RBSE Solutions Class 12 Hindi अपठित पद्यांश

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Detailed अपठित पद्यांश RBSE Solutions for Class 12 Hindi

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Class 12 Hindi अपठित पद्यांश RBSE Solutions PDF

अपठित काव्यांश के अंतर्गत काव्य-पंक्तियों का भावार्थ समझकर उत्तर देने होते हैं। इसमें काव्य के भाव-सौन्दर्य पर आधारित प्रश्नोत्तर होते हैं। इस हेतु विद्यार्थियों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • सर्वप्रथम पूरे काव्यांश को शान्ति के साथ ध्यानपूर्वक पढ़िए।
  • यदि उसका भावार्थ समझ में नहीं आ रहा है तो घबरायें नहीं। उसे पुन: पढ़े। इस बार शब्दों पर ध्यान देकर उनका अर्थ समझने का प्रयास करें।
  • आपसे यह आशा नहीं की जाती कि आप पूरी कविता के प्रत्येक शब्द का अर्थ जान लेंगे। इस कारण निराश और व्याकुल होने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब आप काव्यांश के नीचे दिए गए प्रश्नों को पढ़े तथा उनके उत्तर पद्यांश को पढ़कर तलाश करने का प्रयत्न करें।
  • एक-दो बार के प्रयत्न से प्रश्नों के उत्तर मिल जायेंगे। काव्यांश का स्थूल भाव समझ में आने पर प्रश्नों का उत्तर देने में सरलता होगी।
  • प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट शब्दों में लिखें। यदि पद्यांश की किसी पंक्ति में प्रतीक के माध्यम से कोई बात कही गई हो तो उसको स्पष्ट त्तर कुछ विस्तार से लिखा जा सकता है।
  • जपाठरा पगप्पारा पग उत्तर ५। समय जपना आत्मविश्वास बनाए रखें।

जिसका मुकुट हिमालय, वह देश कौन-सा है ?
नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही हैं,
सींचा हुआ सलोना, वह देश कौन-सा है ?
जिसके बड़े रसीले, फल, कन्द, नाज, मेवे,
सब अंग में सजे हैं, वह देश कौन-सा है ?
जिसमे सुगन्ध वाले, सुन्दर प्रसूने प्यारे,
दिन-रात हँस रहे हैं, वह देश कौन-सा है ?
मैदान, गिरि, वनों में हरियालियाँ लहकती,
आनन्दमय जहाँ है, वह देश कौन-सा है ?
जिसकी अनन्त धन से, धरती भरी पड़ी है,
संसार का शिरोमणि, वह देश कौन-सा है?

 

Question 1. (क) भारत का मुकुट किसे कहा गया है ?
(ख) कवि ने भारतवर्ष की कौन-सी विशेषताएँ बतायी हैं ?
(ग) “सींचा हुआ सलोना' से क्या तात्पर्य है ?
(घ) भारत देश को संसार का शिरोमणि क्यों कहा गया है ?
Answer:
(क) भारत का मुकुट हिमालय को कहा गया है। हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है और इसे देश का संरक्षक माना जाता है।
(ख) कवि ने बताया है कि भारतवर्ष प्रकृति की गोद में बसा एक सुखद स्वर्ग है। इसकी भूमि को सागर अपने चरणों से धोता है, हिमालय इसका मुकुट है, और नदियाँ अमृत के समान जल से इसे सींचती हैं। यह धरती खुशी पैदा करने वाली है और पूरे संसार में सबसे महान है।
(ग) “सींचा हुआ सलोना' का मतलब है कि यहाँ की सुंदर प्राकृतिक छटा नदियों के अमृत जैसे पानी से हरी-भरी रहती है। यह नदियों का वरदान है जो भूमि को उपजाऊ और सुंदर बनाता है।
(घ) भारत देश के पास कुदरती सुंदरता और बेशकीमती खनिज संपदा है। इसी कारण इसे संसार का शिरोमणि कहा गया है, यानी यह दुनिया में सबसे खास और अग्रणी है।
In simple words: (क) भारत का मुकुट हिमालय है। (ख) कवि ने भारत को प्रकृति की गोद में बसा स्वर्ग कहा है, जहाँ नदियाँ इसे सींचती हैं और सागर चरण धोता है। (ग) इसका मतलब है कि नदियों के अमृत जैसे जल से भारत की धरती हमेशा हरी-भरी और सुंदर रहती है। (घ) भारत अपने प्राकृतिक सौंदर्य और खनिज संपदा के कारण दुनिया का मुकुट है।

🎯 Exam Tip: जब भी किसी देश का वर्णन हो, उसकी भौगोलिक विशेषताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक महत्व को शामिल करना महत्वपूर्ण होता है।

 

मेरी भूमि तो है पुण्यभूमि वह भारती,
सौ नक्षत्र-लोक करें आके आप आरती।
नित्य नये अंकुर असंख्य वहाँ फूटते,
फूल झड़ते हैं, फल पकते हैं, टूटते।
सुरसरिता ने वहीं पाई हैं सहेलियाँ,
लाखों अठखेलियाँ, करोड़ों रंगरेलियाँ।
नन्दन विलासी सुरवृन्द, बहु वेशों में,
करते विहार हैं हिमाचल प्रदेशों में।
रहता प्रपूर्ण हमारा रंगमंच भी,
रुकता नहीं है लोक नाट्य कभी रंच भी।

 

Question 2. (क) कवि ने पुण्य-भूमि किसे और क्यों कहा है ?
(ख) हिमाचल प्रदेश की क्या विशेषता बताई गयी है ?
(ग) “दुःख जो न हो, तो फिर सुख में सत्त्व क्या ?”-इस कथन का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
(घ) पृथ्वीवासियों को 'नित्य नये' क्यों कहा गया है ?
Answer:
(क) कवि ने भारत भूमि को पुण्य-भूमि कहा है क्योंकि यहाँ आकर सैकड़ों तारों और देवताओं के लोग इसकी आरती उतारते हैं। यहाँ हर दिन नए जीवन के अंकुर फूटते हैं और खुशहाली बनी रहती है।
(ख) हिमाचल प्रदेश की विशेषता यह बताई गई है कि नंदन वन में घूमने वाले देवता कई रूप बदलकर यहाँ घूमने आते हैं। यह स्थान देवताओं को भी आकर्षित करता है।
(ग) “दुःख जो न हो, तो फिर सुख में सत्त्व क्या ?” इस कथन का मतलब है कि सुख का असली आनंद तभी पता चलता है जब हमने दुख सहा हो। अगर जीवन में सिर्फ सुख ही हो और दुख कभी न आए, तो सुख का कोई महत्व नहीं रह जाता। ईश्वर ने दुनिया को सुख और दुख दोनों से मिलकर बनाया है।
(घ) परिवर्तन प्रकृति का नियम है। धरती पर हर समय चीजें बदलती रहती हैं। पुराना जाता है और उसकी जगह नया ले लेता है। इसलिए, यह संसार हमेशा नया बना रहता है, और इसी कारण पृथ्वी पर रहने वालों को 'नित्य नये' कहा गया है। हर पीढ़ी अपने नए विचारों और कार्यों से दुनिया को नया रूप देती है।
In simple words: (क) भारत को पुण्य-भूमि कहा गया है क्योंकि यहाँ देवी-देवता भी आरती करने आते हैं और नया जीवन हमेशा पनपता है। (ख) हिमाचल प्रदेश में देवता भी अलग-अलग रूप में आकर घूमते हैं। (ग) इसका मतलब है कि दुख के बिना सुख का कोई असली मूल्य नहीं है, दोनों एक-दूसरे को महत्व देते हैं। (घ) पृथ्वीवासी हमेशा 'नए' कहे जाते हैं क्योंकि दुनिया में हर पल बदलाव होता रहता है।

🎯 Exam Tip: कविता के कठिन वाक्यों या वाक्यांशों के अर्थ को सीधे बताने की बजाय, उनके भाव को सरल भाषा में समझाना चाहिए।

 

यह अवसर है, स्वर्णिम सुयुग है,
रंगरेलियों में, छेड़छाड़ में,
तरुण, विश्व की बागडोर ले तू अपने कठोर कर में,
स्थापित कर रे मानवती बर्बर नृशंस के उर में।
दंभी को कर ध्वस्त धरा पर अस्त-त्रस्त पाखंडों को,
करुणा शान्ति स्नेह सुख भर दे बाहर में, अपने घर में।
यौवन की ज्वाला वाले दे अभयदान पद दलितों को,
तेरे चरण शरण में आहत जग आश्वासन-श्वास गहे॥

 

Question 3. (क) “यह अवसर है, स्वर्णिम सुयुग है' कवि ने किस अवसर को स्वर्णिम सुयुग कहा है ?
(ख) विश्व की बागडोर किसके हाथों में शोभा पाती है ? क्यों ?
(ग) “बाहर में, अपने घर में क्या भरने के लिए कहा गया है ?
(घ) “दे अभयदान पद दलितों को” पंक्ति को आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) कवि ने जवानी यानी युवावस्था को स्वर्णिम युग कहा है। युवावस्था वह सुनहरा मौका है, जिसमें व्यक्ति कुछ नया बना सकता है और बड़े काम कर सकता है।
(ख) विश्व की बागडोर नौजवानों (युवकों) के हाथों में शोभा पाती है, क्योंकि युवावस्था में बहुत हिम्मत, जोश, उत्साह और ताकत होती है। यह वह समय है जब व्यक्ति में सबसे ज्यादा करने की क्षमता होती है।
(ग) कविता में 'बाहर में, अपने घर में' करुणा, शांति, स्नेह और सुख भरने के लिए कहा गया है। इसका मतलब है कि व्यक्ति को अपने आसपास और अपने भीतर दोनों जगह सकारात्मक भावनाओं को फैलाना चाहिए।
(घ) “दे अभयदान पद दलितों को” पंक्ति का अर्थ है कि शोषित और कमजोर लोगों को सुरक्षा और सहारा दिया जाए। यह पंक्ति समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने और न्याय दिलाने का संदेश देती है।
In simple words: (क) कवि ने जवानी के समय को सुनहरा युग कहा है, क्योंकि इसमें नए काम करने की शक्ति होती है। (ख) दुनिया की बागडोर नौजवानों के हाथों में अच्छी लगती है, क्योंकि उनमें जोश और ताकत होती है। (ग) बाहर और घर में करुणा, शांति और सुख भरने को कहा गया है। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि कमजोर और सताए हुए लोगों को सहारा और सुरक्षा दी जाए।

🎯 Exam Tip: जब किसी कविता के कठिन शब्दों या प्रतीकों का अर्थ पूछा जाए, तो उन्हें सरल शब्दों में समझाते हुए उसका विस्तृत भाव स्पष्ट करें।

 

(4) शान्ति नहीं तब तक, जब तक सुखभाग न नर का सम हो,
नहीं किसी को बहुत अधिक हो, नहीं किसी को कम हो।
ऐसी शान्ति राज करती है, तन पर नहीं हृदय पर,
नर के ऊँचे विश्वासों पर, श्रद्धा, भक्ति, प्रणय पर,
न्याय शान्ति का प्रथम न्यास है, जब तक न्यास न आता,
जैसा भी हो महल, शान्ति का, सुदृढ़ नहीं रह पाता।
कृत्रिम शान्ति सशंक आप अपने से ही डरती है।
खड्ग छोड़ विश्वास किसी का कभी नहीं करती है।

 

Question 4. (क) “शान्ति नहीं तब तक, जब तक सुख भाग ने नर को सम हो”-इस कथन का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
(ख) शान्ति को प्रथम न्यास किसे कहा गया है और क्यों?
(ग) “कृत्रिम शान्ति सशंक आप अपने से ही डरती है”- ऐसा क्यों कहा गया है?
(घ) 'न्याय' व 'समानता' से स्थापित शान्ति का साम्राज्य किन स्थानों व किन भावनाओं पर स्थापित हो जाता है?
Answer:
(क) इस कविता के अंश का मतलब है कि जब तक समाज में सभी लोगों को बराबर सुख-सुविधाएं नहीं मिलेंगी और भेदभाव रहेगा, तब तक सच्ची शांति नहीं आ सकती। सभी को समान अवसर मिलना जरूरी है।
(ख) शांति की पहली नींव न्याय को बताया गया है। इसका कारण यह है कि जहाँ सभी के साथ न्याय होगा और किसी के साथ पक्षपात नहीं होगा, वहीं असली शांति कायम हो सकती है। न्याय ही शांति की सबसे पहली शर्त है।
(ग) “कृत्रिम शान्ति सशंक आप अपने से ही डरती है”- ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि जो शांति स्वाभाविक रूप से और न्याय के आधार पर नहीं बनती, वह नकली होती है। ऐसी शांति में लोग कभी भी बेफिक्र होकर नहीं रह पाते। ऐसी शांति लाने वाला व्यक्ति खुद भी अंदर से बेचैन रहता है।
(घ) जब न्याय और समानता के आधार पर शांति स्थापित होती है तो वह मनुष्य के शरीर पर नहीं, बल्कि उसके दिल पर, उसके भरोसे पर, उसकी श्रद्धा और प्रेम पर राज करती है। ऐसी शांति स्थायी होती है और लोगों को भीतर से जोड़ती है।
In simple words: (क) इसका मतलब है कि जब तक सभी को बराबर सुख नहीं मिलेगा, तब तक सच्ची शांति नहीं आ सकती। (ख) शांति की पहली नींव न्याय को बताया गया है, क्योंकि न्याय से ही भेदभाव खत्म होता है। (ग) नकली शांति हमेशा डरती है क्योंकि वह जबरदस्ती थोपी गई होती है, स्वाभाविक नहीं। (घ) न्याय और समानता से मिली शांति इंसान के दिल, भरोसे, श्रद्धा और प्रेम पर राज करती है।

🎯 Exam Tip: किसी भी कथन के तात्पर्य को स्पष्ट करते समय, उसके मूल अर्थ को सरल और सीधे शब्दों में प्रस्तुत करें, जिससे पाठक आसानी से समझ सकें।

 

ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में, मनुज नहीं लाया है।
अपना सुख उसने अपने, भुजबल से ही पाया है।
प्रकृति नहीं डर कर झुकती है, कभी भाग्य के बल से।
सदा हारती वह मनुष्य के उद्यम से, श्रम-जल से।
ब्रह्मा का अभिलेख पढ़ा करते निरुद्यमी प्राणी ।
धोते वीर कुअंक भाल का, बहा ध्रुवों से पानी।

(5)
भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का।
जिससे रखता दबा एक जन, भाग दूसरे जन का।
वही मनुज के श्रम का शोषण, वही अनय-मय दोहन।
वही मलिन छल नर-समाज से, वही ग्लानिमय अर्जन ।
एक मनुज संचित करता है, अर्थ पाप के बल से।
और भोगता उसे दूसरा, भाग्यवाद के छल से।

 

Question 5. (क) भाग्य को कौन पढ़ता है?
(ख) भाग्यवादी लोग प्रकृति पर विजय क्यों नहीं पा सकते ?
(ग) भाग्य के नाम पर लोग दूसरों का शोषण क्यों करते हैं ?
(घ) चालाक लोग दूसरों के अधिकारों पर कैसे डाका डालते हैं ?
Answer:
(क) भाग्य को बेकार लोग पढ़ते हैं, जो मेहनत नहीं करते और सोचते हैं कि जो भाग्य में लिखा है, वही होगा। वे कर्म की बजाय किस्मत पर निर्भर रहते हैं।
(ख) भाग्यवादी लोग कभी प्रकृति पर जीत नहीं पा सकते। प्रकृति मेहनत करने वालों के सामने झुकती है, किस्मत के सामने नहीं। केवल मेहनती लोग ही प्रकृति की मुश्किलों को पार करके जीवन में सफलता पाते हैं।
(ग) भाग्य के नाम पर लोग दूसरों का शोषण करते हैं क्योंकि वे अपने गलत कामों और अन्याय को किस्मत का बहाना बनाकर छिपाते हैं। यह एक पाप है जिसे वे भाग्य के पर्दे के पीछे छुपा देते हैं।
(घ) चालाक लोग दूसरों के साथ धोखा करते हैं और यह कहकर उनके हक पर कब्जा कर लेते हैं कि यह उनकी किस्मत में था। इस तरह वे धोखे और फरेब से, भाग्य का नाम लेकर, दूसरों के अधिकारों को हड़प लेते हैं।
In simple words: (क) भाग्य को वे लोग पढ़ते हैं जो आलसी होते हैं और मेहनत नहीं करते। (ख) भाग्यवादी लोग प्रकृति को नहीं जीत सकते क्योंकि प्रकृति सिर्फ मेहनती लोगों के आगे झुकती है। (ग) लोग अपने पापों को छिपाने और दूसरों का शोषण करने के लिए भाग्य का बहाना बनाते हैं। (घ) चालाक लोग दूसरों के साथ धोखा करके और भाग्य का नाम लेकर उनके अधिकारों को छीन लेते हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जहाँ कविता के भाव पूछे जाएं, वहाँ कवि के मुख्य संदेश को सरल और सीधे तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए।

 

(6) मैंने झुक नीचे को देखा तो झलकी आशा की रेखा -
विप्रवर स्नान कर चढ़ा सलिल शिव पर दूर्वादल, तंदुल, तिल,
लेकर झोली आए ऊपर देखकर चले तत्पर वानर
द्विज रामभक्त, भक्ति की आश भजते शिव को बारहों मास।
कर रामायण का पारायण जपते हैं श्रीमन्नारायण।
दुःख पाते जब होते अनाथ, कहते कपियों के जोड़ हाथ।
मेरे पड़ोस के वे सज्जन, करते प्रतिदिन सरिता मज्जन।
झोली से पुए निकाल लिए बढ़ते कपियों के हाथ दिये।
देखा भी नहीं उधर फिर कर जिस ओर रही वह भिक्ष इत।
चिल्लाया किया दूर दानव, बोला - धन्य, श्रेष्ठ मानव।

 

Question 6. (क) कवि ने नीचे क्या देखा? उसे उस दृश्य में क्या बात आशाजनक लगी ?
(ख) कवि ने विप्रवर की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है ?
(ग) कवि की आशा निराशा में कैसे बदल गई ?
(घ) कवि के कथन 'धन्य, श्रेष्ठ मानव' में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) कवि ने पुल के नीचे देखा तो एक ब्राह्मण नदी में स्नान करके शिवजी की पूजा-अर्चना करने के बाद ऊपर आते हुए दिखाई दिए। यह देखकर कवि को उम्मीद हुई कि वह पुल पर बैठे गरीब भिखारी को कुछ खाने को देंगे।
(ख) कवि ने विप्रवर की ये विशेषताएं बताई हैं: वे राम और शिव के भक्त थे, रोज़ नदी में नहाते थे, रामायण पढ़ते थे, और शिवजी को दूब-घास, चावल, तिल और जल चढ़ाते थे। फिर वे बंदरों को कुछ खाने को देते थे।
(ग) कवि को उम्मीद थी कि वह ब्राह्मण पुल पर बैठे भिखारी को अपनी झोली से पूए निकालकर खाने को देंगे। लेकिन उन्होंने भिखारी की तरफ देखा तक नहीं और झोली से पूए निकालकर पास बैठे बंदरों को दे दिए, जिससे कवि की आशा निराशा में बदल गई।
(घ) कवि का "धन्य, श्रेष्ठ मानव!" कहने में गहरा व्यंग्य छिपा है। कवि ने यह तब कहा जब ब्राह्मण ने भूखे भिखारी को अनदेखा करके बंदरों को खाना दिया। यह उन लोगों पर कटाक्ष है जो धर्म के नाम पर पशुओं को तो दान देते हैं, लेकिन जरूरतमंद इंसानों की अनदेखी करते हैं।
In simple words: (क) कवि ने ब्राह्मण को पूजा करते देख उम्मीद की कि वह भिखारी को खाना देंगे। (ख) ब्राह्मण राम-शिव भक्त थे, नदी में नहाते थे, पूजा करते थे और बंदरों को खिलाते थे। (ग) कवि की उम्मीद टूट गई जब ब्राह्मण ने भिखारी को अनदेखा करके बंदरों को खाना दिया। (घ) "धन्य, श्रेष्ठ मानव" कहने में व्यंग्य है, क्योंकि ब्राह्मण ने जरूरतमंद इंसान की बजाय बंदरों को खाना दिया।

🎯 Exam Tip: व्यंग्य वाले प्रश्नों में, उस सामाजिक विरोधाभास या पाखंड को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है जिस पर कवि टिप्पणी कर रहा है।

 

मेरा देश जल रहा, कोई नहीं बुझाने वाला।
जाति धर्म गृहहीन युगों का नंगा-भूखा-प्यासा आज सर्वहारा तू ही है।
एक हमारी आशा ये छल-छंद शोषकों के हैं।
कुत्सित, ओछे, गंदे तेरा खून चूसने को ही ये दंगों के फंदे।
तेरा एका, गुमराहों को राह दिखाने वाला।
मेरा देश जल रहा, कोई नहीं बुझाने वाला।

 

Question 7. (क) भारतमाता ने अपनी सन्तानों को कुलकलंक क्यों कहा है ?
(ख) भारतमाता की व्यथा को अपने शब्दों में संक्षेप में लिखिए।
(ग) साम्प्रदायिक दंगे कौन कराता है तथा क्यों कराता है ?
(घ) भारत को इन दंगों से मुक्ति कैसे मिल सकती है ?
Answer:
(क) भारतमाता ने अपनी संतानों यानी भारतीयों को कुलकलंक इसलिए कहा है क्योंकि वे धर्म और जाति के नाम पर आपस में लड़ते-झगड़ते हैं। यह आपसी लड़ाई देश को कमजोर करती है।
(ख) भारतमाता देशवासियों के आपसी झगड़ों से बहुत दुखी हैं। वह सोचती हैं कि अगर उन्हें पता होता कि उनकी संतानें बड़ी होकर आपस में लड़ेंगी, तो वह उन्हें जन्म लेते ही मार देतीं। उन्हें निपूती कहा जाता लेकिन उन्हें यह पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती। दंगों की आग में देश को जलता देख भारतमाता बहुत परेशान हैं।
(ग) सांप्रदायिक दंगे वे लोग करवाते हैं जो गरीब और वंचित वर्ग का शोषण करते हैं। इन दंगों के जरिए वे गरीबों और मजदूरों का खून चूसना चाहते हैं और अपना फायदा देखते हैं।
(घ) कवि को उम्मीद है कि जाति, धर्म और गरीब तबका (सर्वहारा वर्ग) अपनी एकता के दम पर शोषकों की इस साजिश को खत्म कर सकता है। भारत की आम गरीब जनता धर्म और जाति के भेदभाव के खिलाफ है, वे दंगे कराने वालों की योजनाओं को नाकाम कर सकती है।
In simple words: (क) भारतमाता ने अपनी संतानों को कुलकलंक कहा है क्योंकि वे जाति-धर्म के नाम पर लड़ते हैं। (ख) भारतमाता अपने बच्चों के झगड़ों से दुखी हैं, सोचती हैं कि इससे अच्छा होता कि वे पैदा ही न होते। (ग) गरीब लोगों का शोषण करने वाले लोग सांप्रदायिक दंगे करवाते हैं ताकि उनका खून चूस सकें। (घ) भारत को इन दंगों से मुक्ति तब मिल सकती है जब जाति, धर्म और गरीब तबका एकजुट होकर शोषकों की साजिशों को नाकाम कर दे।

🎯 Exam Tip: किसी भी भावनात्मक चित्रण वाले प्रश्न में, कवि के मुख्य भाव को सरल और मार्मिक शब्दों में व्यक्त करें।

 

तू देखेगी जलद-तन को जा वहीं तद्गता हो,
होंगे लोने नयन उनके, ज्योति-उत्कीर्णकारी,
मुद्रा होगी वर-वदन की मूर्ति सी सौम्यता की.
सीधे-साधे वचन उनके सिक्त होंगे सुधा से।
नीले फूले कमल दल-सी गात की श्यामता है,
पीला प्यारा वरुन कटि में पैन्हते हैं फबीला,

(8)
छूटी काली अलक मुख की कान्ति को बढ़ाती,
सद्धस्त्रों में नवल तन की फूटती-सी प्रभा है।
साँचे ढाला सकल वपु है दिव्य सौन्दर्यशाली,
सत्पुष्पों-सी सुरभि उसकी प्राण-संपोषिका है।
दोनों कंधे वृषभ-वरसे हैं बड़े ही सजीले,
लम्बी बाँहें कलभ-कर-सी शक्ति की पेटिका हैं ॥

 

Question 8. (क) कवि राधा वायु को किससे प्रेरित कर रही है ?
(ख) श्रीकृष्ण की मुख-मुद्रा का वर्णन राधा वायु से किस तरह करती है ?
(ग) श्रीकृष्ण की वाणी की क्या विशेषता राधा वायु से बताती है ?
(घ) श्रीकृष्ण के कंधों और बाँहों की क्या विशेषता है ?
Answer:
(क) राधा वायु को श्रीकृष्ण के पास जाने और उन्हें अपना संदेश देने के लिए प्रेरित कर रही है। वह वायु को श्रीकृष्ण से मिलने और उनकी मनःस्थिति को समझने को कहती है।
(ख) राधा वायु से कहती है कि श्रीकृष्ण का चेहरा मूर्ति की तरह शांत और सुंदर है। उनकी आँखों से चमक निकलती है, और उनके माथे पर काली लटें चेहरे की सुंदरता को बढ़ाती हैं। उनका पूरा शरीर दैवीय सौंदर्य से भरा हुआ है।
(ग) राधा वायु से बताती है कि श्रीकृष्ण की वाणी सरल और अमृत जैसी मीठी है। उनकी बातें सुनने वाले के मन को शांति और आनंद देती हैं।
(घ) श्रीकृष्ण के दोनों कंधे मजबूत बैल के कंधों की तरह बहुत चौड़े और सजे हुए हैं। उनकी लंबी भुजाएँ हाथी के बच्चे की सूंड जैसी शक्तिशाली हैं, जो उनकी अद्भुत ताकत को दर्शाती हैं।
In simple words: (क) राधा वायु को श्रीकृष्ण के पास अपना संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित कर रही है। (ख) राधा कहती है कि श्रीकृष्ण का चेहरा मूर्ति जैसा सुंदर है, आँखों से चमक निकलती है और काली लटें सुंदरता बढ़ाती हैं। (ग) उनकी वाणी सरल और अमृत जैसी मीठी है। (घ) श्रीकृष्ण के कंधे बैल जैसे मजबूत और भुजाएँ हाथी की सूंड जैसी शक्तिशाली हैं।

🎯 Exam Tip: जब किसी पात्र के गुणों का वर्णन करना हो, तो कविता में दिए गए विवरणों को सटीक रूप से प्रस्तुत करें और उन्हें सरल भाषा में समझाएं।

 

(9)
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट शब्दों में दीजिए
ओ बदनसीब अन्धो ! कमजोर अभागो,
अब तो खोलो नयन नींद से जागो।
वह अघी ? बाहुबल का जो अपलापी है,
जिसकी ज्वाला बुझ गई, वही पापी है।
जब तक प्रसन्न यह अनल, सुगुण हँसते हैं,
है जहाँ खड्ग, सब पुण्य वहीं बसते हैं।
वीरता जहाँ पर नहीं, पुण्य का क्षय है,
वीरता जहाँ पर नहीं, स्वार्थ की जय है।
तलवार पुण्य की सखी, धर्मपालक है,
लालच पर अंकुश कठिन, लोभ सालक है।
असि छोड़, भीरु बन जहाँ धर्म सोता है,
होता है।

 

Question 9. (क) भारतवासियों के प्रति कवि के आक्रोश को क्या कारण है?
(ख) पुण्य का क्षय तथा स्वार्थ का उदय कब होता है?
(ग) कवि ने तलवार को पुण्य की सखी और धर्मपालक क्यों कहा है?
(घ) “असि छोड़.........सोता है' का आशय क्या है?
Answer:
(क) भारतवासियों के प्रति कवि का गुस्सा इसलिए है क्योंकि वे लालच में फंसकर अपनी वीरता और पराक्रम भूल चुके हैं। इसका नतीजा यह है कि शोषण और दुर्भाग्य उनका पीछा नहीं छोड़ रहे। कवि चाहता है कि देशवासी अज्ञान की नींद से जागें।
(ख) पुण्य का नाश और स्वार्थ का उदय तब होता है जब किसी देश के लोग अपनी वीरता और पराक्रम को छोड़ देते हैं। जब वे अपने बल और साहस का त्याग कर देते हैं, तो बुराई बढ़ जाती है।
(ग) कवि ने तलवार को पुण्य की सखी और धर्मपालक कहा है क्योंकि तलवार वीरता की निशानी है। जब मन में वीरता नहीं रहती, तो पापी और दुष्टों को कोई डर नहीं रहता और समाज में पाप फैल जाता है, धर्म नष्ट हो जाता है। तलवार ही पुण्य और धर्म की रक्षा करती है।
(घ) “असि छोड़.........सोता है' का मतलब है कि जब जागरूक और वीर लोग अपना कर्तव्य भूलकर तलवार छोड़ देते हैं और डरपोक बन जाते हैं, तो पाप की भयानक आग फैल जाती है। ऐसे में धर्म कमजोर पड़ जाता है और बुराई हावी हो जाती है।
In simple words: (क) कवि भारतवासियों से गुस्सा है क्योंकि वे लालच में पड़कर अपनी वीरता भूल गए हैं, जिससे वे शोषित हो रहे हैं। (ख) पुण्य तब नष्ट होता है और स्वार्थ तब बढ़ता है जब लोग अपनी वीरता और पराक्रम छोड़ देते हैं। (ग) तलवार को पुण्य की सखी और धर्मपालक कहा गया है क्योंकि यह वीरता और धर्म की रक्षा करती है। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि जब वीर लोग कर्तव्य छोड़ देते हैं, तो धर्म सो जाता है और पाप फैल जाता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रतीकात्मक प्रश्नों में, प्रतीक का मूल अर्थ और उसका व्यापक सामाजिक संदर्भ दोनों को स्पष्ट करें।

