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Detailed Chapter 20 भक्ति आंदोलन और तुलसीदास RBSE Solutions for Class 12 Hindi
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Class 12 Hindi Chapter 20 भक्ति आंदोलन और तुलसीदास RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. स्वतंत्रता आन्दोलन से अलग भारत का सर्वाधिक प्रसिद्ध आन्दोलन है?
(क) मुस्लिम आन्दोलन
(ख) खिलाफत आन्दोलन
(ग) भक्ति आन्दोलन
(घ) अंग्रेजी आन्दोलन।
Answer: (ग) भक्ति आन्दोलन
In simple words: स्वतंत्रता के लिए चले आंदोलनों के अलावा, भारत में भक्ति आंदोलन सबसे अधिक जाना जाता है। इस आंदोलन ने लोगों को धार्मिक और भावनात्मक रूप से जोड़ा।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही विकल्प का चयन करते समय, प्रश्न के मुख्य विषय और ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखें।
Question 2. तुलसी के आराध्य देव कौन थे?
(क) श्रीराम
(ख) श्री कृष्ण
(ग) शिव
(घ) ब्रह्मा
Answer: (क) श्रीराम
In simple words: तुलसीदास जी भगवान राम को अपना आराध्य मानते थे और उनकी भक्ति करते थे। उन्होंने राम के जीवन पर बहुत कुछ लिखा।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध कवियों और उनके आराध्य देवों या विषयों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. डॉ. रामविलास शर्मा के अनुसार भारत का श्रेष्ठ भक्त कवि कौन है?
Answer: डॉ. रामविलास शर्मा के अनुसार, भारत के सबसे महान भक्त कवि तुलसीदास हैं। तुलसीदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति और नैतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया।
In simple words: डॉ. रामविलास शर्मा ने तुलसीदास को भारत का श्रेष्ठ भक्त कवि माना है।
🎯 Exam Tip: जब किसी विद्वान के मत के बारे में पूछा जाए, तो उनके नाम का उल्लेख करना और सीधे उनके विचार को प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. भारतीयों को भावात्मक और राष्ट्रीय एकता में बाँधने वाला प्रमुख आन्दोलन कौन-सा था?
Answer: भारतीयों को भावनात्मक और राष्ट्रीय एकता में जोड़ने वाला मुख्य आंदोलन भक्ति आंदोलन था। इस आंदोलन ने विभिन्न समुदायों के लोगों को एक साथ लाया।
In simple words: भक्ति आंदोलन ने भारतीयों को भावना और राष्ट्रीय स्तर पर एक किया।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन के सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व को उजागर करने वाले कीवर्ड्स का उपयोग करें।
Question 3. तुलसी साहित्य को कोई एक अन्य नाम दीजिए।
Answer: तुलसी साहित्य का एक अन्य नाम भक्ति-साहित्य है। यह नाम उनके लेखन के मूल विषय, भक्ति, को दर्शाता है।
In simple words: तुलसी के साहित्य को भक्ति-साहित्य भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक कृतियों के वैकल्पिक नामों या शैलियों को जानने से आपकी समझ बढ़ती है।
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. भक्ति आन्दोलन के प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
Answer: भक्ति आंदोलन के प्रमुख कवियों में कश्मीर से ललदेव, तमिलनाडु से आंदाल, बंगाल से चंडीदास, गुजरात से नरसी मेहता और उत्तर भारत से कबीर, जायसी, सूर और तुलसी शामिल हैं। इन सभी कवियों ने अपने भजनों और कविताओं से समाज को प्रेरित किया।
In simple words: भक्ति आंदोलन के मुख्य कवियों में ललदेव, आंदाल, चंडीदास, नरसी मेहता, कबीर, जायसी, सूर और तुलसी थे।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों और कवियों के नाम और उनके क्षेत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. भक्ति आन्दोलन से भारत की भावात्मक एकता कैसे मजबूत हुई?
Answer: भक्ति आंदोलन ने पूरे भारत में भावनात्मक एकता स्थापित की। यह आंदोलन गहराई तक फैला और भक्त कवियों ने भावनात्मक एकता को राष्ट्रीय एकता का आधार बनाया। यह एक अखिल भारतीय आंदोलन था, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों, राज्यों और जातियों की सांस्कृतिक धाराएँ एक साथ मिलीं। इस आंदोलन में जुलाहे, दर्जी, नाई जैसे विभिन्न वर्गों के लोग भी शामिल हुए, जिससे जातिगत भेदभाव कम हुआ। तुलसीदास और अन्य कवियों ने इन सभी भेदों को दूर करने की कोशिश की, जिससे लोगों में प्रेम और सद्भाव बढ़ा।
In simple words: भक्ति आंदोलन ने लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ा, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई। इस आंदोलन में सभी जातियों और क्षेत्रों के लोग शामिल हुए और भेदभाव कम हुआ।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन के सामाजिक एकीकरण, जातिगत समानता और राष्ट्रीय भावना के विकास पर जोर दें।
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. भक्ति आन्दोलन में तुलसी का योगदान विषयक विवेचना कीजिए।
