट उतारना' मुहावरे का अर्थ है 'हत्या करना' या 'जान से मार देना'।
वाक्य प्रयोग: प्राचीन काल में युद्धों में सैनिक अपने दुश्मनों को तलवार के घाट उतार देते थे। यह मुहावरा अक्सर युद्धों में होने वाली हिंसा को दर्शाता है।
In simple words: 'तलवार के घाट उतारना' का मतलब 'हत्या करना' है। वाक्य: युद्धों में दुश्मन को तलवार के घाट उतार दिया जाता था।

🎯 Exam Tip: मुहावरों के अर्थ को सटीक रूप से व्यक्त करें और वाक्य प्रयोग ऐसा करें जो मुहावरे के अर्थ को स्पष्ट करे।

 

(12) जो लोग दूसरों को नुकसान पहुँचाने में शामिल रहते हुए भी उनसे दूर रहते हैं, उनसे बेहतर वे लोग हैं जो दूसरों की भलाई में शामिल रहते हैं। क्षत्रिय धर्म सिर्फ अकेला रहने का नाम नहीं है, बल्कि इसका संबंध लोगों की रक्षा से है। इसलिए, यह जनता के पूरे जीवन को छूने वाला होना चाहिए। 'राजा अपने घर का ही राजा होता है', यानी उसकी शक्ति एक सीमित दायरे में होती है। झूठे सम्मान और उपाधियों से यह बात कभी सच नहीं हो सकती। क्षत्रिय जीवन में बस इतना बदलाव आया है कि उसका धर्म के साथ तालमेल खत्म हो गया है, यानी धर्म और कर्तव्य अलग-अलग हो गए हैं।

Question 12.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
(ख) क्षात्रधर्म क्या है ? उसमें कर्म सौन्दर्य कितने रूपों में दिखाई देता है ?
(ग) 'वणिग्धर्म' किसको कहा गया है तथा क्यों ?
(घ) 'व्यापकता' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है? इस प्रत्यय से बना एक अन्य शब्द लिखिए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'क्षत्रिय धर्म और लोकरक्षा' है। यह क्षत्रिय धर्म के सामाजिक दायित्वों पर प्रकाश डालता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'क्षत्रिय धर्म और लोकरक्षा' है।
(ख) क्षत्रिय का कर्तव्य ही क्षात्रधर्म कहलाता है। इसमें अच्छे लोगों की रक्षा करना और बुरे लोगों को दंडित करना क्षत्रिय के मुख्य कर्तव्य हैं। क्षत्रिय धर्म में काम की सुंदरता कई रूपों में दिखती है, जैसे- ताकत के साथ माफी, धन के साथ नम्रता, पराक्रम के साथ सुंदरता, तेज के साथ कोमलता, सुख भोगते समय दुखियों के प्रति दया और सम्मान के साथ धर्म के मार्ग पर चलना। ये सभी गुण क्षत्रिय धर्म को श्रेष्ठ बनाते हैं।
In simple words: क्षत्रिय धर्म में सज्जनों की रक्षा और दुष्टों का दमन मुख्य है। इसमें शक्ति, विनम्रता, पराक्रम और दया जैसे गुणों से कर्म की सुंदरता दिखती है।
(ग) व्यापारी के काम को 'वणिग्धर्म' कहा गया है। इसमें पैसा कमाना मुख्य होता है। आज के समय में लोग इंसानियत की जगह सिर्फ धन कमाने में लगे हुए हैं। इसका मतलब यह है कि व्यापार करते समय नैतिक मूल्यों को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे सामाजिक मूल्यों की गिरावट हो रही है।
In simple words: 'वणिग्धर्म' व्यापारी के काम को कहते हैं, जहाँ पैसे कमाना मुख्य होता है। आज लोग इंसानियत भूलकर बस पैसे कमा रहे हैं।
(घ) 'व्यापकता' शब्द में 'ता' प्रत्यय जुड़ा है। इस प्रत्यय से बना एक अन्य शब्द 'सुंदरता' हो सकता है। प्रत्यय शब्द के अंत में लगकर उसके अर्थ में बदलाव लाते हैं।
In simple words: 'व्यापकता' में 'ता' प्रत्यय है। 'सुंदरता' भी इसी प्रत्यय से बना है।

🎯 Exam Tip: प्रत्यय की पहचान करते समय, मूल शब्द और जुड़े हुए अंश को अलग-अलग करके देखना चाहिए, जिससे सही प्रत्यय का पता चले।

 

(13) बदलते सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक माहौल में इंसान अपनी सहजता खोकर बनावटीपन और दिखावे की भीड़ में गुम होता जा रहा है। वह सच्चाई को छिपाकर, सभ्य और सुसंस्कृत होने के नाम पर झूठे दिखावों और ढोंग अपना रहा है। इस मुश्किल माहौल में आम जीवन की स्वाभाविक अभिव्यक्ति को खोजना असंभव नहीं तो बहुत मुश्किल ज़रूर हो गया है। बड़े शहरों में रहने पर इंसान खुद को अकेला, छोटा, खोया हुआ, बीमार, असहाय और अंजान महसूस कर रहा है। "जितना बड़ा शहर होगा, उतना ही इंसान असहाय और दूसरों पर निर्भर होगा। सोने-जागने, बैठने-उठने, आने-जाने, हँसने-रोने, हर हाल में एक यांत्रिक व्यवस्था से सब चलता है। यह शहरी जीवन का अभिशाप है।" हर जगह इंसान आज़ाद होता जा रहा है। मानवीय व्यवहार में अकल्पनीय बदलाव आया है। जिनसे आदर्श व्यवहार की उम्मीद की जाती है, वे ही आपत्तिजनक काम करते दिख रहे हैं। संयुक्त परिवार आधुनिकता की भेंट चढ़ गया है, और तो और आधुनिक युग ने एकल परिवार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नैतिक मूल्यों की गिरावट लगातार बढ़ रही है। उपभोक्तावाद ने सामाजिक मूल्यों का रूप ले लिया है। भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। भौतिक चीज़ें अब सम्मान की बात बन गई हैं। ऊँचे तबके का एक हिस्सा दोहरा व्यवहार कर रहा है। वह मंच पर हमारे अतीत के गौरव का बखान करता है और असल में अमेरिकी संस्कृति को अपनाता है। एक वर्ग तो पूरी तरह पश्चिमी संस्कृति का गुलाम हो गया है। इस वर्ग ने 'भारत' को अपने लिए 'इंडिया' बना लिया है।

Question 13.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
(ख) आज मानव-समाज में लोकजीवन की सरस अभिव्यक्ति को ढूंढना कठिन क्यों हो गया है?
(ग) बदलते परिवेश का परिवार नामक संस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है?
(घ) विलोम शब्द लिखिए-(i) संयुक्त, (ii) अतीत, (iii) उच्च, (iv) पाश्चात्य।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'आधुनिकता और नैतिक ह्रास' है। यह गद्यांश आधुनिक समाज में नैतिक मूल्यों की गिरावट को दर्शाता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'आधुनिकता और नैतिक ह्रास' है।
(ख) आज के मानव समाज में आम जीवन की स्वाभाविक अभिव्यक्ति को खोजना मुश्किल हो गया है, क्योंकि समाज में बनावटीपन और दिखावा बहुत बढ़ गया है। लोग सच्चाई से दूर होकर झूठे दिखावों को अपना रहे हैं। इस बदलते माहौल में सच्ची भावनाएं व्यक्त करना कठिन हो गया है।
In simple words: समाज में बनावटीपन और दिखावा बढ़ने के कारण आज आम जीवन की सच्ची अभिव्यक्ति को खोजना मुश्किल हो गया है।
(ग) बदलते परिवेश का परिवार नामक संस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। संयुक्त परिवार आधुनिकता के कारण खत्म हो गए और उनकी जगह एकल परिवार बढ़ गए हैं। अब तो एकल परिवार पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों के साथ समय नहीं बिता पाते, जिससे बच्चों में अकेलेपन की भावना बढ़ रही है।
In simple words: परिवार पर बहुत बुरा असर पड़ा है; संयुक्त परिवार खत्म हो गए, और एकल परिवार में भी बच्चे अकेले पड़ रहे हैं।
(घ) (i) संयुक्त - एकल, (ii) अतीत - वर्तमान, (iii) उच्च - निम्न, (iv) पाश्चात्य - पौर्वात्य।
In simple words: संयुक्त का एकल, अतीत का वर्तमान, उच्च का निम्न और पाश्चात्य का पौर्वात्य विलोम शब्द हैं।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्दों के अभ्यास के लिए, शब्दों के विपरीत अर्थों को ध्यान से समझें और उन्हें याद करें।