 

लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा।
इस समय में
इन अनगिनत अचीन्ही आवाजों में
जहाँ भी मिलेगी
उन्हें प्यार के सितार पर बजाऊँगा।
चाहे इस प्रार्थना सभा में
कैसा दर्द है !
तुम सब मुझ पर गोलियाँ चलाओ।
कोई नहीं सुनता
मैं मर जाऊँगा।
पर इन आवाजों को
लेकिन मैं कल फिर जन्म लूँगा
और इन कराहों को
कल फिर आऊँगा।
दुनिया सुने, मैं यह चाहूँगा।

 

Question 10. (क) कौन पुनः जन्म लेकर क्या करना चाहता है ?
(ख) वह दुनिया को क्या सुनाना चाहते हैं ?
(ग) कातरता, चुप्पी या चीखों को सितार पर बजाने का आशय क्या है ?
(घ) 'प्रार्थना सभा में तुम मुझ पर गोलियाँ चलाओ'-में कवि का संकेत किस ओर है ?
Answer:
(क) महात्मा गाँधी दोबारा जन्म लेकर भारत के गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच जाना चाहते हैं ताकि उन्हें सांत्वना दे सकें। उनका लक्ष्य है समाज के कमजोर वर्गों की मदद करना।
(ख) गाँधीजी चाहते हैं कि वह भारत के गरीब लोगों के दुख-दर्द को जानें और पूरी दुनिया के सामने उसे रखें। वह चाहते हैं कि पीड़ित लोगों की वह कराह और दर्द जो कोई नहीं सुनता, उसे दुनिया सुने और समझे।
(ग) कातरता, चुप्पी या चीखों को सितार पर बजाने का आशय है कि गाँधीजी दुनिया में जहाँ भी उदासी, खामोशी और दुखभरी चीखें हैं, और हारे हुए लोगों के मन में निराशा भरी है, वहाँ प्यार का मधुर गीत छेड़ना चाहते हैं। वे प्यार के संगीत से लोगों के दुख और निराशा को दूर करना चाहते हैं।
(घ) 'प्रार्थना सभा में तुम मुझ पर गोलियाँ चलाओ'-में कवि का इशारा प्रार्थना सभा में महात्मा गाँधी पर चलाई गई गोलियों की ओर है। कवि बताना चाहते हैं कि गाँधीजी के उपदेश और शिक्षाएं अमर हैं। उनका प्रेम का संदेश कभी खत्म नहीं हो सकता, भले ही उन्हें शारीरिक रूप से मार दिया जाए।
In simple words: (क) महात्मा गाँधी दोबारा जन्म लेकर गरीब लोगों को दिलासा देना चाहते हैं। (ख) वह दुनिया को गरीब लोगों के दुख-दर्द सुनाना चाहते हैं। (ग) इसका मतलब है कि जहाँ भी दुख और खामोशी है, वहाँ प्यार और शांति का संदेश फैलाना। (घ) यह पंक्ति गाँधीजी पर चली गोलियों की तरफ इशारा करती है, लेकिन उनके विचार अमर हैं।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक या प्रतीकात्मक घटनाओं से जुड़े प्रश्नों में, संदर्भ को स्पष्ट करें और कवि के संदेश को उसके मूल रूप में व्यक्त करें।

 

(11) निम्नांकित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
अर्जुन देखो, किस तरह कर्ण, सारी सेना पर टूट रहा,
किस तरह पाण्डवों का पौरुष होकर अशंक वह लूट रहा।
देखो, जिस तरफ, उधर उसके ही बाण दिखायी पड़ते हैं,
बस, जिधर सुनो, केवल उसकी हुँकार सुनायी पड़ते हैं।
कैसी करालता ! क्या लाघव! कैसा पौरुष! कैसा प्रहार।
किस गौरव से यह वीर द्विरद कर रही समर-वन में विहार।
व्यूहों पर व्यूह फटे जाते, संग्राम उजड़ता जाता है,
ऐसी तो नहीं कमलवन में भी कुजर धूम मचाता है।
इस परुष-सिंह का समर टेख मेरे तो द्राग् निद्राल नयन,
कु वचन।

 

Question 11. (क) श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कर्ण की किस बात के लिए प्रशंसा की है?
(ख) कर्ण को कवि ने 'समर-वन' तथा 'कमल-वन' में किसके समान बताया है?
(ग) श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कौन-सा गूढ़ वचन बताया?
(घ) कर्ण के युद्ध कौशल को देखकर कृष्ण उसके बारे में क्या सोच रहे थे?
Answer:
(क) श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कर्ण की प्रशंसा उसकी युद्धभूमि में दिखाई वीरता के लिए की है। कर्ण जिस तरह पांडवों की सेना पर टूट पड़ा था और उनके पूरे साहस को चुनौती दे रहा था, वह अद्भुत था।
(ख) कवि ने कर्ण को 'युद्ध रूपी वन' में घूमने वाले 'हाथी' और 'कमल-वन' में धूम मचाने वाले 'कुंजर' (हाथी) के समान बताया है। यह उसकी प्रचंड शक्ति और प्रभाव को दर्शाता है।
(ग) श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह गहरा वचन बताया कि वह अर्जुन और कर्ण दोनों की वीरता को जानते हैं। वे दोनों के बल से परिचित हैं, लेकिन मन ही मन वह कर्ण को अर्जुन से भी बड़ा वीर मानते रहे हैं।
(घ) कर्ण के युद्ध कौशल को देखकर कृष्ण सोच रहे थे कि क्या संसार में कोई और ऐसा वीर है जो कर्ण की बराबरी कर सके? क्या उसे युद्ध में हराया जा सकता है? यह कर्ण की असाधारण शक्ति पर उनके आश्चर्य को दर्शाता है।
In simple words: (क) श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कर्ण की प्रशंसा उसकी युद्ध में दिखाई गई वीरता के लिए की है, जैसे वह पांडवों की सेना पर टूट पड़ा था। (ख) कर्ण को 'युद्ध वन' और 'कमल वन' में हाथी के समान बताया गया है। (ग) श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि वह कर्ण को उससे भी बड़ा वीर मानते हैं। (घ) कृष्ण सोच रहे थे कि क्या कोई और कर्ण जितना वीर है या उसे हरा सकता है।

🎯 Exam Tip: युद्ध या पराक्रम के वर्णन वाले प्रश्नों में, मुख्य योद्धा की विशेषताओं और उसकी तुलना को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

(12)
आज की दुनियाँ विचित्र नवीन,
प्रकृति पर सर्वत्र है विजयी पुरुष आसीन ।
हैं बँधे नर के करों में वारि, विद्युत, भाप,
हुक्म पर चढ़ता उतरता है पवन का ताप।
है नहीं बाकी कहीं व्यवधान,
गिरि, सिन्धु एक
लाँघ सकता नर सरित्, समान।
शीश पर आदेश कर अवधार्य
प्रकृति के सब तत्व करते हैं मनुज के कार्य,
मानते हैं हुक्म मानव का महा वरुणेश,
और करता शब्दगुण अम्बर वहन सन्देश।
नव्य नर की मुष्टि में विकराल,
हैं सिमटते जा रहे दिक्काल।
यह प्रगति निस्सीम ! नर का यह अपूर्व विकास ।
चरण तल भूगोल ! मुट्ठी में निखिल आकाश।
किन्तु है बढ़ता गया मस्तिष्क ही निःशेष,
छूटकर पीछे गया है रह हृदय का देश;

 

Question 12. (क) आज की दुनिया को विचित्र और नवीन कहने का क्या कारण है?
(ख) किसका आदेश कौन अपने सिर पर धारण करता है?
(ग) मनुष्य की निस्सीम प्रगति के बारे में कवि ने क्या कहा है?
(घ) “छूटकर पीछे गया है रह हृदय का देश' -का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) आज की दुनिया को विचित्र और नया इसलिए कहा गया है क्योंकि आज इंसान ने विज्ञान के आविष्कारों की मदद से प्रकृति पर पूरी तरह से काबू पा लिया है। मानव ने अपनी बुद्धिमत्ता और तकनीकी प्रगति से दुनिया को बदल दिया है।
(ख) प्रकृति के सभी तत्व इंसान का आदेश मानकर अपने सिर पर धारण करते हैं। इसका मतलब यह है कि आज इंसान का आदेश पाकर प्रकृति उसके हिसाब से काम करती है। इंसान ने प्रकृति की शक्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है।
(ग) मनुष्य की असीमित प्रगति के बारे में कवि ने कहा है कि मनुष्य ने अपनी मुट्ठी में पूरे ब्रह्मांड को समेट लिया है। उसने धरती को पैरों तले रौंद डाला है और आकाश के सभी रहस्यों को जान लिया है।
(घ) “छूटकर पीछे गया है रह हृदय का देश'-इस पंक्ति का मतलब है कि मनुष्य ने भले ही विज्ञान और दिमाग से बहुत तरक्की कर ली है, लेकिन वह अपने दिल और मानवीय भावनाओं को पीछे छोड़ आया है। इंसान तकनीकी रूप से आगे बढ़ गया है, पर भावनात्मक रूप से पिछड़ गया है।
In simple words: (क) दुनिया को विचित्र और नया कहा गया है क्योंकि इंसान ने विज्ञान से प्रकृति पर काबू पा लिया है। (ख) प्रकृति के सभी तत्व इंसान का आदेश मानते हैं और उसके अनुसार काम करते हैं। (ग) मनुष्य ने विज्ञान से इतनी तरक्की कर ली है कि उसने धरती और आकाश के रहस्यों को जान लिया है। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि इंसान ने दिमाग से तो तरक्की कर ली, लेकिन दिल और भावनाओं को पीछे छोड़ दिया है।

🎯 Exam Tip: आधुनिकता और प्रगति पर आधारित प्रश्नों में, कवि के दृष्टिकोण को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करें, जिसमें प्रगति के लाभ और संभावित कमियाँ दोनों शामिल हों।

 

मन छुटपन में छिपकर पस बाए थ
सोचा था, पैसों के प्यारे पेड़ उगेंगे
रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी
और फूल-फूलकर मैं मोटा सेठ बनूँगा !
पर बंजर धरती में एक न अंकुर फूटा
बंध्या मिट्टी ने न एक भी पैसा उगला !
यह धरती कितना देती है! धरती माता
कितना देती है अपने प्यारे पुत्रों को !
नहीं समझ पाया था मैं उसके महत्त्व को !

बचपन म, छिः, स्वाथ लाभवश पैसे बाकर !
रत्न प्रसविनी है वसुधा, अब समझ सका हूँ।
इसमें सच्ची समता के दाने बोने हैं
इसमें जन की क्षमता के दाने बोने हैं
इसमें मानव ममता के दाने बोने हैं
जिससे उगल सकें फिर धूल सुनहली फसलें
मानवता की, जीवन श्रम से हँसें दिशाएँ
हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे।

 

Question 13. (क) कवि ने बचपन में क्या किया था? उसका क्या परिणाम हुआ ?
(ख) कवि धरती के किस महत्त्व को नहीं समझ पाया था?
(ग) कवि ने स्वार्थवश क्या भूल की थी?
(घ) “हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे' -का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) कवि ने बचपन में धरती में कुछ पैसे बोए थे। वह सोचता था कि इससे पैसों के पेड़ उगेंगे और वह अमीर सेठ बन जाएगा। लेकिन उसका प्रयास बेकार गया, कोई भी अंकुर नहीं निकला क्योंकि पैसे फसल नहीं बन सकते।
(ख) कवि अब समझ पाया है कि धरती बहुत महत्वपूर्ण है। वह रत्न पैदा करने वाली है और सही बीज बोने पर ढेर सारे फल दे सकती है। धरती का असली महत्व सिर्फ भौतिक धन से कहीं अधिक है।
(ग) कवि ने अमीर बनने के लिए स्वार्थवश पैसों के बीज बोए थे। वह बिना मेहनत किए मोटा सेठ बनना चाहता था, यह उसकी बड़ी भूल थी। उसने धरती के असली मूल्य को नहीं समझा।
(घ) “हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे' का मतलब है कि धरती में जो बीज बोए जाते हैं, वैसा ही फल मिलता है। अगर हम पैसे बोएंगे तो फसल नहीं उगेगी। हमें समानता, क्षमता और ममता के बीज बोने चाहिए ताकि मानवता की अच्छी फसलें मिलें। यह कर्म के सिद्धांत को दर्शाता है।
In simple words: (क) कवि ने बचपन में धरती में पैसे बोए थे ताकि अमीर बन सकें, पर कुछ नहीं उगा। (ख) कवि धरती के असली महत्व को नहीं समझ पाया था कि यह सही बीज बोने पर सब कुछ देती है। (ग) उसने अमीर बनने के लालच में पैसे बोए, जो उसकी बड़ी गलती थी। (घ) इसका मतलब है कि हम जो बोते हैं, वही काटते हैं; अच्छे कर्मों से ही अच्छा फल मिलता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे नैतिक शिक्षा वाले प्रश्नों में, कवि के संदेश को सीधे और सकारात्मक रूप से प्रस्तुत करें।

 

(14) टुक हिर्स हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा।
कज्जाव अजल को लूटे है दिन रात बजाकर नक्कारा।
क्या बधिया भैंसा बैल शुतर क्या गोनी पल्ला सर मारा।
क्या गेहूं चावल माठ मटर क्या आग धुंआ औ अंगारा।
सब ठाठ पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा।
गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरा भारी है।
ऐ गाफिल तुझसे भी चढ़ता येह और बड़ा व्यापारी है।
क्या शक्कर मिसरी कंद गरी क्या साँभर मीठा खारी है।
क्या दाख मुनक्का सोंठ मिरिच क्या कसर लोंग सुपारी है।
सब ठाठ पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा।
जब चलते-चलते रस्ते में यह न तेरी ढल जाएगी।
एक बधिया तेरी मिट्टी पर फिर घास न चरने पाएगी।

 

Question 14. (क) कवि ने मनुष्य के जीवन के ध्रुव-सत्य की ओर किन शब्दों में इशारा किया है ?
(ख) बड़ा व्यापारी किसको बताया गया है तथा 'गाफिल' किसको कहा गया है?
(ग) कवि के अनुसार जीवन के अन्तिम समय में कौन-कौन साथ नहीं देते?
(घ) 'ठाठ' और 'बंजारा' शब्द किसके प्रतीक हैं?
Answer:
(क) कवि ने मनुष्य के जीवन की अटल सच्चाई मृत्यु की ओर इन शब्दों में इशारा किया है: जब मृत्यु आती है तो मनुष्य का जीवन भर का कमाया हुआ सब कुछ यहीं छूट जाता है। यह जीवन की क्षणभंगुरता को बताता है।
(ख) बड़ा व्यापारी ईश्वर को बताया गया है, जो सब कुछ लेता है। 'गाफिल' उस इंसान को कहा गया है जो अपनी मौत को भूलकर दुनियादारी में फंसा रहता है।
(ग) कवि के अनुसार जब मृत्यु आती है तो कोई भी साथ नहीं देता। बेटा-बेटी, दामाद, और पत्नी भी उस समय साथ नहीं दे पाते। व्यक्ति को अकेले ही इस यात्रा पर जाना होता है।
(घ) 'ठाठ' शब्द संसार का प्रतीक है। जब मनुष्य दुनिया छोड़कर जाता है तो यह संसार और इससे जुड़ी चीजें यहीं छूट जाती हैं। 'बंजारा' एक खानाबदोश जाति है जो जगह-जगह भटकती है। यहाँ यह शब्द मनुष्य का प्रतीक है। मनुष्य भी इस संसार में बंजारे की तरह कुछ समय के लिए ही रहता है।
In simple words: (क) कवि ने कहा है कि मृत्यु आने पर इंसान का सब कुछ यहीं रह जाता है। (ख) ईश्वर को बड़ा व्यापारी और मौत को भूले इंसान को गाफिल कहा गया है। (ग) कवि के अनुसार, मृत्यु के समय कोई साथ नहीं देता, यहाँ तक कि परिवार वाले भी। (घ) 'ठाठ' संसार का और 'बंजारा' इंसान का प्रतीक है, जो यहाँ अस्थायी रूप से रहता है।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते समय, कविता के संदर्भ में उनका गहरा अर्थ समझाएं।

 

(15)
उठे राष्ट्र तेरे कन्धों पर
बढ़े प्रगति के प्रांगण में,
पृथ्वी को रख दिया उठाकर
तूने नभ के आँगन में
विजय वैजयन्ती फहरी है जो
जग के कोने-कोने में
उसमें तेरा नाम लिखा है
जीने में बलि होने में !
तेरे बाहु-दण्ड में है वह बल
जो केहर-कटि तोड़ सके,
तेरे दृढ़ स्कन्ध में वह बल
जो गिरि से ले होड़ सके,
यह अवसर है, स्वर्ण सुयुग है,
खो न इसे नादानी में
रंगरेलियों में, छेड़छाड़ में,
मस्ती में, मनमानी में !

 

Question 15. (क) राष्ट्र को कंधों पर उठाकर प्रगति की ओर ले जाने में किसका योगदान है?
(ख) 'उसमें तेरा नाम लिखा है/जीने में बलि होने में'-का क्या आशय है?
(ग) युवक की भुजाओं तथा कंधों की शक्ति के बारे में कवि ने क्या कहा है?
(घ) कवि युवकों को क्या संदेश दे रहा है?
Answer:
(क) राष्ट्र को अपने कंधों पर उठाकर प्रगति की ओर ले जाने में देश के नौजवानों का सबसे बड़ा योगदान होता है। उनकी युवा शक्ति और ऊर्जा से ही देश आगे बढ़ता है।
(ख) 'उसमें तेरा नाम लिखा है/जीने में बलि होने में' का मतलब है कि संसार में जो विजय पताका फहरा रही है, वह नौजवानों की बहादुरी का ही नतीजा है। नौजवानों ने अपने राष्ट्र के भले के लिए अपना जीवन न्यौछावर किया है और देश की रक्षा के लिए बलिदान भी दिया है।
(ग) कवि ने कहा है कि नौजवानों की भुजाओं में इतनी ताकत है कि वे शेर की कमर तोड़ सकती हैं। उनके कंधे भी बहुत शक्तिशाली हैं, वे ताकत में किसी भी पर्वत से मुकाबला कर सकते हैं।
(घ) कवि नौजवानों को संदेश दे रहा है कि युवावस्था वह समय है जब उनमें बहुत शक्ति और पराक्रम भरा होता है। उन्हें इस शक्ति का उपयोग लापरवाही, खेल-कूद या मनमानी में नहीं, बल्कि सही दिशा में करना चाहिए ताकि देश और समाज का भला हो सके।
In simple words: (क) देश की प्रगति में नौजवानों का योगदान होता है। (ख) इसका मतलब है कि देश की जीत और बलिदान में नौजवानों का नाम लिखा है। (ग) कवि ने कहा है कि नौजवानों की भुजाएं शेर की कमर तोड़ सकती हैं और कंधे पहाड़ से भी मजबूत हैं। (घ) कवि नौजवानों को अपनी शक्ति का सही उपयोग करने का संदेश दे रहा है।

🎯 Exam Tip: किसी भी प्रेरक कविता के संदेश को स्पष्ट करते समय, उसके मुख्य प्रेरणादायक बिंदुओं को उजागर करें और उन्हें सरल भाषा में समझाएं।

 

छानता र शिशु कान ?
मौन भी क्या रहती वह
रहते प्राण ? रे अंजान !
एक मेषमाता ही
रहती है निर्निमेष-
दुर्बल वह-
छिनती संतान जब
जन्म पर अपने अभिशप्त
तप्त आँसू बहाती है,

याग्य जन जाता है।
पश्चिम की उक्ति नहीं
गीता है, गीता है।
स्मरण करो बार-बार-
जागो फिर एक बार !
ब्रह्म हो तुम
पद-रज भर भी है नहीं पूरा यह विश्व-भार-
जागो फिर एक बार।

 

Question 16. (क) अपनी सन्तान छिनने पर सिंहनी क्या करती है ?
(ख) संतान पर संकट आने पर भेड़ क्या करती है ?
(ग) आशय स्पष्ट कीजिए-'पश्चिम की उक्ति नहीं, गीता है, गीता है।'
(घ) कवि भारतीयों को क्या प्रेरणा दे रहा है ?
Answer:
(क) अपनी संतान के छीने जाने पर सिंहनी चुप नहीं बैठती। वह तुरंत उसकी रक्षा के लिए तैयार हो जाती है और छीनने वाले पर हमला करती है, अपने बच्चे को बचाने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है।
(ख) भेड़ कमजोर होती है। अपनी संतान पर संकट आने पर वह कुछ नहीं कर पाती। वह केवल दुखी होती है और उसकी आँखों से लगातार आँसू बहते रहते हैं, क्योंकि उसमें लड़ने की शक्ति नहीं होती।
(ग) 'पश्चिम की उक्ति नहीं, गीता है, गीता है' का मतलब है कि कवि कहते हैं कि संसार में वही जीवित रहता है जो शक्तिशाली और सक्षम होता है। यह सिद्धांत पश्चिम के वैज्ञानिक डार्विन का नहीं है, बल्कि यह भारतीय महान ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता में पहले ही बताया जा चुका है। यह जीवन का एक शाश्वत सत्य है।
(घ) कवि भारतीयों को कायरता, दीनता और डर छोड़कर वीर और पराक्रमी बनने के लिए कह रहा है। वह कहता है कि तुम ब्रह्म के समान शक्तिशाली हो, यह पूरा ब्रह्मांड तुम्हारे पैरों की धूल के बराबर भी नहीं है। तुम अज्ञान की नींद से जागो और अपना सच्चा रूप पहचानो, अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानो।
In simple words: (क) सिंहनी अपनी संतान छिनने पर चुप नहीं रहती, बल्कि उसकी रक्षा के लिए तुरंत हमला करती है। (ख) भेड़ अपनी संतान पर संकट आने पर केवल रोती है, क्योंकि वह कमजोर होती है। (ग) इसका मतलब है कि 'जो ताकतवर है, वही जिंदा रहता है' यह पश्चिमी नहीं बल्कि गीता का सिद्धांत है। (घ) कवि भारतीयों को डर छोड़कर बहादुर और शक्तिशाली बनने की प्रेरणा दे रहा है, क्योंकि वे ब्रह्म के समान हैं।

🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में, दोनों पक्षों के व्यवहार को स्पष्ट करें और कवि के निहितार्थ को सरल शब्दों में बताएं।

 

तोड़ मत विश्वास की दीवार पगले !
फिर नहीं यह बन सकेगी।
ठीक है, दीवार बाधा है मनोरथ की
किन्तु बकरी बाड़ को खाकर बचेगी ?
स्वार्थ के रथ पर चढ़ो मत, रोक दो गति
इस तरह इंसान की दुनियाँ चलेगी ?
चल रही है जिन्दगी विश्वास-बल से

(17)
तोड़ मत निर्मोह हो स्नेह बन्धन
सत्य है, बन्धन प्रगति को रोकते हैं
काटकर जड़ पेड़ कैसे जी सकेगा ?
सरल मन कच्चे घड़े-सा
टूटकर जुड़ता नहीं है।
खींचने से अधिक टूटे तार वाली
नेह की वीणा कभी बजती नहीं है।

 

Question 17. (क) कवि ने विश्वास को दीवार कहा है तथा उसे कभी भी न तोड़ने का आग्रह किया है। एक बार टूटने पर दोबारा विश्वास स्थापित करना बहुत कठिन होता है।
(ख) दीवार मनोरथों के पूरा होने में बाधक होती है। वह स्वतन्त्रता को रोकती है। फिर भी बाह्य संकट से सुरक्षा के लिए दीवार की सुरक्षा जरूरी है। बकरी यदि काँटों की बाड़े को खाने लगेगी तो उसको वन्यपशुओं से बचाना संभव नहीं होगा।
(ग) इंसान की दुनिया अर्थात् यह संसार एक-दूसरे पर विश्वास करने से ही चलता है। अविश्वास इस संसार के सुचारु संचालन में सदा बाधक होता है।
(घ) प्रेम वीणा के समान है। वीणा के तारों को ज्यादा केसने पर वे टूट जाते हैं तथा उनसे संगीत के स्वर नहीं निकलते। इसी प्रकार अधिक तर्क-वितर्क, खींचतान तथा परस्पर अविश्वास और शंका प्रेम में बाधक होते हैं। इनसे प्रेम नष्ट हो जाता है।
Answer:
(क) कवि ने भरोसे को दीवार कहा है और उसे कभी न तोड़ने को कहा है। एक बार भरोसा टूट जाए तो उसे दोबारा बनाना बहुत मुश्किल होता है। विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव होता है।
(ख) दीवारें हमारी इच्छाओं को पूरा करने में रुकावट डालती हैं और आजादी को रोकती हैं। लेकिन बाहरी खतरों से बचने के लिए सुरक्षा बहुत जरूरी है। अगर बकरी कांटेदार बाड़ को ही खाने लगेगी, तो उसे जंगली जानवरों से बचाना मुश्किल होगा।
(ग) इंसान की दुनिया यानी यह संसार एक-दूसरे पर भरोसे से ही चलता है। अगर लोगों में भरोसा न हो, तो यह संसार ठीक से नहीं चल सकता। शक और अविश्वास हमेशा समाज के सुचारु संचालन में बाधा डालते हैं।
(घ) प्रेम वीणा के तार जैसा होता है। अगर वीणा के तारों को बहुत ज्यादा कस दिया जाए, तो वे टूट जाते हैं और उनसे मीठा संगीत नहीं निकलता। इसी तरह, बहुत ज्यादा बहस, खींचतान और आपसी अविश्वास प्रेम को कमजोर करते हैं। इन चीजों से प्रेम खत्म हो जाता है।
In simple words: (क) कवि ने कहा है कि विश्वास की दीवार कभी नहीं तोड़नी चाहिए, क्योंकि एक बार टूटने पर वह दोबारा नहीं बनती। (ख) दीवारें इच्छाओं में रुकावट डालती हैं, पर बाहरी सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, जैसे बाड़ के बिना बकरी सुरक्षित नहीं। (ग) इंसान की दुनिया भरोसे पर चलती है; अविश्वास इसे ठीक से चलने नहीं देता। (घ) प्रेम वीणा के तार जैसा है; ज्यादा कसने पर या ज्यादा बहस से प्रेम टूट जाता है।

🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार वाले प्रश्नों में, रूपक का स्पष्टीकरण देते हुए उसके वास्तविक अर्थ को सरल शब्दों में समझाएं।

 

(18)
खूब गए
दूधिया निगाहों में
फटी बिवाइयों वाले खुरदरे पैर
धंस गए
कुसुम कोमल मन में
गुट्ठल घट्ठों वाले कुलिश कठोर पैर
दे रहे थे गति
रबड़विहीन ठूंठ पैडलों को
चला रहे थे
एक नहीं, दो नहीं तीन-
कर रहे थे मात्र त्रिविक्रम वामन के पुराने पैरों को
नाप रहे थे धरती का अनहद फासला
घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे !
उस दिन इन आंखों से वे पैर
देर तक टकराए
भूल नहीं पाऊँगी फटी बिवाइयाँ
भैंस
कुसुम कोमल मन में।

 