Answer: भक्ति आंदोलन में तुलसीदास ने भावनात्मक एकता को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संत और भक्त को एक ही अर्थ में देखा और कर्मकांडों के बजाय प्रेम को महत्व दिया। तुलसीदास ने कहा, "रामहि केवल प्रेम पियारा, जानि लेउ जो जाननिहारा" (राम को केवल प्रेम प्यारा है, जो जानने वाला हो वह यह जान ले)। उन्होंने प्रेम के आधार पर मानव समाज को जोड़ने का प्रयास किया। उस समय जड़-चेतन, सगुण-निर्गुण और ज्ञान-भक्ति जैसे कई भेद मौजूद थे, लेकिन तुलसीदास ने इन भेदों को मिटाया। उन्होंने कहा, "अगुन-सगुन दुइ ब्रह्म स्वरूपा" (निर्गुण और सगुण दोनों ही ब्रह्म के रूप हैं), जिससे इन भेदों को मजबूत करने के बजाय एकता को बढ़ावा मिला। भक्ति आंदोलन एक अखिल भारतीय सांस्कृतिक आंदोलन था, और तुलसीदास का इसमें सबसे बड़ा योगदान था। उन्होंने वैष्णवों और शाक्तों, तथा निर्गुण और सगुण पंथियों को एकजुट किया। तुलसीदास ने भक्ति के माध्यम से आम लोगों के लिए धर्म को सरल और सुगम बनाया। वे मानवीय करुणा के कवि थे; उनके राम दीनबंधु हैं, जिन्होंने शबरी, गीध और वानरों को भी गले लगाया। वनवासी कोल-किरात, अभीर, स्वपच जैसे सभी लोग उनके दर्शन से मुक्ति पाते थे। उन्होंने राम को आराध्य मानकर आस्था का भवन निर्मित किया। तुलसी-साहित्य आत्मनिवेदन और विनय का साहित्य है, जिसका प्रभाव आज भी जनता पर है। उन्होंने प्रचलित मान्यताओं को नहीं माना और निष्क्रियता का साहित्य नहीं लिखा। तुलसीदास मानते थे कि राम का भक्त ही सुख की नींद सो सकता है। उनके काव्य में जनता की पीड़ा, विरोध की भावना और सुखी जीवन की कल्पना है।
In simple words: तुलसीदास ने भक्ति आंदोलन में प्रेम और एकता का संदेश फैलाया। उन्होंने सभी भेदों को मिटाकर सगुण और निर्गुण भक्ति को एक किया। उनके राम सभी के लिए दयालु थे, जिससे समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ा।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास के योगदान को बताते हुए उनके मुख्य सिद्धांतों जैसे प्रेम को महत्व देना, भेदभावरहित भक्ति, और समन्वयवादी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालें।
Question 2. भक्ति आन्दोलन ने भारत में जातिवाद को छिन्न-भिन्न कर दिया, समझाइए।
Answer: भक्ति आंदोलन ने भारत में भावनात्मक-सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता स्थापित की। यह एक अखिल भारतीय आंदोलन था जिसकी धारा पूरे भारत में फैली। इस आंदोलन ने संकीर्ण जातिवाद की जड़ों को हिला दिया। इसमें जुलाहे, दर्जी, नाई जैसे विभिन्न वर्ग के लोग शामिल थे, जिससे यह केवल एक जाति का आंदोलन नहीं रहा। उस समय जाति प्रथा आज जितनी मजबूत नहीं थी, जितना नामदेव दर्जी, सेनानाई, चोखा महार, रैदास और कबीर के समय में थी। शिक्षित लोगों में जातिवाद की संकीर्णता भी उतनी नहीं थी जितनी सूर और कबीर जैसे अनपढ़ भक्तों में थी। वर्णाश्रम धर्म और जाति प्रथा की तीखी आलोचना भक्ति साहित्य में मिलती है, जो आधुनिक साहित्य में भी उतनी नहीं है। उस समय भक्त और संत में कोई भेद नहीं था। यदि जाति प्रथा इतनी मजबूत होती, तो मलिक मुहम्मद जायसी जैसे कवि वेद-पुराण और कुरान सभी का आदर नहीं करते। आलवार संतों की ख्याति पूरे भारत में फैल गई थी। भक्ति आंदोलन एक अखिल भारतीय आंदोलन था जिसमें भावनात्मक और राष्ट्रीय एकता थी। आज के युग में भावनात्मक एकता की कमी है, और संकीर्ण प्रांतीयता बढ़ गई है। भक्ति साहित्य की विशालता आज नहीं है, लेकिन आज भी इसकी आवश्यकता है ताकि संकीर्णता को तोड़ा जा सके। आज जाति प्रथा मजबूत हो गई है, लेकिन भक्ति काल में इसमें इतनी दृढ़ता नहीं थी। विभिन्न जातियों के लोगों ने भक्ति आंदोलन में सहयोग दिया और अपनी अमृतवाणी से जनता के हृदय को सींचा। आज भी ऐसी एकता की आवश्यकता है। जातिगत भेदों को आलोचकों ने ही अधिक बढ़ाया है। उस समय राष्ट्रीय एकता की भावना अधिक थी। तुलसीदास ने राष्ट्रीय एकता के लिए लिखा है: "भलि भारत भूमि, भले कुल जन्म, समाज सरीर भलो लहि कै। जो भजै भगवान सयान सोई तुलसी दृढ़ चातक ज्यों गहि कै।" आज ऐसे ही भक्ति साहित्य की आवश्यकता है जो शिक्षित और अशिक्षित सभी में भक्ति साहित्य की तरह एकता स्थापित कर सके और जातिवाद की जटिल दीवारों को तोड़ सके। राम ने जिस तरह कोल, किरात, शबरी, वानर आदि को गले लगाया, उसी प्रकार सभी को आपस में प्रेम करना चाहिए। हिंदी और अन्य भाषाओं के साहित्य में भी समानता थी। आज ऐसे ही समान भावों के साहित्य की आवश्यकता है।
In simple words: भक्ति आंदोलन ने भारत में जातिवाद को कमजोर किया क्योंकि इसने सभी जातियों और वर्गों के लोगों को एक साथ जोड़ा। कवियों ने जातिगत भेदभाव की कड़ी आलोचना की, जिससे समाज में समानता बढ़ी।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में भक्ति आंदोलन के जातिगत भेदभाव को कम करने और सामाजिक समानता लाने वाले प्रभावों पर ध्यान दें। उदाहरण के तौर पर विभिन्न जातियों के कवियों के योगदान का उल्लेख करें।
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. डॉ. रामविलास शर्मा की दृष्टि में भारत के श्रेष्ठ भक्त कवि हैं
(क) सूरदास
(ख) तुलसीदास
(ग) रैदास
(घ) कबीरदास
Answer: (ख) तुलसीदास
In simple words: डॉ. रामविलास शर्मा के अनुसार, तुलसीदास भारत के सबसे महान भक्त कवि थे।
🎯 Exam Tip: विद्वानों के विशेष मतों को याद रखना सहायक होता है, खासकर जब वे किसी प्रमुख साहित्यिक व्यक्ति के बारे में हों।
Question 2. तुलसीदास ने जड़े हिला दीं
(a) नास्तिकों की मान्यता की।
(b) पुजारियों के अंधविश्वास की
(c) पण्डों की धारणा की
(d) पुरोहितों के धार्मिक अधिकार की।
Answer: (d) पुरोहितों के धार्मिक अधिकार की।
In simple words: तुलसीदास ने पुरोहितों के धार्मिक अधिकारों की नींव हिला दी क्योंकि उन्होंने धर्म को सभी के लिए सरल बना दिया।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास के सामाजिक सुधारों और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रयासों से संबंधित बिन्दुओं पर ध्यान दें।
Question 3. ईसा की दूसरी शताब्दी में कृष्णोपासना के चिह्न किस प्रदेश में पाए जाते हैं?