 

(14) कर्तव्य को निभाना और सच्चाई में गहरा संबंध है। जो व्यक्ति अपना कर्तव्य निभाता है, वह अपने कामों और बातों में सच्चाई रखता है। वह सही समय पर, सही तरीके से अच्छे काम करता है। सच्चाई ही एक ऐसी चीज़ है जिससे इस दुनिया में इंसान अपने कामों में सफल हो सकता है, क्योंकि दुनिया में कोई भी काम झूठ से नहीं चल सकता। अगर किसी घर में सब लोग झूठ बोलने लगें, तो उस घर में कोई काम नहीं हो पाएगा और सब लोग बड़ा दुख भोगेंगे। इसलिए हमें अपने कामों में झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। सच्चाई को सबसे ऊँचा स्थान देना चाहिए। दुनिया में जितने भी पाप हैं, झूठ उन सबमें सबसे बुरा है। झूठ पाप, चालाकी और कायरता से पैदा होता है। बहुत से लोग सच्चाई पर इतना कम ध्यान देते हैं कि वे अपने नौकरों को खुद झूठ बोलना सिखाते हैं। लेकिन उन्हें इस बात पर आश्चर्य करना और गुस्सा नहीं होना चाहिए, जब उनके नौकर भी उनसे अपने लिए झूठ बोलें।

बहुत से लोग नियम और ज़रूरत का बहाना बनाकर झूठ को सही ठहराते हैं। वे कहते हैं कि इस समय झूठ बोलना नियम के हिसाब से सही है या इस समय झूठ बोलने की ज़रूरत है। फिर बहुत से लोग किसी बात को 'सत्य-सत्य' कहकर ऐसे बोलते हैं, जिससे सुनने वाला यह समझे कि यह बात सच नहीं है, बल्कि इसका उल्टा ही सच होगा। इस प्रकार से बातें करके झूठ बोलना पाप से कम नहीं है।

दुनिया में बहुत से ऐसे नीच और बुरे लोग भी होते हैं, जो झूठ बोलने को अपनी होशियारी समझते हैं और सच को छिपाकर धोखा देकर या झूठ बोलकर खुद को बचा लेने में अपना बड़ा सम्मान मानते हैं। ऐसे लोग ही समाज को बर्बाद करके दुख और परेशानी फैलाने के मुख्य कारण होते हैं। इस प्रकार, झूठ बोलना, खासकर जब स्पष्ट न बोला जाए, तो यह न बोलने से भी ज़्यादा बुरा और निंदनीय काम है।

Question 14.
(क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) कर्तव्य-पालन करने वाले मनुष्य में कौन-से गुण होते हैं?
(ग) नीति और आवश्यकता के बहाने झूठ की रक्षा कैसे की जाती है?
(घ) 'समयानुकूल' शब्द में सन्धि-विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए।
Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'जीवन में सत्य का महत्त्व' है। यह गद्यांश कर्तव्य और सच्चाई के महत्व पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'जीवन में सत्य का महत्त्व' है।
(ख) जो व्यक्ति कर्तव्य का पालन करते हैं, वे अपने जीवन और कार्यों में सच्चाई का व्यवहार करते हैं। कोई भी काम सच्चाई के बिना ठीक से नहीं हो सकता। कर्तव्य पालन और सत्यता में गहरा संबंध है। ऐसे लोग सच्चाई के मार्ग पर चलकर ही अपने कर्तव्यों को सफलतापूर्वक निभाते हैं। वे जानते हैं कि ईमानदारी ही सबसे अच्छी नीति है।
In simple words: कर्तव्य-पालन करने वाले व्यक्ति सच्चे होते हैं और सच्चाई से ही अपने काम पूरे करते हैं, क्योंकि सच्चाई और कर्तव्य का गहरा संबंध है।
(ग) कुछ लोग झूठ बोलते समय यह कहते हैं कि इस समय झूठ बोलना नीति के हिसाब से सही है, या फिर इस समय झूठ बोलने की ज़रूरत है। इस तरह वे झूठ बोलने को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। वे अपने स्वार्थ के लिए नियमों का गलत इस्तेमाल करते हैं।
In simple words: लोग नीति या ज़रूरत का बहाना बनाकर झूठ बोलते हैं, और उसे सही ठहराते हैं।
(घ) 'समयानुकूल' शब्द का संधि-विच्छेद 'समय' + 'अनुकूल' है। इस संधि का नाम 'दीर्घ स्वर संधि' है। दीर्घ स्वर संधि में दो समान स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं।
In simple words: 'समयानुकूल' का संधि-विच्छेद 'समय + अनुकूल' है और यह 'दीर्घ स्वर संधि' है।

🎯 Exam Tip: संधि-विच्छेद और संधि का नाम पहचानते समय, शब्दों के नियमों और उदाहरणों पर ध्यान दें ताकि कोई गलती न हो।

 

(15) शिक्षा का उद्देश्य इंसान को अज्ञानता के बंधन से मुक्त करके उसे विकास के लायक बनाना है। इंसान के व्यक्तित्व में छिपी हुई शक्तियों को बाहर लाना ही शिक्षा का मुख्य काम है। शिक्षा इंसान को समझदार बनाती है, ज्ञान और विज्ञान को जन्म देती है। यह उसे अच्छा व्यवहार करना सिखाती है, दोस्त और दुश्मन की पहचान कराती है। शिक्षा समस्याओं को हल करना और पूर्वजों की खोजों व उपलब्धियों के बारे में जानकारी देती है।

Question 15.
(क) शिक्षा का उद्देश्य किसे बताया गया है और क्यों?
(ख) “विद्या मनुष्य को अज्ञान के बन्धन से मुक्त करती है।' यह किस प्रकार का वाक्य है? प्रकार बताते हुए परिभाषा भी लिखें।
(ग) 'मानवीय' शब्द में मूल शब्द व प्रत्यय बताइए।
(घ) अपठित गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
Answer:
(क) शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य के जीवन को हर तरह से विकसित करना है। शिक्षा इंसान के व्यक्तित्व में छिपी हुई क्षमताओं को बाहर निकालती है और उसे विकास के योग्य बनाती है। यह उसे एक संपूर्ण इंसान बनाती है।
In simple words: शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य का सर्वांगीण विकास करना है, ताकि वह अपनी क्षमताओं को पहचान सके।
(ख) यह एक 'साधारण वाक्य' है। साधारण वाक्य वह होता है जिसमें सिर्फ एक काम (क्रिया) और उसे करने वाला एक ही व्यक्ति (कर्ता) होता है। इसमें कोई जटिलता नहीं होती।
In simple words: यह 'साधारण वाक्य' है, जिसमें एक काम और एक ही कर्ता होता है।
(ग) 'मानवीय' शब्द में मूल शब्द 'मानव' है। इसमें 'ईय' प्रत्यय जोड़कर 'मानवीय' शब्द बनाया गया है। 'ईय' प्रत्यय संबंध दर्शाने के लिए उपयोग होता है।
In simple words: 'मानवीय' में मूल शब्द 'मानव' है और 'ईय' प्रत्यय है।
(घ) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'शिक्षा का महत्व' हो सकता है। यह पूरे गद्यांश में शिक्षा की भूमिका को उजागर करता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'शिक्षा का महत्व' है।

