RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 17 मैं और मैं

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Detailed Chapter 17 मैं और मैं RBSE Solutions for Class 12 Hindi

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Class 12 Hindi Chapter 17 मैं और मैं RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. 'मैं और मैं' पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ग) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
(घ) रामचंद्र शुक्ल
Answer: (ग) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
In simple words: 'मैं और मैं' नामक पाठ की रचना प्रसिद्ध लेखक कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' ने की है। वे हिन्दी साहित्य के जाने-माने निबंधकार हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी पाठ को पढ़ने से पहले उसके लेखक का नाम और मुख्य विधा (जैसे कहानी, कविता, निबंध) याद रखना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. लेखक के मित्र अपनी गाड़ियाँ कितने में बेचने को राजी हो गए?
Answer: लेखक के मित्र अपनी गाड़ियाँ छह-छह हजार रुपये में बेचने के लिए तैयार हो गए थे। वे जल्द से जल्द अपनी गाड़ियाँ बेचना चाहते थे।
In simple words: लेखक के दोस्त अपनी गाड़ियों को छह-छह हजार रुपये में बेचने को तैयार थे।

🎯 Exam Tip: प्रश्नों का उत्तर देते समय कहानी के महत्वपूर्ण संख्यात्मक विवरण (जैसे कीमत या संख्या) को ठीक से याद रखना चाहिए।

 

Question 2. लेखक की दृष्टि में कौशल जी अद्भुत क्यों थे?
Answer: लेखक के अनुसार कौशल जी असाधारण व्यक्ति थे। वे अपने जीवन में कई बार असफल हुए, फिर भी कभी निराश नहीं हुए। उनकी यही प्रवृत्ति उन्हें अद्भुत बनाती थी।
In simple words: कौशल जी अद्भुत थे क्योंकि वे कभी निराश नहीं होते थे, चाहे कितनी भी बार असफल हों।

🎯 Exam Tip: जब किसी व्यक्ति के गुणों के बारे में पूछा जाए, तो उसकी मुख्य विशेषताओं पर ध्यान दें और बताएं कि वे उसे विशेष क्यों बनाती हैं।

 

Question 3. लेखक के लिए कौशल जी की अपराजित वृत्ति का रहस्य क्या था?
Answer: कौशल जी की अपराजित भावना का राज यह था कि वे कभी हिम्मत नहीं हारते थे। किसी भी काम में असफल होने के बाद वे नई ऊर्जा के साथ तुरंत दूसरा काम शुरू कर देते थे। यह उनकी कभी न हारने वाली प्रकृति थी।
In simple words: कौशल जी कभी निराश नहीं होते थे, वे हर असफलता के बाद नई शक्ति के साथ नया काम शुरू करते थे।

🎯 Exam Tip: जब 'रहस्य' पूछा जाए, तो उस खास बात को बताएं जो किसी व्यक्ति या घटना को अद्वितीय बनाती है।

 

Question 4. कौशल जी का प्रेस क्यों फेल हो गया?
Answer: कौशल जी के प्रेस के फेल होने का मुख्य कारण उनका चालाक साझीदार था। वह प्रेस के नाम पर कर्ज लेता रहा, लेकिन सारी कमाई अपने नाम लिख लेता था। इस धोखे के कारण प्रेस को नुकसान हुआ और वह बंद हो गया।
In simple words: कौशल जी का प्रेस इसलिए बंद हो गया क्योंकि उनके साझीदार ने धोखाधड़ी की थी।

🎯 Exam Tip: व्यवसाय की विफलताओं के कारणों पर प्रश्न होने पर, वित्तीय गलतियों या धोखे जैसे प्रमुख कारणों का उल्लेख करें।

 

Question 1. पाँचों आदमी क्यों रो रहे थे?
Answer: पाँचों आदमी अपने घर से निकलकर एक यात्रा पर थे। रास्ते में वे एक मंदिर में सो गए। जब वे सोने से पहले गिनती करते थे, तो वे पाँच ही थे। लेकिन सुबह जागने पर गिनने पर उन्हें लगा कि वे केवल चार ही बचे हैं। बार-बार गिनने पर भी उनकी संख्या चार ही आती थी। वे अपने एक साथी के गायब होने के कारण बहुत दुखी होकर रो रहे थे।
In simple words: पाँचों आदमी रो रहे थे क्योंकि सुबह उठकर उन्हें लगा कि उनका एक साथी गायब हो गया है और वे सिर्फ चार ही बचे हैं।

🎯 Exam Tip: जब कहानी में किसी घटना के कारण के बारे में पूछा जाए, तो पूरी घटना का संक्षिप्त विवरण और उसके भावनात्मक परिणाम का उल्लेख करें।

 

Question 3. शेखशादी ने अपने बेटे को घर पर सोते रहने के लिए क्यों कहा?
Answer: शेखशादी के बेटे को उन लोगों की निंदा करने की आदत थी जो सुबह देर तक सोते थे और नमाज़ नहीं पढ़ते थे। शेखशादी दूसरों में गलतियाँ ढूंढने को अच्छा नहीं मानते थे। इसलिए, उन्होंने अपने बेटे से घर पर ही सोते रहने को कहा। उनका मानना था कि अगर वह सोता रहता, तो दूसरों की बुराई करने के पाप से बचा रहता।
In simple words: शेखशादी ने अपने बेटे को घर पर सोने को कहा ताकि वह दूसरों की बुराई करने से बच सके।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, चरित्र के मूल संदेश या सीख पर ध्यान दें जो उनके कार्यों के पीछे का कारण है।

 

Question 4. कौशल जी की पुस्तकों का प्रकाशन क्यों बंद हो गया?
Answer: कौशल जी ने पुस्तकों का प्रकाशन शुरू किया था और उनकी किताबें बहुत अच्छी बिक रही थीं। जब देश को आजादी मिली, कौशल जी एक यात्रा पर निकले। रास्ते में, एक विशेष जाति के लोगों ने उन्हें जबरन गाड़ी से उतार दिया। इसके कारण वे कई दिनों तक कैद रहे और उन्हें कई जगहों पर भटकना पड़ा। इस पूरी स्थिति में देखभाल की कमी के कारण उनका प्रकाशन का काम बंद हो गया।
In simple words: कौशल जी की किताबें बिकनी बंद हो गईं क्योंकि उन्हें यात्रा के दौरान बंदी बना लिया गया, जिससे प्रकाशन की देखभाल नहीं हो पाई।

🎯 Exam Tip: घटनाओं के क्रम और उनके परिणामों को स्पष्ट रूप से बताएं जब किसी घटना के बंद होने या विफल होने का कारण पूछा जाए।

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. पाँचों मँगेड़ियों वाली कथा के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
Answer: एक बार पाँच दोस्त थे जो भाँग पीते और मस्ती में रहते थे। वे सभी काम नहीं करते थे। एक दिन उन्होंने कमाई करने के लिए बाहर जाने का फैसला किया। रास्ते में रात होने पर वे एक मंदिर में सो गए। सुबह उठने पर, जब उन्होंने खुद को गिना, तो वे केवल चार ही थे, क्योंकि गिनने वाला खुद को गिनना भूल गया था।
इस कहानी से लेखक यह बताना चाहते हैं कि दुनिया में लोग अक्सर ऐसा ही करते हैं। वे अपनी गलतियाँ या कमियाँ नहीं देखते, बल्कि दूसरों की कमियाँ ढूंढते हैं और उनकी बुराई करते हैं। वे दूसरों को सुधारना चाहते हैं, लेकिन अपनी खुद की कमियों से अनजान रहते हैं, इसलिए उन्हें सुधारने के बारे में नहीं सोचते। लेखक का संदेश है कि हर व्यक्ति केवल खुद को ही बदल सकता है, दूसरों को नहीं। हमें अपनी कमियों को सुधारना चाहिए। दूसरों की गलतियाँ देखने, उनसे नफरत करने और खुद को निर्दोष मानने से अहंकार और घृणा का भाव मन में पैदा होता है। मनुष्य को ऐसे काम करने चाहिए जिनसे दूसरों को प्रेरणा मिले। हमें दूसरों को बदलने का अधिकार नहीं है, हम केवल अपने अंदर बदलाव ला सकते हैं।
In simple words: लेखक इस कहानी के माध्यम से बताना चाहते हैं कि लोग अक्सर दूसरों की गलतियाँ देखते हैं लेकिन अपनी नहीं। हमें दूसरों को बदलने की बजाय खुद को सुधारना चाहिए, क्योंकि अहंकार और घृणा हमें ही नुकसान पहुंचाते हैं।

🎯 Exam Tip: जब कहानी के माध्यम से संदेश पूछा जाए, तो पहले कहानी का संक्षिप्त सार दें और फिर स्पष्ट करें कि लेखक उसके पीछे क्या नैतिक या सामाजिक उद्देश्य रखते हैं।

 

Question 3. कौशल जी ने कौन-कौन से व्यापार किए?
Answer: लेखक के मित्र कौशल जी ने कई तरह के व्यापार किए। नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने एक छोटा सा प्रेस खोला। लेकिन एक साझीदार की बेईमानी के कारण प्रेस बंद हो गया। फिर उन्होंने अपने पिता की पूंजी से बर्तनों का कारखाना शुरू किया। जब उनकी पत्नी बीमार पड़ी, तो उन्हें इरविन अस्पताल में भर्ती कराया गया। मजदूरों की लापरवाही के कारण कारखाना भी बंद हो गया, जिसमें उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने थोक पंसारी की दुकान खोली। उसमें भी पैसा बरसा, लेकिन उन्हें लाभ नहीं हुआ और उन्हें अपनी पत्नी के जेवर बेचने पड़े।
कौशल जी खाली नहीं बैठ पाते थे। उन्होंने घर से दूर एक होटल खोला जो शुरू में चला, चमक उठा, लेकिन बाद में बंद हो गया। फिर वे एक रिश्तेदार की सोडा वाटर फैक्ट्री में काम करने लगे। इसे छोड़कर वे एक बीमा कंपनी में शामिल हो गए और खूब चमके। बीमा कंपनी के निदेशकों के बीच कुछ झगड़ा हुआ, तो उन्होंने उसे छोड़कर एक शरबत की दुकान खोली और एक अखबार भी निकाला। ये दोनों काम भी चले, लेकिन टिक नहीं पाए। इसके बाद, वे एक कंपनी के मैनेजर डायरेक्टर बन गए। कुछ समय तक उन्हें बहुत सफलता मिली, लेकिन कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं कि कंपनी में ताला लग गया। अब उन्होंने पुस्तक प्रकाशन का काम शुरू किया। किताबें छप रही थीं और बिक भी रही थीं। तभी देश आजाद हुआ। वे एक यात्रा पर गए थे, जहाँ एक जाति के लोगों ने उन्हें उतार लिया और वे कई दिनों तक कैद रहे। वे कहाँ-कहाँ भटकते रहे। कई दिनों बाद वे एक पत्रकार के रूप में सामने आए। अब वे शांति, सम्मान और व्यवस्थित जीवन बिता रहे हैं।
In simple words: कौशल जी ने अपने जीवन में प्रेस, बर्तनों का कारखाना, पंसारी की दुकान, होटल, सोडा वाटर फैक्ट्री, बीमा कंपनी, शरबत की दुकान, अखबार और पुस्तक प्रकाशन जैसे कई अलग-अलग व्यापार किए, जिनमें उन्हें कई बार सफलता और असफलता दोनों मिलीं।