(क) आंध्र प्रदेश में
(ख) बिहार में
(ग) उत्तर प्रदेश में
(घ) गुजरात में।
Answer: (क) आंध्र प्रदेश में
In simple words: ईसा की दूसरी शताब्दी में कृष्ण की पूजा के प्रमाण आंध्र प्रदेश में मिले हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय इतिहास में विभिन्न धार्मिक परंपराओं के उद्गम स्थलों और कालखंडों को याद रखना सहायक है।
Question 4. भक्ति कवियों ने जनता को एक किया
(क) राजनीतिक रूप से
(ख) आध्यात्मिक रूप से
(ग) भावात्मक रूप से
(घ) राष्ट्रीय एकता के रूप से
Answer: (ग) भावात्मक रूप से
In simple words: भक्ति कवियों ने लोगों को उनकी भावनाओं के स्तर पर एक किया, जिससे उनमें जुड़ाव महसूस हुआ।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन के मुख्य प्रभाव को पहचानें - इसने लोगों को भावनात्मक रूप से एकजुट किया।
Question 5. जनता के नेताओं में, उनकी पार्टियों में तुलसी-युग की सी नहीं मिलती
(क) धार्मिक एकता
(ख) राजनीतिक एकता
(ग) भावात्मक एकता
(घ) राष्ट्रीय एकता।
Answer: (ग) भावात्मक एकता
In simple words: आज के नेताओं और पार्टियों में तुलसीदास के समय जैसी भावनात्मक एकता नहीं दिखती।
🎯 Exam Tip: प्रश्न को आधुनिक संदर्भ से जोड़कर देखें कि किस प्रकार तुलसीदास का युग आज के समय से अलग था।
Question 7. भक्ति काल की अपेक्षा आज किसमें अधिक दृढ़ता देखने को मिलती है?
(क) वर्ण व्यवस्था में
(ख) वर्ग भेद में
(ग) जाति प्रथा में
(घ) धार्मिक मान्यता में।
Answer: (ग) जाति प्रथा में
In simple words: भक्ति काल की तुलना में आज जाति प्रथा समाज में ज्यादा मजबूत दिखाई देती है।
🎯 Exam Tip: भक्ति काल और वर्तमान समाज के बीच जाति व्यवस्था की स्थिति की तुलना करें।
Question 8. निराला ने अपने निबन्धों में जिस कवि को रहस्यवादी कवि माना है, वह है।
(क) जायसी
(ख) सूरदास
(ग) कबीरदास
(घ) तुलसीदास
Answer: (घ) तुलसीदास
In simple words: निराला ने अपने लेखों में तुलसीदास को रहस्यवादी कवि कहा है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कवियों को दिए गए विशेषणों और उनके प्रति विद्वानों के मतों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. तुलसी के उपास्यदेव को प्रिय है -
(क) कर्मकाण्ड
(ख) प्रेम।
(ग) भक्ति
(घ) धर्म
Answer: (ख) प्रेम।
In simple words: तुलसीदास के आराध्य देव भगवान राम को प्रेम सबसे प्रिय है।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास की भक्ति भावना के मूल में प्रेम का महत्व समझने से प्रश्न का उत्तर देना आसान होगा।
RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. डॉ. रामविलास शर्मा ने तुलसी को भारत का श्रेष्ठ भक्त कवि क्यों माना है?
Answer: रामविलास जी ने तुलसीदास को भारत का सबसे अच्छा भक्त कवि माना है क्योंकि उन्होंने भक्ति को आधार बनाकर आम लोगों के लिए धर्म को सरल और सुगम बनाया। इस तरह उन्होंने पुरोहितों के धार्मिक अधिकारों की जड़ें हिला दीं। तुलसीदास ने सभी लोगों को भक्ति का मार्ग दिखाया।
In simple words: रामविलास शर्मा ने तुलसीदास को महान भक्त कवि इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने धर्म को आसान बनाया और पुरोहितों के प्रभाव को कम किया।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में रामविलास शर्मा की दृष्टि से तुलसीदास के सामाजिक और धार्मिक प्रभावों को स्पष्ट करें।
Question 2. लेखक ने तुलसी को मानवीय करुणा का कवि क्यों माना है?
Answer: लेखक ने तुलसीदास को मानवीय करुणा का कवि माना है क्योंकि तुलसीदास ने कोल, किरात, आभीर, जवन, खस, स्वपच जैसे सभी अंत्यज और अछूतों को भक्ति का अधिकारी माना। उन्होंने सभी को प्रेम और समानता का संदेश दिया।
In simple words: तुलसीदास को मानवीय करुणा का कवि कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सभी वंचित और अछूत लोगों को भक्ति का मार्ग दिखाया।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास की सार्वभौमिक प्रेम भावना और समाज के सभी वर्गों के प्रति उनकी दया को उजागर करें।
Question 3. तुलसी-साहित्य का सामाजिक महत्त्व किस पर निर्भर है?
Answer: तुलसी-साहित्य का सामाजिक महत्व भक्ति आंदोलन के सामाजिक महत्व पर निर्भर करता है। यह उससे पूरी तरह जुड़ा हुआ है। तुलसीदास के साहित्य ने समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा दिया।
In simple words: तुलसी के साहित्य का सामाजिक महत्व भक्ति आंदोलन के महत्व से जुड़ा है।
🎯 Exam Tip: तुलसी साहित्य के सामाजिक महत्व को भक्ति आंदोलन के व्यापक प्रभावों से जोड़कर समझाएँ।
Question 4. भक्त कवियों ने अपने युग में कौन-सा बड़ा कार्य किया?
Answer: भक्त कवियों ने अपने युग में विभिन्न प्रदेशों को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बांधने का बहुत बड़ा कार्य किया। उनके इस योगदान का मूल्य आंकना आसान नहीं है। उन्होंने लोगों को एक दूसरे के करीब लाया।
In simple words: भक्त कवियों ने अपने समय में लोगों को राष्ट्रीय एकता के धागे में बांधने का महान काम किया।
🎯 Exam Tip: भक्त कवियों के राष्ट्रीय एकीकरण और सांस्कृतिक महत्व पर जोर दें।
Question 5. तुलसीयुगीन साहित्यकार वर्तमान साहित्यकारों से किस प्रकार भिन्न है?
Answer: तुलसीदास के युग के साहित्यकार विभिन्न प्रदेशों की विचारधाराओं से एक-दूसरे से अधिक परिचित थे। आज के साहित्यकार उतने परिचित नहीं हैं। उनमें विचारों की भिन्नता है। तुलसीदास के समय में साहित्य में अधिक सामंजस्य था।
In simple words: तुलसीदास के समय के साहित्यकार एक-दूसरे के विचारों को ज्यादा जानते थे, जो आज के साहित्यकारों से अलग है।
🎯 Exam Tip: तुलसीयुगीन साहित्यकारों की तुलना करते समय, उनके विचारों की एकजुटता और अंतर-प्रांतीय पहचान पर जोर दें।
Question 6. 'अंग्रेजों ने संकीर्ण जातिवाद को दूर किया।' विद्वानों की इस मान्यता का लेखक रामविलास शर्मा ने किस प्रकार खण्डन किया?
