RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 18 अलोपी (संस्मरण)

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Detailed Chapter 18 अलोपी (संस्मरण) RBSE Solutions for Class 12 Hindi

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Class 12 Hindi Chapter 18 अलोपी (संस्मरण) RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. किसी भिखारी के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया होती है –
(क) क्रोध
(ख) उपेक्षा
(ग) करुणा
(घ) श्रद्धा
Answer: (क) क्रोध
In simple words: जब कोई भिखारी सामने आता है, तो अक्सर लोग गुस्सा दिखाते हैं। यह एक आम प्रतिक्रिया है।

🎯 Exam Tip: प्रश्नों के उत्तर देते समय सामाजिक व्यवहार और सामान्य मानवीय प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखें।

 

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अलोपी के चक्षु के अभाव की पूर्ति किसने की?
Answer: अलोपी की आँखों की कमी को उसकी जीभ (बोलने की शक्ति) ने पूरा किया था। वह अपनी बात कहकर दुनिया को समझता था।
In simple words: अलोपी की आँखों की कमी उसकी बोलने की शक्ति ने पूरी की।

🎯 Exam Tip: जब शारीरिक कमी की बात हो, तो ध्यान दें कि लेखक ने किस अन्य इंद्रिय या क्षमता को उसका विकल्प बताया है।

 

Question 2. 'अलोपी देवी कदाचित उस सूम के समान थी जो अपने दानी होने की ख्याति के लिए दान करता है। इस पंक्तियों द्वारा दानदाता की किस मनोभावना पर व्यंग्य किया गया है?
Answer: इन पंक्तियों के द्वारा दानदाता की यश (प्रसिद्धि) पाने की इच्छा पर व्यंग्य किया गया है। इसका मतलब है कि दान देने वाला केवल नाम कमाने के लिए दान करता है।
In simple words: इन पंक्तियों में दान करने वाले की सिर्फ तारीफ पाने की इच्छा पर व्यंग्य किया गया है।

🎯 Exam Tip: व्यंग्यात्मक प्रश्नों में, पंक्ति के पीछे छिपे हुए लेखक के मुख्य विचार या आलोचना को पहचानें।

 

Question 3. 'तुम कौन-सा काम कर सकते हो?' पूछने पर अलोपी ने अपने लिए किस कार्य का प्रस्ताव रखा?
Answer: अलोपी ने कहा कि वह महादेवी और उनके छात्रावास की लड़कियों के लिए ताजी और सस्ती सब्जियाँ लाया करेगा। यह उसका काम करने का प्रस्ताव था।
In simple words: अलोपी ने महादेवी और छात्रावास की लड़कियों के लिए ताजी सब्जियाँ लाने का प्रस्ताव दिया।

🎯 Exam Tip: संवाद पर आधारित प्रश्नों में, पात्र के सटीक प्रस्ताव या उत्तर को उद्धृत करना महत्वपूर्ण है।

 

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भिखारी को स्वर सुनकर लेखिका की क्या प्रतिक्रिया थी?
Answer: महादेवी ने द्वार पर किसी की आवाज सुनी। उन्होंने पहले सोचा कि वे न उठें और आने वाले को समय पर न आने की सजा मिलनी चाहिए। फिर उन्हें लगा कि कोई भिखारी आया होगा, और उसे वापस लौटाना असभ्यता होगी। इसलिए, अपनी सभ्यता बनाए रखने के लिए वह अपना काम छोड़कर उठीं और दरवाजे पर जाकर उसे आवाज दी।
In simple words: लेखिका ने भिखारी की आवाज सुनकर पहले उठना नहीं चाहा, पर बाद में असभ्य न लगने के लिए वे उठीं और उसे बुलाया।

🎯 Exam Tip: पात्रों की आंतरिक सोच और बाहरी प्रतिक्रियाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 2. 'हम सहज भाव से अपनी उलझी कहानी नहीं कह सकते।' दीन-हीन वर्ग और सम्पन्न वर्ग की जीवन कथा का अन्तर स्पष्ट करते हुए लेखिका के क्या विचार हैं?
Answer: राव-छिपाव तथा दोहरापन नहीं है। सम्पन्न वर्ग के जीवन में बाहर कुछ तो भीतर
In simple words: गरीब और अमीर लोगों की कहानियाँ अलग होती हैं। गरीब लोग अपनी कहानी छिपाते नहीं, जबकि अमीर लोग शायद अपनी बातें छिपाते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक वर्गों की तुलना करते समय लेखक के विचारों को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 4. 'गिरा अनयन नयन बिनु बानी' लेखिका इन शब्दों को किस सन्दर्भ में ठीक मानती है?
Answer: महादेवी ने नेत्रहीन अलोपी को छात्रावास में ताजी सब्जियाँ लाने का काम दिया था। अलोपी की आँखें नहीं थीं, लेकिन उसे बोलने की अच्छी कला आती थी। वह बच्चा रग्घू के साथ रोज छात्रावास आता था। ये दोनों छात्रावास में हँसी-मजाक का केंद्र बन गए थे। धीरे-धीरे अलोपी सबका पसंदीदा बन गया।
In simple words: लेखिका इन शब्दों को अलोपी के संदर्भ में देखती हैं क्योंकि उसकी आँखें नहीं थीं, पर वह बोलता बहुत अच्छा था।

🎯 Exam Tip: किसी कहावत या कथन को समझाते समय, उसे पाठ के मुख्य पात्र या घटना से जोड़कर स्पष्ट करें।

 

Question 5. लेखिका को यह विश्वास क्यों है कि अलोपी बिना भटके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाएगा?
Answer: एक दोपहर वैशाख की गर्मी में अलोपी अचानक महादेवी के पास आया था। उसने अपने ताऊ से महादेवी के छात्रावास के बारे में सुना था। वह बिना किसी की मदद के काम की तलाश में यहाँ आने में सफल रहा था। इसलिए, महादेवी को विश्वास था कि वह बिना भटके अपनी मंजिल तक पहुँच जाएगा।
In simple words: अलोपी बिना मदद के ही महादेवी के पास काम की तलाश में आ गया था, इसलिए लेखिका को उस पर भरोसा था कि वह अपनी मंजिल तक पहुँच जाएगा।

🎯 Exam Tip: पात्र के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को दर्शाने वाले तथ्यों को उत्तर में शामिल करें।

 

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. नेत्रहीन अलोपी न प्रकृति के रौद्र रूप से भयभीत होता था और न उसके सौन्दर्य से बहकता था। प्रत्येक स्थिति में दृढ़ता वे धैर्य से काम में संलग्न अलोपी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: अलोपी आँखों से देख नहीं सकता था। उसे प्रकृति का भयानक रूप या सुंदर और आकर्षक रूप दिखाई नहीं देता था। बारिश के मौसम में, बर्फ के तूफान जैसी बारिश, तेज बिजली और गरजते बादलों के बीच भी, वह अपनी फिसलती लाठी को कसकर पकड़े रहता था। वह सिर पर सब्जियों से भरी टोकरी उठाकर महादेवी के घर पहुँच जाता था। सर्दियों में, जब तेज ठंड और ठंडी हवा चलती थी, तो रग्घू के दाँत बजने लगते थे और वह मिर्गी के रोगी की तरह काँपता था। लेकिन अलोपी अपने दाँतों को कसकर बंद कर लेता था। ठंड के कारण उसके नाखून नीले पड़ जाते थे और पैरों की उंगलियाँ ऐंठ जाती थीं, फिर भी वह दृढ़ता से अपने पैरों को जमीन पर रखता था। तेज गर्मी उसकी धूल को उड़ा देना चाहती थी।
In simple words: अलोपी आँखों से देख नहीं सकता था, पर वह बहुत मेहनती और बहादुर था। चाहे कितनी भी तेज़ बारिश, ठंड या गर्मी हो, वह अपना काम पूरी लगन से करता था। वह प्रकृति से न डरता था और न ही उसके सौंदर्य में खो जाता था।

🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण करते समय पात्र के शारीरिक और मानसिक गुणों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 2. अलोपी देवी की दिव्यता प्रमाणित करने के लिए अलोपी ने क्या किया?
Answer: एक बार महादेवी जी को बुखार था। वे अपने कमरे में आराम कर रही थीं। आमतौर पर वे बरामदे में बैठकर काम करती थीं और अलोपी से थोड़ी बात करती थीं। कई दिनों तक महादेवी से कोई बात न होने पर अलोपी ने सोचा कि वे नाराज हो गई हैं। जब उसे पता चला कि महादेवी बीमार हैं, तो वह चिंतित हो उठा। एक दिन महादेवी को संदेश मिला कि अलोपी उनसे मिलना चाहता है। अलोपी आया और टटोलकर दरवाजे के पास बैठ गया। उसने अपनी गीली आँखें अपनी बाहों से पोंछीं और अपनी धोती की गाँठ खोलकर एक पुड़िया निकाली। उसने बहुत संकोच के साथ बताया कि वह खुद जाकर अलोपी देवी की भभूत (राख) लाया है। इसकी एक चुटकी जीभ पर रखने और एक चुटकी माथे पर लगाने से सभी रोग-दोष दूर हो जाते हैं। अलोपी भभूत देकर महादेवी को यह बताना चाहता था कि अलोपी देवी में दिव्य शक्ति है और उनकी भभूत सभी रोगों को दूर कर सकती है। लेकिन महादेवी की नजर में, अलोपी का कर्तव्य के प्रति दृढ़ संकल्प और उसका मोम जैसा कोमल हृदय ही अलोपी देवी की दिव्यता को साबित करने के लिए काफी था।
In simple words: महादेवी के बीमार होने पर अलोपी उनके लिए अलोपी देवी की भभूत लाया। वह यह दिखाना चाहता था कि भभूत से बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं, लेकिन महादेवी को अलोपी की लगन और कोमल हृदय ही उसकी महानता का प्रमाण लगा।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के कार्यों को समझाते समय, उन कार्यों के पीछे के उद्देश्य और उनसे जुड़े भावनात्मक पहलुओं को स्पष्ट करें।

 

Question 3. 'अंधे का दुःख गूंगा होकर आया था। अतः सांत्वना देने वाले उसके हृदय तक पहुँचने का मार्ग ही न पा सकते थे।' पंक्तियों का क्या आशय है?
Answer: अलोपी ने शादी की। उसकी माँ इस शादी के पक्ष में नहीं थीं, इसलिए वह अलग रहने लगीं और पत्नी ने घर संभाल लिया। अलोपी का यह सुंदर संसार छह महीने तक ही रह सका। एक दिन उसकी पत्नी उसे धोखा देकर उसकी सारी जमा-पूँजी लेकर गायब हो गई। अलोपी आँखों से देख नहीं सकता था, लेकिन वह बोलता था। उसकी बोलने की कला ने उसकी आँखों की कमी को पूरा कर दिया था। इससे ज्ञानेंद्रियों का संतुलन तो नहीं बन पाया था, लेकिन वह अपनी वाणी से आँखों की कमी को पूरा कर लेता था। पत्नी के विश्वासघात से अलोपी बहुत दुखी था। उसके दिल पर गहरा चोट लगा था। अब वह पहले की तरह बोलता नहीं था, ज्यादातर चुप ही रहता था। वह अंधा तो था ही, अब गूंगा भी हो गया था। उसका दुःख चुप्पी के रूप में सामने आया था। जब कोई उसे सांत्वना देना चाहता था, तो अलोपी चुपचाप उसकी बातें सुनता रहता था। वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था। सांत्वना देने वाला यह नहीं समझ पाता था कि उसकी बातों का उसके मन पर क्या असर पड़ा। असलियत यह थी कि उसकी बातें अलोपी के दिल तक पहुँचती ही नहीं थीं। इसलिए सांत्वना देने का प्रयास बेकार ही रहा।
In simple words: अलोपी की पत्नी उसे छोड़कर भाग गई, जिससे वह बहुत दुखी हो गया। वह अंधा तो था ही, अब इतना चुप रहने लगा कि गूंगा जैसा हो गया। उसका दुख इतना गहरा था कि कोई उसे सांत्वना नहीं दे पाता था।

🎯 Exam Tip: किसी कथन का आशय स्पष्ट करते समय, उसके पीछे की पूरी कहानी और पात्र की भावनात्मक स्थिति को समझाएँ।

 

Question 4. 'अपने अपराध से अनजान और अकारण दण्ड की कठोरता से अवाक बालक जैसे अलोपी के चारों ओर जो अंधेरी छाया घिर रही थी, इस परिवर्तन का क्या कारण था?
Answer: अलोपी की पत्नी को उसकी कमाई की चिंता रहती थी और वह हमेशा पैसों की ही बातें करती थी। वह अलोपी से पूछती थी कि उसने अपने गहने जमीन में कहाँ दबाकर रखे हैं। शायद इस बहाने वह अलोपी की जमा की हुई कमाई के बारे में जानना चाहती थी। इस तरह छह महीने बीत गए। उसकी पत्नी एक दिन उसका सारा धन समेटकर गायब हो गई। अलोपी जमीन में खोदे गए गड्डों को देखकर उसकी प्रतीक्षा करता रहा। फिर उसे सब कुछ समझ आ गया कि उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। अलोपी यह समझ नहीं पा रहा था कि उसका अपराध क्या था? उसे इतनी कठोर सजा क्यों मिली, यह भी उसकी समझ से बाहर था। फलस्वरूप वह चुप हो गया था। अब वह अक्सर शांत ही रहता था। अलोपी में आए इस बदलाव को देखकर महादेवी चिंतित थीं। उन्हें अलोपी के साथ किसी अनहोनी का डर सताने लगा था।
In simple words: अलोपी की पत्नी उसका सारा धन लेकर भाग गई। अलोपी यह समझ नहीं पाया कि उसे बिना किसी गलती के ऐसी कठोर सजा क्यों मिली। इस घटना से वह बहुत दुखी और शांत हो गया था, जिससे महादेवी चिंतित थीं।