🎯 Exam Tip: वाक्य के प्रकार पहचानते समय, उसमें मौजूद क्रियाओं और कर्ताओं की संख्या पर ध्यान दें।

 

(16) धर्म का असली गुण तब दिखता है जब हम जीवन की सच्चाई जानने के लिए और इस दुनिया में दया और क्षमा के योग्य चीज़ों को बढ़ाने के लिए लगातार खोज और रिसर्च करते रहते हैं। रिसर्च या खोज की लगन और उन लक्ष्यों को बढ़ाना, जिनके प्रति हम प्रेम दिखाते हैं - ये आध्यात्मिक इंसान के दो मुख्य पहलू होते हैं। हमें सच्चाई की खोज तब तक करते रहना चाहिए जब तक हम उसे जान न लें और उसका अनुभव न कर लें। चाहे कुछ भी हो, इंसान में वही तत्व मौजूद है, इसलिए वह हमारे प्यार और सद्भावना का हकदार है। समाज और पूरी सभ्यता की बस यही कोशिश है कि इंसान आपस में प्रेम और सद्भाव से रहें। हमें यह कोशिश तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक पूरी दुनिया हमारा अपना परिवार न बन जाए।

Question 16.
(क) धर्म का वास्तविक गुण कब प्रकट होता है ?
(ख) आध्यात्मिक मनुष्य के दो पक्ष कौन-से हैं ?
(ग) हर मनुष्य में कौन-सा तत्त्व मौजूद है ?
(घ) मनुष्यों को आपस में सद्भाव का प्रयास कब तक करते रहना चाहिए ?
Answer:
(क) धर्म का असली गुण तब प्रकट होता है जब हम जीवन की सच्चाई जानने के लिए और इस संसार में दया व क्षमा जैसी अच्छी चीज़ों को बढ़ाने के लिए लगातार खोज करते रहते हैं। लगातार रिसर्च में लगे रहकर ही हम धर्म के सही गुण को समझ पाते हैं।
In simple words: धर्म का असली गुण तब दिखता है जब हम सच्चाई और दया-क्षमा को खोजने का काम लगातार करते रहते हैं।
(ख) आध्यात्मिक मनुष्य के दो मुख्य पहलू होते हैं: (i) सच्चाई या ज्ञान की खोज करने की गहरी लगन होना। (ii) उन लक्ष्यों को बढ़ाना जिनके प्रति हमारे मन में बहुत गहरा प्रेम होता है। ये दोनों ही पहलू उसे आत्मिक रूप से समृद्ध बनाते हैं।
In simple words: आध्यात्मिक मनुष्य के दो पक्ष हैं: खोज की लगन और उन लक्ष्यों के प्रति गहरा प्रेम होना।
(ग) हर मनुष्य में वही 'तत्व' मौजूद होता है, इसलिए वह हमारे प्यार और सद्भावना का हकदार है। मनुष्य में जन्म से ही प्रेम और सद्भावना की क्षमता होती है।
In simple words: हर इंसान में प्रेम और सद्भावना का तत्व मौजूद है, इसलिए वह प्यार का हकदार है।
(घ) मनुष्यों को आपस में सद्भाव (अच्छे संबंध) बनाए रखने की कोशिश तब तक करते रहना चाहिए, जब तक पूरी दुनिया एक बड़े परिवार जैसी न बन जाए। एकता और भाईचारा ही सबका लक्ष्य होना चाहिए।
In simple words: इंसानों को तब तक सद्भाव से रहना चाहिए, जब तक पूरी दुनिया एक परिवार न बन जाए।

🎯 Exam Tip: आध्यात्मिक विषयों पर प्रश्नों के उत्तर देते समय, मुख्य विचारों और उनके नैतिक महत्व को स्पष्ट करें।

 

(17) गांधीजी ने शिक्षा के बारे में कई नए विचार दिए थे। उनका मानना था कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो इंसान का शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास करे। उनके अनुसार, हर बच्चे को अपनी मातृभाषा में मुफ्त और ज़रूरी शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उसके आसपास के जीवन से जुड़ी हो। यह शिक्षा हस्तकला और काम के ज़रिए दी जाए, ताकि बच्चा आत्मनिर्भर बन सके और उसमें नैतिक व आध्यात्मिक मूल्य विकसित हों। गांधीजी के इन विचारों से साफ है कि वे व्यक्ति और समाज के पूरे जीवन को अपने खास नज़रिए से देखते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लेकर भारतीय समाज और राजनीति में इन मूल्यों को स्थापित करने की कोशिश की। गांधीजी की पूरी सोच भारतीय परंपरा पर आधारित थी। उनके दिखाए रास्ते पर चलकर हर व्यक्ति और पूरा देश सच्ची आज़ादी, सामाजिक सद्भाव एवं सामुदायिक विकास पा सकता है। जब-जब भारतीय समाज रास्ता भटकेगा, तब-तब गांधीजी उसका मार्गदर्शन करने में सक्षम रहेंगे।

Question 17.
(क) गाँधीजी के अनुसार प्रत्येक बच्चे को किस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए ?
(ख) 'गाँधीजी के उक्त विचारों से स्पष्ट है कि वे व्यक्ति और समाज के सम्पूर्ण जीवन पर अपनी मौलिक दृष्टि रखते थे'-यह किस प्रकार का वाक्य है, बताते हुए परिभाषा भी लिखें।
(ग) “सामाजिक' शब्द के मूल शब्द तथा प्रत्यय बताइए।
(घ) उपर्युक्त गद्यांश की उचित शीर्षक लिखिए।
Answer:
(क) गांधीजी के अनुसार, हर बच्चे को अपनी मातृभाषा में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिलनी चाहिए। यह शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बच्चे का शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास करे, उसे भविष्य में रोज़गार दिलाकर आत्मनिर्भर बनाए और नैतिक व आध्यात्मिक ज्ञान दे। शिक्षा का उद्देश्य संपूर्ण विकास होना चाहिए।
In simple words: गांधीजी के अनुसार, हर बच्चे को अपनी मातृभाषा में मुफ्त और ज़रूरी शिक्षा मिले, जो उसका शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास कर उसे आत्मनिर्भर बनाए।
(ख) यह एक 'मिश्रित वाक्य' है। मिश्रित वाक्य वह होता है जिसमें एक मुख्य वाक्य (प्रधान उपवाक्य) होता है और एक या एक से ज़्यादा छोटे वाक्य (आश्रित उपवाक्य) उस मुख्य वाक्य पर निर्भर करते हैं।
In simple words: यह 'मिश्रित वाक्य' है। इसमें एक मुख्य वाक्य होता है और दूसरे वाक्य उस पर निर्भर करते हैं।
(ग) 'सामाजिक' शब्द में मूल शब्द 'समाज' है और इसमें 'इक' प्रत्यय जोड़ने से यह शब्द बना है। 'इक' प्रत्यय किसी शब्द के अंत में जुड़कर उसे विशेषण बना देता है।
In simple words: 'सामाजिक' में मूल शब्द 'समाज' और प्रत्यय 'इक' है।
(घ) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'गांधीजी और बुनियादी शिक्षा' है। यह गांधीजी के शैक्षिक विचारों पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'गांधीजी और बुनियादी शिक्षा' है।

🎯 Exam Tip: मिश्रित वाक्य की पहचान के लिए, मुख्य उपवाक्य और उस पर निर्भर आश्रित उपवाक्य को समझना आवश्यक है।