Answer: लेखक रामविलास शर्मा ने इस मान्यता का खंडन करते हुए कहा है कि भक्ति आंदोलन के समय भक्त और संत में कोई भेदभाव नहीं था। यह भेदभाव आलोचकों ने ही बाद में किया है। तुलसीदास की पंक्ति 'बन्दउ संत समान चित, हित अनहित नहिं कोइ' (संतों और असंतों को समान चित्त से प्रणाम करता हूँ, क्योंकि उनमें हित-अहित का भाव नहीं होता) के अनुसार उनके लिए संत और भक्त शब्द पर्यायवाची थे। कबीर और जायसी ने भी इनमें कोई भेद नहीं किया। इस प्रकार, जातिवाद की संकीर्णता को दूर करने का श्रेय भक्ति आंदोलन को जाता है, न कि अंग्रेजों को।
In simple words: रामविलास शर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने नहीं बल्कि भक्ति आंदोलन ने जातिवाद को कम किया। भक्ति काल में संत और भक्त के बीच कोई भेदभाव नहीं था।
🎯 Exam Tip: रामविलास शर्मा के खंडन को स्पष्ट करते हुए भक्ति आंदोलन के सामाजिक प्रभावों को प्राथमिकता दें।
Question 8. भक्ति-आन्दोलन के कवियों में एक स्तर पर समानता दिखाई देती है। उसे स्पष्ट कीजिए।
Answer: कबीर, जायसी और तुलसी जैसे भक्ति आंदोलन के कवियों में एक सामान्य दार्शनिक भूमिका थी। इसी के अनुरूप उनके साहित्य की सामाजिक विषयवस्तु में भी बहुत बड़ी समानता है। उन्होंने सभी को प्रेम, एकता और भक्ति का संदेश दिया।
In simple words: भक्ति आंदोलन के कवि जैसे कबीर, जायसी और तुलसी की सोच और उनके लिखने का तरीका काफी मिलता-जुलता था।
🎯 Exam Tip: भक्ति कवियों के सामान्य दार्शनिक आधार और उनकी रचनाओं में सामाजिक समरूपता को उजागर करें।
Question 9. डॉ. रामविलास शर्मा ने तुलसीदास को मानवीय करुणा का अन्यतम कवि क्यों कहा है?
Answer: डॉ. रामविलास शर्मा ने तुलसीदास को मानवीय करुणा का अनुपम कवि कहा है क्योंकि तुलसीदास के राम दीनबंधु हैं। उन्होंने शबरी, गीध, बंदर, भालू जैसे सभी को गले लगाया। वनवासी कोल और किरात भी राम के दर्शन से प्रसन्न होते थे। तुलसीदास ने अपने काव्य के माध्यम से सभी के प्रति दया और प्रेम का भाव व्यक्त किया।
In simple words: तुलसीदास को मानवीय करुणा का कवि कहा जाता है क्योंकि उनके राम गरीबों और कमजोरों के प्रति बहुत दयालु थे, और उन्होंने सभी को अपनाया।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास के राम के चरित्र की मानवीय पहलुओं, उनकी दयालुता और सभी के प्रति समान व्यवहार को उजागर करें।
Question 10. तुलसी-साहित्य किस प्रकार का है?
Answer: तुलसी-साहित्य एक ओर आत्मनिवेदन और विनय का साहित्य है, तो दूसरी ओर यह प्रतिरोध का साहित्य भी है। तुलसीदास ने कई प्रचलित मान्यताओं को अस्वीकार करके अपना साहित्य रचा था। उनका साहित्य समाज को एक नई दिशा दिखाता है।
In simple words: तुलसीदास का साहित्य एक तरफ नम्रता और समर्पण दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ यह गलत बातों का विरोध भी करता है।
🎯 Exam Tip: तुलसी साहित्य के दोहरे स्वरूप को स्पष्ट करें: आत्मनिवेदन (भक्ति) और प्रतिरोध (सामाजिक सुधार)।
Question 11. तुलसी के राम उनकी भावनाओं के अनुरूप हैं। स्पष्ट कीजिए।
Answer: तुलसीदास के हृदय में जो प्रेम और आनंद का प्रवाह उमड़ता था, वही राम में साकार हो गया है। उन्होंने अपनी भावनाओं के अनुसार राम को प्रेममय और अपार करुणा से भरा हुआ देखा है। राम में हमें तुलसीदास की मानवीय छवि दिखाई देती है। भगवान राम का चरित्र तुलसीदास की अपनी आंतरिक भावनाओं का प्रतिबिंब है।
In simple words: तुलसीदास ने भगवान राम को अपनी भावनाओं के अनुसार प्रेम और करुणा से भरा हुआ देखा। राम का चरित्र तुलसीदास के हृदय का ही एक रूप है।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास के राम के चित्रण में उनके व्यक्तिगत भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय गुणों को दर्शाने पर ध्यान दें।
Question 12. तुलसीदास के काव्य का सामाजिक महत्त्व बताइए।
Answer: तुलसीदास के काव्य का सामाजिक महत्व यह है कि इसमें देश की करोड़ों जनता की पीड़ा, प्रतिरोध की भावना और सुखी जीवन की आकांक्षा व्यक्त हुई है। यह साहित्य आम लोगों के जीवन से जुड़ा है। भारत के नए जागरण का कोई भी महान कवि भक्ति-आन्दोलन और तुलसीदास से मुंह नहीं मोड़ सकता।
In simple words: तुलसीदास के काव्य का सामाजिक महत्व यह है कि इसमें आम जनता की दुःख, संघर्ष और खुशी की इच्छाओं को दिखाया गया है।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास के काव्य के सामाजिक महत्व को बताते हुए, यह स्पष्ट करें कि कैसे यह जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं को दर्शाता है।
Question 2. रामविलास शर्मा ने तुलसी-युग के साहित्यकारों की क्या विशेषता बताई है?