🎯 Exam Tip: पात्र के जीवन में आए बड़े बदलावों का कारण बताते समय, घटनाक्रम को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 5. संस्मरण में से चित्रमयी भाषा के प्रयोग के अंश संकलित कीजिए।
Answer: 'अलोपी' महादेवी वर्मा द्वारा लिखा गया एक संस्मरण है। इसमें महादेवी जी ने छात्रावास में सब्जियाँ पहुँचाने वाले अलोपी का बहुत अच्छा वर्णन किया है। महादेवी जी ने अलोपी का सजीव चित्र बनाया है। 'अलोपी' संस्मरण में इस्तेमाल की गई चित्रमयी भाषा के कुछ हिस्से नीचे दिए गए हैं –
1. वैशाख नए गायक के समान अपनी अग्निवीणा पर एक एक लम्बा आलाप लेकर संसार को विस्मित कर देना चाहता था। मेरा छोटा घर गर्मी की दृष्टि से कुम्हार का देहाती आवाँ बन रहा था और हवा से खुलते-बन्द होते खिड़की-दरवाजों के कोलाहल के कारण आधुनिक कारखाने की भ्रांति उत्पन्न करता था।
2. धूल के रंग के कपड़े और धूल भरे पैर तो थे ही उस पर उसके छोटे-छोटे बालों, चपटे-से माथे, शिथिल पलकों की विरले वरूनियों, बिखरी-सी भौंहों, सूखे पतले ओठों और कुछ ऊपर उठी हुई ठुड्डी पर राह की गर्द की एक परत इस तरह जम गई थी कि वह आधे सूखे क्ले-मॉडल के अतिरिक्त और कुछ लगता ही न था।
3. मूसलाधार वृष्टि जब बर्फ के तूफान की भ्रांति उत्पन्न करती, बिजली जब लपटों के फब्बारे जैसी लगती और बादलों के गर्जन में पर्वतों के बोलने का आभास मिलता।
4. मझोले कद की सुगठित शरीर वाली प्रौढ़ा देखने में साधारण-सी लगी पर उसके कंठ में ऐसा लोच और स्वर में ऐसा आत्मीयता भरा निमंत्रण था, जो किसी को भी आकर्षित किए बिना नहीं रहता और कुछ विशेष चमकदार आँखों में चालाकी के साथ-साथ ऐसी कठोरता झलक जाती थी।
5. उसका कुछ भरा हुआ-सा कंकाल कुरते से सज गया, सिर पर जब तब साफा सुशोभित होने लगा और ऊँची धोती कुछ नीचे सरक आई।
In simple words: इस संस्मरण में महादेवी जी ने अलोपी का बहुत ही सुंदर चित्र खींचा है, जहाँ उन्होंने प्रकृति और लोगों के रूप का वर्णन ऐसे किया है जैसे कोई तस्वीर देख रहा हो।

🎯 Exam Tip: चित्रमयी भाषा के उदाहरण देते समय, सीधे पाठ से उन वाक्यों को चुनें जो दृश्यों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

 

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. महादेवी जी ने गर्मी को शांत करने के लिए किस वस्तु को उल्लेख नहीं किया है?
(क) बर्फ
(ख) खस
(ग) बिजली का पंखा
(घ) एयर कंडीशनर
Answer: (घ) एयर कंडीशनर
In simple words: महादेवी जी ने अपनी रचना में गर्मी भगाने के लिए बर्फ, खस और बिजली के पंखे का जिक्र किया है, लेकिन एयर कंडीशनर का नहीं।

🎯 Exam Tip: नकारात्मक प्रश्नों (किसका उल्लेख नहीं किया) में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़कर सही उत्तर का चुनाव करें।

 

Question 2. मनुष्य की शिष्टता की परीक्षा होती है –
(क) किसी भिखारी के घर के दरवाजे पर आने पर
(ख) किसी धनवान मित्र के आने पर
(ग) किसी धनी रिश्तेदार के आने पर
(घ) किसी नेता अथवा मंत्री के घर आने पर
Answer: (क) किसी भिखारी के घर के दरवाजे पर आने पर
In simple words: हमारी अच्छी आदतें तभी दिखती हैं जब हम किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति के प्रति दयालुता दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: शिष्टता जैसे नैतिक गुणों से संबंधित प्रश्नों में, सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थिति वाले विकल्प को चुनें।

 

Question 3. “तीसरा पहर थके यात्री के समान मानो ठहर-ठहर कर बढ़ा चला आ रहा था।” कथन की भाषा है –
(क) गद्यात्मकं
(ख) काव्यात्मक
(ग) विनोदपूर्ण
(घ) व्यंग्यात्मक।
Answer: (ख) काव्यात्मक
In simple words: इस वाक्य में बातों को कविता की तरह सुंदर शब्दों में कहा गया है।

🎯 Exam Tip: भाषा शैली संबंधी प्रश्नों में, वाक्यों में अलंकार, कल्पना और भावुकता जैसे तत्वों को पहचानें।

 

Question 4. “ऐसे आश्चर्य से मेरा साक्षात्कार नहीं हुआ था”- महादेवी को क्या देखकर आश्चर्य हुआ?
(क) माता के साथ पैसों के लिए झगड़ते किशोर
(ख) युवक
Answer: (ख) युवक
In simple words: महादेवी को युवक की लगन देखकर बहुत हैरानी हुई।

🎯 Exam Tip: लेखक या पात्र के आश्चर्य का कारण बताते समय, उस विशेष घटना या व्यक्ति को इंगित करें जिससे आश्चर्य हुआ था।

 

Question 5. अलोपी देवी के द्वार पर किसको याचक बनकर उपस्थित होना पड़ा?
(क) अलोपी
(ख) अलोपी का पिता
(ग) अलोपी की माता
(घ) रग्घू
Answer: (ख) अलोपी का पिता
In simple words: अलोपी के पिता को ही अलोपी देवी के सामने मदद मांगने के लिए आना पड़ा था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के संबंधों और उनके कार्यों को याद रखें ताकि सही उत्तर चुन सकें।

 

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'अलोपी' पाठ किस गद्य-विधा की रचना है।
Answer: 'अलोपी' पाठ एक 'संस्मरण' गद्य-विधा की रचना है। संस्मरण एक ऐसी विधा होती है जहाँ लेखक अपनी यादों के आधार पर किसी व्यक्ति या घटना का वर्णन करता है।
In simple words: 'अलोपी' एक 'संस्मरण' है, जिसमें लेखक पुरानी यादें लिखता है।

🎯 Exam Tip: साहित्यिक विधा संबंधी प्रश्नों में, रचना के प्रकार को सटीक रूप से पहचानें और बताएं।

 

Question 2. अलोपी कौन था?
Answer: अलोपी एक नेत्रहीन युवक था। वह अलोपी देवी का पुत्र था जिसे वरदान के रूप में प्राप्त किया गया था।
In simple words: अलोपी एक आँखें न होने वाला युवक था।

🎯 Exam Tip: मुख्य पात्रों की पहचान और उनकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता को संक्षिप्त रूप से बताएं।

 

Question 3. अलोपी को अलोपी नाम से क्यों पुकारा जाता था?
Answer: अलोपी का जन्म अलोपी देवी के वरदान के कारण हुआ था। इसी वजह से उसका नाम अलोपी रखा गया था।
In simple words: उसे अलोपी देवी के वरदान से मिला था, इसलिए उसका नाम अलोपी रखा गया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के नामकरण से जुड़े पौराणिक या संदर्भगत तथ्यों को स्पष्ट करें।

 

Question 4. अलोपी महादेवी जी के पास क्यों आया था?
Answer: अलोपी महादेवी जी के पास काम की तलाश में आया था। वह मेहनत करना चाहता था और अपनी माँ की मदद करना चाहता था।
In simple words: अलोपी महादेवी जी के पास काम ढूंढने आया था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के उद्देश्यों और प्रेरणाओं को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 7. महादेवी को धूल से सना अलोपी कैसा लगा?
Answer: धूल से सना अलोपी महादेवी को आधे सूखे क्ले मॉडल (मिट्टी के पुतले) की तरह लगा। वह बिल्कुल निष्प्राण और थका हुआ दिख रहा था।
In simple words: महादेवी को अलोपी धूल से भरा, सूखे मिट्टी के मॉडल जैसा दिखा।

🎯 Exam Tip: पात्रों के शारीरिक वर्णन को सटीक उपमाओं और तुलनाओं के साथ प्रस्तुत करें।

 

Question 8. “पर जब से अप्रसन्न होने की सीमा के पार पहुँच चुकी हूँ'- कहने से महादेवी का क्या आशय है?
Answer: इस बात का मतलब है कि महादेवी ने अपने गुस्से पर काबू पा लिया है। अब वे छोटी-मोटी बातों पर क्रोधित नहीं होतीं।
In simple words: इसका मतलब है कि महादेवी अब गुस्सा नहीं करतीं, उन्होंने अपने क्रोध को नियंत्रित कर लिया है।

🎯 Exam Tip: लेखक के भावों से जुड़े प्रश्नों में, कथन के पीछे छिपे वास्तविक अर्थ और भावना को स्पष्ट करें।

 

Question 9. जो भक्तिन के विवेक को रुचे वह मुझे स्वीकृत हो”- महादेवी ने ऐसा क्यों कहा?
Answer: महादेवी का भोजन भक्तिन बनाती थी। वह जो भी सब्जियाँ बनाती थी, वही महादेवी खा लेती थी। इसलिए उन्होंने भक्तिन के विवेक पर भरोसा किया।
In simple words: महादेवी ने भक्तिन पर भरोसा किया, इसलिए कहा कि भक्तिन को जो पसंद हो, वह उन्हें मंजूर है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के संबंधों और विश्वास को दर्शाने वाले संवादों के अर्थ को स्पष्ट करें।

 

Question 10. “एक बार जब अपनी लम्बी अकर्मण्यता पर लज्जित हमारे हिंदू-मुस्लिम भाई वीरता की प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे”- में महादेवी का संकेत किस ओर है?
Answer: “एक बार जब ...... भाग ले रहे थे"- में महादेवी का संकेत हिन्दू-मुसलमानों के बीच होने वाले हिंसक दंगों की ओर है। इसमें दंगे को एक प्रतियोगिता के रूप में व्यंग्यात्मक ढंग से दिखाया गया है।
In simple words: महादेवी का इशारा हिंदू-मुस्लिम के बीच हुए खतरनाक दंगों की ओर था।

🎯 Exam Tip: अप्रत्यक्ष कथनों में लेखक के संकेत को पहचानें और उसे सही घटना या मुद्दे से जोड़कर समझाएँ।

 

Question 11. महादेवी भक्तिन से क्या सुनकर विस्मित हुई?
Answer: भक्तिन ने महादेवी को बताया कि अलोपी विवाह कर रहा है। यह सुनकर महादेवी को बहुत हैरानी हुई थी।
In simple words: भक्तिन ने अलोपी की शादी की बात बताई, तो महादेवी हैरान रह गईं।

🎯 Exam Tip: पात्रों की प्रतिक्रियाओं (जैसे विस्मित होना) का कारण बताते समय, उस सटीक जानकारी को प्रस्तुत करें जिससे यह प्रतिक्रिया हुई।

 

Question 12. 'अलोपी इस ढहते हुए स्वर्ग में छः महीने रह सका'-कहने का क्या तात्पर्य है?
Answer: 'अलोपी इस ढहते हुए स्वर्ग में छ: महीने रह सका'- कहने का मतलब है कि अलोपी का विवाहित जीवन केवल छह महीने तक ही चल पाया। उसके बाद उसका जीवन बिखर गया था।
In simple words: इसका मतलब है कि अलोपी की शादी के बाद की खुशियाँ सिर्फ छह महीने तक ही रहीं।

🎯 Exam Tip: लाक्षणिक वाक्यों का अर्थ स्पष्ट करते समय, कथन के पीछे छिपे वास्तविक घटनाक्रम और परिणाम को समझाएँ।

 

Question 14. अलोपी द्वारा विवाह करना क्या आपकी दृष्टि में उसकी भूल थी?
Answer: मेरी नजर में, यह उसकी भूल नहीं थी क्योंकि मानव स्वभाव के कारण ही अलोपी उस स्त्री की ओर आकर्षित हुआ था। प्यार और साथ की भावना स्वाभाविक होती है।
In simple words: नहीं, यह उसकी गलती नहीं थी क्योंकि इंसानी फितरत के कारण वह उस स्त्री की तरफ आकर्षित हुआ था।

🎯 Exam Tip: 'आपकी दृष्टि में' जैसे प्रश्नों में, व्यक्तिगत राय को पाठ के संदर्भ और मानवीय स्वभाव के आधार पर तार्किक रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 15. अलोपी के जीवन तथा मृत्यु के बारे में महादेवी का क्या कहना है?
Answer: महादेवी अलोपी के जीवन को भाग्य का व्यंग्य (मजाक) और उसकी मृत्यु को संसार के छल का परिणाम मानती हैं। उनका मानना है कि उसका जीवन दुख भरा था और दुनिया ने उसे धोखा दिया।
In simple words: महादेवी के अनुसार, अलोपी का जीवन भाग्य का मजाक और उसकी मृत्यु संसार के धोखे का नतीजा थी।

🎯 Exam Tip: लेखक के मुख्य विचारों को उनके शब्दों और संदर्भ के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 16. महादेवी के मन में अलोपी के प्रति कौन-सा भाव है?
Answer: महादेवी के मन में अलोपी के प्रति ममता का भाव है। वे उसे अपने बच्चे जैसा मानती थीं और उसकी परवाह करती थीं।
In simple words: महादेवी के मन में अलोपी के लिए माँ जैसी ममता थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों के आपसी संबंधों में मौजूद भावनाओं को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से बताएं।

 

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अलोपी कौन है? महादेवी के साथ उसका परिचय किस प्रकार हुआ?
Answer: अलोपी तेईस साल का एक आँखों से देख न सकने वाला युवक था। उसके पिता अब जीवित नहीं हैं। उसकी माँ घूम-घूम कर सब्जियाँ बेचती है। उसने अपने ताऊ से महादेवी के विद्यापीठ का नाम सुना था। उसे यह अच्छा नहीं लगता था कि बूढ़ी माँ मेहनत करे और वह घर पर खाली बैठे। इसलिए, काम की तलाश में वह महादेवी के पास आया था।
In simple words: अलोपी आँखों से न देख सकने वाला एक युवक था। वह अपनी माँ के लिए काम ढूंढते हुए महादेवी के पास आया था।

🎯 Exam Tip: पात्र का संक्षिप्त परिचय दें और फिर उसके लेखक से परिचय की पूरी कहानी बताएं।

 

Question 2. पाठ (अलोपी) के आरम्भ में महादेवी ने गर्मी की ऋतु तथा अपने घर के बारे में क्या बताया है?
Answer: 'अलोपी' संस्मरण की शुरुआत में महादेवी ने बताया है कि जब अलोपी उनसे मिलने आया, तब वैशाख का महीना था और बहुत तेज गर्मी पड़ रही थी। महादेवी का छोटा घर गाँव के कुम्हार के आवाँ (मिट्टी के बर्तन पकाने का भट्टा) जैसा गर्म था। तेज हवा चल रही थी, जिससे घर की खिड़कियाँ और दरवाजे बार-बार टकरा रहे थे और उनसे तेज आवाज आ रही थी। इससे ऐसा लग रहा था जैसे घर कोई कारखाना हो।
In simple words: महादेवी ने बताया कि अलोपी के आने पर वैशाख का महीना था, बहुत गर्मी थी, और उनका घर तेज हवा के कारण एक कारखाने जैसा आवाज कर रहा था।

🎯 Exam Tip: किसी पाठ की शुरुआत के वर्णन को समझाते समय, मौसम, स्थान और माहौल के प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट करें।

 

Question 4. किसी की पुकार सुनकर महादेवी जब द्वार पर पहुँचीं तो उन्होंने क्या देखा?
Answer: किसी की आवाज सुनकर महादेवी जब दरवाजे पर पहुँचीं, तो उन्होंने दो लोगों को नीम के पेड़ की छाया की ओर जाते देखा। उन्होंने उन्हें बुलाया, तो वे महादेवी के पास लौट आए। उनमें एक 6-7 साल का दुबला-पतला लड़का था, जिसने हड्डियों के ढाँचे जैसे शरीर को लंबे फटे हुए कुर्ते से ढक रखा था। दूसरा एक कंकाल जैसा युवक था, जिसने मैली बनियान और ऊँची धोती पहन रखी थी। लड़का लाठी का एक सिरा पकड़े आगे चल रहा था और युवक लाठी के दूसरे सिरे के सहारे धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा था।
In simple words: महादेवी ने दरवाजे पर दो लोगों को देखा: एक छोटा, दुबला-पतला लड़का और एक कंकाल जैसा युवक, जो लाठी के सहारे धीरे-धीरे चल रहा था।

🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित प्रश्नों में, देखे गए दृश्यों और पात्रों का सटीक वर्णन करें।

 

Question 5. “उस शरीर की निर्जीव मूर्तिमत्ता की भ्रांति और भी गहरी हो जाती थी”- कथन किसके विषय में है तथा ऐसा कहने का क्या कारण है?
Answer: यह कथन अलोपी के बारे में है। वैशाख की गर्म दोपहर में जब वह महादेवी से मिलने आया था, तो उसके शरीर पर धूल की परतें जमी हुई थीं। उसके कपड़े भी धूल के रंग के थे। वह आधे सूखे मिट्टी के मॉडल जैसा लग रहा था। उसकी आँखें छोटी-छोटी थीं, जो कच्चे काँच की गंदी गोलियों जैसी चमकहीन थीं। उसे देखकर ऐसा भ्रम होता था कि वह एक जीवित मनुष्य नहीं बल्कि कोई बेजान मूर्ति है।
In simple words: यह बात अलोपी के बारे में कही गई है। वह इतना धूल से सना और थका हुआ था कि महादेवी को वह एक बेजान मूर्ति जैसा लगा।

🎯 Exam Tip: किसी कथन के विषय और उसके पीछे के कारण को स्पष्ट करते समय, पात्र के वर्णन और परिस्थितियों को जोड़कर समझाएँ।

 

Question 6. “इस प्रकार पाँच ज्ञानेन्द्रियों में चाहे ज्ञान का उचित विभाजन न हो सका, पर उसके परिणाम स्वरूप संतुलन नहीं बिगड़ा”- का तात्पर्य क्या है?
Answer: आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा ये पाँच ज्ञानेंद्रियाँ हैं, जो अलग-अलग चीजों का ज्ञान कराती हैं। अलोपी अंधा था। इसलिए वह देखकर किसी चीज के बारे में जान नहीं सकता था। वह लाचार था। उसकी आँखों की कमी को उसकी जीभ (वाणी) ने पूरा कर दिया था। इस तरह, ज्ञान का पाँचों इंद्रियों में सही बँटवारा तो नहीं हो पाया था, लेकिन कुल मिलाकर ज्ञान की मात्रा संतुलित ही बनी रही। वह अपनी वाणी से दुनिया को समझता और समझाता था।
In simple words: अलोपी की आँखें काम नहीं करती थीं, पर उसकी बोलने की शक्ति इतनी अच्छी थी कि उसने आँखों की कमी पूरी कर दी, जिससे उसका ज्ञान संतुलन में रहा।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक कथनों का अर्थ समझाते समय, उनके शाब्दिक अर्थ से परे जाकर गहरे निहितार्थों को स्पष्ट करें।

 

Question 7. “अलोपी देवी कदाचित उस उदार सूम के समान थीं जो अपने दानी होने की ख्याति के लिए दान करता है, याचक की आवश्यकता पूर्ति के लिए नहीं?” अलोपी देवी की तुलना किसी उदार कंजूस से करने का क्या कारण है?
Answer: अलोपी का जन्म अलोपी देवी के वरदान से हुआ था, लेकिन वह आँखों से देख नहीं सकता था। देवी ने मांगने वाले अलोपी के पिता को एक पूरी तरह स्वस्थ पुत्र नहीं दिया था। इससे देवी उदार तो दिखती हैं, लेकिन वे कंजूस भी हैं। इसलिए, वे मांगने वाले को मनचाहा वरदान नहीं देतीं। इसी कारण लेखिका ने उनकी तुलना उदार कंजूस, दानी व्यक्ति से की है।
In simple words: अलोपी देवी की तुलना कंजूस दानी से इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने अलोपी को जन्म तो दिया, पर उसे आँखों की रोशनी नहीं दी, जिससे वे उदार होते हुए भी कंजूस लगीं।

🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में, तुलना के आधार और उसके पीछे के तार्किक कारण को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 9. “प्रस्ताव अभूतपूर्व था”- महादेवी के समक्ष अलोपी ने क्या प्रस्ताव रखा था तथा वह अभूतपूर्व क्यों था?
Answer: अलोपी अंधा होने के बावजूद काम करना चाहता था। उसने महादेवी वर्मा को उनके विद्यालय और घर के लिए ताजी और सस्ती सब्जियाँ लाने का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव असाधारण था क्योंकि एक नेत्रहीन व्यक्ति इतनी बड़ी जिम्मेदारी लेने को तैयार था।
In simple words: अलोपी ने महादेवी को उनके विद्यालय और घर के लिए सब्जियाँ लाने का प्रस्ताव दिया, जो उसकी आँखों से न देख पाने की हालत को देखते हुए बहुत असाधारण था।

🎯 Exam Tip: किसी प्रस्ताव के 'अभूतपूर्व' होने का कारण बताते समय, उसकी विशिष्टता और परिस्थितियों के आधार पर व्याख्या करें।

 

Question 10. “अपने दुर्बल कंधों पर कर्तव्य का गुरु-भार लादकर कौन लौटे तथा क्यों?
Answer: "तुम यहाँ क्या काम कर सकते हो?" पूछने पर अलोपी ने महादेवी को छात्रावास की लड़कियों के लिए गाँव से ताजी और सस्ती सब्जियाँ लाने का प्रस्ताव दिया। महादेवी को उसकी आँखों से न देख पाने की वजह से शक था, लेकिन अलोपी ने रग्घू की मदद से काम को सफल बनाने का भरोसा दिलाया। महादेवी ने अलोपी का निवेदन मान लिया और शारीरिक रूप से कमजोर एक युवक (अलोपी) तथा उसके छोटे साथी (रग्घू) को कर्तव्य पालन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी।
In simple words: अलोपी और उसका छोटा साथी रग्घू, महादेवी के छात्रावास के लिए सब्जियाँ लाने का काम लेकर लौटे। महादेवी ने अलोपी की दृढ़ता और रग्घू की मदद पर भरोसा करके यह काम सौंपा था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के संवादों और उनके कार्यों को जोड़कर बताएं कि किसे क्या जिम्मेदारी मिली और क्यों।

 

Question 11. अलोपी द्वारा सब्जियों की पसंद पूछने पर उनके सामने क्या कठिनाई उत्पन्न हुई?
Answer: अलोपी ने जानना चाहा कि महादेवी को कौन-सी सब्जियाँ पसंद हैं। इस सवाल ने महादेवी के सामने एक मुश्किल खड़ी कर दी। कुछ सब्जियाँ तो डॉक्टरों ने महादेवी के लिए मना कर रखी थीं। वैसे भी उन्हें कुछ दिन खिचड़ी, दलिया, फल और दही पर ही रहना पड़ता था। बाकी दिनों में वे वही सब्जी खा लेती थीं जो भक्तिन अपनी समझ से बनाती थी। इस तरह, अपनी पसंद के हिसाब से खाने का कोई सवाल ही नहीं था।
In simple words: अलोपी के सब्जियों की पसंद पूछने पर महादेवी दुविधा में पड़ गईं, क्योंकि डॉक्टर ने कई सब्जियाँ मना की थीं और वे ज्यादातर भक्तिन की पसंद की सब्जियाँ ही खाती थीं।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के सामने आई कठिनाई को समझाते समय, उसके सभी प्रासंगिक पहलुओं और कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 12. अलोपी तथा रग्यू के साथ छात्रावास में कैसा व्यवहार होता था?
Answer: अलोपी और रग्घू महादेवी के घर और छात्रावास में सब्जियाँ पहुँचाते थे। अलोपी अंधा था और रग्घू एक छोटा बच्चा था। जब वे छात्रावास में सब्जियाँ लेकर जाते थे, तो शुरुआत में वहाँ के लोगों के लिए वे मजाक का केंद्र बन जाते थे। धीरे-धीरे छात्रावास की लड़कियाँ और कर्मचारी अलोपी की बातें सुनकर उससे प्रभावित होने लगे। अब अलोपी सबका प्रिय बन गया था। वह घंटों वहाँ बैठकर महाराजिन और बारी आदि से बातें करती रहती थीं।
In simple words: शुरुआत में अलोपी और रग्घू छात्रावास में मजाक का पात्र थे, पर बाद में अपनी बातों से उन्होंने सबको अपना प्रिय बना लिया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के प्रति लोगों के बदलते व्यवहार को शुरुआत और अंत दोनों स्थितियों के साथ समझाएँ।

 

Question 14. प्रकृति के स्वरूप का अलोपी पर क्या प्रभाव पड़ता था?
Answer: प्रकृति के दो रूप होते हैं- एक सुंदर और दूसरा भयानक। सुंदर रूप देखने वाले को आकर्षित करता है, जबकि भयानक रूप उसे डराता है। अलोपी नेत्रहीन था। वह प्रकृति के किसी भी रूप को देख नहीं सकता था। जब वह प्रकृति को देख ही नहीं सकता था, तो उसके सुंदर या भयानक होने का उस पर कोई प्रभाव पड़ना संभव नहीं था। इसलिए, अलोपी पर प्रकृति के स्वरूप का कोई असर नहीं पड़ता था।
In simple words: अलोपी आँखों से देख नहीं सकता था, इसलिए प्रकृति के सुंदर या भयानक किसी भी रूप का उस पर कोई असर नहीं पड़ता था।

🎯 Exam Tip: पात्र की विशेषताओं (जैसे नेत्रहीनता) को ध्यान में रखते हुए उसके अनुभवों और प्रतिक्रियाओं की व्याख्या करें।

 

Question 15. "वसंत हो या होली, दशहरा हो या दीवाली, अलोपी के नियम में कोई व्यतिक्रम नहीं देखा गया।” अलोपी का क्या नियम था? लिखिए।
Answer: अलोपी को महादेवी और छात्रावास की लड़कियों के लिए रोज ताजी और सस्ती सब्जियाँ लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। अलोपी कर्तव्यनिष्ठ था। वह रोज सब्जियाँ पहुँचाने का काम पूरा करता था। गर्मी, सर्दी, बरसात जैसे मौसमों में और होली, दिवाली, दशहरा जैसे त्योहारों के कारण भी उसका काम प्रभावित नहीं होता था। वह हमेशा समय पर गाँव से ताजी और सस्ती सब्जियाँ लाकर महादेवी के यहाँ पहुँचाता था।
In simple words: अलोपी का नियम था कि वह रोज समय पर महादेवी और छात्रावास के लिए ताजी सब्जियाँ लाएगा, चाहे मौसम या कोई त्योहार हो।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के 'नियम' को समझाते समय, उसकी कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ता को दर्शाने वाले उदाहरण दें।

 

Question 16. “तुम हृदय के भी अंधे हो,”- महादेवी ने यह किससे कहा तथा क्यों?'अलोपी' पाठ के आधार लिखिए।
Answer: एक बार प्रयाग में हिंदू-मुस्लिम दंगे हो रहे थे। अलोपी ने पहले से दोगुनी बड़ी सब्जियों से भरी टोकरी उठाई और रग्घू को लेकर सूनी गलियों से होते हुए महादेवी के घर पहुँचा। उसके इस हिम्मत भरे काम को देखकर महादेवी को गुस्सा आया और उन्होंने अलोपी से कहा, "तुम सिर्फ आँखों के ही नहीं, बल्कि दिल के भी अंधे हो।" यह कहने का कारण यह था कि अलोपी ने उस समय अपने जीवन पर आने वाले संभावित खतरे को भी अनदेखा कर दिया था। यह उसकी लापरवाही थी।
In simple words: महादेवी ने अलोपी से यह तब कहा जब वह दंगों के बीच जान जोखिम में डालकर सब्जियाँ पहुँचाने आया था, क्योंकि उसने अपनी जान की परवाह नहीं की थी।

🎯 Exam Tip: संवाद पर आधारित प्रश्नों में, कौन किससे कह रहा है, क्यों कह रहा है और उसके पीछे का पूरा संदर्भ स्पष्ट करें।

 

Question 17. हिंसक दंगों में अपनी जान जोखिम में डालकर तरकारी पहुँचाने के पीछे अलोपी ने क्या कारण बताकर महादेवी को संतुष्ट किया?
Answer: एक बार प्रयाग में हिंदू-मुस्लिम दंगे हो रहे थे। अलोपी ने अपनी जान की चिंता किए बिना रग्घू को साथ लेकर महादेवी के घर आ गया। उस समय अलोपी चुपचाप वहाँ से चला गया। छात्रावास से लौटकर
In simple words: अलोपी ने दंगों में जान जोखिम में डालकर सब्जियाँ पहुँचाने का कोई खास कारण नहीं बताया, बस चुपचाप चला गया।

🎯 Exam Tip: अधूरे उत्तरों को ज्यों का त्यों प्रस्तुत करें, और यदि संभव हो तो 'इन सरल शब्दों में' उसका सबसे संभावित अर्थ बताएं।

 

Question 18. “एक बार की घटना अपनी क्षुद्रता में भी मेरे लिए बहुत गुरु है।” महादेवी किस छोटी घटना को अपने लिए महत्त्वपूर्ण बता रही हैं? तथा इसका कारण क्या है?
Answer: महादेवी को बुखार था। यह पता चलने पर अलोपी खुद अलोपी देवी की भभूत (राख) लेकर आया। उसने महादेवी से कहा कि इसे जीभ पर रखने और माथे पर लगाने से सभी रोग दूर हो जाते हैं। यह घटना बहुत छोटी थी, लेकिन इसमें महादेवी के प्रति अलोपी का आदर, प्रेम और सहानुभूति के भाव भरे हुए थे। इससे उसके दिल की सच्ची भावनाएँ सामने आ रही थीं। छोटी होने पर भी यह घटना महादेवी के लिए बहुत महत्वपूर्ण और याद रखने योग्य है।
In simple words: महादेवी उस छोटी घटना को महत्वपूर्ण मानती हैं जब अलोपी उनके बीमार होने पर भभूत लाया, क्योंकि इसमें अलोपी का उनके प्रति गहरा आदर और प्रेम छिपा था।

🎯 Exam Tip: किसी घटना की महत्ता समझाते समय, घटना के साथ-साथ उसके भावनात्मक और नैतिक मूल्यों को भी उजागर करें।

 

Question 19. महादेवी को ज्वर-मुक्त करने के लिए अलोपी अलोपी देवी की विभूति लाया तो महादेवी क्या कहना चाहती थी? किन्तु वह चुप क्यों रही?
Answer: महादेवी को बुखार होने पर अलोपी स्वयं अलोपी देवी की भभूत लाया था। वह चाहता था कि उसको चाटने तथा माथे पर मलने से रोग दूर हो जाएगा। महादेवी कहना चाहती थीं कि जब देवी अलोपी को ही अंधता से मुक्ति नहीं दे सकीं, तो वे उनका क्या भला करेंगी। लेकिन वह चुप रहीं। अलोपी देवी की दिव्यता का ध्यान आते ही वह कुछ नहीं बोलीं।
In simple words: अलोपी जब भभूत लाया, तो महादेवी कहना चाहती थीं कि अगर देवी अलोपी को ही ठीक नहीं कर पाईं तो उनका क्या करेंगी। पर उन्होंने अलोपी की श्रद्धा देखकर कुछ नहीं कहा।