Question 18. (क) रिक्शाचालक के पैरों में बिवाइयाँ और गाँठों से भरे घट्टे क्यों पड़ गए थे ?
(ख) कवि ने रिक्शाचालक के पैरों की तुलना किसके पैरों से की है ?
(ग) “घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे' से कवि किस कटु सत्य की ओर संकेत करता है ?
(घ) कवि को क्यों लगता है कि वह रिक्शाचालक के बिवाई पड़े पैरों को भूल नहीं पाएगा ?
Answer:
(क) रिक्शे के पैडलों पर रबड़ नहीं लगी थी, वे कठोर थे। उनको लगातार चलाते-चलाते रिक्शाचालक के पैरों में बिवाइयाँ और गाँठों से भरे सख्त निशान पड़ गए थे। यह उसकी कठिन मेहनत का प्रतीक है।
(ख) कवि ने रिक्शाचालक के पैरों की तुलना तीन कदमों में पूरे संसार को नापने वाले विष्णु के वामन अवतार के पैरों से की है। यह तुलना रिक्शाचालक के अथक परिश्रम और उसकी विशाल यात्राओं को दर्शाती है।
(ग) “घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे' से कवि इस कड़वे सच की ओर इशारा करता है कि रिक्शाचालक को सवारियों से जो पैसा मिल रहा था, वह दूरी के हिसाब से नहीं बल्कि समय के हिसाब से था। इसका मतलब है कि रिक्शाचालक का शोषण हो रहा था और उसे अपनी मेहनत के अनुसार मजदूरी नहीं मिल रही थी।
(घ) कवि का मन रिक्शाचालक के शोषण और उत्पीड़न को देखकर करुणा से भर उठा है। उसे लगता है कि वह कभी भी रिक्शाचालक के बिवाई पड़े पैरों को भूल नहीं पाएगा क्योंकि यह उसके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ गया है।
In simple words: (क) रिक्शे के कठोर पैडलों को लगातार चलाने से रिक्शाचालक के पैरों में बिवाइयाँ और सख्त गाँठें पड़ गई थीं। (ख) कवि ने रिक्शाचालक के पैरों की तुलना विष्णु के वामन अवतार के पैरों से की है। (ग) इसका मतलब है कि रिक्शाचालक को घंटों काम करने के बावजूद कम मजदूरी मिल रही थी। (घ) कवि को लगता है कि वह रिक्शाचालक के दुखी पैरों को कभी नहीं भूलेगा क्योंकि उसे उस पर बहुत दया आई है।

🎯 Exam Tip: जब सामाजिक असमानता या शोषण पर आधारित प्रश्न हों, तो कवि के सामाजिक संदेश को स्पष्ट करें और उसके प्रतीकात्मक अर्थ को उजागर करें।

 

मृत्यु भी वरदान है संघर्ष में प्यारे
सत्य के संघर्ष में क्यों रोशनी हारे।
अँधेरे के इशारों पर नाचती-गाती।
थका हारा सोचता मन-सोचता मन।
भूखी प्यासी कानाफूसी दे उठी दस्तक
अंधा बन जा झुका दे तम-द्वार पर मस्तक ।
रेवड़ी की बाँट में तू रेवड़ी बन जा
देखते ही देखते तम तोड़ता है दम
और सूरज की तरह हम ठोंकते हैं खम।

 

Question 19. (क) थके-हारे मन की उलझन क्या थी ?
(ख) अँधेरे में अंधों की भीड़ खुश क्यों थी ?
(ग) भूख-प्यास की विवशता को क्या परामर्श था ?
(घ) संघर्ष में विजय किसे मिलती है ?
Answer:
(क) थके-हारे मन की उलझन यह थी कि मनुष्य संघर्ष के निराशाजनक माहौल को मजबूती से झेले या भ्रष्टाचार के अंधेरे के सामने घुटने टेककर संसार के सुख को अपना ले। यह व्यक्ति के आंतरिक दुविधा को दर्शाता है।
(ख) अंधेरे में अंधों की भीड़ रेवड़ी खाकर खुश थी, यानी वे अपना स्वार्थ पूरा होने के कारण बहुत खुश थे। यह उन लोगों को दर्शाता है जो अपने छोटे से फायदे के लिए गलत कामों में शामिल हो जाते हैं।
(ग) भूख और प्यास की मजबूरी को यह सलाह दी गई थी कि संघर्ष करने की बजाय मनुष्य को अंधेरे के सामने अपना सिर झुकाकर जीवन के छोटे-मोटे सुखों को लूट लेना चाहिए। यह एक तरह की समझौतावादी प्रवृत्ति को दर्शाता है।
(घ) संघर्ष में विजय उसे मिलती है जिसमें दृढ़ता होती है। संघर्ष में वही व्यक्ति जीतता है जो अपने मन को वश में कर लेता है और मुश्किलों से घबराता नहीं।
In simple words: (क) थके मन की उलझन थी कि वह संघर्ष करे या हार मानकर सुख अपना ले। (ख) अंधेरे में अंधों की भीड़ खुश थी क्योंकि उनका स्वार्थ पूरा हो रहा था। (ग) भूख-प्यास की मजबूरी के लिए सलाह थी कि संघर्ष छोड़ कर छोटे सुख अपनाए जाएं। (घ) संघर्ष में जीत उसे मिलती है जो मजबूत होता है और अपने मन को काबू में रखता है।

🎯 Exam Tip: जीवन की चुनौतियों और नैतिक विकल्पों पर आधारित प्रश्नों में, कवि के दृष्टिकोण को समझाएं और उसके निहितार्थों को स्पष्ट करें।

 

(20)
जहाँ चित्त
जहाँ हम गर्व से माथा ऊँचा करके चल सकें
जहाँ ज्ञान मुक्त हो
जहाँ विशाल वसुधा को
खण्डों में विभाजित कर
छोटे और छोटे आँगन बनाए जाते हों।
जहाँ हर वाक्य दिल की गहराई से निकलता हो,
जहाँ हर दिशा में कर्म के अजस्त्र स्रोत फूटते हों,
निरन्तर बिना बाधा के बहती हो
जहाँ मौलिक विचारों की सरिता
तुच्छ आचारों की मरु रेती में न खोती हों
जहाँ पर कर्म, भावनाएँ, आनंदानुभूतियाँ
सभी तुम्हारे अनुगत हों।
हे प्रभु! हे पिता ! अपने हाथों से कड़ी थपकी देकर
सोते हुए
इस स्वतन्त्र भारत को जगाओ।

 

Question 20. (क) वसुधा को खण्डों में विभाजित कर छोटे-छोटे आँगन बनाने से कवि का क्या अभिप्राय है?
(ख) कर्म के अजस्र स्रोत फूटने का आशय स्पष्ट कीजिए। (ग) मौलिक विचारधारा कहाँ खो जाती है ?
(घ) कवि स्वतन्त्र भारत को सोता हुआ क्यों कहता है ?
Answer:
(क) वसुधा को खंडों में बांटकर छोटे-छोटे आँगन बनाने से कवि का मतलब है कि लोग अपनी धरती को जाति, धर्म या छोटे स्वार्थों के नाम पर बांट रहे हैं। इससे एकता खत्म होती है और देश कमजोर होता है।
(ख) कर्म के अजस्र स्रोत फूटने का आशय है कि हर दिशा में लगातार और बहुत सारे अच्छे काम होने लगें। यह ऐसे समय को दर्शाता है जब हर व्यक्ति पूरी ऊर्जा और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य निभा रहा हो।
(ग) मौलिक विचार तब खो जाते हैं जब वे तुच्छ व्यवहारों और छोटी सोच की रेगिस्तान जैसी रेत में मिल जाते हैं। जब लोग अपने विचारों को व्यवहार में नहीं लाते और रूढ़िवादिता में फंस जाते हैं, तो मौलिकता खत्म हो जाती है।
(घ) कवि स्वतंत्र भारत को सोता हुआ इसलिए कहता है क्योंकि देश के नागरिक निष्क्रिय हैं, उनमें सद्भावना की कमी है, उनके विचार और आचरण गलत हैं, और वे देश की एकता को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्हें देश के विकास और बेहतर भविष्य की चिंता नहीं है।
In simple words: (क) धरती को छोटे आँगन में बांटने का मतलब है कि लोग इसे जाति-धर्म या स्वार्थ में बांट रहे हैं। (ख) कर्म के अजस्र स्रोत फूटने का मतलब है कि हर तरफ अच्छे और बड़े काम लगातार होने लगें। (ग) मौलिक विचार तब खो जाते हैं जब लोग तुच्छ व्यवहारों और रूढ़ियों में फंस जाते हैं। (घ) कवि स्वतंत्र भारत को सोता हुआ कहता है क्योंकि यहाँ के नागरिक निष्क्रिय और अपने देश के भविष्य के प्रति लापरवाह हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आलोचना वाले प्रश्नों में, कवि की चिंता को स्पष्ट रूप से उजागर करें और उसके समाधान या सुझाव को भी बताएं यदि कविता में निहित हो।

 

Question 21.
(क) बादल की तुलना किससे की गई है और क्यों ?
(ख) घाटी सोती हुई-सी क्यों जान पड़ती है ?
(ग) मनुष्य को सिद्धि प्राप्त कराने के लिए घाटी ने क्या व्यवस्था की ?
(घ) उन पंक्तियों को उधृत कीजिए जिसका आशय है- वर्षा के द्वारा मनुष्य का अभिषेक किया जाता है।
Answer:
(क) बादलों की तुलना आसमान से की गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि बादल पूरी घाटी को ऊपर से घेरे हुए थे, जैसे आसमान ने घाटी को एक किनारे से दूसरे किनारे तक ढक लिया हो। यह नज़ारा बहुत शांत और भव्य था।
(ख) जब बादल पूरी घाटी पर छा गए, तो वहाँ अंधेरा हो गया। ऐसा लग रहा था जैसे बादल घाटी को थपकी दे रहे हों, जिससे घाटी को हल्की नींद आ रही हो। यह दृश्य प्रकृति की शांति को दर्शाता है।
(ग) घाटी ने लोगों को सफलता और स्वर्ग तक पहुँचने में मदद करने के लिए अपने ऊपर कोहरे के पतले, कबूतर के पंखों जैसे पुल बनाए थे। यह दर्शाता है कि प्रकृति हमें कठिनाइयों को पार करने के रास्ते दिखाती है।
(घ) जिस पंक्ति का अर्थ है कि वर्षा के द्वारा मनुष्य का अभिषेक किया जाता है, वह यह है: 'ऐसे ही मानव को घाटी बहलाती है, बरसा कर पानी अभिसिंचन करवाती है।' इसका मतलब है कि घाटी बारिश के पानी से मनुष्यों को ताजगी और शुद्धि प्रदान करती है, जैसे किसी पवित्र संस्कार में जल छिड़का जाता है।
In simple words: (क) बादलों की तुलना आसमान से की गई है क्योंकि बादल पूरी घाटी को आसमान की तरह घेरे हुए थे। (ख) बादल छाने से घाटी में अंधेरा हो गया। ऐसा लगा जैसे बादल घाटी को सुला रहे हों। (ग) घाटी ने कोहरे से कबूतर के पंखों जैसे पुल बनाए, ताकि लोग उन्हें पार करके सफलता और स्वर्ग तक पहुँच सकें। (घ) वह पंक्ति है: 'ऐसे ही मानव को घाटी बहलाती है, बरसा कर पानी अभिसिंचन करवाती है।' इसका मतलब है कि बारिश से घाटी इंसान को ताजगी देती है।

🎯 Exam Tip: जब कोई विशेष पंक्ति या वाक्यांश पूछा जाए, तो उसे उत्तर में हूबहू लिखना चाहिए और फिर उसका सरल शब्दों में अर्थ समझाना चाहिए।

 

Question 22.
(क) फूल, बौर तथा कोयल-कण्ठ के प्रति कवि और उसकी प्रेयसी के दृष्टिकोण में क्या भिन्नता है?
(ख) सौन्दर्य के प्रति उपयोगितावादी दृष्टिकोण रखने वालों का जीवन अंततः कैसा हो जाता है?
(ग) “जीवन भर की यातना' से कवि का क्या तात्पर्य है?
(घ) कविता के अनुसार हँसी, गंध और गीत सब मुक्ति में ही हैं, कैसे?
Answer:
(क) कवि और उसकी प्रेयसी के विचार फूल, बौर (फूल आने से पहले की अवस्था), और कोयल की आवाज़ के बारे में बिलकुल अलग हैं। कवि चाहता है कि ये सब आज़ाद रहें ताकि इनसे खुशी मिल सके। वहीं, उसकी प्रेयसी का नज़रिया इन्हें अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने का है। वह इन्हें आज़ादी छीनकर अपने काम में लाकर खुश होती है, जैसे कोई चीज़ों का उपयोग करता है।
(ख) जो लोग सुंदरता को सिर्फ उपयोग के नज़रिए से देखते हैं, उनका जीवन उदासी और मुश्किलों से भर जाता है। जब कोई सुंदरता पर अपना हक जमाना चाहता है, तो यह सुंदरता को खत्म कर देता है और समाज में लड़ाई-झगड़े पैदा करता है। ऐसे लोगों के जीवन से खुशी और आनंद चला जाता है, क्योंकि वे प्रकृति की चीज़ों को केवल अपने फायदे के लिए देखते हैं।
(ग) कवि 'जीवन भर की यातना' से यह बताना चाहता है कि अगर हम प्राकृतिक सुंदरता को केवल अपने फायदे के नज़रिए से देखें, तो हम अपने पूरे जीवन में असली खुशी से दूर रह जाते हैं। यह सोच इंसान के पूरे जीवन को दुखी कर देती है। इससे उसकी सारी खुशी, जोश और हँसी गायब हो जाती है, क्योंकि वह प्रकृति का आनंद नहीं ले पाता।
(घ) प्रकृति को आज़ादी में रखना ही सही है, उसे बाँधना ठीक नहीं। जब हम प्रकृति की आज़ाद सुंदरता को देखते हैं, तभी हमें असली जीवन का आनंद मिलता है। फूलों के खिलने, पेड़ों पर बौर के महकने और कोयल के गाने से सच्ची खुशी तभी मिल सकती है, जब हम उन्हें अपनी मर्ज़ी से रहने दें और उनकी आज़ादी न छीनें। प्रकृति का मुक्त रूप ही हमें खुशी देता है।
In simple words: (क) कवि चाहता है कि फूल, बौर और कोयल आज़ाद रहें, पर उसकी प्रेयसी उन्हें अपने काम के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। (ख) जो लोग सुंदरता को सिर्फ अपने फायदे के लिए देखते हैं, उनका जीवन उदास और दुखी हो जाता है। इससे सुंदरता भी खत्म होती है और समाज में झगड़े भी बढ़ते हैं। (ग) कवि के अनुसार, 'जीवन भर की यातना' का मतलब है कि अगर हम प्रकृति की सुंदरता को सिर्फ अपने फायदे के लिए देखें, तो हम जीवन भर खुश नहीं रह पाते और दुखी रहते हैं। (घ) प्रकृति को आज़ाद रखना ही सही है। जब फूल खिलते हैं, बौर महकती है और कोयल गाती है, तो सच्ची खुशी तभी मिलती है जब हम उन्हें मुक्त रहने दें।

🎯 Exam Tip: जब दो अलग-अलग विचारों की तुलना करनी हो, तो दोनों के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से बताएं और अंतर को रेखांकित करें।

 

Question 23.
(क) 'अपने मन का राजा' होने के दो लक्षण कविता से चुनकर लिखिए।
(ख) किस पंक्ति का आशय है-कवि पतझड़ को भी वसन्त मान लेता है।
(ग) कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
(घ) आशय स्पष्ट कीजिए-'कब रोक सकी मुझको चितवन, मदमाते कजरारे घन की।'
Answer:
(क) अपने मन का राजा होने का मतलब है कि व्यक्ति अपने मन का मालिक है और अपनी इच्छा के अनुसार काम करने के लिए आज़ाद है। दूसरा, वह जहाँ चाहे वहाँ जा सकता है, चाहे वह एक जगह हो या दूसरी, उसे कोई रोक नहीं सकता।
(ख) इस कविता की वह पंक्ति जिसका मतलब है कि कवि पतझड़ को भी वसंत के समान मानता है, वह है: 'पथ-पथ मेरे पतझारों में नव सुरभि भरा मधुमास पला।' इसका अर्थ है कि कवि अपने जीवन की मुश्किलों और सूखे समय को भी नए फूलों और खुशियों से भरा वसंत जैसा मानता है, क्योंकि वह हमेशा सकारात्मक रहता है।
(ग) कविता का मुख्य भाव यह है कि कवि बहुत बहादुर है और दुनिया की मुश्किलों से बिल्कुल नहीं डरता। वह अपने फैसले खुद लेता है कि उसे किस हाल में क्या करना है। उसे कोई भी बंधन पसंद नहीं है। वह किसी स्त्री की सुंदरता या प्रकृति के आकर्षण में फँसता नहीं है। कवि बुद्धिमान, मेहनती और आज़ाद सोच वाला व्यक्ति है।
(घ) इस कथन का अर्थ है कि कवि अपने लक्ष्य पर दृढ़ है और कोई भी चीज़ उसे डिगा नहीं सकती। चाहे वह किसी स्त्री की सुंदर, मदहोश कर देने वाली काली आँखें हों या बारिश के मौसम का सुंदर नज़ारा, कोई भी उसे अपने रास्ते से भटका नहीं पाया है। कवि अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित है।
In simple words: (क) इसका मतलब है कि व्यक्ति अपने मन का मालिक है और अपनी मर्ज़ी से काम करता है। वह जहाँ चाहे जा सकता है। (ख) कवि पतझड़ को भी वसंत मानता है, यह 'पथ-पथ मेरे पतझारों में नव सुरभि भरा मधुमास पला' पंक्ति में दिखता है। मतलब वह मुश्किलों में भी खुशियाँ ढूंढ लेता है। (ग) इस कविता का मुख्य विचार है कि कवि एक बहादुर, आज़ाद और मेहनती व्यक्ति है जो किसी भी मुश्किल से नहीं डरता और अपने फैसले खुद लेता है। (घ) कवि अपने रास्ते पर अडिग है। किसी भी स्त्री की सुंदरता या बारिश के मौसम का नज़ारा उसे अपने लक्ष्य से भटका नहीं पाया।

🎯 Exam Tip: केन्द्रीय भाव लिखते समय कविता के मुख्य संदेश को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें कवि का दृष्टिकोण शामिल हो।

 

Question 24.
(क) कवि के स्वभाव की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. कवि निरन्तर चलने में विश्वास करता है। वह मानता है कि गति ही जीवन है।
2. कवि कठिनाइयों से विचलित नहीं होता। वह निरन्तर संघर्ष करते हुए साहस और दृढ़ता का परिचय देता है और उन पर विजय पाता है।
(ख) कविता में आए मेघ, विद्युत, सागर की गर्जना और ज्वालामुखी किनके प्रतीक हैं? कवि ने उनका संयोजन यहाँ क्यों किया है?
(ग) “शूलों के बदले फूलों का किया न मैंने मित्र चयन'-पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
(घ) “युग की प्राचीर' का क्या तात्पर्य है? उसे कमजोर क्यों बताया गया है?
Answer:
(क) कवि का स्वभाव यह है कि वह हमेशा चलते रहने में यकीन रखता है, क्योंकि उसका मानना है कि आगे बढ़ते रहना ही जीवन है। दूसरा, कवि मुश्किलों से घबराता नहीं। वह लगातार हिम्मत और मज़बूती से संघर्ष करता है और उन्हें पार कर लेता है।
(ख) कविता में बादल, बिजली, समुद्र की गड़गड़ाहट और ज्वालामुखी जीवन की मुश्किलों और रास्ते में आने वाली बाधाओं को दिखाते हैं। कवि ने इन सबको एक साथ इसलिए रखा है ताकि यह बता सके कि वह रास्ते की किसी भी मुश्किल से नहीं डरता। वह बिना डरे और बिना रुके उनसे लड़ता है और आगे बढ़ता जाता है।
(ग) इस पंक्ति का मतलब है कि कवि अपने जीवन में कभी भी मुश्किलों से नहीं डरा। उसने कभी भी लड़ाई छोड़ कर आरामदायक जीवन जीने का रास्ता नहीं चुना। कवि हमेशा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है।
(घ) 'युग की प्राचीर' का मतलब है जीवन में समय-समय पर आने वाली मुश्किलें या समाज की ऐसी पुरानी रस्में और परंपराएँ जो इंसान को आगे बढ़ने से रोकती हैं। युग की दीवार को कमज़ोर कहने का मतलब यह है कि जीवन में आने वाली बाधाएँ और कठिनाइयाँ कवि की हिम्मत को तोड़ नहीं सकतीं।
In simple words: (क) कवि का स्वभाव है कि वह हमेशा चलते रहने में विश्वास रखता है और मुश्किलों से घबराता नहीं, बल्कि उनका सामना करता है। (ख) कविता में बादल, बिजली, समुद्र और ज्वालामुखी जीवन की मुश्किलों को दिखाते हैं। कवि ने इन्हें यह बताने के लिए जोड़ा है कि वह मुश्किलों से नहीं डरता और उनसे लड़कर आगे बढ़ता है। (ग) कवि जीवन में मुश्किलों से कभी नहीं डरा और उसने आरामदायक जीवन जीने के लिए संघर्ष को कभी नहीं छोड़ा। (घ) 'युग की प्राचीर' का मतलब है जीवन की मुश्किलें और पुरानी सामाजिक रीतियाँ जो इंसान को आगे बढ़ने से रोकती हैं। इसे कमज़ोर इसलिए कहा गया है क्योंकि ये कवि की हिम्मत नहीं तोड़ सकतीं।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते समय, पहले प्रतीक का सीधा अर्थ बताएं और फिर समझाएं कि उसका गहरा या छिपा हुआ अर्थ क्या है।

 

Question 25.
(क) मेघों के झुकने का धरती पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा क्यों ?
(ख) राधा कौन थी? उसे बेसुध क्यों कहा गया है ?
(ग) मन के भावों और प्रेम गीतों का परस्पर क्या सम्बन्ध है ? इनमें कौन किस पर आश्रित है ?
(घ) 'खेतों पर यौवन लहराया, रूप गुजरिया का दमका है।' का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) जब बादल धरती के पास आते हैं, तो धरती का तन-मन खुशी से भर उठता है, क्योंकि उसे उम्मीद होती है कि बारिश होगी। बारिश से धरती की प्यास बुझती है और वह हरी-भरी हो जाती है। यह दृश्य प्रकृति के चक्र को दर्शाता है।
(ख) राधा एक गोपिका थी जो भगवान कृष्ण के प्रति अपने प्रेम में पूरी तरह डूबी हुई थी। उसे बेसुध इसलिए कहा गया है क्योंकि वह कृष्ण के प्रेम में इतनी लीन रहती थी कि उसे अपनी सुध-बुध नहीं रहती थी। वह हमेशा कृष्ण की यादों में खोई रहती थी।
(ग) मन के भाव और प्रेम गीत एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। कवि अपने मन के भावों से प्रेरित होकर ही कविताएँ लिखता है। जब उसके मन में प्यार की भावनाएँ उमड़ती हैं, तो वह प्रेम से भरे गीत लिखता है। इस तरह प्रेम गीत मन के अंदर के भावों पर पूरी तरह निर्भर करते हैं।
(घ) इस पंक्ति का मतलब है कि जब खेतों में काम करते समय ग्रामीण लोकगीत या आल्हा गाए जाते हैं, तो किसान और मज़दूर युवा जोश और खुशी से भर जाते हैं। उस समय गाँव की लड़कियाँ और महिलाएँ भी बहुत सुंदर दिखने लगती हैं। यह दृश्य ग्रामीण जीवन के उत्साह और सौंदर्य को दिखाता है।
In simple words: (क) जब बादल झुकते हैं, तो धरती खुश हो जाती है क्योंकि बारिश होने से वह हरी-भरी और ताज़ा हो जाती है। (ख) राधा कृष्ण से बहुत प्रेम करती थी। उसे बेसुध इसलिए कहा गया क्योंकि वह कृष्ण की यादों में इतनी खोई रहती थी कि उसे अपनी खबर भी नहीं रहती थी। (ग) कवि मन के भावों से कविता लिखता है। जब मन में प्यार के भाव आते हैं, तो वह प्रेम गीत लिखता है। प्रेम गीत मन के भावों पर निर्भर करते हैं। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि जब गाँवों में लोकगीत गाए जाते हैं, तो खेतों में काम करने वाले किसान युवा जोश से भर जाते हैं और गाँव की युवतियाँ सुंदर दिखने लगती हैं।

🎯 Exam Tip: काव्यांश के अर्थ को समझते समय, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के बीच के संबंध को ध्यान में रखें, क्योंकि कवि अक्सर इन्हीं के माध्यम से अपनी बात कहता है।

 

Question 26.
(क) इस काव्यांश में कवि किसे प्रेरणा दे रहा है और क्या ?
(ख) अद्भुत सफर की अद्भुतता क्या है ?
(ग) आशय स्पष्ट कीजिए-जीवन सतत् संग्राम है।
(घ) कविता का केन्द्रीय भाव दो-तीन वाक्यों में लिखिए।
Answer:
(क) इस कविता के हिस्से में कवि नौजवानों को हिम्मत दे रहा है। वह उनसे कहता है कि रास्ते में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, उन्हें रुकना नहीं चाहिए, बल्कि लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए और हार नहीं माननी चाहिए।
(ख) यह यात्रा वाकई बहुत अनोखी है। इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ आसान रास्तों पर नहीं, बल्कि बर्फ से ढके पहाड़ों पर, ज्वालामुखी के गर्म लावा के ऊपर और तेज़ तलवार की धार पर भी आगे बढ़ती है। यह दर्शाता है कि यह सफ़र चुनौतियों से भरा है।
(ग) इस कथन का मतलब है कि जीवन कभी न खत्म होने वाले एक युद्ध जैसा है। इंसान का जीवन हमेशा मुश्किलों और बाधाओं से लड़ते हुए ही बीतता है। इसमें आराम करने का कोई मौका नहीं मिलता, बल्कि हर पल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
(घ) कविता का मुख्य भाव यह है कि जीवन एक लगातार चलने वाली लड़ाई जैसा है, जिसमें आराम करने का कोई मौका नहीं मिलता। कवि युवकों को संदेश देता है कि उन्हें अपने मन में जोश भरना चाहिए, रास्ते की मुश्किलों को पार करना चाहिए और नामुमकिन को मुमकिन बनाकर नई चीज़ें बनानी चाहिए। यह एक प्रेरणादायक संदेश है।
In simple words: (क) कवि नौजवानों को प्रेरणा दे रहा है कि वे मुश्किलों से बिना डरे हमेशा आगे बढ़ते रहें। (ख) यह यात्रा अनोखी है क्योंकि यह बर्फ़ीले पहाड़ों, ज्वालामुखी के लावे और तलवार की धार जैसे मुश्किल रास्तों से होकर गुज़रती है। (ग) 'जीवन सतत् संग्राम है' का मतलब है कि जीवन एक लगातार चलने वाली लड़ाई है, जिसमें इंसान को हमेशा मुश्किलों से लड़ना पड़ता है और आराम नहीं मिलता। (घ) कविता का मुख्य भाव है कि जीवन एक लगातार लड़ाई है, जिसमें आराम नहीं। युवकों को जोश से मुश्किलों को पार कर नामुमकिन को मुमकिन करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: पद्यांश के केंद्रीय भाव को लिखते समय, कवि के मुख्य संदेश और उसके उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करें ताकि सटीक और संक्षिप्त उत्तर दिया जा सके।

 

Question 27.
(क) मनुष्य पुरुषार्थ से क्या-क्या कर सकता है ?
(ख) “सफलता वर-तुल्य वरो उठो'-पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
(ग) अपुरुषार्थ भयंकर पाप है-कैसे ?
(घ) काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
Answer:
(क) इंसान मेहनत और कोशिश से दूसरों की भलाई कर सकता है। वह अपनी ज़रूरतें भी पूरी कर सकता है। अपनी मेहनत से इंसान दुनिया में सभी को सुख और शांति दे सकता है। यानी, कोशिशों से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।
(ख) इस पंक्ति का अर्थ है कि सफलता एक वरदान जैसी है, और इसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करना बहुत ज़रूरी है। बिना परिश्रम के जीवन में कभी सफलता नहीं मिल सकती। इसलिए, अपनी पूरी कोशिश और मेहनत से सफलता हासिल करो, जैसे किसी वरदान को मांगते हैं।
(ग) मेहनत न करना या हिम्मत हारना एक बड़ा पाप है। ऐसा इसलिए क्योंकि बिना मेहनत के जीवन में कोई सफलता नहीं मिलती। मेहनत न करने वाले को न तो नाम मिलता है और न ही कोई बड़ी उपलब्धि। जो इंसान मेहनत नहीं करता, वह कीड़े-मकोड़ों की तरह ही जीता और मरता है।
(घ) इस कविता के हिस्से के लिए सबसे अच्छा शीर्षक है: 'पुरुष हो, पुरुषार्थ करो।' यह शीर्षक कविता के मुख्य विचार को दर्शाता है कि हर इंसान को मेहनती और शक्तिशाली होना चाहिए।
In simple words: (क) इंसान मेहनत से दूसरों की भलाई कर सकता है, अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकता है और दुनिया में सुख-शांति भी ला सकता है। (ख) 'सफलता वर-तुल्य वरो उठो' का मतलब है कि सफलता एक वरदान है जिसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करना ज़रूरी है। (ग) मेहनत न करना एक बड़ा पाप है क्योंकि बिना मेहनत के जीवन में सफलता, नाम या शक्ति नहीं मिलती। ऐसे लोग कीड़े-मकोड़ों जैसे होते हैं। (घ) कविता का सही शीर्षक 'पुरुष हो, पुरुषार्थ करो' है।

🎯 Exam Tip: शीर्षक हमेशा कविता के मुख्य संदेश को दर्शाना चाहिए और संक्षिप्त, आकर्षक व अर्थपूर्ण होना चाहिए ताकि एक नज़र में कविता का विषय समझ में आ जाए।

 