Answer: रामविलास शर्मा ने बताया है कि तुलसीदास के युग में विभिन्न प्रदेशों के साहित्यकार एक-दूसरे की विचारधाराओं से अधिक परिचित थे। आधुनिक युग के साहित्यकार एक-दूसरे की विचारधाराओं से उतने परिचित नहीं हैं। इससे यह साफ होता है कि हिंदी और अन्य भाषाओं के भक्ति साहित्य में समानता आकस्मिक नहीं है। यह समानता इसलिए थी क्योंकि वे दूसरे प्रदेशों के साहित्य से परिचित थे।
In simple words: रामविलास शर्मा के अनुसार, तुलसीदास के समय के साहित्यकार एक-दूसरे के विचारों को अच्छे से जानते थे, जो आज के साहित्यकारों में कम दिखता है।
🎯 Exam Tip: तुलसी-युग के साहित्यकारों की अंतर-प्रांतीय समझ और उनके विचारों के आदान-प्रदान के महत्व पर जोर दें।
Question 3. भक्ति-आन्दोलन की व्यापकता पर प्रकाश डालिए।
Answer: भक्ति-आंदोलन सीमित नहीं बल्कि बहुत व्यापक था। इस आंदोलन से भावनात्मक एकता स्थापित हुई और इसका फैलाव व गहराई दोनों बहुत अधिक थी। यह भावनात्मक एकता केवल पढ़े-लिखे वर्ग तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि प्रादेशिक भाषाओं के माध्यम से भी स्थापित हुई। भक्ति-आंदोलन अखिल भारतीय होने के साथ-साथ प्रादेशिक और जातीय आंदोलन भी था। देश और प्रदेश, राष्ट्र और जाति सभी की सांस्कृतिक धाराएँ एक साथ थीं। यही कारण है कि भक्ति-आंदोलन इतना व्यापक था।
In simple words: भक्ति आंदोलन पूरे भारत में फैला हुआ था और यह केवल एक जगह तक सीमित नहीं था। इसने भावनात्मक एकता बढ़ाई और सभी जाति-धर्म के लोगों को जोड़ा।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन की व्यापकता को समझाने के लिए, इसके अखिल भारतीय, प्रादेशिक और जातीय प्रभावों का उल्लेख करें।
Question 4. आधुनिक युग की अपेक्षा भक्ति-साहित्य में जाति प्रथा दृढ़ नहीं थी। स्पष्ट कीजिए।
Answer: जाति प्रथा वर्तमान समय में आधुनिक साहित्य में अधिक देखने को मिलती है। जाति प्रथा की इतनी मजबूती नामदेव दर्जी, सेना नाई, चोखा महार, रैदास और कबीर जुलाहे के समय में नहीं थी। भक्ति-आंदोलन में जुलाहे, दर्जी, नाई जैसे विभिन्न वर्ग के लोग सिमट गए थे। आज जैसी जातिगत दृढ़ता सूर और कबीर के पद गाने वाले अनपढ़ लोगों में भी नहीं है। वर्णाश्रम धर्म और जाति प्रथा की तीव्र आलोचना भक्ति-साहित्य में देखने को मिलती है। इससे पता चलता है कि भक्ति काल में जाति प्रथा उतनी मजबूत नहीं थी जितनी आज है।
In simple words: भक्ति साहित्य के समय जाति प्रथा आज जितनी मजबूत नहीं थी। उस समय विभिन्न जातियों के लोग भक्ति आंदोलन में शामिल होते थे और जातिगत भेदभाव कम था।
🎯 Exam Tip: भक्ति साहित्य में जाति प्रथा की स्थिति की तुलना आधुनिक युग से करते हुए, भक्ति काल में इसके लचीलेपन पर जोर दें।
Question 5. भक्त और सन्त के सम्बन्ध में भक्त कवियों की मान्यता स्पष्ट कीजिए।
Answer: भक्त और संत के बीच के भेद को आधुनिक आलोचकों ने अधिक किया है। भक्त कवियों ने इनमें इतना भेद नहीं किया। स्वयं भक्त और संत कवि भक्तों और संतों में भेद नहीं करते थे। तुलसीदास ने लिखा- 'बन्दउ सन्त समान चित, हित अनहित नहि कोइ' (मैं संत और असंत को समान चित्त से प्रणाम करता हूँ, क्योंकि उनमें हित-अहित का भाव नहीं होता)। तुलसीदास के लिए भक्त और संत शब्द पर्यायवाची थे। कबीर ने भी इनमें कोई भेद नहीं किया। उन्होंने भी एक समान विचारधारा प्रस्तुत की।
In simple words: भक्ति कवियों के लिए भक्त और संत में कोई फर्क नहीं था। वे दोनों को एक समान मानते थे और उनके बीच कोई भेदभाव नहीं करते थे।
🎯 Exam Tip: भक्त और संत की अवधारणा में समानता को उजागर करें, और आधुनिक आलोचना से इसकी भिन्नता पर ध्यान दें।
Question 6. भक्ति-साहित्य में प्रेम तत्त्व के दर्शन होते हैं, समझाइए।
Answer: भक्ति साहित्य लोक धर्म की स्थापना करता है, जिसका आधार प्रेम है। कबीर, जायसी, तुलसी जैसे कवि रहस्यवादियों की तरह ज्ञान-नेत्र खुलने पर आनंद से भर जाते हैं, और इस आनंद को वे मानव-प्रेम से जोड़ देते हैं। जायसी ने प्रेम के संबंध में लिखा है – 'लेसा हिये प्रेम कर दिया, उठी जोति भा निरमल हिया।' (हृदय में प्रेम का दीपक जला, तो निर्मल ज्योति उठ खड़ी हुई)। तुलसीदास भी ज्ञान-नेत्र खुलने पर प्रेम की बात करते हैं। ज्ञान-नेत्र खुलने पर जो प्रकाश दिखता है, उसमें प्रेम का प्रवाह ही उमड़ता है। प्रेम की यही भावनात्मक एकता कबीर, जायसी, सूर और तुलसी को एक सामान्य भावभूमि पर लाकर खड़ा कर देती है। तुलसीदास के आराध्य देव राम को भी प्रेम ही प्रिय है। वे लिखते हैं – 'रामहि केवल प्रेम पियारा। जानि लेउ जो जाननि हारा।।' (राम को केवल प्रेम प्यारा है, जो जानने वाला हो वह यह जान ले)। यही प्रेम तत्व मानव-समाज को एक सूत्र में बांधता है।
In simple words: भक्ति साहित्य का मूल प्रेम है। कवियों ने प्रेम को ज्ञान और आनंद से जोड़ा, जिससे लोग आपस में जुड़ सकें। भगवान राम को भी प्रेम प्रिय था, जिससे समाज में एकता आई।
🎯 Exam Tip: भक्ति साहित्य में प्रेम के विभिन्न रूपों (मानव-प्रेम, ईश्वरीय प्रेम) और उसके सामाजिक एकीकरण के प्रभाव को समझाएँ।
Question 7. भक्ति-आन्दोलन के कवियों ने विरोधी तत्त्वों में एकरूपता कैसे स्थापित की?