🎯 Exam Tip: पात्र के अनकहे विचारों और चुप्पी के कारणों को समझाते समय, उसके आंतरिक संघर्ष और सामाजिक संदर्भ को बताएं।

 

Question 20. महादेवी के यहाँ तरकारियाँ अलोपी की सँभली हुई आर्थिक दशा का क्या प्रमाण मिलता है? 'अलोपी' संस्मरण के आधार पर लिखिए।
Answer: अलोपी तीन साल से महादेवी के यहाँ सब्जियाँ पहुँचा रहा था। सत्तर रुपये से ज्यादा की सब्जियाँ मासिक आती थीं। इससे अलोपी की आर्थिक स्थिति सुधर गई थी। वह कुर्ता तथा धोती पहनने लगा था और कभी-कभी सिर पर साफा भी बाँध लेता था। रग्घू ने बताया था कि अलोपी की माँ उसके कमाए रुपयों को जमीन में गाढ़कर रखने लगी थी।
In simple words: अलोपी की आर्थिक हालत अच्छी हो गई थी क्योंकि वह तीन साल से महादेवी को सब्जियाँ पहुँचा रहा था। वह अच्छे कपड़े पहनने लगा और उसकी माँ पैसे जमा करने लगी थी।

🎯 Exam Tip: पात्र की आर्थिक स्थिति का वर्णन करते समय, उसकी जीवनशैली में आए बदलावों और बचत के संकेतों को बताएं।

 

Question 21. अलोपी के अँधेरे जीवन के उपसंहार का विधाता ने क्या प्रबन्ध किया था? संस्मरण के अनुसार लिखिए।
Answer: अलोपी नेत्रहीन था। उसका जीवन अंधकार से भरा था। उसके जीवन का अंत भी अंधकारमय ही होना था। भाग्य ने इसका प्रबंध कर दिया था। एक विधवा स्त्री अलोपी के संपर्क में आई। उसके गले की आवाज से प्रभावित होकर अलोपी ने उससे शादी कर ली। वह उसकी कठोर और धोखेबाज आँखों को देख नहीं पाया। वह उसका सब कुछ चुराकर उसे छोड़कर भाग गई। इस विश्वासघात ने अलोपी को अंदर और बाहर से तोड़ दिया। वह जीवित नहीं रह सका।
In simple words: अलोपी का जीवन दुख भरा था और भाग्य ने उसके अंत की तैयारी की थी। उसकी विधवा पत्नी उसे धोखा देकर सब कुछ ले भागी, जिससे वह टूट गया और जीवित नहीं रह सका।

🎯 Exam Tip: पात्र के जीवन के अंतिम चरण का वर्णन करते समय, घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करें और उसके भावनात्मक प्रभाव को दर्शाएँ।

 

Question 23. "अलोपी इस ढहते हुए स्वर्ग में छः महीने रह सका"- इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: अलोपी ने शादी तो कर ली, लेकिन उसका वैवाहिक जीवन केवल छह महीने तक ही चल सका। उसकी पत्नी ने उसका जमा किया हुआ धन ले लिया और उसे धोखा देकर वहाँ से भाग गई। जमीन में खोदे गए गड्ढों को टटोलकर अलोपी कुछ दिनों तक उसके लौटने का इंतजार करता रहा, लेकिन सच्चाई जानने के बाद वह पूरी तरह टूट गया।
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि अलोपी का विवाहित जीवन सिर्फ छह महीने चला, क्योंकि उसकी पत्नी उसका धन लेकर भाग गई और उसे धोखा दिया।

🎯 Exam Tip: लाक्षणिक कथनों का अर्थ समझाते समय, उसके पीछे की घटना और पात्र पर उसके प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

Question 24. अलोपी ने अपना पैसा चुराकर भागने वाली पत्नी की सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी? आपकी दृष्टि में क्या यह उचित था?
Answer: अलोपी की पत्नी उसका पैसा चुराकर भाग गई थी। लोगों ने उसे सलाह दी कि वह पुलिस को बताए। अलोपी ने ऐसा करने से मना कर दिया। उसने निराशा लेकिन शांति के साथ कहा- अपनी स्त्री की पहचान बताकर उसे पकड़वाना नीचता का काम है। यह अलोपी की उदारता हो सकती है, लेकिन मेरी दृष्टि में इससे अपराधी को बढ़ावा मिलता है और यह उचित नहीं था।
In simple words: अलोपी ने अपनी पत्नी की शिकायत पुलिस में नहीं की क्योंकि उसे अपनी पत्नी को पकड़वाना नीचता लगा। मेरी राय में, इससे अपराध को बढ़ावा मिलता है और यह सही नहीं था।

🎯 Exam Tip: 'आपकी दृष्टि में' जैसे प्रश्नों में, व्यक्तिगत राय को नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से तार्किक रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 25. “यह सत्य होने पर भी कल्पना जैसा जान पड़ता है – ” इस कथन में कौन-से सत्य को उल्लेख है जो कल्पना जैसा जान पड़ता है?
Answer: अलोपी साहसी, मेहनती और कठोर परिश्रमी था। वह सब्जियों से भरी टोकरी सिर पर उठाकर संतुलन बनाकर चल लेता था। जब उसकी पत्नी उसे धोखा देकर चली गई, तो अलोपी को गहरा धक्का लगा। उसका सारा साहस, पूरा विश्वास और आत्मविश्वास संसार के एक धोखे में समा गया था। यह बात सच है, लेकिन इतनी भयानक है कि यह कल्पना जैसी लगती है।
In simple words: अलोपी की पत्नी के धोखे से उसका सारा साहस और विश्वास टूट जाना एक हकीकत थी, पर यह इतनी दर्दनाक थी कि कल्पना जैसी लगती थी।

🎯 Exam Tip: किसी कथन के विरोधाभास को समझाते समय, सत्य और कल्पना के बीच के अंतर को स्पष्ट करने वाले उदाहरण दें।

 

Question 26. महादेवी के यहाँ अलोपी अन्तिम बार कब आया? उसके वहाँ आने पर जो दशा थी, उसका अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
Answer: पत्नी के विश्वासघात से दुखी होने के बावजूद अलोपी कुछ दिन बाद काम पर आने लगा था। दशहरे की छुट्टियों के कारण महादेवी घर पर ही थीं। तब अलोपी अंतिम बार उनके पास आया था। सब्जियाँ देकर वह शाम तक मेस में बैठा रहा। कभी वह प्यार से तराजू को छूता था, कभी पूसी (बिल्ली) की पीठ को सहलाता था, कभी छोटी लड़कियों को चिढ़ाता था। उसने महादेवी की पालतू कुतिया की मुरझुरे और हिरनी सोना को मूली के पत्ते खिलाए। शाम होने पर उसने महादेवी के बरामदे को नमस्कार किया और चला गया। वह फिर कभी नहीं लौटा।
In simple words: अलोपी अपनी पत्नी के धोखे के बाद अंतिम बार महादेवी के पास दशहरे पर आया था। वह उदास था, पर प्रेम और स्नेह के भाव दिखा रहा था, और फिर कभी वापस नहीं लौटा।

🎯 Exam Tip: अंतिम मुलाकातों के वर्णन में, पात्र की मानसिक और शारीरिक स्थिति, उसके कार्यों और लेखक की प्रतिक्रिया को स्पष्ट करें।

 

RBSE Class 12 Hindi सरयू Chapter 18 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. अलोपीदीन कौन था? महादेवी के साथ उसकी पहली भेंट का वर्णन कीजिए।
Answer: अलोपी एक मेहनती और कर्तव्यनिष्ठ युवक था। वह आँखों से देख नहीं पाता था और उसकी उम्र तेईस साल थी। उसका नाम अलोपीदीन इसलिए रखा गया था क्योंकि उसका जन्म अलोपी देवी के वरदान से हुआ था। उसके पिता अब जीवित नहीं थे और उसकी बूढ़ी माँ सब्जियाँ बेचकर गुजारा करती थी। अलोपी को यह पसंद नहीं था कि वह घर पर बैठा रहे जबकि उसकी माँ मेहनत करे। एक दिन उसने अपने ताऊ से महादेवी के विद्यापीठ के बारे में सुना और वहाँ सब्जियाँ पहुँचाने का काम शुरू करने का मन बनाया। वैशाख की तेज़ गर्मी में, बालक रग्घू की मदद से, वह महादेवी के घर पहुँचा और उन्हें पुकारा। महादेवी ने उसे अंदर बुलाया। अलोपी ने उन्हें नमस्कार किया। उसके कपड़े और पैर धूल से सने थे। उसके बाल, माथा, पलकें, भौंहें, होंठ और ठुड्डी पर धूल की परत थी। उसकी आँखें काँच की गोलियों जैसी बेजान और चमकहीन थीं, जैसे वह एक सूखा मिट्टी का मॉडल या बेजान मूर्ति हो। महादेवी ने उससे पूछा कि वह क्या काम कर सकता है। अलोपी ने बताया कि वह महादेवी और छात्रावास की लड़कियों के लिए गाँव से ताज़ी सब्जियाँ लाएगा। महादेवी ने उसे इसकी इजाजत दे दी।
In simple words: अलोपी एक नेत्रहीन और मेहनती युवक था। वह महादेवी के पास अपनी माँ का सहारा बनने और काम की तलाश में आया था। उसकी पहली मुलाकात में वह धूल से सना और बेजान सा दिख रहा था, लेकिन उसमें काम करने की ज़बरदस्त लगन थी।

🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण वाले प्रश्नों में व्यक्ति के शारीरिक विवरण, स्वभाव और जीवन की परिस्थितियों का वर्णन क्रमबद्ध तरीके से करें।

 

Question 2. 'ऐसे आश्चर्य से मेरा कभी साक्षात् नहीं हुआ था।' महादेवी को अलोपी में क्या अपूर्व आश्चर्यजनक लगा? स्पष्ट करके लिखिए।
Answer: अलोपी एक नेत्रहीन युवक था। उसने महादेवी को भरोसा दिलाया कि वह रग्घू की मदद से उनके यहाँ ताज़ी सब्जियाँ पहुँचाएगा। महादेवी को अलोपी का आत्मविश्वास और काम के प्रति लगन देखकर बहुत हैरानी हुई। आजकल के कई युवक अपनी असफलता को ही अपनी बहादुरी मानते हैं और काम नहीं करना चाहते। लेकिन अलोपी, जो आँखों से देख नहीं सकता था, अपनी माँ को आराम देना चाहता था और खुद मेहनत करके काम करना चाहता था। वह अपने अंधेपन को चुनौती दे रहा था और अपना कर्तव्य पूरा करने को तैयार था। अलोपी का यह मज़बूत इरादा महादेवी के लिए बहुत हैरान करने वाला था। उन्होंने ऐसा मेहनती और अद्भुत युवक पहले कभी नहीं देखा था।
In simple words: अलोपी के अंधा होने के बावजूद उसका आत्मविश्वास, मेहनत करने की लगन और दूसरों पर निर्भर न रहने का उसका फैसला महादेवी को बहुत हैरान कर गया।

🎯 Exam Tip: किसी कथन के संदर्भ को स्पष्ट करते समय पहले कथन का अर्थ बताएं, फिर बताएं कि वह किस पात्र के बारे में कहा गया है और उसके पीछे का कारण क्या है।

 

Question 3. "कहना व्यर्थ है कि अलोपी को अपने सिद्धान्त में कोई परिवर्तन नहीं करना पड़ा।” अलोपी का क्या सिद्धान्त था? उसको परिवर्तन क्यों नहीं करना पड़ा?
Answer: अलोपी छात्रावास की लड़कियों और महादेवी के लिए सब्जियाँ लाता था। वह छात्रावास में सबको बहुत पसंद था। वह महाराजिन और बारी (काम करने वालों) से बातें करता रहता था। लड़कियाँ उसके पास चिड़ियों की तरह चहकती रहती थीं। कुछ समय बाद वह उनके लिए अमरूद, बेर और जामुन जैसे फल मुफ्त में लाने लगा। विद्यापीठ के फल बेचने वाले ने महादेवी से शिकायत की कि इससे उसका व्यापार खराब हो रहा है। महादेवी ने लड़कियों से पूछा तो पता चला कि अलोपी उन्हें फल देता था। महादेवी ने अलोपी को समझाया कि यह सही नहीं है, क्योंकि इससे फल वाले को नुकसान होता है। अलोपी ने कहा कि वह स्कूल के समय में नहीं आता, तो फल वाले को नुकसान कैसे हो सकता है? उसने यह भी बताया कि वह लड़कियों से पैसे नहीं लेता था। उसने बताया कि उसकी एक चचेरी बहन थी जो अब जीवित नहीं है। अलोपी को उन लड़कियों की आवाज़ में अपनी बहन की आवाज़ सुनाई देती थी। वे गरीब थीं, और उन्हें फल देने से उसे खुशी मिलती थी। वह फल बेचकर पैसे कमाने की बात सोच भी नहीं सकता था। उसका मानना था कि गाँव में भेंट में कुछ देने के बदले पैसे नहीं लिए जाते। उसे नहीं पता था कि शहरों में ऐसा करना अच्छा नहीं माना जाता। बिना पैसे लिए लड़कियों को फल देने से अलोपी को अंदर से संतोष मिलता था। यही उसका सिद्धान्त था। महादेवी उसकी बातें सुनकर चुप रह गईं। अलोपी को अपना यह सिद्धान्त बदलना नहीं पड़ा। वह पहले की तरह लड़कियों को फल देता रहा।
In simple words: अलोपी का सिद्धान्त था कि वह छात्रावास की गरीब लड़कियों को मुफ्त में फल देता था, क्योंकि उन्हें देखकर उसे अपनी मृत बहन की याद आती थी। महादेवी की बात सुनकर भी उसने अपना यह सिद्धान्त नहीं बदला क्योंकि उसे ऐसा करने में आत्मिक संतुष्टि मिलती थी।

🎯 Exam Tip: सिद्धान्त से जुड़े प्रश्नों में व्यक्ति के सिद्धान्त की स्पष्ट व्याख्या करें और बताएं कि परिस्थितियों के बावजूद उसने उसे क्यों नहीं छोड़ा।

 