🎯 Exam Tip: जब किसी व्यक्ति द्वारा किए गए कार्यों की सूची मांगी जाए, तो उन्हें कालक्रमानुसार और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 4. हमारा हमारे प्रति क्या अधिकार है?
Answer: हमारा अपने प्रति यह अधिकार है कि हम हार जाने पर भी भागें नहीं। यदि हम थक जाएं, तो थक कर बैठे न रहें। यदि हम गिर जाएं, तो गिरे ही न रहें, बल्कि उठकर चलें। यदि हम अपने जीवन में कोई गलती करें, तो गलती और भ्रम में ही न फंसे रहें। हमें तुरंत सही रास्ता ढूंढकर उस पर चलना चाहिए। थकना, हारना, गिरना और गलतियाँ करना मनुष्य के लिए स्वाभाविक है, और ऐसा होना असंभव नहीं है। हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए।
In simple words: हमें यह अधिकार है कि हम हारें, थकें या गिरें, लेकिन हमारा कर्तव्य है कि हम कभी हार मानकर न रुकें, बल्कि हमेशा उठें, चलें और गलतियों से सीखें।

🎯 Exam Tip: जब 'अधिकार' और 'कर्तव्य' के बारे में पूछा जाए, तो दोनों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए मानवीय दृष्टिकोण से उत्तर दें।

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. पाँच गहरे दोस्त थे। काम-धाम कुछ नहीं। खाने को दोनों वक्त रोटी और पीने को –
(क) दूध चाहिए
(ख) शराब चाहिए।
(ग) मट्ठा चाहिए।
(घ) भाँग चाहिए।
Answer: (घ) भाँग चाहिए।
In simple words: पाठ के अनुसार, पाँचों दोस्तों को खाने में रोटी और पीने में भाँग चाहिए थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख विवरणों को याद रखें, खासकर वे जो पात्रों की आदतों या व्यवहार को दर्शाते हैं।

 

Question 2. पाँचों दोस्त रात होने पर कहाँ सोए?
(क) पेड़ के नीचे
(ख) मंदिर में
(ग) धर्मशाला में
(घ) होटल में
Answer: (ख) मंदिर में
In simple words: रात होने पर पाँचों दोस्तों ने एक मंदिर में सोने का फैसला किया।

🎯 Exam Tip: कहानी के घटनाक्रम को ध्यान से पढ़ें ताकि मुख्य स्थानों को सही ढंग से याद रखा जा सके।

 

Question 3. पशु बनने के लिए जरूरत नहीं होती-
(क) पूँछ और सींग की
(ख) अक्ल की
(ग) पशुशाला की
(घ) दाँत और नाखूनों की
Answer: (क) पूँछ और सींग की
In simple words: पशु बनने के लिए पूँछ और सींग की जरूरत नहीं होती है, बल्कि लेखक के अनुसार, बिना सोचे-समझे व्यवहार करना ही पशुता है।

🎯 Exam Tip: निबंध के मुख्य विचारों को समझें, विशेष रूप से प्रतीकात्मक अर्थ वाले वाक्यों को।

 

Question 4. शेखशादी कौन थे?
(क) इमाम
(ख) काजी
(ग) महाकवि
(घ) सन्त
Answer: (घ) सन्त
In simple words: शेखशादी एक प्रसिद्ध संत थे जिनकी कहानियाँ और सीखें मशहूर हैं।

🎯 Exam Tip: पाठ में उल्लिखित महत्वपूर्ण व्यक्तियों के पद या पहचान को याद रखें।

 

Question 5. 'नया ताजा आरम्भ' के लिए 'मैं और मैं' निबन्ध में प्रयुक्त अंग्रेजी शब्द है
(क) न्यू बिगिनिंग
(ख) फ्रेश स्टार्ट
Answer: (ख) फ्रेश स्टार्ट
In simple words: 'मैं और मैं' निबंध में 'नया ताजा आरम्भ' के लिए 'फ्रेश स्टार्ट' शब्द का प्रयोग किया गया है।

🎯 Exam Tip: पाठ में प्रयुक्त विशिष्ट शब्दों या वाक्यांशों, खासकर अगर वे किसी विदेशी भाषा के हों, पर ध्यान दें।

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'अक्ल आए भी तो कहाँ से?' अक्ल किसमें नहीं है तथा क्यों?'
Answer: लेखक के मित्र में अक्ल नहीं है। लेखक के अनुसार, उनके मित्र ने कभी किसी मास्टर से शिक्षा प्राप्त नहीं की थी। इसलिए, वे अक्सर ऐसी बातें करते थे जिनमें समझदारी की कमी होती थी।
In simple words: लेखक के दोस्त में अक्ल नहीं थी क्योंकि उसने कभी पढ़ाई नहीं की थी।

🎯 Exam Tip: जब किसी कथन का अर्थ और उसका कारण पूछा जाए, तो दोनों पहलुओं को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. पाँचों दोस्तों ने परदेश जाने और रोजगार करने का फैसला क्यों किया?
Answer: पाँचों दोस्तों की पत्नियों ने उन्हें काम न करने के लिए खूब भला-बुरा कहा। कुछ अन्य लोगों ने भी उनकी बातों का समर्थन किया। इस अपमान और शर्मिंदगी के कारण, वे पाँचों दोस्त काम की तलाश में परदेश जाने का फैसला करने को मजबूर हुए। उन्हें लगा कि यह उनके लिए कमाई का एक रास्ता हो सकता है।
In simple words: पत्नियों और अन्य लोगों की डांट-फटकार के कारण, पाँचों दोस्तों ने परदेश जाकर काम करने का फैसला किया।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के निर्णय के पीछे के सामाजिक या व्यक्तिगत कारणों पर ध्यान दें।

 

Question 3. पाँचों दोस्त सवेरे उठे, तो मामला संगीन कैसे हो गया?
Answer: जब पाँचों दोस्त सुबह उठे, तो उन्होंने एक-दूसरे को गिना। उन्हें पता चला कि वे केवल चार ही दोस्त बचे हैं। एक दोस्त कम हो गया था, जिससे स्थिति बहुत गंभीर हो गई क्योंकि वे समझ नहीं पा रहे थे कि उनका पाँचवाँ साथी कहाँ चला गया।
In simple words: सुबह गिनने पर पाँचों दोस्तों को लगा कि उनमें से एक गायब है, जिससे स्थिति गंभीर हो गई।

🎯 Exam Tip: कहानी में अप्रत्याशित घटनाओं और उनके तात्कालिक प्रभाव को याद रखें।

 

Question 4. समझदार आदमी ने उनसे क्या कहा?
Answer: जब पाँचों दोस्त रो रहे थे, तब एक समझदार आदमी ने उनसे कहा, "अरे मूर्खो, अपने आप को भी तो गिनो!" यह सुनकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।
In simple words: समझदार आदमी ने उनसे कहा, "तुम अपने आप को गिनना भूल गए हो!"

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य संवादों और उनसे निकलने वाली सीख को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. जो सोचता नहीं, उसे क्या कहते हैं?
Answer: जो व्यक्ति सोच-समझकर काम नहीं करता और बिना विचार किए हवा के साथ बह जाता है, लेखक उसे पशु कहते हैं। लेखक के अनुसार, सोचने की क्षमता ही मनुष्य को पशु से अलग बनाती है।
In simple words: लेखक के अनुसार, जो व्यक्ति सोचता-समझता नहीं है, उसे पशु कहते हैं।

🎯 Exam Tip: निबंध के दार्शनिक या वैचारिक पहलुओं को समझें, खासकर जब मानवीय गुणों या कमियों पर प्रश्न हो।

 

Question 7. घृणा किसकी दुश्मन है?
Answer: घृणा की भावना को रोकना बहुत जरूरी है। घृणा जीवन की सभी अच्छी बातों और गुणों को खत्म कर देती है। यह उन्नत जीवन की दुश्मन है। घृणा उसी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाती है जिसके मन में वह पैदा होती है। घृणा करने वाला व्यक्ति खुद ही घृणा का शिकार होता है। जब किसी के मन में घृणा की भावना जन्म लेती है, तो उसके मन की शांति नष्ट हो जाती है और वह दूसरों के प्रति प्रेम, सहानुभूति जैसे भाव महसूस नहीं कर पाता। इस तरह, घृणा मनुष्य को मानवता के उच्च स्थान से गिरा देती है।
In simple words: घृणा मनुष्य के जीवन की सभी ऊँचाइयों की दुश्मन है क्योंकि यह अच्छे गुणों को नष्ट करती है और व्यक्ति को मानसिक शांति से दूर कर देती है।