Answer: आधुनिक काल में जड़ और चेतन, सगुण और निर्गुण, ज्ञान और भक्ति जैसे भेद देखने को मिलते हैं। आलोचकों के लिए ये भेद महत्वपूर्ण हो गए हैं। तुलसीदास के समय में इन भेदों में जटिलता और दृढ़ता नहीं थी। तुलसीदास और अन्य कवियों ने इन भेदों को मिटाने का प्रयत्न किया। जायसी ने लिखा है: 'परगट गुपूत सो सरब बिआपी। धरमी चीन्ह न चीन्है पापी।' (जो प्रकट है और जो छिपा है, वह सब जगह व्याप्त है; धर्मी पहचानता है और पापी नहीं पहचानता)। तुलसीदास ने इस भेद को मिटाते हुए यह भाव व्यक्त किया: 'अगुन सगुन दुई ब्रह्म सरूपा' (निर्गुण और सगुण दोनों ही ब्रह्म के रूप हैं)। निर्गुण और सगुण परस्पर विरोधी नहीं हैं, बल्कि एक ही सत्ता के दो पक्ष हैं। व्यक्त और अव्यक्त दोनों हैं। कबीर ने भी इसी मत का समर्थन करते हुए कहा है कि ये दो खंभे हैं।
In simple words: भक्ति कवियों ने सगुण और निर्गुण, ज्ञान और भक्ति जैसे विरोधी विचारों को एक किया। उन्होंने बताया कि ये सभी एक ही ईश्वर के अलग-अलग रूप हैं।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन के समन्वयवादी दृष्टिकोण को स्पष्ट करें, जिसमें विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक तत्वों को एकजुट किया गया।
Question 8. तुलसी-साहित्य का सामाजिक महत्त्व प्रतिपादित कीजिए।
Answer: तुलसीदास का साहित्य आत्मनिवेदन और विनय का साहित्य है। हमारे समाज पर इस साहित्य का गहरा प्रभाव पड़ा है। यह लोगों को नैतिक मूल्यों और सद्भावना की ओर प्रेरित करता है। तुलसीदास का साहित्य समाज में प्रेम, करुणा और एकता को बढ़ावा देता है।
In simple words: तुलसीदास के साहित्य ने समाज में नम्रता, भक्ति और प्रेम का संदेश फैलाया, जिससे लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
🎯 Exam Tip: तुलसी साहित्य के नैतिक, भावनात्मक और एकता स्थापित करने वाले सामाजिक प्रभावों को उजागर करें।
Question 9. तुलसी का साहित्य निष्क्रियता और जीवन की अस्वीकृत का साहित्य नहीं है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सामंती समाज के साहित्य की सबसे बड़ी कमजोरी उसका निष्क्रिय होना है, लेकिन तुलसीदास का साहित्य निष्क्रियता का साहित्य नहीं है। उनके धनुर्धर राम रावण का वध करने वाले पुरुषोत्तम हैं। तुलसीदास उन लोगों का मजाक उड़ाते हैं जो काम, क्रोध के भय के कारण रात को सो नहीं पाते हैं। केवल राम का भक्त ही चैन से सोता है। उनके सभी पात्र सक्रिय और आशावादी हैं, यहां तक कि बंदर और भालू भी सक्रिय और आशावादी दिखाए गए हैं। इससे पता चलता है कि तुलसी साहित्य जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है।
In simple words: तुलसी का साहित्य निष्क्रिय नहीं है, बल्कि यह सक्रियता और आशावाद सिखाता है। उनके पात्र हमेशा काम करते रहते हैं और जीवन में आगे बढ़ने का संदेश देते हैं।
🎯 Exam Tip: तुलसी साहित्य के सक्रिय और आशावादी स्वरूप को उजागर करें, जिसमें उनके पात्रों की भूमिका और जीवन के प्रति सकारात्मक संदेश शामिल हो।
Question 10. तुलसी के हृदय का प्रेम ही राम में साकार हो गया है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: तुलसीदास ने राम में जो जन्मभूमि के प्रति प्रेम, निर्धन और परित्यक्त जनों के प्रति प्रेम चित्रित किया है, वह अचानक नहीं है। स्वयं उनके हृदय में जो प्रेम उमड़ा था, वही राम में साकार हो गया है। उन्होंने कहा भी है- 'जाकी रही भावना जैसी। प्रभु मूरति देखी तिन तैसी।' (जिसकी जैसी भावना होती है, उसे प्रभु की मूर्ति वैसी ही दिखती है)। तुलसीदास ने अपनी भावना के अनुसार राम को प्रेममय और अपार करुणा से भरा हुआ देखा है। उनके राम अन्य कवियों के राम से भिन्न हैं। राम में हमें स्वयं तुलसीदास की मानवीय छवि दिखायी देती है। करुणामयी राम में कहीं तुलसी का चुनौती वाला स्वर दिखायी देता है। कहीं उनमें तुलसी की परिहासप्रियता दिखायी देती है। लक्ष्मण में यह परिहासप्रियता अधिक दिखायी देती है। रामचरितमानस के हर पात्र में तुलसीदास के मन का कुछ-न-कुछ अंश मौजूद है।
In simple words: तुलसीदास का गहरा प्रेम और भावनाएँ ही राम के रूप में प्रकट हुई हैं। उन्होंने राम को अपनी करुणा और प्रेम के अनुसार देखा, जिससे राम में उनकी अपनी मानवीय छवि दिखती है।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास के रामचरितमानस में उनके व्यक्तिगत भावनात्मक जुड़ाव और राम के चरित्र पर उनके प्रभाव को स्पष्ट करें।
Question 11. रामचरितमानस एक लोकप्रिय काव्य है। रामविलास शर्मा की इस धारणा को स्पष्ट कीजिए।
Answer: तुलसीदास की रचना रामचरितमानस लोक संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन गई है। रामचरितमानस को लोकप्रिय बनाने के लिए तुलसीदास ने किसी पंथ या संघ का सहयोग नहीं लिया। मिथिला के गाँवों से लेकर मालवा की भूमि तक जनता ने इस ग्रंथ को अपनाया। करोड़ों हिंदीभाषियों के लिए यह धर्मग्रंथ, नीतिग्रंथ और काव्यग्रंथ है। इसका एक अप्रत्यक्ष सामाजिक प्रभाव यह हुआ कि हिंदी भाषा जनता को संगठित करने में और उसमें जातीय एकता का भाव उत्पन्न करने में रामचरितमानस की अद्वितीय भूमिका रही। इसी कारण यह काव्य अधिक लोकप्रिय हो गया।
In simple words: रामचरितमानस बहुत प्रसिद्ध काव्य है क्योंकि तुलसीदास ने इसे आम जनता के लिए लिखा और इसने हिंदी भाषियों को एकजुट किया।
🎯 Exam Tip: रामचरितमानस की लोकप्रियता के कारणों को बताते हुए, इसके सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक एकीकरण में योगदान पर जोर दें।
Question 12. भक्ति-आन्दोलन और तुलसी-काव्य की सामाजिक महत्ता पर प्रकाश डालिए।
Answer: भक्ति-आंदोलन और तुलसीकाव्य का सामाजिक महत्व यह है कि इनमें देश की करोड़ों लोगों की व्यथा, प्रतिरोध की भावना और सुखी जीवन की आकांक्षा व्यक्त हुई है। भारत के नए जागरण का कोई भी महान कवि भक्ति-आंदोलन और तुलसीदास से विमुख नहीं हो सकता। यह जन-मानस का काव्य है। इन रचनाओं ने लोगों को एकजुट किया और समाज में सकारात्मक बदलाव लाए।
In simple words: भक्ति आंदोलन और तुलसी के काव्य ने समाज में लोगों की पीड़ा, संघर्ष और खुशी की उम्मीदों को दिखाया, जिससे यह बहुत महत्वपूर्ण बन गया।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन और तुलसी के काव्य की सामाजिक महत्ता को दर्शाते हुए, यह स्पष्ट करें कि कैसे इसने जनता की भावनाओं को आवाज़ दी और समाज को प्रभावित किया।
Question 2. निराला ने तुलसीदास को रहस्यवादी कवि क्यों कहा है?