 

(18) देश की पूरी तरक्की और विकास के लिए देशवासियों में अपने देश के प्रति प्रेम का होना बहुत ज़रूरी है। जिस देश के नागरिकों में देश की भलाई और राष्ट्र के कल्याण की भावना होती है, वह देश हमेशा उन्नति करता है। देशप्रेम से भरा व्यक्ति अपने देशवासियों की भलाई, देश के उद्धार और राष्ट्रीय प्रगति के लिए अपना जीवन भी कुर्बान कर देता है। अगर हम अपने देश के इतिहास को देखें, तो ऐसे देशभक्तों की एक लंबी परंपरा मिलती है, जिन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर करके देशप्रेम का अद्भुत उदाहरण दिया है। महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, सरदार भगत सिंह, महारानी लक्ष्मीबाई, लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी जैसे हज़ारों देशभक्तों के नाम इस संदर्भ में लिए जाते हैं। हमें अपने देश के इतिहास से देशप्रेम की एक महान परंपरा मिलती है और इससे हमें देश के हित के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने की प्रेरणा मिलती है।

Question 18.
(अ) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
(ब) देश को उन्नतिशील बनाने के लिए देशवासियों में किन गुणों का होना आवश्यक है?
(स) उपर्युक्त रेखांकित वाक्य का प्रकार बताइए तथा परिभाषा भी लिखिए।
(द) 'स्वदेश' शब्द में मूल शब्द व उपसर्ग बताइए।
Answer:
(अ) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'स्वदेश-प्रेम' है। यह गद्यांश देशप्रेम के महत्व और उसके प्रभाव पर केंद्रित है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'स्वदेश-प्रेम' है।
(ब) देश को उन्नतिशील बनाने के लिए देशवासियों में अपने देश के हित और राष्ट्र के कल्याण की भावना होनी चाहिए। जब नागरिक अपने देश की भलाई के बारे में सोचते हैं, तभी देश आगे बढ़ता है और उन्नति करता है।
In simple words: देश को उन्नतिशील बनाने के लिए नागरिकों में देशहित और राष्ट्र कल्याण की भावना होनी चाहिए।
(स) यह एक 'संयुक्त वाक्य' है। संयुक्त वाक्य वह होता है जिसमें दो या दो से अधिक मुख्य वाक्य (प्रधान उपवाक्य) होते हैं और वे किसी संयोजक शब्द (जैसे 'और', 'तथा', 'किंतु' आदि) से जुड़े होते हैं। ये सभी मुख्य वाक्य अपना पूरा अर्थ रखते हैं।
In simple words: यह एक 'संयुक्त वाक्य' है, जिसमें दो या ज़्यादा मुख्य वाक्य संयोजक शब्दों से जुड़े होते हैं।
(द) 'स्वदेश' शब्द में 'देश' मूल शब्द है और उससे पहले 'स्व' उपसर्ग जुड़ा है। उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में बदलाव लाते हैं।
In simple words: 'स्वदेश' में 'देश' मूल शब्द है और 'स्व' उपसर्ग है।

🎯 Exam Tip: व्याकरण संबंधित प्रश्नों में, उदाहरणों के साथ परिभाषा देना आपके उत्तर को और अधिक प्रभावी बनाता है।

 

(19) भिखारी की तरह गिड़गिड़ाना प्यार की भाषा नहीं है। यहाँ तक कि मुक्ति पाने के लिए भगवान की पूजा करना भी घटिया पूजा मानी जाती है। प्यार कोई इनाम नहीं चाहता। प्यार में कोई जल्दबाजी नहीं होती। प्यार हमेशा प्यार के लिए ही होता है। भक्त इसलिए प्यार करता है क्योंकि वह बिना प्यार किए रह ही नहीं सकता। जब हम कोई सुंदर प्राकृतिक नज़ारा देखकर उस पर मोहित हो जाते हैं, तो हम उस नज़ारे से कोई फल नहीं माँगते और न ही वह नज़ारा हमसे कुछ माँगता है; फिर भी वह नज़ारा हमें बहुत खुशी देता है। वह हमारे मन को खुश और शांत कर देता है और हमें आम दुनिया से ऊपर उठाकर एक दिव्य आनंद में डुबो देता है। इसलिए, प्यार के बदले कुछ माँगना प्यार का अपमान है। प्यार करना एक तेज तलवार की धार पर चलने जैसा है, क्योंकि स्वार्थ के लिए या सिर्फ दिखावे के लिए तो सब प्यार करते हैं, लेकिन उसे निभाते नहीं। वे सिर्फ पाना चाहते हैं, देना नहीं। वे असल में प्यार शब्द को बदनाम करते हैं।

Question 19.
(क) मुक्ति के लिए भगवान की उपासना करना कैसी उपासना है तथा क्यों?
(ख) प्रेम करना नंगी तलवार की धार पर चलने के समान क्यों है?
(ग) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उचित शीर्षक लिखिए।
(घ) “वे वस्तुतः प्रेम शब्द को कलंकित करते हैं' -रेखांकित शब्द को संज्ञा में बदलकर अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Answer:
(क) मुक्ति के लिए भगवान की उपासना करना एक घटिया (अधम) पूजा है, क्योंकि इस पूजा में पूजा करने वाले का अपना स्वार्थ छिपा होता है और वह बदले में कुछ इनाम चाहता है। सच्चा प्रेम बिना किसी स्वार्थ के होता है और बदले में कुछ नहीं चाहता। भक्ति का असली रूप निस्वार्थ सेवा है।
In simple words: मुक्ति के लिए भगवान की उपासना घटिया है क्योंकि इसमें स्वार्थ छिपा होता है और बदले में इनाम चाहा जाता है।
(ख) प्रेम में त्याग की भावना होना बहुत ज़रूरी है। इसमें प्रेम करने वाले को अपना सब कुछ दूसरे की भलाई के लिए समर्पित करना पड़ता है। सच्चा प्रेम अपने सुख की बजाय दूसरे के सुख की इच्छा रखता है, जो कि बहुत मुश्किल काम है। इसलिए प्रेम करना नंगी तलवार की धार पर चलने जैसा है, यानी यह बहुत कठिन और जोखिम भरा कार्य है।
In simple words: प्रेम में त्याग और दूसरों की भलाई ज़रूरी है, जो मुश्किल है, इसलिए यह नंगी तलवार की धार पर चलने जैसा है।
(ग) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'सच्चा प्रेम' है। यह गद्यांश निस्वार्थ प्रेम के महत्व को दर्शाता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'सच्चा प्रेम' है।
(घ) 'कलंकित' शब्द से बनने वाली संज्ञा 'कलंक' है।
वाक्य प्रयोग: चोरी करने से परिवार के नाम पर कलंक लग जाता है। यह किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकता है।
In simple words: 'कलंकित' से संज्ञा 'कलंक' बनती है। वाक्य: चोरी से परिवार पर कलंक लगता है।

🎯 Exam Tip: मुहावरों और उनके वाक्य प्रयोग में, संज्ञा और विशेषण के रूप में बदलाव को ध्यान से समझें।

 