Question 4. "एक बार की घटना अपनी क्षुद्रता में भी मेरे लिए बहुत गुरु है।” 'अलोपी' शीर्षक संस्मरण के आधार पर घटना का वर्णन कीजिए।
Answer: एक बार महादेवी जी को बुखार था। वह बरामदे में काम नहीं कर रही थीं, बल्कि अपने कमरे में आराम कर रही थीं। अलोपी जब भी आता था, महादेवी उससे बातें करती थीं। इस बार कई दिनों तक बात न होने पर अलोपी को लगा कि महादेवी नाराज़ हैं। जब उसे पता चला कि महादेवी बीमार हैं, तो वह बहुत परेशान हो गया। एक दिन उसने महादेवी से मिलने की इजाज़त माँगी। अलोपी उनसे मिलने आया और टटोलते हुए दरवाज़े के पास ज़मीन पर बैठ गया। उसने अपनी आँखों को बांहों से पोंछा और अपनी धोती की गाँठ से एक पुड़िया निकाली। उसने महादेवी को पुड़िया देते हुए बताया कि वह खुद अलोपी देवी की भभूत लाया है। उसने कहा कि इसे जीभ पर रखने और माथे पर लगाने से सारे रोग-दोष दूर हो जाते हैं।
In simple words: एक बार जब महादेवी बीमार थीं, तो अलोपी को लगा कि वे उससे नाराज़ हैं। बीमारी का पता चलने पर वह चिंता में आ गया और अलोपी देवी की भभूत लेकर आया, यह सोचकर कि इससे महादेवी ठीक हो जाएंगी।

🎯 Exam Tip: किसी विशेष घटना का वर्णन करते समय सभी मुख्य पात्रों की भावनाओं और प्रतिक्रियाओं पर ध्यान दें।

 

Question 5. "अलोपी के सब साहस, सम्पूर्ण उत्साह और समस्त आत्मविश्वास को संसार का एक विश्वासघात निगल गया है।” अलोपी के साथ हुए उस विश्वासघात का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: अलोपी आँखों से देख नहीं पाता था, लेकिन यह बात उसकी हिम्मत में कभी रुकावट नहीं बनी। वह बहुत साहसी, उत्साही और आत्मविश्वास से भरा युवक था। वह अपना काम पूरी लगन से करता था, चाहे कितनी भी तेज बारिश, कड़ाके की ठंड या भीषण गर्मी हो। वह सब्जियों से भरी टोकरी सिर पर उठाकर, रग्घू की लाठी का सहारा लेकर, अपने रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ता था। जब उसकी कमाई बढ़ने लगी, तो उसकी माँ उसकी बचत को ज़मीन में छिपा कर रखने लगी। तभी उसका संपर्क एक अधेड़ उम्र की सब्जी बेचने वाली महिला से हुआ, जिसके दो पति पहले ही मर चुके थे। अलोपी उस महिला की मीठी आवाज़ से प्रभावित होकर अपनी माँ की मर्ज़ी के खिलाफ उससे शादी कर बैठा। उस महिला की दिलचस्पी अलोपी की कमाई में ज़्यादा थी। लगभग छह महीने बाद, एक दिन वह महिला अloपी का सारा सामान और पैसे लेकर गायब हो गई। पहले तो अलोपी को विश्वास नहीं हुआ। वह ज़मीन में खुदे गड्ढों को टटोलता रहा और उसके लौटने का इंतज़ार करता रहा। पड़ोसियों ने उसे पुलिस को सूचना देने की सलाह दी, लेकिन उसने ऐसा करना ठीक नहीं समझा। इस धोखे ने अलोपी को पूरी तरह तोड़ दिया। उसका पहले जैसा साहस, उत्साह और आत्मविश्वास खत्म हो गया। वह अब ठीक से चल भी नहीं पाता था, लड़खड़ाता था, और उसके सिर से टोकरी गिरने लगती थी। वह इस घटना के लिए खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाया और रग्घू के बिना ही एक अज्ञात जगह चला गया, जहाँ से वह कभी नहीं लौटा।
In simple words: अलोपी की कमाई बढ़ने पर उसने एक विधवा सब्जीवाली से शादी कर ली। लेकिन उसकी पत्नी छह महीने बाद उसका सारा पैसा और सामान लेकर भाग गई। इस धोखे ने अलोपी को पूरी तरह तोड़ दिया और वह कभी इससे उबर नहीं पाया।

🎯 Exam Tip: किसी विश्वासघात की घटना का वर्णन करते समय, उसके कारणों, घटनाक्रम और पात्र पर उसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

Question 6. "नियति के व्यंग्य से जीवन और संसार के छल से मृत्यु पाने वाले अलोपी की जीवन-यात्रा की सार्थकता पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न अंकित करता हुआ यह संस्मरण आत्मा के सौन्दर्य की व्याख्या अवश्य करता है।” इस कथन पर विचारपूर्ण टिप्पणी लिखिए।
Answer: अलोपी के पिता ने अलोपी देवी से पुत्र होने की प्रार्थना की थी। देवी के आशीर्वाद से अलोपी का जन्म हुआ। लेकिन अलोपी का दुर्भाग्य था कि देवी की कृपा से उसे पूरी तरह से ठीक बच्चा नहीं मिल पाया। उसका जन्म से अंधा होना किस्मत का एक कड़वा मज़ाक था। अलोपी एक आत्मविश्वासी और मेहनती युवक था। उसने अपने अंधेपन को चुनौती दी और कड़ी मेहनत से सफलता पाई। जब उसके पास कुछ पैसे आए, तो उसने शादी कर ली, यह सोचकर कि वह एक सुखी जीवन जीएगा। लेकिन उसकी धोखेबाज़ पत्नी उसका सब कुछ लेकर भाग गई। इस विश्वासघात ने अलोपी को बहुत बड़ा सदमा दिया और उसकी मौत का रास्ता खोल दिया। इस संसार के छल ने उसकी जान ले ली। जन्म से लेकर मृत्यु तक अloपी के जीवन में क्या मिला? जन्म से ही अंधापन, मेहनत और हिम्मत के बाद भी धोखा। ये बातें उसके जीवन के सार्थक होने पर सवाल खड़ा करती हैं। इस संस्मरण का एक खास पहलू अloपी की सुंदर आत्मा को दिखाना है। भले ही हम कहें कि अलोपी का जीवन सफल नहीं था और उसे अपने जीवन में वह सब नहीं मिला जो वह चाहता था, लेकिन इन सब बातों ने उसकी आत्मा की सुंदरता पर कोई बुरा असर नहीं डाला।
In simple words: अलोपी का अंधा जीवन, मेहनत और फिर पत्नी से मिले धोखे ने उसके जीवन की सार्थकता पर सवाल खड़े कर दिए। लेकिन इस संस्मरण में उसकी आत्मा की सुंदरता को दर्शाया गया है, जो सभी मुश्किलों के बावजूद बनी रही।

🎯 Exam Tip: दार्शनिक या विचारात्मक प्रश्नों में कथन के दोनों पहलुओं - जैसे जीवन की चुनौतियां और आत्मा का सौंदर्य - पर विचार करें और अपनी टिप्पणी दें।

'अलोपी' संस्मरण के नायक अलोपी का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: 'अलोपी' महादेवी वर्मा का लिखा एक सुंदर संस्मरण है। इसमें अलोपी नाम के अंधे युवक को पूरी इज्जत दी गई है। अलोपी के मुख्य गुण ये हैं:

  • नेत्रहीन लेकिन मेहनती: अलोपी आँखों से देख नहीं पाता, पर हिम्मत वाला था। वह अपने अंधेपन को चुनौती देकर काम करता था। वह रग्घू की लाठी का सहारा लेकर महादेवी के घर रोज़ सब्जियाँ पहुँचाता था।
  • आत्मविश्वासी: अलोपी को अपने ऊपर पूरा भरोसा था। उसे नहीं लगता था कि वह अंधा होने के कारण काम नहीं कर सकता। वह महादेवी से कहता था कि रग्घू की मदद से वह सब्जियाँ लाने का मुश्किल काम भी आसानी से कर लेगा। वह अपनी कमाई का हिसाब भी अपने कम पढ़े-लिखे ताऊ की मदद से सही रखता था।
  • सबके प्रति सम्मान और अच्छा व्यवहार: अलोपी बड़ों का आदर करता था। वह महादेवी का बहुत सम्मान करता था और रोज़ उनके काम करने की जगह की तरफ मुँह करके नमस्कार करता था। दंगों के समय अपनी जान खतरे में डालकर आने पर जब महादेवी उसे डाँटती थीं, तो वह कहता था कि "जब मेरी आज्ञा नहीं है", तब वह घर से बाहर पैर नहीं रख सकता। वह अपनी बूढ़ी माँ का ख्याल रखता था और अपनी धोखेबाज़ पत्नी की शिकायत भी पुलिस से नहीं करता था।
  • मेहनती: अloपी बहुत मेहनत करता था। वह काम से बचने के लिए अपने अंधेपन का बहाना नहीं बनाता था। वह अपने काम के प्रति ज़िम्मेदार था और समय पर काम पूरा करता था।
  • धोखे से टूटा हुआ: पत्नी के धोखे ने अलोपी को पूरी तरह तोड़ दिया। इससे उसके शरीर और मन दोनों पर बुरा असर पड़ा। वह खुद को माफ़ नहीं कर पाया और एक दिन यह दुनिया छोड़ गया।

 

Question 8. 'संस्मरण' गद्य-विधा का संक्षिप्त परिचय देते हुए महादेवी द्वारा लिखित संस्मरण 'अलोपी' की चार विशेषताएँ लिखिए।
Answer:

  • संस्मरण का स्वरूप: संस्मरण हिन्दी गद्य की एक विधा है, जहाँ लेखक अपनी यादों और अनुभवों को कल्पना के सहारे शब्दों में पिरोता है। महादेवी वर्मा हिन्दी की प्रसिद्ध संस्मरण लेखिका हैं। उनके लिए संस्मरण अपनी यादों के आधार पर पुराने समय की धूल पोंछकर बीते हुए लोगों के साथ फिर से जीने जैसा है।
  • भावपूर्ण रचना: 'अलोपी' एक बहुत भावुक रचना है जो पाठकों के मन को छूती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है।
  • कोमल और प्रतीकात्मक भाषा: 'अलोपी' की भाषा बहुत कोमल और प्रतीकात्मक है, जो विषय के अनुसार बिल्कुल सही है और अपनी बात कहने में पूरी तरह सक्षम है।
  • उद्देश्यपूर्ण रचना: 'अलोपी' एक उद्देश्यपूर्ण रचना है। यह आज के समाज में, जहाँ युवा अपनी निराशा और कमजोरी की शिकायत करते हैं और दूसरों पर निर्भर रहना चाहते हैं, वहीं अलोपी जैसे नेत्रहीन युवक की मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा को दिखाता है। यह रचना सफल जीवन जीने के लिए कर्तव्यपरायण होने का संदेश देती है।


In simple words: संस्मरण यादों पर आधारित एक गद्य विधा है। महादेवी के 'अलोपी' संस्मरण की मुख्य विशेषताएँ हैं - यह एक भावुक और प्रतीकात्मक भाषा में लिखी गई उद्देश्यपूर्ण रचना है, जो मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देती है।

🎯 Exam Tip: किसी विधा का परिचय देते समय उसकी परिभाषा, प्रमुख लेखकों का उल्लेख और संबंधित रचना की मुख्य विशेषताओं को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

लेखिका - परिचय:

 

Question 1. महादेवी वर्मा का जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्य सेवाओं पर प्रकाश डालिए।
Answer:

  • जीवन-परिचय: हिन्दी की जानी-मानी कवयित्री और लेखिका महादेवी वर्मा का जन्म 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक पढ़े-लिखे परिवार में हुआ था। उनके पिता गोविन्द प्रसाद भागलपुर में प्रिंसिपल थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई इंदौर (म.प्र.) में हुई। कम उम्र में ही उनकी शादी डॉ. स्वरूप नारायण वर्मा से हो गई। 1933 में उन्होंने संस्कृत में एम.ए. की डिग्री ली। इसके बाद वह प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रिंसिपल बन गईं। समाज सेवा के साथ-साथ उन्होंने लेखन का काम भी जारी रखा। वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सदस्य भी चुनी गईं। भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित किया। 19 सितंबर, 1987 को उनका निधन हो गया।
  • साहित्यिक परिचय: महादेवी जी ने स्कूल के समय से ही लिखना शुरू कर दिया था। वह आधुनिक हिन्दी कविता की 'छायावादी' धारा के चार मुख्य कवियों में से एक हैं। वह न केवल एक सफल कवयित्री थीं, बल्कि एक प्रसिद्ध गद्य लेखिका भी थीं। उन्होंने संस्मरण और रेखाचित्र लिखकर हिन्दी गद्य को और बेहतर बनाया। उन्होंने निबंध और आलोचना जैसी गद्य विधाओं पर भी अपनी लेखनी चलाई। महादेवी जी की भाषा में संस्कृत के शब्द ज़्यादा थे, जिससे कभी-कभी यह कठिन लगती थी, लेकिन उसमें मिठास और बहाव भी था। उन्होंने अपनी रचनाओं में वर्णनात्मक, भावनात्मक, विचारात्मक, संस्मरणात्मक और व्यंग्य-विनोदपूर्ण शैलियों का इस्तेमाल किया।
  • प्रमुख रचनाएँ: महादेवी वर्मा की मुख्य रचनाएँ इस प्रकार हैं:
    • संस्मरण और रेखाचित्र: 'अतीत के चलचित्र', 'स्मृति की रेखाएँ', 'पथ के साथी', 'मेरा परिवार' आदि।
    • निबंध संग्रह: 'क्षणदा', 'श्रृंखला की कड़ियाँ', 'साहित्य की आस्था' और अन्य निबंध।
    • आलोचना: हिन्दी का आलोचनात्मक गद्य।
    • काव्य: 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा', 'दीपशिखा', 'यामी', 'सांध्य गीत' आदि। 'नीरजा' के लिए उन्हें 'सेक्सरिया पुरस्कार' और 'यामा' के लिए 'मंगला प्रसाद पारितोषिक' मिल चुके हैं।
    • संपादन: 'चाँद' नामक मासिक पत्रिका।


In simple words: महादेवी वर्मा एक प्रसिद्ध कवयित्री और गद्य लेखिका थीं, जिनका जन्म 1907 में हुआ था। उन्होंने 'पद्मश्री' प्राप्त की और 'छायावादी' धारा की प्रमुख स्तंभ थीं। उनकी मुख्य रचनाओं में संस्मरण, रेखाचित्र, निबंध और कविताएँ शामिल हैं, और उन्होंने 'चाँद' पत्रिका का संपादन भी किया।

🎯 Exam Tip: किसी लेखक या कवयित्री के परिचय में उनके जन्म, शिक्षा, प्रमुख कृतियाँ और साहित्यिक योगदान को स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें।

 

अलोपी का आना

वैशाख की गर्मी थी। महादेवी अपने छोटे से घर में थीं जो तप रहा था। तेज़ हवा चलने से खिड़की-दरवाजों की आवाज़ें आ रही थीं। महादेवी उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रही थीं। दिन का तीसरा पहर था कि बाहर से किसी भिखारी जैसी पुकार सुनाई दी। नौकर-चाकर अपने कमरों में सो रहे थे। महादेवी उठना नहीं चाहती थीं, लेकिन अपनी माँ से मिली अतिथि सत्कार की शिक्षा याद आ गई। माँ ने सिखाया था कि मनुष्य की विनम्रता की परीक्षा महत्वपूर्ण मेहमान के आने पर नहीं, बल्कि किसी भिखारी द्वारा हाथ फैलाने पर होती है। अपनी विनम्रता का ख्याल कर महादेवी उठीं। महादेवी ने देखा कि पुकारने वाले दो व्यक्ति नीम की छाया की ओर बढ़ रहे थे। बुलाने पर वे पास आए। एक 6-7 वर्ष का हड्डियों के ढेर जैसा बालक था, जिसने फटे हुए कुर्ते से ढका था। वह लाठी का एक छोर पकड़े आगे आ रहा था। उसके पीछे लाठी के दूसरे छोर के सहारे एक नेत्रहीन व्यक्ति उसके पीछे आ रहा था। वह भी हड्डियों का ढाँचा मात्र था। उसने एक मैली बंडी और ऊँची धोती पहन रखी थी। उसने नमस्कार किया तो ऐसा लगा जैसे वह महादेवी को नहीं, बल्कि खजूर के पेड़ को नमस्कार कर रहा हो।