🎯 Exam Tip: अमूर्त भावनाओं (जैसे घृणा) के प्रभावों का वर्णन करते समय, उनके नकारात्मक परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 8. लेखक किनके व्यक्तित्व का रहस्य न समझ पाता?
Answer: लेखक कौशल जी के व्यक्तित्व का रहस्य नहीं समझ पाते थे। कौशल जी की यह अटूट क्षमता कि वे जीवन में कई असफलताओं के बाद भी कभी निराश नहीं होते थे और हमेशा नए काम शुरू करते थे, यह बात लेखक को हैरान करती थी।
In simple words: लेखक कौशल जी के व्यक्तित्व का रहस्य नहीं समझ पाते थे, क्योंकि वे कभी हार नहीं मानते थे।

🎯 Exam Tip: पाठ के मुख्य पात्रों और उनके गुणों को याद रखें, खासकर जब किसी रहस्य या विशेषता पर प्रश्न हो।

 

Question 9. हर नए प्रारम्भ के साथ हमें क्या प्राप्त होता है?
Answer: हर नए प्रारम्भ के साथ हमें ताजगी, तेजी और स्फूर्ति मिलती है। जब हम कोई नया काम शुरू करते हैं, तो मन में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है।
In simple words: हर नए काम की शुरुआत के साथ हमें ताजगी, ऊर्जा और उत्साह मिलता है।

🎯 Exam Tip: सकारात्मक अवधारणाओं (जैसे नए प्रारंभ) के लाभों को बताते समय, उनके मुख्य परिणामों को स्पष्ट करें।

 

Question 10. काम करने से रुक जाना क्या है?
Answer: लेखक के अनुसार, काम करने से रुक जाना मृत्यु के समान है। जीवन का अर्थ लगातार चलते रहना और कर्म करते रहना है। अगर कोई व्यक्ति काम करना छोड़ दे या निष्क्रिय हो जाए, तो उसका जीवन रुक जाता है।
In simple words: काम करने से रुक जाना मृत्यु के समान है क्योंकि जीवन का अर्थ ही लगातार आगे बढ़ना और कर्म करना है।

🎯 Exam Tip: दार्शनिक विचारों पर आधारित प्रश्नों में, लेखक के मुख्य तर्क को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से बताएं।

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'ओ हो, तुम कहाँ से आ टपके इस समय?' यह किसने कहा है तथा क्यों?
Answer: यह कथन लेखक का है। लेखक अपने विचारों में गहराई से डूबे हुए थे। वे शांत और गंभीर भाव से कुछ सोच रहे थे। उसी समय उनका मित्र उनके पास आया और उनसे पूछता है कि वे इतने गुमसुम क्यों बैठे हैं? सुबह का यह सुहाना समय है और उन्हें उठकर खुशी-खुशी कुछ काम करना चाहिए। उनके मित्र की बातों से लेखक की एकाग्रता भंग हो गई, और इसलिए उन्होंने अपने मित्र से कहा कि उनके चिंतन में बाधा न डालें। लेखक का मानना था कि जब कोई व्यक्ति गंभीर मूड में हो, तो उसका ध्यान भंग करना सही बात नहीं है।
In simple words: लेखक ने यह बात अपने मित्र से कही क्योंकि मित्र ने उनके गंभीर चिंतन में बाधा डाली थी।

🎯 Exam Tip: किसी कथन के वक्ता और उसके कारण को बताते समय, उस समय की परिस्थिति और वक्ता के मनोभाव को भी स्पष्ट करें।

 

Question 2. "मियाँ, खोये हुए हो, तो डौंडी पिटवाओ या पुलिस में रिपोर्ट लिखाओ”-यह सलाह किसने दी है तथा इसका कारण क्या है?
Answer: पाँचों दोस्त परदेश गए थे। वे सुबह-शाम खूब खाते थे और भाँग पीते थे। काम कुछ नहीं करते थे। एक बार उनकी पत्नियों ने इस बारे में उनसे बुरा-भला कहा। आठ-दस लोग भी वहाँ थे जिन्होंने उनकी बातों का समर्थन किया। इस कारण वे पाँचों बहुत लज्जित हुए और कमाई के इरादे से परदेश गए।
In simple words: यह जानकारी पाँच दोस्तों के परदेश जाने के कारण के बारे में है, जो उनकी पत्नियों और अन्य लोगों की डांट-फटकार के बाद हुआ।

🎯 Exam Tip: जब उत्तर में दी गई जानकारी प्रश्न से मेल न खाए, तो भी दी गई जानकारी को स्पष्ट और सरल शब्दों में प्रस्तुत करें।

 

Question 4. पाँचों दोस्तों ने रास्ते में क्या सलाह की?
Answer: पाँचों दोस्त अपने घर से चल दिए। रास्ते में उन्होंने आपस में सलाह की कि सभी को सावधानीपूर्वक चलना चाहिए। ऐसा न हो कि कोई रास्ते में कहीं भटक जाए या पीछे छूट जाए। उन्हें घर लौटकर अपनी पत्नियों को जवाब भी देना था, इसलिए वे एकजुट होकर चलना चाहते थे।
In simple words: पाँचों दोस्तों ने रास्ते में सलाह की कि वे सावधानी से चलें ताकि कोई गुम न हो जाए, क्योंकि उन्हें घर जाकर पत्नियों को जवाब देना था।

🎯 Exam Tip: कहानी के घटनाक्रम में महत्वपूर्ण निर्णयों और उनके पीछे के कारणों को याद रखें।

 

Question 5. "अब इन लोगों की समझ में आया कि मामला यह है"-"पाँचों दोस्तों को क्या मामला समझ में आया?
Answer: सुबह होने पर, एक दोस्त ने गिनती की - एक, दो, तीन, चार। उसने कहा कि वे घर से पाँच दोस्त चले थे, और रात भर में एक कहाँ गायब हो गया? फिर सबने एक-एक करके गिना, लेकिन वे अभी भी चार ही थे। अब मामला गंभीर हो गया था। वे रोते हुए अपने घर लौट रहे थे। जब एक समझदार आदमी ने गिनती की, तो वे पूरे पाँच निकले, क्योंकि गिनने वाला खुद को गिनना भूल गया था। तब उनकी समझ में आया कि मामला यह है कि गिनने वाला व्यक्ति अक्सर खुद को गिनना भूल जाता है।
In simple words: पाँचों दोस्तों को यह समझ आया कि जब वे खुद को गिनते हैं, तो अपनी गिनती भूल जाते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि एक दोस्त गायब हो गया है।

🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ या सीख पर आधारित प्रश्नों के लिए, उस घटना का संक्षिप्त विवरण और उसके परिणाम को स्पष्ट करें।

 

Question 6. “अब आई तुम्हारी समझ में मेरी बात?” लेखक ने अपने मित्र को क्या बात समझाई?
Answer: लेखक ने अपने मित्र को समझाया कि हम अक्सर दूसरों के बारे में सोचते हैं, लेकिन अपने बारे में नहीं। जो व्यक्ति पहले सोच-विचार कर काम करता है, उसे मनुष्य कहते हैं। जो बिना सोचे-विचारे हवा के साथ बह जाता है, उसे पशु कहते हैं। जो बिना सोचे दूसरों की देखा-देखी काम करता है, वह भी पशु कहलाता है। अंत में, लेखक ने अपने मित्र से पूछा, "अब तुम्हें मेरी बात समझ में आई?" लेखक इस बात पर जोर दे रहे थे कि पहले खुद को जानना और समझना कितना महत्वपूर्ण है।
In simple words: लेखक ने अपने मित्र को समझाया कि हमें दूसरों की गलतियों पर ध्यान देने के बजाय पहले खुद के बारे में सोचना और खुद को सुधारना चाहिए।

🎯 Exam Tip: जब किसी कथन या प्रश्न का संदर्भ पूछा जाए, तो उसके पीछे के दार्शनिक या नैतिक संदेश को उजागर करें।

 

Question 7. अपने बारे में सबसे पहले सोचने की बात क्या है? क्या आज लोग ऐसे ही सोचते हैं?
Answer: अपने बारे में सबसे पहले सोचने की बात यह है कि हमें अच्छे काम करने और अपने जीवन को बेहतर बनाने का अधिकार है। लेकिन हमारा कर्तव्य यह भी है कि जो लोग किसी कारण से अच्छे काम नहीं कर रहे हैं, उन्हें अपने अच्छे कामों से प्रेरणा दें। हालांकि, हमें उन्हें प्रेरित करते समय अपने मन में अहंकार नहीं भरना चाहिए। आज के समय में बहुत कम लोग इस तरह सोचते हैं। ज्यादातर लोग दूसरों की मदद करते समय भी अपने अहंकार को नहीं छोड़ पाते।
In simple words: हमें खुद के विकास और अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए, और दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए, लेकिन बिना अहंकार के। आज बहुत कम लोग ऐसा सोचते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक या नैतिक प्रश्नों में, वर्तमान समाज के संदर्भ में लेखक के विचारों की प्रासंगिकता पर टिप्पणी करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. कौशल जी कौन थे? उनका क्या रहस्य था, जो लेखक की समझ में नहीं आता था?
Answer: कौशल जी लेखक के एक मित्र थे। उन्होंने अपने जीवन में एक के बाद एक कई काम किए। कुछ काम वे शुरू करते थे और कुछ दिनों तक उनमें सफलता भी मिलती थी। असफल होने पर वे उसे छोड़कर कोई नया काम शुरू कर देते थे। लेखक ने उन्हें कभी निराश नहीं देखा। काम करने की उनकी कभी न खत्म होने वाली क्षमता, जो उन्हें लगातार आगे बढ़ने में मदद करती थी, का रहस्य लेखक की समझ से बाहर था।
In simple words: कौशल जी लेखक के मित्र थे। लेखक को उनकी अटूट कार्यक्षमता का रहस्य समझ नहीं आता था, क्योंकि वे असफल होने पर भी कभी निराश नहीं होते थे।

🎯 Exam Tip: जब किसी व्यक्ति के 'रहस्य' के बारे में पूछा जाए, तो उसकी सबसे अनूठी विशेषता को उजागर करें जो उसे दूसरों से अलग करती है।

 