Question 21. जिन्दगी को ठीक से जीने का क्या उपाय है?
(क) जिन्दगी को ठीक से जीने का क्या उपाय है?
(ख) आशय स्पष्ट कीजिए-'जिन्दगी से अन्त में हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमें पूँजी लगाते हैं।'
(ग) 'कभी न खत्म होने वाली (चीज)' के अर्थ को प्रकट करने के लिए एक शब्द लिखिए।
(घ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उचित शीर्षक लिखिए।
Answer:
(क) जीवन का सच्चा सुख पाने के लिए उसे ठीक से जीना ज़रूरी है। इसका उपाय यह है कि हमें जीवन में आने वाली हर चुनौती का साहस से सामना करना चाहिए। चुनौतियों से डरे बिना उनका सामना करने पर ही जीवन का असली सुख मिल पाता है।
(ख) 'जिन्दगी से अन्त में हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमें पूँजी लगाते हैं।' इस बात का मतलब यह है कि हम अपने जीवन में जैसा काम करते हैं, वैसा ही फल हमें मिलता है। अगर हम आलस्य में समय बर्बाद करते हैं या बहुत मेहनत करते हैं, तो उसी के हिसाब से हमें जीवन में अच्छे या बुरे नतीजे मिलते हैं। जैसे एक व्यापारी जितना पैसा अपने व्यापार में लगाता है, उसे उतना ही ज़्यादा फायदा होता है, वैसे ही हमारे काम ही जीवन के व्यापार की असली 'पूंजी' होते हैं। मेहनत करने से ही अच्छे परिणाम मिलते हैं।
(ग) 'कभी न खत्म होने वाली (चीज)' के लिए एक शब्द 'अनन्त' है।
(घ) इस गद्यांश के लिए उचित शीर्षक 'जोखिम भरी जिन्दगी' हो सकता है।
In simple words: जीवन को सही से जीने के लिए जोखिम उठाना और चुनौतियों का सामना करना ज़रूरी है। हम जीवन में जितनी मेहनत करते हैं, उतना ही पाते हैं। 'अनन्त' का मतलब 'कभी न खत्म होने वाला' है। गद्यांश का शीर्षक 'जोखिम भरी जिन्दगी' है।

🎯 Exam Tip: गद्यांश-आधारित प्रश्नों में, शब्दों के सटीक अर्थ और वाक्यों के गहरे भाव को समझना महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब मुहावरों का प्रयोग किया गया हो।

 

Question 22. बौद्ध-युग किन बातों में आधुनिकता आन्दोलन के समान था?
(क) बौद्ध-युग किन बातों में आधुनिकता आन्दोलन के समान था?
(ख) संन्यास को समाज विरोधी कहने का क्या कारण है?
(ग) इस गद्यांश का एक उचित शीर्षक लिखिए।
(घ) “श्रेष्ठता' तथा आधुनिकता' में कौन-सा प्रत्यय जुड़ा है? इसे हटाकर बनने वाले शब्द व्याकरण की दृष्टि से कैसे शब्द हैं?
Answer:
(क) बौद्ध युग इन बातों में आधुनिकता आन्दोलन जैसा था:
1. यह ब्राह्मणों की श्रेष्ठता के खिलाफ था।
2. बौद्ध युग में जाति-प्रथा को नहीं माना जाता था।
3. मनुष्य को उसके जन्म से नहीं, बल्कि कर्मों से श्रेष्ठ या नीचा माना जाता था।
4. स्त्रियों को भी पुरुषों के बराबर माना गया, और उन्हें भिक्षुणी बनने का अधिकार था। इन विचारों ने समाज में समानता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किए।
(ख) संन्यास को समाज के लिए गलत माना गया है, क्योंकि लाखों युवक जो मेहनत करके समाज के काम आ सकते थे (जैसे खेतों और कारखानों में उत्पादन बढ़ाना), वे संन्यासी बनकर समाज के लिए बेकार हो जाते हैं। संन्यास से भले ही व्यक्ति को कुछ फायदा हो, पर समाज को इससे कोई लाभ नहीं होता। यह समाज की उन्नति को रोकता है।
(ग) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'बौद्ध-धर्म और आधुनिकतावाद' है।
(घ) 'श्रेष्ठता' और 'आधुनिकता' शब्दों में 'ता' प्रत्यय जुड़ा है। जब 'ता' प्रत्यय हटाते हैं, तो 'श्रेष्ठ' और 'आधुनिक' शब्द बनते हैं। व्याकरण के हिसाब से ये दोनों शब्द 'विशेषण' (विशेषता बताने वाले) हैं।
In simple words: बौद्ध युग ने जाति, लिंग और जन्म के आधार पर भेदभाव का विरोध किया, जो आधुनिक विचारों जैसा था। संन्यास को समाज विरोधी इसलिए कहा गया क्योंकि यह युवाओं को समाज सेवा से दूर कर देता था। गद्यांश का शीर्षक 'बौद्ध-धर्म और आधुनिकतावाद' है। 'श्रेष्ठता' और 'आधुनिकता' में 'ता' प्रत्यय है, और 'श्रेष्ठ' व 'आधुनिक' विशेषण हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी गद्यांश का शीर्षक हमेशा ऐसा होना चाहिए जो उसके मुख्य विचार को छोटे और सीधे शब्दों में बता सके।

 

Question 23. (क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) लेखक का मत है कि आधुनिकता का नैतिकता, सौन्दर्य-बोध तथा अध्यात्म की भाँति कोई शाश्वत मूल्य नहीं है। सच में तो आधुनिकता का कोई मूल्य ही नहीं है। वह तो एक समय-सापेक्ष धर्म है। प्रत्येक युग अपने समय में आधुनिक होता है तथा उस समय के कुछ लोग उस पर गर्व करते हैं तथा कुछ उससे असन्तुष्ट होते हैं और उसकी आलोचना करते हैं।
(ग) उचित शीर्षक-' भारत और आधुनिकता बोधे।
(घ) 'विचारणीय' शब्द में 'अनीयर्' (अनीय) प्रत्यय जुड़ा है। इस प्रत्यय से निर्मित अन्य दो शब्द हैं-'पठनीय' तथा 'कथनीय'।

Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'भारत और आधुनिकता बोध' है।
(ख) लेखक का मानना है कि आधुनिकता नैतिकता, सुंदरता की समझ या आध्यात्मिकता जैसी कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो हमेशा सच रहे। असल में आधुनिकता का अपना कोई स्थायी मूल्य नहीं है। यह तो एक समय के हिसाब से बदलने वाली सोच है। हर दौर अपने समय में आधुनिक होता है, और उस समय के कुछ लोग उस पर गर्व करते हैं, जबकि कुछ उससे नाराज़ होकर उसकी बुराई भी करते हैं। यह समय के साथ बदलने वाली धारणा है।
(ग) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'भारत और आधुनिकता बोध' है।
(घ) 'विचारणीय' शब्द में 'अनीयर्' (अनीय) प्रत्यय जुड़ा है। इस प्रत्यय से 'पठनीय' (पढ़ने योग्य) और 'कथनीय' (कहने योग्य) जैसे शब्द बनाए जा सकते हैं।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'भारत और आधुनिकता बोध' है। लेखक के अनुसार, आधुनिकता का कोई हमेशा रहने वाला मूल्य नहीं होता, यह समय के साथ बदलता रहता है। 'विचारणीय' में 'अनीयर्' प्रत्यय है, जिससे 'पठनीय' और 'कथनीय' जैसे शब्द बनते हैं।

🎯 Exam Tip: अगर प्रश्न में ही उत्तर के संकेत या पूरा उत्तर दिया गया हो, तो भी उसे अपनी भाषा में सरल करके लिखें और व्याकरण के नियमों का पालन करें।

 

Question 24. (क) भारत में सांस्कृतिक एकता किस रूप में दिखाई देती है?
(ख) भारत की किस विशेषता पर भारतीये गर्व करते हैं?
(ग) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
(घ) 'धर्मावलम्बी' शब्द का क्या अर्थ है? 'अवलम्बी' शब्द जोड़कर एक अन्य शब्द बनाइए।