 

आगंतुक व्यक्ति

आने वाले के पैर, बाल, माथा, पलकें, भौंहें, होंठ और ठुड्डी-सभी पर धूल की परत जमी थीं। उसकी आँखों में रोशनी नहीं थी। वह मिट्टी की एक बेजान मूर्ति के समान लग रहा था। महादेवी उससे कुछ पूछने के बारे में सोच ही रही थीं कि उसने अपनी बात कहना शुरू किया। महादेवी जान गईं कि उसकी नेत्रहीनता की कमी उसकी वाचालता ने पूरी कर दी थी।

 

अलोपीदीन

उसका जन्म अलोपी देवी के वरदान के फलस्वरूप हुआ था। इसलिए उसका नाम अलोपीदीन रखा गया। अब अलोपीदीन तेईस वर्ष का है और उसके पिता स्वर्ग सिधार चुके हैं। माँ सब्जियाँ लेकर फेरी लगाती है। अलोपी को यह अच्छा नहीं लगता कि जवान बेटा घर पर बैठा रहे और बूढ़ी माँ मेहनत से कमाए। सब्जी विक्रेता अपने ताऊ के यहाँ महादेवी के विद्यापीठ की चर्चा सुनकर वह काम की तलाश में यहाँ आया। यह जानकर महादेवी को आश्चर्य हुआ क्योंकि युवा पुरुषों की निष्क्रियता के उदाहरण तो बहुत मिलते हैं। लेकिन अलोपी जैसी कर्तव्यपरायणता कम ही दिखाई देती है। महादेवी के पूछने पर उसने बताया कि वह उनके और छात्रावास की छात्राओं के लिए गाँव से ताज़ी और सस्ती सब्जी लाएगा और अपने फुफेरे भाई रग्घू की सहायता से सब काम ठीक-ठाक कर लेगा। महादेवी की अनुमति प्राप्त होने पर दूसरे दिन वह सब्जियों से भरी टोकरी लेकर उपस्थित हो गया।

 

सबका प्रिय

अलोपी जानना चाहता था कि महादेवी को क्या-क्या सब्जियाँ पसंद हैं। लेकिन महादेवी ने वे सभी सब्जियाँ ले लीं जो वह उनके लिए लाया था। उसने कहा कि पैसे वह महीना पूरा होने पर लेगा। हिसाब रखने की कठिनाई बताने पर उसने स्वयं यह ज़िम्मेदारी निभाने का विश्वास जताया। छात्रावास में उन दोनों को सब जगह आने-जाने की अनुमति प्राप्त थी। महाराजिन, बारी आदि को वह सब्जियों के प्रकार और खेतों के बारे में बताता था। वह बच्चियों के लिए बेर, अमरूद आदि फल लाने लगा था। कॉलेज के फल वाले ने शिकायत की कि इससे उसको हानि होती है। पूछने पर अलोपी ने बताया कि वह कॉलेज के समय में नहीं आता। छात्राओं से पैसे न लेने पर उसने बताया कि उसे बच्चियों के स्वर में उसे अपनी आठ-नौ वर्ष की मृत चचेरी बहन की आवाज़ सुनाई देती है। फिर वह ये फल दाम देकर नहीं खरीदता। अतः उसका काम पहले जैसा ही जारी रहा।

 

कर्तव्यशीलता

वर्षा, सर्दी, गर्मी की भीषणता तथा दशहरा, होली, दीवाली के उल्लास अलोपी के काम में बाधक नहीं थे। वह सिर पर सब्जियाँ और रग्घू की लाठी का छोर पकड़कर निडर होकर कर्तव्यपथ पर बढ़ता था। वह परिश्रमी युवक कर्तव्यनिष्ठा से काम करता था। एक बार हिन्दू-मुस्लिम दंगे हो रहे थे। अलोपी पहले से दोगुनी बड़ी

 

महादेवी के प्रति आदर

अलोपी महादेवी का बहुत आदर करता था। वह आते-जाते बरामदे को लक्ष्य कर नमस्कार करता था, चाहे महादेवी वहाँ बैठी हों अथवा नहीं। एक बार महादेवी बीमार थीं और कमरे में थीं। अलोपी से कोई बात नहीं हुई तो उसने सोचा कि वह नाराज़ हैं। उनकी बीमारी का पता चलने पर आज्ञा लेकर वह आया। उसने अपने पिछौरे के छोर में बँधी एक पुड़िया उनको देकर बताया कि उसमें अलोपी देवी की भभूत है। इसको लगाने और खाने से सब रोग दूर हो जाते हैं। अपने प्रति उसकी उस सहानुभूति को महादेवी भुला नहीं सकती थीं।

 

अलोपी का घर बसाना

अलोपी तीन साल से महादेवी के लिए सब्जियाँ ला रहा था। उसकी आमदनी अच्छी थी। शरीर कुछ पुष्ट हो गया था। अब वह सिर पर साफा बाँधने लगा था। उसकी माँ उसकी कमाई गाढ़कर रखने लगी थी। एक दिन भक्तिन ने बताया कि अलोपी शादी कर रहा है। उसकी होने वाली पत्नी पहले ही दो पतियों को छोड़ चुकी है। उसकी माँ नहीं चाहती कि वह शादी करे। मगर शादी हुई। उसकी माँ अलग रहने लगी। रग्घू से पता चला कि अलोपी की पत्नी हर समय रुपयों की ही बातें करना पसंद करती है। इस तरह 6 महीने नहीं बीते, पता चला कि इसकी चालाक पत्नी इसका सब कुछ समेट कर भाग गई। ज़मीन में दबा उसका पैसा भी वह ले गई थी। पहले तो अलोपी को इस घटना का विश्वास ही नहीं हुआ किन्तु बाद में वह दुःख के कारण बीमार हो गया। ऐसी धोखेबाज़ पत्नी की शिकायत पुलिस से करना भी उसको उचित न लगा।

 

अलोपी की कथा का अंत

ठीक होने पर अलोपी फिर काम पर आने लगा। अब उसमें पहले जैसी सजीवता नहीं बची थी। पत्नी के विश्वासघात ने उसके सब साहस, उत्साह और आत्मविश्वास को नष्ट कर दिया था। वह अंधा तो था ही अब गूंगा भी हो गया था। वह कम बोलने लगा था। घटना के बारे में पूछने पर वह लज्जित हो उठता था। अतः महादेवी ने उससे पूछताछ कर उसका कष्ट बढ़ाना उचित नहीं समझा। उसकी माँ ने उसे क्षमा कर दिया। किन्तु अलोपी स्वयं को क्षमा नहीं कर सका। उसकी इस अवस्था से महादेवी उसके प्रति चिंतित हो उठी थीं। दशहरे के अवकाश के दिन अलोपी सब्जियाँ देकर शाम तक मेस में ही बैठा रहा। फिर महादेवी के बरामदे की ओर नमस्कार करके चला गया। तीसरे दिन रो-रो कर रग्घू ने बताया कि उसका अंधा दादा किसी अज्ञात लोक की महायात्रा पर चला गया है। महादेवी ने रग्घू को किसी दूसरे काम पर लगा दिया और अलोपी को बुलाने का प्रयास किया किन्तु अलोपी की छाया अब भी उनके सामने प्रकट होती है। वह आँखें मलकर सोचती हैं कि भाग्य के व्यंग्य से जीवन तथा संसार के छल से मृत्यु पाने वाले अलोपी को क्या वह कभी भुला सकेंगी?

 

कठिन शब्दों के अर्थ

परमाणु - कण।

कड़ी - पंक्ति।

करुण - दयापूर्ण।

अग्निवीणा - सूर्य का बढ़ता हुआ ताप।

घटना-शून्य - घटना रहित।

आलाप - संगीत का स्वर, यहाँ तेज़ गर्मी।

आवाँ - मिट्टी से बने बर्तनों को पकाने के लिए बना भट्टा।

कोलाहल - शोर।

भ्रांति - भ्रम।

मुखर - प्रकट, स्पष्ट।

विवेक - उचित-अनुचित का ज्ञान।

खस - एक प्रकार की घास।

टटिया - झोपड़ी नुमा छप्पर।

कृत्रिम - बनावटी।

उपचार - उपाय।

अन्यान्यपरायण - अन्य के प्रति निष्ठावान।

पहर - प्रहर, समय।

सघन - गहरा।

उलूक - उल्लू।

असमय - अनुचित समय।

तर्कहीनता - विवाद न करना।

व्यवहार-सूत्र - व्यवहार करने का सिद्धान्त।

शिष्टता - शील, सद्व्यवहार।

कण - छोटा अंश।

निरुपाय - विवश होकर।

मूर्तियाँ - व्यक्ति।

याचना - माँगना।

अपरिचाय बोधक संज्ञा - अनजान व्यक्ति को बुलाने के

कृत्रिम - बनावटी।

बगुलापन - दिखावटीपन।

तारतम्यहीन - क्रमहीन।

अकथनीय - न कहने योग्य।

झंकार - पूँज, तारों को छेड़ने से निकलने वाले स्वर।

गुत्थी - उलझन।

भूलभुलैया - भटकाव।

दैन्य - दीनता।

वाचालता - बातूनीपन।

चक्षु - नेत्र, आँखें।

रसना - जीभ।

पाँच ज्ञानेन्द्रिय - आँख, कान, नाक, रसना और त्वचा पाँच शारीरिक अंग।

परिमाण - मात्रा।

कुलावतंस - कुलभूषण।

वंशधर - पुत्र।

याचक - भिखारी।

सूम - कंजूस।

ख्याति - यश।

अखंडित - साबुत, बिना टूटी हुई।

कृतघ्नता - उपकार न मानना।

कृपणती - कंजूसी।

पितृ ऋण चुकाना - पुत्र उत्पन्न करना।

मूल - उधार लिए गए धन की राशि।

तरकारी - सब्जी।

फेरी लगाना - जगह-जगह सामान बेचना।

तत्ववेत्ता - परम ज्ञानी।

ताऊ - पिता का बड़ा भाई।

चर्चा - बातें।

साक्षात् - सामना।

किशोर - बचपन तथा जवानी के बीच की अवस्था।

पोर - पोटुआ।

छलनी होना - अनेक छेद हो जाना, घायल होना।

पौरुष - पुरुषार्थ, पराक्रम।

दरिद्र - गरीब।

कुण्ठित - अप्रभावी, भौंथरा।

भिक्षावृत्ति - भीख माँगना।

मूर्छित - बेहोश।

उपार्जित - कमाए हुए।

विलाप - रुदन, रोना।

भाव-भंगिमा - भावनाओं का प्रदर्शन।

मर्सिया - शोकगीत।

स्यापा - विलाप, रोना।

स्तुत्य - प्रशंसनीय।

दोहाई देना - पुकारना, दया की याचना करना।

प्रकृतिस्थ - सामान्य होना, बाहरी प्रभाव से मुक्त होना।

जीवनव्यापी अंधेरापन - जन्म से ही अन्धा होना।

अवकाश - अवसर, मौका।

फुफेरा भाई - पिता की बहन का बेटा।

गुरु भार - भारी बोझ।

छाबड़ी - डलिया।

अनुनाय-विनय - निवेदन।

पथ्य - सुपाच्य भोजन।

विवेक को रुचे - अच्छा लगे।

रुचि - पसंद।

वीतराग - तटस्थ, विरक्त।

विरक्ति - अनिच्छा।

युगल मूर्ति - अलोपी और रग्घू दो व्यक्तियों की जोड़ी।

विनोदात्मक कोलाहल - हास-परिहास की बातें।

गिरा - वाणी।

अनयन - नेत्ररहित।

स्वच्छंदता - बन्धनों से मुक्ति।

बारी - सफाई कर्मचारी।

ज्ञातव्य - जानने योग्य बातें।

दाम - कीमत।

व्याख्यान - भाषण।

पिछोरी - पीछे से ओढ़ने का वस्त्र।

अनुरूप - अनुसार।

घलुए में - सामान खरीदने पर बिना मूल्य प्राप्त अभिलषित वस्तु।

मुख - सामने की ओर मुँह किए हुए।

ढपोरशंखी - निष्फल।

खीज - चिढ़ना।

रौद्र - क्रोधपूर्ण, भयंकर।

मूसलाधार वृष्टि - तेज़ बरसात।

चिथड़े - फटे हुए कपडे।

चूते - टपकते।

खंड - टुकड़ा।

अक्षम्य - क्षमा करने योग्य।

व्यूह - घेरा।

पक्षाघात - एक बीमारी।

कपाट - किवाड़े।

चीत्कार - चीख।

भाड़ - अनाज भूनने के लिए बालू गरम करने की मिट्टी।

दाने - अनाज।

धीरता - धैर्य।

व्यतिक्रम - परिवर्तन।

अकर्मण्यता - हरामखोरी, काम न करना।

वीरता की प्रतियोगिता - दंगे, झगड़े (व्यंग्य में प्रयुक्त)।

दुस्साहस - सीमा के बाहर, अनुचित हिम्मत।

सजलता - नरमी।

मनोयोगपूर्वक - लगन के साथ।

क्षुद्रता - छोटापन।

गुरु - भारी।

विभूति - भभूत, राख।

दिव्यता - अलौकिकता।

वज्र - कठोर।

स्वर- समूह - आवाज़।

भरा हुआ सा - पुष्ट।

जब-तब - कभी-कभी।

माई - माता।

उपसंहार - अंत।

काछिन - तरकारी बेचने वाली।

मझोला कद - मध्यम लम्बाई।

आत्मीयता - अपनापन।

कदाचित् - संभवतः।

भेदिया - गुप्त बातें बताने वाला।

गाड़े दिन - बुढ़ापा, कठिनाई का समय।

पछेली और झुमके - आभूषण।

युक्ति - उपाय।

दीक्षित - प्रशिक्षित।

हुलिया - शारीरिक लक्षण।

विश्वासघात - धोखा।

पूँगा - चुप।

अवाक् - मूक।

हठी - जिद्दी।

अतीत - पुराना समय।

मेस - छात्रावास।

पूसी - बिल्ली।

विनोद - हँसी।

मुरमुरे - लाई।

गन्तव्य - जाने का स्थान।

स्मारक - याद दिलाने वाली चीजें, स्मृति।

यवनिका - नाटक में मंच के बीच का स्थान।

पुंजीभूत - एकत्रित होकर विशेष रूप ग्रहण कराना।

निष्प्रभ -

 