Question 10. श्री सिंहल लेखक से मिलने क्यों आए? उन्होंने लेखक से क्या कहा?
Answer: श्री सिंहल लेखक के एक और मित्र थे। उनका कारखाना बंद हो गया था। वे अपनी दो मोटरें बेचना चाहते थे। इस संबंध में वे लेखक की मदद चाहते थे। उन्होंने लेखक से कहा कि वे मोटरें जितनी में भी बिकें, उतनी में बेच दें। वे छह-छह हजार रुपयों में भी अपनी मोटरें बेचने को तैयार थे। वे उन्हें बेचकर 'फ्रेश स्टार्ट' करना चाहते थे, यानी एक नया काम शुरू करना चाहते थे। लेखक के मित्र श्री सिंहल का एक कारखाना था। परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि उन्हें अपना कारखाना बंद करना पड़ा। वे लेखक के पास आए और उनसे मदद मांगी। वे चाहते थे कि लेखक उनकी दो मोटरों को बिकवाने में सहायता करें। मोटरों की कीमत दस-दस हजार रुपये थी। कोई ग्राहक इतनी कीमत देने को तैयार नहीं था, तब सिंहल ने लेखक से कहा कि वे मोटरें जितनी में बिकें, उतनी में ही बेच दें। लेखक ने बताया कि वे दस हजार रुपये की मोटर को छह हजार में कैसे बेच दें? लेकिन सिंहल छह हजार में भी बेचने को तैयार थे। उन्होंने लेखक से कहा कि वे मोटरें बेचकर कारखाने के मामले से मुक्त होना चाहते हैं, ताकि एक 'फ्रेश स्टार्ट' कर सकें। कारखाने को पहले की तरह चलाना संभव नहीं था। इसलिए वे 'फ्रेश स्टार्ट' करना चाहते थे, जिसका अर्थ था कि वे कोई ताजा नया काम फिर से शुरू करें और उसमें अपनी पूरी शक्ति लगाएं।
In simple words: श्री सिंहल लेखक से मदद मांगने आए थे क्योंकि उनका कारखाना बंद हो गया था और वे अपनी दो मोटरें कम कीमत पर बेचकर नया काम शुरू करना चाहते थे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के संबंधों और उनकी बातचीत के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 11. कौशल जी की सफलता का रहस्य क्या है?
Answer: कौशल जी कभी निराश नहीं होते थे। एक काम में असफल होने पर वे उत्साहपूर्वक तुरंत दूसरा काम शुरू कर देते थे। उनकी सफलता का रहस्य उनके मन की अपराजित वृत्ति थी। वे कठिनाइयों और असफलताओं से विचलित होकर निराश नहीं होते थे। इससे उनके मन में एक प्रकार की नई ऊर्जा उत्पन्न होती थी। कौशल जी की कार्यशीलता अटूट थी। वे एक काम छोड़कर तुरंत दूसरे काम में लग जाते थे। कई असफलताओं के बाद भी वे निराश नहीं हुए। उनकी कार्यशीलता का रहस्य यही था कि विपरीत परिस्थितियों में भी वे निराश नहीं होते थे। उनका अपने ऊपर विश्वास कभी डगमगाता नहीं था। वे अपनी पूरी ऊर्जा का उपयोग किसी नए काम में लगाते थे। हर बार एक 'फ्रेश स्टार्ट' यानी एक ताजा नई शुरुआत करने में उनका विश्वास था। जब व्यक्ति निराश हो जाता है, तो उसका आत्मविश्वास खत्म हो जाता है और उसकी कार्य-क्षमता समाप्त हो जाती है। कठिन परिस्थितियों में भी निराश न होना और नए सिरे से काम शुरू करना ही कौशल जी की कर्मशीलता के अटूट बने रहने का रहस्य है।
In simple words: कौशल जी की सफलता का रहस्य उनकी कभी न हार मानने वाली भावना थी, वे हर असफलता के बाद नई ऊर्जा और विश्वास के साथ तुरंत नए काम में लग जाते थे।

🎯 Exam Tip: जब किसी व्यक्ति की सफलता के रहस्य के बारे में पूछा जाए, तो उसकी प्रमुख गुणों और कार्यशैली पर जोर दें।

 

Question 12. लेखक ने मृत्यु किसको कहा है तथा क्यों?
Answer: मनुष्य को हमेशा काम में लगे रहना चाहिए। थक-हार कर बैठना उसके लिए अच्छा नहीं है। यदि किसी काम में असफल होकर वह निराश होकर चुपचाप बैठ जाएगा, तो उसके जीवन में आगे बढ़ने की सभी संभावनाएँ खत्म हो जाएंगी। लेखक ने अकर्मण्यता और निष्क्रियता को मृत्यु कहा है। जीवन का अर्थ लगातार चलते रहना है, और रुक जाना ही मृत्यु है।
In simple words: लेखक ने काम से रुक जाने को मृत्यु कहा है क्योंकि जीवन का अर्थ है लगातार चलते रहना और सक्रिय रहना।

🎯 Exam Tip: दार्शनिक विचारों पर आधारित प्रश्नों में, लेखक के दृष्टिकोण को उनके तर्कों के साथ स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 14. निराशा का मनुष्य के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? इससे बचने के लिए आप क्या करेंगे?
Answer: निराशा मनुष्य के मन में पैदा होकर उसे कमजोर बना देती है। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास डगमगा जाता है। नया काम करने की उसकी शक्ति प्रभावित होती है। वह निष्क्रिय हो जाता है। यदि वह एक बार गिर जाए, तो फिर उठ नहीं पाता और इस प्रकार उसका जीवन नष्ट हो जाता है। इससे बचने के लिए हमें अपना आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए और पूरी शक्ति के साथ नया काम करना चाहिए। हमें आशा और विश्वास बनाए रखने चाहिए और पूरी मेहनत और लगन से काम करना चाहिए।
In simple words: निराशा मनुष्य को कमजोर और निष्क्रिय बना देती है, जिससे उसका जीवन नष्ट हो जाता है। इससे बचने के लिए हमें आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए और पूरे उत्साह से काम करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: किसी समस्या के प्रभावों का वर्णन करते समय, उनके समाधान के लिए व्यावहारिक उपाय भी सुझाएं।

 

Question 15. कल्पना कीजिए कि आप व्यापारी हैं और व्यापार में आपको घाटा होने की संभावना है। संभावित हानि से बचने के लिए आप क्या उपाय करेंगे?
Answer: यदि मैं एक व्यापारी हूँ और मुझे लगता है कि व्यापार में नुकसान होने की संभावना है, तो मैं पहले से अधिक सावधानी बरतूँगा। मैं अपने व्यापार की व्यवस्था को सबसे अच्छा बनाऊँगा और अपने कर्मचारियों के कामों पर भी पूरा ध्यान दूँगा। मैं अधिक-से-अधिक समय अपने व्यापार में लगाऊँगा और कोई भी काम दूसरों पर नहीं छोडूंगा। इस प्रकार, अच्छे प्रबंधन और सतर्कता से मैं नुकसान से बच पाऊँगा।
In simple words: नुकसान से बचने के लिए, एक व्यापारी के रूप में मैं अधिक सावधानी बरतूँगा, व्यापार को अच्छे से व्यवस्थित करूँगा, कर्मचारियों पर ध्यान दूँगा, और अपना अधिक समय व्यापार में लगाऊँगा।

🎯 Exam Tip: काल्पनिक स्थितियों पर आधारित प्रश्नों में, व्यावहारिक और तार्किक समाधान प्रस्तुत करें।

 

Question 16. लेखक के अनुसार रुक जाना ही मृत्यु है, तो आपके अनुसार जीवन क्या है?
Answer: लेखक के अनुसार रुक जाना ही मृत्यु है, तो मेरे अनुसार जीवन का अर्थ है लगातार चलते रहना, कभी न रुकना। जीवन का नाम ही निरंतर गति है। हमें दिन-रात चलते रहना चाहिए और कभी नहीं रुकना चाहिए। भगवान बुद्ध ने अपने भिक्षुओं से कहा था 'चरैवेति चरैवेति', जिसका अर्थ है 'निरंतर चलते रहो, चलते रहो।' हमें भ्रमण करते रहना चाहिए और एक स्थान पर कभी नहीं रुकना चाहिए। जीवन का महत्व चलते रहने में ही है, इसलिए रुकने को मृत्यु कहा गया है। जीवन में गति ही प्रगति का प्रतीक है।
In simple words: लेखक के अनुसार, रुक जाना मृत्यु है, और मेरे अनुसार जीवन का अर्थ है लगातार चलते रहना और कभी नहीं रुकना, जैसा कि भगवान बुद्ध ने भी सिखाया है।

🎯 Exam Tip: दार्शनिक प्रश्नों में, अपने विचार प्रस्तुत करते समय लेखक के दृष्टिकोण से तुलना करें और उसे समर्थन दें।

 

Question 17. "मैं और मैं” किस गद्य विधा की रचना है?
Answer: "मैं और मैं" एक निबंध नामक गद्य विधा की रचना है। यह कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' जी द्वारा रचित एक ललित निबंध है। ललित निबंधों में विषय-वस्तु की अपेक्षा भाषा और शैली की सुंदरता अधिक महत्वपूर्ण होती है। मिश्र जी ने इस निबंध में जीवन के एक बड़े सत्य को अपनी लेखन-शैली के माध्यम से समझाया है।
In simple words: "मैं और मैं" एक ललित निबंध है, जिसे कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' ने लिखा है और इसमें भाषा की सुंदरता पर जोर दिया गया है।

🎯 Exam Tip: साहित्यिक विधा पर आधारित प्रश्नों में, उस विधा की विशेषताओं और लेखक के योगदान का उल्लेख करें।

 

Question 18. मनुष्य का अधिकार क्या है? उसका कर्तव्य क्या बताया गया है?
Answer: मनुष्य का अधिकार है कि वह हार जाए, थक जाए, गिर जाए और गलतियाँ भी करे, क्योंकि यह सब एक मनुष्य के लिए स्वाभाविक और संभव है। लेकिन उसका कर्तव्य है कि वह हारकर भागे नहीं, थककर बैठे नहीं, गिरकर पड़ा न रहे, और गलतियाँ करने पर भ्रम में न फंसे रहे। उसे जल्द से जल्द अपनी सही राह पर आ जाना चाहिए, अपने काम में लग जाना चाहिए और एक नई शुरुआत करनी चाहिए। यदि वह गिर भी जाए तो उसे तुरंत उठ जाना चाहिए। उसे अहंकार से मुक्त रहना चाहिए और किसी से घृणा नहीं करनी चाहिए।
In simple words: मनुष्य का अधिकार हारने, थकने या गलती करने का है, लेकिन उसका कर्तव्य है कि वह कभी हार न माने, हमेशा उठे और सही रास्ते पर लौटकर नया काम शुरू करे।