Answer:
(क) भारत में सांस्कृतिक एकता कई रूपों में दिखाई देती है। पूरे देश में हिन्दू, सिख, ईसाई और मुस्लिम जैसे लोग साथ मिलकर रहते हैं। वे एक-दूसरे के त्योहारों में खुशी से भाग लेते हैं। पूजा करने की जगहें (जैसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च) पूरे देश में मौजूद हैं। यह विविधता में एकता का एक अनूठा उदाहरण है।
(ख) भारत की 'विविधता में एकता' एक ऐसी खास बात है जिस पर हर भारतीय गर्व करता है। दुनिया के दूसरे देश भारत की इस अनोखी विशेषता को देखकर हैरान रह जाते हैं। यह दिखाता है कि कैसे अलग-अलग संस्कृतियों के लोग सद्भाव से रहते हैं।
(ग) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'विविधता में एकता' हो सकता है।
(घ) 'धर्मावलम्बी' शब्द का अर्थ है 'किसी धर्म को मानने वाला'। 'अवलम्बी' शब्द जोड़कर 'स्वावलम्बी' जैसा एक और शब्द बनाया जा सकता है।
In simple words: भारत में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं, त्योहार मनाते हैं, जो इसकी सांस्कृतिक एकता दिखाता है। भारत को अपनी 'विविधता में एकता' पर गर्व है। गद्यांश का शीर्षक 'विविधता में एकता' है। 'धर्मावलम्बी' यानी 'धर्म मानने वाला' और 'अवलम्बी' से 'स्वावलम्बी' बनता है।

🎯 Exam Tip: व्याकरण के प्रश्नों में मूल शब्द, उपसर्ग और प्रत्यय को पहचानना बहुत ज़रूरी है। यह आपकी भाषा की समझ को दर्शाता है।

 

Question 25. (क) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ख) लोगों की सोच को बनाने-बदलने में मीडिया की क्या भूमिका है?
(ग) आज दुनिया में भारतीय किन गुणों के लिए जाने जाते हैं?
(घ) सरल वाक्य में बदलिए-ऐसे अधिकारी हैं जो अपने सिद्धान्तों को रोटी-रोजी से बड़ा मानते हैं।

Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'चरित्रवान् नागरिक चरित्रवान् समाज' हो सकता है।
(ख) लोगों की सोच को बनाने और बदलने में मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जब लोग किसी ख़बर को बार-बार पढ़ते या देखते हैं, तो उससे वे बहुत प्रभावित होते हैं। जनता की राय बनाने में मीडिया का खास योगदान होता है। मीडिया लोगों के विचारों को दिशा देने में सक्षम है।
(ग) आज दुनिया में भारतीय लोग अपनी ईमानदारी, कड़ी मेहनत और बुद्धिमत्ता के लिए ज़्यादा जाने जाते हैं, न कि बेईमानी या भ्रष्टाचार के लिए। यह एक सकारात्मक बदलाव है।
(घ) सरल वाक्य: 'अपने सिद्धान्तों को रोटी-रोजी से बड़ा मानने वाले अधिकारी हैं।'
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'चरित्रवान् नागरिक चरित्रवान् समाज' है। मीडिया लोगों की सोच बदलने में अहम भूमिका निभाता है। आजकल भारतीय ईमानदारी और बुद्धिमत्ता के लिए जाने जाते हैं। दिए गए वाक्य का सरल रूप है 'अपने सिद्धान्तों को रोटी-रोजी से बड़ा मानने वाले अधिकारी हैं'।

🎯 Exam Tip: किसी भी वाक्य को सरल वाक्य में बदलते समय, उसमें से संयोजक शब्दों को हटाकर एक ही मुख्य क्रिया और कर्ता पर ध्यान दें।

 

Question 26. (क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) दहेज प्रथा के व्यक्ति और समाज पर क्या कुप्रभाव होते हैं ?
(ग) दहेज प्रथा की समाप्ति के लिए महिलाओं और कन्याओं को क्या करना होगा?
(घ) मूलशब्द और प्रत्यये अलग करके लिखिए।

Answer:
(क) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'दहेज प्रथा एक सामाजिक अभिशाप' हो सकता है।
(ख) दहेज प्रथा के कारण व्यक्ति और समाज दोनों पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। इससे धन का बेवजह खर्च होता है, समाज की काम करने वाली पूंजी बर्बाद होती है, जीवन में बेईमानी बढ़ती है, महिलाओं का सम्मान घटता है, और लोग खुदकुशी करने या हीन भावना महसूस करने लगते हैं। यह समाज के लिए एक बड़ा नुकसान है।
(ग) दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए महिलाओं और लड़कियों को मजबूत बनना होगा। उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनना चाहिए। उन्हें ऐसे पुरुषों का बहिष्कार करना चाहिए जो शादी के लिए दहेज मांगते हैं, क्योंकि वे धन को ही सब कुछ मानते हैं।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'दहेज प्रथा एक सामाजिक अभिशाप' है। दहेज प्रथा से धन की बर्बादी, भ्रष्टाचार और नारी के सम्मान को ठेस पहुँचती है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनकर दहेज मांगने वालों का विरोध करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: सामाजिक मुद्दों पर आधारित गद्यांशों में, समस्या के कारणों और उसके समाधानों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

 

Question 27. (क) राणाप्रताप ने किन लोगों की बात नहीं मानी और क्यों?
(ख) तुलसीदास और केशवदास के जीवन में क्या अन्तर था और क्यों?
(ग) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(घ) 'हाथ की कठपुतली होना’-मुहावरे का अर्थ लिखकर उसको अपने बनाए वाक्य में प्रयोग कीजिए।

Answer:
(क) महाराणा प्रताप ने उन लोगों की बात नहीं मानी जिन्होंने उनसे अकबर की अधीनता स्वीकार करने को कहा था। प्रताप जानते थे कि अपनी इज्जत और स्वाभिमान की चिंता जितनी वह खुद कर सकते हैं, उतना कोई दूसरा नहीं करेगा। अधीनता स्वीकार करने से मर्यादा को ठेस पहुँचती है। उन्हें अपने देश और सम्मान से समझौता करना मंजूर नहीं था।
(ख) केशवदास ने राजाओं का सहारा लिया था, इसलिए वे अपनी मर्जी से काव्य रचना नहीं कर पाए। इसके उलट, तुलसीदास किसी के अधीन नहीं थे। वे मन से आज़ाद, बेफिक्र और आत्मनिर्भर थे। इसी वजह से वे इतने मशहूर और लोकप्रिय कवि बन सके। तुलसीदास ने अपने सिद्धांतों पर बिना किसी दबाव के काम किया।
(ग) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'आत्मनिर्भरता' हो सकता है।
(घ) 'हाथ की कठपुतली होना' मुहावरे का अर्थ है 'दूसरों पर पूरी तरह निर्भर होना' या 'पराश्रित होना'।
वाक्य प्रयोग: किसी के हाथ की कठपुतली बनकर कोई भी इंसान जीवन में सफल नहीं हो सकता और अपनी पहचान नहीं बना पाता।
In simple words: राणाप्रताप ने उन लोगों की बात नहीं मानी जिन्होंने उन्हें अकबर की अधीनता स्वीकार करने को कहा था, क्योंकि उन्हें अपनी मर्यादा की चिंता थी। तुलसीदास आत्मनिर्भर थे, जबकि केशवदास राजाओं पर निर्भर थे, इसलिए दोनों के जीवन में अंतर था। गद्यांश का शीर्षक 'आत्मनिर्भरता' हो सकता है। 'हाथ की कठपुतली होना' मतलब दूसरों पर निर्भर रहना।

🎯 Exam Tip: मुहावरे का अर्थ लिखते समय, उसका भावार्थ स्पष्ट करना और फिर उसे अपने वाक्य में सही तरीके से प्रयोग करना आवश्यक है।

 