छोटा घर गर्मी की वजह से कुम्हार के कच्चे मिट्टी के बर्तन पकाने वाले भट्टे जैसा गर्म हो रहा था। हवा चलने से खुलते-बंद होते खिड़की-दरवाजों से शोर ऐसा आ रहा था जैसे कोई आधुनिक कारखाना हो। मैं भी इस तेज़ गर्मी के माहौल में अपने काम में लगी थी, यानी उत्तर-पुस्तिकाओं में भरे ज्ञान-अज्ञान के ढेर को विवेक की कसौटी पर परखकर ज्ञान के सही मूल्य तय कर रही थी।

सन्दर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल 'अलोपी' नामक संस्मरण से लिया गया है। इसे श्रीमती महादेवी वर्मा ने लिखा है।

प्रसंग: अलोपीदेवी के आशीर्वाद से जन्मे अलोपी की कहानी बहुत दुखभरी है। वह जन्म से अंधा था, लेकिन बहुत मेहनती था। वह महादेवी का बहुत सम्मान करता था। एक बहुत गर्म दिन पर, अलोपी काम की तलाश में महादेवी के पास आया था।

व्याख्या: महादेवी जी बताती हैं कि वैशाख का महीना था और बहुत तेज़ गर्मी पड़ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वैशाख एक गायक हो, जो आग जैसी वीणा बजाकर एक लंबा गीत गा रहा हो और पूरी दुनिया को हैरान कर रहा हो। महादेवी का घर छोटा था। गर्मी की वजह से वह गाँव के उस भट्टे जैसा गर्म हो गया था जहाँ मिट्टी के बर्तन पकाए जाते हैं। उस समय तेज़ हवा चल रही थी, जिससे खिड़की-दरवाज़े बार-बार खुल-बंद हो रहे थे। उनके आपस में टकराने से ऐसा शोर हो रहा था जैसे महादेवी का घर कोई आधुनिक कारखाना हो। उस गर्मी के हिसाब से ही महादेवी जी अपना काम कर रही थीं। वह छात्राओं की उत्तर-पुस्तिकाओं को जांच रही थीं, जिनमें छात्राओं ने परीक्षा के सवालों के जवाब लिखे थे।

विशेष:

  • वैशाख की तेज़ गर्मी के दौरान, नौकर सो रहे थे लेकिन महादेवी छात्राओं की उत्तर-पुस्तिकाओं को जांच रही थीं।
  • महादेवी ने वैशाख के महीने को एक नए गायक के रूप में बताया है।
  • भाषा संस्कृत शब्दों से भरी, शुद्ध, मीठी और विषय के अनुसार है।
  • शैली वर्णनात्मक है और उसमें कविता जैसी मिठास है।

 

मैंने सोचा कि मैं उठूँगी नहीं। जो असमय आता है, उसे सज़ा मिलनी चाहिए। लेकिन एक भिखारी के बारे में मेरे विचार कुछ इस तरह के अंधविश्वास तक पहुँच चुके थे, जहाँ तर्क खत्म हो जाता है। बचपन से लेकर बड़े होने तक मेरी माँ ने इस व्यवहार-सूत्र को न जाने कितनी तरह से समझाया था कि हमारी विनम्रता की असली परीक्षा तब नहीं होती जब कोई बड़ा या खास मेहमान हमारे घर आता है, बल्कि तब होती है जब कोई भूला-भटका व्यक्ति हमारे दरवाज़े पर आकर मदद के लिए हाथ फैलाता है।

सन्दर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल 'अलोपी' नामक संस्मरण से लिया गया है। इसे श्रीमती महादेवी वर्मा ने लिखा है।

प्रसंग: वैशाख की तेज़ गर्मी का तीसरा पहर था। महादेवी छात्राओं की उत्तर-पुस्तिकाओं को जांच रही थीं। नौकर-चाकर सो रहे थे। महादेवी के काम में रुकावट हुई और वह थोड़ी नाराज़ हो गईं।

व्याख्या: लोग भिखारी का सत्कार करके खुद को सम्मानित समझते हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हम सभ्य और पढ़े-लिखे हैं। बल्कि, जब कोई भिखारी हमारे घर के दरवाज़े पर हाथ फैलाकर कुछ मांगता है और हम उसके साथ विनम्रता से व्यवहार करते हैं, तभी यह सिद्ध होता है कि हम शालीन और सभ्य हैं। इसलिए महादेवी उठीं और दरवाज़े पर जाकर पुकारने वाले को देखा।

विशेष:

  • महादेवी के घर कोई भी मेहमान, खासकर समाज के गरीब या कोई भिखारी, अपमानित नहीं होता था। इस मामले में वह कुछ हद तक अंधविश्वासी थीं।
  • तेज़ गर्मी में या काम छोड़कर महादेवी ने देखा कि बाहर कौन पुकार रहा है।
  • भाषा शुद्ध, संस्कृत शब्दों से भरी, साहित्यिक और मीठी है।
  • शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक है।

 

उसके कपड़े धूल के रंग के थे और पैर धूल से सने थे। उस पर उसके छोटे बाल, चपटा माथा, थकी पलकों पर बिखरी पलकें, बिखरी भौंहें, सूखे पतले होंठ और थोड़ी ऊपर उठी ठुड्डी पर रास्ते की धूल की एक परत इस तरह जम गई थी कि वह किसी आधे सूखे मिट्टी के मॉडल से ज़्यादा कुछ नहीं लग रहा था। रोशनी से खाली छोटी-छोटी आँखें कच्चे काँच की गंदी गोलियों जैसी चमकहीन थीं; जिनसे उसके शरीर की बेजान मूर्ति होने का भ्रम और गहरा हो जाता था।

आम तौर पर, आजकल के पुरुष की बहादुरी रोने में है। वह जितनी तरह से, जितने हाव-भाव से, जितनी आवाज़ों में अपने निराश जीवन का दुखड़ा गा सके, अपनी अक्षमता का प्रदर्शन कर सके, उतना ही वह प्रशंसा के योग्य है और उतना ही ज़्यादा वह पुरुष कहलाता है। अलोपी, जो अपनी अंधी आँखों को आकाश की ओर उठाकर अपनी मेहनत का हवाला दे रहा था, उसे इस परंपरा के न्याय में फाँसी की सज़ा से ज़्यादा कुछ नहीं मिल सकता था।

सन्दर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल 'अलोपी' नामक संस्मरण से लिया गया है। इसे श्रीमती महादेवी वर्मा ने लिखा है।

प्रसंग: अलोपी नाम का युवक तेईस साल का और नेत्रहीन था। उसके पिता जीवित नहीं थे और उसकी माँ सब्जी बेचती थी। अलोपी को यह पसंद नहीं था कि वह घर पर बैठा रहे जबकि उसकी बूढ़ी माँ मेहनत करे। उसने अपने सब्जी बेचने वाले ताऊ से महादेवी के विद्यालय के बारे में सुना और काम की तलाश में वहाँ पहुँचा।

व्याख्या: महादेवी जी कहती हैं कि उन्होंने पहले ऐसा हैरान कर देने वाला अनुभव कभी नहीं किया था। वह जानती हैं कि दुनिया में ऐसे कई युवा हैं जो जीवन के बारे में बहुत कम जानते हैं। उनकी माँएँ सिलाई करके घर चलाती हैं, लेकिन वे खुद कुछ काम नहीं करते, बल्कि माँ से झगड़ा करके आराम से रहना चाहते हैं। समाज में ऐसे युवकों की भी कमी नहीं है जो शांत बहुओं की तरह आँसू बहाकर चुप रहते हैं और मेहनत किए बिना अपने गरीब पिता का सब कुछ छीन लेते हैं या भीख मांगते हैं। ऐसे लोग भी कम नहीं हैं जो मेहनत से भागते हैं और अपनी इस हार में ही जीत देखते हैं।

विशेष:

  • अंधे अलोपी का महादेवी से काम मांगने आना उन्हें हैरान कर गया। वहीं दूसरी ओर, ऐसे अशिष्ट युवक भी हैं जो मेहनत से बचते हैं और गरीब माता-पिता की कमाई छीनने को ही अपनी मर्दानगी समझते हैं।
  • महादेवी की नज़र में नेत्रहीन अलोपी का साहस और मेहनत करने की भावना बहुत सराहनीय है।
  • भाषा संस्कृत शब्दों से भरी, साहित्यिक और प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली व्यंग्यात्मक है। इसमें दूसरों पर निर्भर रहने वाले युवकों पर कटाक्ष किया गया है।

 

गर्मी में जब धूल ऐसी लगती है जैसे कोई पृथ्वी को पीसकर उड़ा रहा हो, और लू जलते हुए आदमी की तरह चीखती हुई इस कोने से उस कोने दौड़ रही हो, तब आँखों पर हाथ रखकर भागते रग्घू के तेज़-तेज़ कदमों को देखकर मुझे भट्टी में नाचते हुए दानों की याद आती थी। लेकिन अलोपी अपनी पलकें बंद करके, आँखों के अंधेरे को अंदर ही रोककर, जलती धरती पर हर कदम इतनी धीरे से रखता था, मानो वह धरती के दिल का तापमान माप रहा हो। बसंत हो या होली, दशहरा हो या दीवाली, अलोपी के नियम में कभी कोई बदलाव नहीं देखा गया।

सन्दर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल 'अलोपी' शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसे श्रीमती महादेवी वर्मा ने लिखा है।

प्रसंग: अलोपी तेईस साल का एक नेत्रहीन युवक है। वह महादेवी के लिए ताज़ी सब्जियाँ लाता है। जब से उसे यह काम मिला है, वह सर्दी, गर्मी या बारिश की परवाह किए बिना लगातार अपना कर्तव्य निभा रहा है। रग्घू नाम के लड़के के साथ वह महादेवी जी की सेवा में लगा रहता है।

व्याख्या: महादेवी कहती हैं कि गर्मी के मौसम में जब धूल भरी हवाएँ चलती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई पृथ्वी को पीसकर हवा में उड़ा रहा हो। उस समय गरम लू ऐसे चलती है जैसे कोई आग से जला हुआ व्यक्ति एक जगह से दूसरी जगह दौड़ रहा हो। इस तेज़ गर्मी में रग्घू अपनी आँखों पर हाथ रखकर तेज़ी से कदम बढ़ाता था। उसके पैरों को देखकर भट्टी की गर्म रेत में उछलते हुए अनाज के दानों की याद आती थी। वह अपने पैरों को जलती ज़मीन से बचाने के लिए तेज़ी से कदम रखता और उठाता था। लेकिन अलोपी अपनी पलकें बंद कर लेता था और आँखों के अंधेरे को अंदर ही रोक लेता था। वह जलती पृथ्वी पर हर कदम बहुत धैर्य से रखता था, मानो वह पृथ्वी के दिल का तापमान माप रहा हो। वसंत, होली, दशहरा या दीवाली हो, अलोपी अपने काम में कभी रुकावट नहीं आने देता था। वह हमेशा महादेवी के विद्यालय और घर पर सब्जियाँ पहुँचाता रहता था।

विशेष:

  • शैली वर्णनात्मक है। महादेवी का गद्य कविता जैसी मधुरता लिए हुए है।

 

एक बार जब हमारे हिंदू-मुस्लिम भाई अपनी लंबी निष्क्रियता पर शर्मिंदा होकर बहादुरी की प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे, तब अलोपी पहले से दोगुनी बड़ी टोकरी में न जाने क्या-क्या भरकर और एक बड़ी गठरी रग्घू की पीठ पर लादकर सुनसान रास्ते से आ पहुँचा। उसके इस हिम्मत भरे काम ने मुझे हैरान करने की बजाय गुस्सा दिला दिया। 'तुम दिल के भी अंधे हो, ऐसी अंधेरी गलियों में जान देकर तुम्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा' - ऐसे ही स्वागत-वचनों के जवाब में अलोपी बैंगन और लौकी को टटोलने लगा। मेरे आँगन में सब्जियों का ढेर बनाकर, वह चुपचाप छात्रावास की ओर चल दिया। वहाँ से लौटकर जब वह अपनी सूखी आँखें पोंछता हुआ और ठिठुरता हुआ मेरे सामने आकर खड़ा हुआ, तब मेरा गुस्सा खत्म हो चुका था और मन में ममता भर आई थी।

सन्दर्भ: यह गद्यांश महादेवी वर्मा द्वारा लिखे 'अलोपी' नामक संस्मरण से लिया गया है। यह संस्मरण हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल है।

प्रसंग: अलोपी महादेवी वर्मा के घर सब्जियाँ पहुँचाया करता था। वह बहुत समझदार और कर्तव्यनिष्ठ था और हमेशा अपनी ज़िम्मेदारी का ध्यान रखता था। भारी बारिश, ठंड या गर्मी भी उसे महादेवी के घर सब्जियाँ पहुँचाने से नहीं रोक पाती थी। एक बार हिंदू-मुस्लिम दंगों के दौरान भी उसने अपनी जान जोखिम में डालकर वहाँ सब्जियाँ पहुँचाई थीं।

व्याख्या: महादेवी जी कहती हैं कि एक बार प्रयाग में हिंदू-मुस्लिम दंगे हो रहे थे, जिससे लंबे समय से शांत शहर अशांत हो गया था। शायद दोनों समुदाय अपनी बहादुरी दिखाने और लंबे समय की निष्क्रियता का दाग मिटाने के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे थे। ऐसे खतरनाक समय में अलोपी पहले से दोगुनी बड़ी टोकरी में बहुत सारी सब्जियाँ भरकर और सब्जियों की एक बड़ी गठरी रग्घू की पीठ पर लादकर सुनसान रास्ते से महादेवी जी के घर पहुँचा। उसने अपनी जान जोखिम में डाली थी। उसके इस हिम्मत भरे काम को देखकर महादेवी जी को हैरानी की बजाय बहुत गुस्सा आया। उन्होंने उसे डाँटते हुए कहा कि वह केवल आँखों का ही नहीं, मन का भी अंधा है। अगर उन सुनसान गलियों में कोई उसे मार डालता तो उसे स्वर्ग भी नहीं मिलता। महादेवी ने जब इस तरह के कठोर शब्दों से उसका स्वागत किया, तो वह चुप रहा और बैंगन-लौकी टटोलने लगा। फिर उसने उन सब्जियों का एक बड़ा ढेर महादेवी के आँगन में रख दिया और चुपचाप छात्रावास की ओर चला गया। वहाँ से लौटकर वह महादेवी के पास आया और ठंड से काँपता हुआ अपनी सूखी आँखें पोंछता हुआ उनके सामने आकर खड़ा हो गया। उस समय तक महादेवी का गुस्सा शांत हो चुका था और उनका मन ममता से भर गया था।

विशेष:

  • इन पंक्तियों में अलोपी की कर्तव्यनिष्ठा और महादेवी के प्रति उसके सम्मान की भावना दिखाई देती है। महादेवी के मन का सहज स्नेह भी इसमें प्रकट हुआ है।
  • अलोपी ने जान जोखिम में डालकर महादेवी के घर सब्जियाँ पहुँचाईं, लेकिन महादेवी ने उसे डाँटा। अलोपी चुप रहा। आँखों से न देख पाने वाला अलोपी महादेवी के मन में छिपे प्यार को समझ गया था।

 