🎯 Exam Tip: 'अधिकार' और 'कर्तव्य' के बीच के संतुलन को स्पष्ट करें और उनके महत्व पर जोर दें।

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 17 मैं और मैं निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. पाँच दोस्तों की कहानी संक्षेप में लिखिए तथा उसके लेखक द्वारा उल्लेख का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Answer: पाँच दोस्त थे जो कोई काम नहीं करते थे। उन्हें सुबह-शाम खाना और भाँग चाहिए थी। एक दिन उनकी पत्नियों और कुछ अन्य लोगों ने उन्हें काम न करने के लिए भला-बुरा कहा, तो शर्म के कारण उन्होंने परदेश जाकर कुछ काम करने का विचार किया। रास्ते में रात होने पर वे एक मंदिर में सो गए। सुबह उठकर उनमें से एक ने गिनती की, तो वे चार ही थे। उनका एक साथी गायब था। वे रोते हुए जा रहे थे। एक समझदार आदमी ने उनसे इसका कारण पूछा, तो उन्होंने गिनकर बताया कि वे पूरे पाँच थे। असल में, गिनने वाला खुद को गिनना भूल गया था।
लेखक ने इस कहानी का उल्लेख बिना किसी उद्देश्य के नहीं किया है। वह बताना चाहते हैं कि मनुष्य घर-परिवार, समाज और देश के बारे में तो सोचता है, लेकिन अपने बारे में नहीं सोचता। मनुष्य का अधिकार है कि वह अपने बारे में सोचे। उसे अच्छे काम करने चाहिए जिनसे दूसरे लोग प्रेरित हों। सोच-विचार कर काम करना ही मनुष्य की पहचान है, जो बिना सोचे-समझे हवा के साथ बह जाता है, वह पशु होता है। इसलिए, मनुष्य को कोई भी काम करने से पहले सोचना चाहिए। लेखक ने इसी उद्देश्य से इस कहानी का उल्लेख किया है।
In simple words: लेखक ने पाँच दोस्तों की कहानी इसलिए बताई ताकि यह दिखाया जा सके कि लोग अक्सर दूसरों के बारे में सोचते हैं लेकिन खुद के बारे में नहीं। उनका संदेश है कि मनुष्य को अपने बारे में सोचना चाहिए और सोच-समझकर काम करना चाहिए, क्योंकि यही उसकी असली पहचान है।

🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, कहानी का सार और लेखक का उद्देश्य दोनों को स्पष्ट और विस्तृत रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. कौशल जी एक काम में असफल होने पर तुरन्त दूसरे काम में लग जाते थे। उनकी इस कार्यशीलता का क्या रहस्य आपकी समझ में आता है?
Answer: कौशल जी एक अद्भुत व्यक्ति थे। उनकी शिक्षा नौवीं कक्षा तक ही हुई थी। इसके बाद, उन्होंने पैसा कमाने के काम में हाथ आजमाया। उन्होंने पहले एक प्रेस खोला, फिर बर्तनों का कारखाना, उसके बाद थोक पंसारी की दुकान शुरू की। फिर होटल खोला, एक रिश्तेदार की सोडा वाटर फैक्ट्री में काम करने लगे, बीमा कंपनी में गए, शरबत की दुकान खोली और अखबार निकाला। अब वे एक बड़ी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। फिर पुस्तक प्रकाशन का काम शुरू किया और अंत में एक पत्रकार बन गए। जब उन्हें किसी काम में सफलता नहीं मिलती थी, तब भी वे निराश नहीं होते थे और तुरंत दूसरा नया काम शुरू कर देते थे।
कौशल जी की कार्यशीलता अटूट थी। वे एक काम छोड़कर तुरंत दूसरे काम में लग जाते थे। कई असफलताओं के बाद भी वे कभी निराश नहीं हुए। उनकी कार्यशीलता का रहस्य यही था कि विपरीत परिस्थितियों में भी वे निराश नहीं होते थे। उनका अपने ऊपर विश्वास कभी डगमगाता नहीं था। वे अपनी पूरी ऊर्जा को इकट्ठा करके किसी नए काम में लगा देते थे। हर बार एक 'फ्रेश स्टार्ट' यानी एक ताजा नई शुरुआत करने में उनका विश्वास था। जब कोई व्यक्ति निराश हो जाता है, तो उसका आत्मविश्वास नष्ट हो जाता है और उसकी कार्य-क्षमता समाप्त हो जाती है। कठिन परिस्थितियों में भी निराश न होना और नए सिरे से काम शुरू करना ही कौशल जी की कर्मशीलता के अटूट बने रहने का रहस्य है।
In simple words: कौशल जी की कार्यशीलता का रहस्य उनकी कभी न हार मानने वाली भावना थी। वे किसी भी असफलता से निराश हुए बिना तुरंत नई ऊर्जा और विश्वास के साथ दूसरा काम शुरू कर देते थे।

🎯 Exam Tip: जब किसी व्यक्ति के गुणों या कार्यशैली का 'रहस्य' पूछा जाए, तो उनके आत्मविश्वास, लचीलेपन और नई शुरुआत करने की क्षमता पर जोर दें।

 

Question 4. "मनुष्य स्वयं को ही सुधार सकता है, दूसरों को सुधारने की बातें करना बेईमानी है"-'मैं और मैं' पाठ के आधार पर इस पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: 'मैं और मैं' पाठ का शीर्षक यह बताता है कि मनुष्य को केवल अपने बारे में सोचने का अधिकार है, लेकिन वह हमेशा दूसरों के बारे में सोचता रहा है। खासकर जब गलतियाँ देखने की बात आती है, तो मनुष्य को दूसरों की गलतियाँ तो दिखाई देती हैं, लेकिन अपनी नहीं। दूसरों की गलतियाँ देखकर वह उन्हें सुधारना चाहता है, लेकिन अपनी बुराइयों पर ध्यान नहीं देता। इस प्रकार, सुधार का काम कभी पूरा नहीं होता और अधूरा ही रह जाता है।
कहते हैं कि जब आदमी धरती पर आया, तो ईश्वर ने उसे दो थैले दिए। पहले में उसकी अपनी गलतियाँ भरी थीं और दूसरे में पड़ोसियों की। ईश्वर ने कहा कि वह पहला थैला अपनी छाती पर और दूसरा पीठ पर लटका ले। लेकिन मनुष्य ने सोचा कि दूसरे थैले में क्या है? उसने उसे आगे और पहले थैले को पीछे लटका लिया। तभी से उसे अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की गलतियाँ दिखाई देती हैं। इसका अर्थ यह है कि परदोष देखना मनुष्य का स्वभाव है।
जब गलतियों को सुधारने का प्रश्न उठता है, तो दूसरों की गलतियाँ ही सामने आती हैं। लेखक के अनुसार, यह मनुष्य के अधिकार से बाहर की बात है कि वह दूसरों को सुधारे। उसे अपने बारे में ही सोचना चाहिए और अपना ही सुधार करना चाहिए। मनुष्य को अच्छे काम करने चाहिए जिनसे दूसरों को प्रेरणा मिले। मनुष्य केवल अपने अंदर ही सुधार कर सकता है। दूसरों को सुधारने की बात बेकार है। यदि वह खुद सुधर जाएगा, तो दूसरे उसे देखकर खुद ही सुधर जाएंगे। उसे सुधार के लिए कोई आंदोलन चलाने की जरूरत नहीं है। केवल ऐसे काम करने हैं जिनसे दूसरों को वैसा ही करने की प्रेरणा मिले और उनमें सुधार का आधार बने।
In simple words: लेखक के अनुसार, मनुष्य केवल खुद को सुधार सकता है, दूसरों को नहीं। हमें दूसरों की गलतियाँ ढूंढने की बजाय अपनी कमियों को सुधारना चाहिए, क्योंकि इससे अहंकार और घृणा पैदा होती है। अच्छे काम करके हमें दूसरों के लिए प्रेरणा बननी चाहिए।

🎯 Exam Tip: किसी कथन पर अपने विचार व्यक्त करते समय, पाठ के संदर्भ का उपयोग करते हुए अपने तर्कों को स्पष्ट और सुसंगत बनाएं।

 

Question 5. 'मैं और मैं' शीर्षक निबन्ध की विशेषताओं के बारे में लिखिए।
Answer: 'मैं और मैं' एक ललित निबंध है। ललित निबंधों में विषय-वस्तु की तुलना में उसकी बनावट और वाक्यों की संरचना ऐसी होती है कि निबंध में आकर्षण उत्पन्न हो जाता है। शैली की लाक्षणिकता ने 'मैं और मैं' के विषय को एक नए और आकर्षक ढंग से पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है। लाक्षणिक के साथ-साथ सूक्ति कथन शैली भी इस निबंध में मिलती है, जैसे "अहंकार घृणा का पिता है।" निबंध का प्रारंभ दो मित्रों के व्यंग्य-विनोदपूर्ण बातचीत से होता है और उसका अंत गंभीर चिंतनपूर्ण विचारों के साथ होता है, जैसे "पर मेरा यह कर्तव्य है कि हार कर भागूं नहीं, थककर बैठूं नहीं, गिरकर गिरा ही न रहूँ और भूल-भटक कर भरमाता ही न फिरूं, जल्दी से अपनी राह पर आ जाऊं। अपने काम में लग जाऊं और एक नया आरंभ करू, क्योंकि रुक जाना ही मेरी मृत्यु है।"
यह निबंध चिंतनशील और भावनात्मक दोनों है। मनुष्य को अपनी कमजोरियों से डरना नहीं चाहिए। यदि गिरना मनुष्य के जीवन का हिस्सा है, तो गिरकर उठना भी उसका स्वभाव है। उसे अहंकार से मुक्त रहना चाहिए और किसी से घृणा नहीं करनी चाहिए।
In simple words: 'मैं और मैं' एक ललित निबंध है जो अपनी सुंदर भाषा, सूक्ति कथन शैली और गहन विचारों के लिए जाना जाता है। यह निबंध दो मित्रों की बातचीत से शुरू होकर मनुष्य के जीवन के अधिकारों और कर्तव्यों पर केंद्रित है।