Question 28. (ख) इस गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(ग) “मनुष्य की पशुता को जितनी बार काट दो, वह मरना नहीं जानती।' इस वाक्य को साधारण वाक्य में बदल कर लिखिए।
(घ) “पशु' शब्द में तल् (ता) प्रत्यय जोड़ने से 'पशुता' भाववाचक संज्ञा बनती है। मनुष्य' शब्द में कोई अन्य प्रत्यय जोड़कर भाववाचक संज्ञा बनाइए।

Answer:
(ख) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'नाखून क्यों बढ़ते हैं?' हो सकता है। यह शीर्षक मुख्य विषय को दर्शाता है।
(ग) साधारण वाक्य: 'बार-बार काटे जाने पर भी मनुष्य की पशुता मरना नहीं जानती।'
(घ) 'मनुष्य' शब्द में 'त्व' प्रत्यय जोड़ने से 'मनुष्यत्व' भाववाचक संज्ञा बनती है। 'मनुष्यत्व' इंसानियत या मानवीय गुणों को दर्शाता है।
In simple words: गद्यांश का शीर्षक 'नाखून क्यों बढ़ते हैं?' है। वाक्य 'मनुष्य की पशुता जितनी बार काट दो, वह मरना नहीं जानती' का सरल रूप है 'बार-बार काटे जाने पर भी मनुष्य की पशुता मरना नहीं जानती'। 'मनुष्य' में 'त्व' प्रत्यय जोड़ने से 'मनुष्यत्व' बनता है।

🎯 Exam Tip: भाववाचक संज्ञा बनाते समय, सही प्रत्यय का चुनाव करें, जैसे 'ता', 'त्व', 'पन', 'आई' आदि।

 

Question 29. (क) लेखक किस विषय में साम्यवादी बनना नहीं चाहता?
(ख) 'छाछ को फेंक-फेंक कर पीने की आवश्यकता नहीं पड़ी' इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) 'सार्थक' शब्द की विलोम लिखिए।
(घ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उचित शीर्षक लिखिए।

Answer:
(क) लेखक दुख के मामले में साम्यवादी नहीं बनना चाहता। लेखक को संसार में दूसरों की तुलना में बहुत कम दुख मिला है। वह यह नहीं चाहता कि दुख और सुख सबको बराबर मात्रा में मिलें, क्योंकि हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है।
(ख) 'छाछ को फेंक-फेंक कर पीने की आवश्यकता नहीं पड़ी' इस बात का मतलब है कि लेखक को अपने जीवन में कभी कोई बड़ा दुख या मुश्किल धोखा नहीं मिला। इसलिए उसे हर बात पर शक करने या बहुत सावधानी बरतने की ज़रूरत नहीं पड़ी। उसका जीवन सहज और बिना बड़ी कठिनाइयों के बीता।
(ग) 'सार्थक' शब्द का विलोम 'निरर्थक' है।
(घ) इस गद्यांश के लिए उचित शीर्षक 'मेरा जीवन' हो सकता है।
In simple words: लेखक दुख के मामले में समानता नहीं चाहता क्योंकि उसे कम दुख मिला है। 'छाछ को फेंक-फेंक कर पीने की आवश्यकता नहीं पड़ी' का मतलब है कि उसे जीवन में कोई बड़ा कष्ट या धोखा नहीं मिला। 'सार्थक' का विलोम 'निरर्थक' है। गद्यांश का शीर्षक 'मेरा जीवन' है।

🎯 Exam Tip: किसी भी कथन का आशय स्पष्ट करते समय, उसके पीछे के छिपे हुए अर्थ और सन्दर्भ को समझाना चाहिए।

 

Question 30. (क) भीष्म ने किस पक्ष की उपेक्षा की थी?
(ख) 'भीष्म में कर्तव्य-अकर्तव्य के निर्णय में कहीं कोई कमजोरी थी।” इस वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) उपर्युक्त गद्यांश का एक संक्षिप्त शीर्षक लिखिए।
(घ) 'इतिहासकार' में कौन-सा प्रत्यय जुड़ा है? इसे प्रत्यय को प्रयोग करके दो नये शब्द बनाइए।

Answer:
(क) भीष्म ने दूसरों की भलाई (परहित) और जनता के हित (जनहित) के पक्ष की अनदेखी की थी। उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए सत्य के कठोर मार्ग को चुना, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने जनहित के कुछ पहलुओं को नज़रअंदाज़ किया। उनका दृढ़ संकल्प उनके लिए महत्वपूर्ण था।
(ख) इस वाक्य का मतलब है कि भीष्म सही समय पर यह तय नहीं कर पाते थे कि क्या करना सही है और क्या गलत। द्रोपदी के अपमान के समय उनका चुप रहना इसी कमज़ोरी का सबसे बड़ा सबूत है। उनकी यह हिचकिचाहट उनके निर्णयों को प्रभावित करती थी।
(ग) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'अनिर्णय के शिकार भीष्म पितामह' हो सकता है।
(घ) 'इतिहासकार' शब्द में 'कार' प्रत्यय जुड़ा है। 'कार' प्रत्यय से दो नए शब्द बनाए जा सकते हैं: 1. कहानीकार (कहानी लिखने वाला), 2. उपन्यासकार (उपन्यास लिखने वाला)।
In simple words: भीष्म ने दूसरों की भलाई और जनहित को अनदेखा किया। 'कर्तव्य-अकर्तव्य में कमज़ोरी' का अर्थ है सही निर्णय न ले पाना, जैसे द्रोपदी के अपमान पर चुप रहना। गद्यांश का शीर्षक 'अनिर्णय के शिकार भीष्म पितामह' है। 'इतिहासकार' में 'कार' प्रत्यय है, जिससे 'कहानीकार' और 'उपन्यासकार' बनते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी ऐतिहासिक व्यक्ति पर आधारित गद्यांशों में, उनके चरित्र की विशेषताओं और उनके निर्णयों के प्रभावों को सही ढंग से समझाना ज़रूरी है।

 

Question 31. (क) जापाने के उन दो शहरों के नाम बताएँ, जो परमाणु त्रासदी का शिकार हुए?
(ख) जापान के फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्रों की त्रासदी से विश्व के समक्ष विचार के लिए क्या प्रश्न उपस्थित हुआ है?
(ग) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक-'परमाणु ऊर्जा का उपयोग निरापद नहीं।'
(घ) “कल्पना से बाहर की बात' शब्दांश के लिए एक शब्द-अकल्पनीय।

Answer:

In simple words: इस प्रश्न का उत्तर दिए गए स्त्रोत में उपलब्ध नहीं है।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण और विज्ञान से जुड़े गद्यांशों में, किसी भी नई तकनीक के फायदे और नुकसान, दोनों पर ध्यान देना चाहिए।

 

Question 32. (क) ईर्ष्या का काम क्या है? चिन्ता तथा ईर्ष्या में क्यों अन्तर है?
(ख) ईर्ष्या का लाभदायक पक्ष कौन-सा है?
(ग) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(घ) उपर्युक्त गद्यांश से दो शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।

Answer:
(क) ईर्ष्या का काम दूसरों को जलाने के बजाय खुद को जलाना है। यह उसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाती है जिसके मन में यह पैदा होती है। चिंता को चिता के समान कहा जाता है क्योंकि चिंता में डूबे व्यक्ति का जीवन बेकार हो जाता है, पर ईर्ष्या चिंता से भी ज़्यादा बुरी है। ईर्ष्या इंसान के अच्छे गुणों को खत्म कर देती है, जिससे व्यक्ति अंदर से खोखला हो जाता है।
(ख) ईर्ष्या का एक लाभदायक पक्ष यह है कि यह व्यक्ति को आगे बढ़ने और दूसरों से बेहतर करने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसके कारण हर व्यक्ति, हर जाति और हर समूह अपने विरोधियों के बराबर या उनसे आगे निकलने की कोशिश करता है। ऐसा तभी होता है जब ईर्ष्या से मिलने वाली प्रेरणा सकारात्मक और रचनात्मक हो।
(ग) इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'ईर्ष्या से हानि' हो सकता है।
(घ) गद्यांश से दो शब्द-युग्म हैं: (1) जला-भुना, (2) चलती-फिरती।
In simple words: ईर्ष्या खुद को जलाती है और गुणों को नष्ट करती है, जो चिंता से भी बुरी है। ईर्ष्या का एक अच्छा पक्ष यह है कि यह लोगों को बेहतर करने के लिए प्रेरित कर सकती है, अगर इसका इस्तेमाल सही तरीके से हो। गद्यांश का शीर्षक 'ईर्ष्या से हानि' है। दो शब्द-युग्म 'जला-भुना' और 'चलती-फिरती' हैं।