Question 28.
(क) असहायों से खेल कौन कर रहा है ? आशा को अफीम क्यों कहा है ?
(ख) 'सदियों की कुर्बानी यदि यों बेमोल बिकी' का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) देश के विकास के लिए कवि किस बात को आवश्यक मानता है ?
(घ) कविता की पंक्तियों में 'ऐसी घड़ियाँ' से किस ओर संकेत है ?
Answer:
(क) जो लोग किस्मत पर भरोसा करते हैं, वे ही बेबस लोगों के साथ खेल रहे हैं। आशा को अफीम इसलिए कहा गया है क्योंकि यह लोगों को यह सोचकर बेसुध कर देती है कि सब कुछ किस्मत पर छोड़ दो, जिससे वे कोई मेहनत नहीं करते और झूठी उम्मीद में रहते हैं। यह लोगों को काम करने से रोकती है।
(ख) इस पंक्ति का मतलब है कि अगर हमारे देश के लोगों ने आज़ादी के लिए जो सालों की मेहनत और त्याग किया है, वह सब बेकार हो जाए और उसका कोई अच्छा नतीजा न निकले। यह दर्शाता है कि इतनी बड़ी कुर्बानियों का सम्मान होना चाहिए और उनका फल मिलना चाहिए।
(ग) देश को आगे बढ़ाने के लिए कवि को लगता है कि लोगों में एकता, खुद पर भरोसा और मेहनत बहुत ज़रूरी हैं। उनका मानना है कि जब लोग मिलकर काम करेंगे और अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल करेंगे, तभी देश सच में तरक्की कर पाएगा और मजबूत बनेगा।
(घ) कविता में 'ऐसी घड़ियाँ' भारत को आज़ादी मिलने के बाद के अहम समय को दर्शाती हैं, जब देश को आगे बढ़ाने के कई मौके मिले थे। यह वह मौका था जब सभी को मिलकर काम करना चाहिए था ताकि देश तरक्की कर सके और अपना भविष्य उज्ज्वल बना सके।
In simple words: (क) भाग्यवादी लोग बेबस लोगों से खेल रहे हैं। आशा को अफीम इसलिए कहा है क्योंकि यह लोगों को झूठी उम्मीद देकर उन्हें बेकार कर देती है। (ख) 'सदियों की कुर्बानी यदि यों बेमोल बिकी' का मतलब है कि देश के लिए दी गई सालों की कुर्बानियाँ अगर बेकार चली जाएँ और उनका कोई फल न मिले। (ग) देश के विकास के लिए कवि एकता, आत्मविश्वास और मेहनत को ज़रूरी मानता है। (घ) 'ऐसी घड़ियाँ' से कवि भारत की आज़ादी के बाद देश के विकास के महत्वपूर्ण अवसरों की बात कर रहा है।

🎯 Exam Tip: कवि के व्यंग्यात्मक भाव को स्पष्ट करते समय, यह बताएं कि कवि किस सामाजिक या मानवीय समस्या पर कटाक्ष कर रहा है और उसका उद्देश्य क्या है।

 

Question 29.
(क) कवि ने भारत की साम्प्रदायिक विविधता की तुलना किससे की है ?
(ख) एकता के लिए कवि ने कौन-सी बातें आवश्यक बताई हैं?
(ग) “दो एक एकादश हुए' से कवि का क्या आशय है ?
(घ) कवि ने एकता की क्या-क्या विशेषताएँ बताई हैं?
Answer:
(क) कवि ने भारत में अलग-अलग धर्मों और जातियों के लोगों की विविधता की तुलना कई तरह के फूलों से बनी एक माला से की है। जैसे अलग-अलग फूल मिलकर एक सुंदर माला बनाते हैं, वैसे ही अलग-अलग धर्मों के लोग भी साथ मिलकर एकता से रह सकते हैं और देश को सुंदर बना सकते हैं।
(ख) एकता के लिए कवि ने कहा है कि हमें अपनी अज्ञानता छोड़नी होगी, मन से मन मिलाना होगा, और सारी दुश्मनी और विरोध को हिम्मत और समझदारी से खत्म करना होगा। ये सब बातें एकता के लिए बहुत ज़रूरी हैं ताकि समाज में शांति और भाईचारा बना रहे।
(ग) 'दो एक एकादश हुए' इस पंक्ति में कवि ने 'एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं' मुहावरे का इस्तेमाल कविता के रूप में किया है। इसका मतलब यह है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो देश और समाज की ताकत बहुत बढ़ जाती है, जिससे वे कोई भी बड़ा काम कर सकते हैं और मुश्किलों का सामना कर सकते हैं।
(घ) कवि ने बताया है कि एकता से हर काम में सफलता मिलती है। एकता मन की उदासी को दूर कर देती है और इससे एक खास और अद्भुत ताकत मिलती है। जब लोग एक साथ आते हैं, तो वे एक और एक मिलकर ग्यारह के बराबर हो जाते हैं, यानी उनकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
In simple words: (क) कवि ने भारत की विविधताओं की तुलना फूलों की माला से की है, जैसे अलग-अलग फूल मिलकर एक माला बनाते हैं, वैसे ही लोग भी एकता से रह सकते हैं। (ख) एकता के लिए कवि ने कहा है कि अज्ञान छोड़ो, मन से मन मिलाओ और सारी दुश्मनी को हिम्मत व समझदारी से खत्म करो। (ग) 'दो एक एकादश हुए' का मतलब है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो देश और समाज की ताकत बहुत बढ़ जाती है। (घ) कवि के अनुसार, एकता से सफलता मिलती है, मन की उदासी दूर होती है और अद्भुत शक्ति मिलती है, जिससे लोग एक और एक ग्यारह बन जाते हैं।

🎯 Exam Tip: मुहावरे या लोकोक्ति का प्रयोग होने पर, पहले उसका शाब्दिक अर्थ बताएं और फिर समझाएं कि कवि ने उसे किस भाव को व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल किया है।

 

Question 30.
(क) 'कवि ने हृष्ट-पुष्ट समर्थ कर्ता-हर्ता' किन्हें कहा है? 'हिलता-ढुलता कंकाल' में किसकी ओर संकेत है ?
(ख) किसान ने अपने खेत को किस प्रकार तैयार किया था ?
(ग) कवि ने किसान की पत्नी तथा उसके बच्चों की दशा का क्या वर्णन इन पंक्तियों में किया है ?
(घ) 'उसका कुटुम्ब था भरा-पूरा आहों से हाहाकारों से' कहने का तात्पर्य क्या है ?
Answer:
(क) कवि ने 'हृष्ट-पुष्ट समर्थ कर्ता-हर्ता' शब्द धनी लोगों, ज़मींदारों और साहूकारों के लिए इस्तेमाल किए हैं जो शक्तिशाली होते हैं। 'हिलता-ढुलता कंकाल' से कवि ने भारत के बहुत गरीब और कमज़ोर किसान की हालत बताई है। यह दर्शाता है कि अमीर लोग शक्तिशाली हैं, जबकि गरीब किसान बेहद कमज़ोर हैं।
(ख) किसान ने अपने खेत को तैयार करने में पिछले चार महीने बहुत मेहनत की थी। उसने अपने खेत में गेहूं की फसल बोई थी। इस फसल को उगाने के लिए उसने भूख-प्यास सहते हुए और आहें भरते हुए अपना खून-पसीना एक किया था। इस काम में उसने अपनी बीमार पत्नी और भूखे बच्चों का भी ध्यान नहीं रखा।
(ग) किसान की पत्नी बहुत बीमार थी, लेकिन किसान के पास उसके इलाज के लिए न पैसे थे और न ही समय। उसके तीन बच्चों को माता-पिता का प्यार नहीं मिला था। वे भूख और प्यास से नाली के कीड़ों की तरह तड़प रहे थे। वे देखने में बहुत गंदे, छोटे, बदसूरत और टेढ़े-मेढ़े लग रहे थे। वे ज़िंदा नहीं रहना चाहते थे और उन्हें मरने का भी हक नहीं था।
(घ) इस पंक्ति का मतलब है कि किसान का पूरा परिवार बहुत ज़्यादा दुखी था और लगातार दर्द में था। इसका अर्थ यह है कि किसान के परिवार के सभी लोग भूख, प्यास और दूसरों के अत्याचार से बहुत परेशान थे। उनके मुँह से हमेशा दर्द भरी आवाज़ें निकलती रहती थीं। 'हाहाकारों तथा आहों से भरापूरा कुटुम्ब' कहकर कवि ने उस गरीब परिवार की दुखद हालत पर गहरा व्यंग्य किया है।
In simple words: (क) कवि ने 'हृष्ट-पुष्ट समर्थ कर्ता-हर्ता' शब्द अमीर लोगों के लिए इस्तेमाल किया है। 'हिलता-ढुलता कंकाल' से गरीब और कमज़ोर किसान की हालत बताई है। (ख) किसान ने चार महीने मेहनत करके अपना खेत तैयार किया था। उसने भूख-प्यास सहकर गेहूं की फसल उगाई और बीमार पत्नी व भूखे बच्चों का भी ध्यान नहीं दिया। (ग) किसान की पत्नी बीमार थी और उसके पास इलाज के लिए पैसे या समय नहीं था। उनके तीन बच्चों को प्यार नहीं मिला, वे भूख-प्यास से तड़प रहे थे और मरना चाहते थे। (घ) इसका मतलब है कि किसान का परिवार भूख, प्यास और शोषण से बहुत दुखी था। उनके मुँह से हमेशा दर्द भरी आवाज़ें निकलती थीं। कवि ने इस बात पर व्यंग्य किया है।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति या समूह की दशा का वर्णन करते समय, उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक पहलुओं को शामिल करें ताकि एक पूरी तस्वीर पेश की जा सके।

 

Question 31.
(क) इस कविता के आधार पर भारतमाता के स्वरूप का वर्णन कीजिए।
(ख) कश्मीर पर भारतीयों को अभिमान क्यों है ?
(ग) भारत के सांस्कृतिक विकास में किस-किस का योगदान है ?
(घ) जो थे असि घाटों पर लेटे' का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) भारतमाता के सिर पर हिमालय एक मुकुट जैसा लगता है। उन्होंने हरे-भरे पेड़ों और खेत-खलिहानों की चादर ओढ़ रखी है। समुद्र उनके पैर छूकर सम्मान देता है, और उनके दिल में देवताओं का वास है। यह भारत की प्राकृतिक सुंदरता और पवित्रता को दर्शाता है, जो देश को एक विशेष पहचान देती है।
(ख) कश्मीर धरती पर स्वर्ग जैसा है। उसकी सुंदरता इतनी शानदार है कि उसकी कोई तुलना नहीं। वहाँ कई तरह के फल और केसर पैदा होते हैं। इसी वजह से भारत के लोगों को कश्मीर पर बहुत गर्व है, क्योंकि यह देश का एक अनमोल हिस्सा है और उसकी प्राकृतिक धरोहर है।
(ग) भारत की संस्कृति को आगे बढ़ाने में कई महान लोगों का योगदान है। इनमें भगवान राम, कृष्ण, महात्मा बुद्ध, महावीर, गुरुनानक देव, स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद जैसे बड़े संत और विचारक शामिल हैं। इन सभी ने भारत की पहचान और मूल्यों को मजबूत किया है और देश को विश्व गुरु बनाया है।
(घ) इस कविता के हिस्से का मतलब है कि महाराणा प्रताप और वीर शिवाजी जैसे योद्धाओं ने दुश्मनों की तलवारों का बिना डरे सामना किया था। उनका जीवन तलवार की धार पर चलने जैसा था, जिसका मतलब है कि वे हमेशा खतरों के बीच बहादुरी से रहे। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए जान दे दी।
In simple words: (क) भारतमाता के माथे पर हिमालय मुकुट है, उन्होंने हरियाली की चादर ओढ़ रखी है, समुद्र उनके पैर छूता है और उनके दिल में देवता रहते हैं। (ख) कश्मीर धरती का स्वर्ग है, उसकी सुंदरता बेजोड़ है। वहाँ कई फल और केसर उगते हैं, इसलिए भारतीयों को उस पर गर्व है। (ग) भारत की संस्कृति को आगे बढ़ाने में राम, कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरुनानक, आर्य दयानन्द और स्वामी विवेकानन्द जैसे महापुरुषों का बहुत योगदान है। (घ) इसका मतलब है कि महाराणा प्रताप और शिवाजी जैसे योद्धाओं ने दुश्मनों की तलवारों का बहादुरी से सामना किया। उनका जीवन हमेशा खतरों से भरा रहा।

🎯 Exam Tip: किसी देश या व्यक्तित्व का वर्णन करते समय, उसके ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक पहलुओं को एक साथ जोड़कर प्रस्तुत करें ताकि एक संपूर्ण चित्र उभरे।

 

Question 32.
(क) भारतीय युवक यदि दृढ़ निश्चय कर लें तो आँधियों को मोड़ सकते हैं, आकाश के तारे तोड़ सकते हैं तथा संसार के इतिहास में यशस्वी लोगों में अपना नाम लिखा सकते हैं।
(ख) नवयुवकों से आग्रह किया जा रहा है कि वे विचारों की नई गंगा बहा दें तथा ऐसा तूफान उठायें जो सब कुछ बदल दे। वे अपनी शक्ति पर संसार के विश्वास को और अधिक मजबूत करें।
(ग) युवक यदि परिश्रम करें तो करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दे सकते हैं। वे अपने पसीने से सींचकर धूल में भी सोने के फूल खिला सकते हैं।
(घ) 'कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे-' का आशय है कि नवयुवकों में अपार शक्ति होती है। वह जिस स्थान पर रहकर श्रम करते हैं, वह स्थान सफलता और सम्पन्नता से भर उठता है। वे अपने श्रम से अनुपजाऊ भूमि में भी लाभकारी फसलें पैदा कर सकते हैं?
Answer:
(क) इस काव्यांश के अनुसार, अगर भारत के नौजवान पक्का इरादा कर लें, तो वे तूफानों की दिशा बदल सकते हैं, आकाश के तारे तोड़ सकते हैं, और दुनिया के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में लिख सकते हैं। यह दर्शाता है कि नौजवानों में बहुत बड़ी शक्ति होती है और वे कुछ भी हासिल कर सकते हैं।
(ख) कवि नौजवानों से कह रहा है कि वे नए विचारों की एक लहर लाएँ, जैसे गंगा नदी बहती है, और ऐसा बड़ा बदलाव लाएँ जिससे सब कुछ बदल जाए। उन्हें अपनी ताकत से पूरी दुनिया के भरोसे को और मज़बूत करना चाहिए। यह आह्वान एक बड़े सामाजिक परिवर्तन का है, जो युवाओं की ऊर्जा से संभव है।
(ग) अगर नौजवान कड़ी मेहनत करें, तो वे करोड़ों गरीब और लाचार लोगों को एक नई और बेहतर ज़िंदगी दे सकते हैं। वे अपने खून-पसीने से किसी भी बंजर ज़मीन को इतना उपजाऊ बना सकते हैं कि वहाँ सोने जैसे फूल खिल उठें। यह उनकी मेहनत की अद्भुत शक्ति को दर्शाता है और उन्हें कर्मयोगी बनने के लिए प्रेरित करता है।
(घ) 'कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे' इस पंक्ति का मतलब है कि नौजवानों में बहुत ज़्यादा ताकत होती है। वे जिस जगह भी मेहनत करते हैं, वह जगह कामयाबी और खुशहाली से भर जाती है। अपनी कड़ी मेहनत से वे बंजर ज़मीन में भी अच्छी फसलें उगा सकते हैं, जैसे धूल में सोने के फूल खिल उठें और नया जीवन पैदा करें।
In simple words: (क) अगर भारतीय नौजवान पक्का इरादा कर लें, तो वे तूफानों को मोड़ सकते हैं, तारे तोड़ सकते हैं और इतिहास में अपना नाम लिख सकते हैं। (ख) नौजवानों से कहा गया है कि वे नए विचार लाएँ, बड़ा बदलाव लाएँ और अपनी शक्ति से दुनिया का भरोसा मज़बूत करें। (ग) अगर नौजवान मेहनत करें, तो वे करोड़ों गरीबों को नया जीवन दे सकते हैं। वे अपनी मेहनत से बंजर ज़मीन पर भी सोने जैसे फूल उगा सकते हैं। (घ) 'कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे' का मतलब है कि नौजवानों में बहुत ताकत है। वे अपनी मेहनत से बंजर ज़मीन को भी उपजाऊ बना सकते हैं और खुशहाली ला सकते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रेरणादायक कविताओं के उत्तर लिखते समय, कवि के उत्साहपूर्ण शब्दों और उनके पीछे छिपे सकारात्मक संदेश को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।

 

Question 33.
(क) आज देश के सामने कौन सी विकट समस्या है?
(ख) 'आज सब जलयान दागी हो गए' से कवि का क्या आशय है?
(ग) शुभ्र शिखरों पर कालिमा चढ़ने में कवि ने क्या संकेत किया है?
(घ) “नाव टूटी' का प्रतीकार्थ क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) आज देश के सामने सबसे बड़ी और मुश्किल समस्या यह है कि देश के नेता और दिशा दिखाने वाले लोग भ्रष्ट हो गए हैं। लोगों के पास कोई ऐसा आदर्श व्यक्ति नहीं बचा है जिसका वे अनुसरण करके सही रास्ता चुन सकें। यह स्थिति देश के लिए बहुत चिंताजनक है और विश्वास का संकट पैदा करती है।
(ख) कवि का इस पंक्ति से मतलब है कि देश के सभी राजनीतिक दलों में भ्रष्ट और अपराधी लोग भरे पड़े हैं। ऐसे हालात में कवि सोच रहा है कि देश की समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी किसे दी जाए, क्योंकि कोई भी सच्चा और ईमानदार व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा है। यह समाज के नैतिक पतन को दर्शाता है।
(ग) कवि ने यह बताने की कोशिश की है कि जो लोग बड़े और सम्मानित पदों पर बैठे हैं, वे भी भ्रष्ट हो रहे हैं। यानी, सभी पर किसी न किसी तरह का आरोप लग रहा है, जिससे उनकी इज़्ज़त खराब हो रही है। यह स्थिति देश में नैतिकता के पतन को दिखाती है, जहाँ ऊँचे पद वाले लोग भी अपनी ईमानदारी खो रहे हैं।
(घ) 'नाव टूटी' का मतलब है कि लोग हिम्मत हार चुके हैं या हमारे पास समस्याओं को हल करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। एक टूटी हुई नाव से समुद्र पार नहीं किया जा सकता। इसी तरह, अधूरे साधनों या निराश मन से बड़ी समस्याओं को हल करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि इनके बिना कोई समाधान संभव नहीं है।
In simple words: (क) आज देश के सामने बड़ी समस्या यह है कि नेता और मार्गदर्शक भ्रष्ट हो गए हैं। जनता के पास कोई सही रास्ता दिखाने वाला नहीं है। (ख) कवि का मतलब है कि सभी राजनीतिक दल भ्रष्ट लोगों से भरे हैं। ऐसे में देश की समस्याओं को कौन हल करेगा, यह एक बड़ी चिंता है। (ग) कवि ने संकेत किया है कि बड़े और सम्मानित पदों पर बैठे लोग भी भ्रष्ट हो रहे हैं और उन पर आरोप लग रहे हैं। (घ) 'नाव टूटी' का मतलब है निराश लोग या समस्याओं को हल करने के लिए कम साधन। जैसे टूटी नाव से समुद्र पार नहीं होता, वैसे ही इन हालात में समस्याओं का हल नहीं मिल सकता।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक कविता में, हर प्रतीक का अर्थ स्पष्ट रूप से बताएं और यह भी समझाएं कि कवि ने उस प्रतीक का उपयोग किस बड़े विचार या समस्या को दर्शाने के लिए किया है।

 

Question 34.
(क) कवि ने सड़कों, राजमार्गों और हाइवे को क्या कहा है और क्यों?
(ख) सड़कों पर रोज कौन बिलखते हैं?
(ग) “त्वरा का, रफ्तार का मूढ़ उन्माद' से कवि का आशय क्या है?
(घ) कवि ने प्रगति और विकास पर क्या व्यंग्य किया है?
Answer:
(क) कवि ने सड़कों, हाईवे और बड़े रास्तों को 'खूनी', 'कातिल' और 'खून का प्यासा' कहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन रास्तों पर हर दिन गाड़ियों से दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, जिनमें बेकसूर लोग अपनी जान गँवाते हैं। यह सड़कों पर होने वाली मौतों की भयावहता को दिखाता है।
(ख) सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं के कारण पत्नियाँ विधवा हो जाती हैं, माताएँ अपने बच्चे खो देती हैं, और पिता, भाई तथा दोस्त दुखी होते हैं। ये सभी लोग अपने प्रियजनों की मौत पर रोते-बिलखते दिखते हैं, क्योंकि दुर्घटनाएँ उनके जीवन में दुख भर देती हैं। यह सड़कों पर होने वाली मौतों के दुखद परिणामों को दर्शाता है।
(ग) कवि का मतलब है कि सड़कों पर हर दिन भयानक और दिल दहला देने वाली दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, लेकिन फिर भी गाड़ी चलाने वाले लोग बहुत तेज़ी से और लापरवाही से गाड़ियाँ चलाते हैं। वे इन दुर्घटनाओं से कोई सबक नहीं लेते और अपनी आदतें नहीं बदलते। यह मानवीय लापरवाही पर एक कटाक्ष है।
(घ) कवि ने विकास और तरक्की के नाम पर लोगों के हर दिन इतनी बड़ी संख्या में मरने पर तंज कसा है। उसका कहना है कि प्रगति और विकास से तो लोगों को खुश और सुरक्षित महसूस करना चाहिए, न कि असमय मौत का शिकार होना चाहिए। यह बताता है कि हम जिस विकास की बात कर रहे हैं, वह लोगों की जान ले रहा है।
In simple words: (क) कवि ने सड़कों को 'खूनी' और 'कातिल' कहा है क्योंकि इन पर रोज़ दुर्घटनाओं में बेकसूर लोग मारे जाते हैं। (ख) सड़कों पर दुर्घटनाओं के कारण पत्नियाँ, माताएँ, पिता, भाई और दोस्त अपने प्रियजनों की मौत पर रोते-बिलखते दिखते हैं। (ग) कवि का मतलब है कि सड़कों पर रोज़ भयानक दुर्घटनाएँ होती हैं, फिर भी लोग तेज़ी और लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं। (घ) कवि ने विकास के नाम पर लोगों की रोज़ हो रही मौतों पर तंज कसा है। विकास से लोगों को सुरक्षित होना चाहिए, न कि मरना चाहिए।

🎯 Exam Tip: सामाजिक समस्याओं पर आधारित प्रश्नों का उत्तर देते समय, समस्या का कारण, उसके परिणाम और कवि का दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 35.
(क) प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) पर्वत अपने हजारों नेत्रों से क्या देख रहा है?
(ग) पर्वत के चरणों में विशाल तालाब जल से भरा हुआ लहरा रहा है, जो पर्वत मे बहने वाले झरनों से ही बना है।
(घ) भावार्थ-कवि पहाड़ से बहने वाले निर्झरों का वर्णन करते हुए कहता है कि झरने अपने झागों से भरे जल के साथ पहाड़ से नीचे झरते हैं तो ऐसा लगता है मानो वे मोतियों की लड़ियों से बनी सुंदर मालाएँ हों।
Answer:
(क) इस कविता के हिस्से का सबसे सही शीर्षक 'पर्वत प्रदेश में पावस' या 'प्रकृति का सौंदर्य' हो सकता है। यह शीर्षक कविता के मुख्य विषय, यानी वर्षा ऋतु में पहाड़ों की सुंदरता, को दर्शाता है।
(ख) पर्वत अपने हजारों फूलों रूपी नेत्रों से नीचे जल में अपने विशाल आकार को बार-बार देख रहा है। वह अपनी भव्यता और सौंदर्य को देखकर जैसे खुद ही मंत्रमुग्ध हो गया हो। यह दृश्य प्रकृति की आत्म-प्रशंसा को दर्शाता है।
(ग) पर्वत के निचले हिस्से में एक बहुत बड़ा तालाब है जो पानी से भरा हुआ है और लहरें मार रहा है। यह तालाब पहाड़ों से बहने वाले झरनों के पानी से ही बना है। यह प्राकृतिक सुंदरता और जल के चक्र को दर्शाता है।
(घ) कवि पहाड़ों से गिरने वाले झरनों के बारे में बताते हुए कहता है कि जब झरने अपने झाग वाले पानी के साथ पहाड़ से नीचे गिरते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे वे मोतियों की खूबसूरत मालाएँ हों। यह झरनों की सुंदरता और उनकी आवाज़ को एक काव्यात्मक ढंग से दिखाता है।
In simple words: (क) इस कविता का शीर्षक 'पर्वत प्रदेश में पावस' या 'प्रकृति का सौंदर्य' है। (ख) पर्वत अपने हजारों फूलों जैसे आँखों से नीचे पानी में अपने बड़े आकार को बार-बार देख रहा है। (ग) पहाड़ के नीचे एक बड़ा तालाब है, जो झरनों के पानी से भरा है और लहरें मार रहा है। (घ) कवि कहता है कि झरने जब झाग वाले पानी के साथ पहाड़ से नीचे गिरते हैं, तो वे मोतियों की सुंदर मालाओं जैसे लगते हैं।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन करते समय, कल्पनाशील भाषा का प्रयोग करें और मानवीकरण जैसे अलंकारों का उपयोग करते हुए दृश्य को जीवंत बनाएं।

RBSE Class 12 Hindi अपठित पद्यांश

RBSE Solutions for Class 12 Hindi अपठित बोध अपठित पद्यांश, राजस्थान बोर्ड RBSE Class 12 Hindi अपठित बोध अपठित पद्यांश का एक हिस्सा है। यहाँ हमने राजस्थान बोर्ड RBSE Class 12 Hindi अपठित बोध अपठित पद्यांश के लिए समाधान दिए हैं।

अपठित काव्यांश के अंतर्गत काव्य-पंक्तियों का भावार्थ समझकर उत्तर देने होते हैं। इसमें काव्य के भाव-सौन्दर्य पर आधारित प्रश्नोत्तर होते हैं। इस हेतु विद्यार्थियों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • सर्वप्रथम पूरे काव्यांश को शान्ति के साथ ध्यानपूर्वक पढ़िए।
  • यदि उसका भावार्थ समझ में नहीं आ रहा है तो घबरायें नहीं। उसे पुनः पढ़े। इस बार शब्दों पर ध्यान देकर उनका अर्थ समझने का प्रयास करें।
  • आपसे यह आशा नहीं की जाती कि आप पूरी कविता के प्रत्येक शब्द का अर्थ जान लेंगे। इस कारण निराश और व्याकुल होने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब आप काव्यांश के नीचे दिए गए प्रश्नों को पढ़े तथा उनके उत्तर पद्यांश को पढ़कर तलाश करने का प्रयत्न करें।
  • एक-दो बार के प्रयत्न से प्रश्नों के उत्तर मिल जायेंगे। काव्यांश का स्थूल भाव समझ में आने पर प्रश्नों का उत्तर देने में सरलता होगी।
  • प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट शब्दों में लिखें। यदि पद्यांश की किसी पंक्ति में प्रतीक के माध्यम से कोई बात कही गई हो तो उसको स्पष्ट उत्तर कुछ विस्तार से लिखा जा सकता है।
  • अपना आत्मविश्वास बनाए रखें।

जिसका मुकुट हिमालय, वह देश कौन-सा है ?
नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही हैं,
सींचा हुआ सलोना, वह देश कौन-सा है ?
जिसके बड़े रसीले, फल, कन्द, नाज, मेवे,
सब अंग में सजे हैं, वह देश कौन-सा है ?
जिसमे सुगन्ध वाले, सुन्दर प्रसूने प्यारे,
दिन-रात हँस रहे हैं, वह देश कौन-सा है ?
मैदान, गिरि, वनों में हरियालियाँ लहकती,
आनन्दमय जहाँ है, वह देश कौन-सा है ?
जिसकी अनन्त धन से, धरती भरी पड़ी है,
संसार का शिरोमणि, वह देश कौन-सा है?