वह बहुत चिंतित हो गया। अगले दिन उसे संदेश मिला कि अलोपी उससे मिलने की अनुमति चाहता है। इतनी परेशानी में भी मुझे हँसी आ गई। एक अंधा अलोपी बार-बार अनुमति मांगकर भी मुझे कैसे देख सकता था? लेकिन अलोपी अंदर आया और नमस्कार करके, टटोलते हुए, दरवाज़े के पास बैठ गया। फिर उसने अपनी धुंधली, बेजान आँखों की नमी को बांहों से पोंछा और अपनी धोती की गाँठ खोलते हुए अपराधी की तरह बताया कि वह खुद अलोपी देवी की भभूत लाया है। उसने कहा कि इसे जीभ पर रखने और माथे पर लगाने से सारे रोग-दोष दूर हो जाएंगे।

मेरा मन हुआ कि मैं कहूँ- 'जब देवी तुम्हें ही ठीक नहीं कर पाईं, तो वे मेरा क्या भला करेंगी?' लेकिन उनके वरदान की गंभीरता के कारण मेरे मुंह से कुछ नहीं निकला। अलोपी देवी की महानता साबित करने के लिए अलोपीदीन का कर्तव्य के प्रति वज्र जैसा दृढ़ मन और ममता के प्रति मोम जैसा कोमल हृदय ही काफी था। वह व्यक्ति जिसका परिचय सिर्फ उसकी आवाज़ से होता है, उसके प्रति इतनी सहानुभूति को कभी भूला नहीं जा सकता।

सन्दर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल 'अलोपी' नामक संस्मरण से लिया गया है। इसे श्रीमती महादेवी वर्मा ने लिखा है।

प्रसंग: एक बार महादेवी बीमार थीं। यह पता चलने पर अलोपी ने उनसे मिलने की इजाज़त माँगी। वह उनके ठीक होने के लिए अलोपी देवी की भभूत लाया था। इस घटना के ज़रिए लेखिका ने अलोपी की हमदर्दी का ज़िक्र किया है।

व्याख्या: महादेवी जी कहती हैं कि एक बार एक घटना हुई, जो छोटी होने के बावजूद उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। उन्हें बुखार था और वह अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी थीं। वह बाहर बरामदे में बैठकर काम नहीं कर पा रही थीं। अपनी आदत के अनुसार, अलोपी कई दिनों तक बरामदे की तरफ नमस्कार करता रहा। एक दिन उसने रग्घू से कहा कि गुरुजी (महादेवी) बहुत नाराज़ लगती हैं और पहले की तरह कुछ पूछती नहीं हैं। लेकिन जब उसे पता चला कि महादेवी बीमार हैं और बाहर बरामदे में नहीं आ सकतीं, तो वह बहुत चिंतित हो गया। अगले दिन उसे महादेवी का संदेश मिला कि वह उनसे मिलने की अनुमति चाहता है। महादेवी उस समय बहुत तकलीफ में थीं, लेकिन यह सुनकर उन्हें हँसी आ गई कि अलोपी, जो नेत्रहीन है, उन्हें कैसे देख सकता है।

लेकिन अलोपी अंदर आया। उसने महादेवी को प्रणाम किया और टटोलते हुए दरवाज़े के पास बैठ गया। फिर उसने अपनी धुंधली और बेजान आँखों की नमी को बांहों से पोंछा और अपनी धोती की गाँठ खोलकर एक पुड़िया निकाली। उसने बताया कि वह खुद अलोपी देवी के मंदिर गया था और यह भभूत उनके लिए लाया है। उसने कहा कि इसे जीभ पर रखने और माथे पर लगाने से सारे रोग दूर हो जाते हैं। उसने यह सब ऐसे बताया जैसे वह कोई अपराध कर रहा हो। महादेवी कहना चाहती थीं कि जब देवी ने उसे खुद ही स्वस्थ जीवन नहीं दिया और अंधा बना दिया, तो वह महादेवी का क्या भला करेंगी? लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा। अलोपी अपने कर्तव्य के प्रति वज्र की तरह कठोर और ममता में मोम की तरह कोमल है। इसके ये दो गुण ही अलोपी देवी की महानता साबित करने के लिए काफी हैं। महादेवी के साथ उसका रिश्ता सिर्फ आवाज़ से था। वह उन्हें उनकी भावनाओं से ही पहचानता था। लेकिन महादेवी के मन में उसके लिए गहरी हमदर्दी थी। महादेवी यह बात कभी नहीं भूल सकतीं।

विशेष:

  • अलोपी ने शादी की लेकिन पत्नी के धोखे ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया।
  • वह हताश और निराश हो गया। बातूनी अलोपी अब चुप हो गया था। निरपराध अलोपी अपने अनजाने अपराध के लिए खुद को माफ़ नहीं कर पा रहा था।
  • भाषा प्रवाहपूर्ण और सरल है।
  • अलोपी के मन की धोखे से मिली पीड़ा को दिखाया गया है।
  • शैली मनोवैज्ञानिक विश्लेषण वाली है।
  • 'अंधे का दुःख पूँगा होकर आया था' एक भावपूर्ण कहावत है।

 

अलोपी के अंधेरे जीवन का अंत भी कम अंधेरा न हो, इसका सही इंतजाम भगवान ने पहले ही कर रखा था। एक दिन मेरे पास बैठकर भक्तिन संसार की बातें करते हुए कहने लगी कि अलोपी घर बसा रहा है। मैं इतनी हैरान हुई कि भक्तिन की बातों को हमेशा नज़रअंदाज़ करने की अपनी आदत भूलकर 'क्या' कह उठी। तब भक्तिन ने मुझे उसी खुशी भरे अंदाज़ में देखा, जैसे भीष्म ने रथ का पहिया लेकर दौड़ते हुए कृष्ण को देखा होगा। पता चला कि उसकी हर बात बिल्कुल सच थी।

सन्दर्भ: यह गद्यांश श्रीमती महादेवी वर्मा द्वारा लिखे 'अलोपी' नामक संस्मरण से लिया गया है। यह संस्मरण हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल है।

प्रसंग: अलोपी पिछले तीन साल से महादेवी के घर सब्जियाँ पहुँचा रहा था। उसकी कमाई अच्छी होने लगी थी। वह कुर्ता और साफा पहनने लगा था। वह एक विधवा सब्जी बेचने वाली महिला की तरफ आकर्षित हो चुका था और उससे शादी करना चाहता था।

व्याख्या: अलोपी नेत्रहीन था, उसके जीवन में सिर्फ अंधेरा था। उसके इस अंधेरे से भरे जीवन का अंत भी अंधेरा ही हो, यह भगवान ने पहले ही तय कर दिया था। भक्तिन महादेवी के पास आकर बैठती थी और दुनिया भर की बातें करती थी। महादेवी को उनमें कोई दिलचस्पी नहीं थी। एक दिन भक्तिन ने बताया कि अलोपी शादी कर रहा है। यह सुनकर महादेवी को बहुत हैरानी हुई। वह भक्तिन की बातों पर ध्यान नहीं देती थीं, लेकिन उनके मुँह से अचानक 'क्या' निकल गया। वह अपना नज़रअंदाज़ करने का भाव भूल चुकी थीं। इस पर भक्तिन ने भी उन्हें खुशी से देखा। वह महादेवी की उपेक्षा पर जीत पाकर खुश थी। जैसे महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की अपनी प्रतिज्ञा को भूलकर रथ का पहिया उठाकर भीष्म की ओर दौड़े थे और उनकी प्रतिज्ञा तोड़कर भीष्म को खुश किया था, उसी तरह महादेवी के उत्सुकता भरे 'क्या' पूछने पर भक्तिन को भी खुशी हुई थी। बाद में पता चला कि उसकी बात हर अक्षर सच थी।

विशेष:

  • भक्तिन से अलोपी की शादी की खबर सुनकर महादेवी भी उसके बारे में जानने को उत्सुक हो गईं।
  • भक्तिन खुश थी कि उसने महादेवी के अपनी बातों को नज़रअंदाज़ करने की आदत को खत्म कर दिया था।
  • भाषा सरल, मधुर और प्रवाहपूर्ण है।
  • शैली वर्णनात्मक है।
  • श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध में शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा ली थी। लेकिन भीष्म की भक्ति के कारण उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ दी थी और रथ का पहिया हथियार की तरह हाथों में उठा लिया था। सूरदास ने भी इसका ज़िक्र 'आज हो हरिहिं अस्त्र गहैयों' कहकर किया है।

 

अंधे का दुख अब ऐसा था जैसे वह गूंगा होकर आया हो, इसलिए सांत्वना देने वाले लोग उसके दिल तक पहुँच ही नहीं पाते थे। मेरे बोलते ही वह शर्म से ऐसा सिकुड़ जाता था, मानो उसके चारों ओर ओले बरस रहे हों। इसलिए मैंने ज़्यादा कुछ कहना-सुनना ठीक नहीं समझा, ताकि उसकी झिझक वाली परेशानी और न बढ़े। लेकिन अपने अपराध से अनजान और बिना किसी वजह की सज़ा से हैरान एक बच्चे जैसे अलोपी के चारों ओर जो अंधेरा छा रहा था, उसने मुझे चिंतित कर दिया था।

सन्दर्भ: यह गद्यांश श्रीमती महादेवी वर्मा द्वारा लिखे 'अलोपी' नामक संस्मरण से लिया गया है। यह संस्मरण हमारी पाठ्यपुस्तक में शामिल है।

प्रसंग: पत्नी के धोखे से दुखी होकर अलोपी, बालक रग्घू का सहारा लिए बिना ही, किसी अज्ञात जगह की अनंत यात्रा पर निकल गया। महादेवी उसके अंदर आए इस बदलाव को लेकर पहले से ही चिंतित थीं।

व्याख्या: महादेवी कहती हैं कि अloपी जन्म से अंधा तो था ही, पत्नी के धोखे के कारण अब गूंगा भी हो गया था। पहले वह बहुत बातूनी था, लेकिन अब उसने बोलना बंद कर दिया था। उसके मन की पीड़ा उसकी चुप्पी में दिख रही थी। जब कोई उसे दिलासा देता, तब भी वह कुछ नहीं कहता था। इसलिए लोग उसकी बातें उसके दिल तक पहुँचा नहीं पाते थे। वह महादेवी से भी झिझकता था। इसलिए जब वह उससे कुछ पूछतीं, तो वह शर्म से बिल्कुल चुप हो जाता था। महादेवी ज़्यादा पूछकर उसका दुख और नहीं बढ़ाना चाहती थीं। अलोपी यह समझ नहीं पा रहा था कि उसका क्या अपराध था और उसे बिना किसी कारण के यह किस बात की सज़ा मिली थी? इसलिए वह किसी बच्चे की तरह हैरान और चुप हो गया था। महादेवी को महसूस हो रहा था कि उसके चारों ओर दुर्भाग्य की एक काली छाया घिर रही है। इसी वजह से वह अलोपी को लेकर चिंतित हो उठी थीं।

विशेष:

  • अलोपी ने शादी की लेकिन पत्नी के धोखे ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया।
  • वह हताश और निराश हो गया। बातूनी अलोपी अब चुप हो गया था। निरपराध अलोपी अपने अनजाने अपराध के लिए खुद को माफ़ नहीं कर पा रहा था।
  • भाषा प्रवाहपूर्ण और सरल है।
  • अलोपी के मन की धोखे से मिली पीड़ा को दिखाया गया है।
  • शैली मनोवैज्ञानिक विश्लेषण वाली है।
  • 'अंधे का दुःख पूँगा होकर आया था' एक भावपूर्ण कहावत है।

विशेष -

  • अलोपी ने विवाह तो कर लिया, लेकिन पत्नी के धोखे के कारण उसका जीवन टूट गया।
  • वह बहुत उदास और निराश हो गया। पहले बातें करने वाला अलोपी अब चुप हो गया था। बेकसूर अलोपी खुद को अपने किसी अनजाने गुनाह के लिए माफ नहीं कर पा रहा था।
  • भाषा बहुत साफ और सरल है।
  • अलोपी के मन में पत्नी के धोखे से हुई पीड़ा को दिखाया गया है।
  • कहानी कहने का तरीका मन के अंदर की बातों को समझने वाला है।
  • 'अंधे का दुख गूंगा होकर आया था,' यह एक बहुत गहरी बात है।

 

Question 11. बालक रग्घू के लिए दूसरे काम का प्रबंध कर मैंने अलोपी के शेष स्मारक पर विस्मृति की यवनिका डाल दी है; पर आज भी देहली की ओर देखते ही मेरी दृष्टि मानों एक छायामूर्ति में पूंजीभूत होने लगती है। फिर धीरे-धीरे उस छाया का मुख स्पष्ट हो चलता है। उसमें मुझे कच्चे काँच की गोलियों जैसी निष्प्रभ आँखें भी दिखाई पड़ती है और पिचके गालों पर सूखे आँसुओं की रेखा का आभास भी मिलने लगता है। तब मैं आँख मल-मल कर सोचती हूँ- नियति के व्यंग्य से जीवन और संसार के छल से मृत्यु पाने वाली अलोपी क्या मेरी ममता के लिए प्रेत होकर मँडराता रहेगा? (पृष्ठ 109)
Answer:
सन्दर्भ – यह अंश श्रीमती महादेवी वर्मा द्वारा लिखे गए संस्मरण 'अलोपी' से लिया गया है और हमारी किताब में शामिल है।
प्रसंग – पत्नी के धोखे से दुखी होकर अलोपी, बालक रग्घू का सहारा लिए बिना ही, किसी अनजान जगह चला गया था। महादेवी जी को उसमें आए बदलावों को देखकर पहले से ही चिंता थी।
व्याख्या – महादेवी जी बताती हैं कि उन्होंने रग्घू बच्चे के लिए एक काम का इंतजाम कर दिया था, ताकि वह अपनी रोजी-रोटी कमा सके। इसके बाद उन्होंने सोचा कि वे अलोपी की यादों से बाहर आ जाएंगी, लेकिन क्या वे ऐसा कर पाईं? वे बताती हैं कि आज भी जब वे दरवाजे की तरफ देखती हैं, तो उन्हें एक परछाई दिखाई देती है। फिर धीरे-धीरे उस परछाई का चेहरा उन्हें साफ-साफ दिखने लगता है। उस चेहरे की आँखें उन्हें बिना चमक वाली, कच्चे कांच की गोलियों जैसी दिखती हैं। उन्हें दिखता है कि उसके गालों पर सूखे आँसुओं की लकीरें बन गई हैं। तब महादेवी जी बार-बार अपनी आँखों को मलती हैं.
In simple words: लेखिका ने रग्घू के लिए काम ढूंढकर अलोपी की यादों को भुलाने की कोशिश की। लेकिन, वे कहती हैं कि उन्हें आज भी दरवाजे पर अलोपी की परछाई दिखती है, जिसकी आंखें बेजान और गालों पर आंसू के निशान हैं। वे सोचती हैं कि क्या अलोपी का दुखद अंत उनकी ममता के लिए एक भूत बनकर हमेशा रहेगा?

🎯 Exam Tip: जब भी किसी गद्यांश की व्याख्या करनी हो, तो पहले सन्दर्भ (यह कहाँ से लिया गया है), फिर प्रसंग (इसका विषय क्या है), और अंत में मुख्य व्याख्या (गहराई से अर्थ समझाना) लिखें।

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