Answer: निराला ने तुलसीदास को मूल रूप से रहस्यवादी कवि कहा है। इस धारणा के पीछे यह विचार था कि कबीर, जायसी, सूर और तुलसी की चेतना का एक सामान्य स्तर है। रहस्यवाद का सामाजिक महत्व असाधारण है। उनका रहस्यवाद अद्वैत ब्रह्म के साक्षात्कार का दावा करके अनेक धर्मों के स्थान पर लोकधर्म की स्थापना करता था। इस लोकधर्म का आधार प्रेम था। कबीर, जायसी, तुलसी जैसे कवि रहस्यवादियों की तरह ज्ञान-नेत्र खुलने पर आनंद से भर जाते हैं और इस आनंद को वे मानव-प्रेम से जोड़ देते हैं।
In simple words: निराला ने तुलसीदास को रहस्यवादी कवि कहा क्योंकि उन्होंने अद्वैत ब्रह्म और लोकधर्म की बात की, जिसे प्रेम के आधार पर स्थापित किया गया।
🎯 Exam Tip: निराला के मत को स्पष्ट करते हुए तुलसीदास के रहस्यवादी दर्शन, जैसे अद्वैत ब्रह्म और मानव-प्रेम से जुड़ाव को समझाएँ।
Question 3. भक्ति-आन्दोलन ने भावात्मक एकता एकता स्थापित की। स्पष्ट कीजिए।
Answer: भक्ति-आंदोलन से भावनात्मक एकता स्थापित हुई, जिसमें फैलाव और गहराई दोनों थी। यह एकता समाज के केवल थोड़े से शिक्षित लोगों तक सीमित नहीं थी। यह संस्कृत के माध्यम से स्थापित राष्ट्रीय और भावनात्मक एकता से भिन्न थी। यह एकता प्रादेशिक भाषाओं के माध्यम से स्थापित हुई। भक्ति-आंदोलन प्रादेशिक जातीय आंदोलन भी था। देश और प्रदेश, राष्ट्र और जाति दोनों की सांस्कृतिक धाराएँ एक साथ थीं। इसका कारण भक्ति आंदोलन की व्यापकता थी। इस आंदोलन में जुलाहे, दर्जी, नाई जैसे विभिन्न वर्ग के लोग भी जुड़े हुए थे। प्रेम की भावनात्मक एकता कबीर, जायसी, सूर और तुलसी जैसे कवियों को एक सामान्य भावभूमि पर लाकर खड़ा कर देती है।
In simple words: भक्ति आंदोलन ने भावनात्मक एकता स्थापित की, जो सभी भाषाओं, जातियों और प्रदेशों में फैली। इसने लोगों को प्रेम और सद्भाव के आधार पर एक किया।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन की भावनात्मक एकता के विभिन्न आयामों (भाषाई, प्रादेशिक, जातीय) को स्पष्ट करें।
Question 4. रामविलास शर्मा की दृष्टि में तुलसीदासे भारत के श्रेष्ठ भक्त कवि हैं। तुलसीदास की श्रेष्ठता बताइए।
Answer: रामविलास शर्मा ने तुलसीदास को भक्ति-आंदोलन का श्रेष्ठ कवि माना है। तुलसीदास ने निर्गुणपंथियों और सगुण मतावलंबियों को एक किया। उन्होंने वैष्णवों और शाक्तों को मिलाया। तुलसीदास ने भक्ति के आधार पर जनसाधारण के लिए धर्म को सरल और सुलभ बनाया तथा पुरोहितों के धार्मिक अंधविश्वासों की जड़ें हिला दीं। तुलसीदास मानवीय करुणा के श्रेष्ठ कवि हैं। उनके राम साधारण मानव नहीं, बल्कि दीनों के बंधु हैं। उन्होंने कोल, किरात, आभीर, जवन, खस, स्वपच आदि सभी अंत्यजों और अछूतों को भक्ति का उत्तराधिकारी माना। उनका साहित्य निष्क्रियता का साहित्य नहीं है। यह जीवन की अस्वीकृति का साहित्य भी नहीं है। इसी कारण रामविलास शर्मा ने तुलसीदास को भक्ति-आंदोलन का श्रेष्ठ कवि माना है।
In simple words: रामविलास शर्मा ने तुलसीदास को महान भक्त कवि माना क्योंकि उन्होंने भक्ति को सरल बनाया, सभी धर्मों को एक किया और गरीबों के प्रति दया दिखाई।
🎯 Exam Tip: तुलसीदास की श्रेष्ठता को उनके समन्वयवादी दृष्टिकोण, सामाजिक सुधारों और मानवीय करुणा के गुणों से जोड़कर समझाएँ।
लेखक - परिचय:
अंग्रेजी के प्रोफेसर होकर भी हिन्दी के प्रकांड विद्वान डा. रामविलास शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में स्थित उचगाँव सानी 10 अक्टूबर 1912 को हुआ। आपका निधन 30 मई 2000 को हुआ।
साहित्यिक परिचय -
डा. रामविलास शर्मा समर्थ प्रगतिशील आलोचक थे। आप ऋग्वेद और मार्क्स के अध्येता होने के साथ आलोचक, इतिहासवेत्ता भाषाविद् होने के साथ-साथ एक अच्छे कवि भी थे। आपकी आलोचना कट्टर रूप से मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर आधारित है। इनकी आलोचना में आदेशात्मक तथा निर्णयात्मक स्वर अधिक मुखरित है। आपके स्थापित प्रगतिशील आलोचना तथा साहित्य के मानदण्डों में स्थायित्व है। आपने सरल भाषा अपनाई थी। शैली में प्रचारात्मकता है। छोटी-सी बात को बढ़ाकर और दुरूह बात को सरल रूप में प्रस्तुत करने की शक्ति आपकी भाषा-शैली में अपार है। आपकी आलोचना में प्रगतिशील साहित्य, जनसाहित्य की दुहाई बहुत है।