 

Question 1. (क) भारत का मुकुट किसे कहा गया है ?
(ख) कवि ने भारतवर्ष की कौन-सी विशेषताएँ बतायी हैं ?
(ग) “सींचा हुआ सलोना' से क्या तात्पर्य है ?
(घ) भारत देश को संसार का शिरोमणि क्यों कहा गया है ?
Answer:
(क) भारत का मुकुट हिमालय को कहा गया है। हिमालय पर्वत भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है और इसे देश का गौरव माना जाता है।
(ख) कवि ने बताया है कि भारतवर्ष प्रकृति की गोद में बसा हुआ सुख-स्वर्ग है। इसके चरणों को सागर धोता है, मुकुट हिमालय है, नदियाँ अमृत-रस से इसे सींच रही हैं। आनंद की सृष्टि करने वाली यह धरा है, जो संसार का शिरोमणि है।
(ग) “सींचा हुआ सलोना' से यहाँ आशय है कि नदियों की अमृत धारा से यहाँ की प्राकृतिक मोहक छटा सिंचित है। इससे भारत-भूमि हरी-भरी है। यह भारत की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाता है।
(घ) भारत देश के पास प्राकृतिक सौंदर्य और अपूर्व खनिज-संपदा पड़ी है, अतः यह संसार का शिरोमणि है। यहाँ की प्राकृतिक संपदा इसे अद्वितीय बनाती है।
In simple words: (क) हिमालय भारत का मुकुट है। (ख) भारत प्रकृति का स्वर्ग है, सागर पैरों को धोता है, हिमालय मुकुट है, नदियाँ अमृत देती हैं। (ग) इसका मतलब है कि नदियाँ भारत को सुंदर बनाती हैं। (घ) भारत अपने प्राकृतिक सौंदर्य और खनिजों के कारण दुनिया में सबसे अच्छा है।

🎯 Exam Tip: जब किसी देश या स्थान की विशेषताओं का वर्णन किया जाए, तो उसकी प्राकृतिक सुंदरता, संसाधनों और भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करें।

(2) मेरी भूमि तो है पुण्यभूमि वह भारती,
सौ नक्षत्र-लोक करें आके आप आरती।
नित्य नये अंकुर असंख्य वहाँ फूटते,
फूल झड़ते हैं, फल पकते हैं, टूटते।
सुरसरिता ने वहीं पाई हैं सहेलियाँ,
लाखों अठखेलियाँ, करोड़ों रंगरेलियाँ।
नन्दन विलासी सुरवृन्द, बहु वेशों में,
करते विहार हैं हिमाचल प्रदेशों में।
रहता प्रपूर्ण हमारा रंगमंच भी,
रुकता नहीं है लोक नाट्य कभी रंच भी।

 

Question 2. (क) कवि ने पुण्य-भूमि किसे और क्यों कहा है ?
(ख) हिमाचल प्रदेश की क्या विशेषता बताई गयी है ?
(ग) “दुःख जो न हो, तो फिर सुख में सत्त्व क्या ?”-इस कथन का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
(घ) पृथ्वीवासियों को नित्य नये' क्यों कहा गया है ?
Answer:
(क) कवि ने भारत भूमि को पुण्य-भूमि कहा है क्योंकि वहाँ आकर सैकड़ों नक्षत्र लोक उसकी आरती उतारते हैं। वहाँ नित्य नवजीवन के अंकुर फूटते हैं। भारत एक पवित्र भूमि है जहाँ हमेशा कुछ नया होता रहता है।
(ख) नन्दन वन में विहार करने वाले देवता अनेक वेशों में आकर हिमालय प्रदेश में विहार करते हैं। हिमाचल प्रदेश देवताओं की क्रीड़ास्थली है।
(ग) सुख का आनन्द दुःख सहने के पश्चात् ही पता चलता है। यदि जीवन में सुख ही सुख हो और दुःख हो ही नहीं तो सुख का महत्त्व ही कुछ नहीं रह जाता। विधाता ने संसार को सुख-दुःखमय बनाया है। जीवन में सुख और दुःख दोनों का अनुभव करना महत्वपूर्ण है।
(घ) परिवर्तन सृष्टि का नियम है। धरती पर हर समय परिवर्तन होते रहते हैं। पुराना जाता है उसको स्थान नया ले लेता है। अतः यह संसार नित्य नया बना रहता है। इस कारण पृथ्वीवासियों को नित्य नये कहा गया है। यह जीवन की निरंतरता को दर्शाता है।
In simple words: (क) भारत को पुण्य-भूमि कहा गया है क्योंकि यहाँ नए जीवन के अंकुर फूटते हैं। (ख) देवता हिमाचल में कई रूपों में घूमते हैं। (ग) सुख का असली मूल्य तभी पता चलता है जब दुःख हो। (घ) संसार हमेशा बदलता रहता है, इसलिए पृथ्वी के लोग भी हमेशा नए होते हैं।

🎯 Exam Tip: काव्यांश के प्रश्नों का उत्तर देते समय, कवि के विचारों और शब्दों का सही अर्थ समझें और अपनी भाषा में स्पष्ट करें।

(3) यह अवसर है, स्वर्णिम सुयुग है, खो न इसे नादानी में,
रंगरेलियों में, छेड़छाड़ में, मस्ती में, मनमानी में।
तरुण, विश्व की बागडोर ले तू अपने कठोर कर में,
स्थापित कर रे मानवती बर्बर नृशंस के उर में।
दंभी को कर ध्वस्त धरा पर अस्त-त्रस्त पाखंडों को,
करुणा शान्ति स्नेह सुख भर दे बाहर में, अपने घर में।
यौवन की ज्वाला वाले दे अभयदान पद दलितों को,
तेरे चरण शरण में आहत जग आश्वासन-श्वास गहे॥

 

Question 3. (क) “यह अवसर है, स्वर्णिम सुयुग है' कवि ने किस अवसर को स्वर्णिम सुयुग कहा है ?
(ख) विश्व की बागडोर किसके हाथों में शोभा पाती है ? क्यों ?
(ग) “बाहर में, अपने घर में क्या भरने के लिए कहा गया है ?
(घ) “दे अभयदान पद दलितों को” पंक्ति को आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) कवि ने तरुणाई (जवानी) को स्वर्णिम सुयुग कहा है। युवावस्था ही वह स्वर्णिम अवसर है, जिसमें वह नया निर्माण कर सकता है। यह समय जीवन में बदलाव लाने का होता है।
(ख) विश्व की बागडोर तरुण (युवक) के हाथ में शोभा पाती है, क्योंकि युवावस्था में दृढ़ता, जोश-उत्साह, शक्ति-सामर्थ्य अपने चरम की क्षमता होती है। युवा शक्ति में ही दुनिया बदलने की ताकत होती है।
(ग) “बाहर में, अपने घर में करुणा, शान्ति और स्नेह रूपी सुख भरने के लिए कहा गया है। यह समाज और परिवार में सकारात्मकता फैलाने का संदेश देता है।
(घ) “दे अभयदान पद दलितों को” पंक्ति का आशय है कि युवाओं को उन लोगों को सहारा और सुरक्षा देनी चाहिए जो समाज में पिछड़े हुए और सताए गए हैं। युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे कमजोरों की रक्षा करें।
In simple words: (क) कवि ने जवानी को सुनहरा समय कहा है, जब नए काम किए जा सकते हैं। (ख) दुनिया की बागडोर युवाओं के हाथ में अच्छी लगती है, क्योंकि उनमें जोश और ताकत होती है। (ग) बाहर और घर में दया, शांति और प्यार भरने को कहा गया है। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि युवाओं को कमजोर लोगों को सुरक्षा और सहारा देना चाहिए।

🎯 Exam Tip: युवाओं की शक्ति और उनके कर्तव्यों पर आधारित प्रश्नों में, उनके उत्साह, क्षमता और सामाजिक भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

(4) शान्ति नहीं तब तक, जब तक सुखभाग न नर का सम हो,
नहीं किसी को बहुत अधिक हो, नहीं किसी को कम हो।
ऐसी शान्ति राज करती है, तन पर नहीं हृदय पर,
नर के ऊँचे विश्वासों पर, श्रद्धा, भक्ति, प्रणय पर,
न्याय शान्ति का प्रथम न्यास है, जब तक न्यास न आता,
जैसा भी हो महल, शान्ति का, सुदृढ़ नहीं रह पाता।
कृत्रिम शान्ति सशंक आप अपने से ही डरती है।
खड्ग छोड़ विश्वास किसी का कभी नहीं करती है।

 

Question 4. (क) “शान्ति नहीं तब तक, जब तक सुख भाग ने नर को सम हो”-इस कथन का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
(ख) शान्ति को प्रथम न्यास किसे कहा गया है और क्यों?
(ग) “कृत्रिम शान्ति सशंक आप अपने से ही डरती है”- ऐसा क्यों कहा गया है?
(घ) 'न्याय' व 'समानता' से स्थापित शान्ति का साम्राज्य किन स्थानों व किन भावनाओं पर स्थापित हो जाता है?
Answer:
(क) इस अंश का आशय है कि जब तक समाज में सभी को समान सुख-सुविधाएँ नहीं मिलेंगी, भेद-भाव होगा, तब तक स्थायी शान्ति स्थापित नहीं हो सकती। सभी लोगों को बराबर अवसर मिलना ज़रूरी है।
(ख) शान्ति का प्रथम न्यास न्याय को बताया गया है। जहाँ सबके साथ न्याय किया जायेगा, पक्षपात नहीं होगा, वहीं शान्ति स्थापित हो सकती है। न्याय शान्ति के लिए पहली शर्त है क्योंकि न्याय से ही लोगों में विश्वास पैदा होता है।
(ग) जहाँ शान्ति स्वाभाविक रूप से, न्याय के आधार पर स्थापित नहीं होगी वह नकली शान्ति होगी। ऐसी शान्ति में मनुष्य कभी निर्भय होकर नहीं रह सकता। ऐसी शान्ति स्थापित करने वाला मन ही मन अशान्ति से भयभीत रहता है। जब शांति जबरदस्ती थोपी जाती है तो वह कभी स्थायी नहीं होती।
(घ) जब न्याय और समानता के आधार पर शान्ति स्थापित होती है तो वह मनुष्य के शरीर पर नहीं बल्कि उसके हृदय पर, उसके विश्वासों पर, श्रद्धा और भक्ति पर तथा प्रेमभाव पर राज्य करती है। वह स्थायी होती है। यह वास्तविक शांति होती है।
In simple words: (क) इसका मतलब है कि जब तक सभी को बराबर सुख नहीं मिलेगा, तब तक सच्ची शांति नहीं आएगी। (ख) न्याय को शांति की पहली नींव कहा गया है, क्योंकि जहाँ न्याय होता है वहीं शांति आती है। (ग) दिखावटी शांति डरी हुई रहती है क्योंकि वह न्याय पर आधारित नहीं होती। (घ) न्याय और समानता से आई शांति दिल, विश्वास, श्रद्धा, भक्ति और प्यार पर राज करती है, शरीर पर नहीं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक न्याय और शांति पर आधारित प्रश्नों में, समानता, विश्वास और वास्तविक समाधानों के महत्व को उजागर करें।

(5)
ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में, मनुज नहीं लाया है।
अपना सुख उसने अपने, भुजबल से ही पाया है।
प्रकृति नहीं डर कर झुकती है, कभी भाग्य के बल से।
सदा हारती वह मनुष्य के उद्यम से, श्रम-जल से।
ब्रह्मा का अभिलेख पढ़ा करते निरुद्यमी प्राणी।
धोते वीर कुअंक भाल का, बहा ध्रुवों से पानी।
भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का।
जिससे रखता दबा एक जन, भाग दूसरे जन का।
वही मनुज के श्रम का शोषण, वही अनय-मय दोहन।
वही मलिन छल नर-समाज से, वही ग्लानिमय अर्जन ।
एक मनुज संचित करता है, अर्थ पाप के बल से।
और भोगता उसे दूसरा, भाग्यवाद के छल से।

 

Question 5. (क) भाग्यवादी किसे कहते हैं?
(ख) भाग्यवादी लोग कभी प्रकृति पर विजय क्यों नहीं पा सकते?
(ग) भाग्य का नाम लेकर लोग दूसरों का शोषण कैसे करते हैं?
(घ) कवि ने ‘अपूर्ब खनिज-संपदा’ किसे कहा है ?
Answer:
(क) भाग्यवादी वे लोग ही होते हैं जो यह मानते हैं कि 'जो भाग्य में लिखा है वही मिलेगा' और इस विचार के कारण परिश्रम से दूर रहते हैं। ऐसे लोग मेहनत करने से बचते हैं।
(ख) भाग्यवादी लोग कभी प्रकृति पर विजय नहीं पा सकते। परिश्रमी लोग ही प्रकृति की विभिन्न बाधाओं पर विजय प्राप्त करके जीवन में सफलता पाते हैं। मेहनत और लगन से ही सफलता मिलती है।
(ग) भाग्य का नाम लेकर लोग दूसरों का शोषण करते हैं। यह पाप है किन्तु अपने इस पाप को लोग भाग्य के पर्दे के पीछे छिपा लेते हैं। चालाक लोग दूसरों के साथ छल करते हैं और उनके हक पर स्वयं अधिकार जमा लेते हैं यह कहकर कि यह उनके भाग्य में है। इस प्रकार छल-कपट करके, भाग्य का नाम लेकर, चतुर लोग दूसरों के अधिकारों पर डाका डालते हैं।
(घ) कवि ने 'अपूर्ब खनिज-संपदा' काव्यांश में सीधे-सीधे किसी को नहीं कहा है, लेकिन यह दर्शाता है कि भारत देश के पास प्राकृतिक सौंदर्य और खनिज-संपदा है। यह प्रकृति की दी हुई अनमोल संपत्ति है।
In simple words: (क) भाग्यवादी वो होते हैं जो सोचते हैं कि जो किस्मत में लिखा है, वही होगा, इसलिए वे मेहनत नहीं करते। (ख) भाग्यवादी लोग प्रकृति को जीत नहीं सकते, केवल मेहनती लोग ही जीतते हैं। (ग) कुछ चालाक लोग अपनी गलत हरकतों को भाग्य का बहाना बनाकर दूसरों का हक छीनते हैं। (घ) कवि ने सीधे तौर पर 'अपूर्ब खनिज-संपदा' किसी को नहीं कहा है, बल्कि भारत के प्राकृतिक सौंदर्य और खनिज संपदा की बात की है।

🎯 Exam Tip: भाग्य और कर्म पर आधारित प्रश्नों में, कर्म के महत्व, परिश्रम के लाभ और शोषण के तरीकों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

(6) मैंने झुक नीचे को देखा तो झलकी आशा की रेखा –
विप्रवर स्नान कर चढ़ा सलिल शिव पर दूर्वादल, तंदुल, तिल,
लेकर झोली आए ऊपर देखकर चले तत्पर वानर
द्विज रामभक्त, भक्ति की आश भजते शिव को बारहों मास।
कर रामायण का पारायण जपते हैं श्रीमन्नारायण।
दुःख पाते जब होते अनाथ, कहते कपियों के जोड़ हाथ।
मेरे पड़ोस के वे सज्जन, करते प्रतिदिन सरिता मज्जन।
झोली से पुए निकाल लिए बढ़ते कपियों के हाथ दिये।
देखा भी नहीं उधर फिर कर जिस ओर रही वह भिक्षु।
चिल्लाया किया दूर दानव, बोला – धन्य, श्रेष्ठ मानव।

 

Question 6. (क) कवि ने नीचे क्या देखा? उसे उस दृश्य में क्या बात आशाजनक लगी ?
(ख) कवि ने विप्रवर की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है ?
(ग) कवि की आशा निराशा में कैसे बदल गई ?
(घ) कवि के कथन 'धन्य, श्रेष्ठ मानव' में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) कवि ने पुल से नीचे देखा तो उसे एक ब्राह्मण सज्जन नदी में स्नान करके शिवजी की पूजा-अर्चना करने के पश्चात् ऊपर आते दिखाई दिए। यह देखकर कवि के मन में आशा उत्पन्न हुई कि वह पुल पर बैठे दीन-दुर्बल भिक्षुक को खाने के लिए कुछ देंगे। यह एक सामान्य मानवीय उम्मीद थी।
(ख) विप्रवर राम और शिव के भक्त हैं। वह प्रतिदिन नदी में स्नान करके रामायण पढ़ते हैं तथा शिवजी के ऊपर दूब-घास, चावल, तिल और जल चढ़ाते हैं। फिर वह बन्दरों को कुछ खाने के लिए देते हैं। उनकी भक्ति और दानशीलता विशेष है।
(ग) कवि को आशा थी कि वह विप्र पुल के ऊपर आकर वहाँ बैठे हुए भिक्षुक को अपनी झोली से निकालकर पुए खाने के लिए देगा परन्तु उन्होंने भिक्षुक की ओर देखा ही नहीं और झोली से निकालकर पुए वहाँ बैठे बन्दरों को दे दिए। इस अनदेखी से कवि की आशा निराशा में बदल गई।
(घ) कवि ने देखा कि विप्र ने पुए बन्दरों को दे दिए और वहाँ बैठे भूखे, दीन-दुर्बल भिक्षुक की ओर देखा भी नहीं। यह देखकर कवि ने व्यंग्यपूर्वक कहा-'धन्य हो, हे श्रेष्ठ मनुष्य!' कवि के इस कथन में धर्म की उस आस्था पर करारा व्यंग्य है जो मनुष्य की अपेक्षा पशुओं के प्रति अधिक दयालु है। यह मानवीय पाखंड को उजागर करता है।
In simple words: (क) कवि ने एक ब्राह्मण को नदी में नहाकर पूजा करते देखा। उसे लगा वह गरीब भिक्षुक को खाना देगा। (ख) ब्राह्मण राम और शिव के भक्त हैं, रोज नहाते हैं, रामायण पढ़ते हैं, और शिव को चढ़ावा देते हैं। (ग) कवि को लगा कि ब्राह्मण भिक्षुक को खाना देगा, पर उसने बंदरों को दे दिया, जिससे कवि निराश हो गया। (घ) कवि का "धन्य, श्रेष्ठ मानव" कहना एक ताना है। इसका मतलब है कि लोग इंसानों से ज्यादा जानवरों पर दया दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: व्यंग्यात्मक प्रश्नों में, कवि के कटाक्ष को पहचानें और उसके पीछे के सामाजिक या मानवीय विरोधाभास को स्पष्ट करें।

(7) मेरा देश जल रहा, कोई नहीं बुझाने वाला।
जाति धर्म गृहहीन युगों का नंगा-भूखा-प्यासा आज सर्वहारा तू ही है।
एक हमारी आशा ये छल-छंद शोषकों के हैं।
कुत्सित, ओछे, गंदे तेरा खून चूसने को ही ये दंगों के फंदे।
तेरा एका, गुमराहों को राह दिखाने वाला।
मेरा देश जल रहा, कोई नहीं बुझाने वाला।

 

Question 7. (क) भारतमाता ने अपनी सन्तानों को कुलकलंक क्यों कहा है ?
(ख) भारतमाता की व्यथा को अपने शब्दों में संक्षेप में लिखिए।
(ग) साम्प्रदायिक दंगे कौन कराता है तथा क्यों कराता है ?
(घ) भारत को इन दंगों से मुक्ति कैसे मिल सकती है ?
Answer:
(क) भारतमाता ने अपनी सन्तानों अर्थात् भारतीयों को कुलकलंक कहा है क्योंकि वे आपस में धर्म और जाति के नाम पर लड़ते-झगड़ते हैं। यह आपसी फूट देश को कमजोर करती है।
(ख) भारतमाता देशवासियों के आपस में लड़ने-झगड़ने से दुःखी है। यदि उसे यह पता होता कि उसकी सन्तानें बड़ी होकर आपस में लड़ेंगी तो वह उनका जन्म लेते ही वध कर देती। लोग उसे निपूती कहते परन्तु उसको यह पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती। उसको बन्ध इनों में नहीं बँधना पड़ता। दंगों की आग में जलने से भारतमाता बहुत दुःखी है। यह उसकी गहरी वेदना है।
(ग) सर्वहारा वर्ग का शोषण करने वाले ही साम्प्रदायिक दंगे करवाते हैं। इन दंगों के माध्यम से वे गरीबों तथा सर्वहाराजनों का खून चूसना चाहते हैं। वे अपनी स्वार्थी पूर्ति के लिए लोगों को लड़ाते हैं।
(घ) कवि को आशा है कि जाति, धर्म, गृहहीन सर्वहारावर्ग ही अपनी एकता के द्वारा शोषकों के इस षड्यन्त्र का अन्त कर सकता है। भारत की सामान्य गरीब जनता धर्म और जाति की कट्टरता के विरुद्ध है, वह चाहे तो दंगा कराने वालों की योजनाओं को विफल कर सकती है। एकता में ही शक्ति है।
In simple words: (क) भारतमाता ने अपने बच्चों को कुलकलंक कहा है, क्योंकि वे धर्म और जाति के नाम पर लड़ते हैं। (ख) भारतमाता दुखी है क्योंकि उसके बच्चे आपस में लड़ते हैं, अगर उसे पता होता तो वह उन्हें पैदा ही नहीं करती। (ग) गरीब लोगों का शोषण करने वाले ही दंगे करवाते हैं, ताकि वे गरीबों का खून चूस सकें। (घ) भारत को दंगों से मुक्ति तब मिल सकती है जब गरीब और लाचार लोग एक होकर शोषण करने वालों के खिलाफ खड़े हों।

🎯 Exam Tip: सामाजिक समस्याओं और देशप्रेम से जुड़े प्रश्नों में, कवि के संदेश को स्पष्ट करें, जिसमें एकता, शांति और शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने का महत्व हो।

(8)
तू देखेगी जलद-तन को जा वहीं तद्गता हो,
होंगे लोने नयन उनके, ज्योति-उत्कीर्णकारी,
मुद्रा होगी वर-वदन की मूर्ति सी सौम्यता की.
सीधे-साधे वचन उनके सिक्त होंगे सुधा से।
नीले फूले कमल दल-सी गात की श्यामता है,
पीला प्यारा वरुन कटि में पैन्हते हैं फबीला,
छूटी काली अलक मुख की कान्ति को बढ़ाती,
सद्धस्त्रों में नवल तन की फूटती-सी प्रभा है।
साँचे ढाला सकल वपु है दिव्य सौन्दर्यशाली,
सत्पुष्पों-सी सुरभि उसकी प्राण-संपोषिका है।
दोनों कंधे वृषभ-वरसे हैं बड़े ही सजीले,
लम्बी बाँहें कलभ-कर-सी शक्ति की पेटिका हैं ॥

 

Question 8. (क) राधा वायु के माध्यम से अपना संदेश श्रीकृष्ण को क्यों पहुँचाना चाहती है?
(ख) श्रीकृष्ण की मुख-मुद्रा का वर्णन करते हुए राधा वायु से क्या कहती है?
(ग) श्रीकृष्ण की वाणी की विशेषता क्या बताई गयी है?
(घ) श्रीकृष्ण के दोनों कंधों और बाँहों का वर्णन कीजिए।
Answer:
(क) राधा वायु के माध्यम से अपना संदेश श्रीकृष्ण को इसलिए पहुँचाना चाहती है, क्योंकि वह श्रीकृष्ण से दूर है और उनसे मिल नहीं पा रही है। वायु एक तेज़ माध्यम है।
(ख) श्रीकृष्ण की मुख-मुद्रा का वर्णन करते हुए राधा वायु से कहती है कि उनका मुख मूर्ति के समान सौम्य है, उनके नेत्रों से प्रकाश की किरणें निकलती हैं, लटकी हुई काली लटें मुख की शोभा को बढ़ाती हैं तथा वह अमृत के समान मधुर और सरल वचन बोलते हैं। उनका चेहरा बहुत आकर्षक है।
(ग) राधा कहती है कि श्रीकृष्ण की वाणी सरल और अमृत जैसी मधुर है। वह खिले हुए नीलकमल जैसे शरीर पर पीला वस्त्र धारण किया करते हैं। उनकी बातें मन को शांति देती हैं।
(घ) श्रीकृष्ण के दोनों कंधे किसी मजबूत बैल के समान अत्यन्त पुष्ट तथा ऊँचे उठे हुए हैं। उनकी दोनों बाँहें हाथी के बच्चे की सूँड के समान हैं तथा अत्यन्त शक्तिशाली हैं। यह उनकी शारीरिक क्षमता को दर्शाता है।
In simple words: (क) राधा हवा से श्रीकृष्ण को संदेश भेजती है क्योंकि वह उनसे दूर है। (ख) राधा कहती है कि श्रीकृष्ण का चेहरा सुंदर और शांत है, उनकी आँखों से चमक निकलती है, और उनके बाल चेहरे को सजाते हैं। उनके शब्द मीठे अमृत जैसे हैं। (ग) श्रीकृष्ण की वाणी बहुत सीधी और मीठी है, जो अमृत जैसी लगती है। वह पीले कपड़े पहनते हैं। (घ) श्रीकृष्ण के कंधे मजबूत बैल जैसे हैं और उनकी बाँहें हाथी की सूँड जैसी शक्तिशाली हैं।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के वर्णन पर आधारित प्रश्नों में, शारीरिक विशेषताओं के साथ-साथ उनके गुणों और प्रभाव को भी जोड़कर उत्तर दें।

(9)
ओ बदनसीब अन्धो ! कमजोर अभागो,
अब तो खोलो नयन नींद से जागो।
वह अघी ? बाहुबल का जो अपलापी है,
जिसकी ज्वाला बुझ गई, वही पापी है।
जब तक प्रसन्न यह अनल, सुगुण हँसते हैं,
है जहाँ खड्ग, सब पुण्य वहीं बसते हैं।
वीरता जहाँ पर नहीं, पुण्य का क्षय है,
वीरता जहाँ पर नहीं, स्वार्थ की जय है।
तलवार पुण्य की सखी, धर्मपालक है,
लालच पर अंकुश कठिन, लोभ सालक है।
असि छोड़, भीरु बन जहाँ धर्म सोता है,
पाप प्रचुरमात्र वहाँ प्रकट होता है।

 

Question 9. (क) भारतवासियों के प्रति कवि के आक्रोश को क्या कारण है?
(ख) पुण्य का क्षय तथा स्वार्थ का उदय कब होता है?
(ग) कवि ने तलवार को पुण्य की सखी और धर्मपालक क्यों कहा है?
(घ) “असि छोड़.........सोता है' का आशय क्या है?
Answer:
(क) भारतवासी लालच में फंसकर अपने पराक्रम तथा वीरता को भुला चुके हैं, फलस्वरूप शोषण और दुर्भाग्य उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। कवि के मन में इसी कारण उनके प्रति आक्रोश है। वह देशवासियों को अज्ञान की इस नींद से जगाना चाहता है। वह चाहते हैं कि लोग अपनी शक्ति पहचानें।
(ख) जब किसी देश के लोग अपनी वीरता तथा पराक्रम का त्याग कर देते हैं तो वहाँ पुण्य नष्ट हो जाते हैं तथा स्वार्थ प्रबल हो उठता है। यह समाज में नैतिक मूल्यों की कमी को दर्शाता है।
(ग) तलवार वीरता की सूचक है। जब मन में वीरता का भाव नहीं रहता, पापियों और दुष्टों को दण्ड का भय नहीं रहता, तभी समाज में पाप प्रकट होते हैं और धर्म नष्ट हो जाता है। तलवार ही पुण्यों की तथा धर्म की संरक्षिका है। कवि ने इसी कारण तलवार को पुण्य की सखी और धर्मपालक कहा है। तलवार न्याय का प्रतीक भी है।
(घ) जागरूक वीर पुरुष ही धर्म की रक्षा करते हैं। वे तलवार हाथ में उठाकर दुष्टों-अधर्मियों का दमन करते हैं। जब वे अपना कर्तव्य भुलाकर तलवार का परित्याग कर देते हैं तथा कायर बन जाते हैं, तो वहाँ पाप की भयानक आग फूट पड़ती है। यह निष्क्रियता के परिणामों को दर्शाता है।
In simple words: (क) कवि भारतवासियों से नाराज है क्योंकि वे लालच में पड़कर अपनी ताकत और बहादुरी भूल गए हैं, जिससे उनका शोषण हो रहा है। (ख) जब लोग अपनी वीरता छोड़ देते हैं, तो पुण्य खत्म हो जाता है और स्वार्थ बढ़ जाता है। (ग) कवि ने तलवार को पुण्य की दोस्त और धर्म का रक्षक कहा है, क्योंकि यह बुराई को रोकने और न्याय स्थापित करने में मदद करती है। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि जब वीर लोग अपनी तलवार छोड़ कर डरपोक बन जाते हैं, तो बुराई बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: वीरता, धर्म और सामाजिक बुराइयों पर आधारित प्रश्नों में, कवि के नैतिक संदेश को उजागर करें और सामाजिक पतन के कारणों पर प्रकाश डालें।

(10)
लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा।
इन अनगिनत अचीन्ही आवाजों में
कैसा दर्द है !
कोई नहीं सुनता
पर इन आवाजों को
और इन कराहों को
दुनिया सुने, मैं यह चाहूँगा।
जहाँ भी मिलेगी
उन्हें प्यार के सितार पर बजाऊँगा।
चाहे इस प्रार्थना सभा में
तुम सब मुझ पर गोलियाँ चलाओ।
मैं मर जाऊँगा।
लेकिन मैं कल फिर जन्म लूँगा
कल फिर आऊँगा।

 