🎯 Exam Tip: 'शब्द-युग्म' ऐसे शब्द होते हैं जो साथ में प्रयोग होते हैं, जैसे 'माता-पिता' या 'भाई-बहन'। इन्हें गद्यांश से पहचानना सीखें।

 

Question 33. (क) साहित्य के मंदिर में किनके लिए स्थान नहीं होता ?
(ख) साहित्यकार को अपने सम्मान की चिंता क्यों नहीं करनी चाहिए ?
(ग) सादी जिन्दगी के साथ ऊँची निगाह' के लिए हिन्दी में क्या कहावत प्रयुक्त होती है ?
(घ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उचित शीर्षक लिखिए।

Answer:
(क) धन-दौलत को ज़्यादा महत्व देने वाले लोगों के लिए साहित्य के मंदिर में कोई जगह नहीं होती। साहित्य की रचना केवल वही लोग कर सकते हैं जो सादगी भरा जीवन जीते हैं और पैसे के पीछे नहीं भागते। साहित्य सच्चे विचारों और कला का क्षेत्र है।
(ख) साहित्यकार को अपने सम्मान की चिंता नहीं करनी चाहिए। साहित्यकार की रचनाएँ ही उसका असली सम्मान होती हैं। एक अच्छा साहित्यकार कभी भी सम्मान के पीछे नहीं भागता, बल्कि उसकी रचनाएँ ही उसे सम्मान दिलाती हैं। उसकी कला ही उसकी पहचान है।
(ग) 'सादी जिन्दगी के साथ ऊँची निगाह' के लिए हिन्दी में 'सादा जीवन उच्च विचार' कहावत इस्तेमाल की जाती है। यह जीवन शैली को दर्शाती है जहाँ भौतिक सुख से ज़्यादा विचारों को महत्व दिया जाता है।
(घ) इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'साहित्यकार और उसका लक्ष्य' हो सकता है।
In simple words: साहित्य मंदिर में धन-दौलत को चाहने वालों के लिए जगह नहीं है। साहित्यकार को सम्मान की चिंता नहीं करनी चाहिए, उसकी रचनाएँ ही उसका सम्मान होती हैं। 'सादी जिन्दगी के साथ ऊँची निगाह' के लिए 'सादा जीवन उच्च विचार' कहावत है। गद्यांश का शीर्षक 'साहित्यकार और उसका लक्ष्य' है।

🎯 Exam Tip: किसी भी गद्यांश में कहावतों और मुहावरों का उपयोग अक्सर गहरे अर्थों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है, उन्हें सही ढंग से पहचानें।

 

Question 34. (क) प्रयत्न-साध्य होने का क्या अर्थ है ? लेखक के अनुसार प्रयत्न-साध्य क्या है ?
(ख) निर्भय रहने के लिए कौन-सी दो बातें आवश्यक होती हैं ?
(ग) “मुक्तातंक' शब्द में सन्धि-विच्छेद करके लिखिए।
(घ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक लिखिए।

Answer:
(क) जिस काम में कोशिश करने से कामयाबी मिलती है, वह काम 'प्रयत्न-साध्य' कहलाता है। लेखक के अनुसार, 'प्रयत्न-साध्य' का अर्थ है, मेहनत से सफल होना। यह बताता है कि कोई भी बड़ा काम बिना प्रयास के पूरा नहीं होता।
(ख) निडर रहने के लिए दो बातें बहुत ज़रूरी होती हैं। पहली, हमें किसी को कोई दुख या कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए और न ही किसी से डरना चाहिए। दूसरी, दूसरे लोग हमें दुख पहुँचाने या डराने की हिम्मत न कर सकें। इसका मतलब है कि निडर रहने के लिए व्यक्ति को दयालु और ताकतवर होना चाहिए।
(ग) 'मुक्तातंक' शब्द में 'दीर्घ सन्धि' है। इसका सन्धि-विच्छेद 'मुक्त + आतंक' होता है।
(घ) इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'हम निर्भीक कैसे रहें?' हो सकता है।
In simple words: 'प्रयत्न-साध्य' का मतलब है कि कोई काम मेहनत से सफल होता है। निडर रहने के लिए हमें किसी को कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए और दूसरे हमें डराने की हिम्मत न करें। 'मुक्तातंक' का सन्धि-विच्छेद 'मुक्त + आतंक' (दीर्घ सन्धि) है। गद्यांश का शीर्षक 'हम निर्भीक कैसे रहें?' है।

🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद करते समय शब्दों के सही मूल रूप और सन्धि के नियमों (जैसे दीर्घ, गुण, वृद्धि आदि) का ध्यान रखना चाहिए।

 

Question 35. (क) देश की आंतरिक सुरक्षा से क्या तात्पर्य है? इसके लिए कौन लोग खतरा बने हुए हैं?
(ख) सरकार माओवादियों पर पार पाने में क्यों सफल नहीं हो पा रही है?
(ग) इसे गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(घ) “अपहरण' शब्द से उपसर्ग और मूल शब्द अलग कीजिए और इसी उपसर्ग द्वारा दो नए शब्द बताइए।

Answer:
(क) देश की आंतरिक सुरक्षा का मतलब है देश के अंदर शांति और व्यवस्था बनाए रखना। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए देशी-विदेशी आतंकवादी और माओवादी बड़े खतरे बने हुए हैं। ये समूह देश की शांति भंग करते हैं।
(ख) सरकार माओवादियों पर काबू पाने में सफल नहीं हो पा रही है क्योंकि सरकार के पास मजबूत इच्छाशक्ति की कमी है और उसने कोई स्पष्ट रणनीति नहीं अपनाई है। इन समस्याओं के कारण माओवादियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
(ग) इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'माओवादी संकट' हो सकता है।
(घ) 'अपहरण' शब्द में 'अप' उपसर्ग है और 'हरण' मूल शब्द है। 'अप' उपसर्ग से दो नए शब्द 'अपराध' और 'अपमान' बनाए जा सकते हैं।
In simple words: आंतरिक सुरक्षा का मतलब देश में शांति बनाए रखना है, जिसके लिए आतंकवादी और माओवादी खतरा हैं। सरकार माओवादियों से निपटने में सफल नहीं हो रही क्योंकि उसमें इच्छाशक्ति और रणनीति की कमी है। गद्यांश का शीर्षक 'माओवादी संकट' है। 'अपहरण' में 'अप' उपसर्ग है, जिससे 'अपराध' और 'अपमान' बनते हैं।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करते समय, शब्द के अर्थ को ध्यान में रखें और देखें कि कौनसा अंश शब्द के मूल अर्थ को बदल रहा है या नया अर्थ जोड़ रहा है।

Free study material for Hindi

RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश

Students can now access the RBSE Solutions for अपठित गद्यांश prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for अपठित गद्यांश

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Hindi Class 12 Solved Papers

Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for अपठित गद्यांश to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Hindi are as per latest RBSE curriculum.

Are the Hindi RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Hindi. You can access RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित गद्यांश in printable PDF format for offline study on any device.