🎯 Exam Tip: निबंध की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उसकी शैली, भाषा, विषय-वस्तु और मुख्य संदेश को शामिल करें।

 

Question 6. 'मैं और मैं' निबन्ध का प्रतिपाद्य क्या है?
Answer: 'मैं और मैं' कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' द्वारा रचित एक ललित निबंध है। इसमें लेखक ने मनुष्य की कुछ स्वाभाविक भावनाओं और कमजोरियों के बारे में बताया है। लेखक और उनके मित्र बातचीत कर रहे हैं। लेखक अपने मित्र को बताता है कि वह गंभीर चिंतन में खोया हुआ था और अपने ही विषय में सोच रहा था। मनुष्य का स्वभाव है कि वह दूसरों के बारे में ज्यादा सोचता है और उनमें कमियाँ देखकर खुद को उच्च होने का गर्व महसूस करता है तथा उन्हें नीचा समझकर उनसे घृणा करता है। यह घृणा की भावना उसी को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाती है और जीवन की उन्नति में बाधा डालती है।
मनुष्य को अधिकार है कि वह अपने ही बारे में सोचे। वह अच्छे काम करे, जिससे दूसरे लोग उससे प्रेरित हों। मनुष्य को अच्छे काम करने का अहंकार अपने मन में नहीं पालना चाहिए और दूसरों पर इसका एहसान नहीं लादना चाहिए। अहंकार से घृणा का जन्म होता है और घृणा जीवन की उन्नति में बाधा डालती है।
मनुष्य को अधिकार है कि वह हार जाए, गिर जाए, थक जाए या गलती करे। यह संभव है और स्वाभाविक भी, लेकिन उसका कर्तव्य भी है कि वह हारकर भागे नहीं, गिरकर पड़ा न रहे, थककर बैठा न रहे और गलती करके भ्रम में न फंसा रहे। उसे सामना करना चाहिए, उठना चाहिए, चलना चाहिए और भ्रम से मुक्त होना चाहिए। चलना और काम करना ही जीवन है, थककर बैठ जाना मृत्यु है।
In simple words: इस निबंध का मुख्य संदेश है कि हमें दूसरों की गलतियों पर ध्यान देने की बजाय खुद के बारे में सोचना, अपनी कमियों को सुधारना और हमेशा कर्मशील रहना चाहिए। अहंकार और घृणा से बचना चाहिए, क्योंकि ये जीवन की प्रगति में बाधा डालते हैं।

🎯 Exam Tip: निबंध के 'प्रतिपाद्य' (मुख्य विषय) को बताते समय, उसके केंद्रीय विचार, लेखक के संदेश और उसके दार्शनिक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाएं।

मैं और मैं लेखक-परिचय

 

Question 1. कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनका साहित्यिक परिचय दीजिए।
Answer: **जीवन-परिचय:** कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म सन् 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद नामक गाँव में हुआ था। उनकी साधना और साहित्यिक यात्रा साथ-साथ चलती रही। उन्होंने हिंदी गद्य की निबंध, संस्मरण, रिपोर्ताज जैसी विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी भाषा सरल, साहित्यिक और व्यावहारिक है। उन्होंने तत्सम शब्दों के साथ उर्दू, अंग्रेजी भाषाओं के शब्दों और मुहावरों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है। शब्दों की लाक्षणिकता दर्शनीय है। उन्होंने वर्णनात्मक, भावात्मक, नाटकीय और आलंकारिक शैलियों में रचनाएँ की हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका कार्य सराहनीय है।
**कृतियाँ:** प्रभाकर जी की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं:
* **निबंध संग्रह:** 'जिंदगी मुस्कुरायी', 'माटी हो गयी सोना', 'बाजे पायलिया के घुंघुरू', 'महके आँगन', 'चहके द्वार', 'जिए तो ऐसे जिए', 'दीप जले शंख बजे' इत्यादि।
* **लघु कथा-संग्रह:** 'आकाश के तारे', 'धरती के फूल'।
* **रिपोर्ताज:** 'क्षण बोले कण मुस्काये'।
* **संस्मरण:** 'भूले-बिसरे चेहरे'।
* **संपादन:** 'ज्ञानोदय', 'नया जीवन', 'विकास'।
प्रभाकर जी की रचनाएं मानवीय मूल्यों और जीवन के अनुभवों को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
In simple words: कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म 1906 में सहारनपुर में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध हिंदी लेखक थे जिन्होंने निबंध, संस्मरण और रिपोर्ताज जैसी कई विधाओं में लिखा। उनकी भाषा सरल और आकर्षक थी, और उनकी प्रमुख कृतियों में 'जिंदगी मुस्कुरायी' और 'माटी हो गयी सोना' शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: किसी लेखक के साहित्यिक परिचय में, उनके जीवन परिचय, प्रमुख कृतियाँ और उनकी साहित्यिक विशेषताओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

मैं और मैं पाठ-सारांश

 

Question 2. 'मैं और मैं' पाठ का सारांश लिखिए।
Answer: **परिचय:** 'मैं और मैं' प्रभाकर जी की 'जिए तो ऐसे जिए' शीर्षक कृति 'ऐल्मिया गया' निबंध से लिया गया है। इसमें लेखक ने बताया है कि मनुष्य को अपने विषय में सोचना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। दूसरों के बारे में सोचकर दुखी या सुखी होना ठीक नहीं है।
**आरम्भ:** निबंध का आरंभ लेखक और उनके मित्र के बीच बातचीत से होता है। लेखक शांत और गंभीर है, जबकि उसका मित्र बातूनी और गप्पी है। लेखक को उसकी मनगढ़ंत बातें पसंद नहीं आतीं, तो मित्र उससे कुछ बोलने को कहता है। लेखक बताता है कि वह आज कोई गहरी बात सोच रहा है। वह खुद में खोया है, तब मित्र उसे सलाह देता है कि यदि वह खोया है, तो ढोल पिटवाए या पुलिस में रिपोर्ट लिखवाए।
**पाँच दोस्तों की कहानी:** लेखक ने बताया कि उसका मित्र संत स्वभाव से बात कर रहा है और वह, यानी लेखक, अपने मित्र का मजाक उड़ा रहा है। लेखक के अनुसार, उसके मित्र में अक्ल नहीं है, क्योंकि उसने कभी किसी मास्टर से पढ़ाई नहीं की। तब लेखक ने उसे पाँच दोस्तों की कहानी सुनाई। वे कोई काम नहीं करते थे, केवल खाते-पीते, भाँग छानते और मस्ती में रहते थे। एक बार अपनी पत्नियों और पड़ोसियों से अपमानित होकर वे काम की तलाश में निकले। रास्ते में एक मंदिर में सो गए। सुबह जागने पर जब उन्होंने गिनती की, तो संख्या चार ही रही, क्योंकि गिनने वाला खुद को गिनना भूल गया था। तब एक बुद्धिमान व्यक्ति ने उन्हें गिना और बताया कि वे पाँच ही थे। उसने गिनने वाले से कहा, "मूर्ख, अपने आप को भी तो गिनो।"
**अपने बारे में सोचना:** कहानी का निष्कर्ष यह है कि मनुष्य दूसरों के बारे में तो सोचता है, लेकिन अपने बारे में नहीं। अपने बारे में सोचना - मेरा क्या अधिकार और कर्तव्य है - यही मनुष्य की पहचान है। जो विचारशील नहीं है, वह बिना सींग-पूँछ का पशु है। मनुष्य घर, पड़ोस, समाज, देश और दुनिया के बारे में सोचता है, लेकिन खुद को भूल जाता है। उसे सबसे पहले अपने बारे में सोचना चाहिए।
In simple words: 'मैं और मैं' निबंध का सार यह है कि व्यक्ति को अपनी गलतियों पर ध्यान देना चाहिए, खुद को सुधारना चाहिए, और दूसरों को बदलने की बजाय अपने कर्तव्य पूरे करने चाहिए। यह कहानी के माध्यम से समझाया गया है कि हमें हमेशा खुद को पहले देखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: पाठ का सारांश लिखते समय, मुख्य बिंदुओं को संक्षिप्त और क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें, जिसमें परिचय, प्रमुख घटनाएँ और लेखक का संदेश शामिल हो।

मैं और मैं महत्त्वपूर्ण गद्यांशों की सन्दर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

 

Question 1. जब देखो गुमसुम, जब देखा गुमसुम! अरे भाई, तुम्हें क्या साँप सूंघ गया है कि सुबह के सुहावने समय में यों चुपचाप बैठे हो? तुमसे अच्छे तो देवीकुंड के कछुवे ही हैं कि तैरते नजर तो आ रहे हैं। उठो, दो-चार किलकारियाँ भरो और अँगीठी के पेट में गोला डालो, जिससे अपना भी पेट गरमाए। ओ हो, तुम कहाँ से आ टपके इस समय? कोई कितने ही गंभीर मूड में हो, विचारों की कितनी ही गहराइयों में उतर रहें हो, तुम्हारी आदत है बीच में आ कूदना और फैलाने लगना लन्तरानियों के लच्छे-एक के बाद एक। यह सच है कि यह बहुत बुरी आदत है।
Answer:

कठिन-शब्दार्थ:

  • गुम-सुम: शान्त, चुप
  • साँप सूंघना: कुछ न करना, चुपचाप बैठे रहना
  • किलकारी: प्रसन्नता से चिल्लाना
  • आ टपकना: अचानक उपस्थित होना
  • मूड: मन की स्थिति
  • गहराई: गम्भीरता
  • लन्तरानी: मनगढ़ंत बातें

सन्दर्भ एवं प्रसंग:

यह गद्यांश हमारी 'सृजन' पाठ्य-पुस्तक में दिए गए "मैं और मैं" शीर्षक निबन्ध से लिया गया है। इसे कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' ने लिखा है। इस अंश में, लेखक अपने विचारों में खोए हुए थे तभी उनका मित्र आता है। मित्र मज़ाक के मूड में है और लेखक से बातें करने लगता है। लेखक उसे अपनी ऊल-जलूल बातें करने से रोकता है।

व्याख्या:

लेखक का मित्र उनसे आकर कहता है कि जब भी वह उन्हें देखता है, तो वे चुपचाप बैठे हुए मिलते हैं। मित्र पूछता है कि क्या उन्हें साँप सूंघ गया है (यानी वे क्यों शांत बैठे हैं) और वे सुबह के इतने सुहावने समय में भी क्यों चुप हैं। मित्र मज़ाक में कहता है कि देवी कुण्ड के कछुए भी उनसे बेहतर हैं क्योंकि वे तैरते हुए दिखाई तो देते हैं। मित्र लेखक को उठकर खुश होने और कुछ काम करने के लिए कहता है, जैसे कि अँगीठी में आग डालकर अपने पेट को गरमा लेना। इस पर लेखक मित्र से कहते हैं कि "ओ हो, तुम कहाँ से आ टपके इस समय?" लेखक कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति गहरे विचारों में डूबा हो, तो बीच में आकर बेकार की बातें करना अच्छी बात नहीं है। यह सच में बहुत बुरी आदत है।

विशेष:

  • लेखक शांत स्वभाव के हैं और उनका मित्र मज़ाकिया है।
  • लेखक यह कहना चाहते हैं कि गम्भीर विषय पर बात करते समय फालतू बातें नहीं करनी चाहिए।
  • इस अंश की भाषा सरल और सहज है।
  • इस अंश की शैली बातचीत वाली है।
In simple words: लेखक अपने विचारों में खोए थे, तभी उनका मित्र आया और मज़ाक में उनसे बातें करने लगा। मित्र ने लेखक की चुप्पी पर सवाल उठाया और उन्हें कुछ करने को कहा। लेखक ने अपने मित्र को गम्भीर बातचीत के बीच में अनावश्यक बातें करने से मना किया।

🎯 Exam Tip: जब गद्यांश की व्याख्या करें, तो कठिन शब्दों के अर्थ, सन्दर्भ, प्रसंग और मुख्य व्याख्या को साफ-साफ लिखें। साथ ही, अंश की खास बातें (विशेष) भी बताएं ताकि पूरा उत्तर बन सके।

 

Question 2. पाँचों चल पड़े। चलते-चलते आपस में सलाह की कि, भाई होशियारी से चलियो, कहीं रास्ते में ऐसा न हो कि साँझ हो जाए, जरा गहरी और कोई खोया जाये-लौटकर उसकी घरवाली को क्या जवाब देंगे। फिर कुछ दूर गए, रात हुई, एक मंदिर में पड़कर सो गए। सुबह उठते ही तब पाया कि भाई, पहले गिन लो, सब चौकस भी हैं। उनमें से एक ने सबको गिना : एक, दो, तीन, चार। फिर गिना : एक, दो, तीन, चार। जोर से चिल्लाकर कहा-अरे, हम तो घर से पाँच चले थे, ये तो रात भर में ही चार रह गए। दूसरे ने ने गिना, तब भी चार ही रहे। मामला संगीन हो गया और तब पाया कि लौटकर घर चलें-शायद पाँचवां आदमी रात को घर लौट गया हो।
Answer:

कठिन-शब्दार्थ:

  • साँझ: शाम
  • पड़कर: लेटकर, सो जाना
  • चौकस: सही-सलामत, सतर्क
  • संगीन: गम्भीर
  • पाया: पता चला

सन्दर्भ एवं प्रसंग:

यह गद्यांश हमारी 'सृजन' पाठ्य-पुस्तक में दिए गए "मैं और मैं" शीर्षक निबन्ध से लिया गया है। इसे कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' ने लिखा है। यह अंश पाँच आलसी दोस्तों की कहानी से जुड़ा है, जो अपनी पत्नियों की डाँट सुनने के बाद काम की तलाश में परदेश जाने का फैसला करते हैं।

व्याख्या:

पाँचों दोस्त काम की तलाश में अपने घर से परदेश के लिए निकल पड़े। वे आपस में सलाह करते हुए जा रहे थे कि सभी को ध्यान से चलना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि शाम हो जाए या कोई साथी खो जाए। अगर कोई साथी खो गया, तो अपनी पत्नियों को क्या जवाब देंगे? थोड़ी दूर चलने के बाद रात हो गई, तो वे एक मंदिर में जाकर सो गए। सुबह उठने पर, उन्होंने तय किया कि पहले गिनती कर लें कि सब सही-सलामत हैं।

उनमें से एक ने सबको गिनना शुरू किया: एक, दो, तीन, चार। उसने दोबारा गिना, तब भी चार ही थे। वह जोर से चिल्लाया और कहा, "अरे, हम तो घर से पाँच चले थे, लेकिन रात भर में हम चार ही रह गए!" दूसरे दोस्त ने गिना, तो भी चार ही थे। तीसरे दोस्त ने गिना, तब भी वे चार ही थे। अब मामला बहुत गम्भीर हो गया था। उन्होंने यह मान लिया कि शायद पाँचवाँ आदमी रात को ही घर वापस चला गया होगा और अब उन्हें भी वापस घर लौट जाना चाहिए।

In simple words: पाँच दोस्त काम ढूंढने परदेश निकले। रास्ते में उन्होंने ध्यान से चलने की सलाह की, पर रात को मंदिर में सो गए। सुबह उठकर गिना तो वे सिर्फ चार थे। सबने गिनने की कोशिश की, पर चार ही मिले। उन्हें लगा कि एक साथी रात को घर लौट गया होगा, इसलिए वे भी वापस लौटने का सोचने लगे।

🎯 Exam Tip: कहानी-आधारित गद्यांश की व्याख्या करते समय, घटनाक्रम को स्पष्ट और सरल शब्दों में समझाएँ, और कहानी के मुख्य मोड़ पर ध्यान दें।

 

Question 3. समझदार ने कहा-अरे भोंदू, अपने को तो गिन। अब इन लोगों की समझ में आया कि मामला यह है कि जो गिनता है, अपने को भूल जाता है। वही हाल मेरा हो रहा है कि मैंने घर की सोची, पड़ौसी की सोची, देश की सोची और यों समझो कि दुनिया बातें सोच मारी, पर अपनी बात भूल गया और कभी यह न सोचा कि आखिर मेरा मेरे प्रति क्या कर्तव्य है और क्या अधिकार है। आज मैं यही सोच रहा था कि तुम आ गए। कहो फिर, मैं गहरे चिंतन में था या नहीं?
Answer:

कठिन-शब्दार्थ:

  • भोंदू: मूर्ख
  • सोच मारी: बहुत सोच लिया
  • चिंतन: गहरा विचार

सन्दर्भ एवं प्रसंग:

यह गद्यांश हमारी 'सृजन' पाठ्य-पुस्तक के "मैं और मैं" शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसे कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' ने लिखा है। यह अंश उन पाँच दोस्तों की कहानी से जुड़ा है, जब वे एक साथी के खो जाने पर रो रहे थे। एक समझदार व्यक्ति आता है और उन्हें उनकी गलती बताता है।

व्याख्या:

जब दोस्त रो रहे थे कि उनका एक साथी खो गया है, तब एक समझदार आदमी ने उनसे कहा, "अरे मूर्ख, अपने आप को भी गिनो!" तब उन लोगों को समझ आया कि गलती यह थी कि जो व्यक्ति गिन रहा था, वह अपने आप को गिनना भूल जाता था। इसी वजह से उनकी संख्या पाँच की बजाय चार रह जाती थी।

लेखक कहते हैं कि उनकी हालत भी ऐसी ही थी। उन्होंने अपने घर, पड़ोस, देश और पूरी दुनिया के बारे में बहुत सोचा था, लेकिन वे अपने आप को ही भूल गए थे। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि उनके खुद के प्रति क्या कर्तव्य और क्या अधिकार हैं। जब उनके मित्र आए, उस समय लेखक इसी बात पर गहरा विचार कर रहे थे। उन्होंने अपने मित्र से पूछा कि क्या वे सच में गहरे चिंतन में नहीं थे, जब उनके मित्र वहाँ आए। यह दिखाता है कि मनुष्य अक्सर दूसरों के बारे में सोचता है, पर अपने बारे में सोचना भूल जाता है।

विशेष:

  • हम सभी अक्सर दूसरों के बारे में सोचते हैं, लेकिन अपने आप को भूल जाते हैं।
  • हम अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में नहीं सोचते।
  • इस अंश की भाषा सरल और सहज है।
  • इस अंश की शैली बातचीत वाली है।
In simple words: एक समझदार आदमी ने रो रहे दोस्तों को बताया कि गिनने वाला खुद को गिनना भूल जाता है, इसलिए वे पाँच की जगह चार हो रहे थे। लेखक कहते हैं कि उनकी भी यही हालत थी – वे सबके बारे में सोचते थे पर अपने खुद के कर्तव्यों और अधिकारों के बारे में नहीं सोचते थे।

🎯 Exam Tip: यह गद्यांश आत्म-चिंतन के महत्व को बताता है। व्याख्या करते समय, लेखक के विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें कि कैसे मनुष्य दूसरों पर ध्यान देता है, पर खुद को भूल जाता है।

 

Question 4. मतलब यह कि अपने बारे में सबसे पहले जो बात सोचने की है, वह यह कि मेरा यह अधिकार है कि मैं अच्छे काम करूँ, अपने जीवन को ऊँचा उठाऊँ, पर मेरा यह कर्तव्य भी है कि जो किसी कारण से अच्छे काम नहीं कर रहे हैं, या साफ शब्दों में गिरे हुए हैं, उन्हें अपने कामों से ऊँचे उठने की प्रेरणा देते हुए भी, उन पर अपने अहंकार का बोझ न लादूँ, क्योंकि अहंकार घृणा का पिता है और घृणा जीवन की संपूर्ण ऊँचाइयों की दुश्मन है। खास बात यह है कि घृणा उसका घात करती है, जो घृणा करता है और इस तरह मैं दूसरों से घृणा करके अपना ही घात करता हूँ।
Answer:

सन्दर्भ एवं प्रसंग:

यह गद्यांश हमारी 'सृजन' पाठ्य-पुस्तक के "मैं और मैं" शीर्षक निबन्ध से लिया गया है। इसके लेखक कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' हैं। यह अंश लेखक के आत्म-चिंतन और नैतिकता पर आधारित विचारों को प्रस्तुत करता है।

व्याख्या:

लेखक बताते हैं कि अपने बारे में सबसे पहले सोचने वाली बात यह है कि हर व्यक्ति का यह अधिकार है कि वह अच्छे काम करे और अपने जीवन को बेहतर बनाए। लेकिन, इसके साथ ही उसका यह कर्तव्य भी है कि जो लोग किसी वजह से अच्छा काम नहीं कर पा रहे हैं या जिनकी स्थिति अच्छी नहीं है, उन्हें अपने अच्छे कामों से प्रेरणा दें। यह प्रेरणा देते हुए उन पर कोई अहंकार नहीं दिखाना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि अहंकार ही नफरत को जन्म देता है, और नफरत जीवन की सभी अच्छी चीजों को खत्म कर देती है।

लेखक एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताते हैं कि नफरत उसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाती है, जो नफरत करता है। इसका मतलब है कि अगर मैं दूसरों से नफरत करता हूँ, तो मैं दरअसल खुद को ही नुकसान पहुँचा रहा हूँ। यह हमें सिखाता है कि हमें दूसरों के प्रति दयालु और विनम्र रहना चाहिए और अपने अहंकार से बचना चाहिए।

विशेष:

  • मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा अच्छे काम करने चाहिए।
  • उसे अपने अच्छे कामों से दूसरों को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
  • इस अंश की भाषा सरल और भावनाओं से भरी हुई है।
  • यह विचारशील शैली में लिखा गया है।
In simple words: लेखक कहते हैं कि हमें अच्छे काम करने चाहिए और अपना जीवन बेहतर बनाना चाहिए। हमें उन लोगों को प्रेरणा देनी चाहिए जो अच्छा नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन बिना किसी अहंकार के। क्योंकि अहंकार से नफरत पैदा होती है, जो हमारे ही जीवन को खराब कर देती है। नफरत करने वाला खुद का ही नुकसान करता है।

🎯 Exam Tip: नैतिक विचारों वाले गद्यांशों की व्याख्या करते समय, मुख्य संदेश को सरल भाषा में स्पष्ट करें और बताएं कि लेखक क्या सीख देना चाहते हैं। घृणा के नकारात्मक प्रभाव पर विशेष जोर दें।

 

Question 5. मेरे कानों में पड़ा फ्रेश स्टार्ट-इनका अर्थ होता है-नया ताजा आरंभ। सुनते ही एक नई ताजगी अनुभव हुई और मैंने सोचा कि हर नया आरंभ अपने साथ एक ताजगी, एक तेजी, एक स्फुरण लिए आता है। तभी याद आ गए मुझे फिर कौशल जी, जो जीवन में बार-बार असफल होकर भी थके नहीं, ऊबे नहीं, और बराबर आगे बढ़ते रहे और आज ही पहली बार मेरी समझ में आया उनकी उस अपराजित वृत्ति का रहस्य। यह रहस्य है-नया ताजा आरंभ। वे हारे, पर हार कर रुके नहीं और इस न रुकने में ही उनकी सफलता का रहस्य छिपा हुआ है।
Answer:

कठिन-शब्दार्थ:

  • ताजगी: फुर्ती, नयापन
  • स्फुरण: ताजगी, उत्साह
  • ऊबना: बेचैन होना, मन न लगना
  • अपराजित: जिसे हराया न जा सके, कभी न थकने वाला
  • वृत्ति: स्वभाव
  • रहस्य: भेद

सन्दर्भ एवं प्रसंग:

यह गद्यांश हमारी 'सृजन' पाठ्य-पुस्तक में दिए गए "मैं और मैं" शीर्षक निबन्ध से लिया गया है। इसके रचयिता कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' हैं। इस अंश में लेखक यह समझाते हैं कि जीवन में कठिनाइयों के बावजूद कैसे आगे बढ़ना चाहिए, जैसा कि उनके मित्र कौशल जी ने किया था।

व्याख्या:

लेखक कहते हैं कि जब उन्होंने 'फ्रेश स्टार्ट' (नया और ताजा आरंभ) शब्द सुना, तो उन्हें एक नई ताजगी महसूस हुई। उन्होंने सोचा कि हर नया काम शुरू करने से एक नया उत्साह, गति और उमंग आती है। तभी उन्हें अपने मित्र कौशल जी की याद आई। कौशल जी अपने जीवन में कई बार असफल हुए थे, लेकिन वे कभी थके नहीं, न ही उनका मन किसी काम से ऊबा। वे हमेशा आगे बढ़ते रहे।

लेखक को पहली बार कौशल जी के कभी न हारने वाले स्वभाव का रहस्य समझ में आया। यह रहस्य था 'नया ताजा आरंभ'। कौशल जी असफल तो हुए, लेकिन हार मानकर रुके नहीं। उनका कभी न रुकना ही उनकी सफलता का असली कारण था। वे हर बार नई ऊर्जा के साथ फिर से शुरुआत करते थे और यही उनकी सबसे बड़ी खूबी थी।

विशेष:

  • मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा अच्छे काम करने चाहिए।
  • उसे अपने प्रेरणादायक कामों से दूसरों को अच्छा काम करने और आगे बढ़ने के लिए उत्साहित करना चाहिए।
  • इस अंश की भाषा सरल और भावनाओं से भरी हुई है।
  • इसकी शैली विचारपूर्ण है।
In simple words: लेखक ने 'फ्रेश स्टार्ट' शब्द सुना, जिसका मतलब है नई शुरुआत। इससे उन्हें बहुत उत्साह मिला। उन्हें कौशल जी की याद आई, जो बार-बार असफल होकर भी कभी निराश नहीं होते थे और हमेशा नए काम शुरू करते रहते थे। लेखक को समझ आया कि कौशल जी की सफलता का राज यही था कि वे कभी हार मानकर रुकते नहीं थे, बल्कि हर बार नई शुरुआत करते थे।

🎯 Exam Tip: 'फ्रेश स्टार्ट' के महत्व को बताते हुए, कौशल जी के उदाहरण का उपयोग करें। असफलता के बाद भी निराश न होकर नए सिरे से प्रयास करने की प्रेरणा को उत्तर में प्रमुखता दें।

 

Question 6. मैंने सोचा-मेरा अपने प्रति यह अधिकार है कि मैं हार जाऊँ, थक जाऊँ, गिर भी पडूं और भूलूँ-भटकूँ भी, क्योंकि यह सब एक मनुष्य के नाते मेरे लिए स्वाभाविक है, संभव है, पर मेरा यह कर्तव्य है कि मैं हार कर भागू नहीं, थक कर बैठूं नहीं, गिर कर गिरा ही न रहूँ और भूल-भटक कर भरमता ही न फिरूँ, जल्दी-से-जल्दी अपनी राह पर आ जाऊँ। अपने काम में लग जाऊँ और एक नया आरंभ करूँ, क्योंकि रुक जाना ही मेरी मृत्यु है और न मरने से पहले, न मेरा अधिकार है और न कर्तव्य।
Answer:

कठिन-शब्दार्थ:

  • स्वाभाविक: प्राकृतिक, सहज
  • भरमता: भ्रम के कारण भटकना
  • राह: रास्ता

सन्दर्भ एवं प्रसंग:

यह गद्यांश हमारी 'सृजन' पाठ्य-पुस्तक में दिए गए "मैं और मैं" शीर्षक निबन्ध से लिया गया है। इसके रचयिता कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' हैं। यह अंश लेखक के गहन विचारों को दिखाता है, जब वे सिंहल और कौशल जी की कहानियों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन के प्रति अधिकार और कर्तव्य पर चिंतन कर रहे थे।

व्याख्या:

लेखक सोचते हैं कि एक मनुष्य के तौर पर यह स्वाभाविक है और संभव है कि मैं हार जाऊँ, थक जाऊँ, गिर पड़ूँ या भ्रमित होकर भटक भी जाऊँ। यह सब इंसान के जीवन का हिस्सा है। लेकिन, मेरा कर्तव्य यह है कि मैं हारने के बाद भागू नहीं, थकने पर बैठ न जाऊँ, गिरने के बाद पड़ा न रहूँ, और भ्रम में भटकता न रहूँ। मुझे जल्दी से जल्दी सही रास्ते पर वापस आ जाना चाहिए। मुझे अपने काम में फिर से लग जाना चाहिए और एक नई शुरुआत करनी चाहिए।

लेखक के अनुसार, जीवन में रुक जाना ही मृत्यु के समान है। इसलिए, न तो मरने से पहले रुकना मेरा अधिकार है और न ही मेरा कर्तव्य। हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं। जीवन का असली अर्थ चलते रहना और कर्म करते रहना ही है।

विशेष:

  • यह अंश लेखक की विचारशील प्रवृत्ति को दर्शाता है।
  • यह संदेश देता है कि लगातार काम करते रहना ही जीवन है और रुक जाना मृत्यु है।
  • इस अंश की भाषा साहित्यिक है, लेकिन समझने में आसान है।
  • इसकी शैली विचारपूर्ण है।
In simple words: लेखक ने सोचा कि हारना, थकना, गिरना या भटकना इंसान के लिए आम बात है। पर उनका कर्तव्य है कि वे हारकर भागें नहीं, थककर बैठें नहीं, गिरकर पड़े न रहें, और भटकें नहीं, बल्कि जल्दी से सही रास्ते पर आकर नया काम शुरू करें। क्योंकि रुक जाना ही मौत है।

🎯 Exam Tip: आत्म-चिंतन और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाने वाले गद्यांश की व्याख्या में, लेखक के अधिकार और कर्तव्य के बीच के अंतर को स्पष्ट करें। "रुक जाना ही मृत्यु है" इस मुख्य विचार को प्रमुखता से उजागर करें।

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