Question 10. (क) कौन पुनः जन्म लेकर क्या करना चाहता है ?
(ख) वह दुनिया को क्या सुनाना चाहते हैं ?
(ग) कातरता, चुप्पी या चीखों को सितार पर बजाने का आशय क्या है ?
(घ) 'प्रार्थना सभा में तुम मुझ पर गोलियाँ चलाओ'-में कवि का संकेत किस ओर है ?
Answer:
(क) महात्मा गाँधी पुनः जन्म लेकर भारत में अभावग्रस्त लोगों के बीच जाना तथा उनको सान्त्वना देना चाहते हैं। उनका उद्देश्य समाज सेवा है।
(ख) गाँधीजी चाहते हैं कि वह भारत के गरीब लोगों के दुःख-दर्द को जाने तथा सारी दुनिया के सामने उसको रखें। वह चाहते हैं कि पीड़ितों की यह कराह और दर्द जिसे कोई नहीं सुनता, उसे दुनिया सुने और जाने। वे उनकी आवाज़ बनना चाहते हैं।
(ग) गाँधीजी चाहते हैं कि संसार में जहाँ भी कातरता, चुप्पी और दुःखभरी चीखें हैं तथा पराजित लोगों के मन में भरी हुई निराशा की खीझ है, उसमें वह प्यार का मधुर राग छेड़े। वह प्यार के संगीत से लोगों की पीड़ा और निराशा को दूर करना चाहते हैं। तात्पर्य यह है कि लोगों के दुःख-दर्द और निराशा को वह प्यार भरे व्यवहार से दूर करना चाहते हैं। वे लोगों में उम्मीद जगाना चाहते हैं।
(घ) 'प्रार्थना सभा में तुम मुझ पर गोलियाँ चलाओ'-में कवि का संकेत प्रार्थना-सभा में महात्मा गाँधी के ऊपर चलाई गई गोलियों से है। कवि बताना चाहता है कि गाँधीजी के उपदेश तथा शिक्षा अमर है। उनका प्रेम का संदेश अमिट है। वह मर नहीं सकता। उनके आदर्श हमेशा जीवित रहेंगे।
In simple words: (क) महात्मा गाँधी फिर से जन्म लेकर गरीब लोगों की मदद करना चाहते हैं। (ख) वे चाहते हैं कि दुनिया गरीब और दुखी लोगों का दर्द सुने। (ग) दुखी आवाज़ों को सितार पर बजाने का मतलब है कि वे प्यार से लोगों के दुख और निराशा को दूर करना चाहते हैं। (घ) यह पंक्ति महात्मा गाँधी पर चलाई गई गोलियों की ओर इशारा करती है, जिसका मतलब है कि उनके विचार हमेशा ज़िंदा रहेंगे।

🎯 Exam Tip: गांधीवादी विचारों से संबंधित प्रश्नों में, उनके सिद्धांतों (जैसे अहिंसा, सेवा, सत्य) और उनके स्थायी प्रभाव को स्पष्ट करें।

(11) निम्नांकित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
अर्जुन देखो, किस तरह कर्ण, सारी सेना पर टूट रहा,
किस तरह पाण्डवों का पौरुष होकर अशंक वह लूट रहा।
देखो, जिस तरफ, उधर उसके ही बाण दिखायी पड़ते हैं,
बस, जिधर सुनो, केवल उसकी हुँकार सुनायी पड़ते हैं।
कैसी करालता ! क्या लाघव! कैसा पौरुष! कैसा प्रहार।
किस गौरव से यह वीर द्विरद कर रही समर-वन में विहार।
व्यूहों पर व्यूह फटे जाते, संग्राम उजड़ता जाता है,
ऐसी तो नहीं कमलवन में भी कुजर धूम मचाता है।
इस परुष-सिंह का समर देख मेरे तो दृग् निद्रालु नयन,
कुंभकर्ण सदृश सुप्त-वचन।

 

Question 11. (क) श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कर्ण की किस बात के लिए प्रशंसा की है?
(ख) कर्ण को कवि ने 'समर-वन' तथा 'कमल-वन' में किसके समान बताया है?
(ग) श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कौन-सा गूढ़ वचन बताया?
(घ) कर्ण के युद्ध कौशल को देखकर कृष्ण उसके बारे में क्या सोच रहे थे?
Answer:
(क) श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कर्ण की युद्धभूमि में प्रदर्शित वीरता के लिए प्रशंसा की है कि वह किस तरह पाण्डवों की सेना पर टूट पड़ा था और उनके सारे पुरुषार्थ को चुनौती दे रहा था। यह उसकी अद्वितीय बहादुरी को दर्शाता है।
(ख) कर्ण को 'युद्ध रूपी वन' में विहार करते 'हाथी' तथा 'कमल-वन' में धूम मचाते 'कुंजर' के समान बताया गया है। यह उसकी शक्ति और प्रभाव का प्रतीक है।
(ग) श्रीकृष्ण ने अर्जुन से यह गूढ़ वचन बताया कि वह अर्जुन तथा कर्ण दोनों की वीरता को जानते हैं। वह दोनों के बल से परिचित हैं परन्तु मन ही मन वह कर्ण को अर्जुन से भी बड़ा वीर मानते रहे हैं। यह उनकी युद्ध क्षमता का गहरा मूल्यांकन था।
(घ) कृष्ण सोच रहे थे कि संसार में क्या कोई और ऐसा वीर है जो कर्ण की बराबरी कर सके? उसे युद्ध में पराजित कर सके? वे उसकी तुलना किसी और से नहीं कर पा रहे थे।
In simple words: (क) श्रीकृष्ण ने कर्ण की वीरता की प्रशंसा की क्योंकि वह अकेले पांडव सेना पर भारी पड़ रहा था। (ख) कर्ण को 'युद्ध के जंगल' में 'हाथी' और 'कमल के जंगल' में 'हाथी' के समान बताया गया है। (ग) श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि वह कर्ण को अर्जुन से भी ज़्यादा वीर मानते थे। (घ) कृष्ण सोच रहे थे कि कर्ण जैसा वीर दुनिया में कोई दूसरा नहीं है, जो उसे हरा सके।

🎯 Exam Tip: युद्ध कौशल और वीरता पर आधारित प्रश्नों में, पात्रों के गुणों और युद्ध में उनकी भूमिका को स्पष्ट करें, साथ ही उनके बीच के तुलनात्मक भावों को भी उजागर करें।

(12)
आज की दुनियाँ विचित्र नवीन,
प्रकृति पर सर्वत्र है विजयी पुरुष आसीन ।
हैं बँधे नर के करों में वारि, विद्युत, भाप,
हुक्म पर चढ़ता उतरता है पवन का ताप।
है नहीं बाकी कहीं व्यवधान,
लाँघ सकता नर सरित्, गिरि, सिन्धु एक समान।
शीश पर आदेश कर अवधार्य
प्रकृति के सब तत्व करते हैं मनुज के कार्य,
मानते हैं हुक्म मानव का महा वरुणेश,
और करता शब्दगुण अम्बर वहन सन्देश।
नव्य नर की मुष्टि में विकराल,
हैं सिमटते जा रहे दिक्काल।
यह प्रगति निस्सीम ! नर का यह अपूर्व विकास ।
चरण तल भूगोल ! मुट्ठी में निखिल आकाश।
किन्तु है बढ़ता गया मस्तिष्क ही निःशेष,
छूटकर पीछे गया है रह हृदय का देश;

 

Question 12. (क) आज की दुनिया को विचित्र और नवीन कहने का क्या कारण है?
(ख) किसका आदेश कौन अपने सिर पर धारण करता है?
(ग) मनुष्य की निस्सीम प्रगति के बारे में कवि ने क्या कहा है?
(घ) “छूटकर पीछे गया है रह हृदय का देश' -का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) आज की दुनिया को विचित्र और नवीन कहने का कारण यह है कि आज विज्ञान के आविष्कारों के बल पर मनुष्य ने प्रकृति के ऊपर विजय प्राप्त कर ली है। उसने अकल्पनीय चीजें हासिल की हैं।
(ख) प्रकृति के सभी तत्त्व मनुष्य का आदेश पाकर उसे अपने सिर पर धारण करते हैं। आशय यह है कि आज मनुष्य का आदेश पाकर प्रकृति उसके अनुसार काम करती है। मनुष्य ने प्रकृति पर नियंत्रण कर लिया है।
(ग) मनुष्य ने विज्ञान और अपनी बुद्धि के बल पर असीमित प्रगति की है। समस्त धरती को उसने अपने पैरों से रौंद डाला है और विशाल आकाश के समस्त रहस्यों को जान चुका है। यह उसकी असीमित बौद्धिक विकास को दर्शाता है।
(घ) “छूटकर पीछे गया है रह हृदय का देश' का आशय यह है कि मनुष्य ने बौद्धिक और वैज्ञानिक प्रगति तो बहुत कर ली है, लेकिन उसके हृदय में भावनाएँ और मानवीयता पिछड़ गई है। वह भावनात्मक रूप से अधूरा रह गया है।
In simple words: (क) आज की दुनिया को अजीब और नया कहा गया है क्योंकि इंसान ने विज्ञान की मदद से प्रकृति को जीत लिया है। (ख) प्रकृति के सभी तत्व इंसान का हुक्म मानते हैं। (ग) कवि ने कहा है कि इंसान ने विज्ञान से बहुत तरक्की कर ली है, धरती और आकाश के सारे रहस्य जान लिए हैं। (घ) इसका मतलब है कि इंसान ने दिमाग से तो बहुत विकास कर लिया, पर दिल और भावनाओं को पीछे छोड़ दिया है।

🎯 Exam Tip: विज्ञान, प्रगति और मानवीयता पर आधारित प्रश्नों में, आधुनिक विकास के साथ नैतिक और भावनात्मक मूल्यों के संतुलन पर ध्यान दें।

(13)
मन छुटपन में छिपकर पस बाएं थ
सोचा था, पैसों के प्यारे पेड़ उगेंगे
रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी
और फूल-फूलकर मैं मोटा सेठ बनूँगा !
पर बंजर धरती में एक न अंकुर फूटा
बंध्या मिट्टी ने न एक भी पैसा उगला !
यह धरती कितना देती है! धरती माता
कितना देती है अपने प्यारे पुत्रों को !
नहीं समझ पाया था मैं उसके महत्त्व को !
बचपन म, छिः, स्वार्थ लाभवश पैसे बाकर !
रत्न प्रसविनी है वसुधा, अब समझ सका हूँ।
इसमें सच्ची समता के दाने बोने हैं
इसमें जन की क्षमता के दाने बोने हैं
इसमें मानव ममता के दाने बोने हैं
जिससे उगल सकें फिर धूल सुनहली फसलें
मानवता की, जीवन श्रम से हँसें दिशाएँ
हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे।

 

Question 13. (क) कवि ने बचपन में क्या किया था? उसका क्या परिणाम हुआ ?
(ख) कवि धरती के किस महत्त्व को नहीं समझ पाया था?
(ग) कवि ने स्वार्थवश क्या भूल की थी?
(घ) “हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे' -का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) कवि ने बचपन में धरती में कुछ पैसे बोये थे। वह सोचता था कि इससे जो पेड़ उत्पन्न होगा उस पर पैसों के फल लगेंगे और वह मोटा सेठ बन जायेगा। परन्तु उसका प्रयास व्यर्थ गया। कोई अंकुर नहीं निकला। यह उसकी बचपन की नासमझी थी।
(ख) कवि ने अब समझा है कि सही बीज बोने पर धरती उसको फल देने में कोई कमी नहीं रखती। धरती हमें हमेशा कुछ न कुछ देती है, बशर्ते हम सही काम करें।
(ग) कवि ने धनवान बनने के लिए पैसों के बीज बोए थे। वह बिना परिश्रम किए मोटा सेठ बन जाना चाहता था। यह उसकी भूल थी। उसने धरती के असली महत्व को नहीं समझा था।
(घ) कवि कहता है कि दोष धरती का नहीं है। हम ही ठीक बीज नहीं बोते । हम जैसा बीज धरती में डालते हैं, हमें उसका फल वैसा ही प्राप्त होता है। पैसा बोने पर बीज नहीं उगता। हमें समता, क्षमता और ममता के बीज बोने चाहिए ताकि मानवता की फसलें उगें। यह कर्म के सिद्धांत को दर्शाता है।
In simple words: (क) कवि ने बचपन में धरती में पैसे बोए, सोचकर कि पैसों के पेड़ उगेंगे, पर कुछ नहीं उगा। (ख) कवि धरती का महत्व नहीं समझ पाया था कि वह तभी फल देती है जब सही बीज बोए जाएँ। (ग) कवि ने पैसे बोकर धनवान बनने की गलती की थी, बिना मेहनत किए। (घ) इसका मतलब है कि जैसा हम करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा। अगर हम प्यार और समानता बोएंगे, तो इंसानियत की फसल मिलेगी।

🎯 Exam Tip: नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्यों पर आधारित प्रश्नों में, कर्म के महत्व, स्वार्थ के परिणाम और सही चुनाव के प्रभाव को स्पष्ट करें।

(14) टुक हिर्स हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा।
कज्जाव अजल को लूटे है दिन रात बजाकर नक्कारा।
क्या बधिया भैंसा बैल शुतर क्या गोनी पल्ला सर मारा।
क्या गेहूं चावल माठ मटर क्या आग धुंआ औ अंगारा।
सब ठाठ पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा।
गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरा भारी है।
ऐ गाफिल तुझसे भी चढ़ता येह और बड़ा व्यापारी है।
क्या शक्कर मिसरी कंद गरी क्या साँभर मीठा खारी है।
क्या दाख मुनक्का सोंठ मिरिच क्या कसर लोंग सुपारी है।
सब ठाठ पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा।
जब चलते-चलते रस्ते में यह न तेरी ढल जाएगी।
एक बधिया तेरी मिट्टी पर फिर घास न चरने पाएगी।

 

Question 14. (क) कवि ने मनुष्य के जीवन के ध्रुव-सत्य की ओर इन शब्दों में क्या इशारा किया है?
(ख) बड़ा व्यापारी किसको बताया गया है तथा 'गाफिल' किसको कहा गया है?
(ग) कवि के अनुसार जीवन के अन्तिम समय में कौन-कौन साथ नहीं देते?
(घ) 'ठाठ' और 'बंजारा' शब्द किसके प्रतीक हैं?
Answer:
(क) कवि ने मनुष्य के जीवन के ध्रुव-सत्य मृत्यु की ओर इन शब्दों में इशारा किया है। जब मृत्यु आती है तो मनुष्य का जीवन भर का संचित सब कुछ यहीं छूट जाता है। यह जीवन की नश्वरता को दर्शाता है।
(ख) बड़ा व्यापारी ईश्वर को बताया गया है तथा अपने निश्चित अन्त मृत्यु को भुलाकर दुनियादारी में फंसे इन्सानों को गाफिल कहा गया है। ईश्वर ही सबसे बड़ा व्यापारी है, जो सभी का हिसाब रखता है।
(ग) कवि के अनुसार जब मृत्यु आती है तो कोई साथ नहीं देता। बेटा-बेटी, जवाँई यहाँ तक कि पत्नी भी उस समय साथ नहीं दे पाती। सभी रिश्ते-नाते यहीं छूट जाते हैं।
(घ) 'ठाठ' शब्द संसार का सूचक है। जब मनुष्य दुनिया छोड़कर जाता है तो यह संसार तथा इससे सम्बन्धित चीजें यहीं पर ही छूट जाती हैं। 'बंजारा' एक घुमंतू जाति है। बंजारे जगह-जगह भटकते हैं। यहाँ यह शब्द मनुष्य का प्रतीक है। मनुष्य भी इस संसार में बंजारे के समान कुछ समय ही रहता है। यह जीवन की अस्थिरता को बताता है।
In simple words: (क) कवि ने बताया है कि मौत आने पर इंसान का सब कुछ यहीं छूट जाता है। (ख) ईश्वर को बड़ा व्यापारी और दुनियादारी में फंसे इंसान को गाफिल (लापरवाह) कहा गया है। (ग) कवि के अनुसार, मौत के समय बेटा-बेटी, दामाद और यहाँ तक कि पत्नी भी साथ नहीं देती। (घ) 'ठाठ' संसार का प्रतीक है और 'बंजारा' इंसान का प्रतीक है, जो इस दुनिया में कुछ समय के लिए ही रहता है।

🎯 Exam Tip: जीवन की नश्वरता और वैराग्य से संबंधित प्रश्नों में, सांसारिक मोह के त्याग और वास्तविक सत्य की ओर ध्यान आकर्षित करने वाले शब्दों का प्रयोग करें।

(15)
उठे राष्ट्र तेरे कन्धों पर
बढ़े प्रगति के प्रांगण में,
पृथ्वी को रख दिया उठाकर
तूने नभ के आँगन में
विजय वैजयन्ती फहरी है जो
जग के कोने-कोने में
उसमें तेरा नाम लिखा है
जीने में बलि होने में !
तेरे बाहु-दण्ड में है वह बल
जो केहर-कटि तोड़ सके,
तेरे दृढ़ स्कन्ध में वह बल
जो गिरि से ले होड़ सके,
यह अवसर है, स्वर्ण सुयुग है,
खो न इसे नादानी में
रंगरेलियों में, छेड़छाड़ में,
मस्ती में, मनमानी में !

 

Question 15. (क) राष्ट्र को कंधों पर उठाकर प्रगति की ओर ले जाने में किसका योगदान है?
(ख) 'उसमें तेरा नाम लिखा है/जीने में बलि होने में'-का क्या आशय है?
(ग) युवक की भुजाओं तथा कंधों की शक्ति के बारे में कवि ने क्या कहा है?
(घ) कवि युवकों को क्या संदेश दे रहा है?
Answer:
(क) राष्ट्र को अपने कंधों पर उठाकर प्रगति की ओर ले जाने में उस राष्ट्र के नवयुवकों का योगदान होता है। उनकी ऊर्जा और संकल्प से ही राष्ट्र आगे बढ़ता है।
(ख) संसार में जो विजय पताका फहरा रही है, वह युवकों की वीरता के फलस्वरूप ही है। युवकों ने ही अपने राष्ट्र के हितार्थ अपना जीवन लगाया है तथा देश की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान भी किया है। यह युवाओं के त्याग और शौर्य को दर्शाता है।
(ग) युवकों की भुजाओं में इतनी शक्ति है कि वह शेर की कमर तोड़ सकती है। उसके कंधे भी अत्यन्त शक्तिशाली हैं। वे शक्ति में किसी पर्वत से भी होड़ ले सकते हैं। यह उनकी अद्भुत शारीरिक शक्ति का वर्णन है।
(घ) कवि युवकों को संदेश दे रहा है कि यौवन वह अवस्था है जब युवकों में अपार शक्ति और पराक्रम भरा होता है। इसका उपयोग वे अपने राष्ट्र के निर्माण और विकास के लिए करें, न कि व्यर्थ की मौज-मस्ती में। यह समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा है।
In simple words: (क) राष्ट्र को आगे बढ़ाने में युवाओं का सबसे बड़ा हाथ है। (ख) दुनिया भर में जो जीत का झंडा फहरा है, वह युवाओं की बहादुरी और बलिदान के कारण है। (ग) कवि कहता है कि युवाओं की भुजाओं में शेर की कमर तोड़ने और कंधों में पहाड़ से मुकाबला करने की ताकत है। (घ) कवि युवाओं को संदेश दे रहा है कि यह जवानी का सुनहरा मौका है, इसे व्यर्थ की मस्ती में न गंवाकर राष्ट्र के काम में लगाएँ।

🎯 Exam Tip: राष्ट्र निर्माण और युवा शक्ति पर आधारित प्रश्नों में, युवाओं की क्षमता, उनके बलिदान और देश के प्रति उनके योगदान को महत्व दें।

(16)
छानता र शिशु कान ?
मौन भी क्या रहती वह
रहते प्राण ? रे अंजान !
एक मेषमाता ही
रहती है निर्निमेष-
दुर्बल वह-
छिनती संतान जब
जन्म पर अपने अभिशप्त
तप्त आँसू बहाती है,
याग्य जन जाता है।
पश्चिम की उक्ति नहीं
गीता है, गीता है।
स्मरण करो बार-बार-
जागो फिर एक बार !
ब्रह्म हो तुम
पद-रज भर भी है नहीं पूरा यह विश्व-भार-
जागो फिर एक बार।

 

Question 16. (क) अपनी सन्तान छिनने पर सिंहनी क्या करती है ?
(ख) संतान पर संकट आने पर भेड़ क्या करती है ?
(ग) आशय स्पष्ट कीजिए-'पश्चिम की उक्ति नहीं, गीता है, गीता है।'
(घ) कवि भारतीयों को क्या प्रेरणा दे रहा है ?
Answer:
(क) अपनी सन्तान छीने जाने पर सिंहनी चुप नहीं बैठती। वह तुरन्त उसकी रक्षा के लिए उद्यत होती है तथा छीनने वाले पर झपट पड़ती है। वह अपनी संतान की रक्षा के लिए पूरी ताकत लगा देती है।
(ख) भेड़ निरीह होती है। अपनी सन्तान छिनने पर वह कुछ नहीं कर पाती। वह केवल दुःखी होती है और आँखों से आँसू बहाती रहती है। भेड़ अपनी कमजोरी के कारण helpless महसूस करती है।
(ग) कवि कहता है कि संसार में वही जीवित रहता है जो पराक्रमी तथा सक्षम होता है। यह सिद्धान्त पश्चिम के वैज्ञानिक डार्विन का नहीं है (सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट)। यह तो भारतीय महान् ग्रन्थ श्रीमद्भगवद्गीता में पहले ही बताया जा चुका है। जीवित रहना है तो हमको शक्तिशाली बनना ही होगा। यह प्राचीन भारतीय ज्ञान की महिमा को दर्शाता है।
(घ) कवि भारतीयों से कायरता, दीनता और भय त्यागकर वीर पराक्रमी बनने के लिए कह रहा है। तुम ब्रह्म हो, यह पूरा ब्रह्माण्ड तुम्हारे पैरों की धूल के बराबर भी नहीं है। तुम अज्ञान की नींद से जागो और अपना सच्चा रूप पहचानो। वह उन्हें अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने को कहता है।
In simple words: (क) जब सिंहनी से उसका बच्चा छीन लिया जाता है, तो वह चुप नहीं रहती, बल्कि उस पर हमला करती है। (ख) भेड़ कमज़ोर होती है, इसलिए वह अपने बच्चे को छीनने पर कुछ नहीं कर पाती, बस रोती रहती है। (ग) इसका मतलब है कि शक्तिशाली वही है जो दुनिया में जीवित रहता है, और यह बात डार्विन ने नहीं, बल्कि हमारी गीता ने बहुत पहले ही बता दी थी। (घ) कवि भारतीयों को बहादुर बनने और डर छोड़कर अपनी असली ताकत पहचानने को कह रहा है।

🎯 Exam Tip: शक्ति, कमजोरी और भारतीय दर्शन पर आधारित प्रश्नों में, गीता के सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ से जोड़कर स्पष्ट करें, साथ ही प्रेरणादायक संदेश भी दें।

(17)
तोड़ मत विश्वास की दीवार पगले !
फिर नहीं यह बन सकेगी।
ठीक है, दीवार बाधा है मनोरथ की
किन्तु बकरी बाड़ को खाकर बचेगी ?
स्वार्थ के रथ पर चढ़ो मत, रोक दो गति
इस तरह इंसान की दुनियाँ चलेगी ?
चल रही है जिन्दगी विश्वास-बल से
तोड़ मत निर्मोह हो स्नेह बन्धन
सत्य है, बन्धन प्रगति को रोकते हैं
काटकर जड़ पेड़ कैसे जी सकेगा ?
सरल मन कच्चे घड़े-सा
टूटकर जुड़ता नहीं है।
खींचने से अधिक टूटे तार वाली
नेह की वीणा कभी बजती नहीं है।

 

Question 17. (क) कवि ने विश्वास को दीवार क्यों कहा है तथा उसे न तोड़ने का आग्रह क्यों किया है?
(ख) दीवार मनोरथों की पूर्ति में कैसे बाधक बनती है?
(ग) इंसान की दुनिया किसके सहारे चलती है?
(घ) प्रेम वीणा के समान क्यों है?
Answer:
(क) कवि ने विश्वास को दीवार कहा है तथा उसे कभी भी न तोड़ने का आग्रह किया है। एक बार टूटने पर दोबारा विश्वास स्थापित करना बहुत कठिन होता है। विश्वास ही रिश्तों की नींव है।
(ख) दीवार मनोरथों के पूरा होने में बाधक होती है। वह स्वतन्त्रता को रोकती है। फिर भी बाह्य संकट से सुरक्षा के लिए दीवार की सुरक्षा जरूरी है। बकरी यदि काँटों की बाड़े को खाने लगेगी तो उसको वन्यपशुओं से बचाना संभव नहीं होगा। बाहरी सुरक्षा भी जरूरी है।
(ग) इंसान की दुनिया अर्थात् यह संसार एक-दूसरे पर विश्वास करने से ही चलता है। अविश्वास इस संसार के सुचारु संचालन में सदा बाधक होता है। विश्वास के बिना कोई भी समाज नहीं चल सकता।
(घ) प्रेम वीणा के समान है। वीणा के तारों को ज्यादा कसने पर वे टूट जाते हैं तथा उनसे संगीत के स्वर नहीं निकलते। इसी प्रकार अधिक तर्क-वितर्क, खींचतान तथा परस्पर अविश्वास और शंका प्रेम में बाधक होते हैं। इनसे प्रेम नष्ट हो जाता है। प्रेम को कोमलता और समझदारी से निभाना चाहिए।
In simple words: (क) कवि ने विश्वास को दीवार कहा है और इसे न तोड़ने को कहा है, क्योंकि एक बार टूट जाने पर इसे दोबारा बनाना बहुत मुश्किल होता है। (ख) दीवारें हमारी इच्छाओं को पूरा करने से रोकती हैं, पर कभी-कभी बाहर के खतरों से बचाने के लिए ज़रूरी होती हैं। (ग) इंसानों की दुनिया एक-दूसरे पर विश्वास करने से चलती है। (घ) प्रेम वीणा की तरह है; अगर तारों को ज़्यादा खींचा जाए तो वे टूट जाते हैं, वैसे ही ज्यादा झगड़े और शक से प्यार भी टूट जाता है।

🎯 Exam Tip: विश्वास, संबंध और जीवन के नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रश्नों में, इन अवधारणाओं के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझाते हुए स्पष्ट उत्तर दें।

(18)
खूब गए
दूधिया निगाहों में
फटी बिवाइयों वाले खुरदरे पैर
धंस गए
कुसुम कोमल मन में
गुट्ठल घट्ठों वाले कुलिश कठोर पैर
दे रहे थे गति
रबड़विहीन ठूंठ पैडलों को
चला रहे थे
एक नहीं, दो नहीं तीन-
कर रहे थे मात्र त्रिविक्रम वामन के पुराने पैरों को
नाप रहे थे धरती का अनहद फासला
घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे !
देर तक टकराए
उस दिन इन आंखों से वे पैर
भूल नहीं पाऊँगी फटी बिवाइयाँ
खूब गए दूधिया निगाहों में
भैंस
कुसुम कोमल मन में।

 

Question 18. (क) रिक्शाचालक के पैरों में बिवाइयाँ और गाँठों से भरे घट्टे क्यों पड़ गए थे ?
(ख) कवि ने रिक्शाचालक के पैरों की तुलना किसके पैरों से की है ?
(ग) “घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे' से कवि किस कटु सत्य की ओर संकेत करता है ?
(घ) कवि को क्यों लगता है कि वह रिक्शाचालक के बिवाई पड़े पैरों को भूल नहीं पाएगा ?
Answer:
(क) रिक्शे के पैडलों पर रबड़ नहीं थी। वे कठोर थे। उनको चलाते-चलाते रिक्शावाले के पैरों में बिवाइयाँ और गाँठों से भरे घट्टे पड़ गए थे। यह उसके कठोर परिश्रम का परिणाम था।
(ख) कवि ने रिक्शाचालक के पैरों की तुलना तीन कदमों में पूरे संसार को नापने वाले विष्णु के वामन अवतार से की है। यह तुलना रिक्शाचालक के अथक परिश्रम को दर्शाती है।
(ग) रिक्शाचालक को सवारियों से जो पैसा मिल रहा था वह स्थान की दूरी के अनुसार नहीं था। सवारियाँ उसको घण्टों के हिसाब से पैसा दे रही थीं। इससे रिक्शाचालक का शोषण हो रहा था तथा उसको परिश्रम के अनुसार मजदूरी नहीं मिल रही थी। यह समाज की आर्थिक असमानता को दिखाता है।
(घ) कवि का मन रिक्शाचालक के शोषण-उत्पीड़न को देखकर करुणा से भर उठा है। उसे लगता है कि वह कभी रिक्शाचालक के बिवाई पड़े पैरों को भूल नहीं पाएगा क्योंकि यह दर्द भरी स्मृति उसके मन में बस गई है।
In simple words: (क) रिक्शाचालक के पैरों में दरारें और गांठे पड़ गई थीं क्योंकि उसके रिक्शे के पैडल बिना रबड़ के थे और वह उन्हें दिन भर चलाता था। (ख) कवि ने रिक्शाचालक के पैरों की तुलना विष्णु के वामन अवतार के पैरों से की है, जिन्होंने तीन कदमों में दुनिया नाप ली थी। (ग) "घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे" का मतलब है कि रिक्शाचालक को उसकी मेहनत के हिसाब से पैसे नहीं मिल रहे थे, बल्कि उसे कम पैसे दिए जा रहे थे। (घ) कवि रिक्शाचालक के दर्द भरे पैरों को नहीं भूल पाएगा क्योंकि उसे लगा कि उसका बहुत शोषण हुआ है।