रचनाएँ -
आपने सौ से अधिक पुस्तकें लिखीं। 'संस्कृति और हिन्दी प्रदेश', 'निराला की साहित्य साधना', 'भारतीय साहित्य की भूमिका', 'आस्था और सौन्दर्य', 'पश्चिमी एशिया और ऋग्वेद', 'साहित्य और संस्कृति', 'परम्परा का मूल्यांकन' आदि रचनाएँ प्रमुख रूप से प्रसिद्ध हैं। अज्ञेय द्वारा संपादित 'तार सप्तक' (1943 ई.) में एक कवि के रूप में अपनी रचनाएँ बहुत चर्चित हुईं।
पाठ - सार
तुलसीदास भारत के श्रेष्ठ कवि, भक्ति आंदोलन के निर्माता हैं। उनके साहित्य का सामाजिक महत्व भक्ति-आंदोलन के सामाजिक महत्व पर आधारित है। ऐसा व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन संसार में दूसरा नहीं हुआ। दूसरी शताब्दी में आंध्र प्रदेश में कृष्णोपासना के चिह्न पाए जाते हैं। गुप्त साम्राज्य में विष्णुनारायण-वासुदेव की उपासना ने अखिल भारतीय रूप ले लिया। भारत के विभिन्न प्रांतों में भक्ति कवि डेढ़ हजार वर्ष तक जनता के हृदय को सींचते रहे। यह भक्ति-आंदोलन ब्रह्मदेश, अफगानिस्तान और ईरान की सीमाओं पर रुक गया। सिंध, कश्मीर, पंजाब, बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्र, तमिलनाडु आदि में तीव्र वेग से यह धारा बहती रही। भक्त कवियों ने विभिन्न प्रदेशों को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बांधा। भक्ति की भावनात्मक एकता से जनता को एक किया। तुलसीदास के युग की सी भावनात्मक एकता आज देखने को नहीं मिलती। तुलसी के युग में विभिन्न प्रदेशों के साहित्यकार एक-दूसरे के विचारों से परिचित थे। हिंदी तथा अन्य भाषाओं के भक्ति-साहित्य में समानताएँ आकस्मिक नहीं हैं।
भक्ति आंदोलन से जो भावनात्मक एकता स्थापित हुई उसमें फैलाव और गहराई दोनों थीं। यह आंदोलन अखिल भारतीय और प्रदेशगत, जातीय आंदोलन भी था। देश और प्रदेश तथा राष्ट्र और जाति दोनों की सांस्कृतिक धाराएँ एक साथ थीं। अनेक विद्वान महत्वपूर्ण नहीं थे जितने आज आलोचकों को लगते हैं।
कठिन शब्दों का अर्थ:
- (पृष्ठ 120) उपलब्धि = प्राप्ति, समझ । संबद्ध = सम्बन्धित, जुड़ा हुआ।
- (पृष्ठ 121) वेग = प्रवाह। आँकना = अनुमान करना। आकस्मिक = सहसा होने वाला । सामर्थ्य = कुछ कर सकने की शक्ति, योग्यता। संकीर्ण = संकुचित, क्षुद्र, तुच्छ।
- (पृष्ठ 122) द्विजेतर = गैर ब्राह्मण। प्रतिपादित = निर्धारित । अद्वैत = परम ब्रह्म और जीव में कोई अन्तर नहीं देखने वाला सिद्धान्त। विद्वेष = विरोध। कर्मकाण्डी = विधिवत यज्ञादि कर्म करने वाला ब्राह्मण।
- (पृष्ठ 123) उपास्य = आराध्य। अन्यतम = बहुतों में से एक। मर्मान्तक = मन में चुभने वाला, मर्मभेदी।
विशेष
- साहित्यिक तत्सम शब्दावली का प्रयोग है।
- भक्ति आन्दोलन के प्रचार-प्रसार का वर्णन है।
- विभिन्न प्रान्तों के भक्तों का आन्दोलन में सहयोग वर्णित है।
- भक्ति आन्दोलन अखिल भारतीय आन्दोलन था।
विशेष
- भक्ति आन्दोलन ने भावात्मक एकता स्थापित की।
- भक्ति आन्दोलन व्यापक था।
- संस्कृत की अपेक्षा इसकी भावात्मक एकता अधिक व्यापक थी।
- इस एकता में विभिन्न वर्गों के लोग सम्मिलित थे।
विशेष
- तुलसी रहस्यवादी कवि थे।
- उनका रहस्यवाद अद्वैत ब्रह्म में विश्वास करता है।
- कबीर, जायसी, तुलसी अपने आनन्द को मानव-प्रेम से जोड़ते हैं।
विशेष
- भक्ति-आन्दोलन सर्वव्यापी था।
- तुलसी ने समन्वय की पद्धति अपनाई।
- तुलसी के राम दीनबन्धु थे।
- तुलसी ने अपने समय के भेदों का खण्डन किया।
विशेष
- तुलसी का किसी पन्थ या संघ से सम्बन्ध नहीं है।
- रामचरितमानस लोकप्रिय काव्य है यह सिद्ध किया है।
- रामचरितमानस समाज को संगठित करने और राष्ट्रीय एकता उत्पन्न करने वाला काव्य है।
विशेष
- तुलसी का साहित्य सक्रियता का और स्वीकृति का साहित्य है।
- कभी क्रोधी व्यक्ति निश्चिन्त नहीं रहता।
- राम का भक्त चैन से रहता है।
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