🎯 Exam Tip: शोषण, गरीबी और मानवीय पीड़ा पर आधारित प्रश्नों में, समाज की असमानताओं और व्यक्ति के दर्द को मार्मिक रूप से व्यक्त करें।

(19)
अँधेरे के इशारों पर नाचती-गाती।
थका हारा सोचता मन-सोचता मन।
भूखी प्यासी कानाफूसी दे उठी दस्तक
अंधा बन जा झुका दे तम-द्वार पर मस्तक ।
रेवड़ी की बाँट में तू रेवड़ी बन जा
मृत्यु भी वरदान है संघर्ष में प्यारे
सत्य के संघर्ष में क्यों रोशनी हारे।
देखते ही देखते तम तोड़ता है दम
और सूरज की तरह हम ठोंकते हैं खम।

 

Question 19. (क) थके-हारे मन की उलझन क्या थी ?
(ख) अँधेरे में अंधों की भीड़ खुश क्यों थी ?
(ग) भूख-प्यास की विवशता को क्या परामर्श था ?
(घ) संघर्ष में विजय किसे मिलती है ?
Answer:
(क) थके-हारे मन की उलझन यह थी कि मनुष्य संघर्ष के निराशापूर्ण वातावरण को मजबूती से झेलता रहे अथवा भ्रष्टाचार के अन्धकार के सामने घुटने टेककर संसार का सुख प्राप्त करे। यह संघर्ष और आत्म-सम्मान के बीच का चुनाव था।
(ख) अँधेरे में अन्धों की भीड़ रेवड़ी खाकर अर्थात् अपना स्वार्थ पूरा होने के कारण अत्यन्त खुश थी। वे केवल अपने फायदे में लगे हुए थे।
(ग) भूख-प्यास से व्याकुलता और विवशता का परामर्श था कि संघर्ष करने के स्थान पर मनुष्य को अन्धकार के सामने अपना सिर झुकाकर जीवन का सुख लूटना चाहिए। यह एक तरह का समझौता करने का सुझाव था।
(घ) संघर्ष में विजय पाने के लिए मन की दृढ़ता आवश्यक है। संघर्ष में वही विजयी होता है जो मन को वश में कर लेता है। आत्मविश्वास और आत्म-नियंत्रण बहुत ज़रूरी है।
In simple words: (क) थके मन की उलझन यह थी कि क्या निराशा और भ्रष्टाचार का सामना करें या हार मानकर सुख खोजें। (ख) अँधेरे में अंधे लोग खुश थे क्योंकि उन्हें रेवड़ी (स्वार्थ) मिल रही थी। (ग) भूख और प्यास की मजबूरी में सलाह दी गई थी कि संघर्ष छोड़कर हार मान लें और जीवन का सुख लें। (घ) संघर्ष में जीत उसे मिलती है जिसका मन मज़बूत होता है और जो अपने मन को काबू में रखता है।

🎯 Exam Tip: जीवन के संघर्ष और नैतिक चुनौतियों पर आधारित प्रश्नों में, आंतरिक शक्ति, आत्म-नियंत्रण और स्वार्थ बनाम त्याग के अंतर को स्पष्ट करें।

(20)
जहाँ चित्त
जहाँ हम गर्व से माथा ऊँचा करके चल सकें
जहाँ ज्ञान मुक्त हो
जहाँ विशाल वसुधा को
खण्डों में विभाजित कर
छोटे और छोटे आँगन बनाए जाते हों।
जहाँ हर वाक्य दिल की गहराई से निकलता हो,
जहाँ हर दिशा में कर्म के अजस्र स्रोत फूटते हों,
निरन्तर बिना बाधा के बहती हो
जहाँ मौलिक विचारों की सरिता
तुच्छ आचारों की मरु रेती में न खोती हों
जहाँ पर कर्म, भावनाएँ, आनंदानुभूतियाँ
सभी तुम्हारे अनुगत हों।
हे प्रभु! हे पिता ! अपने हाथों से कड़ी थपकी देकर
सोते हुए
इस स्वतन्त्र भारत को जगाओ।

 

Question 20. (क) वसुधा को खण्डों में विभाजित कर छोटे-छोटे आँगन बनाने से कवि का क्या अभिप्राय है?
(ख) कर्म के अजस्र स्रोत फूटने का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) मौलिक विचारधारा कहाँ खो जाती है ?
(घ) कवि स्वतन्त्र भारत को सोता हुआ क्यों कहता है ?
Answer:
(क) वसुधा को खण्डों में विभाजित कर छोटे-छोटे आँगन बनाने से कवि का अभिप्राय है कि लोगों ने देश को जाति, धर्म और क्षेत्रीयता के आधार पर बाँट दिया है। यह संकीर्णता को दर्शाता है।
(ख) कर्म के अजस्र स्रोत फूटने का आशय यह है कि लोग बिना किसी रुकावट के लगातार परिश्रम करते रहें और हर दिशा में काम करने के अवसर पैदा हों। यह निरंतर प्रगति और कार्यशीलता का प्रतीक है।
(ग) मौलिक विचारधारा तुच्छ आचारों की मरु रेती में खो जाती है, अर्थात जब लोग छोटे-मोटे रीति-रिवाजों और संकीर्ण सोच में उलझ जाते हैं, तो उनके बड़े और नए विचार दब जाते हैं।
(घ) स्वतन्त्र भारत के नागरिक अकर्मण्य, सद्भावना से रहित, दोषपूर्ण विचारों और आचरण से देश की एकता को क्षति पहुँचाने वाले हैं। उन्हें देश के उत्थान और श्रेष्ठ भविष्य की चिन्ता नहीं है। इस कारण कवि ने स्वतन्त्र भारत को सोता हुआ कहा है। वह चाहता है कि लोग जागें और अपने कर्तव्यों को निभाएं।
In simple words: (क) धरती को टुकड़ों में बांटकर छोटे आँगन बनाने का मतलब है कि लोगों ने देश को जाति और धर्म के नाम पर बांट दिया है। (ख) कर्म के झरने फूटने का मतलब है कि लोग हर तरफ मेहनत करने लगें और नए काम शुरू हों। (ग) जब लोग छोटी सोच और गलत रीति-रिवाजों में पड़ जाते हैं, तो उनके अच्छे और नए विचार खो जाते हैं। (घ) कवि ने भारत को सोता हुआ इसलिए कहा है क्योंकि लोग आलसी हो गए हैं और देश के भविष्य की परवाह नहीं करते।

🎯 Exam Tip: राष्ट्र प्रेम, सामाजिक चेतना और देश की समस्याओं पर आधारित प्रश्नों में, कवि के संदेश को स्पष्ट करें, जिसमें एकता, कर्मठता और मौलिक विचारों के महत्व पर जोर दिया गया हो।

(21)
घाटी के ऊपर झुक
फैला-सा अंबर ज्यों
सजल-सलज-छलनामय शब्दों से
बेमन दुलार रहा,
दे रहा हो थपकी-सी
आ रही हो झपकी-सी घाटी को !
या फिर खुद घाटी ने मानव का दर्द जान,
मानव को अपने ही अंतर का भाग मान.
लोरी के कपसीले बादल बिखराए हों-
कुहरे के झीने-से
कबूतर के डैने-से पुल ये बनाए हों,
जिससे कि मानव भी पा सके सिद्धि-स्वर्ग
वैसे मानव-मन का हर कोना रीता है, घायल है
आशा-निराशा, दुराशा हताशा के दृश्य सभी नाटकीय-
ऐसे ही मानव को घाटी बहलाती है,
बरसाकर पानी अभिसिंचन करवाती है।

 

Question 21. (क) बादल की तुलना किससे की गई है और क्यों ?
(ख) घाटी सोती हुई-सी क्यों जान पड़ती है ?
(ग) मनुष्य को सिद्धि प्राप्त कराने के लिए घाटी ने क्या व्यवस्था की ?
(घ) उन पंक्तियों को उधृत कीजिए जिसका आशय है- वर्षा के द्वारा मनुष्य का अभिषेक किया जाता है।
Answer:
(क) बादल की तुलना आकाश से की गई है क्योंकि बादल पूरी घाटी के ऊपर छाया हुआ है। उसने आकाश के समान ही घाटी को एक छोर से दूसरे छोर तक ढक लिया है। यह प्राकृतिक नज़ारे का सुंदर चित्रण है।
(ख) बादल छा जाने से घाटी में अन्धकार छा गया है। बादल घाटी को थपकी दे रहा है जिससे घाटी को हल्की-सी झपकी आ रही है। यह शांति और सुकून का वातावरण बनाता है।
(ग) घाटी ने अपने ऊपर कुहरे के झीने-से कबूतर के पंखों जैसे पुल बनाए हैं जिससे लोग इन पुलों को पार कर सिद्धि का स्वर्ग पा सकें। यह आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है।
(घ) पंक्ति – ऐसे ही मानव को घाटी बहलाती है, बरसा कर पानी अभिसिंचन करवाती है। इसका अर्थ है कि घाटी वर्षा के माध्यम से मानव जीवन को शुद्ध करती है।
In simple words: (क) बादल की तुलना आकाश से की गई है, क्योंकि बादल पूरी घाटी को ऐसे ढक लेते हैं जैसे आकाश। (ख) घाटी सोती हुई इसलिए लग रही है क्योंकि बादल छा गए हैं और उसे थपकी दे रहे हैं। (ग) घाटी ने धुंध के पंखों जैसे पुल बनाए हैं ताकि इंसान उनसे होकर स्वर्ग जैसा सुख पा सके। (घ) वह पंक्ति है: "ऐसे ही मानव को घाटी बहलाती है, बरसा कर पानी अभिसिंचन करवाती है।"

🎯 Exam Tip: प्रकृति के मानवीकरण पर आधारित प्रश्नों में, प्राकृतिक तत्वों को मानवीय भावनाओं और क्रियाओं से जोड़कर स्पष्ट करें।

(22)
"देखो, कैसी भीनी गंध है!"
तुमने उसे पीसा
और चटनी बना डाली
मैंने कोयल को सराहा,
मुक्त रहो !
जन्म भर की यह यातना भी
इस ज्ञान के समक्ष तुच्छ है
हँसी फूल में नहीं
देखो, कैसा मीठा गाती है!
तुमने उसे पकड़ा
और पिंजरे में डाल दिया !
एक युग पहले की बातें ये
गंध बौर में नहीं
गीत कण्ठ में नहीं
हँसी, गंध, गीत- सब मुक्ति में हैं।
मुक्ति ही सौन्दर्य का अन्तिम प्रमाण है।

 

Question 22. (क) फूल, बौर तथा कोयल-कण्ठ के प्रति कवि और उसकी प्रेयसी के दृष्टिकोण में क्या भिन्नता है?
(ख) सौन्दर्य के प्रति उपयोगितावादी दृष्टिकोण रखने वालों का जीवन अंततः कैसा हो जाता है?
(ग) “जीवन भर की यातना' से कवि का क्या तात्पर्य है?
(घ) कविता के अनुसार हँसी, गंध और गीत सब मुक्ति में ही हैं, कैसे?
Answer:
(क) फूल, बौर तथा कोयल-कण्ठ के सम्बन्ध में कवि और उसकी प्रेयसी के दृष्टिकोण में बहुत भिन्नता है। कवि फूल, बौर और कोयल को मुक्त रखकर उनसे आनन्द प्राप्त करना चाहता है लेकिन उसकी प्रेयसी का इन सभी के प्रति उपयोगितावादी दृष्टिकोण है। वह उनकी स्वतन्त्रता छीनकर उन्हें अपने उपयोग में लाकर प्रसन्न होती है। एक का दृष्टिकोण प्रकृतिवादी है, तो दूसरे का व्यावहारिकतावादी।
(ख) सौन्दर्य के प्रति उपयोगितावादी दृष्टिकोण रखने वालों का जीवन निराशा और कष्टपूर्ण हो जाता है। उस पर एकाधिकार का विचार सौन्दर्य को तो मिटाता ही है, समाज में संघर्ष भी उत्पन्न करता है। जीवन का आनन्द और प्रसन्नता समाप्त हो जाती है। वे कभी खुशी नहीं पाते।
(ग) जीवनभर की यातना से कवि का अभिप्राय प्राकृतिक सौन्दर्य को उपयोगितावादी दृष्टिकोण से देखकर अपना पूरा जीवन आनन्द से वंचित रहकर गुजारने से है। यह दृष्टिकोण मनुष्य के पूरे जीवन को दुःखी बना देता है। उसकी प्रसन्नता, उत्साह, हँसी सब छिन जाती हैं। यह भावनात्मक पीड़ा है।
(घ) प्रकृति को बन्धन में बाँधना उचित नहीं है। उसके मुक्त सौन्दर्य का दर्शन ही जीवन का आनन्द है। फूल के खिलने, बौर के महकने तथा कोयल के गाने का सच्चा आनन्द उनको मुक्त रहने देकर ही प्राप्त किया जा सकता है। यह स्वतंत्रता का प्रतीक है।
In simple words: (क) कवि प्रकृति को आज़ाद छोड़ना चाहता है, पर उसकी प्रेयसी फूलों और कोयल को अपने काम के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। (ख) जो लोग सुंदरता को सिर्फ अपने फायदे के लिए देखते हैं, उनका जीवन अंत में दुख भरा हो जाता है। (ग) "जीवन भर की यातना" का मतलब है कि अगर आप प्रकृति की सुंदरता को सिर्फ अपने फायदे के लिए देखें, तो जीवन भर खुश नहीं रह पाएंगे। (घ) कविता के अनुसार, हंसी, खुशबू और गीत तभी असली होते हैं जब वे आज़ाद होते हैं, बिना किसी बंधन के।

🎯 Exam Tip: प्रकृति प्रेम और उपयोगितावादी दृष्टिकोण पर आधारित प्रश्नों में, स्वतंत्रता के महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के वास्तविक आनंद को स्पष्ट करें।

(23)
मत रोक मुझे भयभीत न करे, मैं सदा कटीली राह चला।
पथ-पथ मेरे पतझारों में नव सुरभि भरा मधुमास पला।
फिर कहाँ डरा पाएगा यह पगले! जर्जर संसार मुझे।
इन लहरों के टकराने पर, आता रह-रह कर प्यार मुझे।
मैं हूँ अपने मन का राजा, इस पार रहूँ उस पार चलें।
मैं मस्त खिलाड़ी हैं ऐसी जी चाहे जीत हार चलें॥
इन उठती-गिरती लहरों को कर लेने दो श्रृंगार मुझे।
इन लहरों के टकराने पर आता रह-रह कर प्यार मुझे ॥

 

Question 23. (क) 'अपने मन का राजा' होने के दो लक्षण कविता से चुनकर लिखिए।
(ख) किस पंक्ति का आशय है-कवि पतझड़ को भी वसन्त मान लेता है।
(ग) कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
(घ) आशय स्पष्ट कीजिए-'कब रोक सकी मुझको चितवन, मदमाते कजरारे घन की।'
Answer:
(क) अपने मन का राजा होने के दो लक्षण निम्नलिखित हैं –
1. वह अपने मन का स्वामी है। वह अपनी मर्जी के अनुसार काम करने को स्वतन्त्र है।
2. वह चाहे तो इस पार रह सकता है और यदि वह उस पार जाना चाहता है, तो जा सकता है। यह उसकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
(ख) इस कविता की निम्नलिखित पंक्ति का आशय है कि कवि पतझड़ को भी वसन्त मान लेता है – 'पथ-पथ मेरे पतझारों में नव सुरभि भरा मधुमास पला।' यह उसकी सकारात्मक सोच को दिखाता है।
(ग) कवि निर्भीक है। वह संसार की कठिनाइयों का सामना करने से नहीं डरता। वह स्वयं निर्णय करता है कि उसे किन परिस्थितियों में क्या करना है। उसको कोई बंधन स्वीकार नहीं। वह किसी नारी तथा प्रकृति के सौन्दर्य के आकर्षण में नहीं हँसता। वह विवेकशील, कर्मठ और स्वतन्त्रचेता है। यह कवि के मजबूत इरादों को दर्शाता है।
(घ) कवि अपने कर्तव्य-पथ पर अडिग है। उसे किसी नारी के काले मदभरे नेत्र अपनी ओर आकर्षित कर पथभ्रष्ट नहीं कर सके हैं अथवा वर्षा ऋतु का मनमोहक दृश्य उसे पथ से विमुख नहीं कर पाया। वह अपने लक्ष्य पर स्थिर है।
In simple words: (क) 'अपने मन का राजा' होने का मतलब है कि व्यक्ति अपनी मर्जी से काम करता है और जहाँ चाहे वहाँ जा सकता है। (ख) वह पंक्ति है 'पथ-पथ मेरे पतझारों में नव सुरभि भरा मधुमास पला', जिसका मतलब है कि कवि पतझड़ को भी वसंत की तरह खुशबूदार मानता है। (ग) कविता का मुख्य विचार यह है कि कवि निडर, स्वतंत्र और कर्मठ है, जो किसी बंधन को नहीं मानता। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि कोई भी सुंदर आँखों या वर्षा के मौसम का सौंदर्य कवि को उसके कर्तव्य पथ से नहीं भटका सका।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता, दृढ़ संकल्प और जीवन के मार्ग पर अडिग रहने पर आधारित प्रश्नों में, कवि के आत्मविश्वास और अडिग स्वभाव को स्पष्ट करें।

(24)
क्या रोकेंगे प्रलय मेघ ये, क्या विद्युत्-घन के नर्तन,
मुझे न साथी रोक सकेगे, सागर के गर्जन-तर्जन।
मैं अविराम पथिक अलबेला रुके न मेरे कभी चरण,
शूलों के बदले फूलों का किया न मैंने मित्र चयन।
मैं विपदाओं में मुसकाता नव आशा के दीप लिए,
फिर मुझको क्या रोक सकेंगे जीवन के उत्थान-पतन।
में अटका कब, कब विचलित में, सतत डगर मेरी संबल,
रोक सकी पगले कब मुझको यह युग की प्राचीर निबल।
आँधी हो, ओले-वर्षा हों, राह सुपरिचित है मेरी,
फिर मुझको क्या डरा सकेंगे ये जग के खंडन-मंडन।
मुझे डरा पाए केबे अंधड़, ज्वालामुखियों के कपन,

 

Question 24. (क) कवि के स्वभाव की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
(ख) कविता में आए मेघ, विद्युत, सागर की गर्जना और ज्वालामुखी किनके प्रतीक हैं? कवि ने उनका संयोजन यहाँ क्यों किया है?
(ग) “शूलों के बदले फूलों का किया न मैंने मित्र चयन'-पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
(घ) “युग की प्राचीर' का क्या तात्पर्य है? उसे कमजोर क्यों बताया गया है?
Answer:
(क) कवि के स्वभाव की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. कवि निरन्तर चलने में विश्वास करता है। वह मानता है कि गति ही जीवन है।
2. कवि कठिनाइयों से विचलित नहीं होता। वह निरन्तर संघर्ष करते हुए साहस और दृढ़ता का परिचय देता है और उन पर विजय पाता है। यह उसकी अडिगता और जुझारूपन को दर्शाता है।
(ख) कविता में आए मेघ, विद्युत, सागर की गर्जना और ज्वालामुखी जीवन में आने वाली कठिनाइयों तथा मार्ग की बाधाओं के प्रतीक हैं। कवि ने उनका संयोजन यहाँ यह प्रकट करने के लिए किया है कि वह पथ की बाधाओं से डरता नहीं, वह निर्भीकतापूर्वक अविचलित होकर उनसे टक्कर लेता है और आगे बढ़ता है। यह कवि के मजबूत इरादों को दर्शाता है।
(ग) कवि जीवन में कभी कठिनाइयों से नहीं डरा। उसने कभी भी संघर्ष का पथ त्यागकर सुविधाभोगी जीवन-शैली स्वीकार नहीं की। उसने हमेशा चुनौतियों को चुना।
(घ) “युग की प्राचीर'-जीवन में समय-समय पर आने वाली कठिनाइयाँ अथवा मनुष्य की प्रगति को रोकने वाली सामाजिक रीतियाँ और परम्पराएँ । युग की दीवार को कमजोर कहने का आशय यह है कि जीवन की बाधाएँ तथा कठिनाइयाँ कवि का साहस भंग नहीं कर सकतीं। वह किसी भी चुनौती से नहीं डरता।
In simple words: (क) कवि निरंतर चलता रहता है और कठिनाइयों से नहीं डरता, बल्कि उनका सामना करता है। (ख) बादल, बिजली, सागर की गर्जना और ज्वालामुखी जीवन की मुश्किलों के प्रतीक हैं। कवि ने इन्हें इसलिए जोड़ा है कि वह इन मुश्किलों से नहीं डरता। (ग) "शूलों के बदले फूलों का किया न मैंने मित्र चयन" का मतलब है कि कवि ने मुश्किल रास्ते चुने हैं, आसान नहीं। (घ) "युग की प्राचीर" का मतलब है पुराने नियम और परंपराएँ जो प्रगति रोकती हैं। इसे कमजोर कहा गया है क्योंकि ये कवि को नहीं रोक सकतीं।

🎯 Exam Tip: बाधाओं पर विजय और आत्मविश्वास पर आधारित प्रश्नों में, कवि के मजबूत इरादों और चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता को प्रमुखता से लिखें।

(25)
जब-जब बाँहें झुकीं मेघ की, धरती का तन-मन ललका है,
जब-जब मैं गुजरा पनघट से, पनिहारिन का घट छलका है।
सुन बाँसुरिया सदा-सदा से हर बेसुध राधा बहकी है,
मेघदूत को देख यक्ष की सुधियों में केसर महकी है।
क्या अपराध किसी का है फिर, क्या कमजोरी कहूँ किसी की,
जब-जब रंग जमा महफिल में जोश रुका कब पायल का है।
जब-जब मन में भाव उमड़ते, प्रणय श्लोक अवतीर्ण हुए हैं,
जब-जब प्यास जगी पत्थर में, निर्झर स्रोत विकीर्ण हुए हैं।
जब-जब पूँजी लोकगीत की धुन अथवा आल्हा की कड़ियाँ
खेतों पर यौवन लहराया, रूप गुजरिया का दमका हैं।

 

Question 25. (क) मेघों के झुकने का धरती पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा क्यों ?
(ख) राधा कौन थी? उसे बेसुध क्यों कहा गया है ?
(ग) मन के भावों और प्रेम गीतों का परस्पर क्या सम्बन्ध है ? इनमें कौन किस पर आश्रित है ?
(घ) इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए- 'रूप गुजरिया का दमका है।'
Answer:
(क) मेघों के झुकने पर धरती का तन-मन ललकता है, क्योंकि बारिश से धरती हरी-भरी हो जाती है और उसमें नया जीवन आता है। यह प्रकृति के सौंदर्य और जीवनदायिनी शक्ति को दर्शाता है।
(ख) राधा कृष्ण की प्रेयसी थी और उसे बेसुध इसलिए कहा गया है क्योंकि वह कृष्ण की बाँसुरी की धुन में खोई रहती थी। उसका प्रेम उसे सब कुछ भुला देता था।
(ग) मन के भावों से प्रेरित और उत्साहित होकर ही कवि काव्य-रचना करता है। जब मन में प्रेम के भाव उमड़ते हैं तो कवि प्रेम के गीत रचता है। इनमें प्रेमगीत मन के भावों पर आश्रित हैं। यानी भाव ही गीत का आधार हैं।
(घ) इस पंक्ति का आशय यह है कि जब भी गाँवों में लोकगीत या आल्हा गाए जाते हैं तो खेतों में कार्य करते किसान यौवन की मस्ती से भर जाते हैं और ग्रामीण युवतियाँ सुन्दर लगने लगती हैं। यह ग्रामीण जीवन के उत्साह और सुंदरता को दर्शाता है।
In simple words: (क) बादलों के झुकने से धरती खुश हो जाती है और उसमें नया जीवन आता है, क्योंकि बारिश से हरियाली फैलती है। (ख) राधा कृष्ण की प्रेमिका थी और वह उनकी बाँसुरी की धुन में इतनी खो जाती थी कि उसे बेसुध कहा गया है। (ग) कवि प्रेम गीत तब लिखता है जब उसके मन में प्यार के भाव उठते हैं। प्रेम गीत मन के भावों पर निर्भर करते हैं। (घ) इस पंक्ति का मतलब है कि जब गाँव में लोकगीत गाए जाते हैं, तो किसान और ग्रामीण लड़कियाँ अपनी जवानी की मस्ती में सुंदर दिखने लगती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रकृति, प्रेम और लोक-संस्कृति पर आधारित प्रश्नों में, कवि की भावनाओं, प्रतीकों और मानवीय अनुभवों के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।

(26)
पथ बंद है पीछे अचल पीठ पर धक्का प्रबल।
मत सोच बढ़ चल तू अभय, ले बाहु में उत्साह-बल।
जीवन-समर में सैनिको, सम्भव असम्भव को करो।
पथ-पथ निमन्त्रण दे रहा आगे कदम, आगे कदम।
ओ बैठने वाले तुझे देगा न कोई बैठने।।
पल-पल समर नूतन सुमन-शैया न देगा लेटने।
आराम सम्भव है नहीं जीवन सतत् संग्राम है।
बढ़ चल मुसाफिर धर कदम, आगे, आगे कदम।
ऊँचे हिमानी श्रृंग पर, अंगार के भु-भंग पर
तीखे करारे खंग पर, आरम्भ कर अद्भुत सफर
औ नौजवाँ, निर्माण के पथ मोड़ दे, पथ खोल दे
जय-हार में बढ़ता रहे आगे कदम, आगे कदम।

 

Question 26. (क) इस काव्यांश में कवि किसे प्रेरणा दे रहा है और क्या ?
(ख) अद्भुत सफर की अद्भुतता क्या है ?
(ग) आशय स्पष्ट कीजिए-जीवन सतत् संग्राम है।
(घ) कविता का केन्द्रीय भाव दो-तीन वाक्यों में लिखिए।
Answer:
(क) इस काव्यांश में कवि युवकों को प्रेरणा दे रहा है कि वे मार्ग की कठिनाइयों से विचलित न होकर निरन्तर आगे बढ़ते रहें। वह उन्हें निडर होकर चुनौतियों का सामना करने को कहता है।
(ख) यह सफर अद्भुत है। इसकी विशेषता यह है कि यह बर्फ से ढंके पहाड़ों पर, ज्वालामुखी के गर्म लावे पर तथा पैनी तेज तलवार पर होकर आगे जाता है। यह खतरों से भरा, फिर भी रोमांचक सफर है।
(ग) जीवन एक निरन्तर चलने वाले युद्ध की तरह है। मनुष्य का जीवन आने वाली कठिनाइयों तथा बाधाओं से निरन्तर संघर्ष करते हुए व्यतीत होता है। इसमें विश्राम को कोई अवसर नहीं है। हर पल एक नई चुनौती आती है।
(घ) जीवन एक युद्ध की तरह है। उसमें विश्राम को अवसर नहीं है। युवकों को चाहिए कि वे मन में उत्साह पैदा करें तथा मार्ग की बाधाओं को कुचलकर आगे बढ़े। उन्हें असम्भव को सम्भव करके नवनिर्माण का मार्ग खोलना है। यह कविता संघर्ष और प्रगति का संदेश देती है।
In simple words: (क) कवि युवाओं को प्रेरणा दे रहा है कि वे मुश्किलों से डरे बिना हमेशा आगे बढ़ते रहें। (ख) अद्भुत सफर इसलिए खास है क्योंकि यह बर्फ़ीले पहाड़ों, ज्वालामुखी और तलवारों जैसे ख़तरनाक रास्तों से गुज़रता है। (ग) "जीवन सतत् संग्राम है" का मतलब है कि जीवन एक लगातार लड़ाई है जिसमें कभी आराम नहीं मिलता। (घ) कविता का मुख्य विचार यह है कि जीवन एक लगातार संघर्ष है जिसमें युवाओं को उत्साह और शक्ति से आगे बढ़कर असंभव को संभव बनाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: जीवन में संघर्ष, उत्साह और प्रगति पर आधारित प्रश्नों में, कवि के प्रेरक संदेश और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा को स्पष्ट करें।

(27)
भुवन में सुख-शान्ति भरो, उठो।
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।
न पुरुषार्थ बिना वह स्वर्ग है,
न पुरुषार्थ बिना अपवर्ग है।
न पुरुषार्थ बिना क्रियता कहीं,
अपुरुषाथ भयकर पाप है,
न उसमें यश है, न प्रताप है।
न कृमि-कीट समान मरो, उठो,
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥

 

Question 27. (क) मनुष्य पुरुषार्थ से क्या-क्या कर सकता है ?
(ख) “सफलता वर-तुल्य वरो उठो'-पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
(ग) अपुरुषार्थ भयंकर पाप है-कैसे ?
(घ) काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
Answer:
(क) पुरुष पुरुषार्थ के माध्यम से परमार्थ कर सकता है। वह स्वार्थ भी पूरा कर सकता है। पुरुषार्थ द्वारा मनुष्य संसार को सुख-शान्ति दे सकता है। मेहनत से ही जीवन में सब कुछ हासिल होता है।
(ख) सफलता एक वरदान के समान है। उसे प्राप्त करने के लिए कर्म करना आवश्यक है। बिना श्रम के जीवन में सफलता प्राप्त नहीं होती। अतः पुरुषार्थ द्वारा सफलता प्राप्त करो। यह पंक्ति परिश्रम के महत्व को समझाती है।
(ग) अपुरुषार्थ अर्थात् पौरुषहीनता एक भयंकर पाप है क्योंकि पुरुषार्थ के बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती। अपुरुषार्थ से न यश मिलता है न पराक्रम। पुरुषार्थहीन मनुष्य कीड़े-मकोड़ों के समान जीता-मरता है। यह जीवन की व्यर्थता को दर्शाता है।
(घ) काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'पुरुषार्थ करो' या 'कर्म का महत्व' हो सकता है। यह शीर्षक काव्यांश के मुख्य संदेश को व्यक्त करता है।
In simple words: (क) इंसान मेहनत करके अपना और दूसरों का भला कर सकता है, और दुनिया में शांति ला सकता है। (ख) "सफलता वर-तुल्य वरो उठो" का मतलब है कि सफलता एक आशीर्वाद की तरह है, जिसे पाने के लिए हमें मेहनत करनी चाहिए। (ग) मेहनत न करना बहुत बड़ा पाप है, क्योंकि बिना मेहनत के न तो हमें कुछ मिलता है और न ही हमें कोई सम्मान मिलता है। ऐसे लोग कीड़े-मकोड़ों की तरह जीते हैं। (घ) इस कविता का सबसे अच्छा नाम 'पुरुषार्थ करो' या 'कर्म का महत्व' है।

🎯 Exam Tip: पुरुषार्थ और सफलता पर आधारित प्रश्नों में, कर्म के महत्व, परिश्रम के लाभ और निष्क्रियता के नकारात्मक परिणामों को स्पष्ट करें।

(28)
यों खेल करोगे कब तक तुम असहायों से
कब तक अफीम आशा की हमें खिलाओगे ?
बरबाद हो गयी फसल कहीं जोती बोयी,
क्या बैठ अकेले ही मरघट पर गाओगे ?
विश्वास सर्वहारा का तुमने खोया तो,
आसन्न मौत की गहन फाँस गड़ जायेगी।
यदि बाँध बाँधने से पहले जल सूख गया,
धरती की छाती में दरार पड़ जायेगी।
सदियों की कुर्बानी यदि यों बेमोल बिकी,
जमुहाई लेने में खो गया सवेरा यदि ।
जनता पूर्णिमा मनाने की जब तक सोचे,
घिर गया अमावस का अम्बर में घेरा यदि
इतिहास न तुमको माफ करेगा याद रहे,
पीढ़ियाँ तुम्हारी करनी पर पछतायेंगी।
पूरब की लाली में कालिख पुत जायेगी,
सदियों में फिर क्या ऐसी घड़ियाँ आयेंगी ?

 

Question 28. (क) असहायों से खेल कौन कर रहा है ? आशा को अफीम क्यों कहा है ?
(ख) सदियों की कुर्बानी यदि यों बेमोल बिकी' का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) देश के विकास के लिए कवि किस बात को आवश्यक मानता है ?
(घ) कविता की पंक्तियों में ऐसी घड़ियाँ' से किस ओर संकेत है ?
Answer:
(क) असहायों से खेल सत्ता में बैठे लोग, राजनेता और शोषक वर्ग कर रहा है। आशा को अफीम इसलिए कहा गया है क्योंकि यह लोगों को झूठी दिलासा देकर उन्हें निष्क्रिय कर देती है, जिससे वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष नहीं करते।
(ख) “सदियों की कुर्बानी यदि यों बेमोल बिकी' का आशय स्पष्ट कीजिए- यदि देश की आज़ादी के लिए दिए गए सदियों के बलिदान व्यर्थ चले जाएँ और उनका कोई महत्व न रहे, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। यह बलिदानों के मूल्य को कम आंकना है।
(ग) देश के विकास के लिए कवि यह आवश्यक मानता है कि जनता जागरूक हो, अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो, और पुराने बलिदानों का सम्मान करते हुए भविष्य के लिए कर्म करे। वह निष्क्रियता को त्यागने को कहता है।
(घ) कविता की पंक्तियों में 'ऐसी घड़ियाँ' से देश के स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद आए स्वर्णिम अवसर की ओर संकेत है। यह मौका है जब देश प्रगति कर सकता था।
In simple words: (क) सत्ता में बैठे लोग असहायों से खेल रहे हैं। आशा को अफीम कहा गया है क्योंकि यह झूठी उम्मीदें देकर लोगों को शांत कर देती है। (ख) "सदियों की कुर्बानी यदि यों बेमोल बिकी" का मतलब है कि अगर देश के लिए किए गए पुराने बलिदान बेकार हो जाएं। (ग) देश के विकास के लिए कवि चाहता है कि जनता जागरूक हो और मेहनत करे। (घ) कविता में "ऐसी घड़ियाँ" का मतलब है आज़ादी के बाद का वो सुनहरा समय जब देश तरक्की कर सकता था।

🎯 Exam Tip: सामाजिक अन्याय, ऐतिहासिक बलिदान और राष्ट्रीय विकास पर आधारित प्रश्नों में, कवि के आक्रोश, चेतावनी और भविष्य के लिए संदेश को स्पष्ट करें।

(29)
आओ, मिलें सब देश बांधव हार बनकर देश के,
साधक बनें, सच प्रेम से सुख शान्तिमय उद्देश्य के।
क्या साम्प्रदायिक भेद से है ऐक्य मिट सकता अहो,
बनती नहीं क्या एक माला विविध सुमनों की कहो।
रक्खो परस्पर मेल, मन से छोड़कर अविवेकता,
मन का मिलन ही मिलन है, होती उसी से एकता।
सब बैर और विरोध का बल-बोध से वारण करो।
है भिन्नता में खिन्नता ही, एकता धारण करो।
है कार्य ऐसा कौन-सा साधे न जिसको एकता,
देती नहीं अद्भुत अलौकिक शक्ति किसको एकता।
दो एक एक एकादश हुए किसने नहीं देखे सुने,
हाँ, शून्य के भी योग से हैं अंक होते दश गुने।

 

Question 29. (क) कवि ने भारत की साम्प्रदायिक विविधता की तुलना किससे की है ?
(ख) एकता के लिए कवि ने कौन-सी बातें आवश्यक बताई हैं?
(ग) “दो एक एकादश हुए' से कवि का क्या आशय है ?
(घ) कवि ने एकता की क्या-क्या विशेषताएँ बताई हैं?
Answer:
(क) कवि ने भारत की साम्प्रदायिक विविधता की तुलना अनेक प्रकार के फूलों से बनी हुई माला से की है। जिस प्रकार अनेक प्रकार के फूलों से एक माला बन सकती है उसी प्रकार भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों के अनुयायी भी एकता से रह सकते हैं। यह 'अनेकता में एकता' का सुंदर उदाहरण है।
(ख) एकता के लिए कवि ने अज्ञान त्यागकर मन से मन को मिलाना तथा सब प्रकार के बैर और विरोध को बल और विवेक द्वारा त्याग देना आवश्यक बताया है। सच्ची एकता तभी आती है जब लोग मन से जुड़ते हैं।
(ग) “दो एक एकादश हुए' में कवि ने ' एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं' मुहावरे का काव्यात्मक प्रयोग किया है। इसका आशय है- एकता से देश और समाज की शक्ति बढ़ती है। यह एकता के बड़े प्रभाव को दर्शाता है।
(घ) एकता से हर काम में सफलता मिलती है। मन की खिन्नता दूर हो जाती है, एकता से एक अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है। एक और एक मिलकर ग्यारह के बराबर हो सकते हैं। यह एकता के अनेक लाभ हैं।
In simple words: (क) कवि ने भारत की विभिन्न संस्कृतियों की तुलना फूलों की माला से की है, जैसे अलग-अलग फूल मिलकर एक माला बनाते हैं। (ख) एकता के लिए कवि ने कहा है कि हमें अपनी नासमझी छोड़नी होगी, मन से मन मिलाना होगा और सभी दुश्मनी त्यागनी होगी। (ग) "दो एक एकादश हुए" का मतलब है कि जब लोग एक साथ आते हैं, तो उनकी शक्ति बहुत बढ़ जाती है। (घ) कवि ने बताया है कि एकता से काम सफल होते हैं, मन की उदासी दूर होती है, और एक अद्भुत शक्ति मिलती है।

🎯 Exam Tip: एकता और विविधता पर आधारित प्रश्नों में, 'अनेकता में एकता' के विचार को स्पष्ट करें और सामाजिक सौहार्द के महत्व को उजागर करें।

(30)
थी रही रुग्ण पली कराह ।
उसके थे बच्चे तीन, जिन्हें माँ-बाप का मिला प्यार न था,
जो थे जीवन के व्यंग्य, जिन्हें मरने का भी अधिकार न था.
थे क्षुधाग्रस्त बिलबिला रहे, मानो वे मोरी के कीड़े,
वे निपट घिनौने महापतित, बौने, कुरूप, टेढ़े-मेढ़े !
उसका कुटुम्ब था भरा-पुरा आहों से हाहाकारों से;
फाकों से लड़-लड़कर प्रतिदिन, घुट-घुटकर अत्याचारों से।
तैयार किया था उसने ही
अपना छोटा-सा एक खेत !

 

Question 30. (क) 'कवि ने हृष्ट-पुष्ट समर्थ कर्ता-हर्ता' किन्हें कहा है? 'हिलता-ढुलता कंकाल' में किसकी ओर संकेत है ?
(ख) किसान ने अपने खेत को किस प्रकार तैयार किया था ?
(ग) कवि ने किसान की पत्नी तथा उसके बच्चों की दशा का क्या वर्णन इन पंक्तियों में किया है ?
(घ) 'उसका कुटुम्ब था भरा-पूरा आहों से हाहाकारों से' कहने का तात्पर्य क्या है ?
Answer:
(क) कवि ने 'हृष्ट-पुष्ट समर्थ कर्ता-हर्ता' पूँजीपतियों, जमींदारों तथा साहूकारों को कहा है। 'हिलता दुलता कंकाल' में कवि ने भारत के दीन-दुर्बल किसान की ओर संकेत किया है। यह शोषण करने वालों और शोषितों के बीच के अंतर को दर्शाता है।
(ख) किसान ने अपने खेत को पिछले चार महीने मेहनत करके तैयार किया था। उसने खेत में गेहूं की फसल उगाई थी और भूख-प्यास से आह भरते हुए अपना खून सुखाकर उस फसल को तैयार किया था। उसने अपनी बीमार पत्नी तथा भूखे-प्यासे बच्चों पर भी ध्यान नहीं दिया था। यह उसके अथक परिश्रम को दर्शाता है।
(ग) किसान की पत्नी बीमार थी। किसान के पास उसके इलाज के लिए न पैसे थे न समय। उसके तीन बच्चों को माँ-बाप का प्यार भी नहीं मिला था। वे भूख-प्यास से नाली के कीड़ों की तरह बिलबिला रहे थे। वे घिनौने, बौने, कुरूप और टेढ़े-मेढ़े थे। वह जी नहीं पा रहे थे। उनको मरने का भी हक नहीं था। यह उनके दुखद जीवन का मार्मिक चित्रण है।
(घ) किसान का कुटुम्ब हाहाकारों तथा आहों से भरापुरा था। आशय यह है कि किसान के परिवार के सभी सदस्य भूख-प्यास तथा शोषण से व्याकुल थे। उनके मुँह से सदा आहें निकलती थीं। 'हाहाकारों तथा आहों से भरापूरा कुटुम्ब' में कवि ने पैना व्यंग्य किया है। यह उनकी दयनीय स्थिति को उजागर करता है।
In simple words: (क) कवि ने 'ताकतवर काम करने वाले' उन अमीर लोगों को कहा है जो दूसरों का शोषण करते हैं, जबकि 'हिलता-ढुलता कंकाल' गरीब और कमज़ोर किसान को दर्शाता है। (ख) किसान ने अपना खेत चार महीने की कड़ी मेहनत और खून-पसीना बहाकर तैयार किया था, यहाँ तक कि अपने परिवार की परवाह भी नहीं की। (ग) कवि ने बताया है कि किसान की पत्नी बीमार थी, बच्चे भूखे और प्यासे थे, जिन्हें माता-पिता का प्यार नहीं मिला, और वे मरने के अधिकार से भी वंचित थे। (घ) "उसका कुटुम्ब आहों और हाहाकारों से भरा था" का मतलब है कि किसान का पूरा परिवार भूख, प्यास और शोषण से बहुत दुखी था, और हमेशा दर्द में रहता था।

🎯 Exam Tip: किसानों की दुर्दशा, शोषण और गरीबी पर आधारित प्रश्नों में, मार्मिक चित्रण के साथ सामाजिक-आर्थिक विषमताओं को उजागर करें।

(31)
धरा-स्वर्ग की उपमा प्यारी,
मेवा और केसर की क्यारी,
वह काश्मीर हमारा जिसके हम सब हैं अभिमानी।
जो थे असि धारों पर लेटे,
आन-बान के कभी न हेठे,
शीश हथेली पर धर जूझे, ऐसे थे बलिदानी।

 

Question 31. (क) इस कविता के आधार पर भारतमाता के स्वरूप का वर्णन कीजिए।
(ख) कश्मीर पर भारतीयों को अभिमान क्यों है ?
(ग) भारत के सांस्कृतिक विकास में किस-किस का योगदान है ?
(घ) जो थे असि घाटों पर लेटे' का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) भारतमाता के माथे पर हिमालयरूपी मुकुट है। उसने हरियाली के रूप में धानी चादर ओढ़ रखी है। समुद्र उसकी चरण-वन्दना करता है। उसके हृदय में देवताओं का निवास है। भारत एक पवित्र और समृद्ध भूमि है।
(ख) कश्मीर धरती का स्वर्ग है। उसकी सुन्दरता अनुपम है। वहाँ अनेक मेवे तथा केसर पैदा होती है। भारतीयों को इस कारण उस पर गर्व है। यह भारत का गौरवशाली हिस्सा है।
(ग) भारत के सांस्कृतिक विकास में राम, कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरुनानक, आर्य दयानन्द तथा स्वामी विवेकानन्द जैसे महापुरुषों का योगदान है। इन सभी ने भारत की सभ्यता और संस्कृति को आगे बढ़ाया है।
(घ) इस काव्यांश का आशय है कि राजा प्रताप और वीर शिवाजी ने शत्रुओं की तलवारों का निर्भीकता से सामना किया था। उनका जीवन तलवार की धार पर चलने के समान वीरता से परिपूर्ण था। यह उनकी निडरता और बलिदान को दर्शाता है।
In simple words: (क) भारतमाता का माथा हिमालय है, उसने हरी साड़ी पहन रखी है, समुद्र उसके पैर धोता है, और उसके दिल में देवता रहते हैं। (ख) कश्मीर धरती पर स्वर्ग जैसा सुंदर है, और वहाँ मेवा तथा केसर उगते हैं, इसलिए भारतीयों को उस पर गर्व है। (ग) भारत के सांस्कृतिक विकास में राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, गुरुनानक और स्वामी विवेकानंद जैसे महान लोगों का योगदान है। (घ) "जो थे असि घाटों पर लेटे" का मतलब है कि महाराणा प्रताप और शिवाजी जैसे वीर योद्धाओं ने दुश्मनों की तलवारों का बहादुरी से सामना किया था।

🎯 Exam Tip: राष्ट्र के गौरव, सांस्कृतिक विरासत और वीरों के बलिदान पर आधारित प्रश्नों में, देश की गरिमा और उसके नायकों के योगदान को स्पष्ट करें।

(32)
नए युग में विचारों की नई गंगा बहाओ तुम,
कि सब कुछ जो बदल दे ऐसे तूफाँ में नहाओ तुम।
अगर तुम ठान लो तो आँधियों को मोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तारे गगन के तोड़ सकते हो
अगर तुम ठान लो तो विश्व के इतिहास में अपने-
सुयश का एक नव अध्याय भी तुम जोड़ सकते हो,
तुम्हारे बाहुबल पर विश्व को भारी भरोसा है –
उसी विश्वास को फिर आज जन-जन में जगाओ तुम।
पसीना तुम अगर इस में अपना मिला दोगे,
करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दिला दोगे।
तुम्हारी देह के श्रम-सीकरों में शक्ति है इतनी
कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे।
नया जीवन तुम्हारे हाथ का हल्का इशारा है।
युवाशक्ति से ही नया भारत बनेगा।

 

Question 32. (क) भारतीय युवक यदि दृढ़ निश्चय कर लें तो आँधियों को मोड़ सकते हैं, आकाश के तारे तोड़ सकते हैं तथा संसार के इतिहास में यशस्वी लोगों में अपना नाम लिखा सकते हैं। इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ख) नवयुवकों से आग्रह किया जा रहा है कि वे विचारों की नई गंगा बहा दें तथा ऐसा तूफान उठायें जो सब कुछ बदल दे। वे अपनी शक्ति पर संसार के विश्वास को और अधिक मजबूत करें। इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) युवक यदि परिश्रम करें तो करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दे सकते हैं। वे अपने पसीने से सींचकर धूल में भी सोने के फूल खिला सकते हैं। इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
(घ) 'कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे-' का आशय है कि नवयुवकों में अपार शक्ति होती है। वह जिस स्थान पर रहकर श्रम करते हैं, वह स्थान सफलता और सम्पन्नता से भर उठता है। वे अपने श्रम से अनुपजाऊ भूमि में भी लाभकारी फसलें पैदा कर सकते हैं? इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) भारतीय युवक यदि दृढ़ निश्चय कर लें तो आँधियों को मोड़ सकते हैं, आकाश के तारे तोड़ सकते हैं तथा संसार के इतिहास में यशस्वी लोगों में अपना नाम लिखा सकते हैं। इसका आशय यह है कि युवाओं में असीमित क्षमता है जिससे वे असंभव को संभव कर सकते हैं और इतिहास रच सकते हैं।
(ख) नवयुवकों से आग्रह किया जा रहा है कि वे विचारों की नई गंगा बहा दें तथा ऐसा तूफान उठायें जो सब कुछ बदल दे। वे अपनी शक्ति पर संसार के विश्वास को और अधिक मजबूत करें। इसका आशय है कि युवाओं को नए और क्रांतिकारी विचारों को अपनाना चाहिए और अपनी क्षमताओं से दुनिया को बदलना चाहिए।
(ग) युवक यदि परिश्रम करें तो करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दे सकते हैं। वे अपने पसीने से सींचकर धूल में भी सोने के फूल खिला सकते हैं। इसका आशय है कि युवाओं की मेहनत से गरीब और वंचित लोगों के जीवन में खुशहाली आ सकती है और वे असंभव लगने वाले काम भी पूरे कर सकते हैं।
(घ) 'कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे-' का आशय है कि नवयुवकों में अपार शक्ति होती है। वह जिस स्थान पर रहकर श्रम करते हैं, वह स्थान सफलता और सम्पन्नता से भर उठता है। वे अपने श्रम से अनुपजाऊ भूमि में भी लाभकारी फसलें पैदा कर सकते हैं। यह युवाओं की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाता है।
In simple words: (क) अगर भारतीय युवा ठान लें, तो वे बड़े-बड़े काम कर सकते हैं, जैसे आँधियाँ मोड़ना या तारे तोड़ना, और इतिहास में अपना नाम बनाना। (ख) युवाओं से कहा जा रहा है कि वे नए विचार लाएं और दुनिया को बदलने वाला बदलाव लाएं, जिससे दुनिया उनकी शक्ति पर भरोसा करे। (ग) अगर युवा मेहनत करें, तो वे लाखों गरीब लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं, और अपनी मेहनत से बंजर ज़मीन को भी उपजाऊ बना सकते हैं। (घ) "कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे" का मतलब है कि युवाओं की मेहनत में इतनी ताकत है कि वे किसी भी जगह पर काम करके उसे सफल और समृद्ध बना सकते हैं।

🎯 Exam Tip: युवा शक्ति और परिवर्तन पर आधारित प्रश्नों में, युवाओं के दृढ़ संकल्प, नवीन विचारों और उनके द्वारा लाए जा सकने वाले सकारात्मक बदलावों को उजागर करें।

(33)
आज सब प्रतिमान दागी हो गए।
क्या करें उपमान दागी हो गए।
अब किसे सौंपो जलधि का अभियान ये
आज सब जलयान दागी हो गए।
शुभ्र शिखरों पर चढ़ी है कालिमा।
तमस ने घेरी प्रभाती लालिमा।
भर गई अपराध बोधी धुंध सी,
पंथ के संचयन दागी हो गए।
आज रोगी तो हंसों बिंदु पर।
नील टूटा रोग खदेड़ हम किंतु पर
प्रात से पहले घिरी इस साँझ में,
दिवस के दिनमान दागी हो गए।

 

Question 33. (क) आज देश के सामने कौन सी विकट समस्या है?
(ख) 'आज सब जलयान दागी हो गए' से कवि का क्या आशय है?
(ग) शुभ्र शिखरों पर कालिमा चढ़ने में कवि ने क्या संकेत किया है?
(घ) “नाव टूटी' का प्रतीकार्थ क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) आज देश के सामने देश के नेताओं और मार्गदर्शकों के भ्रष्ट हो जाने की विकट समस्या है। जनता के सामने कोई ऐसा आदर्श पुरुष नहीं जिसे सामने रखकर वह सही मार्ग चुन सके। यह देश में नेतृत्व के संकट को दर्शाता है।
(ख) कवि को इस पंक्ति से आशय है कि सभी राजनीतिक दलों में भ्रष्ट और अपराधी लोग जमे हुए हैं। ऐसे में देश को समस्याओं से पार लगाने का दायित्व वह किसे सौंपे ? यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
(ग) कवि ने संकेत किया है कि ऊँचे-ऊँचे पदों पर आसीन और महिमा मण्डित लोग भी दागी हो रहे हैं। सब पर कोई न कोई आरोप लगा है। यह भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है।
(घ) 'नाव टूटी' का प्रतीकार्थ है-निराश हृदय लोग या अपर्याप्त साधन जिनसे समस्याओं का हल सम्भव नहीं है। टूटी नौका से समुद्र पार नहीं किया जा सकता, वैसे ही कमज़ोर साधनों से देश की समस्याएं हल नहीं होंगी।
In simple words: (क) आज देश के सामने बड़ी समस्या यह है कि नेता और मार्गदर्शक भ्रष्ट हो गए हैं, जिससे जनता को सही रास्ता नहीं मिल रहा। (ख) "आज सब जलयान दागी हो गए" का मतलब है कि सभी राजनीतिक दल भ्रष्ट और अपराधी हो गए हैं, जिससे देश की समस्याओं को हल करना मुश्किल हो गया है। (ग) "शुभ्र शिखरों पर कालिमा चढ़ने" का मतलब है कि ऊँचे पदों पर बैठे सम्मानित लोग भी भ्रष्टाचार में लिप्त हो गए हैं। (घ) "नाव टूटी" का मतलब है निराश लोग या अपर्याप्त साधन, जिनसे देश की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।

🎯 Exam Tip: भ्रष्टाचार, नेतृत्व संकट और सामाजिक समस्याओं पर आधारित प्रश्नों में, कवि के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें और सामाजिक पतन के कारणों को उजागर करें।

(34)
सिर की सिन्दूरी रेखाएँ, लुटी हुई गोदें,
पितृत्व, सहोदरता, मित्रताएँ।
वाहनों से बरसता यह मानवी विनाश !

 

Question 34. (क) कवि ने सड़कों, राजमार्गों और हाइवे को क्या कहा है और क्यों?
(ख) सड़कों पर रोज कौन बिलखते हैं?
(ग) “त्वरा का, रफ्तार का मूढ़ उन्माद' से कवि का आशय क्या है?
(घ) कवि ने प्रगति और विकास पर क्या व्यंग्य किया है?
Answer:
(क) कवि ने सड़कों, राजमार्गों और हाइवे को खूनी, कातिल और रक्त का प्यासा कहा है क्योंकि इन पर रोज वाहनों की दुर्घटनाएँ होती हैं जिसमें निर्दोष लोग मारे जाते हैं। यह सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं की भयावहता को दर्शाता है।
(ख) सड़कों पर विधवा हो गई पत्नियाँ, माताएँ, पिता, भाई और मित्र बिलखते नजर आते हैं क्योंकि इनके प्रियजनों की दुर्घटनाओं में मृत्यु हो जाती है। यह मानवीय पीड़ा और नुकसान को दर्शाता है।
(ग) कवि का आशय है कि सड़कों पर रोज भीषण और हृदय विदारक दुर्घटनाएँ घटित होती हैं फिर भी वाहन चालक तेज रफ्तार और असावधानी से वाहन चलाते रहते हैं। यह लापरवाही और जल्दबाज़ी की निंदा करता है।
(घ) कवि ने प्रगति और विकास के नाम पर लोगों के इतनी संख्या में रोज मारे जाने पर व्यंग्य किया है। प्रगति और विकास से तो लोगों को सुखी और सुरक्षित होना चाहिए न कि अकाल मृत्यु का ग्रास बनना चाहिए। यह विकास के विरोधाभास को उजागर करता है।
In simple words: (क) कवि ने सड़कों को खूनी और रक्त का प्यासा कहा है क्योंकि उन पर रोज़ दुर्घटनाएं होती हैं और लोग मरते हैं। (ख) सड़कों पर रोज़ विधवा पत्नियाँ, माताएँ, पिता, भाई और दोस्त रोते हैं, क्योंकि उनके अपने लोग दुर्घटनाओं में मर जाते हैं। (ग) "तेज़ रफ़्तार का मूर्ख पागलपन" का मतलब है कि लोग सड़कों पर बहुत तेज़ और लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं, जिससे रोज़ भयानक दुर्घटनाएं होती हैं। (घ) कवि ने तरक्की और विकास पर व्यंग्य किया है। उसका कहना है कि तरक्की से लोगों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, न कि मौत।

🎯 Exam Tip: सड़क सुरक्षा, मानवीय त्रासदी और आधुनिक जीवन की विडंबनाओं पर आधारित प्रश्नों में, सामाजिक संदेश और कवि के व्यंग्य को स्पष्ट करें।

(35)
पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,
पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार बार
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पड़ा ताल
दर्पण सा फैला है विशाल
गिरि के गौरव गाकर झर-झर
मद में नस-नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों से मुंदर
झरते हैं झाग भरे निर्झर।

 

Question 35. (क) प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) पर्वत अपनी सहस्र दृग सुमन' नेत्रों से क्या देख रहा है?
(ग) पर्वत के चरणों में विशाल तालाब जल से भरा हुआ लहरा रहा है, जो पर्वत मे बहने वाले झरनों से ही बना है। इस कथन का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
(घ) भावार्थ-कवि पहाड़ से बहने वाले निर्झरों का वर्णन करते हुए कहता है कि झरने अपने झागों से भरे जल के साथ पहाड़ से नीचे झरते हैं तो ऐसा लगता है मानो वे मोतियों की लड़ियों से बनी सुंदर मालाएँ हों। इस कथन का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक 'पर्वत प्रदेश में पावस' या 'प्रकृति का अनुपम सौंदर्य' हो सकता है। यह शीर्षक कविता के मुख्य विषय को दर्शाता है।
(ख) पर्वत अपनी 'सहस्र दृग सुमन' नेत्रों से नीचे जल में अपने विशाल रूप को बार-बार देख रहा है। वह अपनी भव्यता का अनुभव कर रहा है।
(ग) पर्वत के चरणों में विशाल तालाब जल से भरा हुआ लहरा रहा है, जो पर्वत से बहने वाले झरनों से ही बना है। यह तालाब पर्वत के लिए एक दर्पण का काम कर रहा है, जिसमें वह अपनी छवि देखता है। यह प्रकृति के आपसी जुड़ाव को दर्शाता है।
(घ) कवि पहाड़ से बहने वाले निर्झरों का वर्णन करते हुए कहता है कि झरने अपने झागों से भरे जल के साथ पहाड़ से नीचे झरते हैं तो ऐसा लगता है मानो वे मोतियों की लड़ियों से बनी सुंदर मालाएँ हों। यह झरनों की सुंदरता और गतिशीलता को एक अद्भुत उपमा से व्यक्त करता है।
In simple words: (क) इस कविता का सही नाम 'पर्वत प्रदेश में बारिश' हो सकता है। (ख) पर्वत अपनी हज़ारों फूल जैसी आँखों से नीचे पानी में अपना विशाल रूप बार-बार देख रहा है। (ग) पर्वत के चरणों में एक बड़ा तालाब है, जो झरनों के पानी से भरा है, और यह तालाब पर्वत के लिए आईने का काम करता है। (घ) कवि कहता है कि जब झरने झाग भरे पानी के साथ पहाड़ से नीचे गिरते हैं, तो वे मोतियों की माला जैसे सुंदर लगते हैं।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक सौंदर्य और मानवीकरण पर आधारित प्रश्नों में, कवि द्वारा उपयोग किए गए प्रतीकों और उपमाओं को स्पष्ट करें, साथ ही प्रकृति के चित्रण की सुंदरता को भी उजागर करें।

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